# भारत का इतिहास – विश्व सभ्यता का गौरव! > भारत के इतिहास पर विश्वसनीय सामग्री ## Posts - [भारत सरकार अधिनियम 1935](https://bharatkaitihas.com/government-of-india-act-niniteen-hundred-thirty-five/): भारत सरकार अधिनियम 1935 के माध्यम से प्रान्तों में स्वायत्त शासन तथा केन्द्र में आंशिक उत्तरदायी सरकार की स्थापना की व्यवस्था की गई। इसलिए भारत सचिव के उन अधिकारों में कमी की गई जिनके द्वारा वह भारत सरकार पर प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रखता था किन्तु गवर्नर जनरल तथा गवर्नरों के अधिकारों में वृद्धि कर […] - [भारत में साम्प्रदायिक समस्या](https://bharatkaitihas.com/development-of-communal-politics-in-india-part-one/): भारत में साम्प्रदायिक समस्या का आरम्भ मुसलमानों के भारत में प्रवेश के समय से हो गया था किन्तु ब्रिटिश शासन के दौरान इस समस्या ने एक नवीन रूप ग्रहण किया। साम्प्रदायिकता की समस्या साम्प्रदायिकता की समस्या हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन कर खड़ी हो गई। इस कारण जनता को आजादी […] - [भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास](https://bharatkaitihas.com/development-of-communal-politics-in-india-part-two/): भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास अंग्रेजी शासन के द्वारा किया गया। अंग्रेज अधिकारियों ने भारत के हिन्दुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे से लड़ते रहने के लिए प्रेरित किया ताकि वे एकजुट होकर भारत की स्वाधीनता के लिए न लड़ सकें। भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास (1.) मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसम्बर 1906 […] - [राजनीति में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस](https://bharatkaitihas.com/chapter-85-rise-of-netaji-subhash-chandra-bose-in-indian-politics-and-activism-in-congress/): भारतीय राजनीति में नेताजी सुभाषचन्द्र का नाम बहुत ऊँचा है। वे भारतीय राजनीति के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, देश की भूमि से बाहर जाकर सेना का निर्माण किया तथा ब्रिटिश कालीन राजनीति में नेताजी के नाम से जाने गए। प्रारम्भिक जीवन नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 […] - [भारतीय राष्ट्रीय सेना में सुभाषचंद्र बोस](https://bharatkaitihas.com/netaji-subhash-chandra-bose-and-indian-national-army/): कलकत्ता प्रेसीडेंसी में भूख हड़ताल करने से सुभाष बाबू की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इस पर सरकार ने उन्हें 5 दिसम्बर 1940 को जेल से मुक्त करके उनके घर में नजरबन्द कर दिया। घर में भी उन पर कड़े प्रतिबन्ध थे। भारत से पलायन नजरबंदी के दौरान कुछ दिनों तक सुभाष अपने घर में […] - [आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन](https://bharatkaitihas.com/reconstitution-of-azad-hind-fauj-by-netaji-subhash-chandra-bose/): रासबिहारी बोस ने 1 सितम्बर 1942 को आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी किंतु कुछ कठिनाइयों के कारण इसे भंग कर देना पड़ा। जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने रासबिहारी बोस के साथ काम करने का निश्चय किया तो सुभाष बाबू ने आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन करने का निश्चय किया। सुभाष द्वारा आजाद हिन्द […] - [सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/evaluation-of-netaji-subhash-chandra-boses-successes/): जिस समय देश को आजादी मिली, उस समय सुभाषचन्द्र बोस जीवित नहीं थे, फिर भी देश की आजादी में उनका बहुत बड़ा हाथ था। सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ अप्रतिम थीं। सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ आजाद हिन्द फौज की सफलताओं का मूल्यांकन आजाद हिन्द फौज के नायकों और सैनिकों में देश भक्ति की उज्जवल भावना थी। […] - [स्वतंत्रता के द्वार पर भारत](https://bharatkaitihas.com/india-at-the-gateway-to-freedom/): भारत का स्वतंत्रता के द्वार पर पहुंचना एक विस्मयकारी ऐतिहासिक घटना थी। इसके लिए विगत लगभग एक सौ सालों से भारतीय जनता प्राण-प्रण से प्रयासरत थी। भारत की स्वतंत्रता किसी एक घटना या आंदोलन का परिणाम नहीं थी। इसके पीछे बहुत सी घटनाओं, आंदोलनों एवं दबावों ने काम किया। इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति अथवा […] - [भारत का विभाजन](https://bharatkaitihas.com/partition-of-india/): भारत का विभाजन आधुनिक भारत के इतिहास के सबसे बड़ी त्रासदी थी। इस्लाम की मजहबी कट्टरता और अंग्रेजों की मक्कारी ने भारत का विभाजन किया। कांग्रेस में भारत विभाजन के प्रति सहमति गांधीजी सहित लगभग समस्त कांग्रेसी नेता भारत विभाजन के विरुद्ध थे। राजाजी राजगोपालाचारी जैसे नेता तथा घनश्यामदास बिड़ला जैसे उद्योगपति, भारत की आजादी […] - [स्वाधीनता का उदय](https://bharatkaitihas.com/elimination-of-independence-and-rise-of-independence/): 14 अगस्त 1857 को सर्यास्त के साथ ही भारत से पराधीनता के चिह्न विलोपित होने लगे एवं स्वाधीनता का उदय होने लगा। ब्रिटिश नेताओं एवं भारतीय नेताओं ने ब्रिटिश राज्यशाही के विलोपन में गरिमा को बनाए रखा। भारत के अंग्रेजों के विरुद्ध किसी तरह की नारेबाजी नहीं की गई एवं न उन्हें अपमानित करने का […] - [विभाजन के बाद साम्प्रदायिक उन्माद](https://bharatkaitihas.com/communal-frenzy-after-partition-of-india/): भारत विभाजन के बाद साम्प्रदायिक उन्माद उठ खड़ा हुआ। जो लोग अपने घरों को छोड़कर जा रहे थे, उनमें दूसरे सम्प्रदाय के विरुद्ध अपार क्रोध था जिसकी परिणति साम्प्रदायिक उन्माद में हुई। लॉर्ड माउण्टबेटन ने रैडक्लिफ आयोग की रिपोर्ट 15 अगस्त के बाद प्रकाशित करने का निर्णय लिया था। जिस समय रैडक्लिफ की रिपोर्ट प्रकाशित […] - [देशी रजवाड़ों की समस्या](https://bharatkaitihas.com/question-of-merger-of-indigenous-princely-states-in-independent-india/): भारत में अत्यंत प्राचीन काल से देशी रजवाड़े मौजूद थे। अंग्रेज इन्हें एक केन्द्रीय शासन व्यवस्था के अधीन लाना चाहते थे किंतु राजा लोग इसके लिए तैयार नहीं थी। आजादी के बाद भी देशी रजवाड़ों की समस्या बनी रही। इसे सुलझाना आवश्यक था। देशी रजवाड़ों की समस्या स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश में गवर्नरों द्वारा […] - [देशी रियासतें पाकिस्तान में मिलाने हेतु षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/jinnah-conspiracy-on-merger-of-indigenous-states-with-india/): मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने के उद्देश्य से भारत का विभाजन करवाया था किंतु जब पाकिस्तान बनने लगा तो मुहम्मद अली जिन्ना तथा उसके साथी नेताओं ने राजपूताने की देशी रियासतें पाकिस्तान में मिलाने हेतु गहरा षड़यंत्र किया। भारत विभाजन का निर्णय हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या की बहुलता के क्षेत्रों के आधार […] - [जूनागढ़ की समस्या](https://bharatkaitihas.com/problem-of-junagadh-on-merger-in-india/): भारत में विलय के प्रश्न पर जूनागढ़ की समस्या जूनागढ़ के नवाब द्वारा अनावश्यक रूप से खड़ी की गई। जूनागढ़ की बहुसंख्य प्रजा हिन्दू थी और शासक मुसलमान था जो कि पाकिस्तन में मिलना चाहता था। गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में 1748 ई. से जूनागढ़ रियासत स्थित थी। इस पर मुस्लिम नवाब का शासन था। […] - [हैदराबाद की समस्या](https://bharatkaitihas.com/hyderabad-problem-on-merger-in-india/): जिस समय भारत को स्वतंत्रता मिली, उस समय हैदराबाद रियासत के शासक ने अपनी रियासत को भारत एवं पाकिस्तान दोनों से स्वतंत्र रहने का प्रयास किया। इस कारण भारत सरकार के समक्ष हैदराबाद की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया। हैदराबाद रियासत की स्थापना 1720 ई. में चिनकुलीजखाँ ने की थी जिसने निजामुल्मुल्क की […] - [कश्मीर समस्या](https://bharatkaitihas.com/kashmir-problem-on-merger-in-india/): जिस समय भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय हैदराबाद की तरह कश्मीर के शासक ने भी अपनी रियासत को स्वतंत्र रखने का विचार किया, इस कारण भारत सरकार के समक्ष कश्मीर समस्या से निबटने की चुनौती खड़ी हो गई। भारत के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में 2,10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला जम्मू-कश्मीर राज्य सामरिक दृष्टि से विशेष […] - [Princes faced exile (4)](https://bharatkaitihas.com/when-princes-faced-exile/): Shahjahan’s trio of Princes became restless as they were being sent away from the capital Delhi. Shahjahan’s Princes faced exile. On 6 April 1648, Shah Jahan was 56 years old when he entered Delhi’s Red Fort, still his body was full of vigor and energy. Although thousands of women lived in Shah Jahan’s harem, Shah […] - [Red Fort Illuminated by the children of Mumtaz Mahal ! (3)](https://bharatkaitihas.com/illuminated-by-children-of-mumtaz-mahal/): Red Fort Illuminated by the children of Mumtaz Mahal, As a result, Shahjahan’s other eight Begums and many of their children were badly neglected and their names couldn’t be recorded on the pages of history. Shah Jahan had nine Begams – Kandhari Mahal, Akbarabadi Begum, Mumtaz Mahal, Hasina Begum, Moti Begum, Kudsia Begum, Fatehpuri Mahal, […] - [Red fort Descended with Wings of dreams (2)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-descended-with-wings-of-dreams/): Red fort Descended were with Wings of dreams. The huge royal palace was built in the middle of the Red Fort where Shah Jahan himself and his future generations were to live. In 1628, Jahangir’s son Khurram became the possessor of India’s lush green plains, uninterrupted rivers and high rising mountains, killing 18 of his […] - [Babur and Humayun - From rags to riches (1)](https://bharatkaitihas.com/babur-and-humayun-from-rags-to-riches/): Babur and Humayun came to India in rags but when they defeated Ibrahim Lodi, The Sultan of Delhi, Babur and Humayun became the riches. The rivers originating from the Himalayas had irrigated the vast plains of northern India for millions of years and nurtured its flora and fauna. These plains on the banks of the […] - [Tears of Red Fort : A Historical series on YouTube Channel](https://bharatkaitihas.com/tears-of-red-fort-a-historical-series-on-youtube-channel/): Tears of Red Fort is a historical serial originally written in Hindi by renowned historian Dr. Mohanlal Gupta under the title Lal Qila Ki Dard Bhari Dastaan. There are two Red Forts in India. The first red fort is in Agra, which was built by Tomar Rajputs, centennials before Muslims came to India. Sikandar Lodi, […] - [देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/democratic-system-in-native-princely-states-after-independence-of-india/): स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था स्थापित करने के लिए स्थानीय राजनीतिक संस्थाओं ने आंदोलन चलाए। इस कारण कुछ राज्यों में लोकप्रिय सरकारें स्थापित हुईं किंतु देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था इन रियासतों के विलीनीकरण के बाद ही स्थापित हो सकी। भारतीय राज्यों का भारत मे सम्मिलित होना एक बड़ी सफलता थी। […] - [ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी](https://bharatkaitihas.com/supreme-officials-of-british-rule-in-india/): भारत में ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी समय-समय पर अलग-अलग पदनामों से नियुक्त होकर आते रहे। इस सूची में बंगाल के गवर्नर से लेकर अंतिम क्राउन रिप्रजेंटेटिव तक के नाम दिए गए हैं। बंगाल के गवर्नर (ई.1757 -1765) ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा ई.1757 में प्लासी युद्ध की विजय से लेकर ई.1773 तक बंगाल के गवर्नर […] - [मुगलकालीन स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/mughal-art-architecture-and-literature-first-part/): मुगलकालीन स्थापत्य कला भारत के मध्यकालीन इतिहास की विभिन्न प्रवृत्तियों को जानने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। मुगल शासक भारत में विध्वसंक आक्रांताओं के रूप में आए थे। इस कारण उन्होंने भारत के मूल स्थापत्य का विध्वंस करके उनके ऊपर ही नई संरचनाओं क निर्माण करवाया। मुगलकालीन स्थापत्य कला 1221 ई. से लेकर 1526 ई. […] - [मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल - शाहजहाँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%95/): मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल शाहजहाँ का शासनकाल मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँच गई। शाहजहाँ ने अनेक इमारतें बनवाईं। वह स्वयं स्थापत्य कला में निपुण था। वह अपनी इमारतांे के नक्शे स्वयं देखता था। शाहजहाँ की इमारतें श्वेत संगमरमर से निर्मित हैं। उसके समय में राजपूताने में […] - [पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): औरंगजेब एवं परवर्ती मुगल बादशाहों के काल के स्थापत्य को पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य कहा जाता है। इस काल में मुगलों ने महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण बंद कर दिया तथा हिन्दू स्थपात्य को बड़ी क्षति पहुंचाई। जहाँगीर की मृत्यु के बाद चित्रकला का और शाहजहाँ की मृत्यु के बाद मुगल स्थापत्य कला का पतन आरम्भ हो […] - [मुगलकालीन साहित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मुगलकालीन साहित्य मुगल सल्तनत की पूर्ववर्ती तुर्की सल्तनत की अपेक्षा बहुत अधिक समृद्व था। इसका सबसे बड़ा कारण मुगलों की संस्कृति का बर्बर तुर्कों की संस्कृति से अलग होना था। मुगलकालीन साहित्य मुगलों के आने से पहले एवं मुगलों के काल में भी शाही दरबार की भाषा फारसी थी। राज्याधिकारियों को अनिवार्य रूप से फारसी […] - [मुगल कालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): मुगल कालीन चित्रकला निश्चित रूप से हिन्दू चित्रकला से भिन्न थी। मुगल कालीन चित्रकला के बिम्ब, विषय एवं शैली तीनों ही हिन्दू चित्रकला से अलग थे। मुगल कालीन चित्रकला कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि मुगल साम्राज्य की स्थापना के साथ ही चित्रकला में नवजीवन आ गया क्योंकि मुगल बादशाह चित्रकला के महान् प्रेमी थे। […] - [राजपूत राज्यों का प्रशासन](https://bharatkaitihas.com/administrative-structure-and-institutions-of-rajput-states/): राजपूत राज्यों का प्रशासन प्राचीन क्षत्रियों की राज्य व्यवस्था के आधार पर स्थपित किया गया था जिसमें धर्म एवं नैतिकता को प्रमुखता दी गई थी किंतु मध्यकालीन भारत में राजपूतों ने मुगलों के अनुकरण पर राजपूत राज्यों का प्रशासन स्थिर किया जिसमें प्रजा के हितों को बहुत कम संरक्षण दिया गया था। राजपूत शासकों ने […] - [राजपूतों का राजस्व प्रशासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be/): राजपूतों का राजस्व प्रशासन इस प्राचीन सिद्धांत पर आधारित था कि भोग रा धणी राज हो, भोम रा धणी म्हाँ छो। अर्थात् भूमि तो जोतने वाले किसान की है, राजा केवल भोग अर्थात् राजस्व का अधिकारी है किंतु मुगल काल में इस मान्यता को ठुकरा दिया गया और राजा एवं जागीरदार ही समस्त भूमि के […] - [राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5/): राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था और दण्ड-व्यवस्था का आधार प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्र थे। परम्परा, रीति-रिवाज तथा देशाचार को भी मान्यता दी जाती थी। गाँवों में न्याय व्यवस्था गाँव में ग्राम चौधरी या पटेल न्याय देने को कार्य करते थे। ग्राम पंचायत और जाति पंचायतों द्वारा भी न्याय का कार्य किया जाता था। पंचायतों के निर्णयों के […] - [राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d/): राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन परमपरागत हिन्दू सैन्य प्रबन्धन पर आधारित था जिसके कारण वे मुगलों का सामना तो करते थे किंतु उन्हें पराजित नहीं कर पाते थे। राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन सेना का गठन मध्यकालीन राजपूत राज्यों में सेना का रख-रखाव सामान्तों द्वारा किया जाता था। राजा को जब सेना की आवश्यकता होती थी तब […] - [राजपूत राज्यों में समाज](https://bharatkaitihas.com/society-and-economy-in-rajput-states/): राजपूत राज्यों में समाज भारत के अन्य क्षुत्रों की जनता की तुलना में अधिक परम्परावादी थी। सामाजिक परम्पराओं में परिवर्तन की गति बहुत धीमी थी। राजपूत राज्यों में समाज का शैक्षिक स्तर बहुत निम्न था और लोगों में राजा के विरुद्ध आवाज उठाने को विद्रोह एवं पाप माना जाता था। राजपूत राज्यों में समाज मध्यकालीन […] - [राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a5%8d/): राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था प्राचीन हिन्दू जीवन शैली पर आधारित थी और अत्यंत सरल कार्यकलापों से युक्त थी। राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था प्राचीन हिन्दू जीवन शैली पर आधारित थी और अत्यंत सरल कार्यकलापों से युक्त थी। प्रजा से उनके द्वारा अर्जित किए जाने वाले धन पर राजा केवल उतना ही कर लेता था जितना कि […] - [जनपद राज्य और प्रथम मगधीय साम्राज्य (अध्याय 10)](https://bharatkaitihas.com/janpad-rajya-and-first-magadhiya-empire/): जनपद राज्य वैदिक आर्यों ने जन अर्थात् कबीलों की स्थापना की थी। जन का आकार बढ़ने एवं नगरीय जीवन का प्रादुर्भाव होने से, बड़े राज्यों अर्थात् जनपद राज्य का उदय हुआ। धीरे-धीरे लोगों की निष्ठा जन अथवा अपने कबीले के प्रति नहीं रहकर उस जनपद राज्य के प्रति हो गई जिसमें वे बसे हुए थे। […] - [पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क (अध्याय 11)](https://bharatkaitihas.com/indias-contact-with-the-western-world/): मानव सभ्यता के प्रथम चरण में घुमक्कड़ प्रवृत्ति का था। वह छोटे-छोटे समूहों में दूर-दूर तक यात्राएं किया करता था और शिकार करके अपना पेट भरता था। इस कारण पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क अत्यंत प्राचीन काल से था। उत्तर-पूर्व भारत के छोटे रजवाड़ों और गणराज्यों का विलयन धीरे-धीरे मगध साम्राज्य में हो गया […] - [चंद्रगुप्त मौर्य (अध्याय 12)](https://bharatkaitihas.com/chandra-gupta-mourya/): इस अध्याय में चंद्रगुप्त मौर्य के इतिहास के साथ-साथ उसकी विजयें एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का वर्णन किया गया है। चंद्रगुप्त मौर्य ही वह पहला राजा है जिसके समय से भारतीय राजाओं की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिखित प्रमाण मिलने आरम्भ होते हैं। मौर्य वंश मौर्य साम्राज्य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का प्रारम्भिक जीवन अन्धकार में […] - [अशोक महान् (अध्याय 13)](https://bharatkaitihas.com/ashok-the-great/): अशोक महान् मौर्य राजवंश का तीसरा राजा था। वह चंद्रगुप्त मौर्य का पौत्र तथा बिन्दुसार का पुत्र था। उसका वास्तविक नाम अशोक था किंतु जवाहरलाल नेहरू ने अशोक को अशोक महान् तथा अकबर को अकबर महान् लिखा है, इस कारण इतिहास में उसे अशोक महान् के नाम से जाना जाता है। मौर्य सम्राट बिन्दुसार के […] - [मौर्य कालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/mauryan-era-india/): मौर्य कालीन भारत का इतिहास भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की अनूठी विरासत को समेटे हुए है। मौर्य कालीन समाज आज के भारतीय समाज से पूर्णतः भिन्न था। मौर्य कालीन भारत को जानने के तीन प्रमुख साधन हैं- (1) मेगस्थनीज का भारतीय विवरण, (2) कौटिल्य का अर्थशास्त्र तथा (3) अशोक के अभिलेख। मौर्य कालीन समाज वर्ण-व्यवस्था […] - [शुंग वंश एवं कण्व वंश](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6/): मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में एक के बाद एक तीन ब्राह्मण राज्य स्थापित हुए। इन राज्यों के संस्थापक शुंग वंश, कण्व वंश एवं सातवाहन वंश के थे। इस अध्याय में शुंग वंश एवं कण्व वंश का इतिहास दिया गया है। मौर्य-साम्राज्य भारत का प्रथम विशाल साम्राज्य था। मौर्य काल में भारत को […] - [सातवाहन अथवा आन्ध्र वंश](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a8/): सातवाहन राजाओं के नामों में गौतम और वसिष्ठ लगा हुआ है। ये ब्राह्मण गोत्र हैं। नासिक अभिलेख में गौतमीपुत्र शातकर्णि की माता गौतमी बलश्री को राजर्षिवधू कहा गया है। आन्ध्र वंश अथवा सातवाहन आन्ध्र एक जाति का नाम था जो गोदावरी तथा कृष्णा नदियों के मध्य-भाग में निवास करती थी। वायु पुराण के अनुसार आन्ध्र […] - [भारत के विदेशी शासक - यूनानी, शक, पह्लव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): भारत के विदेशी शासक मुख्यतः यूनानी, शक, पह्लव एवं कुषाण वंश के थे। इस अध्याय में यूनानी, शक एवं पह्लवों पर जानकारी दी गई है। कुषाण वंश के बारे में अगले अध्याय में जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। विदेशी आक्रमण अशोक की मृत्यु के साथ ही भारत की राजनीतिक विशृंखलता पुनः आरम्भ हो गई। उत्तरकालीन […] - [गुप्त वंश](https://bharatkaitihas.com/gupta-empire/): भारत में गुप्त वंश के शासकों की एक दीर्घ शृंखला ने 320 ईण् से 495 ईण् तक शासन किया। गुप्त वंश के शासन काल को भारतीय पुनर्जागरण का युग तथा भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। मौर्य शासन के नष्ट हो जाने के बाद भारत की राजनीतिक एकता भंग हो गई थी, […] - [प्रारंभिक गुप्त शासक](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): प्रारंभिक गुप्त शासक अब भी इतिहास के कुहासे में हैं, उनके बारे में स्पष्ट एवं विस्तृत जानकारी अब तक नहीं जुटाई जा सकी है। फिर भी अब तक प्राप्त तथ्यों के आधार पर श्रीगुप्त, घटोत्कच एवं चंद्रगुप्त (प्रथम) को प्रारम्भिक गुप्त शासक माना जाता है। प्रारंभिक गुप्त शासक श्रीगुप्त श्रीगुप्त का काल 275 ई. से […] - [काच](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a/): कुछ स्वर्णमुद्रओं पर काच नामक राजा का नाम लिखा हुआ मिलता है। इन मुद्राओं के सामने की ओर एक राजा अंकित है जो अपने बाएँ हाथ में चक्रध्वज लिए खड़ा है। राजा के बाएँ हाथ के नीचे ब्राह्मी लिपि में एक वर्तुलाकार लेख उत्कीर्ण है- ‘ काचो गामवजित्य दिवं कर्मभिरुत्तमैः ’ अर्थात् – पृथ्वी-विजय के […] - [समुद्रगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): गुप्त सम्राटों में समुद्रगुप्त का बड़ा नाम है। उसने ई.335 से 375 तक भारत के बड़े भूभाग को अपने अधीन किया तथा उस पर सफलता पूर्वक शासन किया। चन्द्रगुप्त (प्रथम) के बाद उसका पुत्र समुद्रगुप्त मगध के सिंहासन पर बैठा। चन्द्रगुप्त (प्रथम) की माता लिच्छवियों की राजकुमारी कुमारदेवी थी। यद्यपि समुद्रगुप्त के और भी कई […] - [रामगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): समुद्रगुप्त के बाद उसका बड़ा पुत्र रामगुप्त पाटलिपुत्र का राजा हुआ। उसे अपने पिता का विशाल साम्राज्य पैतृक अधिकार में प्राप्त हुआ किंतु वह इतने बड़े साम्राज्य के शासक के रूप में अयोग्य सिद्ध हुआ। रामगुप्त (375 ई.) समुद्रगुप्त के कई पुत्र तथा पौत्र थे। उसके ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम गुप्त था जो उसके […] - [चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य](https://bharatkaitihas.com/chandragupta-vikramaditya/): चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य को गुप्त शासकों के इतिहास में चन्द्रगुप्त द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। वह महान् हिन्दू सम्राट था जिसने भारत भूमि को धन-सम्पदा, ज्ञान-विज्ञान एवं धर्म-अध्यात्म से सम्पन्न बनाने में अद्भुत सफलताएं अर्जित कीं। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) समुद्रगुप्त की रानी दत्तदेवी का पुत्र था। वह बड़ा ही वीर तथा पराक्रमी राजकुमार था। […] - [गोविंद गुप्त बालादित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मालव अभिलेख के अनुसार चन्द्रगुप्त (द्वितीय) की मृत्यु के बाद गोविंद गुप्त बालादित्य राजा हुआ। अतः गोविंदगुप्त अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ किंतु उसका शासन अत्यंत अल्पकाल का रहा। गोविंद गुप्त बालादित्य (412-415 ई.) बसाढ़ (वैशाली) से ध्रुवस्वामिनी की एक मुहर प्राप्त हुई है जिस पर एक लेख इस प्रकार उत्कीर्ण है- महाराजाधिराज श्री चंद्रगुप्त-पत्नी […] - [कुमार गुप्त प्रथम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae/): कुमार गुप्त प्रथम गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय का कनिष्ठ पुत्र था। उसे महेन्द्रादित्य भी कहते हैं। गोविंद गुप्त बालादित्य के संक्षिप्त शासन काल के बाद कुमारगुप्त प्रथम गुप्तों के सिंहासन पर बैठा। कुमार गुप्त प्रथम (415-455 ई.) बिलसड़ अभिलेख के अनुसार कुमारगुप्त की आरम्भिक तिथि 415 ई. तथा उसके चांदी के सिक्कों पर उसकी अंतिम […] - [स्कन्दगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): कुमारगुप्त की मृत्यु के उपरान्त उसका पुत्र स्कन्दगुप्त सिंहासन पर बैठा। जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार वह ई. 455 में गुप्तों के सिंहासन पर बैठा। जूनागढ़ अभिलेख में स्कन्दगुप्त अपने पिता कुमारगुप्त के नाम का उल्लेख तो करता है किंतु अपनी माता के नाम का उल्लेख नहीं करता जबकि गुप्त शासकों में इस प्रकार के शिलालेखों […] - [गुप्त साम्राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/fall-of-gupta-empire/): ईस्वी 570 के आसपास गुप्त साम्राज्य का पतन हो गया। गुप्तों के पतन के बाद देश की राजनीतिक एकता भंग हो गई तथा छोटे-छोटे राज्यों का उदय होने लगा। उत्तरकालीन गुप्त सम्राट स्कन्दगुप्त के बाद उसका विमात-पुत्र पुरुगुप्त वृद्धावस्था में सिंहासन पर बैठा। पुरुगुप्त ने 467 ई. से 473 ई. तक शासन किया। उसने धनुर्धर […] - [गुप्त कालीन शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): गुप्त कालीन शासन व्यवस्था राज्य के संरक्षण एवं प्रजा के हित-साधन के सिद्धांतों पर केन्द्रित थीं। शासक द्वारा प्रजा से न्यूनतम कर लिया जाता था। गुप्त कालीन शासन व्यवस्था के मूल तत्व शासन का आदर्श गुप्त-सम्राटों के शासन का आदर्श बहुत ऊँचा था। वे स्वयं को प्रजा का ऋणी समझते थे और प्रजा की सेवा […] - [भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल](https://bharatkaitihas.com/golden-age-of-india-in-gupta-period/): गुप्त शासकों के शासन काल को भारत का स्वर्णयुग कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस काल में प्रजा सुखी एवं सम्पन्न थी। प्रजा को न तो शासन का और न अपराधियों का भय था। इतिहास में स्वर्ण युग का तात्पर्य उस युग से होता है जो अन्य युगों से अधिक […] - [गुप्त कालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/india-in-gupta-period/): गुप्त कालीन भारत में ब्राह्मण धर्म का पुनरुद्धार हुआ। इस काल में अनेक पुराण, नीति, स्मृति एवं अन्य धर्मशास्त्रों का लेखन हुआ तथा वैष्णव मंदिरों का निर्माण हुआ। यज्ञों का फिर से विस्तार हुआ। गुप्त कालीन समाज गुप्त कालीन भारत में बाह्य संस्कृति को आत्मसात् करने की अपूर्व क्षमता थी। यही कारण है कि शक, […] - [हूण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%a3/): हूण लोग मूलतः चीन के निवासी थे। चीनी भाषा में इन्हें हिगनू कहा जाता था। संस्कृत-साहित्य तथा अभिलेखों में इन्हें हूण कहा गया है। हूण लोग मंगोल जाति के थे और सीथियनों की एक शाखा से थे। ये लोग बड़े ही असभ्य, निर्दयी, रक्त पिपासु तथा लड़ाकू होते थे और युद्ध कला में बड़े कुशल […] - [हर्षवर्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): हर्षवर्धन के शासनकाल की जानकारी कई साधनों से मिलती है। हर्ष के दरबार में रहने वाले कवि बाणभट्ट ने अपनी कृति हर्षचरित में हर्ष तथा उसके पूर्वजों का वर्णन किया है। पुष्यभूति वंश का उदय गुप्त साम्राज्य के छिन्न-भिन्न हो जाने के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता एक बार पुनः समाप्त हो गई और देश […] - [हर्ष की उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): हर्ष की उपलब्धियाँ उसके साम्राज्य विस्तार के रूप में तो हमारे सामने आती ही हैं, साथ ही सांस्कृतिक क्षेत्र में भी हर्ष की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं। हर्ष की उपलब्धियाँ हर्ष की गणना भारत के महान् सम्राटों में की जाती है, हर्ष की उपलब्धियाँ इस प्रकार से हैं- (1) महान् विजेता स्मिथ ने हर्ष की उपलब्धियों […] - [ह्वेनसांग की भारत यात्रा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): चीनी चात्री ह्वेनसांग की भारत यात्रा सातवीं शताब्दी ईस्वी में हुई। उस समय उत्तर भारत में हर्षवर्धन बहुत बड़े क्षेत्र पर शासन कर रहा था। ह्वेनसांग की भारत यात्रा के विवरण से हमें सातवीं शताब्दी ईस्वी के भारत के इतिहास की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है। चीनी चात्री ह्वेनसांग ह्वेनसांग एक चीनी यात्री था, जो […] - [पल्लव एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/the-contribution-of-the-pallavas-to-indian-culture/): दक्षिण के राज्यों में पल्लव वंश का बहुत बड़ा महत्त्व है। इस वंश ने दक्षिण भारत पर लगभग 500 वर्ष तक शासन किया। इस वंश का उदय लगभग 350 ई. में चोड अथवा चोल देश के पूर्वी समुद्र तट पर हुआ। दक्षिण भारत के राज्य भारतवर्ष के मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम दिशा की […] - [चालुक्य एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/contribution-of-chalukyas-to-indian-culture/): दक्षिण भारत के चालुक्य तीन शाखाओं में बंटे हुए थे- बादामी अथवा वातापी के चालुक्य, कल्याणी के चालुक्य एवं वेंगी के चालुक्य। गुजरात के अन्हिलवाड़ा में भी चालुक्यों की एक शाखा शासन करती थी। चालुक्य वंश चालुक्यों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विद्वान एकमत नहीं हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार वे प्राचीन क्षत्रियों के वंशज […] - [चोल एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/the-contribution-of-the-cholas-in-indian-culture/): पल्लव वंश के कमजोर पड़ जाने पर उनके राज्य पर चोल वंश का शासन हो गया। चोल शासक आदित्य प्रथम ने पाण्ड्य नरेश पर आक्रमण करके उससे कोंगु प्रदेश छीन लिया। इस प्रकार आदित्य प्रथम ने शक्तिशाली चोल राज्य की स्थापना की। चोल वंश चोल तमिल भाषा के ‘चुल’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ […] - [राजपूतों का उदय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a4%af/): हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत की केन्द्रीय राजनीति में उत्पन्न शून्यता को भरने के लिए राजपूतों का उदय हुआ। राजपूतों ने पांच शताब्दियों तक मुसलमानों को भारत भूमि से बाहर रखा। पुष्यभूति राजा हर्षवर्द्धन की मृत्यु के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता पुनः भंग हो गई और देश के विभिन्न भागों में छोटे-छोटे राज्यों […] - [प्रमुख राजपूत वंश](https://bharatkaitihas.com/major-rajput-dynasties-of-india/): भारत के प्रमुख राजपूत वंश भारत भूमि को ऐसे समय में अपनी सेवाएं देने में सफल रहे जब प्राचीन राजवंश पूरी तरह निर्बल होकर इतिहास के नेपथ्य में जा चुके थे। गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहार वंश का उदय राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में गुर्जर प्रदेश में हुआ। इसी कारण इस वंश के नाम के पहले गुर्जर शब्द […] - [राजपूतकालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/india-under-rajput-rulers/): राजपूतकालीन भारत का इतिहास में बहुत बड़ा महत्त्व है। राजपूतों ने लगभग साढ़े पांच शताब्दियों तक अदम्य उत्साह के साथ मुस्लिम आक्रांताओं से देश की रक्षा की। यद्यपि वे अन्त में अपने देश की स्वतंत्रता की रक्षा न कर सके परन्तु उनके त्याग, उनके देशप्रेम, उनके साहस तथा उनके उच्चादर्श की कहानियां अमर हो गईं। […] - [त्रिकोणीय संघर्ष (गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट)](https://bharatkaitihas.com/triangular-struggle-for-supremacy-gurjara-pratihara-pal-and-rashtrakuta-dynasty/): त्रिकोणीय संघर्ष गुर्जर.प्रतिहारों पालों और राष्ट्रकूटों के बीच हुआ। यह संघर्ष भारत भूमि के लिए अत्यंत विनाशकारी एवं दुर्भाग्यपूर्ण सिद्ध हुआ। इस कारण मुसलमानों के लिए भारत के द्वार खुलते चले गए। अवंति का गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहारों का उदय मण्डोर में हुआ तथा वे जालोर होते हुए अवन्ति तक जा पहुंचे थे। गुर्जर प्रदेश का […] - [इस्लाम का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/rise-of-islam/): इस्लाम (Islam) का उत्कर्ष सम्पूर्ण विश्व की संस्कृतियों के लिए बड़े खतरे के रूप में हुआ। इस्लामी सेनाएँ (Islamic armies) जहाँ कहीं भी गईं, उन्होंने बड़ी संख्या में नरसंहार किया तथा वहाँ के सांस्कृतिक परिवेश एवं चिह्नों को नष्ट किया। इस्लाम का अर्थ इस्लाम अरबी भाषा के ‘सलम’ शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता […] - [अरबवासियों का भारत आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/arabs-invade-india/): अरबवासियों का भारत आक्रमण यद्यपि सिंध क्षेत्र तक सीमित था किंतु इससे अरबवासियों को भारतीयों की कमजोरियों का पता लग गया। अरबवासियों का परिचय अरब एशिया महाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रायद्वीप है। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिमी में लालसागर और पूर्व में फारस की खाड़ी स्थित है। इस क्षेत्र के निवासी […] - [महमूद गजनवी के आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): महमूद गजनवी के आक्रमण ईस्वी 1000 से 1027 के बीच कुल 17 बार हुए जिनमें भारत की प्रजा का बहुत बड़ा विनाश हुआ। महमूद गजनवी ने खलीफा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए प्रतिज्ञा की कि वह प्रतिवर्ष भारत के काफिरों पर आक्रमण करेगा। सिंध में अरबों के आक्रमण के लगभग 350 वर्ष बाद उत्तर-पश्चिमी […] - [शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी के आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी के आक्रमण भारत भूमि पर एक नई विपदा के रूप में हुए। उस काल में भारत की शक्ति अनेक छोटे-बड़े राज्यों में बिखरी हुई थी। इन राज्यों के शासक परस्पर युद्ध करके अपने-अपने राज्य का विस्तार करने में लगे रहते थे। इस कारण भारतीय राजा मुहम्मद गौरी के आक्रमणों का एकजुट होकर […] - [नेहरू से असंतुष्ट थे पटेल ! (112)](https://bharatkaitihas.com/patel-was-dissatisfied-with-nehru-regarding-kashmir-goa-china-tibet-and-nepal/): गांधी के दबाव पर पटेल ने नेहरू को प्रधानमंत्री की कुर्सी तो दे दी किंतु दोनों के व्यक्तित्व बिल्कुल अलग थे।काश्मीर, गोआ, चीन, तिब्बत और नेपाल को लेकर नेहरू से असंतुष्ट थे पटेल ! सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस में बिताया था। दोनों ही गांधीजी के निकट सहयोगी माने जाते […] - [नेहरू की चीन नीति से नाराज थे सरदार पटेल ! (113)](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-foreboding-of-future-chinese-invasion/): सरदार पटेल नेहरू की चीन नीति से बुरी तरह नाराज थे। सरदार पटेल को पूर्वाभास था कि एक दिन चीन भारत पर आक्रमण करेगा तथा भारत को बड़ी मुसीबत में डाल देगा किंतु प्रत्यक्ष रूप से समाजवादी तथा परोक्ष रूप से कम्युनिस्ट नेहरू चीन के सम्मोहन में ऐसे बंधे थे कि वे सरदार पटेल की […] - [वायुयान दुर्घटना ने देश को चिंता में डाल दिया (114)](https://bharatkaitihas.com/air-crash-caused-country-to-worry/): यह घटना उन दिनों की है जब सरदार पटेल को राजस्थान नामक नवीन प्रादेशिक इकाई का उद्घाटन करने के लिए दिल्ली से जयपुर जाना था। जयपुर से कुछ पहले ही विमान खराब हो गया। पूरे देश में वायुयान दुर्घटना के समाचार फैल गए जिन्होंने देश को चिंता में डाल दिया! 29 मार्च 1949 को सरदार […] - [पटेल का अंतिम संस्कार आम आदमी की तरह किया गया ! (115)](https://bharatkaitihas.com/patel-was-cremated-like-a-common-man/): सरदार पटेल जन-जन के नेता थे। उनकी अंतिम यात्रा में बहुत बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए किंतु सरदार पटेल का अंतिम संस्कार आम आदमी की तरह किया गया! 1950 की गर्मियों में पटेल का स्वास्थ्य तेजी से गिरा। उनकी खांसी में खून आने लगा। मणिबेन ने पटेल की बैठकों तथा कार्य-घण्टों की संख्या कम […] - [वल्लभभाई विष्णुगुप्त चाणक्य तथा समुद्रगुप्त की तरह राष्ट्र निर्माता थे ! (116)](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-the-creator-of-nation-like-vishnugupta-chanakya-and-samudragupta/): भारत के विभाजन के समय, वल्लभभाई पटेल पर हिन्दुओं का पक्ष लेने तथा साम्प्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया गया। मौलाना आजाद ने अपनी पुस्तक में पटेल की बहुत आलोचना की है। हिन्दू राष्ट्रवादी शक्तियां भी वल्लभभाई पर भारत का विभाजन स्वीकारने में जल्दबाजी करने का आरोप लगाती रही हैं। सुभाषचंद्र बोस के पक्षधर सरदार […] - [प्राक्कथन - मुगल कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/preface-of-mughal-kaleen-pramukh-bhawan/): प्राक्कथन – मुगल कालीन भवन पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक भारत के मुगलकालीन प्रमुख भवन पुस्तक की भूमिका दी गई है। यह पुस्तक अमेजन पर उपलब्ध है। वास्तुकला को समस्त कलाओं की रानी कहा जाता है। इसलिए यह कहावत भी है कि ‘संसार में दो ही चीजें जीवित रहती हैं, या तो […] - [मुगल स्थापत्य शैली](https://bharatkaitihas.com/mughals-and-their-architectural-style/): भारत में मुगल स्थापत्य शैली का प्रवेश बाबर की दिल्ली सल्तनत पर विजय के बाद हुआ। बाबर एवं हुमायूं के काल में मुगल स्थापत्य शैली का विकास नहीं हो सका। भारत में मुगलों ने एक नवीन इस्लामी राज्य की स्थापना की जो सभ्यता एवं संस्कृति के स्तर पर अपने पूर्ववर्ती ‘दिल्ली सल्तनत’ से पूर्णतः भिन्न […] - [बाबर का स्थापत्य बोध](https://bharatkaitihas.com/baburs-architectural-sense/): बाबर का स्थापत्य बोध उसके द्वारा बनाए गए भवनों की अपेक्षा उसकी आत्मकथा बाबरनामा से अधिक होता है। बाबर ने भारत में मौलिक रचनाओं का निर्माण करने की बजाय हिन्दू मंदिरों को तोड़कर उन्हें मस्जिदों में बदलने का कार्य किया। जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने ई.1526 में भारत में मुगल सल्तनत की स्थापना की थी। उसे […] - [हुमायूँ द्वारा निर्मित भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-by-humayun/): भारत में हुमायूँ द्वारा निर्मित भवन बहुत कम हैं। हुमायूँ ने ई.1530 से 1540 तक भारत पर शासन किया। लगभग छः माह के लिए उसने ई.1555 में भी शासन किया। बाबर के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल के दुर्ग में हुआ था। जब ई.1526 में वह बाबर के साथ […] - [सूर स्थापत्य - सूरी सल्तनत में निर्मित भवन](https://bharatkaitihas.com/suri-sultanate-era-buildings/): सूर स्थापत्य अपने पूर्ववर्ती तुर्क शासकों एवं पश्चवर्ती मुगलशासकों से कई प्रकार से अलग था। य़़द्यपि भारत में सूर स्थापत्य के अधिक उदाहरण देखने को नहीं मिलते तथापि वे अपनी शैलीगत विशेषताओं के कारण अलग से ही पहचाने जाते हैं। शेरशाह सूरी का का वास्तविक नाम शेर खाँ था। उसका उत्कर्ष ई.1520 से 1525 के […] - [अकबर कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-during-reign-of-akbar/): अकबर कालीन भवन अकबर के शासन की सुदृढ़ता का प्रदर्शन करते हैं। उनमें भव्यता कम है किंतु उनकी सुघड़ता, बनावट तथा आकार अकबर के शासन की शक्ति की घोषणा करते हैं। अकबर का शासन-काल शासन के प्रत्येक क्षेत्र में हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के सम्मिश्रण और समन्वय का काल था। इस कारण उसके समय में स्थापत्य एवं […] - [जहाँगीर कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-during-reign-of-jahangir/): एतमादुद्दौला का मकबरा प्रमुख जहाँगीर कालीन भवन है। इसका निर्माण ई.1625 में नूरजहाँ ने अपने पिता घियासुद्दीन बेग की स्मृति में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से आगरा में करवाया था। 25 अक्टूबर 1605 को सलीम आगरा में नूरूद्दीन मुहम्मद जहाँगीर के नाम से मुगलों के तख्त पर बैठा। बादशाह बनने के बाद जहाँगीर […] - [शाहजहाँ कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-carpet-building-golden-age-of-mughal-architecture/): समूचे मुगलिया शासन के दौरान बने भवनों में शाहजहाँ कालीन भवन अपनी भव्यता के लिए सर्वाधिक विख्यात हुए। शाहजहाँ कालीन भवन निर्माण में इतना धन पानी की तरह बहाया गया कि राजकोष रिक्त होने लगा। इन भवनों में कीमती हीरे-मोतियों का उपयोग पत्थरों की तरह किया गया। धन के इसी अपव्य के कारण औरंगजेब अपने […] - [ताजमहल - मुगलकाल का सर्वश्रेष्ठ भवन](https://bharatkaitihas.com/taj-mahal-the-best-building-of-the-mughal-period/): आगरा का ताजमहल, शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई सर्वाधिक शानदार इमारत है। यह शाहजहाँ की प्रिय बेगम अर्जुमंद बानो का मकबरा है जो अपनी 14वीं संतान को जन्म देते समय मृत्यु को प्राप्त हो गई थी। शाहजहाँ ने अर्जुमंद बानो को ‘मुमताज महल’ की उपाधि दी थी जिसका अर्थ होता है- ‘महल का सबसे सुंदर आभूषण।’ […] - [तेजोमय महालय था ताजमहल](https://bharatkaitihas.com/was-the-taj-mahal-a-glorious-mahalaya/): प्रसिद्ध इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से ताजमहल को हिंदू संरचना सिद्ध किया था। उनके अनुसार ताजमहल मकबरा नहीं अपितु तेजोमय महालय नामक हिंदू महल था। शाहजहाँनामा में ताजमहल के लिए लिखा है कि यह मंदिर भवन नगर के दक्षिण में भव्य एवं सुंदर हरित उद्यान से घिरा हुआ है। […] - [औरंगजेब कालीन भवन - मुगल स्थापत्य का पतनकाल](https://bharatkaitihas.com/buildings-of-mughal-architecture-during-aurangzeb-era/): औरंगजेब कालीन भवन भारत में न के बराबर देखने को मिलते हैं। इस काल में शिल्प एवं स्थापत्य कला का विनाश देखने को मिलता है। शाहजहाँ तथा मुमताज महल की चैदह संतानें थीं। उनमें से मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब छठा था। उसका जन्म 3 नवम्बर 1618 को उज्जैन के निकट दोहद में हुआ था। जब शाहजहाँ […] - [मुगलकाल में ध्वस्त भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-demolished-during-the-mughal-period-babur-to-shah-jahan/): भारत के इतिहास में गुगल काल केवल निर्माण के लिए ही नहीं जाना जाता है अपितु हिन्दू स्थापत्य, विशेषकर मंदिरों के विध्वंस के लिए बदनाम भी है। मुगलकाल में ध्वस्त भवन बहुत बड़ी संख्या में रहे होंगे, अब तो उनके नाम भी नहीं मिलते। इस अध्याय में मुगल बादशाह बाबर से लेकर शाहजहाँ तक के […] - [प्लासी का युद्ध (1757 ई.)](https://bharatkaitihas.com/war-of-plasi-in-seventeen-hundred-fifty-seven/): प्लासी का युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बीच ई.1757 में लड़ा गया था। प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास के निर्णायक युद्धों में से एक है। प्लासी का युद्ध होने के प्रमुख कारण प्लासी का युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे- (1.) अलीनगर की सन्धि की शर्तों का पूरा नहीं होना […] - [बक्सर युद्ध](https://bharatkaitihas.com/rise-of-british-power-in-bengal-and-buxar-war/): बक्सर युद्ध में भारत की तीन प्रमुख शक्तियों- मुगल बादशाह शाहआलम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और बंगाल के नवाब मीर कासिम के भाग्य का फैसला हुआ। नवाब मीर कासिम मीर कासिम के प्रारम्भिक जीवन के बारे में विशेष जानकारी नहीं मिलती। उसका जन्म निश्चय ही किसी शासक परिवार में हुआ होगा, तभी मीर जाफर ने […] - [बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-diarchy-in-bengal-by-east-india-company/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना की गई। हस व्यवस्था में बंगाल का प्रशानिक प्रबंधन नवाब के हाथों में रहा जबकि भूराजस्व वसूल करने का दायित्व ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने ग्रहण कर लिया। अकबर द्वारा स्थापित मुगल शासन पद्धति के अन्तर्गत बंगाल के सूबे का शासन दो भागों में बँटा हुआ […] - [बसीन की संधि (1802 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%bf/): बसीन की संधि ई.1802 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा अपदस्थ पेशवा बाजीराव (द्वितीय) के बीच हुई। इस संधि के बाद से ही मराठा शक्ति का पतन आरम्भ हो गया तथा कुछ ही वषोँ में मराठे सहायक संधियों के माध्यम से कम्पनी सरकार के अधीन हो गए। मराठों में परस्पर संघर्ष पेशवा बाजीराव (द्वितीय) (1796-1851 ई.) […] - [प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782 ई.)](https://bharatkaitihas.com/first-anglo-maratha-war/): 18 मई 1775 को अँग्रेजों एवं मराठों के बीच अरास नामक स्थान पर प्रथम आंग्ल.मराठा युद्ध हुआ जिसमें मराठे परास्त हुए और मराठा शक्ति को बड़ा धक्का लगा। छत्रपति शिवाजी (1646-1680 ई.) ने मराठा शक्ति को संगठित करने का काम किया। औरंगजेब जैसा शक्तिशाली मुगल बादशाह भी मराठा शक्ति का दमन नहीं कर सका। छत्रपति […] - [द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा मराठा शक्ति के बीच हुआ। मराठों की तरफ से सिंधिया एवं भौंसले ने इस युद्ध में भाग लिया जबकि गायकवाड़ और होलकर इस युद्ध से अलग रहे। द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध बसीन की सन्धि के बाद मई 1803 में बाजीराव (द्वितीय) को अँग्रेजों के संरक्षण में पुनः पेशवा बनाया […] - [तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1816-1818 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध ई.1816 से 1818 के बीच चला। इस समय लॉर्ड वेलेजली ईस्ट इण्डिया कम्पनी का गवर्नर जनरल था। इस युद्ध में मराठों की तरफ से पेशवा, होलकर, सिन्धिया और भौंसले ने युद्ध किया।तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद ये तीनों ही अपने-अपने राज्यों के अधिकांश भू.भाग खो बैठे। तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध लॉर्ड हेस्टिंग्ज 1813 […] - [मराठा शक्ति का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): मराठा शक्ति का पतन भारत के आधुनिक इतिहास का सर्वाधिक निर्णायक मोड़ है। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने राजपूत राज्यों को अधीनस्थ सहायता की संधियाँ करने के लिए विवश करने के बाद मराठा शक्ति को पूरी तरह कुचलकर अपने अधीन कर लिया। मराठा शक्ति का पतन अधिकांश अँग्रेज इतिहासकारों के अनुसार ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत […] - [भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-british-rule-in-india/): भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना और साम्राज्य विस्तार के वास्तविक कारणों के विषय में इतिहासकारों में भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापनापर्याप्त मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत में ब्रिटिश भारत की स्थापना एक चमत्कारिक घटना थी। भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना के सम्बन्ध में धारणाएँ कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत में […] - [सहायक संधि प्रथा और वेलेजली](https://bharatkaitihas.com/marquis-wellejlee-invented-subsidiary-treaty-system/): मार्क्विस वेलेजली (1798-1805 ई.) ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी का प्रभावक्षेत्र विस्तारित करने के लिए सहायक संधि प्रथा का अविष्कार किया। इस प्रथा के अंतर्गत देशी राज्यों को विवश किया जाता था कि वे कम्पनी सरकार से सहायक संधि करके कम्पनी सरकार का संरक्षण प्राप्त कर लें। जिस समय मार्क्विस वेलेजली (1798-1805 ई.) को बंगाल का […] - [लॉर्ड हेस्टिंग्ज की हस्तक्षेप नीति](https://bharatkaitihas.com/lord-hastingss-intervention-policy/): 1784 ई. में ब्रिटिश संसद ने पिट्स इण्डिया एक्टके माध्यम से ईस्ट इण्डिया कम्पनी को आदेश दिया था कि कम्पनी सरकार भारत में देशी रियासतों के प्रति अहस्तक्षेप की नीति का पालन करेगी। इस नीति के कारण अंग्रेज अधिकारी भारत में साम्राज्य विस्तार नहीं कर पा रहे थे। अतः कम्पनी ने इस नीति को छोड़ […] - [डॉक्टराइन ऑफ लैप्स](https://bharatkaitihas.com/lord-dalhousies-doctrine-of-laps/): डॉक्टराइन ऑफ लैप्स का आविष्कार लॉर्ड डलहौजी ने किया। वह घोर साम्राज्यवादी अंग्रेज था। वह अपने कार्यकाल में सम्पूर्ण भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन करना चाहता था। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के इतिहास में 1848 ई. से 1856 ई. का काल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। 1848 ई. में लॉर्ड हेनरी हार्डिंग के जाने के बाद […] - [अंग्रेजों का जमींदारी बंदोबस्त](https://bharatkaitihas.com/zamindari-settlement-of-east-india-company/): अंग्रेजों का जमींदारी बंदोबस्त ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासनकाल में विकसित हुई एक नई प्रकार की भूराजस्व प्रणाली थी। इसमें किसानों को मुगलों के काल से चले आ रहे बंदोबस्त की अपेक्षा कुछ राहतें प्राप्त हुईं। भारत में वैदिक काल से ही राजा को प्रजा से भोग प्राप्त करने का अधिकार था। भोग, किसी भी […] - [अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त](https://bharatkaitihas.com/east-india-companys-reyatwadi-settlement/): अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त लागू करने का प्रमुख कारण यह था कि भारत के दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम में जमींदार वर्ग नहीं था, जिसके साथ भूमि का बन्दोबस्त किया जा सके। मद्रास प्रांत में अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त जिस समय बंगाल प्रान्त में स्थायी बन्दोबस्त लागू किया जा रहा था उस समय मद्रास प्रान्त अनिश्चिय की […] - [अंग्रेजों का महलवाड़ी बंदोबस्त](https://bharatkaitihas.com/mahalwadi-settlement-of-east-india-company/): राजस्व निर्धारण एवं संग्रहण के क्षेत्र में अनेक प्रयोगों के अनुभव के पश्चात, उत्तर भारत के राज्यों द्वारा कम्पनी को हस्तान्तरित और अँग्रेजों द्वारा विजित आगरा तथा अवध इत्यादि ब्रिटिश क्षेत्रों में अंग्रेजों का महलवाड़ी बंदोबस्त लागू किया गया। इस बन्दोबस्त में भूमि-कर की इकाई किसान का खेत नहीं अपितु ग्राम या महाल होती थी। […] - [कृषि का वाणिज्यीकरण और उसका प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/commercialization-and-impact-of-agriculture-in-india-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में कृषि का वाणिज्यीकरण हुआ। परम्परागत रूप से भारत में कृषि निजी उपभोग के उद्देश्य से होती थी। कृषि उत्पादों को बाजार में नहीं बेचा जाता था अपितु भूराजस्व के रूप में फसल चुकाने तथा निजी उपयोग हेतु घर में रखने के बाद बची हुई फसल का उपयोग वस्तु विनिमय […] - [भारत से धन का निष्कासन](https://bharatkaitihas.com/expulsion-of-money-from-india-during-british-era/): भारत से धन का निष्कासन लगभग एक हजार साल तक होता रहा। आठवीं शताब्दी ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम पहला आक्रांता था जो भारत से धन लूटकर अफगानिस्तान ले गया। अंग्रेज जाति अंतिम शक्ति थी जो भारत से बड़ी मात्रा में धन का निष्कासन करने में सफल रही। भारत पर पाश्चात्य देशों के आक्रमण तो […] - [कुटीर उद्योगों का पतन](https://bharatkaitihas.com/the-decline-of-cottage-industries-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन में भारतीय कुटीर उद्योगों का पतन बड़ी तेजी से हुआ। इस कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा धक्का लगा और ग्रामीण जनसंख्या रोजगार पाने के लिए बड़ी तेजी से नगरों की ओर अग्रसर हुई। अँग्रेजों के आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योग अँग्रेजों के भारत आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित […] - [ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार](https://bharatkaitihas.com/judicial-reforms-in-india-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार का वास्तविक कार्य ईस्ट इण्डिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्ज के काल में आरम्भ हुआ। कानून का शासन तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता इस प्रणाली की विशेषताएँ थीं। मुगल कालीन न्याय व्यवस्था का ह्रास मुगल कालीन न्याय व्यवस्था कुरान के सिद्धांतों पर अवलम्बित थी किंतु उसका दण्ड विधान हिन्दुओं पर […] - [भारत में ईसाई शिक्षा के प्रारम्भिक प्रयास](https://bharatkaitihas.com/early-christian-education-efforts-in-india/): भारत में ईसाई शिक्षा के प्रारम्भिक प्रयास पुर्तगाली मिशनरियों द्वारा सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में आरम्भ हुए। बाद में नीदरलैण्ड, डेनमार्क, फ्रांस एवं इंग्लैण्ड से आए मिशनरी लोगों ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति प्रचीन भारत में शिक्षा प्रणाली का विकास आध्यात्मिक आवश्यकताओं के कारण हुआ था। इस कारण शिक्षा का स्वरूप […] - [भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण](https://bharatkaitihas.com/first-phase-of-development-of-western-education-in-india/): भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण ईस्वी 1813 से 1853 तक चला। ईस्वी 1813 का चार्टर एक्ट भारत में पाश्चात्य शिक्षा के इतिहास निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। 1813 ई. का चार्टर एक्ट भारतीय शिक्षा के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है। क्योंकि अब कम्पनी ने भारतीयों की शिक्षा को अपने कर्त्तव्यों में […] - [वुड घोषणा पत्र तथा पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण (1854-1882 ई.)](https://bharatkaitihas.com/second-phase-of-development-of-western-education-in-india/): वुड घोषणा पत्र ई.1854 में जारी हुआ जिसके पश्चात् अंग्रेज सरकार ने भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण आरम्भ किया। यह चरण ई.1854 से 882 तक चला। 1835 से 1853 ई. तक मैकाले द्वारा निर्धारित नीति पर भारत में पाश्चात्य शिक्षा का विकास हुआ। 18 वर्ष के इस काल में मैकाले की […] - [हण्टर आयोग तथा पाश्चात्य शिक्षा के विकास का तीसरा चरण (1882-1901 ई.)](https://bharatkaitihas.com/third-phase-of-development-of-western-education-in-india/): हण्टर आयोग का उद्देश्य यह जानना था कि 1854 ई. के घोषणा पत्र में उल्लिखित शिक्षा नीति का किस सीमा तक पालन किया गया है तथा इस नीति को सुचारू रूप से कार्यान्वित करने के लिए सरकार को कौनसे कदम उठाने चाहिए! 1854 ई. के वुड घोषणा पत्र तथा 1858 ई. की महारानी विक्टोरिया की […] - [बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा का विकास](https://bharatkaitihas.com/fourth-phase-of-development-of-western-education-in-india/): लॉर्ड कर्जन के समय में बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का चौथा चरण ई.1901 से आरम्भ हुआ जो कि ई.1919 तक चला। इस चरण में विश्वविद्यालय अधिनियम लागू हुआ तथा सैडलर आयोग की रिपोर्ट आई। इसके बाद ई.1919 से 1947 तक पांचवाँ चरण चला। बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा विकास का चतुर्थ चरण […] - [समाज सुधार आन्दोलन के कारण](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-first-part/): समाज सुधार आन्दोलन के कारण स्वयं हिन्दू समाज में आ रही शिथिलता में ही मौजूद थे। उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी ईस्वी में अंग्रेजों के द्वारा थोपे जा रहे सांस्कृतिक संक्रमण से लड़ने के लिए भी समाज सुधार आंदोलनों का चलना आवश्यक हो गया था। भारत में धर्म सुधार एवं समाज सुधार आंदोलन के कारण मध्यकाल […] - [ब्रह्म समाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-second-part/): ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय ईसाई धर्म की कई विशेषताओं के प्रशंसक थे किंतु उन्होंने ईसा के देवत्व को उसी प्रकार अस्वीकार किया जिस प्रकार वे हिन्दू अवतारवाद को अस्वीकार करते थे। उग्र एवं कट्टर समाज सुधारक उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारकों में ब्रह्म समाज और प्रार्थना समाज जैसे उग्र सुधारवादी पश्चिमी सभ्यता […] - [भारतीय ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-third-part/): केशवचंद्र सेन ने ईस्वी 1866 में भारतीय ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ईसाई धर्म से प्रभावित होने के कारण भारतीय ब्रह्म समाज ईसा मसीह को पूज्य मानने लगा। युवा बंगाल आन्दोलन  जनवरी 1817 में कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना, भारत के धर्म और समाज सुधार आन्दोलन के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। सार्वजनिक जीवन […] - [आर्य समाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-fourth-part/): महर्षि दयानंद ने हिन्दू धर्म, सभ्यता और भाषा के प्रचार के लिए 10 अप्रेल 1875 को बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश नामक महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखा। स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज यद्यपि ब्रह्म समाज ने धर्म एवं समाज सुधार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किया तथापि ब्रह्म समाज ने पाश्चात्य […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी के सुधार कार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी में भारत में थियोसॉफिकल सोसायटी के सुधार कार्य बहुत व्यापक नहीं थे किंतु इन्होंने भारतीय धर्म की महत्ता को पुनर्स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। थियोसॉफिकल सोसायटी थियोसॉफिकल सोसायटी भारत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आन्दोलन था जिसने देश के धार्मिक तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। थियोसॉफी का अर्थ होता है- ईश्वर […] - [रामकृष्ण मिशन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-sixth-part/): रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1 मई 1897 को स्वामी विवेकानन्द ने की। वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय कलकत्ता के निकट बेलुर में है। रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में धर्म के नाम से चलाए जा रहे पाखण्ड को नष्ट करके […] - [मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-seventh-part/): जिस समय भारत में हिन्दू धर्म के भीतर सुधार आंदोलन आरम्भ हुए, उस समय मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन चलाए जाने की आवश्यकता अनुभव हुई। मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन 19वीं शताब्दी में भारत के मुसलमानों में भी सुधार आन्दोलन आरम्भ हुए। मुस्लिम समाज इस देश में आने से पहले ही दो प्रमुख वर्गों में विभाजित था- […] - [सोने का दिल लोहे के हाथ ! (117)](https://bharatkaitihas.com/heart-of-gold-with-iron-hands/): उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी गांधीजी की इच्छा के लिए कुर्बान कर दी। वे चाहते थे तो प्रधानमंत्री बन सकते थे किंतु उन्होंने देश की स्वतंत्रता के रथ को तेजी से आगे बढ़ने देने के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी को वैसे ही त्याग दिया जैसे सुभाषचंद्र बोस ने गांधीजी की इच्छापूर्ति के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी त्याग दी थी। - [औरंगजेब द्वारा ध्वस्त भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-demolished-during-mughal-period-aurangzeb/): औरंगजेब एक क्रूर, धर्मान्ध और हत्यारा शासक ही नहीं था, अपितु वह कला और संस्कृति का भी बहुत बड़ा शत्रु था। औरंगजेब द्वारा ध्वस्त भवन अब हमें देखने को नहीं मिल सकते किंतु उनकी सूची बहुत लम्बी है। औरंगजेब के काल में मंदिरों का विध्वंस औरंगजेब का मानना था कि मुसलमानों के लिए यह उचित […] - [विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-eighth-part/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी के भारत में हिन्दू समाज तथा मुस्लिम समाज की तरह अन्य समुदायों में भी स्थानीय स्तर पर विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन चले। विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन भारत में ऐसे कई धार्मिक-सामाजिक सुधार आन्दोलन हुए जिनके कार्य तथा उद्देश्य बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित थे। पारसियों ने अपने धर्म और समाज सुधार के […] - [सुधार आंदोलनों के परिणाम](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-ninth-part/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी में चले सुधार आंदोलनों के परिणाम स्वरूप भारत की जनता में जागृति आई तथा उसे अपनी दुर्दशा का भान हुआ। इस कारण आजादी की लड़ाई में भी तेजी आ गई। सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के परिणाम 19वीं शताब्दी के सुधार आन्दोलनों के परिणाम स्वरूप भारत पश्चिम के आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं विचारों […] - [अठारहवीं सदी में प्रेस एवं पत्रकारिता का विकास](https://bharatkaitihas.com/development-of-press-and-journalism-in-india-in-eighteenth-century/): अठारहवीं सदी में प्रेस एवं पत्रकारिता का विकास ब्रिटिश शासन काल की एक महत्वपूर्ण घटना थी। प्रेस एवं पत्रकारिता के माध्यम से भारत के लोगों को दुनिया भर में आ रहे परिवर्तनों की जानकारी मिलने लगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मानव सभ्यता के विकास के साथ समाचार पत्रों के स्वरूप में भी परिवर्तन आता रहा है। अशोक […] - [उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता के इतिहास का दूसरा अध्याय अँग्रेजी समाचार पत्रों के साथ-साथ देशी भाषा में भी समाचार पत्रों का प्रकाशन से आरम्भ हुआ। उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता के भारतीय प्रयास 1818 ई. तक देशी भाषा में प्रकाशित होने वाले किसी भी समाचार पत्र का उल्लेख नहीं मिलता। इस काल से पहले केवल छुटपुट […] - [1857 के बाद पत्रकारिता](https://bharatkaitihas.com/journalism-in-india-after-eighteen-fifty-seven/): 1857 के बाद पत्रकारिता कई चरणों से गुजरी। अठारह सौ सत्तावन से पहले की पत्रकारिता और अठारह सौ सत्तावन के बाद की पत्रकारिता में काफी अंतर आ गया। उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशकों में पत्रकारिता ने एक बार फिर मोड़ लिया। ब्रिटिश काल में पत्रकारिता के उद्देश्य 1853 ई. में हिन्दू पैट्रियट के सम्पादक हरिशचन्द्र […] - [उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/major-nineteenth-century-peasant-movements-in-india/): उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्चाचारों एवं शोषण के विरुद्ध जनमन की अभिव्यक्ति थे। उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन 1855 ई. से 1885 तक की अवधि में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक विद्रोह हुए। इनमें से कुछ प्रमुख आंदोलन इस प्रकार से हैं- (1.) बंगाल के […] - [बीसवीं सदी के किसान आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2/): ब्रिटिश शासन काल में बीसवीं सदी के किसान आंदोलन आरम्भ हुए। किसान आंदोलनों की एक लम्बी शृंखला थी जो कि सम्पूर्ण राष्ट्र में रह-रह कर प्रस्फुटित होती रही। अंग्रेज, देशी राजा एवं जमींदार मिलकर भी भारत में किसान आन्दोलन की इस शृंखला को कुचल नहीं पाए। कांग्रेस के नेतृत्व में बीसवीं सदी के किसान आंदोलन […] - [किसान आन्दोलनों के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-peasant-movement-in-the-nineteenth-century/): उन्नीसवीं सदी के भारत में किसान आन्दोलनों के कारण बहुत स्पष्ट थे। ये आंदोलन अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के विरोध में उठ खड़े होते थे, साथ ही किसानों की आर्थिक दुर्दशा की भी मुखर अभिव्यक्ति थे। भारत में किसानों की दुर्दशा का आरम्भ मुस्लिम आक्रांताओं के भारत आक्रमणों के समय हुआ। राजस्व वसूली […] - [अंग्रेजी शासन में विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/revolts-in-the-first-century-of-british-rule/): अंग्रेजी शासन में विद्रोह अठारहवीं शताब्दी ईस्वी से ही आरम्भ हो गए थे। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोहों की शृंखला तब तक चलती रही जब तक कि अंग्रेज भारत को छोड़कर चले नहीं गए। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने ई.1757 के प्लासी युद्ध के बाद भारतीय क्षेत्रों पर शासन करने के अधिकार प्राप्त करने आरम्भ किए। […] - [ब्रिटिश काल में आदिवासी विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/tribal-revolts-in-british-period/): ब्रिटिश काल में आदिवासी विद्रोह का एक लम्बा इतिहास है। इसका मुख्य कारण यह था कि आदिवासी लोग अपनी संस्कृति में किसी भी बाहरी मनुष्य का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते थे। अंग्रेजों को आदिवासियों के विद्रोह कुचलने में काफी शक्ति लगानी पड़ती थी। संसार भर में आदिवासी समूह दुर्गम पहाड़ों और जंगलों में निवास करते […] - [दलित आन्दोलनों का उदय](https://bharatkaitihas.com/the-rise-of-dalit-movements-in-india/): ब्रिटिश शासन काल में दलित आन्दोलनों का उदय हिन्दू धर्म के भीतर की कमजोरियों के विरोध में हुआ था। पश्चिमी शिक्षा के आलोक में दलितों को अपनी स्थिति में सुधार लाने के लिए नवीन प्रेरणा प्राप्त हुई। हिन्दू समाज में उत्तर वैदिक काल में जिस वर्ण व्यवस्था का उद्भव हुआ, उस वर्ण व्यवस्था ने कालांतर […] - [सत्तावन की क्रांति के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-revolution-of-eighteen-fifty-seven/): अठारह सौ सत्तावन की क्रांति के कारण बहुत स्पष्ट नहीं थे किंतु इतना निश्चित है कि अंग्रेजी राज के विरुद्ध देश के विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों में अलग-अलग कारणों से असंतोष उत्पन्न हो गया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ई.1757 में प्लासी का युद्ध जीतने के बाद से एक-एक करके भारतीय राज्यों को हड़पती जा रही […] - [अठारह सौ सत्तावन की क्रांति की घटनाएँ एवं प्रसार](https://bharatkaitihas.com/events-and-spread-of-revolution-of-eighteen-fifty-seven/): कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अठारह सौ सत्तावन की क्रांति एक सोची-समझी एवं पूर्व नियोजित योजना थी। इसका नेतृत्व अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोगों ने किया। इस संघर्ष में धार्मिक नेताओं, पूर्व राजाओं, जागीरदारों, कृषकों, कारीगरों, सैनिकों और सामामान्य जनता ने डटकर मुकाबला किया। अठारह सौ सत्तावन की क्रांति की योजना 1852 ई. में […] - [सत्तावन की क्रांति का दमन](https://bharatkaitihas.com/suppression-of-eighteen-fifty-seven-revolution-by-british/): सत्तावन की क्रांति का दमन दिल्ली से आरम्भ हुआ। हेनरी बरनार्ड को सेना देकर दिल्ली की ओर भेजा गया। क्रांतिकारी सैनिकों ने अँग्रेजी सेना को पीछे हटा दिया। दिल्ली में एकत्रित भारतीय सैनिकों में जोश तो था किंतु उनका सफल संचालन करने वाला कोई अनुभवी सेनापति नहीं था। अतः वे विभिन्न दिशाओं से आने वाली […] - [1857 की क्रांति की असफलता के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-failure-of-eighteen-fifty-revolution/): 1857 की क्रांति की असफलता के कई कारण थे। सबसे बड़ा कारण यह था कि क्रांति की सफलता के बाद देश का भविष्य क्या होगा, इसका कोई स्वरूप निश्चित नहीं था। 1857 की क्रांति की असफलता के कारण अँग्रेजों को भारत से बाहर निकालने के लिए 1857 में जो क्रांति हुई, उसकी असफलता के कई […] - [बंगाल के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a0%e0%a4%a8/): ब्रिटिश शासनकाल में बंगाल के राजनीतिक संगठन बंगाली समाज में राजनीतिक चेतना में वृद्धि करने में अपना अमूल्य योगदान देने में सफल रहे। बंगाल प्रेसीडेंसी में राजनीतिक संगठनों का उदय उन्नीसवीं सदी का भारत हर तरफ से द्वंद्वों एवं संघर्षों में फंसा हुआ था। देश किसानों के आंदोलन, सामाजिक सुधार आंदोलन, आदिवासियों के आंदोलन, सन्यासियों […] - [महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/rise-of-political-organizations-in-india-second-part/): महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन देश भर में खड़े हो रहे राजनीतिक संगठनों की ही एक शृंखला थे। इन संगठनों ने न केवल अंग्रेज अधिकारियों के अत्याचारों का विरोध किया अपितु बम्बई प्रेसीडेंसी की जनता में राजनीतिक चेतना भी उत्पन्न की। महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन बॉम्बे एसोसिएशन बम्बई प्रेसीडेन्सी में राजनीतिक गतिविधियाँ मराठी मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवी के […] - [मद्रास के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/rise-of-political-organizations-in-india-third-part/): मद्रास के राजनीतिक संगठन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा व्यापारियों एवं जमींदारों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए आरम्भ हुए। बाद में इन्होंने राजनीतिक मंचों का स्वरूप धारण कर लिया। मद्रास के राजनीतिक संगठन मद्रास नेटिव एसोसिएशन 26 फरवरी 1852 को मद्रास के व्यापारियों ने कलकत्ता की ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन की एक शाखा मद्रास में […] - [राजनीतिक जनजागरण के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-for-political-public-awareness-in-india/): ब्रिटिश शासनकाल में भारत में हुए राजनीतिक जनजागरण के कारण बहुत विस्तृत थे। उस काल में चारों ओर से नवीन सूचनाओं का आगमन हो रहा था। यूरोप में पनप रहे राष्ट्रवादी विचारों एवं यूरोप में हुई वैज्ञानिक शोधों ने लोगों को नए तरीके से सोचने का मार्ग दिखाया जिसका असर भारत पर भी पड़ा। भारत […] - [कांग्रेस की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-indian-national-congress/): कांग्रेस की स्थापना से पहले कलकत्ता, मद्रास तथा बम्बई प्रेसीडेंसी में कई राजनीतिक संस्थाओं का उदय हुआ किंतु ये संस्थाएं स्थानीय हितों के लिये काम करती रहीं। सरकार के भय के कारण इन संस्थाओं के सदस्य, इन संस्थाओं को छोड़ जाते थे तथा इस कारण कई संस्थाएं दम तोड़ चुकी थीं। इल्बर्ट बिल के बाद […] - [कांग्रेस का उदारवादी नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/moderate-leadership-of-moderate-congress/): ईस्वी 1885 से ईस्वी 1919 तक कांग्रेस का उदारवादी नेतृत्व कांग्रेस पर हावी रहा। इस काल के नेताओं ने अंग्रेज शासकों से अनुनय-विनय करके अपने अधिकारों में वृद्धि के लिए प्रयत्न किए। भारत की आजादी के लिये संघर्ष अँग्रेजी राज्य की स्थापना के साथ ही आरम्भ हो गया था। 18वीं शती में प्रेस के उदय […] - [उदारवादी नेतृत्व की सफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/moderate-leadership-of-moderate-congress-part-two/): अनेक इतिहासकार नरमपंथी कांग्रेस के उदारवादी नेताओं को राजनीतिक याचक बताकर उनकी उपेक्षा करते हैं किंतु साम्रज्यशाही के उस काल में उदारवादी नेतृत्व की सफलताएँ असंदिग्ध रूप से उल्लेखनीय थीं। उदारवादी नेताओं की रणनीति कांग्रेस के उदारवादी नेताओं की रणनीति बहुत सरल, स्पष्ट और विनम्र संघर्ष की थी। उन्होंने सरकार के विरुद्ध कटु भाषा का […] - [कांग्रेस का उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-one/): कांग्रेस का उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व उदारवादी नेताओं की रीति-नीति की प्रतिक्रया के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था। उग्रराष्ट्रवादी नेता अंग्रेजों के समक्ष अनुनय-विनय करने को उचित नहीं मानते थे। भारत में उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा, कांग्रेस के जन्म से बहुत पहले जन्म ले चुकी थी। 1857 ई. की क्रांति उसी की अभिव्यक्ति थी। पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन […] - [उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण कांग्रेस की स्थापना के बाद उदारवादी नेताओं द्वारा अपनाई गई रीति-नीति में छिपे हैं। वस्तुतः उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के बाद ही कांग्रेस सही अर्थों में एक राजनीतिक दल का स्वरूप ले सकी। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण कांग्रेस में उग्रवादी नेतृत्व के उदय के कारणों को मोटे […] - [उग्रराष्ट्रवादियों द्वारा बंग-भंग का विरोध](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-two/): जब ईस्वी 1905 में लॉर्ड कर्जन ने हिन्दू बंगाल और मुस्लिम बंगाल बनाने के उद्देश्य से बंगाल का विभाजन किया तब उग्रराष्ट्रवादियों द्वारा बंग-भंग का विरोध किया गया। लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन बंगाल एक विशाल प्रान्त था। इसमें बंगाल, असम, बिहार, उड़ीसा तथा छोटा नागपुर तक विस्तृत भू-भाग सम्मिलित था। इतने बड़े प्रांत […] - [सूरत की फूट](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%82%e0%a4%9f/): उदारवादी नेताओं एवं उग्रराष्ट्रवादी नेताओं के बीच ई.1907 में हुए वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस दो धड़ों में विभक्त हो गई। इन्हें नरमपंथी और गरमपंथी कांग्रेस कहा जाता था। इस घटना को सूरत की फूट कहते हैं। उदारवादियों और उग्रवादियों के अलग-अलग रास्ते बंगाल विभाजन के बाद कांग्रेस में, उदारवादियों और उग्रवादियों का अंतर्विरोध और […] - [उग्रवादी नेतृत्व की कार्यशैली](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-three/): उग्रवादी नेतृत्व की कार्यशैली कांग्रेस के उदारवादी नेताओं से बिल्कुल अलग थी। उग्रवादी नेता अंग्रेज सरकार के समक्ष अनुनय-विनय की शब्दाली का प्रयोग करने के स्थान पर सरकार का प्रत्यक्ष विरोध करने के समर्थन में थे। उग्रवादी गुट का प्रादुर्भाव, उदारवादी नेताओं की कार्यशैली के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। अतः स्वाभाविक था कि […] - [उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d-2/): उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन करते समय हमें उनकी सफलताओं एवं विफलताओं दोनों पर विचार करना चाहिए। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को उदारवादी नेतृत्व के दौर से आगे बढ़ाया जिसके कारण कांग्रेस को जनता का प्रबल समर्थन प्राप्त हो सका। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन उग्रवादियों की सफलताएँ उग्रवादी आन्दोलन का प्रमुख क्षेत्र बंगाल, […] - [भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन का उदय](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-one/): यदि यह कहा जाए कि भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन का उदय कांग्रेस के उग्र राष्ट्रवादी नेताओं की रीतियों-नीतियों से प्रेरित था, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कांग्रेस के उग्रवादी नेता उग्र आंदोलन के समर्थक थे जिनमें असहयोग, प्रदर्शन, भाषण, बहिष्कार आदि उग्र उपायों का सहारा लिया जाता था। वे किसी भी स्थिति में हिंसक […] - [बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-two/): बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ बंगाल में सशस्त्र क्रांति का मंत्र समाचार पत्रों के माध्यम से प्रसारित हुआ। 1906 ई. में वारीन्द्र कुमार घोष  और भूपेन्द्र दत्त  ने मिलकर युगान्तर समाचार पत्र आरम्भ किया। इसका मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारी भावना का प्रचार करना था। शीघ्र ही यह पत्र इतना लोकप्रिय हो गया कि इसकी 50,000 प्रतियां प्रतिदिन […] - [पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-three/): पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियाँ 1904 ई. में जोतीन्द्र मोहन चटर्जी और कुछ नौजवानों ने मिलकर एक गुप्त संगठन बनाया। इस संगठन का मुख्यालय रुड़की में स्थापित किया गया। यहीं पर लाला हरदयाल, अजीतसिंह और सूफी अम्बा प्रसाद भी इस संगठन से जुड़े। इससे पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियों में हलचल आई। पंजाब के क्रांतिकारी, लाला हरदयाल […] - [उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-four/): जिस समय पंजाब, महाराष्ट्र एवं बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधयाँ चल रही थीं, उस समय उत्तर उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ अपने चरम पर थीं। उत्तर भारत के दिल्ली, संयुक्त प्रदेश, आगरा एवं अवध, बिहार तथा उड़ीसा आदि प्रांतों के क्रांतिकारी भी अंग्रेज सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ […] - [महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be/): महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ ईस्वी 1857 की सशस्त्र क्रांति के विफल हो जाने के बाद से आरम्भ होने लगी थीं। महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाों को चरम पर पहुंचाने का श्रेय विनायक दामोदर सावरकर को जाता है। महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ महाराष्ट्र अँग्रेजों के आगमन के समय से ही राजनीतिक हलचलों का केन्द्र बना हुआ था। […] - [अन्य प्रांतों में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-six/): पेशावर में क्रांतिकारी गतिविधियाँ पेशावर में पुलिस ने एक जुलूस पर गोली चलाई जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों को नियंत्रित करने के लिये सेना बुलाई गई। इस सेना में पंजाबियों की प्रधानता थी तथा क्रांतिकारियों के गुप्त संगठन भी सेना के भीतर सक्रिय थे। ऐसी स्थिति में ब्रिटिश सरकार ने 18वीं रॉयल गढ़वाली […] - [विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-five/): विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन की अलख जगाने वालों में श्यामजी कृष्ण वर्मा, सरदारसिंहजी रेवा भाई राना, श्रीमती भीखाजी रुस्तम कामा तथा वीर विनायक दामोदर सावरकर प्रमुख थे। विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों ने अन्य देशों के क्रांतिकारियों से सम्पर्क स्थापित करके उनसे भारत की स्वाधीनता के लिये समर्थन, सहायता एवं हथियार प्राप्त किये। विदेशों […] - [क्रांतिकारी आंदोलन का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-seven/): क्रांतिकारी आंदोलन का मूल्यांकन करते समय हमें क्रांतिकारी आंदोलन की सफलाताओं एवं असफलताओं पर विचार करने के साथ-साथ राष्ट्र को दिए गए योगदान पर भी चर्चा करनी होगी। क्रांतिकारी आन्दोलन की असफलता के कारण क्रांतिकारी आंदोलन भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त करवाने के उद्देश्य से आरम्भ किया गया था परन्तु यह आंदोलन अँग्रेजों से […] - [गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-one/): गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन गुजरात के पोरबन्दर, राजकोट और बांकानेर राज्यों में बीता जहाँ गांधीजी के पिता करमचंद दीवान रहे। गांधी के जीवन पर उनकी माता पुतली बाई का काफी प्रभाव पड़ा। बीसवीं सदी में भारत की राजनीति में गांधी का पदार्पण, बीसवीं शताब्दी की प्रमुख घटनाओं में से एक है। उन्होंने कांग्रेस के चरित्र […] - [असहयोग आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-two/): कांग्रेस अधिवेशन में असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिये जाने के बाद रवीन्द्रनाथ ठाकुर आदि ख्याति प्राप्त लोगों ने तथा जन साधारण ने सरकारी उपाधियाँ लौटा दीं। असहयोग आन्दोलन से पहले की घटनाएँ प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार को पूरा सहयोग दिया था और गोरी सरकार ने युद्ध समाप्ति के […] - [असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-three/): असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति में गांधीजी ने कुछ और प्रयोग किए किंतु अहयोग आंदोलन की तरह वे सभी प्रयोग निष्फल सिद्ध हुए। गांधीजी ने जनता से जो वायदे किए, उन्हें वे पूरा नहीं कर सके। असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति भारत में 1920 ई. में असहयोग आंदोलन आरम्भ हुआ जो लगभग विफल […] - [सविनय अवज्ञा आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-four/): सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित था। इस आंदोलन के माध्यम से गांधीजी ने भारतीयों से आह्वान किया कि वे ब्रिटिश सरकार के आदेशों का पालन नहीं करें ताकि अंग्रेज सरकार भारतीयों को शासन के अधिकार सौंप दें। सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण गांधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा आरम्भ किये […] - [गोलमेज सम्मेलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-five/): ब्रिटिश सरकार ने भारत के ब्रिटिश प्रांतों एवं देशी राज्यों को मिलाकर एक संघ बनाने के उद्देश्य से तीन गोलमेज सम्मेलन किए किंतु गोलमेज सम्मेलनों में गांधीजी की कोई विशेष भूमिका नहीं रही। प्रथम गोलमेज सम्मेलन लॉर्ड इरविन की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में ई.1930 में ब्रिटिश सरकार ने लन्दन में पहला गोलमेज सम्मेलन बुलाया। 12 […] - [द्वितीय विश्वयुद्ध](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-six/): ईस्वी 1939 से 1945 तक की अवधि में द्वितीय विश्वयुद्ध लड़ा गया। चूंकि उस काल में भारत ब्रिटिश साम्राज्य का अंग था, इसलिए भारत की सेनाओं ने भी इस युद्ध में भाग लिया। गांधीजी के आह्वान पर भारतीय युवक ब़ड़ी संख्या में सेना में भर्ती होकर द्वितीय विश्वयुद्ध के मोर्चों पर लड़ने के लिए गए। […] - [भारत छोड़ो आन्दोलन (1942 ई.)](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-seven/): क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद कांग्रेस ने भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ किया। चूंकि यह आंदोलन अगस्त माह में आरम्भ हुआ था, इसलिये इस आन्दोलन को अगस्त क्रांति भी कहा जाता है। भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण कांग्रेस द्वारा ईस्वी 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ करने के कई कारण थे- (1.) क्रिप्स मिशन की […] - [कांग्रेस समाजवादी दल](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-one/): कांग्रेस समाजवादी दल ने 21 अक्टूबर 1934 को बम्बई में आयोजित प्रथम अधिवेशन में पार्टी का लक्ष्य, भारत के लिए पूर्ण स्वाधीनता की प्राप्ति और समाजवादी समाज की स्थापना करना घोषित किया गया। कांग्रेस के युवा नेताओं में गांधीजी की नीतियों के विरुद्ध निरंतर असंतोष सुलग रहा था जो हर आंदोलन के बाद बढ़ जाता […] - [भारत में साम्यवाद का उदय एवं विकास](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-two/): भारत में साम्यवाद का उदय रूस की समाजवादी क्रान्ति से प्रेरित थी। साम्यवाद से प्रेरित युवकों को लगता था कि जिस प्रकार रूस में जार का शासन उखाड़ कर फैंक दिया गया है, उसी प्रकार भारत में साम्यवाद के बल पर साम्राज्यवादी अंग्रेजों का शासन समाप्त किया जा सकता है। भारत में साम्यवाद का उदय […] - [भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-three/): भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना का उद्देश्य, सम्पूर्ण स्वराज्य को प्राप्त करना और एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जिसमें उत्पादन और धन के वितरण पर सामूहिक स्वामित्व हो। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कानपुर षड़यन्त्र केस के कुछ दिनों बाद ही संयुक्त प्रांत में सक्रिय साम्यवादी समूह के नेता सत्यभक्त ने 1 सितम्बर 1924 […] - [फॉरवर्ड ब्लॉक एवं अन्य कम्युनिस्ट पार्टियाँ](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-four/): नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने ई.1939 में कांग्रेस के अन्दर ही फॉरवर्ड ब्लॉक नामक प्रगतिशील पार्टी की स्थापना की जिसके झण्डे के नीचे समस्त वामपंथी तत्त्व एकत्र हो सकें। कांग्रेस के दक्षिण पंथी नेताओं ने इस पार्टी की स्थापना का विरोध नहीं किया। फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की पृष्ठभूमि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का झुकाव आरम्भ से […] - [श्रमिक वर्ग में असंतोष](https://bharatkaitihas.com/labor-movements-in-india-part-one/): औद्योगिक श्रमिक वर्ग में असंतोष ब्रिटिश साम्राज्यवादी शासकों द्वारा लम्बे समय तक किए गए शोषण के विरोध में उत्पन्न हुआ था। श्रमिक वर्ग में असंतोष के कारण हड़तालों की शुरुआत हुई। भारत में 1835 ई. तक चाय बागान श्रमिक अस्तित्व में आ चुके थे फिर भी यह माना जा सकता है कि भारत में औद्योगिक […] - [ट्रेड यूनियनवाद का उदय](https://bharatkaitihas.com/labor-movement-in-india-part-two/): जब भारत में औद्योगिकीकरण के कारण श्रमिक वर्ग की संख्या में वृद्वि हुई और श्रमिक असंतोष बढ़ा, तब ट्रेड यूनियनवाद का उदय हुआ। ट्रेड यूनियनवाद का उदय बीसवीं सदी के दूसरे दशक में राष्ट्रव्यापी हड़तालों की पृष्ठभूमि में भारत का ट्रेड यूनियन आन्दोलन उत्पन्न हुआ। लगभग समस्त बड़े उद्योगों तथा औद्योगिक केन्द्रों में अधिकतर ट्रेड […] - [भारत सरकार अधिनियम 1919](https://bharatkaitihas.com/government-of-india-act-niniteen-hundred-ninteen/): मांटेग्यू-चैम्सफोर्ड रिपोर्ट के आधार पर 1919 ई. में ब्रिटिश संसद में एक विधेयक पारित किया गया। इसे मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम अथवा भारत सरकार अधिनियम 1919 कहते हैं। मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट से असंतोष  भारत की गोरी सरकार का 1909 ई. का अधिनियम मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट कहलाता है। यह कांग्रेस की 1907 ई. की सूरत फूट का […] - [नशेड़ी अंग्रेज मजिस्ट्रेट से निर्दोष सुनार के पक्ष में फैसला लिखवाया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-got-verdict-in-favor-of-innocent-goldsmith-from-drunk-british-magistrate/): सुनार पर आरोप लगा कि वह व्यभिचार की नीयत से एक औरत के घर में घुसा था। झूठे गवाहों के बल पर सुनार को सजा होना निश्चित था। सुनार ने वल्लभभाई को अपना वकील बनाया। वादी पक्ष के झूठे गवाह इतने मजबूत थे कि उनकी बात काट पाना संभव नहीं था। - [सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट को वल्लभभाई के आगे जिद्द छोड़नी पड़ी](https://bharatkaitihas.com/crazy-english-magistrate-had-to-give-up-his-stubbornness-in-front-of-vallabhbhai/): यद्यपि अंग्रेजी न्याय व्यवस्था साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर चलती थी किंतु बहुत से सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट अपनी सनक के कारण साधारण मुकदमों में भी तरह-तरह के निर्णय दिया करते थे। कुछ सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट मुकदमों की सुनवाई के लिए भी अजीब-अजीब से तरीके अपनाया करते थे। वे वकीलों, गवाहों, अभियुक्तों एवं वादियों को […] - [विट्ठलभाई पटेल को बैरिस्ट्री पढ़ने लंदन भेज दिया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-sent-vitthalbhai-to-london-in-his-place-to-study-baristry/): यह संसार में अपनी तरह का एक ही प्रकरण है जिसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल को अपनी जगह बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने लंदन भेज दिया। वल्लभभाई बोरसद के न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे थे किंतु उनकी इच्छा थी कि वे इंग्लैण्ड से बैरिस्ट्री पढ़ कर आयें। उन्होंने इंग्लैण्ड जाने […] - [वल्लभभाई की उदारता](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-used-to-give-his-thing-to-others/): व्यक्तित्व की विराटता और स्वभाव की उदारता यद्यपि एक दूसरे के पूरक हैं किंतु सरदार पटेल में ये दोनों गुण चरम पर मौजूद थे जिनका लाभ न केवल उन्हें या उनके परिवार को अपितु सम्पूर्ण मानवता को भी मिला। - [सरदार पटेल में कर्त्तव्यनिष्ठा - कोर्ट में बहस करते रहे वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-continued-to-argue-in-court-even-after-receiving-telegram-of-his-wifes-death/): 11 जनवरी 1909 को अचानक झबेरबा का निधन हो गया। वल्लभभाई को तार द्वारा इस दुःखद घटना की सूचना दी गई। - [बैरिस्टर बनने का संकल्प](https://bharatkaitihas.com/wifes-death-could-not-change-the-idea-to-become-barrister/): बच्चों को पालने की विकट समस्या आ खड़ी हुई। इस पर भी वल्लभभाई ने लंदन जाकर बैरिस्टरी पढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा। - [रोमन कानून याद कर लिया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-memorized-roman-law-during-his-journey/): रोमन कानून बहुत लम्बा और जटिल तो था ही, साथ ही भारतीय नैसर्गिक न्याय चिंतन से बिलकुल उलट था। इस कारण रोमन कानून को समझना और उसे याद रख पाना एक दुष्कर कार्य था। - [लंदन में वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/all-day-either-walking-or-reading-books-vallabhbhai/): सरदार पटेल भारत में अपनी जमी-जमाई वकालात छोड़कर बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने इंग्लैण्ड गए थे। लंदन में वल्लभभाई अत्यंत साधारण जिंदगी जीते थे। इस समय उनकी आय का कोई भी स्रोत नहीं था। जब उनके अग्रज विठ्ठलभाई बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने लंदन गए थे तब सरदार ने उनकी पढ़ाई तथा उनके परिवार का खर्चा उठाया […] - [लंदन में धूम](https://bharatkaitihas.com/boy-from-karamsad-village-made-a-splash-in-london/): शेडर्ज नामक एक अंग्रेज किसी समय गुजरात में कमिश्नर रहा था, उसने जब वल्लभभाई के चित्र अखबारों में देखे तो वह स्वयं चलकर वल्लभभाई के पास पहुंचा और बधाई देने के साथ-साथ अपने घर पर भोजन करने का निमंत्रण देकर गया। - [व्यावसायिक सफलता के गुर सीख लिये वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-learned-all-tricks-of-professional-success/): वल्लभभाई ने अंग्रेजों के रहने, खाने, चलने, बोलने तथा परस्पर व्यवहार करने के तरीकों को भी गहराई से परखा। - [जज नहीं बने वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/instead-of-becoming-a-judge-in-high-court-vallabhbhai-decided-to-practice-in-ahmedabad/): वल्लभभाई ने विनम्रतापूर्वक इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे स्वयं अपनी प्रैक्टिस करेंगे। - [मिस्टर फॉक्स के छक्के छुड़ा दिये वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-defeated-fox/): अहमदाबाद का एक कुख्यात अंग्रेज मजिस्ट्रेट मिस्टर फॉक्स दिन में कोर्ट लगाने के स्थान पर रात्रि में 9 बजे से 12 बजे तक कोर्ट लगाता था। - [आत्मविश्वास से परिपूर्ण वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-became-invincible-in-the-world-of-law/): आत्मविश्वास से परिपूर्ण वल्लभभाई का यह व्यक्तित्व स्वतंत्रता संग्राम के समय पूरी तरह तो नहीं बदला, हाँ उन्होंने अंग्रेजी हैट-टाई और सूट-बूट छोड़कर देशी झब्बा और धोती धारण कर ली। - [मुवक्किल की जमानत](https://bharatkaitihas.com/on-two-questions-of-vallabhbhai-magistrate-granted-bail-to-his-client/): वल्लभभाई ने दूसरा प्रश्न पूछा कि यदि ऐसा नहीं है तो उनके मुवक्किल को जमानत क्यों नहीं मिली जबकि उसके विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण भी नहीं है ? - [ब्रिज के खिलाड़ी सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/at-request-of-mrs-wadia-patel-freed-her-husband-from-condition-at-behest-of-mrs-wadia/): जब तीसरे दिन का खेल चल रहा था तब वाडिया की पत्नी क्लब में आईं और उन्होंने वल्लभभाई से अनुरोध किया कि वे खेल को बंद कर दें। - [किसान की गुदड़ी के लाल थे वल्लभभाई!](https://bharatkaitihas.com/gandhi-was-son-of-minister-but-vallabhbhai-grew-up-in-farmer-house/): जहाँ दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेज जाति ने गांधी का इतना अपमान किया था कि वे तिलमिलाकर भारत लौट आये थे, वहीं भारत के गोरे मजिस्ट्रेट, वल्लभभाई का सामना करने से घबराते थे। - [प्लेग रोगियों की सेवा करते-करते स्वयं भी प्लेग की चपेट में आ गये पटेल](https://bharatkaitihas.com/while-serving-plague-patients-patel-himself-came-in-grip-of-plague/): वल्लभ भाई ने कुछ लोगों को अपने साथ लेकर एक समिति बनाई जो लोगों को इस महामारी से छुटकारा दिलाने की दिशा में काम करने लगी। - [चम्पारन आंदोलन में गांधीजी की ओर ध्यान गया पटेल का!](https://bharatkaitihas.com/after-champaran-movement-patel-got-attention-of-gandhi/): सरदार पटेल व्यावहारिक मनुष्य थे। उन्हें अति आदर्शवाद और अति काल्पनिकता की बातें अच्छी नहीं लगती थीं। इस कारण उन्हें मोहनदास कर्मचंद गांधी के भाषणों से अरुचि थी। - [मोहनदास गांधी से भेंट](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-patel-and-mohandas-gandhi-meet-first-time-in-godhra/): उस समय तक देश में गांधी, नेहरू और पटेल को बहुत कम लोग जानते थे जबकि बाल गंगाधर तिलक के भाषणों की धूम मची हुई थी। लोकमान्य तिलक को गुजराती नहीं आती थी इसलिये वे हिन्दी में बोले और शापर्डे ने दुभाषिया बनकर उनके भाषण का गुजराती में अनुवाद सुनाया। - [गुजरात में बेगार](https://bharatkaitihas.com/byefforts-of-vallabhbhai-forced-labor-banned-in-gujarat/): वल्लभभाई ने अपनी पूर्व चेतावनी के अनुसार, बेगारी न देने के आह्वान के पर्चे छपवाकर गांवों में बंटवा दिये। इसके बाद जब सरकारी अधिकारी गांवों में दौरे पर गये तो लोगों ने बेगार देने से मना कर दिया तथा अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों से बेगार लेने का चलन बंद हो गया। - [खेड़ा आंदोलन में अंग्रेजी वेशभूषा त्याग दी वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-renounced-english-costumes-in-kheda-movement/): सरदार पटेल तथा मोहनदास गांधी ने खेड़ा क्षेत्र के किसानों का आह्वान किया कि वे सरकार को लगान न दें। इस पर सरकार ने किसानों पर अत्याचार किये तथा उनकी जमीनें जब्त कर लीं। - [सत्याग्रह का मार्ग](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-proved-that-path-of-satyagraha-is-effective/): सरदार पटेल ने सिद्ध कर दिया कि सत्याग्रह का मार्ग प्रभावशाली है! मोहनदास कर्मचंद गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में प्रिटोरिया सरकार के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन किया था जो बुरी तरह विफल रहा था। सत्याग्रह आंदोलन को गांधीजी सत्याग्रह का मार्ग कहते थे। गांधीजी ने भारत में भी सत्याग्रह आंदोलन का प्रयोग दोहराना चाहा। कांग्रेसी नेता […] - [विश्वयुद्ध के मोर्चे पर भारतीय युवक](https://bharatkaitihas.com/indian-youth-joined-english-army-at-vallabhbhais-suggestion/): जो भारतीय नौजवान प्रथम विश्वयुद्ध के मोर्चे से लौट कर आये, उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना संसार के अन्य देशों से की। उन सैनिकों को भरोसा हो गया कि भारत में भी संसार के समक्ष पूरी तरह तन कर खड़े होने की क्षमता है। - [असहयोग आंदोलन की बागडोर](https://bharatkaitihas.com/gandhiji-handed-over-command-of-non-cooperation-movement-to-sardar/): कांग्रेस ने जनरल डायर के कुकृत्य की जांच की मांग की। कांग्रेस को अपेक्षा थी कि रौलट एक्ट के विरोध में गांधीजी कुछ करेंगे किंतु गांधीजी बीमार थे इसलिये वे कुछ निर्णय नहीं ले सके। - [असहयोग आंदोलन का नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/sardar-and-his-brother-left-vakalat-to-participate-in-non-cooperation-movement/): गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का नेतृत्व सरदार पटेल को सौंपा था। असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिये सरदार पटेल ने वकालात छोड़ दी। उनके साथ उनके बड़े भाई विठ्ठल भाई पटेल भी वकालात छोड़कर पूरी तरह से असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा पुनः असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव स्वीकार कर […] - [सत्याग्रह आंदोलन बंद](https://bharatkaitihas.com/after-patels-support-country-accepted-decision-to-stop-satyagraha-movement/): गांधीजी के इस निर्णय से देश की जनता कांग्रेस के विरुद्ध भड़क गई। जनता की दृष्टि में चौरीचौरा की घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसके कारण राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रश्न को भी छोड़ दिया जाये। कांग्रेस के भीतर भी गांधीजी के विरुद्ध आवाजें उठने लगीं। - [झण्डा जुलूस](https://bharatkaitihas.com/nagpur-collector-lifted-ban-on-flag-procession-of-vallabhbhai/): उस काल में बहुत कम आयु के अंग्रेज लड़के बिना कोई समुचित प्रशिक्षण दिए ब्रिटिश भारत के जिलों में कलक्टर लगा दिए जाते थे। ये अनुभवहीन एवं प्रशिक्षणहीन अंग्रेज लड़के जनता पर मनमर्जी का कानून थोप देते थे जिसे उन दिनों व्यंग्य से पॉकेट रूल कहा जाता था। - [बोरसद आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-launched-an-unprecedented-movement-against-government-arbitrariness/): सरकार ने अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था के नाम पर बोरसद के लोगों पर 2.40 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक कर लगा दिया। लोगों ने वल्लभभाई से सरकार की इस कार्यवाही की शिकायत की। - [अहमदाबाद में स्कूल खोलकर सरकार को करारा जवाब दिया सरदार पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-gave-a-befitting-reply-to-english-government-by-opening-schools/): पटेल ने इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स को लिखा कि अब वह नगर पालिका के स्कूलों को न तो अनुदान भेजे और न निरीक्षण करने के लिये आये। - [गुजरात की जनता ने पटेल को गरीब नवाज तथा अपना मसीहा कहा](https://bharatkaitihas.com/people-of-gujarat-called-patel-as-god-of-poor/): वल्लभभाई ने वायसराय को लोगों की समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरदार पटेल ने मांग की कि सरकार अपने खर्चे से उन लोगों के मकान बनवाये जो फिर से मकान बनावाने की स्थिति में नहीं हैं। - [बारदोली आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-told-government-that-i-am-not-outsider-in-bardoli/): सरदार पटेल ने किसानों से पूछा कि यदि वे सरकार के विरुद्ध आंदोलन करेंगे तो सरकार उनकी जमीनें, मवेशी और घरबार छीन लेगी। उन्हें जेलों में ठूंस देगी। उनके गांवों में आग लगायेगी और औरतों तथा बच्चों पर डण्डे बरसायेगी। क्या वे इतनी तकलीफें सहन करने के लिये तैयार हैं ? - [हाथी और मच्छर](https://bharatkaitihas.com/britsh-sarkar-is-a-mad-elephant-i-am-going-to-be-a-mosquito-in-its-ear/): बारदोली में अंग्रेज सरकार द्वारा की जा रही मनमानियों के विरोध में सरदार पटेल ने जनता से कहा कि यह हाथी और मच्छर की लड़ाई है। गोरी सरकार पागल हाथी है, इम इसके कान में मच्छर बनकर घुसेंगे! बारदोली आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने के लिये वल्लभभाई ने सूक्ष्मता से तैयारी की। उन्होंने बारदोली […] - [बारदोली आंदोलन की सफलता](https://bharatkaitihas.com/white-government-was-scared-by-the-sound-of-drums/): पटेल ने लोगों से कहा कि गलत आदमी का बहिष्कार करना समाज का अधिकार है किंतु उसके विरुद्ध हिंसा न की जाये। यदि वह व्यक्ति पारिवारिक समारोह में किसी को भोजन के लिये बुलाये तो बेशक उसके घर कोई न जाये किंतु यदि वह बीमार पड़ जाये तो उसकी सेवा करने के लिये गांव का प्रत्येक व्यक्ति उसके घर जाये। - [सरदार पटेल का सम्मान](https://bharatkaitihas.com/rural-women-with-torn-rags-marked-tilak-on-patels-head/): जब बारदोली के किसानों ने सरकार की बात नहीं मानी तथा बढ़ा हुआ कर नहीं चुकाता तो सरकार ने किसानों पर अत्याचार बढ़ा दिए। इस पर सरदार पटेल ने गांवों का दौरा बढ़ा दिया। लोग सरदार पटेल का सम्मान करने के लिए आतुर रहते। फटे चीथड़ों वाली ग्रामीण महिलाएं पटेल के भाल पर तिलक लगाती […] - [गांधीजी का मंत्र](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-did-first-successful-test-of-mantra-of-gandhiji/): सरदार पटेल ने गांधीजी का मंत्र अपनी जीवन में उतारा तथा उसे सार्वजनिक जीवन में सिद्ध करके दिखाया। यह मंत्र था सत्य पर अड़े रहना, जिसे गांधीजी सत्याग्रह कहते थे। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के पत्र को पढ़कर बम्बई का गवर्नर हिल गया। उसे सरदार पटेल की शक्ति का अनुमान हो गया। उसे यह भी समझ […] - [राजनैतिक मंच से क्रांति नहीं होती](https://bharatkaitihas.com/shouting-from-political-platform-does-not-lead-to-revolution/): प्रायः लोगों को यह भ्रम होता है कि किसी भी समाज में अथवा राष्ट्र में राजनीतिक मंच से क्रांति होनी संभव है किंतु वास्तविकता यह है कि राजनैतिक मंच से चिल्लाने से क्रांति नहीं होती! बारदोली की सफलता के बाद सरदार पटेल एक चमत्कारिक पुरुष के रूप में देखे जाने लगे। उन्होंने वह कर दिखाया […] - [बालगंगाधर तिलक की अनुगूंज](https://bharatkaitihas.com/sound-of-bal-gangadhar-tilak-was-heard-in-voice-of-sardar-patel/): इस काल तक सरदार पटेल न केवल गुजरात कांग्रेस के अपितु अखिल भारतीय कांग्रेस के भी सर्वमान्य नेता बन गए थे। उन्होंने बोरसद, खेड़ा, अहमदाबाद एवं बारदोली में सफल आंदोलन चलाए थे। कांग्रेसी नेताओं को सरदार पटेल की वाणी में बालगंगाधर तिलक की अनुगूंज सुनाई देती थी। अभी सरदार पटेल महाराष्ट्र में जन-जागरण के कार्य […] - [बिहारी किसानों की दुर्दशा देखकर सरदार पटेल का हृदय रो उठा](https://bharatkaitihas.com/seeing-plight-of-farmers-of-bihar-sardar-patels-heart-wept/): जब से देश में तुर्कों का आगमन हुआ था, तब से पूरे देश के किसानों की हालत खराब होने लगी थी। मुगलों के काल में भी किसानों का बहुत शोषण हुआ। अंग्रेजों ने जमींदारी व्यवस्था को मजबूत करके किसानों के शोषण के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित कर दिया। बिहारी किसानों की दुर्दशा देखकर सरदार […] - [लाहौर कांग्रेस की अध्यक्षता](https://bharatkaitihas.com/on-gandhijis-wish-patel-refused-to-become-the-president-of-the-congress/): सरदार पटेल और मोहनदास कर्मचंद गांधी दोनों गुजराती थे। इस समय तक गांधीजी को जितनी भी सफलता मिली थी, उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल का हाथ अधिक था। गांधीजी अपने दम पर अब तक कोई सफलता प्राप्त नहीं कर सके थे। फिर भी गांधजी को पटेल की बजाय नेहरू अधिक पसंद थे। गांधीजी की इच्छा देखकर […] - [सविनय अवज्ञा आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/patel-said-when-guns-are-fired-then-history-is-made/): मरना है तो बहादुरों की मौत मरो। कायरों की नहीं। जब तोपों से गोले बरसते हैं, हवाई जहाजों से बम गिरते हैं, हजारों की संख्या में लोग मरते हैं, तभी इतिहास बनता है। - [गांधीजी की दाण्डी यात्रा को सफल बनाने के लिये पटेल गांव-गांव घूमे](https://bharatkaitihas.com/patel-traveled-from-village-to-village-to-make-gandhijis-dandi-march-successful/): गांधीजी की दाण्डी यात्रा को भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। इस यात्रा ने पूरे देश के लोगों का ध्यान कांग्रेस के कार्यक्रमों की तरफ खींचा। जब गांधीजी पैदल चले तो सैंकड़ों भावुक भारतीय भी इस आशा में उनके साथ हो लिए कि एक दिन यही व्यक्ति भारत को आजादी दिलवाएगा। […] - [ब्रिटिश कमिश्नर का स्वागत](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-refused-to-stand-to-welcome-british-commissioner/): एक बार कमिश्नर गेरेट जेल के दौरे पर आया। उसके सम्मान के लिये समस्त कैदियों को एक पंक्ति में खड़े होने के लिये कहा गया। सरदार ने ब्रिटिश कमिश्नर का स्वागत करने के लिए खड़े होने से मना कर दिया। - [सिंह जेल में था और गीदड़ उसका घर खराब कर रहे थे](https://bharatkaitihas.com/loin-was-in-jail-and-jackals-were-spoiling-his-house/): सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान सरदार पटेल ने जनता में सरकार का विरोध करने का साहस संचारित किया जिसके कारण सरकार घबरा गई। सरकार ने सरदार पटेल को जेल में ठूंस दिया तथा सरदार की माता पर अत्याचार किया। यह वैसा ही था जैसे कि सिंह जेल में था और गीदड़ उसका घर खराब कर […] - [सरदार पटेल की सिंह-गर्जना से गोरी सरकार कांप उठी](https://bharatkaitihas.com/white-government-shook-with-lions-roar-of-sardar-patel/): 25 जनवरी 1931 को विशेष आदेश जारी करके भारत सरकार ने कांग्रेस के 26 शीर्ष नेताओं को रिहा कर दिया ताकि कांग्रेस को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिये मनाया जा सके। रिहा होने वाले नेताओं में सरदार पटेल भी थे। - [गांधी-इरविन पैक्ट से देश में उत्तेजना फैल गई](https://bharatkaitihas.com/gandhi-irwin-pact-spread-excitement-in-country/): देश की आजादी का मुद्दा पूरी तरह गौण हो गया था। क्रांतिकारियों को उनके भाग्य पर अकेला छोड़ दिया गया था। सुभाषचंद्र बोस तथा विट्ठलभाई उस समय विदेश में थे। - [कराची सम्मेलन की अध्यक्षता](https://bharatkaitihas.com/sardar-gets-the-thorny-crown-of-chairmanship-of-karachi-conference/): सरदार ने कहा कि इस समय गांधीजी की आयु 63 वर्ष और मेरी आयु 56 वर्ष है। हम लोग अपने जीवन में ही देश को स्वतंत्र देखना चाहते हैं, इसलिये आपसे अधिक व्यग्र हम हैं। सरदार के इन शब्दों से युवकों का गुस्सा ठण्डा हुआ। - [लौह निर्मित हैं सरदार](https://bharatkaitihas.com/whites-did-not-know-that-sardar-was-made-of-iron-not-of-flesh-and-flesh/): गोरों को पता नहीं था कि हाड़-मांस से नहीं, लौह निर्मित हैं सरदार! अंग्रेजी सरकार वल्लभभाई को अन्य नेताओं की तरह मानकर व्यवहार कर रही थी किंतु सरकार को पता नहीं था कि हाड़-मांस से नहीं, लौह निर्मित हैं सरदार! गोलमेज सम्मेलन के बाद गांधी ने लंदन में भारत मामलों के मंत्री होरे से भेंट […] - [सोने का सरदार](https://bharatkaitihas.com/selfless-service-turned-iron-sardar-gold-lord/): सरदार पटेल ने स्वयंसेवकों के दल गठित किये जो गांव-गांव घूमकर लोगों की सेवा करते, मृतकों का दाह संस्कार करते तथा ग्रामीणों को प्लेग से बचने और उससे लड़ने के तरीके बताते। - [चुनावी टिकटों का बंटवारा करने के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत](https://bharatkaitihas.com/patel-formulated-guidelines-for-election-ticket-distribution/): चुनावी टिकटों का बंटवारा राजनीतिक दलों के लिए बहुत बड़ा संकट रहा है। जो लोग निःस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करते हैं, वे अपने लिए कभी पद नहीं मांगते किंतु जो लोग सत्ता एवं शक्ति प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों में घुस जाते हैं, वे चुनावी टिकटों का बंटवारा होते समय चालाकियां दिखाकर […] - [सरदार पटेल साम्प्रदायिक हैं!](https://bharatkaitihas.com/nariman-accuses-sardar-patel-of-being-communal/): नरीमन ने इसे अपना अमान समझा और अपने प्रभाव वाले अखबारों में सरदार पटेल के विरुद्ध बहुत सी अनर्गल बातें छपवाईं जिनका सीधा-सीधा अर्थ यह होता था कि सरदार पटेल साम्प्रदायिक हैं इसलिये उन्होंने पारसी धर्म के नरीमन को बम्बई विधान सभा में कांग्रेस का नेता नहीं बनने दिया। - [गांधीजी को समर्थन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-once-again-supported-gandhiji-in-the-hour-of-crisis/): संकट की घड़ी में एक बार फिर सरदार पटेल ने गांधीजी को समर्थन दिया! गांधीजी और सरदार पटेल के बीच बड़े विचित्र सम्बन्ध थे। सरदार पटेल प्रायः गांधीजी की बातों से सहमत नहीं होते थे किंतु गांधीजी जब कांग्रेस पर अथवा सरदार पटेल पर अपना व्यक्तिगत निर्णय थोप देते थे तो सरदार आंख मूंदकर उसे […] - [गांधीजी का अंधानुकरण](https://bharatkaitihas.com/patel-used-to-follow-gandhiji-blindly-without-reality/): कांग्रेस की विचित्र स्थिति थी। पहले विश्वयुद्ध में भी अंग्रेजों ने भारत के लोगों से पूछे बिना भारत को विश्वयुद्ध में धकेल दिया था और गांधीजी ने वायसराय से समझौता करके भारतीय नौजवानों को सेना में भरती होने का अभियान चलाया था। - [भारत छोड़ो आंदोलन में जनता की प्रतिक्रिया पर सरदार पटेल को गर्व था](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-proud-of-publics-reaction-to-quit-india-movement/): एक तरफ अंग्रेज अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहे थे और दूसरी ओर जापान का विजय रथ तेजी से आगे बढ़ रहा था। कांग्रेस की ढुलमुल और गलत नीतियों से दुःखी होकर सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज का गठन किया तथा बर्मा की तरफ से भारत में प्रवेश कर लिया। - [शिमला सम्मेलन 1945 में भाग लेने के लिये पटेल को जेल से रिहा किया गया](https://bharatkaitihas.com/patel-released-from-jail-to-attend-shimla-conference/): डॉ. भीमराव अम्बेडकर चाहते थे कि स्वतंत्र भारत में दलित जातियों को उचित स्थान दिया जाये। अंग्रेज चाहते थे कि भारत को पूर्ण स्वतंत्रता न देकर डोमिनियन स्टेटस दिया जाये। - [भारतीय सैनिक और सरकार](https://bharatkaitihas.com/sardar-made-a-pact-between-indian-soldiers-and-white-government/): 20 जनवरी 1946 को कराची में वायुसेना के सैनिकों ने आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों के समर्थन में हड़ताल कर दी जो बम्बई, लाहौर और दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालयों पर भी फैल गई। - [पटेल प्रधानमंत्री नहीं बने](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-could-not-become-prime-minister/): गांधीजी को लगता था कि नेहरू ने यूरोप, चीन, रूस आदि देशों की यात्रा की थी इसलिये अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी से बात करने में नेहरू अधिक सक्षम थे। - [सरदार पटेल और चर्चिल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-warned-winston-churchill/): विंस्टन चर्चिल समझ गये कि समय का पहिया तेजी से घूम रहा है, यदि समझदारी नहीं दिखाई गई तो इंग्लैण्ड को भारत की मित्रता से हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिये चर्चिल ने विदेश सचिव ऐंथनी हेडन के द्वारा पटेल को यह संदेश भिजवाया- 'मुझे पटेल के प्रत्युत्तर से बड़ा आनंद हुआ। - [मुस्लिमलीग को गृह-मंत्रालय न देने पर अड़ गये सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-adamant-on-not-giving-home-ministry-to-muslim-league/): जिन्ना ने सरदार पटेल से गृह मंत्रालय छीनने की चाल चली। उसने नेहरू से कहा कि यदि गृहमंत्री मुस्लिम लीग का बने तो मुस्लिम लीग अंतरिम सरकार में सम्मिलित हो जायेगी। - [लॉर्ड वैवेल भारत को और दस वर्ष और गुलाम रखेगा](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-believed-that-wavell-would-keep-india-slave-for-another-ten-years/): वायसराय को इंगलैण्ड की सरकार पर अविश्वास था और प्रधानमंत्री एटली, वायसराय पर विश्वास नहीं करता था। भारतीय नेताओं में भी परस्पर अविश्वास का वातावरण था। सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू भारत के विभाजन को अनिवार्य मानते थे! - [मुस्लिम लीग का बजट](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-opposes-budget-presented-by-minister-of-muslim-league/): वित्तमंत्री की हैसियत से लियाकत अलीखां को सरकार के प्रत्येक विभाग में दखल देने का अधिकार मिल गया था। वह प्रत्येक प्रस्ताव को या तो अस्वीकार कर देता था या फिर उसमें बदलाव कर देता था। - [पटेल और नेहरू ने गांधीजी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया](https://bharatkaitihas.com/patel-and-nehru-rejected-gandhis-proposal/): विभाजन को रोकने के लिये गांधीजी इस सीमा तक आतुर थे कि उन्होंने वही सोच रखा था जो कभी राजा सोलोमन ने सोचा था। बच्चे को काट कर आधा न बांटो। पूरा देश ही जिन्ना को दे दो। जिन्ना अपनी मुस्लिम लीग के साथ सामने आयें, सरकार बनायें। देश के तीस करोड़ नागरिकों पर राज्य करें। - [देश का विभाजन नहीं होता तो हमारे हाथ से सबकुछ चला जाता](https://bharatkaitihas.com/sardar-believed-that-if-country-had-not-been-divided-then-everything-would-have-gone/): यदि शरीर का एक भाग खराब हो जाये तो उसको शीघ्र हटाना ठीक है, ताकि सारे शरीर में जहर न फैले। मैं मुस्लिम लीग से छुटकारा पाने के लिए भारत का कुछ भाग देने के लिए तैयार हूँ। - [मुसलमानों के दुश्मन नहीं थे सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-not-an-enemy-of-muslims-and-pakistan/): मोरारजी देसाई ने लिखा है- 'मुझे लगभग 20 वर्ष तक सरदार के नेतृत्व में कार्य करने का अवसर मिला निजी अनुभव के आधार पर मैं दावे से कह सकता हूँ कि सरदार एक मात्र व्यक्ति थे जो साम्प्रदायिक, जातिगत या धार्मिक पूर्वाग्रह से मुक्त थे और सभी धर्मों तथा समुदायों के प्रति सद्भाव रखते थे।' - [शरणार्थियों का पुनर्वास करने के लिये दिन-रात एक कर दिये सरदार पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/patel-did-hard-work-to-rehabilitate-refugees/): जहाँ शाम को खाली मैदान दिखाई देते थे, सुबह उठकर लोग देखते थे कि उन मैदानों में रातों-रात हजारों शरणार्थियों ने डेरे जमा लिये हैं। ये लोग भूख-प्यास, सर्दी, बरसात और बीमारियों के सताये हुए थे और अपना सर्वस्व पाकिस्तान में छोड़कर आये थे। - [आजादी की नाव को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आने वाली थी सरदार पटेल पर](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-going-to-have-responsibility-of-safeguarding-freedom/): दुर्दिन के मसीहाओं ने भविष्यवाणी की थी कि हिंदुस्तान की आजादी की नाव रजवाड़ों की चट्टान से टकरायेगी। सरदार पटेल पर जिम्मदारी आने वाली थी कि आजादी की नाव इस चट्टान टकराकर चूर-चूर न हो जाये। - [राजे-रजवाड़े स्वतंत्र भारत की झोली में डाल दें](https://bharatkaitihas.com/patel-said-to-mountbatten-to-put-all-princes-in-bag-of-india/): सदार पटेल ने माउण्टबेटन से कहा कि वे ब्रिटिश भारत के समस्त राजे-रजवाड़े स्वतंत्र भारत की झोली में डाल दें! भारत के 566 देशी राज्यों में से 12 राज्य, प्रस्तावित पाकिस्तान की भौगोलिक सीमा में स्थित थे जबकि शेष 554 में से अधिकांश, भारतीय क्षेत्रों से घिरे हुए थे। कुछ राज्य प्रस्तावित भारत-पाकिस्तान की सीमा […] - [सरदार पटेल की चुनौती](https://bharatkaitihas.com/a-big-challenge-was-ready-for-sardar-patel/): जिन्ना ने निजाम हैदराबाद से भी सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया क्योंकि उसके प्रति माउंटबेटन का रवैया अत्यंत नरम था। कुछ हिन्दू रियासतों के शासक भी पाकिस्तान में सम्मिलित होने को तैयार हो गये जो कि कांग्रेस के नेताओं से नाराज थे। - [लौह-पुरुष अपनी धोती समेट कर राजाओं के पीछे पड़ जायेगा](https://bharatkaitihas.com/congress-knew-that-iron-man-would-fold-his-dhoti-and-follow-the-kings/): पटेल का जोरदार व्यक्तित्व और मेनन के लचीले दिमाग का संयोग इस मौके पर अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ। - [कोरफील्ड को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-dispatched-corfield-to-england/): सरदार पटेल ने राजनैतिक सलाहकार कोनार्ड कोरफील्ड को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया वायसराय के राजनैतिक सलाहकार कोनार्ड कोरफील्ड ने मुहम्मद अली जिन्ना की सहायता करने के लिये, रेजीडेंटों और पॉलिटिकल एजेंटों के माध्यम से देशी राजाओं को भारतीय संघ से पृथक रहने के लिये प्रेरित किया। वायसराय के […] - [बड़ौदा नरेश प्रतापसिंह गायकवाड़ को गद्दी से उतार दिया!](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-dethroned-the-king-of-baroda/): भारत सरकार ने महाराजा प्रतापसिंह गायकवाड़ की मान्यता समाप्त करके उनके पुत्र फतहसिंह को महाराजा बड़ौदा स्वीकार किया। यह राजाओं के लिये बड़ा झटका था, सच्चाई उनकी समझ में आने लगी थी। - [सरदार पटेल का लक्ष्य राजाओं के झुण्ड को हाँककर भारत संघ में लाना था](https://bharatkaitihas.com/sardar-patels-goal-was-to-bring-flock-of-kings-to-union-of-india/): भारत की आजादी के समय जब चारों ओर चीख-चिल्लाहट मची हुई थी तब सरदार पटेल का लक्ष्य भारत के 565 राजाओं में से अधिकांश राजाओं को भारत संघ में सम्मिलित करना था। 5 जुलाई 1947 को रियासती विभाग के अस्तित्व में आते ही सरदार पटेल ने देशी राजाओं से अपील की कि वे 15 अगस्त […] - [सरदार पटेल के हाथ राजाओं की भुजाओं पर कसने लगे](https://bharatkaitihas.com/patels-hand-with-velvet-gloves-tightened-on-kings-arms/): राजा लोग सदियों से अपने राज्यों को भोगते आए थे। पहले वे मुगलों की छत्रछाया में रहे और बार में अंग्रेजों के संरक्षण में रहे किंतु अब उन्हें कांग्रेस शासित भारत में मिलने से डर लग रहा था किंतु सरदार पटेल के हाथ राजाओं की भुजाओं पर कसने लगे। अधिकांश राजाओं को डर था कि […] - [देशी रियासतों का विलय](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-merged-all-princely-states-into-india-before-independence/): भारत की आजादी के समय भारत में 566 देशी रियासतें थीं किंतु पाकिस्तान के अलग हो जाने के कारण उस क्षेत्र की 12 रियासतें पाकिस्तान में चली गईं। सरदार पटेल ने शेष 554 में से 550 देशी रियासतों का विलय भारत में कर लिया। भारतीय राजाओं ने भारत संघ में सम्मिलित होने के लिये एक-एक […] - [लक्षद्वीप पर अधिकार](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-included-lakshadweep-in-india/): लक्षद्वीप में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती थी, इसलिए डर था कि पाकिस्तान इन पर कब्जा कर लेगा किंतु सरदार पटेल ने लक्षद्वीप पर अधिकार कर लिया। जब अरब के मुसलमानों ने दुनिया में इस्लाम फैलाना आरम्भ किया तब उन्होंने दुनिया के उन हिस्सों को अपना पहला निशाना बनाया जो सीरिया और ईरान की […] - [जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान में मिलने की घोषणा करके पटेल को चुनौती दे बैठा](https://bharatkaitihas.com/nawab-of-junagadh-challenged-patel-by-announcing-to-merge-with-pakistan/): जूनागढ़ का नवाब रसूलखानजी कट्टर मुसलमान था। भारत की आजादी के समय उसने प्रयास किया कि जूनागढ़ रियासत पाकिस्तान में शामिल हो जाए। वस्तुतः हैदराबाद, जूनागढ़ और भोपाल नवाब एक ऐसा मुस्लिम गलियारा बनाना चाहते थे जिसका एक सिरा भारत में तो दूसरा सिरा पाकिस्तान में खुलता हो! गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में जूनागढ़ रियासत […] - [माउण्टबेटन का सुझाव](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-refuses-to-accept-mountbattens-suggestion/): माउण्टबेटन का सुझाव था किजूनागढ़ के मसले को यूनाईटेड नेशन्स में ले जाना चाहिये अन्यथा भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ जायेगा। सरदार पटेल ने माउण्टबेटन का सुझाव मानने से मना कर दिया! जूनागढ़ नवाब द्वारा पाकिस्तान में मिलने की घोषणा करने से जूनागढ़ की जनता में बेचैनी फैल गई तथा जनता ने नवाब […] - [निजाम हैदराबाद ने हैदराबाद की समस्या को भारत के पेट में नासूर बना दिया!](https://bharatkaitihas.com/sardar-believed-that-hyderabad-was-like-cancer-in-the-stomach-of-india/): भारत की आजादी के समय हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा राज्य था। यहां की जनता हिन्दू थी किंतु शासक मुसलमान था जिसे निजाम हैदराबाद कहा जाता था। वह भारत में शामिल नहीं होना चाहता था। इसलिए निजाम हैदराबाद ने हैदराबाद की समस्या को भारत के पेट में नासूर बना दिया! 15 अगस्त 1947 तक भारत […] - [हैदराबाद में सत्याग्रह आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/patel-instructed-congress-to-run-satyagraha-movement-in-hyderabad/): जब निजाम हैदराबाद ने भारत में सम्मिलन के पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए तो पटेल ने कांग्रेस को हैदराबाद में सत्याग्रह आंदोलन चलाने का निर्देश दिया ! 9 जून 1947 को निजाम ने वायसराय माउण्टबेटन को एक पत्र लिखा जिसमें उसने अपने मन की अकुलाहट को खुलकर व्यक्त किया- ‘पिछले कुछ दिनों में मैंने स्वाधीनता […] - [माउण्टबेटन योजना घर चली गई!](https://bharatkaitihas.com/patel-said-mountbatten-plan-has-gone-home/): पटेल ने हैदराबाद के नवाब से कहा कि माउण्टबेटन योजना घर चली गई है! उस समय नेहरू यूरोप दौरे पर थे तथा सरदार पटेल कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे थे। वायसराय के दबाव से नवम्बर 1947 में हैदराबाद निजाम ने भारत के साथ स्टेंडस्टिल एग्रीमेंट पर दस्तख्त कर दिये जिसके अनुसार भारत […] - [काश्मीर की समस्या यू.एन.ओ. में ले जाने पर पटेल, जवाहरलाल से नाराज हो गये](https://bharatkaitihas.com/patel-gets-angry-with-jawaharlal-for-taking-problem-of-kashmir-to-uno/): पटेल ने रक्षामंत्री बलदेवसिंह को विश्वास में लेकर भारतीय सुरक्षा दलों को काश्मीर की सीमा पर भारतीय क्षेत्रों में इस प्रकार नियोजित किया जिससे उन्हें तत्काल युद्ध क्षेत्र में भेजा जा सके। - [भोपाल नवाब को घुटने टेकने पर विवश कर दिया!](https://bharatkaitihas.com/patel-forced-bhopal-nawab-to-kneel-down/): सरदार पटेल ने नवाब को पत्र लिखकर उसे धिक्कारा कि मेरे लिये यह एक बड़ी निराशाजनक और दुःख की बात थी कि आपके विवादित हुनर तथा क्षमताओं को आपने देश के उपयोग में उस समय नहीं आने दिया जब देश को उसकी जरूरत थी। - [भारतीय नागरिक सेवाएँ बनाए रखने का निर्णय लिया पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/sardar-decides-to-retain-ics-officers/): भारत की आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू भारतीय नागरिक सेवाएँ भंग करना चाहते थे किंतु सरदार पटेल ने देश का शासन चलाने के लिए भारतीय नागरिक सेवाएँ बनाए रखने का निश्चय किया ताकि देश को मजबूत शासन तंत्र दिया जा सके! स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय नागरिक सेवाओं (आईसीएस) में दक्षिण भारतीयों का बोलबाला […] - [फांसी चढ़ाने का अधिकार](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-want-kings-to-have-right-to-hang-subjects/): देशी रियासतों के राजाओं के पास अपनी जनता को सजा देने के अधिकार थे। वे किसी को भी फांसी पर चड़ा सकते थे।सरदार पटेल नहीं चाहते थे कि भारत की आजादी के बाद भी राजाओं के पास प्रजा को फांसी चढ़ाने का अधिकार हो! देशी राज्यों को भारत में सम्मिलित कर लेना सरदार पटेल की […] - [देशी राज्यों का विलय](https://bharatkaitihas.com/patel-tied-native-states-in-bundle/): देशी राज्यों का विलय स्वतंत्र भारत के सामने एक उलझन भरी समस्या बन गया। राजा लोग किसी भी कीमत पर न अपने राज्य छोड़ना चाहते थे और न अधिकार। भारत संघ में रह गये 554 देशी राज्यों में से अधिकांश, आर्थिक दृष्टि से इतने कमजोर एवं छोटे थे कि वे अपने संसाधनों से एक छोटी […] - [पटेल का व्यावहारिक रुख](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-took-a-very-practical-stand-with-kings/): पांच सौ चौवन राजाओं के सैंकड़ों साल पुराने राज्य खत्म होने जा रहे थे, मुसलमान अपना बोरिया-बिस्तर लेकर पाकिस्तान भाग रहे थे। सिक्खों के सैलाब पश्चिमी पंजाब से भारत की तरफ भागे चल आ रहे थे। सिंध प्रदेश पाकिस्तान में छूट गया था, देश में चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। ऐसी स्थिति में सरदार […] - [राजाओं का धन नहीं, उनके राज्य चाहिये थे!](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-want-wealth-of-kings-but-their-kingdoms/): जब भारत सरकार राजाओं से उनके राज्य छीन रही थी, तब सरदार पटेल ने अत्यंत व्यावहारिक रुख अपाया। लोग चाहते थे कि राजा लोग अपना धन और महल छोड़कर निकल जाएं किंतु सदार पटेल को राजाओं का धन नहीं, उनके राज्य चाहिये थे! सदार पटेल ने भारत के 554 राजाओं के राज्य, भारत में मिलाये […] - [अलवर नरेश तेजसिंह नजरबंद !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-arrested-alwar-king-tej-singh/): राजा लोग विगत कुछ दशकों से अंग्रेजों की छत्रछाया में कांग्रेसी नेताओं से संघर्ष करते आ रहे थे। इसलिए वे देशी की आजादी के समय भी हवा के रुख के परिवर्तन को नहीं पहुंचा सके और भारत सरकार के नेताओं की अवज्ञा करने लगे। जब अलवर नरेश तेजसिंह नजरबंद कर लिया गया, तब जाकर राजाओं […] - [भरतपुर महाराजा का भाग्य](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-protected-the-fate-of-bharatpur-maharaja/): भारत की आजादी के समय भरतपुर महाराजा ने भारत सरकार को नाराज करने वाले कई कार्य किए। इस कारण भारत सरकार भरतपुर महाराजा के विरुद्ध हो गई और उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने पर विचार करने लगी। ऐसी स्थिति में सरदार वल्लभभाई ने भरतपुर महाराजा का भाग्य बचाया। रियासती विभाग भरतपुर राज्य की गतिविधियों से […] - [देशी रियासतों का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/patel-did-what-bismarck-did-in-germany-and-kabur-in-italy/): देशी रियासतों का एकीकरण करके सरदार पटेल ने भारत में वह कर दिखाया जो जर्मनी में बिस्मार्क ने तथा इटली में काबूर ने किया था! सरदार पटेल के नेतृत्व में देशी रियासतों का एकीकरण करने का काम तेजी से चला। दिसम्बर 1947 में उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के 39 राज्यों का उड़ीसा और मध्यप्रान्त में विलय […] - [अजमेर दंगे !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-got-into-a-dispute-with-jawaharlal-nehru-over-ajmer-riots/): भारत की आजादी के तुरंत बाद हुए अजमेर दंगे सरदार पटेल एवं जवाहर लाल नेहरू के बीच विवाद का विषय बन गए। जवाहर लाल नेहरू ने इन दंगों के बाद हिन्दुओं को कुचलने की तैयारी की जबकि पटेल का मानना था कि दंगे मुसलमानों ने किए थे। 5 दिसम्बर 1947 को अजमेर में साम्प्रदायिक दंगे […] - [नेहरू को फटकार !](https://bharatkaitihas.com/patel-rebuked-by-writing-a-letter-to-nehrus-prominent-personal-secretary/): अजमेर दंगे के बहाने से जवाहर लाल नेहरू जिस तरह की ओछी हरकतें कर रहे थे, उनसे सरदार पटेल को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने नेहरू को फटकार लगाने का निश्चय किया। सरदार के सार्वजनिक वक्तव्य को नेहरू ने अपनी व्यक्गितगत प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और उन्होंने व्यक्तिशः अजमेर भ्रमण का कार्यक्रम बनाया किंतु अचानक […] - [नेहरू को पत्र](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-showed-displeasure-by-writing-a-letter-to-nehru/): यद्यपि सरदार पटेल अजमेर दंगे पर आयंग की यात्रा के लिए आयंगर के माध्यम से नेहरू को फटकार चुके थे किंतु इससे पटेल को संतोष नहीं हुआ। उन्होनें सीधे ही नेहरू को पत्र लिखने का निश्चय किया। 23 दिसम्बर 1947 को सरदार पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर कहा कि आयंगर की अजमेर यात्रा आश्चर्य […] - [नेहरू द्वारा पदत्याग की इच्छा !](https://bharatkaitihas.com/nehru-wrote-a-letter-to-sardar-patel-and-offered-to-step-down/): अजमेर दंगे के बाद सरदार पटेल द्वारा जवाहर लाल नेहरू को लगाई गई फटकार से व्यथित होकर नेहरू द्वारा पदत्याग करने की इच्छा व्यक्त की गई! नेहरू ने सरदार को लिखा कि आपके और मेरे बीच में इस प्रकार की घटनाओं की प्रवृत्ति तथा कठिनाइयां उत्पन्न होने से मैं बहुत अप्रसन्न हूँ। ऐसा लगता है […] - [पटेल-नेहरू विवाद काल के गर्त में समा गया!](https://bharatkaitihas.com/with-death-of-gandhi-patel-nehru-dispute-got-engulfed-in-a-period-of-time/): कश्मीर समस्या अपने चरम पर पहुँच गई थी तथा देश में साम्प्रदायिक तनाव भी अपने उच्चतम स्तर पर था। भारत सरकार इस समय संक्रांति काल में थी। एक छोटा सा धक्का भी बहुत बड़ा नुक्सान पहुँचा सकता था। - [भीमराव अम्बेडकर की नियुक्ति में पटेल की भूमिका](https://bharatkaitihas.com/patel-had-an-important-role-in-appointment-of-ambedkar/): सरदार पटेल ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाने का निश्चय किया किंतु भीमराव अम्बेडकर की नियुक्ति में कठिनाई यह थी कि उस काल की कांग्रेस में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का कद इतना ऊँचा नहीं था। जिस समय भारत की संविधान सभा का गठन हुआ और संविधान का प्रारूप बनाने के लिए […] - [पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये](https://bharatkaitihas.com/patel-protested-against-giving-fifty-five-crore-rupees-to-pakistan/): गांधी ने पटेल की इस बात का यह कहकर विरोध किया कि यदि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये नहीं दिये गये तो उसके बदले में अधिक हिंसा और बदले की कार्यवाही की जायेगी। - [अल्पसंख्यक आयोग का विरोध किया पटेल ने !](https://bharatkaitihas.com/patel-opposes-the-decision-to-set-up-a-minorities-commission/): जब नेहरू ने भारत में रह गए मुसलमानों के लिए अल्पसंख्यक आयोग स्थापित करने का प्रयास किया तो पटेल ने अल्पसंख्यक आयोग का विरोध किया। भारत का विभाजन हिन्दू एवं मुसलमान जनसंख्या के आधार पर किया गया था। चूंकि भारत के मुसलमानों ने हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया था, इसी आधार पर […] - [पटेल-नेहरू द्वंद्व](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-let-nehrus-personal-wishes-dominate-congress/): सरदार पटेल एवं जवाहर लाल नेहरू अलग-अलग व्यक्तित्व के धनी थे। भारत की आजादी के बाद पटेल-नेहरू द्वंद्व अधिक मुखर होकर सामने आया। पटेल ने नेहरू की व्यक्तिगत इच्छाओं को कांग्रेस पर हावी नहीं होने दिया! पटेल एवं नेहरू दोनों ही कांग्रेस के सर्वाग्रणी नेता थे। स्वतंत्रता के समय कांग्रेस में पटेल को अधिक पसंद […] - [सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-rebuilt-ancient-somnath-temple/): आजादी की लड़ाई में सरदार पटेल की उपलब्धियां विलक्षण थीं किंतु आजादी के समय उनकी भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण थी। उन्होंने देश की 554 देशी रियासतों का भारत में सम्मिलन करवाया। स्वतंत्र भारत में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि गुजरात के प्राचीन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाना रही। सोमनाथ का जगत् प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के […] - [शेख अब्दुल्ला की बोलती बंद कर दी पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/patel-stopped-sheikh-abdullah/): कश्मीर समस्या के तीन मुख्य सूत्रधार थे- शेख अब्दुल्ला, जवाहरलाल नेहरू और महाराजा हरिसिंह! तीन की महत्वाकांक्षाओं ने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया तथा कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की समस्या बना दिया। यह समस्या आज भी पूरी तरह नहीं सुलझ सकी है। शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे। शेख अब्दुल्ला का परदादा […] - [चित्रकूट की ओर (123)](https://bharatkaitihas.com/towards-chitrakoot/): – ‘शहंशाहे आलम! गुलाम की दरख्वास्त है कि मुझे कुछ दिनों के लिये चित्रकूट जाने की इजाजत दी जाये।’ खानखाना ने जहाँगीर के सामने उपस्थित हो कर निवेदन किया। – ‘क्यों अतालीक बाबा? यहाँ किसी किस्म की तकलीफ है आपको?’ जहाँगीर ने अपने स्वभाव के विपरीत स्वर कोमल ही रखा जाने क्यों आज उसे अपने […] - [सब भाड़ में (124)](https://bharatkaitihas.com/sab-bhaad-mein/): रहीम ने भाड़ में घास झौंकते हुए रीवां नरेश को जवाब दिया कि जिस रहीम के सिर पर विशाल मुगलिया सल्तनत का भार था उस रहीम ने सल्तनत का भार सब भाड़ में झौंक दिया है। रीवां नरेश की आँखें फटी की फटी रह गयीं। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि जो दृश्य वे अपनी आँखों […] - [गोद लिये हुलसी फिरै (125)](https://bharatkaitihas.com/god-liye-hulasee-phirai/): गुसाईंजी ने वृद्ध ब्राह्मण के हाथों से चिट्ठी लेकर पढ़ी तो उनके नेत्रों से आंसुओं की धारा बह निकली। खानखाना ने उसमें लिखा था- गोद लिये हुलसी फिरै तुलसी सो सुत होय। – ‘तुलसी बाबा! ई बूढ़ा विप्र तोहरे शरण में आइ बा। हमार रक्षा आप न करिहैं तो कवन करे?’ एक बूढ़ा ब्राह्मण गुसाईंजी […] - [बादशाह का अपहरण (126)](https://bharatkaitihas.com/kidnapping-of-badshah/): आखिर वही हुआ जो नूरजहाँ चाहती थी, खुर्रम अपने बाप की नजरों में गिर गया। खुसरो पहले ही मर चुका था और जहाँदार वैसे भी किसी काम का न था। इस प्रकार शहरयार के बादशाह के तख्त तक पहुँचने के मार्ग में आने वाली तीन बाधायें स्वतः हट चुकी थीं। अब केवल परवेज बचा था […] - [खीरा सिर से काटिये (127)](https://bharatkaitihas.com/kheera-sir-se-kaatiye/): खानखाना के बेटे दाराबखाँ की पुत्री नूरजहाँ के भाई आसिफखाँ के बेटे शायस्ताखाँ को ब्याही गयी थी। चूंकि दाराबखाँ और दाराबखाँ के बेटे को महावतखाँ ने मार डाला था इसलिये खानखाना की यह पौत्री महावतखाँ से बड़ी क्रुद्ध रहा करती थी। महावतखाँ का कोई भी परिचित आदमी जब भी उससे मिलता तो वह एक ही […] - [बेरहम वक्त (128)](https://bharatkaitihas.com/beraham-vakt/): – ‘इस कुतिया के बच्चे को कह कि हुक्का भर कर लाये नहीं तो मार-मार कर चमड़ी उधेड़ दूंगा।’ शराब के नशे में धुत्त कुंवर हरिसिंह ने चिल्लाकर कहा तो खुर्रम की रूह कांप गयी। हुक्का लाने वाली दासी भी कुंवर का यह रौद्र रूप देखकर सहम गयी। ऐसा घनघोर अपमान! खुर्रम तो स्वप्न में […] - [काला साया (129)](https://bharatkaitihas.com/kaala-saaya/): बदजात महावतखाँ बादशाह से कोई दुर्व्यवहार तो नहीं करता था किंतु उसने बादशाह पर ढेर सारी पाबंदियाँ लाद दी थीं जो किसी दुर्व्यवहार से कम नहीं थीं। बिना महावतखाँ की इजाजत के कोई परिंदा तक बादशाह के पास पर नहीं मार सकता था। उसे सुबह-शाम दो सेर शराब और आधा सेर कबाब दिया जाता था। […] - [फिर से दक्खिन (130)](https://bharatkaitihas.com/south-again-raheem/): नूरजहाँ ने जहाँगीर को आया देखकर सिर पीट लिया किंतु बाहर से उसने बड़ी प्रसन्नता जाहिर की और बादशाह का स्वागत किया। अगली रात नूरजहाँ के डेरों में बड़ा भारी जलसा किया गया। जलसे में ईरान से आयी हुई उन खूबसूरत रक्कासाओं के ऊपर अशर्फियाँ उछाली गयीं किंतु बादशाही आदेश से इस जलसे में किसी […] - [दुखती रग (131)](https://bharatkaitihas.com/dukhatee-rag/): महावतखाँ लड़ता कम था और भागता अधिक था। उधर खानखाना लड़ना तो चाहता था किंतु किसी मैदान में अच्छी तरह मोर्चा बांधकर। इस कारण दोनों ही सेनाएं छुट-पुट लड़ाईयाँ ही करती थीं। जब दक्खिन बहुत कम दूरी पर रह गया तब खानखाना ने पूरी ताकत के साथ महावतखाँ पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। जब […] - [अद्भुत बालक (132)](https://bharatkaitihas.com/wonderful-child/): जेठ का महीना है और सूर्यदेव आकाश के ठीक मध्य में विराजमान हैं। सन-सनाती लू से परिपूर्ण आकाश में धूल के तप्त कण घुल जाने से जब वायु कानों में घुसती है तो लगता है किसी ने पिघला हुआ सीसा उंडेल दिया है। ऐसी विकट गर्मी में मनुष्यों और पशुओं की कौन कहे, चिड़ियों तक […] - [बेहोशी (133)](https://bharatkaitihas.com/unconscious/): आज पूरे चार दिन बाद रहीम की बेहोशी टूटी थी। जाने कहाँ-कहाँ से ढूंढ कर लायी थी जाना उसे। तीन दिनों की भागम भाग के बाद खानखाना दिल्ली के बाहर जंगलों में बेसुध पड़ा हुआ मिला था। – ‘बेटी जाना!’ – ‘हाँ अब्बा हुजूर।’ – ‘देखो तो कमरे में कितना अंधेरा घिर आया है, जरा […] - [उड़ गया चातक (134)](https://bharatkaitihas.com/ud-gaya-chatak/): खानखाना की चेतना लौटी। उसने देखा हवेली पूरी तरह निस्तब्ध है। कहीं से कोई शब्द नहीं। बेटी जाना बाप के पलंग पर ही कंधा रखकर सो गयी है। शमां की रौशनी तेल खत्म हो जाने से अपने अंतिम क्षण गिन रही है जिससे कमरे में अंधेरा छाता जा रहा है। पूरी रात खानखाना सुधि और […] - [उच्छवास (135)](https://bharatkaitihas.com/uchhawas-the-lastthoughts/): मैं इस उपन्यास की भूमिका में लिख आया हूँ- ”उस युग में एक सिपाही का कवि हो जाना कितनी बड़ी बात थी इसका अनुमान लगा पाना आज की परिस्थितियों में संभव नहीं है।” उपन्यास के पूरा हो जाने पर मैं उच्छवास के रूप मेंइस वक्तव्य में कुछ और भी जोड़ना चाहता हूँ। उस युग में […] - [प्रस्तावना - चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/preface-chishtiya-suphi-sampradaya/): प्रस्तावना – चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया गया है। बहुत से लोग सूफीवाद को इस्लाम का एक रूप मानते हैं तथा सूफियों को मुसलमान मानते हैं किंतु सूफीवाद का उदय इस्लाम के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति के रूप में हुआ। […] - [इस्लाम का उदय तथा प्रसार](https://bharatkaitihas.com/the-rise-and-spread-of-islam/): मध्य एशिया में स्थित 'सउदी अरेबिया' नामक देश के 'मक्का' नगर में रहने वाले 'कुरेश कबीले' में ई.570 में 'हजरत मुहम्मद' का जन्म हुआ। - [भारत में सूफी मत की सफलता के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-to-the-success-of-sufism-in-india/): भारत में सूफी मत का आगमन एक युगांतरकारी घटना थी। सूफ मत ने इस्लाम को तो प्रभावित किया ही, साथ ही हिन्दुओं के मन में भी कुछ आकर्षण उत्पन्न किया। शरीअत के खिलाफ बगावत कुछ विद्वानों का मत है कि सूफीवाद, इस्लाम की शरीअत के खिलाफ एक बगावत थी। सूफी मत कोई एक मत नहीं […] - [सूफी परम्परा](https://bharatkaitihas.com/chishtiya-sampradaya/): इस्लाम के उदय एवं प्रसार के कई सौ साल बाद सूफी परम्परा का जन्म हुआ। सूफी परम्परा के कुछ सिद्धांत इस्लाम से मेल खाते हैं तो कुछ सिद्धांत दुनिया के अन्य सम्प्रदायों एवं दर्शनों से मेल खाते हैं। वैराग्ययुक्त साधना द्वारा अल्लाह की उपासना को श्रेयस्कर मानने वाले सूफी कहलाते थे। सूफी परम्परा अथवा ससव्वुफ […] - [ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/khwaja-moinuddin-chishti/): ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने गौर साम्राज्य की अंतिम सीमा पर स्थित अजमेर को अपना स्थाई निवास बनाया। मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रारम्भिक जीवन विषयक प्रामाणिक सूचनाओं का प्रायः अभाव है। गौस उल आजम का एक शिष्य था मोईनुद्दीन, जिसका जन्म फारस में हुआ था। ई.1186 में मोइनुद्दीन को अपने गुरु का उत्तराधिकारी चुना गया। उन दिनों […] - [मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह](https://bharatkaitihas.com/moinuddin-chishti-dargah/): ख्वाजा मोइनुद्दीन को उसी हुज्रा (कोठरी) में दफनाया गया जिसमें उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय प्रार्थनायें करने में व्यतीत किया था। इसी को अब मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह कहते हैं। आरंभ में यह कच्ची मजार के रूप में एक पहाड़ी पर स्थित थी जो झाड़ियों एवं पौधों से घिरी हुई थी। ख्वाजा हुसैन नागौरी […] - [छत्रपति शिवाजी का संघर्ष एवं उपलब्धियाँ - प्रस्तावना](https://bharatkaitihas.com/preface-of-book-chhatrapati-shivaji/): छत्रपति शिवाजी का संघर्ष बहुकोणीय था। उन्होंने बीजापुर के शिया राज्य से भूमि छीनकर हिन्दू राज्य की स्थापना की। शिवाजी ने औरंगजेब से जीवन भर संघर्ष किया। छत्रपति ने आम्बेर नरेश मिर्जाराजा जयसिंह तथा जोधपुर नरेश जसवंतसिंह जैसे दुराधर्ष योद्धाओं से अपने राज्य को बचाया तथा औरंगजेब के जीवन काल में ही अपना राज्याभिषेक करवाया। […] - [शिवाजी के पूर्वज (2)](https://bharatkaitihas.com/ancestors-of-shivaji/): माना जाता है कि शिवाजी के पूर्वज मेवाड़ के महाराणाओं के वंश में से निकले थे। राजकुमार सज्जनसिंह अथवा सुजानसिंह उनका पूर्वज था। ई.1303 में अल्लाऊद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग तोड़ा और रावल रत्नसिंह को मार डाला। उसकी मृत्यु के साथ ही मेवाड़ के गुहिलों की रावल शाखा का अंत हो गया। तब बहुत से […] - [शिवाजी का बाल्यकाल (3)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-childhood/): शिवाजी का बाल्यकाल बड़ी कठिनाइयों में बीता। कहा जा सकता है कि इन कठिनाइयों ने ही शिवाजी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण किया। शाहजी एवं जीजाबाई का विवाह मालोजी अभी तक जाधवराय द्वारा किए गए अपमान को भूला नहीं था। मालोजी भी अभी तक अहमदनगर की सेवा में था तथा उसकी पुत्री जीजाबाई भी अब […] - [शिवाजी की राजनीति](https://bharatkaitihas.com/shivajis-entry-into-active-politics/): शिवाजी की राजनीति बहुत स्पष्ट थी। उनकी राजनीति अपने लिए एक राज्य बनाने तक सीमित नहीं थी। वे भारत भूमि पर विशाल हिन्दू साम्राज्य की स्थापना करना चाहते थे। सक्रिय राजनीति में प्रवेश शिवाजी का सक्रिय राजनीति में प्रवेश उनकी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण हुआ। वे अपने पिता से अलग रहकर अपनी माता के संरक्षण […] - [अफजल खाँ का वध (5)](https://bharatkaitihas.com/slaughter-of-afzal-khan/): शिवाजी को शाहजी के आगमन का समाचार मिला तो वह कई मील पैदल चलकर अपने पिता की अगवानी करने पहुंचा। एक मंदिर में पिता-पुत्र का मिलन हुआ। - [शाइस्ता खाँ को शिकस्त (6)](https://bharatkaitihas.com/defeat-to-shaista-khan/): महाराजा जसवंतसिंह को शाइस्ता खाँ के साथ दक्षिण के अभियान पर भेजा गया था किंतु वह शिवाजी के विरुद्ध किए जा रहे अभियान से सहमत नहीं था। - [सूरत की लूट (7)](https://bharatkaitihas.com/plunder-of-surat/): शिवाजी के सिपाही सूरत नगर में घुसकर व्यापारियों का धन छीनने लगे और शिवाजी के डेरे में लाकर ढेर लगाने लगे। - [मिर्जा राजा जयसिंह का अभियान (8)](https://bharatkaitihas.com/campaign-of-mirza-raja-jai-singh/): सूरत के बाद शिवाजी ने औरंगाबाद तथा अहमदनगर के बीच स्थित मुगल क्षेत्रों पर आक्रमण किए। - [शिवाजी की आगरा यात्रा (9)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-agra-tour/): शिवाजी की आगरा यात्रा किसी महानायक की दिग्वजय यात्रा से कम नहीं है। भारतीय इतिहास में इसकी गूंज कई सदियों तक सुनाई देती रहेगी। वस्तुतः इस यात्रा ने ही शिवाजी को महानायक के रूप में स्थापित किया। 22 जनवरी 1666 को आगरा के लाल किले में औरंगजेब के पिता शाहजहाँ की मृत्यु हो गई। औरंगजेब […] - [शिवाजी का औरंगजेब विरोध (10)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-opposes-aurangzeb/): छत्रपति शिवाजी द्वारा औरंगजेब का विरोध भारतीय इतिहास को गति प्रदान करती है। - [साल्हेर मुल्हेर का युद्ध (11)](https://bharatkaitihas.com/war-of-salher-mulher/): मराठों ने मुगलों की सेनाओं को बुरी तरह नष्ट कर दिया। कई हजार मुगलों को मार डाला तथा कई हजार मुगलों को बंदी बना लिया। - [प्रतापराव गूजर का बलिदान (12)](https://bharatkaitihas.com/sacrifice-of-commander-pratap-rao/): कोंडाजी के आदमियों ने दुर्ग का फाटक खोल दिया जिससे पास में छिपी हुई मराठा सेना प्रवेश कर गई। इस सेना ने दुर्ग के मुख्य रक्षक तथा उसके बहुत से सैनिकों को नींद में ही काट डाला। - [शिवाजी का राज्याभिषेक (13)](https://bharatkaitihas.com/coronation-of-shivaji/): शिवाजी का राज्याभिषेक एक युगांतरकारी घटना थी। औरंगजेब के जीवित रहते यह संभव नहीं था किंतु शिवाजी ने औरंगजेब सहित तीन मुसलमान बादशाहों और सुल्तानों से लड़कर अपने राज्य का निर्माण किया तथा स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित किया। उस समय उत्तर भारत में केवल महाराणा राजसिंह तथा दक्षिण भारत में छत्रपति शिवाजी ही ऐसे […] - [शिवाजी की शासन व्यवस्था (14)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-governance/): शिवाजी की शासन व्यवस्था प्राचीन क्षत्रिय राज्यों के अनुसार की गई। राज्य कार्य संचालन के लिए अष्ट-प्रधान की नियुक्ति की गई। राज्य का समस्त कार्य इन आठ प्रधानों में बांट दिया गया (1.) पेशवा: राज्य का प्रधान व्यवस्थापक पेशवा कहलाता था। शिवाजी ने इस पद पर मोरोपंत पिंघले को नियुक्त किया। (2.) मजीमदार: इस मंत्री […] - [मुगलों पर पुनः आक्रमण (15)](https://bharatkaitihas.com/re-invasion-of-mughals/): ओरंगजेब ने दिलेर खाँ को पुनः दिल्ली बुलवा लिया था। इस कारण सूबेदार बहादुर खाँ ही दक्षिण में मुगल सत्ता का अकेला प्रतिनिधि था। - [शिवाजी का कर्नाटक अभियान (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/): शिवाजी का कर्नाटक अभियान इसलिए किया गया था ताकि सेनाओं का व्यय निकल सके। कर्नाटक अत्यंत प्राचीन काल से ही एक समृद्ध प्रदेश था जिसे मुसलमान लूट रहे थे। जब शिवाजी दक्षिण भारत में मुगलों के क्षेत्र को कई बार लूट चुका तो उसका ध्यान कर्नाटक की ओर गया। कर्नाटक में चार शताब्दियों से मुसलमानों […] - [सम्भाजी का दुराचरण (17)](https://bharatkaitihas.com/misbehavior-of-shambhaji/): जब दिलेर खाँ को ज्ञात हुआ कि शिवाजी ने सम्भाजी को पन्हाला दुर्ग में बंदी बनाकर रखा है तो दिलेर खाँ ने पत्रों के माध्यम से सम्भाजी से सम्पर्क किया। - [जजिया का विरोध (18)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-opposes-jaziya/): मुझे आपके अधिकारियों की स्वामिभक्ति पर आश्चर्य होता है, क्योंकि वे वास्तविकता को आपसे छिपाते हैं और प्रज्वलित अग्नि को फूस से ढंकते हैं। मेरी कामना है कि जहांपनाह का राजत्व महानता के क्षितिज के ऊपर चमके। - [शिवाजी का निधन (19)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-passed-away/): शिवाजी का निधन भारतवासियों के लिए एक अपूर्णनीय क्षति थी। भारत माता को ऐसे वीर पुत्रों की कमी नहीं थी किंतु शिवाजी उनमें सबसे अलग था। - [शिवाजी का भारत पर प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/the-influence-of-shivajis-rise-on-indian-politics/): शिवाजी का भारत पर प्रभाव शताब्दियों के अंतराल में भी देखा जा सकता है। शिवाजी राजे की भीषण टक्करों से दक्षिण भारत में स्थित बीजापुर का आदिलशाही राज्य पूरी तरह कमजोर हो गया। इसी शिया मुस्लिम राज्य में से शिवाजी ने अपने हिन्दू राज्य का निर्माण किया। गोलकुण्डा का कुतुबशाही राज्य अपनी शक्ति खोकर शिवाजी […] - [महाकवि भूषण की कविता में शिवाजी (21)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-in-the-poem-of-mahakavi-bhushan/): भारत के अनेक राजा महाकवि भूषण को अपने दरबार में देखना चाहते थे किंतु उन्होंने शिवाजी के दरबार में रहना पसंद किया। - [शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be/): शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन सम-सामयिक परिस्थितियों के अनुसार किया जाना चाहिए। उसके कार्य अपने समय से बहुत आगे थे। उसने विस्मयकारी उपलब्धियाँ अर्जित कीं। शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन (1.) साम्राज्य संस्थापक के रूप में शेरशाह भारत के उन गिने-चुने शासकों में से है जिसने एक साधारण परिवार में जन्म लेकर विशाल साम्राज्य खड़ा […] - [शेरशाह के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शेरशाह के उत्तराधिकारी शेरशाह की तरह प्रतिभावान नहीं थे। उन्हें शेरशाह से जो साम्राज्य प्राप्त हुआ, वह लगातार कम होता हुआ नष्ट हो गया। इस्लामशाह शेरशाह ने अपने जीवन काल में ही अपने बड़े पुत्र आदिल खाँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया परन्तु शेरशाह की मृत्यु के उपरान्त अमीरों ने शेरशाह के छोटे पुत्र जलाल […] - [सूरी साम्राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): सूरी साम्राज्य का पतन होने के कई कारण थे। उस काल में उत्तर-पश्चिमी भारत में मुगल एवं अफगान तो सक्रिय थे ही, राजपूत राजाओं के वंशज भी अपनी खोई हुई स्वतंत्रता को पाने के लिए उद्यत थे। सूरी साम्राज्य का पतन होने के कारण (1.) शेरशाह की अकाल मृत्यु शेरशाह की अकाल-मृत्यु से सूरी साम्राज्य […] - [अकबर का प्रारम्भिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-first-part/): जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर ने ई. 1556 से1605 तक शासन किया। अकबर का प्रारम्भिक जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था। उसे अपने ही परिवार के षड़यंत्रों का शिकार होना पड़ा। अकबर का प्रारम्भिक जीवन अकबर का जन्म अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था। उसके पिता का नाम हुमायूँ और माता का नाम हमीदा बानू […] - [पानीपत का दूसरा युद्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): ऐतिहासिक दृष्टि से पानीपत का दूसरा युद्ध मुगल बादशाह अकबर तथा दिल्ली के शासक हेमचंद्र विक्रमादित्य के बीच हुआ किंतु वस्तुतः यह युद्ध बैरम खाँ तथा हेमचंद्र विक्रमादित्य के बीच लड़ा गया। पानीपत का दूसरा युद्ध हेमू का उत्कर्ष हेमू का असली नाम हेमराज था। वह धूसर जाति का बनिया था। कुछ इतिहासकार उसे गौड़ […] - [बैरम खाँ का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): हुमायूँ ने बैरम खाँ को अल्पवय अकबर का संरक्षक नियुक्त किया था। बैरम खाँ ने ही अकबर को उसके पिता का खोया हुआ राज्य फिर से दिलवाया था किंतु जैसे ही अकबर वयस्क हुआ, उसने बैरम खाँ से छुटकारा पाने का प्रयास किया। बैरम खाँ का विद्रोह मूलतः इसी कारण हुआ था। बैरम खाँ से […] - [अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): भारतीय इतिहासकारों ने अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला है। इन इतिहासकारों के अनुसार अकबर ने अपने शासन के कुछ निश्चित उद्देश्य निर्धारित किए तथा इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसने जीवन भर प्रयास किए। अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य शासन की बागडोर हाथ में लेने के उपरान्त अकबर […] - [अकबर का साम्राज्य विस्तार](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-second-part/): अकबर का साम्राज्य विस्तार अकबर की राजधानी फतहपुर सीकरी के चारों ओर दूर-दूर तक हुआ। इतने बड़े देश पर अधिकार करने के लिए अकबर को इतना व्यापक विस्तार अभियान चलाना पड़ा। अकबर का साम्राज्य विस्तार और नीति-वैषम्य हुमायूँ द्वारा जीते गये भू-भाग तथा बैरम खाँ द्वारा विजित क्षेत्रों से आगे बढ़कर  साम्राज्य विस्तार करने के […] - [अकबर की राजपूत नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अकबर की राजपूत नीति मध्यकालीन भारतीय इतिहास मे युगांतरकारी परिवर्तन लाने में सक्षम सिद्ध हुई। अकबर ने राजपूतों के साथ सुलह एवं मैत्री का मार्ग अपनाया। अकबर अशिक्षित था किंतु संघर्षों ने उसे चतुर राजनीतिज्ञ बना दिया था। कामरान की निर्दयता, बैरमखाँ की संगति, हरम के कुचक्रों तथा मिर्जाओं के षड़यंत्रों ने अकबर को अपनी […] - [अकबर की राजपूतों पर विजय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af/): अकबर की राजपूतों पर विजय अकबर की साम्राज्य विस्तार नीति का प्रमुख अंग थी। अकबर ने न केवल राजपूतों को अपने अधीन किया अपितु उनसे ही अपने राज्य का विस्तार करवाया। आम्बेर के साथ मैत्री सम्बन्ध राजपूताना में स्थित आम्बेर राज्य पर कच्छवाहा राजपूतों का शासन था। इन दिनों राजा भारमल वहाँ शासन कर रहा […] - [अकबर की शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-fourth-part/): अकबर की शासन व्यवस्था त्रिस्तरीय थी जिसमें सर्वोच्च स्तर पर केन्द्रीय शासन, मध्यम स्तर पर प्रांतीय शासन तथा निम्नतम स्तर पर स्थानीय शासन था। अकबर की शासन व्यवस्था केन्द्रीय शासन अकबर का केन्द्रीय शासन पूर्ण रूप से स्वेच्छाचारी तथा निरंकुश राजतंत्र पद्धति पर आधारित था। इस केन्द्रीय शासन का कार्य न केवल राजधानी में रहने […] - [अकबर का सैन्य प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): अकबर भारत जैसे विशाल देश के अधिकांश हिस्से पर शासन करता था। यह केवल एक विशाल सेना के बल पर ही किया जा सकता था। इस कारण अकबर का सैन्य प्रबन्धन अत्ंयंत बेहतर अवस्था में था। अकबर ने विशाल मुगल सल्तनत का निर्माण सेना के बल पर ही किया था। सल्तनत की सुरक्षा एवं सल्तनत […] - [अकबर का भूमि प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): अकबर का भूमि प्रबन्धन उस युग की परिस्थितियों को देखते हुए काफी हद तक वैज्ञानिक था। इसमें किसानों से निश्चित कर लेने की व्यवस्था की गई थी जिसके कारण कर्मचारी किसानों पर मनमानी नहीं कर सकते थे। अकबर ने सैनिक सुधारों की भांति भूमि सुधार भी गुजरात विजय के बाद ही आरम्भ किये। इस्लामशाह की […] - [अकबर के सामाजिक सुधार](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-fifth-part/): अकबर के सामाजिक सुधार भारत के मध्यकालीन इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं। अकबर ने मजहबी कट्टरता के उस वातावरण में भी गैर-इस्लामिक प्रजा को अपनी प्रजा समझा तथा उन्हें पूर्ववर्ती सुल्तानों एवं बादशाहों की तुलना में अनेक सहूलियतें दीं। अकबर के सामाजिक सुधार अकबर ने ऐसे कई सामाजिक सुधार किये जिनका उसकी समस्त प्रजा […] - [अकबर की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अकबर की धार्मिक नीति एक वैचारिक रूप से सुदृढ़ शासक की नीति थी। जीवन की पाठशाला में हुए अनुभवों ने उसे सिखा दिया था कि सभी धर्मों में अच्छाइयाँ एवं कमियाँ हैं। कोई भी धर्म पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं है। अकबर अपने युग के मुस्लिम बादशाहों से बिल्कुल उलट, उदार तथा व्यापक दृष्टिकोण […] - [दीन-ए-इलाही](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%8f-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80/): दीन-ए-इलाही का शाब्दिक अर्थ, ‘ईश्वर का धर्म’ होता है परन्तु वास्तव में दीन-ए-इलाही कोई धर्म नहीं था। यह ऐसे लोगों की एक गोष्ठी थी जो अकबर के विचारों तथा विश्वासों से सहमत थे और जो उसे अपना पीर या गुरु मानने को तैयार थे। अकबर जानता था कि न तो समस्त धर्मों को जोड़कर एक […] - [अकबर के शासन की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-third-part/): अकबर के शासन की विशेषताएँ उसके सम्पूर्ण शासनकाल में दिखाई देती हैं। उसने निरकुंश एवं एकच्छत्र शासक होते हुए भी प्रजा के विभिन्न वर्गों के हित के लिए कार्य किए। महान साम्राज्य निर्माता भारत में जिस प्रकार दो अफगान साम्राज्यों की स्थापना हुई थी। ठीक उसी प्रकार तीन मुगल साम्राज्यों की स्थापना हुई थी। पहले […] - [अकबर का व्यक्तित्व](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-sixth-part/): अकबर का व्यक्तित्व मध्यकालीन मुसलमान शासकों की तुलना में अधिक उदार एवं बड़ा था। वह बड़ी सल्तनत का शासक था और उसके व्यक्तित्व में बड़ी सल्तनत पर शासन करने के समस्त आवश्यक गुण विद्यमान थे।  अकबर की गणना भारत के महान् शासकों में की जाती है। उसके व्यक्तित्व के सम्बन्ध में विद्वानों ने इतना अधिक […] - [इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87/): इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर का स्थान बहुत ऊँचा है। चाहे भारतीय इतिहासकार हों या विदेशी इतिहासकार सभी ने अकबर के शासन की प्रशंसा की है। जवाहर लाल नेहरू ने अकबर को भारत के दो महान राजाओं में से एक बताया है। मध्यकालीन इतिहासकारों से लेकर आधुनिक इतिहासकारों ने अकबर के बारे में बहुत कुछ […] - [नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर](https://bharatkaitihas.com/nooruddin-muhammad-jahangir-first-part/): नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर ने ईस्वी 1605 से 1627 तक शासन किया। वह अकबर के चार पुत्रों में सबसे बड़ा था। जिस समय अकबर की मृत्यु हुई, उस समय अकबर के पुत्रों में अकेला वही जीवित बचा था। नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का प्रारम्भिक जीवन नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का बचपन का नाम सलीम था। उसकी माता हीराकंवर […] - [नूरजहाँ का उत्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8/): नूरजहाँ का उत्थान जहाँगीर कालीन राजनीति की प्रमुख घटना थी। जहाँगीर के शासनकाल में नूरजहाँ ही मुगललिया सल्तनत की वास्तविक शासक थी। नूरजहाँ का बचपन का नाम मेहरुन्निसा था। फारसी में मेहर प्रेम को कहते हैं तथा अरबी में निसा स्त्री को कहते हैं। इस प्रकार मेहरुन्निसा का शाब्दिक अर्थ प्रेम करने योग्य स्त्री होता […] - [खुर्रम का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): खुर्रम का विद्रोह जहाँगीर की दरबारी गुटबंदी का परिणाम थी। यह गुटबंदी नूरजहाँ ने आरम्भ की थी। जब जहाँगीर के पुत्रों को लगा कि नूरजहाँ अपने पुत्र को अगला बादशाह बनाना चाहती है, तब खुर्रम ने बगावत का झण्डा बुलंद कर दिया। जब जहाँगीर बीमार पड़ा तो खुर्रम में, तख्त प्राप्त करने की आतुरता बढ़ […] - [महाबत खाँ का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): महाबत खाँ का विद्रोह नूरजहाँ के भाई आसफ खाँ के षड़यंत्रों एवं का परिणाम था। नूरजहाँ ने आसफ खाँ ने महाबत खाँ के लिए ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कर दीं जिनके कारण महाबत खाँ को बगावत करनी पड़ी। खुर्रम के विद्रोह के समय खुर्रम का श्वसुर आसफ खाँ चुपचाप विद्रोह की गतिविधियों को देखता रहा। उसने […] - [जहाँगीर का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): इतिहासकारों के लिए जहाँगीर का चरित्र किसी पहेली से कम नहीं है। जब तक अकबर जीवित रहा, जहाँगीर ने कई बार अपने पिता से विद्रोह किया तथा अपनी पत्नी मानबाई और अपने पिता के मित्र अबुल फजल की हत्या जैसे गंभीर अपराध किए किंतु जब वह बादशाह बना तो वह न्यायप्रिय शासक एवं कलाओं का […] - [नूरजहाँ का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): नूरजहाँ का चरित्र मध्यकालीन इतिहास में किसी पहेली से कम नहीं है। उस युग में इस बात पर विश्वास नहीं किया जाता था कि किसी औरत में शासकीय प्रतिभा हो सकती है किंतु जहाँगीर ने अपने राज्य का पूरा शासन नूरजहाँ पर छोड़ दिया था। नूरजहाँ का चरित्र नूरजहाँ के गुणों के कारण जहाँगीर ने […] - [शाहजहाँ](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-first-part/): शाहजहाँ ने ईस्वी 1628 से 1658 तक शासन किया। वह अपने पिता जहाँगीर की तुलना में अधिक कट्टर शासक था। उसने अपने पितामह की सुलहकुल नीति को तो नहीं छोड़ा किंतु उसने कई मंदिरों को तुड़वाया जिनमें पुष्कर का प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर भी शामिल है। शाहजहाँ का प्रारम्भिक जीवन शाहजहाँ का वास्तविक नाम खुर्रम था। […] - [शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध मुस्लिम इतिहासकारों की दृष्टि में शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध मध्यकालीन इतिहास का स्वर्णयुग था जबकि हिन्दू इतिहासकार उसके शासन प्रबन्ध को मजहबी कट्टरता से परिपूर्ण मानते हैं। शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध शाहजहाँ ने बादशाह बनने के पहले से ही अपनी योग्यता का परिचय देकर ख्याति अर्जित कर ली थी। वह अपने […] - [उत्तराधिकार युद्ध](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-second-part/): शाहजहाँ के जीवित रहते हुए ही शाहजहाँ के पुत्रों में उत्तराधिकार युद्ध हुआ जिसमें औरंगजेब विजयी रहा और उसने शाहजहाँ को पकड़कर ताजमहल में कैद कर लिया। सितम्बर 1657 में शाहजहाँ बीमार पड़ गया। वह 65 वर्ष का हो चुका था। वृद्धावस्था के कारण उसकी बीमारी में सुधार नहीं हुआ और उसकी दशा बिगड़ती चली […] - [औरंगजेब (आलमगीर)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac/): औरंगजेब का पूरा नाम मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब था। उसे आलमगीर भी कहा जाता था। उसने ईस्वी 1658 से 1707 तक भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया। वह एक क्रूर एवं धर्मान्ध कट्टर सुन्नी मुसलमान शासक था। उसकी कट्टर नीतियों ने मुगल सल्तनत को पतन के मार्ग पर धकेल दिया। औरंगजेब का प्रारम्भिक जीवन मुहीउद्दीन […] - [औरंगजेब की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): औरंगजेब की धार्मिक नीति इस्लामिक मजहबी कट्टरता पर आधारित थी। वह सुन्नी मुसलमान था और भारत की सम्पूर्ण प्रजा को सुन्नी मुसलमान बनाना चाहता था। औरंगजेब कट्टर सुन्नी मुसलमान था। इस्लाम में उसकी बड़ी अनुरक्ति थी। वह स्वयं को इस्लाम का रक्षक तथा पोषक समझता था। इसलिये राज्य के समस्त साधनों को इस्लाम की सेवा […] - [औरंगजेब की राजपूत नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): औरंगजेब की राजपूत नीति मजहबी संकीर्णता पर आधारित थी। वह राजपूत राजाओं से अपने साम्राज्य का विस्तार तो करवाना चाहता था किंतु साथ ही उन्हें मुसलमान भी बनाना चाहता था। औरंगजेब की हिन्दू विरोधी नीति के कारण राजपूत राज्यों के साथ उसका संघर्ष अनिवार्य हो गया। औरंगजेब की राजपूत नीति बुंदेलों से युद्ध सबसे पहले […] - [औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति](https://bharatkaitihas.com/muhiuddin-muhammad-aurangzeb-second-part/): औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति न केवल मुगल सल्तनत के लिए, न केवल भारत की जनता के लिए अपितु स्वयं उसके लिए भी विनाशकारी सिद्ध हुई। औरंगजेब अपनी सल्तनत का विस्तार भारत के बचे हुए भू-भाग तथा उत्तर पूर्व में उन क्षेत्रों तक करना चाहता था जिन पर किसी समय तैमूर लंग का शासन था। उसने […] - [औरंगजेब के अंतिम दिन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/): औरंगजेब के अंतिम दिन कष्ट से भरे हुए थे। वह भारत की समस्त प्रजा को सुन्नी मुसलमान बनाना चाहता था किंतु लाखों हिन्दुओं का रक्त बहाकर भी वह इस लक्ष्य को अर्जित नहीं कर पाया। उसके सामने ही चारों ओर विद्रोहों की ज्वालाएँ फूट पड़ी थीं। 1682 ई. से औरंगजेब (आलमगीर) दक्षिण में लड़ रहा […] - [औरंगजेब के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/aurangzebs-successor/): औरंगजेब के उत्तराधिकारी न तो औरंगजेब द्वारा छोड़ी गई विशाल मुगलिया सल्तनत को संभाल सके और न औरंगजेब द्वारा उत्पन्न की गई अव्यवस्था को संभाल सके। 1707 ई. में दक्खिन के मोर्चे पर जब औरंगजेब की मृत्यु हुई, तब तक मुगल सल्तनत राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक दृष्टि से काफी कमजोर हो गई थी किंतु उसकी […] - [मुगल सल्तनत का विघटन](https://bharatkaitihas.com/disintegration-of-mughal-sultanate-first-part/): औरंगजेब के आँखें बन्द करते ही चारों तरफ से मुगल सल्तनत का विघटन आरम्भ हो गया। सल्तनत के प्रभावशाली अमीरों और मनसबदारों ने अपने-अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित करने आरम्भ कर दिये। आरम्भ में यह कार्य केन्दीय राजधानी दिल्ली से दूर के क्षेत्रों में हुआ, बाद में उत्तर भारत में भी कई छोटे-छोटे राज्य बन गये। […] - [मुगल सल्तनत का अंत](https://bharatkaitihas.com/disintegration-of-mughal-sultanate-second-part/): मुगल सल्तनत का अंत कोई आकस्मिक राजनीतिक घटना नहीं थी। मुगल सल्तनत का विघटन तो औरंगजेब के जीवनकाल में ही आरम्भ हो गया था। मुगल सल्तनत का अंत होने के कारण मुगल दरबार में दलबन्दी अमीरों, मनसबदारों, शहजादों तथा बेगमों के निजी स्वार्थों और आपसी स्पर्द्धा के कारण हुमायूँ के समय से ही मुगल दरबार […] - [मुगल शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/mughal-governance-and-institutions-first-part/): मुगल शासन व्यवस्था को भारतीय इतिहास में कुलीनों का शासन कहा जाता है। मुगलकालीन शासन व्यवस्था के मूल ढाँचे को खड़ा करने का श्रेय अकबर को है। उसने जिस शासन पद्धति को लागू किया, वह थोड़े-से परिवर्तनों के साथ औरंगजेब के समय तक तथा उसके भी बाद तक जारी रही। मंगोलों की शासन व्यवस्था में […] - [मुगलों की मनसबदारी प्रथा](https://bharatkaitihas.com/mansabdari-system-of-mughals/): आधुनिक इतिहासकार अभी तक मुगलों की मनसबदारी प्रथा को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। फिर भी इतना स्पष्ट है कि मनसबदारी प्रथा सैनिक रैंक के साथ-साथ जमींदारी की हैसियत से भी जुड़ी हुई थी। मुगलों की मनसबदारी प्रथा मनसब प्रथा की आवश्यकता अकबर के शासन के आरम्भिक वर्षों में शाही सेना में मंगोल, तुर्क, […] - [मुगलों की जागीरदारी प्रथा](https://bharatkaitihas.com/feudatory-system-of-mughals/): मुगलों की जागीरदारी प्रथा का आधार वे हिन्दू एवं मुसलमान सेनापति थे जो अपनी प्रजा पर कड़ाई से नियंत्रण करके प्रजा से राजस्व वसूल करके केन्द्रीय कोषागार में समय पर जमा करवा सके। मुगलों की जागीरदारी प्रथा में जागीरों के प्रकार राज्य कर्मचारियों को वेतन के बदले जो भूमि दी जाती थी उसे जागीर कहते […] - [मुगलों का प्रांतीय शासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): मुगलों का प्रांतीय शासन पूर्ववर्ती तुर्कों द्वारा स्थापित प्रांतीय शासन की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ था। विद्रोह करने वाले प्रांतपतियों का सख्ती से दमन किया जाता था। बाबर एवं हुमायूँ ने प्रान्तीय व्यवस्था स्थापित करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया। इसलिये सल्तनत कालीन व्यवस्था ही चलती रही। अकबर के शासनकाल मंे मुगल सल्तनत को सूबों […] - [मुगलों की सैनिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/mughal-governance-and-institutions-second-part/): मुगलों की सैनिक व्यवस्था ही उनकी साम्राज्य शक्ति का मुख्य आधार थी। सेना के बल पर ही इतने विशाल साम्राज्य को स्थिर रखा जा सकता था। मुगलों की सैनिक व्यवस्था बाबर ने सैनिक शक्ति के बल पर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। उसकी सैन्य व्यवस्था तैमूर और चंगेज खाँ के संगठन पर आधारित थी। बाबर […] - [मुगलों की न्याय व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): मुगलों की न्याय व्यवस्था के सम्बन्ध में इतिहासकारों के मध्य विवाद रहा है। जदुनाथ सरकार ने इस व्यवस्था को सुगम, सक्रिय एवं अपूर्ण बताया है। डॉ. आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव ने इसे दोषपूर्ण बताया है जबकि डॉ. हसन ने इसे समयानुकूल माना है। डॉ. जैन का मत है कि मुगलों की न्याय व्यवस्था कम खर्चीली, शीघ्र कार्य […] - [मुगलों की राजस्व व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): मुगलों की राजस्व व्यवस्था पूर्ववर्ती दिल्ली सल्तनत कालीन राजस्व व्यवस्था से अधिक मजबूत थी। प्रजा से कर वसूल करके केन्द्रीय कोषागार तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए थे। बाबर और हुमायूँ, दोनों का शासनकाल किसी प्रकार के आर्थिक सुधारों को कार्यान्वित करने के लिए अपर्याप्त रहा। अकबर ने सल्तनत की अर्थव्यवस्था को संगठित […] - [मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2/): मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन करते समय हमें मध्ययुगीन परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिये। उस युग में धार्मिक कट्टरता की प्रधानता थी और कोई भी संस्था उससे अप्रभावित नहीं रह पाई थी। उस युग में यातायात, आवागमन तथा संचार के साधनों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया था। केन्द्रीय सरकार के लिए शासन की प्रांतीय […] - [मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/land-and-land-revenue-arrangements-of-mughals/): मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था अकबर के समय में स्थापित हुई थी। इस कार्य में राजा टोडरमल की मुख्य भूमिका थी। चूंकि राजा टोडरमल अफगान शासक शेरशाह सूरी का भी मंत्री था। इसलिए मुगलकालीन अर्थव्यवस्था को शेरशाह कालीन अर्थव्यवस्था ही माना जाता है। भारत पर अधिकार स्थापित करने वाले प्रारम्भिक तुर्क सुल्तानों के समक्ष यह समस्या […] - [मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व](https://bharatkaitihas.com/mughal-economy-land-ownership-and-land-revenue-agriculture-industry-technology-technology/): मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्वों में कृषि, भूस्वामित्व, भूराजस्व, कृषि, प्रौ़द्योगिकी एवं उद्यो तथा वाणिज्य एवं व्यापार आते हैं। मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्वों में कृषि, भूस्वामित्व, भूराजस्व, कृषि, प्रौ़द्योगिकी एवं उद्यो तथा वाणिज्य एवं व्यापार आते हैं। हमने इस अध्याय को तीन भागों में विभक्त किया है-1. मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व, 2. मुगलकालीन […] - [मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80/): प्राचीन काल से ही भारत में प्रौद्योगिकी विकास की गति बहुत धीमी रही थी। मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग भी विशेष उन्नति नहीं कर सका। मुगलकालीन प्रौद्योगिकी धातु प्रौद्योगिकी इस युग में धातु-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुछ उन्नति हुई। कांसे, पीतल, लोहे, सोना और चाँदी के बर्तन, मूर्तियाँ बनाने की प्रौद्योगिकी पहले की ही तरह चलती […] - [मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य](https://bharatkaitihas.com/trade-and-commerce-in-mughal-economy/): मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य वैदेशिक एवं अन्तर-प्रादेशिक दोनों ही स्तरों पर उन्नत अवस्था में था। व्यापार पर लगने वाले कर से मुगलों को अच्छी आय होती थी, इसलिए व्यापारियों को तंग नहीं किया जाता था। मुगल काल में आन्तरिक एवं बाह्य, दोनों प्रकार का व्यापार उन्नति पर था। पुरातन समय से ही भारत के बाह्य […] - [सरदार पटेल : प्रेरक एवं रोचक प्रसंग - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/one-hundred-seventeen-stories-of-sardar-patels-life/): इस विशाल राष्ट्रव्यापी आयोजन से देश के 140 करोड़ लोगों तक सरदार पटेल द्वारा राष्ट्र को दिये गये अवदान की जानकारी भी नये सिरे से पहुंचेगी जो देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ करेगी। - [भगवान श्रीराम के वंशज थे सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-a-descendant-of-lord-shri-ram/): सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म एक गुजराती लेवा पटेल परिवार में हुआ। लेवा स्वयं को भगवान श्रीराम के वंशज मानते हैं। उनके अनुसार लेवा भगवान श्रीराम के पुत्र लव के वंशज हैं। लेवा जाति पंजाब में निवास करने वाली क्षत्रिय जाति थी जो किसी समय गुजरात में आकर रहने लगी। लेवा जाति की पाटीदार […] - [लाड़बाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-and-vitthalbhai-were-last-to-remember-for-sweets/): सरदार वल्लभ भाई पटेल के पिता का नाम झबेरभाई और माता का नाम लाड़बाई था। अपने माता-पिता की कई संतानों में से एक होने के कारण मिठाई के लिये सबसे अंत में याद किये जाते थे वल्लभभाई और विट्ठलभाई। झबेरभाई की पहली पत्नी की मृत्यु होने पर उनका दूसरा विवाह हुआ। दूसरी पत्नी लाड़बाई उनसे […] - [सरदार का आत्मिक बल](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-stained-his-body-with-burning-bars/): सरदार पटेल का आत्मिक बल आजादी की लड़ाई के दौरान किए गये संघर्ष में उनके बहुत काम आया। वे कभी न तो अपने संकल्प से डिगे, न कर्म से डिगे और न उन्होंने किसी के समक्ष समर्पण किया। - [सरदार पटेल की हास्यप्रियता](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-did-not-let-any-opportunity-to-laugh/): अपने व्यक्तित्व में गंभीरता एवं हास्यप्रियता के समुचित मिश्रण के बल पर ही सरदार पटेल ने न केवल कोनार्ड कोरफील्ड जैसे षड़यंत्रकारी अंग्रेज अधिकारियों को हवाई जहाज में बैठाकर इंग्लैण्ड भेजा दिया अपितु भारत के 565 राजाओं के राज्य भारत में सम्मिलित करवा लिए। - [सरदार पटेल का स्वाभिमान](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-did-not-worry-about-opposition-from-anyone/): सरदार पटेल का स्वाभिमान – किसी से भी विरोध हो जाने की चिंता नहीं करते थे वल्लभभाई सरदार पटेल का स्वाभिमान बचपन से ही उच्च स्तर पर था। वे न तो बाल्यकाल में किसी से डरे, न अपने कैरियर में किसी से दबे और न आजादी की लड़ाई के दौरान किसी पुलिस अधिकारी अथवा जेलर […] - [गुजराती भाषा से प्रेम](https://bharatkaitihas.com/two-quarreling-scions-drove-everyone-away/): गुजराती भाषा से प्रेम – दो दंगाई पाड़ों ने सबको भगा दिया सरदार पटेल को बाल्यकाल में गुजराती भाषा से प्रेम था। चूंकि वे मेधावी क्षात्र थे, इसलिए अध्यापक चाहते थे कि वल्लभ भाई संस्कृत भाषा पढ़ें किंतु वल्लभ भाई ने संस्कृत के स्थान पर गुजाराती भाषा को चुना। मैट्रिक में विद्यार्थियों को अन्य विषयों […] - [झबेर बा से विवाह](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-wanted-to-go-to-england-and-see-what-such-a-specialty-is-in-that-country/): वे यह जानकर आश्चर्य चकित थे कि अंग्रेजी बोलने वाले अंग्रेजों का इंग्लैण्ड, बहुत छोटा सा देश है किंतु उन्होंने दुनिया में अपना राज्य इतना फैला लिया है कि उसमें कभी सूरज नहीं डूबता। - [गोधरा में वकालात](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-became-independent-lawyer-after-passing-mukhtaris-examination/): वल्लभभाई को किसी शहर से विफल होकर चले जाना अच्छा नहीं लगा। इसलिए वे गोधरा में वकालात करते रहे। - [बोरसद में वकालात](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-came-to-borsad-from-godhra-to-help-his-elder-brother/): बोरसद में वकालात के दौरान वल्लभभाई की ख्याति और आय दोनों में ही कई गुना वृद्धि हुई। वल्लभभाई के सम्पर्कों में भी विस्तार हुआ। - [मुकदमेबाजों के हथकण्डे](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-carefully-studied-the-tactics-of-litigants/): अंग्रेजों ने भारत में ब्रिटिश न्याय प्रणाली पर आधारित न्यायालयों की स्थापना की थी। इस व्यवस्था में पीड़ित को न्याय मिलने की प्राथममिकता नहीं थी, अपति विभिन्न आधारों पर अपराध कारित नहीं होने की स्थापना की जाती थी। इस कारण अपराधी अपराध करने के बाद विभिन्न प्रकार के हथकण्डे अपनाते थे। सरदार पटेल ने निर्दोष […] - [अंग्रेजी न्याय - को जेल जाने से बचा लिया वल्लभभाई ने !](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-saved-innocent-railway-inspector-from-going-to-jail/): वल्लभभाई ने मुकदमे का अध्ययन किया तो समझ गये कि दुष्ट अंग्रेज अधिकारी ने इतना मजबूत जाल रचा है कि वल्लभभाई अपने मुवक्किल को कोर्ट में सजा होने से नहीं बचा पायेंगे। - [कर्मनासा (23)](https://bharatkaitihas.com/karmanasa-river/): कुदरत ने मध्य एशियाई मंगोलों का भाग्य उनके पुण्यकर्मों से नहीं उनकी खूनी ताकत से लिखा था किंतु हुमायूँ की आधी खूनी ताकत तो हिन्दुस्तान की आबोहवा ने खत्म कर दी थी और बची-खुची ताकत कर्मनासा ने नष्ट कर दी। जहाँ एक ओर भाग्यलक्ष्मी बैराम खाँ पर मेहरबान हुई वहीं दूसरी ओर हुमायूँ के उन […] - [जाके प्रिय न राम बैदेही (24)](https://bharatkaitihas.com/who-does-not-love-lord-ram-and-sita/): युवा संन्यासी ने लिखा- जाके प्रिय न राम बैदेही। तजिए ताहि  कोटि  बैरी  सम  जद्यपि  परम  सनेही। तज्यौ पिता  प्रहलाद,  बिभीषन  बंधु  भरत  महतारी। बलि गुरु तज्यो, कंत ब्रज बनितनि भये मुद मंगल कारी। जिस अयोध्या को मीर बाकी जला कर क्षार कर गया था और भगवान श्रीराम के जन्म स्थल पर स्थित विशाल देवालय […] - [लशकर गेब (25)](https://bharatkaitihas.com/lashkar-geb/): अचानक उसने देखा कि दुश्मन की सेना के पीछे से एक लश्कर प्रकट हुआ। बात ही बात में वह लश्कर टिड्डी दल की तरह दुश्मन पर छा गया। हुमायूँ ने अपने आदमियों से पूछा कि यह क्या लशकर गेब  है ?  कन्नौज से हुमायूँ और बैरामखाँ की सेनायें अलग हो गयीं थीं। जब हुमायूँ आगरा […] - [खानका (26)](https://bharatkaitihas.com/khanka/): एक दिन दोनों बादशाहों ने शिकार खेलने के बाद चोगानबाजी और कबलअंदाजी की। उस दिन बैरमबेग को खानका का खिताब दिया गया। हिन्दुस्थान से अपना दाना-पानी उठ गया जानकर हुमायूँ हिन्दुस्थान छोड़कर कंधार की ओर रवाना हुआ। हुमायूँ का भाई कामरान उसका रास्ता रोककर बैठ गया। वह नहीं चाहता था कि हुमायूँ सही सलामत हिन्दुस्थान […] - [फरमान (27)](https://bharatkaitihas.com/decree/): बैराम खाँ ने तुहमास्प से ईरानी सेना प्राप्त की और उससे तथा हूमायूँ से एक-एक फरमान लेकर फिर से हिन्दुस्थान आया। ये फरमान उसने हुमायूँ के भाई कामरान के नाम लिखवाये थे ताकि भाई को भाई के खिलाफ नहीं लड़ना पड़े और उनमें प्रेम हो जाये। बैरामखाँने हिन्दुकुश पर्वत पार कर कांधार पर आक्रमण किया। […] - [कातर निगाहें (28)](https://bharatkaitihas.com/beggar-eyes/): बैराम खाँ एक ऐसा स्वामिभक्त था जिसके हृदय में निजी अभिमान का अंशमात्र भी नहीं होता और जो अपने स्वामी की कातर निगाहें देखने के बजाय मर जाना अधिक पसंद करता है, भले ही स्वामी कितना ही मक्कार और बदजात क्यों न हो! कामरान ने एक माह तक बैराम खाँ को अपने पास रखा उसने […] - [तोप के सामने (29)](https://bharatkaitihas.com/in-front-of-cannon/): दुष्ट कामरान ने शहजादे अकबर को तोप के सामने लटका दिया। अब उसे बचाने वाला कोई नहीं था। बैराम खाँ ने पिछले दरवाजे से दुर्ग में घुसकर दुर्ग की प्राचीर से लटक रहे तीन वर्ष के अकबर को तोप के सामने से उतारा और मुख्य दरवाजा खोलकर हुमायूँ के पास चला आया। हिन्दुकुश पर्वत पार […] - [आँखों में सलाई (30)](https://bharatkaitihas.com/needle-in-eye/): बैराम खाँ ने उसी समय लोहे की सलाईयां गरम करवाईं और कामरान की आँखों में फिरा दीं। आँखों में सलाई फिरते ही कामरान अंधा होकर चीखने और छटपटाने लगा। कांधार हाथ से निकल जाने के बाद कामरान फिर से काबुल भाग आया और मोर्चा बांधकर बैठ गया। वह जानता था कि हुमायूँ भले ही कितना […] - [फिर से दिल्ली (31)](https://bharatkaitihas.com/delhi-again/): अपने भाईयों से मुक्ति पाकर हुमायूँ ने फिर से दिल्ली और आगरा पर अधिकार करने की ठानी। 1540 ईस्वी में उसने दिल्ली और आगरा छोड़े थे और दर-दर की ठोकरें खाते हुए चौदह साल हो चले थे। वह काबुल से चलकर पेशावर आया और सिंधु नदी पार करके कालानौर  तक चला आया। यहाँ उसने अपनी […] - [मेवों की बेटी (32)](https://bharatkaitihas.com/daughters-of-meo-community/): पहली मेवों की बेटी चंगेज और तैमूरलंग के खानदान में और दूसरी बेटी तुर्कों की कराकूयलू शाखा के बहारलू खानदान में ब्याह दी गयी। आगे चलकर इसी मेवों की बेटी से 17 दिसम्बर 1556 को लाहौर में बैरामखाँ के पुत्र अब्दुर्रहीम का जन्म हुआ। दिल्ली के दक्षिण पश्चिम में स्थित रेवाड़ी, अलवर और तिजारा परगनों […] - [कच्चे चबूतरे का बादशाह (33)](https://bharatkaitihas.com/king-of-raw-pops/): बैराम खाँ ने साढ़े तेरह साल के बालक अकबर को बादशाह तो घोषित कर दिया किंतु वह केवल कच्चे चबूतरे का बादशाह था। मुगलों का असली तख्त तो दिल्ली में था जिस पर कोई भी कभी भी कब्जा कर सकता था। जब हुमायूँ दिल्ली को प्रस्थान कर गया तो सिकंदर सूर ने पहाड़ों से निकल […] - [सलीमा बेगम (34)](https://bharatkaitihas.com/salima-begum/): अकबर अपनी बुआ की बेटी सलीमा बेगम से यद्यपि उम्र में छोटा था किंतु वह सलीमा बेगम पर जान लुटाता था और उससे विवाह करना चाहता था लेकिन दूसरी ओर सलीमा बेगम खुरदरे चेहरे वाले जिद्दी और अनपढ़ अकबर को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। सदियों से ईरानी खून में तुर्कों, मंगोलों, तातारों, हब्शियों […] - [अकाल का महादानव (35)](https://bharatkaitihas.com/demon-of-famine/): बैरामखाँ जानता था कि सिकंदर सूर, आदिलशाह और इब्राहीम से निबटे बिना दिल्ली तक पहुंच पाना संभव नहीं था लेकिन इन सब शत्रुओं से प्रबल एक और शत्रु था जो बैरामखाँ को सबसे ज्यादा सता रहा था। वह था देश व्यापी महाअकाल। अकाल का महादानव पूरे देश में ताण्डव कर रहा था। सलीमा बेगम को […] - [धूसर बनिया (36)](https://bharatkaitihas.com/gray-merchant/): एक जमाना था जब रेवाड़ी की सड़कों पर एक धूसर बनिया नमक बेचा करता था। उसका नाम था हेमचंद्र लेकिन वह अपने आप को हेमू ही कहता था। वह बातों का बड़ा खिलाड़ी था। देखते ही देखते वह किसी को भी अपने पक्ष में कर लेता था। धीरे-धीरे वह राजकीय कर्मचारियों से घुल मिल गया […] - [विक्रमादित्य हेमचंद्र (37)](https://bharatkaitihas.com/vikramaditya-hemachandra/): जब महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र दिल्ली के अधीश्वर हुए तो देशवासियों का उत्साह विशाल झरने की भांति फूट पड़ा। महाराज हेमचंद्र के अफगान व तुर्क सैनिक हिन्दू जनता के इस उत्साह को आश्चर्य और कौतूहल से देखते थे। जब हेमू को ज्ञात हुआ कि हुमायूँ की मृत्यु हो गयी है और बैरामखाँ अकबर को लेकर दिल्ली […] - [काबुल या दिल्ली (38)](https://bharatkaitihas.com/kabul-or-delhi/): जब अकबर के समक्ष यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि काबुल या दिल्ली तो अकबर ने अकबर अपने अमीरों की सलाह से आदेश दिया कि सेना को दिल्ली की ओर बढ़ाने के बजाय काबुल की ओर कूच किया जाये। उन दिनों उत्तरी भारत के समस्त बादशाह और सेनापति हेमू के नाम से थर्राते थे। इब्राहीम सूर […] - [तार्दीबेग की हत्या (39)](https://bharatkaitihas.com/murder-of-tardibeg/): जब अकबर जंगल में काफी आगे तक चला गया तो बैरामखाँ ने तार्दीबेग को अपने डेरे पर बुलवाया। जैसे ही तार्दीबेग बैरामखाँ के डेरे पर पहुँचा, बैराम खाँ ने तलवार निकाल कर तार्दीबेग की हत्या कर दी। अकबर की सहमति पाकर बैरामखाँ ने खिज्र खाँ को सिकंदर सूर से निबटने के लिये तैनात किया और […] - [फिर से पानीपत (40)](https://bharatkaitihas.com/panipat-again/): बाबर ने पानीपत के मैदान में ही इब्राहीम लोदी से भारत का राज्य छीना था। आज एक बार मुगल सेना फिर से पानीपत की ओर चल पड़ी थी जहाँ उसे महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र की विशाल सेना से दो-दो हाथ करने थे। जब महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र ने देखा कि बैराम खाँ मुगल सेना लेकर दिल्ली की […] - [काफिरों की हत्या (41)](https://bharatkaitihas.com/killing-the-infidels/): काफिरों की हत्या करने के बाद बैरामखाँ ने अपने प्रबलतम शत्रु महाराज हेमचंद्र का सिर काबुल भेज दिया जहाँ उसे चौराहे पर लटका दिया गया ताकि शत्रु समझ लें कि बैरामखाँ का विरोध करने वालों का क्या हश्र होता है। अलीकुलीखाँ और शाहकुली मरहम मूर्च्छित महाराजा हेमचंद्र को लेकर बैरामखाँ के पास आये। महाराज के […] - [सोने की ईंटें (42)](https://bharatkaitihas.com/gold-bricks/): रानी अलवर जिले में स्थित बीजवाड़े की पहाड़ियों में जाकर छिप गयी। उसने कई दिनों तक जंगलों में घूम-घूम कर सोने की ईंटें तथा स्वर्ण-आभूषण धरती में अलग-अलग स्थानों पर दबा दिये ताकि यदि बैराम खाँ सोने का पीछा करता हुआ बीजवाड़े की पहाड़ियों में आ भी पहुँचे तो भी उसे एक साथ सम्पूर्ण कोष […] - [मस्त हाथी (43)](https://bharatkaitihas.com/drunk-elephant/): एक दिन शाम के समय बैराम खाँ यमुना में नौका विहार के लिये गया। जाने कैसे एक शाही हाथी बिगड़ गया और बैराम खाँ को कुचलने के लिये झपटा। बैराम खाँ किसी तरह मस्त हाथी से अपनी जान बचाकर लौट आया। दिल्ली और उसके बाद आगरा भी मुगलों ने फिर से हासिल कर लिये किंतु […] - [खून की होली (44)](https://bharatkaitihas.com/bloody-holi/): नासिरुल्मुल्क को लगा कि अब बैराम खाँ खून की होली खेलने वाला है। इसलिए वह किसी तरह जान बचा कर अकबर के पास भाग आया। जब उसने आपबीती कहानी अपने मुँह से अकबर को सुनाई तो अकबर कांप उठा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहाड़ों की तलहटी में उन दिनों धमरी के पास मऊका परगना हुआ […] - [संकरी घाटी (45)](https://bharatkaitihas.com/narrow-valley/): विश्वभर के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे जब सेवक ने अपने स्वामी से विद्रोह किया हो किंतु ऐसे उदाहरण एक-दो ही हैं जब स्वामी अपने सेवक के विरुद्ध विद्रोह करने पर विवश हुआ हो। खानखाना बैराम खाँ और अकबर अब इतिहास की उसी संकरी घाटी में आ खड़े हुए थे जहाँ अपने सेवक […] - [माहम अनगा (46)](https://bharatkaitihas.com/maham-angaa/): माहम अनगा का लड़का आदम खाँ तथा जंवाई शियाबुद्दीन भी बहुत ही बदमाश और घमण्डी थे तथा किसी की भी परवाह नहीं करते थे। माहम अनगा और उसका परिवार यदि किसी से भय खाते थे तो वह था बैराम खाँ। अकबर की बहुत सी धायें और आयाएं थीं। उनमें से कुछ तो शिशु अकबर को […] - [आगरा से पलायन (47)](https://bharatkaitihas.com/departure-from-agra/): जब बादशाह ने आगरा से पलायन करके दिल्ली के लिए कूच किया तो खुरजे में माहम अनगा का जंवाई शहाबुद्दीन अहमद खाँ अपने सब भाई बंदों के साथ बादशाह की पेशवाई के लिये हाजिर हुआ। जब दिल्ली पर काबिज होने के चार साल पूरे होने को आये तो बैरामखाँ और अकबर राजकीय कार्य के सिलसिले […] - [हरम सरकार (48)](https://bharatkaitihas.com/government-of-harem/): अकबर के आगरा से दिल्ली चले आने पर आगरा में बैराम खाँ की सरकार और दिल्ली में हरम सरकार स्थापित हो गयी। ये दोनों सरकारें एक-दूसरे को खत्म करने पर तुल गयीं। अकबर इन दोनों सरकारों के बीच में बादशाह होते हुए भी प्यादे की तरह बेबस होकर रह गया। कैसी विचित्र शतरंज थी यह? […] - [लखनवी (49)](https://bharatkaitihas.com/lucknowi/): सलीमशाह ने भी एक बार एक लाख स्वर्ण मुद्रायें दी थीं जिन्हें बाबा रामदास ने उसी प्रकार भिखारियों में बांट दिया था जिस प्रकार से इस बार बांट दिया है। इसलिये सलीमशाह ने उसका नाम लखनवी रख दिया था। बैराम खाँ उस तपस्वी संगीतज्ञ को प्रणाम करके उठ आया। उन दिनों आगरा से मथुरा तक […] - [आगरा से अलविदा (50)](https://bharatkaitihas.com/goodbye-agra/): बैराम खाँ ने आनंद और विनोद में डूबे उस परिवार को दखल देना ठीक नहीं समझा और दूर से ही उल्टे पैरों लौट गया। उसने मन ही मन निश्चय कर लिया कि अब वह खुदा की इबादत के लिये मक्का चला जायेगा। आगरा से अलविदा कहने का समय आ गया था। जब अपने सारे आदमियों […] - [बैराम खाँ का विद्रोह (51)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): बैराम खाँ का विद्रोह मुगलों के इतिहास की ऐसी दर्दनाक दास्तान है जिसे पढ़कर किसी भी नेकदिल इंसान का दिल सियासत लिए हिकारत के भावों से भर जाएगा। वापस आगरा न जाकर बैराम खाँ वहीं से अलवर के लिये रवाना हो गया ताकि वहाँ से अपने परिवार को लेकर मक्का के लिये प्रस्थान कर सके। […] - [बारूद में आग (52)](https://bharatkaitihas.com/rising-tension/): अब तो पूरी तरह बारूद में आग दिखा दी गयी थी। अपनी मान-मर्यादा को इस तरह धूल में मिलते देखकर सत्ता का चतुर खिलाड़ी बैराम खाँ एक बार फिर से खून की होली खेलने को तैयार हो गया। जब अकबर को ज्ञात हुआ कि बैराम खाँ बागी हो गया है तो उसे माहम अनगा की […] - [विशाल अजगर (53)](https://bharatkaitihas.com/giant-python/): बादशाही लश्कर पहाड़ के नीचे जमा खड़ा था। ज्यों ही बैरामखाँ आता हुआ दिखायी दिया तो बड़ा कोलाहल मचा। मुगल सेना के विशाल अजगर ने वक्राकार होकर बैरामखाँ को चारों ओर से घेर लिया। जब अकबर ने सुना कि बैरामखाँ अपनी सेना लेकर जालंधर तक आ पहुँचा है तो भी वह शिकार खेलने में व्यस्त […] - [नकाबपोश (54)](https://bharatkaitihas.com/masked/): बहुत दूर से वे पाँचों नकाबपोश घोड़े फैंकते हुए चले आ रहे थे। बालू के टीले और कंटीले झुरमुट उनका रास्ता रोकते थे किंतु उनकी परवाह किये बिना वे सरपट घोडा़ दौड़ाये चले जा रहे थे। उनके घोड़े थक चुके थे और मुँह से श्वेत फेन बहने लगा था। हालांकि नकाब के कारण अश्वारोहियों के […] - [बुरी खबर (55)](https://bharatkaitihas.com/bad-news/): अकबर अन्तर्मन के जिस दड़बे में छिपकर रहता था, उस दड़बे की छत इस बुरी खबर की आंधी ने एक ही झटके में उड़ा दी थी। अकबर ने इस दड़बे में स्मृतियों के जाने कितने क्षण कबूतरों की तरह पाल रखे थे। – ‘रहीम कौन ?’ तरुण बादशाह ने अत्यन्त ही अन्यमनस्कता से पूछा। असमय […] - [दो फकीर (56)](https://bharatkaitihas.com/two-saints/): बालक अब्दुर्रहीम को दो फकीर अकबर के पास लेकर आए थे। उन फकीरों के मुंह से बैराम खाँ की हत्या का विवरण सुनकर अकबर का चेहरा सफेद पड़ गया, मानो किसी ने उसके चेहरे का समस्त रक्त निचोड़ लिया हो! बाबा जम्बूर और मुहम्मद अमीन दीवाना बादशाह की सेवा में उपस्थित हुए तो बादशाह ने […] - [खुरदरा चेहरा (57)](https://bharatkaitihas.com/rough-face/): अकबर का खुरदरा चेहरा और अधिक खुरदरा हो आया। बहुत देर तक तरुण बादशाह के खुरदरे चेहरे पर विभिन्न प्रकार की लकीरें बनती-बिगड़ती रहीं। अधिकतर लकीरें ऐसी थीं जिन्हें बाबा जम्बूर किसी भी हालत में नहीं पढ़ सकता था लेकिन बाबा जम्बूर ने हारना नहीं सीखा था। बाबा जम्बूर तो उस समय भी नहीं हारा […] - [प्रलाप (58)](https://bharatkaitihas.com/babble/): अकबर मन ही मन प्रलाप कर रहा था। आज जीवन में पहली बार उसे इस बात का ज्ञान हुआ था कि बड़े से बड़े बादशाह का भी परिस्थितियों पर कोई नियंत्रण नहीं होता। अकबर के खुरदरे चेहरे से चिंता की लकीरें मिटी नहीं। न तो अब्दुर्रहीम और न ही दोनों करिश्माई फकीर उसके सीने में […] - [शत्रु की वापसी (59)](https://bharatkaitihas.com/return-of-enemy/): जब माहम अनगा को पता लगा कि बैरामखाँ का बेटा फिर से बादशाह के पास लौट आया है तो उसकी चिंता का पार न रहा। उसे लगा कि शत्रु की वापसी हो गई है और अब तक के सब किये धरे पर पानी फिर गया है। माहम चाहती थी कि माहम का अपना बेटा आदमखाँ […] - [हरम सरकार के दुर्दिन (60)](https://bharatkaitihas.com/bad-days-of-harem-government/): माहम अनगा की बेटी माहबानू की सगाई अब्दुर्रहीम से कर देने की खुशी में अकबर ने माहम अनगा के बेटे अजीज कोका को खानेआजम की पदवी दी लेकिन कुछ दिनों बाद जब अकबर ने अतगाखाँ को राज्य का वकीले मुतलक[1]  नियुक्त किया तो माहम अनगा समझ गयी कि अब मेरे दिन लद गये किंतु वह […] - [फिर से गुजरात (61)](https://bharatkaitihas.com/gujarat-again/): हुमायूँ के गुजरात अभियान के दौरान बैरामखाँ का सितारा बुलंदी पर पहुँचा था और वह साधारण सिपाही से मुगलिया सल्तनत का खानखाना तथा अकबर के अतालीक के पद पर आसीन हुआ था। ईस्वी 1572 में अकबर ने गुजरात पर चढ़ाई की। इस अभियान में उसने मिर्जा खाँ अब्दुर्रहीम को भी अपने साथ लिया। इस प्रकार […] - [सितारा बुलंदी पर (62)](https://bharatkaitihas.com/fortune-at-heights/): रहीम का सितारा भाग्य के आकाश पर पूरे जोर से चमकने लगा। रहीम का सितारा बुलंदी पर देखकर बहुत से लोगों की छाती पर सांप लोटने लगे। जब अकबर ने मेवाड़ नरेश महाराणा प्रतापसिंह के खिलाफ अभियान किया तो उसने अपने समस्त योग्य सेनापतियों को अजमेर पहुँचने का आदेश दिया। मिर्जाखाँ रहीम को भी ये […] - [मछलियाँ और कछुए (63)](https://bharatkaitihas.com/fish-and-turtles/): मछलियाँ और कछुए इतिहास के उस मोड़ पर आ पहुंचे थे जहाँ अब उनमें से किसी एक का साम्राज्य बचे रहना था और दूसरे को मिट जाना था। ईसा की नौवीं-दसवीं शताब्दी में चम्बल नदी के किनारे कूर्मवंशी क्षत्रियों की तीन शाखाएं राज्य करती थीं। इनमें से एक शाखा नरवर पर, दूसरी ग्वालिअर पर तथा […] - [पेट में दर्द (64)](https://bharatkaitihas.com/stomach-ache/): महाराणा प्रताप ने मानसिंह से कहलवाया कि हमारे पेट में दर्द है इसलिए हम आपके साथ भोजन नहीं करेंगे। मानसिंह तुरंत समझ गया कि महाराणा प्रताप मुझे म्लेच्छों का नौकर जानकर मेरे साथ भोजन नहीं करेंगे और यह मेरा अपमान है। जब मेवाड़ राजवंश ने अपनी कन्याएं मुगलों को देने से मना कर दिया तो […] - [नववर्ष उत्सव (65)](https://bharatkaitihas.com/new-year-celebration/): आज के दरबार में बड़ी भीड़ थी। दरबारे आम में वैसे भी बड़ी भीड़ रहती है किंतु आज की भीड़ कुछ अलग किस्म की थी। आम दिनों में तो मांगने वालों और फरियादियों का तांता लगता है किंतु आज के दिन रियाया बादशाह को नववर्ष उत्सव की मुबारिकबाद देने के लिये उपस्थित हुई थी। आज […] - [चित्रकूट की एक शाम (66)](https://bharatkaitihas.com/an-evening-of-chitrakoot/): चित्रकूट की एक शाम तीन राजपुरुष अपने कीमती और ऊँचे घोड़ों को मंथर गति से मंदाकिनी के किनारे-किनारे चलाये ले जा रहे थे। वे तीनों असाधारण रूप से चुप थे। वनावली के सघन होने पर भी मार्ग बिल्कुल साफ था किंतु ऐसा लगता था कि नदी और अश्व अपनी-अपनी गति को एक दूसरे के अनुरूप […] - [प्रजापालन (67)](https://bharatkaitihas.com/service-to-public/): राजा के मंत्री ही राजा की ओर से प्रजापालन , प्रजा का अनुशासन और उसकी सार-संभाल करते हैं। जिस राजा के सचिव, सहायक और सेवक प्रजा को दुख देते हैं, उस राजा का नाश हो जाता है और प्रजा पीड़ित होती है। अतिथियों के भोजन के बाद चारों व्यक्ति तसल्ली से बैठे। किसी को किसी […] - [अयोग्य शिष्य (68)](https://bharatkaitihas.com/inept-pupil/): खानखाना अब्दुर्रहीम अच्छी तरह जनता था कि शहजादा सलीम एक ऐसा अयोग्य शिष्य है जिसे कभी भी पढ़ा-लिखा कर इंसान नहीं बनाया जा सकता। कच्छवाहों की राजकुमारी जोधाबाई से निकाह करके अकबर ने उसे मरियम उज्जमानी नाम दिया और उसे शाह-बेगम घोषित किया। उससे उत्पन्न पुत्र सलीम का नामकरण सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के […] - [कविता का व्याकरण (69)](https://bharatkaitihas.com/poetry-grammar/): खानखाना अच्छी तरह समझता था कि जीवन रूपी कठोर कविता का व्याकरण और चाटुकारिता से भरी हुई कविता का व्याकरण कितने अलग होते हैं। शहजादे का अतालीक मुकर्रर किये जाने से अब्दुर्रहीम के रुतबे और ख्याति में एकाएक ही बहुत वृद्धि हुई। अब्दुर्रहीम की विद्वता की ख्याति सुनकर उसके दरबार में दुनिया भर के लोग […] - [जुआ (70)](https://bharatkaitihas.com/gambling/): मिर्जा खाँ को रणक्षेत्र से बाहर खींच ले जाने का प्रयास करने वाले उसके शुभचिंतक सैनिक नहीं जानते थे कि मिर्जा खाँ आज सेनापति नहीं था, जुआरी था, जिसने पराये हाथों में थमे पासों पर अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया था। हर हालत में उसे जुआ खेलना ही अभीष्ट था, पक्के जुआरी की तरह, […] - [नोपकृतं (71)](https://bharatkaitihas.com/do-never/): प्राप्य चलानधिकारान् शत्रुषु,  मित्रेषु बंधुवर्गेषुं। नोपकृतं  नोपकृतं  नोपकृतं  कि कृतं तेन।। अर्थात्- जिसने चल अधिकार पाकर शत्रु, मित्र और भाई बंदों का क्रमशः उपकार, उपकार और उपकार नहीं किया, उसने कुछ नहीं किया। गुजरात विजय के उपलक्ष्य में खानखाना बनाये जाने पर अब्दुर्रहीम दिल्ली दरबार में उपस्थित हुआ और उसने बादशाह के प्रति आभार का […] - [बनी के राना (72)](https://bharatkaitihas.com/king-of-forest/): तुम जंगल के सेर बनी के राना । बड़ेन  की  चाल  बड़ेन पहचाना ।। – ‘अब्बा हुजूर, फिर क्या हुआ?’ जाना ने पिता के कंधे पर मुक्का मारा। – ‘अरे कब क्या हुआ?’ खानखाना ने पूछा। – ‘अरे कल जो कहानी आप हमें सुना रहे थे, उसमें आगे क्या हुआ?’ – ‘हम कल कौनसी कहानी […] - [अहेर (73)](https://bharatkaitihas.com/hunt/): मैं यहाँ अहेर खेलने के लिये आया था। अपने साथियों से अलग होकर जंगल में भटक गया। खानखाना अपने कपड़े झाड़ते हुए उठ बैठा। उसकी भुजा में अब भी भयानक दर्द हो रहा था। अरावली की सघन उपत्यकाओं में एक आदमी तेजी से भागा चला जा रहा था किंतु हाथ में गाय का रस्सा पकड़े […] - [जसोदा बार बार भाखै (74)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%88/): जसोदा बार बार भाखै । है कोऊ ब्रज में हितू हमारो चलत गोपालहि राखै। अकबर ने शहजादा मुराद का विवाह खानखाना अब्दुर्रहीम के साले खाने-आजम मिर्जा अजीज कोका की बेटी से करना निश्चित किया। शहजादे मुराद के विवाह में भाग लेने के लिये अकबर ने मुगलिया सल्तनत के लगभग सभी बड़े अमीर, उमराव और सेनापतियों […] - [वकीले मुतलक (75)](https://bharatkaitihas.com/royal-representative/): एक तरफ मुगल सल्तनत का वकीले मुतलक है तो दूसरी ओर सल्तनत का महत्वपूर्ण सेनापति। स्वयं बादशाह तक इन दोनों में से किसी को नाराज नहीं करना चाहता। बादशाह ने दरबार बर्खास्त करने का आदेश दिया और खानखाना को संकेत से अपने साथ आने के लिये कह कर उठ खड़ा हुआ। एकांत पाकर बादशाह ने […] - [विचित्र दरबार (76)](https://bharatkaitihas.com/strange-court/): थोड़ी ही देर में रहीम ने जिस दरबार में प्रवेश किया उस विशाल और विचित्र दरबार की शोभा देखते ही बनती थी। दरबार का शामियाना सोने और चांदी की चोबों पर खड़ा था जो दिन-रात मोतियों की झालरों से झिलमिलाता था। – ‘हुजूर! बाहर फरियादियों का हुजूम इकट्ठा हो गया है। कुछ लोग तो सुबह […] - [शिकायत (77)](https://bharatkaitihas.com/complaint/): अमीरों को सबसे अधिक शिकायत इस बात से थी कि साधारण सिपाही के घर में जन्म लेने वाला रहीम हुमा का पर लगाकर दरबार करता है। भले ही उसका बाप खानखाना के पद तक जा पहुँचा हो किंतु था तो वह मूल रूप से एक साधारण सिपाही ही! खानखाना का ऐसा ठाठ-बाट, अकूत सम्पदा और […] - [जाडा महडू (78)](https://bharatkaitihas.com/jada-mahadu/): – ‘हुजूर! महाराणा प्रतापसिंह के भाई जगमाल का वकील जाडा महडू आपकी सेवा में हाजिर हुआ चाहता है।’ गुलाम ने राज्य के वकील खानखाना अब्दुर्रहीम से निवेदन किया। उस समय खानखाना अपने निजी दरबार में व्यस्त था। – ‘जाडा महडू!’ खानखाना के भीतर स्मृतियों का पिटारा खुला। कहाँ सुना यह नाम? कब? अचानक ही उसे […] - [चाकर रघुबीर के (79)](https://bharatkaitihas.com/servant-of-god/): हम चाकर रघुबीर के पटौ लिखौ दरबार। तुलसी हम का होंइगे नर के  मनसबदार। – ‘महात्मन्! शंहशाह की इच्छा है कि आप उनके दरबार को पवित्र करें।’ शहंशाह अकबर के वकीले मुतलक और काशी के सूबेदार अब्दुर्रहीम खानखाना ने गुंसाईजी से हाथ जोड़कर निवेदन किया। – ‘खानखानाजी, कैसी बात करते हैं आप? हम तो दास […] - [हुक्म उदूली (80)](https://bharatkaitihas.com/disobey/): जब तुलसीदासजी ने अकबर के दरबार में जाने से मना कर दिया तो अकबर ने इसे अपनी हुक्म उदूली समझा और वह आग-बबूला हो गया। – ‘उस भिखारी को इतना घमण्ड?’ क्रोध से चीख पड़ा अकबर। – ‘नहीं जिल्लेइलाही। बाबा को किसी तरह का घमण्ड नहीं। उन्होंने अपनी युवावस्था में ही गृह संसार त्यागकर सन्यास […] - [वानर (81)](https://bharatkaitihas.com/monkeys-in-royal-palace/): आधी रात के बाद सीकरी में हा-हाकार मच गया। जहाँ देखो वहीं लंगूर। महलों, छतों और कंगूरों पर उत्पात मचाते हुए हजारों लंगूर अचानक ही जाने कहाँ से आ गये थे। सैंकड़ों वानर लाल-लाल मुँह के थे तो हजारों काले मुँह के। उनकी लम्बी पूंछों और विकराल दाँतों ने बच्चों और स्त्रियों को ही नहीं […] - [छत्तीस लाख (82)](https://bharatkaitihas.com/thirty-six-lakhs/): खानखाना ने उसी समय अपने कोश में से छत्तीस लाख रुपये कवि गंग को प्रदान किये। उस पूरे काल में संभवतः किसी और कवि को इतना बड़ा पुरस्कार नहीं मिला था। – ‘महाराज जगन्नाथ!’ खानखाना ने अपने दरबार में उपस्थित कवि जगन्नाथ को सम्बोधित करके कहा। – ‘जी हुजूर!’ – ‘तनिक इस पर पर विचार […] - [मुख देखे दुःख उपजत (83)](https://bharatkaitihas.com/unlucky-face/): भारतीय संतों को राजाओं, बादशाहों और धनपतियों से कोई काम नहीं होता था। अकबर इस बात को समझ नहीं पाया। संत कुंभनदास ने अकबर को लिखकर भिजवाया- जिनको मुख देखे दुःख उपजत तिनको करिबे परी सलाम। – ‘महाराज! बैरामखाँ को सुअन अब्दुर्रहीम महाराज के श्रीचरनन में कोटि-कोटि प्रणाम निवेदन करि रह्यौ। खानखाना ने अपना मस्तक […] - [हुमा (84)](https://bharatkaitihas.com/auspicious-bird/): अब्दुर्रहीम के दरबारी मुल्ला शकेबी ने सिंध विजय पर एक कविता पढ़ी जिसमें कहा गया था- जो हुमा आकाश में उड़ाता था, उसको तूने पकड़ा और जाल से छोड़ दिया। अब्दुर्रहीम ने मुल्ला को एक हजार अशर्फियां इनाम में दीं। जिस प्रकार बारहमूला काश्मीर का दरवाजा है और जिस प्रकार गढ़ी बंगाल का दरवाजा है […] - [हसन गंगू (85)](https://bharatkaitihas.com/hassan-gangu/): एक दिन उस ब्राह्मण ने हसन गंगू की भाग्य रेखाओं को देखकर बताया कि एक दिन तू इस प्रदेश का राजा बनेगा। उसी ब्राह्मण के निर्देश पर हसन गंगू मुहम्मद बिन तुगलक की सेना में भर्ती हो गया और शीघ्र ही वह दक्षिण भारत में दिल्ली सल्तनत का सबसे विश्वस्त आदमी बन गया। आज जिस […] - [चाँदबीबी (86)](https://bharatkaitihas.com/chaandbibi/): हब्शियों से निबटकर मियाँ मंझू ने चाँदबीबी से निबटने की योजना निर्धारित की किंतु उसी समय उसने सुना कि मुगल शहजादा मुराद और खानखाना अब्दुर्रहीम विशाल सेना लेकर अहमद नगर की ओर बढ़ रहे हैं। सोलहवीं शताब्दी के अंतिम दशक में अहमद नगर अपने सरदारों की आपसी लड़ाई से अत्यंत जर्जर हो चला था। बुरहान […] - [छोटे सरकार (87)](https://bharatkaitihas.com/junior-lords/): छोटे सरकार की सवारी निकलने वाली है। उसे देखने के लिये सैंकड़ों बाशिंदे रास्ते के दोनों ओर जमा हैं। जब सवारी निकल जाये तो लोग भी निकल जायेंगे और हम भी। बड़ी-बड़ी मूंछों और लम्बी दाढ़ियों वाले चार दैत्याकार कहार शाही पालकी को अपने मजबूत कंधों पर उठाये हुए तेजी से नगर की सड़कों पर […] - [बेर केर को संग (88)](https://bharatkaitihas.com/mismatch/): सम्पूर्ण उत्तरी भारत पर अधिकार करने के बाद ई. 1591 में अकबर ने दक्षिण भारत के अहमदनगर, खानदेश, बीजापुर, बरार और गोलकुण्डा राज्यों पर अधिकार करने की नीयत से अपने दूत इन राज्यों को भिजवाये और उनसे राजस्व की मांग की। इस पर खानदेश के सुल्तान राजा अलीखाँ ने तो अकबर की अधीनता स्वीकार कर […] - [शहजादे की पगड़ी (89)](https://bharatkaitihas.com/prestige-issue-2/): किले पर अधिकार करने में असफल रहने के बाद मुराद समझ गया कि खानखाना की शक्ति प्राप्त किये बिना अहमदनगर का किला नहीं लिया जा सकता। उसने हार कर खानखाना को बुलाया। खानखाना अपने आदमियों के साथ शहजादे की सेवा में हाजिर हुआ। मुराद ने अन्य दिनों के विपरीत बड़ी लल्लो-चप्पो के साथ खानखाना का […] - [रहस्यमय संवाद (90)](https://bharatkaitihas.com/mystical-dialog/): शहजादे की अनुमति पाकर खानखाना स्वयं मुगलों की ओर से चाँदबीबी के सम्मुख उपस्थित हुआ। इससे उसके एक साथ दो उद्देश्य पूरे हो गये। एक तो खानखाना फिर से इस अभियान के केंद्र में आ गया और दूसरा यह कि चाँदबीबी को देख पाने की उसकी साध पूरी हो गयी। वह जब से अहमदनगर की […] - [वचन भंग (91)](https://bharatkaitihas.com/breach-of-promise/): राजधानी से निकलने के बाद तीन साल बीत जाने पर भी शहजादा मुराद बादशाह अकबर को एक भी विजय की सूचना नहीं भेज पा रहा था इससे मुराद की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। जब खानखाना ने अहमदनगर की सुलताना चाँद बीबी की ओर से प्राप्त प्रस्ताव मुराद के समक्ष रखा कि यदि मुराद अहमदनगर […] - [दक्षिण से वापसी (92)](https://bharatkaitihas.com/return-from-south/): शहजादा मुराद खानखाना के नियंत्रण से छुटकारा पाना चाहता था। उसने अकबर से खानखाना की शिकायत की कि वह चांद बीबी से मिल गया है। इस शिकायत पर खानखाना की दक्षिण से वापसी हो गई। मुराद तो यही चाहता था। यह बड़ी भारी विजय थी जिसके कारण पूरा दक्खिन काँप उठा था। जीत का सेहरा […] - [उलटा पहिया (93)](https://bharatkaitihas.com/reverse-wheel/): जब खानखाना लाहौर में अकबर की सेवा में उपस्थित हुआ तो अकबर ने उसकी ड्यौढ़ी बंद करवा दी।[1]  खानखाना निरंतर शहजादे की अप्रसन्नता, सादिकखाँ की शत्रुता और अपनी बेगुनाही के बारे में तरह-तरह से अर्ज करता रहा। जब कई माह बीत गये और कोई परिणाम नहीं निकला तो एक दिन खानखाना ने अंतिम प्रयास करने […] - [खप जासी खुरसाण (94)](https://bharatkaitihas.com/khap-jaasee-khurasaan/): – ‘हुजूर! महाराणा अमरसिंह का चारण आपकी सेवा में हाजिर हुआ चाहता है।’ पहरेदार ने खानखाना को सूचना दी। – ‘उसे यहीं ले आ।’ खानखाना ने आज्ञा दी। चारण मुजरा करके चुपचाप खड़ा हो गया। खानखाना उस समय कुछ लिख रहा था। इसलिये वह मुजरा स्वीकार करके फिर से अपने काम में लग गया। खानखाना […] - [फिर से दक्षिण में (95)](https://bharatkaitihas.com/south-again/): खानखाना नहीं चाहता था कि वह फिर से दक्षिण में जावे। वह जानता था कि दक्षिण उसके लिये दो पाटों की चक्की बन चुका है। एक तरफ बादशाह है तो दूसरी तरफ चाँद। दक्षिण के मोर्चे से एक बुरी खबर आई जिसे सुनकर अकबर थर्रा उठा। दक्षिण ने बलि लेनी शुरू कर दी थी। शहजादा […] - [नकाब में चाँद (96)](https://bharatkaitihas.com/moon-in-mask/): जब खानखाना दक्षिण में पहुँचा तो दानियाल ने उसे सबसे पहले अहमदनगर पर ही घेरा डालने के आदेश दिये। शहजादे के आदेश से खानखाना ने अहमदनगर को घेर लिया। एक रात जब खानखाना अपने डेरे में बैठा हुआ कुछ लिखा-पढ़ी कर रहा था तो उनकी नजर अचानक एक काले साये पर पड़ी जो चोरी से […] - [नियति के मोहरे (97)](https://bharatkaitihas.com/toys-of-destiny/): मुगलिया राजनीति तथा दक्खिन की शिया राजनीति के बीच खानखाना तथा चांद बीबी नियति के मोहरे बन कर रह गए थे। उधर सुलताना ने और इधर खानखाना ने योजना के अनुसार जल्दी-जल्दी सियासी मोहरे इधर से उधर किये। सुलताना ने अभंगखाँ हबशी को पंद्रह हजार घुड़सवारों सहित किले से बाहर निकाल कर चित्तार की तरफ […] - [बंदूक में शराब (98)](https://bharatkaitihas.com/alcohol-in-gun/): एक तरफ चाँद के नहीं रहने से और दूसरी तरफ मुराद के मर जाने से खानखाना सभी तरह की दुविधाओं से बाहर निकल आया था और वह दक्षिण में जबर्दस्त दबाव बना रहा था। खानखाना के पुत्र एरच ने भी पिता का बहुत साथ दिया और मलिक अम्बर जैसे दुर्दांत शत्रु को वह लगातार पीटता […] - [तैमूर की समाधि (99)](https://bharatkaitihas.com/taimur-ki-samadhi/): मुराद के बाद दानियाल के मरने की खबर पाकर बादशाह का मन हर उस वस्तु से उचाट हो गया जो उसके आस-पास थी। उसके चेहरे का खुरदुरापन उसके मन में उतर आया था। वह मन की शांति प्राप्त करना चाहता था किंतु उसका कोई उपाय नहीं सूझता था। उसने मक्का जाने का निश्चय किया किंतु […] - [विद्रोही (100)](https://bharatkaitihas.com/the-rebels/): अकबर के तीन शहजादों में से दो छोटे शहजादे मुराद और दानियाल अत्यधिक शराब पीकर मर चुके थे। तीसरा तथा सबसे बड़ा शहजादा सलीम भी अत्यधिक शराब पीकर न केवल खुद मौत के कगार पर जा खड़ा हुआ था अपितु अपने बुरे दोस्तों की सोहबत में अपने बाप अकबर तथा पूरी मुगलिया सल्तनत को मौत […] - [कहर (101)](https://bharatkaitihas.com/havoc/): – ‘आसमान से कहर बरपा है जिल्ले इलाही।’ तातार गुलाम ने भय से कांपते हुए कहा। – ‘क्या है कमजात? क्यों आसमान से कहर बरपाता है? तुझे शहजादे की सेवा में भेजा था, वहाँ से भाग आया क्या?’ गुलाम की बात सुनकर अकबर को चिंता तो हुई किंतु उसने अपने स्वर को मुलायम ही बनाये […] - [सुलह (102)](https://bharatkaitihas.com/reconciliation/): अकबर की यह हालत देखकर सलीमा बेगम ने पिता-पुत्र के मध्य सुलह करवाने का विचार किया। वह अकबर से अनुमति लेकर इलाहाबाद गयी और सलीम को समझा बुझा कर आगरा ले आयी। सलीम अपने बाप की यह दुर्दशा देखकर उसके पैरों पर गिर पड़ा और अपने अपराधों के लिये पश्चाताप करने लगा। अकबर ने अबुल […] - [पहरे दर पहरे (103)](https://bharatkaitihas.com/pahare-dar-pahare/): – ‘शहजादे!’ एक फुसफुसाहट सी सलीम के कानों में पड़ी। उसने इधर-उधर देखा किंतु कोई दिखाई नहीं दिया। बाहर शाम घिर आई थी तथा कमरे में इतना कम प्रकाश था कि उसमें कुछ भी स्पष्ट देखना संभव नहीं था। – ‘इधर देखो, इधर।’ सलीम ने फिर दृष्टि घुमाई किंतु कुछ भी दिखायी नहीं दिया। – […] - [हुमायूँ की तलवार (104)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-sword/): अभी सूरज निकलने में कुछ समय था जब सलीमा बेगम ने अपनी लौण्डी सहित बादशाह सलामत के कक्ष में प्रवेश किया। सलीमा बेगम ने अपना पूरा बदन बुर्के में छिपा रखा था किंतु उसके मुँह से कपड़ हटा हुआ था। जबकि लौण्डी के चेहरे पर कपड़ा पड़ा हुआ था। सलीमा बेगम को देखकर कच्छवाहा पहरेदार […] - [असार संसार (105)](https://bharatkaitihas.com/destitute-world/): जिस दिन अकबर सलीम के सिर पर अपनी पगड़ी रखकर एक ओर को लुढ़क गया था उसके बाद वह कभी भी नये सूरज का उजाला नहीं देख सका। वह छः दिन तक बेहोश रहा। सातवें दिन आधी रात के लगभग अकबर के प्राण पंखेरू उड़ गये। राजा मानसिंह अपने आदमियों को लेकर महल से बाहर […] - [भाग्य की विडम्बना (106)](https://bharatkaitihas.com/irony-of-fate-2/): खुसरो आगरा से निकल कर दिल्ली होते हुए लाहौर की ओर भागा। अपने बारह हजार आदमी लेकर वह सिक्खों के गुरु अर्जुनदेव की शरण में पहुँचा। अर्जुनदेव ने उसे बादशाह होने का आशीर्वाद दिया। जब यह समाचार जहाँगीर को मिला तो उसकी रूह काँप गयी। वह स्वयं सेना लेकर लाहौर गया। भैंरोंवाल[1]  के निकट पिता […] - [खानखाना की चिंता (107)](https://bharatkaitihas.com/khaanakhaana-ki-chinta/): इधर खानखाना अपने दामाद दानियाल के मर जाने तथा अपनी बेटी के शोक में डूब जाने के दोहरे कहर से जर्जर हो चला था और उधर अकबर तथा सलीम के बीच घट रहे घटनाक्रम से उसकी चिंतायें दिन दूनी और रात चौगुनी होती जाती थीं। आगरा से जिस तरह के समचार मिल रहे थे उनसे […] - [समंद और फतूह (108)](https://bharatkaitihas.com/samand-and-fatuah/): बेटी जाना की तसल्ली के लिये खानखाना ने मुकर्रब खाँ के साथ ही आगरा जाने का विचार किया। वह चाहता था कि चाहे जैसे भी हो, जाना के बेटों को लौटा लाये। खानखाना पूरी तैयारी के साथ जहाँगीर के सामने उपस्थित हुआ। वह इस अवसर को गंवाना नहीं चाहता था। उसने मोतियों के दो हार, […] - [दक्षिण में आग (109)](https://bharatkaitihas.com/fire-in-south/): खानखाना के दक्षिण से हटते ही दक्खिनियों के हौंसले बुलंद हो गये। वे एक जुट होकर खानेजहाँ लोदी में कसकर मार लगाने लगे। सल्तनत का विश्वस्त सेनापति अब्दुल्लाखाँ खानेजहाँ की सहायता के लिये भेजा गया किंतु वह हार कर गुजरात भाग आया। खाने आजम कोका भी बुरी तरह परास्त हुआ। रामदास कच्छवाहा और मानसिंह भी […] - [ऊदाराम ब्राह्मण (110)](https://bharatkaitihas.com/udaram-brahmin/): दक्षिण में इस तरह की शांति देखकर खानेजहाँ लोदी की छाती पर साँप लोट गया। वह कतई नहीं चाहता था कि बादशाह इस बात को देखे कि जिस मोर्चे पर खानेजहाँ असफल हो गया, वहाँ किसी और ने सफलता के झण्डे गाढ़ दिये। वस्तुतः मुगलिया सल्तनत की स्थापना से लेकर उसके अंत तक मुगल सेनापतियों […] - [कहर दर कहर (111)](https://bharatkaitihas.com/kahar-dar-kahar/): खानखाना ने जहाँगीर को हीरे की एक खान समर्पित की जो खानखाना के बेटे अमरूल्लाह ने खानदेश के जमींदार पनजू से छीनी थी। जहाँगीर ने अत्यंत प्रसन्न होकर खानखाना का खिताब सात हजारी मनसब और सात हजारी सवार कर दिया। ये वे क्षण थे जब जहाँगीर अपने जीवन में खानखाना पर सर्वाधिक प्रसन्न हुआ। इसके […] - [जौहर (112)](https://bharatkaitihas.com/jauhar/): पूरी मुगल सेना में हड़कम्प मचा हुआ था। जिसे देखो वही कुछ न कुछ नवीन सूचना बांटने में लगा हुआ था। जितने मुँह उतनी बातें। कोई कहता था कि खानखाना मलिक अम्बर के सामने समर्पण करने जा रहा है। कोई कहता था कि खानखाना ने जौहर करने का फैसला किया है। हालांकि जौहर हिन्दू स्त्रियों […] - [आधा सेर कबाब (113)](https://bharatkaitihas.com/aadha-ser-kabaab/): जहाँगीर ने अपने अमीरों से कहा कि मैंने अपना सारा राज्य नूरजहाँ को दे दिया है। अब मुझे क्या चाहिये? कुछ भी तो नहीं, सिवाय एक सेर शराब और आधा सेर कबाब के! किसी समय ईरान में मिर्जा गयास बेग नामक आदमी रहता था। वह था तो मिर्जाओं के वंश में से किंतु उसकी माली […] - [भेड़िये का बच्चा (114)](https://bharatkaitihas.com/bhediye-ka-bachcha/): जहाँगीर के पाँच बेटे थे- खुसरो, परवेज, खुर्रम, जहाँदार और शहरयार। खुसरो पहले ही बादशाह द्वारा आँखें फुड़वाकर मरवाया जा चुका था। अब परवेज ही सबसे बड़ा था और वही बादशाह को सबसे प्रिय था लेकिन नूरजहाँ के भाई आसफ अली की बेटी का विवाह खुर्रम के साथ हो जाने से नूरजहाँ परवेज के पक्ष […] - [दादा-पोते (115)](https://bharatkaitihas.com/daada-pote/): मुगलिया राजनीति की खूनी चौसर पर अब दादा.पोते एक-दूसरे का सिर उतारने के लिए आमने-सामने ख़ड़े थे। एक तरफ था अब्दुर्रहीम खानखाना तो दूसरी ओर उसका पोता मनूंचहर! खानखाना के समझाने पर खुर्रम ने बादशाह के पास क्षमा याचना की कई अर्जियाँ भिजवाईं किंतु बादशाह ने उन पर कोई विचार नहीं किया। जो भी वकील […] - [षड़यंत्र (116)](https://bharatkaitihas.com/conspiracy/): – ‘क्या बात है लाल मुहम्मद?’ – ‘हुजूर कहते हुए जुबान कटती है। जान बख्शी जाये तो कुछ हिम्मत करूं।’ – ‘बिना किसी डर के अपनी बात कहो, लाल मुहम्मद। तुम हमारे भरोसेमंद हो।’ शहजादे खुर्रम से आश्वासन पाकर लाल मुहम्मद ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकाली और खुर्रम की ओर बढ़ा दी। – […] - [वक्त की दगा (117)](https://bharatkaitihas.com/cheating-of-time/): जब महावतखाँ को खानखाना की कैद के समाचार मिले तो वह दूने उत्साह से भरकर खुर्रम की ओर दौड़ा। महावतखाँ को लगा कि भाग्य ने उसके लिये एक साथ दो-दो सफलतायें पाने का अवसर उपस्थित कर दिया है। खुर्रम की हालत तो उसी समय पतली हो गयी थी जब उसकी सेनाएं खुर्रम को छोड़कर परवेज […] - [उड़ावे फहीम (118)](https://bharatkaitihas.com/udaave-phaheem/): खानखाना अब पूरी तरह दो हिस्सों में बंट गया। उसका बेटा दाराबखाँ, बेटे शाहनवाजखाँ की पुत्री और दाराबखाँ के बेटे खुर्रम के पास थे और पोता मनूंचहर तथा स्वयं खानखाना परवेज के पास थे। ऐसी स्थिति में खानखाना के लिये कहीं ठौर न बची थी। जाये तो जाये कहाँ? उसने खुर्रम के निज मंत्री भीम […] - [जागत व्हैगो भोर (119)](https://bharatkaitihas.com/aagat-vhaigo-go-bhor/): जब मौत सिर पर मण्डराने लगी तो रहीम ने हँस कर कहा- करम हीन रहिमन लखो, धँसो बड़े घर चोर। चिंतत ही बड़ लाभ के, जागत व्हैगो  भोर। फहीम के गिरते ही खानखाना गिरफ्तार कर लिया गया। उसका डेरा परवेज के डेरे के पास लगाया गया। खानखाना के डेरे के बाहर सामान्य सिपाहियों और छोटे […] - [मन उचाट (120)](https://bharatkaitihas.com/mind-blowing/): खुर्रम ने दाराबखाँ को रोहतास से दक्षिण के मोर्चे पर जाने के आदेश दिये। दाराबखाँ रोहतास से निकल कर लगभग सौ कोस ही आगे गया होगा कि उसे अब्दुर्रहीम के कैदी हो जाने के समाचार मिले। अब्दुर्रहीम को दुबारा कैदी बनाये जाने पर दाराबखाँ को मुगलों से घृणा हो गयी। उसके फरिश्ते जैसे निर्दोष और […] - [शहीदी तरबूज (121)](https://bharatkaitihas.com/shaheedee-tarabooj/): अब्दुर्रहीम ने थाली पर से कपड़ा हटाया तो उसकी आँखें पथरा गयीं। अपने पौत्र दाराब खाँ का कटा हुआ सिर छाती से लगाते हुए उसने कहा – यह शहीदी तरबूज  है। खास बेल पर ही लगता है। खुर्रम का नौकर अब्दुल्लाहखाँ एक नम्बर का हरामी था। वह कई सालों से अब्दुर्रहीम से अदावत रखता था। […] - [क्षमादान (121)](https://bharatkaitihas.com/kshamaadaan/): अब्दुर्रहीम अपने शिष्य जहाँगीर के चरणों में गिरकर रोता रहा तो जहाँगीर ने उसे क्षमादान दे दिया। उसने खानखाना को फिर से पुराना ओहदा, पदवी, अख्तियार और खिलअत देकर उसका बहुत मान-सम्मान किया। तीन वर्ष लगातार भागते-भागते खुर्रम थक गया। उसका स्वास्थ्य गिर गया। उसके विश्वस्त आदमी मर गये और सेना भी छीज कर अत्यल्प […] - [लाल किले में हत्याकाण्ड](https://bharatkaitihas.com/british-killed-residents-of-red-fort-like-pheasants/): कितना दर्दनाक दृश्य था जब औरतों और बच्चों की भीड़ कश्मीरी और मोरी दरवाजे से बाहर आ रही थी। इनमें वे औरतें भी थीं जो कभी अपने घरों से बाहर नहीं निकली थीं। - [शाही बेगमों के कपड़े](https://bharatkaitihas.com/british-entered-the-red-fort-and-looted-the-clothes-of-the-royal-begums/): जो दुपट्टे, कमीजें, सलवारें, घाघरे और गरारे कल तक मुगल बेगमें और शहजादियां पहनती थीं, उन दुपट्टों, कमीजों सलवारों, घाघरों और गरारों को अंग्रेज और अंग्रेजी सेना के भारतीय सिपाही अपनी बीवियों के लिए ले जा रहे थे। - [बहादुरशाह जफर की गिरफ्तारी](https://bharatkaitihas.com/hodgson-brought-emperor-to-jail-in-red-fort/): बेगम जीनत महल नहीं चाहती थी कि बादशाह दिल्ली छोड़कर भागे क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि हॉडसन अपने वायदे पर स्थिर रहेगा और बहादुरशाह जफर, बेगम जीनत महल, शहजादे जवां बख्त तथ जीनत महल के पिता मिर्जा कुली खाँ को सुरक्षा देगा। - [मुगल शहजादों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/hodgson-naked-and-looted-the-princess/): हॉडसन ने तीनों शहजादों को गाड़ी से उतरने को कहा। फिर नंगा होने को कहा। फिर एक कॉल्ट रिवॉल्वर निकालकर उसने तीनों को गोली मार दी। - [जीनत महल](https://bharatkaitihas.com/british-soldiers-took-up-beard-of-mughal-emperor/): हम लोग एक और बेगम से मिलने गए जो अपने जमाने में बहुत खूबसूरत मानी जाती थीं। हमने उनको अत्यंत शोकग्रस्त अवस्था में पाया। - [दिल्ली में कत्लेआम](https://bharatkaitihas.com/british-reminded-taimurlung-and-nadirshah-in-slaughtering-people-of-delhi-and-awadh/): ई.1857 में तीन दिन तक चले कत्लेआम में दिल्ली के हजारों लोगों को मारा गया। जफरनामा लिखता है कि लोगों के सिर काट कर उनके ऊँचे ढेर लगा दिये गये और उनके धड़ हिंसक पशु-पक्षियों के लिये छोड़ दिये गये.......। - [लालकिले की गंदी कोठरियाँ](https://bharatkaitihas.com/british-put-bahadur-shah-zafar-in-a-dirty-cell/): जब भी कोई पुरुष इन शाही बेगमों एवं शहजादियों के कमरों में आता है तो ये दीवार की तरफ मुंह फेर लेती हैं। बादशाह को देखने आने वाले अंग्रेजों में से बहुतों को इस तरह औरतों का पर्दा तोड़कर बादशाह के परिवार को अपमानित करने में बहुत मजा आता है।' - [दिल्ली को दण्ड](https://bharatkaitihas.com/british-dug-up-every-house-in-delhi-and-took-out-the-goods/): जब दिल्ली के अधिकांश लोग या तो मार दिए गए या भाग गए तब अंगेजी सेनाओं ने दिल्ली के खाली पड़े घरों को लूटने का काम आरम्भ किया। - [मिर्जा गालिब](https://bharatkaitihas.com/british-allowed-hindu-families-to-come-back-to-delhi/): दिल्ली में न अब कोई सौदागर है न खरीदार! न कोई दुकानदार जिससे आटा खरीद सकें। धोबी, नाई और सफाई वाले सब दिल्ली से गायब हो गए थे। हमने अपने मौहल्ले की गली को पत्थरों के एक ऊंचे से ढेर से बंद कर लिया है। - [सलातीनों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/british-officials-hunted-and-killed-the-princes-and-salatins/): बहुत से शहजादों को बर्मा के मौलामेन नामक शहर की जेलों में भेज दिया गया। इनमें एक शहजादा या सलातीन तो निरा बालक ही था और एक शहजादा या सलातीन नितांत बूढ़ा था। - [रानी विक्टोरिया की प्रजा](https://bharatkaitihas.com/bahadur-shah-zafar-said-that-i-am-not-a-subject-of-queen-victoria/): बादशाह तथा उसके पक्षधरों का कहना था कि कम्पनी सरकार बादशाह पर मुकदमा नहीं चला सकती क्योंकि बादशाह रानी विक्टोरिया की प्रजा नहीं है। - [बादशाह का कोर्ट मार्शल](https://bharatkaitihas.com/red-fort-saw-another-of-its-emperors-being-insulted/): बादशाह को कई गवाहों के बयान सुनाए गए। बादशाह ने उन सारे गवाहों को झूठा बताया और तकिए पर सिर टिकाकर आराम से बैठ गया। - [बहादुरशाह का निष्कासन](https://bharatkaitihas.com/mughals-came-from-fargana-on-horses-were-loaded-into-bullock-carts-and-sent-to-burma/): 9 मार्च 1858 को कोर्ट मार्शल अंतिम बार बैठा। उसी दिन शाम को तीन बजे कोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया। पांचों सैनिक न्यायाधीशों ने एक स्वर से बहादुरशाह जफर को अपराधी ठहराया। - [जॉन लॉरेंस](https://bharatkaitihas.com/lords-of-britain-wanted-delhi-to-be-erased-from-the-map-of-india/): जॉन लॉरेंस ने लॉर्ड केनिंग को लिखा कि दिल्ली के अंग्रेज इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं मानो वे हिंदुस्तानियों को जड़ से उखाड़ फैंकने की लड़ाई कर रहे हों। - [लाल किले पर खतरा](https://bharatkaitihas.com/john-lawrence-saves-the-red-fort-from-being-invisible/): यमुना की तरफ सफेद संगमरमर की बारादरियां बनी हुई थीं, उन्हें भी नष्ट कर दिया गया। समस्त सुनहरी गुम्बद और संगमरमर की फिटिंग्स वसूली एजेंटों ने उतरवा लीं। - [दिल्ली की जामा मस्जिद](https://bharatkaitihas.com/british-wanted-to-eradicate-the-mughals-from-delhi/): दिल्ली की जामा मस्जिद मूलतः एक हिन्दू मंदिर था जो मुसलमानों के भारत में आने से कई सौ साल पहले से दिल्ली की धरती पर विष्णु भगवान को समर्पित करके बनाया गया था। यह हिन्दू कला, स्थापत्य एवं शिल्प का अनूठा उदाहरण होता। यदि मुसलमानों ने इसे जामा मस्जिद में नहीं बदला होता तो यह […] - [मुगलों की दुर्दशा](https://bharatkaitihas.com/moon-like-appearance-women-of-red-fort-were-roaming-streets-wearing-torn-pajamas/): जो मुगल भारत के स्वामी होने का दावा करते थे, अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के बाद उन मुगलों की दुर्दशा अपने चरम पर पहुंच गई। उनमें से बहुत से तांगा चलाने लगे, जूतियां गांठने लगे और कुछ तो केवल भीख मांगकर खाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सके। जब अंग्रेजों ने अठ्ठारह सौ […] - [मुसलमानों का षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/british-alleged-that-the-red-fort-wanted-to-rule-india-again/): एक रक्त की नदी ने कम से कम उत्तरी भारत में दो जातियों को अलग-अलग कर दिया तथा उस पर पुल बाँधना एक कठिन कार्य ही था। - [सन् सत्तावन का विप्लव](https://bharatkaitihas.com/eer-savarkar-said-it-was-not-a-rebellion-but-indias-first-freedom-war/): जिन लोगों ने विप्लव में भाग लिया अथवा विप्लवकारियों को शरण एवं सहायता दी, उनकी प्रशंसा में गीतों की रचना की गई। - [लाल किले की विफलता](https://bharatkaitihas.com/red-fort-could-not-offer-gallantry-to-the-goddess-of-revolution/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की विफलता वस्तुतः लाल किले की विफलता थी। लाल किले में बैठे बादशाह को शक्ति का स्रोत मानकर क्रांतिकारियों ने उसे अपना नेता चुना किंतु उन्हें पता नहीं था कि लाल किला बिल्कुल लुंज-पुंज और निशक्त है। वह तो विगत लगभग एक सौ साल से अंग्रेजों की पेंशन पर जी […] - [दो गज जमीन](https://bharatkaitihas.com/owner-of-red-fort-did-not-even-get-two-yards-of-land-in-india/): उभरते हुए नए भारत में किलों, घोड़ों, तलवारों एवं पालकियों का समय पीछे छूट रहा था और पिस्तौलों से लेकर बम बरसाने वाली तोपों तथा ट्रेनों का समय आ गया था किंतु इस हिंदुस्तान में बाबर के बेटों के लिए कोई स्थान नहीं था। उन्हें अब रंगून में अपना भविष्य तलाशना था। - [वैवस्वत मनु तथा उनके वंशज राजाओं की कथा (23)](https://bharatkaitihas.com/story-of-vaivasvata-manu-and-his-descendant-kings/): पिछली कथाओं में हमने वराह कल्प के 14 मनुओं में से पहले मनु अर्थात् स्वायंभू-मनु की चर्चा की थी। साथ ही उनके पुत्रों उत्तानपाद एवं प्रियव्रत और पौत्रों ध्रुव तथा उत्तम की भी चर्चा की थी। इस कथा में हम वराह कल्प के वर्तमान मनु अर्थात सातवें मनु की चर्चा करेंगे जिन्हें वैवस्वत मनु के […] - [लाल किला तोड़ दो](https://bharatkaitihas.com/public-said-break-the-red-fort-free-the-azad-hind-fauj/): साथियो! आपके युद्ध का नारा हो- चलो दिल्ली, चलो दिल्ली। इस स्वतन्त्रता संग्राम में हम में से कितने जीवित बचेंगे, यह मैं नहीं जानता परन्तु मैं यह जानता हूँ कि अन्त में विजय हमारी होगी और हमारा ध्येय तब तक पूरा नहीं होगा जब तक हमारे शेष जीवित साथी ब्रिटिश साम्राज्य की कब्रगाह- लाल किले पर विजयी परेड नहीं करेंगे। - [भारतीय सम्प्रभुता का प्रतीक](https://bharatkaitihas.com/last-farewell-of-british-was-from-red-fort/): लाल किला आज भी बड़ी शान से दिल्ली में खड़ा है जहाँ भारत के प्रधानमंत्री प्रत्येक 15 अगस्त को झण्डा फहराते हैं । तिरंगे की गौरवमय उपस्थिति के कारण आज यह किला भारत की आन-बान और शान का प्रतीक है। - [भूमिका - रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/preface-razia-sultana/): भूमिका – रजिया सुल्तान पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक रजिया सुल्तान की भूमिका दी गई है जिसमें इस पुस्तक के बारे में संक्षिप्त जानकारी लिखी गई है। तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में जब दिल्ली सल्तनत पर लड़ाका तुर्की कबीले शासन कर रहे थे, एक यतीम शहजादी का दिल्ली के तख्त पर काबिज हो […] - [इल्तुतमिश का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/rise-of-shamsuddin-iltutmish/): रजिया सुल्तान का इतिहास उसके पिता शम्सुद्दीन इल्तुतमिश से शुरु होता है। इल्तुतमिश मध्य एशिया में रहने वाले तुर्कों के अल्बारी अथवा इल्बरी कबीले के एक प्रमुख एवं प्रभावशाली व्यक्ति आलम खाँ का प्रतिभाशाली तथा रूपवान पुत्र था। इस कारण उसे अपने पिता की विशेष कृपा तथा वात्सल्य प्राप्त था। इससे इल्तुतमिश के भाइयों तथा […] - [शहजादी रजिया](https://bharatkaitihas.com/succession-to-shehzadi-razia/): शहजादी रजिया भारत के मुस्लिम शासकों में सबसे अलग चमकता हुआ सितारा है जिसे कट्टरपंथी मुसलमानों ने शासन नहीं करने दिया तथा अकारण ही उसकी हत्या कर दी। शहजादी रजिया का जन्म रजिया का जन्म सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक की शहजादी कुतुब बेगम के गर्भ से हुआ था। चूंकि रजिया का जन्म एक शहजादी के पेट […] - [शाह तुर्कान का कहर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%b0/): जब तुर्की अमीरों ने मरहूम सुल्तान इल्तुतमिश की इच्छा को नकार दिया तथा शहजादी रजिया को सुल्तान बनाने से मना करके रुकनुद्दीन फीरोजशाह को सुल्तान बना दिया तो नए सुल्तान रुकनुद्दीन फिरोजशाह की माँ शाह तुर्कान का कहर मरहूम सुल्तान इल्तुतमिश की बेगमों एवं शहजादियों पर टूट पड़ा। शाह तुर्कान का कहर अब शाह तुर्कान […] - [रजिया का दांव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5/): जब शाह तुर्कान के अत्याचारों के कारण दिल्ली सल्तनत में चारों ओर असंतोष फैल गया तो राजनीति की चतुर खिलाड़ी शहजादी रजिया ने शाह तुर्कान से पंजा लड़ाने का निश्चय किया। रजिया का दांव उलटा भी पड़ सकता था किंतु रजिया के लिए यह करो या मरो जैसी स्थिति थी। राजनीति के दांवपेच किशोरावस्था से […] - [रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): रुकुनुद्दीन फीरोजशाह की हत्या हो जाने के बाद रजिया अपने मरहूम बाप इल्तुतमिश की इच्छा के अनुसार सल्तनत के तख्त पर बैठी। भारतीय इतिहास में उसे रजिया सुल्तान तथा रजिया सुल्ताना कहा गया है। रजिया सुल्तान के सिर पर छत्र ताना गया, चंवर ढुलाये गये और उसकी विरुदावली गाई जाने लगी। दिल्ली ने बहुत से […] - [रजिया सुल्तान का शासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): रजिया सुल्तान का शासन उस काल के सुल्तानों की तुलना में काफी अच्छा था। औरत होने के कारण वह इस्लाम के बल पर शासन नहीं कर सकती थी। उसे अपने मित्रों एवं शत्रुओं के बीच संतुलन स्थापित करना था। यह कार्य उसने बड़ी सूझबूझ से किया। रजिया सुल्तान का शासन अमीरों की पुनर्नियुक्ति रजिया ने […] - [रजिया सुल्तान की हत्या](https://bharatkaitihas.com/fall-of-razia/): रजिया सुल्तान की हत्या भारत के मुस्लिम शासन का सबसे दुखद अध्याय है। रजिया सुल्तान मुसलमान होते हुए भी केवल मुसलमानों को अपनी प्रजा नहीं मानती थी। वह दिल्ली के आसपास शासन कर रहे राजपूत शासकों से अच्छे सम्बन्ध बनाकर अपनी सल्तनत में शांति चाहती थी। रजिया की हत्या के पीछे एक बड़ा कारण यह […] - [रजिया सुल्तान की असफलता](https://bharatkaitihas.com/causes-of-failure-of-razia/): रजिया सुल्तान की असफलता के लिए स्वयं रजिया बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं थी। अपितु तुर्की अमीरों की संकुचित दृष्टि एवं स्थार्थपरक राजनीति ने रजिया सुल्तान को सफल नहीं होने दिया। यद्यपि रजिया सुल्तान इल्तुतमिश के उत्तराधिकारियों में सर्वाधिक योग्य तथा राजपद के सर्वाधिक उपयुक्त थी परन्तु दूषित राजनीतिक वातावरण में वह शासन चलाने में असफल […] - [रजिया सुल्तान का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/razias-character-and-her-actions/): रजिया सुल्तान का मूल्यांकन उसके शासनकाल की अवधि अथवा सामरिक सफलताओं से नहीं अपितु मध्यकालीन परिस्थितियों में दिखाए गए साहस एवं धैर्य से किया जा सकता है। प्रथम स्त्री सुल्तान रजिया भारत की प्रथम स्त्री सुल्तान थी। यद्यपि विदेशों में रजिया सुल्तान के पूर्व भी स्त्रियां तख्त पर बैठ चुकी थीं परन्तु भारत में अब […] - [इतिहास में रजिया सुल्तान का स्थान](https://bharatkaitihas.com/impact-of-razia-sultan-on-indian-history-and-public-psyche/): भारत के मुस्लिम इतिहास में रजिया सुल्तान का स्थान अल्पावधि के शासन के उपरांत भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि इल्तुतमिश या बलबन का। रजिया ने इल्तुतमिश और बलबन की ही तरह कट्टर तुर्की अमीरों पर नकेल कसने में सफलता प्राप्त की। मध्यकालीन इतिहास में रजिया सुल्तान भारत के मध्यकाल का इतिहास रजिया सुल्तान […] - [मोहनजोदारो की नृत्यांगना - भूमिका](https://bharatkaitihas.com/preface/): मोहनजोदारो की नृत्यांगना भारत की दस हजार साल पुरानी सभ्यता पर लिखा गया एक उपन्यास है। इस उपन्यास में आधारभूत सामग्री के रूप में उस काल का वैदिक साहित्य एवं सैंन्धव पुरातत्व काम में लिया गया है। शरीर रचना शास्त्र  (Racical Anthropology) की दृष्टि से भारत भूमि पर निवास करने वाली आदिम जातियों के छः […] - [सप्तसिंधु (1)](https://bharatkaitihas.com/saptasindhu/): उन दिनों सिंधु, शतुद्रि, विपासा, परुष्णि, असिक्नी, वितस्ता तथा सरस्वती का सम्पूर्ण क्षेत्र सप्त सैंधव अथवा सप्तसिंधु कहलाता था। यह बहुत बाद की बात है कि गंगा-यमुना का क्षेत्र आर्य संस्कृति के प्रसार का केन्द्र बना। नदियाँ केवल जल लेकर प्रवाहित नहीं होतीं। जल के साथ पर्वतीय खण्ड भी उनके आकर्षण में बंधे चले आते […] - [मरुस्थल का पथिक (2)](https://bharatkaitihas.com/desert-wanderer/): मरुस्थल का पथिक प्रतनु इस कार्य के लिये उन्हें पर्याप्त स्वर्ण चुकायेगा किंतु कोई भी सैंधव इतना बड़ा खतरा उठाने को तैयार नहीं हुआ। इस पर भी प्रतनु निराश नहीं हुआ। निराश होना तो उसने जैसे जाना ही नहीं। अन्ततः वही हुआ जिसका प्रतनु को भय था। उसने कभी नहीं चाहा था इन आकृतियों को […] - [मोहेन-जो-दड़ो (3)](https://bharatkaitihas.com/mohen-jo-daro/): मोहेन-जो-दड़ो के पशुपति महालय का प्रधान पुजारी किलात सैंधव सभ्यता के महान दार्शनिक कोल्या की सातवीं पीढ़ी का वंशज है। कोल्या सैंधव सभ्यता का अनुभवी पुरोहित, गूढ़ उपदेशक, सुप्रसिद्ध न्यायकर्ता और दृढ़ प्रशासक था। सिंधु नदी के तट पर स्थित मोहेन-जो-दड़ो! [1] आज से पाँच हजार साल पहले भारत भूमि पर पल्लवित और पुष्पित होने […] - [दिव्य पूजन (4)](https://bharatkaitihas.com/divine-worship/): दिव्य पूजन की अंतिम प्रार्थना से पूर्व पद्म पत्रों पर रखे सहस्रों दीप सिंधु में प्रवाहित कर दिये गये। सिंधु की अनंत लहरों पर लहराते-इठलाते सहस्रों ज्योतिर्पुन्ज। ये मिट्टी और यव-चूर्ण से बने दीप नहीं, सैन्धव लोगों द्वारा अपने मन के अंधियारे को हटाने के घोषणा पत्र हैं। सूर्योदय अब भी नहीं हुआ था जब […] - [अदृश्य नृत्यांगना (5)](https://bharatkaitihas.com/invisible-dancer/): अदृश्य नृत्यांगना रोमा! जो पशुपति महालय की मुख्य नृत्यांगना है। रोमा! जो सद्यः यौवना है। रोमा! जो कला की  अधिष्ठात्री है। रोमा! जो नृत्यविधा में देवलोक की बहुविश्रुत अप्सराओं और अनजाने पर्वतीय प्रदेशों में नृत्यरत गांधर्वियों से अधिक निष्णात है। चन्द्रवृषभ समारोह में बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति होने से इसका आयोजन महालय के […] - [सभा (6)](https://bharatkaitihas.com/assembly/): सभा में साम-गायन के साथ-साथ विभिन्न यज्ञ भी निर्विघ्न रूप से होते हैं। पुरुषों के साथ जन की समस्त स्त्रियों को इस सभा में भाग लेना अनिवार्य है। अशक्त और रोगी प्रजा को सभा से अनुपस्थित रहने की अनुमति है। शुभ्र हिम से आच्छादित शिखरों की सघन शृंखला ने चारों ओर घूम कर एक दुर्ग […] - [गविष्टि (7)](https://bharatkaitihas.com/meeting/): गविष्टि के समय आर्यों का नेतृत्व करने वाले ‘गोप’ आर्य सुरथ ने ऋषियों को आश्वस्त करते हुए दुंदुभि को नमस्कार किया और दुंदुभि का आह्वान करते हुए कहा- ‘हे दुंदुभि! तू हमारे शत्रुओं के विरुद्ध घोष कर। हमें बल दे।’ ऋषि पत्नी अदिति ने यज्ञ शाला में स्थापित दुंदुभि उठाकर ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा के मंगलमय हाथों […] - [पुरोडाश (8)](https://bharatkaitihas.com/rituals/): इन्द्र ने अग्नि और सोम का आह्वान करके कहा कि तुम तो मेरे हो और मैं तुम्हारा हूँ। तुम क्यों इस दस्यु को बढ़ावा देते हो। इन्द्र ने अग्नि और सोम को प्रसन्न करने के लिये ‘एकादशकपाल पुरोडाश’ का निर्वपन किया। संध्याकाल में परुष्णि के पावन तट पर आर्यों की सभा पुनः जुड़ी। प्रातः अचानक […] - [अद्भुत प्रतिमा (9)](https://bharatkaitihas.com/amazing-statue/): कहाँ से आई यह अद्भुत प्रतिमा यहाँ ? किसने बनाया इसे ? क्या सैंधवों में भी कोई इतना निष्णात शिल्पी है! देव शिल्पी त्वष्टा और दानव शिल्पी मय के बारे में तो सुना है उन्होंने किंतु सैंधवों में तो कोई इतना निष्णात शिल्पी आज तक नहीं हुआ! मोहेन-जो-दड़ो पशुपति देवालय के वार्षिक समारोह को कोई […] - [अग्निहोत्र (10)](https://bharatkaitihas.com/havan/): इस समय आर्य-जन प्रातःकालीन अग्निहोत्र की तैयारी में संलग्न हैं। ऋषिगण चारों दिशाओं का वंदन कर रहे हैं। ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा ने पूर्व दिशा को नमस्कार करते हुए कहा- ‘प्रकाश दायिनी पूर्व दिशा का अधिपति सूर्य है। इसकी बाणरूप रश्मियाँ समस्त बंधनों से रहित करने वाली हैं। जगत की रक्षा करने वाले सूर्य को हमारा नमस्कार […] - [अभिसार (11)](https://bharatkaitihas.com/dating/): गगन मण्डल में सप्त सिंधुओं का प्रतिनिधत्व कर रहे सप्त नक्षत्र अब अपने पुर को जाने को लालायित थे किंतु यही सोचकर अटके हुए थे कि अभिसार पूर्ण होने से पहले चल देना उचित नहीं होगा। शुक्ल पक्ष की प्रथमा का क्षीण चंद्र अल्प समय आकाश में उपस्थित रह कर प्रस्थान कर चुका है। नक्षत्रों […] - [समिति (12)](https://bharatkaitihas.com/committee/): जन के ठीक मध्य में स्थित यज्ञशाला के निकट ही वृहद पर्णशाला [1] बनी हुई है जिसमें प्रातः कालीन सभा, सांध्यकालीन गोष्ठि [2] तथा विशेष अवसर उपस्थित होने पर समिति [3] का आयोजन होता है। गोधूलि बेला [4] के आगमन में अभी विलम्ब है तथा सूर्य देव की प्रखरता भी अभी कम नहीं हुई है। […] - [पर्वतीय उपत्यकाओं की ओर (13)](https://bharatkaitihas.com/to-the-valley/): वह उत्साह आज नहीं है। क्या आशा और क्या लक्ष्य लेकर लौटे वह अपने पुर को ? दीर्घ यात्रा के पश्चात अपने पुर को लौटने वाले अपने साथ कुछ अर्जित करके लौटते हैं। उसने क्या अर्जित किया है ? - [गोष्ठी (14)](https://bharatkaitihas.com/seminar/): मंद गति से विचरण करता हुआ निशीथ अंतरिक्ष के मध्य में आ बैठा था। दो प्रहर रात्रि व्यतीत हुई जान कर गोष्ठी विसर्जित की गयी। परुष्णि के तट पर आर्यों की सांध्यकालीन गोष्ठी जुड़ी है। आर्य सुरथ और आर्य सुनील अन्य आर्यवीरों के साथ सोम की खोज में गये थे किंतु वहाँ से न केवल […] - [मायावी स्त्रियाँ (15)](https://bharatkaitihas.com/elusive-women/): प्रतनु के मस्तिष्क में बार-बार यह शंका उत्पन्न हो रही थी कि कहीं ये मायावी स्त्रियाँ उसके नेत्रों पर वस्त्र बांध कर उसे पर्वत से नीचे धकेलने तो नहीं ले जा रहीं। वरुण देव ही जानें क्या माया है ? कई दिवसों से पर्वत उपत्यकाओं में निरूद्देश्य सा भटकता रहा है प्रतनु। मोहेन-जो-दड़ो से यहाँ […] - [यातुधान (16)](https://bharatkaitihas.com/demons/): गुहा द्वार पर पाँच यातुधान पहरा दे रहे थे किंतु वे पूरी तरह असावधान थे। उन्हें इस बात की कल्पना भी नहीं थी कि इस निविड़ पर्वत प्रदेश में कोई प्राणी उनके कार्य में विघ्न उपस्थित करने के लिये आ सकता है। दिन भर के श्रांत-क्लांत गोप सुरथ परुष्णि के जल में निमज्जित होकर थकान […] - [मायावी सरोवर (17)](https://bharatkaitihas.com/elusive-lake/): शर्करा के तट से सिंधु नद के विशाल तट तक। मोहेन-जो-दड़ो से नागों के इस अनजाने पुर तक। न कहीं ऐसा देखा, न कहीं ऐसा सुना। लगता था सम्पूर्ण उपवन मायावी विद्या से निर्मित है। ईशान कोण में स्थित मायावी सरोवर से ही आरंभ किया प्रतनु ने। सूर्योदय हुए काफी विलम्ब हो चुका था जब […] - [विचित्र स्वप्न (18)](https://bharatkaitihas.com/bizarre-dream/): ऋषिश्रेष्ठ ने विचित्र स्वप्न देखा कि एक वृक्ष है जिसकी शाखा पर दो पक्षी बैठे हैं। पहला पक्षी फल खा रहा है और दूसरा पक्षी देख रहा है। हर काल खण्ड में पहला पक्षी ही फल खा रहा है। जबकि किसी भी काल खण्ड में दूसरा पक्षी कुछ नहीं खा रहा। पर्ण शैय्या पर लेटते ही […] - [अमल-धवल प्रासाद (19)](https://bharatkaitihas.com/amal-dhawal-palace/): प्रतनु ने विशाल अमल-धवल प्रासाद में प्रवेश किया। मोहेन-जो-दड़ो के जिस विशाल और समृद्ध पशुपति महालय को देखकर प्रतनु ने दांतो तले अंगुलि दबा ली थी, वह महालय इस प्रासाद की भव्यता और विशालता के सामने कुछ भी नहीं था। प्रासाद के गगनोन्नत तोरण द्वार में प्रवेश करने के पश्चात् प्रतनु को विस्तृत प्रांगण दिखाई […] - [आर्य सुरथ का चिंतन (20)](https://bharatkaitihas.com/contemplation-of-arya-surath/): जनपदों की संगठित शक्ति न केवल असुरों से अपनी रक्षा करने में समर्थ होगी अपितु असुरों का दमन भी कर सकेगी। इन्हीं विचारों में डूबते उतरते जाने कब गोप सुरथ की आँख लगी और आर्य सुरथ का चिंतन कब समाप्त हुआ, उन्हें पता ही नहीं चला। दिन भर के संग्राम के पश्चात् जहाँ अन्य आर्य […] - [रानी मृगमंदा (21)](https://bharatkaitihas.com/queen-mrigmanda/): प्रतनु ने धरती पर घुटने टेककर रानी मृगमंदा का अभिवादन किया। प्रतनु ने अनुभव किया कि इस पूरे वार्तालाप में रानी मृगमंदा एक भी शब्द नहीं बोली है। हिन्तालिका और निर्ऋति ही उसकी तरफ से प्रश्न पूछती रही हैं। अमल-धवल प्रासाद के केन्द्रीय कक्ष में प्रवेश करते ही प्रकाश से आंखें चुंधिया गयीं प्रतनु की। […] - [जनपदों की ओर (22)](https://bharatkaitihas.com/towards-districts/): आर्य सुरथ ने अपनी बात पूरी करते-करते अनुभव किया कि अब आर्यों को जन से जनपदों की ओर ले जाने का समय आ गया है। लघु जनों की अपेक्षा वृहद् जनपदों में ही आर्य प्रजा सुरक्षित रह सकती है। गोप सुरथ ने सभा में अपना मंतव्य प्रस्तुत किया- ‘जिस प्रकार समस्त आर्य प्रजा परिवार में, […] - [तीसरा प्रश्न (23)](https://bharatkaitihas.com/third-question/): प्रतनु रानी मृगमंदा के तीसरे प्रश्न का उत्तर पा चुका है। वह दबे पांव अपने प्रासाद में लौट आया। तीसरा प्रश्न अनायास ही सुलझ गया था। नागों के इस विवर में अघोषित अतिथि के रूप में रहते हुए प्रतनु को कई दिन हो गये हैं। अघोषित अतिथि के रूप में वह विविध प्रकार का आनंद […] - [राजन् (24)](https://bharatkaitihas.com/king/): मैं वैवस्वत मनुपुत्र सुरथ, आर्य प्रजा के कल्याण के लिये और आर्य जनपदों को संगठित करने के लिये जनपति अर्थात् राजन् होना स्वीकार करता हूँ। आज प्रातःकालीन अग्निहोत्र के तत्काल पश्चात् विशेष समिति का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर निकटवर्ती आर्य जनों से भी अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। देवों के निमित्त […] - [घोषित अतिथि (25)](https://bharatkaitihas.com/announced-guest/): रानी मृगमंदा का घोषित अतिथि बन जाने के बाद प्रतनु को नागों के पुर में विशेष अधिकार प्राप्त हो गये। अब वह कहीं भी बिना रोक-टोक जा सकता था। प्रतनु ने अनुभव किया कि न केवल रानी मृगमंदा और उसकी सखियाँ अपितु समस्त नाग अनुचर, सैनिक एवं प्रहरी भी प्रतनु को विशेष सम्मान देते हैं। […] - [तूर्य (26)](https://bharatkaitihas.com/basset-horn/): नाग कुमारियों ने आज तूर्य [1] का आयोजन किया था। रानी मृगमंदा ने शिल्पी प्रतनु को भी इसमें सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया। सैंधवों में तूर्य आयोजित करने की परम्परा नहीं है इस कारण प्रतनु के लिये इस तरह का आयोजन देखने का पहला ही अवसर था।  रानी मृगमंदा ने बताया कि तूर्य समारोह में […] - [गरुड़ों का आक्रमण (27)](https://bharatkaitihas.com/garuda-invasion/): हम पर गरुड़ों का आक्रमण हुआ है। गरुड़ सैन्य ने रात्रि के अंधकार में दुर्ग तोड़ लिया है। सैंकड़ों गरुड़ दुर्ग में प्रवेश कर गये है। जाने कैसे उन्हें दुर्ग के गुप्त मार्ग का ज्ञान हुआ। प्रातः होने में अभी पर्याप्त समय शेष था, जब प्रतनु की निद्रा विचित्र कोलाहल के कारण भंग हो गयी। […] - [रानी मृगमंदा का प्रस्ताव (28)](https://bharatkaitihas.com/proposal-of-queen-mrigamanda/): रानी मृगमंदा का प्रस्ताव सुनकर गुल्मपति चौंका था किंतु अब समय आ गया था जब प्रतनु के विरुद्ध कुछ न कुछ बोलना आवश्यक था। अतः उसने रानी मृगमंदा से अनुमति मांगी कि उसे भी कुछ बोलने का अवसर दिया जाये। शत्रुओं के हाथ में लगभग जा चुके दुर्ग को पुनः हस्तगत करने के पश्चात रानी […] - [अतिथि की विदाई (29)](https://bharatkaitihas.com/guest-farewell/): अतिथि की विदाई की बात सुनकर रानी मृगमंदा हतप्रभ रह गई। उसे लगा कि रानी मृगमंदा के द्वारा ऩिऋित के माध्यम से दिए गए विवाह का प्रस्ताव सुनकर ही प्रतनु यहाँ से जाना चाहता है। घटनायें इतनी अप्रत्याशित गति से घटित हुईं कि निर्ऋति प्रतनु के प्रतिज्ञाबद्ध होने तथा सैंधव नृत्यांगना के प्रति अनुरक्त होने […] - [पिशाच (30)](https://bharatkaitihas.com/vampire/): प्रतनु ने अपने नेत्र पूरी तरह खोल दिये। श्वान-मुखी मादा पिशाच की पूर्णतः निर्वस्त्र वीभत्स देह प्रतनु की देह पर पूरी तरह झुकी हुई थी। उसने अपनी दोनों हथेलियाँ प्रतनु के शरीर पर ही टिका रखी थीं जिससे उसके लटकते हुए वीभत्स स्तन प्रतनु के शरीर को स्पर्श कर रहे थे। उषा के आगमन के […] - [अश्वारोहियों से भेंट (31)](https://bharatkaitihas.com/meeting-with-horsemen/): पिशाचों के बीच से पूर्णतः निर्वस्त्र अवस्था में प्राण बचाकर भागे प्रतनु की अश्वारोहियों से भेंट हुई तो प्रतनु को अपने प्राण फिर से संकट में प्रतीत होने लगे। बाल-बाल बचा प्रतनु। आर्यों का एक अश्वारोही दल काफी तीव्र गति से घोड़े फैंकता हुआ उन्हीं सघन वृक्षों के नीचे आकर रुका जिनकी छाया में प्रतनु […] - [पुनः मोहेन-जो-दड़ो में (32)](https://bharatkaitihas.com/again-in-mohen-jo-daro/): मोहेन-जो-दड़ो से प्रतनु के निष्कासन की अवधि समाप्त होने में अभी कुछ दिन शेष थे। नियमानुसार वह दो वर्ष से पूर्व पुनः मोहेन-जो-दड़ो में प्रवेश नहीं कर सकता था किंतु उसमें इतना धैर्य नहीं रह गया था कि वह नगर से बाहर रुककर अवधि पूर्ण होने की प्रतीक्षा करे। जिस समय प्रतनु मोहेन-जो-दड़ो के नगरद्वार […] - [किलात से भेंट (33)](https://bharatkaitihas.com/meeting-with-kilaat/): शिल्पी प्रतनु और नृत्यांगना रोमा ने सावधानी से कई बार काल गणना की और आश्वस्त हो जाने पर कि प्रतनु के निष्कासन की दो वर्ष की अवधि पूर्ण हो गयी है, प्रतनु ने आज ही किलात से भेंट करने का निर्णय लिया। पशुपति महालय के प्रातःकालीन पूजन के पश्चात् प्रतनु किलात की सेवा में उपस्थित […] - [नृत्यांगना की घोषणा (34)](https://bharatkaitihas.com/announcement-from-dancer/): मोहेन-जो-दड़ो के वातावरण में आज सनसनी है। पुरवासियों में इतनी सनसनी और इतनी उत्तेजना तो उस दिन भी नहीं थी जिस दिन देवी रोमा की निर्वसना प्रतिमा किसी अज्ञात शिल्पी ने नगर के मुख्यमार्ग पर लाकर रख दी थी। जिसने भी नृत्यांगना की घोषणा के बारे में सुना अवसन्न रह गया। भला यह कैसे संभव […] - [चतुरंगिणी (35)](https://bharatkaitihas.com/four-division-army/): चैथा अंग पदाति सैनिकों का था। यह अंग चतुरंगिणी का सबसे बड़ा और सबसे मुख्य अंग था। शेष अंग एक तरह से इसी अंग की सहायता के लिये संगठित किये गये थे। राजन् सुरथ ने ऊँची टेकरी पर चढ़कर चतुरंगिणी[1] का अवलोकन किया। चारों दिशायें आर्य सैनिकों से आप्लावित थीं। राजन् सुरथ तथा सेनप सुनील […] - [अमंगल की आशंका (36)](https://bharatkaitihas.com/apprehension-of-danger/): अमंगल की आशंका पुरवासियों के मन में घर कर गयी है। यदि मातृदेवी गर्भवती न हुई तो! वह एक क्षुद्र शिल्पी से कैसे गर्भवती होना स्वीकार करेगी! मोहेन-जो-दड़ो वासी एक बार फिर उत्तेजित हैं। इस बार युवकों की अपेक्षा बड़े बूढ़ों में अधिक बेचैनी है। देवी रोमा द्वारा प्रचारित घोषणा के एक दिन बाद स्वामी […] - [जयघोष (37)](https://bharatkaitihas.com/acclamation/): सेनप सुनील ने पुर की प्राचीर पर खड़े होकर अपना विकराल खड्ग मुक्त भाव से आकाश में लहराया और उच्च स्वर में जयघोष किया- ‘कृण्न्वतो विश्वम् आर्यम्।’ समस्त आर्य वीरों ने सेनप सुनील का जयघोष सुनकर हर्षध्वनि की और जो जहाँ स्थित था, वहीं से उसने अपने शस्त्र हवा में लहराये। आर्य चतुरंगिणी कई दिनों […] - [चन्द्रवृषभ (38)](https://bharatkaitihas.com/chandravrishabh/): भूदेवी को गर्भवती बनाने वाले चन्द्रवृषभ  की भूमिका में शिल्पी प्रतनु यथा समय उपस्थित हुआ। आज उसके लिये कठिन परीक्षा की घड़ी थी। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मोहेन-जोदड़ो वासियों एवं सैंधव प्रदेश के विभिन्न भागों से आये सैंधवों की सुविधा के लिये पशुपति महालय परिसर में विशाल वितान बनाया गया था जो […] - [प्लावन (39)](https://bharatkaitihas.com/natation/): यह एक सुखद संयोग ही था कि आर्यों को इतना ऊँचा और विशाल बालुका स्तूप मिल गया था अन्यथा इस प्लावन में उनका नष्ट हो जाना निश्चित था। कुभा, सुवास्तु क्रुमु, तथा गोमती आदि नदी-तटों को पीछे छोड़कर चतुरंगिणी पुनः सिंधु-नद के तट पर लौट आयी। असुरों के विरुद्ध उसका अभियान पूरा हो गया था। […] - [मेलुह्ह (40)](https://bharatkaitihas.com/meluhh/):   – ‘वह जो भित्ती दिखायी दे रही है, वही मेलुह्ह पुर की प्राचीर है। लगभग एक प्रहर में हम वहाँ होंगे। हमारे स्पश आज प्रातः ही वहाँ पहुँच गये थे। किसी भी क्षण वे हमें लौटते हुए मिलेंगे।’ सेनप सुनील ने अपना अश्व आर्य सुरथ के अश्व के बराबर लाते हुए कहा। लगभग पूरे […] - [मणिपर्यंक (41)](https://bharatkaitihas.com/bed-of-pearls/): चक्रवर्ती सम्राट सुरथ को लगा वे सिंधु की स्तुति नहीं कर रहे, वे तो शिल्पी प्रतनु को अर्घ्य दे रहे हैं जो नृत्यांगना रोमा के साथ सिंधु तट पर बिछे इतिहास के मणिपर्यंक पर सदा-सर्वदा के लिये शैय्यासीन हो गया है। ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा ने यज्ञकुण्ड में आहुति देकर अपने विशाल नेत्र खोले। आज दीर्घकाल के पश्चात् […] - [प्रस्तावना - चित्रकूट का चातक](https://bharatkaitihas.com/preface-chitrakoot-ka-chatak/): प्रस्तावना – चित्रकूट का चातक पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ऐतिहासिक उपन्यास चित्रकूट चातक की पृष्ठभूमि स्पष्ट की गई है। अब्दुर्रहीम खानखाना की पहचान आज के भारत में एक ‘संत-कवि’ की है। इसीलिये हिन्दू उन्हें रहीमदासजी कहते हैं। विगत चार सौ वर्षों से वे करोड़ों हिन्दी भाषी भारतीयों के लिये श्रद्धा के पात्र […] - [इंसानी खून का रंग (1)](https://bharatkaitihas.com/human-blood/): इस उपन्यास की कहानी हमें बताती है कि इंसानी खून का रंग किस तरह मानव को मानवता का दुश्मन बनाकर उसे दानवता की ओर ले जाता है। संसार में इंसानी खून का रंग हर जगह लाल है किंतु उसकी ताकत हर जगह अलग है। जब इंसानी खून की ताकत जोर मारती है तो इंसान, इंसान […] - [चन्द्रवंशी राजा ययाति (2)](https://bharatkaitihas.com/descendants-of-yayati/): हिन्दुओं में मान्यता है कि चन्द्रवंशी राजा ययाति के बेटे ‘तुरू’ के वंशज आगे चलकर ‘तुर्क’ कहलाये। कई पुराणों में राजा ययाति की कथा मिलती है। इस कथा का सर्वप्रथम उल्लेख महाभारत में हुआ है जिसके अनुसार राजा ययाति के दो विवाह हुए। पहला विवाह दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी से और दूसरा […] - [लाओ शंग (3)](https://bharatkaitihas.com/lao-shang/): लाओ शंग ने यू-ची राजा को मार डाला तथा उसकी खोपड़ी निकलवाकर अपने महल में ले गया। उसके बाद लाओ-शंग ने जीवन भर उसी खोपड़ी में पानी पिया। चीन के उत्तर में मंगोलिया का विशाल रेगिस्तान है। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र में कई बर्बर जातियाँ निवास करती थीं। इन बर्बर जातियों का […] - [बगदाद के खलीफा (4)](https://bharatkaitihas.com/khalifa-of-baghdad/): तुर्की गुलामों द्वारा खलीफाओं के तख्त उलट दिए गए तथा तुर्की गुलाम स्वयं बगदाद के खलीफा बन गए। इस्लाम के इतिहास में बगदाद के खलीफा बड़े प्रसिद्ध हुए। यू-ची गोबी प्रदेश छोड़कर नान-शान प्रदेश में चले गये किंतु यहाँ भी हूणों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 140 ई.पू. में हूणों की वू-सुन शाखा के राजकुमार […] - [भारत पर मुस्लिम आक्रमण (5)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): भारत पर मुस्लिम आक्रमण ऐसे समय में हुए जब भारत का वैभव अपने चरम पर था किंतु भारत भूमि छोटे-छोटे राज्यों में बंटी हुई थी। ई. 712 में मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया। वह पहला मुस्लिम आक्रांता था जिसने भारत की भूमि पर पैर रखा था। उसने सिंध के राजा दाहिर सेन […] - [रक्त और मांस का पिण्ड (6)](https://bharatkaitihas.com/ball-of-blood-and-flesh/): दिलम बोल्डक के तुर्क बादशाह ने रक्त और मांस का पिण्ड लेकर पैदा होने वाले इस इस अजीब शैतानी बालक का नाम रखा- चंगेजखाँ। 1155 ईस्वी की एक सुबह। ओमन नदी का शांत जल प्रतिदिन की भांति अपनी मंथर गति से प्रवाहित हो रहा था। उसके निर्मल जल में सहस्रों रूपहली मछलियाँ और जलमुर्गियाँ अठखेलियां […] - [स्तब्ध परमात्मा (7)](https://bharatkaitihas.com/stunned-god/): इंसान की खूनी ताकत अपने ही जैसे दूसरे इंसानों का खून बहता हुआ देखकर पैशाचिक अट्टहास करती थी और अपने ही बनाये हुए पुतले की क्रूरता को देखकर स्तब्ध परमात्मा पूरी तरह मौन एवं अदृश्य था। चंगेजखाँ पहला मंगोल था जिसने भारत पर आक्रमण किया। उन दिनों दिल्ली पर मुहम्मद गौरी के गुलाम के गुलाम, […] - [लंगड़ा दैत्य (8)](https://bharatkaitihas.com/lame-monster/): समरकंद से एक लाख घुड़सवारों की सेना लेकर एक लंगड़ा दैत्य भारत की ओर चल पड़ा है। वह सिंधु नदी पार कर चुका है और कुछ दिनों में पंजाब पहुँचने वाला है। वह जिस गाँव से गुजरता है, उस गाँव में किसी को जीवित नहीं छोड़ता। दीना ने भरी दुपहरी में अपने सिर से घास […] - [मृतकों के नगर (9)](https://bharatkaitihas.com/cities-of-dead/): कई महीनों तक दिल्ली में किसी पक्षी तक ने पर नहीं मारा फिर बेबस आदमी का तो कहना ही क्या था। चीलों, गिद्धों एवं सियारों को भी मृतकों के नगर साफ करने में कई महीने लग गए। यह तो नहीं कहा जा सकता कि इतिहास की वह कौनसी तिथि थी जब मंगोलों ने इस्लाम स्वीकार […] - [खूनी ताकतों का संगम (10)](https://bharatkaitihas.com/confluence-of-bloody-forces/): इस प्रकार बाबर की धमनियों में मध्य ऐशिया की दो खूनी ताकतों का संगम हो गया था। इन खूंखार आक्रांताओं में से एक का नाम चंगेज खाँ और दूसरे का नाम तैमूर लंग था। तैमूर लंगड़े का चौथा वंशज मिर्जा उमर शेख अपने बाप-दादों की तरह परम असंतोषी जीव था। वह फरगना[1]  का शासक था […] - [दिखकाट की बुढ़िया (11)](https://bharatkaitihas.com/old-lady-of-dikhkat/): दिखकाट की बुढ़िया ने पूरी रात जागकर बाबर को देवभूमि भारत की सम्पन्नता और तैमूर लंग की क्रूरता के किस्से सुनाये। इन किस्सों को सुनकर बाबर के आश्चर्य का पार न रहा। – ‘यह कौनसा गाँव है?’ पहले नौजवान ने अपने माथे पर छलक आये पसीने को अपने सिर की पगड़ी के कपड़े से पौंछते […] - [फिर से बादशाही (12)](https://bharatkaitihas.com/crownship-again/): फिर से बादशाही मिलने के बाद बाबर ने एक बार फिर से अपने बाप-दादों के राज्य पर अधिकार करने का प्रयत्न किया और ईरान के शाह से सहायता मांगी। भाग्य ने बाबर की शीघ्र ही फिर से सुधि ली। जब बाबर के शत्रु शैबानी खाँ ने कुन्दुज के शासक खुसरो शाह को हरा कर उसकी […] - [कराकूयलू (13)](https://bharatkaitihas.com/karakuylu/): तुर्कों की कई प्रबल शाखायें हुई जिन्होंने अलग-अलग स्थानों पर अपने राज्य कायम किये। जो ‘तुर्क’ तुर्किस्तान से आकर ईरान में बस गये थे, उन्हें तुर्कमान कहा जाता था। तुर्कमानों का जो कबीला काली बकरियां चराता था वह कराकूयलू कहलाता था। तुर्की भाषा में ‘करा’ काले को कहते हैं, ‘कूय’ माने बकरी और ‘लू’ का […] - [देवभूमि की ओर (14)](https://bharatkaitihas.com/towards-land-of-deities/): बाबर ने अपनी सात सौ तोपों को गाड़ियों पर रखवाया। और सेना को हिन्दुस्तान की ओर कूच करने का आदेश दिया। सैंकड़ों गाड़ियों को देवभूमि भारत की ओर बढ़ते हुए देखकर बाबर की खूनी ताकत हिलोरें लेने लगी। बाबर को अपनी खूनी ताकत पर पूरा भरोसा था जिसके बल पर वह अपना भाग्य नये सिरे […] - [कोहिनूर (15)](https://bharatkaitihas.com/kohinoor/): हुमायूँ ने बड़े जोर-शोर से बाप का स्वागत किया और लूट में प्राप्त हजारों कीमती पत्थरों के साथ कोहिनूर हीरा भी भेंट किया। बाबर ने इस करामाती हीरे के बड़े किस्से सुने थे। उसे अपने भाग्य पर विश्वास नहीं हुआ कि एक दिन वह खुद इस हीरे का मालिक होगा! बाबर ने भारत पर चार […] - [काले पन्ने (16)](https://bharatkaitihas.com/black-pages/): पूरे चार सौ सालों से सैंकड़ों हिन्दू नरेश और लाखों हिन्दू वीर अपने आराध्य की जन्मभूमि को फिर से प्राप्त करने के लिये प्राणों की आहुतियाँ दे रहे हैं। इन युद्धों में मीरबाकी के बहुत से शिलालेख नष्ट हो गये किंतु इतिहास के काले पन्ने मीरबाकी की क्रूरताओं के किस्से आज तक कहते हैं। बाबर […] - [अस्सी घाव (17)](https://bharatkaitihas.com/eighty-wounds/): राणा ने अपने शत्रुओं का जी भर कर मान मर्दन किया किंतु इन लड़ाईयों में उसके शरीर के हर हिस्से पर घाव लग गये। उसके शरीर पर कुल अस्सी घाव थे। वह एक आँख, एक हाथ और एक पैर से वंचित हो गया था किंतु उसकी शक्तियाँ अब भी उसके पास थीं। राजस्थान में मेवाड़ […] - [प्रसाद (18)](https://bharatkaitihas.com/holy-offerings/): राजकुमार विक्रमादित्य ने अपने पिता महाराणा संग्राम सिंह से अपनी बड़ी भाभी मीराबाई की शिकायत की कि मीरा बाई प्रसाद लेने से मना कर रही हैं। क्योंकि मीराबाई की दृष्टि में यह प्रसाद नहीं भैंसे का मांस है। – ‘प्रसाद का अपमान! भाभीसा, आप तो स्वयं को भगवान की भक्त कहती हैं!’ विक्रमादित्य ने चीख […] - [प्रस्थान (19)](https://bharatkaitihas.com/departure/): जब महाराणा सांगा ने बाबर से युद्ध करने के लिए चित्तौड़ से प्रस्थान किया तो उन्होंने महाराणी द्वारा तिलक किए जाने के बाद मीराबाई के हाथों से भी तिलक करवाया। सांगा का मन मीरा के भविष्य को लेकर उद्वेलित था। जब महाराणा सांगा ने देखा कि बाबर ने देखते ही देखते दिल्ली और आगरा पर […] - [खानुआ (20)](https://bharatkaitihas.com/khanua/): जिस दिन बाबर का मुख्य सेनापति अपने प्रथम सैनिक दस्ते के साथ खानुआ पहुँचा उसी दिन राणा सांगा ने बाबर पर आक्रमण किया। अरावली की उपत्यकाओं से निकलने वाली गंभीरी नदी की विपुल जल राशि आज भले ही काल के गाल में समा चुकी है किंतु उन दिनों अपने नाम के अनुरूप सचमुच ही वह […] - [बैरमबेग (21)](https://bharatkaitihas.com/bairambeg/): चांदनी के उजाले में पहली ही नजर में बादशाह को चालीसवाँ सिपाही जंच गया। सचमुच ही वह रात बैरमबेग की थी। उसके बुद्धि चातुर्य से हुमायूँ ने मात्र तीन सौ सिपाहियों के बल पर उसी रात फतह हासिल कर ली। बाबर अपना टूटे हुए दिल में नाउम्मीदियों का समुद्र भर कर ट्रांसआक्सियाना से अफगानिस्तान लौटा […] - [विषपान (22)](https://bharatkaitihas.com/poisoning/): मीरा ने दासी के हाथ से प्याला लेकर विषपान किया और हंस कर बोली जब राणाजी कहते हैं कि यह गिरिधर गोपालजी का चरणामृत है तो असत्य नहीं कहते हैं। यदि विष होता तो मैं जीवित थोड़े ही रहती। राणा सांगा की सारी आशंकायें सही सिद्ध हुई थीं। वह स्वयं युद्ध भूमि से लौट कर […] - [फर्रूखसियर](https://bharatkaitihas.com/farrukhsiyar-was-engulfed-in-terrible-conspiracies-as-soon-as-he-became-king/): बादशाह बनने के बाद फर्रूखसियर ने इलाहाबाद के सूबेदार सैयद अब्दुल्ला खाँ को अपना वजीर नियुक्त किया तथा अब्दुल्ला के छोटे भाई सैयद हुसैन अली को अपनी सेना का प्रधान नियुक्त किया। - [महाराजा अजीतसिंह से दुश्मनी](https://bharatkaitihas.com/the-emperor-reached-his-tent-to-kill-maharaja-ajitsingh/): फर्रूखसियर ने महाराजा को पांच हजार जात एवं पांच हजार सवार का मनसब दिया तथा उसे अपने दरबार में उपस्थित होने के निर्देश दिए। - [बंदासिंह बैरागी की हत्या](https://bharatkaitihas.com/farrukhsiyar-got-banda-bairagi-and-his-associates-cut-into-pieces/): बंदासिंह बैरागी की हत्या के बाद सिक्ख नेतृत्व-विहीन हो गये। जब सिक्खों के सामने न गुरु रहा, न गुरु का बन्दा, तब सिक्खों ने सरबत खालसा और गुरुमत्ता की प्रथाएँ आरम्भ कीं। - [चूड़ामन जाट का अंत](https://bharatkaitihas.com/chudaman-captured-the-keys-of-the-red-fort/): चूड़ामन को राहदार बनाए जाने पर टिप्पणी करते हुए इतिहासकार कानूनगो ने लिखा है- 'एक भेड़िये को भेड़ों के झुण्ड का रक्षक बना दिया गया।' - [सवाई जयसिंह](https://bharatkaitihas.com/red-fort-gets-loyal-defenders-as-sawai-jai-singh/): आम्बेर का राजा सवाई जयसिंह भारत के इतिहास में एक अद्भुत राजा हुआ है। उसने कम से कम पांच मुगल शासकों के काल में मुगलों की सेवा की तथा उनकी नाक के नीचे हिन्दू धर्म का उत्थान किया। जब भी लाल किला उजड़ता हुआ दिखाई दिया, तब ही सवाई जयसिंह ने लाल किले को संरक्षण […] - [फर्रुखसीयर की हत्या](https://bharatkaitihas.com/emperor-was-strangulated-beaten-with-shoes-in-red-fort/): सैयद बन्धु फर्रूखसियर को अनुभवहीन जानकर उसे अपने हाथों की कठपुतली बनाकर रखना चाहते थे किंतु जब फर्रुखसीयर ने सैयद बंधुओं के इशारों पर नाचने से मना कर दिया तो उन दोनों दुष्टों ने बादशाह फर्रुखसीयर की हत्या करने का षड़यंत्र रचा। फर्रूखसियर सैयद बन्धुओं के सहयोग से बादशाह बना था। इसलिये उसने सैयद अब्दुल्ला […] - [सैयद बन्धु](https://bharatkaitihas.com/syed-brothers-killed-mughal-emperors-like-insects/): जब रफी-उद्-दरजात को तख्त पर बैठाने के लिए ले जाया गया, तब उसकी माता फूट-फूटकर रो रही थी। - [मुहम्मदशाह रंगीला](https://bharatkaitihas.com/emperors-mother-wrote-a-secret-letter-to-chinkulich-khan/): रौशन अख्तर का जन्म 7 अगस्त 1702 को अफगानिस्तान के गजना नामक स्थान पर कुदसिया बेगम के पेट से हुआ था। - [सैयद बंधुओं की हत्या](https://bharatkaitihas.com/emperor-killed-prime-minister-and-commander-in-chief/): सैयदों ने दोस्त मुहम्मद खाँ रूहेला को भी साढ़े तीन हजार घुड़सवारों के साथ चिनकुलीच खाँ पर चढ़ाई करने के लिए रिवाना कर दिया। - [मुहम्मदशाह रंगीला का दरबार](https://bharatkaitihas.com/emperor-himself-used-to-draw-his-bare-pictures/): नूर बाई नामक वेश्या के कोठे के आगे शाही अमीरों और धनी लोगों की इतनी भीड़ लगती थी कि उनके हाथियों से दिल्ली की गलियों में जाम लग जाता था। - [बदनसिंह जाट](https://bharatkaitihas.com/sawai-jai-singh-enthroned-badansingh-jat-with-his-own-hands/): इस घटना के बाद जयसिंह, बदनसिंह जाट का मित्र बन गया। - [हिन्दू राज्य की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/maharaja-ajitsingh-established-hindu-principality-in-ajmer/): महाराजा ने तीस हजार घुड़सवारों के साथ अजमेर नगर को घेर लिया तथा मुगल सूबेदार को अजमेर से मारकर भगा दिया। - [मल्लिका उज्जमानी](https://bharatkaitihas.com/mallika-ujjmani-becomes-thirsty-for-the-life-of-maharaja-ajitsinh/): बादशह बेगम बनकर फर्रूखसियर की बेटी मलिका उज्जमानी महाराजा अजीतसिंह के प्राणों की प्यासी हो गई। - [चिनकुलीच खाँ](https://bharatkaitihas.com/red-fort-said-with-pride-see-how-beautifully-dances-the-donkey-of-south/): मुहम्मदशाह ने अपने बहुत से दुश्मनों की गलतियों को नजर अंदाज करके उन्हें अपनी सेवा में बने रहने दिया। - [अलीवर्दी खाँ](https://bharatkaitihas.com/emperor-continued-to-enjoy-awadh-and-bengal-became-independent/): अलीवर्दी खाँ बिहार का छोटा सा सूबेदार था किंतु उसने बादशाह मुहम्मदशाह रंगीला के निकम्मेपन का लाभ उठाकर बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा पर कब्जा कर लिया तथा बंगाल में अलग मुस्लिम राज्य की स्थापना की। औरंगजेब के समय से ही मुगलों का विरोध कर रहे राजपूतों, सिक्खों, मराठों तथा अन्य हिन्दू शक्तियों ने मुहम्मदशाह रंगीला […] - [पेशवा बालाजी विश्वनाथ](https://bharatkaitihas.com/owner-of-red-fort-sitting-under-the-shadow-of-beauty-and-marathas-were-rushing-rapidly/): मराठा शक्ति का अभ्युदय छत्रपति शिवाजी द्वारा ई.1645 से 1680 की अवधि में शाहजहाँ एवं औरंगजेब के काल में किया गया था। - [मराठों का आतंक](https://bharatkaitihas.com/red-fort-tried-to-frighten-the-marathas-but-the-nose-broke/): मराठों ने राजपूताना रियासतों पर बार-बार हमले करने और चौथ वसूलने की नीति अपना ली थी। इस कारण मराठों का आतंक पूरे उत्तर भारत में छा गया। - [पेशवा बाजीराव](https://bharatkaitihas.com/peshwa-bajirao-shakes-the-tenon-of-the-red-fort/): जयसिंह ने पेशवा बाजीराव को जयपुर बुलाने तथा जयपुर से दिल्ली ले जाकर बादशाह से मिलवाने का निश्चय किया। - [उर्दू शायरी](https://bharatkaitihas.com/emperor-was-singing-dhrupad-and-listening-poetry-but-nadirshah-came-to-take-kohinoor/): जब उर्दू शायरी मुगल दरबार से निकलकर दिल्ली की गलियों में टहलने निकली तो उसने वेश्याओं और नृत्यांगनाओं के कोठों पर मुकाम किया। - [नादिरशाह](https://bharatkaitihas.com/there-is-no-one-whom-you-can-kill-with-your-sword-except-to-raise-the-dead-and-kill-again/): जिस बादशाह को औरतों के कपड़े पहनने और अपने ही नंगे चित्र बनाने से फुर्सत न हो, उस बादशाह की सेना का नेतृत्व करने के लिए कोई योग्य सेनापति कहाँ से आता! - [लाल किले का खजाना](https://bharatkaitihas.com/largest-armed-robbery-in-human-history-took-place-in-red-fort/): कोहिनूर का मूल्य संसार के ढाई दिन के भोजन के व्यय के बराबार आंका जाता था। - [कोहिनूर हीरा](https://bharatkaitihas.com/emperors-favorite-prostitute-told-nadirshah-the-address-of-the-kohinoor-diamond/): तूने दिल्ली से अब तक जो लूटा है, वह उस दौलत के सामने कुछ भी नहीं है जो दौलत मुहम्मदशाह की पगड़ी में छिपी हुई है। - [नादिरशाह का कत्ल](https://bharatkaitihas.com/nadirshah-tied-misfortune-with-kohinoor-as-well/): जिन मुगलों ने विगत दो सौ साल में भारतीयों को कंगाल बना दिया था, उन्हीं मुगलों को नादिरशाह ने लंगोटी लगाकर छोड़ दिया। - [कोहिनूर हीरे की यात्रा](https://bharatkaitihas.com/kohinoor-reaches-london-via-iran-afghanistan-and-punjab-from-red-fort/): महाराजा रणजीतसिंह ने अपनी वसीयत में लिखा कि यह हीरा उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर को भेंट कर दिया जाए किंतु उनके उत्तराधिकारियों ने महाराजा की इस इच्छा का सम्मान नहीं किया। - [नादिरशाह की फूफियाँ](https://bharatkaitihas.com/nadir-shah-came-to-meet-his-aunts-in-red-fort/): हम हिन्दुस्तान पर हमला करने नहीं आए बल्कि लाल किले में नादिरशाह की फूफियाँ रहती हैं, हम अपनी फूफी जान से मुलाक़ात करने आए हैं। - [मुहम्मदशाह रंगीला की मौत](https://bharatkaitihas.com/chinkkulich-khan-the-emperors-dear-friend-was-killed-on-the-banks-of-the-sutlej/): किसानों द्वारा उगाई जा रही फसलों से मिलने वाले लगान से लाल किले का व्यय मजे से चलता रहा। - [बादशाह अहमदशाह बहादुर](https://bharatkaitihas.com/udham-bais-son-sat-on-the-throne-of-the-mughals/): जब मुहम्मदशाह रंगीला बादशाह हुआ तो उसने ऊधम बाई से विवाह करके उसे कुदसिया बेगम की उपाधि दी थी। - [शाही हरम के हिंजड़े](https://bharatkaitihas.com/khwajasaras-ruled-mughalia-haram/): ख्वाजासरा उस पुरुष को कहते थे जिसके यौन अंग काट दिए जाते थे अथवा जो नैसर्गिक रूप से नपुंसक उत्पन्न होते थे। - [मुगल हरम में समलैंगिकता](https://bharatkaitihas.com/shahi-haram-was-obsessed-with-homosexuality/): प्राचीन यूनान में समलैंगिकता को कला, बौद्धिकता और नैतिक गुणों की तरह देखा जाता था। - [ख्वाजासरा जाविद खाँ](https://bharatkaitihas.com/emperor-and-wazir-fought-for-chief-kinnar/): ख्वाजासरा जाविद खाँ शाही महल के हिंजड़ों का मुखिया था। उसे लेकर बादशाह अहमदशाह बहादुर एवं वजीर सफदरजंग में ठन गई! इस विवाद के कारण अवध सूबा मुगल सल्तनत से स्वतंत्र हो गया। बादशाह अहमदशाह बहादुर ने अवध के नवाब सफदरजंग को सल्तनत के मुख्य वजीर के पद पर बने रहने दिया था तथा चिनकुलीच […] - [इमादुलमुल्क](https://bharatkaitihas.com/wazir-blinds-the-emperor-and-his-mother-and-puts-them-in-jail/): मुगलिया राजनीति की चौसर पर बादशाह और शहजादे एक-एक करके मारे जा रहे थे किंतु लाल किला अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाने के अतिरिक्त और कुछ करने की स्थिति में नहीं था। - [मुगल बादशाहों के हरम](https://bharatkaitihas.com/there-were-eight-thousand-women-in-ahmad-shah-bahadurs-harem/): एक बादशाह के हरम में इतनी औरतों का होना विचित्र बात लगती है किंतु उस काल में भारत के मुगल बादशाहों के हरम पूरी दुनिया में अपने बड़े आकार के लिए चर्चित थे। - [आलमगीर बादशाह](https://bharatkaitihas.com/alamgir-became-emperor-after-spending-forty-years-in-prison/): अजीजुद्दीन ने औरंगजेब की तरह भारत पर कठोर शासन व्यवस्था स्थापित करने का सपना देखा और अपना नाम आलमगीर रख लिया। - [अहमदशाह अब्दाली](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-handed-over-two-of-its-princesses-to-ahmad-shah-abdali/): महाराजा सूरजमल चाहता था कि मराठों को उत्तर भारत की राजनीति से दूर रखा जाए तथा उन्हें नर्बदा पार करके लौट जाने के लिए कह दिया जाए। - [अहमदशाह अब्दाली का कहर](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-built-minarets-of-beheaded-people-of-brij/): उत्तर भारत के लोगों पर अहमदशाह अब्दाली का कहर ठीक वैसा ही था जैसा उसके पूर्ववर्ती आक्रांताओं मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, तैमूर लंग, बाबर और नादिरशाह आदि रक्त-पिपासुओं ने ढाया था। अहमदशाह अब्दाली ने निर्दोष हिन्दुओं के सिर काटकर उनकी मीनारें बनवाईं। जब महाराजा सूरजमल ने अहमदशाह अब्दाली के आदेश को मानने […] - [महाराजा सूरजमल](https://bharatkaitihas.com/maharaja-suraj-mal-challenges-ahmad-shah-abdali-to-attack-bharatpur/): अहमदशाह अब्दाली ने पत्र महाराजा सूरजमल को लिखकर धमकाया कि यदि वह रुपये नहीं देगा तो भरतपुर, डीग तथा कुम्हेर के किले धरती में मिला दिये जायेंगे। - [शाही महिलाओं का शीलहरण](https://bharatkaitihas.com/royal-women-were-humiliated-in-red-fort/): शहजादी हजरत बेगम इस समय केवल सोलह साल की थी और बहुत सुंदर दिखती थी। बादशाह आलमगीर (द्वितीय) स्वयं भी इस शहजादी से विवाह करना चाहता था। - [मराठा सेनापति रघुनाथ राव](https://bharatkaitihas.com/the-marathas-surrounded-the-red-fort-as-soon-as-abdali-left/): पेशवा नाना साहब अर्थात् बालाजी बाजी राव ने अपने चचेरे भाई रघुनाथ राव तथा मराठा सरदार मल्हारराव होलकर को आदेश दिए थे कि वे अहमदशाह अब्दाली का मार्ग रोकने के लिए दिल्ली पहुंचें। - [मल्हारराव होलकर](https://bharatkaitihas.com/raghunath-rao-used-cannons-to-fire-at-the-red-fort/): नजीब खाँ ने मल्हारराव को अपना धर्मपिता कहकर उसके पांव पकड़ लिये तथा उसके समक्ष समर्पण करने को तैयार हो गया। - [लाल किले की कंगाली](https://bharatkaitihas.com/mother-india-was-also-shedding-tears-along-with-red-fort/): कई दिन की निरंतर भूख से पीड़ित होकर शहजादियां परदा तोड़कर शहर में जाने लगीं जिन्हें बड़ी कठिनाई से रोका गया। - [यूरोपीय कम्पनियों का ताण्डव](https://bharatkaitihas.com/french-dragged-red-fort-into-seven-years-war-of-europe/): हमारे देश में तोप का पहला गोला छूटने के साथ ही अमरीका और एशिया की तोपों में भी आग लग जाती थी। - [आलमगीर की हत्या](https://bharatkaitihas.com/wazir-killed-emperor-after-not-removing-afghan-flag-from-red-fort/): प्लासी एक ऐसा सौदा था, जिसमें बंगाल के धनी लोगों और मीर जाफर ने नवाब को अँग्रेजों के हाथों बेच दिया। - [सदाशिव राव भाऊ](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-comes-back-to-extract-blood-from-indias-wounds/): सदाशिव राव भाऊ अविवेकी व्यक्ति था, उसने सूरजमल के व्यावहारिक सुझावों को मानने से मना कर दिया। - [जाट मराठा संघ](https://bharatkaitihas.com/marathas-took-down-silver-from-red-fort-and-cast-coins/): दिल्ली हाथ में आते ही सदाशिव राव भाऊ तोते की तरह आंख बदलने लगा। महाराजा सूरजमल के लाख मना करने पर भी भाऊ ने लाल किले के दीवाने खास की छतों से चांदी के पतरे उतार लिये और नौ लाख रुपयों के सिक्के ढलवा लिये। - [मराठों का कत्ल](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-killed-one-lakh-marathas/): मराठा सेनापतियों की अदूरदर्शिता ने मराठों को संकट में डाल दिया तथा अहमदशाह अब्दाली ने एक लाख मराठों का कत्ल कर दिया। - [मराठा परिवारों की दुर्दशा](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-captured-thousands-of-marathas/): अब्दाली के सैनिकों ने पानीपत की गलियों में भागती मराठा औरतों एवं उनके बच्चों को पकड़ लिया। हजारों औरतों ने अब्दाली के सैनिकों के हाथों में पड़ने से बचने के लिए पानीपत के कुओं एवं तालाबों में छलांग लगा दी। - [जाटों की राजमाता](https://bharatkaitihas.com/kishore-devi-rajmata-of-the-jats-said-maratha-soldiers-are-my-children-dont-kill-them/): भरतपुर के जाटों की राजमाता किशोरी देवी को मराठों पर बड़ी दया आई। राजमाता ने घोषणा की कि मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं, इन्हें नहीं मारें। - [महाराजा सूरजमल की विजय](https://bharatkaitihas.com/maharaja-surajmal-snatched-two-capitals-of-the-mughals-2/): सूरजमल की सेना ने आगरा के लाल किले के किलेदार के परिवार को पकड़ लिया तथा किलेदार पर दबाव बनाया कि वह लाल किला सूरजमल को समर्पित कर दे। - [महाराजा सूरजमल की हत्या](https://bharatkaitihas.com/red-fort-killed-maharaja-suraj-mal/): एक रूहेला सैनिक महाराजा सूरजमल की कटी हुई भुजा को अपने भाले की नोक में पताका की भांति उठाकर नजीबुद्दौला के पास ले गया। - [बक्सर का युद्ध](https://bharatkaitihas.com/maharaja-surajmal-snatched-two-capitals-of-the-mughals/): बक्सर विजय के परिणाम स्वरूप, सम्पूर्ण अवध सूबे पर ईस्ट इण्डिया कम्पनी का नियंत्रण हो गया। - [शाहआलम (द्वितीय)](https://bharatkaitihas.com/wazir-did-not-allow-the-emperor-to-enter-red-fort-for-six-years/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने मुगल बादशाह शाहआलम (द्वितीय) को 26 लाख रुपये वार्षिक पेंशन देकर शासन के कार्य से लगभग मुक्त कर दिया। - [सिक्ख लाल किले में](https://bharatkaitihas.com/sikhs-took-control-of-the-red-fort/): सिक्खों को न तो मुगलों की औरतें चाहिए थीं और न लाल किले की सत्ता। वे तो लाल किले का मान-मर्दन करके अपने गुरुओं एवं गुरु-पुत्रों की हत्याओं का बदला ले रहे थे! - [बेगम समरू](https://bharatkaitihas.com/begum-samaru-protects-emperor-shah-alam/): लाल किले की शहजादियों और बेगमों को ईरानी और अफगानी आक्रांता जबर्दस्ती पकड़-पकड़कर ले गए थे जिसके कारण लाल किला भीतर से बिल्कुल सुनसान दिखाई देता था। - [मलिका उज्मानी](https://bharatkaitihas.com/malika-ujmani-gave-twelve-lakh-rupees-to-make-emperor-blind/): लाल किले पर ढाई माह के अधिकार के दौरान गुलाम कादिर ने शाहआलम के 22 पुत्र-पुत्रियों को मार डाला। - [महादजी सिंधिया](https://bharatkaitihas.com/mahadji-scindia-made-shah-alam-emperor-again/): शाहआलम ने महादजी सिंधिया को अपना वकीले मुतलक अर्थात् मुख्य वजीर नियुक्त किया था तथा उसे अमीर-उल उमरा की उपाधि दी थी जिसका अर्थ होता है, सभी अमीरों का मुखिया। - [मुल्ला का किला](https://bharatkaitihas.com/east-india-company-snatches-title-of-mughal-emperor/): अंग्रेजी न्यायिक व्यवस्था का दिखावटी चेहरा था, वास्तविकता यह थी कि अंग्रेजों से पेंशन पा रहे बादशाह को उन सभी आदेशों पर अपनी मुहर लगानी पड़ती थी जो अंग्रेज उसके समक्ष प्रस्तुत करते थे। - [मिर्जा अकबर शाह](https://bharatkaitihas.com/raja-rammohan-roy-went-to-london-to-increase-emperors-pension/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधिकारियों ने एक बार अकबरशाह के पुत्र मिर्जा जहांगीर को बंदी बना लिया। अकबर की बेगम ने कुतुबुद्दीन काकी की मजार पर जाकर मनौती मांगी कि यदि मिर्जा जहांगीर की रिहाई हो जाए तो वह काकी की दरगाह पर चादर चढ़ाएगी। - [बहादुरशाह जफर](https://bharatkaitihas.com/lord-dalhousie-asked-the-mughal-emperor-to-vacate-the-fort/): अँग्रेजों ने बादशाह की इच्छा के विरुद्ध, बादशाह के सबसे निकम्मे पुत्र मिर्जा कोयास को बादशाह का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। - [लॉर्ड डलहौजी का शिकंजा](https://bharatkaitihas.com/the-discontent-of-the-red-fort-started-growing-as-a-spark-towards-the-british/): देशी राज्य हमारी दया पर निर्भर हैं तथा वे ही भारत में हमारी वास्तविक शक्ति हैं। इस शक्ति का अनुमान हमें तब तक नहीं होगा जब तक कि हम उसे खो न देंगे। - [नीच और मूर्ख भारतीय](https://bharatkaitihas.com/british-used-to-hang-indians-in-name-of-power-of-red-fort/): अंग्रेज जिन्हें नीच और मूर्ख भारतीय कहते थे, अब छाती ठोक कर अंग्रेजों के सामने खड़े हो गए और अंग्रेजों को गोली मारने लगे। - [वाजिद अली शाह](https://bharatkaitihas.com/british-decided-to-seize-awadh-by-force/): भगवान श्री कृष्ण को संबोधित करके लिखी गई उसकी एक ठुमरी इस प्रकार है- 'मोरे कान्हा जो आए पलट के, अब के होली मैं खेलूंगी डट के।' - [अवध की मुक्ति](https://bharatkaitihas.com/british-captured-nawab-wajid-ali-shah-of-awadh-and-sent-him-to-calcutta/): वाजिद अली शाह ने हसीन बेगमों को रहने और उन्हें नृत्य का प्रशिक्षण देने के लिए 'परीखाना' का निर्माण करवाया। - [हिन्दू सैनिकों का क्रोध](https://bharatkaitihas.com/goddess-of-revolution-was-looking-towards-red-fort-with-hopeful-eyes/): भारतीय आकाश यद्यपि इस समय बिल्कुल शांत है किंतु एक छोटा सा बादल जो एक मुट्ठी से बड़ा न हो, उठ सकता है, जो बढ़कर हमारा सर्वनाश कर सकता है। - [नाना साहब पेशवा](https://bharatkaitihas.com/peshwa-nana-saheb-brought-message-of-revolution-to-red-fort/): नाना साहब ने भारत में राष्ट्रव्यापी स्वातंत्र्य संग्राम आरम्भ करने के लिए उन रजवाड़ों से सम्पर्क करने की योजना बनाई जिनके राज्य अंग्रेजों ने छीन लिए थे या जिन राजाओं की पेंशनें बंद कर दी थीं। - [लाल कमल का फूल](https://bharatkaitihas.com/lotus-flowers-and-roti-began-to-roam-from-village-to-village/): हिन्दू संस्कृति में लाल कमल का फूल बहुत श्रद्धा से देखा जाता है। देवी लक्ष्मी कमल के आसान पर विराजमान हैं, भगवान विष्णु के हाथों में कमल का फूल है तथा ब्रह्माजी की पूजा कमल के फूलों से की जाती है। इस कारण 1857 की राष्ट्रव्यापी सशस्त्र क्रांति के समय लाल कमल का फूल क्रांति […] - [मंगल पाण्डे](https://bharatkaitihas.com/mangal-pandey-shot-english-officer-and-played-bugle-of-nationwide-mahakranti/): मंगल पाण्डे ने विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया। उसने अपने साथियों को ललकारा- 'तुम लोग धर्म के लिये संग्राम में उतर पड़ो।' - [द लास्ट मुगल](https://bharatkaitihas.com/red-fort-was-not-in-a-position-to-face-british-due-to-internal-strife/): एक मरियल कुत्ते को गलती से भेड़िया समझा जा सकता है। - [बहादुरशाह जफर का हरम](https://bharatkaitihas.com/red-fort-was-poor-but-bahadur-shah-zafars-harem-was-rich/): बहादुरशाह में कई खूबियां हो सकती हैं किंतु हरम को काबू में रखना उसके वश में नहीं था। - [भूखे-नंगे शहजादे](https://bharatkaitihas.com/two-thousand-hungry-bare-princesses-were-closed-in-red-fort/): सलातीन के निवास में एक बहुत ऊंची दीवार है ताकि कोई उनको नहीं देख पाए। इसके अंदर उनके लिए छप्पर वाली अनेक झौंपड़ियां हैं। जहाँ यह बेचारे रहते हैं। जब दरवाजे खुले तो बहुत से अधनंगे, भूखे, मुसीबत जदा लोगों ने हमको घेर लिया। उनमें से कुछ तो अस्सी साल के थे और बिल्कुल प्राकृतिक अवस्था में थे, अर्थात् नंगे थे। - [सर चार्ल्स मेटकाफ](https://bharatkaitihas.com/metcalf-family-made-the-red-fort-pathetic/): सर चार्ल्स मेटकाफ अत्यंत चालाक व्यक्ति था। उसने शालीमार बाग में अपने लिए एक शानदार बंगला बनवा रखा था और एक खूबसूरत सिक्ख लड़की से विवाह करके उस बंगले में रहा करता था। - [दिल्ली में खूनी क्रांति](https://bharatkaitihas.com/red-fort-accepted-to-lead-a-nationwide-revolution/): यह एक मजहबी जंग है और मजहब के नाम पर लड़ी जा रही है। इसलिए तमाम शहरों और गांवों के हिन्दुओं और मुसलमानों का फर्ज है कि वे अपने-अपने मजहब और रस्मो-रिवाज पर कायम रहें और उनकी हिफाजत करें। - [कानपुर की क्रांति](https://bharatkaitihas.com/peshwa-nana-sahebs-army-entered-ganges-river-and-killed-hundreds-of-british/): भारतीय सिपाही गंगाजी में उतर पड़े तथा अंग्रेज अधिकारियों को नावों से खींच-खींचकर मारने लगे। - [बीबीघर का हत्याकाण्ड](https://bharatkaitihas.com/two-hundred-british-women-and-children-were-killed-in-bibi-ghar/): बीबीघर का हत्याकाण्ड अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के दौरान हुई एक बड़ी ही शर्मनाक घटना है जिसने भारतीय क्रांति के सैनिकों को कलंकित किया तथा अंग्रेजों को भारतीय सैनिकों का शत्रु बना दिया। नाना साहब पेशवा ने अंग्रेजों से कानपुर मुक्त करवाकर अंग्रेज अधिकारियों को छूट दी थी कि वे अपने परिवारों को लेकर […] - [बेगम हजरत महल](https://bharatkaitihas.com/begum-hazrat-mahal-sitting-on-an-elephant-killed-british/): बेगम हज़रत महल का जन्म अवध रियासत के फ़ैज़ाबाद कस्बे में हुआ था। वह पेशे से तवायफ़ थी और अपने माता-पिता द्वारा बेचे जाने के बाद खवासीन के रूप में अवध के शाही हरम में ले ली गई थी। - [अंग्रेजों का खूनी खेल](https://bharatkaitihas.com/british-converted-trees-in-a-machine-to-hang-revolutionaries/): बाराबंकी के जंगलों से छापामार गतिविधियां चला रहे अवध के क्रांतिकारी जागीरदार जयलाल सिंह को अंग्रेजों ने छल पूर्वक पकड़ लिया तथा उसे 1 अक्टूबर 1859 को लखनऊ में फांसी दे दी। - [जागीरदार कुंवरसिंह](https://bharatkaitihas.com/kunwar-singh-hosted-his-flag-on-palace-before-he-died/): कुंवरसिंह के सिपाहियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों को खदेड़ कर जगदीशपुर के महल से यूनियन जैक उतारकर अपना झण्डा लगा दिया। - [नसीराबाद की क्रांति](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-shot-major-spotswood-and-cut-colonel-newbury-to-pieces/): छावनी क्षेत्र में एक असिस्टेण्ट कमिश्नर, एक सिविल सर्जन तथा उसकी पत्नी, गवर्नमेंट कॉलेज का प्रिंसीपल, उसका एक सहायक तथा आधा दर्जन नॉन कमीशन्ड अधिकारी तोपखाने के पास ही रहते थे। - [चलो दिल्ली मारो फिरंगी](https://bharatkaitihas.com/the-revolutionaries-of-nasirabad-also-walked-towards-the-red-fort/): विद्रोही घुड़सवार को एक तोपची ने मार गिराया। उसके पांच विद्रोही साथियों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। तीन को आजीवन कारावास दिया गया तथा पच्चीस सैनिकों के हथियार छीनकर दूसरे सैनिकों को दे दिये गये। - [ठाकुर कुशालसिंह](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-beheaded-political-agent-mac-mawson-and-hung-him-outside-the-fort/): कप्तान शावर्स ने सेना लेकर विद्रोही सिपाहियों का पीछा किया। वह शाहपुरा भी गया किंतु शाहपुरा के शासक लक्ष्मणसिंह ने कप्तान शावर्स के लिये नगर के द्वार नहीं खोले। - [मेजर बर्टन की हत्या](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-beheaded-major-burton-and-locked-the-maharaja-of-kota-in-the-fort/): कोटा रियासत के विद्रोही सेनिकों ने ब्रिटिश सेना के मेजर बर्टन की हत्या कर दी और उसका सिर काटकर कोटा के किले पर लटका दिया। - [महारानी लक्ष्मी बाई](https://bharatkaitihas.com/maharani-laxmi-bai-introduced-the-british-to-power-of-indian-women/): महारानी महारानी लक्ष्मी बाई की दशा देखकर पृथ्वीसिंह को भारत भूमि की दुर्दशा का बोध हुआ। पृथ्वीसिंह ने महारानी को दो दिन तक अपने महल में ठहराया तथा उसे नये वस्त्र प्रदान किये। - [तात्या टोपे](https://bharatkaitihas.com/marathi-brahmin-tatya-tope-defeated-british/): तात्या टोपे पेशवा बाजीराव (द्वितीय) के निजी कर्मचारी पाण्डुरंग राव भट्ट़ का स्वाभिमानी बेटा था। तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पाण्डुरंग राव था, परंतु उसे स्नेह से तात्या कहा जाता था। - [तात्या टोपे का संघर्ष](https://bharatkaitihas.com/saffron-flag-nut-and-betel-leaf-began-to-roam-from-village-to-village/): अंग्रेज समझ गए कि नाना साहब या तात्या टोपे इस क्षेत्र में आने वाले हैं तथा उनके गुप्त संगठन जन साधारण को नाना साहब या तात्या टोपे के पक्ष में संगठित कर रहे हैं। - [मेरठ के क्रांतिकारी](https://bharatkaitihas.com/tilangas-entered-delhi-and-started-a-terrible-game-of-violence-and-plunder/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी की दिल्ली में स्थित सेनाओं में कोई विद्रोह नहीं हुआ था। जब मेरठ के क्रांतिकारी दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने क्रांति की शुरुआत की। चूंकि यह सशस्त्र सैनिक क्रांति थी इसलिए क्रांति का प्राकट्य हिंसा से हुआ और हिंसा से ही इस क्रांति का समापन हो सका। 10 मई 1857 को रविार था […] - [दिल्ली की लूट](https://bharatkaitihas.com/tilangas-cut-jennings-beautiful-daughter/): मरने वालों में फादर जेनिंग्स की एक खूबसूरत बेटी भी शामिल थी। अभी उसने यौवन की देहरी पर पैर ही रखा था कि बेरहम मौत ने उसे बिना किसी अपराध के आकर जकड़ लिया। - [तिलंगों का कहर](https://bharatkaitihas.com/theophilus-metcalf-reached-kotwali-in-a-shirt-and-under-wear/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में भाग लने वाले पुरबिया सैनिकों को भारतीय इतिहास में तिलंगा कहा गया है। दिल्ली वासियों ने इन तिलंगों का कहर अपनी आंखों से देखा। जब तिलंगों ने दिल्ली पर आक्रमण किया, तब उनका उद्देश्य अंग्रेजों को मारकर दिल्ली को मुक्त करवाना और बहादुरशाह जफर को बादशाह घोषित करना था […] - [अंग्रेजों की लाशें](https://bharatkaitihas.com/bahadur-shah-zafar-sewed-shroud-for-the-british-of-delhi/): किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह दिल्ली की उन सड़कों पर निकलकर देखे कि अंग्रेजों की लाशें किन-किन सड़कों पर पड़ी हैं! कौनसे लाला की हवेली के दरवाजे टूटे पड़े हैं और कौनसे रईस के अस्तबल के घोड़े कल सुबह से भूखे खड़े हैं! - [बहादुरशाह जफर की बादशाहत](https://bharatkaitihas.com/cannon-thunder-rose-from-red-fort-in-midnight/): जब तिलंगों ने रानी विक्टोरिया और गोरों को गालियां देना आरम्भ किया तो बादशाह खिन्न हो गया। उसने अनुभव किया कि तिलंगों की नारेबाजी में उस गरिमा का अभाव है जो बादशाह के जुलूसों में चलने वाले सिपाहियों में होती है। - [काफिरों पर कहर](https://bharatkaitihas.com/people-of-delhi-believed-that-god-sent-tilangas-to-delhi/): अंग्रेजों पर खुदा का कहर टूटा है। उनके घमंड को खुदाई इंतकाम ने चूर-चूर कर दिया है। कुरआन शरीफ में लिखा है कि खुदा घमण्ड करने वालों को पसंद नहीं करता है। वह इन ईसाइयों पर ऐसी प्रलय लाया है कि थोड़े ही समय में इस खून-खराबे ने उनको बिल्कुल ही तबाह और बर्बाद कर दिया। - [दिल्ली की तवायफें](https://bharatkaitihas.com/tilangas-captured-kothas-of-delhis-tawaifs/): डॉ. चमनलाल जो कि हिन्दू से ईसाई बन गया था, उसे इन दंगों में मार दिया गया जबकि एंग्लो इण्डियन ईसाई औरत मिसेज ऑल्डवैल को इसलिए जीवित छोड़ दिया गया क्योंकि उसे कलमा पढ़ना आता था। - [तिलंगे](https://bharatkaitihas.com/mother-india-will-be-grateful-to-tilangas/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के समय तिलंगे शब्द बड़ा विख्यात हुआ। अंग्रेज अधिकारी इस शब्द से भयभीत थे तो भारतीयों के सीने इस शब्द को सुनकर गर्व से फूल जाते थे। आज भी बहुत से नौजवान जानना चाहते हैं कि तिलंगे कौन थे और कहाँ से आए थे! अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति होने […] - [दिल्ली में भुखमरी](https://bharatkaitihas.com/failure-of-red-fort-leads-to-starvation-in-delhi/): बहादुरशाह जफर का मानना था कि दिल्ली में घुस आए क्रांतिकारी सैनिक भरोसेमंद नहीं हैं। उन्हें दरबारी तौर-तरीकों की कोई जानकारी नहीं है। वे किसी की इज्जत करना नहीं जानते हैं। - [अंग्रेजों का आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/major-british-officers-died-of-cholera-even-before-invading-delhi/): अंग्रेज सेनाओं ने इन क्रांतिकारी सेनाओं पर तत्काल आक्रमण कर दिया जिससे क्रांतिकारियों की सेनाओं को बड़ली की सराय से पीछे भागकर दिल्ली में घुस जाना पड़ा और अंग्रेजों ने यमुना के पश्चिमी तट पर स्थित रिज पर अधिकार कर लिया जो कि दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित थी। - [विलियम हॉडसन के जासूस](https://bharatkaitihas.com/william-hodgsons-spies-spread-all-over-delhi/): हॉडसन के घुड़सवार दस्ते को अंग्रेजी सेनाओं के आगे रहकर शत्रु सेना की जासूसी करनी थी ताकि अंग्रेजों को अपनी रणनीति तय करने में सहायता मिल सके। - [लाल किले पर गोलीबारी](https://bharatkaitihas.com/english-cannon-shells-started-falling-on-red-fort/): बादशाह और शाही खानदान के लोग लाल किले की छत पर बैठ गए। सलातीन भी लाल किले की दीवारों के बुर्जों से इस गोली-बारी को देखते रहते। - [ब्रिगेडियर जॉन निकल्सन](https://bharatkaitihas.com/john-nicholson-has-come-as-the-death-of-indian-soldiers/): विलियम डेलरिम्पल ने लिखा है कि जॉन निकल्सन प्रोटेस्टेण्ट ईसाई था किंतु चापलूस हिन्दुस्तानियों का एक समूह उसे निकल सेन कहता था और उसे विष्णु का अवतार बताता था। - [मेजर जनरल आर्कडेल विल्सन](https://bharatkaitihas.com/entering-delhi-the-english-army-took-heavy-alcohol/): सार्जेंट कारमाइकल ने कश्मीरी गेट को बारूद से उड़ा दिया। मेजर रीड बुरी तरह घायल हो गया और उसका पूरा कॉलम बिखर गया। - [दिल्ली में दहशत](https://bharatkaitihas.com/delhi-became-vacant-due-to-fear-of-british-forces-and-goons/): किसी भी भारतीय के घर में आग लगा देना, सरे आम कोड़ों से पिटवाना और किसी भी भारतीय को फांसी के फंदे से लटका देना अंग्रेजों के लिए आम बात थी। - [दिल्ली की औरतें](https://bharatkaitihas.com/women-of-delhi-came-to-fight-the-british-for-bahadur-shah-zafar/): दिल्ली की औरतें के जिहादी चाहते थे कि बादशाह बहादुरशाह जफर स्वयं घोड़े पर सवार होकर अंग्रेजों की सेना से लड़ें किंतु जब लोगों ने देखा कि बादशाह कायरता दिखा रहा है तो दिल्ली की औरतें जिहादियों की भीड़ में शामिल होकर अंग्रेजों को मारने के लिए निकल पड़ीं। 16 सितम्बर 1857 को जिस दिन […] - [बाबर का आखिरी वंशज](https://bharatkaitihas.com/baburs-last-descendant-left-red-fort-in-dark-of-night/): जब सूरज निकला तो बादशाह एक कश्ती में बैठकर अपनी मंजिल की ओर रवाना हो गया। कुछ देर बाद बाबर का आखिरी वंशज यमुना नदी के पुराने किले के घाट की तरफ उतरा। - [मुगल हरम (6)](https://bharatkaitihas.com/mughal-harems-were-full-of-mughal-princesses/): मुगल हरम अकबर के समय से ही मुगल शहजादियों से भरने लगा था क्योंकि अकबर ने शहजादियों के विवाह करने की परम्परा बंद कर दी थी। - [तैमूरी खून (7)](https://bharatkaitihas.com/the-blood-of-genghis-khan-and-timur-lang-beating-hard-in-veins-of-the-princes/): मुगल शहजादों में उत्तराधिकार का प्रश्न शहजादों के खून से ही सुलझता आया था। - [महाराणा राजसिंह (8)](https://bharatkaitihas.com/maharana-snatched-mandalgarh-as-soon-as-shah-jahan-became-ill/): महाराणा राजसिंह ने शाहजहाँ के बीमार होने का सूचना सुनी तो उसने माण्डलगढ़ पर आक्रमण करके माण्डलगढ़ का किला छीन लिया। - [आगरा का लाल किला (9)](https://bharatkaitihas.com/emperor-left-delhi-and-went-to-agra/): शाहजहाँ दिल्ली छोड़कर आगरा चला गया! आगरा का लाल किला उसने नहीं बनवाया था किंतु फिर भी आगरा और लाल किला दोनों ही उसे पसंद थे। - [शाहजहाँ की बीमारी (10)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-was-common-enemy-of-the-three-little-princesses/): शाहजहाँ की बीमारी के समाचार लाल किले की दीवारों से बाहर निकलकर पूरी सल्तनत में तेजी से फैलते जा रहे थे। - [औरंगजेब का भय (11)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-was-most-afraid-of-aurangzeb/): दारा ने कई बार कट्टर मुल्ला-मौलवियों, अमीर-उमरावों तथा सूबेदारों को दण्डित किया था इसलिए वे दारा शिकोह से दुश्मनी रखते थे और औरंगजेब के प्रति जबर्दस्त समर्थन रखते थे। - [राठौड़ राजा (12)](https://bharatkaitihas.com/the-rathore-kings-did-not-like-aurangzeb-at-all/): औरंगज़ेब न केवल हिन्दुस्तान की किस्मत का मालिक बनना चाहता था अपितु बड़े भाई दारा शिकोह के कारण मुगलिया राजनीति जिस गलत दिशा में चल पड़ी थी, उस दिशा का मुँह भी मोड़ देना चाहता था। - [शाहशुजा (13)](https://bharatkaitihas.com/shahshuja-declared-himself-king-and-rushed-to-agra/): शाहशुजा ने भविष्य में फिर कभी बगावत नहीं करने तथा मुंगेर के पास स्थित राजमहल को अपनी राजधानी बनाकर वहीं तक सीमित रहने का वचन दिया। - [मुरादबक्श (14)](https://bharatkaitihas.com/muradbaksh-proclaimed-himself-emperor-and-rushed-to-agra/): जिस समय शाहशुजा की सेनाएं बनारस में शाही सेनाओं से युद्ध कर रही थीं, तब कुछ ऐसे समाचार मिले कि शाहशुजा आसानी से दारा को परास्त कर देगा। अतः मुरादबक्श चिंता में पड़ गया। - [शाहजहाँ का भय (15)](https://bharatkaitihas.com/the-old-shah-jahan-was-afraid-of-dara-shikoh-and-jahanara-as-well/): शहजादी रौशनआरा ने आगरा का सारा हाल और शाहजहाँ का भय अपने भाई औरंगज़ेब को लिख भेजा। बाकी शहजादियाँ भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। - [कासिम खाँ की नमकहरामी (16)](https://bharatkaitihas.com/cheating-of-qasim-khan/): दारा शिकोह को जिस कासिम खाँ पर पूरा विश्वास था, उसी कासिम खाँ की नमकहरामी ने महाराजा जसवंतसिंह को पराजय और मृत्यु के कगार पर पहुंचा दिया। - [धरमत का युद्ध (17)](https://bharatkaitihas.com/the-entire-army-of-maharaja-jaswant-singh-was-destroyed-and-he-alone-could-reach-to-jodhpur/): महाराजा और उसके राजपूत, मुगलिया राजनीति की खूनी चौसर में ऐसे स्थान पर घेर लिए गए जहाँ से न तो महाराजा जसवंतसिंह के लिए और न उसके राजपूतों के लिए बचकर निकल पाना संभव था। - [दारा शिकोह की हताशा (18)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-arrives-at-agras-doorstep-by-dodging-dara/): इस विशाल सैन्य समूह के सामने औरंगज़ेब और मुराद के पास कुल मिलाकर चालीस हजार घुड़सवार ही थे जो धरमत का युद्ध करने और लगातार चलते रहने के कारण थक कर चूर हो रहे थे। - [रूपसिंह राठौड़ (19)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-was-afraid-of-maharaja-roop-singh/): औरंगजेब को राजा रूपसिंह का भय सता रहा था! इस समय वह शाहजहाँ और दारा शिकोह के चारों ओर एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ा था। - [शामूगढ़ का युद्ध (20)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-roop-singhs-sword-reached-aurangzebs-neck/): दारा ने महाराजा रूपसिंह को तलवार लेकर पैदल ही औरंगज़ेब के हाथी की तरफ दौड़ते हुए देखा तो दारा की सांसें थम सी गईं। - [जहाँआरा का शोक (21)](https://bharatkaitihas.com/on-hearing-the-news-of-the-death-of-maharaja-roop-singh-shahzadi-jahanara-put-on-black-clothes/): महाराजा रूपसिंह की मृत्यु का समाचार सुनकर शहजादी जहाँआरा ने काले कपड़े पहन लिए! जहाँआरा का शोक शब्दों में व्यक्त करने योग्य नहीं था। - [शाहजहाँ की कैद (22)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-imprisons-the-owner-of-the-red-fort/): शाहजहाँ की शहजादियों ने जिस पिता को तख्त से उतारने के लिए हजार षड़यंत्र रचे थे, आज उसी शाहजहाँ की कैद उनके समस्त दुखों का कारण बन गई थी। - [शाहजहाँ के दुर्दिन (23)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-turned-down-the-proposal-of-partition-of-the-sultanate/): अकबर, जहांगीर तथा शाहजहाँ ने अनेक हिन्दू राजवंशों द्वारा विगत कई शताब्दियों में संचित किए गए खजाने छीनकर आगरा में लाकर जमा कर लिए थे। - [मुरादबक्श की हत्या (24)](https://bharatkaitihas.com/the-red-forts-of-delhi-and-agra-got-away-from-the-eyes-of-muradbaksh/): मुरादबक्श (Murad Bakhsh) की हत्या औरंगजेब (Aurangzeb) की योजना के प्रारम्भिक भाग में कल्पित नहीं की गई थी किंतु मुरादबक्श की उतावली ने औरंगजेब को मजबूर कर दिया कि दारा शिकोह (Dara Shikoh) की हत्या करने से पहले औरंगजेब मुरादबक्श की हत्या करे। बादशाह शाहजहाँ (Shahjahan) तथा शहजादी जहाँआरा (Jahanara Begum) को कैद करने के […] - [महाराजा जसवंतसिंह (25)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-conspired-to-assassinate-aurangzeb/): महाराजा जसवंतसिंह खजुआ के मैदान में औरंगजेब की तरफ से लड़ने के लिए पहुंच तो गया किंतु महाराजा की आत्मा महाराजा को धिक्कारती थी। - [शाहशुजा की हत्या (26)](https://bharatkaitihas.com/shahshuja-was-captured-by-wild-people-and-killed/): जब शाहशुजा ने देखा कि उसकी सेना युद्ध के मैदान से भाग छूटी है तो वह भी सिर पर पैर रखकर अपनी सेना के पीछे-पीछे भाग लिया। - [जोधपुर नरेश जसवंतसिंह राठौड़ (27)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-refused-to-accompany-dara-shikoh/): जोधपुर नरेश जसवंतसिंह राठौड़ (Maharaja Jaswantsingh) शाहजहाँ एवं औरंगजेब (Aurangzeb) कालीन मुगल राजनीति (Mughal Politics) में एक बहुप्रतिष्ठित एवं बुद्धिमान राजा हुआ है किंतु मुगलिया राजनीति की चौसर ने उसे ऐसा जकड़ लिया कि लाख चाहने पर भी जसवंतसिंह उस चौसर से स्वयं को अलग नहीं कर सका। दारा शिकोह (Dara Shikoh) आगरा से भागकर […] - [दौराई का युद्ध (28)](https://bharatkaitihas.com/the-sparks-of-cannonballs-glowed-like-lightning/): दौराई का युद्ध मुगलों के इतिहास में वैसा ही महत्व रखता है जैसा कि शामूगढ़ का युद्ध। - [जम्मू का राजा रामरूपराय (29)](https://bharatkaitihas.com/raja-ramroop-rai-of-jammu-sacrificed-for-aurangzeb/): दारा शिकोह की मोर्चाबंदी और धुंआधार बारूद बरसाने के कारण जम्मू का राजा रामरूपराय औरंगजेब के लिए बलिदान हो गया! - [उत्तराधिकार का युद्ध (30)](https://bharatkaitihas.com/unfortunately-hindu-rajas-took-wrong-decisions-regarding-dara/): उत्तराधिकार का युद्ध इस बात की गवाही देता है कि मुगल काल की राजनीति में हिन्दु राजाओं ने गलत निर्णय लिए। यहां तक कि महाराजा जसवंतसिंह ने भी! - [दारा शिकोह की गिरफ्तारी (31)](https://bharatkaitihas.com/the-treacherous-emir-sold-dara-to-aurangzeb/): दारा शिकोह की गिरफ्तारी से पूरे भारत में हा-हाकर मच गया। दुष्ट और छली षड़यंत्रकारियों की विजय हो गई तथा हिन्दुओं का एक मित्र उनसे हमेशा के लिए छिन गया। - [शहजादी रौशन आरा (32)](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-roshanara-demanded-death-for-her-brother-dara/): शहजादी रौशनआरा ने अपने भाई दारा शिकोह के लिए प्राणदण्ड की मांग की! दरअसल वह अपने आप को उत्तराधिकार के युद्ध की वास्तविक विजेता मानती थी। - [सुलेमान शिकोह (33)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-made-shahzade-suleiman-shikoh-drink-opium-and-get-it-killed/): सुलेमान शिकोह (Suleman Shikoh) अपने पिता दारा शिकोह (Dara Shikoh) का बड़ा पुत्र था। सबको लगता था कि शाहजहाँ (Shahjahan) के बाद दारा शिकोह और दारा शिकोह के बाद सुलेमान शिकोह हिन्दुस्तान का बादशाह तथा लाल किलों (Red Forts of Agra and Delhi) का मालिक होगा। इसलिए सुलेमान बड़े उत्साह से राजकाज एवं युद्धों में […] - [जहानआरा के अहसान (34)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-could-not-forget-the-blessings-of-jahanara/): औरंगजेब (Aurangzeb) ने अपने पिता शाहजहाँ (Shahjahan) के साथ अपनी बड़ी बहिन जहानआरा बेगम (Jahanara Begum) को बंदी बना तो लिया था किंतु औरंगजेब पर जहानआरा के अहसान इतने थे कि औरंगजेब उन्हें चाह कर भी भुला नहीं सकता था। शहजादी जहानआरा का जन्म 23 मार्च 1614 को अजमेर में हुआ था। वह शाहजहाँ (Shahjahan) […] - [शहजादी जहानआरा (35)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-jahanara-was-engulfed-in-flames/): आग की लपटों में घिर गई शहजादी जहानआरा ! किसी भी मुगल शहजादी न इससे पहले या इसके बाद इस तरह की आग स्वप्न में भी नहीं देखी होगी। - [जहानआरा की दौलत (36)](https://bharatkaitihas.com/jahanara-was-the-richest-woman-of-the-mughalia-sultanate/): शाह-बेगम की पदवी मिल जाने के कारण जहानआरा को शासन में सीधे हस्तक्षेप करने के अधिकार मिल गए थे। इसी कारण उसे बेगम-साहिब भी कहा जाता था। - [रौशनआरा का रुतबा (37)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-roshanara-defeated-jahanara-the-elder-sister/): वह जहानआरा द्वारा शाहजहाँ के उत्तराधिकारी के रूप में पसंद किए गए भाई दारा शिकोह को नापसंद करने लगी और उद्दण्ड औरंगजेब का पक्ष लेने लगी। - [शाहजहाँ के हीरे मोती (38)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-quarrelled-with-shah-jahan-for-diamonds-and-pearls/): शाहजहाँ ने औरंगजेब को लिखा कि वक्त आने पर तेरे बेटे भी तेरे साथ वही करेंगे जो तूने मेरे साथ किया है। - [शाहजहाँ की मृत्यु (39)](https://bharatkaitihas.com/after-all-shah-jahan-died-in-one-evening/): आखिर एक शाम शाहजहाँ की मृत्यु हो गई। जिस आदमी ने लाखों लोगों को मौत बांटी थी, आज वही आदमी मर गया और उसकी मौत से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। - [शाहबेगम (40)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-made-jahanara-again-shah-begum/): औरंगजेब ने जहानआरा को फिर से शाहबेगम बना दिया! वह अपनी इस बड़ी बहिन के अहसान कभी नहीं भूल सकता था। उसी ने औरंगजेब को पाला था। - [रौशनआरा की हत्या (41)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-killed-raushanara-by-slow-poison/): रौशनआरा की हत्या मुगलिया राजनीति का एक ऐसा काला और रहस्यमय अध्याय है जो मुगलों की राजनीतिक हवस को अच्छी तरह उजागर करता है। - [मुगल शहजादियों के विवाह (42)](https://bharatkaitihas.com/clarions-of-the-marriage-of-mughal-princesses-started-ringing-again-in-red-fort/): लाल किले में मुगल शहजादियों के विवाह की शहनाइयाँ फिर से बजने लगीं! ये शहनाइयाँ अकबर के समय से बंद पड़ी थीं। - [लाल किले की रंगीनियाँ (43)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-expelled-artists-from-red-fort/): शाहजहां के काल में गहरी जड़ें जमा चुकीं लाल किले की रंगीनियाँ औरंगजेब को फूटी आंख नहीं सुहाती थीं। वह इन रंगीनियों को इस्लाम विरोधी समझता था। - [मुगलिया भवनों की सजावट (44)](https://bharatkaitihas.com/orders-for-building-construction-were-not-issued-now-from-red-fort/): मुगल सैनिक पूरे भारत को लूट कर लाल किलों को महंगे रत्नों से भर रहे थे और लाल किलों में बैठे उनके मालिक इन रत्नों को इन भवनों में लगा रहे थे। शाहजहां कालीन मुगलिया भवनों की सजावट देखते ही बनती थी। - [दिलरास बानू का मकबरा (45)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-did-not-provide-money-for-his-begums-tomb/): औरंगजेब ने अपनी बेगम दिलरास बानू का मकबरा अत्यंत साधारण पत्थरों से बनवाया था जिसे देखकर दिलरास बानू के पुत्रों को बड़ी निराशा हुई। - [जीनत-उन्निसा (46)](https://bharatkaitihas.com/due-to-fear-of-hindus-aurangzeb-built-a-mosque-in-red-fort/): जीनत-उन्निसा औरंगजेब की दूसरे नम्बर की बेटी थी। वह अपने बाबा शाहजहाँ की लाड़ली थी और अपने बाप औरंगजेब को पसंद नहीं करती थी। - [औरंगजेब की कट्टरता (47)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-prohibited-the-writing-of-kalma-on-coins/): औरंगजेब का इस्लाम अपने जमाने के तमाम मुसलमानों से अलग था। कारण कुछ लोग उसे पीर एवं औलिया मानते थे तो कुछ लोग इसे औरंगजेब की कट्टरता कहते थे। - [औरंगजेब का मंदिर विनाश (48)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-of-delhi-started-hammering-hindu-temples/): सुबह-शाम बजने वाले नगाड़े और शहनाइयां के स्वर मानो औरंगजेब के भय से यमुनाजी के जल में समाधि ले चुके थे। - [मूर्तिभंजक औरंगजेब (49)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-demolished-temples-of-ujjain-ayodhya-and-jagannathpuri/): 21 सितम्बर 1681 को औरंगजेब ने बेलदारों के दारोगा जवाहर चंद को आदेश दिए कि वह बुरहानपुर जाए तथा अजमेर से बुरहानपुर तक के मार्ग में स्थित प्रत्येक मंदिर को तोड़ डाले। - [ब्रजभूमि पर कहर (50)](https://bharatkaitihas.com/braj-devastated-by-havoc-of-red-fort-but-rajputana-settled/): ई.1670 में औरंगजेब के आदेश से मथुरा के केशवराय मन्दिर को तोड़कर उसके पत्थरों से उसी स्थान पर मस्जिद बनवाई गई तथा मथुरा का नाम बदलकर इस्लामाबाद रख दिया गया। - [राजपूताने पर कहर (51)](https://bharatkaitihas.com/after-desolating-braj-aurangzeb-bared-his-teeth-on-rajputana/): मुगल सेना ने खण्डेला स्थित मोहनजी का मंदिर, खाटू श्यामजी स्थित सांवलजी का मंदिर एवं निकटवर्ती अन्य मंदिर तोड़ दिए। - [दक्षिण भारत पर कहर (52)](https://bharatkaitihas.com/beladar-became-daroga-of-bathroom-who-demolished-temples-for-aurangzeb/): मुगल सैनिकों ने मंदिर में गायों को लाकर उनकी हत्या की तथा मंदिर को ढहा दिया। - [शाइस्ता खाँ की मक्कारी (53)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-imprisoned-aurangzebs-army-in-mountains/): अभी शाइस्ता खाँ मार्ग में ही था कि उसे समाचार मिला कि शिवाजी ने छुरा भौंककर बीजापुर के सेनापति अफजल खाँ का वध कर दिया है। - [शाइस्ता खाँ की अंगुली (54)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-cut-off-the-finger-of-aurangzebs-maternal-uncle/): छत्रपति शिवाजी ने शाइस्ता खाँ की अंगुली नहीं काटी थी, अपितु अंगुली के रूप में औरंगजेब की नाक काटकर उसके हाथ में पकड़ाई थी। - [महाराजा जसवंतसिंह का उपकार (55)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-gave-shivaji-an-opportunity-to-escape/): शिवाजी पर किया गया महाराजा जसवंतसिंह का उपकार स्वयं महाराजा के लिए बहुत भारी पड़ा। औरंगजेब ने जसवंतसिंह के पुत्रों को छल-बल से मारा। - [राजकुमारी चारुमती का विवाह (56)](https://bharatkaitihas.com/maharana-raj-singh-married-with-princess-charumati/): औरंगजेब ने महाराणा को एक कड़ा पत्र लिखकर नाराजगी व्यक्त की जिसमें कहा गया कि मेरे हुक्म के बिना किशनगढ़ जाकर तुमने शादी क्यों की? - [सूरत बंदरगाह की लूट (57)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-shivaji-looted-the-estate-of-jahanara/): सूरत बंदरगाह की लूट औरंगजेब के गाल पर जड़ा गया ऐसा तमाचा था जिसकी गूंज पूरे भारत में सुनाई दी।इस लूट के बाद शिवाजी हिन्दू जाति के नायक बन गए। - [शिवाजी लाल किले में (58)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-shivaji-entered-red-fort-with-bhagwa-flag-on-elephant/): शिवाजी की आगरा यात्रा न केवल मुगल सल्तनत के इतिहास की अपितु मराठों के इतिहसा की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना ने मराठों की धाक जमा दी। - [शिवाजी की गर्जना (59)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-walls-shook-with-shivajis-roar/): जब शिवाजी लाल किले में खड़े होकर गरजे तो औरंगजेब जैसे क्रूर एवं मदांध बादशाह की रूह भी कांप उठी। शिवाजी की गर्जना से लाल किले की दीवारें कांप उठीं! शिवाजी की गर्जना न केवल मुगल इतिहास की, अपितु हिन्दुओं के इतिहास की भी अत्यंत महत्वपूर्ण घटना बन गई। जब औरंगजेब के बख्शी असद खाँ […] - [अमरसिंह राठौड़ की गर्जना (60)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-saw-the-walls-of-the-red-fort-shivering-with-the-roar-of-amarsingh-rathod/): औरंगजेब वह दिन भूल नहीं पाता था जब नागौर के राव अमरसिंह राठौड़ ने औरंगजेब के पिता शाहजहाँ की आंखों के सामने ही भरे दरबार में बादशाह के बख्शी सलावत खाँ को मार डाला था! - [शिवाजी का पलायन (61)](https://bharatkaitihas.com/the-walls-of-the-red-fort-could-not-stop-shivaji/): औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा में नजरबंद कर रखा था किंतु उसके सैनिक शिवाजी का पलायन नहीं रोक पाए। - [संभाजी की वापसी (62)](https://bharatkaitihas.com/the-brahmin-couple-fed-sambhaji-in-their-plate/): औरंगजेब को जब शिवाजी और उनके पुत्र संभाजी के सकुशल रायगढ़ पहुंच जाने के समाचार मिले तो वह अपमान और क्रोध से तिलमिलका कर रह गया। - [हिन्दू राजाओं की सुन्नत (63)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-played-a-conspiracy-to-take-hindu-rajas-to-iran-and-circumcise-them/): राजकुुमार पद्मसिंह को बीकानेर राजवंश का अब तक का सबसे वीर पुरुष माना जाता है। उसकी तलवार का वजन आठ पौण्ड तथा खाण्डे का वजन पच्चीस पौण्ड था। - [मिर्जाराजा जयसिंह (64)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-killed-mirzaraja-jaisingh-by-poisoning-him/): ई.1636 में शाहजहाँ ने जयसिंह को 'मिर्जा-राजा' की उपाधि दी थी। तब से मिर्जाराजा जयसिंह शाहजी एवं शिवाजी को हानि पहुंचाता आ रहा था। - [वीर गोकुला जाट (65)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-got-veer-gokula-jat-sliced-in-agras-red-fort/): गंगा-यमुना के दो-आब में निवास करने के कारण जाटों को मुसलमान शासकों के हाथों दीर्घकाल तक उत्पीड़न झेलना पड़ा जिसके कारण इनमें संघर्ष करने की प्रवृत्ति विकसित हो गई। - [औरंगजेब को चुनौती (66)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-looted-surat-for-second-time-and-openly-challenged-aurangzeb-for-war/): छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्पूर्ण अस्तित्व ही धूर्त औरंगजेब को चुनौती था। औरंगजेब के समक्ष शिवाजी की शक्ति कुछ भी नहीं थी किंतु औरंगजेब शिवाजी को छू भी नहीं पाता था। शिवाजी की आगरा यात्रा के लिए मिर्जाराजा जयसिंह के माध्यम से शिवाजी को शाही खजाने से 1 लाख रुपए दिए गए थे। जब शिवाजी […] - [छत्रसाल बुंदेला (67)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-made-chhatrasal-an-enemy-of-the-red-fort/): औरंगजेब तो ई.1707 में छत्रसाल का दमन करने की अधूरी इच्छा के साथ मर गया किंतु राजा छत्रसाल ई.1731 तक मातृभूमि की सेवा करता रहा। - [छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक](https://bharatkaitihas.com/red-fort-saw-with-great-surprise-the-coronation-of-chhatrapati-shivaji/): ब तक वह कट्टरपंथी औरंगजेब, अकबर के सिंहासन पर बैठा रहा, एक भी राजपूत उसे बचाने के लिए अपनी अंगुली भी हिलाने को तैयार नहीं था। औरंगजेब को अपनी दाहिनी भुजा खोकर दक्षिण के शत्रुओं के साथ युद्ध करना पड़ा। - [भारतीय औरतों से विवाह (68)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-did-not-like-that-portuguese-men-marry-indian-women/): पुर्तगालियों ने अराकानी स्त्रियों के साथ विवाह करने आरम्भ कर दिए क्योंकि पुर्तगाली औरतें भारत में आकर रहने को तैयार नहीं थीं। - [सतनामियों के ताबीज (69)](https://bharatkaitihas.com/afraid-of-satnamis-aurangzeb-tied-amulets-on-cannons/): संत रैदास तथा उनके शिष्यों द्वारा दिए गए भगवद्भक्ति के मंत्र ने सतनामियों को इतना साहस प्रदान किया कि वे भारतीय इतिहास का अमिट हिस्सा बन गए।  - [सिक्ख गुरुओं की हत्या (70)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-killed-guru-arjun-dev-and-guru-tegh-bahadur/): 11 नवम्बर 1675 को दिल्ली के चाँदनी चौक में काज़ी ने फ़तवा पढ़ा और जल्लाद जलालदीन ने तलवार से गुरु तेग बहादुर का शीश धड़ से अलग कर दिया। - [नेताजी पाल्कर](https://bharatkaitihas.com/netaji-palkar-became-a-hindu-again-by-defying-the-red-fort/): लाल किले को धता बताकर नेताजी पाल्कर फिर से हिन्दू बन गया! - [औरंगजेब की औलादें](https://bharatkaitihas.com/shahzada-muhammad-sultan-died-in-salimgarh-jail/): औरंगजेब की औलादें जेलों में सड़-सड़ कर मरीं, जो जीवित बचीं वे आपस में कट-कट कर मरीं। औरंगजेब ने सबकी जिंदगी नर्क बना रखी थी। - [यूसुफजइयों के कबीले](https://bharatkaitihas.com/yusufjai-sold-twenty-thousand-men-and-women-of-kabul-to-the-markets-of-central-asia/): यूसुफजइयों के कबीले बड़े दुर्दान्त, लड़ाकू एवं क्रूर थे। वे प्रायः आसपास के मैदानों पर धावा बोलते थे और लूटमार करके भाग जाते थे। - [महाराजा जसवंतसिंह की रानियाँ](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-imprisoned-the-queens-of-maharaja-jaswant-singh/): औरंगजेब को पूरा विश्वास था कि स्वर्गीय महाराजा की दोनों रानियां एवं राजकुमार अजीतसिंह दिल्ली में ही कहीं पर छिपे हुए हैं। अतः घर-घर तलाशी ली गई। - [भारत में जजिया](https://bharatkaitihas.com/red-fort-re-enforced-jiziya-in-india/): जजिया एक विशेष प्रकार का कर है जो मुस्लिम शासकों द्वारा अपनी गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाता था। भारत में जजिया से प्रथम परिचय ई.712 में हुआ था जब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध प्रदेश को जीतकर वहाँ के हिन्दुओं पर जजिया लागू किया था। लाल किले के नए मालिकों ने भी कई बार भारत […] - [औरंगजेब से नफरत](https://bharatkaitihas.com/the-whole-country-stood-up-against-the-red-fort/): जब औरंगजेब ने हिन्दू राजाओं की एक साथ सुन्नत करने का प्रयास किया तो हिन्दू राजा औरंगजेब से विमुख हो गए। - [राठौड़ों का राजकुमार](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-could-not-get-the-prince-of-the-rathores/): महाराणा राजसिंह ने राजकुमार अजीतसिंह को केलवा ठिकाणे का पट्टा देकर वहाँ रक्खा तथा जोधपुर के राजपूत सरदारों को आश्वस्त किया कि बादशाह कितना ही ताकतवर क्यों न हो, वह वीर दुर्गादास तथा मेवाड़ की सम्मिलित शक्ति का सामना नहीं कर सकता। - [राजपूताने पर आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/rathores-and-sisodis-drag-aurangzeb-into-the-mountains/): महाराणा ने भीलों की सेना को पहाड़ों की नाकाबंदी करने पर नियुक्त कर दिया। इन भीलों ने सैंकड़ों मुगल सैनिकों को अपने तीरों से मार डाला। - [कुंवर भीमसिंह](https://bharatkaitihas.com/maharana-raj-singh-brought-the-gold-of-the-mughals-to-udaipur-by-loading-on-camels/): अब औरंगजेब मेवाड़ की तरफ से निश्चिंत होकर अपनी सम्पूर्ण शक्ति मराठों के विरुद्ध लगा सकता था। - [औरंगजेब का चौथा बेटा](https://bharatkaitihas.com/aurangzebs-fourth-prince-was-rebel/): औरंगजेब अपने अमीरों, उमरावों, एवं सेनापतियों को भी संदेह की दृष्टि से देखता था। इसलिए वह राज्य के छोटे-से-छोटे काम को स्वयं करने का प्रयत्न करता था। - [औरंगजेब का छल](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-wrote-a-false-letter-and-sent-it-to-veer-durgadas/): शंभाजी ने अकबर को आश्वासन दिया कि वह शीघ्र ही एक बड़ी सेना लेकर औरंगजेब पर आक्रमण करने के लिए उत्तर भारत की तरफ अभियान करेगा। - [शहजादी जेबुन्निसा](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-jailed-his-elder-daughter-zebunnisa/): औरंगजेब को चित्रकला, मूर्तिकला एवं संगीतकला से घृणा थी किंतु जेबुन्निसा को संगीत तथा साहित्य में बहुत रुचि थी और वह अपने समय की अच्छी गायिका थी। - [शहजादी जेबुन्निसा का अंत](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-jebunnisa-died-in-jail/): औरंगजेब अपनी पांच पुत्रियों में से सबसे अधिक प्रेम अपनी बड़ी पुत्री जेबुन्निसा से करता था और अपने पांच पुत्रों में से सर्वाधिक प्रेम अपने चौथे नम्बर के पुत्र अकबर से करता था किंतु इन दोनों ने ही औरंगजेब को मुगलों के तख्त से उतारने का षड़यंत्र रचा। - [बेगम जहांजेब बानू](https://bharatkaitihas.com/jahanzeb-daughter-in-law-of-aurangzeb-made-anirudh-singh-a-son/): वह नित्य प्रतिदिन अल्लाह से प्रार्थना किया करे कि उसका पिता मर जाए ताकि अकबर को एक दिन मुगलों का बादशाह बनने का अवसर मिल सके। - [मुअज्जम](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-prohibited-cutting-of-shahzades-hair-and-nails/): इस समय तक मुअज्जम यौवन की दहलीज पर पैर रख चुका था इसलिए उसके मन में औरतों के प्रति आकर्षण उत्पन्न होना स्वाभाविक था। - [वीर राजाराम जाट](https://bharatkaitihas.com/veer-rajaram-jat-put-the-bones-of-emperor-akbar-in-the-fire/): गोकुला के दर्दनाक अंत से बुरी तरह आहत हुए जाट धीरे-धीरे सिनसिनी गांव के निवासी ब्रजराज जाट तथा उसके भाई भज्जासिंह जाट के नेतृत्व में एकत्रित होने लगे। - [शंभाजी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80/): औरंगजेब ने सोचा था कि शंभाजी की हत्या के बाद मराठा शक्ति बिखर जाएगी किंतु हुआ ठीक उलटा। - [गुरु गोविन्दसिंह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/): नौ वर्ष की आयु में जब गोविन्दसिंह के पिता दिल्ली में शहीद हुए तब सिक्ख पंथ का भार बालक गोविन्द सिंह के कन्धों पर आ गया और वे सिक्खों के दसवें गुरु हुए। - [शहजादी सफियतुन्निसा](https://bharatkaitihas.com/veer-durgadas-returned-aurangzebs-grandson-and-granddaughter/): राजकुमार अजीतसिंह शहजादी सफियतुन्निसा से विवाह करना चाहता था किंतु वीर दुर्गादास ने अजीतसिंह को शहजादी सफियतुन्निसा से मिलने एवं उससे विवाह करने पर रोक लगा दी। - [दक्षिण भारत में औरंगजेब](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-was-in-a-rage-in-south-india-for-twenty-five-years/): दक्षिण भारत में औरंगजेब के पच्चीस साल उतने ही भयावह थे जितने तैमूर लंग के कुछ साल उत्तर भारत के लिए भयंकर विनाशकारी रहे थे। - [मुगल काल में किसान](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-was-squeezing-blood-of-people-of-india/): किसानों के खेतों पर जाने वाले कर्मचारी एवं सिपाही बेईमान थे इस कारण वे किसानों से बड़ी क्रूरता से पेश आते थे। - [औरंगजेब की मौत](https://bharatkaitihas.com/nobody-was-crying-over-aurangzebs-death/): औरंगजेब का जन्म ई.1618 में हुआ था और अब वह जीवन के उननब्बेवां पतझड़ देख रहा था। - [चगताई शहजादों का रक्त](https://bharatkaitihas.com/baburs-descendants-were-accustomed-to-murder-of-chagatai-shahzadas/): इस वंश के जितने शहजादों का खून स्वयं इस परिवार के सदस्यों ने बहाया, उतना खून उनके शत्रुओं ने भी नहीं बहाया था। - [औरंगजेब की वसीयत](https://bharatkaitihas.com/my-part-in-the-house-is-from-floor-to-ceiling-your-part-is-from-roof-to-sky/): औरंगजेब की वसीयत में मुगल सल्तनत के उत्तरी भारत के प्रांतों को दिल्ली एवं आगरा नामक दो भागों में विभक्त करके अपने शेष दो पुत्रों को आपस में बांट लेने की सलाह दी थी। - [शाहआलम](https://bharatkaitihas.com/after-killing-aurangzebs-favorite-sons-shah-alam-became-the-emperor-of-india/): आजमशाह को किसी नजूमी ने बताया कि यदि 20 जून को युद्ध आरम्भ हुआ तो तेरी विजय होगी। - [महाराजा अजीतसिंह](https://bharatkaitihas.com/maharaja-ajitsingh-washed-the-jodhpur-fort-with-ganga-water/): अजीतसिंह पूरे मारवाड़ राज्य का स्वामी था किंतु औरंगजेब ने उसे अपने ही राज्य में एक छोटा सा जागीरदार बनाने की साजिश की थी। - [शाहे बेखबर](https://bharatkaitihas.com/the-court-of-shahe-bekhar-was-divided-into-shia-and-sunni/): बादशाह राजकीय कार्यों में इतना अधिक लापरवाह था, कि लोग उसे 'शाहे-बेख़बर' कहने लगे थे किंतु इतिहासकारों का यह आरोप सही नहीं लगता है। - [शहजादा कामबक्श](https://bharatkaitihas.com/bahadurshah-heals-with-his-hands-on-the-wounds-of-kambaksha/): कामबख्श बुरी तहर से घायल हो गया तथा उसके शरीर से रक्त बह जाने के कारण वह बेहोश हो गया। - [सवाई जयसिंह से दुश्मनी](https://bharatkaitihas.com/kachhawahs-rathores-and-sisodis-formed-a-union-against-red-fort/): जजाऊ के युद्ध में आजमशाह तथा बेदारबख्त की मृत्यु हो गई तथा सवाई जयसिंह के भी बहुत से राजपूत सिपाही मारे गए। - [बंदासिंह बैरागी](https://bharatkaitihas.com/red-fort-finds-bandasingh-bairagi-as-new-enemy/): माधवदास बैरागी, गुरु गोविंदसिंह की बातों से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उसने स्वयं को गुरु का बन्दा कहना आरम्भ कर दिया। - [चूड़ामन जाट](https://bharatkaitihas.com/red-fort-kneels-in-front-of-chudaman-jat/): जब औरंगजेब दक्षिण भारत में अंतिम सांसें गिन रहा था तब जाटों का नेतृत्व चूड़ामन जाट के हाथों में था। - [बहादुरशाह की मृत्यु](https://bharatkaitihas.com/body-of-emperor-could-not-be-buried-for-two-and-a-half-months/): बादशाह सिक्खों का दमन करने तथा लाहौर के मुल्ला-मौलवियों से समझौता करने के लिए लाहौर चला गया। - [जहाँदारशाह](https://bharatkaitihas.com/jahandarshah-made-the-red-fort-a-dance-house/): बहादुरशाह के पुत्रों में से जहाँदारशाह सबसे बड़ा था। उसका वास्तविक नाम मिर्जा मुइज्जुद्दीन बेग मुहम्मद खान था। - [जहाँदारशाह की हत्या](https://bharatkaitihas.com/iranian-wazirs-betrayed-jahandarshah-and-got-him-killed/): जहाँदारशाह की हत्या से भारत के मुगलों में बादशाहों की हत्या का एक लम्बा सिलसिला शुरु होता है। हत्याओं के इसी सिलसिले ने मुगल सल्तनत को उसके अंत तक पहुंचा दिया। ईरानी वजीरों ने गद्दारी करके जहाँदारशाह की हत्या करवाई! मुगल बादशाह जहाँदारशाह ने शासन व्यवस्था में बड़े परिवर्तन करने के प्रयास किए। उसने राज्य […] - [रोम में पांचवाँ दिन - 21 मई 2019 (6)](https://bharatkaitihas.com/fifth-day-in-rome/): आज रोम में हमारा पांचवाँ दिन था। आज हमें सेंट एंजिलो कैसल जाना था। इस कारण आज का दिन भी बहुत से नए अनुभवों वाला होने वाला था। शरीर भारतीय समय को भूलकर इटली का समय अपनाने लगा है। हालांकि अब भी आंख एक बार तो भारतीय समय के अनुसार प्रातः पाँच बजे खुल जाती […] - [फ्लोरेंस में पहला दिन - 22 मई 2019 (7)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-florence/): फ्लोरेंस में पहला दिन हमने यूरोप की सबसे पुरानी फार्मेसी का भवन ढूंढने में बिताया। फ्लोरेंस के लोग इस फार्मेसी के बारे में बिल्कुल भूल चुके थे। अंत में एक नई उम्र की लड़की ने हमें पुरानी फार्मेसी के बारे में कुछ संकेत बताए। आज हमें फ्लोरेंस के लिए निकलना है। हमारी ट्रेन प्रातः 11.30 […] - [फ्लोरेंस में दूसरा दिन - 23 मई 2019 (8)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-florence/): हमारा फ्लोरेंस में दूसरा दिन भारत के आम चुनावों के परिणाम देखने तथा पीसा शहर की यात्रा करने में व्यतीत हुआ। संसार भर के यात्री फ्लोरेंस एवं पीसा देखने के लिए आते हैं। रात भर नींद नहीं आई। हम जब भारत से चले थे तो सत्रहवीं लोकसभा के लिए मतदान करके चले थे और आज […] - [पीसा में एक दिन (9)](https://bharatkaitihas.com/a-day-in-pisa/): फ्लोरेंस से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर पीसा नामक शहर है जहाँ झुकी हुई मीनार स्थित है। दूरबीन के आविष्कारक गैलीलियो का जन्म ई.1564 में इसी पीसा शहर में हुआ था। हम सही समय पर रेल्वे स्टेशन पहुँच गए। फ्लोरेंस से प्रत्येक आधे घण्टे में पीसा के लिए ट्रेन है। यहाँ कई हॉल थे […] - [फ्लोरेंस में तीसरा दिन - 24 मई 2019 (10)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-florence/): आज फ्लोरेंस शहर देखने का कार्यक्रम बनाया था जिसे स्थानीय भाषा में फिरेंजे कहते हैं। किसी भी शहर के भीतरी भाग को देखना हो तो सबसे बढ़िया माध्यम पैदल चलना ही हो सकता है। आंख खुली तो देखा पाँच बज रहे हैं। यह कमाल ही था कि शरीर की जैविक घड़ी में भी अब भारत […] - [वेनेजिया में पहला दिन - 25 मई 2019 (11)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-venzia/): वेनेजिया में पहला दिन हमें अब तक विदेश यात्राओं में हुए अनुभवों से पूरी तरह अलग अनुभव देने वाला रहा। समझ में नहीं आता कि यह कैसा शहर है। शहरों में से नदी या नहरें गुजरती हुई तो हमने देखी थीं किंतु यह शहर समुद्री नदियों एवं नहरों के बीच से होकर गुजरता हुआ प्रतीत […] - [वेनेजिया में दूसरा दिन - 26 मई 2019 (12)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-venezia/): वेनेजिया में दूसरा दिन लगभग 90 साल की एक वृद्ध इटैलियन महिला से दीपा की हैलो के साथ आरम्भ हुआ जो एक विशाल बहुमंजिला भवन के किसी फ्लोर पर अकेली रहती थी। हैलो दीपा! सुबह पाँच बजे आंख खुल गई। मधु ने चाय बनाई। इस चाय के कारण ऐसा लगता ही नहीं है कि हम […] - [वेनेजिया में तीसरा दिन - 27 मई 2019 (13)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-venezia/): वेनेजिया में तीसरा दिन बरसात की भेंट चढ़ गया। दिन निकलने के साथ ही बरसात आरम्भ हो गई थी, इसलिए कहीं दूर आना-जान संभव नहीं था। इसलिए हमने शहर में ही एक छोटा सा चक्कर लगाने का निश्चय किया। प्रातः 4 बजे आंख खुल गई। लगभग पूरी रात बरसात होती रही इसलिए सुबह तक ठण्ड […] - [इटली में अंतिम दिन - 28 मई 2019 (14)](https://bharatkaitihas.com/last-day-in-italy/): आज हमारा इटली में अंतिम दिन था। इस दिन की शुरुआत रास्ते के लिए खाना बनाने से आरम्भ हुई। इस दिन का दूसरा बड़ा काम कचरा फैंकने के लिए स्थान ढूंढना रहा। कचरा फैंकने की मशक्कत सुबह 4.30 बजे उठकर निकलने की तैयारियां कीं। मधु एवं भानु ने रात में ही पूड़ियां बना ली थीं। […] - [लेखकीय - रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/preface-of-history-of-roman-empire/): लेखकीय – रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण पृष्ठ पर लेखकर डॉ. मोहनलाल गुप्ता की कलम से पुस्तक रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण की प्रस्तावना लिखी गई है। आदमी द्वारा किए गए आविष्कारों और खोजों की सूची आग और पहिए से आरम्भ होती है। इस सूची में घोड़े की पीठ […] - [इटली यूरोप का भारत (1)](https://bharatkaitihas.com/italy-the-india-of-europe/): कई मायनों में इटली यूरोप का भारत है। कई मायनों में इटली यूरोप का भारत है। इस बात को वहाँ जाकर ही समझा जा सकता है। इटली के लोगों की कद-काठी, बालों का रंग, चेहरा-मोहरा भारत के पंजाब प्रांत के लोगों से मिलता है न कि शेष यूरोपवासियों से। इटली को ‘यूरोप का भारत’ कहा […] - [रिपब्बलिका इटेलियाना (2)](https://bharatkaitihas.com/repubblica-italiana/): इटली की मूल भाषा लैटिन तथा वर्तमान राजभाषा ‘इटेलियन’ में इस देश का मूल नाम रिपब्बलिका इटेलियाना है। अंग्रेजी भाषा में इसे ‘इटली’ कहा जाता है। 35 से 47 डिग्री उत्तरी अक्षांशों एवं 6 से 19 डिग्री पूर्वी देशांतरों के बीच, यूरोप महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित इटालियन प्रायद्वीप, ई.1861 से एक देश के […] - [रोमन् सभ्यता की स्थापना एवं विस्तार (3)](https://bharatkaitihas.com/establishment-and-expansion-of-roman-civilization/): रोमन् सभ्यता की स्थापना का उद्भव तथा रोमन सभ्यता की स्थापना दो अलग-अलग विषय हैं। इस क्षेत्र में मानवों का अधिवास अत्यंत प्राचीन काल से था किंतु रोमन् सभ्यता की स्थापना उसके बहुत बाद में हुई तथा माना जाता है कि रोमन् सभ्यता की स्थापना भारत से गए आर्यों के किसी दल ने की जो […] - [रोम का प्राचीन धर्म (4)](https://bharatkaitihas.com/ancient-religion-of-rome/): रोम का प्राचीन धर्म भारत के वैदिक धर्म पर ही आधारित है। इस कारण रोमन देवी-देवताओं के नाम वैदिक देवी-देवताओं से समानता रखते हैं। भारोपीय (हिन्द-यूरोपीय) धर्म भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में यूरोप की सभ्यता एवं संस्कृति हजारों साल बाद की है। भारत में ऋग्वेद की रचना का काल यद्यपि पश्चिमी इतिहासकारों ने […] - [पाइथोगोरियन ब्रदरहुड](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-the-pythagorean-brotherhood-in-italy/): पाइथोगोरस यूरोपीय इतिहास का प्रथम ऋषि है जिसके बारे में लिखित प्रमाण मिलते हैं। पाइथोगोरस ने पाईथोगोरियनवाद नामक वैचारिक आन्दोलन की स्थापना की जिसे उस काल का धार्मिक मत भी कहा जा सकता है। उसके जीवन काल में उसे रहस्यवादी दार्शनिक माना जाता था। - [महान् रोमन गणराज्य](https://bharatkaitihas.com/great-roman-republic/): 6. महान् रोमन गणराज्य रोम की स्थापना के लगभग बाद पाँच सौ सालों तक रोम में राजा का राज्य चलता रहा किंतु ई.पू. 509 में रोमन गणराज्य की स्थापना हुई। यह एक विचित्र प्रकार का गणराज्य था जिस पर जमींदार वर्ग के कुछ धनी कुटुम्बों का वर्चस्व था। उन्हें सम्मिलित रूप से ‘सीनेट’ कहते थे। […] - [रोमनगणराज्य का नैतिक पतन (7)](https://bharatkaitihas.com/moral-decline-of-roman-republic/): रोमनगणराज्य का पतन होने से पहले रोमनगणराज्य का नैतिक पतन हुआ। इस कारण रोम की जनता रोमनगणराज्य से घृणा करने लगी। यह कैसा गणराज्य था जिसमें न तो गण की सुरक्षा थी और न राज की। रोमवासियों का गणराज्य से मोहभंग कार्थेज के पतन के बाद पराजित देशों से गुलाम पकड़ने का काम तेज हो […] - [जूलियस सीजर एवं क्लियोपैट्रा (8)](https://bharatkaitihas.com/julius-caesar-and-cleopatra/): जब तक जूलियस सीजर मिस्र पहुँचकर पॉम्पी को घेर पाता, मिस्र के राजा टॉलेमी (तेरहवें) ने पॉम्पी को पकड़कर उसकी हत्या कर दी। इससे पहले कि जूलियस सीजर मिस्र से वापस रोम लौटता, रानी क्लियोपैट्रा ने सीजर से गुप्त-स्थान पर भेंट करने की प्रार्थना भिजवाई। - [महान् रोमन साम्राज्य का उदय (9)](https://bharatkaitihas.com/the-rise-of-the-great-roman-empire/): जब रोमनगणराज्य का नैतिक पतन हो गया और रोमनगणराज्य बिखरने लगा तब महान् रोमन साम्राज्य की स्थापना का मार्ग स्वतः ही प्रशस्त होता चला गया। पूरी दुनिया राजतंत्र से गणतंत्र की ओर जाती है किंतु रोम के लोग गणतंत्र से तंग आकर राजतंत्र की ओर अग्रसर हुए। प्रिन्सेप्स ऑगस्टस ऑक्टेवियन सीजर जूलियस सीजर की हत्या […] - [ईसा मसीह को सूली (10)](https://bharatkaitihas.com/crucifix/): जेरूसलम और रोमन साम्राज्य में ईसा मसीह को सूली उस समय इतनी महत्त्वहीन थी कि रोमवासियों को तो कुछ पता ही नहीं चला कि उनके साम्राज्य के एक गवर्नर ने ‘प्रभु के पुत्र’ को सूली पर चढ़ाया है। यहाँ तक कि जेरूसलम में भी कोई हलचल नहीं हुई। ईसा मसीह का जन्म ईस्वी 4 में […] - [महान् रोमन शासक (11)](https://bharatkaitihas.com/ruler-of-great-roman-empire/): जिन राजाओं, राजकुमारों, रानियों एवं राजकुमारियों को महान् रोमन शासक कहा जाता है, वे वास्तव में कितने महान् थे, इसका विवरण तत्कालीन इतिहास की पुस्तकों से मिलता है। उनमें अधिकांश अपने ही वंश के रक्त के प्यासे, हत्यारे, लालची एवं बहुत छोटे दिमागों वाले मनुष्य थे किंतु उनकी कथाओं को इतना बढ़ा-चढ़ाकर लिख गया कि […] - [दो ऑगस्टस तथा दो सीजर (12)](https://bharatkaitihas.com/two-augustus-and-two-caesars/): डियोक्लेटियन ने ‘चार राजाओं के शासन’ का सिद्धांत बनाया जिसके तहत दो ऑगस्टस तथा दो सीजर की नियुक्ति की गई। सम्राट डियोक्लेटियन ने स्वयं को ऑगस्टस की उपाधि दी तथा ई.286 में अपने पुराने एवं विश्वस्त सैनिक साथी मैक्सीमियन को अपने अधीन सह-सम्राट (दूसरा ऑगस्टस) नियुक्त किया। नवम्बर 284 से अप्रेल 305 तक डियोक्लेटियन रोम […] - [ईसाइयों को प्राणदण्ड (13)](https://bharatkaitihas.com/death-to-christians-in-roman-empire/): रोमन लोग ईसाइयों को झगड़ालू और संकीर्ण मनोवृत्ति वाला समझने लगे। सम्राट की मूर्ति के समक्ष सिर नहीं झुकाना राजद्रोह समझा गया तथा इसके लिए बहुत से ईसाइयों को प्राणदण्ड दिया गया। ईसाई लोग मनोरंजन के उद्देश्य से होने वाली पशुओं और मनुष्यों की लड़ाइयों का भी विरोध करते थे। यीशू के भयग्रस्त अनुयायियों ने […] - [रोमन साम्राज्य का विभाजन (14)](https://bharatkaitihas.com/partition-of-great-roman-empire/): चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत तक पूर्वी रोमन साम्राज्य के सम्राट द्वारा पश्चिमी रोमन साम्राज्य के शासक को सह.शासक के रूप में नियुक्त किया जाता था किंतु पश्चिमी साम्राज्य पर पूर्वी सम्राट का नियंत्रण नाम मात्र का ही था। धीरे-धीरे रोमन साम्राज्य का विभाजन हो गया। ई.305 में कॉन्स्टेंटीन (प्रथम) रोम का शासक हुआ। उसे […] - [पश्चिमी रोमन साम्राज्य (15)](https://bharatkaitihas.com/western-roman-empire/): ई.379 से ई.392 तक पश्चिमी रोमन साम्राज्य में वेलेण्टाइन (द्वितीय) तथा मैग्नस मैक्सीमस नामक दो शासक अस्तित्व में थे, इन्होंने साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों पर अपनी सत्ता बनाए रखी। वेलेण्टाइन राजवंश ई.364 से 392 तक पश्चिमी रोमन साम्राज्य में वेलेण्टाइन राजवंश की सत्ता रही जिसकी राजधानी रोम थी। जूलियन की मृत्यु के बाद ई.364 में […] - [पूर्वी रोमन साम्राज्य (16)](https://bharatkaitihas.com/eastern-roman-empire/): चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में रोमन साम्राज्य दो भागों में बँट गया! पश्चिमी रोमन साम्राज्य की राजधानी रोम थी और पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया थी। जब सम्राट कॉन्स्टेन्टीन अपनी राजधानी रोम से बिजैन्तिया ले आया तब उसकी माँ ने फिलीस्तीन की राजधानी जेरूसलम में ईसा की समाधि के पास एक बड़ा चर्च […] - [ईसाई धर्म का अंतर्द्वन्द्व (17)](https://bharatkaitihas.com/internal-fight-in-christianity/): ईसाई धर्म का अंतर्द्वन्द्व अपने आप में एक लम्बा इतिहास लिए हुए है। इसी अंतर्द्वन्द्व के कारण ईसाई धर्म को अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता कि ईसाई धर्म का इतिहास रक्त रंजित है। ईसाई धर्म अपने जन्म के साथ ही अंतर्द्वन्द्वों में फंसा हुआ था। […] - [पोप का प्राकट्य एवं उसका शक्ति विस्तार (18)](https://bharatkaitihas.com/popes-presence-and-expansion-of-his-power/): रोम का सेंट पीटर्स लातीनी चर्च आगे चलकर कैथोलिक चर्च के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस चर्च का बिशप लातीनी सम्प्रदाय का प्रमुख माना गया। बाद में बिशप रोम का पोप कहलाने लगा। पोप का अर्थ पापा अर्थात् पिता से था। इस प्रकार रोम में पोप का प्राकट्य हुआ। ईसाई धर्म के विभिन्न सम्प्रदाय ईसा […] - [रोमन साम्राज्य का अंत (19)](https://bharatkaitihas.com/sad-end-of-great-roman-empire/): महान् रोमन साम्राज्य का अंत बड़ा दुःखद था। ईसाई धर्म ने उस प्राचीन रोमन धर्म को कुचल कर नष्ट कर दिया था जिस प्राचीन रोमन धर्म की पृष्ठभूमि में महान् रोमन साम्राज्य का जन्म हुआ था। रोमुलस ऑगुस्टस द्वारा पश्चिमी साम्राज्य का विभाजन ई.474 में कुस्तुंतुनिया के सम्राट लिओ (प्रथम) ने जूलियस नीपो को रोमन […] - [द्वितीय रोमन साम्राज्य (20)](https://bharatkaitihas.com/second-edition-of-the-great-roman-empire/): फ्रैंक कबीले ने ऑस्ट्रोगोथों को रोम से बाहर निकला दिया। पोप ने फ्रैंक सरदार क्लोविस को रोम का शासक स्वीकार कर लिया। इसी के साथ रोम में द्वितीय रोमन साम्राज्य की स्थापना हो गई। इटली का बिखराव ई.493 में पूर्वी रोमन साम्राज्य के सम्राट जेनो के आदेश से उसके सामंत  थियोडोरिक ने इटली पर आक्रमण […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य का प्रथम संस्करण (21)](https://bharatkaitihas.com/first-edition-of-holy-roman-empire/): पच्चीस दिसम्बर 800 के दिन सेंट पीटर्स बेसिलिका में फ्रैंक राजा शार्लमैन का पापल कोरोनेशन किया गया अर्थात् उसे पवित्र रोमन ताज पहनाया गया तथा उसे ऑगस्टस ऑफ रोमन्स की उपाधि दी गई। इसके साथ ही रोम में  पवित्र रोमन साम्राज्य की स्थापना हो गई। फ्रैंक राजा शार्लमैन द्वारा पोप का अपमान ई.772 में पोप […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय संस्करण (22)](https://bharatkaitihas.com/second-edition-of-holy-roman-empire/): पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय संस्करण केन्द्रीय यूरोप का एक बहुजातीय जटिल राजनैतिक संघ था जो ई.962 से ई.1806 तक अस्तित्व में रहा जब तक कि नेपोलियन बोनापार्ट ने इसे समाप्त नहीं कर दिया। यह राज्य मध्य-युग में मध्य-यूरोप का हिस्सा था। ई.955 में पोप जॉन (बारहवां) रोम के कैथोलिक चर्च का पोप हुआ। वह रोम […] - [गिरजाघरों की गॉथिक शैली का विकास (23)](https://bharatkaitihas.com/development-of-the-gothic-style-of-churches/): ईसा की ग्यारहवीं-बारहवीं सदी में पश्चिमी यूरोप में गिरजाघर निर्माण की एक नई शैली का विकास हुआ जिसे गिरजाघरों की गॉथिक शैली कहते हैं। इस शैली में गिरजाघरों का आकार बहुत बड़ा रखा जाता है। इसमें बड़ी एवं भारी छतों का भार, मुख्य भवन के बाहर बने पैनल्स पर टिकाया  जाता है। मुख्य भवन के […] - [वेनिस शहर की दुविधा (24)](https://bharatkaitihas.com/dilemma-of-venice-city/): उत्तरी इटली में स्थित वेनिस शहर की बसावट का इतिहास बहुत रोचक है तथा सामुद्रिक व्यापार से लेकर सामरिक महत्ता की दृष्टि से यह संसार के अन्य शहरों से बिल्कुल भिन्न है। यह दलदल पर बसा हुआ शहर है। इसे वेनेजिया भी कहते हैं। छठी शताब्दी ईस्वी में जब अतिला हूण आग लगाता हुआ और […] - [हिलाल के खिलाफ क्रॉस का क्रूसेड (25)](https://bharatkaitihas.com/crusade-of-the-cross-against-hilal/): मुसलमानों से लड़ने के लिए पोप के द्वारा दिए गए निर्णय को आलंकारिक भाषा में हिलाल (मुसलमानों का धार्मिक चिह्न- दूज का चांद) के खिलाफ क्रॉस (ईसाइयों का धार्मिक चिह्न- सूली) का क्रूसेड (धर्मयुद्ध) कहा गया। येरूशलम येरुशलम को हिब्रू में जेरूशलम तथा अरबी में अल-कुद्स कहा जाता है। यह संसार के सबसे प्राचीन नगरों […] - [पोप एवं रोमन सम्राट में टकराव का चरम (26)](https://bharatkaitihas.com/extreme-conflict-between-pope-and-holy-roman-emperor/): पोप एवं रोमन सम्राट में टकराव सत्ता में अधिकारों को लेकर आरम्भ हुआ और जब दोनों में शक्ति संतुलन स्थापित नहीं हो सका तो यह टकराव चरम पर पहुंच गया। फ्रेडरिक लालमुँहा बारहवीं एवं तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में रोमन साम्राज्य की बागडोर ‘होहेन्तॉफेन’ नामक ईसाई राजवंश के हाथों में रही। होहेन्तॉफेन जर्मनी का एक छोटा […] - [इनक्विजिशन की स्थापना (27)](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-inquisition-by-christian-association/): कैथोलिक चर्च के इतिहास में इनक्विजिशन का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इनक्विजिशन का अर्थ है जाँच-पड़ताल। यह एक तरह का न्यायाधिकरण है जिसकी स्थापना कैथोलिक धर्म के सिद्धान्तों से भटकने वाले व्यक्तियों का पता लगाकर उन्हें दण्ड दिलवाने के लिए सरकार को सौंपने के उद्देश्य से हुई थी। कैथोलिक धर्म के अधिकारी अपने धार्मिक विश्वासों […] - [पोप की प्रतिष्ठा को धक्का (28)](https://bharatkaitihas.com/decline-of-popes-reputation/): ई.1377 तक पोपों को फ्रांस के सम्राट के अंगूठे के अधीन रहना पड़ा। इससे पोप की प्रतिष्ठा को बड़ा धक्का लगा। कनौजा में पोप से मिलने के लिए सम्राट को घण्टों बर्फ में नंगे-पैर खड़े रहने की सजा अब इतिहास का पन्ना बनकर रह गई थी। पोप के शयनागार में फ्रांसीसी सम्राट का दूत जब […] - [पूर्वी रोमनसाम्राज्य का अंत (29)](https://bharatkaitihas.com/end-of-eastern-roman-empire/): ई.1453 में उस्मानिया तुर्कों अर्थात् ओट्टोमन तुर्कों ने पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया को घेर लिया और कुस्तुंतुनिया के शासक कॉन्स्टेन्टीन ग्यारहवें को मार दिया। इस प्रकार पूर्वी रोमनसाम्राज्य का अंत हुआ। हमें पूर्वी रोमन साम्राज्य का इतिहास बीच में ही छोड़ना पड़ा था किंतु यहाँ उसकी चर्चा फिर से करनी होगी। पूर्वी रोमन […] - [रिनेंसाँ नामक युग का प्रारम्भ (30)](https://bharatkaitihas.com/beginning-of-the-era-of-rinensa-in-italy/): पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी पर ईसाइयों का शासन समाप्त होने के साथ ही यूरोप के इतिहास में मध्य.युग की समाप्ति होती है तथा यूरोप मानो गहरी नींद से जागता है। उसे अपने पतन का अहसास होता है और वह अपने अस्तित्व को बचाने लिए अपने पुनरुत्थान के लिए प्रयास करता है। यूरोप के इतिहास […] - [धर्म एवं विज्ञान में संघर्ष (31)](https://bharatkaitihas.com/conflict-between-religion-and-science/): धर्म एवं विज्ञान एक दूसरे के पूरक हैं। भारत में तो धर्म को ही विज्ञान कहा जाता है तथा माना जाता है कि जब मनुष्य को आत्मा और परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हो जाता है तो उसे मोक्ष मिल जाता है किंतु ईसाइयत में धर्म एवं विज्ञान को एक दूसरे के शत्रु के […] - [कैथोलिक धर्म से अलग सम्प्रदायों का उदय (32)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-different-sects-from-christianity/): ईसाइयत में कैथोलिक धर्म ही अकेला पंथ या सम्प्रदाय नहीं है। कैथोलिक धर्म से अलग भी बहुत से सम्प्रदाय हैं। ये पंथ एवं सम्प्रदाय भी ईसाई धर्म के अंतर्गत हैं किंतु कैथोलिक मान्यताओं से अलग मान्यताएं रखते हैं। मार्टिन लूथर का आंदोलन धर्म एवं विज्ञान के बीच हुए संघर्ष में वैज्ञानिकों पर किए गए अत्याचारों […] - [यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण (33)](https://bharatkaitihas.com/discrimination-and-exploitation-in-european-society/): यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण का सिलसिला आदि काल से है। संसार में यूरोप के लोगों को सर्वाधिक सुसभ्य माना जाता है किंतु यह बात सही नहीं है। आज भी यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण संसार की अन्य सभ्यताओं की तुलना में अधिक हैं। धर्म के नाम पर अत्याचारों का सिलसिला ईसाई धर्म […] - [यूरोप में लोकतांत्रिक विचार (34)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-democratic-ideas-in-europe/): छोटे-छोटे बर्बर कबीलों में बंटा हुआ यूरोप छोटे-छोटे देशों में बदल गया। इस कारण यूरोप में लोकतांत्रिक विचार का जन्म लेना और विकसित होना एक अत्यंत कठिन कार्य था। भाप के इंजन का आविष्कार अठारहवीं शताब्दी के आरम्भ में ई.1712 में इंग्लैण्ड में भाप के ऐसे इंजन का आविष्कार हो गया जो तरह-तरह की मशीनें […] - [यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (35)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-nationalism-in-europe/): यूरोप की धरती पर विभिन्न भाषाओं, रीति-रिवाजों एवं परम्पराओं को मानने वाले लोग रहते थे। ये लोग अपने कबीले को ही अपना देश मानते थे। धीरे-धीरे यूरोप के लोगों ने अपनी कबीलाई पहचाहन को अपने राष्ट्र के रूप में देखना आरम्भ किया। इसी को यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय कहा जाता है। अठारहवीं सदी में […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय का अन्त (36)](https://bharatkaitihas.com/end-of-second-edition-of-holy-roman-empire/): जिस प्रकार पवित्र रोमन साम्राज्य प्रथम का अन्त हुआ था, उसी प्रकार पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय का अन्त भी बड़ा दुखद था। मुसलमानों के छोटे से धक्के से वह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। नेपालियन का विजय अभियान अठारहवीं शताब्दी के अंत में इटली में छोटे-छोटे राजा राज्य किया करते थे। इनमें से […] - [इटली का एकीकरण (37)](https://bharatkaitihas.com/integration-of-italy/): विभिन्न समुद्री द्वीपों और कबीलाई संस्कृतियों से बने इटली का एकीकरण एक कठिन प्रक्रिया थी। छोटे-छोटे इलाकों के राजा अपने अधिकारों को छोड़कर किसी एक बड़े देश में शामिल होने को तैयार नहीं थे। इटली का एकीकरण रीसॉर्जीमेंटो कहलाता है। वियना कांग्रेस में इटली का बंटवारा नेपोलियन बोनापार्ट को बंदी बनाए जाने के बाद सितंबर […] - [बैनितो मुसोलिनी - फासिज्म का नायक (38)](https://bharatkaitihas.com/fascisms-hero-banito-mussolini/): इटली में कारखाने के मालिकों ने देश में चल रही कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं को अपने पक्ष में किया तथा उन्हें मजदूरों एवं समाजवादी नेताओं के विरुद्ध खड़ा कर दिया। इन संगठनों में बैनितो मुसोलिनी का ई.1910 से चल रहा संगठन प्रमुख था। प्रथम विश्वयुद्ध आरम्भ होने से पहले ही इटली भयानक आर्थिक संकट में फंसा […] - [फासीवाद और नाजीवाद (39)](https://bharatkaitihas.com/fasci-nazi-bhai-bhai/): फासीवाद और नाजीवाद दोनों अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं थीं किंतु राजनीतिक स्वार्थों के चलते दोनों ने हाथ मिला लिया तथा इटली की सड़कों पर फासी-नाजी भाई-भाई के नारे लगने लगे। फासीवाद और नाजीवाद में समानता जिस समय रूस में बोल्शेविक क्रांति की सफलता के बाद साम्यवादी राज्य की स्थापना हो रही थी तथा एक नए समाज […] - [इटली में गणराज्य की स्थापना (40)](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-modern-republic-in-italy/): वर्ष 1946 में इटली में इटली में गणराज्य की स्थापना हुई। यह वह समय था जब द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूरी दुनिया में अधिकांश देशों के नक्शे बदल रहे थे और नई सरकारों की स्थापना हो रही थी। गणतन्त्र शासन की स्थापना 2 जून 1946 को इटली में आम-चुनाव हुए जिनमें देश की जनता ने […] - [रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास (41)](https://bharatkaitihas.com/history-of-the-roman-catholic-church/): रोमन कैथोलिक चर्च का आशय किसी एक विशिष्ट भवन से न होकर विश्व-व्यापी संस्था से है। यह विश्व का सबसे बड़ा ईसाई चर्च है। इस चर्च के सदस्यों की संख्या एक सौ करोड़ से अधिक है। उनके नेता पोप हैं जो विश्व भर में फैले हुए ईसाई धर्माध्यक्षों अर्थात् पादरियों, बिशपों एवं कार्डिनलों के समुदाय […] - [कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं (42)](https://bharatkaitihas.com/major-doctrines-and-teachings-of-the-roman-catholic-church/): कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं उन्हीं मूलभूत अवयवों से निर्मित हैं जिन तत्वों से धर्म नामक सार्वभौमिक तत्व का निर्माण होता है। फिर भी कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं दुनिया भर के मजहबों, पंथों, सम्प्रदायों से स्वयं को अलग दिखाने का प्रयास करते हैं। कुछ सीमा तक यह पृथकता एक वास्तविकता भी है। […] - [पोप (43)](https://bharatkaitihas.com/the-pope-of-rome/): रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म-गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं। ‘पोप’ का शाब्दिक अर्थ ‘पिता’ होता है। यह लैटिन भाषा के ‘पापा’ (papa) शब्द से बना है जो स्वयं ग्रीक भाषा के ‘पापास्’ (pápas) शब्द से व्युत्पन्न है। उन्हें संत पापा (पिता) तथा ‘होली फादर’ भी कहते हैं। […] - [हिन्दू धर्म-साहित्य का अद्भुत कथा-संसार (1)](https://bharatkaitihas.com/wonderful-stories-of-hindu-religious-literature/): हिन्दू धर्म-साहित्य अत्यंत विशाल है। विश्व में अन्य किसी धर्म का इतना विपुल साहित्य उपलब्ध नहीं है। हिन्दू धर्म-साहित्य का अद्भुत कथा-संसार इतना रोचक, ज्ञानवर्द्धक और आत्मा के लिए कल्याणकारी है, जिसे शब्दों में वर्णित करना कठिन है। धर्म का अर्थ है धारण करना। जो मनुष्य उत्तम विचार, उत्तम दर्शन और उत्तम आचरण को धारण […] - [मधु-कैटभ के वध की कथा पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी है (2)](https://bharatkaitihas.com/story-of-the-slaughter-of-madhu-catabh-is-related-to-the-origin-of-the-earth/): मधु-कैटभ के वध की कथा पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी है वेदों में हिरण्यगर्भ से सौरमण्डल के उत्पन्न होने की कथा मिलती है। हिरण्यगर्भ को पुराणों में डिम्ब या अण्ड भी कहा गया है जिससे सौर मण्डल की उत्पत्ति हुई जिसमें सूर्य तथा उसके नौ ग्रहों के अस्तित्व में आने का उल्लेख है। इस कथा […] - [जल-प्लावन से जुड़ी हैं मत्स्यावतार, कूर्मावतार एवं वराह अवतार की कथाएं (3)](https://bharatkaitihas.com/stories-of-matsyavatar-kurmaavatar-varaha-avatar-are-associated-with-water-planks/): अत्यंत प्राचीन काल में धरती पर आए जल-प्लावन की कथाएं विश्व के प्रत्येक भूभाग की प्राचीन संस्कृतियों में मिलती हैं। इन कथाओं के अनुसार पृथ्वी का अधिकांश भूभाग इस जल-प्लावन में डूब गया था जिसके कारण प्राणियों की सृष्टि बड़ी कठिनाई से जीवित बची थी। भगवान श्री हरि विष्णु के तीन प्रथम अवतारों मत्स्यावतार, कूर्मअवतार […] - [मत्स्यावतार की कथा महा जल-प्लावन एवं जीवों के क्रमिक विकास से जुड़ी है (4)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): भगवान श्री हरि विष्णु के मत्स्यावतार की कथा वाल्मीकि रामायण, महाभारत, मत्स्य पुराण, हरिवंश पुराण आदि विविध ग्रंथों में मिलती है। यह कथा प्रकृति में दो हिमकालों के बीच होने वाले जलप्लावन एवं तत्पश्चात् आने वाले ऊष्णकाल के आगमन की घटना को दर्शाती है तथा भगवान द्वारा सृष्टि एवं ज्ञान की रक्षा के लिए अवतार […] - [कूर्मावतार की कथा मानव सृष्टि को वैभव प्रदान करने से जुड़ी है (5)](https://bharatkaitihas.com/story-of-kurmavatar-is-associated-with-providing-glory-to-the-human-creation/): कूर्मावतार की कथा सृष्टि का आरम्भ होने की घटना से जुड़ी हुई है। पुराणों के अनुसार प्रजापति ने सन्तति प्रजनन के अभिप्राय से कूर्म का रूप धारण किया। शतपथ ब्राह्मण, महाभारत के आदि पर्व तथा पद्मपुराण के उत्तरखंड में उल्लेख है कि संतति प्रजनन हेतु प्रजापति, कच्छप का रूप धारण करके पानी में संचरण करता […] - [मोहिनी अवतार की कथा सृष्टि को पुनः वैभव प्रदान करने से जुड़ी है (6)](https://bharatkaitihas.com/story-of-mohini-avatar-is-associated-with-giving-glory-to-world-again/): मोहिनी अवतार धारी भगवान श्रीहरि ने देवताओं को अमृत तथा राक्षसों को वारुणि पिलाना आरम्भ कर दिया। राक्षस उस वारुणि को पीकर मदमत्त होने लगे। ‘राहू’ नामक एक राक्षस को भगवान के मोहिनी अवतार की इस चालाकी का पता चल गया। हमने पिछली कड़ी में समुद्र मंथन के दौरान हुए भगवान श्री हरि विष्णु के […] - [नील वाराह की अवतार कथा किसी प्राचीन हिमयुग की समाप्ति से जुड़ी है (07)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9/): ब्रह्माजी ने चिंतित होकर, जल में निवास करने वाले श्रीहरि विष्णु का स्मरण किया और फिर भगवान श्रीहरि विष्णु ने नील वाराह के रूप में प्रकट होकर धरती के कुछ भागों को जल से मुक्त किया। हमारे सौर मण्डल के समस्त ग्रह सूर्य से टूटकर अलग हुए हैं जिनमें से पृथ्वी भी एक है। आज […] - [हिरण्याक्ष की कथा धरती के समुद्र में डूब जाने की द्योतक है (8)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): जय और विजय बैकुण्ठ से गिर कर दिति के गर्भ में आ गए। कुछ काल के पश्चात् दिति के गर्भ से दो पुत्र उत्पन्न हुये जिनके नाम प्रजापति कश्यप ने हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु रखे। पिछली कड़ी में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के नील वाराह के अवतार की चर्चा की थी। इस कड़ी में हम […] - [आदिवाराह अवतार की कथा](https://bharatkaitihas.com/lord-shri-hari-took-incarnation-of-adi-varaha-and-saved-the-earth/): सृष्टि आरम्भ करने के लिए भूमि की आवश्यकता थी किंतु इस समय हिरण्याक्ष नामक दैत्य धरती को सागर के भीतर ले जाकर भू-देवी को अपना तकिया बना कर सोया हुआ था। हिरण्याक्ष ने अपने चारों ओर विष्ठा का घेरा बना रखा था ताकि देवता हिरण्याक्ष के निकट नहीं आएं। - [वाराह अवतार से जुड़ी हुई है दक्षिण भारत की वराह जाति (10)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0/): पिछली कुछ कड़ियों में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के नील वाराह एवं आदि वाराह के अवतारों की चर्चा की थी। इस कड़ी में हम नील वाराह वाराह अवतार, आदि वाराह अवतार तथा श्वेत वाराह वाराह अवतार के दक्षिण भारत की कुछ वनवासी जातियों से सम्बन्ध की चर्चा करेंगे। वाराह कल्प के 3 खण्ड हैं- […] - [नृसिंह अवतार की कथा (11)](https://bharatkaitihas.com/to-protect-the-devotee-prahlada-god-took-narsingh-avatar/): पिछली कड़ियों में चर्चा की थी कि सनकादि ऋषि के श्राप से भगवान विष्णु के जय एवं विजय नामक दो गण, दैत्य बनकर कश्यप ऋषि की पत्नी दिति के गर्भ से धरती पर आए। इनमें से दैत्यों के राजा हिरण्याक्ष के वध हेतु भगवान श्री हरि विष्णु के वाराह अवतार की कथा हम बता चुके […] - [वामन अवतार की कथा (12)](https://bharatkaitihas.com/vishnu-took-vamana-avatar-to-free-the-earth-and-heaven-from-demons/): इस धारावाहिक की पिछली कड़ियों में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के चार अवतारों- मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराह अवतार एवं नृसिंह अवतार की चर्चा की है। ये सभी अवतार मनुष्येतर रूप में अर्थात् जलचर, उभयचर एवं थलचर जीवों के रूप में थे जबकि इस कड़ी में हम भगवान श्री हरि के वामन अवतार की चर्चा कर […] - [प्रजापति कश्यप की कथा (13)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa/): हिन्दू धर्मग्रंथों में आए संदर्भों के अनुसार प्रजापति ब्रह्मा के पुत्र मरीचि हुए। मरीचि के पुत्र प्रजापति कश्यप हुए। प्रजापति कश्यप ने प्रजापति दक्ष की 17 पुत्रियों से विवाह किया। इनमें दिति और अदिति भी थीं। इस कड़ी में हम प्रजापति कश्यप तथा उनकी पत्नियों दिति एवं अदिति की चर्चा करेंगे। प्राचीन धर्म-ग्रंथों में प्रजापति […] - [दिति ने इन्द्रहंता पुत्र की प्राप्ति के लिए पति को प्रसन्न किया (14)](https://bharatkaitihas.com/diti-pleases-husband-to-get-indrahanta-son/): पिछली कड़ी में हमने देवमाता अदिति की कथा पर चर्चा की थी। इस कड़ी में हम दैत्यों की माता दिति की चर्चा करेंगे। अदिति की भांति दिति भी प्रजापति दक्ष की उन 17 पुत्रियों में  से थी जिनका विवाह प्रजापति मरीचि के पुत्र कश्यप से हुआ था। विभिन्न धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि एक […] - [इन्द्र ने दिति के गर्भ के उनन्चास टुकड़े कर दिए (15)](https://bharatkaitihas.com/indra-broke-ninety-nine-pieces-of-ditis-womb/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि अदिति के पुत्र इन्द्र को मारने के लिए अदिति की बहिन दिति ने एक तेजस्वी पुत्र की कामना की तथा अपने पति को प्रसन्न करके उससे एक तेजस्वी गर्भ प्राप्त कर लिया। महर्षि कश्यप ने दिति को तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने के लिए पुंसवन व्रत करने का […] - [कद्रू के पुत्र (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): अण्डों के उत्पन्न होने के पांच सौ वर्ष बीत जाने के बाद कद्रु के अंडों से एक सहस्र नाग प्रकट हुए जो कद्रू के पुत्र कहलाए! हम पिछली कुछ कड़ियों में दक्ष की 17 पुत्रियों का उल्लेख करते आए हैं जिनका विवाह प्रजापति ब्रह्माजी के पौत्र कश्यप ऋषि से हुआ था। प्रजापति दक्षराज की इन […] - [कश्यप ऋषि को वसुदेव के रूप में पैदा होने का श्राप मिला था (17)](https://bharatkaitihas.com/rishi-kashyap-was-cursed-to-be-born-as-vasudeva/): एक बार ऋषि कश्यप ने अपने आश्रम में एक विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया तथा अनेक महाज्ञानी ऋषियों को यज्ञ सम्पन्न करने के लिए अपने आश्रम में बुलाया। - [वृत्रासुर वध की कथा धरती पर वर्षा आरम्भ होने की घटना से जुड़ी है (18)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%a7/): वृत्रासुर वध की कथा सबसे पहले ऋग्वेद के चतुर्थ ब्राह्मण में मिलती है। बाद में यह कविता बहुत से पुराणों में भी कही गई है। यद्यपि वैदिक ब्राह्मण एवं पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली इस कथा के मुख्य पात्र इन्द्र, त्वष्टा, विश्वरूप एवं वृत्रासुर ही हैं तथापि बाद की कथाओं में गुरु बृहस्पति एवं महर्षि […] - [वृत्रासुर ने इन्द्र को स्वर्ग से निकाल दिया (19)](https://bharatkaitihas.com/vritrasura-drove-indra-out-of-heaven/): पिछली कड़ी में हमने वैदिक ब्राह्मण के आधार पर देवराज इन्द्र द्वारा वृत्रासुर के वध की कथा की चर्चा की थी। इस कड़ी में तथा इसके बाद की एक और कड़ी में हम पुराणों में आए हुए संदर्भों के आधार पर इन्द्र द्वारा वृत्रासुर का वध किए जाने की चर्चा करेंगे। पुराणों में आए संदर्भों […] - [दधीचि ऋषि ने वृत्रासुर के नाश के लिए अपनी हड्डियां दे दीं (20)](https://bharatkaitihas.com/dadichi-rishi-gave-his-bones-to-destroy-vritrasura/): इस धारावाहिक की पिछली कड़ी में हमने त्वष्टा के यज्ञ से उत्पन्न वृत्रासुर की चर्चा की थी जिसने त्वष्टा के कहने पर इन्द्र पर आक्रमण कर दिया। ब्रह्माजी ने इन्द्र को सलाह दी कि वृत्रासुर को मारने हेतु वज्र बनाने के लिए वह दधीचि ऋषि की अस्थियों को प्राप्त करे। वैदिक ग्रंथों में जिन ऋषियों […] - [चौदह मनुओं की कथा (21)](https://bharatkaitihas.com/story-of-fourteen-manu/): चौदह मनुओं की कथा भारतीय पुराण साहित्य की विलक्षण संकल्पना है। यह कथा सृष्टि के नवीन रूप धारण करके बार-बार संभव होने के प्रति आश्वस्त करती है। अर्थात् सृष्टि कभी पूर्ण रूप से नष्ट नहीं होती। पहली सृष्टि में अर्जित ज्ञान अलगी सृष्टि में बीज रूप में स्थानांतरित होता है। हिन्दू मानते हैं कि हिन्दू […] - [स्वायंभू मनु तथा उनके वंशजों की कथा (22)](https://bharatkaitihas.com/story-of-swayambhu-manu-and-his-descendants/): पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि वराह कल्प के प्रथम मनु का नाम स्वायंभू मनु था, जिनके साथ मिलकर शतरूपा नामक स्त्री ने प्रथम मानव सृष्टि उत्पन्न की। स्वायंभू मनु एवं शतरूपा स्वयं धरती पर उत्पन्न हुए अर्थात् उनका कोई माता या पिता नहीं था। इन्हीं मनु की सन्तानें मानव अथवा मनुष्य कहलाती […] - [अश्वत्थामा के आँसू](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%b8%e0%a5%82/): अश्वत्थामा के आँसू एक हास्य व्यंग्य नाटिका है जिसे देश के कई हिस्सों में मंचित किया गया है। इस नाटिका के माध्यम से नाटककर डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गहरी चोट की है। भूमिका महाभारत का युद्ध हुए 5300 वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है किंतु आज भी […] - [जावा द्वीप पर अंतिम दिन (37)](https://bharatkaitihas.com/last-day-on-java-island/): आज हमारा जावा द्वीप पर अंतिम दिन था। 23 अप्रेल को हमें जावा द्वीप से विदाई लेनी थी। आज भी मैं प्रातः 6 बजे चाय पीने होटल की लॉबी में आया तो मुस्कुराहट से भरी वही लड़की, कल वाले स्थान पर खड़ी हुई अतिथियों का चाय पर स्वागत कर रही थी। आज हमें जकार्ता से […] - [पागल सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): पागल सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक – अनुक्रमणिका पृष्ठ पर दिल्ली सल्तनत के सुल्तन मुहम्मद बिन तुगलक के इतिहास के अध्यायों का क्रम दिया गया है। इस पृष्ठ पर दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करने से सीधे ही सम्बन्धित अध्याय को पढ़ा जा सकता है। 1.उसने उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए! 2 सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक […] - [उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए (1)](https://bharatkaitihas.com/he-whipped-ulema-and-kajis/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने सिपहसालारों का मांस चावल के साथ रांधकर उसके परिवार वालों को खाने के लिए भिजवाया। उसने उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए । मुहम्मद बिन तुगलक ने ई.1325 से ई.1351 अर्थात् 26 साल की दीर्घ अवधि तक भारत पर शासन किया। उसका व्यक्तित्व आकर्षक तथा प्रभावोत्पादक था। उसके समान विद्वान […] - [सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने महल में पिघला हुआ सोना भर दिया (2)](https://bharatkaitihas.com/sultan-ghiyasuddin-tughlaq-filled-molten-gold-in-palace-pond/): मक्कार गाजी खाँ , सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक के नाम से दिल्ली का शासक बन गया और उसका पुत्र जूना खाँ हाथ मलता रह गया! जूना खाँ इसके लिए तैयार नहीं था। मुहम्मद बिन तुगलक के बचपन का नाम फखरुद्दीन मुहम्मद जूना खाँ था। वह अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा, सर्वाधिक महत्वाकांक्षी एवं सबसे प्रतिभावान […] - [शहजादे जूना खाँ ने सुल्तान गयासुद्दीन की हत्या कर दी (3)](https://bharatkaitihas.com/prince-juna-khan-murdered-his-father-sultan-ghiyasuddin/): अब तक आप पढ़ चुके हैं कि किस प्रकार शहजादे जूना खाँ ने दिल्ली सल्तनत के खिलजी सुल्तान खुसरोशाह की हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के तख्त पर बैठने का प्रयास किया किंतु जब जूना खां का पिता गाजी तुगलक दिल्ली के तख्त पर बैठ गया तो जूना खाँ के हसीन सपने धरे के […] - [सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने सड़कों पर अशर्फियां लुटा दीं (4)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-looted-gold-incense-on-the-streets-of-delhi/): सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक को किसी भी प्रकार का आर्थिक संकट नहीं था। तख्त पर बैठते समय उसके तीन भाई जीवित थे किंतु किसी ने भी उसका विरोध नहीं किया। ई.1324 में जब सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक बंगाल विजय के लिये गया तब वह शहजादे जूना खाँ को राजधानी में छोड़ गया ताकि सुल्तान की अनुपस्थिति […] - [किसानों की आय बढ़ाने का सपना देखने वाला पहला मुस्लिम शासक (5)](https://bharatkaitihas.com/he-was-first-muslim-ruler-to-dream-of-increasing-income-of-farmers/): भारतीय राजा अपने राज्य में किसानों की आय बढ़ाने के लिए नहरें, तालाब आदि बनवाया करते थे किंतु मुहम्मद बिन तुगलक पहला ऐसा मुस्लिम शासक था जिसने किसानों की आय बढ़ाने का सपना देखा। हालांकि उसके लिए किसान का मतलब मुस्लिम किसान से था न कि हिन्दू किसान से। पिछली कड़ी में आपने देखा कि […] - [गंगा-यमुना क्षेत्र के किसान जंगलों में भाग गए (6)](https://bharatkaitihas.com/farmers-of-ganga-yamuna-region-fled-into-jungles-due-to-the-tax-increase-by-sultan/): तख्त पर बैठने के कुछ दिन बाद सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने गंगा-यमुना क्षेत्र के दोआब क्षेत्र में भू-राजस्व करों में वृद्धि की। किसानों पर भूमि कर के अतिरिक्त ‘घरी’ अर्थात गृहकर तथा ‘चरही’ अर्थात् चरागाह कर भी लगाया गया। तत्कालीन मुस्लिम लेखक जियाउद्दीन बरनी के अनुसार बढ़ा हुआ कर, प्रचलित करों का दस से […] - [राजधानी दिल्ली से दौलताबाद चले गए कुत्ते-बिल्ली और भिखारी (7)](https://bharatkaitihas.com/sultan-took-dog-cats-and-beggars-from-delhi-to-daulatabad/): जब मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की तब वह दिल्ली के कुत्ते-बिल्ली और भिखारी भी अपने साथ ले गया। दिल्ली सल्तनत की स्थापना ई.1193 में मुहम्मद गौरी के जीवनकाल में ही हो गई थी। तब से लेकर ई.1325 में मुहम्मद बिन तुगलक के दिल्ली का सुल्तान बनने तक की 132 […] - [ताम्बे के सिक्के ढलवाए मुहम्मद बिन तुगलक ने (8)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughlaq-casts-copper-coins-instead-of-gold-and-silver-coins/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने राज्य में सोने-चांदी की मुद्रा के स्थान पर ताम्बे के सिक्के ढलवाए। यह भारत में सांकेतिक मुद्रा का प्रथम प्रचलन था किंतु दुर्भाग्य से यह विफल हो गया। आज संसार में कई तरह की मुद्राएं चलती हैं जिनमें पेपर करंसी, मेटल करंसी, प्लास्टिक करंसी, क्रिप्टो करंसी आदि प्रमुख हैं। पेपर […] - [मंगोलों से संधि (9)](https://bharatkaitihas.com/instead-of-fighting-the-mongols-muhammad-bin-tughluq-gave-them-gold-and-silver-rupees/): मुहम्मद बिन तुगलक ने लड़ने की बजाय मंगोलों से संधि करने का मार्ग अपनाया तथा मंगोलों को सोने-चांदी के रुपए दिए किंतु इस नीति से वह मंगोलों का विश्वास नहीं जीत सका। चीन के उत्तर में स्थित गोबी-रेगिस्तान में मंगोल नामक घुमंतू एवं अर्द्धसभ्य जाति रहती थी जिसका मुख्य पेशा घोड़ों और अन्य पशुओं का […] - [कटोच राजपूत और मुहम्मद बिन तुगलक (10)](https://bharatkaitihas.com/katoch-rajputs-beaten-muhammad-bin-tughlaq/): कांगड़ा घाटी में नगरकोट नामक एक प्रसिद्ध राज्य था जिस पर एक प्राचीन हिन्दू राजवंश शासन करता था। इस राजवंश को कटोच राजपूत राजवंश कहा जाता था। तुगलकों के काल में दिल्ली सल्तनत अपने चरम-विस्तार को प्राप्त कर गई। तुगलक वंश के दूसरे सुल्तान अर्थात् मुहम्मद बिन तुगलक ने भी अनेक हिन्दू राजाओं का राज्य […] - [कराजल अभियान में मुहम्मद बिन तुगलक की सेना नष्ट हो गई (11)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-dreamed-of-conquering-iran-tibet-and-china/): कराजल अभियान मुहम्मद बिन तुगलक के लिए अत्यंत विनाशकारी सिद्ध हुआ। कराजल क्षेत्र के पहाड़ी हिन्दू योद्धाओं ने तुगलक की समस्त सेना नष्ट कर दी। ! नगरकोट अभियान के बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने खुरासान विजय की योजना बनाई। उसके दरबार में उन दिनों कुछ खुरासानी अमीर भी रहते थे जिन्होंने सुल्तान को खुरासान की […] - [बागियों का दमन करने में बड़ी क्रूरता दिखाई सुल्तान ने ! (12)](https://bharatkaitihas.com/sultan-sliced-his-cousin-and-cooked-it-in-rice/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी सल्तनत में होने वाले व्रिदोहों का बड़ी दृढ़ता से दमन किया तथा बागियों का दमन करने में बड़ी क्रूरता दिखाई ! उस युग में बागियों का दमन करने में ऐसी ही क्रूरता दिखाई जाती थी। मुहम्मद बिन तुगलक संसार के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक का स्वामी था। उसने […] - [विजयनगर साम्राज्य की स्थापना तथा मुहम्मद बिन तुगलक (13)](https://bharatkaitihas.com/vijayanagara-empire-was-established-but-muhammad-bin-tughluq-could-not-do-anything/): सुल्तान ने हरिहर को उस क्षेत्र का शासक और बुक्का को उसका मन्त्री बनाकर भेज दिया। वहाँ पहुँचने पर धीरे-धीरे हरिहर ने अपनी शक्ति संगठित कर ली और विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कर ली। मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के कारण सल्तनत में स्थान-स्थान पर हो रहे विद्रोहों को देखकर हिन्दू राजाओं ने भी स्वतन्त्र […] - [चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो गई (14)](https://bharatkaitihas.com/independent-kingdom-of-chittor-was-restored-and-muhammad-bin-tughluq-could-do-nothing/): ई.1303 में छल-बल से की गई रावल रत्नसिंह की पराजय का बदला ई.1338 में ले लिया गया तथा चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो गई। मुहम्मद बिन तुगलक के पूर्ववर्ती शासकों में से एक अल्लाउद्दीन खिलजी ने ई.1303 में चित्तौड़ के रावल रतनसिंह को छल से मारकर गुहिलों के चित्तौड़ राज्य को समाप्त कर दिया था। […] - [बहमनी सल्तनत की स्थापना (15)](https://bharatkaitihas.com/bahmani-empire-was-established-but-muhammad-bin-tughluq-could-not-do-anything/): हसन गंगू ने ने जफर खाँ की उपाधि धारण की तथा अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम पर बहमनी सल्तनत की स्थापना की। वह स्वयं को ईरान के शाह बहमन बिन असफन्द यार का वंशज बताता था। जब दक्षिण भारत में विजयनगर हिन्दू साम्राज्य की स्थापना तथा चित्तौड़ में गुहिलों के प्राचीन चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो […] - [पागल बादशाह क्यों कहा गया मुहम्मद बिन तुगलक को ! (16)](https://bharatkaitihas.com/was-muhammad-bin-tughlaq-mad/): मुहम्मद बिन तुगलक पागल नहीं था। फिर भी उसे भारत के इतिहास में पागल बादशाह के नाम से जाना गया। इसका कारण समकालीन इतिहास लेखकों की हठधर्मिता है न कि मुहम्मद बिन तुगलक की अयोग्यता! इस शृंखला में मैंने चौदहवीं शताब्दी ईस्वी में भारत के एक प्रमुख शासक मुहम्मद बिन तुगलक के बारे में अब […] - [लाल किले की दर्द भरी दास्तान - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/tragic-history-of-red-fort-book/): भारत में दो लाल किले हैं। पहला लाल किला आगरा में है जिसका निर्माण तोमर राजपूतों ने लाल कोट के नाम से करवाया था। - [शाहजहाँ का परिवार (1)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0/): शाहजहां को अपने बाप-दादाओं का जमा-जमाया साम्राज्य मिला था। इसलिए उसके सामने चुनौतियां बहुत कम थीं। - [मुगल शहजादियाँ (2)](https://bharatkaitihas.com/mughal-princesses-started-spreading-rumors-outside-the-walls-of-the-red-fort/): मुगल शहजादियां लाल किले की दीवारों से बाहर अफवाहें फैलाती रहती थीं, इन अफवाहों का मुख्य कारण उस युग की स्वार्थ भरी राजनीति थी। - [मुगल शहजादे (3)](https://bharatkaitihas.com/mughal-princes-used-to-kill-their-brothers-for-royal-throne/): मुगल शहजादे अपने भाइयों एवं चाचाओं को मारकर ही तख्त प्राप्त कर पाते थे। मुगलों में यह परम्परा सदियों से चली आ रही थी। - [दारा शिकोह (4)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-used-to-roam-in-red-fort-wearing-ramnami/): शाहजहाँ ने अपने कई अमीर-उमरावों और सेनानायकों के परिवारों की औरतों को अपने हरम में बुलाकर उन्हें खराब किया था। - [मुमताज महल (5)](https://bharatkaitihas.com/the-children-of-mumtaz-mahal-vied-to-kill-each-other-for-the-red-fort/): मुमताज महल की नसों में ईरान का तथा शाहजहाँ की नसों में समरकंद के मंगोलों का रक्त था। इस रक्त मिश्रण से उत्पन्न शहजादे रक्त के प्यासे रहते थे। - [मुसलमानों के प्रमुख त्यौहार](https://bharatkaitihas.com/middle-class-indian-society-social-institutions-and-customs-part-four/): मध्यकालीन भारत के मुस्लिम समाज में मुहर्रम, मीलाद उन-नबी, सबे-उल-फितर और ईद-उल-जुहा मुसलमानों के प्रमुख प्रमुख त्यौहार थे। मध्य-कालीन मुस्लिम समाज इन त्यौहारों को बड़ी श्रद्धा से मनाता था। मुहर्रम के पहले दस दिनों में शिया मुसलमान शोक मनाते थे। शिया अनुश्रुतियों के अनुसार हज़रत अली और उनके दो पुत्र-हसन और इमाम हुसैन, दीन की […] - [भारतीय कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): भारतीय कला चाहे वह शिल्पकला हो, मूर्तिकला हो, चित्रकला हो, संगीत कला हो या फिर और किसी भी प्रकार की कला हो, वह अपने माधुर्य, लावण्य एवं कला के चरमोत्कर्ष के लिए जानी जाती है। ई. बी. हावेल ने लिखा है- किसी भी राष्ट्रीय कला का वास्तविक मूल्यांकन करते समय हमें यह विचार नहीं करना […] - [भारतीय मूर्ति कला](https://bharatkaitihas.com/indian-sculpture/): ई. बी. हावेल ने भारतीय मूर्ति कला की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि सर्वोत्तम भारतीय मूर्ति सर्वोत्तम यूनानी मूर्ति की अपेक्षा अनुभूति के गहनतर स्वर और उत्कृष्ट मनोभावों को स्पर्श करती है।                      सिन्धु सभ्यता कालीन भारतीय मूर्ति कला सैन्धव सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता के काल से ही आग में पकी हुई मिट्टी की मूर्तियाँ, […] - [भारत के शैलचित्र](https://bharatkaitihas.com/rock-paintings-of-india/): भारत के शैलचित्र कम से कम बीस हजार साल पुराने हैं। ये भारत के लगभग समस्त प्रांतों में स्थित पहाड़ियों की गुफाओं में मिलते है। भारत के शैलचित्र इस बात की गवाही देते हैं कि भारत की सभ्यता कितनी पुरानी है। भारत के शैलचित्र के सबसे प्राचीन साक्ष्य आदिमकालीन गुफाओं से मिलते हैं। आदिम युगीन […] - [भारत की चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/painting-of-india-part-one/): भारत की चित्रकला अत्यंत प्राचीन है। भारत के धर्मशास्त्रों तक में चित्रकला का उल्लेख मिलता है। इन उल्लेखों से मानव समाज पर चित्रकला के प्रभाव की जानकारी मिलती है। कलाओं में चित्रकला सबसे ऊँची है जिसमें धर्म, अर्थ, काम एवम् मोक्ष की प्राप्ति होती है। अतः जिस घर में चित्रों की प्रतिष्ठा अधिक रहती है, […] - [मुस्लिम चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): भारत की मुस्लिम चित्रकला को दो भागों में बांटा जा सकता है- दिल्ली सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला तथा मुगल सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला। निश्चित रूप से भारत की मुस्लिम चित्रकला पर हिन्दू शैलियों का भी प्रभाव है। दिल्ली-सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला मूर्ति-पूजा करना और मनुष्यों के चित्र एवं मूर्तियाँ बनाना इस्लाम में वर्जित है। क्योंकि […] - [राजपूत चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/painting-of-india-part-two/): राजस्थान में मुगल शासकों के काल में विकसित हुई चित्रकला शैलियों को राजपूत चित्रकला के अंतर्गत रखा जाता है। राजपूत चित्रकला पर मुगल एवं ईरानी शैलियों का प्रभाव है। राजस्थान में अत्यंत प्राचीन काल से अब तक विकसित हुई चित्रकला की समृद्ध धारा के प्रवाह को देखा जा सकता है। कोटा जिले के आलणियां, दरा, […] - [मौर्य कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-one/): मौर्य कालीन स्थापत्य कला में स्तूपों का स्थान भी महत्वपूर्ण है। स्तूप ईंटों तथा पत्थरों के ऊँचे टीले तथा गुम्बदाकार स्मारक हैं। कुछ स्तूपों के चारों ओर पत्थर, ईंटें अथवा ईंटों की जालीदार बाड़ लगाई गई है। ‘वास्तु’ शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की ‘वस्’ धातु से हुई है जिसका अर्थ ‘बसना’ होता है। बसने […] - [हिन्दू स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-two/): हिन्दू स्थापत्य कला अत्यंत प्राचीन काल में विकसित हुई जिसमें देवालय, राजप्रासाद, दुर्ग, जलाशय, उद्यान आदि के भवन बनाए जाते थे। मौर्य काल के बाद हिन्दू स्थापत्य कला का तेजी से विकास हुआ। हिन्दू स्थापत्य कला दो रूपों में मिलती है- (1.) निजी उपयोग के भवन, (2.) सार्वजनिक उपयोग के भवन। निजी उपयोग के भवन […] - [राजपूत स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-three/): राजपूत स्थापत्य कला हिन्दू स्थापत्य कला का ही प्रमुख अंग है। राजपूत राजाओं के काल में विकसित इस स्थपत्य कला पर मुगल कला का भी न्यूनाधिक प्रभाव है। उत्तर भारत में बने अनेक देवालय, राजप्रासाद, दुर्ग, जलाशय, उद्यान आदि राजपूत स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। भारत के इतिहास में 7वीं से 12वीं सदी तक […] - [खजुराहो मंदिर शैली](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80/): खजुराहो मंदिर शैली हिन्दू स्थापत्य कला का ही प्रमुख अंग है। इस शैली के मंदिर चंदेल राजपूत राजाओं के काल में खजुराहो में बनाए गए थे। इसलिए इसे खजुराहो मंदिर शैली कहा जाता है। इस शैली के मंदिर मुख्यतः दसवीं से बारहवीं शताब्दी ईस्वी के बीच बने थे। खजुराहो मंदिर शैली मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले […] - [कलिंग मंदिर शैली](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80/): उड़ीसा का स्थापत्य प्राचीनकाल में विकसित कलिंग वास्तुकला शैली में निर्मित है। उड़ीसा के मंदिर कलिंग मंदिर शैली के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। कोणार्क का सूर्य मंदिर कोणार्क का सूर्य मंदिर 13वीं शताब्दी ईस्वी में गंगा राजवंश के राजा नरसिंघेव (प्रथम) ने बनवाया था। यह कलिंग शैली में बना है तथा भगवान बिरंचि-नारायण (सूर्य) को […] - [हिन्दू दुर्ग स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हिन्दू दुर्ग स्थापत्य अत्यंत प्राचीन काल से अस्तित्व में है। ऋग्वेद में इंद्र को पुरंदर कहा गया है जिसका अर्थ दुर्ग का राजा होता है। अर्थात् ऋग्वैदिक काल में भी भारतीयों को दुर्ग बनाने एवं उसमें रहने के महत्व का ज्ञान था। ‘दुः’ का तात्पर्य दुष्कर (कठिन) से है तथा ‘ग’ का तात्पर्य गमन करने […] - [हिन्दू जल स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हिन्दू जल स्थापत्य अथवा जल संग्रहण स्रोतों की स्थापत्य कला अत्यंत प्राचीन काल से ही उन्नत दशा में थी। भारत में जल को देवता के रूप में सम्मान दिया जाता था और जल की पूजा की जाती थी इसलिए जलाशयों को तीर्थ की तरह पवित्र बनाया जाता था। भारत में सार्वजनिक उपयोग हेतु कुओं, तालाबों, […] - [इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला](https://bharatkaitihas.com/indo-saracenic-architecture-and-architecture/): दिल्ली सल्तनत काल में मुस्लिम शासकों द्वारा भारत में बनाए गए भवनों की कला को मुस्लिम कला, तुर्क स्थापत्य कला एवं इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला कहा जाता है। यह कला भारत में प्रचलित प्राचीन हिन्दू स्थापत्य एवं मध्यकालीन राजपूत स्थापत्य से तो अलग थी ही, तुर्कों के बाद स्थापित होने वाली मुगल स्थापत्य कला से भी अलग […] - [हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य में अंतर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मध्यकालीन हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य का अंतर बहुत स्पष्ट है। इस काल में हिन्दू स्थापत्य को बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त किया गया तथा हिन्दू भवनों को तोड़कर उसी सामग्री से मुस्लिम स्थापत्य का निर्माण किया गया। बारहवीं शताब्दी ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ ही भारत में मुस्लिम स्थापत्य कला का प्रवेश हुआ। दिल्ली सल्तनत […] - [मुगल स्थापत्य कला की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-one/): मुगल स्थापत्य कला मुगलों के साथ भारत में नहीं आई थी। इसका विकास भारत में आने के बाद हिन्दू एवं फारसी शैलियों के मिश्रण से हुआ। ई.1526 में मंगोल-वंशी बाबर भारत में अपनी सत्ता स्थापित करने में सफल हो गया। भारत में बाबर तथा उसके वंशज ‘मुगलों’ के नाम से जाने गए। बाबर के वंशज […] - [बाबर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-two/): बाबर कालीन स्थापत्य मस्जिद एवं मकबरों के निर्माण तक सीमित था। बाबर एक क्रूर विध्वंसक था, इसलिए उसने भगवान श्रीराम का जन्मभूमि मंदिर तोड़कर वहाँ भी मस्जिद बनवाई। ई.1526 में बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को परास्त करके दिल्ली एवं आगरा पर अधिकार कर लिया। इसके बाद बाबर ने खानवा, चंदेरी […] - [हुमायूँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हुमायूँ कालीन स्थापत्य कुछ मस्जिदों तक सीमित था। उसने दिल्ली के पुराने किले में निवास स्थापित करने के लिए उसका परकोटा मरम्मत करवाया तथा वहाँ एक पुस्तकालय भी बनवाया। बाबर के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ ने ई.1533 में दिल्ली में यमुना के किनारे दीनपनाह नामक नवीन नगर का निर्माण आरम्भ करवाया। यह नगर ठीक उसी […] - [अकबर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-three/): अकबर ने भारत में प्रचलित तत्कालीन स्थापत्य शैलियों की बारीकी को समझा और अपने शिल्पकारों को इमारतें बनाने के लिए नये विचार दिये। अकबर कालीन स्थापत्य कला वास्तव में हिन्दू-मुस्लिम शैलियों का समन्वय थी। अकबर कालीन स्थापत्य अकबर ने लगभग 50 वर्ष भारत पर शासन किया। इस अवधि में उसका राज्य काफी विस्तृत हो गया […] - [जहाँगीर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-four/): जहाँगीर कालीन स्थापत्य का सबसे पहला उदाहरण आगरा से बाहर बना हुआ सिकन्दरा का मकबरा है जिसकी योजना स्वयं अकबर ने बनाई थी किंतु इसका निर्माण जहाँगीर ने अकबर की मृत्यु के बाद अपनी निगरानी में करवाया। यह मकबरा परम्परागत इस्लामी शैली का मकबरा नहीं है। जहाँगीर कालीन स्थापत्य जहाँगीर को भवन निर्माण में अकबर […] - [शाहजहाँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-five/): शाहजहाँ कालीन स्थापत्य मुगल शासन काल की स्थापत्य कला का स्वर्णयुग था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँच गई। कुछ इतिहासकारों ने शाहजहाँ को निर्माताओं का शहजादा कहा है। स्थापत्य कला का स्वर्णयुग इतिहासकारों की दृष्टि में शाहजहाँ का शासन-काल स्थापत्य कला का स्वर्णयुग था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम […] - [ताजमहल का स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-six/): मुख्य भवन के बाहर बने इवान, ऊपरी हिस्से में बने गुम्बद तथा इसके चारों ओर बनी मीनारों के आधार पर ताजमहल का स्थापत्य निश्चित रूप से एक मुगल स्थापत्य होने की गवाही देता है किंतु इस भवन का भीतरी भाग हिन्दू स्थापत्य की विशेषताओं से युक्त है। आगरा का ताजमहल, शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई सर्वाधिक […] - [औरंगजेब कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-seven/): औरंगजेब कालीन स्थापत्य सर्वथा गौरवहीन है। इसका मुख्य कारण यह है कि वह कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसे यह पसंद नहीं था कि ऐसा कोई भवन बने जो इस्लाम की सादगी के सिद्धांत के विरुद्ध हो। औरंगजेब के पिता शाहजहाँ तथा औरंगजेब के तीनों भाई चित्रकला, संगीतकला तथा स्थापत्य में रुचि रखते थे। औरंगजेब की […] - [ब्रिटिश कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): ब्रिटिश अधिकारियों ने भारत में अनेक विशाल भवन बनाए जिनमें भारतीय एवं मुस्लिम स्थापत्य शैलियों के साथ यूरोपीय स्थापत्य शैलियों का भी समावेश किया। इसे ब्रिटिश कालीन स्थापत्य कह सकते हैं। सत्रहवीं शताब्दी ईस्वी में अंग्रेज, पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी आदि यूरोपीय जातियों ने भारत में प्रवेश किया। उन्होंने यूरोपियन शैली के कुछ चर्च, फोर्ट एवं […] - [दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य एवं द्रविड़ शैली](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-one/): दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य से तात्पर्य दक्षिण भारत के मंदिर स्थापत्य एवं शैलियों से है जो प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल एवं आधुनिक काल में विकसित हुई हैं। दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य अपने आप में कितना अद्भुत है, इसका अनुमान प्रो. हीरेन के इस कथन से हो जाता है कि महाबलिपुरम् के कोरोमण्डल तट पर […] - [पल्लव मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-two/): गुप्तकाल एवं उससे पूर्ववर्ती काल में तमिल क्षेत्र को द्रविड़ प्रदेश कहा जाता था। उस काल की मंदिर कला में काष्ठ एवं कंदराओं का अधिक प्रयोग होता था। इसलिए प्रारम्भिक पल्लव शिल्पकारों ने पल्लव मन्दिर स्थापत्य कला में उन्हीं प्रणालियों का उपयोग किया। गुप्तकाल के पराभव के बाद जब छठी शताब्दी ईस्वी में सिंहविष्णु ने […] - [राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4/): राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला दक्षिण भारत की प्रमुख मंदिर स्थापत्य शैलियों में से है। राष्ट्रकूट राजा उत्तर भारत में आने से पहले दक्षिण भारत में शासन करते थे। एलौरा का कैलाश नाथ मन्दिर राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला का सर्वाधिक प्रसिद्ध उदाहरण एलौरा का कैलाश नाथ मन्दिर है। यह स्थान आन्ध्रप्रदेश के औरंगाबाद नगर से 15 […] - [चोल मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): द्रविड़ मंदिर शैली का चरमात्कर्ष चोल मन्दिर स्थापत्य कला में हुआ। चोलों ने पल्लवों और पाण्ड्यों का स्थान लिया था। इसलिए चोलों ने पल्लवों और पाण्ड्यों की स्थापत्य कला को ही आगे बढ़ाया। चोल मन्दिर स्थापत्य कला का कालखण्ड चोल मन्दिरों का निर्माण ई.850 से 1200 तक निरन्तर होता रहा। इन्हें दो वर्गों में रखा […] - [चालुक्य मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): चालुक्य मन्दिर स्थापत्य कला के तीन प्रमुख केन्द्र थे- एहोल, वातापी (बादामी) और पट्टडकल। एहोल में लगभग 70 मन्दिर मिले हैं जिनके कारण इस नगर को ‘मन्दिरों का नगर’ कहते हैं। समस्त मन्दिर गर्भगृह और मण्डपों से युक्त हैं परन्तु छतों की बनावट अलग-अलग है। कुछ मन्दिरों की छतें चपटी हैं तो कुछ की ढलवां। […] - [दक्षिण भारत की मूर्तिकला](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-three/): दक्षिण भारत की मूर्तिकला न केवल दक्षिण के मंदिर स्थापत्य एवं वास्तु आदि का परिचय देती हैं अपितु विभिन्न कालों में दक्षिण भारत की संस्कृति में आ रहे परिवर्तनों की भी सूचना देती है। दक्षिण भारत के मन्दिरों में मन्दिर की बाहरी दीवारों पर इतनी अधिक मूर्तियाँ उत्कीर्ण की गई हैं कि मन्दिर की वास्तुगत […] - [कालीदास](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-kalidas/): वैदिक एवं उत्तरवैदिक धार्मिक ग्रंथों के बाद संस्कृत साहित्य में महाकवि कालीदास को जितनी सफलता मिली, उतनी अन्य किसी कवि को नहीं मिली।  काउण्ट ब्जोन्सर्टजेरेना ने लिखा है कि भारत का साहित्य हमें अतीत काल के महान राष्ट्र से परिचित कराता है जिसका ज्ञान की हर शाखा पर अधिकार था और जो सदा ही मानव […] - [संत तुलसीदास का साहित्य](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-tulsidas/): भारतीय इतिहास के मध्य-काल में तथा आर्य-संस्कृति के लिए सर्वाधिक कठिन समय में संत तुलसीदास आर्य-संस्कृति के प्रतिनिधि कवि हुए। वे हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध और सर्वाधिक प्रतिभाशाली कवि थे। संत तुलसीदास की जीवनी संत तुलसीदास के जीवन के बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं मिलती किन्तु उनके जीवन की बहुत सी घटनाओं से उनके […] - [मीराबाई](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-meerabai/): मध्यकालीन राजस्थान में सगुण-भक्ति-रस की धारा प्रवाहित करने वाले संत-कवियों में सन्त शिरोमणि मीराबाई का नाम सर्वोपरि है। मीराबाई के जन्मकाल की घटनाएं तो मिलती हैं किंतु जन्म-मृत्यु के सम्बन्ध में निश्चित तिथियाँ नहीं मिलती हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने मीरा का जन्म वि.सं. 1573 (ई.1516) में माना है जबकि गौरीशंकर हीराचंद ओझा, हरविलास शारदा […] - [रवीन्द्र नाथ टैगोर](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-robindranath-tegore/): रवीन्द्र नाथ टैगोर का प्रारम्भिक जीवन रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता में हुआ। उनके पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने केशवचंद्र सेन से मतभेद हो जाने के कारण ब्रह्मसमाज से अलग होकर आदि-ब्रह्मसमाज की स्थापना की थी। रवीन्द्रनाथ की माता का नाम शारदा देवी था। रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता […] - [भारतीय पुनर्जागरण](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-one/): अपने आरम्भिक चरण में भारतीय पुनर्जागरण एक बौद्धिक आन्दोलन था जिसने पराधीन भारत के साहित्य, शिक्षा तथा चिंतनधारा को प्रभावित किया तथा जीवन के प्रत्येक अंग का परिष्कार किया। भारतीय सभ्यता, समाज एवं संस्कृति का विकास विश्व की अन्य संस्कृतियों से पूर्णतः पृथक एवं स्वतंत्र रूप से हुआ था। यह विश्व की प्राचीनतम संस्कृति थी […] - [राजा राममोहन राय और उनका ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-two/): राजा राममोहन राय ने शुद्ध एकेश्वरवाद के सिद्धांत पर आधारित ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ब्रह्मसमाज मूलतः भारतीय था और इसका आधार उपनिषदों का अद्वैतवाद था। भारत में धार्मिक और समाजिक आन्दोलनों के प्रवर्तक राजा राम मोहन राय का जन्म ई.1774 में बंगाल के राधानगर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। वे आरम्भ से ही […] - [युवा बंगाल आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): हेनरी लुई विवियन देरीजियो युवा बंगाल आन्दोलन का जनक था। उसने कलकत्ता के विद्यार्थियों को इस संस्था से जोड़कर अंग्रेजी कुशासन के विरुद्ध आंदोलन चलाया। इस कारण अंग्रेज उससे नाराज हो गए।  जनवरी 1817 में कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना, भारत के धर्म और समाज सुधार आन्दोलन के इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटना थी। सार्वजनिक […] - [केशवचन्द्र सेन का भारतीय ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%b5%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8/): केशवचन्द्र सेन ने ई.1866 में भारतीय ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ईसाई धर्म से प्रभावित होने के कारण भारतीय ब्रह्मसमाज ईसा मसीह को पूज्य मानने लगा। केशवचन्द्र सेन द्वारा संत सभा की स्थापना केशवचन्द्र सेन ई.1856 में ब्रह्मसमाज के सदस्य बने। उन्होंने अपने भाषणों तथा लेखों के माध्यम से नवयुवकों को ब्रह्मसमाज की ओर आकर्षित किया। […] - [आत्माराम पाण्डुरंग और प्रार्थना समाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97/): डॉ. आत्माराम पाण्डुरंग ने 31 मार्च 1867 को जस्टिस महादेव गोविन्द रानडे तथा इतिहासकार आर. जी. भंडारकर के साथ मिलकर बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की। प्रार्थना-समाज ब्रह्म-समाज से प्रेरित हिन्दूवादी आंदोलन था। यह प्राचीन वेदों पर आधारित था एवं पूर्णतः आस्तिक विचारधारा पर खड़ा था। आत्माराम पाण्डुरंग केशवचंद्र सेन से बहुत प्रभावित थे। […] - [स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-three/): स्वामी दयानन्द सरस्वती स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म ई.1824 में गुजरात के टंकारा परगने के शिवपुर ग्राम में सम्पन्न एवं रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके बचपन का नाम मूलशंकर था। 14 वर्ष की आयु में उन्होंने एक चूहे को शिवलिंग पर चढ़कर प्रसाद खाते देखा तो उनका मूर्ति-पूजा से विश्वास उठ गया। जब वे […] - [स्वामी श्रद्धानंद का शुद्धि आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-four/): स्वामी श्रद्धानंद का वास्तविक नाम महात्मा मुन्शीराम था। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले स्वामी श्रद्धानन्द कांग्रेस के लिए कार्य करते थे तथा देश भर में आर्य समाज के सिद्धांतों का प्रचार करते हुए लोगों को वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते थे। ई.1901 में मुंशीराम विज ने वैदिक धर्म तथा भारतीयता […] - [रामकृष्ण परमहंस](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-five/): रामकृष्ण परमहंस का जन्म ई.1836 में बंगाल के हुगली जिले में निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ने भारतीयों के समक्ष धर्म के सच्चे स्वरूप को प्रदर्शित किया। रामकृष्ण के बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। उन उन्हें बचपन से ही शिक्षा के प्रति रुचि नहीं थी। वे हर समय धार्मिक चिंतन में मग्न रहते […] - [स्वामी विवेकानन्द](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6/): शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानन्द ने कहा- मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूँ जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं।            स्वामी विवेकानन्द ने हिन्दू-धर्म का प्रतिपादन ब्रह्मसमाज […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80/): थियोसॉफिकल सोसायटी भारत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आन्दोलन था जिसने देश के धार्मिक तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। थियोसॉफी का अर्थ होता है- ‘ईश्वर का ज्ञान।’ संस्कृत में इसे ‘ब्रह्मविद्या’ कहते हैं। थियोसॉ फी  शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग तीसरी शताब्दी ईस्वी में एलेक्जेण्ड्रिया के ग्रीक विद्वान इम्बीकस ने किया था। आधुनिक काल में इस […] - [विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-six/): उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी में हिन्दू समाज में सुधार आंदोलन चले तब वे केवल हिन्दुओं तक सीमित नहीं रहे। अपितु भारत के विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन चले जिनसे उनमें भी नवीन ऊर्जा का आगमन हुआ। भारत में ऐसे कई धार्मिक-सामाजिक सुधार आन्दोलन हुए जिनके कार्य तथा उद्देश्य बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित थे। पारसियों […] - [मुस्लिम सुधार आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/muslim-reform-movement-in-nineteenth-and-twentieth-centuries/): 19वीं शताब्दी में भारत में मुस्लिम सुधार आन्दोलन आरम्भ हुए। मुस्लिम समाज दो प्रमुख वर्गों में विभाजित था- पहला, उच्च अभिजात्य वर्ग जिसमें बादशाह, अमीर तथा उनके परिवार के लोग थे और दूसरा, जन-साधारण जिसमें सैनिक, श्रमिक, सेवक तथा छोटे कार्य करने वाले मुसलमान थे। दूसरे वर्ग में वे मुसलमान भी थे जो मूलतः हिन्दू […] - [समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82/): उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दी ईस्वी में चले समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन करते समय इस बात पर विचार अवश्य किया जाना चाहिए कि उस समय देश पराधीन था और सीमित साधनों के बीच जो भी व्यक्ति या संगठन जितना कुछ भी कर पाया, उसका मूल्य किसी भी तरह कम नहीं था। 19वीं शताब्दी के मध्य में […] - [बाल गंगाधर तिलक का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/bal-gangadhar-tilaks-contribution-to-national-movement/): भारत में उग्र राष्ट्रवाद के जनक बाल गंगाधर तिलक न केवल भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अप्रतिम सेनानी थे अपितु वे महान् विचारक और राजनीतिज्ञ भी थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई ई.1857 की सशस्त्र-क्रांति को माना जाता है जिसे अंग्रेज सैनिक-विद्रोह एवं बगावत कहते थे। इस संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि भारत से […] - [मोहनदास कर्मचंद गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-the-national-movement/): मोहनदास कर्मचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोबंदर में हुआ। उनके पिता कर्मचंद गांधी पोरबंदर, राजकोट और वंकानेर रियासतों के दीवान रहे। गांधीजी ने ई.1914 के बाद भारतीय राजनीति में प्रवेश किया और देश के स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कांग्रेस के माध्यम से राजनीतिक आंदोलनों की एक क्रमबद्ध शृंखला […] - [सुभाष चन्द्र बोस का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/netaji-subhash-chandra-boses-contribution-to-national-movement/): भारत की राजनीति में सुभाष चन्द्र बोस अकेले ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने राष्ट्रसेवा के लिए विभिन्न मोर्चों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने समय की कठिनतम आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की, एक कॉलेज के प्रिंसीपल रहे, एक विशाल सशस्त्र सेना की स्थापना की और उसके अध्यक्ष रहे, वे सैनिक के रूप में युद्ध […] - [आचार्य सुश्रुत](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-sushruta/): भारतीय चिकित्सा में शल्य चिकित्सा के पितामह और सुश्रुत संहिता के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म ई.पू. छठी शताब्दी में काशी में हुआ था। भारतीय संस्कृति को आधुनिक विज्ञान ने अत्यधिक प्रभावित किया है। वैज्ञानिक आविष्कारों ने एक ओर मानव जीवन को सुखी बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है तो दूसरी ओर विश्व के विनाश […] - [महर्षि चरक](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-maharishi-charak/): महर्षि चरक को प्राचीन भारत के आयुर्वेद के महान ज्ञाता के रूप में ख्याति प्राप्त है। कुछ विद्वानों का मत है कि चरक कनिष्क के राजवैद्य थे अर्थात् वे ईसा की प्रथम शताब्दी में हुए परन्तु कुछ लोग उन्हें बौद्ध-काल से भी पहले का मानते हैं अर्थात् वे ई.पू. 600 से भी पूर्व हुए। त्रिपिटक […] - [आर्यभट्ट](https://bharatkaitihas.com/chief-scientist-of-india-aryabhata/): आर्यभट्ट (ई.476-550) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभट्टीय नामक ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इस ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्म-स्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 लिखा है। आर्यभट्ट का जन्म-स्थल कुसुमपुर दक्षिण भारत में था। एक अन्य मान्यता के अनुसार उनका जन्म […] - [वराहमिहिर](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-varahamihira/): वराहमिहिर अथवा वरःमिहिर ईसा की पाँचवीं-छठी शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ थे। उन्होंने अपने ग्रंथ पंचसिद्धान्तिका में सबसे पहले बताया कि अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर है। कापित्थक (उज्जैन) में उनके द्वारा विकसित गणितीय विज्ञान का गुरुकुल सात सौ वर्षों तक अद्वितीय रहा। वे बचपन से मेधावी थे। अपने पिता आदित्य दास […] - [जगदीश चन्द्र बसु](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-jagdish-chandra-basu/): डॉ. (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण खोजें कीं। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त […] - [चन्द्रशेखर वेंकटरमन (सी. वी. रमन)](https://bharatkaitihas.com/chief-scientist-of-india-chandrashekhar-venkataraman/): भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. चन्द्रशेखर वेंकटरमन विश्व भर के भौतिक-विज्ञानियों में विशेष स्थान रखते हैं। वे प्रथम भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्हें विश्व के सर्वोच्च ‘नोबल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। चन्द्रशेखर वेंकटरमन का जन्म 7 नवम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर के पास तिरूवालेक्कावाल गांव में में हुआ। उनके पिता चन्द्रशेखर अय्यर भौतिकी […] - [प्रस्तावना - हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया](https://bharatkaitihas.com/preface-of-hindutva-ki-chhaya-me-indinasia/): प्रस्तावना – हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया पृष्ठ पर पुस्तक की विषय वस्तु को स्पष्ट किया गया है। इस पुस्तक के लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता हैं। अत्यंत प्राचीन काल से भारतीय ऋषि-मुनि मानव मात्र को सुखी बनाने के उद्देश्य से धरती के विभिन्न द्वीपों और दूरस्थ देशों की यात्रा करके अहिंसा, प्रेम, सद्भाव एवं शांति […] - [अनुक्रमणिका - हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया](https://bharatkaitihas.com/index-of-hindutva-ki-chhaya-me-indinasia/): अनुक्रमणिका – हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया पृष्ठ पर इस पुस्तक के अध्यायों का क्रम दिया गया है। इस पृष्ठ पर दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके अध्यायों तक सीधे ही पहुंचा जा सकता है। 1. प्रस्तावना 2. इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ 3. जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास 4. सुमात्रा में बौद्ध धर्मानुयायी श्री विजय राजवंश 5. […] - [इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ (1)](https://bharatkaitihas.com/mythological-references-to-indonesian-islands/): इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ कई पुराणों में मिलते हैं जिनसे ज्ञात होता है कि इन समस्त द्वीपों पर भारतीय ऋषियों का आवागमन होता रहता था। इण्डोनेशिया गणराज्य, दीपान्तर अर्थात् पार-महा-द्वीपीय (ट्रांसकॉन्टीनेन्टल) देश है जो दक्षिण-पूर्व एशिया और ओशिनिया (उष्णकटिबन्धीय प्रशान्त महासागर के द्वीप) क्षेत्रों में स्थित है। भारतीय पुराणों में इसे ”द्वीपान्तर भारत” अर्थात् […] - [जावा द्वीप का इतिहास (2)](https://bharatkaitihas.com/early-history-of-java-island/): जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास यवद्वीप के नाम से मिलता है। भारतीय संस्कृत साहित्य में इस द्वीप का उल्लेख यवद्वीप के नाम से हुआ है जहाँ चावल एवं स्वर्ण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। चीनी संदर्भों में भी जावाद्वीप का इतिहास मिलता है। चीनी पुराणों के अनुसार जावा में लगभग 2 शताब्दी ईस्वी पूर्व में […] - [सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश (3)](https://bharatkaitihas.com/buddhist-dharmanuyayi-sri-vijay-dynasty-in-sumatra/): सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश मूलतः हिन्दू राजवंश था किंतु बाद में इसने बौद्ध मत अंगीकार कर लिया था। इण्डोनेशिया के इतिहास में इस राजवंश का बड़ा महत्व है। प्राचीन भारतीय संस्कृत साहित्य में सुमात्रा द्वीप को स्वर्णदीप तथा स्वर्णभूमि कहा गया है क्योंकि इस द्वीप के ऊपरी क्षेत्रों में स्वर्ण धातु के विशाल भण्डार उपलब्ध […] - [इण्डोनेशिया के मुसलमान (4)](https://bharatkaitihas.com/culture-of-muslims-of-indonesian-islands/): इण्डोनेशिया के मुसलमान पूरी दुनिया के मुसलमानों से अलग हैं। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपनी पुरानी संस्कृति को नष्ट कर दिया है। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपने पुरखों द्वारा अर्जित ज्ञान को अपना शत्रु समझ लिया है। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपने पुरखों के स्थापत्य एवं शिल्प तथा पुस्तकों को आग में […] - [मसाला द्वीपों के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्द्धा (5)](https://bharatkaitihas.com/competition-in-europe-for-trade-with-spice-islands/): पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में इण्डोनेशियाई एवं भारतीय मसाला द्वीपों के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्द्धा हुई जिसने कुछ ही वर्षों में खूनी जंग का रूप धारण कर लिया। यूरोप के बहुत से देश इन मसाला द्वीपों से व्यापार करने एवं इस व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए पूरी दुनिया में एक-दूसरे पर तोपों से गोले […] - [इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम (6)](https://bharatkaitihas.com/independence-struggle-of-indonesia/): इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम ई.1825 में आरम्भ हुआ जब इण्डोनेशिया की जनता ने डच शासन के विरुद्ध जबर्दस्त विद्रोह किया किंतु इस विद्रोह को कुचल दिया गया। डचों का दमन चक्र इतना क्रूर था कि लगभग 95 वर्ष तक इण्डोनेशिया की जनता शांत बनी रही। इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम पुनः ई.1914 में आरम्भ हुआ जब […] - [बाली में हिन्दू सभ्यता (7)](https://bharatkaitihas.com/development-of-hindu-civilization-in-bali-island/): बाली में हिन्दू सभ्यता अनादि काल से अपनी जड़ें जमाए हुए है। वस्तुतः वैदिक काल से लेकर गुप्त काल तक इण्डोनेशिया को भारतीय उपमहाद्वीप का ही नहीं अपितु भारत का ही एक द्वीप-समूह समझा जाना चाहिए। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार भारत की मुख्य भूमि पर सैंकड़ों राजा एवं राजवंश शासन करते थे, उसी प्रकार […] - [वर्तमान समय में बाली (8)](https://bharatkaitihas.com/present-day-bali/): लगभग चार पांच फुट ऊंचे स्तम्भ पर एक छोटा आला होता है जिसे काला (स्तंभ पर स्थित लघु देवालय) कहते हैं। - [इण्डोनेशिया के मंदिर (9)](https://bharatkaitihas.com/major-hindu-and-buddhist-temples-of-indonesia/): इण्डोनेशिया के मंदिर आकार में विशाल हैं, विषय-वस्तु में विविधता लिए हुए हैं तथा हिन्दू पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं किंतु उनमें सजावट का अंश न के बराबर है। इण्डोनेशिया के मंदिर धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दो भागों में विभक्त किए जा सकते हैं। पहले भाग में वे हिन्दू मंदिर आते हैं जो बड़ी […] - [परमबनन शिव मंदिर समूह (10)](https://bharatkaitihas.com/parambanan-shiva-temple-group/): मध्य जावा में स्थित परमबनन शिव मंदिर समूह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा और विशाल हिंदू मंदिर समूह है। यह मंदिर समूह मुख्यतः भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित है। परमबनन मंदिर विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। परमबनन शिव […] - [प्लाओसान बौद्ध मंदिर (11)](https://bharatkaitihas.com/plosan-buddhist-temple/): प्लाओसान बौद्ध मंदिर भी एक मंदिर समूह है जिसमें मंदिरों के खण्डहर स्थित हैं। यह मंदिर परमबनन मंदिर के उत्तर-पश्चिम में केवल एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस स्थान को बुगिसान गांव कहते हैं। यह सेंट्रल जावा के परमबनन जिले की क्लाटेन रीजेंसी का कस्बे जैसा गांव है जहाँ पक्की दुकानों की पंक्तियां बनी […] - [बोरोबुदुर बौद्ध चैत्य एवं विहार (12)](https://bharatkaitihas.com/borobudur-buddhist-chaitya-and-vihara/): बोरोबुदुर बौद्ध चैत्य एवं विहार महायान बौद्ध विहार है जो मध्य जावा प्रान्त के मगेलांग नगर में स्थित है। यह भी परमबनन शिव मंदिर तथा प्लाओसान बौद्ध विहार की भांति मूलतः 9वीं सदी ईस्वी में निर्मित है। जिस समय यह बना था उस समय यह संसार का सबसे बड़ा बौद्ध विहार था। इसका यह स्थान […] - [चण्डी बोरोबुदुर (13)](https://bharatkaitihas.com/chandi-borobudur/): इंडोनेशिया में प्राचीन मंदिरों को चण्डी कहा जाता है। इस कारण बोरोबुदुर बौद्ध स्मारक को ” चण्डी बोरोबुदुर ” भी कहा जाता है। जावा में चण्डी शब्द प्राचीन बनावट के द्वार और स्नान से सम्बन्धित रचनाओं के लिए प्रयुक्त होता है। बोरोबुदुर शब्द का अर्थ ज्ञात नहीं है। इस शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख अंग्रेज इतिहासकार […] - [जकार्ता के मंदिर (14)](https://bharatkaitihas.com/temples-of-jakarta/): जकार्ता शहर का वास्तविक नाम जयकार्ता है। यह पश्चिमी जावा में स्थित है तथा इंडोनेशिया की राजधानी है। - [बाली द्वीप के मंदिर (15)](https://bharatkaitihas.com/bali-island-temples/): बाली द्वीप के मंदिर हिन्दू देवी-देवताओं को समर्पित हैं। इनमें भगवान विष्णु, शिव, माता दुर्गा, सरस्वती तथा गणेश प्रमुख हैं। बाली में मंदिरों को पुरा कहा जाता है जो कि संस्कृत भाषा के ‘पुर’ शब्द से बना हुआ है जिसका आशय नगर एवं दुर्ग दोनों से लिया जाता है। बाली भाषा में ”पुरा” का अर्थ […] - [उबुद-वानर-वन के मंदिर एवं देव प्रतिमाएं (16)](https://bharatkaitihas.com/temples-and-gods-of-ubud-vanar-van/): एक स्तम्भ पर भरे हुए शरीर वाले योद्धा की मनुष्याकर प्रतिमा खड़ी है जिसने बाएं हाथ में ढाल एवं दायें हाथ में तलवार ले रखी है। इसकी आंखें लम्बी, मूछें बड़ी एवं भाव-भंगिमा कठोर है। - [बाली एवं जावा द्वीपों पर ग्यारह दिन (17)](https://bharatkaitihas.com/eleven-days-on-islands-of-bali-and-java/): बाली एवं जावा द्वीपों पर लेखक ने अपने परिवार के साथ ग्यारह दिन का प्रवास किया। इस प्रवास में लेखक को इन द्वीपों पर हिन्दू संस्कृति की छाप दिखाई दी। लेखक ने अपनी पुस्तक हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया नाम पुस्तक में बाली एवं जावा द्वीपों पर वर्तमान समय में हिन्दू धर्म की स्थिति का […] - [बाली द्वीप पर पांच दिन (18)](https://bharatkaitihas.com/five-days-on-bali-island/): इण्डोनेशिया देश में हमारी ग्यारह दिनों की यात्रा में से बाली द्वीप पर पांच दिन निर्धारित थे। वस्तुतः भारत के लोगों के लिए इण्डोनेशिया में सबसे बड़ा आकर्षण बाली द्वीप ही है। पुतु से भेंट अब हम एयरपोर्ट से बाहर जा सकते थे। हमने बाली द्वीप के मैंगवी नामक एक छोटे से गांव में अपना […] - [बाली द्वीप में पहला दिन (19)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-bali-island/): 14 अप्रेल 2017 को हम अपने सर्विस अपार्टमेंट में लगभग एक बजे पहुंच गए। इसी के साथ हमारा बाली द्वीप में पहला दिन आरम्भ हो गया। रास्ते में हमने एक सब्जी मण्डी देखी जिसे देखकर तबियत प्रसन्न हो गई और निर्णय लिया गया कि संध्या काल में इस सब्जी मण्डी से सब्जियां खरीदी जाएंगी। हम […] - [बाली द्वीप में दूसरा दिन (20)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-bali-island/): 15 अप्रेल 2017 को दूसरे दिन प्रातः पांच बजे ही आंख खुल गई। आज हमारा बाली द्वीप में दूसरा दिन था। इस समय भारत में तो रात के ढाई ही बजे होंगे किंतु हमारे शरीर में लगी जैविक घड़ी ने स्थानीय समय से पूरी तरह से तालमेल बैठा लिया था। चावल के खेतों के बीच […] - [तमन राम सीता (21)](https://bharatkaitihas.com/taman-ram-sita/): सीता अभय मुद्रा में हैं और राम इस मुद्रा में खड़े हैं मानो बाली द्वीपवासियों को सम्बोधित कर रहे हों! - [तमन अयुन पुराडेसा (22)](https://bharatkaitihas.com/taman-ayun-purdesa/): तमन अयुन पुराडेसा में प्रवेश करते ही एक बड़ा सा मण्डप है। इसमें प्रतिमाओं के माध्यम से बाली की सांस्कृतिक झांकी प्रस्तुत की गई है। तमन अयुन पुराडेसा मंदिर में प्रवेश के लिए प्रत्येक व्यक्ति को बीस हजार इण्डोनेशियन रुपए मूल्य का टिकट खरीदना होता है। हमने पांच टिकट खरीदे इसलिए एक लाख रुपए खर्च […] - [तनाहलोट मंदिर (23)](https://bharatkaitihas.com/towards-tanhalot-temple/): तमन अयुन टेम्पल देख लेने के बाद हम पुतु के सथ तनाहलोट मंदिर के लिए रवाना हुए। यह मेंगवी से लगभग एक घण्टे की दूरी पर है। लगभग एक घण्टे चलने के बाद हम तनाहलोट पहुंचे। प्राचीन तनाहलोट हिन्दू मंदिर, बाली द्वीप के तबनन रीजेंसी क्षेत्र में समुद्र के भीतर किंतु तट के काफी निकट […] - [गुलंगान पर्व के शानदार जुलूस (24)](https://bharatkaitihas.com/great-procession-of-gulangan-festival/): महिलाओं के सिर पर बांस की खपच्चियों से बने हुए कंदील थे जिनके ऊपरी हिस्से में दीपक का प्रकाश जगमगा रहा था। - [बाली द्वीप में तीसरा दिन (25)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-bali-island/): आज हमारा बाली द्वीप में तीसरा दिन था। आज हमें उलूवातू में वानर उद्यान तथा कुता शहर में राजा का महल देखने जाना था। तीसरी सुबह 16 अप्रेल को भी आंख जल्दी ही खुल गई। सूर्योदय का आनंद हमने उसी लॉन में बोगनविलिया के छज्जे के नीचे बैठकर चाय पीते हुए लिया। आज भी हमने […] - [बाली द्वीप में चौथा दिन (26)](https://bharatkaitihas.com/fourth-day-in-bali-island/): आज हमारा बाली द्वीप में चौथा दिन था। आज का दिन हमने मेंगवी गांव के विश्रामगृह में ही बिताने का निश्चित किया था। इसलिए हमने दिन में मेंगवी गांव तथा उसके आसपास का क्षेत्र देखने का निर्णय लिया। 17 अप्रेल को भी नींद प्रातः पांच बजे के आसपास खुल गई। इस समय भारत में तो […] - [जावा द्वीप पर पांच दिन (27)](https://bharatkaitihas.com/five-days-on-java-island/): मैंने कुछ रातें भारत-पाक सीमा पर पूरी-पूरी रात जीप में यात्रा करते हुए भी बिताई हैं, किंतु ऐसी खराब अनुभूति तो तब भी नहीं हुई। - [जावा द्वीप पर दूसरा दिन (28)](https://bharatkaitihas.com/second-day-on-java-island/): जैसे-तैसे प्रातः हुई। हम अपनी आदत के अनुसार प्रातः पांच बजे उठ गए। इसी के साथ जावा द्वीप पर हमारा दूसरा दिन आरम्भ हो गया। पहले दिन का अनुभव बहुत बुरा रहा था। आज का दिन हम उतना बुरा नहीं बिताना चाहते थे। गंदगी और बदबू से विदा तथा मासप्रियो का उपदेश टॉयलेट में हमने […] - [परमबनन शिव मंदिर (29)](https://bharatkaitihas.com/parambanan-shiva-temple/): धूप तेज थी और जहाँ से हमने परमबनन मंदिर के लिए चलना आरम्भ किया था, वहाँ से परमबनन शिव मंदिर के शिखर लगभग एक किलोमीटर दूर दिखाई दे रहे थे। जैसे-जैसे मंदिर के शिखर निकट आते गए, उनके चारों तरफ बिखरे हुए काले रंग के चौकोर एवं तराशे हुए सुगढ़ पत्थरों के विशाल ढेर हमारे […] - [जावा द्वीप पर तीसरा दिन](https://bharatkaitihas.com/third-day-on-java-island/): आज 19 मई हो चुकी थी। जावा के समयानुसार प्रातः चार बजे मेरी आंख खुल गई। आज जावा द्वीप पर तीसरा दिन था।मैंने हिसाब लगाया, इस समय बाली द्वीप पर सुबह के तीन ही बजे होंगे और भारत में रात के बारह बज रहे होंगे। यह शरीर भी कितना विचित्र है! इसमें लगी जैविक घड़ी […] - [बोरोबुदुर का पहाड़नुमा स्थापत्य (31)](https://bharatkaitihas.com/huge-hill-architecture/): बोरोबुदुर का पहाड़नुमा स्थापत्य हमारी आंखों के सामने था। इसे देखकर विश्वास नहीं होता कि कुछ साल पहले तक यह विशाल संरचना मिट्टी में दबकर इंसानों की दृष्टि से ओझल हो चुकी थी और लोग इसके बारे में भूल चुके थे। केव कुछ लोककथाओं में बोरोबुदुर के उल्लेख जीवित थे। लगभग एक घण्टा चलने के […] - [गैम्बीरा लोका जू (32)](https://bharatkaitihas.com/gambira-loca-zoo/): एक बाड़े में जवाई हाथी प्रदर्शित किए गए हैं जो डीलडौल एवं शारीरिक बनावट में भारतीय हाथियों के मुकाबले में कहीं नहीं टिकते। - [रावत जालान (34)](https://bharatkaitihas.com/search-for-food/): एक बड़े से साइन बोर्ड पर रोमन लिपि में बड़े-बड़े अक्षरों में रावत जालान लिखा हुआ था। पिताजी ने अनुमान लगाया कि जोधपुर में कुछ अग्रवाल परिवार अपना सरनेम जालान लगाते हैं। हो न हो यह जोधपुर के ही किसी अग्रवाल परिवार की दुकान हो। इसी प्रकार जोधपुर में रावत मिष्ठान भण्डार है जो कि […] - [योग्यकार्ता से विदा (35)](https://bharatkaitihas.com/depart-from-yugyakarta/): आज 21 अप्रेल को हमें योग्यकार्ता से विदा लेनी थी और इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता के लिए रवाना होना था। हमने एक लक्जरी ट्रेन से रिजर्वेशन करवा रखा था। यह ट्रेन प्रातः 8.57 पर योग्यकार्ता से चलकर सायं 4.52 पर जकार्ता पहुंचने वाली थी। रेलवे स्टेशन हमारे सर्विस अपार्टमेंट से केवल 8-9 किलोमीटर की दूरी […] - [इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता में तीन दिन (36)](https://bharatkaitihas.com/three-days-in-jakarta-capital-of-indonesia/): हम अपनी यात्रा के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुके थे। अब हमें इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता में तीन दिन व्यतीत करने थे और उसके बाद भारत के लिए प्रस्थान करना था। गम्बीरी स्टेस्यन यह भारत के किसी भी व्यस्त रेलवे स्टेशन जैसा था किंतु इस स्टेशन को देखना, विश्व इतिहास के दर्शन करने से […] - [लेखकीय - पोप के देश में ग्यारह दिन](https://bharatkaitihas.com/preface-pope-ke-desh-me/): लेखकीय – पोप के देश में ग्यारह दिन पृष्ठ पर लेखक डॉ. मोहन लाल गुप्ता द्वारा इटली में बिताए गए 11 दिनों के अनुभव के आधार पर यात्रा वृत्तांत लिखा गया है। हमारे लिए ये महंगी विदेश यात्राएं उस देश के इतिहास और संस्कृति को आत्मसात् करने और बाद में उसे ज्यों की त्यों पन्नों […] - [दुनिया की नाभि की ओर (1)](https://bharatkaitihas.com/towards-the-navel-of-the-world/): दुनिया की नाभि भारत में अत्यंत प्राचीन काल से रोम को दुनिया की नाभि कहा जाता है। यह तो तय है कि रोम धरती के मध्य में नहीं है, तो फिर रोम को दुनिया की नाभि क्यों कहा जाता है! निश्चित रूप से रोम ने यूरोप को ज्ञान-विज्ञान, धर्म और दर्शन दिया। कानून और नियम […] - [रोम में पहला दिन - 17 मई 2019 (2)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-rome/): 17 मई 2019 को सायं सात बजे हम इटली की राजधानी रोम से 35 किलोमीटर दूर लिओनार्डो दा विंची इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे। इसी के साथ रोम में पहला दिन आरम्भ हो गया। लियोनार्डो दा विंची एयरपोर्ट पर  सायं 7.00 बजे हम रोम से 35 किलोमीटर दूर लिओनार्डो दा विंची एयरपोर्ट पर उतरे। फ्लाइट 2.15 […] - [रोम में दूसरा दिन - 18 मई 2019](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-rome/): हमारा आज रोम में दूसरा दिन था। आज से ही हमें रोम का वास्तविक भ्रमण आरम्भ करना था। एक समय था जब पूरी दुनिया में यह कहावत प्रचलित थी- ऑल रोडस् लीड टू रोम’ अर्थात् दुनिया की सारी सड़कें रोम तक ले जाती हैं। आज उसी रोम की सड़कों पर हमें चलना था। सैलफोन चार्जर […] - [रोम में तीसरा दिन - 19 मई 2019](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-rome/): यहाँ की चौड़ी-चौड़ी सड़कें, उनके दोनों ओर खड़े फूलों के वृक्ष तथा बड़े-बड़े आवासीय भवन बरसात में भीगकर छायाचित्रों एवं कलैण्डरों में दिखने वाले दृश्य उत्पन्न कर रहे थे। - [रोम में चौथा दिन - 20 मई 2019](https://bharatkaitihas.com/fourth-day-in-rome/): आज हमारा रोम में चौथा दिन था। आज हमें विश्व इतिहास में बदनाम कोलोजियम को देखने जाना था। यह वही स्थान था जहाँ ईसा की आरम्भिक शताब्दियों में रोमनवासियों ने हजारों योद्धाओं का रक्त केवल अपने मनोरंजन के लिए बहा दिया था। रोम में तीसरा दिन अनुभवों से भरा रहा था और आज चौथे दिन […] - [अनसूया हजारों साल बूढ़ी थी](https://bharatkaitihas.com/bhardwaj-introduced-shri-ram-and-sita-to-thousands-of-years-old-anasuya/): ऋषि भरद्वाज ने श्रीराम एवं सीता से हजारों साल बूढ़ी अनसूया का परिचय करवाया! जब दशरथ नंदन भरत अयोध्यावासियों को चित्रकूट से अयोध्या ले गए तो राजकुमार रामचंद्र ने लक्ष्मण एवं सीताजी को अपने साथ लेकर चित्रकूट छोड़ दिया और गहन दण्डकारण्य में प्रवेश किया। उन्होंने अरण्य में रहकर तपस्या करने वाले ऋषियों के आश्रमों […] - [शरभंग ऋषि ने श्रीराम को समस्त योग, यज्ञ, तप एवं व्रत समर्पित कर दिए (31)](https://bharatkaitihas.com/sharabhang-rishi-dedicated-all-yoga-yagya-penance-and-fast-to-shri-ram/): श्रीराम का लक्ष्य शरभंग ऋषि के आश्रम तक पहुंचने का था। इसलिए वे मुनियों से शरभंग ऋषि की कुटिया का मार्ग पूछने लगे। शीघ्र ही यह समाचार शरभंग ऋषि तक पहुंच गया कि श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीताजी शरभंग ऋषि के आश्रम की ओर बढ़ रहे हैं। महर्षि अत्रि एवं सती अनसूया से भेंट करने के […] - [सुतीक्ष्ण ऋषि ने भगवान को देखकर आंखें बंद कर लीं (32)](https://bharatkaitihas.com/sutikshan-closed-his-eyes-to-see-rama/): शरभंग ऋषि को विदा करके श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीताजी ने वनवासी सन्यांसियों से सुतीक्ष्ण ऋषि के आश्रम का पता पूछा। इस अवसर पर उपस्थित सैंकड़ों मुनियों, तापसों एवं ऋषि-पुत्रों ने श्रीराम से कहा कि हम आपको सुतीक्ष्णजी के आश्रम तक पहुंचाएंगे। वे लोग चाहते थे कि अधिक से अधिक समय तक वे श्रीराम का सान्निध्य […] - [महर्षि अगस्त्य से भेंट की श्रीराम ने (33)](https://bharatkaitihas.com/shri-ram-met-maharishi-agastya-to-get-divine-weapons/): भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के समय महर्षि अगस्त्य से भेंट करके उनसे दिव्य आयुध एवं अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए। महर्षि अगस्त्य से भेंट के पीछे श्रीराम का मंतव्य केवल इतना ही नहीं था। इस भेंट के पीछे बड़े गहरे प्रयोजन छिपे थे। श्रीराम, लक्ष्मण तथा जनकनंदिनी सीताजी महर्षि अगस्त्य से भेंट करने के लिए सुतीक्ष्ण […] - [दिव्य आयुध श्रीराम को समर्पित कर दिए अगस्त्य ऋषि ने (34)](https://bharatkaitihas.com/agastya-rishi-dedicated-his-divine-weapons-to-shri-ram/): जब भगवान श्रीराम महर्षि अगस्त्य के आश्रम में उपस्थित हुए, तब गूढ़ संवादों के माध्यम से दोनों ने एक-दूसरे को बता दिया कि उनके उद्देश्य एक समान हैं। अगस्त्य ऋषि ने दिव्य आयुध श्रीराम को समर्पित कर दिए! मुनि सुतीक्ष्ण श्रीराम, लक्ष्मण एवं जानकी को अपने साथ लेकर महर्षि अगस्त्य के आश्रम पहुंचे। यह आश्रम […] - [सीताजी की चिंता (35)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%be/): वाल्मीकि रामायण में सीताजी की चिंता का वर्णन हुआ है। जब वनवास काल में सीताजी भगवान श्रीराम को अपने कंधों पर हर समय धनुष धारण किए हुए देखती हैं तथा जंगलों में पशुओं का शिकार करते हुए देखती हैं तो सीताजी कहती हैं कि मैं आपकी यह प्रवृत्ति देखकर चिंतित हूँ। महर्षि अगस्त्य से भेंट […] - [शम्बूक वध का सच (36)](https://bharatkaitihas.com/shriram-killed-shambuk-who-was-meditating-for-his-heavenly-entry/): शम्बूक वध का सच भारतीय पौराणिक इतिहास की ऐसी जटिल पहेली बन गया है जिसे आज के राजनेता अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए काम में ले रहे हैं। उन्हें शम्बूक वध का सच नहीं जानना है, इस मिथक को अपने पक्ष में भुनाना है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब श्रीराम अयोध्या के राजा बन गए […] - [राजा शिबि](https://bharatkaitihas.com/raja-shibi-cut-off-flesh-of-his-body-and-gave-it-to-the-eagle/): राजा शिबि ने अपने शरीर का मांस काटकर बाज को दे दिया! पिछली एक कथा में हमने चर्चा की थी कि इन्द्र के कुपित हो जाने के कारण राजा ययाति स्वर्ग से नीचे गिरने लगा। उस स्थान पर अष्टक, प्रतर्दन, वसुमान् और शिबि नामक राजर्षि बैठे हुए तपस्या कर रहे थे। इस कथा में हम […] - [लवणासुर का वध कर दिया शत्रुघ्न ने](https://bharatkaitihas.com/shatrughan-killed-lavanasura-who-killed-his-ancestor-mandhata/): इस धारवाहिक की 9वीं कड़ी में हमने वायुपुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, भागवत पुराण, मत्स्य पुराण, वाल्मीकि रामायण तथा महाभारत आदि ग्रंथों में मिलने वाली राजा मांधाता की कथा की चर्चा की थी। राजा मांधाता त्रेता युग का पहला राजा था जो ईक्ष्वाकु कुल में उत्पन हुआ था। उसका वध लवणासुर नामक एक असुर ने […] - [लाल किले की दर्दभरी दास्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): लाल किले की दर्दभरी दास्तान शीर्षक से लिखी गई इस पुस्तक को देश-विदेश में अभूतपूर्व प्रसिद्धि प्राप्त हुई है। लाखों लोगों ने इसे पसंद किया एवं सराहा है। शाहजहाँ से लेकर औरंगजेब तक के मुगलों का जैसा रोमांचक एवं वास्तविक इतिहास इस पुस्तक में लिखा गया है, वैसा इतिहास अन्य पुस्तकों में नहीं मिलता। भारत […] - [पोप के देश में ग्यारह दिन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/): पोप के अस्तित्व में आने से पहले रोम की धरती पर बहुत कुछ ऐसा घटित हो चुका था जो न केवल प्राचीन रोम की पहचान है अपितु पूरी दुनिया को आज भी आकर्षित करता है। - [हिन्दी साहित्य की पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/literature-books-of-mohanlalgupta/): डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में सैंकड़ों की संख्या में आलेख, कविता, कहानियाँ, नाटक, लघुनाटिकाएँ आदि की रचना की है। उनकी रचनाएं विगत चार दशकों से देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं तथा रेडिया एवं टेलिविजन पर प्रसारित हुई हैं। उनकी बहुत से कहानियों एवं उपन्यासों के तेलुगु, मराठी […] - [इतिहास पुरुष](https://bharatkaitihas.com/historical-biographies-by-mohanlalgupta/): ये पुस्तकें हमारी नई पीढ़ी के ज्ञानवर्द्धन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं साक्षात्कारों की तैयारी करवाने में दुर्लभ संदर्भ सामग्री का कार्य करती हैं। - [राजस्थान का इतिहास](https://bharatkaitihas.com/books-of-history-of-rajasthan-by-mohanlal-gupta/): राजस्थान ज्ञान कोश नामक पुस्तक के अब तक 15 संस्करण प्रकाशित हुए हैं जिससे इस पुस्तक की लोकप्रियता एवं उयोगिता का अनुमान लगाया जा सकता है। - [विश्व इतिहास पर पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/books-of-world-history-by-mohanlal-gupta/): विश्व इतिहास की दृष्टि से डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तकें अनूठी एवं अमूल्य हैं। भारतीय पाठकों के लिए ये पुस्तकें अद्यतन नवीन जानकारी प्रस्तुत करती हैं। - [डॉ. मोहनलाल गुप्ता की मुद्रित पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/books-by-dr-mohanlal-gupta-available-for-sale/): इस पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता की मुद्रित पुस्तकें संक्षिप्त विवरण सहित उपलब्ध, सूची रूप में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। ये पुस्तकें अमेजन डॉट इन से अथवा शुभदा प्रकाशन से सम्पर्क करके क्रय की जा सकती हैं। विश्व इतिहास 1. हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया, हार्ड बाउण्ड, पृष्ठ-176, मूल्य 350 रुपए। (ऑफसेट प्रिंटिंग, डिमाई […] - [पौराणिक धर्म अथवा वैष्णव धर्म का उदय एवं विकास](https://bharatkaitihas.com/rise-and-development-of-mythological-religion-or-vaishnavism-part-one/): पौराणिक धर्म अथवा वैष्णव धर्म का मुख्य आधार वेदों में वर्णित देवता विष्णु एवं उनके दस अवतार हैं। नारद पुराण में कहा गया है कि इस जगत में विष्णु सर्वत्र व्याप्त हैं, इस जगत् का कारण विष्णु हैं।…… विष्णु के समान कोई अन्य देव नहीं है।   जब जैन-धर्म तथा बौद्ध-धर्म ह्रास के मार्ग पर बढ़ […] - [पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व](https://bharatkaitihas.com/rise-and-development-of-mythological-religion-or-vaishnavism-part-two/): पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व भगवान विष्णु की भक्ति पर केन्द्रित हैं। विष्णु तथा उनके अवतारों की उपासना, प्रार्थना, भक्ति तथा उनकी कृपा का अवलम्बन ही इस धर्म का मूल तत्व है। पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व विष्णु पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व भगवान विष्णु ही हैं। पुराणों का वैचारिक आधार विष्णु की भक्ति एवं उपासना पर अवलम्बित […] - [पौराणिक धर्म में समन्वय के तत्व](https://bharatkaitihas.com/rise-and-development-of-mythological-religion-or-vaishnavism-part-three/): पौराणिक धर्म को व्यावहारिक एवं लोकप्रिय बनाने के लिए विभिन्न मत-मतांतरों के तत्वों का पौराणिक धर्म में समन्वय किया गया। समन्वयन की प्रवृत्ति के कारण ही पौराणिक धर्म बौद्ध धर्म का सामना करके करोड़ों हिन्दुओं को हिन्दू धर्म के भीतर बनाए रखने में सफल रहा। पौराणिक धर्म (वैष्णव धर्म) को लोकप्रिय बनाने के प्रयास जनसामान्य […] - [शैव धर्म](https://bharatkaitihas.com/shaivism-and-shakta-dharma-part-one/): शैव धर्म भारत के सबसे प्राचीन धर्मों में से है। इस धर्म को मानने वाले लोगों के आराध्य देव भगवान शिव हैं जिनका सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। शैव मत के कई शाखाएं हैं जिन्हें पंथ कहा जाता है। ऋग्वेद में रुद्र नामक देवता का उल्लेख है, यजुर्वेद के 16वें अध्याय में भवागन रुद्र […] - [नाथ सिद्ध कालमुख एवं अघोरी सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/shaivism-and-shakta-dharma-part-two/): नाथ सिद्ध कालमुख एवं अघोरी मत अत्यंत प्राचीन काल से शैव धर्म की विभिन्न शाखाओं के रूप में विद्यमान हैं। यद्यपि ये समस्त शाखाएं भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करती हैं तथापि इन समस्त शाखाओं के साधकों का एक ही उद्देश्य है- शिवत्व को प्राप्त करना। शैव धर्म का नाथ संप्रदाय ‘नाथ’ शब्द […] - [शाक्त धर्म एवं उसके सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/shaivism-and-shakta-dharma-part-three/): वैष्णव धर्म (पौराणिक धर्म) एवं शैव धर्म की तरह शाक्त धर्म भी भारत में अत्यंत प्राचीन काल से विद्यमान है। यह भी पूरे भारत में फैला हुआ है। हालांकि आजकल शाक्त सम्प्रदाय को तांत्रिक धर्म मान लिया जाता है किंतु प्राचीन काल में इसका स्वरूप पूर्णतः तांत्रिक नहीं था। सिंधु घाटी सभ्यता में मातृदेवी की […] - [संगम युग में समाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/): संगम युग के तमिल जन्म और मृत्यु के अवसरों पर आनुष्ठानिक अस्वच्छता में भी विश्वास करते थे। मृतकों को दफनाया अथवा जलाया जाता था अ - [संगम साहित्य](https://bharatkaitihas.com/sangam-era-literature-society-and-culture-part-one/): संगम साहित्य से तात्पर्य पांड्य-शासकों द्वारा संरक्षित विद्वत्-परिषद् के साहित्यकारों द्वारा तीन अलग-अलग सम्मेलनों में तमिल भाषा में रचे गए साहित्य से है। इतिहासविद् संगम साहित्य की तुलना ग्रीस और रोम के गौरव-ग्रंथों तथा यूरोपीय पुनर्जागरण काल के साहित्य से करते हैं। कुछ विद्वान संगम युग को तमिलों का स्वर्ण-युग मानते हैं। निश्चय ही तमिलों […] - [संगम युगीन अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/sangam-era-literature-society-and-culture-part-two/): संगम युगीन साहित्य एवं शासन व्यवस्था दोनों ही इस बात के प्रमाण हैं कि संगम युगीन अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत रही होगी। अर्थव्यवस्था की मजबूती के बिना न तो उन्नत शासन व्यवस्था स्थापित की जा सकती है और इतना उत्कृष्ट साहित्य लिखा जा सकता है। संगम साहित्य में वर्णित राज्य व्यवस्था संगम काव्य दक्षिण भारत में […] - [इस्लाम का जन्म](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-a/): जिस समय भारत भूमि पर वैष्णव धर्म के भीतर विभिन्न दार्शनिक विचारों का विकास नवीन उत्कर्ष को प्राप्त कर रहा था, भारत भूमि से दूर अरब की भूमि पर इस्लाम का जन्म हो रहा था। पश्चिम एशिया में स्थित अरब प्रायद्वीप को भूमध्य सागर, लाल सागर, अरब सागर और फारस की खाड़ी तीन ओर से […] - [इस्लाम के सिद्धांत](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-b/): इस्लाम के सिद्धांत हजरत मुहम्मद के उपदेशों पर आधारित हैं तथा ये कुरान के माध्यम से मुसलमानों के लिए उपलब्ध हैं। माना जाता है कि कुरान किसी ने लिखी नहीं थी, अपितु इसकी आयतें इलहाम के माध्यम से मुहम्मद पर आयत हुई थीं, अर्थात् आसमान से उतरी थीं। मुसलमान के पांच कर्त्तव्य कुरान के अनुसार […] - [खलीफाओं का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-c/): इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद की मृत्यु के बाद खलीफाओं का उत्कर्ष हुआ। खलीफाओं के प्रयत्नों से इस्लाम अरब की भूमि से बाहर निकल कर पूरी दुनिया में फैल गया। ‘खलीफा’ अरबी के ‘खलफ’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है- ‘लायक बेटा’ अर्थात् योग्य पुत्र परन्तु खलीफा का अर्थ है जाँ-नशीन या उत्तराधिकारी। हजरत मुहम्मद […] - [इस्लामी साम्राज्य का प्रसार](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-d/): इस्लामी साम्राज्य का प्रसार इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद के जीवन काल में ही होना आरम्भ हो गया था। मुहम्मद के प्रयासों से अरब के अधिकांश भू-भाग पर इस्लाम का वर्चस्व हो गया। मुहम्मद की मृत्यु के बाद खलीफाओं का उत्कर्ष होने पर खलीफाओं के नेतृत्व में इस्लामी साम्राज्य का प्रसार तेजी से हुआ। अरबवासियों ने […] - [सूफी मत](https://bharatkaitihas.com/sufism-in-india-in-bhartiya-sanskriti/): भारत में इस्लाम के साथ-साथ सूफी मत का भी प्रवेश हुआ। सूफी मत, इस्लाम का एक वर्ग अथवा समुदाय है और उतना ही प्राचीन है जितना कि इस्लाम। सूफी प्रचारक कई वर्गों तथा संघों में विभक्त थे। उनके अलग-अलग केन्द्र थे। इस्लाम की ही तरह सूफी मत का भी भारत में तीव्र गति से प्रचार […] - [गुरु नानक एवं उनका धर्म](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-a/): पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में गुरु नानक ने गुरुमत की खोज की। उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया, बाह्य आडम्बरों का विरोध किया तथा एकेश्वरवाद एवं निराकारवाद का प्रचार किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके सिद्धांतों को सिक्ख धर्म के रूप में मान्यता मिली।  गुरु नानक सिक्खों के प्रथम गुरु ‘नानक देव’ सिक्ख धर्म के प्रवर्त्तक […] - [सिक्ख धर्म के ग्रंथ एवं मंदिर](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-b/): सिक्ख धर्म के ग्रंथ सिक्ख धर्म की मान्यताओं का विवेचन करते हैं। सिक्खों का सर्वप्रमुख ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब है जिसमें सिक्ख गुरुओं एवं वैष्णव संतों के पद संग्रहीत हैं। सिक्ख धर्म के ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब सिक्खों का धार्मिक ग्रन्थ ‘श्री आदि ग्रंथ’ या ‘ज्ञान गुरु ग्रंथ साहिब’ है। इसे ‘आदि गुरु दरबार’ या […] - [सिक्ख गुरु एवं उनका इतिहास](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-c/): गुरु नानक से लेकर गुरु गोविन्दसिंह तक दस सिक्ख गुरु हुए जिनके नाम क्रमशः (1.) नानक, (2.) अंगद, (3.) अमरदास, (4.) रामदास, (5.) अर्जुनदेव, (6.) हरगोविन्द, (7.) हरराय, (8.) हरकृष्णराय, (9.) तेग बहादुर और (10.) गोविन्दसिंह है। प्रत्येक गुरु अपने अन्तिम समय में अपने उत्तराधिकारी को अपना पद सौंपकर उसे पंथ का गुरु घोषित कर […] - [बंदा बैरागी और सिक्ख धर्म](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-d/): एक हिन्दू पंडित प्रतापमल का पुत्र जब मुसलान बनने लगा, तब उससे कहा गया कि यदि तुम खान-पान की स्वतंत्रता के लिए हिन्दू-धर्म को छोड़ना चाहते हो तो अच्छा है कि मुसलमान न होकर सिक्ख हो जाओ। - [वैदिक भारत में शिक्षा व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-a/): यह देखकर सुख आश्चर्य होता है कि ऋषियों ने वैदिक भारत में शिक्षा व्यवस्था का जो तंत्र विकसित किया, उससे समाज में ज्ञान-विज्ञान, दर्शन एवं अध्यात्म का व्यापक प्रसार हुआ। वैदिक काल में शिष्य की पात्रता पर बड़ा ध्यान दिया जाता था। इस सम्बन्ध में निरुक्त में एक बहुत सुंदर उक्ति मिलती है जिसके अनुसार […] - [स्त्री शिक्षा एवं शूद्र शिक्षा](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-b/): प्राचीन भारत में स्त्री शिक्षा एवं शूद्र शिक्षा की स्थिति मध्यकाल की अपेक्षा बहुत अच्छी थी। स्त्रियों को पढ़ने का पूरा अधिकार था। इस कारण वे वेदों की ऋचाएं तक लिखने में निष्णात हो जाती थीं। शूद्रों को भी पढ़ने का अधिकार था। वैदिक-काल में स्त्री शिक्षा वैदिक-काल में स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता […] - [प्राचीन वैदिक शिक्षा केन्द्र](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-c/): प्राचीन वैदिक शिक्षा केन्द्र पूरे भारत में विद्यमान थे। ये प्रायः छोटे-छोटे गुरुकुलों के रूप में स्थापित हुए थे जिन्हें स्थानीय शासकों एवं नागरिकों द्वारा संसाधन उपलब्ध करवाए जाते थे और इनमें दूर-दूर से छात्र पढ़ने आते थे। उत्तरवैदिक-काल के अंत में शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप में परिवर्तन आने लगा और देश के विभिन्न क्षेत्रों […] - [प्राचीन जैन शिक्षा केन्द्र](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-d/): प्रायः जिन नगरों में वैदिक धर्म एवं बौद्ध धर्म की शिक्षा दी जाती थी, उन्हीं नगरों में जैन उपासरों को ही प्राचीन जैन शिक्षा केन्द्र के रूप विकसित किया गया। जैन धर्म भारत के अत्यंत प्राचीन धर्मों में से है। इसकी स्थापना ऋषभदेव के काल में हुई जिन्हें प्रथम तीर्थंकर तथा जैन धर्म का संस्थापक […] - [प्राचीन बौद्ध शिक्षा केन्द्र](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-e/): महात्मा बुद्ध के उपदेशों से प्रभावित होकर बहुत से लोग किशोरावस्था में ही भिक्षुव्रत ग्रहण करके बौद्ध संघ में सम्मिलित हो गए। विभिन्न राज्यों के राजा एवं सम्पन्न गृहस्थ बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक दान देते थे। ये विहार प्राचीन बौद्ध शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित हुए जिनमें आचार्य और उपाध्याय अध्यापन का कार्य करते […] - [वर्णों की उत्पत्ति](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-a/): वर्णों की उत्पत्ति कर्म के आधार पर हुई थी। जो व्यक्ति जो कर्म करता था, वही उसका वर्ण बन जाता था। कर्म बदलने पर व्यक्ति का वर्ण भी बदल जाता था। शुक्र नीति के अनुसार इस संसार में जन्म से कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या म्लेच्छ नहीं होता है, गुण तथा कर्म के भेद […] - [प्राचीन काल में शूद्र](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-b/): प्राचीन काल में शूद्र वर्ण की स्थिति में निरंतर बदलाव आते रहे। वैदिक काल में कोई शूद्र नहीं था, रामायण काल में शिल्पी को शूद्र माना जाता था, महाभारत काल में हाथ से कार्य करने वाले को शूद्र माना जाता था, उसके बाद चाण्डाल आदि शूद्र जातियों का उद्भव हुआ। इन समस्त कालों में मैला […] - [मौर्य युग में वर्णव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-c/): मौर्य युग में वर्णव्यवस्था वैदिक युग की वर्ण व्यवस्था से काफी आगे निकल चुकी थी। इस युग में मृत पशुओं की खाल निकालने वाले तथा शमशान में मृत मानवों का अंतिम संस्कार करने वाले शूद्र वर्ण का उदय हो चुका था। इन शूद्रों को गांव से बाहर निवास करना होता था। ‘कौटिल्य’ द्वारा रचित ग्रन्थ […] - [मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-d/): मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था का आशय मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात् शुंग, कण्व एवं सातवाहन काल में भारतीय समाज में प्रचलित वर्ण व्यवस्था से है। मौर्य कालीन वर्ण व्यवस्था की तुलना में में मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था अधिक जटिल हो गई थी। मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था से तात्पर्य शुंग, कण्व एवं सातवाहन काल में आर्य प्रजा में […] - [वर्ण व्यवस्था गुप्तकाल से मध्यकाल तक](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-e/): वैदिक काल में जिस वर्ण व्यवस्था ने आकार लेना आरम्भ किया वह उत्तर वैदिक काल में आते-आते पुष्ट हो गई। गुप्त काल तथा हर्षवर्द्धन काल में भी वर्ण-व्यवस्था और अधिक पुष्ट हुई। अब लोग एक वर्ण से दूसरे वर्ण में प्रवेश नहीं कर सकते थे। मौर्योत्तर  काल में चातुर्वण्य का जो रूप प्रचलित था, वह […] - [हिन्दुओं की जाति प्रथा](https://bharatkaitihas.com/caste-system-of-hindus-part-a/): सिडनी लो ने अपनी पुस्तक ए विजन ऑफ इण्डिया में लिखा है कि हिन्दुओं की जाति प्रथा अर्थात् जाति-संगठन वस्तुतः उनका क्लब, उनका व्यावसायिक संघ और उनका हितकारी तथा मानव-प्रेमी समाज है। हिन्दुओं की जाति-प्रथा के कारण भारत में कोई दरिद्रालय अथवा सुधारालय नहीं है, उसकी कोई आवश्यकता भी नहीं है। प्राचीन भारतीय आर्य ही, […] - [जाति प्रथा के गुणदोष](https://bharatkaitihas.com/caste-system-of-hindus-part-b/): जाति प्रथा के गुणदोष भारतीय सामाजिक व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुए। चूंकि जाति प्रथा का उदय वर्ण व्यवस्था के विस्तार से हुआ, इसलिए जाति व्यवस्था भी मूलतः श्रम-विभाजन पर आधारति है। भारतीय जाति प्रथा के गुणदोष पर विचार करने से पहले हमें भारतीय समाज की जटिलताओं एवं पूर्ववर्ती वर्ण-व्यवस्था को समझना होगा। जाति प्रथा के […] - [चाण्डाल एवं कायस्थ जातियों का जाति प्रथा में स्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): चाण्डाल एवं कायस्थ जातियाँ भारतीय जाति प्रथा में तो स्थान रखती हैं किंतु वैदिक आर्य व्यवस्था में इन दोनों जातियों का कोई उल्लेख नहीं मिलता। इससे स्पष्ट है कि ये दोनों जातियाँ वैदिक काल के बाद में अस्तित्व में आईं। भारतीय इतिहास में चाण्डाल जाति मनुस्मृति तथा धर्मसूत्रों के अनुसार चाण्डाल जाति की उत्पत्ति शूद्र […] - [प्राचीन विवाह प्रणालियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): प्राचीन विवाह प्रणालियाँ कई प्रकार की थीं और पूरे भारत में प्रचलित थीं। इनमें से कुछ विवाह प्रणालियों को श्रेयस्कर तो कुछ प्रणालियों को बुरा माना जाता था। प्राचीन विवाह प्रणालियाँ स्त्री-पुरुष के यौन सम्बन्धों को अनुशासन में बांधने तथा मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की उपलब्धि कराने के लिए उसे सुव्यवस्थित गृहस्थ […] - [भारत में परिवारिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/family-life-in-india-part-a/): भारतीय समाज एवं संस्कृति को समझने के लिए आवश्यक है कि भारत में परिवारिक जीवन को समझा जाए। इसे समझे बिना भारतीय समाज एवं संस्कृति तथा जीवन मूल्यों को समझना असंभव है। भारतीय सामाजिक संगठन का इतिहास पाँच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। जब विश्व के अधिकांश देश सभ्यता के उषाकाल में थे, […] - [भारतीय परिवार की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a4%be/): संसार में प्रत्येक समाज एवं संस्कृति में परिवार को महत्व दिया गया है किंतु भारतीय परिवार की विशेषताएँ अन्य संस्कृतियों के परिवारों से अलग हैं। भारतीय परिवार एक गतिशील संस्था है। समय-समय पर इसका स्वरूप बदलता रहा है। फिर भी भारतीय परिवार के संगठन का आधार ठोस है तथा इसकी मूलभूत विशेषताएँ आज भी देखी […] - [भारतीय परिवार के कर्त्तव्य](https://bharatkaitihas.com/family-life-in-india-part-b/): भारतीय परिवार के कर्त्तव्य विश्व की प्रत्येक संस्कृति में परिवार के प्रमुख कर्त्तव्यों में बच्चों का लालन-पालन, वृद्धों की सेवा, बीमारों की सुश्रुषा तथा प्रत्येक सदस्य को संरक्षण एवं सहारा देना शामिल होता है किंतु भारतीय परिवार कुछ विशिष्ट कार्यों को भी सम्पादित करता है। तीन ऋणों से उऋण होना, पंच महायज्ञ करना तथा सोलह […] - [संयुक्त परिवार प्रणाली](https://bharatkaitihas.com/family-life-in-india-part-c/): संयुक्त परिवार प्रणाली संयुक्त परिवार प्रणाली भारतीय जीवन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है। गृह्यसूत्रों में बड़े परिवारों का उल्लेख किया गया है। बौद्ध युग में भी परिवार बड़े हुआ करते थे। अनेक जातकों में ऐसे परिवारों का उल्लेख हुआ है जो अपने सदस्यों के सहयोग एवं सहायता से चलते थे। ऐसे कुटुम्बों का भी […] - [वैदिक काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-one/): वैदिक काल में नारी की स्थिति पुरुष के बराबर थी। उसे भोग की वस्तु न समझ कर परिवार की वृद्धि करने वाली, परिवार को पालने वाली तथा धर्म में साथ निभाने वाली माना जाता था। नारी की उपस्थिति के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान यथा धर्म-कर्म, दान-पुण्य, पितृशांति आदि कर्म सम्पन्न नहीं हो सकते थे। […] - [महाकाव्य काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): वैदिक काल में नारी की स्थिति की अपेक्षा महाकाव्य काल में नारी की स्थिति में कुछ परिवर्तन आ गया था। अब उन्हें पुरुष के संरक्षण में रहने के लिए कहा जाने लगा। ईस्वी पूर्व 800 से ईस्वी पूर्व 600 तक के कालखण्ड को महाकाव्य काल कहा जाता है। इस कालखण्ड में रामरायण तथा महाभारत नामक […] - [स्मृति काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-two/): स्मृति काल में नारी की स्थिति से आशय स्मृति ग्रंथों के रचना काल में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति से है। श्रुति अर्थात् (वेद, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद्) के बाद स्मृति ग्रंथ आते हैं। माना जाता है कि स्मृतियों की रचना ईस्वी पूर्व 1000 से ईस्वी पूर्व 500 के बीच के कालखण्ड में हुई। स्मृतियाँ बहुत […] - [पौराणिक काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): पौराणिक काल में नारी की स्थिति वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल के समान ही अत्यंत संतोषजनक थी। पौराणिक काल में नारी अपने विवाह आदि के सम्बन्ध में निर्णय स्वयं ले सकती थी। उसे पर्दा नहीं करना पड़ता था। पौराणिक काल पौराणिक काल उस कालखण्ड को कहते हैं जिसमें पुराणों की रचना हुई। पुराणों में धर्म […] - [पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति से आशय गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद के भारत में नारी की स्थिति से है। इस काल में नारी की स्थिति वैदिक काल, महाकाव्यकाल, स्मृतिकाल तथा गुप्तकाल की नारी से बिल्कुल अलग थी। भारत के इतिहास में हर्ष की मृत्यु अर्थात् ई.648 से लेकर मुसलमानों के भारत में शासन […] - [मध्य काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-three/): मध्य काल में नारी की स्थिति प्राचीन काल की अपेक्षा बहुत अधिक खराब हो गई। इसका सबसे बड़ा कारण भारत में इस्लाम का शासन स्थापित हो जाना था। विदेशी आक्रांताओं के भय से नारी के लिए सार्वजनिक स्थलों पर जाना पुरुष-संरक्षण के बिना असंभव हो गया। भारत के इतिहास में मध्य-काल विदेशी आक्रांताओं के भीषण […] - [ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-five/): ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति में परिवर्तन अंग्रेजी शिक्षा, अंग्रेजी कानूनों एवं हिन्दू समाज सुधारकों के प्रयासों से आया। परम्परा के नाम पर नारी पर होने वाले अत्याचारों को दूर करने में बहुत लम्बा समय लगा। ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति में सुधार अंग्रेजी शिक्षा का योगदान अंग्रेजी शिक्षा के कारण तथा अंग्रेजी […] - [आधुनिक काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-four/): यह सामान्य प्रचलित धारणा है कि आधुनिक काल में नारी की स्थिति पहले के समस्त कालों की अपेक्षा बहुत अच्छी है किंतु यह पूर्ण सत्य नहीं है। नारी की जितनी अच्छी स्थिति वैदिक काल में थी, उतनी अच्छी स्थिति आधुनिक काल में नहीं है। भारतीय इतिहास में आधुनिक काल का आशय मुगल शासन की समाप्ति […] - [संस्कार](https://bharatkaitihas.com/sacraments-of-hindus/): ब्रह्मसूत्र भाष्य में कहा गया है कि व्यक्ति में गुणों का आरोपण करने के लिए जो कर्म किया जाता हैं, उसे संस्कार कहते हैं। भारतीय संस्कृति का ताना बना संस्कारों से ही बुना गया है। भारतीय समाज में ‘संस्कारों’ की अत्यधिक महत्ता है किंतु वेदों में इस शब्द का एक बार भी उल्लेख नहीं हुआ है। […] - [पुरुषार्थ-चतुष्टय की अवधारणा](https://bharatkaitihas.com/purushaarth-chatushtay-part-a/): पुरुषार्थ-चतुष्टय की अवधारणा मनुष्य के जीवन को संतुलित, सुखी एवं दीर्घ जीवन जीने के लिए है। यह प्रत्येक मनुष्य को अपना कर्म करते हुए मोक्ष की तरफ ले जाती है। इन्हें पुरुषार्थ भी कहा जाता है। पुरुषार्थ-चतुष्टय के चार अंग हैं- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इनमें से प्रथम पुरषार्थ है- धर्म! धर्म के सम्बन्ध […] - [धर्म - पुरुषार्थ-चतुष्टय (1)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/): पुरुषार्थ में धर्म का स्थान सर्वोपरि है परन्तु यह किसी विशेष प्रकार के धार्मिक विश्वासों, सम्प्रदायों की मान्यताओं अथवा ईश्वर की विशिष्ट उपासना पद्धतियों तक ही सीमित नहीं है। पुरुषार्थ के अर्थ में इसका आशय अत्यंत व्यापक है। इसका आशय स्वयं को संयमित, मर्यादित, अनुशासित करने से है। इस प्रकार ‘धर्म’ व्यक्ति के चिंतन, आचरण […] - [अर्थ - पुरुषार्थ-चतुष्टय (2)](https://bharatkaitihas.com/purushaarth-chatushtay-part-b/): अर्थ रूपी पुरुषार्थ का आशय धन-सम्पत्ति एवं समृद्धि अर्जित करने से है। इसे दूसरा पुरुषार्थ माना गया है। धन के बिना समाज, परिवार एवं व्यक्ति का कार्य नहीं चल सकता किंतु धन में लालसा नहीं रखने को उच्च आदर्श माना जाता था। इस प्रकार भारतीय संस्कृति अर्थार्जन एवं निस्पृह जीवन के बीच संतुलन स्थापित करती […] - [काम - पुरुषार्थ-चतुष्टय (3)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae/): मनुष्य जीवन में ‘ काम ‘ को तीसरा पुरुषार्थ माना गया है। इस पुरुषार्थ का भी मनुष्य जीवन में शेष तीनों पुरुषार्थों के समान ही महत्त्व है। काम के दो स्वरूप हैं- (1.) कामना अर्थात् किसी भी वस्तु अथवा सुख को प्राप्त करने की इच्छा। (2.) यौन-सुख अथवा ऐन्द्रिक-इच्छा। पुरुषार्थ रूपी काम का प्रमुख आशय […] - [मोक्ष - पुरुषार्थ-चतुष्टय (4)](https://bharatkaitihas.com/purushaarth-chatushtay-part-c/): मानव-जीवन का अन्तिम लक्ष्य ‘मोक्ष’ है। धर्म, अर्थ और काम के सेवन का लक्ष्य भी मोक्ष है। वर्णाश्रम धर्म का लक्ष्य भी मोक्ष है। वेदों के अध्ययन-अध्यापन का अंतिम लक्ष्य भी मोक्ष है। श्रेष्ठतम एवं निकृष्टतम व्यक्ति भी अपने लिए अंत में मोक्ष की कामना करते हैं। इसलिए मोक्ष को चतुर्थ पुरुषार्थ में सम्मिलित किया […] - [आर्यों की आश्रम व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-one/): मनुष्य जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आर्यों की आश्रम व्यवस्था की स्थापना हुई तथा मनुष्य के लिए नियम एवं कर्त्तव्य निर्धारित किए गए।       मनुष्य जीवन बचपन, यौवन, प्रौढ़वय एवं वृद्धावस्था से गुजरता हुआ  पूर्णता को प्राप्त होता है। प्रत्येक वय में मनुष्य की आवश्यकताएं, क्षमताएं एवं रुचियाँ भिन्न होती हैं तथा इनके […] - [ब्रह्मचर्य आश्रम](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-two/): मनुष्य को बाल्यकाल में ही शिक्षा, ज्ञान एवं विवेक प्राप्त हो, इसके लिए ब्रह्मचर्य आश्रम की व्यवस्था की गई। ब्रह्मचर्य दो शब्दों, ‘ब्रह्म’ और ‘चर्य’ से मिलकर बना है। ब्रह्म का अर्थ है ‘ईश्वर’ और ‘चर्य’ का अर्थ है। ‘विचरण’। इन दोनों का सम्मिलित अर्थ है ‘ब्रह्म के मार्ग पर चलना’। ब्रह्मचर्य का व्यावहारिक अर्थ […] - [गृहस्थ आश्रम](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-three/): मनुस्मृति में लिखा है कि जिस प्रकार प्राणवायु का आश्रय प्राप्त कर समस्त जीव जीवित रहते हैं, उसी प्रकार गृहस्थ आश्रम का आश्रय प्राप्त करके समस्त आश्रम चलते हैं।  गृहस्थ आश्रम की श्रेष्ठता गृहस्थ आश्रम मनुष्य जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण था। कुछ धर्मशास्त्रकारों ने इस आश्रम का महत्त्व प्रतिपादित करने के लिए आश्रमों के […] - [वानप्रस्थ आश्रम](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-four/): लगभग पचास वर्ष की आुय में जब मनुष्य अपने गृहस्थ-कर्त्तव्यों और उत्तरदायित्वों को पूरा कर लेता था तब उसे सांसारिक मोह-माया त्यागकर वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करना होता था। आरण्यक ग्रंथों की रचना इन्हीं वानप्रस्थी तपस्वियों ने की थी, जो अरण्यों (जंगलों) में रहा करते थे। उपनिषद् युग में वानप्रस्थ जीवन का विस्तार हुआ। प्रौढ़ […] - [आश्रम व्यवस्था में स्त्री का स्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): आर्यों की आश्रम व्यवस्था में स्त्री का स्थान जानने के लिए वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, महाकाव्य काल, बुद्ध काल, शुंग काल तथा मध्य काल में स्त्रियों की बदलती हुई स्थिति को जानना आावश्यक है। पुरुषों एवं स्त्रियों के लिए आश्रम-व्यवस्था के प्रावधानों में अंतर था। ब्राह्मण पुरुषों के लिए चार आश्रमों का तथा क्षत्रिय […] - [संन्यास आश्रम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/): मनुष्य के जीवन का अन्तिम भाग, पचहत्तर वर्ष की आयु से सौ वर्ष अथवा इसके बाद तक संन्यास आश्रम के अन्तर्गत रखा गया था। वानप्रस्थ आश्रम के बाद सन्यास आश्रम प्रारम्भ होता था। समस्त पुरुषार्थों के अन्तिम लक्ष्य अर्थात् मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में यह अंतिम चरण था। विष्णु-पुराण में उसे ‘परिवाट्’ तथा धर्मसूत्रों […] - [भगवद्भक्ति की अवधारणा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be/): आर्यों के प्रथम ग्रंथ ऋग्वेद में ईश्वर की स्तुतियां लिखी गई थीं। इस प्रकार भगवद्भक्ति की अवधारणा का बीज वेदों में उपलब्ध था जो उपनिषद काल में हरे-भरे पौधे में बदलने लगा। बादरायण के ब्रह्मसूत्र ने भगवद्भक्ति की अवधारणा को भलीभांति आगे बढ़ाया। श्रीमद्भगवतगीता ने भक्ति रूपी पौधे को वैचारिक एवं दार्शनिक खाद-पानी देकर भगवद्भक्ति […] - [भक्ति आन्दोलन का पुनरुद्धार एवं उसके कारण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): भारत के मध्यकालीन इतिहास में भक्ति आन्दोलन का पुनरुद्धार एक बड़ी घटना थी जिसने न केवल भारत की संस्कृति का आमूल-चूल परिवर्तन किया अपितु भारत के इतिहास की धारा का रुख भी मोड़ दिया। भारतीय संस्कृति में भक्ति आंदोलन वस्तुतः एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है जो वेदों के काल से आरम्भ होकर आज तक […] - [मध्य-युगीन भक्ति सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6/): मध्य-युगीन भक्ति सम्प्रदाय भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों के प्रति भक्ति भावना रखने के निमित्त स्थापित हुए थे। इन समस्त सम्प्रदायों के मूल दर्शन में भगवान का भक्तवत्सल स्वरूप तथा दुष्ट हंता स्वरूप केन्द्रीय भाव में था, साथ ही भगवान को मोक्ष भक्तों के पापों को दूर करके उन्हें मोक्ष देने वाला भी प्रदर्शित किया […] - [भक्तिआन्दोलन की प्रमुख धाराएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): मध्यकालीन भक्तिआन्दोलन की प्रमुख धाराएँ देखने में भले ही अलग-अलग लगती हों किंतु वस्तुतः एक ही लक्ष्य को लेकर चलती हैं। वह लक्ष्य है भगवत्-प्राप्ति। श्रीमद्भगवत्गीता में मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बताये गये हैं- ज्ञान, कर्म एवं भक्ति। इनमें से ज्ञान-मार्ग सर्वाधिक कठिन और भक्ति-मार्ग सर्वाधिक सरल है। भक्ति अपने उपास्यदेव के प्रति भक्त […] - [भक्ति आन्दोलन का प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5/): हिन्दू जाति पर मध्यकालीन भक्ति आन्दोलन का प्रभाव बहुत व्यापक था। जब मुसलमान आक्रांता बलपूर्वक हिन्दुओं को मुसलमान बना रहे थे, तब हिन्दुओं को भक्त कवियों की रचनाओं ने सम्बल प्रदान किया। भक्ति-आन्दोलन का भारतीयों के धार्मिक, सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। यह प्रभाव इतना गहरा था कि जहाँ साधारण जनता मुस्लिम […] - [रामानुजाचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): रामानुजाचार्य भक्ति मार्गी सन्त थे। वे वैष्णव भक्ति के सर्वप्रमुख देव विष्णु एवं देवी की भक्ति को प्रमुखता देते थे। उन्होंने जो परम्परा स्थापित की, वह आज तक विद्यमान है। भक्ति मार्गी सन्त रामानुजाचार्य ग्यारहवीं शताब्दी ईस्वी से भारत में वैष्णव आचार्यों की एक नवीन परम्परा आरम्भ हुई। इस परम्परा में आलवार संत यमुनाचार्य के […] - [माधवाचार्य (मध्वाचार्य)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में माधवाचार्य (ई.1197-1278) वैष्णव परम्परा के बड़े आचार्य हुए। उनका जन्म ई.1197 में कन्नड़ जिले के उडिपी नगर के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। अपनी शारीरिक शक्ति के कारण वे भीम समझे जाते थे। उन्होंने युवावस्था में ही सन्यास ले लिया। वे भी रामानुज की भांति विष्णु के उपासक थे। […] - [निम्बार्काचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): रामानुज तथा माधवाचार्य के बाद निम्बार्क स्वामी अथवा निम्बार्काचार्य ने बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी में वैष्णव धर्म को नवीन गति दी। उनका जन्म मद्रास प्रान्त के वेलारी जिले में हुआ था। वे रामानुज के समकालीन थे। निम्बार्काचार्य दक्षिण भारत से उत्तर भारत में चले आए तथा उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उस […] - [संत नामदेव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5/): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के काल में महाराष्ट्र में हुए वैष्णव भक्तों में संत नामदेव का नाम अग्रणी है। उनका जन्म ई.1270 में महाराष्ट्र के नरसी बामनी गांव के एक दर्जी परिवार में हुआ। संत नामदेव के पिता का नाम दयाशेठ और माता का नाम गोणाई था। उनका विवाह बाल्यावस्था में ही कर दिया गया तथा […] - [रामानन्दाचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): रामानुजाचार्य की शिष्य परम्परा में 14वीं शताब्दी ईस्वी में रामानंद हुए जिन्हें रामानन्दाचार्य भी कहा जाता है। उन्हें वैष्णव परम्परा की धार्मिक क्रांति को दक्षिण से उत्तर भारत में ले आने का श्रेय प्राप्त है- ‘भक्ति द्राविड़ ऊपजी, लाए रामानन्द।’ कुछ विद्वानों के अनुसार रामानंद का जन्म ई.1299 में प्रयाग के एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार […] - [वल्लभाचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म ई.1479 में दक्षिण भारत के एक तैलंग ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता एक उच्चकोटि के विद्वान् थे और उन्होंने बनारस को अपना कार्यक्षेत्र बना रखा था। 13 वर्ष की आयु में ही वल्लभाचार्य समस्त धर्मग्रन्थों में पारंगत हो गए। उनके विचारों पर विष्णु स्वामी के भक्ति-सिद्धान्तों का विशेष प्रभाव पड़ा। […] - [चैतन्य महाप्रभु](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a5%81/): चैतन्य महाप्रभु महाप्रभु वल्लभाचार्य के समकालीन थे। चैतन्य का जन्म ई.1486 में कलकत्ता से 75 मील उत्तर में स्थित नवद्वीप अथवा नादिया ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उस समय मुसलमानों के आतंक से भयभीत वैष्णव-भक्त बंगाल से भागकर नवद्वीप में शरण ले रहे थे। इस कारण नवद्वीप में वैष्णव-भक्ति की धारा अबाध […] - [सूरदास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): संत शिरोमणि सूरदास का जन्म सोलहवीं सदी में हुआ। वे वल्लभाचार्य के प्रमुख शिष्य थे तथा भक्ति आंदोलन के महान संत थे किंतु वे उपदेशक अथवा सुधारक नहीं थे। सूरदास ने अपने गुरु वल्लभाचार्य के निर्देश पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया तथा भागवत् पुराण में वर्णित लीलाओं को आधार बनाते हुए […] - [संत कबीर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b0/): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की बहुत सारी धाराओं में संत कबीर का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। वे राम को निराकार ब्रह्म के रूप में देखते थे। मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की बहुत सारी धाराओं में संत कबीर का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। वे राम को निराकार ब्रह्म के रूप में देखते […] - [भक्त रैदास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): भक्त रैदास का जन्म काशी के एक चमार परिवार में हुआ। वे रामानन्द के बारह प्रमुख शिष्यों में से थे। वे विवाहित थे तथा जूते बनाकर अपनी जीविका चलाते थे। भक्त रैदास तीर्थयात्रा, जाति-भेद, उपवास आदि के विरोधी थे। हिन्दू तथा मुसलमानों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं मानते थे। वे निर्गुण भक्ति में विश्वास […] - [गुरु नानकदेव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5/): पंजाब के सन्तों में गुरु नानकदेव का नाम अग्रणी है। उनका जन्म ई.1469 में लाहैर से 50 किलोमीटर दूर तलवण्डी गांव के खत्री परिवार में हुआ। उनके पिता कालू ग्राम के पटवारी थे। नानक विवाहित थे तथा उनके दो पुत्र भी हुए किंतु बाद में साधु-संतों की संगत में रहने लगे। वे निर्गुण-निराकार ईश्वर की […] - [मीरा बाई](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%88/): मध्य-कालीन भक्तों में मीरा बाई का नाम अग्रणी है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने मीरा का जन्म वि.सं. 1573 (ई.1516) में माना है जबकि गौरीशंकर हीराचंद ओझा, हरविलास शारदा तथा गोपीनाथ शर्मा आदि इतिहासकारों ने मीरा बाई का जन्म वि.सं. 1555 (ई.1498) में माना है। मीरा मेड़ता के राठौड़ शासक राव दूदा के पुत्र रतनसिंह की […] - [तुलसीदास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): रामानंद की शिष्य मण्डली के प्रमुख सदस्य नरहरि आनंद के शिष्य तुलसीदास, अकबर के समकालीन संत हुए। उनका जन्म ई.1532 के लगभग हुआ। उन्होंने रामचरित मानस, गीतावली, कवितावली, विनय पत्रिका, एवं हनुमान बाहुक आदि ग्रंथों की रचना की। उन्होंने भारत की जनता को धनुर्धारी दशरथ-नदंन श्रीराम की भक्ति करने की प्रेरणा दी जो धरती, ब्राह्मण, […] - [संत तुकाराम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae/): संत तुकाराम का जन्म ई.1608 में महाराष्ट्र के देहू गांव में हुआ। वे अपने समय के महान् संत और कवि थे तथा तत्कालीन भारत में चले रहे भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। उन्हें ‘तुकोबा’ भी कहा जाता है। उनके जन्म आदि के विषय में विद्वानों में मतभेद हैं। तुकाराम को चैतन्य नामक साधु ने […] - [दादू दयाल](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2/): भारत के मध्यकालीन भक्ति आन्दोलन के संतों में दादू दयाल का नाम आदर से लिया जाता है। दादू दयाल का जन्म ई.1544 में गुजरात के अहमदाबाद नगर में हुआ तथा उनका अधिकांश जीवन राजस्थान में व्यतीत हुआ। संत कबीर एवं नानकदेव की भाँति दादू ने भी अन्धविश्वास, मूर्ति-पूजा, जाति-पाँति, तीर्थयात्रा, व्रत-उपवास आदि का विरोध किया […] - [मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c/): दसवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में आए मुस्लिम लेखक अलबिरूनी ने मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज पर टिप्पणी करते हुए लिखा है- हिन्दू अलग-अलग बैठकर भोजन खाते हैं और उनके भोजन का स्थान गोबर से लिपा चौका होता है। वे उच्छिष्ट का उपयोग नहीं करते हैं और जिन बर्तनों में खाते हैं, यदि वे मिट्टी के होते […] - [मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c/): भारत में मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज विदेशी आक्रांताओं के साथ आए थे। जिन हिन्दुओं को बलपूर्वक या लालच से या स्वेच्छा से मुसलमान बना लिया गया वे भी मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज मानने लगे। मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज मुस्लिम परिवार में पुत्र का जन्म हालांकि मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज हिन्दुओं से अलग थे किंतु मुसलमानों में भी हिन्दुओं की […] - [मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be/): वैदिक आर्यों के काल से ही भारत में सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार पर ध्यान दिया गया। मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार भी वैदिक काल की तरह उन्नत था। वैदिक काल की तरह मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार में अब भी अतिथि सत्कार, बड़ों का अभिवादन, भूखे को भोजन, जीवदया, अहिंसा आदि कर्तव्य सम्मिलित थे। फिर […] - [मध्यकालीन वेशभूषा एवं आभूषण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b7%e0%a4%be/): मध्यकालीन वेशभूषा एवं आभूषण लोगों की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक हैसियत के अनुसार होते थे। विभिन्न समुदायों के लोग प्रायः सूती वस्त्र पहनते थे। मध्यकालीन वेशभूषा एवं आभूषण वर्तमान काल की अपेक्षा काफी अलग थे। निर्धन लोगों के पास पूरा तन ढकने के लिए भी कपड़े नहीं होते थे। मध्यमवर्गीय परिवारों के वस्त्राभूषण भी अत्यंत […] - [मध्यकालीन समाज का भोजन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8/): मध्यकालीन समाज का भोजन आधुनिक समाज के भोजन से कई अर्थों में अलग था। अधिकांश लोग घर में बने हुए भोजन एवं व्यंजन उपयोग में लाते थे तथा शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता था। मध्यकालीन समाज का भोजन हिन्दुओं एवं मुसलमानों में मांस के अतिरिक्त एक जैसा ही था। हिन्दुओं के भोजन में विभिन्न […] - [मध्यकालीन आवास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8/): भारत में मध्यकालीन आवास धनी, मध्यम एवं निर्धन वर्ग के लिए अलग-अलग प्रकार के थे। मध्यकालीन आवास के भीतर की सुख-सुविधा भी गृहस्वामी की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती थी। मध्य-कालीन समाज में आज की ही तरह अमीरों के घर बड़े, पक्के एवं महंगे होते थे जबकि गरीबों के घर छोटे, कच्चे एवं सस्ते होते […] - [मध्यकाल में मनोरजंन के साधन](https://bharatkaitihas.com/middle-class-indian-society-social-institutions-and-customs-part-three/): मध्यकाल में मनोरजंन के अनेक साधन उपलब्ध थे। अमीरों एवं गरीबों के खेल एवं मनोरंजन के साधन अलग-अलग थे। इसी प्रकार नगरों एवं गांवों के मनोरंजन के साधन अलग-अलग थे। गरीब लोग प्रायः कबड्डी, कुश्ती, गिल्ली डण्डा, गेंद आदि खेल खेलते थे। मध्यकाल में मनोरजंन के लिए शाही परिवारों के सदस्य, धनी लोग एवं मध्यमवर्गीय […] - [मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0/): मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार और वर्तमान में मनाए जाने वाले हिन्दू त्यौहारों में विशेष अंतर नहीं है किंतु मध्यकालीन हिन्दू समाज में त्यौहारों की संख्या अधिक थी। आज का हिन्दू समाज बहुत से त्यौहारों को मनाना भूल चुका है। मध्य-कालीन समाज में त्यौहार, उत्सव और मेले हिन्दू और मुसलमान अलग-अलग त्यौहार मनाते थे। ये त्यौहार पूरे […] - [एक लाख हिन्दुओं की हत्या कर दी तैमूर लंग ने (148)](https://bharatkaitihas.com/timur-lung-killed-one-lakh-hindus-outside-delhi/): तैमूर लंग ने एक लाख हिन्दुओं को बंदी बना लिया था। इतने सारे बंदियों के रहते वह दिल्ली पर आक्रमण नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि एक लाख हिन्दुओं की हत्या कर दी जाए। तैमूर लंग की सेना ने भटनेर के किले पर अधिकार करके दस हजार हिन्दुओं को […] - [दिल्ली का कत्लेआम करवाया तैमूर लंग ने (149)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%86%e0%a4%ae/): तैमूर लंग की सेना ने दिल्ली का कत्लेआम करके मानवता के माथे पर कालिख पोत दी। कोई भी मनोवैज्ञानिक इस गुत्थी का हल नहीं बता सकता कि कैसे कोई मनुष्य मजहब के नाम पर किसी दूसरे धार्मिक विश्वास वाले लोगों को पशुओं की तरह काटकर खुदा का शुक्रिया अदा कर सकता है! तैमूर लंग की […] - [शिवालिक क्षेत्र पर आक्रमण करके तैमूर ने लाखों हिन्दुओं को मार दिया (150)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/): दिल्ली में कत्लेआम करने के बाद तैमूर लंग ने शिवालिक क्षेत्र पर आक्रमण किया। पहाड़ों के हिन्दुओं ने तैमूर की सेना का दृढ़ता से मुकाबला किया किंतु तैमूर की बर्बर सेना ने लाखों हिन्दुओं को मार दिया। तैमूर लंग की सेना को दिल्ली से लेकर मेरठ, तुगलुक नगर, सहारनपुर एवं हरिद्वार आदि अनेक स्थानों पर […] - [तैमूर लंग का विध्वंस (151)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b8/): तैमूर लंग का विध्वंस भारतीयों का मनोबल तोड़ गया। बहुत दिनों तक लोग एक दूसरे से आँख नहीं मिलाते थे! उनकी आंखों के सामने उनकी माता, बहिनों एवं पुत्रियों का बलात्कार हुआ था। उनके बच्चों को आग में झौंक दिया गया था। उनके सगे-सम्बन्धी तैमूर की सेना द्वारा गुलाम बनाकर मध्यएशिया ले जाए गए थे। […] - [खिज्र खाँ दिल्ली पर शासन करने लगा (152)](https://bharatkaitihas.com/khizr-khan-began-to-rule-delhi-on-behalf-of-samarkand/): तैमूर लंग द्वारा पंजाब के सूबेदार के रूप में नियुक्त खिज्र खाँ सैयद ने ई.1414 में दिल्ली पर अधिकार करके दिल्ली में एक नए शासक वंश की स्थापना की जिसे भारत के इतिहास में सैयद वंश कहा जाता है ई.1398-99 में किए गए तैमूर लंग के भारत अभियान के भारतीय समाज पर गहरे सामाजिक, आर्थिक, […] - [सैयद वंश दिल्ली पर शासन नहीं कर सका (153)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%a6-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6/): तैमूर लंग ने खिज्र खाँ सैयद को मुल्तान तथा दीपालपुर का गवर्नर नियुक्त किया था। ई.1414 में खिज्र खाँ ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया तथा स्वयं को समरकंद का प्रतिनिधि घोषित करके दिल्ली का सुल्तान बन गया। खिज्र खाँ ने दिल्ली में सैयद वंश की स्थापना की। ई.1421 में खिज्र खाँ बीमार पड़ा और […] - [बहलोल लोदी दिल्ली का सुल्तान बन गया (154)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80/): ई.1451 में दिल्ली का सुल्तान अल्लाउद्दीन आलमशाह सैयद दिल्ली छोड़कर बदायूं चला गया तथा लाहौर एवं सरहिंद के सूबेदार बहलोल लोदी ने दिल्ली के तख्त पर अधिकार कर लिया। इसके साथ ही दिल्ली से सैयद वंश की सदा के लिए विदाई हो गई तथा दुर्दांत लोदी दिल्ली के राजनीतिक मंच पर भूमिका निभाने आ गए। […] - [सिकंदर लोदी भारत का सुल्तान बन गया (155)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80/): ई.1489 में बहलोल लोदी की मृत्यु हो गई तथा उसका पुत्र निजाम खाँ, सिकंदर लोदी के नाम से दिल्ली का सुल्तान हुआ। वह हेमा नामक सुनार स्त्री के पेट से उत्पन्न हुआ था। सिकंदर का चेहरा बहुत सुंदर था और वह अपने चेहरे की सुन्दरता बनाये रखने के लिए दाढ़ी नहीं रखता था। अब्दुल्ला ने […] - [सिकंदर लोदी का शासन (156)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बनने के बाद सिकंदर लोदी को अगले तीन साल अपने विरोधियों को नष्ट करने में लगाने पड़े। इसके बाद उसने अफगान अमीरों को अनुशासन में बांधने का प्रयास किया। सिकंदर लोदी का शासन प्रबंधन तथा अमीरों पर नियंत्रण ये एक-साथ चलते रहे। अफगान अमीर अपनी उच्छृंखल प्रवृत्ति के कारण किसी का […] - [सिकंदर लोदी की कट्टरता (157)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be/): सिकंदर लोदी की कट्टरता उसे फीरोज तुगलक तथा औरंगजेब जैसे उन्मादी शासकों की श्रेणी में लाकर खड़ा करती है। वह इस्लाम के विशुद्ध स्वरूप में विश्वास करता था। उसने मुस्लिम औरतों को पीरों की मजारों पर जाने से रोक दिया! उसने शिया मुसलमानों को ‘ताजिया’ निकालने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया। सिकंदर लोदी ने अफगान […] - [सिकंदर लोदी के अत्याचार (158)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/): मजहबी कट्टरता से ग्रस्त सिकंदर लोदी के अत्याचार हिन्दुओं के लिए नई मुसीबतें लेकर आए। उसने हिन्दुओं की तीर्थयात्रा पर रोक लगा दी। उन्हें मंदिरों में जाने से रोक दिया तथा मंदिरों की मूर्तियां तुड़वाकर कसाइयों को दे दीं। उत्तर भारत की जनता सिकंदर लोदी के अत्याचारों से त्राहि-त्राहि करने लगी। सिकंदर लोदी ने अपनी […] - [ग्वालियर के तोमर और सिकंदर लोदी (159)](https://bharatkaitihas.com/sikandar-lodi-declared-jihad-against-the-tomars-of-gwalior/): सिकंदर लोदी के शासनकाल मेें ग्वालियर पर तोमर राजपूतों का शासन था। मुहम्मद गौरी के भारत आगमन के समय दिल्ली पर इन्हीं तोमरों का शासन था किंतु जब दिल्ली से तोमरों का राज्य हट गया तो वे ग्वालियर आ गए। सिकंदर के काल में ग्वालियर के तोमर बड़े शक्तिशाली हुआ करते थे। सिकन्दर लोदी ने […] - [सिकंदर लोदी का जेहाद (160)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6/): सिकंदर लोदी की बड़ी इच्छा थी कि वह मेवाड़ के गुहिल शासक महाराणा सांगा, ग्वालियर के तोमर राजा मानसिंह तथा रणथंभौर के हाड़ा चौहान को समाप्त करके सम्पूर्ण मध्यभारत पर अधिकार कर ले। जब वह इस कार्य में सफल नहीं हुआ तो उसने हिन्दू राजाओं के विरुद्ध जेहाद घोषित कर दिया। हिन्दू राजाओं ने सिकंदर […] - [इब्राहीम लोदी ने भाई जलाल खाँ की हत्या करवा दी (161)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80/): इस समय तक सुल्तान इब्राहीम की सेनाएं आगरा से ग्वालियर के लिए कूच कर चुकी थीं। इस कारण इब्राहीम की स्थिति दो पाटों के बीच फंसे घुन जैसी हो गई। इब्राहीम लोदी को अपनी गलती का अहसास हो गया कि उसने जौनपुर को स्वतन्त्र करके बड़ी भूल की है। 21 नवम्बर 1517 को दिल्ली के […] - [आजम हुमायूं शेरवानी को इब्राहीम लोदी ने छल से पकड़ लिया (162)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): सुल्तान इब्राहीम लोदी ने अपने पिता सिकंदर लोदी का सपना पूरा करने के लिए आजम हुमायूं शेरवानी नामक एक शक्तिशाली अमीर को ग्वालियर पर हमला करने भेजा। आजम हुमायूं शेरवानी के पास अपने पचास हजार घुड़सवार थे। सुल्तान इब्राहीम लोदी ने उसे 30 हजार घुड़सवार तथा 300 हाथीसवार योद्धा भी प्रदान किए। आजम हुमायूं शेरवानी […] - [ग्वालियर दुर्ग पर अधिकार कर लिया इब्राहीम लोदी ने (163)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): राजा विक्रमादित्य तोमर समझ चुका था कि मनुष्यों एवं पशुओं को खोने के बाद अब उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं बचा था जिसके सहारे वह इस युद्ध को जीत सके। इसलिए राजा ने इब्राहीम लोदी के पास संधि का प्रस्ताव भिजवाया। इब्राहीम लोदी ने ग्वालियर दुर्ग पर अधिकार कर लिया! दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम […] - [विक्रमादित्य तोमर के पास था कोहिनूर हीरा (164)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b0/): दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी ने ग्वालियर दुर्ग पर विजय प्राप्त करके राजा विक्रमादित्य तोमर को शम्साबाद का जागीरदार बनाया किंतु विक्रमादित्य शम्साबाद की बजाय अपने परिवार को लेकर आगरा के किले में रहने लगा। हरिहर निवास द्विवेदी ने लिखा है कि धुरमंगद चम्बल की अपनी पुरानी गढ़ियों में चले गए और विक्रमादित्य अपने छोटे […] - [महाराणा सांगा से पराजय (165)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%af/): ग्वालियर के तोमरों को हराकर इब्राहीम लोदी ने मध्य भारत पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली किंतु उसके बाद इब्राहीम लोदी की चित्तौड़ के शासक महाराणा सांगा से पराजय हो गई। दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी ने ग्वालियर के दुर्ग पर विजय प्राप्त करके राजा विक्रमादित्य तोमर को शम्साबाद का जागीरदार बना दिया किंतु विक्रमादित्य […] - [तुर्की अमीरों की हत्या करवाता था इब्राहीम लोदी (166)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): बहुत से तुर्की अमीर सुल्तान इब्राहीम लोदी के साथ एक ही दरी पर बैठते थे और सुल्तान के सामने अपने हाथ अपनी छाती पर कैंची की तरह नहीं रखते थे। इस कारण सुल्तान इब्राहीम लोदी तुर्की अमीरों की हत्या करवा देता था। यदि कोई तुर्की अमीर गद्दारी करने का प्रयास करता था, तो उसके प्राण […] - [तुर्की अमीरों की बगावत को कुचल दिया इब्राहीम लोदी ने (167)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a4/): सुल्तान इब्राहीम लोदी ने अमीरों पर अंकुश रखने के लिए नियम एवं कायदे लागू किए जिसके कारण अनेक अमीर सुल्तान के विरोधी हो गए और अनेक तुर्की अमीरों ने बगावत कर दी। दिल्ली सल्तानत के सुल्तान के विरुद्ध तुर्की अमीरों की बगावत कोई नई बात नहीं थी। यह तो कुतुबुद्दीन एबक के समय से ही […] - [इब्राहीम लोदी की हत्या (168)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): भारत में ऐसा कौन था जो इब्राहीम लोदी की हत्या नहीं करना चाहता था किंतु भारत के किसी भी आदमी के लिए ऐसा करना संभव नहीं हुआ। अंत में यह कार्य समरकंद से आए मंगोल आक्रांता जहीरुद्दीन बाबर ने किया। उसकी सेना ने इब्राहीम लोदी का सिर काट दिया। दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी ने […] - [काश्मीर का मुसलमानीकरण (169)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): काश्मीर का मुसलमानीकरण करने में जितना हाथ मुस्लिम आक्रांताओं का रहा, उससे भी अधिक हाथ सूफियों का रहा। सबसे पहले सूफियों ने काश्मीर में जाकर मुसलमानों की जनसंख्या का निर्माण करना आरम्भ किया। यद्यपि सुल्तान इब्राहीम लोदी की मृत्यु के साथ ही दिल्ली सल्तनत तथा उसका इतिहास समाप्त हो जाते हैं तथापि उस काल में […] - [जौनपुर तथा खानदेश दिल्ली सल्तनत से अलग हो गए (170)](https://bharatkaitihas.com/jaunpur-and-khandesh-split-from-delhi-sultanate/): जौनपुर तथा खानदेश दिल्ली सल्तनत के काल में प्रांतीय मुस्लिम राज्य थे। जौनपुर तथा खानपुर दोनों के शासक दिल्ली के सुल्तान द्वारा नियुक्त किए जाते थे। जौनपुर जौनपुर उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के तट पर स्थित है। कहा जाता है कि इस नगर की स्थापना दिल्ली के सुल्तान फीरोजशाह तुगलक ने ई.1359-60 में की […] - [दिल्ली सल्तनत में बंगाल की स्थिति (171)](https://bharatkaitihas.com/delhi-could-not-keep-bengal-under-its-control/): दिल्ली सल्तनत में बंगाल की स्थिति कभी स्वतंत्र, कभी अर्द्धस्वतंत्र तो कभी पूर्णतः अधीनस्थ राज्य की रहती थी। दिल्ली से दूर होने के कारण दिल्ली के सुल्तान अधिक समय के लिए बंगाल को अपने अधीन नहीं रख पाते थे। भारत के अन्य प्रांतों की तरह बंगाल पर भी अनादि काल से हिन्दू राजाओं का शासन […] - [बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार हो गया (172)](https://bharatkaitihas.com/muslim-population-spread-in-bengal-under-the-umbrella-of-bengali-sultans/): बंगाल में अनादि काल से हिन्दू संस्कृति फल-फूल रही थी किंतु दिल्ली सल्तनत के काल में बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार हो गया तथा बंगाल की जनसंख्या को तलवार के बल पर इस्लाम के अधीन ले जाया गया। बलबन ने बंगाल के सुल्तान तुगरिल खाँ को मारकर अपने पुत्र बुगरा खाँ को बंगाल का […] - [गुजरात में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार (173)](https://bharatkaitihas.com/muslim-population-spread-in-gujarat-when-delhi-was-liberated-from-the-sultanate/): भारत के अन्य प्रदेशों की तरह गुजरात में भी अनादि काल से हिन्दू सभ्यता एवं संस्कृति विकसित थी किंतु जब दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों ने गुजरात को अपने अधीन किया तब गुजरात में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार होने लगा। पाठकों को स्मरण होगा कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ के मन्दिर को लूटकर अथाह सम्पत्ति प्राप्त […] - [महमूद बेगड़ा जहर खाकर जिंदा रहता था (174)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be/): गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा को डर था कि उसे छल से विष देकर मारा जा सकता है, इसलिए वह स्वयं ही प्रतिदिन थोड़ा सा जहर खाता था ताकि उसका शरीर जहर सेवन का आदी हो जाए। तैमूर लंग के आक्रमण के बाद दिल्ली सल्तन का शिकंजा ढीला पड़ गया तथा गुजरात, मालवा एवं नागौर […] - [मालवा में मुस्लिम जनसंख्या](https://bharatkaitihas.com/goris-and-khiljis-spread-muslim-population-in-malwa/): ई.1531 में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने मालवा को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया। - [बुढ़िया का चश्मा (हिन्दी लघु नाटक)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be/): प्रस्तावना – बुढ़िया का चश्मा बुढ़िया का चश्मा डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित भारतीय राजनीति तथा भारत में फैले भ्रष्टाचार पर एक करारा व्यंग्य है जो लघुनाटक के रूप में लिखा गया है। हिन्दी साहित्य में व्यंग्य नाटक लिखे जाने की परम्परा बहुत पुरानी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों की आकांक्षाएं जिस प्रकार बढ़ी […] - [चन्द्रमा](https://bharatkaitihas.com/deity-moon-killed-devguru-jupiters-wife/): चन्द्रमा ने देवगुरु बृहस्पति की पत्नी का हरण कर लिया! भगवान श्रीहरि विष्णु के नाभि-सरोवर के कमल से प्रजापति ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई। विष्णु पुराण तथा हरिवंश पुराण सहित अनेक ग्रंथों में आई एक कथा के अनुसार ब्रह्मा के पुत्र हुए अत्रि और अत्रि के पुत्र हुए चंद्रमा। उन्हीं अत्रि के नेत्रों से अमृतमय चन्द्रमा […] - [राजा इल](https://bharatkaitihas.com/king-il-married-budh-muni-as-ila/): राजा इल ने इला बनकर बुध मुनि से विवाह किया! वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड में राजा इल की अद्भुत एवं विस्मयकारी कथा मिलती है। इस कथा का उल्लेख अन्य पुराणों में भी किया गया है। इस कथा के अनुसार प्रजापति कर्दम के पुत्र इल बाल्हिक देश के राजा थे। वे बड़े धर्मात्मा नरेश थे तथा […] - [राजा इल को पुरुषत्व (4)](https://bharatkaitihas.com/king-il-was-blessed-with-masculinity-by-lord-shiva/): जब देवी पार्वती के श्राप से राजा इल स्त्री बन गया तो वह बड़ा दुखी हुआ। इस पर ऋषियों को राजा इल पर बड़ी दया आई और उन्होंने भगवान शिव से राजा इल को पुरुषत्व दिलवाया। जब समस्त किन्नरियां पर्वत के किनारे चली गईं तो मुनि के रूप में रह रहे राजा बुध ने इला […] - [उर्वशी](https://bharatkaitihas.com/bharat-muni-cursed-urvashi-and-sent-her-to-earth/): भरत मुनि ने उर्वशी को श्राप देकर धरती पर भेज दिया! श्रीहरिवंश पुराण सहित अनेक पुराणों में आए एक कथानक के अनुसार बुध एवं इला का पुत्र पुरुरवा हुआ। यही पुरुरवा चंद्रवंशी राजाओं का मूल पुरुष था। राजा पुरुरवा और उर्वशी का उल्लेख वेदों में भी मिलता है। वही पुरुरवा और उर्वशी पुराणों की कथाओं […] - [राजा नहुष ने इन्द्र बनकर शची को प्राप्त करना चाहा (6)](https://bharatkaitihas.com/raja-nahusha-wanted-to-get-shachi/): राजा नहुष ने इंद्राणी की यह बात स्वीकार कर ली तथा इंद्राणी पुनः देवगुरु बृहस्पति के घर आ गई। इन्द्राणी की बात सुनकर समस्त देवता एवं ऋषि इन्द्र के बारे में विचार करने लगे। चंद्रवंशी राजा पुरुरवा को स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी से आयु, वनायु, क्षतायु, दृढ़ायु, धीमंत और अमावसु नामक कई पुत्र प्राप्त हुए। […] - [नहुष को श्राप देकर महर्षि अगस्त्य ने इन्द्र को पुनः देवराज बना दिया (7)](https://bharatkaitihas.com/maharishi-agatsya-destroyed-nahush/): राजा नहुष अपने पुण्यकर्मों के संचय के कारण इंद्रलोक का स्वामी बन गया किंतु जब उसने अनाचार करके देवताओं को भयभीत कर दिया, तब महर्षि अगस्त्य ने नहुष को श्राप देकर अजगर बना दिया। भगवान विष्णु द्वारा इंद्र की पाप-मुक्ति का उपाय बताने पर देवताओं एवं ऋषियों ने इंद्र को तीनों लोकों में ढूंढना आरम्भ […] - [रजि पुत्रों की कथा (8) !](https://bharatkaitihas.com/devguru-brihaspati-and-sons-of-raji/): रजि पुत्रों की कथा के अनुसार देवगुरु बृहस्पति ने रजि पुत्रों को नास्तिक बनाकर स्वर्ग से बाहर निकलवा दिया। इससे देवता पुनः सुखी हो गए। हमने पूर्व की कड़ियों में चर्चा की थी कि उर्वशी एवं पुरुरवा के ज्येष्ठ पुत्र आयु ने राहु की कन्या प्रभा से विवाह किया था जिससे आयु को नहुष, क्षत्रवृद्ध, […] - [राजा धन्वंतरि ने मनुष्यों के कल्याण के लिए काशीराज के यहाँ जन्म लिया (9)](https://bharatkaitihas.com/dhanvantari-was-born-to-kashiraj-for-welfare-of-human-beings/): राजा धन्वंतरि ने मुनि भरद्वाज से आयुर्वेद तथा चिकित्साकर्म का ज्ञान प्राप्त किया तथा उसे आठ भागों में विभक्त कर दिया। फिर उन विभागों की विवेचना की। इसके पश्चात् भगवान् धन्वंतरि ने बहुत से शिष्यों को उस अष्टांग युक्त आयुर्वेद की शिक्षा प्रदान की। उर्वशी एवं पुरुरवा के ज्येष्ठ पुत्र आयु को नहुष, क्षत्रवृद्ध, रम्भ, […] - [कच ने शुक्राचार्य की पुत्री का प्रणय निवेदन स्वीकार नहीं किया (10)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%9a/): महाराज! मैं महर्षि अङ्गिरा का पौत्र और देवगुरु बृहस्पति का पुत्र कच हूँ। मैं आपकी शरण में रहकर, एक हज़ार वर्षों तक, आपकी सेवा करना चाहता हूँ। आप कृपया मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार कर लीजिए। महाभारत एवं अनेक पुराणों में में नहुष एवं विरजा के पुत्र राजा ययाति की कथा आई है जिसमें […] - [देवयानी ने दैत्यों के साथ रहने से मना कर दिया (11)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): पिछली कथा में हमने दैत्यगुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी तथा दैत्यराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा की चर्चा की थी। विभिन्न पुराणों में आए आख्यानों  के अनुसार वे दोनों ही अत्यंत सुंदर थीं। एक दिन देवयानी तथा शर्मिष्ठा अपनी सखियों के साथ उद्यान में घूम रही थीं। कुछ समय पश्चात् दोनों कन्याएं अपनी सखियों को साथ […] - [ययाति को श्राप (12)](https://bharatkaitihas.com/shukracharya-cursed-yayati-to-become-old/): दैत्यगुरु शुक्राचार्य अपनी पुत्री शर्मिष्ठा के मोह में अंधा था। उसन महाराज ययाति को श्राप देकर बूढ़ा बना दिया जिससे ययाति की इच्छाएं अपूर्ण रह गईं। ययाति को श्राप की कथा अनेक पुराणें में मिलती है। देवयानी द्वारा दैत्यराज वृषपर्वा के राज्य का त्याग कर दिए जाने पर दैत्यगुरु शुक्राचार्य दैत्यराज वृषपर्वा के पास आए […] - [राजा ययाति एक हजार वर्ष तक अपने पुत्र का यौवन भोगता रहा (13)](https://bharatkaitihas.com/raja-yayati-continued-to-enjoy-his-sons-youth-for-a-thousand-years/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि देवयानी के शिकायत करने पर दैत्यगुरु शुक्राचार्य के शाप से राजा ययाति बूढ़ा हो गया। राजा ययाति ने भयभीत होकर कहा- ‘हे दैत्यगुरु! आपकी पुत्री के साथ विषय-भोग करते हुए अभी मेरी तृप्ति नहीं हुई है। इस शाप के कारण तो आपकी पुत्री का भी अहित है। […] - [महाराज ययाति इन्द्र के श्राप से स्वर्ग से धरती पर गिर पड़ा (14)](https://bharatkaitihas.com/raja-yayati-fell-down-from-heaven-to-the-earth-due-to-curse-of-indra/): नहुष की तरह नहुष का पुत्र महाराज ययाति भी अपने सद्कर्मों के कारण स्वर्ग में निवास करता था किंतु जब उसके सद्कर्म समाप्त हो गए तो महाराज इन्द्र के श्राप से स्वर्ग से धरती पर गिर पड़ा! पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि भोग-विलासों की निरर्थकाता समझकर राजा ययाति ने अपने पुत्र पुरु […] - [ययाति के पूर्वज ऋषियों के पुण्यकर्म (15)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%9c/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि स्वर्ग से गिरते हुए राजा ययाति को ययाति के पूर्वज अष्टक ऋषि ने आकाश में ही रोककर उससे इस प्रकार गिरने का कारण पूछा। जब अष्टक को लगा कि राजा ययाति सामान्य व्यक्ति नहीं है, वह ज्ञान और अनुभव की दृष्टि से अत्यंत परिपक्व है तो अष्टक […] - [हैहयराज कार्तवीर्य सहस्रार्जुन यदुवंश में उत्पन्न हुआ था (16)](https://bharatkaitihas.com/hayajaraja-kartavirya-sahasrarjuna-was-born-in-yaduvansh/): रुद्रश्रेण्य के वंश में आगे चलकर हैहयराज कार्तवीर्य सहस्रार्जुन का जन्म हुआ। उसने दस हजार वर्षों तक भगवान दत्तात्रेय की आराधना करके चार वरदान प्राप्त किए। इनमें से पहला वरदान यह था कि मेरी एक हजार भुजाएं हों। दूसरा वरदान यह था कि जो लोग सत्पुरुषों के साथ अधर्म करते हैं, मैं उनका निवारण करूं। […] - [ययाति का श्राप (17)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa/): विभिन्न पुराणों में ययाति का श्राप बहुलिखित आख्यान है। ययाति का श्राप बताता है कि आज की हिन्दू संस्कृति में तथा ययाति कालीन आर्य संस्कृति में बहुत अधिक अंतर नहीं था। पुत्रों पर पिता का अधिकार आज की ही तरह सिद्ध था। पिछली कड़ी में हमने चंद्रवंशी राजा ययाति के पुत्र यदु से चले वंशों […] - [ययाति की पुत्री माधवी महर्षि गालव को सौंप दी गई (18)](https://bharatkaitihas.com/raja-yayati-gave-his-daughter-madhvi-to-galwa-rishii/): चन्द्रवंशी राजा ययाति के पांच पुत्रों का उल्लेख हम इससे पूर्व की कथाओं में कर आए हैं। इस कथा में हम ययाति की पुत्री माधवी की चर्चा करेंगे। जहाँ तक मेरी जानकारी है किसी भी प्राचीन पुराण में माधवी का उल्लेख नहीं हुआ है। माधवी की कथा धूर्त वामवंथी लेखकों द्वारा गढ़ी गई है ताकि […] - [गालव ऋषि की पालित कन्या माधवी ने चार पुरुषों से चार पुत्र जन्मे (19)](https://bharatkaitihas.com/madhvi-gave-birth-to-four-sons/): हमने पिछली कथा में चर्चा की थी कि राजा ययाति ने अपनी पुत्री माधवी गालव ऋषि को सौंप दी ताकि गालव मुनि माधवी की सहायता से आठ सौ श्वेत अश्वों का प्रबंध कर सकें जिनका दायां कान काला हो। गालव ऋषि ने माधवी को प्राप्त करके ययाति से कहा- ‘ठीक है, राजन्! मेरा मनोरथ पूर्ण […] - [माधवी का आख्यान व्यभिचारिणी स्त्री की कथा नहीं है (20)](https://bharatkaitihas.com/the-story-of-madhavi-is-not-a-story-of-an-adulteress-woman/): माधवी का आख्यान व्यभिचारिणी स्त्री की कथा नहीं है! वेदों, उपनिषदों, ब्राह्मणों, आरण्यकों एवं पुराणों सहित किसी भी प्राीचन ग्रंथ में माधवी की कथा का उल्लेख नहीं है। पुराणों में ययाति के पांच पुत्रों- यदु, तुर्वसु, अनु, द्रह्यु और पुरू का ही उल्लेख है। ये नाम वेदों में भी आए हैं किंतु माधवी का उल्लेख […] - [शकुंतला विश्वामित्र एवं मेनका की पुत्री थी (21)](https://bharatkaitihas.com/shakuntala-was-daughter-of-menka-and-vishwamitra/): शकुंतला विश्वामित्र एवं मेनका की पुत्री थी। इस प्रकार शकुंतला एक ऋषि एवं एक अप्सरा की संतान थी। शकुंतला का पालन-पोषण महर्षि कण्व ने किया था। चंद्रवंशी राजाओं की कथाओं के क्रम में महर्षि अत्रि के कुल में उत्पन्न सातवें चंद्रवंशी राजा ययाति तथा उसके वंशजों की चर्चा कर रहे हैं। राजा ययाति ने अपने […] - [राजा भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा (22)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a4%a4/): पिछली कड़ी में हमने चंद्रवंशियों के पुरु एवं तुर्वुसु नामक दो राजकुलों के मिलने से बने पौरव कुल के प्रथम राजा दुष्यंत और स्वर्ग की अप्सरा मेनका की पुत्री शकुन्तला के गंधर्व विवाह से उत्पन्न पुत्र राजा भरत की चर्चा की थी। मेनका के दौहित्र एवं शकुंतला के पुत्र राजा भरत की गणना महाभारत में […] - [सूर्य की पुत्री ताप्ती के लिए राजा संवरण ने घनघोर तपस्या की (23)](https://bharatkaitihas.com/raja-sanvar-performed-austerity-for-tapti-the-beautiful-daughter-of-sun/): पुराणों में कथा मिलती है कि भगवान सूर्य की पुत्री ताप्ती बहुत सुंदर थी। उसे पाने के लिए चंद्रवंशी राजा संवरण ने घनघोर तपस्या की। अत्रि के वंशजों में हम राजा भरत तक के कुछ विख्यात राजाओं की कथाओं की चर्चा कर चुके हैं। राजा भरत के चैथे वंशज राजा हस्ती हुए जिन्होंने गंगा-यमुना के […] - [राजा कुरु के परिश्रम से धर्म क्षेत्र बन गया कुरुक्षेत्र (24)](https://bharatkaitihas.com/kurukshetra-became-a-religion-zone-due-to-the-toil-of-raja-kuru/): पुराणों में उल्लेख है कि राजा कुरु ने अपने ससुर अत्यागस से, ईरान से लेकर यूनान तक का विशाल भूभाग प्राप्त किया था। उसने अपने राज्य का नाम अपने पिता अजमीड़ के नाम पर अजमीढ़ रखा था। पिछली कथा में हमने चंद्रवंशी राजा संवरण की चर्चा की थी। राजा संवरण हस्तिनापुर को बसाने वाले राजा […] - [गंगा ने राजा शांतनु के सात पुत्रों को नदी में बहा दिया (25)](https://bharatkaitihas.com/ganga-swept-the-seven-sons-of-king-shantanu-into-the-river/): महाराज शांतनु उस शिशु को लेकर अपने महल में आ गए। गंगा और शांतनु का यह आठवां पुत्र वास्तव में प्रभास नामक आठवां वसु था जो श्राप के कारण धरती पर ही रह गया। उसका नाम देवव्रत रखा गया किंतु भीषण प्रतिज्ञा करने के कारण वह बालक आगे चलकर भीष्म के नाम से प्रसिद्ध हुआ। […] - [सत्यवती से विवाह कर लिया राजा शांतनु ने (26)](https://bharatkaitihas.com/king-shantanu-married-matsyagandha-satyavati/): सत्यवती का उत्तर सुनकर महाराज शांतनु चकित रह गए। निषाद कन्या होकर इतना रूप वैभव, जिसकी समता कोई आर्यकन्या एवं देवकन्या भी नहीं कर सकती थी। पिछली कथा में हमने स्वर्ग की अप्सरा गंगा द्वारा आठ वसुओं को जन्म देने तथा आठवां पुत्र शांतनु को देकर फिर से स्वर्ग लौट जाने की कथा कही थी। […] - [वेदव्यास ने नियोग से चंद्रवंशियों के कुल की रक्षा की (27)](https://bharatkaitihas.com/satyavatis-son-vedvyas-protected-the-clan-of-chandravanshi-by-nioga/): एक वर्ष व्यतीत हो जाने पर वेदव्यास पुनः हस्तिनापुर आए। सबसे पहले वे बड़ी रानी अम्बिका के पास गए। अम्बिका अपने समक्ष इतने तेजस्वी ऋषि को देखकर भयभीत हो गई तथा उसने अपने नेत्र बन्द कर लिए। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि सत्यवती के पिता ने निषाद होते हुए भी आर्य राजाओं […] - [धृतराष्ट्र, पाण्डु एवं विदुर(28)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a7%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0/): धृतराष्ट्र तथा पाण्डु तो महर्षि वेदव्यास की संतान थे। फिर वे चंद्रवंशी राजसिंहासन के उत्तराधिकारी कैसे हुए! धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर एक ही पिता की संतान थे, फिर भी उनमें से धृतराष्ट्र एवं पाण्डु को राजकुमार तथा विदुर को दासीपुत्र क्यों माना गया। पिछली कथा में हमने सत्यवती के पुत्र वेदव्यास द्वारा कुरुवंशी रानियों अम्बिका […] - [गांधारी ने कुंती से द्वेष रखने के कारण अपना गर्भ गिरा दिया (29)](https://bharatkaitihas.com/gandhari-gave-up-her-pregnancy-due-to-malice-with-kunti/): गांधारी के पेट से लोहे के समान कठोर एक मांसपिण्ड निकला। गांधारी ने उसे मांस-पिण्ड को फिंकवाने का निर्णय किया। महर्षि वेदव्यास को योगबल से इस घटना का पता चल गया और वे तुरंत गांधारी के पास आए तथा उससे गर्भ गिराने का कारण पूछा। पिछली कथाओं में हमने चर्चा की थी कि स्वर्गीय चंद्रवंशी […] - [ऋषि किन्दम ने महाराज पाण्डु को स्त्री-संसर्ग से मृत्यु का श्राप दिया (30)](https://bharatkaitihas.com/rishi-kindam-cursed-maharaj-pandu-to-die-of-female-intercourse/): महाराज पाण्डु ने एक मृग युगल को तीर मारकर घायल कर दिया। वे दोनों मृग ऋषि किन्दम तथा उनकी पत्नी थे। ऋषि किन्दम ने महाराज पाण्डु को मृत्यु का श्राप दिया! यह कथा चंद्रवंशी राजा पाण्डु पर केन्द्रित है। एक बार हस्तिनापुर के राजा पाण्डु अपनी दोनों रानियों कुन्ती तथा माद्री के साथ आखेट के […] - [पाण्डुपुत्र (31)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): महाराज पाण्डु की रानियों कुंती एवं माद्री ने देवताओं से पांच पुत्र वरदान में प्राप्त किए जिन्हें लोक में पाण्डुपुत्र एवं पांच पाण्डव के नाम से प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि ब्रहृलोक जा रहे ऋषि-मुनियों ने महाराज पाण्डु के कोई पुत्र नहीं होने के कारण उन्हें अपने साथ ले […] - [माद्री ने देवताओं से दो पुत्रों को प्राप्त किया (32)](https://bharatkaitihas.com/rani-madri-received-two-sons-from-the-gods/): पिछली कथा में हमने महारानी कुंती द्वारा देवताओं का आह्वान करके तीन पुत्र प्राप्त करने की चर्चा की थी। इस कथा में हम रानी माद्री द्वारा दो पुत्र उत्पन्न किए जाने की कथा की चर्चा करेंगे। जब महारानी कुंती को दुर्वासा ऋषि द्वारा दिए गए दिव्य मंत्र की सहायता सेे तीन देवताओं के माध्यम से […] - [चंद्रवंशी राजा देवताओं और मनुष्यों का मिश्रण बन गए (33)](https://bharatkaitihas.com/chandravanshi-kings-became-a-mixture-of-gods-and-humans/): चंद्रवंशी राजा ययाति ने स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी तथा विश्वाची के साथ रमण किया। महाराज दुष्यंत ने स्वर्ग की अप्सरा मेनका की पुत्री से विवाह किया। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि स्वर्गीय महाराज पाण्डु के पांचों पुत्रों के हस्तिनापुर आगमन के साथ ही चंद्रवंशी राजाओं की पुरानी परम्परा समाप्त होती है तथा […] - [अर्जुन की परीक्षा लेने आए भगवान शंकर (34)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/): महाभारत, शिव पुराण तथा अन्य संस्कृत वांगमय में भगवान शिव के द्वारा अर्जुन की परीक्षा लिए जाने का प्रसंग आया है। इस परीक्षा के माध्यम से भगवान शंकर ने अर्जुन के बल की थाह ली ताकि यह ज्ञात हो सके कि वह भविष्य में होने वाले युद्ध की लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं! […] - [शिव अर्जुन संवाद (35)](https://bharatkaitihas.com/lord-shiv-opened-gates-of-heaven-for-arjun/): भगवान शिव एवं पाण्डुपुत्र अर्जुन के बीच हुए युद्ध का समापन शिव अर्जुन संवाद से होता है जिसमें भगवान शिव अर्जुन को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित करवाते हैं। पिछली कथा में हमने भगवान शिव तथा अर्जुन के बीच हुए युद्ध की चर्चा की थी। भगवान के द्वारा किए गए घूंसे के प्रहार से अर्जुन […] - [अर्जुन का स्वर्ग प्रवास (36)](https://bharatkaitihas.com/arjuna-rejects-the-love-of-his-great-grand-mother/): अर्जुन का स्वर्ग प्रवास महाभारत एवं कतिपय पुराणों में वर्णित है। अर्जुन के लिए मानव देह में स्वर्ग के द्वार खुलना एक अद्भुत घटना है। यद्यपि अर्जुन के कई पूर्वज मानव शरीर में ही स्वर्ग में रहे थे और अवधि पूर्ण होने पर धरती पर पुनः भेज दिए गए थे। पिछली कथा में हमने चर्चा […] - [लोमश ऋषि का आश्चर्य (37)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b6-%e0%a4%8b%e0%a4%b7%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): अर्जुन को इन्द्र के सिंहासन पर विराजमान देखकर लोमश ऋषि का आश्चर्य देखते ही बनता था। वे समझ नहीं सके कि धरती से आया एक मानव देवराज के सिंहासन पर आधे भाग में कैसे बैठा है! पिछली कथा में हम अर्जुन के स्वर्ग में पहुंचने तथा देवताओं से शस्त्र-विद्याएं सीखने के साथ-साथ चित्रसेन गंधर्व से […] - [महारानी द्रौपदी एवं पाण्डुपुत्र हिमालय पर गिर गए (38)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8c%e0%a4%aa%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): महाभारत का युद्ध समाप्त होने के 37 वर्ष बाद महारानी द्रौपदी एवं पाण्डुपुत्र हिमालय पर्वत पर चले गए जहाँ वे अपने जीवन में किए गए पापों के कारण एक-एक करके हिमालय पर्वत पर गिर गए। केवल युधिष्ठिर ही एक कुत्ते के साथ आगे बढ़ते हुए स्वर्ग तक जा पहुंचे। पिछली कथा में हमने चर्चा की […] - [युधिष्ठिर का कुत्ता (39)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि सुमेरु पर्वत के दर्शनों के बाद महारानी द्रौपदी, सहदेव, नकुल तथा अर्जुन हिमालय की उपत्यकाओं में गिर पड़े। अब केवल भीमसेन एवं महाराज युधिष्ठिर ही बचे थे तथा युधिष्ठिर का कुत्ता साथ चल रहा था। थोड़ा ही आगे बढ़ने पर कुंती नंदन भीमसेन भी गिर पड़े। धर्मराज […] - [कलियुग सोने का मुकुट पहन कर धरती एवं धर्म को पीटने लगा (40)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97/): हे कलियुग! द्यूत, मद्यपान, परस्त्रीगमन और हिंसा इन चार स्थानों में असत्य, मद, काम और क्रोध का निवास होता है। मैं तुझे इन चार स्थानों में निवास करने की अनुमति देता हूँ। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि जब युधिष्ठिर अपने भाइयों एवं महारानी द्रौपदी को साथ लेकर स्वर्ग जाने लगे तो उन्होंने […] - [राजा परीक्षित मृत्यु निकट जानकर गंगा तट पर जा बैठा (41)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि जब कलियुग महाराज परीक्षित के मुकुट में आकर बैठ गया तब राजा परीक्षित की बुद्धि भ्रमित हो गई और उसने शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया! शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि- ‘हे अधर्मी राजा आज […] - [नागराज तक्षक राजा परीक्षित को डंसने के लिए राजमहल में घुस गया (42)](https://bharatkaitihas.com/nagraj-takshaka-entered-the-palace-of-raja-parikshit/): जब शमीक ऋषि के शिष्य गौमुख ने हस्तिनापुर के राजमहल में उपस्थित होकर राजा परीक्षित को सूचित किया कि शृंगी ऋषि ने आपको श्राप दिया है कि आज से सातवें दिन नागराज तक्षक आकर आपको अपने विष से जलाएगा तो राजा परीक्षित सावधान हो गया। पिछली कथा में हमने शापग्रस्त चंद्रवंशी राजा परीक्षित को शुकदेवजी […] - [राजा जनमेजय ने कहा, इन्द्र को भी सांपों के साथ घसीट लो (43)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a4%af/): आस्तीक द्वारा की गई यज्ञ की स्तुति को सुनकर राजा जनमेजय ने आस्तीक ऋषि को यज्ञशाला के भीतर बुलवाया। आस्तीक ऋषि ने यज्ञशाला में पहुंचकर वहाँ बैठे हुए यजमान, ऋत्विज्, सभासद् तथा अग्नि की स्तुति की जिसे सुनकर वहाँ उपस्थित सभी लोग प्रसन्न हो गए। पिछली कथा में हमने तक्षक द्वारा चंद्रवंशी राजा परीक्षित को […] - [दधीचि के पौत्र ने तपस्या का फल लेने से मना कर दिया ! (1)](https://bharatkaitihas.com/grandson-of-dadhich-refused-to-take-the-fruits-of-penance/): जब राजा इक्ष्वाकु ने पुण्यों का फल महर्षि दधीचि के पौत्र को वापस लौटाना चाहा तो महर्षि दधीचि के पौत्र ने एक बार दी गई वस्तु वापस लेने से मना कर दिया! ‘धर्म’ का शाब्दिक अर्थ है- धारण करना। जो मनुष्य उत्तम विचार, उत्तम दर्शन और उत्तम आचरण को धारण करता है, वह मनुष्य धर्म […] - [सुदर्शन चक्र भगवान के भक्त का अपमान सहन नहीं कर सका (2)](https://bharatkaitihas.com/sudarshan-chakra-could-not-bear-the-insult-of-a-saint/): राजा अम्बरीष न्यायप्रिय राजा होने के साथ-साथ भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। जब महर्षि दुर्वासा ने राजा अम्बरीष को श्राप देना चाहा तो सुदर्शन चक्र भगवान के भक्त का अपमान सहन नहीं कर सका। राजा अम्बरीष पौराणिक धर्म साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय पात्र हैं। वे वैवस्वत मनु के प्रपौत्र, ईक्ष्वाकु के पौत्र और राजा […] - [शुनःशेप की बलि (4)](https://bharatkaitihas.com/maharishi-vishwamitra-saved-shunahshep/): महर्षि विश्वामित्र के मंत्र से शुनःशेप बलि चढ़ने से बच गया! अंबरीष ने वरुण से प्रार्थना की कि वह शुनःशेप की बलि न ले किंतु वरुण अपने हठ पर दृढ़ रहा। महर्षि विश्वामित्र ने उसे बलि चढ़ने से बचा लिया ? शुनःशेप का आख्यान ऋग्वेद, ऐतरेय ब्राह्मण, वाल्मीकि रामायण, ब्रह्मपुराण तथा महाभारत आदि ग्रंथों में […] - [शुनःशेप का पिता कौन](https://bharatkaitihas.com/shunahshep-asked-the-sages-who-is-my-father-who-sold-me-or-bought-me/): शुनःशेप ने ऋषियों से पूछा कि मेरा पिता कौन है, मुझे बेचने वाला या खरीदने वाला! शुनःशेप का पिता कौन ? इस प्रश्न के माध्यम से मानव सम्बन्धों की जटिल व्याख्या की गई है। इस कहानी का निष्कर्ष भारतीय संस्कृति का निरूपण है। पिछली कड़ी में हमने देखा था कि महर्षि विश्वामित्र द्वारा दिए गए […] - [राजा वेन](https://bharatkaitihas.com/the-sages-killed-ven-by-a-roar/): राजा वेन को ऋषियों ने अपनी हुंकार से मार डाला! प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथों में राजा वेन की कथा मिलती है। इन कथाओं के आधार पर यह निश्चित करना कठिन हो जाता है कि वह कौनसे मनु का वंशज था। अलग-अलग कथाओं में उसे अलग-अलग मनु का वंशज बताया गया है। अलग-अलग कथाओं के अनुसार राजा […] - [राजा पृथु ने पिता बनकर पृथ्वी का पालन किया (6)](https://bharatkaitihas.com/raja-prithu-nourished-the-earth-as-a-father/): पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि ईक्ष्वाकु राजा अंग के अत्याचारी पुत्र वेन को ऋषियों ने अपनी हुंकार से मार डाला तथा वेन की माता सुनीथा ने मन्त्रा के बल से अपने पुत्र के शव की रक्षा की। जब धरती पर कोई राजा नहीं रहा तो चारों ओर अव्यवस्था होने लगी। चोर-डाकू और […] - [राजा धुंधुमार ने धुंधु राक्षस मार दिया (7)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0/): महाभारत के वन पर्व सहित अनेक पुराणों में राजा धुंधुमार की कथा मिलती है। यह कथा किसी प्राकृतिक घटना की ओर संकेत करती है। पुराणों में ईक्ष्वाकु वंश की वंशावली को बहुत ही विकृत कर दिया गया है। इस कारण राजाओं के क्रम का वास्तविक ज्ञान नहीं हो पाता। कुछ स्थानों पर उल्लेख मिलता है […] - [त्रेता युग लंगड़ाता हुआ आ गया (78)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97/): सत्युग को कृत युग भी कहा जाता है तथा कहा जाता है कि गणितीय गणना के अनुसार कृतयुग के बाद द्वापर को, द्वापर के बाद त्रेता युग को और त्रेता के बाद कलियुग को आना चाहिए था किंतु कृतयुग के समाप्त होते ही द्वापर के स्थान पर त्रेता आ गया। पिछली कड़ियों में हमने ईक्ष्वाकु […] - [राजा मांधाता को दिव्य त्रिशूल से नष्ट कर दिया लवणासुर ने (9)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be/): राजा मांधाता की कथा वायुपुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, भागवत पुराण, मत्स्य पुराण, वाल्मीकि रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों में मिलती है। इन कथाओं के अनुसार ईक्ष्वाकुवंशी राजा युवनाश्व सतयुग का अंतिम राजा था। विष्णु पुराण के अनुसार अयोध्या नरेश युवनाश्व निःसंतान था। च्यवन ऋषि की सलाह पर राजा युवनाश्व ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया। जब यज्ञ […] - [राजा सत्यव्रत के लिए नया स्वर्ग बना दिया ऋषि विश्वामित्र ने (10)](https://bharatkaitihas.com/vishwamitra-created-a-new-paradise-for-raja-satyavrat/): ईक्ष्वाकु वंश में राजा मांधाता के वंशजों में से सातवां वंशज राजा सत्यव्रत था। उसे पुराणों में त्रिशंकु के नाम से जाना जाता है। राजा त्रिशंकु की कहानी का वर्णन वाल्मीकि रामायण के बाल काण्ड में भी किया गया है। इस कथा के अनुसार राजा सत्यव्रत ईक्ष्वाकु वंशी राजा पृथु के पुत्र और राजा रामचंद्र […] - [राजा हरिश्चंद्र ने रानी से शमशान का कर मांगा (11)](https://bharatkaitihas.com/raja-harishchandra-told-his-queen-to-tear-half-of-her-sari-and-pay-tax-on-crematorium/): राजा हरिश्चंद्र ने अपनी रानी तारामती से कहा कि वह अपनी साड़ी फाड़कर आधी साड़ी से शमशान का कर चुकाए। शमशान का कर चुकाए बिना वह अपने पुत्र का संस्कार शमशान में नहीं कर पाएगी। ईक्ष्वाकु वंशी राजाओं में जितने भी प्रसिद्ध राजा हुए हैं उनमें महाराज हरिश्चंद्र का नाम भी अत्यधिक आदर से लिया […] - [राजा सगर ने यवनों के सिर मूंड कर उन्हें धर्म से वंचित कर दिया (12)](https://bharatkaitihas.com/raja-sagar-shaved-the-heads-of-yavanas-and-deprived-them-from-religion/): ईक्ष्वाकु वंशी राजाओं में राजा बाहुक का नाम बहुत प्रसिद्ध है। वे राजा हरिश्चंद्र के बाद की लगभग सातवीं पीढ़ी के राजा हैं। चूंकि अलग अलग पुराणों, वाल्मीकि रामायण एवं महाभारत में सगर के पिता का नाम अलग-अलग दिया हुआ है, इसलिए यह निश्चित कर पाना संभव नहीं है कि राजा बाहुक हरिश्चंद्र की पीढ़ी […] - [राजा सगर के पुत्र (13)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): राजा सगर के पुत्र बड़े पराक्रमी एवं वीर थे किंतु दुष्ट स्वभाव एवं क्रूर कर्मा होने के कारण उन्होंने धरती एवं समुद्र को बहुत कष्ट दिया। पिछली कड़ी में हमने राजा सगर की बड़ी रानी केशिनी के गर्भ से असमंजस नामक दुष्ट पुत्र की तथा छोटी रानी सुमति के गर्भ से एक तूम्बे का जन्म […] - [राजा भगीरथ ने गंगाजी को धरती पर लाने के लिए महातप किया (14)](https://bharatkaitihas.com/raja-bhagiratha-performed-a-great-battle-to-bring-gangaji-to-earth/): राजा भगीरथ पुनः अपने दिव्य रथ पर सवार होकर समुद्र की ओर चल दिए तथा गंगाजी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे चलती हुईं समुद्र तक पहुँच गयीं। यहाँ से राजा भगीरथ गंगाजी को रसातल में ले गए तथा अपने पितरों की भस्म को गंगाजल से सिंचित करके उन्हें मुक्ति दिलवाई। विभिन्न पुराणों से लेकर वाल्मीकि रामायण […] - [महर्षि अगस्त्य ने समुद्र पी लिया (15)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): बहुत से पुराणों में महर्षि अगस्त्य द्वारा समुद्रों को पीकर उन्हें खाली करने का आख्यान मिलता है। महाभारत में भी इस आख्यान का विस्तार से वर्णन किया गया है। पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि जब राजा भगरीथ गंगाजी को स्वर्ग से उतार कर लाए तो वे गंगाजी को धरती से पाताल लोक […] - [राजा नाभि के समय नवीन सृष्टि आरम्भ हुई (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%bf/): राजा ईक्ष्वाकुवंशी राजा अंशुमान के पौत्र राजा भगीरथ गंगाजी को धरती पर लाये। राजा भगीरथ के बाद उनका पुत्र श्रुत और श्रुत के बाद राजा नाभि अयोध्या का राजा हुआ। पौराणिक अख्यानों के अनुसार राजा नाभि के समय में धरती पर बहुत सी बड़ी हलचलें हुईं। चूंकि वह काल हिमयुग के व्यतीत हो जाने के […] - [राजा ऋतुपर्ण ने आकाश से ही पेड़ के पांच करोड़ पत्ते गिन लिए (17)](https://bharatkaitihas.com/raja-rituparna-counted-five-crore-leaves-of-the-tree-from-the-sky/): राजा नल वस्त्राभूषणों से अलंकृत होकर अपनी रानी दमयन्ती एवं अपने श्वसुर राजा भीष्मक से मिला। राजा भीष्मक ने बड़ी प्रसन्नता के साथ नल का स्वागत किया। राजा नल के आगमन की प्रसन्नता में विदर्भ नगर में बड़ा आनंद हुआ। - [राजा सौदास महर्षि वसिष्ठ के श्राप से कल्मषपाद राक्षस बन गया (18)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): ईक्ष्वाकु वंशी राजा सौदास का उल्लेख अनेक हिन्दू पौराणिक ग्रंथों एवं महाभारत में हुआ है। विष्णु पुराण के अनुसार राजा सौदास इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न राजा ऋतुपर्ण का प्रपौत्र, राजा सर्वकाम का पौत्र तथा राजा सुदास का पुत्र था। सुदास का पुत्र होने के कारण इसे सौदास कहा जाता था। कुल पुरोहित वसिष्ठ के आशीर्वाद […] - [राजा खट्वांग की कथा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): राजा खट्वांग अपनी मृत्यु की जानकारी होते ही स्वर्ग छोड़कर अयोध्या आ गए ! ईक्ष्वाकु वंश के द्वापर युगीन राजाओं में खट्वांग भी महाप्रतापी, धर्मपरायण एवं सत्यव्रती राजा हुए हैं। इनकी कथा अनेक पुराणों एवं महाभारत में भी मिलती है। कुछ पुराणों में इन्हें राजा दिलीप भी कहा गया है। ईक्ष्वाकु वंश में दिलीप नामक […] - [राजा दिलीप ने सिंह से कहा वह गौ के स्थान पर मुझे खा ले (20)](https://bharatkaitihas.com/raja-dileep-asked-singh-to-eat-me-in-place-of-cow/): महर्षि वसिष्ठ ने राजा दिलीप को बताया कि आपने स्वर्ग लोक में  कामधेनु गाय का अपमान किया है। इसी दोष से आपकी संतान की कामना फलवती नहीं होती। पिछली कड़ी में हमने राजा खट्वांग की कथा कही थी। राजा खट्वांग से दीर्घबाहु नामक पुत्र हुआ। कुछ पुराणों में राजा खट्वांग को दिलीप कहा गया है […] - [महाराज रघु](https://bharatkaitihas.com/maharaj-raghu-received-tax-for-brahman-kumar-from-yaksharaj-kubera/): महाराज रघु ने यक्षराज कुबेर से ब्राह्मणकुमार के लिए कर प्राप्त किया! अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के पुराण-प्रसिद्ध राजा दिलीप के पुत्र राजा रघु हुए। वे अत्यंत प्रतापी एवं सत्यनिष्ठ राजा थे। अनेक पुराणों में राजा रघु की कथा मिलती है जिनके अनुसार राजा दिलीप को नंदिनी गाय की सेवा करने के प्रसाद के रूप […] - [राजा अज](https://bharatkaitihas.com/raja-aj-cut-wood-in-the-forest-and-paid-guru-dakshina/): राजा अज ने जंगल में लकड़ियां काटकर गुरु दक्षिणा चुकाई! अज का अर्थ होता है जिसका जन्म नहीं हुआ हो। इसीलिए प्रजापति ब्रह्मा को अज कहा जाता है। पौराणिक काल में अज नामक कई राजा हुए हैं। इनमें सर्वाधिक विख्यात ईक्ष्वाकु वंश का राजा अज था। वह महाराज रघु का पुत्र था। विष्णु पुराण सहित […] - [रानी कैकेयी](https://bharatkaitihas.com/rani-kaikeyi-protected-life-of-raja-dasharatha-in-devasur-sangram/): रानी कैकेयी ने देवासुर संग्राम में राजा दशरथ के प्राणों की रक्षा की! राजा दशरथ ईक्ष्वाकु वंशी राजा अज के पुत्र थे एवं त्रेता युग में कौशल राज्य के राजा थे जिसकी राजधानी अयोध्या थी। राजा दशरथ का उल्लेख विभिन्न पुराणों, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण एवं भगवान वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में हुआ है। […] - [राजा दशरथ की रानियाँ](https://bharatkaitihas.com/three-queens-of-raja-dasharatha-symbolize-pranamaya-annamaya-and-manomaya-kosh/): प्राणमय, अन्नमय ओर मनोमय कोश की प्रतीक हैं राजा दशरथ की रानियाँ ! विभिन्न पुराणों में आई हुई कथाओं में वर्णित ईक्ष्वाकु वंशी राजाओं को मानव देह धारी होने के साथ-साथ प्राकृतिक शक्तियों के रूप में देखा जाता है। उदाहरण के लिए राजा सगर के साठ हजार पुत्रों की कथा, राजा धुंधुमार द्वारा धुंधु राक्षस […] - [श्रीराम कितने पुराने हैं](https://bharatkaitihas.com/hindu-scripture-ikshvaku-vanshi-tells-raja-ramachandra-to-be-twenty-five-million-years-old/): ईक्ष्वाकु वंशी श्रीराम कितने पुराने हैं ? इस प्रश्न का उत्तर आज तक नहीं दिया जा सका है! धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्य श्रीराम का कालखण्ड अलग-अलग समय पर निर्धारित करते हैं! हिन्दू धर्म ग्रंथराजा रामचंद्र को पौने दो करोड़ साल पुराना बताते हैं!  ईक्ष्वाकु वंशी राजा दशरथ के चार पुत्र हुए। बड़े पुत्र रामचंद्र […] - [भरत तुम मनुष्यों के राजा बनो, मैं जंगली पशुओं का सम्राट बनूंगा (26)](https://bharatkaitihas.com/hey-bharata-you-be-the-king-of-men-i-will-be-the-emperor-of-wild-animals/): जब श्रीराम ने भरत से यह कहा कि तुम मनुष्यों के राजा बनो और मैं जंगली पशुओं का सम्राट बनूंगा तो इस बात में कई गुप्त संदेश छिपे हुए थे। उनके कहने का आशय यह था कि अब मैं जंगल में घुसकर वहाँ निवास करने वाले नरभक्षी राक्षसों का अनुशासन करंगा अर्थात् उन्हें नष्ट करूंगा। […] - [महर्षि जाबालि को कड़ी फटकार लगाई वनवासी राम ने (27)](https://bharatkaitihas.com/vanvasi-ram-reprimanded-maharishi-zabali/): हमने पिछली कड़ी में उल्लेख किया था कि दशरथ नंदन श्रीराम ने चित्रकूट में अपने अनुज भरत को यह समझाने का प्रयास किया कि पुत्रों को अपने मृत पिता के वचनों का पालन करके उसे ऋण से मुक्त करवाने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने समस्त पितरों की रक्षा एवं मुक्ति का प्रयास करना चाहिए। […] - [महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम को ईक्ष्वाकुओं की परम्परा बताई (28)](https://bharatkaitihas.com/maharishi-valmiki-told-shriram-the-tradition-of-the-ikshvakus/): आज हमें रामकथा का प्राचीनतम स्वरूप महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण में मिलता है। इस ग्रंथ में श्रीराम का चित्रण मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में किया गया है। जब भगवान श्रीराम ने जाबालि ऋषि से रोषपूर्ण बातें कहीं तो गुरु वसिष्ठ ने श्रीराम को बताया कि जाबालि ऋषि नास्तक नहीं हैं। वे तो आपसे केवल […] - [जयंत की आंख फोड़कर उसे जीवित छोड़ दिया श्रीराम ने (29)](https://bharatkaitihas.com/shriram-broke-the-eye-of-jayanta-son-of-indra-and-left-him-alive/): राजकुमार भरत द्वारा अयोध्यावासियों को अपने साथ लेकर अयोध्या लौट जाने के बाद भी राम, लक्ष्मण एवं सीता कुछ दिनों तक चित्रकूट में निवास करते रहे। वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण, नरसिंह पुराण, पद्म पुराण तथा गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस में श्रीराम के चित्रकूट प्रवास के दौरान घटित इंद्र के पुत्र जयंत की कथा का […] - [शाह तुर्कान ने दिल्ली सल्तनत पर कब्जा कर लिया (58)](https://bharatkaitihas.com/beautiful-shah-turkan-captured-delhi-sultanate/): रुकुनुद्दीन की माँ शाह तुर्कान ने शासन की बागडोर अपने हाथों में ले ली। शाह तुर्कान बला की खूबसूरत औरत थी। उसका जन्म अभिजात्य तुर्कों में न होकर निम्न समझे जाने वाले वंश में हुआ था। वह अपने दैहिक सौन्दर्य के बल पर इल्तुतमिश जैसे प्रबल सुल्तान की बेगम बनी थी। छब्बीस साल तक शासन […] - [शाह तुर्कान का सिर काट दिया गुण्डों ने (59)](https://bharatkaitihas.com/gundas-of-delhi-beheaded-shah-turkan/): रजिया ने बूढ़े मुसलमानों की परवाह नहीं की तथा वह मस्जिद से निकलने वाले नौजवानों के सामने अपनी बात बार-बार दोहराने लगी। मुस्लिम नौजवानों पर रजिया का जादू चल गया। उन्होंने रजिया की गुहार स्वीकार कर ली। कुछ गुण्डों ने शाह तुर्कान का सिर काट दिया! इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों को निकम्मा जानकर अपनी पुत्री […] - [रजिया सुल्ताना तुर्की अमीरों को फटकारने लगी (60)](https://bharatkaitihas.com/razia-reprimand-turkish-amir/): दिल्ली के नौजवानों को भड़का कर शाह तुर्कान का सिर कटवाकर रजिया दिल्ली की सुल्तान बन गई। चालीसा के जिन अमीरों ने रजिया के उत्तराधिकार का विरोध किया था, उन्हीं अमीरों ने रजिया को सुल्तान स्वीकार कर लिया। रजिया को भारत के इतिहास में रजिया सुल्ताना कहा जाता है। दिल्ली के अमीरों द्वारा रजिया को […] - [रजिया का सौंदर्य और प्रेम के किस्से इतिहास पर हावी हो गए (61)](https://bharatkaitihas.com/tales-of-beauty-and-love-dominated-history-of-razia/): इतिहास के साथ किंवदन्तियाँ और मिथक भी अवश्य ही जुड़ जाते हैं जिनके कारण सत्य और असत्य का निर्धारण कठिन हो जाता है। इसी प्रवृत्ति के कारण रजिया का सौंदर्य और प्रेम के किस्से इतिहास पर हावी हो गए! तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में जब दिल्ली पर अफगानिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों से आए लड़ाका तुर्की कबीले […] - [याकूत हब्शी से प्रेम करने लगी रजिया सुल्ताना (62)](https://bharatkaitihas.com/razia-sultan-started-loving-yakut-habshi/): कहा नहीं जा सकता कि इसमें कितना सच और कितना झूठ है किंतु रजिया सुल्ताना के बारे में पूरी दिल्ली सल्तनत में यह अपवाद व्याप्त हो गया कि रजिया सुल्ताना अपने गुलाम याकूत हब्शी से प्रेम करने लगी है। तेरहवीं सदी के बेरहम तुर्की भारत में रजिया सुल्ताना किसी आश्चर्य से कम नहीं थी। उस […] - [रणथंभौर तथा ग्वालियर दुर्ग रजिया ने हिन्दुओं को सौंप दिए (63)](https://bharatkaitihas.com/razia-handed-over-fort-of-ranthambore-and-gwalior-to-hindus/): रजिया सुल्ताना समझ गई कि वह एक साथ कई मोर्चों पर नहीं लड़ सकती थी। इस समय उसे दिल्ली के तुर्की अमीरों से निबटना था, इसलिए उसने रणथंभौर तथा ग्वालियर दुर्ग हिन्दुओं को सौंप दिए! रजिया सुल्ताना ने अपनी रक्षा के लिए अबीसीनियाई हब्शी गुलाम जमालुद्दीन याकूत को अपनी सेवा में नियुक्त किया जो हर […] - [अल्तूनिया से विवाह कर लिया रजिया ने (64)](https://bharatkaitihas.com/razia-married-cunning-altunia/): अप्रेल 1240 में रजिया बंदी बना ली गई। अपनी शक्ति और बुद्धि का अहंकार रखने वाले तुर्की अमीरों ने एक लड़की को छल से बंदी बनाया। वे युद्ध के मैदान में रजिया का सामना करने की स्थिति में नहीं थे। सूबेदारों की संयुक्त सेनाओं द्वारा रजिया बंदी बनाई जाकर अल्तूनिया को समर्पित कर दी गई। […] - [रजिया की हत्या कर दी लुटेरों ने (65)](https://bharatkaitihas.com/robbers-killed-razia-and-altunia/): कैथल के निकट जाटों ने अल्तूनिया तथा रजिया को पकड़ लिया और उनका माल-असबाब लूटकर उनकी हत्या कर दी। इस प्रकार रजिया सुल्तान का सदा के लिये अंत हो गया। एक अन्य मत के अनुसार रजिया तथा अल्तूनिया को पकड़कर दिल्ली लाया गया तथा बहरामशाह के आदेश से अल्तूनिया तथा रजिया की हत्या की गई। […] - [सुल्तान बहरामशाह की बहिन से विवाह कर लिया एतिगीन ने (66)](https://bharatkaitihas.com/etigine-forcibly-married-sultans-sister/): एतिगीन ने सुल्तान बहरामशाह की एक बहिन से जबर्दस्ती विवाह कर लिया। इस प्रकार वह सुल्तान से भी अधिक महत्त्वपूर्ण तथा शक्तिशाली हो गया तथा निरंकुश व्यवहार करने लगा। रजिया भारत की प्रथम तथा अन्तिम स्त्री सुल्तान थी। यद्यपि विदेशों में रजिया के पूर्व भी स्त्रियां तख्त पर बैठ चुकी थीं तथा बाद में कुछ […] - [सुल्तान नासिरुद्दीन औरतों के कपड़े पहनकर दिल्ली में घुसा (67)](https://bharatkaitihas.com/nasiruddin-entered-delhi-wearing-womens-clothes-and-became-a-sultan/): सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद इल्तुतमिश का पुत्र था। उसका बचपन कारागार में व्यतीत हुआ था। दिल्ली की जनता जानती थी कि नासिरुद्दीन महमूद ने अपने भतीजे एवं पूर्ववर्ती सुल्तान मसूदशाह की धोखे से हत्या करके दिल्ली का तख्त हथियाया है फिर भी प्रजा ने उसे सार्वजनिक दरबार में अपना सुल्तान स्वीकार कर लिया। बहरामशाह की हत्या […] - [इल्बरी कबीले का गुलाम था बलबन (68)](https://bharatkaitihas.com/another-slave-of-ilbari-clan-came-to-rule-delhi/): सुल्तान नासिरुद्दीन ने बलबन को अपना प्रधानमंत्री बना लिया। वह इल्बरी कबीले का तुर्क गुलाम था। बलबन में अपने समय के समस्त तुर्की अमीरों की अपेक्षा साहस, शक्ति एवं योग्यता की मात्रा बहुत अधिक थी। दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद नासिरुद्दीन को भी अपने पूर्ववर्ती सुल्तानों की तरह अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। […] - [नासिरुद्दीन ने हिन्दू राजाओं दमन किया (69)](https://bharatkaitihas.com/sultan-nasiruddin-brutally-suppressed-hindu-kings/): नासिरुद्दीन ने अपने गुलाम बलबन की सहायता से चालीसा मण्डल पर नियंत्रण कस लिया तथा अपनी सल्तनत को मजबूती से जमा लिया किंतु सुल्तान तथा सल्तनत दोनों के संकटों का कोई अंत नहीं था। जब तक तुर्की अमीर जीवित थे, जब तक मंगोल जीवित थे और जब तक हिन्दू सरदार जीवित थे, दिल्ली सल्तनत शांति […] - [गयासुद्दीन बलबन दिल्ली का सुल्तान बन गया (70)](https://bharatkaitihas.com/a-turkish-slave-became-sultan-of-delhi/): बीस वर्ष तक दिल्ली सल्तनत पर शासन करने के बाद सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद ई.1266 में मृत्यु को प्राप्त हुआ। उसने अपनी मृत्यु से पहले ही अपने तुर्की गुलाम गयासुद्दीन बलबन को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया जो कि सुल्तान का श्वसुर भी था। दिल्ली सल्तनत के इतिहास में आगे बढ़ने से पहले हमें दिल्ली के नए […] - [बलबन को पैगम्बर मान लिया मुस्लिम इतिहासकारों ने (71)](https://bharatkaitihas.com/muslim-historians-consider-balban-a-prophet/): बलबन एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उस काल के मुस्लिम इतिहासकार बलबन को पैगम्बर मानते थे जिसे अल्लाह ने भारत में इस्लाम के प्रसार हेतु भेजा था। अतः स्वाभाविक ही था कि बलबन विद्रोही हिन्दू राजाओं का कठोरता से दमन करता। दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बनकर गियासुद्दीन बलबन ने ‘जिल्ले इलाही’ तथा ‘नियामत ए खुदाई’ […] - [मेवों के सिर के बदले बलबन ने चांदी के सिक्के दिए (72)](https://bharatkaitihas.com/balban-gave-two-silver-coins-for-each-head-of-meo/): प्रत्येक अफगान सैनिक सौ-सौ मेवों के सिर काटकर लाया। मल्का को भी उसके परिवार के 250 सदस्यों के साथ बंदी बनाया गया। बलबन ने मल्का से 142 घोड़े तथा 30 हजार टंके छीन लिए। बलबन ने सल्तनत को मजबूती देने के लिए विद्रोहियों एवं अपने विरोधियों को दण्ड देने में कोई संकोच नहीं किया। एक […] - [बलबन की क्रूरता (73)](https://bharatkaitihas.com/balbans-cruelty-was-higher-than-timurlung-and-nadirshah/): बलबन की क्रूरता के आगे तैमूरलंग और नादिरशाह की तलवारों की चमक फीकी पड़ गई। बलबन ने नागरिक बस्तियों में आग लगवा कर उन्हें नष्ट कर दिया। गंगा-यमुना के दो-आब क्षेत्र के लोग युगों से स्वातंत्र्यप्रिय थे। इस क्षेत्र के राजा भले ही  गजनी के आक्रांताओं से युद्धों में हार गए थे किंतु इस क्षेत्र […] - [बलबन का चित्तौड़ अभियान (74)](https://bharatkaitihas.com/chittor-defeated-balban/): बलबन ने रजिया सुल्ताना की तरह राजस्थान के बड़े हिन्दू राजाओं से दूर ही रहने की नीति अपनाई किंतु बलबन का चित्तौड़ अभियान इसका अपवाद था। बलबन का चित्तौड़ अभियान गुजरात तक पहुंचने के लिए हुआ था। गियासुद्दीन बलबन द्वारा दिल्ली के निकट रहने वाले मेवों, गंगा-यमुना दो-आब के किसानों और अवध तथा कटेहर के […] - [तुगरिल खाँ को फांसी पर चढ़ा दिया बलबन ने (75)](https://bharatkaitihas.com/balban-hanged-tughril-khan-the-ruler-of-bengal-in-market-of-lakhnauti/): तुगरिल खाँ अपने कुछ साथियों के साथ जाजनगर के जंगलों में भाग गया। बड़ी खोज के बाद तुगरिल खाँ को पकड़ा जा सका। उसे लखनौती के बाजार में सरेआम सूली पर लटकाया गया तथा उसका सिर काटकर नदी में फेंक दिया गया। उसकी स्त्रियों तथा बच्चों को कैद कर लिया गया। बलबन ने चालीसा मण्डल […] - [बलबन का राजत्व सिद्धान्त (76)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): दिल्ली सल्तनत के इतिहास में बलबन का राजत्व सिद्धान्त बहुत प्रसिद्ध है। यह देखकर आश्चर्य होता है कि एक अनपढ़, क्रूर तुर्की गुलाम राजत्व के ऐसे ऊचे आदर्श एवं सिद्धांत गढ़ पाया जैसे बड़े-बड़े बादशाह नहीं गढ़ पाते हैं। गियासुद्दीन बलबन ने सल्तनत को स्थाई, सुल्तान को प्रभावशाली तथा सरकार को मजबूत बनाने के लिये […] - [कुरूप किंतु भाग्यवान बलबन ने दिल्ली सल्तनत को मजबूती प्रदान की (77)](https://bharatkaitihas.com/ugly-but-fortunate-balban-firmly-solidified-delhi-sultanate/): कुरूप किंतु भाग्यवान बलबन दिल्ली का सुल्तान था। उसने दिल्ली सल्तनत को मजबूती प्रदान की। वह अपने समस्त पूर्ववर्ती सुल्तानों से अधिक प्रतिभावान था। वह जितना अधिक कुरूप था, उतना ही अधिक क्रूर भी था। गियासुद्दीन बलबन का एक गुलाम पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर एक विशाल सल्तनत का स्वामी बन जाना एक अलग बात थी […] - [शहजादा बुगरा खाँ सल्तनत छोड़कर भाग गया (78)](https://bharatkaitihas.com/balbans-prince-escaped-leaving-the-sultanate/): बलबन ने शहजादा बुगरा खाँ को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहा किंतु शहजादा बुगरा खाँ अपने पिता के कठोर स्वभाव से डरकर लखनौती भाग गया। इस पर बलबन ने अपने बड़े पुत्र मुहम्मद के पुत्र कैखुसरो को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। शरीर से कुरूप किंतु भाग्यवान बलबन ने लड़खड़ाती हुई दिल्ली सल्तनत को अपनी बुद्धि, परिश्रम […] - [कैकुबाद ने पिता को पैरों में गिराकर सलाम करवाया (79)](https://bharatkaitihas.com/kaikubad-receives-his-fathers-salute-by-dropping-him-in-feet/): जब बुगरा खाँ अपने पुत्र सुल्तान कैकुबाद के समक्ष उपस्थित हुआ तो बुगरा खाँ ने अन्य अमीरों की तरह धरती पर माथा रगड़कर सुल्तान की जमींपोशी की तथा सुल्तान के पैर पकड़कर उसकी पैबोशी की। दिल्ली के सुल्तान गियासुद्दीन बलबन ने अपने बड़े शहजादे मुहम्मद की मृत्यु हो जाने के कारण अपने द्वितीय पुत्र बुगरा […] - [गुलाम वंश का अंत (80)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4/): खिलजियों ने सुल्तान कैकुबाद को लातों से मारकर यमुनाजी में फैंक दिया! इसी के साथ दिल्ली सल्तनत से गुलाम वंश का अंत हो गया। अमीरों ने कैकुबाद के अल्पवयस्क पुत्र क्यूमर्स को सुल्तान बना दिया। बलबन के पोते कैकुबाद को दिल्ली पर शासन करते हुए तीन साल ही हुए थे कि अत्यधिक शराब पीने के […] - [जलालुद्दीन खिलजी हिन्दुओं के ढोल नगाड़े सुनकर खून के आंसू रोता था (81)](https://bharatkaitihas.com/jalaluddin-khilji-used-to-cry-tears-of-blood-on-hearing-drums-of-hindus/): सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी अफगानिस्तान के खिलजी कबीले का तुर्क था। वह कट्टर मुसलमान था जो हिन्दुओं के ढोल-नगाड़े सहन करने को तैयार नहीं था। वह भारत के समस्त हिन्दुओं को मुसलमान बनाना चाहता था। दिल्ली सल्तनत के तुर्की अमीरों ने जलालुद्दीन खिलजी को मारने का षड़यंत्र इसलिए रचा था क्योंकि तुर्की अमीरों की दृष्टि में […] - [मलिक छज्जू के साथ हो गए बागी हिन्दू (82)](https://bharatkaitihas.com/rebel-hindus-geathered-with-chhajju-like-ants-and-locusts/): बलबन के भतीजे मलिक छज्जू ने बगावत का झण्डा उठाया जो कि कड़ा-मानिकपुर का गवर्नर बनाया गया था। मलिक छज्जू ने भरे दरबार में सुल्तान की अधीनता स्वीकार की थी और तभी से राजभक्ति प्रदर्शित कर रहा था किंतु असन्तुष्ट तुर्क सरदारों ने उसे विद्रोह करने के लिए उकसाया। तुर्की सरदार सत्ता के इतने भूखे […] - [जलालुद्दीन खिलजी की नीति (83)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): हालांकि जलालुद्दीन खिलजी दो मुसलमान बादशाहों की हत्या करके दिल्ली सल्तनत के तख्त पर बैठा था किंतु सुल्तान बन जाने के बाद जलालुद्दीन खिलजी की नीति हिन्दुओं के साथ कठोरतम व्यवहार करने की और मुसलमानों के साथ उदारता बरतने की बन गई। सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने तुर्की अमीरों को अपने पक्ष में करने के लिए […] - [सीदी मौला भारत का खलीफा बनना चाहता था (84)](https://bharatkaitihas.com/sidi-maula-wants-to-become-khalifa-of-india-by-killing-sultan/): सीदी मौला अजुद्धान अर्थात् पाकपटन के ‘शेख फरीदुद्दीन गजेशंकर’ का शिष्य था। सीदी मौला के गुरु ने उसे राजनीति से दूर रहने का उपदेश दिया था परन्तु दिल्ली आने पर सीदी मौला की रुचि राजनीति में हो गई। दिल्ली के सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने पूर्व सुल्तान बलबन के भतीजे मलिक छज्जू का सफलता पूर्वक दमन […] - [रणथम्भौर दुर्ग नहीं जीत सका जलालुद्दीन खिलजी (85)](https://bharatkaitihas.com/one-hair-of-muslim-soldiers-is-worth-more-than-hundred-forts-of-ranthambore/): सुल्तान ने रणथम्भौर दुर्ग पर आक्रमण करने का निश्चय किया। रणथंभौर के शासक वीर हम्मीरदेव चौहान के सैनिक अपने दुर्ग की रक्षा के लिए दृढ़़-सकंल्प थे। राजपूतों की दृढ़़ता तथा दुर्ग की अभेद्यता से हताश होकर सुल्तान ने रणथम्भौर विजय का विचार त्याग दिया और घेरा उठाने के आदेश दिए। जलालुद्दीन खिलजी ने बलबन के […] - [जलालुद्दीन खिलजी की बेटी मंगोलों को दे दी गई (86)](https://bharatkaitihas.com/jalaluddin-khilji-married-his-daughter-to-mongols-and-settled-in-delhi/): जलालुद्दीन खिलजी संसार में किसी भी कीमत पर इस्लाम का प्रसार करना चाहता था। उसने मंगोलों को भी मुसलमान बनने का प्रस्ताव दिया। इसके बदले में जलालुद्दीन खिलजी की बेटी मंगोलों को दे दी गई तथा मंगोलों को दिल्ली में लाकर बसाया गया। ई.1292 में सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी की आज्ञा से उसके भतीजे एवं दामाद […] - [देवगिरि के यादव अल्लाउद्दीन से परास्त हो गए (87)](https://bharatkaitihas.com/yadavas-of-devagiri-gave-gold-pearl-diamond-and-thousand-mana-silver-to-allauddin/): देवगिरि के यादव अल्लाउद्दीन से परास्त हो गए! उन्होंने अल्लाउद्दीन को 50 मन सोनाए 5 मन मोतीए 2 मन हीरे और 1 हजार मन चाँदी दी। अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना ने देवगिरि राज्य को जमकर लूटा। मंगोलों पर की गई सैनिक कार्यवाही के बाद सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने कभी कोई सैनिक अभियान नहीं किया तथा […] - [जलालुद्दीन खिलजी की हत्या (88)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी की हत्या करके उसका सिर भाले पर लटका दिया । सुल्तान का सिर अवध के विभिन्न शहरों शहरों में घुमाया गया ताकि पूरी सल्तनत तक यह समाचार भलीभांति पहुंच जाए। अल्लाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान जलालुद्दीन से चंदेरी पर अभियान करने की अनुमति मांगी और ऐलिचपुर को जीतने के बाद […] - [दिल्ली का शाही तख्त सुल्तानों के खून का प्यासा था (89)](https://bharatkaitihas.com/delhis-royal-throne-was-thirsty-for-sultans-blood/): दिल्ली का शाही तख्त अब तक कई सुल्तानों का खून पी चुका था। प्रत्येक शहजादा, अमीर और विदेशी आक्रांता दिल्ली का शाही तख्त प्राप्त करना चाहता था। इस कारण अधिकतर सुल्तानों को अपनी स्वाभाविक मौत नसीब नहीं हो पाती थी। दिल्ली सल्तनत का शाही-तख्त इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद से ही सुल्तानी खून का प्यासा […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली में घुस गया (90)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khiljis-mother-in-law-could-not-stop-allauddin-from-entering-delhi/): अपने मजहबी विश्वासों के प्रति उन्मादी सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी धोखे, छल, फरेब से भरी तेरहवीं शताब्दी के भारत में अपने दुष्ट भतीजे अल्लाउद्दीन खिलजी के ऊपर विश्वास करके भयानक मृत्यु को प्राप्त हुआ। इतिहास के पन्नों में आगे बढ़ने से पहले हमें अल्लाउद्दीन खिलजी के बाल्यकाल में झांकना चाहिए। यद्यपि उस काल के इतिहासकारों ने […] - [जलाली अमीर (91)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0/): पूर्व सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी के विश्वस्त अमीरों को जलाली अमीर कहा जाता था। चूंकि अल्लाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान जलालुद्दीन की हत्या की थी, इसलिए जलाली अमीर अल्लाउद्दीन को क्षमा करने को तैयार नहीं थे। इसलिए नए सुल्तान ने जलाली अमीर अंधे करके जेल में ठूंस दिए। जिस समय अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली का शासक बना, वह […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की समस्याएँ (92)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8/): दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद अल्लाउद्दीन खिलजी की समस्याएँ बढ़ गईं किंतु अशिक्षित होने के कारण अल्लाउद्दीन खिलजी उन समस्याओं को समझने की बजाय एक नया मजहब चलाना चाहता था और मुसलमानों का नबी बनना चाहता था। अल्लाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि के यादवों से लूटी गई सोने की अशर्फियों के बल पर न केवल […] - [मंगोल आक्रांता अल्लाउद्दीन खिलजी को दिल्ली की गलियों में ढूंढने लगे (93)](https://bharatkaitihas.com/mongols-searched-allauddin-khilji-in-streets-of-delhi/): मंगोलों ने दिल्ली की गलियों में धावे मारे। वे सुल्तान अल्लाउद्दीन को दिल्ली में ढूंढते रहे किंतु अल्लाउद्दीन उनके हाथ नहीं लगा। अंत में निजामुद्दीन औलिया ने मंगोल सरदार से बात की और मंगोल दिल्ली छोड़कर चले गए। इस प्रकार लगभग तीन महीने तक दिल्ली मंगोलों के अधिकार में रही। काजी अलाउलमुल्क के परामर्श से […] - [मंगोलों के सिर कटवाकर मीनारें बनवाईं अल्लाउद्दीन खिलजी ने (94)](https://bharatkaitihas.com/allahuddin-khilji-built-minarets-after-beheading-mongols/): मलिक काफूर ने रावी नदी के तट पर कबक खाँ नामक मंगोल सरदार को बीस हजार मंगोलों सहित कैद कर लिया। इन्हें दिल्ली लाकर हाथियों के पैरों तले कुचलवाया गया। इन मंगोलों के सिर कटवार बदायूं दरवाजे पर मंगोलों के सिरों की एक मीनार बनाई गई। ई.1302 में मंगोल दिल्ली पर अधिकार करने में सफल […] - [सीरी दुर्ग की नींव में डलवाए अल्लाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों के कटे हुए सिर (95)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-put-severed-head-of-mongols-in-foundation-of-siri-fort/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने सीरी दुर्ग की नींव में उन आठ हजार मंगोलों के कटे हुए सिर डलवा दिए जो बदायूं दरवाजे के पास पड़े सड़ रहे थे। इस घटना के बाद जब तक अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली के तख्त पर बैठा रहा, तब तक मंगोलों का भारत पर आक्रमण नहीं हुआ। अल्लाउद्दीन खिलजी के समय में […] - [उलूग खाँ कर्ण बघेला की रानी को उठा लाया (96)](https://bharatkaitihas.com/ulugh-khan-snatched-the-queen-of-karna-baghela/): राजा कर्ण बघेला की रानी कमलावती अप्रतिम सौंदर्य की स्वामिनी थी। उलूग खाँ ने अपने सनिकों से कहा कि वे रानी पर वार नहीं करें अपितु उसे जीवित ही पकड़ लें। खिलजी सैनिकों के थोड़े से परिश्रम से रानी पकड़ ली गई। ई.1299 में अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना ने गुजरात-अभियान पर जाने के लिए थार […] - [जालोर के चौहान सोमनाथ शिवलिंग के खण्ड छीनने में सफल रहे (97)](https://bharatkaitihas.com/chauhans-of-jalore-snatched-blocks-of-somnath-from-khiljis/): जब अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े लेकर दिल्ली लौटी तथा मार्ग में जालोर राज्य से होकर गुजरी तो जालोर के चौहान अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना से सोमनाथ शिवलिंग के खण्ड छीनकर ले जाने में सफल रहे। अल्लाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खाँ तथा नुसरत खाँ ने गुजरात की राजधानी अन्हिलवाड़ा पर आक्रमण […] - [अल्लाउद्दीन की माँ को लूट लिया जैसलमेर के राजकुमारों ने (98)](https://bharatkaitihas.com/the-princes-of-jaisalmer-looted-allauddins-mother/): ई.1304 में दिल्ली के सुल्तान अल्लाउद्दीन की माँ लगभग साढ़े पांच सौ खच्चरों पर सोने-चांदी की अशर्फियां, कीमती रेशमी कपड़े तथा खाने-पीने की बहुमूल्य वस्तुएँ लेकर मुल्तान एवं सिंध होते हुए जैसलमेर राज्य के रास्ते हज करने मक्का जा रही थी, तब भाटियों ने दिल्ली की सेना को अपनी तलवार का पानी पिलाने का निश्चय […] - [जैसलमेर दुर्ग छोड़कर भाग गए भूख से व्याकुल तुर्की सैनिक (99)](https://bharatkaitihas.com/hungry-turkish-soldiers-fled-from-jaisalmer-fort/): जैसलमेर दुर्ग ऐसे विकट रेगिस्तान में स्थित था जहाँ सैंकड़ों मील दूर तक रेत के टीलों के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं देता था। तुर्की सैनिक इन परिस्थितियों में रहने के अभ्यस्त नहीं थे। अतः एक दिन उन्होंने जैसलमेर दुर्ग के टूटे हुए दरवाजों को कांटों की बाड़ से बंद किया तथा चुपचाप दुर्ग खाली […] - [बागी मंगोल वेश्याओं को लेकर जालोर से भाग गए (100)](https://bharatkaitihas.com/mongols-flee-from-jalore-with-their-prostitutes/): बागी मंगोल सैनिकों ने कहा कि वे राजा कान्हड़देव के मित्र हैं, उसके अधीन नहीं हैं। हम उसका आदेश स्वीकार नहीं कर सकते। राजा कान्हड़देव ने उन्हें चेतावनी दी कि वे हमारी शरण में हैं और हमारे राज्य में रह रहे हैं अतः उन्हें राजा का आदेश मानना होगा। सोमथनाथ से लौट रही अल्लाउद्दीन खिलजी […] - [रणथंभौर का जौहर (101)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-sneaked-into-the-ranthambore-fort/): अल्लाउद्दीन खिलजी के आक्रमणों के कारण राजपूताने के कई किलों में जौहर हुए। इनमें चित्तौड़ का जौहर, जालौर का जौहर, सिवाना का जौहर, जैसलमेर का जौहर तथा रणथंभौर का जौहर बहुत चर्चित हैं। अन्य किलों में भी जौैहर हुए। हिन्दू रानियों से लेकर दासियां, छोटी बच्चियां यहाँ तक कि अवयस्क लड़के भी जौहर की भीषण […] - [चित्तौड़ दुर्ग को मिट्टी में मिलाने निकल पड़ा अल्लाउद्दीन खिलजी (102)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-attacked-chittor-fort-to-demolish-it/): अल्लाउद्दीन खिलजी अब तक जैसलमेर तथा रणथंभौर के दुर्गों को जीत कर अधीन कर चुका था और अब उसकी आँख चित्तौड़ दुर्ग पर लगी हुई थी। ई.1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी एक विशाल सेना लेकर चित्तौड़ अभियान पर चल दिया। आगे बढ़ने से पहले हमें चित्तौड़ दुर्ग के इतिहास पर दृष्टि डालनी चाहिए। यह तो नहीं […] - [चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी को छीनना चाहता था अल्लाउद्दीन (103)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-wanted-to-snatch-the-queen-of-chittor/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने ई.1301 में रणथंभौर दुर्ग पर विजय प्राप्त करने के बाद ई.1303 में भारत के सबसे दुर्गम माने जाने वाले दुर्गों में से एक चित्तौड़ पर आक्रमण के लिए प्रस्थान किया। अल्लाउद्दीन चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी को छीनना चाहता था। चित्तौड़ दुर्ग गंभीरी और बेढ़च नदियों के संगम पर मेसा के पठार पर […] - [पृथ्वीराज रासो से आई है जायसी की पद्मावती (104)](https://bharatkaitihas.com/padmavati-of-jayasi-has-come-from-prithviraj-raso/): बहुत से लोग जायसी की पद्मावती को केन्द्रबिंदु बनाकर चित्तौड़ का इतिहास लिखने का प्रयास करते हैं किंतु इस ग्रंथ की नायिका जायसी की मौलिक रचना नहीं है, न ही वह चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी अथवा पद्मावती है। जायसी की पद्मिनी अथवा पद्मावती तो ‘पृथ्वीराज रासो’ नामक ग्रंथ से उधार ली हुई है। ई.1303 में […] - [राणा हमीर ने शत्रुओं को पत्थरों से बांधकर चित्तौड़ दुर्ग से नीचे गिरा दिया (105)](https://bharatkaitihas.com/rana-hamir-tied-enemies-with-stones-and-dropped-them-down-walls-of-chittor-fort/): एक दिन राणा हमीर ने चित्तौड़ दुर्ग पर आक्रमण किया। उसके सैनिक चुपचाप दुर्ग में प्रवेश करके दुर्ग की प्राचीरों तक जा पहुंचे और उन्होंने, मुस्लिम तथा चौहान सैनिकों को पत्थरों से बांध-बांधकर दुर्ग की दीवारों से नीचे गिरा दिया और दुर्ग पर अधिकार कर लिया। ई.1303 में अल्लाउद्दीन खिजली ने चित्तौड़ दुर्ग पर आक्रमण […] - [बंगाल में ब्रिटिश प्रभुसत्ता का विस्तार](https://bharatkaitihas.com/expansion-of-british-sovereignty-in-bengal/): बंगाल में मुस्लिम नवाब का शासन था। नवाब के परिवार में सत्ता की प्राप्ति के लिए षड़यंत्र चलते रहते थे। इस कारण ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा बंगाल में ब्रिटिश प्रभुसत्ता का विस्तार तेजी से किया जाना संभव हुआ। ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना तथा भारत में प्रवेश 1600 ई. में ब्रिटेन के कुछ व्यापारियों ने […] - [शहजादी फीरोजा ने वीरमदेव से विवाह करने का प्रण लिया (106)](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-feroza-pledged-to-marry-prince-veeramdev-of-jalore/): शहजादी फीरोजा की माता और महल की अन्य बेगमों ने शहजादी को समझाया कि वह हिन्दू है और तुम मुसलमान। दोनों का विवाह कैसे हो सकता है? परन्तु शहजादी फीरोजा ने बहुत हठ किया और मरने को तैयार हो गई। अतः बेगमों ने बादशाह को सूचित किया। ई.1303 में दिल्ली के सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने […] - [राजकुमार वीरमदेव के कटे सिर ने शहजादी से मुंह फेर लिया (107)](https://bharatkaitihas.com/veeramdevs-severed-head-turned-his-back-on-princess/): मुंहता नैणसी री ख्यात में आए विवरण के अनुसार राजकुमार वीरमदेव ने जालोर आकर अपने पिता रावल कान्हड़देव को बताया कि दिल्ली के बादशाह ने मुझे अपनी शहजादी फीरोजा से विवाह करने का लगन दिया है तो राजा कान्हड़देव ने सोचा कि बात बिगड़ गई। उसने कामदारों को बुलाकर शीघ्र ही किलेबन्दी करवाई तथा युद्ध […] - [जालोर पर आक्रमण किया शहजादी फीरोजा की धाय गुलबहिश्त ने (108)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-ferozas-nurse-gulabhisht-invaded-jalore/): पद्मनाभ तथा मुंहता नैणसी द्वारा दिए गए विवरणों के अनुसार जब जालोर के राजा कान्हड़देव ने अपने राजकुमार वीरमदेव का विवाह शहजादी फीरोजा से करने से मना कर दिया तो शहजादी दिल्ली लौट गई तथा अल्लाउद्दीन खिलजी ने शहजादी की धाय गुलबहिश्त के नेतृत्व में दिल्ली की सेना जालोर जालोर पर आक्रमण करने भेजी। पद्मनाभ […] - [सिवाना पर आक्रमण किया अल्लाउद्दीन खिलजी ने (109)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा अब तक गुजरात के अन्हिलवाड़ा, मालवा के मांडू, उज्जैन, धारा नगरी तथा चन्देरी एवं राजपूताने के जैसलमेर, रणथंभौर एवं चित्तौड़ जैसे राज्यों को जीतने के उपरांत भी जालोर का राज्य उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था इसलिए उसने जालोर पर अभियान करने का निश्चय किया किंतु जालोर पर अभियान करने से पहले […] - [मलिक काफूर कर्ण बाघेला की पुत्री देवलदेवी को उठा लाया (110)](https://bharatkaitihas.com/malik-kafur-stole-karnal-bazholas-daughter-devaladevi/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत के अभियानों की जिम्मेदारी अपने गुलाम मलिक काफूर को सौंपी जो खम्भात से खरीद कर लाया गया एक हिन्दू लड़का था और उसे खवासरा अर्थात् नपुंसक बनाकर एवं इस्लाम में परिवर्तित करके सुल्तान की सेवा में रखा गया था। अल्लाउद्दीन खिलजी का सपना पूरे भारत पर अधिकार करने का था। […] - [प्रताप रुद्रदेव ने मलिक काफूर को कोहीनूर हीरा दिया (111)](https://bharatkaitihas.com/pratap-rudra-dev-gave-malik-kafur-kohinoor-diamond/): ई.1310 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने मलिक काफूर को वारांगल पर आक्रमण करने भेजा। अल्लाउद्दीन ने मलिक काफूर को आदेश दिया कि यदि प्रताप रुद्रदेव सुल्तान की अधीनता स्वीकार कर ले और अपना कोष, घोड़े तथा हाथी समर्पित करे तो उससे सन्धि कर ली जाये और उसका राज्य न छीना जाये। मलिक काफूर ने एक विशाल […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की नीति (112)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4/): अल्लाउद्दीन खिलजी की नीति ने सिद्ध कर दिया कि केवल अनपढ़ ही शासन कर सकते हैं। उससे पहले दिल्ली का कोई भी सुल्तान इतना सफल सिद्ध नहीं हुआ था। अल्लाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर ने देवगिरि, वारांगल, द्वारसमुद्र तथा मदुरा को जीतकर उन्हें खिलजी सल्तनत के अधीन कर लिया तथा खिलजी का साम्राज्य उत्तर […] - [खिलजी का बाजार प्रबन्धन (113)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): दिल्ली के सुल्तानों के लिए बाजार प्रबन्धन शासन का कोई आधार ही नहीं था किंतु खिलजी का बाजार प्रबन्धन दिल्ली सल्तनत शासन में एक नवीन घटना थी। इसका अध्ययन दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों एवं इतिहासकारों के लिए कौतूहल का विषय है। नितांत अनपढ़ होने के उपरांत भी सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन के […] - [हिन्दू प्रजा पर अत्याचार किया अल्लाउद्दीन खिलजी ने (114)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने मुल्लाओं की सलाह पर हिन्दू प्रजा पर अत्याचार किया तथा हिन्दुओं की सम्पत्ति छीनकर उन्हें गरीब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपनी सम्पत्ति की रक्षा करने के लिए हिन्दुओं के सामने केवल यही एक रास्ता बचा था कि वे मुसलमान बन जाएं। अल्लाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली सल्तनत के शासन में बड़े […] - [तुर्की अमीरों का दमन (115)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%a8/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने तुर्की अमीरों का दमन करने के लिए उनकी शराब और वेश्याएं छीन लीं। तुर्की अमीर न तो शराब के बिना रह सकते थे और न वेश्याओं के बिना। इसलिए वे सुल्तान के विरुद्ध हो गए किंतु सुल्तान की शक्ति के कारण खुलकर बगावत नहीं कर सके। सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने एक ओर […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी का दण्डविधान (116)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-used-to-ampute-hands-and-feet-on-suspicion-of-minor-crime/): अल्लाउद्दीन खिलजी का दण्डविधान बहुत कठोर था। वह मामूली अपराध के संदेह में हाथ-पैर कटवा देता था। अपराधी को सरेआम कोड़े लगवाने से लेकर फांसी पर चढ़ाना उसके दण्डविधान के अनिवार्य अंग थे। अल्लाउद्दीन खिलजी ने तुर्की एवं गैर-तुर्की अमीरों की सम्पत्तियां छीनकर उन्हें इतना कमजोर कर दिया कि अब वे सुल्तान के विरुद्ध न […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की क्रूरता ने मिस्र के फैरोह को पीछे छोड़ दिया (117)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-murdered-humans-more-than-pharaohs-of-egypt/): भारत के इतिहास की पुस्तकें अल्लाउद्दीन खिलजी की क्रूरता के किस्सों से भरी पड़ी हैं। कहा जाता है कि उसने मनुष्यों का रक्तपात करने के मामले में मिस्र के फैरोह को भी पीछे छोड़ दिया। अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपनी सल्तनत को सैनिक शासन के आधार पर खड़ा किया जो उसके क्षमतावान रहने तक ही खड़ी […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी का शासन सर्वथा गौरवहीन था (118)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khiljis-rule-was-utterly-shameless/): कई इतिहासकारों की दृष्टि में अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली के सुल्तानों में सर्वश्रेष्ठ था किंतु कई अन्य इतिहासकार इस बात से सहमत नहीं हैं। वी. ए. स्मिथ ने उसके शासन को सर्वथा गौरवहीन बताते हुए लिखा है कि वह वास्तव में बड़ा ही बर्बर तथा क्रूर शासक था और न्याय का बहुत कम ध्यान रखता था। […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी के अंतिम दिन (119)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-used-to-cry-like-crazy-in-roar/): अल्लाउद्दीन खिलजी के अंतिम दिन अच्छे नहीं बीते। वह हर समय शराब के नशे में धुत्त रहता था और अपने महल में अकेला पड़ा हुआ पागलों की तरह दहाड़ें मार कर रोता था! अल्लाउद्दीन खिलजी का जन्म ई.1266 में हुआ था। तीस साल की आयु में अर्थात् ई.1296 में वह सुल्तान बना था और ई.1316 […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की बेगम से एक किन्नर ने विवाह कर लिया (120)](https://bharatkaitihas.com/kinnar-married-sultans-begum/): मलिक काफूर ने अल्लाउद्दीन खिलजी की बेगम मलिका-ए-जहाँ की सारी सम्पत्ति छीन ली तथा मलिका को उसके पुत्र मुबारक खाँ के साथ ग्वालियर के जेल में बन्द कर दिया। यद्यपि मरहूम सुल्तान अल्लाउद्दीन के दोनों बड़े पुत्र अल्लाउद्दीन के समय से ही कारागार में बंद थे तथापि वे किसी भी समय मलिक काफूर के लिए […] - [सुल्तान मुबारक खाँ नंगा होकर दरबार में दौड़ने लगा (121)](https://bharatkaitihas.com/sultan-mubarak-khan-got-naked-and-started-running-in-court/): सुल्तान मुबारक खाँ अल्लाउद्दीन खिलजी का तीसरे नम्बर का पुत्र मुबारक खाँ मलिक काफूर तथा अपने छोटे भाई शिहाबुद्दीन उमर की हत्या करके मुबारक शाह के नाम से स्वयं सुल्तान बन गया। उसने अपने बड़े भाई खिज्र खाँ की हत्या करके उसकी पत्नी देवलदेवी को भी छीन लिया। उन्हीं दिनों मुबारक शाह ने अपने अन्य […] - [तुर्की अमीर इस्लाम के नाम पर भारतीय अमीरों को नष्ट करने लगे! (122)](https://bharatkaitihas.com/turkish-ministers-destroyed-indian-ministers-in-name-of-islam/): जब नासिरुद्दीन खुसरोशाह अल्लाउद्दीन खिलजी के पुत्र को मारकर दिल्ली का सुल्तान बन गया तो तुर्की अमीर इस परिवर्तन को सहन नहीं कर सके। वे किसी भारतीय मुसलमान को सुल्तान के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते थे। इसलिए तुर्की अमीर इस्लाम के नाम पर भारतीय अमीरों को नष्ट करने लगे! गुजरात के एक हिन्दू […] - [गाजी मलिक भारत का सुल्तान बन गया (123)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95/): गाजी मलिक ने सिबिस्तान, मुल्तान तथा समाना के उन तुर्की सेनापतियों से सहयोग मांगा जो एक हिन्दुस्तानी मुसलमान को सुल्तान के रूप में नहीं देखना चाहते थे। इन प्रांतों में नियुक्त तुर्की मूल के बहुत से अधिकारी गाजी मलिक का सहयोग करने को तैयार हो गए। अंतिम खिलजी सुल्तान मुबारकशाह को मारकर एक भारतीय मुसलमान […] - [बुद्ध के सामाजिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी - 6](https://bharatkaitihas.com/general-knowledge-quiz-social-thoughts-of-mahatma-buddha/): बुद्ध के सामाजिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी – 6 में महात्मा बुद्ध के सामाजिक विचारों के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: बौद्ध धर्म का एक प्रमुख तत्त्व करुणा है। करुणा के कितने भेद कहे गए हैं? उत्तर: करुणा के तीन भेद हैं- (1.) स्वार्थमूलक करुणा: इस करुणा में स्वार्थ होता है। […] - [महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी: 5](https://bharatkaitihas.com/general-knowledge-quiz-religious-thoughts-of-mahatma-buddha/): महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी: 5 में महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचारों के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: अष्टांग-पथ के तीन प्रधान अंग कौनसे हैं? उत्तर: अष्टांग-पथ का अनुसरण करने से मनुष्य के भीतर शील, समाधि और प्रज्ञा का उदय होता है जो कि बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग […] - [बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्त : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-4](https://bharatkaitihas.com/chief-principles-of-boddh-dharma-quiz/): बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्त : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-4 में बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धांतों एवं दर्शन के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: महात्मा बुद्ध ने कितने सत्य बताए हैं? उत्तर : चार। 2. प्रश्न: महात्मा बुद्ध के चार सत्यों को क्या कहा जाता है? उत्तर : चार आर्य-सत्य अथवा चत्वारि आर्य […] - [महात्मा बुद्ध का परिचय : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-3](https://bharatkaitihas.com/introduction-of-mahatma-buddha-quiz/): महात्मा बुद्ध का परिचय : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-3 में महात्मा बुद्ध का जीवन परिचय एवं उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: बौद्ध धर्म के प्रवर्तक कौन थे? उत्तर: महात्मा बुद्ध। 2. प्रश्न: बौद्ध धर्म को किस धर्म के विरुद्ध धार्मिक क्रांति माना जाता है? उत्तर: ब्राह्मण धर्म […] - [प्राचीन भारतीय साहित्य प्रनोत्तरी-2](https://bharatkaitihas.com/ancient-indian-literature-quiz/): प्राचीन भारतीय साहित्य प्रनोत्तरी-2 में भारत के प्राचीन साहित्य के सम्बन्ध में परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न तथा उनके उत्तर लिखे गए हैं। 1. प्रश्न: भारतीयों को लिपि का ज्ञान कब हुआ? उत्तर: ई.पू. 2500 में लिपि की जानकारी हो चुकी थी। 2. प्रश्न: भारत में सबसे प्राचीन उपलब्ध हस्तलिपियाँ कितनी पुरानी हैं? उत्तर: […] - [सभ्यता एवं संस्कृति प्रश्नोत्तरी 1](https://bharatkaitihas.com/civilization-and-culture-quiz/): प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति प्रश्नोत्तरी में भारत की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के सम्बन्ध में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न तथा उनके उत्तर लिखे गए हैं। 1. प्रश्न : सभ्यता का शाब्दिक अर्थ क्या होता है? उत्तर : सभा में बैठने की योग्यता। सभायाम् अर्हति इति। 2. प्रश्न : पाश्चात्य विद्वानों के […] - [गयासुद्दीन तुगलक ने हिन्दू प्रजा पर धन रखने से रोक लगा दी (124)](https://bharatkaitihas.com/ghazi-tughlaq-prohibited-the-hindu-subjects-from-keeping-wealth/): तुर्की अमीरों ने हिन्दुस्तानी मुस्लिम अमीरों को परास्त करके खुसरोशाह को मार दिया और दिपालपुर का गवर्नर गाजी मलिक तुगलक ‘गयासुद्दीन तुगलक गाजी’ के नाम से दिल्ली का सुल्तान बन गया। उस समय सल्तनत की दशा बड़ी शोचनीय थी। इस कारण नये सुल्तान के समक्ष कई कठिनाइयां मुँह बाये खड़ी थीं। केन्द्रीय सरकार के शक्तिहीन […] - [जूना खाँ ने सुल्तान को तम्बू के नीचे दबाकर मार दिया (125)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81/): खिलजियों के पतन के बाद भारत में मुस्लिम सल्तनत की इमारत डोलने लगी थी किंतु गयासुद्दीन तुगलक ने भारत में मुस्लिम राज्य को फिर से मजबूत कर दिया। उसके दुर्भाग्य से उसका पुत्र जूना खाँ अत्यंत महत्त्वाकांक्षी था जो जल्दी ही दिल्ली का सुल्तान बनना चाहता था, इसलिए जूना खाँ ने छल से सुल्तान गयासुद्दीन […] - [मुहम्मद तुगलक (126)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95/): शहजादे जूना खाँ ने अपने पिता सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक की हत्या कर दी और स्वयं मुहम्मदशाह तुगलक के नाम से दिल्ली का सुल्तान बन गया। निजामुद्दीन औलिया और अब्बासी खलीफा ने मुहम्मद बिन तुगलक को दिल्ली का सुल्तान मान लिया! सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक के अति महत्त्वाकांक्षी पुत्र जूना खाँ ने ई.1325 में अपने पिता की […] - [किसानों की हत्या कर दी मुहम्मद तुगलक ने (127)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-captured-and-killed-the-peasants-from-the-jungles/): मुहम्मद तुगलक भारत में इस्लाम का राज्य स्थापित करना चाहता था। इसलिए वह हिन्दू किसानों की आर्थिक स्थिति नष्ट करके मुसलमानों की सम्पत्ति बढ़ाना चाहता था। उसने बहुत बड़ी संख्या में जंगलों में छिपे हुए हिन्दू किसानों की हत्या कर दी। मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद जनता में सोने-चांदी की […] - [धरती उबलने वाली है](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): अब यह कोई अनुमान की बात नहीं है, न ही कोई भविष्यवाणी है, अब यह एक सत्य है जो सबको नंगी आंखों से दिखाई दे रहा है कि धरती उबलने वाली है। धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि आगामी 50 वर्षों में धरती पर तापक्रम बढ़ने की यही गति बनी रहती है […] - [कोलवी की बौद्ध गुफाएं](https://bharatkaitihas.com/buddhist-caves-of-kolvi-and-hatyagouda/): कोलवी की बौद्ध गुफाएं राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित हैं। इन्हीं गुफाओं के पास हात्यागौड़ की बौद्ध गुफाएं भी स्थित हैं। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित बौद्ध गुफाएं तथा कोलवी की बौद्ध गुफाएं भी अधिक दूरी पर स्थित नहीं हैं। भगवान बुद्ध कभी राजस्थान नहीं आये किंतु उनके निर्वाण के बाद के 1000 […] - [स्वात में बामियान दोहराया जायेगा](https://bharatkaitihas.com/will-bamiyan-be-repeated-in-swat/): पाकिस्तान के धुर पश्चिम में स्वात क्षेत्र स्थित है। यह हरी-भरी पहाड़ियों वाला अत्यंत सुंदर क्षेत्र है। इसीलिये इसे स्वात कहा जाता है। स्वात शब्द ‘‘स्वाति’’ का अपभ्रंश है जिसका अर्थ होता है- सूर्य की पत्नी। यह क्षेत्र सचमुच इतना सुंदर है कि इसे सूर्य की पत्नी कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। किसी […] - [दिल्ली से दौलताबाद (128)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6/): जब मुहम्मद बिन तुगलक अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद ले गया तब दिल्ली के लोग गालियां लिखे कागज तीरों में बांधकर मुहम्मद बिन तुगलक के महल में फैंकते थे! मुहम्मद बिन तुगलक ने दो-आब के क्षेत्र में खेती पर लगने वाले कर में अतिशय वृद्धि कर दी जिसके कारण हिन्दू किसान अपने घरों एवं खेतों […] - [तुगलक की सांकेतिक मुद्रा को जनता ने विफल कर दिया (129)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): चौदहवीं शताब्दी ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक ने सोने-चांदी के सिक्कों के स्थान पर ताम्बे के सिक्के चलाए। इसे तुगलक की सांकेतिक मुद्रा कहा जाता है। लोगों ने अपने घरों में ताम्बे के सिक्के ढाल लिए तथा उनके बदले में राजकोष से सोने-चांदी के सिक्के ले लिए। मुहम्मद बिन तुगलक ने दक्षिण भारत में स्थाई […] - [कराजल पर हमला कर दिया मुहम्मद बिन तुगलक ने (130)](https://bharatkaitihas.com/karajal-was-attacked-by-muhammad-tughlaq-for-the-women/): सुंदर कराजली औरतें पाने के लिए मुहम्मद बिन तुगलक ने कराजल पर हमला कर दिया किंतु मुहम्मद और उसके सैनिक उन सुंदर औरतों को छू भी नहीं पाए। मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में भारत में घट रही घटनाओं के समाचार मध्यएशिया तक भी पहुंच रहे थे। दो-आब में कर बढ़ा देने तथा राजधानी […] - [बागी अमीरों का दमन करने के लिए उनकी खाल में भूसा भरा गया (131)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%a8/): अफगानिस्तान में मंत्रियों को अमीर कहा जाता था। मुहम्मद बिन तुगलक के अमीरों ने बड़ी संख्या में विद्रोह किए। बागी अमीरों का दमन करने के लिए मुहम्मद बिन तुगलक ने उनकी खाल में भूसा भरवा कर देश भर में घुमाया। पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि मुहम्मद बिन तुगलक ने करांचल, हिमाचल, नगरकोट […] - [विजयनगर तथा चित्तौड़गढ़ स्वतंत्र हो गए (132)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8c%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc/): जिस समय मुहम्मद बिन तुगलक अपनी अमीरों एवं प्रांतीय शासकों की बगावतों को कुचलने में लगा हुआ था, उस समय अवसर पाकर विजयनगर तथा चित्तौड़गढ़ के हिन्दू राज्य स्वतंत्र हो गए। विजयनगर तथा चित्तौड़गढ़ के ये दो बड़े राज्य दिल्ली के मुसलमानों तथा प्रांतीय मुस्लिम शासकों से कई सौ साल तक लड़ते रहे। मुहम्मद बिन […] - [दक्षिण भारत के शियाराज्य विजयनगर के शत्रु हो गए (133)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a3-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/): विजयनगर के अस्तित्व में आने के बाद दक्षिण भारत में बहमनी शिया राज्य की स्थापना हुई जो कुछ समय बाद पाँच शिया राज्यों में टूट गया। दक्षिण भारत के शियाराज्य विजयनगर के हिन्दू राज्य के कट्टर शत्रु हो गए। देश भर में हिन्दू राजाओं ने दिल्ली सल्तनत के विरुद्ध विद्रोह करके अपने राज्य स्वतंत्र करवा […] - [मुहम्मद बिन तुगलक को पागल घोषित कर दिया मुल्ला-मौलवियों ने (134)](https://bharatkaitihas.com/mullah-clerics-declared-muhammad-bin-tughluq-as-insane/): मुहम्मद बिन तुगलक के जीवन काल में ही दक्षिण भारत में हसन गंगू नामक एक ईरानी अमीर ने बहमनी सल्तनत की स्थापना कर ली जो आगे चलकर पांच शिया राज्यों में विभक्त हो गया। दक्षिण भारत के शियाराज्य हर समय आपस में लड़ते रहते थे किंतु विजयनगर के हिन्दू राज्य से लड़ने के लिए एक […] - [हिन्दू खतरे में थे ! हिन्दुओं के चोटी, पोथी और मूर्ति भी खतरे में थे (135)](https://bharatkaitihas.com/chotis-pothis-and-idols-of-hindus-were-in-danger/): मुहम्मद बिन तुगलक के काल में हिन्दू खतरे में थे। उनकी चोटी, पोथी और मूर्तियाँ भी खतरे में थीं। उत्तर भारत में सुन्नी शासक तथा दक्षिण भारत में शिया शासक हिन्दुओं को निरंतर नष्ट कर रहे थे किंतु इस काल में हिन्दू जाति भी वीरता पूर्वक मुसलमानों से संघर्ष कर रही थी। मुहम्मद बिन तुगलक […] - [फीरोजशाह तुगलक और ख्वाजाजहाँ ! (136)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be/): यद्यपि मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद दिल्ली तख्त के दो दावेदार उठ खड़े हुए- फीरोजशाह तुगलक और ख्वाजाजहाँ ! यह तुर्की अमीरों पर निर्भर करता था कि वे किसे सुल्तान बनाएं ! यद्यपि मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने चचेरे भाई फीरोजशाह तुगलक को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था तथापित मुहम्मद बिन तुगलक का […] - [फीरोजशाह तुगलक उलेमाओं की कठपुतली बन गया (137)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95/): मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद राज्य के प्रधानमंत्री ख्वाजाजहाँ ने मुहम्मद के अवयस्क भांजे को मुहम्मद का दत्तक पुत्र घोषित करके उसे सुल्तान बना दिया किंतु सल्तनत के अमीरों ने मुहम्मद के 42 वर्षीय चचेरे भाई फीरोजशाह तुगलक को सुल्तान मनोनीत किया। इस पर फीरोजशाह तुगलक ने प्रधानमंत्री ख्वाजाजहाँ तथा उसके द्वारा घोषित […] - [फीरोज तुगलक का शासन (138)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): फीरोज तुगलक का शासन इस्लाम के सिद्धांतों पर चलता था जिसमें अपराधियों एवं विधर्मियों को कठोर दण्ड दिया जाता था और विधर्मियों के लिए कठोर कर-व्यवस्था लागू की गई थी। फीरोज तुगलक को मुल्ला-मौलवियों की कृपा से सुल्तान का तख्त प्राप्त हुआ था, इसलिए वे दीन का मुखौटा लगाकर तथा सल्तनत के कार्यों में मुल्ला-मौलवियों […] - [फीरोज तुगलक की कट्टरता (139)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be/): दिल्ली सल्तनत के इतिहास में फीरोज तुगलक की कट्टरता कुख्यात है। वह हिन्दुओं को तो जीवित ही आग में झौंक देता था किंतु मुस्लिम स्त्रियों का करुण क्रंदन नहीं सुन सकता था! फीरोज तुगलक ने पिछले सुल्तान का परलोक सुधारने के लिए जनता से क्षमापत्र लिखवाकर उसकी कब्र में गढ़वाए तथा इस्लामिक शिक्षा देने के […] - [फीरोजशाह तुगलक की करनीति (140)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): फीरोजशाह तुगलक की करनीति बड़ी विचित्र थी। वह हिन्दुओं से तो कर लेना चहाता था किंतु मुसलमानों से कर नहीं लेना चाहता था अपितु जब कोई मुस्लिम सेनापति या प्रांतपति किसी हिन्दू राज्य को लूटता था तो फीरोजशाह तुगलक द्वारा लूट के माल में से पांचवा हिस्सा लिया जाता था। फीरोजशाह तुगलक ने हिन्दुओं एवं […] - [फीरोजशाह तुगलक का शासन (114)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): फीरोजशाह तुगलक का शासन क्रूरता की सभी सीमाओं को पार कर गया था वह हिन्दू अपराधी को महल के समक्ष जीवित जलवा देता था जबकि मुस्लिम अपराधी पर रहम दिखाकर छोड़ देता था। फीरोज तुगलक ने हिन्दुओं एवं मुसलमानों के लिए अलग-अलग युद्ध नीति अपनाई। इस कारण उसने नगरकोट तथा जाजनगर के हिन्दू राज्यों को […] - [फीरोजशाह तुगलक की मृत्यु (142)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81/): अस्सी वर्ष की आयु में फीरोजशाह तुगलक की मृत्यु हो गई। वह सिकंदर लोदी और औरंगजेब की भांति मजहबी संकीर्णता से ग्रस्त था और हिन्दुओं पर अत्याचार करने का एक भी अवसर हाथ से नहीं जाने देता था। फीरोजशाह तुगलक ने मुल्ला-मौलवियों की सलाह पर अपने शासन का संचालन किया। इस कारण राज्य में सुन्नी […] - [ब्राह्मणों पर अत्याचार करता था फीरोजशाह तुगलक (143)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a3%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/): फीरोजशाह तुगलक वैसे तो समस्त हिन्दुओं पर अत्चार करता था किंतु वह ब्राह्मणों पर अत्याचार करने में सभी सीमाएँ लांघ जाता था। उसने ब्राह्मणों पर जजिया लगा दिया तथा एक मूर्तिपूजक ब्राह्मण को लड़की की मुहर के साथ जीवित जला दिया! फीरोजशाह तुगलक की धर्मांधता ने दिल्ली सल्तनत के शासनतंत्र में कई तरह की विसंगतियां […] - [तुगलक वंश का पतन (144)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): फीरोजशाह तुगलक के जीवनकाल में ही तुगलक वंश का पतन आरम्भ हो गया था। उसके मरने के बाद तो तुगलक वंश का पतन बड़ी तेजी से हुआ। सल्तनत का वजीर ख्वाजा जहाँ अय्याशी करता रहा और तुगलकों की सल्तनत बिखरती रही। फीरोजशाह तुगलक की मजहबी संकीर्णता ने दिल्ली सल्तनत के शासनतंत्र में कई तरह की […] - [तुर्की अमीरों की अय्याशी (145)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80/): तुगलक कालीन तुर्की तुर्की अमीरों की अय्याशी देखते ही बनती थी। वे भी सुल्तानों की तरह अपने-अपने दरबार सजाते थे जिनमें वे सल्तनत के शासन के सम्बन्ध में अथवा सल्तनत की समस्याओं के सम्बन्ध में विचार-विमर्श करने के स्थान पर वेश्याएँ नचाते थे। इस कारण दिल्ली सल्तनत तेजी से बिखरने लगी। सुल्तान महमूद नासिरूद्दीन के […] - [तुगलक शासकों की कमजोरियाँ (146)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): तुगलक शासकों की कमजोरियाँ तुगलक वंश के पतन का सबसे बड़ा कारण बनीं। तुगलकों से पहले किसी भी मुस्लिम राजवंश ने भारत में इतने बड़े क्षेत्र पर शासन नहीं किया था। यह एक आश्चर्य की ही बात है कि तुगलक वंश के अनेक सुल्तानों में से केवल मुहम्मद बिन तुगलक ही शासन करने का वास्तविक […] - [तैमूर लंग ने भटनेर में दस हजार हिन्दुओं को मार डाला (147)](https://bharatkaitihas.com/timur-lung-killed-ten-thousand-hindus-in-the-fort-of-bhatner/): तैमूर लंग को ज्ञात था कि दिल्ली का तुगलक वंश अत्यन्त दुर्बल है जिसके कारण भारत में राजनीतिक अराजकता तथा भ्रष्टाचार का प्रकोप है। तैमूर लंग भारत की इस कमजोरी का लाभ उठाना चाहता था। साथ ही वह भारत की समृद्धि से भी अवगत था और भारत की अथाह सम्पदा को लूटकर अपनी राजधानी समरकंद […] - [खानजादः बेगम मुगलिया राजनीति की आधार थी (73)](https://bharatkaitihas.com/khanzadah-begum-was-main-piller-of-mughal-politics/): दिसम्बर 1545 में जब हुमायूँ ने कांधार पर अधिकार कर लिया तो वह कांधार बैराम खां के संरक्षण में देकर अपनी बुआ खानजादः बेगम के साथ काबुल के लिए रवाना हुआ ताकि मिर्जा कामरान से निबटा जा सके किंतु कबलचाक नामक स्थान पर अचानक ही खानजादः बेगम का निधन हो गया। हुमायूँ के इतिहास में […] - [कामरान हुमायूँ को चकमा देकर भाग गया (74)](https://bharatkaitihas.com/kamran-escaped-by-dodging-humayun/): कामरान की सेना के बहुत से अमीर और बेग कामरान को छोड़ भागे और अपनी-अपनी सेनाएं लेकर हुमायूँ की सेवा में आ गए। इनमें से बहुतों के पास घोड़े और हथियार नहीं थे। हुमायूँ ने तुर्कमान लोगों से एक हजार घोड़े खरीदे तथा घोड़ों के व्यापारियों से कहा कि जब काबुल विजय हो जाएगी, तब […] - [चालीस लड़कियां हरे कपड़े पहनकर पहाड़ों पर घूमने लगीं (75)](https://bharatkaitihas.com/forty-girls-wearing-green-clothes-started-walking-in-the-mountains/): कुछ दिन बाद नौरोज का त्यौहार मनाया गया। इस अवसर पर चालीस लड़कियां हरे कपड़े पहनकर पहाड़ों पर घूमने लगीं। ये जवान और खूबसूरत लड़कियां कई दिनों तक पहाड़ों पर विचरण करके अपने रूप की छटा बिखेरती रहीं ताकि दूर-दूर तक यह संदेश चला जाए कि बादशाह हुमायूँ के राज्य में हर ओर सुख-शांति है। […] - [हुमायूँ के मित्रों की औरतें कामरान ने एक-दूसरे को दे दीं (76)](https://bharatkaitihas.com/kamran-gave-the-women-of-humayuns-friends-to-each-other/): जब कामरान किसी भी तरह से हुमायूँ को नीचा नहीं दिखा सका तो उसने और अधिक नीचता करने का निश्चय किया तथा हुमायूँ के मित्रों की औरतें एक-दूसरे को बांट दीं! वैसे भी कोई मुगल बादशाह या अमीर किसी की भी औरत को भोगने में शर्म नहीं करता था। हुमायूँ का चचेरा भाई मिर्जा सुलेमान […] - [तोपों के आगे अकबर को लटका दिया कामरान ने (77)](https://bharatkaitihas.com/kamran-hangs-akbar-in-front-of-cannons/): कामरान ने अपने सैनिकों को आदेश दिए कि वे तोपों के आगे अकबर को लटका दें। अकबर हुमायूँ का पुत्र था जिसे कामरान हुमायूँ के शिविर से उठा लाया था। कामरान के आदेश से पांच वर्ष के बालक अकबर को काबुल के किले की दीवार पर रस्सियों से लटका दिया गया। जिस समय कामरान काबुल […] - [काबुल दुर्ग में घुसकर हुमायूँ ने औरतों को छुड़ाया (78)](https://bharatkaitihas.com/humayun-entered-kabul-at-midnight-and-rescued-the-women/): जब बहुत दिनों तक काबुल दुर्ग के बाहर हुमायूँ और कामरान की सेनाओं में युद्ध चलता रहा तब हुमायूँ की बेगमों ने ख्वाजा दोस्त मदारिचः नामक एक फकीर को बादशाह हुमायूँ के पास भेजकर कहलवाया कि खुदा के लिए मिर्जा कामरान जो कुछ भी चाहता है, उसे मान लीजिए और अपने गुलामों अर्थात् हमें इस […] - [हुमायूँ की सेना उसे उजबेगों के सामने छोड़कर भाग गई (79)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-army-ran-away-leaving-him-alone-in-front-of-the-uzbegs/): हुमायूँ की सेना की कायरता तथा भाईयों के असहयोग के कारण हुमायूँ को एक बार फिर से शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा था किंतु इस समय हुमायूँ अपने विद्रोही भाइयों के विरुद्ध कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था। अप्रैल 1547 में काबुल पर अधिकार करने के बाद हुमायूँ ने अपने भााइयों को […] - [चचेरे भाई की पत्नी को कामरान ने प्रेमपत्र भिजवाया (80)](https://bharatkaitihas.com/baburs-son-writes-love-letter-to-cousins-wife/): जिस समय हुमायूँ उज्बेगों के विरुद्ध बलख अभियान में व्यस्त था उस समय मिर्जा कामरान और मिर्जा अस्करी को बलख आने के आदेश दिए गए थे किंतु उन दोनों ने पुरानी चाल पर कायम रहते हुए न केवल बादशाह के आदेश की अवहेलना की अपितु हुमायूँ की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर मिर्जा कामरान ने अपने […] - [हरम बेगम ने अपने जेठ हुमायूँ को विशाल सेना तैयार करके दी (81)](https://bharatkaitihas.com/haram-begum-gave-her-brother-in-law-humayun-by-preparing-a-huge-army/): जब मिर्जा सुलेमान और उसका पुत्र मिर्जा इब्राहीम बादशाह हुमायूँ को काबुल पहुंचाकर उससे विदा लेने लगे तो हुमायूँ ने उनके माध्यम से सुलेमान की पत्नी हरम बेगम के नाम संदेश भिजवाया कि भयओ से कहना कि बहुत जल्दी एक सेना सुसज्जित करके भेज दे। हरम बेगम कामरान से अपने अपमान का बदला लेना चाहती […] - [कामरान का पश्चाताप देखकर बुग्गा फाड़कर रोने लगा हुमायूँ! (82)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%aa/): बाबर ने हुमायूँ को अपना उत्तराधिकारी बनाया था किंतु हुमायूँ के तीनों सौतेले भाइयों ने हुमायूँ से बगावत करके जीवन भर उससे युद्ध किया। इस कारण हुमायूँ के दुश्मनों ने हुमायूँ की सल्तनत नष्ट कर दी। इस पर भी हुमायूँ अपने सौतेले भाइयों से इतना प्रेम करता था कि कामरान का पश्चाताप देखकर हुमायूँ को […] - [हुमायूँ की कृपा और भाइयों की दुष्टता (83)](https://bharatkaitihas.com/despite-humayuns-blessings-his-brothers-did-not-give-up-their-wickedness/): हुमायूँ के विरुद्ध बारबार बगावत करने पर भी हुमायूँ अपने भाइयों से प्रेम ही करता रहा। हुमायूँ की कृपा देखकर उसके सौतेले भाइयों की दुष्टता छोड़ देनी चाहिए थी किंतु हुमायूँ के भाइयों ने अपना स्वभाव नहीं बदला, उन्होंने प्रेम की भाषा नहीं समझी और पूर्ववत् दुष्टता का दामन पकड़े रहे। हुमायूँ ने अपने गद्दार […] - [हुमायूँ की हत्या का षड़यंत्र रचा अमीरों ने (84)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-nobles-conspired-to-kill-humayun-on-the-battlefield/): मिर्जा कामरान तथा मिर्जा अस्करी के पक्ष के अमीर हुमायूँ को प्रत्यक्ष युद्ध में नहीं जीत सकते थे। इसलिए कामरान तथा अस्करी ने फिर से षड़यंत्र रचना आरम्भ कर दिया। कामरान के पक्ष के मुगल अमीरों ने हुमायूँ को युद्धक्षेत्र में ही निबटाने के लिए हुमायूँ की हत्या का षड़यंत्र रचा।  जब हुमायूँ बल्ख में […] - [हुमायूँ की मृत्यु की अफवाह फैला दी कामरान ने (85)](https://bharatkaitihas.com/kamran-spread-the-rumor-of-humayuns-death/): हुमायूँ जीवन भर अपने सौतेले भाई मिर्जा कामरान से प्रेम करता रहा और उसके षड़यंत्रों को क्षमा करके उसके प्रति उदार व्यवहार करता रहा किंतु बादशाहत के लालच में अंधा कामरान हुमायूँ के विरुद्ध षड़यंत्र रचता रहा। उसने युद्धक्षेत्र में हुमायूँ की मृत्यु की अफवाह फैला दी। यद्यपि इतिहासकारों ने हुमायूँ पर आलसी, अदूरदर्शी तथा […] - [कामरान दरवेश बन गया (86)](https://bharatkaitihas.com/kamran-became-a-dervish-by-shaving-his-hair/): जब कामरान ने किचबाक के युद्ध में हुमायूँ की मृत्यु की अफवाह फैला दी तो बहुत से लोगों को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। कुछ ही दिनों में लोगों को पता चल गया कि हुमायूँ जीवित है तथा मिर्जा हिंदाल एवं मिर्जा सुलेमान ने उसे ढूंढ लिया है। जब यह बात कामरान को ज्ञात […] - [मिर्जा हिंदाल का तरकस देखकर कामरान ने अपनी पगड़ी धरती पर फैंक दी (87)](https://bharatkaitihas.com/seeing-hindals-pity-kamran-threw-his-turban-on-the-ground/): उधर ख्वाजा इब्राहीम ने मिर्जा हिंदाल के शव को पहचान लिया तथा उसे उठाकर मिर्जा हिंदाल के डेरे पर ले गया। उसने हुमायूँ के समक्ष मिर्जा हिंदाल की मृत्यु का समाचार प्रकट नहीं किया, अपितु कहा कि इस विजय पर मिर्जा हिंदाल ने आपको बधाई भिजवाई है। जब कामरान काबुल छोड़कर भाग गया ओर हुमायूँ […] - [हुमायूँ को चकमा देकर कामरान अफगानिस्तान से भारत भाग गया (88)](https://bharatkaitihas.com/dodging-humayun-kamran-fled-from-afghanistan-to-india/): अब हुमायूँ कामरान से सदैव के लिए छुटकारा पाने का निश्चय कर चुका था। इसलिए वह सेना लेकर कामरान को ढूंढने लगा। कामरान भी समझ गया कि अंब हमायूँ के हाथों में पड़कर बचना कठिन है। इसलिए वह हुमायूँ को चकमा देकर अफगानिस्तान से भारत भाग जाने की जुगत भिड़ाने लगा! मिर्जा हिंदाल की मृत्यु […] - [अकबर के शौक देखकर हुमायूँ चिंतित हो गया (89)](https://bharatkaitihas.com/humayun-got-worried-seeing-akbars-hobbies/): किशोरावस्था की दहलीज पर पैर रख चुका अकबर पहाड़ी ऊंटों एवं अरबी घोड़ों की पीठ पर बैठकर उन्हें तेज गति से दौड़ाने में अपना दिन व्यतीत करता था। मुल्लाजाद असामुद्दीन अकबर को पढ़ाई लिखाई की ओर नहीं खींच सका तो वह भी कबूतर उड़ाने के अपने पुराने शौक में व्यस्त हो गया। धीरे-धीरे अकबर को […] - [बाबर का बेटा औरतों के कपड़े पहनकर भाग निकला (90)](https://bharatkaitihas.com/baburs-son-escaped-wearing-womens-clothes/): हुमायूँ के भय से बाबर का बेटा मिर्जा कामरान बीहसूद से निकल कर हिन्दूकुश पर्वत को पार करके भारत चला आया। इस समय कामरान के पास केवल 12 अनुचर थे जिनमें अमीर तथा सेवक दोनों ही शामिल थे। भारत आकर मिर्जा कामरान को ज्ञात हुआ कि इस समय दिल्ली का शासक इस्लामशाह सूरी पंजाब के […] - [कामरान की हत्या करने को कहा मुल्लाओं ने (91)](https://bharatkaitihas.com/the-mullahs-asked-the-emperor-to-kill-kamran/): हुमायूँ ने अपने दरबारियों की यह बात मानने से अस्वीकार कर दिया तथा उनसे कहा कि मरहूम बादशाह बाबर ने इस संसार को छोड़ते समय मुझे आदेश दिया था कि मैं अपने भाइयों को क्षमा करूं चाहे वे मेरे विरुद्ध कितना भी अपराध क्यों न करें। मैं कुछ भी कर सकता हूँ किंतु अपने मरहूम […] - [कामरान की आंखों में नश्तर फिरवा दिया हुमायूँ ने (92)](https://bharatkaitihas.com/humayun-made-mirza-kamran-turn-a-sword-in-his-eyes/): हुमायूँ का सौतेला भाई मिर्जा कामरान बादशाहत पाने के लालच में जीवन भर हुमायूँ की पीठ में छुरी भौंकता रहा था, किंतु अब मुल्ला-मौलवियों के आदेश पर हुमायूँ ने कामरान की आंखों में नश्तर फिरवा दिया। हुमायूँ ने मुल्ला-मौलवियों को इस बात पर राजी कर लिया कि मिर्जा कामरान की आंखें फोड़ दी जाएं तथा […] - [भारत की जूतियां लेकर आया दरवेश (93)](https://bharatkaitihas.com/a-dervish-reached-kabul-from-india-with-shoes-for-humayun/): अबुल फजल ने बादशाह के पास आने वाले फकीरों के सम्बन्ध में दो विचित्र घटनाओं का उल्लेख किया है। वह लिखता है कि एक दिन एक दरवेश भारत की जूतियां लेकर हुमायूँ के पास पहुंचा और उसने बादशाह को भारत की जूतियां भेंट कीं। बादशाह को इससे पहले किसी ने भी ऐसी भेंट नहीं दी। […] - [शेरशाह सूरी राष्ट्रनिर्माता नहीं था (94)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शेरशाह सूरी एक धर्मांध शासक था किंतु अंग्रेजों के संरक्षण में लिखे गए इतिहास में क्रूर एवं धर्मांध शेरशाह सूरी को राष्ट्रनिर्माता घोषित कर दिया गया। साम्यवादी लेखकों ने भी उसे महान् राष्ट्रनिर्माता बताया किंतु वास्तव में शेरशाह सूरी राष्ट्रनिर्माता नहीं था। नवम्बर 1554 में हुमायूँ अकबर को अपने साथ लेकर भारत अभियान के लिए […] - [अफगान औरतें मुगलों की हवस बुझाने लगीं (95)](https://bharatkaitihas.com/the-afghans-handed-over-their-women-to-quench-the-lust-of-the-mughals/): सुप्रसिद्ध इतिहासकार पी. एन. ओक ने लिखा है कि दीपालपुर में पराजित होने के बाद अफगानों ने अपनी औरतें मुगलों को सौंप दीं। अफगान औरतें मुगलों की हवस बुझाने लगीं। ई.1545 में शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद उसका पुत्र जलाल खाँ सलीमशाह अथवा इस्लामशाह के नाम से दिल्ली का सुल्तान हआ। यद्यपि उसने आठ […] - [हुमायूँ की ठोकर से ताश के पत्तों की तरह ढह गई सूर सल्तनत (96)](https://bharatkaitihas.com/sur-sultanate-collapsed-like-a-pack-of-cards-due-to-humayuns-stumble/): शेर खाँ सूरी ने हुमायूँ के चौसा युद्ध तथा बिलग्राम युद्ध में हराकर हुमायूँ को हिन्दुस्तान से बाहर कर दिया था और सूर सल्तनत की स्थापना की थी किंतु जब हुमायूँ के अच्छे दिन आए तो हुमायूँ की ठोकर से ताश के पत्तों की तरह ढह गई सूर सल्तनत! पंजाब पर अधिकार हुमायूँ ने कालानूर, […] - [अबुल फजल का झूठ (97)](https://bharatkaitihas.com/abul-fazl-got-inspiration-from-babur-to-write-false-history/): अबुल फजल ने झूठा इतिहास लिखने की प्रेरणा बाबर से पाई थी। अबुल फजल का झूठ उसके ग्रंथ में हर ओर बिखरा पड़ा है। बाबर ने हर स्थान पर अपनी सेना की संख्या बहुत कम तथा शत्रु के सैनिकों की संख्या बहुत अधिक बताई है। अबुल फजल ने भी मुगलों का इतिहास लिखते समय ही […] - [हुमायूँ अपने हरम को काबुल से दिल्ली लाने के लिए बेचैन हो गया (98)](https://bharatkaitihas.com/humayun-became-desperate-to-bring-his-harem-from-kabul-to-delhi/): हुमायूँ दिल्ली पर अधिकार कर चुका था किंतु उसका हरम अभी तक काबुल में था। इसलिए हुमायूँ अपने हरम को काबुल से दिल्ली लाने के लिए बेचैन हो गया! जब हुमायूँ काबुल से भारत आया था तब उसकी सेना में कम्बर दीवाना नामक एक सेनापति भी शामिल था। जब हुमायूँ सरहिंद की विजय प्राप्त करके […] - [नकली हुमायूँ शाही महल की छत पर घूमता रहा (99)](https://bharatkaitihas.com/for-seventeen-days-fake-humayun-roamed-on-roof-of-royal-palace/): हुमायूँ दिल्ली के लाल किले में पुस्तकालय की सीढ़ियों से फिसल कर मर गया। कहीं दुश्मन इस खबर को सुनकर हमला न कर दें, इसलिए नकली हुमायूँ सत्रह दिन तक शाही महल की छत पर घूमता रहा! जब शाह अबुल मआली ने सुना कि बैराम खाँ हुमायूँ के बेटे जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर को लेकर सरहिंद […] - [बाबर के बेटे अदृश्य हो गए (100)](https://bharatkaitihas.com/baburs-sons-became-invisible-from-politics-of-india/): हुमायूँ की मृत्यु के साथ ही बाबर के बेटे अदृश्य हो गए। बाबर के चौथे बेटे हिन्दाल को बाबर के दूसरे बेटे कामरान ने मार डाला था। बाबर के दूसरे बेटे कामरान को हुमायूँ ने आंखें फोड़कर मक्का भेज दिया था। बाबर के तीसरे बेटे मिर्जा अस्करी को भी भीख मांगने के लिए मक्का भेजा […] - [शत्रुओं और समस्याओं की लम्बी सूची छोड़ गया बाबर का बेटा (101)](https://bharatkaitihas.com/baburs-son-left-behind-a-long-list-of-enemies-and-problems/): बाबर का बेटा हुमायूँ तो अचानक ही इस असार संसार से चला गया किंतु वह अपने के पुत्र जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के लिए शत्रुओं और समस्याओं की लम्बी सूची छोड़ गया। हुमायूँ तो अचानक ही इस असार संसार से चला गया था किंतु अपने वंशजों के लिए शत्रुओं एवं समस्याओं की लम्बी सूची छोड़ गया […] - [अमेजन पर उपलब्ध पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/history-books-at-amazon/): इस पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित एवं अमेजन पर उपलब्ध पुस्तकें लिंक सहित दी गई हैं। इन पुस्तकों के शीर्षक पर क्लिक करके अमेजन डॉट इन के स्टोर तक पहुंचा जा सकता है। विश्व इतिहास - [अनुक्रमणिका - रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/index-of-history-of-roman-empire-and-unification-of-italy/): अनुक्रमणिका – रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘पोप के देश में ग्यारह दिन’ के रोमन इतिहास सम्बन्धित अध्यायों के शीर्षक उपलब्ध कराए गए हैं। इन शीर्षकों पर क्लिक करके उन अध्यायों को पढ़ा जा सकता है। लेखकीय  1. यूरोप का भारत इटली 2. रिपब्बलिका […] - [पोप के देश में ग्यारह दिन - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-eleven-days-in-italy/): इस पुस्तक का मुद्रित संस्करण भी उपलब्ध है जिसे इस पृष्ठ पर दिए गए चित्र पर क्लिक करके अमेजन डॉट इन से क्रय किया जा सकता है। - [छत्रपति शिवाजी संघर्ष एवं उपलब्धियाँ अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-chhatrapati-shivaji-struggle-and-achievements/): यह सामग्री मुद्रित पुस्तक के रूप में भी उपलब्ध है जिसे अमेजन डॉट इन से क्रय किया जा सकता है। पुस्तक क्रय करने के लिए कृपया इमेज पर क्लिक करें। - [सरदार वल्लभ भाई पटेल : प्रेरक एवं रोचक प्रसंग - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-interesting-and-inspiring-events-of-sardar-patel/): भारत की राजनीति में सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसक सात्विक आचरण वाले नेता बहुत कम हुए हैं जिन्होंने निजी स्वार्थ को परे रखकर भारत माता की सेवा की। - [इक्ष्वाकु राजाओं की कथाएँ - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-of-tales-of-ikshvaku-kings/): इक्ष्वाकु राजाओं की कथाएँ शीर्षक से लिखी गई इस पुस्तक में इक्ष्वाकु राजाओं से सम्बन्धित धर्म एवं अध्यात्म की कथाएं हैं। इक्ष्वाकु राजाओं की कथाएँ – अनुक्रमणिका पर इस पुस्तक में दिए गए आलेखों का क्रम दिया गया है। पाठक प्रत्येक शीर्षक पर क्लिक करके उस कथा को पढ़ सकते हैं।  1. दधीचि के पौत्र […] - [सृष्टि निर्माण की कथाएँ - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/stories-of-life-evolution-of-universe/): सृष्टि निर्माण की कथाएँ पुस्तक में भारतीय पुराणों में आई सृष्टि निर्माण सम्बन्धी कथाओं का संकलन किया गया है तथा उनके वैज्ञानिक संदर्भ भी बताए गए हैं। - [जगद्गुरु शंकराचार्य एवं उनका दर्शन](https://bharatkaitihas.com/jagadguru-shankaracharya-and-his-philosophy/): जगद्गुरु शंकराचार्य का दर्शन उपनिषदों के दर्शन पर आधारित है। उन्होंने उपनिषदों की दार्शनिक व्याख्या करके भारतीय अध्यात्म एवं दार्शनिक ज्ञान को नई दिशा प्रदान की। वेदों की रचना लगभग ई.पू. 1000 तक पूर्ण हो चुकी थी। उनके बाद ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों, उपनिषदों एवं सूत्रों की रचना हुई। इन्हें वेदों का ही भाग माना जाता […] - [अनुक्रमणिका - दिल्ली सल्तनत की दर्द भरी दास्तान](https://bharatkaitihas.com/index-history-of-delhi-sultanate/): अनुक्रमणिका – दिल्ली सल्तनत की दर्द भरी दास्तान पृष्ठ पर डॉ. मोहन लाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक दिल्ली सल्तनत की दर्द भरी दास्तान के अध्यायों का क्रम दिया गया है। नीचे दिए गए शीर्षकों को क्लिक करके सम्बन्धित अध्याय तक पहुंचा जा सकता है। 1.            किताबें लिखे जाने से पहले पूरी दुनिया सनातन धर्म को […] - [प्राक्कथन - दिल्ली सल्तनत की दर्दभरी दास्तान](https://bharatkaitihas.com/preface-delhi-sultanate-ki-dard-bhari-dastan/): प्राक्कथन – दिल्ली सल्तनत की दर्दभरी दास्तान पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘दिल्ली सल्तनत की दर्दभरी दास्तान’ के अध्यायों के शीर्षक उपलब्ध कराए गए हैं। इन शीर्षकों पर क्लिक करके उन अध्यायों को पढ़ा जा सकता है। भारत आदिकाल से हिन्दुओं का देश है। सृष्टिकर्ता ने इस देश को प्राकृतिक सम्पदा, मेधा […] - [लालकिले की दर्दभरी दास्तान -अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-lal-qile-ki-dard-bhari-dastan/): लालकिले की दर्दभरी दास्तान -अनुक्रमणिका पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘लालकिले की दर्दभरी दास्तान -अनुक्रमणिका’ (The Tragic History of the Red Fort) के अध्यायों के शीर्षक उपलब्ध कराए गए हैं। इन शीर्षकों पर क्लिक करके उन अध्यायों को पढ़ा जा सकता है। इसपुस्तक में Shahjahan से लेकर भारत की आजादी तक मुगलों […] - [सनातन धर्म को मानती थी पूरी दुनिया! (1)](https://bharatkaitihas.com/the-whole-world-used-to-believe-in-sanatan-dharma-before-holi-books-of-other-religion-were-written/): सनातन धर्म दुनिया का एकमात्र ऐसा धर्म है जो किसी पुस्तक के आधार पर अस्तित्व में नहीं आया। जब बाइबिल एवं कुरान लिखी गईं तो दुनिया में पुस्तकों के आधार पर चलने वो मजहब अस्तित्व में आए। किताबें लिखे जाने से पहले सनातन धर्म को मानती थी पूरी दुनिया! मध्य एशिया से आए तुर्की कबीलों […] - [चंद्रवंशी राजाओं की कथाएँ - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/stories-of-chandra-vansh-puruvansh/): इस पुस्तक में भारत के अत्यंत प्राचीन एवं चंद्रवंष नाम से विख्यात कुल में उत्पन्न चंद्रवंशी राजाओं की कथाएँ लिखी गई हैं। साथ ही उनके पौराणिक एवं वैज्ञानिक संदर्भों का भी उल्लेख किया गया है। 1 ब्रह्माजी ने सोम को ब्राह्मण, बीज, वनस्पति और जल का सम्राट बना दिया! 2 चंद्रमा ने देवगुरु बृहस्पति की […] - [अरब रेगिस्तान में भी पूजे जाते थे भारतीय देवी-देवता! (2)](https://bharatkaitihas.com/indian-gods-and-goddesses-were-worshiped-in-the-arabian-desert-too/): जिस प्रकार हिमालय से लेकर समुद्र तक वैदिक देवी-देवताओं की पूजा होती थी, उसी प्रकार अरब रेगिस्तान (Arabian Desert) में भी पूजे जाते थे भारतीय देवी-देवता! उस काल में रोम एवं यूनान में भी वैदिक देवी-देवताओं की पूजा होती थी। एशिया महाद्वीप के निम्न-मध्य-पूर्व भाग में स्थित एक प्रायद्वीप ‘अरब’ कहलाता है। इसके दक्षिण में […] - [जेहाद और इस्लाम (3)](https://bharatkaitihas.com/jihad-spread-islam-to-every-corner-of-earth/): जेहाद और इस्लाम का नाता बहुत गहरा है। ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू प्रतीत होते हैं! जेहाद (Jihad) ने इस्लाम (Islam) को धरती के कौने-कौने तक पहुंचा दिया ईस्वी 632 में हजरत मुहम्मद (Hazrat Muhammad) का निधन होने तक लगभग सम्पूर्ण अरब प्रायद्वीप पर इस्लाम का प्रचार हो गया था। हजरत मुहम्मद […] - [मुहम्मद बिन कासिम ने भारत का जेहाद से प्रथम परिचय करवाया (4)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-qasim-introduced-india-to-jihad/): मुहम्मद बिन कासिम (Muhammad bin Qasim, 695–715 CE) भारत पर आक्रमण करने वाला पहला इस्लामिक आक्रांता था। उसने जेहाद और इस्लाम के नाम पर भारत पर आक्रमण किया तथा भारतवासियों का जेहाद (Jihad) से प्रथम परिचय करवाया! खलीफाओं को भारत आने वाले अरबी व्यापारियों के माध्यम से भारत की अपार सम्पत्ति की जानकारी थी। उन्हें […] - [खलीफाओं की सेनाएं हिन्दू राजाओं ने नष्ट कर दीं (5)](https://bharatkaitihas.com/hindu-kings-destroyed-the-armies-sent-by-the-caliphs/): इस्लाम के संस्थापक हजरत मुहम्मद के उत्तराधिकारी खलीफा (Khalifa) कहलाते थे। वे भारत में इस्लाम का राज्य (Rule of Islam) स्थापित करने के लिए आठवीं शताब्दी ईस्वी से सेनाएं भेजने लगे। खलीफाओं की सेनाएं (Armies of Khalifas) हिन्दू राजाओं ने नष्ट कर दीं! बगदाद के खलीफा अव वालिद (Caliph al-Walid) ने सिंध क्षेत्र पर अधिकार […] - [तुर्की गुलाम (Turkish slave) इस्लाम को भारत ले आए (6)](https://bharatkaitihas.com/when-arab-fighters-failed-turkish-slaves-brought-islam-to-india/): इस्लाम का जन्म (Birth of Islam) अरब में हुआ था। अरब के मुसलमानों ने इस्लाम को पूरी दुनिया में फैलाने का बीड़ा उठाया किंतु वे जल्दी ही थक गए। इस पर तुर्की गुलाम (Turkish slave) इस्लाम को भारत ले आए! आठवीं सदी के आरम्भ में अरबों ने थल मार्ग से आकर सिन्ध प्रदेश (Sindh Region) […] - [खलीफा मुझे सुल्तान माने तो मैं हर साल भारत पर हमला करूंगा (7)](https://bharatkaitihas.com/if-khalifa-accepts-me-as-sultan-i-will-attack-india-every-year/): महमूद गजनवी ने खलीफा (Khlifa) को लिखा कि यदि खलीफा मुझे सुल्तान माने तो जब तक मैं जीवित रहूंगा, तब तक हर साल भारत पर आक्रमण करके कुफ्र समाप्त करूंगा तथा इस्लाम का प्रसार (Extension of Islam) करूंगा। मुझे भारत से जो सम्पदा मिलेगी उसे मैं खलीफा के पास भिजवा दूंगा। ई.997 में गजनी के […] - [महाराजा जयपाल महमूद से अपमानित होकर चिता पर बैठ गया (8)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaipal-sat-on-pyre-alive-after-being-humiliated-by-mahmud/): पंजाब के विशाल भूभाग पर हिन्दूशाही राजवंश के महाराजा जयपाल (Maharaja Jayapala) का शासन था। महाराजा जयपाल का राज्य चिनाब नदी से लेकर हिन्दूकुश पर्वतमाला तक विस्तृत था। जब महमूद गजनवी ने महाराजा को युद्धक्षेत्र में पकड़ कर अपमानित किया तो महाराजा जयपाल जीवित ही चिता में बैठ गया। ईस्वी 999 में महमूद गजनवी गजनी […] - [चन्द्रवंश की प्राचीनता - लेखकीय](https://bharatkaitihas.com/stories-of-hindu-dharma-chandravanshi-raja/): चन्द्रवंश की प्राचीनता नामक इस अध्याय में चंद्रवंशी राजाओं की कथाएँ शीर्षक से लिखी गई पुस्तक की प्रस्तावना लिखी गई है। चन्द्रवंश की प्राचीनता इस बात से ही प्रकट हो जाती है कि भारत के प्राचीन क्षत्रियों एवं पश्चवर्ती राजपूत कुलों ने अपनी पहचान सूर्यवंशी एवं चंद्रवंशी राजाओं के रूप में स्थापित की। भारत के […] - [नगरकोट से चांदी का महल तोड़कर गजनी ले गया महमूद गजनवी (9)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-ghaznavi-broke-the-silver-palace-in-nagarkot-and-took-it-to-ghazni/): नगरकोट की लूट (Nagarkot Ki Loot) दुनिया की सबसे बड़ी लूट मानी जाती है। महमूद गजनवी को जितना धन सोमनाथ के मंदिर से मिला था, अल्लाउद्दीन खिलजी को जितना धन देवगिरि से मिला था और अहमदशाह अब्दाली को जितना धन दिल्ली के लाल किले से मिला था, उन सब से कहीं अधिक धन महमूद गजनवी […] - [चक्रस्वामी की प्रतिमा महमूद गजनवी ने गजनी के चौक पर डाल दी (10)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-ghaznavi-put-the-statue-of-chakraswami-of-saraswati-river-at-ghazni-chowk/): जेहाद (Jihad) की अवधारणा संसार को इस्लाम की छत्रछाया में लाने से जुड़ी है! प्रत्येक जेहादी चाहता है कि संसार के अन्य धार्मिक विश्वास इस्लाम के हाथों अपमानित हों। इसलिए महमूद गजनवी ने सरस्वती नदी के तट पर लगी चक्रस्वामी की प्रतिमा तोड़कर गजनी के चौक पर डाल दी! पंजाब का हिन्दूशाही राजा (Hindushahi Raja) […] - [सोम](https://bharatkaitihas.com/brahmaji-made-soma-ruler-of-brahmins-seeds-vegetation-and-water/): ब्रह्माजी ने सोम को ब्राह्मण, बीज, वनस्पति और जल का सम्राट बना दिया! पुरुवंश को पूर्वकाल में चंद्र वंश एवं सोम वंश भी कहा जाता था। इस कथा में हम चंद्रमा की उत्पत्ति की चर्चा करेंगे जिसकी वंश परम्परा में आगे चलकर पुरुरवा नामक राजा हुआ और जिससे पुरुवंश की शृंखला चली। श्रीहरिवंश पुराण आदि […] - [मथुरा की लूट (11)](https://bharatkaitihas.com/mehmood-ghaznavi-looted-large-idols-of-gold-from-mathura/): गजनी के आक्रांता ने मथुरा (Mathura) से सोने की बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ लूट लीं! मथुरा की लूट (Mathura Ki Loot) से महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) को इतना धन मिला, जिसकी कोई मनुष्य कल्पना भी नहीं कर सकता। महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ई.1000 से भारत पर हमले करके भारत की जनता को लूट रहा था। […] - [मुल्तान की लूट (12)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%82%e0%a4%9f/): मुल्तान (Multan) का वास्तविक नाम मूलस्थान था। यहाँ सूर्य देव का अत्यंत प्राचीन मंदिर था जिसे मार्तण्ड मंदिर कहते थे। महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ने मार्तण्ड मंदिर (Martand Temple) के स्वर्ण भण्डारों के किस्से सुन रखे थे। इसलिए वह मुल्तान को लूटने के लिए चल दिया। मुल्तान की लूट (Multan Ki Loot) से महमूद […] - [कन्नौज के प्रतिहार नष्ट कर दिए महमूद गजनवी ने (13)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-destroyed-the-pratiharas-of-kannauj/): कन्नौज (Kannauj)क्षेत्र के सात दुर्ग महमूद (Mahmud of Ghazni)के अधीन हो गए। गंगा के उपजाऊ मैदान (Fields of Ganga-Yamuna) की अपार सम्पदा महमूद ने लूट ली। कई हजार स्त्री-पुरुषों को पकड़कर गुलाम बना लिया। हजारों स्त्रियों का सतीत्व लूटा। मासूम बच्चे भालों एवं तलवारों की नोकों से मार दिए। कन्नौज के प्रतिहार (Pratihas of Kannauj) […] - [चंदेल राजा विद्याधर को औरतें उपहार में भिजवाईं महमूद गजनवी ने (14)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-ghaznavi-sent-women-to-chandela-king-vidyadhar-as-a-gift/): हिन्दूशाही राजा त्रिलोचनपाल (Hindushahi Raja Trilochanpal) से निबटकर जब महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) फिर से कन्नौज (Kannauj) की ओर बढ़ा तो चंदेल राजा विद्याधर (Vidyadhara Chandela of Kalinjar) के पुत्र त्रिलोचनपाल (Prince Trilochanpal of Kannauj) ने महमूद का सामना किया जो इस समय कन्नौज का शासक था किंतु यह त्रिलोचनपाल (Prince Trilochanpal of Kannauj) […] - [सोमनाथ महालय की देवदासियां और स्वर्ण-भण्डार (15)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-gazanavi-decides-to-loot-devadasis-and-gold-reserves-of-somnath-temple/): अफगानिस्तान में ऐसी बहुत सी कथाएं प्रचलित थीं जिनमें सोमनाथ महालय की देवदासियां (Devadasis of Somnath Mahalaya) और और स्वर्ण-भण्डार के रोचक विवरण होते थे। महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) अब तक मुल्तान, नगरकोट, मथुरा और कन्नौज के मंदिरों की सम्पदा लूट चुका था। अब वह सोमनाथ महालय की देवदासियां लूटने को आतुर था। ई.1025 […] - [थार रेगिस्तान में घुस गया महमूद गजनवी (16)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-gaznavi-entered-a-desert-full-of-scorpions-for-looting-devdasis-laden-with-gold-ornaments/): सोमनाथ महालय की देवदासियां (Devadasis of Somnath Mahalaya) तथा सोने के भण्डार लूटने के लिए महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) अपने प्राणों की परवाह किए बिना सांप-बिच्छुओं से भरे थार रेगिस्तान (Desert of Thar) में घुस गया। अब तक किए गए भारत-अभियानों में महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) भारतीय राजाओं एवं भारतीय सेनाओं की शक्तियों […] - [पत्थरों से बने आश्चर्य तोड़ दिए महमूद गजनवी ने (17)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-gaznavi-breaks-the-wonders-of-stones-made-in-the-thar-desert/): किरातकूप के देवालय (Temples of Kiradu) इतने सुंदर थे जिन्हें देखकर यह कहने को मन होता था कि इन्हें इंसानी हाथों ने नहीं अपितु देवताओं ने बनाया होगा। महमूद गजनवी ने पीले पत्थरों से बने आश्चर्य तोड़ दिए! जहरीले सांप-बिच्छुओं से भरे थार मरुस्थल में महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) अपने तीस हजार ऊंट सवारों […] - [सोमनाथ में अरब जैसे बुत देखे महमूद ने(18)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-saw-same-idols-in-temple-of-somnath-that-were-worshiped-in-arabia-before-rise-of-islam/): जब महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ने सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) में प्रवेश किया तब उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उसे सोमनाथ में अरब जैसे बुत (Arab-like idols in Somnath) देखने को मिले। ठीक वैसे ही बुत सोमनाथ में हर ओर लगे हुए थे जो इस्लाम के जन्म से पहले अरब में भी पूजे जाते थे। […] - [सोमनाथ की रक्षा में पचास हजार हिन्दुओं ने प्राण न्यौछावर कर दिए (19)](https://bharatkaitihas.com/fifty-thousand-hindus-sacrificed-their-lives-to-protect-somnath/): मुस्लिम लेखकों द्वारा किए गए झूठे विवरणों के आधार पर पहले अंग्रेजों ने तथा बाद में कम्युनिस्ट लेखकों ने आरोप लगाया है कि हिन्दू राजा सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) की रक्षा करने की बजाय भाग खड़े हुए। सच्चाई यह है कि सोमनाथ मंदिर (Smnath Temple) की रक्षा की रक्षा करते हुए अनेक हिन्दू राजाओं एवं […] - [सोमनाथ का शिवलिंग भंग कर दिया महमूद गजनवी ने (20)](https://bharatkaitihas.com/mahmood-breaks-thousands-of-years-old-shivlinga-of-somnath/): जब महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) आधी रात के समय सोमनाथ महालय (Somnath Temple) के गर्भगृह में घुसा तो मंदिर के मुख्य पुजारी ने अपना सिर शिवलिंग पर रख दिया। महमूद गजनवी ने गुर्ज के प्रहार से सोमनाथ का शिवलिंग (Somnath Shivlinga) भंग कर दिया। पुजारी का सिर भी उसी के साथ बिखर गया। इस […] - [महमूद गजनवी की हत्या करने की योजना बनाई भारतीयों ने (21)](https://bharatkaitihas.com/indians-plan-to-kill-mahmood-gaznavi-in-india/): भारत के राजा कायर या कमजोर नहीं थे, किंतु बिखरे हुए थे। महमूद गजनवी ने इसी का लाभ उठाकर भारत को लूटना आरम्भ किया था और वह एक-एक करके मंदिरों एवं नगरों को लूट रहा था। सोमनाथ का शिवलिंग भंग करने के बाद बहुत से हिन्दू राजाओं की आत्मा ने उन्हें धिक्कारा। इसलिए भारतीयों ने […] - [सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े गजनी की जामा मस्जिद में चिनवा दिए महमूद ने (22)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-gazani-saw-same-arabian-statues-in-somnath/): कुछ साम्यवादी लेखकों ने अत्यंत बेशर्मी के साथ लिखा है कि चूंकि अरब की देवी मनात (Goddess Manat of Arab) और भारत के सोमनाथ एक जैसे शब्द हैं इसलिए महमूद ने सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े (Pieces of Somnath Shivalinga) गजनी की जामा मस्जिद (Jama Masjid, Ghazni) में चिनवा दिए! महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) सोमनाथ […] - [महमूद गजनवी की मृत्यु टुबरकुलोसिस तथा मलेरिया से हुई (23)](https://bharatkaitihas.com/mahmud-ghaznavi-died-due-totuberculosis-and-malaria/): महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) की मृत्यु टुबरकुलोसिस तथा मलेरिया से हुई! इन्हीं बीमारियों के कारण 30 अप्रेल 1030 को महमूद गजनवी इस असार संसार से कूच कर गया। भारत से लूटी गई अपार दौलत उसके कुछ काम नहीं आई। जब महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) सोमनाथ महालय (Somnath Temple) को भंग करके गजनी लौट […] - [पवित्र सुल्तान महमूद गजनवी (24)](https://bharatkaitihas.com/indian-historians-declared-mahmud-as-the-holy-sultan/): उतबी ने महमूद को जेहादी लिखा है जबकि प्रोफेसर हबीब ने उसे पवित्र सुल्तान महमूद गजनवी (Holy Sultan Mahmud of Ghazni) सिद्ध करने का दुष्प्रयास किया है। डॉ. आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव ने लिखा है कि उस युग के भारतीय महमूद गजनवी को शैतान का अवतार मानते थे। उनकी दृष्ट में वह एक डाकू, लालची लुटेरा […] - [सिंध के जाट नियाल्तगीन का सिर काट देते हैं (25)](https://bharatkaitihas.com/jats-of-sindh-behead-nialtgin/): सिंध के जाट (Jats of Sindh) सदियों से सिंध क्षेत्र में रहते आए थे। ये लोग कृषि एवं पशुपालन करते थे किंतु जब से अफगानिस्तान की तरफ से सिंध पर मुसलमानों के आक्रमण आरम्भ हुए तब से सिंध के जाट भी लड़ाका जाति में बदलने लगे थे। ई.1030 में महमूद गजनवी का निधन (Death of […] - [हिन्दू राजाओं का संघ गजनी वालों से भारतीय दुर्ग खाली करवाने में सफल रहा (26)](https://bharatkaitihas.com/union-of-hindu-kings-evacuated-indian-forts-from-governors-of-ghazni/): पंजाब से लेकर हिन्दुकुश पर्वत (Punjab to Hindu Kush) तक के क्षेत्र में गजनी के गवर्नर शासन करने लगे। ई.1043 में दिल्ली के तोमर शासक कुमारपाल देव (Tomar Raja Kumar Pal Dev) ने हिन्दू राजाओं का संघ बनाया ताकि इस क्षेत्र को गजनी वालों से मुक्त करवाया जा सके। अब तक गजनी (Ghazni) के शासकों […] - [लाहौर से आगरा तक गजनी के सांप लहराने लगे (27)](https://bharatkaitihas.com/serpents-of-ghazni-began-to-wave-from-lahore-to-agra/): हालांकि दिल्ली के तोमर शासक कुमारपाल देव के नेतृत्व में हिन्दू राजाओं का संघ हांसी, कांगड़ा एवं कुछ अन्य दुर्ग गजनी के गवर्नरों से मुक्त करवाने में सफल रहा किंतु कुछ ही समय पश्चात् लाहौर से आगरा तक गजनी के सांप लहराने लगे! जब गजनी के गर्वनर हांसी, कांगड़ा तथा लाहौर आदि दुर्गों पर अधिकार […] - [राजा सुहेलदेव ने सालार मसूद गाजी को मार डाला (28)](https://bharatkaitihas.com/king-suheldev-kills-salar-masood-ghazi/): फारसी ग्रंथ मिरात-ए-मसूदी में राजा सुहेलदेव तथा गजनी के सेनापति सालार मसूद के बीच हुए युद्ध का उल्लेख किया गया है। यह ग्रंथ सत्रहवीं शताब्दी ईस्वी में मुगल बादशाह जहांगीर के समय अब्दुर्रहमान चिश्ती नामक एक दरबारी लेखक ने लिखा था। अर्थात् राजा सुहेलदेव तथा सालार मसूद के बीच हुए युद्ध के छः सौ साल […] - [गजनी के गवर्नर डेढ़ सौ साल तक भारत को खोखला करते रहे (29)](https://bharatkaitihas.com/governors-of-ghazni-looted-india-for-150-years/): महमूद गजनवी के समय में मुल्तान से लेकर लाहौर तक के क्षेत्र में गजनी के गवर्नर किलों पर अधिकार करके अपनी सत्ता जमाना आरम्भ कर चुके थे। लगभग डेड़ सौ साल तक गजनी के गवर्नर भारत को खोखला करते रहे। गजनी द्वारा पंजाब में नियुक्त गवर्नरों द्वारा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बारबार किए गए […] - [चौहान रूपी चट्टान को तोड़ना आवश्यक हो गया गजनवियों के लिए (30)](https://bharatkaitihas.com/it-became-necessary-for-ghaznavites-to-break-the-rock-of-chauhans/): गजनी के सुल्तान एवं अमीर अब भारत में अपनी स्थाई सत्ता स्थापित करना चाहते थे किंतु उनके लिए चौहान रूपी चट्टान को तोड़ना आवश्यक हो गया! शक्तिशाली चौहानों के रहते वे भारत में अपनी सत्ता स्थापित नहीं कर सकते थे! गजनी के सुल्तानों, अमीरों एवं गजनी के गवर्नरों को भारत पर आक्रमण करते हुए लगभग […] - [गजनी में सत्ता परिवर्तन ने भारत में तुर्की साम्राज्य का मार्ग खोल दिया (31)](https://bharatkaitihas.com/the-change-of-power-in-ghazni-opened-the-way-for-the-establishment-of-the-turkish-empire-in-india/): ई.1173 में गजनी के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा उलट-फेर हुआ। गजनी में सत्ता परिवर्तन ने भारत में तुर्की साम्राज्य का मार्ग खोल दिया महमूद गजनवी के वंशज ई.999 से लेकर ई.1173 तक गजनी पर शासन करते रहे। महमूद के वंशजों ने भारत में अपने साम्राज्य की स्थापना के लिए बहुत प्रयास किए किंतु लगभग डेढ़ […] - [मुहम्मद गौरी के आक्रमण के समय बिखरा हुआ था भारत (32)](https://bharatkaitihas.com/india-was-scattered-during-the-invasions-of-muhammad-gauri/): जिस काल में मुहम्मद गौरी के आक्रमण आरम्भ हुए, उस काल में भारत का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बिखरा हुआ था। सिंधु नदी से लेकर पंजाब की अंतिम नदी तक के क्षेत्र में मुसलमानों के छोटे-छोटे राज्य स्थापित हो चुके थे। शेष भारत में हिन्दू राजाओं के राज्य थे जो हर समय आपस में लड़कर […] - [मुहम्मद गौरी ने भारत के समस्त मुस्लिम अमीरों के राज्य छीन लिए (33)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80/): मुहम्मद गौरी ने करमाथियों को परास्त करके मुल्तान पर अधिकार कर लिया। उसी वर्ष गौरी ने ऊपरी सिंध के कच्छ क्षेत्र पर आक्रमण किया तथा उसे अपने अधिकार में ले लिया। - [पराजय की पीड़ा छिपाने का प्रयास किया भारतीयों ने (34)](https://bharatkaitihas.com/indians-tried-to-hide-pain-of-defeat-by-lying/): पृथ्वीराज रासो के अनुसार पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के बीच 21 लड़ाइयां हुईं जिनमें चौहान विजयी रहे। स्पष्ट है कि भारतीयों ने झूठ बोलकर पराजय की पीड़ा छिपाने का प्रयास किया! मुहम्मद गौरी ने भारत में अपना रास्ता साफ करने के लिए हिन्दू राजाओं पर हाथ डालने से पहले भारत में स्थित मुस्लिम अमीरों […] - [राजा धीर पुण्ढीर ने मुहम्मद गौरी को जीवित ही पकड़ लिया (35)](https://bharatkaitihas.com/king-dhir-pundhir-captured-muhammad-gauri-alive-in-war/): कवि चंद बरदाई ने पृथ्वीराज रासो में लिखा है कि राजा धीर पुण्ढीर ने मुहम्मद गौरी को पकड़ लिया। कवि चंद बरदाई ने यह भी लिखा है कि पृथ्वीराज ने हाथी, घोड़े एवं स्वर्ण लेकर मुहम्मद गौरी को मुक्त कर दिया। ई.1189 में मुहम्मद गौरी ने भटिण्डा दुर्ग पर आक्रमण करके उस पर छल-पूर्वक अधिकार […] - [पृथ्वीराज चौहान के मंत्री और सेनापति मुहम्मद गौरी से मिल गए (36)](https://bharatkaitihas.com/prithviraj-chauhans-ministers-and-generals-cheated-him/): ऐतिहासिक तथ्य इस कड़वी सच्चाई की पुष्टि करते हैं कि पृथ्वीराज चौहान के मंत्री और सेनापति मुहम्मद गौरी से मिल गए जिनके कारण पृथ्वीराज चौहान तराइन की दूसरी लड़ाई हार गया। मुहम्मद गौरी तराइन के युद्ध में घायल होकर राजा धीर पुण्ढीर के हाथों पकड़ लिया गया तथा सम्राट पृथ्वीराज चौहान को विपुल धन देकर […] - [पृथ्वीराज चौहान का शिविर बूचड़खाने में बदल दिया मुहम्मद गौरी ने (37)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-gauri-converts-emperor-prithvirajs-camp-into-a-slaughter-house/): तराइन की दूसरी लड़ाई में जिस समय हिन्दू सेना इस विश्वास के साथ अपने शिविर में रात्रि विश्राम कर रही थी कि संधि हो चुकी है और अब युद्ध नहीं होगा, उस समय मुहम्मद गौरी ने अचानक ही हमला करके हिन्दू सैनिकों को काट दिया और पृथ्वीराज चौहान का शिविर बूचड़खाने में बदल दिया। मुहम्मद […] - [पृथ्वीराज चौहान जीवित पकड़ा गया (38)](https://bharatkaitihas.com/emperor-prithviraj-chauhan-was-captured-alive-by-enemies/): जब मुहम्मद गौरी रात के अंधेरे में छल से पृथ्वीराज चौहान के शिविर में घुसकर हिन्दू सैनिकों को काटने लगा तब पृथ्वीराज चौहान घोड़े पर सवार होकर अपने शिविर से निकला किंतु सिरसा के आसपास मुहम्मद गौरी के सैनिकों के हाथ लग गया । इस प्रकार पृथ्वीराज चौहान जीवित पकड़ा गया। मुहम्मद गौरी ने तराइन […] - [पृथ्वीराज चौहान की हत्या के लिए मंत्री प्रतापसिंह जिम्मेदार था (39)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-gauri-and-pratapsingh-were-responsible-for-prithviraj-chauhans-murder/): निःसंदेह पृथ्वीराज चौहान की हत्या स्वयं मुहम्मद गौरी ने की थी किंतु पृथ्वीराज चौहान की हत्या के लिए मंत्री प्रतापसिंह अधिक जिम्मेदार था जिसने अपने पुराने वैर को निकालने के लिए अपने ही राजा के साथ छल किया तथा अपना देश दुश्मनों के हाथों बेच दिया। तराइन के दूसरे युद्ध में मुहम्मद गौरी ने छल-बल […] - [राजा जयचंद का हाथी (40)](https://bharatkaitihas.com/king-jaychands-elephant-did-not-bow-down-to-muhammad-gauri/): राजा जयचंद के पास एक सफेद रंग का हाथी था। उसे मुहम्मद गौरी की सेना ने पकड़ लिया। महावत के बार-बार प्रयास करने पर भी राजा जयचंद का हाथी मुहम्मद गौरी को प्रणाम करने के लिए तैयार नहीं हुआ। हाथी मनुष्यों से अधिक वफादार निकला। सम्राट पृथ्वीराज चौहान के मंत्री प्रतापसिंह ने अपने राजा को […] - [पांच सौ मन हीरों का मालिक अपनी बेटी के मकबरे में दफनाया गया (41)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): अंग्रेज लेखक स्मिथ ने लिखा है कि शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी की हत्या पंजाब के झेलम जिले में ढामियाक अथवा दामयेक नामक स्थान पर कट्टरपंथी मुसलमानों के एक समूह द्वारा की गई थी। कुछ लेखकों के अनुसार मुहम्मद गौरी का वध विद्रोही गक्खरों ने किया था।  मुहम्मद गौरी ई.1194 में कन्नौज के शासक महाराज जयचंद को […] - [कुरूप तुर्की गुलाम भारत का भविष्य बन गया (42)](https://bharatkaitihas.com/an-ugly-turkish-slave-became-the-fortune-of-india/): मुहम्मद गौरी की हत्या हो जाने के बार कुरूप तुर्की गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली का स्वामी बन गया। अब वही भारत का भाग्य-विधाता था और अब वही भारत के लोगों का भविष्य तय करने वाला था। ई.1206 में मुहम्मद गौरी की हत्या हो गई। मुहम्मद गौरी निःसंतान था, इसलिए उसके गुलामों एवं उसके रक्त सम्बन्धियों […] - [कुतुबुद्दीन ऐबक ने यल्दूज की बेटी से ब्याह कर लिया (43)](https://bharatkaitihas.com/qutbuddin-aibak-married-yalduzs-daughter/): मुहम्मद गौरी की मृत्यु के समय उसका गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली का गवर्नर था। वह एक तुर्की गुलाम था जिसे तुर्किस्तान से लेकर अफगानिस्तान में कई बार बेचा गया था किंतु उसने अपनी योग्यता एवं सुल्तान की कृपा के बल पर अमीर तथा दिल्ली का गवर्नर होने का गौरव प्राप्त किया था। मुहम्मद गौरी के […] - [भारत का राजमुकुट युद्ध के मैदानों में मिला था कुतुबुद्दीन ऐबक को (44)](https://bharatkaitihas.com/qutubuddin-aibak-found-crown-of-india-in-battlegrounds/): गजनी के एक कुरूप गुलाम के सिर पर भारत का राजमुकुट सज गया किंतु उसे भारत का राजमुकुट किसी की कृपा से प्राप्त नहीं हुआ था। उसने यह मुकुट युद्ध के मैदानों में तलवार के जोर पर हासिल किया था। कुतुबुद्दीन ऐबक ने गजनी के सुल्तान यल्दूज तथा मुल्तान के सुल्तान कुबाचा से वैवाहिक सम्बन्ध […] - [सैयद हुसैन खनगसवार मीरन को राजपूतों ने मार डाला (45)](https://bharatkaitihas.com/rajputs-entered-beethali-and-killed-daroga-syed-hussain-khangaswar-meeran/): कुतुबद्दीन ऐबक ने सैयद हुसैन खनगसवार मीरन साहिब को अजमेर का दरोगा नियुक्त किया। इस प्रकार बारहवीं शताब्दी के अंत में अजमेर के चौहान नेपथ्य में चले गये तथा शाकंभरी राज्य पूरी तरह लुप्त हो गया। दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बनने के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक को रावी से लेकर ब्रह्मपुत्र की घाटी तक हिन्दू राजाओं […] - [बख्तियार खिलजी ने नालंदा एवं विक्रमशिला के बौद्ध भिक्षुओं को क्रूरता से मारा (46)](https://bharatkaitihas.com/bakhtiyar-khilji-brutally-killed-buddhist-monks-and-graduates-of-nalanda-and-vikramshila/): इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नालंदा एवं विक्रमशिला में निहत्थे आचार्यों, बटुकों, बौद्ध भिक्षुओं तथा स्नातकों के साथ उसी निर्दयता, नृशंसता एवं क्रूरता का प्रदर्शन किया जो मुहम्मद गौरी ने अजमेर में चौहानों के साथ एवं कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली में तोमरों के साथ किया था। ई.1206 में कुतुबुद्दीन ऐबक मुल्तान एवं गजनी के […] - [कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु (47)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%90%e0%a4%ac%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): ई.1210 में जब कुतुबुद्दीन ऐबक लाहौर में चौगान खेल रहा था तब वह अचानक घोड़े से गिर पड़ा। घोड़े की काठी का उभरा हुआ भाग ऐबक के पेट में घुस गया और इस चोट से कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु हो गई। उसे लाहौर में ही दफना दिया गया। कुतुबुद्दीन ऐबक के सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन […] - [विध्वंसक कुतुबुद्दीन ऐबक को महान् निर्माता कहा गया (48)](https://bharatkaitihas.com/qutbuddin-aibak-devastated-northern-india-but-he-was-called-great-builder/): मुस्लिम इतिहासकारों एवं कम्युनिस्ट लेखकों ने विध्वंसक कुतुबुद्दीन ऐबक को इतिहास की पुस्तकों में महान् निर्माता कहा है जिसके राज्य में भेड़ और भेड़िए एक ही घाट पर पानी पीते थे। भारत में आजादी के बाद की पीढ़ी ने यही इतिहास पढ़कर बड़ी-बड़ी परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं और बड़े-बड़े पद प्राप्त किए। कुतुबुद्दीन ऐबक ने हजारों […] - [बुखारा का गुलाम इल्तुतमिश दिल्ली का सुल्तान बन गया (49)](https://bharatkaitihas.com/another-slave-of-bukhara-became-sultan-of-delhi/): कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद आरामशाह नामक लड़का दिल्ली का सुल्तान हुआ किंतु कुछ ही दिनों में अमीरों के निमंत्रण पर बुखारा का गुलाम इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत के तख्त पर बैठ गया। जिस विध्वंसक कुतुबुद्दीन ऐबक ने उत्तरी भारत में हिंसा, विध्वंस एवं विनाश का ताण्डव किया, उसे निजामी एवं हबीबुल्ला जैसे मुस्लिम इतिहासकारों ने महान् […] - [कुबाचा यल्दूज और अलीमर्दान इल्तुतमिश की जान के दुश्मन बन गए (50)](https://bharatkaitihas.com/kubacha-yalduz-and-alimardan-became-enemies-of-iltutmish/): जब इल्तुतमिश आरामशाह को बंदी बनाकर स्वयं सुल्तान बन गया तो कुबाचा यल्दूज और अलीमर्दान इल्तुतमिश की जान के दुश्मन बन गए। कुबाचा यल्दूज और अलीमर्दान इल्तुतमिश को बुखारा के बाजार में कई बार बिके हुए एक गुलाम से अधिक कुछ नहीं मानते थे। कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत चार भागों में […] - [इल्तुतमिश के शत्रु चुन-चुन कर मारे गए (51)](https://bharatkaitihas.com/iltutmish-killed-his-enemies/): इल्तुतमिश अपने शत्रुओं को चुन-चुन कर मारता जा रहा था किंतु इल्तुतमिश के शत्रु कम होने का नाम नहीं लेते थे। फिर भी इल्तुतमिश ने धैर्य नहीं खोया। वह जीवन भर तलवार चलाता रहा था और अब भी उसे बस तलवार ही चलानी थी। बदायूं का गवर्नर इल्तुतमिश जो किसी समय बुखारा के बाजार में […] - [इल्तुतमिश को राजपूत चुनौती देने लगे (52)](https://bharatkaitihas.com/rajputs-threatened-iltutmish/): मुहम्मद गौरी तथा उसके गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में जिस सल्तनत की स्थापना की थी उसे दिल्ली सल्तनतक कहा जाता था। जब इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत का विस्तार करना आरम्भ किया तो इल्तुतमिश को राजपूत चुनौती देने लगे! कुतुबुद्दीन ऐबक के समय से ही उत्तरी भारत के हिन्दू राजा स्वतंत्र होने के प्रयास कर […] - [हिन्दू राजा लड़ते रहे और अपनी धरती बचाते रहे (53)](https://bharatkaitihas.com/hindu-kings-kept-fighting-and-saving-their-land/): जब मुसलमानों ने उत्तर भारत के बहुत बड़े क्षेत्र पर अधिकार करके दिल्ली सल्तनत की स्थापना कर दी तो हिन्दुओं के पास अपनी सुरक्षा करने के लिए सिवाय युद्ध का मार्ग अपनाने के, और कोई उपाय नहीं बचा। इसलिए हिन्दू राजा लड़ते रहे और मुसलमानों से अपनी धरती बचाते रहे! जालौर के चौहान शासक उदयसिंह […] - [ग्वालियर दुर्ग के सामने आठ सौ मनुष्यों का कत्ल किया इल्तुतमिश ने (54)](https://bharatkaitihas.com/iltutmish-slaughtered-eight-hundred-human-beings-in-front-of-gwalior-fort/): लगभग 11 महीने तक मुस्लिम सेनाएं ग्वालियर दुर्ग लेने का प्रयास करती रहीं। जब किले में रसद सामग्री समाप्त हो गई तो राजा मलयवर्मन एक रात्रि में चुपचाप दुर्ग खाली करके चला गया। जब मुस्लिम सेनाएं दुर्ग में घुसीं तो दुर्ग पूरी तरह खाली था। इस पर इल्तुतमिश ने 800 मनुष्यों को पकड़कर मंगवाया तथा […] - [इल्तुतमिश के सेनापति हिन्दू राजाओं को भेड़िया और स्वयं को भेड़ समझते थे (55)](https://bharatkaitihas.com/iltutmishs-commanders-considered-hindu-kings-as-wolf-and-themselves-as-sheep/): हालांकि इल्तुतमिश की सेनाओं के आगे हिन्दू सेनाएं अनेक स्थानों पर पराजित हो गई थीं किंतु इल्तुतमिश के सेनापति जानते थे कि वे हिन्दू राजाओं को धोखे से मारते थे न कि ताकत से। इसलिए इल्तुतमिश के सेनापति हिन्दू राजाओं से इतने भयभीत रहते थे कि वे हिन्दू राजाओं को भेड़िया और स्वयं को भेड़ […] - [चालीसा का गठन करके अपनी ही औलादों की कब्र खोद दी इल्तुतमिश ने (56)](https://bharatkaitihas.com/iltutmish-dug-the-tomb-of-his-own-children-by-forming-chalisa/): चालीसा का गठन करके इल्तुतमिश ने अपने शासन को मजबूती देने का बुद्धिमान प्रयास किया था। भारतीय शासन नीति के अनुसार यह उचित कदम ही था किंतु तुर्की राज्य कभी भी वंशानुगत नहीं होते थे। कोई भी ताकतवर तुर्क कभी भी सल्तनत पर अधिकार कर सकता था। पाठकों को स्मरण होगा कि ई.1208 में दिल्ली […] - [मुस्लिम सल्तनत का संस्थापक कौन था भारत में (57)](https://bharatkaitihas.com/who-was-actual-founder-of-muslim-sultanate-in-india/): महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, कुतुबुद्दीन ऐबक तथा इल्तुतमिश में से भारत में मुस्लिम सल्तनत का संस्थापक कौन था? इसका निर्णय करना कठिन है। विभिन्न इतिहासकार मुहम्मद बिन कासिम से लेकर, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, कुतुबुद्दीन ऐबक तथा इल्तुतमिश को भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना का श्रेय देते हैं। अधिकांश इतिहासकारों की धारणा है कि […] - [भारत भूमि पर कुदृष्टि - भारतीय हिस्से हथियाने के दुष्प्रयास](https://bharatkaitihas.com/pakistans-attempt-to-grab-indian-land/): भारत की आजादी के कुछ दिन बाद ही जैसलमेर रियासत में पाकिस्तानी फौजें घुस आईं। जैसलमेर महाराजा ने अपने मित्र राजाओं को तार के माध्यम से इसकी सूचना दी। - [काश्मीर पर कबाइली आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/tribal-invasion-in-kashmir/): जब काश्मीर में पाकिस्तान द्वारा आरोपित युद्ध चल रहा था तो भारत सरकार ने पाकिस्तान को बंटवारे में तय हुई सम्पत्तियों का हस्तांतरण रोक दिया। - [बीकानेर महाराजा सादूलसिंह पर पाकिस्तानी मकड़जाल](https://bharatkaitihas.com/conspiracy-of-pakistan-against-maharaja-of-bikaner/): बीकानेर महाराजा सादूलसिंह ने सरदार पटेल से अनुरोध किया कि वह इस सम्बन्ध में दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही में सहायता करें तथा एक आधिकारिक बयान जारी करके इस आरोप को निरस्त करें। - [पाकिस्तान से आगे](https://bharatkaitihas.com/what-after-pakistan/): गांधीजी की नकली और बनवाटी बातें पाकिस्तान का भविष्य नहीं सुधार सकती थीं। नेहरू और पटेल ने पाकिस्तान का भविष्य देख लिया था। - [जिन्ना का पाकिस्तान बनाम पाकिस्तान का जिन्ना!](https://bharatkaitihas.com/jinnah-after-partition-of-india/): नौ माह बाद जिन्ना ने सिंध प्रांत की सरकार को अपदस्थ किया जो स्वयं उनके दल की थी। इसके बाद जिन्ना ने पंजाब सूबे की सरकार के राजमहल में तख्ता पलट करने का प्रयास किया। - [जिन्ना का मोहभंग - भारत वापस लौटना चाहता था जिन्ना !](https://bharatkaitihas.com/jinnah-wanted-to-return-to-india/): पाकिस्तान को धार्मिक राष्ट्र बनाने की बजाय धर्मनिरपेक्षता को इसके लिए उपयुक्त माना। ........ जिन्ना इस बात के लिए भी इच्छुक थे कि भारत और पाकिस्तान लगातार एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते न रहें। - [पाकिस्तान मुस्लिम लीग का विभाजन](https://bharatkaitihas.com/partition-of-pakistan-muslim-league/): गांधीजी 13 जनवरी 1948 को पटेल के विरुद्ध दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठ गए। गांधीजी के उपवास का निर्णय पटेल को भाया नहीं और वे दिल्ली छोड़कर बम्बई चले गए। - [पाकिस्तान से मोहभंग](https://bharatkaitihas.com/disillusionment-with-pakistan/): हमारा मजहब हमें सिखाता है कि हमें मौत के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। एक धार्मिक कारण के लिए शहीद की मौत से अधिक बेहतर उद्धार मुसलमानों के लिए कोई नहीं है। - [जिन्ना के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/pakistan-of-jinnahs-successors/): हिन्दुस्तान का भेड़िया आया, भेड़िया आया' की गुहारें मचाकर वहां का हर डिक्टेटर और हर मुल्ला जनता को बेवकूफ बनाता है और खुद मलाई-मक्खन उड़ाता है। - [भारत-पाकिस्तान सम्बन्ध : एक दूसरे से दूर होते चले गए भारत-पाकिस्तान](https://bharatkaitihas.com/india-pakistan-went-away-from-each-other/): जोगिंदर नाथ मण्डल जो मुस्लिम लीग की तरफ से जवाहरलाल नेहरू के अंतरिम मंत्रिमण्डल में मंत्री बना था, दलित कहे जाने वाले समुदाय का बंगाली राजनीतिज्ञ था। - [नदी जल विभाजन - पाकिस्तान का पानी खतरे में](https://bharatkaitihas.com/pakistans-water-in-danger/): भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान की ओर से हुए उरीएवं पुलमावा आतंकवादी हमलों के बाद भारत की पुरानी नीति में बदलाव करते हुए भारत की जनता से वायदा किया है कि वे भारत की नदियों से पाकिस्तान को जा रहे जल में से भारतीयों के हिस्से के जल को पाकिस्तान की ओर बहने से रोकेंगे। - [पाकिस्तान की सेना ही पाकिस्तान का सबसे बड़ा शत्रु](https://bharatkaitihas.com/pakistans-army-is-the-biggest-enemy-of-pakistan/): पाकिस्तान बनने के कुछ माह बाद प्रथम गवर्नर जनरल मुहम्मद अली जिन्ना की मृत्यु उपेक्षा एवं टीबी से हुई। ई.1951 में पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खाँ की हत्या हुई। - [पूर्वी पाकिस्तान में हिन्दुओं की हत्या](https://bharatkaitihas.com/killing-of-hindus-in-the-name-of-religion-and-muslims-in-the-name-of-language-in-east-pakistan/): ई.1958 में अयूब खाँ द्वारा पाकिस्तान पर सैनिक शासन लादे जाने के बाद पूर्वी-बंगाल, पश्चिमी पाकिस्तान से आए सैनिकों की संगीनों के साए में जीने लगा। - [बंगालियों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/west-pakistan-army-killed-three-million-bengalis-and-biharis/): पूर्वी बंगाल में धर्म के नाम पर न केवल हिन्दुओं की हत्या हुई अपितु भाषा के नाम पर उन बिहारी मुसलमानों की भी हत्या हुई जो बंग्ला-भाषा बोलना नहीं जानते थे। पश्चिमी-पाकिस्तान की सेना ने तीस लाख बंगालियों एवं बिहारियों का संहार किया - [पाकिस्तान में मजहबी कट्टरता](https://bharatkaitihas.com/intolerance-for-people-of-other-religions-in-pakistan/): पाकिस्तान में हिन्दुओं की जनसंख्या में इसलिए वृद्धि नहीं हुई क्योंकि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू या तो मुसलमान बन गए हैं या फिर पाकिस्तान से हिन्दुओं की जनसंख्या प्रकट एवं परोक्ष रूप से भारत में आई है जिसका अधिकांश हिस्सा सीमावर्ती रेगिस्तानी जिलों बाड़मेर, जैसलमेर तथा जोधपुर में निवास करता है। - [अहमदिया मुसलमानों का नरसंहार](https://bharatkaitihas.com/massacre-of-ahmadiya-muslims-in-pakistan/): ई.1974 में प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में पाकिस्तानी संसद ने अहमदियों को गैरमुस्लिम घोषित किया। इसके बाद पूरे पाकिस्तान में अहमदियों के खिलाफ दंगे हुए। - [शिया मुसलमानों की हत्या - पाकिस्तान में शियाओं का सफाया](https://bharatkaitihas.com/shias-wiped-out-in-pakistan/): कराची के शिया मोहल्लों को लगभग किलों में बदल दिया गया है। आत्मघाती हमलावर बारूद से भरी कारें लेकर अब्बास टाउन तथा अन्य शिया बहुल नगरों में घुस जाते हैं और बड़ी संख्या में शियाओं की लाशें दिखाई देने लगती हैं। - [सूफी दरगाहों पर हमले](https://bharatkaitihas.com/attacks-on-sufi-dargahs-in-pakistan/): भारत में लगभग प्रत्येक मुसलमान चाहे वह शिया हो, सुन्नी हो, अहमदिया हो, बोहरा हो, या कुछ और और हो, सूफियों की मजारों पर जाता है, ताजियों में शामिल होता है तथा जियारत करता है किंतु पाकिस्तान में सूफी दरगाहों पर हमले होते हैं क्योंकि वहाँ सूफियों को काफिर माना जाता है। सदियों से पाकिस्तान […] - [दीनदारों तथा सयैदों की जिंदगियों का अंतर](https://bharatkaitihas.com/the-difference-between-the-lives-of-the-deendars-and-the-sayyids/): पाकिस्तान में इंसानों का मैला ढोने वाले, मृत पशुओं की खाल उतारने वाले एवं भिश्तियों आदि को दीनदार मुसलमान कहा जाता है। - [ये कैसा पाकिस्तान !](https://bharatkaitihas.com/what-kind-of-pakistan-is-this/): पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों को अच्छी जिंदगी देने के नाम पर पांच लाख हिन्दुओं एवं सिक्खों का खून बहाकर पाकिस्तान बनवाया था किंतु ये कैसा पाकिस्तान है जिसमें करोड़ों मुसलमान नर्क से भी बदतर जिंदगी जी रहे हैं। नोबेल विजेताओं के लिए जगह नहीं पाकिस्तान निर्माण के बाद से लेकर यह […] - [मौत एवं पलायन ही है पाकिस्तान की नियति !](https://bharatkaitihas.com/process-of-death-and-migration-continues/): अमरीका से मिला धन पाकिस्तान के आतंकवादी छीन लेते हैं और उसी धन से वे अमरीका सहित पूरे विश्व में आतंकी गतिविधियों का संचालन करते हैं तथा मौत एवं पलायन का घृणित खेल खेलते हैं। - [भारत-पाक सम्बन्ध - क्यों नहीं हो सकती भारत से दोस्ती?](https://bharatkaitihas.com/why-cant-there-be-friendship-between-india-and-pakistan/): पटेल ने दिसम्बर 1950 में अपनी मृत्यु से पूर्व भारतीयों को याद दिलाया था- 'मत भूलो कि तुम्हारी भारत माता के अहम अंगों को काट दिया गया है।' - [पाकिस्तानियों की पहचान](https://bharatkaitihas.com/pakistanis-have-an-identity-crisis/):  पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खाँ की पत्नी राना लियाकत अली खाँ को पाकिस्तान में डायनेमो इन सिल्क कहा जाता है। - [कुछ अनुत्तरित प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/un-answered-questions-about-pakistan/): गांधीजी बार-बार यह क्यों कहते रहे कि कांग्रेस भारत-विभाजन का विरोध करेगी, यदि भयानक उपद्रव का खतरा हो तो भी! यहाँ तक कि यदि सम्पूर्ण भारत जल जाए तब भी? - [Government's Statement Of 3 June 1947 (Appendix)](https://bharatkaitihas.com/appendix-governments-statement-of-third-june/): British Government’s Statement Of 3 June 1947 was declaration of partition of India into two new nations- India and Pakistan. Government announced the intention of transferring power in British India to Indian hands. 1. On February 20 the, 1947, His Majesty’s Government announced their intention of transferring power in British India to Indian hands by […] - [संदर्भ सूचि - कैसे बना था पाकिस्तान](https://bharatkaitihas.com/reference-list-how-pakistan-was-formed/): संदर्भ सूचि – कैसे बना था पाकिस्तान पृष्ठ पर उन ग्रंथों, रिपोर्टों, गजेटियरों आदि का विवरण दिया गया है जिनसे इस ग्रंथ को लिखने में सहायता मिली है। अभिलेखागारीय सामग्री पत्रावली संख्या 113-पी/47, कंपलेण्ट्स अगेंस्ट जोधपुर स्टेट, राजपूताना स्टेट एजेंसी पोलिटिकल ब्रांच, पार्ट-1, 1947, राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली। पत्रावली संख्या 8(105) पी. आर.; बीकानेर, गवर्नमेंट […] - [बाबर के बेटों की दास्तान - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-babur-ke-beton-ki-dard-bhari-dastan/): इस अध्याय में बाबर के बेटों की दर्द भरी दास्तान – अनुक्रमणिका दी गई है। इस पुस्तक में बाबर तथा उसके बेटों का इतिहास लिखा गया है। - [बाबर के बेटों की दर्द भरी दास्तान - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/preface-of-babur-ke-beton-ki-dard-bhari-dastan/): बाबर के बेटों की दर्द भरी दास्तान – प्राक्कथन पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ग्रंथ की विषय-वस्तु स्पष्ट की गई है। इस ग्रंथ में बाबर (Babur) के पुरखों की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि से लेकर बाबर द्वारा दिल्ली की लोदी सल्तनत (Lodi Sultanate) पर विजय प्राप्त करने तथा बाबर के पुत्रों हुमायूं (Humayun), कामरान […] - [ययाति के वंशज कुत्तों का मांस खाने लगे (1)](https://bharatkaitihas.com/descendants-of-yayati-started-eating-the-meat-of-dogs/): पुराणों में लिखा है कि चंद्रवंशी महाराज ययाति (Yayati) के वंशज पूरी धरती पर फैल गए। उनके पुत्र तुरु के वंशज ‘तुर्क’ (Turk) कहलाये। राजा ययाति के पुत्र अनु से अभोज्य भोजन करने वाली प्रजा उत्पन्न हुई। वे लोग कुत्ते, बिल्ली, सांप आदि का मांस खाते थे। चूंकि मुगलों (Mughals) का उद्भव तुर्कों (Turk) एवं […] - [तुर्क कहलाने लगा नुकीली टोपी वाले हूणों का एक कबीला (2)](https://bharatkaitihas.com/tribe-of-huns-with-pointed-hats-came-to-be-called-turks/): चीन के उत्तर में स्थित मंगोलिया (M0ngolia) से लेकर मंचूरिया (Manchuria) तथा साइबेरिया (Siberia) तक के प्रदेश में एक प्राचीन जाति रहा करती थी जिसे हूंग-नू (Hoong-Nu) अथवा हूण (Hoon or Hun) कहा जाता था। नुकीली टोपी वाले हूणों का एक कबीला तुर्क (Turk) कहलाने लगा! भारतीय पुराणों के अनुसार राजा ययाति (Raja Yayati) के […] - [खान की उपाधि तुर्कों ने छीन ली मंगोलों से (3)](https://bharatkaitihas.com/turks-snatched-the-title-of-khan-from-the-mongols/): मंगोल कबीलों (Mongol Tribes) के मुखिया अपने नाम के साथ खाँ अथवा खान की उपाधि (Khan Title) लगाते थे। आगे चलकर ‘खाँ’ अथवा ‘खान’ सुल्तान (Sultan) एवं बादशाह (Badshah) का पर्याय बन गया। तुर्कों (Turk) ने मंगोलों (Mongol) को हराकर उनसे उनकी उपाधि छीन ली। जिस समय हूण (Hoon or Hun) मंगोलिया से निकलकर बाल्हीक […] - [चंगेज खाँ ने मुस्लिम देशों में विनाश किया (4)](https://bharatkaitihas.com/genghis-khan-caused-more-destruction-in-muslim-countries/): एक छोटे से कबीले का मुखिया चंगेज खाँ (Genghis Khan or Changes Khan) अब पेकिंग तथा खीवा के दो विशाल साम्राज्यों का स्वामी था किंतु इन राज्यों से संतुष्ट होने की बजाय दुनिया को अपने अधीन करने की उसकी भूख बढ़ गई। इस कारण चंगेज खाँ की सेनाएं पश्चिम दिशा में बढ़ती ही चली गईं। […] - [खलीफा की औरतें बगदाद की गलियों में घसीटी गईं (5)](https://bharatkaitihas.com/women-of-the-caliphs-palace-were-dragged-into-the-streets-of-baghdad/): मंगोल (Mongol) बगदाद (Baghdad) में भूखे गधों की तरह घुस गए और जिस तरह भूखे भेड़िये, भेड़ों पर हमला करते हैं, वैसा करने लगे। बिस्तर और तकिए चाकूओं से फाड़ दिए गए। खलीफा (Caliph or Khalīfa) की औरतें बगदाद की गलियों में घसीटी गईं और तातरियों का खिलौना बनकर रह गईं। जब मंगू खाँ अथवा […] - [हलाकू ने खलीफा को नमदे में लपेट कर मार डाला (6)](https://bharatkaitihas.com/halaku-killed-the-caliph-by-wrapping-him-in-a-sieve/): जब बगदाद (Baghdad) शहर में खलीफा (Caliph or Khalifa) के सैनिकों एवं नागरिकों के शव सड़ने लगे तो हलाकू (Hulagu Khan) ने अपने तम्बू बगदाद शहर के बाहर गढ़वाए तथा बगदाद को जलाकर राख करने के आदेश दिए। मंगोल (Mangol) सैनिकों ने खलीफा के विशाल महल में आग लगा दी। इस कारण महलों में प्रयुक्त […] - [मंगोल सम्राट बरके खाँ (7)](https://bharatkaitihas.com/mongol-politics-got-entangled-with-mongol-emperor-burke-khans-acceptance-of-islam/): मंगोल सम्राट बरके खाँ (Berke Khan) के इस्लाम स्वीकार करने से मंगोल राजनीति (Mongol Politics)उलझ गई! मुसलमान बनने वाला वह पहला मंगोल शासक था। तेरहवीं शताब्दी ईस्वी के मध्य में मंगोल सेनाएं मध्य-एशिया के खीवा (Khiva), ख्वारिज्म (Khwarazm), बगदाद (Baghdad), एशिया-कोचक (Asia Kochak) आदि राज्यों को जीतने के बाद सीरिया, अलीपो, दमस्कस तथा फिलिस्तीन को […] - [तैमूरलंग और चंगेज खाँ का रक्त बहता था बाबर की नसों में (8)](https://bharatkaitihas.com/the-blood-of-timur-lang-and-genghis-khan-used-to-flow-in-baburs-veins/): बाबर (Babur) की नसों में तैमूरलंग और चंगेज खाँ का रक्त बहता था। वह तैमूरलंग (Timur Lang) की पांचवी पीढ़ी का वंशज था और उसकी माता चंगेज खाँ (Changes Khan) की वंशज थी। तुर्कों (Turks) का उद्भव हूणों Hoons) के रक्त से हुआ था, उन्होंने बड़ी तेजी से मध्य एशिया में अपनी संख्या बढ़ाई और […] - [बाबर का बचपन (9)](https://bharatkaitihas.com/babar-had-become-old-in-his-childhood/): मिर्जा उमर शेख के मरते ही बाबर के तीन दुश्मनों ने अलग-अलग दिशाओं से बाबर के फरगना राज्य पर आक्रमण कर दिया। इनमें से एक तो बाबर का सगा ताऊ अहमद मिर्जा था और दूसरा बाबर का सगा मामा महमूद खाँ था। - [एक सौ ग्यारह साल की बुढ़िया ने बाबर को रास्ता दिखाया (10)](https://bharatkaitihas.com/the-one-hundred-and-eleven-year-old-old-lady-showed-the-way-to-babur/): दिखकाट गांव में बाबर (Babur) की भेंट एक बुढ़िया से हुई। उसने तैमूर लंग (Timur Lang) और उसकी सेना को समरकंद (Samarkand) से हिन्दुस्तान पर हमला करने के लिए जाते हुए देखा था। उस एक सौ ग्यारह साल की बुढ़िया ने बाबर को रास्ता दिखाया ! उज्बेक योद्धा शैबानी खाँ (Shaybani Khan) से परास्त हो […] - [बाबर के सैनिक भारत की भेड़, बकरियों एवं भैंसों पर टूट पड़े (11)](https://bharatkaitihas.com/baburs-soldiers-broke-down-on-indias-sheep-goats-and-buffaloes/): बाबर के सैनिक भारत की भेड़, बकरियों एवं भैंसों पर टूट पड़े! उन्हें भारत के सोने, चांदी और गुलामों से भी अधिक आकर्षक ये भेड़ बकरी लगते थे जिन्हें खाने के लिए वे बरसों से तरस रहे थे! उज्बेक योद्धा शैबानी खाँ (Shaibani Khan) द्वारा मध्य-एशिया में तैमूरी बादशाहों के राज्य छीन लिए जाने के […] - [बाबर की सेना पहाड़ी डाकुओं जैसी थी (12)](https://bharatkaitihas.com/baburs-army-was-like-hill-bandits/): जिस समय बाबर (Babur) ने भारत पर आक्रमण आरम्भ किए, उस समय बाबर की सेना किसी बादशाह की नियमित सेना जैसी नहीं दिखती थी। उसका पहनावा, युद्ध पद्धति तथा नैतिकता पहाड़ी डाकुओं से मेल खाती थी जो फटेहाल मैले-कुचैले कपड़ों में रहती थी और लाठी-डण्डों से लड़ती थी! बाबर के सैनिकों को किसी तरह का […] - [बाबर शिया बन गया ताकि उज्बेकों को मार सके (13)](https://bharatkaitihas.com/babur-turned-shia-to-kill-the-uzbeks/): उज्बेकों ने बाबर (Babur) का राज्य छीन लिया और उसकी सेना नष्ट कर दी। अपने राज्य पर फिर से अधिकार प्राप्त करने के लिए बाबर को ईरान के शाह की मदद की आवश्यकता थी। ईरान के शाह के कहने पर बाबर शिया बन गया ताकि शाह से सहायता प्राप्त की जा सके।  जनवरी 1505 में […] - [सुंदर दासियाँ पाने के लिए हजारों नौजवान अफगानिस्तान से भारत चल पड़े (15)](https://bharatkaitihas.com/thousands-of-young-men-migrated-from-afghanistan-to-india-for-the-beautiful-maids/): अफगानिस्तान के लोगों ने भारत की सुंदर औरतों के किस्से सुन रखे थे। जब बाबर भारत पर अधिकार करने के लिए चला तो भारत से सुंदर दासियाँ पाने के लालच में हजारों नौजवान बाबर की सेना (Babur Ki Sena) में भरती हो गए। ई.1513 में उज्बेगों द्वारा बाबर (Babur) को एक बार फिर समरकंद (Samarkand) […] - [बंदूक और तोप बनाने वाले मिल गए बाबर को (14)](https://bharatkaitihas.com/babur-got-guns-and-gunners/): दुनिया अत्यंत प्राचीन काल से बारूद (Barood) से परिचित थी तथा पत्थर के गोले छोड़ने वाली तोप का भी प्रयोग करत थी किंतु सोलहवीं शताब्दी ईस्वी के आरम्भ तक बारूद से चलने वाली बंदूक और तोप के प्रयोग से अनजान थी। भारत के दुर्भाग्य से बाबर (Babur) को ऐसे लोग मिल गए जो बारूद को […] - [अफगान लुटेरे डफलियाँ और चंग बजाते हुए भारत के लिए चल पड़े (16)](https://bharatkaitihas.com/afghan-robbers-left-for-india-playing-duffles-and-changs/): भारत की अकूत सम्पदा और सुन्दर दासियाँ पाने के लालच में हजारों अफगान लुटेरे (Afghan robbers) डफलियाँ और चंग बजाते हुए भारत के लिए चल पड़े। मानवता के मूल्यों से विहीन, प्राणीमात्र के प्रति संवेदना से रहित, करुणा और प्रेम के सुख से अंजान, शांति के मूल्य से अपरिचित ये दुर्दांत लुटेरे शीघ्रातिशीघ्र शस्य-श्यामलाम् एवं […] - [बाबर की पंजाब विजय (17)](https://bharatkaitihas.com/babur-saluted-the-ruler-of-punjab-daulat-khan-by-falling-on-his-knees/): बाबर (Babur) की पंजाब विजय (Babur’s Punjab Victory) उसकी अब तक की विजयों में सबसे महत्वपूर्ण थी। इतिहास की दृष्टि से बाबर की पंजाब विजय का मूल्यांकन भविष्य में होने वाली भारत विजय का पूर्वाभ्यास समझा जाना चाहिए। 17 नवम्बर 1525 को बाबर 25 हजार नौजवानों की एक सेना लेकर काबुल (Kabul) से भारत के […] - [हुमायूँ की हिसार विजय पर बाबर ने एक करोड़ रुपए दिए (18)](https://bharatkaitihas.com/babur-gave-a-prize-of-one-crore-rupees-to-humayun-for-winning-hisar/): बाबर (Babur) ने अपने बड़े पुत्र हुमायूँ (Humayun) को हिसार (Hisar) की तरफ भेजा। हुमायूँ की हिसार विजय पर बाबर ने उसे एक करोड़ रुपए का पुरस्कार दिया। दौलत खाँ लोदी (Daulat Kahan Lodi) की पराजय के साथ ही बाबर की पंजाब विजय (Babur’s Hisar Victory) का कार्य पूरा हो चुका था किंतु फिर भी […] - [दिल्ली सल्तनत विजय में बाबर को पांच घण्टे लगे (19)](https://bharatkaitihas.com/babur-won-the-delhi-sultanate-in-five-hours/): बाबर Babur) मुग़ल साम्राज्य (Mughal Sultanate) के संस्थापक और पहले शासक था बाबर द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) विजय में बाबर को पांच घण्टे लगे! पानीपत के निकट पहुंच कर बाबर ने अपनी तोपों को गाड़ियों पर चढ़ाकर सेना के आगे तैनात करवा दिया। इधर दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) विजय […] - [इब्राहीम लोदी का सिर मिल गया बाबर को (20)](https://bharatkaitihas.com/babur-got-severed-head-of-ibrahim-lodi/): वह शोकप्रद दृश्य देखकर बाबर (Babur) कांप उठा और इब्राहीम लोदी (Ibrahim Lodi) का सिर मिट्टी में से उठाकर कहा, तेरी वीरता को धन्य है। उसने आदेश दिया कि जरवफ्त के थान लाए जाएं और मिश्री का हलुआ तैयार किया जाए तथा सुल्तान के जनाजे को नहलाकर वहाँ दफ्न किया जाए, जहाँ वह शहीद हुआ […] - [पानीपत के मैदान में बदायूनीं ने प्रेतों की आवाजें सुनीं (21)](https://bharatkaitihas.com/badauni-heard-the-voices-of-the-ghosts-in-the-field-of-panipat/): पानीपत (Panipat) के मैदान में पश्चिम की ओर से आने वाले आक्रांताओं एवं भारतीय राजाओं की सेनाओं के बीच कई युद्ध हुए थे। यह मैदान कई बार सैनिकों के क्षत-विक्षत शवों से पटा था। जब अकबर का दरबारी मुल्ला मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूंनी (Badayuni) पानीपत के मैदान से होकर गुजरा तो उसने प्रेतों की मारकाट […] - [भारतीयों की लंगोट का मजाक उड़ाता था बाबर (22)](https://bharatkaitihas.com/babur-used-to-make-fun-of-the-nappies-of-indians/): बाबर (Babur) स्वयं एक भूखे नंगे देश से आया था किंतु वह भारतीयों की गरीबी देखकर सहानुभूति व्यक्त करने के स्थान पर भारतीयों की लंगोट तक का मजाक बनाता था। बाबर यह नहीं समझ सका कि भारतीयों के शरीर के कपड़े तो अफगानिस्तान, ईरान तथा समरंकद के लुटेरे ले गए। अब केवल यह लंगोट ही […] - [हिन्दुस्तान की इच्छा करूं तो मेरा मुँह काला हो (23)](https://bharatkaitihas.com/if-i-desire-hindustan-my-face-will-be-black/): अबूशका नामक एक लेखक ने लिखा है कि ख्वाजा कलां ने हौजे खास के निकट एक संगमरमर पर एक शेर खुदवाया जिसका अर्थ था कि मैं यदि हिन्दुस्तान की इच्छा करूं तो मेरा मुँह काला हो। जब बाबर (Babur) ने इस शेर को पढ़ा तो उसके क्रोध का पार नहीं रहा।  पानीपत की लड़ाई (Panipat […] - [बाबर की तोपें (24)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%82/): बाबर की तोपें (canons of Babur) भारत का इतिहास बदलने के लिए पर्याप्त सिद्ध हुईं। न तो दिल्ली का सुल्तान इब्राहीम लोदी (Ibrahim Lodi) और न चित्तौड़ का महाराणा सांगा (Maharana Sanga) जैसे वीर भारतीय राजा, कोई भी इन तोपों के आगे नहीं टिक सके! भारतीय सिपाही इन तोपों के सामने आकर मर तो सकते […] - [बाबर को जहर दे दिया इब्राहीम लोदी की माता ने (25)](https://bharatkaitihas.com/ibrahim-lodis-mother-poisoned-babur/): जब बाबर (Babur) ने इब्राहीम लोदी (Ibrahim Lodi) को मारकर दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) पर अधिकार कर लिया तब उसने इब्राहीम के परिवार की औरतों को आदर सहित अपने राज्य में रहने दिया किंतु इब्राहीम की माता बुआ बेगम (Bua Begum) ने बाबर को जहर दे दिया। आगरा पर अधिकार करने के बाद बाबर कई […] - [महाराणा सांगा पर आरोप लगाया बाबर ने (26)](https://bharatkaitihas.com/babar-falsely-accused-maharana-sanga/): बाबर ने महाराणा सांगा पर आरोप लगाया है कि सांगा ने ही बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण भिजवाया था ताकि दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम को मारकर उसके राज्य को बाबर तथा सांगा आधा-आधा बांट लें। इब्राहीम लोदी की माता ने 25 दिसम्बर 1526 को आगरा में बाबर को जहर दे दिया। इस […] - [सांगा से भयभीत बाबर तोपगाड़ियों के पीछे छिपकर रहता था (27)](https://bharatkaitihas.com/babar-used-to-hide-behind-artillery-carts-because-of-fear-of-maharana-sanga/): खानवा के मैदान में बाबर अपनी बड़ी-बड़ी तोपों के साथ युद्ध में उतरा था जबकि सांगा के पास पैदल तीरंदाजों और घुड़सवार तलवारबाजों के अतिरिक्त और किसी प्रकार के संसाधन नहीं थे। इस पर भी महाराणा सांगा से भयभीत बाबर तोपगाड़ियों के पीछे छिपकर रहता था। सांगा से भयभीत बाबर ने मेवात के शासक हसन […] - [सांगा के डर से बाबर ने शराब छोड़ दी! (28)](https://bharatkaitihas.com/fearful-of-maharana-sanga-babur-gave-up-on-alcohol/): ठण्डे ट्रांसऑक्सियाना क्षेत्र के निवासी होने के कारण मुगल शराब पीने के आदी थे किंतु खानवा के युद्ध में सांगा के डर से बाबर ने शराब छोड़ दी और अपने सैनिकों के सामने ही सोने-चांदी के बरतन भिखारियों में बांट दिए! जब फरवरी 1527 में महाराणा सांगा आगरा की ओर बढ़ने लगा तो जहीरुद्दीन बाबर […] - [दज्जाल था महाराणा सांगा (29)](https://bharatkaitihas.com/sheikh-jaini-compared-maharana-sanga-to-the-one-eyed-dajjal/): अरब की लोककथाओं में एक आंख वाले शैतान को दज्जाल कहा जाता है जो कयामत के दिन लोगों को उनके पापों की सजा देता है। शेख जैनी ने लिखा है कि मुसलमानों के लिए दज्जाल था महाराणा सांगा!  जब बाबर को सांगा की सेना दिखाई दी तो बाबर को अपनी मृत्यु साक्षात् दिखाई देने लगी। […] - [मेड़तिया राठौड़ महाराणा सांगा को खानवा के मैदान से बाहर ले गए! (30)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a5%8c%e0%a4%a1%e0%a4%bc/): जब खानवा के मैदान में बाबर से लड़ते हुए महाराणा सांगा के प्राण संकट में आ गए तब मेड़तिया राठौड़ महाराणा सांगा को खानवा के मैदान से बाहर ले गए! 17 मार्च 1527 को बाबर तथा महाराणा सांगा की सेनाएं खानवा के मैदान में लगभग एक पहर तथा दो घड़ी दिन व्यतीत हो जाने पर […] - [सलहदी और खानजादा ने युद्ध के बीच में सांगा को छोड़ दिया (31)](https://bharatkaitihas.com/salahdi-and-khanzada-leave-sanga-in-the-middle-of-the-war/): जिस समय महाराणा सांगा बाबर से लड़ने के लिए खानवा के मैदान में उतरा, उस समय दो मुसलमान सरदार सलहदी और खानजादा भी सांगा की तरफ से मैदान में उतरे किंतु उन्होंने युद्ध आरम्भ होते ही महाराणा सांगा को छोड़ दिया तथा बाबर से जा मिले! 17 मार्च 1527 को खानवा के मैदान में बाबर […] - [महाराणा सांगा की शपथ (32)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%aa%e0%a4%a5/): जब मेवाड़ी सरदार युद्धक्षेत्र में बेहोश हो गए सांगा को युद्धक्षेत्र से बाहर निकाल लाए। होश में आने पर महाराणा सांगा को बहुत दुख हुआ। उसने अपने सरदारों को बहुत कोसा तथा फिर से लड़ने के लिए तैयार हो गया। महाराणा की शपथ थी कि वह बाबर को जीते बिना चित्तौड़ वापस नहीं जाएगा!  बंदूकों […] - [खानवा में हिन्दुओं ने हिन्दुस्तान खो दिया! (33)](https://bharatkaitihas.com/hindu-kings-lost-hindustan-in-the-field-of-khanwa/): खानवा के युद्ध में हिन्दू राजाओं के पास एक अवसर था जब वे म्लेच्छों के शासन से सदैव के लिए मुक्ति पा सकते थे किंतु हिन्दुओं की पुरानी युद्ध पद्धति ने तथा महाराणा सांगा द्वारा सलहदी तथा खानजादा जैसे मुसलमान राजाओं पर भरोसा किए जाने की भूल ने यह अवसर खो दिया। खानवा में हिन्दुओं […] - [बाबर की बेगमें और बेटे एक-एक करके हिन्दुस्तान आने लगे (34)](https://bharatkaitihas.com/baburs-wives-and-sons-started-coming-to-india-one-by-one/): बाबर ने पानीपत, खानवा एवं चंदेरी के युद्धों में जीत हासिल करके भारत में अपना राज्य जमा लिया था किंतु उसका परिवार अभी तक अफगानिस्तान में था। इसलिए बाबर ने अपने परिवार को भारत बुलाने का निश्चय किया। इस कारण बाबर की बेगमें और बेटे एक-एक करके हिन्दुस्तान आने लगे। खानवा का युद्ध जीतने के […] - [फजल अब्बास कलंदर ने बाबर से अयोध्या में मस्जिद बनाने को कहा (35)](https://bharatkaitihas.com/fazal-abbas-qalandar-asked-babur-to-build-a-mosque-in-ayodhya/): फकीर फजल अब्बास कलंदर ने कहा कि जन्मस्थान मंदिर तुड़वा कर मेरी नमाज के लिए एक मस्जिद बनवा दो। बाबर ने कहा कि मैं आपके लिए इसी मंदिर के पास एक मस्जिद बनवा देता हूँ। इस पर फकीर फजल अब्बास कलंदर ने कहा मैं इस मंदिर को तुड़वाकर उसकी जगह मस्जिद बनवाना चाहता हूँ। तू […] - [राजगुरु देवीनाथ पांडे](https://bharatkaitihas.com/rajguru-devinath-pandey-made-the-first-sacrifice-for-shri-ram-janmabhoomi/): कुछ इतिहासकारों ने सिद्ध करने की चेष्टा की है कि यह मस्जिद औरंगजेब के समय में बनी तथा इसे बाबरी मस्जिद कहा गया किंतु औरंगजेब के समकालीन इतिहासकारों ने अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तोड़े जाने और उसके स्थान पर मस्जिद बनवाए जाने का कोई उल्लेख नहीं किया है। - [दिल्ली सल्तनत का स्वामी बन गया बाबर (37)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80/): समरकंद और फरगना से लुट-पिट कर आया बाबर पानीपत का युद्ध, खानवा का युद्ध, चंदेरी का युद्ध और घाघरा का युद्ध जीतकर दिल्ली सल्तनत का स्वामी बन गया। यह भारत भूमि का दुर्भाग्य ही था कि भारत के बड़े-बड़े हिन्दू राजा देखते ही रह गए और एक असभ्य लुटेरा गंगा-यमुना के हरे-भरे मैदानों का मालिक […] - [हुमायूँ की माता ने बाबर से कहा आप हमारे पुत्र को भूल जाइए (38)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-mother-said-to-babur-forget-our-son/): हुमायूँ की माता माहम बेगम ने शोक से कातर होकर कहा- ‘मेरा तो केवल यही एक पुत्र है, इसलिए मैं दुःखी होती हूँ किंतु आप बादशाह हैं, आपको क्या दुःख है? आपके कई अन्य पुत्र भी हैं। हमारे पुत्र को आप भूल जाइए!’ बाबर ने घाघरा के युद्ध में महमूद खाँ लोदी के नेतृत्व में […] - [बाबर का व्यक्तित्व विकृति का शिकार था (39)](https://bharatkaitihas.com/babur-was-a-victim-of-personality-distortion/): बाबर का व्यक्तित्व इतिहासकारों के लिए जटिल पहले बनकर रह गया है। एक तरफ तो वह उच्च कोटि की कविताएं लिखता था और दूसरी ओर जीवन भर युद्ध के मैदानों में रहकर क्रूरतम अत्याचार करता था। एक ओर तो वह अपने परिवार से अनन्य प्रेम करता था और दूसरी ओर वह हिन्दुओं के सिर कटवाकर […] - [बाबर ने भारत के अतिरिक्त और कहीं भी भवन नहीं तोड़े (40)](https://bharatkaitihas.com/babur-did-not-demolish-buildings-anywhere-other-than-india/): बाबर ने भारत के अतिरिक्त और कहीं भी भवन नहीं तोड़े । इसका मुख्य कारण यह प्रतीत होता है कि बाबर के समय तक हिन्दू धर्म भारत के अतिरिक्त उस किसी भी क्षेत्र में स्थित नहीं जिन क्षेत्रों पर बाबर ने आक्रमण किए थे। न वहाँ कोई मंदिर एवं देवालय आदि ही बचे थे। बाबर […] - [बाबरनामा बाबर की आंखों के सामने नष्ट हो गया (46)](https://bharatkaitihas.com/most-of-the-baburnama-was-destroyed-in-front-of-babars-eyes/): बाबर के जीवन काल की घटनाओं का सर्वाधिक विस्तृत वर्णन स्वयं बाबर की पुस्तक बाबरनामा से मिलता है किंतु इसके विवरण पूर्णतः विश्वसनीय नहीं हैं। बाबर ने तथ्यों को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़-मरोड़ कर लिखा है। हालांकि बाबर ने इस पुस्तक में एक स्थान पर लिखा है कि मैंने प्रण लिया था कि मैं […] - [मुगलों की निंदा करता था बाबर (42)](https://bharatkaitihas.com/babur-used-to-strongly-condemn-the-mughals/): यद्यपि बाबरनामा स्वयं भी झूठ से भरा पड़ा है तथापि बाबरनामा से कई चौंकाने वाले खुलासे होते हैं किंतु यह देखकर हैरानी होती है कि आधुनिक भारतीय इतिहासकारों ने बाबरनामा की सच्चाइयों को यत्नपूर्वक छिपाया है। इनमें से सबसे बड़ी सच्चाई बाबर के वंश के सम्बन्ध में है। बाबरनामा से ज्ञात होता है कि बाबर […] - [माहम सुल्ताना हेरात के शिया परिवार की बेटी थी !](https://bharatkaitihas.com/humayuns-mother-was-daughter-of-shia-family-of-herat/): हुमायूँ की माता माहम सुल्ताना हेरात के शिया परिवार की बेटी थी! उसे माहिज बेगम एवं माहम बेगम भी कहते थे। गुलबदन बेगम ने उसे अपनी पुस्तकों में आका बेगम एवं आकम बेगम भी लिखा है। हुमायूँ के व्यक्तित्व पर माहम सुल्ताना की गहरी छाप थी। 26 दिसम्बर 1530 को बाबर की मृत्यु हो गई […] - [कांटों का ताज सौंपा बाबर ने हुमायूँ को (44)](https://bharatkaitihas.com/babur-had-handed-over-the-crown-of-thorns-to-humayun/): बाबर की मृत्यु के समय उसके चार पुत्र जीवित थे जिनमें से हुमायूँ सबसे बड़ा था। बाबर ने उसे ही अपना उत्तराधिकारी बनाया। वास्तव में बाबर ने हुमायूँ को जो बादशाहत दी, वह कांटों का ताज से अधिक कुछ नहीं थी! हालांकि बाबर ने अपनी मृत्यु से चार दिन पहले हुमायूँ को अपना उत्तराधिकारी घोषित […] - [हुमायूँ की सल्तनत स्वार्थी भाइयों में बंट गई (45)](https://bharatkaitihas.com/humayun-divided-his-kingdom-among-his-selfish-brothers/): बाबर जानता था कि उसका बड़ा पुत्र हुमायूँ योग्य शहजादा है किंतु उसके छोटे भाई न केवल अयोग्य हैं अपितु राज्य के लालची भी हैं। इसलिए बाबर ने हुमायूँ को अपना उत्तराधिकारी बनाया किंतु हुमायूँ ने अपनी सल्तनत का बंटवारा करने का निश्चय किया। इस कारण हुमायूँ की सल्तनत स्वार्थी भाइयों में बंट गई! बाबर […] - [मिर्जा कामरान ने बड़े भाई हुमायूँ की पीठ में पहली छुरी मारी (46)](https://bharatkaitihas.com/mirza-kamran-stabs-elder-brother-humayun-in-the-back/): हुमायूँ को कालिंजर के राजा रुद्र प्रताप देव तथा अफगानों के नेता महमूद लोदी से संघर्ष में फंसा हुआ देखकर मिर्जा कामरान ने पंजाब पर हमला कर दिया। कामरान का यह काम पीठ में छुरी भौंकने से कम नहीं था। बादशाह बनते समय हुमायूँ के सामने समस्याओं का अम्बार था जिन्हें धैर्य, समय, परिश्रम, योग्यता […] - [मुहम्मद जमां मिर्जा ने हुमायूँ की पीठ में दूसरी छुरी भौंकी (47)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-brother-in-law-blew-another-knife-into-humayuns-back/): जिस समय हुमायूँ कालिंजर के राजा रुद्र प्रताप देव तथा अपने छोटे भाई मिर्जा कामरान से उलझा हुआ था उस समय ने हुमायूँ के बहनोई मुहम्मद जमां मिर्जा ने हुमायूँ की पीठ में दूसरी छुरी भौंक दी! बादशाह बनते ही हुमायूँ चारों तरफ शत्रुओं से घिर गया। कालिंजर का राजा रुद्र प्रताप देव कालपी पर […] - [गुजरात का सुल्तान बहादुरशाह समुद्र में डूब कर मर गया (48)](https://bharatkaitihas.com/sultan-of-gujarat-died-by-drowning-in-the-sea/): फरवरी 1537 में गुजरात का सुल्तान बहादुरशाह समुद्र में नाव उलट जाने से डूब कर मर गया, जब वह दीव के पुर्तगाली गवर्नर से मिलने जा रहा था। बहादुरशाह ने गुजरात तथा मालवा पर फिर से अधिकार कर लिया था किंतु वह इस विजय का उपभोग नहीं कर सका। यूरोपियन इतिहासकार ब्रिग्ज ने लिखा है […] - [शेर खाँ बाबर के प्रधानमंत्री खलीफा का नौकर था (49)](https://bharatkaitihas.com/sher-khan-was-servant-of-the-khalifa-prime-minister-of-babur/): बबार की मृत्यु के तुरंत बाद तथा हुमायूँ के बादशाह बनते ही शेर खाँ का नाम अचानक ही इतिहास की पुस्तकों में सामने आने लगता है। उससे पहले शेर खाँ का कोई उल्लेख नहीं मिलता। वह कौन था, कहाँ से आया था, अचानक ही क्यों इतना महत्वपूर्ण हो गया था, इसे जानने के लिए हमें […] - [शेर खाँ सूरी ने हुमायूँ को जमकर मूर्ख बनाया (50)](https://bharatkaitihas.com/sher-khan-made-a-fool-of-humayun/): शेर खाँ सूरी पन्द्रह महीने तक बाबर के प्रधानमंत्री निजामुद्दीन अली मुहम्मद खलीफा की सेवा में रहा। इस दौरान शेर खाँ सूरी ने मुगलों के सैनिक संगठन, उनकी रणपद्धति तथा उनकी शासन व्यवस्था का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया। कुछ समय बाद शेर खाँ सूरी फिर से अपनी जागीर सहसराम में चला आया परन्तु इस […] - [हुमायूँ की भूल (51)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b2/): सरल स्वभाव का हुमायूँ लोगों के कथन पर सहज ही विश्वास कर लेता था, यहाँ तक कि अपने शत्रुओं की बातों पर भी विश्वास कर लेता था। राजनीति में सहज विश्वास कर लेने की आदत हुमायूँ की भूल सिद्ध हुई।  शेर खाँ ने चुनार के दुर्ग पर सहज ही अधिकार कर लिया और हुमायूँ उससे […] - [राजा चिंतामणि के साथ घिनौना व्यवहार किया शेरशाह सूरी ने (52)](https://bharatkaitihas.com/sher-khan-treated-king-chintamani-in-a-deplorable-manner/): ई.1539 में रोहतास दुर्ग पर राजा चिंतामणि का शासन था। इतिहास की पुस्तकों में राजा चिंतामणि को नृपति भी कहा गया है। राजा चिन्तामणि शेर खाँ का मित्र था। राजा चिंतामणि इस बात को समझने में असफल रहा कि राजनीति में कोई किसी का मित्र नहीं होता, मुसलमान तो बिल्कुल भी नहीं! जब हुमायूँ (Humayun) […] - [मिर्जा हिन्दाल ने हुमायूँ की पीठ में तीसरी छुरी मारी (53)](https://bharatkaitihas.com/mirza-hindal-stabs-humayun-in-back-with-the-third-knife/): मिर्जा हिन्दाल के कर्त्तव्य-भ्रष्ट हो जाने के कारण हुमायूँ की सेना में रसद की कमी हो गई। इधर शेर खाँ ने आगरा जाने वाले मार्गों पर नियन्त्रण कर लिया। इन परिस्थितियों में बंगाल से वापसी-यात्रा की तैयारी करने के अतिरिक्त हूमायू के पास कोई चारा नहीं बचा। जब हुमायूँ ने शेर खाँ की तरफ बढ़ना […] - [मौत का जाल बिछा दिया शेर खाँ ने (54)](https://bharatkaitihas.com/sher-khan-laid-a-terrible-death-trap-for-humayun/): जब शेर खाँ को ज्ञात हुआ कि हुुमायूँ वापस जा रहा है तो वह जंगलों से निकल आया। उसने हुमायूँ के लिए मौत का जाल बिछा दिया। इस समय हुमायूँ की स्थिति उस चिड़िया की तरह थी जिसके पैरों में मौत का जाल था और उसे खतरे का आभास तक नहीं था। जब बंगाल की […] - [चौसा का युद्ध (55)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): चौसा का युद्ध कोई युद्ध नहीं था किंतु हुमायूँ के भाग्य का विनाश करने वाला सिद्ध हुआ। चौसा नामक स्थान पर शेर खाँ सूरी ने अचानक ही हुमायूँ के शिविर में घुसकर शाही हरम की औरतें पकड़ लीं और हुमायूँ को जान बचाकर भागना पड़ा। इसी के साथ हिन्दुस्तान का तख्त और ताज दोनों ही […] - [बाबर के बेटे अपने ही भाई को नष्ट करने लगे (56)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%87/): बाबर (Babur) ने पूरी जिंदगी खपाकर हिन्दुस्तान में अपनी सल्तनत स्थापित की थी। हुमायूँ (Humayun) उस सल्तनत को विस्तार दे रहा था किंतु बाबर के बेटे बड़े निकम्मे निकले, वे अपने ही भाई को मारकर अपने बाप के द्वारा बनाई गई सल्तनत को नष्ट करने पर तुल गए! 26 जून 1539 का तड़का होते ही […] - [गुलबदन को बलपूर्वक लाहौर ले गया मिर्जा कामरान (57)](https://bharatkaitihas.com/mirza-kamran-took-gulbadan-to-lahore-by-force/): बाबर की एक स्त्री का नाम दिलदार बेगम था जिसकी कोख से गुलबदन तथा हिन्दाल का जन्म हुआ था। इन दोनों बच्चों को हुमायूँ की माता माहम सुल्ताना ने पाला था किंतु जब बाबर के दूसरे नम्बर के पुत्र मिर्जा कामरान ने अपने सौतेले भाई हुमायूँ से बगावत की तब मिर्जा हिन्दाल भी इस बगावत […] - [बिलग्राम का युद्ध बिना गोली चलाए हार गया हुमायूँ! (58)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): जिस तरह चौसा का युद्ध कोई वास्तविक युद्ध नहीं था, उसी प्रकार बिलग्राम का युद्ध कोई वास्तविक युद्ध नहीं था। इन दोनों युद्धों में न तो शेर खाँ सूरी ने एक भी गोली चलाई और न हुमायूँ की तरफ से कोई गोली चली। फिर भी इन दोनों युद्धों में हुमायूँ की करारी हार हुई तथा […] - [हरम की औरतें मार डालना चहता था हुमायूँ (59)](https://bharatkaitihas.com/humayun-wanted-to-kill-the-women-of-his-family/): शेर खाँ के हमलों से हुमायूँ इतना भयभीत हो गया कि वह अपने हरम की औरतें मार डालना चाहता था ताकि वे शेर खाँ के सैनिकों के हाथों में न पड़ सकें तथा उनके साथ अफगान सैनिक बलात्कार न कर सकें। कन्नौज अथवा बिलग्राम के युद्ध में परास्त होने के बाद हुमायूँ बड़ी कठिनाई से […] - [दर-दर के भिखारी हो गए बाबर के बेटे (60)](https://bharatkaitihas.com/babars-sons-became-beggars-from-door-to-door/): सल्तनत के लालची बाबर के बेटे आपसी कलह, हुमायूँ की अयोग्यता एवं शेर खाँ सूरी की महत्वाकांक्षाओं के कारण दर-दर के भिखारी होकर भारत की भूमि से भाग जाने की तैयारी करने लगे। ऐसे समय में भी मिर्जा कामरान ने दुष्टता नहीं छोड़ी। इस समय तक शेर खाँ ने आगरा तथा दिल्ली पर अधिकार कर […] - [हमीदा बानू बेगम ने कहा हुमायूँ से विवाह कैसे करूं (61)](https://bharatkaitihas.com/how-to-marry-humayun-my-hands-do-not-reach-his-neck/): हुमायूँ को बताया गया कि यह मीर बाबा दोस्त की पुत्री हमीदा बानू बेगम है। दूसरे दिन मिर्जा हिंदाल के निवास पर फिर मजलिस हुई जिसमें बादशाह हुमायूँ उपस्थित हुआ। हमीदा बानू बेगम प्रायः मिर्जा हिंदाल के हरम के साथ ही रहती थी। इसलिए हुमायूँ को वह दूसरे दिन भी दिखाई दी। दिसम्बर 1540 में […] - [हुमायूँ के किले नौकरों ने छीन लिए (62)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-servants-snatched-humayuns-fort/): जब मनुष्य का बुरा समय आता है तब दुर्भाग्य उसे हर ओर से घेर लेता है। उसके अपने ही उसके दुश्मन हो जाते हैं, यहाँ तक कि नौकर भी पीछे नहीं रहते। हुमायूँ के बुरे दिन आए देखकर हुमायूँ के किले उसके नौकरों ने ही छीन लिए! हुमायूँ चालीस दिन तक हमीदा बानूं बेगम के […] - [तार्दी बेग ने हमीदा बेगम को घोड़ा नहीं दिया (63)](https://bharatkaitihas.com/tardi-beg-refused-to-give-the-horse-to-hamida-begum/): हुमायूँ ने तार्दी बेग खाँ से कहा कि वह अपना घोड़ा हमीदा बानू बेगम को दे दे किंतु तार्दी बेग ने घोड़ा देने से मना कर दिया। इस पर हुमायूँ ने कहा कि मेरे लिए जौहर आफ्ताबची का ऊंट तैयार करो, बेगम मेरे घोड़े पर सवारी करेंगी। नादिम बेग ने अपनी माता को उस ऊंट […] - [अमरकोट के राणा ने हुमायूँ को नया जीवन प्रदान किया (64)](https://bharatkaitihas.com/rana-of-amarkot-gave-new-life-to-humayun/): 22 अगस्त 1542 को हुमायूँ अत्यंत दयनीय दशा में अमरकोट पहुँचा। राहुल सांकृत्यायन ने लिखा है कि हुमायूँ अपने सात साथियों के साथ अमरकोट पहुंच पाया किंतु यह बात सही नहीं है, इस समय भी हुमायूँ के पास कुछ सौ सिपाही अवश्य ही रहे होंगे क्योंकि आगे के वर्णनों में उनके उल्लेख एवं नाम मिलते […] - [अमरकोट का राणा वीरसाल हुमायूँ को छोड़ गया (65)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2/): जब हुमायूँ ने तार्दीबेग से कुछ नहीं कहा तो अमरकोट का राणा वीरसाल हुमायूँ से नाराज होकर रात में ही अपने सैनिकों सहित अमरकोट के लिए रवाना हो गया। सोढ़ा, सूदमः और समीचा सरदार भी अपनी-अपनी सेनाएं लेकर चले गए। हुमायूँ अमरकोट के राणा की सेना लेकर ठट्ठा के शासक मिर्जा शाह हुसैन पर चढ़ाई […] - [हुमायूँ की दूत खानजादः बेगम (66)](https://bharatkaitihas.com/humayun-sent-khanzadah-begum-as-his-messenger/): खानजादः बेगम हुमायूँ की बुआ थी किंतु हुमायूँ के अनुरोध पर कामरान को समझाने के लिए हुमायूँ की दूत बनकर सिंध से कांधार के लिए रवाना हो गई। वहाँ पहुंचकर हुमायूँ की दूत ने कामरान को भी कांधार बुलवा लिया। मिर्जा कामरान एक बड़ी सेना लेकर कांधार पहुंचा। पिछले छः महीनों से हुमायूँ सिंध क्षेत्र […] - [शाहहुसैन का षड़यंत्र (67)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b7%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): शाहहुसैन का षड़यंत्र इतना घिनौना था कि उसने न केवल हुमायूँ को बर्बाद कर दिया अपितु मानवता को भी शर्मसार किया। कोई शायद ही इस बात पर विश्वास कर सकता है कि इंसान अपने बादशाह के साथ ऐसा घृणित व्यवहार भी कर सकता है! कामरान ने मिर्जा हिंदाल को लमगानात और उसके निकटवर्ती दर्रों का […] - [पिशाचों के देश में पहुंच गया हुमायूँ (68)](https://bharatkaitihas.com/humayun-has-reached-land-of-vampires/): जब हुमायूँ का काफिला उस गांव के पास पहुंचा तो वहाँ पर बहुत ही कम घर दिखाई दिए जिनमें कुछ जंगली बिलूची पहाड़ के नीचे बैठे हुए थे। उनकी बोली पिशाचों जैसी थी। हुमायूँ पिशाचों के देश में पहुंच गया ! सिंध के अंतिम छोर पर स्थित सीबी के निकट पहुंचकर हुमायूँ ने कामरान की […] - [ईरान की बेगम ने हमीदा बानू बेगम का शानदार स्वागत किया (69)](https://bharatkaitihas.com/begum-of-iran-gave-a-grand-welcome-to-hamida-banu-begum/): एक दिन शाहजादा सुल्तानम ने हमीदा बानू बेगम का आतिथ्य किया। शाह ने अपनी बहिन से कहा कि हिंदुस्तान की मलिका के सम्मान में राजधानी से बाहर उत्सव रखना। ईरान की बेगम ने हमीदा बानू बेगम का शानदार स्वागत किया। हुमायूँ अपनी पत्नी हमीदा बानू बेगम तथा तीस लोगों के साथ एक ऐसे बलूच कबीले […] - [रौशन कोका ने बादशाह के हीरे चुरा लिए (70)](https://bharatkaitihas.com/roshan-koka-stole-kings-diamonds/): एक दिन हमीदा बानो सिर धोने गई तो उस थैली को रूमाल में लपेटकर बादशाह के पलंग के सिराहने रख गई। रौशन कोका ने रूमाल में लिपटी हुई थैली को देख लिया और उसे खोलकर उसमें से पांच लाल चुराकर ख्वाजा गाजी को सौंप दिए। हुमायूँ अपनी बेगम हमीदा बानो एवं 20-22 अमीरों के साथ […] - [फारस की शहजादी ने हुमायूँ के प्राणों की रक्षा की (71)](https://bharatkaitihas.com/princess-of-persia-saved-humayuns-life/): ईरान का शाह तहमास्प हुमायूँ से खुश नहीं रहता था। तहमास्प का एक भाई भी हुमायूँ से दुश्मनी रखने लगा। ऐसी स्थिति में फारस की शहजादी ने हुमायूँ के प्राणों की रक्षा की। कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि तहमास्प का एक भाई हुमायूँ से वैमनस्य रखने लगा। उसने कुछ लोगों के साथ मिलकर हुमायूँ […] - [कांधार दुर्ग के धन को लेकर मारकाट मच गई (72)](https://bharatkaitihas.com/there-was-a-ruckus-over-the-wealth-of-kandahar-fort/): हुमायूँ ने फारस के शाह की सेना लेकर कांधार दुर्ग पर आक्रमण किया तथा 40 दिन की घेरेबंदी के बाद कांधार पर अधिकार कर लिया। हुमायूँ ने बैराम खाँ को काबुल भेजकर कामरान से कहलवाया कि वह काबुल खाली करके हुमायूँ की शरण में आ जाए किंतु कामरान ने काबुल खाली करने से मना कर […] - [भारत सरकार अधिनियम 1935](https://bharatkaitihas.com/government-of-india-act-niniteen-hundred-thirty-five/): भारत सरकार अधिनियम 1935 के माध्यम से प्रान्तों में स्वायत्त शासन तथा केन्द्र में आंशिक उत्तरदायी सरकार की स्थापना की व्यवस्था की गई। इसलिए भारत सचिव के उन अधिकारों में कमी की गई जिनके द्वारा वह भारत सरकार पर प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रखता था किन्तु गवर्नर जनरल तथा गवर्नरों के अधिकारों में वृद्धि कर […] - [भारत में साम्प्रदायिक समस्या](https://bharatkaitihas.com/development-of-communal-politics-in-india-part-one/): भारत में साम्प्रदायिक समस्या का आरम्भ मुसलमानों के भारत में प्रवेश के समय से हो गया था किन्तु ब्रिटिश शासन के दौरान इस समस्या ने एक नवीन रूप ग्रहण किया। साम्प्रदायिकता की समस्या साम्प्रदायिकता की समस्या हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन कर खड़ी हो गई। इस कारण जनता को आजादी […] - [भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास](https://bharatkaitihas.com/development-of-communal-politics-in-india-part-two/): भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास अंग्रेजी शासन के द्वारा किया गया। अंग्रेज अधिकारियों ने भारत के हिन्दुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे से लड़ते रहने के लिए प्रेरित किया ताकि वे एकजुट होकर भारत की स्वाधीनता के लिए न लड़ सकें। भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास (1.) मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसम्बर 1906 […] - [राजनीति में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस](https://bharatkaitihas.com/chapter-85-rise-of-netaji-subhash-chandra-bose-in-indian-politics-and-activism-in-congress/): भारतीय राजनीति में नेताजी सुभाषचन्द्र का नाम बहुत ऊँचा है। वे भारतीय राजनीति के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, देश की भूमि से बाहर जाकर सेना का निर्माण किया तथा ब्रिटिश कालीन राजनीति में नेताजी के नाम से जाने गए। प्रारम्भिक जीवन नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 […] - [भारतीय राष्ट्रीय सेना में सुभाषचंद्र बोस](https://bharatkaitihas.com/netaji-subhash-chandra-bose-and-indian-national-army/): कलकत्ता प्रेसीडेंसी में भूख हड़ताल करने से सुभाष बाबू की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इस पर सरकार ने उन्हें 5 दिसम्बर 1940 को जेल से मुक्त करके उनके घर में नजरबन्द कर दिया। घर में भी उन पर कड़े प्रतिबन्ध थे। भारत से पलायन नजरबंदी के दौरान कुछ दिनों तक सुभाष अपने घर में […] - [आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन](https://bharatkaitihas.com/reconstitution-of-azad-hind-fauj-by-netaji-subhash-chandra-bose/): रासबिहारी बोस ने 1 सितम्बर 1942 को आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी किंतु कुछ कठिनाइयों के कारण इसे भंग कर देना पड़ा। जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने रासबिहारी बोस के साथ काम करने का निश्चय किया तो सुभाष बाबू ने आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन करने का निश्चय किया। सुभाष द्वारा आजाद हिन्द […] - [सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/evaluation-of-netaji-subhash-chandra-boses-successes/): जिस समय देश को आजादी मिली, उस समय सुभाषचन्द्र बोस जीवित नहीं थे, फिर भी देश की आजादी में उनका बहुत बड़ा हाथ था। सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ अप्रतिम थीं। सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ आजाद हिन्द फौज की सफलताओं का मूल्यांकन आजाद हिन्द फौज के नायकों और सैनिकों में देश भक्ति की उज्जवल भावना थी। […] - [स्वतंत्रता के द्वार पर भारत](https://bharatkaitihas.com/india-at-the-gateway-to-freedom/): भारत का स्वतंत्रता के द्वार पर पहुंचना एक विस्मयकारी ऐतिहासिक घटना थी। इसके लिए विगत लगभग एक सौ सालों से भारतीय जनता प्राण-प्रण से प्रयासरत थी। भारत की स्वतंत्रता किसी एक घटना या आंदोलन का परिणाम नहीं थी। इसके पीछे बहुत सी घटनाओं, आंदोलनों एवं दबावों ने काम किया। इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति अथवा […] - [भारत का विभाजन](https://bharatkaitihas.com/partition-of-india/): भारत का विभाजन आधुनिक भारत के इतिहास के सबसे बड़ी त्रासदी थी। इस्लाम की मजहबी कट्टरता और अंग्रेजों की मक्कारी ने भारत का विभाजन किया। कांग्रेस में भारत विभाजन के प्रति सहमति गांधीजी सहित लगभग समस्त कांग्रेसी नेता भारत विभाजन के विरुद्ध थे। राजाजी राजगोपालाचारी जैसे नेता तथा घनश्यामदास बिड़ला जैसे उद्योगपति, भारत की आजादी […] - [स्वाधीनता का उदय](https://bharatkaitihas.com/elimination-of-independence-and-rise-of-independence/): 14 अगस्त 1857 को सर्यास्त के साथ ही भारत से पराधीनता के चिह्न विलोपित होने लगे एवं स्वाधीनता का उदय होने लगा। ब्रिटिश नेताओं एवं भारतीय नेताओं ने ब्रिटिश राज्यशाही के विलोपन में गरिमा को बनाए रखा। भारत के अंग्रेजों के विरुद्ध किसी तरह की नारेबाजी नहीं की गई एवं न उन्हें अपमानित करने का […] - [विभाजन के बाद साम्प्रदायिक उन्माद](https://bharatkaitihas.com/communal-frenzy-after-partition-of-india/): भारत विभाजन के बाद साम्प्रदायिक उन्माद उठ खड़ा हुआ। जो लोग अपने घरों को छोड़कर जा रहे थे, उनमें दूसरे सम्प्रदाय के विरुद्ध अपार क्रोध था जिसकी परिणति साम्प्रदायिक उन्माद में हुई। लॉर्ड माउण्टबेटन ने रैडक्लिफ आयोग की रिपोर्ट 15 अगस्त के बाद प्रकाशित करने का निर्णय लिया था। जिस समय रैडक्लिफ की रिपोर्ट प्रकाशित […] - [देशी रजवाड़ों की समस्या](https://bharatkaitihas.com/question-of-merger-of-indigenous-princely-states-in-independent-india/): भारत में अत्यंत प्राचीन काल से देशी रजवाड़े मौजूद थे। अंग्रेज इन्हें एक केन्द्रीय शासन व्यवस्था के अधीन लाना चाहते थे किंतु राजा लोग इसके लिए तैयार नहीं थी। आजादी के बाद भी देशी रजवाड़ों की समस्या बनी रही। इसे सुलझाना आवश्यक था। देशी रजवाड़ों की समस्या स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश में गवर्नरों द्वारा […] - [देशी रियासतें पाकिस्तान में मिलाने हेतु षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/jinnah-conspiracy-on-merger-of-indigenous-states-with-india/): मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने के उद्देश्य से भारत का विभाजन करवाया था किंतु जब पाकिस्तान बनने लगा तो मुहम्मद अली जिन्ना तथा उसके साथी नेताओं ने राजपूताने की देशी रियासतें पाकिस्तान में मिलाने हेतु गहरा षड़यंत्र किया। भारत विभाजन का निर्णय हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या की बहुलता के क्षेत्रों के आधार […] - [जूनागढ़ की समस्या](https://bharatkaitihas.com/problem-of-junagadh-on-merger-in-india/): भारत में विलय के प्रश्न पर जूनागढ़ की समस्या जूनागढ़ के नवाब द्वारा अनावश्यक रूप से खड़ी की गई। जूनागढ़ की बहुसंख्य प्रजा हिन्दू थी और शासक मुसलमान था जो कि पाकिस्तन में मिलना चाहता था। गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में 1748 ई. से जूनागढ़ रियासत स्थित थी। इस पर मुस्लिम नवाब का शासन था। […] - [हैदराबाद की समस्या](https://bharatkaitihas.com/hyderabad-problem-on-merger-in-india/): जिस समय भारत को स्वतंत्रता मिली, उस समय हैदराबाद रियासत के शासक ने अपनी रियासत को भारत एवं पाकिस्तान दोनों से स्वतंत्र रहने का प्रयास किया। इस कारण भारत सरकार के समक्ष हैदराबाद की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया। हैदराबाद रियासत की स्थापना 1720 ई. में चिनकुलीजखाँ ने की थी जिसने निजामुल्मुल्क की […] - [कश्मीर समस्या](https://bharatkaitihas.com/kashmir-problem-on-merger-in-india/): जिस समय भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय हैदराबाद की तरह कश्मीर के शासक ने भी अपनी रियासत को स्वतंत्र रखने का विचार किया, इस कारण भारत सरकार के समक्ष कश्मीर समस्या से निबटने की चुनौती खड़ी हो गई। भारत के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में 2,10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला जम्मू-कश्मीर राज्य सामरिक दृष्टि से विशेष […] - [Princes faced exile (4)](https://bharatkaitihas.com/when-princes-faced-exile/): Shahjahan’s trio of Princes became restless as they were being sent away from the capital Delhi. Shahjahan’s Princes faced exile. On 6 April 1648, Shah Jahan was 56 years old when he entered Delhi’s Red Fort, still his body was full of vigor and energy. Although thousands of women lived in Shah Jahan’s harem, Shah […] - [Red Fort Illuminated by the children of Mumtaz Mahal ! (3)](https://bharatkaitihas.com/illuminated-by-children-of-mumtaz-mahal/): Red Fort Illuminated by the children of Mumtaz Mahal, As a result, Shahjahan’s other eight Begums and many of their children were badly neglected and their names couldn’t be recorded on the pages of history. Shah Jahan had nine Begams – Kandhari Mahal, Akbarabadi Begum, Mumtaz Mahal, Hasina Begum, Moti Begum, Kudsia Begum, Fatehpuri Mahal, […] - [Red fort Descended with Wings of dreams (2)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-descended-with-wings-of-dreams/): Red fort Descended were with Wings of dreams. The huge royal palace was built in the middle of the Red Fort where Shah Jahan himself and his future generations were to live. In 1628, Jahangir’s son Khurram became the possessor of India’s lush green plains, uninterrupted rivers and high rising mountains, killing 18 of his […] - [Babur and Humayun - From rags to riches (1)](https://bharatkaitihas.com/babur-and-humayun-from-rags-to-riches/): Babur and Humayun came to India in rags but when they defeated Ibrahim Lodi, The Sultan of Delhi, Babur and Humayun became the riches. The rivers originating from the Himalayas had irrigated the vast plains of northern India for millions of years and nurtured its flora and fauna. These plains on the banks of the […] - [Tears of Red Fort : A Historical series on YouTube Channel](https://bharatkaitihas.com/tears-of-red-fort-a-historical-series-on-youtube-channel/): Tears of Red Fort is a historical serial originally written in Hindi by renowned historian Dr. Mohanlal Gupta under the title Lal Qila Ki Dard Bhari Dastaan. There are two Red Forts in India. The first red fort is in Agra, which was built by Tomar Rajputs, centennials before Muslims came to India. Sikandar Lodi, […] - [देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/democratic-system-in-native-princely-states-after-independence-of-india/): स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था स्थापित करने के लिए स्थानीय राजनीतिक संस्थाओं ने आंदोलन चलाए। इस कारण कुछ राज्यों में लोकप्रिय सरकारें स्थापित हुईं किंतु देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था इन रियासतों के विलीनीकरण के बाद ही स्थापित हो सकी। भारतीय राज्यों का भारत मे सम्मिलित होना एक बड़ी सफलता थी। […] - [ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी](https://bharatkaitihas.com/supreme-officials-of-british-rule-in-india/): भारत में ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी समय-समय पर अलग-अलग पदनामों से नियुक्त होकर आते रहे। इस सूची में बंगाल के गवर्नर से लेकर अंतिम क्राउन रिप्रजेंटेटिव तक के नाम दिए गए हैं। बंगाल के गवर्नर (ई.1757 -1765) ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा ई.1757 में प्लासी युद्ध की विजय से लेकर ई.1773 तक बंगाल के गवर्नर […] - [मुगलकालीन स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/mughal-art-architecture-and-literature-first-part/): मुगलकालीन स्थापत्य कला भारत के मध्यकालीन इतिहास की विभिन्न प्रवृत्तियों को जानने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। मुगल शासक भारत में विध्वसंक आक्रांताओं के रूप में आए थे। इस कारण उन्होंने भारत के मूल स्थापत्य का विध्वंस करके उनके ऊपर ही नई संरचनाओं क निर्माण करवाया। मुगलकालीन स्थापत्य कला 1221 ई. से लेकर 1526 ई. […] - [मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल - शाहजहाँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%95/): मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल शाहजहाँ का शासनकाल मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँच गई। शाहजहाँ ने अनेक इमारतें बनवाईं। वह स्वयं स्थापत्य कला में निपुण था। वह अपनी इमारतांे के नक्शे स्वयं देखता था। शाहजहाँ की इमारतें श्वेत संगमरमर से निर्मित हैं। उसके समय में राजपूताने में […] - [पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): औरंगजेब एवं परवर्ती मुगल बादशाहों के काल के स्थापत्य को पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य कहा जाता है। इस काल में मुगलों ने महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण बंद कर दिया तथा हिन्दू स्थपात्य को बड़ी क्षति पहुंचाई। जहाँगीर की मृत्यु के बाद चित्रकला का और शाहजहाँ की मृत्यु के बाद मुगल स्थापत्य कला का पतन आरम्भ हो […] - [मुगलकालीन साहित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मुगलकालीन साहित्य मुगल सल्तनत की पूर्ववर्ती तुर्की सल्तनत की अपेक्षा बहुत अधिक समृद्व था। इसका सबसे बड़ा कारण मुगलों की संस्कृति का बर्बर तुर्कों की संस्कृति से अलग होना था। मुगलकालीन साहित्य मुगलों के आने से पहले एवं मुगलों के काल में भी शाही दरबार की भाषा फारसी थी। राज्याधिकारियों को अनिवार्य रूप से फारसी […] - [मुगल कालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): मुगल कालीन चित्रकला निश्चित रूप से हिन्दू चित्रकला से भिन्न थी। मुगल कालीन चित्रकला के बिम्ब, विषय एवं शैली तीनों ही हिन्दू चित्रकला से अलग थे। मुगल कालीन चित्रकला कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि मुगल साम्राज्य की स्थापना के साथ ही चित्रकला में नवजीवन आ गया क्योंकि मुगल बादशाह चित्रकला के महान् प्रेमी थे। […] - [राजपूत राज्यों का प्रशासन](https://bharatkaitihas.com/administrative-structure-and-institutions-of-rajput-states/): राजपूत राज्यों का प्रशासन प्राचीन क्षत्रियों की राज्य व्यवस्था के आधार पर स्थपित किया गया था जिसमें धर्म एवं नैतिकता को प्रमुखता दी गई थी किंतु मध्यकालीन भारत में राजपूतों ने मुगलों के अनुकरण पर राजपूत राज्यों का प्रशासन स्थिर किया जिसमें प्रजा के हितों को बहुत कम संरक्षण दिया गया था। राजपूत शासकों ने […] - [राजपूतों का राजस्व प्रशासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be/): राजपूतों का राजस्व प्रशासन इस प्राचीन सिद्धांत पर आधारित था कि भोग रा धणी राज हो, भोम रा धणी म्हाँ छो। अर्थात् भूमि तो जोतने वाले किसान की है, राजा केवल भोग अर्थात् राजस्व का अधिकारी है किंतु मुगल काल में इस मान्यता को ठुकरा दिया गया और राजा एवं जागीरदार ही समस्त भूमि के […] - [राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5/): राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था और दण्ड-व्यवस्था का आधार प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्र थे। परम्परा, रीति-रिवाज तथा देशाचार को भी मान्यता दी जाती थी। गाँवों में न्याय व्यवस्था गाँव में ग्राम चौधरी या पटेल न्याय देने को कार्य करते थे। ग्राम पंचायत और जाति पंचायतों द्वारा भी न्याय का कार्य किया जाता था। पंचायतों के निर्णयों के […] - [राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d/): राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन परमपरागत हिन्दू सैन्य प्रबन्धन पर आधारित था जिसके कारण वे मुगलों का सामना तो करते थे किंतु उन्हें पराजित नहीं कर पाते थे। राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन सेना का गठन मध्यकालीन राजपूत राज्यों में सेना का रख-रखाव सामान्तों द्वारा किया जाता था। राजा को जब सेना की आवश्यकता होती थी तब […] - [राजपूत राज्यों में समाज](https://bharatkaitihas.com/society-and-economy-in-rajput-states/): राजपूत राज्यों में समाज भारत के अन्य क्षुत्रों की जनता की तुलना में अधिक परम्परावादी थी। सामाजिक परम्पराओं में परिवर्तन की गति बहुत धीमी थी। राजपूत राज्यों में समाज का शैक्षिक स्तर बहुत निम्न था और लोगों में राजा के विरुद्ध आवाज उठाने को विद्रोह एवं पाप माना जाता था। राजपूत राज्यों में समाज मध्यकालीन […] - [राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a5%8d/): राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था प्राचीन हिन्दू जीवन शैली पर आधारित थी और अत्यंत सरल कार्यकलापों से युक्त थी। राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था प्राचीन हिन्दू जीवन शैली पर आधारित थी और अत्यंत सरल कार्यकलापों से युक्त थी। प्रजा से उनके द्वारा अर्जित किए जाने वाले धन पर राजा केवल उतना ही कर लेता था जितना कि […] - [जनपद राज्य और प्रथम मगधीय साम्राज्य (अध्याय 10)](https://bharatkaitihas.com/janpad-rajya-and-first-magadhiya-empire/): जनपद राज्य वैदिक आर्यों ने जन अर्थात् कबीलों की स्थापना की थी। जन का आकार बढ़ने एवं नगरीय जीवन का प्रादुर्भाव होने से, बड़े राज्यों अर्थात् जनपद राज्य का उदय हुआ। धीरे-धीरे लोगों की निष्ठा जन अथवा अपने कबीले के प्रति नहीं रहकर उस जनपद राज्य के प्रति हो गई जिसमें वे बसे हुए थे। […] - [पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क (अध्याय 11)](https://bharatkaitihas.com/indias-contact-with-the-western-world/): मानव सभ्यता के प्रथम चरण में घुमक्कड़ प्रवृत्ति का था। वह छोटे-छोटे समूहों में दूर-दूर तक यात्राएं किया करता था और शिकार करके अपना पेट भरता था। इस कारण पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क अत्यंत प्राचीन काल से था। उत्तर-पूर्व भारत के छोटे रजवाड़ों और गणराज्यों का विलयन धीरे-धीरे मगध साम्राज्य में हो गया […] - [चंद्रगुप्त मौर्य (अध्याय 12)](https://bharatkaitihas.com/chandra-gupta-mourya/): इस अध्याय में चंद्रगुप्त मौर्य के इतिहास के साथ-साथ उसकी विजयें एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का वर्णन किया गया है। चंद्रगुप्त मौर्य ही वह पहला राजा है जिसके समय से भारतीय राजाओं की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिखित प्रमाण मिलने आरम्भ होते हैं। मौर्य वंश मौर्य साम्राज्य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का प्रारम्भिक जीवन अन्धकार में […] - [अशोक महान् (अध्याय 13)](https://bharatkaitihas.com/ashok-the-great/): अशोक महान् मौर्य राजवंश का तीसरा राजा था। वह चंद्रगुप्त मौर्य का पौत्र तथा बिन्दुसार का पुत्र था। उसका वास्तविक नाम अशोक था किंतु जवाहरलाल नेहरू ने अशोक को अशोक महान् तथा अकबर को अकबर महान् लिखा है, इस कारण इतिहास में उसे अशोक महान् के नाम से जाना जाता है। मौर्य सम्राट बिन्दुसार के […] - [मौर्य कालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/mauryan-era-india/): मौर्य कालीन भारत का इतिहास भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की अनूठी विरासत को समेटे हुए है। मौर्य कालीन समाज आज के भारतीय समाज से पूर्णतः भिन्न था। मौर्य कालीन भारत को जानने के तीन प्रमुख साधन हैं- (1) मेगस्थनीज का भारतीय विवरण, (2) कौटिल्य का अर्थशास्त्र तथा (3) अशोक के अभिलेख। मौर्य कालीन समाज वर्ण-व्यवस्था […] - [शुंग वंश एवं कण्व वंश](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6/): मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में एक के बाद एक तीन ब्राह्मण राज्य स्थापित हुए। इन राज्यों के संस्थापक शुंग वंश, कण्व वंश एवं सातवाहन वंश के थे। इस अध्याय में शुंग वंश एवं कण्व वंश का इतिहास दिया गया है। मौर्य-साम्राज्य भारत का प्रथम विशाल साम्राज्य था। मौर्य काल में भारत को […] - [सातवाहन अथवा आन्ध्र वंश](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a8/): सातवाहन राजाओं के नामों में गौतम और वसिष्ठ लगा हुआ है। ये ब्राह्मण गोत्र हैं। नासिक अभिलेख में गौतमीपुत्र शातकर्णि की माता गौतमी बलश्री को राजर्षिवधू कहा गया है। आन्ध्र वंश अथवा सातवाहन आन्ध्र एक जाति का नाम था जो गोदावरी तथा कृष्णा नदियों के मध्य-भाग में निवास करती थी। वायु पुराण के अनुसार आन्ध्र […] - [भारत के विदेशी शासक - यूनानी, शक, पह्लव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): भारत के विदेशी शासक मुख्यतः यूनानी, शक, पह्लव एवं कुषाण वंश के थे। इस अध्याय में यूनानी, शक एवं पह्लवों पर जानकारी दी गई है। कुषाण वंश के बारे में अगले अध्याय में जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। विदेशी आक्रमण अशोक की मृत्यु के साथ ही भारत की राजनीतिक विशृंखलता पुनः आरम्भ हो गई। उत्तरकालीन […] - [गुप्त वंश](https://bharatkaitihas.com/gupta-empire/): भारत में गुप्त वंश के शासकों की एक दीर्घ शृंखला ने 320 ईण् से 495 ईण् तक शासन किया। गुप्त वंश के शासन काल को भारतीय पुनर्जागरण का युग तथा भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। मौर्य शासन के नष्ट हो जाने के बाद भारत की राजनीतिक एकता भंग हो गई थी, […] - [प्रारंभिक गुप्त शासक](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): प्रारंभिक गुप्त शासक अब भी इतिहास के कुहासे में हैं, उनके बारे में स्पष्ट एवं विस्तृत जानकारी अब तक नहीं जुटाई जा सकी है। फिर भी अब तक प्राप्त तथ्यों के आधार पर श्रीगुप्त, घटोत्कच एवं चंद्रगुप्त (प्रथम) को प्रारम्भिक गुप्त शासक माना जाता है। प्रारंभिक गुप्त शासक श्रीगुप्त श्रीगुप्त का काल 275 ई. से […] - [काच](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a/): कुछ स्वर्णमुद्रओं पर काच नामक राजा का नाम लिखा हुआ मिलता है। इन मुद्राओं के सामने की ओर एक राजा अंकित है जो अपने बाएँ हाथ में चक्रध्वज लिए खड़ा है। राजा के बाएँ हाथ के नीचे ब्राह्मी लिपि में एक वर्तुलाकार लेख उत्कीर्ण है- ‘ काचो गामवजित्य दिवं कर्मभिरुत्तमैः ’ अर्थात् – पृथ्वी-विजय के […] - [समुद्रगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): गुप्त सम्राटों में समुद्रगुप्त का बड़ा नाम है। उसने ई.335 से 375 तक भारत के बड़े भूभाग को अपने अधीन किया तथा उस पर सफलता पूर्वक शासन किया। चन्द्रगुप्त (प्रथम) के बाद उसका पुत्र समुद्रगुप्त मगध के सिंहासन पर बैठा। चन्द्रगुप्त (प्रथम) की माता लिच्छवियों की राजकुमारी कुमारदेवी थी। यद्यपि समुद्रगुप्त के और भी कई […] - [रामगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): समुद्रगुप्त के बाद उसका बड़ा पुत्र रामगुप्त पाटलिपुत्र का राजा हुआ। उसे अपने पिता का विशाल साम्राज्य पैतृक अधिकार में प्राप्त हुआ किंतु वह इतने बड़े साम्राज्य के शासक के रूप में अयोग्य सिद्ध हुआ। रामगुप्त (375 ई.) समुद्रगुप्त के कई पुत्र तथा पौत्र थे। उसके ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम गुप्त था जो उसके […] - [चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य](https://bharatkaitihas.com/chandragupta-vikramaditya/): चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य को गुप्त शासकों के इतिहास में चन्द्रगुप्त द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। वह महान् हिन्दू सम्राट था जिसने भारत भूमि को धन-सम्पदा, ज्ञान-विज्ञान एवं धर्म-अध्यात्म से सम्पन्न बनाने में अद्भुत सफलताएं अर्जित कीं। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) समुद्रगुप्त की रानी दत्तदेवी का पुत्र था। वह बड़ा ही वीर तथा पराक्रमी राजकुमार था। […] - [गोविंद गुप्त बालादित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मालव अभिलेख के अनुसार चन्द्रगुप्त (द्वितीय) की मृत्यु के बाद गोविंद गुप्त बालादित्य राजा हुआ। अतः गोविंदगुप्त अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ किंतु उसका शासन अत्यंत अल्पकाल का रहा। गोविंद गुप्त बालादित्य (412-415 ई.) बसाढ़ (वैशाली) से ध्रुवस्वामिनी की एक मुहर प्राप्त हुई है जिस पर एक लेख इस प्रकार उत्कीर्ण है- महाराजाधिराज श्री चंद्रगुप्त-पत्नी […] - [कुमार गुप्त प्रथम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae/): कुमार गुप्त प्रथम गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय का कनिष्ठ पुत्र था। उसे महेन्द्रादित्य भी कहते हैं। गोविंद गुप्त बालादित्य के संक्षिप्त शासन काल के बाद कुमारगुप्त प्रथम गुप्तों के सिंहासन पर बैठा। कुमार गुप्त प्रथम (415-455 ई.) बिलसड़ अभिलेख के अनुसार कुमारगुप्त की आरम्भिक तिथि 415 ई. तथा उसके चांदी के सिक्कों पर उसकी अंतिम […] - [स्कन्दगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): कुमारगुप्त की मृत्यु के उपरान्त उसका पुत्र स्कन्दगुप्त सिंहासन पर बैठा। जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार वह ई. 455 में गुप्तों के सिंहासन पर बैठा। जूनागढ़ अभिलेख में स्कन्दगुप्त अपने पिता कुमारगुप्त के नाम का उल्लेख तो करता है किंतु अपनी माता के नाम का उल्लेख नहीं करता जबकि गुप्त शासकों में इस प्रकार के शिलालेखों […] - [गुप्त साम्राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/fall-of-gupta-empire/): ईस्वी 570 के आसपास गुप्त साम्राज्य का पतन हो गया। गुप्तों के पतन के बाद देश की राजनीतिक एकता भंग हो गई तथा छोटे-छोटे राज्यों का उदय होने लगा। उत्तरकालीन गुप्त सम्राट स्कन्दगुप्त के बाद उसका विमात-पुत्र पुरुगुप्त वृद्धावस्था में सिंहासन पर बैठा। पुरुगुप्त ने 467 ई. से 473 ई. तक शासन किया। उसने धनुर्धर […] - [गुप्त कालीन शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): गुप्त कालीन शासन व्यवस्था राज्य के संरक्षण एवं प्रजा के हित-साधन के सिद्धांतों पर केन्द्रित थीं। शासक द्वारा प्रजा से न्यूनतम कर लिया जाता था। गुप्त कालीन शासन व्यवस्था के मूल तत्व शासन का आदर्श गुप्त-सम्राटों के शासन का आदर्श बहुत ऊँचा था। वे स्वयं को प्रजा का ऋणी समझते थे और प्रजा की सेवा […] - [भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल](https://bharatkaitihas.com/golden-age-of-india-in-gupta-period/): गुप्त शासकों के शासन काल को भारत का स्वर्णयुग कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस काल में प्रजा सुखी एवं सम्पन्न थी। प्रजा को न तो शासन का और न अपराधियों का भय था। इतिहास में स्वर्ण युग का तात्पर्य उस युग से होता है जो अन्य युगों से अधिक […] - [गुप्त कालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/india-in-gupta-period/): गुप्त कालीन भारत में ब्राह्मण धर्म का पुनरुद्धार हुआ। इस काल में अनेक पुराण, नीति, स्मृति एवं अन्य धर्मशास्त्रों का लेखन हुआ तथा वैष्णव मंदिरों का निर्माण हुआ। यज्ञों का फिर से विस्तार हुआ। गुप्त कालीन समाज गुप्त कालीन भारत में बाह्य संस्कृति को आत्मसात् करने की अपूर्व क्षमता थी। यही कारण है कि शक, […] - [हूण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%a3/): हूण लोग मूलतः चीन के निवासी थे। चीनी भाषा में इन्हें हिगनू कहा जाता था। संस्कृत-साहित्य तथा अभिलेखों में इन्हें हूण कहा गया है। हूण लोग मंगोल जाति के थे और सीथियनों की एक शाखा से थे। ये लोग बड़े ही असभ्य, निर्दयी, रक्त पिपासु तथा लड़ाकू होते थे और युद्ध कला में बड़े कुशल […] - [हर्षवर्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): हर्षवर्धन के शासनकाल की जानकारी कई साधनों से मिलती है। हर्ष के दरबार में रहने वाले कवि बाणभट्ट ने अपनी कृति हर्षचरित में हर्ष तथा उसके पूर्वजों का वर्णन किया है। पुष्यभूति वंश का उदय गुप्त साम्राज्य के छिन्न-भिन्न हो जाने के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता एक बार पुनः समाप्त हो गई और देश […] - [हर्ष की उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): हर्ष की उपलब्धियाँ उसके साम्राज्य विस्तार के रूप में तो हमारे सामने आती ही हैं, साथ ही सांस्कृतिक क्षेत्र में भी हर्ष की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं। हर्ष की उपलब्धियाँ हर्ष की गणना भारत के महान् सम्राटों में की जाती है, हर्ष की उपलब्धियाँ इस प्रकार से हैं- (1) महान् विजेता स्मिथ ने हर्ष की उपलब्धियों […] - [ह्वेनसांग की भारत यात्रा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): चीनी चात्री ह्वेनसांग की भारत यात्रा सातवीं शताब्दी ईस्वी में हुई। उस समय उत्तर भारत में हर्षवर्धन बहुत बड़े क्षेत्र पर शासन कर रहा था। ह्वेनसांग की भारत यात्रा के विवरण से हमें सातवीं शताब्दी ईस्वी के भारत के इतिहास की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है। चीनी चात्री ह्वेनसांग ह्वेनसांग एक चीनी यात्री था, जो […] - [पल्लव एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/the-contribution-of-the-pallavas-to-indian-culture/): दक्षिण के राज्यों में पल्लव वंश का बहुत बड़ा महत्त्व है। इस वंश ने दक्षिण भारत पर लगभग 500 वर्ष तक शासन किया। इस वंश का उदय लगभग 350 ई. में चोड अथवा चोल देश के पूर्वी समुद्र तट पर हुआ। दक्षिण भारत के राज्य भारतवर्ष के मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम दिशा की […] - [चालुक्य एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/contribution-of-chalukyas-to-indian-culture/): दक्षिण भारत के चालुक्य तीन शाखाओं में बंटे हुए थे- बादामी अथवा वातापी के चालुक्य, कल्याणी के चालुक्य एवं वेंगी के चालुक्य। गुजरात के अन्हिलवाड़ा में भी चालुक्यों की एक शाखा शासन करती थी। चालुक्य वंश चालुक्यों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विद्वान एकमत नहीं हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार वे प्राचीन क्षत्रियों के वंशज […] - [चोल एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/the-contribution-of-the-cholas-in-indian-culture/): पल्लव वंश के कमजोर पड़ जाने पर उनके राज्य पर चोल वंश का शासन हो गया। चोल शासक आदित्य प्रथम ने पाण्ड्य नरेश पर आक्रमण करके उससे कोंगु प्रदेश छीन लिया। इस प्रकार आदित्य प्रथम ने शक्तिशाली चोल राज्य की स्थापना की। चोल वंश चोल तमिल भाषा के ‘चुल’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ […] - [राजपूतों का उदय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a4%af/): हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत की केन्द्रीय राजनीति में उत्पन्न शून्यता को भरने के लिए राजपूतों का उदय हुआ। राजपूतों ने पांच शताब्दियों तक मुसलमानों को भारत भूमि से बाहर रखा। पुष्यभूति राजा हर्षवर्द्धन की मृत्यु के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता पुनः भंग हो गई और देश के विभिन्न भागों में छोटे-छोटे राज्यों […] - [प्रमुख राजपूत वंश](https://bharatkaitihas.com/major-rajput-dynasties-of-india/): भारत के प्रमुख राजपूत वंश भारत भूमि को ऐसे समय में अपनी सेवाएं देने में सफल रहे जब प्राचीन राजवंश पूरी तरह निर्बल होकर इतिहास के नेपथ्य में जा चुके थे। गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहार वंश का उदय राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में गुर्जर प्रदेश में हुआ। इसी कारण इस वंश के नाम के पहले गुर्जर शब्द […] - [राजपूतकालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/india-under-rajput-rulers/): राजपूतकालीन भारत का इतिहास में बहुत बड़ा महत्त्व है। राजपूतों ने लगभग साढ़े पांच शताब्दियों तक अदम्य उत्साह के साथ मुस्लिम आक्रांताओं से देश की रक्षा की। यद्यपि वे अन्त में अपने देश की स्वतंत्रता की रक्षा न कर सके परन्तु उनके त्याग, उनके देशप्रेम, उनके साहस तथा उनके उच्चादर्श की कहानियां अमर हो गईं। […] - [त्रिकोणीय संघर्ष (गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट)](https://bharatkaitihas.com/triangular-struggle-for-supremacy-gurjara-pratihara-pal-and-rashtrakuta-dynasty/): त्रिकोणीय संघर्ष गुर्जर.प्रतिहारों पालों और राष्ट्रकूटों के बीच हुआ। यह संघर्ष भारत भूमि के लिए अत्यंत विनाशकारी एवं दुर्भाग्यपूर्ण सिद्ध हुआ। इस कारण मुसलमानों के लिए भारत के द्वार खुलते चले गए। अवंति का गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहारों का उदय मण्डोर में हुआ तथा वे जालोर होते हुए अवन्ति तक जा पहुंचे थे। गुर्जर प्रदेश का […] - [इस्लाम का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/rise-of-islam/): इस्लाम (Islam) का उत्कर्ष सम्पूर्ण विश्व की संस्कृतियों के लिए बड़े खतरे के रूप में हुआ। इस्लामी सेनाएँ (Islamic armies) जहाँ कहीं भी गईं, उन्होंने बड़ी संख्या में नरसंहार किया तथा वहाँ के सांस्कृतिक परिवेश एवं चिह्नों को नष्ट किया। इस्लाम का अर्थ इस्लाम अरबी भाषा के ‘सलम’ शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता […] - [अरबवासियों का भारत आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/arabs-invade-india/): अरबवासियों का भारत आक्रमण यद्यपि सिंध क्षेत्र तक सीमित था किंतु इससे अरबवासियों को भारतीयों की कमजोरियों का पता लग गया। अरबवासियों का परिचय अरब एशिया महाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रायद्वीप है। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिमी में लालसागर और पूर्व में फारस की खाड़ी स्थित है। इस क्षेत्र के निवासी […] - [महमूद गजनवी के आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): महमूद गजनवी के आक्रमण ईस्वी 1000 से 1027 के बीच कुल 17 बार हुए जिनमें भारत की प्रजा का बहुत बड़ा विनाश हुआ। महमूद गजनवी ने खलीफा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए प्रतिज्ञा की कि वह प्रतिवर्ष भारत के काफिरों पर आक्रमण करेगा। सिंध में अरबों के आक्रमण के लगभग 350 वर्ष बाद उत्तर-पश्चिमी […] - [शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी के आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी के आक्रमण भारत भूमि पर एक नई विपदा के रूप में हुए। उस काल में भारत की शक्ति अनेक छोटे-बड़े राज्यों में बिखरी हुई थी। इन राज्यों के शासक परस्पर युद्ध करके अपने-अपने राज्य का विस्तार करने में लगे रहते थे। इस कारण भारतीय राजा मुहम्मद गौरी के आक्रमणों का एकजुट होकर […] - [इस्लाम का भारत प्रवेश और प्रसार](https://bharatkaitihas.com/entry-of-islam-in-india/): इस्लाम का भारत प्रवेश सातवीं शताब्दी में ही हो गया था। मुस्लिम अरब व्यापारियों ने ईसा की सातवीं शताब्दी में ही भारत के दक्षिण-पश्चिमी समुद्र तटीय राज्यों से व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित कर लिए थे। कुछ अरब व्यापारी दक्षिण भारत के मलाबार तथा अन्य स्थानों पर स्थायी रूप से बस भी गए थे। दक्षिण भारत में […] - [सूफियों के प्रेम तराने भी पाकिस्तान की जड़ों को पनपने से नहीं रोक सके](https://bharatkaitihas.com/love-stories-of-sufis/): भारत की धरती पर विगत लगभग एक हजार साल से सूफियों के प्रेम तराने गूंज रहे हैं। सूफी फकीरों एवं दरवेशों ने भारतीय वेदान्त के प्रेमतत्व को अपने गीतों में ढालकर भारत की धरती को प्रेम और भक्ति की दीवानगी से भर दिया। सूफी-मत का आदि स्रोत शामी जातियों की आदिम प्रवृत्तियों में मिलता है […] - [ब्रिटिश-भारत में साम्प्रदायिक राजनीति](https://bharatkaitihas.com/communal-politics-in-british-india/): ब्रिटिश-भारत में साम्प्रदायिक राजनीति ब्रिटिश भारत में साम्प्रदायिक राजनीति की शुरुआत ईस्ट इण्डिया कम्पनी के समय से ही हो गई थी। जैसे-जैसे गोरों का शासन आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भारत में साम्प्रदायिक राजनीति भी गाढ़ी होती चली गई। यहाँ तक कि यह न केवल देश के विभाजन का अपितु हिन्दू संस्कृतिं के विनाश का मुख्य […] - [ब्रिटिश-भारत में साम्प्रदायिक समस्या के मुख्य कारण (1)](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-communal-problem-in-british-india/): ब्रिटिश-भारत में साम्प्रदायिक समस्या का मुख्य कारण भारत का मध्यकालीन इतिहास था जब मुसलमानों ने सत्ता, तलवार और लालच के बल पर लाखों हिन्दुओं को मुसलमान बनाया। इस्लामी आक्रांताओं का यह कार्य हिन्दुओं के लिए अत्यंत अपमानजनक था तथा उनके गौरव को पददलित करने वाला था। इस कारण भारतवासी कभी नहीं भूल पाये कि उनकी […] - [सैयदअहमद का अलीगढ़ आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/aligarh-movement-of-sir-syed-ahmed-khan/): इस प्रकार सैयद अहमद ने मुसलमानों के हितों की राजनीति करने के नाम पर जिन उपायों एवं वक्तव्यों का सहारा लिया, वे राष्ट्रीय जीवन के मार्ग को अवरुद्ध करने वाले सिद्ध हुए। - [फूट डालो राज करो](https://bharatkaitihas.com/support-to-muslims-by-the-british-after-birth-of-congress/): ज्यों-ज्यों राष्ट्रीय आन्दोलन में उग्रता आने लगी, त्यों-त्यों अँग्रेज यह अनुभव करने लगे कि अपनी सत्ता की सुरक्षा के लिए उन्हें मुसलमानों को अपने पक्ष में लेना चाहिये तथा मुसलमानों को हिन्दुओं से दूर किया जाना चाहिये। - [गॉड सेव द क्वीन](https://bharatkaitihas.com/god-sve-the-king-and-vande-mataram/): अंग्रेजों को नारे एवं गीत के रूप में गॉड सेव द क्वीन चाहिए था, हिन्दुओं को वन्दे मातरम् चाहिए था और मुसलमानों के लिए अल्लाह हो अकबर ही एकमात्र अभीष्ट था। - [कांग्रेस का जन्म](https://bharatkaitihas.com/birth-of-congress-from-the-womb-of-british-bureaucracy/): ब्रिटिश नौकरशाही के गर्भ से कांग्रेस का जन्म कांग्रेस का जन्म भारतीय जनमानस के चिंतन का परिणाम नहीं था। कांग्रेस का जन्म ब्रिटिश नौकरशाही के गर्भ से हुआ था। इसलिए यह संस्थान अपने जन्म से लेकर आज तक भारतीय संस्कृति को नहीं समझ सकी। ए. ओ. ह्यूम और कांग्रेस की स्थापना भारत का शासन वायसराय […] - [कांग्रेस स्थापना के उद्देश्य एवं कारण](https://bharatkaitihas.com/declared-objectives-and-reasons-for-the-establishment-of-congress-by-british/): निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि केवल और केवल अंग्रेजी साम्राज्य की सुरक्षा में ही कांग्रेस स्थापना के उद्देश्य एवं कारण छिपे हुए थे। - [कांग्रेस का प्रारम्भिक स्वरूप एवं प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/initial-form-and-effect-of-congress-established-by-british/): कांग्रेस का प्रारम्भिक स्वरूप भले ही अंग्रेजों की कृपा प्राप्त करने वाला रहा हो किंतु कांग्रेस का जन्म भारत के राजनैतिक इतिहास की अभूतपूर्व घटना थी। - [नरमपंथी कांग्रेस](https://bharatkaitihas.com/role-of-moderate-congress-in-freedom-movement-in-india/): ई.1885 से ई.1947 तक कांग्रेस का इतिहास, भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन का ही इतिहास है। - [ब्रिटिश नौकरशाही द्वारा कांग्रेस का विरोध](https://bharatkaitihas.com/opposition-to-congress-by-british-bureaucracy/): भारत के कुछ सुशिक्षित व मनीषी यह चाहते हैं कि सरकार लोकतांत्रिक हो, नौकरशाही उसके अधीन हो और उन्हें राष्ट्र के खजाने पर अधिकार मिल जाए और शनैः शनैः ब्रिटिश पदाधिकारी उनके सामने करबद्ध खड़े हों। - [उग्र हिन्दुत्ववादी नेता](https://bharatkaitihas.com/rise-of-hindutva-and-radical-nationalist-movement-in-india/): राष्ट्रवाद कभी मर नहीं सकता क्योंकि यह ईश्वर ही है जो बंगाल में कार्य कर रहा है, ईश्वर को कभी मारा नहीं जा सकता, ईश्वर को जेल नहीं भेजा जा सकता।' - [बंग-भंग आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/wave-of-hindutva-in-india/): वे अनुरोध कर रहे थे कि जनता उनको स्वीकार करे और सरकार का अभिनन्दन करे किंतु गर्मपंथी नेताओं का कहना था कि ये सुधार भारतीयों को मूर्ख बनाने के लिए किये गए थे। - [द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत](https://bharatkaitihas.com/birth-of-hindutva-leadership-in-india/): कोई किसी को स्वराज्य नहीं दे सकता। यदि आज अँग्रेज उन्हें स्वराज्य देना चाहें तो वह ऐसे स्वराज्य को ठुकरा देंगे क्योंकि मैं जिस वस्तु को उपार्जित नहीं कर सकता; उसे स्वीकार करने का भी पात्र नहीं हूँ। - [भारत में साम्प्रदायिकता को बढ़ावा](https://bharatkaitihas.com/british-bureaucracy-promoted-communalism-in-india/): आज एक बहुत बड़ी बात हुई है। आज राजनीतिज्ञतापूर्ण एक ऐसा कार्य हुआ जिसका प्रभाव भारत तथा उसकी राजनीति पर चिरकाल तक पड़ता रहेगा। 6 करोड़ 20 लाख लोगों को हमने विद्रोही पक्ष में सम्मिलित होने से रोक लिया है। - [मुस्लिम लीग का जन्म](https://bharatkaitihas.com/birth-of-muslim-league/): कांग्रेस के साथ हमारी एकता सम्भव नहीं हो सकती क्योंकि हमारे और कांग्रेसियों के उद्देश्य एक नहीं। वे प्रतिनिधि सरकार चाहते हैं, मुसलमानों के लिए जिसका मतलब मौत है। - [मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट](https://bharatkaitihas.com/increase-in-communal-problem-in-india-due-to-marley-minto-reform-act/): कुछ लोगों का विचार है कि हमारे मुसलमान भाइयों को अत्यधिक रियायतें दे दी गई हैं किन्तु स्वराज्य की मांग के लिए उनका हार्दिक समर्थन प्राप्त करने के लिए वह आवश्यक था; भले ही कठोर न्याय की दृष्टि से वह सही हो या गलत। उनकी सहायता और सहयोग के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। - [गांधाजी के विरुद्ध संदेह](https://bharatkaitihas.com/doubts-against-gandhaji-among-muslims/): अलगाववादी मुसलमानों ने पूरे देश में यह प्रचार किया कि 'गांधीजी ने अपने स्वार्थों की सिद्धि के लिए मुसलमानों को गुमराह किया।' इससे देश में उत्तेजना फैल गई और साम्प्रदायिक दंगे आरम्भ हो गये। - [भारत में साम्प्रदायिक हिंसा (1921-31)](https://bharatkaitihas.com/era-of-communal-violence-in-india-before-freedom-movement/): स्वतंत्रता संग्राम से पहले भारत में साम्प्रदायिक हिंसा बीसवीं सदी के भारत में साम्प्रदायिक हिंसा के युग की शुरुआत मालाबार के मुस्लिम मोपलाओं ने की। इसके बाद कोहाट के मुस्लिम दंगों ने देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं को भयभीत करने का काम किया। हिन्दुओं ने मोपला और कोहाट दोनों ही स्थानों पर बहुत कमजोर प्रतिरोध दर्ज […] - [उग्र-हिन्दुत्व की लहर](https://bharatkaitihas.com/origin-of-hindutva-wave-in-india/): जब अंग्रेजों के प्रोत्साहन पर अविभाजित भारत के मुसलमान बड़े स्तर पर हिंसा और दंगे करने पर उतारू थे तो हिन्दुओं में भी इसकी तीव्र प्रतिक्रिया हुई। इसके परिणामस्वरूप पूरे देश में उग्र-हिन्दुत्व की लहर उठी जिसने अंग्रेजी शासन की चूलें हिला दीं। मुस्लिम लीग के नेताओं ने देश में उठी उग्र-हिन्दुत्व की लहर का […] - [एकता का राजदूत जिन्ना](https://bharatkaitihas.com/sarojini-naidu-wrote-love-letters-to-jinnah/): माना जाता है कि सरोजनी नायडू से पीछा छुड़ाने के लिये ही मुहम्मद अली जिन्ना भारत छोड़कर लंदन चला गया और वहाँ उसने अपनी वकालात जमा ली। ई.1934 तक जिन्ना लंदन में बैरिस्ट्री करता रहा। - [साँप जैसा चालाक गांधी](https://bharatkaitihas.com/jinnah-publicly-insulted-gandhi-and-nehru/): मुहम्मद अली जिन्ना गांधी और नेहरू को सार्वजनिक मंचों से अपमानति करता था और गांधीजी को साँप जैसा चालाक गांधी कहता था। अंग्रेजी रंग में रंगा था पाकिस्तान का भावी जनक ई.1934 से ई.1947 तक की संक्षिप्त अवधि में भारतीय राजनीति के आकाश पर मुहम्मद अली जिन्ना और गांधीजी एक दूसरे के राजनीतिक दुश्मन माने […] - [मुहम्मद इकबाल](https://bharatkaitihas.com/life-history-of-muhammad-iqbal/): विभाजित भारत का पहला नक्शा मुहम्मद इकबाल ने बनाया मोहम्मद इक़बाल को अल्लामा इकबाल भी कहा जाता है। उसका जन्म 9 नवम्बर 1877 को पंजाब के सियालकोट जिले में (अब पाकिस्तान) में हुआ था। इकबाल के पूर्वज काश्मीरी शैव मत को मानने वाले ब्राह्मण थे। यह परिवार शोपियां से कुलगाम जाने वाली सड़क पर स्थित […] - [साइमन कमीशन](https://bharatkaitihas.com/nehru-committee-report/): साइमन कमीशन के समस्त सदस्य अँग्रेज थे। इसलिये इसे व्हाइट कमीशन भी कहते हैं। कांग्रेस ने इसका बहिष्कार करने का निश्चय किया। - [साइमन कमीशन का विरोध](https://bharatkaitihas.com/simon-commission-report/): मांटेग्यू-चैम्सफोर्ड आयोग की ही भांति साइमन कमीशन ने भी कांग्रेस-मुस्लिम लीग समझौते के सांप्रदायिक अंशों को स्वीकार कर लिया तथा मुसलमानों के लिए पृथक प्रतिनिधित्व अर्थात् मुसलमानों के लिए अलग सीटों के आरक्षण की व्यवस्था को स्वीकार कर लिया। - [भारत के विभाजनकारी तत्व](https://bharatkaitihas.com/communal-award-after-round-table-conference/): अंग्रेजों ने पहचाना कि इस्लाम भारत के विभाजनकारी तत्व के रूप में सर्वाधिक शक्तिशाली भूमिका निभा सकता है। इसलिए उन्होंने मुस्लिम लीग को अलगाववादी कार्यवाहियों के लिए उकसाया। - [पूना पैक्ट](https://bharatkaitihas.com/poona-pact-between-gandhi-and-ambedkar/): अम्बेडकर ने गांधी और जिन्ना की तुलना करते हुए कहा कि- 'इन दोनों ही नेताओं को भारतीय राजनीति से अलग हो जाना चाहिए।' - [रहमत अली](https://bharatkaitihas.com/rahmat-alis-concept-of-pakistan/): भारत किसी एक अकेले राष्ट्र का नाम नहीं है। न ही एक अकेले राष्ट्र का घर है। वास्तव में यह इतिहास में पहली बार ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित एक राष्ट्र की उपाधि है। - [पाकिस्तान के लिए आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/entry-of-jinnah-in-indian-politics/): एक ओर जिन्ना और मुस्लिम लीग साम्प्रदायिक राजनीति के खतरनाक चरण में पहुंच चुके थे किंतु दूसरी ओर कांग्रेसी नेता बदली हुई परिस्थितियों को समझ नहीं पा रहे थे। - [मुसलमानों में बेचैनी](https://bharatkaitihas.com/nehru-apposes-the-idea-of-pakistan/): जब मुहम्मद अली जिन्ना ने लंदन से भारत लौटकर मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग उठाई तो जवाहर लाल नेहरू ने मुसलमानों के लिए अलग देश के विचार का दृढ़ता से विरोध किया। इस कारण मुसलमानों में बेचैनी फैल गई। उधर लंदन में रहमत अली जिन्ना को नकार रहा था तो इधर जवाहरलाल नेहरू […] - [गांधीजी का अपमान](https://bharatkaitihas.com/jinnah-attacks-on-congress/): भारत की आजादी से पहले की राजनीति में गांधीजी एक ऐसी अनिवार्यता बन गए थे जिसकी उपेक्षा करना किसी के लिए संभव नहीं था। गांधीजी मुसलमानों से इतना प्रेम करते थे कि वे किसी भी कीमत पर मुसलमानों को अलग देश नहीं देना चाहते थे। इस कारण मुहम्मद अली जिन्ना ने गांधीजी का अपमान करने […] - [भारत विभाजन की योजनाएँ](https://bharatkaitihas.com/jinnah-and-rahmat-ali-plans-for-partition-of-india/): जिन्ना बड़ी चतुराई से और बड़ी तेज से भारत को विभाजन की ओर धकेल रहा था। जिन्ना के कपट के सामने कांग्रेसी नेता किंकर्त्तव्यविमूढ़ से नजर आते थे। - [पाकिस्तान प्रस्ताव](https://bharatkaitihas.com/pakistan-proposal-of-muslim-league/): मुस्लिम लीग पाकिस्तान के निर्माण के लिए बड़ी तेजी से काम कर रही थी। लीग के नेताओं ने मरो और मारो की नीति अपना ली थी जिसके कारण मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में पाकिस्तान का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसे लाहौर प्रस्ताव भी कहा जाता है। 24 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग ने […] - [वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो](https://bharatkaitihas.com/linlithgow-took-advantage-of-wickedness-of-muslim-league/): कांग्रेस विगत पचास सालों से भी अधिक समय से भारत की आजादी के लिए संघर्ष कर रही थी। उसकी इस मांग को न केवल पूरे भारत में अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा था। - [क्रिप्स मिशन](https://bharatkaitihas.com/india-union-plan-by-cripps-mission/): दली हुई परिस्थितियों में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने नरम रुख अपनाया। इस प्रकार ब्रिटिश सरकार को प्रथम गोलमेज सम्मेलन में आरम्भ हुई 'भारत संघ योजना' को फिर से आरम्भ करना पड़ा। - [क्रिप्स मिशन की असफलता](https://bharatkaitihas.com/cripps-mission-failure/): क्रिप्स का कहना था कि ब्रिटिश सरकार की यह इच्छा है कि सभी देशी-राज्य भारत संघ में सम्मिलित हों किंतु सरकार, संधि-दायित्वों को भंग करके उनसे जबर्दस्ती ऐसा करने को नहीं कहेगी। - [सुभाष चंद्र बोस](https://bharatkaitihas.com/relations-of-jawahar-lal-nehru-and-subhash-chandra-bose/): मुस्लिम लीग मानवता की इस भयानक त्रासदी से तथा क्रांतिकारी आंदोलन से असंपृक्त रहकर केवल पाकिस्तान-पाकिस्तान की रट लगाती रही। - [भारत संघ योजनाएं](https://bharatkaitihas.com/plans-for-formation-of-indian-union/): गांधीजी किसी भी कीमत पर जिन्ना को पाकिस्तान देने के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए वार्तालाप विफल हो गया और पूरे देश को इस विफलता से बड़ी निराशा हुई। - [शिमला सम्मेलन](https://bharatkaitihas.com/agreement-for-formation-of-provisional-government-between-congress-and-muslim-league/): जिन्ना और गांधीजी का मतभेद केवल एक बिंदु पर रहता था। जिन्ना कहता था कि मुस्लिम लीग ही एकमात्र वह संस्था है जो मुसलमानों का प्रतिनिधित्व कर सकती है जबकि गांधीजी का कहना था कि कांग्रेस हिन्दू और मुसलमान दोनों का प्रतिनिधित्व करती है। - [कैबीनेट मिशन](https://bharatkaitihas.com/cabinet-mission-arrives-in-india/): कैबीनेट मिशन का भारत आगमन क्रिप्स मिशन की असफलता से अंतर्राष्ट्रय स्तर पर ब्रिटेन की बहुत किरकिरी हुई। अमरीका सहित अनेक देशों ने इंगलैण्ड पर आरोप लगाया कि वह भारत को स्वतंत्र नहीं करना चाहता इसलिए क्रिप्स मिशन को जानबूझ कर विफल किया गया। इस दाग को धोने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कैबीनेट मिशन […] - [अलीगढ़ में साम्प्रदायिक दंगे](https://bharatkaitihas.com/communal-riots-of-aligarh-and-simla-conference/): जब मुहम्मद अली जिन्ना ने देखा कि गांधीजी हिन्दुओं के साथ-साथ मुसलमानों के भी नेता बने रहना चाहते हैं तथा किसी भी कीमत पर मुसलमानों को पाकिस्तान नहीं देना चाहते हैं तो जिन्ना ने देश में साम्प्रदायिक दंगे करने की नीति अपनाई। इस दिशा में पहले प्रयोग के रूप में अलीगढ़ में साम्प्रदायिक दंगे करवाए […] - [कैबीनेट मिशन प्लान - संयुक्त भारत योजना](https://bharatkaitihas.com/cabinet-mission-plan-or-united-india-plan/): कैबीनेट मिशन ने स्पष्ट कर दिया कि स्वतंत्र भारत के केवल दो टुकड़े नहीं होंगे अपितु समूह ए, बी एवं सी के रूप में तीन टुकड़े तथा चौथा टुकड़ा देशी-राज्यों का भी होगा जो कि एक अथवा उससे अधिक यहाँ तक कि पांच सौ पैंसठ तक हो सकता था। - [कैबीनेट मिशन कम्पलीट](https://bharatkaitihas.com/cabinet-mission-in-india/): पूर्ण सार्वभौम पाकिस्तान के लक्ष्य की प्राप्ति भारत के मुसलमानों का अपरिवर्तनीय उद्देश्य अब भी बना हुआ है, इसलिए हम इसके दीर्घकालीन और अंतरिम दोनों भागों को स्वीकार करते हैं क्योंकि मिशन की योजना में पाकिस्तान का आधार निहित है। - [मौलाना अबुल कलाम आजाद](https://bharatkaitihas.com/maulana-azad-opposes-the-idea-of-pakistan/): मौलाना कभी नहीं चाहते थे कि मुसलमानों का अलग देश बने। वे चाहते थे कि मुसलमान अपना भविष्य भारत में देखें। मौलाना द्वारा किए जा रहे विरोध के बावजूद कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों तेजी से पाकिस्तान की ओर बढ़ रहे थे। - [कैबीनेट प्लान की मृत्यु](https://bharatkaitihas.com/cabinet-mission-plan-fails/): नेहरू कैबिनेट मिशन के समक्ष किए गए अपने वायदे से फिर गया है। इसलिए अब उन्हें नए हालात में उठाए जा सकने वाले कदमों के बारे में फैसला करना था। - [अंतरिम सरकार का निमंत्रण](https://bharatkaitihas.com/interim-government-of-nehru/): जिन्ना ने जवाहरलाल को लिखा कि न तो मुझे यह पता है कि आपके और वायसराय के बीच क्या खिचड़ी पकी है और न ही मुझे आपके बीच हुए किसी समझौते की जानकारी है। - [हुसैन सुहरावर्दी](https://bharatkaitihas.com/massacre-in-direct-action-day-in-kolkata/): हम एक सौ तरीकों से परेशानियां उत्पन्न कर सकते हैं। विशेषकर इसलिए कि हम अहिंसा का सहारा लेने के लिए बाध्य नहीं हैं। बंगाल के मुसमलान सीधी कार्यवाही का अर्थ अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए हमें उन्हें कोई रास्ता दिखाने की आवश्यकता नहीं है। - [कलकत्ता में सीधी कार्यवाही](https://bharatkaitihas.com/direct-day-action-day-in-kolkata/): 19 अगस्त की रात तक सड़ती हुई लाशों के खतरे से कलकत्ता इतना विचलित हो चुका था कि बंगाल की सरकार ने एक लाश ठिकाने लगाने के लिए सैनिकों को पांच रुपए देने की घोषणा की। इस काम में जिन लोगों को लगाया गया उनमें कलकत्ता के फोर्टेस स्टाफ का मेजर डोबनी भी था। - [नोआखाली में हिंसा](https://bharatkaitihas.com/let-pakistan-speak/): कलकत्ता में सीधी कार्यवाही में हिन्दुओं का रक्त बहाने के बाद पूर्वी बंगाल के नोआखाली में हिंसा और हत्याओं का नंगा नाच किया गया। नोआखाली और त्रिपुरा जिलों में लगभग 5000 हिन्दू मारे गए। बड़ी संख्या में हिन्दुओं को मुसलमान बनाया गया तथा स्त्रियों के साथ बलात्कार किए गए। जिन्ना के मुसलमानों ने बंगाल, बिहार […] - [कैसे बना पाकिस्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): कैसे बना पाकिस्तान प्रश्न का उत्तर वस्तुतः भारत विभाजन का इतिहास ही है। इसी प्रश्न का हल ढूंढते हुए मैंने कैसे बना था पाकिस्तान शीर्षक से यह पुस्तक लिखी। इस पुस्तक को देश-विदेश में अपार लोकप्रियता प्राप्त हुई है। इस पुस्तक का लेखन मैंने वर्ष 2017 में किया था। अब तक इस पुस्तक के दो […] - [नेहरू की अंतरिम सरकार](https://bharatkaitihas.com/interim-government-of-jawahar-lal-nehru/): उसी शाम दिल्ली के सदर बाजाद में मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं ने गाड़ियां रोक-रोक कर हिन्दुओं को मुसलमानों से पृथक् करके मारना आरम्भ कर दिया। हिन्दू भी उनके विरोध में उतर आए। इससे कई घण्टे तक मार-काट की स्थिति रही। - [संविधान सभा](https://bharatkaitihas.com/jinnahs-objection-in-constituent-assembly/): हिंदुस्तान में गतिरोध हिन्दुस्तानियों और अंग्रेजों के बीच उतना ज्यादा नहीं। वह हिन्दू-कांग्रेस और मुसलिम-लीग के बीच है। - [मुस्लिम लीग का षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/conspiracy-by-the-muslim-league-against-the-interim-government-of-nehru/): यह सम्मेलन भी कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग के मतभेदों को दूर करने में असमर्थ रहा। इस सम्मेलन में ब्रिटिश सरकार को भारत का भविष्य पूरी तरह से दिखाई दे गया। ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट संकेत कर दिया कि अब वह भारत के बंटवारे की तरफ बढ़ेगी। - [प्रधानमंत्री एटली की घोषणा](https://bharatkaitihas.com/jinnah-got-pakistan/): प्रधानमंत्री एटली की घोषणा – जिन्ना को मिल गया पाकिस्तान प्रधानमंत्री एटली की घोषणा भारत में चल रही अंतरिम सरकार की मुस्लिम लीग द्वारा बनाई जा रही गत को देखकर अंग्रेजों ने भारत से किसी भी तरह छुटकारा पाने का मन बना लिया। इसलिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने अचानक 20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश-पार्लियामेंट […] - [सिक्खों का नरसंहार](https://bharatkaitihas.com/massacre-of-sikhs-and-hindus-in-punjab-by-muslim-league/): एक ओर जिन्ना हिंदुओं को काट रहा था और और सिक्खों का नरसंहार कर रहा था तो दूसरी ओर गांधीजी का मुस्लिम प्रेम और जिन्ना प्रेम दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा था। - [सिक्खिस्तान](https://bharatkaitihas.com/sikhs-demanded-separate-sikhistan/): इस अवधि में पंजाब के लाखों हिन्दू कहाँ चले गए, इसका कोई हिसाब गोरी सरकार के पास नहीं था। - [मेवस्थान](https://bharatkaitihas.com/plan-to-make-mewsthan-in-india/): भारत में मेवस्थान बनाने की योजना जब भारत आजाद होने लगा तो मुसलमानों ने अपने लिए अलग देश की मांग की, सिक्खों ने अपने लिए अलग देश की मांग की, उसी प्रकार मेवात के मेवों ने भी अपने लिए अलग मेवस्थान नामक देश की मांग की। हालांकि मेवात के मेव मुसलमान ही थे किंतु वे […] - [लॉर्ड माउण्टबेटन](https://bharatkaitihas.com/lord-mountbatten-was-sent-to-give-independence-to-india/): लॉर्ड माउंटबेटन भारत के आखिरी वायसरॉय थे और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे। - [गांधीजी की जिद](https://bharatkaitihas.com/gandhi-wanted-jinnah-to-become-prime-minister/): अगर मैं मुसलमान होता तो पाकिस्तान न कभी मांगता न कभी लेता। क्योंकि विभाजन के बाद इस्लामी भारत बहुत ही गरीब राज्य होगा जिसके पास न लोहा होगा न कोयला। यह तो मुसलमानों के सोचने की बात है। मुझे तो पूरा विश्वास है कि अगर आप पाकिस्तान देने को तैयार हो जायें तो मुसलमान उसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। - [एडविना माउण्टबेटन](https://bharatkaitihas.com/mountbatten-prepared-jawaharlal-for-the-partition-of-india/): मैं आश्चर्यचकित एवं दुःखी हुआ जब पेटल ने यह कहा कि हम पसंद करें या नहीं किंतु भारत में दो राष्ट्र हैं। पटेल इस बात से सहमत थे कि मुसलमानों और हिन्दुओं को अब एक देश में एकीकृत नहीं किया जा सकता। - [जिन्ना का उन्माद](https://bharatkaitihas.com/jinnah-was-crazy/): जहाँ एक ओर गांधीजी की जिद थी कि वे मुसलमानों को भारत से अलग नहीं जाने देंगे, वहीं दूसरी ओर जिन्ना का उन्माद उसके सिर पर हावी था। वह हर कीमत में पाकिस्तान चाहता था। माउण्टबेटन की दृष्टि में जिन्ना उन्मादी था! जहाँ भारत के मुसलमान भारत से अलग पाकिस्तान देश के निर्माण को जेहाद […] - [पंजाब और बंगाल](https://bharatkaitihas.com/jinnah-wanted-partition-of-entire-india-and-not-punjab-and-bengal/): जिन्ना पंजाब और बंगाल के बल पर खैबर-पख्तून, बलोचिस्तान तथा सिंध के निर्धन क्षेत्रों के लोगों का पेट भरना चाहता था। - [भारत विभाजन केवल पागलपन](https://bharatkaitihas.com/partition-of-india-is-just-a-madness/): मौलाना अबुल कलाम आजाद का विचार था कि गांधीजी, सरदार पटेल के प्रभाव के कारण बंटवारे का विरोध नहीं कर सके और उसके समर्थक बन गए। - [माउण्टबेटन प्लान](https://bharatkaitihas.com/british-decided-to-cut-india-in-pieces/): यदि जवाहरलाल माउण्टबेटन प्लान को स्वीकार कर लेते तो वे संभवतः एक ऐसे देश के प्रधानमंत्री रह जाते जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं होना था। - [वी. पी. मेनन द्वारा भारत विभाजन योजना में संशोधन](https://bharatkaitihas.com/correction-in-mountbatton-plant/): जवाहरलाल नेहरू ने माउण्टबेटन प्लान को यह कहकर नकार दिया कि ब्रिटिश प्रांतों को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता के वे स्वयं इस बात का निर्णय लें कि भारत में रहें या पाकिस्तान में, अपितु हिन्दू बहुल प्रांतों को अनिवार्यतः भारत में ही रखा जाएगा तथा केवल मुस्लिम बहुल प्रांतों को ही पाकिस्तान में […] - [गांधीजी का असमंजस और भारत को बीच में से चीरने की योजना](https://bharatkaitihas.com/jinnahs-plan-to-rip-india-from-the-middle/): जिन्ना उत्तरी और पश्चिमी-पाकिस्तान को मिलाने के लिए हिमालय के नीचे-नीचे एक सौ मील चौड़ी पट्टी चाहता था। - [स्वतंत्र बंगाल की मांग - सुहरावर्दी द्वारा अलग बंगाल बनाने की योजना](https://bharatkaitihas.com/suhrawardys-plan-to-create-a-separate-bengal/): सुहरावर्दी ने स्वतंत्र बंगाल की मांग कबूल करवाने की आखिरी कोशिश की क्योंकि उसे पता था कि पाकिस्तान में उसे वह जगह नहीं मिलने वाली थी, जो वह चाहता था। जिन्ना ने पूर्वी बंगाल के लिए नाजीमुद्दीन को चुन लिया था। सुहरावर्दी भारत में ही रहने की सोच रहा था। - [गांधीजी के खिलाफ](https://bharatkaitihas.com/every-body-was-against-gandhi/): मैं एक अजीब बात अनुभव कर रहा था। वे सब अंदर ही अंदर चुपके-चुपके गांधी के खिलाफ थे। जल्द ही वे मेरे साथ आ गये। उन्होंने मुझे उकसाना आंरभ किया। - [भेड़ियों के सामने](https://bharatkaitihas.com/congress-accepts-idea-of-pakistan/): अगर कांग्रेस अब खुदाई खिदमतगारों को भेड़ियों के सामने फेंक देती है तो सीमांत प्रदेश इसे दगाबाजी का काम समझेगा। - [गांधीजी से भय](https://bharatkaitihas.com/gandhiji-accepts-pakistan/): गांधीजी राजनीति के चतुर खिलाड़ी थे, उन्होंने वायसराय की आंख में कुछ ऐसा पढ़ लिया था जो पहले कभी नहीं पढ़ा गया था। - [खाकसारों का हमला](https://bharatkaitihas.com/jinnahs-assassination-attempt/): जिन्ना ने पूरी मिल्लत के साथ पूरी तरह से गद्दारी करके उसका सौदा कर लिया है और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए हैं। - [भारत विभाजन को स्वीकृति](https://bharatkaitihas.com/proposal-of-partition-of-india/): जिस समय डॉ. चौथराम भाषण कर रहे थे, नेहरू और पटेल को अपने पांव तले से मिट्टी खिसकती हुई दिखाई देने लगी। उस समय गांधीजी अपना साप्ताहिक व्रत रखे हुए हरिजन कॉलोनी में बैठे थे। - [भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947](https://bharatkaitihas.com/india-independence-act/): देश में मुख्य राजनीतिक शक्ति 'इण्डियन नेशनल कांग्रेस' थी और इसके नेता गण थके हुए लोग थे। उनको पिछले चालीस वर्ष के निरन्तर संघर्ष से होने वाले लाभ पर विश्वास नहीं था। - [विभाजन कौंसिल का गठन](https://bharatkaitihas.com/partition-council-for-india-and-pakistan/): वायसराय के पास सोने के पतरों वाली छः तथा चांदी के पतरों वाली छः बग्घियां थीं। इनमें से सोने के पतरों वाली बग्घियां भारत के हिस्से में आयीं तथा चांदी के पतरों वाली बग्घियां पाकिस्तान के हिस्से में गयीं। - [भारतीय सेना का विभाजन](https://bharatkaitihas.com/interim-governments-for-india-and-pakistan/): ई.1947 में भारत विभाजन के समय भारत की सेनाओं में हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, गोरखा, एंग्लोइण्डियन एवं आदिवासी आदि समस्त जातियों के सैन्य अधिकारियों एवं सैनिकों की संख्या 12 लाख के आसपास थी। इनका भी बंटवारा किया गया। - [रैडक्लिफ आयोग ने खींची विभाजन रेखा](https://bharatkaitihas.com/radcliffe-commission-draws-dividing-line/): जब मैं हिन्दुस्तान का वायसराय होऊंगा, तब दक्षिण अफ्रीका के गोरों को अपनी कुटिया में बुलाऊंगा और कहूंगा कि आप लोगों ने मेरे लोगों को कुचला है किंतु मैं आपका अनुसरण नहीं करूंगा। मैं आपके साथ उदारता का व्यवहार करूंगा। मैं आपके समान कालों को लिंच करके नहीं मारूंगा। आपकी ओर भयंकर क्रूरता है। एक गोरा मारा गया तो सब का सब गांव नष्ट कर दिया जाता है। - [अहमदपुर चौरोली](https://bharatkaitihas.com/hitory-of-a-village-during-partition-of-india/): अंग्रेजों का बनाया हुआ यूनाईटेड प्रोविंस (यू.पी.) अब उत्तर प्रदेश (यू.पी.) कहलाता है। इस प्रांत के पश्चिमी हिस्से में एक छोटा सा गांव है अहमदपुर चौरोली। यह गांव अविभाजित पंजाब एवं संयुक्त प्रांत की सीमा पर बहने वाली यमुना नदी से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर था। गांव के चारों ओर गेहूँ और गन्ने के विशाल […] - [आखिर बन गया पाकिस्तान](https://bharatkaitihas.com/birth-of-pakistan/): पाकिस्तान के नेता माउण्टबेटन के भारत-प्रेम के कारण उनसे इतनी घृणा करते थे कि कई साल बाद जब माउण्बेटन भारत आए तो पाकिस्तान ने उनके हवाई जहाज को पाकिस्तान के ऊपर होकर उड़ने की अनुमति नहीं दी। - [कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया ने पाकिस्तान आंदोलन में सहायता की!](https://bharatkaitihas.com/did-communist-party-of-india-help-in-pakistan-movement/): कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया के महासचिव पी. सी. जोशी ने यह मत व्यक्त किया कि मुस्लिम लीग प्रमुख राजनीतिक संगठन है। उसने कांग्रेस से अलग राष्ट्र की मांग को स्वीकार करने का आग्रह किया। - [अविभाजित पंजाब में दंगे](https://bharatkaitihas.com/history-of-communal-violence-in-united-punjab/): अविभाजित पंजाब में दंगे बहुत भयानक थे। जनता ने इस हद तक आपसी घृणा, क्रूरता और राक्षस-प्रवृत्ति का परिचय दिया कि सभी नेता हक्के-बक्के रह गए। - [पश्चिमी-पंजाब में सांप्रदायिक दंगे](https://bharatkaitihas.com/incidents-during-partition-partition-of-india/): इन साम्प्रदायिक दंगों में पाकिस्तान और भारत दोनों में कितने आदमी मारे गए, कितने शरणार्थी बनाए गए, कितनी युवतियों का अपहरण किया गया और उन्हें नीलाम किया गया, इसका सही हिसाब देना किसी के लिए भी संभव नहीं। - [हिन्दू एवं सिक्ख शरणार्थी](https://bharatkaitihas.com/communal-conflicts-during-partition-of-india/): शरणार्थियों की समस्या दुनिया में समय-समय पर पैदा होती रही है, जिसके कारण अनेक असाधारण और अविस्मरणीय दृश्य सामने आए हैं लेकिन क्या कोई दृश्य उस कारवां के नजदीक खड़ा हो सकता है जिसमें आठ लाख व्यक्ति चलते देखे गए थे? - [शरणार्थियों के कारवां](https://bharatkaitihas.com/communal-violence-during-partition-of-india/): लैरी कांलिन्स एवं दॉमिनिक लैपियर ने आरोप लगाया है कि सिक्खों के आक्रमण सबसे भयानक हुआ करते थे। उनके जत्थे गन्ने और गेहूं के खेतों में से अचानक प्रकट होकर, भयंकर चीत्कार के साथ, कारवां के उस हिस्से पर टूट पड़ते, जहाँ सुरक्षा प्रबंध सबसे कमजोर होता। - [भारत के देशी राज्य](https://bharatkaitihas.com/behavior-of-congress-with-rulers-of-princely-states-of-india/): कांग्रेस शुरु से ही राजाओं को धमका रही थी कि रियासतों पर से परमोच्चता का अधिकार ब्रिटिश क्राउन से समाप्त होकर संघीय सरकार को मिल जाएगा इसलिए राजा लोग कांग्रेस-शासित भारत में मिलने से डरने लगे। - [जिन्ना का षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/removal-of-baroda-maharaja/): भारत सरकार का कठोर रवैया देखकर राजा विनम्र देश-सेवकों जैसा व्यवहार करने लगे। जो राज्य संघ उन्होंने रियासतों का विलय न होने देने के लिये बनाया था, उसे भंग कर दिया गया। - [भोपाल नवाब हमीदुल्ला खाँ](https://bharatkaitihas.com/bhopal-nawab-invited-hindu-rulers-to-merge-their-states-in-pakistan/): जिन्ना के संकेत पर नवाब तथा महाराजराणा ने जोधपुर, जैसलमेर, उदयपुर तथा जयपुर आदि रियासतों के राजाओं से बात की तथा उन्हें जिन्ना से मिलने के लिये आमंत्रित किया। - [सुकार्णो पुत्री ! तुम्हारा स्वागत है!](https://bharatkaitihas.com/daughter-of-sukarno-you-are-welcome/): आज उस बात को 56 साल ही बीते हैं। इस बीच इतिहास का पहिया तेजी से घूम गया है तथा सुकार्णो की बेटी सुकार्णो पुत्री ने फिर से हिन्दू धर्म में लौटने की घोषणा की है जिसका सुकार्णो के परिवार ने स्वागत किया है। इण्डोनेशिया कभी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा था। पांचवीं शताब्दी ईस्वी […] - [कोनार्ड कोरफील्ड](https://bharatkaitihas.com/pakistans-conspiracy-against-native-princely-states-of-india/): एक ओर कोनार्ड कोरफील्ड अंग्रेजों की सत्ता समाप्ति से पहले रजवाड़ों से केन्द्रीय सत्ता का विलोपन करने के काम में लगा हुआ था जिससे एक-एक करके सारी व्यवस्थायें रद्द होती जा रही थीं। - [जोधपुर राज्य को पाकिस्तान में मिलाने का षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/maharaja-hanuwant-singh-decided-to-meet-with-muhammad-ali-jinnah/): जब महाराजा दूसरे दिन भोपाल नवाब के साथ जिन्ना से मिलने गये तो संधि का प्रारूप हस्ताक्षरों के लिए तैयार था। उस समय महाराजा ने केसरीसिंह से कहा कि मैं संधि पर हस्ताक्षर करके राजस्थान का बादशाह हो जाउंगा। - [महाराजा हनवंतसिंह](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-saved-jodhpur/): महाराजा हनवंतसिंह ने अपने राज्य का विलय भारत में करने की बात मान ली और प्रविष्ठ संलेख पर हस्ताक्षर कर दिए। - [महाराजा हनवंतसिंह की भूमिका](https://bharatkaitihas.com/did-jodhpur-maharaja-wanted-to-go-with-pakistan/): जिस समय मुहम्मद अली जिन्ना और भोपाल नवाब हमीदुल्ला खाँ हिन्दू राज्यों को पाकिस्तान में मिलाने का प्रयास कर रहे थे, उस समय जोधपुर नरेश हनवंतसिंह ने जिन्ना से भेंट की। इस कारण महाराजा महाराजा हनवंतसिंह की भूमिका विवादास्पद हो गई! वायसराय लॉर्ड माउण्टबेटन ने भोपाल नवाब हमीदुल्ला खाँ द्वारा भेजे गये तथ्यों को सही […] - [थारपारकर](https://bharatkaitihas.com/conspiracy-to-merge-jodhpur-state-with-pakistan/): जब भारत विभाजन योजना स्वीकार कर ली गयी तो सिंध के सोढ़ा राजपूतों के एक शिष्टमंडल ने जोधपुर आकर महाराजा हनवंतसिंह से प्रार्थना की कि सिंध प्रांत के थारपारकर जिले को भारत व जोधपुर राज्य में मिलाने का प्रयत्न करें। - [हिन्दू शरणार्थियों की समस्या](https://bharatkaitihas.com/problem-of-hindu-refugees-from-pakistan-in-jodhpur-state/): किसी व्यक्ति ने महाराजा से शिकायत की है कि जो हिन्दू शरणार्थी पाकिस्तान से आ रहे हैं उन्हें रेलवे कर्मचारियों एवं कस्टम वालों द्वारा तंग किया जा रहा है और रिश्वत मांगी जा रही है। - [सरकारी कर्मचारियों की समस्या](https://bharatkaitihas.com/problem-of-employees-of-princely-state-jodhpur/): जोधपुर कर्मचारी संघ ने रियासती विभाग के समक्ष एक ज्ञापन प्रस्तुत कर मांग की कि इस कर्मचारी संघ को सरकार द्वारा मान्यता दी जानी चाहिये। - [बीकानेर रियासत का भारत में विलय](https://bharatkaitihas.com/history-of-bikaner-princely-state/): बीकानेर रियासत राज्य भारत के थार रेगिस्तान में स्थित एक पुरानी रियासत थी जो ई.1465 के आसपास अस्तित्व में आई थी। इसके शासक जोधपुर राज्य के राठौड़ वंश में से ही निकले थे। भारत की आजादी के समय सादुलसिंह बीकानेर का राजा था। संविधान सभा में प्रतिनिधि भेजने से लेकरभारत संघ में विलय की घोषणा […] - [जूनागढ़ नवाब बेगमों की बजाय कुत्ते लेकर पाकिस्तान भाग गया](https://bharatkaitihas.com/history-of-junagarh-nawab/): एक बार उसने एक कुत्ते का एक कुतिया से विवाह करवाया जिस पर उसने बहुत धन व्यय किया तथा पूरे राज्य में तीन दिन का अवकाश घोषित किया। - [हैदराबाद निजाम को विश्वास था कि अंग्रेज हैदराबाद को अलग देश बना देंगे!](https://bharatkaitihas.com/nizam-believed-that-british-would-make-hyderabad-a-separate-country/): निजाम को विश्वास था कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा ब्रिटिश क्राउन से समय-समय पर जो संधियां की गई थीं, उनके बल पर वह हैदराबाद को स्वतंत्र बनाये रखने में सफल होगा। - [हैदराबाद रियासत को सरदार पटेल ने भारत में मिला लिया !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-annexed-hyderabad-state-to-india/): पांच दिन की कार्यवाही में भारतीय सेना ने मुस्लिम रजाकारों के प्रतिरोध को कुचल डाला। हजारों रजाकार मारे गये। पूरे हैदराबाद में रजाकरों के शव पड़े हुए दिखाई देने लगे। - [भोपाल नवाब के सपने](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-shattered-the-dreams-of-bhopal-nawab/): भारत की स्वतंत्रता के समय भोपाल का नवाब हमीदुल्लाह खाँ था जो कि ई.1926 में भोपाल रियासत का नवाब बना था। - [नेहरू से असंतुष्ट थे पटेल ! (112)](https://bharatkaitihas.com/patel-was-dissatisfied-with-nehru-regarding-kashmir-goa-china-tibet-and-nepal/): गांधी के दबाव पर पटेल ने नेहरू को प्रधानमंत्री की कुर्सी तो दे दी किंतु दोनों के व्यक्तित्व बिल्कुल अलग थे।काश्मीर, गोआ, चीन, तिब्बत और नेपाल को लेकर नेहरू से असंतुष्ट थे पटेल ! सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस में बिताया था। दोनों ही गांधीजी के निकट सहयोगी माने जाते […] - [नेहरू की चीन नीति से नाराज थे सरदार पटेल ! (113)](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-foreboding-of-future-chinese-invasion/): सरदार पटेल नेहरू की चीन नीति से बुरी तरह नाराज थे। सरदार पटेल को पूर्वाभास था कि एक दिन चीन भारत पर आक्रमण करेगा तथा भारत को बड़ी मुसीबत में डाल देगा किंतु प्रत्यक्ष रूप से समाजवादी तथा परोक्ष रूप से कम्युनिस्ट नेहरू चीन के सम्मोहन में ऐसे बंधे थे कि वे सरदार पटेल की […] - [वायुयान दुर्घटना ने देश को चिंता में डाल दिया (114)](https://bharatkaitihas.com/air-crash-caused-country-to-worry/): यह घटना उन दिनों की है जब सरदार पटेल को राजस्थान नामक नवीन प्रादेशिक इकाई का उद्घाटन करने के लिए दिल्ली से जयपुर जाना था। जयपुर से कुछ पहले ही विमान खराब हो गया। पूरे देश में वायुयान दुर्घटना के समाचार फैल गए जिन्होंने देश को चिंता में डाल दिया! 29 मार्च 1949 को सरदार […] - [पटेल का अंतिम संस्कार आम आदमी की तरह किया गया ! (115)](https://bharatkaitihas.com/patel-was-cremated-like-a-common-man/): सरदार पटेल जन-जन के नेता थे। उनकी अंतिम यात्रा में बहुत बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए किंतु सरदार पटेल का अंतिम संस्कार आम आदमी की तरह किया गया! 1950 की गर्मियों में पटेल का स्वास्थ्य तेजी से गिरा। उनकी खांसी में खून आने लगा। मणिबेन ने पटेल की बैठकों तथा कार्य-घण्टों की संख्या कम […] - [वल्लभभाई विष्णुगुप्त चाणक्य तथा समुद्रगुप्त की तरह राष्ट्र निर्माता थे ! (116)](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-the-creator-of-nation-like-vishnugupta-chanakya-and-samudragupta/): भारत के विभाजन के समय, वल्लभभाई पटेल पर हिन्दुओं का पक्ष लेने तथा साम्प्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया गया। मौलाना आजाद ने अपनी पुस्तक में पटेल की बहुत आलोचना की है। हिन्दू राष्ट्रवादी शक्तियां भी वल्लभभाई पर भारत का विभाजन स्वीकारने में जल्दबाजी करने का आरोप लगाती रही हैं। सुभाषचंद्र बोस के पक्षधर सरदार […] - [प्राक्कथन - मुगल कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/preface-of-mughal-kaleen-pramukh-bhawan/): प्राक्कथन – मुगल कालीन भवन पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक भारत के मुगलकालीन प्रमुख भवन पुस्तक की भूमिका दी गई है। यह पुस्तक अमेजन पर उपलब्ध है। वास्तुकला को समस्त कलाओं की रानी कहा जाता है। इसलिए यह कहावत भी है कि ‘संसार में दो ही चीजें जीवित रहती हैं, या तो […] - [मुगल स्थापत्य शैली](https://bharatkaitihas.com/mughals-and-their-architectural-style/): भारत में मुगल स्थापत्य शैली का प्रवेश बाबर की दिल्ली सल्तनत पर विजय के बाद हुआ। बाबर एवं हुमायूं के काल में मुगल स्थापत्य शैली का विकास नहीं हो सका। भारत में मुगलों ने एक नवीन इस्लामी राज्य की स्थापना की जो सभ्यता एवं संस्कृति के स्तर पर अपने पूर्ववर्ती ‘दिल्ली सल्तनत’ से पूर्णतः भिन्न […] - [बाबर का स्थापत्य बोध](https://bharatkaitihas.com/baburs-architectural-sense/): बाबर का स्थापत्य बोध उसके द्वारा बनाए गए भवनों की अपेक्षा उसकी आत्मकथा बाबरनामा से अधिक होता है। बाबर ने भारत में मौलिक रचनाओं का निर्माण करने की बजाय हिन्दू मंदिरों को तोड़कर उन्हें मस्जिदों में बदलने का कार्य किया। जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने ई.1526 में भारत में मुगल सल्तनत की स्थापना की थी। उसे […] - [हुमायूँ द्वारा निर्मित भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-by-humayun/): भारत में हुमायूँ द्वारा निर्मित भवन बहुत कम हैं। हुमायूँ ने ई.1530 से 1540 तक भारत पर शासन किया। लगभग छः माह के लिए उसने ई.1555 में भी शासन किया। बाबर के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल के दुर्ग में हुआ था। जब ई.1526 में वह बाबर के साथ […] - [सूर स्थापत्य - सूरी सल्तनत में निर्मित भवन](https://bharatkaitihas.com/suri-sultanate-era-buildings/): सूर स्थापत्य अपने पूर्ववर्ती तुर्क शासकों एवं पश्चवर्ती मुगलशासकों से कई प्रकार से अलग था। य़़द्यपि भारत में सूर स्थापत्य के अधिक उदाहरण देखने को नहीं मिलते तथापि वे अपनी शैलीगत विशेषताओं के कारण अलग से ही पहचाने जाते हैं। शेरशाह सूरी का का वास्तविक नाम शेर खाँ था। उसका उत्कर्ष ई.1520 से 1525 के […] - [अकबर कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-during-reign-of-akbar/): अकबर कालीन भवन अकबर के शासन की सुदृढ़ता का प्रदर्शन करते हैं। उनमें भव्यता कम है किंतु उनकी सुघड़ता, बनावट तथा आकार अकबर के शासन की शक्ति की घोषणा करते हैं। अकबर का शासन-काल शासन के प्रत्येक क्षेत्र में हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के सम्मिश्रण और समन्वय का काल था। इस कारण उसके समय में स्थापत्य एवं […] - [जहाँगीर कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-during-reign-of-jahangir/): एतमादुद्दौला का मकबरा प्रमुख जहाँगीर कालीन भवन है। इसका निर्माण ई.1625 में नूरजहाँ ने अपने पिता घियासुद्दीन बेग की स्मृति में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से आगरा में करवाया था। 25 अक्टूबर 1605 को सलीम आगरा में नूरूद्दीन मुहम्मद जहाँगीर के नाम से मुगलों के तख्त पर बैठा। बादशाह बनने के बाद जहाँगीर […] - [शाहजहाँ कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-carpet-building-golden-age-of-mughal-architecture/): समूचे मुगलिया शासन के दौरान बने भवनों में शाहजहाँ कालीन भवन अपनी भव्यता के लिए सर्वाधिक विख्यात हुए। शाहजहाँ कालीन भवन निर्माण में इतना धन पानी की तरह बहाया गया कि राजकोष रिक्त होने लगा। इन भवनों में कीमती हीरे-मोतियों का उपयोग पत्थरों की तरह किया गया। धन के इसी अपव्य के कारण औरंगजेब अपने […] - [ताजमहल - मुगलकाल का सर्वश्रेष्ठ भवन](https://bharatkaitihas.com/taj-mahal-the-best-building-of-the-mughal-period/): आगरा का ताजमहल, शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई सर्वाधिक शानदार इमारत है। यह शाहजहाँ की प्रिय बेगम अर्जुमंद बानो का मकबरा है जो अपनी 14वीं संतान को जन्म देते समय मृत्यु को प्राप्त हो गई थी। शाहजहाँ ने अर्जुमंद बानो को ‘मुमताज महल’ की उपाधि दी थी जिसका अर्थ होता है- ‘महल का सबसे सुंदर आभूषण।’ […] - [तेजोमय महालय था ताजमहल](https://bharatkaitihas.com/was-the-taj-mahal-a-glorious-mahalaya/): प्रसिद्ध इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से ताजमहल को हिंदू संरचना सिद्ध किया था। उनके अनुसार ताजमहल मकबरा नहीं अपितु तेजोमय महालय नामक हिंदू महल था। शाहजहाँनामा में ताजमहल के लिए लिखा है कि यह मंदिर भवन नगर के दक्षिण में भव्य एवं सुंदर हरित उद्यान से घिरा हुआ है। […] - [औरंगजेब कालीन भवन - मुगल स्थापत्य का पतनकाल](https://bharatkaitihas.com/buildings-of-mughal-architecture-during-aurangzeb-era/): औरंगजेब कालीन भवन भारत में न के बराबर देखने को मिलते हैं। इस काल में शिल्प एवं स्थापत्य कला का विनाश देखने को मिलता है। शाहजहाँ तथा मुमताज महल की चैदह संतानें थीं। उनमें से मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब छठा था। उसका जन्म 3 नवम्बर 1618 को उज्जैन के निकट दोहद में हुआ था। जब शाहजहाँ […] - [मुगलकाल में ध्वस्त भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-demolished-during-the-mughal-period-babur-to-shah-jahan/): भारत के इतिहास में गुगल काल केवल निर्माण के लिए ही नहीं जाना जाता है अपितु हिन्दू स्थापत्य, विशेषकर मंदिरों के विध्वंस के लिए बदनाम भी है। मुगलकाल में ध्वस्त भवन बहुत बड़ी संख्या में रहे होंगे, अब तो उनके नाम भी नहीं मिलते। इस अध्याय में मुगल बादशाह बाबर से लेकर शाहजहाँ तक के […] - [प्लासी का युद्ध (1757 ई.)](https://bharatkaitihas.com/war-of-plasi-in-seventeen-hundred-fifty-seven/): प्लासी का युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बीच ई.1757 में लड़ा गया था। प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास के निर्णायक युद्धों में से एक है। प्लासी का युद्ध होने के प्रमुख कारण प्लासी का युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे- (1.) अलीनगर की सन्धि की शर्तों का पूरा नहीं होना […] - [बक्सर युद्ध](https://bharatkaitihas.com/rise-of-british-power-in-bengal-and-buxar-war/): बक्सर युद्ध में भारत की तीन प्रमुख शक्तियों- मुगल बादशाह शाहआलम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और बंगाल के नवाब मीर कासिम के भाग्य का फैसला हुआ। नवाब मीर कासिम मीर कासिम के प्रारम्भिक जीवन के बारे में विशेष जानकारी नहीं मिलती। उसका जन्म निश्चय ही किसी शासक परिवार में हुआ होगा, तभी मीर जाफर ने […] - [बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-diarchy-in-bengal-by-east-india-company/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना की गई। हस व्यवस्था में बंगाल का प्रशानिक प्रबंधन नवाब के हाथों में रहा जबकि भूराजस्व वसूल करने का दायित्व ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने ग्रहण कर लिया। अकबर द्वारा स्थापित मुगल शासन पद्धति के अन्तर्गत बंगाल के सूबे का शासन दो भागों में बँटा हुआ […] - [बसीन की संधि (1802 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%bf/): बसीन की संधि ई.1802 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा अपदस्थ पेशवा बाजीराव (द्वितीय) के बीच हुई। इस संधि के बाद से ही मराठा शक्ति का पतन आरम्भ हो गया तथा कुछ ही वषोँ में मराठे सहायक संधियों के माध्यम से कम्पनी सरकार के अधीन हो गए। मराठों में परस्पर संघर्ष पेशवा बाजीराव (द्वितीय) (1796-1851 ई.) […] - [प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782 ई.)](https://bharatkaitihas.com/first-anglo-maratha-war/): 18 मई 1775 को अँग्रेजों एवं मराठों के बीच अरास नामक स्थान पर प्रथम आंग्ल.मराठा युद्ध हुआ जिसमें मराठे परास्त हुए और मराठा शक्ति को बड़ा धक्का लगा। छत्रपति शिवाजी (1646-1680 ई.) ने मराठा शक्ति को संगठित करने का काम किया। औरंगजेब जैसा शक्तिशाली मुगल बादशाह भी मराठा शक्ति का दमन नहीं कर सका। छत्रपति […] - [द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा मराठा शक्ति के बीच हुआ। मराठों की तरफ से सिंधिया एवं भौंसले ने इस युद्ध में भाग लिया जबकि गायकवाड़ और होलकर इस युद्ध से अलग रहे। द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध बसीन की सन्धि के बाद मई 1803 में बाजीराव (द्वितीय) को अँग्रेजों के संरक्षण में पुनः पेशवा बनाया […] - [तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1816-1818 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध ई.1816 से 1818 के बीच चला। इस समय लॉर्ड वेलेजली ईस्ट इण्डिया कम्पनी का गवर्नर जनरल था। इस युद्ध में मराठों की तरफ से पेशवा, होलकर, सिन्धिया और भौंसले ने युद्ध किया।तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद ये तीनों ही अपने-अपने राज्यों के अधिकांश भू.भाग खो बैठे। तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध लॉर्ड हेस्टिंग्ज 1813 […] - [मराठा शक्ति का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): मराठा शक्ति का पतन भारत के आधुनिक इतिहास का सर्वाधिक निर्णायक मोड़ है। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने राजपूत राज्यों को अधीनस्थ सहायता की संधियाँ करने के लिए विवश करने के बाद मराठा शक्ति को पूरी तरह कुचलकर अपने अधीन कर लिया। मराठा शक्ति का पतन अधिकांश अँग्रेज इतिहासकारों के अनुसार ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत […] - [भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-british-rule-in-india/): भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना और साम्राज्य विस्तार के वास्तविक कारणों के विषय में इतिहासकारों में भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापनापर्याप्त मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत में ब्रिटिश भारत की स्थापना एक चमत्कारिक घटना थी। भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना के सम्बन्ध में धारणाएँ कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत में […] - [सहायक संधि प्रथा और वेलेजली](https://bharatkaitihas.com/marquis-wellejlee-invented-subsidiary-treaty-system/): मार्क्विस वेलेजली (1798-1805 ई.) ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी का प्रभावक्षेत्र विस्तारित करने के लिए सहायक संधि प्रथा का अविष्कार किया। इस प्रथा के अंतर्गत देशी राज्यों को विवश किया जाता था कि वे कम्पनी सरकार से सहायक संधि करके कम्पनी सरकार का संरक्षण प्राप्त कर लें। जिस समय मार्क्विस वेलेजली (1798-1805 ई.) को बंगाल का […] - [लॉर्ड हेस्टिंग्ज की हस्तक्षेप नीति](https://bharatkaitihas.com/lord-hastingss-intervention-policy/): 1784 ई. में ब्रिटिश संसद ने पिट्स इण्डिया एक्टके माध्यम से ईस्ट इण्डिया कम्पनी को आदेश दिया था कि कम्पनी सरकार भारत में देशी रियासतों के प्रति अहस्तक्षेप की नीति का पालन करेगी। इस नीति के कारण अंग्रेज अधिकारी भारत में साम्राज्य विस्तार नहीं कर पा रहे थे। अतः कम्पनी ने इस नीति को छोड़ […] - [डॉक्टराइन ऑफ लैप्स](https://bharatkaitihas.com/lord-dalhousies-doctrine-of-laps/): डॉक्टराइन ऑफ लैप्स का आविष्कार लॉर्ड डलहौजी ने किया। वह घोर साम्राज्यवादी अंग्रेज था। वह अपने कार्यकाल में सम्पूर्ण भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन करना चाहता था। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के इतिहास में 1848 ई. से 1856 ई. का काल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। 1848 ई. में लॉर्ड हेनरी हार्डिंग के जाने के बाद […] - [अंग्रेजों का जमींदारी बंदोबस्त](https://bharatkaitihas.com/zamindari-settlement-of-east-india-company/): अंग्रेजों का जमींदारी बंदोबस्त ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासनकाल में विकसित हुई एक नई प्रकार की भूराजस्व प्रणाली थी। इसमें किसानों को मुगलों के काल से चले आ रहे बंदोबस्त की अपेक्षा कुछ राहतें प्राप्त हुईं। भारत में वैदिक काल से ही राजा को प्रजा से भोग प्राप्त करने का अधिकार था। भोग, किसी भी […] - [अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त](https://bharatkaitihas.com/east-india-companys-reyatwadi-settlement/): अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त लागू करने का प्रमुख कारण यह था कि भारत के दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम में जमींदार वर्ग नहीं था, जिसके साथ भूमि का बन्दोबस्त किया जा सके। मद्रास प्रांत में अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त जिस समय बंगाल प्रान्त में स्थायी बन्दोबस्त लागू किया जा रहा था उस समय मद्रास प्रान्त अनिश्चिय की […] - [अंग्रेजों का महलवाड़ी बंदोबस्त](https://bharatkaitihas.com/mahalwadi-settlement-of-east-india-company/): राजस्व निर्धारण एवं संग्रहण के क्षेत्र में अनेक प्रयोगों के अनुभव के पश्चात, उत्तर भारत के राज्यों द्वारा कम्पनी को हस्तान्तरित और अँग्रेजों द्वारा विजित आगरा तथा अवध इत्यादि ब्रिटिश क्षेत्रों में अंग्रेजों का महलवाड़ी बंदोबस्त लागू किया गया। इस बन्दोबस्त में भूमि-कर की इकाई किसान का खेत नहीं अपितु ग्राम या महाल होती थी। […] - [कृषि का वाणिज्यीकरण और उसका प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/commercialization-and-impact-of-agriculture-in-india-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में कृषि का वाणिज्यीकरण हुआ। परम्परागत रूप से भारत में कृषि निजी उपभोग के उद्देश्य से होती थी। कृषि उत्पादों को बाजार में नहीं बेचा जाता था अपितु भूराजस्व के रूप में फसल चुकाने तथा निजी उपयोग हेतु घर में रखने के बाद बची हुई फसल का उपयोग वस्तु विनिमय […] - [भारत से धन का निष्कासन](https://bharatkaitihas.com/expulsion-of-money-from-india-during-british-era/): भारत से धन का निष्कासन लगभग एक हजार साल तक होता रहा। आठवीं शताब्दी ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम पहला आक्रांता था जो भारत से धन लूटकर अफगानिस्तान ले गया। अंग्रेज जाति अंतिम शक्ति थी जो भारत से बड़ी मात्रा में धन का निष्कासन करने में सफल रही। भारत पर पाश्चात्य देशों के आक्रमण तो […] - [कुटीर उद्योगों का पतन](https://bharatkaitihas.com/the-decline-of-cottage-industries-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन में भारतीय कुटीर उद्योगों का पतन बड़ी तेजी से हुआ। इस कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा धक्का लगा और ग्रामीण जनसंख्या रोजगार पाने के लिए बड़ी तेजी से नगरों की ओर अग्रसर हुई। अँग्रेजों के आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योग अँग्रेजों के भारत आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित […] - [ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार](https://bharatkaitihas.com/judicial-reforms-in-india-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार का वास्तविक कार्य ईस्ट इण्डिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्ज के काल में आरम्भ हुआ। कानून का शासन तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता इस प्रणाली की विशेषताएँ थीं। मुगल कालीन न्याय व्यवस्था का ह्रास मुगल कालीन न्याय व्यवस्था कुरान के सिद्धांतों पर अवलम्बित थी किंतु उसका दण्ड विधान हिन्दुओं पर […] - [भारत में ईसाई शिक्षा के प्रारम्भिक प्रयास](https://bharatkaitihas.com/early-christian-education-efforts-in-india/): भारत में ईसाई शिक्षा के प्रारम्भिक प्रयास पुर्तगाली मिशनरियों द्वारा सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में आरम्भ हुए। बाद में नीदरलैण्ड, डेनमार्क, फ्रांस एवं इंग्लैण्ड से आए मिशनरी लोगों ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति प्रचीन भारत में शिक्षा प्रणाली का विकास आध्यात्मिक आवश्यकताओं के कारण हुआ था। इस कारण शिक्षा का स्वरूप […] - [भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण](https://bharatkaitihas.com/first-phase-of-development-of-western-education-in-india/): भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण ईस्वी 1813 से 1853 तक चला। ईस्वी 1813 का चार्टर एक्ट भारत में पाश्चात्य शिक्षा के इतिहास निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। 1813 ई. का चार्टर एक्ट भारतीय शिक्षा के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है। क्योंकि अब कम्पनी ने भारतीयों की शिक्षा को अपने कर्त्तव्यों में […] - [वुड घोषणा पत्र तथा पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण (1854-1882 ई.)](https://bharatkaitihas.com/second-phase-of-development-of-western-education-in-india/): वुड घोषणा पत्र ई.1854 में जारी हुआ जिसके पश्चात् अंग्रेज सरकार ने भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण आरम्भ किया। यह चरण ई.1854 से 882 तक चला। 1835 से 1853 ई. तक मैकाले द्वारा निर्धारित नीति पर भारत में पाश्चात्य शिक्षा का विकास हुआ। 18 वर्ष के इस काल में मैकाले की […] - [हण्टर आयोग तथा पाश्चात्य शिक्षा के विकास का तीसरा चरण (1882-1901 ई.)](https://bharatkaitihas.com/third-phase-of-development-of-western-education-in-india/): हण्टर आयोग का उद्देश्य यह जानना था कि 1854 ई. के घोषणा पत्र में उल्लिखित शिक्षा नीति का किस सीमा तक पालन किया गया है तथा इस नीति को सुचारू रूप से कार्यान्वित करने के लिए सरकार को कौनसे कदम उठाने चाहिए! 1854 ई. के वुड घोषणा पत्र तथा 1858 ई. की महारानी विक्टोरिया की […] - [बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा का विकास](https://bharatkaitihas.com/fourth-phase-of-development-of-western-education-in-india/): लॉर्ड कर्जन के समय में बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का चौथा चरण ई.1901 से आरम्भ हुआ जो कि ई.1919 तक चला। इस चरण में विश्वविद्यालय अधिनियम लागू हुआ तथा सैडलर आयोग की रिपोर्ट आई। इसके बाद ई.1919 से 1947 तक पांचवाँ चरण चला। बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा विकास का चतुर्थ चरण […] - [समाज सुधार आन्दोलन के कारण](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-first-part/): समाज सुधार आन्दोलन के कारण स्वयं हिन्दू समाज में आ रही शिथिलता में ही मौजूद थे। उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी ईस्वी में अंग्रेजों के द्वारा थोपे जा रहे सांस्कृतिक संक्रमण से लड़ने के लिए भी समाज सुधार आंदोलनों का चलना आवश्यक हो गया था। भारत में धर्म सुधार एवं समाज सुधार आंदोलन के कारण मध्यकाल […] - [ब्रह्म समाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-second-part/): ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय ईसाई धर्म की कई विशेषताओं के प्रशंसक थे किंतु उन्होंने ईसा के देवत्व को उसी प्रकार अस्वीकार किया जिस प्रकार वे हिन्दू अवतारवाद को अस्वीकार करते थे। उग्र एवं कट्टर समाज सुधारक उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारकों में ब्रह्म समाज और प्रार्थना समाज जैसे उग्र सुधारवादी पश्चिमी सभ्यता […] - [भारतीय ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-third-part/): केशवचंद्र सेन ने ईस्वी 1866 में भारतीय ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ईसाई धर्म से प्रभावित होने के कारण भारतीय ब्रह्म समाज ईसा मसीह को पूज्य मानने लगा। युवा बंगाल आन्दोलन  जनवरी 1817 में कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना, भारत के धर्म और समाज सुधार आन्दोलन के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। सार्वजनिक जीवन […] - [आर्य समाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-fourth-part/): महर्षि दयानंद ने हिन्दू धर्म, सभ्यता और भाषा के प्रचार के लिए 10 अप्रेल 1875 को बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश नामक महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखा। स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज यद्यपि ब्रह्म समाज ने धर्म एवं समाज सुधार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किया तथापि ब्रह्म समाज ने पाश्चात्य […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी के सुधार कार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी में भारत में थियोसॉफिकल सोसायटी के सुधार कार्य बहुत व्यापक नहीं थे किंतु इन्होंने भारतीय धर्म की महत्ता को पुनर्स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। थियोसॉफिकल सोसायटी थियोसॉफिकल सोसायटी भारत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आन्दोलन था जिसने देश के धार्मिक तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। थियोसॉफी का अर्थ होता है- ईश्वर […] - [रामकृष्ण मिशन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-sixth-part/): रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1 मई 1897 को स्वामी विवेकानन्द ने की। वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय कलकत्ता के निकट बेलुर में है। रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में धर्म के नाम से चलाए जा रहे पाखण्ड को नष्ट करके […] - [मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-seventh-part/): जिस समय भारत में हिन्दू धर्म के भीतर सुधार आंदोलन आरम्भ हुए, उस समय मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन चलाए जाने की आवश्यकता अनुभव हुई। मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन 19वीं शताब्दी में भारत के मुसलमानों में भी सुधार आन्दोलन आरम्भ हुए। मुस्लिम समाज इस देश में आने से पहले ही दो प्रमुख वर्गों में विभाजित था- […] - [सोने का दिल लोहे के हाथ ! (117)](https://bharatkaitihas.com/heart-of-gold-with-iron-hands/): उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी गांधीजी की इच्छा के लिए कुर्बान कर दी। वे चाहते थे तो प्रधानमंत्री बन सकते थे किंतु उन्होंने देश की स्वतंत्रता के रथ को तेजी से आगे बढ़ने देने के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी को वैसे ही त्याग दिया जैसे सुभाषचंद्र बोस ने गांधीजी की इच्छापूर्ति के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी त्याग दी थी। - [औरंगजेब द्वारा ध्वस्त भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-demolished-during-mughal-period-aurangzeb/): औरंगजेब एक क्रूर, धर्मान्ध और हत्यारा शासक ही नहीं था, अपितु वह कला और संस्कृति का भी बहुत बड़ा शत्रु था। औरंगजेब द्वारा ध्वस्त भवन अब हमें देखने को नहीं मिल सकते किंतु उनकी सूची बहुत लम्बी है। औरंगजेब के काल में मंदिरों का विध्वंस औरंगजेब का मानना था कि मुसलमानों के लिए यह उचित […] - [विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-eighth-part/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी के भारत में हिन्दू समाज तथा मुस्लिम समाज की तरह अन्य समुदायों में भी स्थानीय स्तर पर विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन चले। विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन भारत में ऐसे कई धार्मिक-सामाजिक सुधार आन्दोलन हुए जिनके कार्य तथा उद्देश्य बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित थे। पारसियों ने अपने धर्म और समाज सुधार के […] - [सुधार आंदोलनों के परिणाम](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-ninth-part/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी में चले सुधार आंदोलनों के परिणाम स्वरूप भारत की जनता में जागृति आई तथा उसे अपनी दुर्दशा का भान हुआ। इस कारण आजादी की लड़ाई में भी तेजी आ गई। सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के परिणाम 19वीं शताब्दी के सुधार आन्दोलनों के परिणाम स्वरूप भारत पश्चिम के आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं विचारों […] - [अठारहवीं सदी में प्रेस एवं पत्रकारिता का विकास](https://bharatkaitihas.com/development-of-press-and-journalism-in-india-in-eighteenth-century/): अठारहवीं सदी में प्रेस एवं पत्रकारिता का विकास ब्रिटिश शासन काल की एक महत्वपूर्ण घटना थी। प्रेस एवं पत्रकारिता के माध्यम से भारत के लोगों को दुनिया भर में आ रहे परिवर्तनों की जानकारी मिलने लगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मानव सभ्यता के विकास के साथ समाचार पत्रों के स्वरूप में भी परिवर्तन आता रहा है। अशोक […] - [उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता के इतिहास का दूसरा अध्याय अँग्रेजी समाचार पत्रों के साथ-साथ देशी भाषा में भी समाचार पत्रों का प्रकाशन से आरम्भ हुआ। उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता के भारतीय प्रयास 1818 ई. तक देशी भाषा में प्रकाशित होने वाले किसी भी समाचार पत्र का उल्लेख नहीं मिलता। इस काल से पहले केवल छुटपुट […] - [1857 के बाद पत्रकारिता](https://bharatkaitihas.com/journalism-in-india-after-eighteen-fifty-seven/): 1857 के बाद पत्रकारिता कई चरणों से गुजरी। अठारह सौ सत्तावन से पहले की पत्रकारिता और अठारह सौ सत्तावन के बाद की पत्रकारिता में काफी अंतर आ गया। उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशकों में पत्रकारिता ने एक बार फिर मोड़ लिया। ब्रिटिश काल में पत्रकारिता के उद्देश्य 1853 ई. में हिन्दू पैट्रियट के सम्पादक हरिशचन्द्र […] - [उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/major-nineteenth-century-peasant-movements-in-india/): उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्चाचारों एवं शोषण के विरुद्ध जनमन की अभिव्यक्ति थे। उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन 1855 ई. से 1885 तक की अवधि में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक विद्रोह हुए। इनमें से कुछ प्रमुख आंदोलन इस प्रकार से हैं- (1.) बंगाल के […] - [बीसवीं सदी के किसान आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2/): ब्रिटिश शासन काल में बीसवीं सदी के किसान आंदोलन आरम्भ हुए। किसान आंदोलनों की एक लम्बी शृंखला थी जो कि सम्पूर्ण राष्ट्र में रह-रह कर प्रस्फुटित होती रही। अंग्रेज, देशी राजा एवं जमींदार मिलकर भी भारत में किसान आन्दोलन की इस शृंखला को कुचल नहीं पाए। कांग्रेस के नेतृत्व में बीसवीं सदी के किसान आंदोलन […] - [किसान आन्दोलनों के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-peasant-movement-in-the-nineteenth-century/): उन्नीसवीं सदी के भारत में किसान आन्दोलनों के कारण बहुत स्पष्ट थे। ये आंदोलन अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के विरोध में उठ खड़े होते थे, साथ ही किसानों की आर्थिक दुर्दशा की भी मुखर अभिव्यक्ति थे। भारत में किसानों की दुर्दशा का आरम्भ मुस्लिम आक्रांताओं के भारत आक्रमणों के समय हुआ। राजस्व वसूली […] - [अंग्रेजी शासन में विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/revolts-in-the-first-century-of-british-rule/): अंग्रेजी शासन में विद्रोह अठारहवीं शताब्दी ईस्वी से ही आरम्भ हो गए थे। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोहों की शृंखला तब तक चलती रही जब तक कि अंग्रेज भारत को छोड़कर चले नहीं गए। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने ई.1757 के प्लासी युद्ध के बाद भारतीय क्षेत्रों पर शासन करने के अधिकार प्राप्त करने आरम्भ किए। […] - [ब्रिटिश काल में आदिवासी विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/tribal-revolts-in-british-period/): ब्रिटिश काल में आदिवासी विद्रोह का एक लम्बा इतिहास है। इसका मुख्य कारण यह था कि आदिवासी लोग अपनी संस्कृति में किसी भी बाहरी मनुष्य का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते थे। अंग्रेजों को आदिवासियों के विद्रोह कुचलने में काफी शक्ति लगानी पड़ती थी। संसार भर में आदिवासी समूह दुर्गम पहाड़ों और जंगलों में निवास करते […] - [दलित आन्दोलनों का उदय](https://bharatkaitihas.com/the-rise-of-dalit-movements-in-india/): ब्रिटिश शासन काल में दलित आन्दोलनों का उदय हिन्दू धर्म के भीतर की कमजोरियों के विरोध में हुआ था। पश्चिमी शिक्षा के आलोक में दलितों को अपनी स्थिति में सुधार लाने के लिए नवीन प्रेरणा प्राप्त हुई। हिन्दू समाज में उत्तर वैदिक काल में जिस वर्ण व्यवस्था का उद्भव हुआ, उस वर्ण व्यवस्था ने कालांतर […] - [सत्तावन की क्रांति के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-revolution-of-eighteen-fifty-seven/): अठारह सौ सत्तावन की क्रांति के कारण बहुत स्पष्ट नहीं थे किंतु इतना निश्चित है कि अंग्रेजी राज के विरुद्ध देश के विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों में अलग-अलग कारणों से असंतोष उत्पन्न हो गया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ई.1757 में प्लासी का युद्ध जीतने के बाद से एक-एक करके भारतीय राज्यों को हड़पती जा रही […] - [अठारह सौ सत्तावन की क्रांति की घटनाएँ एवं प्रसार](https://bharatkaitihas.com/events-and-spread-of-revolution-of-eighteen-fifty-seven/): कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अठारह सौ सत्तावन की क्रांति एक सोची-समझी एवं पूर्व नियोजित योजना थी। इसका नेतृत्व अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोगों ने किया। इस संघर्ष में धार्मिक नेताओं, पूर्व राजाओं, जागीरदारों, कृषकों, कारीगरों, सैनिकों और सामामान्य जनता ने डटकर मुकाबला किया। अठारह सौ सत्तावन की क्रांति की योजना 1852 ई. में […] - [सत्तावन की क्रांति का दमन](https://bharatkaitihas.com/suppression-of-eighteen-fifty-seven-revolution-by-british/): सत्तावन की क्रांति का दमन दिल्ली से आरम्भ हुआ। हेनरी बरनार्ड को सेना देकर दिल्ली की ओर भेजा गया। क्रांतिकारी सैनिकों ने अँग्रेजी सेना को पीछे हटा दिया। दिल्ली में एकत्रित भारतीय सैनिकों में जोश तो था किंतु उनका सफल संचालन करने वाला कोई अनुभवी सेनापति नहीं था। अतः वे विभिन्न दिशाओं से आने वाली […] - [1857 की क्रांति की असफलता के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-failure-of-eighteen-fifty-revolution/): 1857 की क्रांति की असफलता के कई कारण थे। सबसे बड़ा कारण यह था कि क्रांति की सफलता के बाद देश का भविष्य क्या होगा, इसका कोई स्वरूप निश्चित नहीं था। 1857 की क्रांति की असफलता के कारण अँग्रेजों को भारत से बाहर निकालने के लिए 1857 में जो क्रांति हुई, उसकी असफलता के कई […] - [बंगाल के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a0%e0%a4%a8/): ब्रिटिश शासनकाल में बंगाल के राजनीतिक संगठन बंगाली समाज में राजनीतिक चेतना में वृद्धि करने में अपना अमूल्य योगदान देने में सफल रहे। बंगाल प्रेसीडेंसी में राजनीतिक संगठनों का उदय उन्नीसवीं सदी का भारत हर तरफ से द्वंद्वों एवं संघर्षों में फंसा हुआ था। देश किसानों के आंदोलन, सामाजिक सुधार आंदोलन, आदिवासियों के आंदोलन, सन्यासियों […] - [महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/rise-of-political-organizations-in-india-second-part/): महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन देश भर में खड़े हो रहे राजनीतिक संगठनों की ही एक शृंखला थे। इन संगठनों ने न केवल अंग्रेज अधिकारियों के अत्याचारों का विरोध किया अपितु बम्बई प्रेसीडेंसी की जनता में राजनीतिक चेतना भी उत्पन्न की। महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन बॉम्बे एसोसिएशन बम्बई प्रेसीडेन्सी में राजनीतिक गतिविधियाँ मराठी मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवी के […] - [मद्रास के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/rise-of-political-organizations-in-india-third-part/): मद्रास के राजनीतिक संगठन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा व्यापारियों एवं जमींदारों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए आरम्भ हुए। बाद में इन्होंने राजनीतिक मंचों का स्वरूप धारण कर लिया। मद्रास के राजनीतिक संगठन मद्रास नेटिव एसोसिएशन 26 फरवरी 1852 को मद्रास के व्यापारियों ने कलकत्ता की ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन की एक शाखा मद्रास में […] - [राजनीतिक जनजागरण के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-for-political-public-awareness-in-india/): ब्रिटिश शासनकाल में भारत में हुए राजनीतिक जनजागरण के कारण बहुत विस्तृत थे। उस काल में चारों ओर से नवीन सूचनाओं का आगमन हो रहा था। यूरोप में पनप रहे राष्ट्रवादी विचारों एवं यूरोप में हुई वैज्ञानिक शोधों ने लोगों को नए तरीके से सोचने का मार्ग दिखाया जिसका असर भारत पर भी पड़ा। भारत […] - [कांग्रेस की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-indian-national-congress/): कांग्रेस की स्थापना से पहले कलकत्ता, मद्रास तथा बम्बई प्रेसीडेंसी में कई राजनीतिक संस्थाओं का उदय हुआ किंतु ये संस्थाएं स्थानीय हितों के लिये काम करती रहीं। सरकार के भय के कारण इन संस्थाओं के सदस्य, इन संस्थाओं को छोड़ जाते थे तथा इस कारण कई संस्थाएं दम तोड़ चुकी थीं। इल्बर्ट बिल के बाद […] - [कांग्रेस का उदारवादी नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/moderate-leadership-of-moderate-congress/): ईस्वी 1885 से ईस्वी 1919 तक कांग्रेस का उदारवादी नेतृत्व कांग्रेस पर हावी रहा। इस काल के नेताओं ने अंग्रेज शासकों से अनुनय-विनय करके अपने अधिकारों में वृद्धि के लिए प्रयत्न किए। भारत की आजादी के लिये संघर्ष अँग्रेजी राज्य की स्थापना के साथ ही आरम्भ हो गया था। 18वीं शती में प्रेस के उदय […] - [उदारवादी नेतृत्व की सफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/moderate-leadership-of-moderate-congress-part-two/): अनेक इतिहासकार नरमपंथी कांग्रेस के उदारवादी नेताओं को राजनीतिक याचक बताकर उनकी उपेक्षा करते हैं किंतु साम्रज्यशाही के उस काल में उदारवादी नेतृत्व की सफलताएँ असंदिग्ध रूप से उल्लेखनीय थीं। उदारवादी नेताओं की रणनीति कांग्रेस के उदारवादी नेताओं की रणनीति बहुत सरल, स्पष्ट और विनम्र संघर्ष की थी। उन्होंने सरकार के विरुद्ध कटु भाषा का […] - [कांग्रेस का उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-one/): कांग्रेस का उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व उदारवादी नेताओं की रीति-नीति की प्रतिक्रया के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था। उग्रराष्ट्रवादी नेता अंग्रेजों के समक्ष अनुनय-विनय करने को उचित नहीं मानते थे। भारत में उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा, कांग्रेस के जन्म से बहुत पहले जन्म ले चुकी थी। 1857 ई. की क्रांति उसी की अभिव्यक्ति थी। पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन […] - [उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण कांग्रेस की स्थापना के बाद उदारवादी नेताओं द्वारा अपनाई गई रीति-नीति में छिपे हैं। वस्तुतः उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के बाद ही कांग्रेस सही अर्थों में एक राजनीतिक दल का स्वरूप ले सकी। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण कांग्रेस में उग्रवादी नेतृत्व के उदय के कारणों को मोटे […] - [उग्रराष्ट्रवादियों द्वारा बंग-भंग का विरोध](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-two/): जब ईस्वी 1905 में लॉर्ड कर्जन ने हिन्दू बंगाल और मुस्लिम बंगाल बनाने के उद्देश्य से बंगाल का विभाजन किया तब उग्रराष्ट्रवादियों द्वारा बंग-भंग का विरोध किया गया। लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन बंगाल एक विशाल प्रान्त था। इसमें बंगाल, असम, बिहार, उड़ीसा तथा छोटा नागपुर तक विस्तृत भू-भाग सम्मिलित था। इतने बड़े प्रांत […] - [सूरत की फूट](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%82%e0%a4%9f/): उदारवादी नेताओं एवं उग्रराष्ट्रवादी नेताओं के बीच ई.1907 में हुए वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस दो धड़ों में विभक्त हो गई। इन्हें नरमपंथी और गरमपंथी कांग्रेस कहा जाता था। इस घटना को सूरत की फूट कहते हैं। उदारवादियों और उग्रवादियों के अलग-अलग रास्ते बंगाल विभाजन के बाद कांग्रेस में, उदारवादियों और उग्रवादियों का अंतर्विरोध और […] - [उग्रवादी नेतृत्व की कार्यशैली](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-three/): उग्रवादी नेतृत्व की कार्यशैली कांग्रेस के उदारवादी नेताओं से बिल्कुल अलग थी। उग्रवादी नेता अंग्रेज सरकार के समक्ष अनुनय-विनय की शब्दाली का प्रयोग करने के स्थान पर सरकार का प्रत्यक्ष विरोध करने के समर्थन में थे। उग्रवादी गुट का प्रादुर्भाव, उदारवादी नेताओं की कार्यशैली के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। अतः स्वाभाविक था कि […] - [उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d-2/): उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन करते समय हमें उनकी सफलताओं एवं विफलताओं दोनों पर विचार करना चाहिए। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को उदारवादी नेतृत्व के दौर से आगे बढ़ाया जिसके कारण कांग्रेस को जनता का प्रबल समर्थन प्राप्त हो सका। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन उग्रवादियों की सफलताएँ उग्रवादी आन्दोलन का प्रमुख क्षेत्र बंगाल, […] - [भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन का उदय](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-one/): यदि यह कहा जाए कि भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन का उदय कांग्रेस के उग्र राष्ट्रवादी नेताओं की रीतियों-नीतियों से प्रेरित था, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कांग्रेस के उग्रवादी नेता उग्र आंदोलन के समर्थक थे जिनमें असहयोग, प्रदर्शन, भाषण, बहिष्कार आदि उग्र उपायों का सहारा लिया जाता था। वे किसी भी स्थिति में हिंसक […] - [बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-two/): बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ बंगाल में सशस्त्र क्रांति का मंत्र समाचार पत्रों के माध्यम से प्रसारित हुआ। 1906 ई. में वारीन्द्र कुमार घोष  और भूपेन्द्र दत्त  ने मिलकर युगान्तर समाचार पत्र आरम्भ किया। इसका मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारी भावना का प्रचार करना था। शीघ्र ही यह पत्र इतना लोकप्रिय हो गया कि इसकी 50,000 प्रतियां प्रतिदिन […] - [पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-three/): पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियाँ 1904 ई. में जोतीन्द्र मोहन चटर्जी और कुछ नौजवानों ने मिलकर एक गुप्त संगठन बनाया। इस संगठन का मुख्यालय रुड़की में स्थापित किया गया। यहीं पर लाला हरदयाल, अजीतसिंह और सूफी अम्बा प्रसाद भी इस संगठन से जुड़े। इससे पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियों में हलचल आई। पंजाब के क्रांतिकारी, लाला हरदयाल […] - [उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-four/): जिस समय पंजाब, महाराष्ट्र एवं बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधयाँ चल रही थीं, उस समय उत्तर उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ अपने चरम पर थीं। उत्तर भारत के दिल्ली, संयुक्त प्रदेश, आगरा एवं अवध, बिहार तथा उड़ीसा आदि प्रांतों के क्रांतिकारी भी अंग्रेज सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ […] - [महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be/): महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ ईस्वी 1857 की सशस्त्र क्रांति के विफल हो जाने के बाद से आरम्भ होने लगी थीं। महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाों को चरम पर पहुंचाने का श्रेय विनायक दामोदर सावरकर को जाता है। महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ महाराष्ट्र अँग्रेजों के आगमन के समय से ही राजनीतिक हलचलों का केन्द्र बना हुआ था। […] - [अन्य प्रांतों में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-six/): पेशावर में क्रांतिकारी गतिविधियाँ पेशावर में पुलिस ने एक जुलूस पर गोली चलाई जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों को नियंत्रित करने के लिये सेना बुलाई गई। इस सेना में पंजाबियों की प्रधानता थी तथा क्रांतिकारियों के गुप्त संगठन भी सेना के भीतर सक्रिय थे। ऐसी स्थिति में ब्रिटिश सरकार ने 18वीं रॉयल गढ़वाली […] - [विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-five/): विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन की अलख जगाने वालों में श्यामजी कृष्ण वर्मा, सरदारसिंहजी रेवा भाई राना, श्रीमती भीखाजी रुस्तम कामा तथा वीर विनायक दामोदर सावरकर प्रमुख थे। विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों ने अन्य देशों के क्रांतिकारियों से सम्पर्क स्थापित करके उनसे भारत की स्वाधीनता के लिये समर्थन, सहायता एवं हथियार प्राप्त किये। विदेशों […] - [क्रांतिकारी आंदोलन का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-seven/): क्रांतिकारी आंदोलन का मूल्यांकन करते समय हमें क्रांतिकारी आंदोलन की सफलाताओं एवं असफलताओं पर विचार करने के साथ-साथ राष्ट्र को दिए गए योगदान पर भी चर्चा करनी होगी। क्रांतिकारी आन्दोलन की असफलता के कारण क्रांतिकारी आंदोलन भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त करवाने के उद्देश्य से आरम्भ किया गया था परन्तु यह आंदोलन अँग्रेजों से […] - [गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-one/): गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन गुजरात के पोरबन्दर, राजकोट और बांकानेर राज्यों में बीता जहाँ गांधीजी के पिता करमचंद दीवान रहे। गांधी के जीवन पर उनकी माता पुतली बाई का काफी प्रभाव पड़ा। बीसवीं सदी में भारत की राजनीति में गांधी का पदार्पण, बीसवीं शताब्दी की प्रमुख घटनाओं में से एक है। उन्होंने कांग्रेस के चरित्र […] - [असहयोग आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-two/): कांग्रेस अधिवेशन में असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिये जाने के बाद रवीन्द्रनाथ ठाकुर आदि ख्याति प्राप्त लोगों ने तथा जन साधारण ने सरकारी उपाधियाँ लौटा दीं। असहयोग आन्दोलन से पहले की घटनाएँ प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार को पूरा सहयोग दिया था और गोरी सरकार ने युद्ध समाप्ति के […] - [असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-three/): असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति में गांधीजी ने कुछ और प्रयोग किए किंतु अहयोग आंदोलन की तरह वे सभी प्रयोग निष्फल सिद्ध हुए। गांधीजी ने जनता से जो वायदे किए, उन्हें वे पूरा नहीं कर सके। असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति भारत में 1920 ई. में असहयोग आंदोलन आरम्भ हुआ जो लगभग विफल […] - [सविनय अवज्ञा आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-four/): सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित था। इस आंदोलन के माध्यम से गांधीजी ने भारतीयों से आह्वान किया कि वे ब्रिटिश सरकार के आदेशों का पालन नहीं करें ताकि अंग्रेज सरकार भारतीयों को शासन के अधिकार सौंप दें। सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण गांधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा आरम्भ किये […] - [गोलमेज सम्मेलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-five/): ब्रिटिश सरकार ने भारत के ब्रिटिश प्रांतों एवं देशी राज्यों को मिलाकर एक संघ बनाने के उद्देश्य से तीन गोलमेज सम्मेलन किए किंतु गोलमेज सम्मेलनों में गांधीजी की कोई विशेष भूमिका नहीं रही। प्रथम गोलमेज सम्मेलन लॉर्ड इरविन की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में ई.1930 में ब्रिटिश सरकार ने लन्दन में पहला गोलमेज सम्मेलन बुलाया। 12 […] - [द्वितीय विश्वयुद्ध](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-six/): ईस्वी 1939 से 1945 तक की अवधि में द्वितीय विश्वयुद्ध लड़ा गया। चूंकि उस काल में भारत ब्रिटिश साम्राज्य का अंग था, इसलिए भारत की सेनाओं ने भी इस युद्ध में भाग लिया। गांधीजी के आह्वान पर भारतीय युवक ब़ड़ी संख्या में सेना में भर्ती होकर द्वितीय विश्वयुद्ध के मोर्चों पर लड़ने के लिए गए। […] - [भारत छोड़ो आन्दोलन (1942 ई.)](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-seven/): क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद कांग्रेस ने भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ किया। चूंकि यह आंदोलन अगस्त माह में आरम्भ हुआ था, इसलिये इस आन्दोलन को अगस्त क्रांति भी कहा जाता है। भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण कांग्रेस द्वारा ईस्वी 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ करने के कई कारण थे- (1.) क्रिप्स मिशन की […] - [कांग्रेस समाजवादी दल](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-one/): कांग्रेस समाजवादी दल ने 21 अक्टूबर 1934 को बम्बई में आयोजित प्रथम अधिवेशन में पार्टी का लक्ष्य, भारत के लिए पूर्ण स्वाधीनता की प्राप्ति और समाजवादी समाज की स्थापना करना घोषित किया गया। कांग्रेस के युवा नेताओं में गांधीजी की नीतियों के विरुद्ध निरंतर असंतोष सुलग रहा था जो हर आंदोलन के बाद बढ़ जाता […] - [भारत में साम्यवाद का उदय एवं विकास](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-two/): भारत में साम्यवाद का उदय रूस की समाजवादी क्रान्ति से प्रेरित थी। साम्यवाद से प्रेरित युवकों को लगता था कि जिस प्रकार रूस में जार का शासन उखाड़ कर फैंक दिया गया है, उसी प्रकार भारत में साम्यवाद के बल पर साम्राज्यवादी अंग्रेजों का शासन समाप्त किया जा सकता है। भारत में साम्यवाद का उदय […] - [भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-three/): भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना का उद्देश्य, सम्पूर्ण स्वराज्य को प्राप्त करना और एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जिसमें उत्पादन और धन के वितरण पर सामूहिक स्वामित्व हो। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कानपुर षड़यन्त्र केस के कुछ दिनों बाद ही संयुक्त प्रांत में सक्रिय साम्यवादी समूह के नेता सत्यभक्त ने 1 सितम्बर 1924 […] - [फॉरवर्ड ब्लॉक एवं अन्य कम्युनिस्ट पार्टियाँ](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-four/): नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने ई.1939 में कांग्रेस के अन्दर ही फॉरवर्ड ब्लॉक नामक प्रगतिशील पार्टी की स्थापना की जिसके झण्डे के नीचे समस्त वामपंथी तत्त्व एकत्र हो सकें। कांग्रेस के दक्षिण पंथी नेताओं ने इस पार्टी की स्थापना का विरोध नहीं किया। फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की पृष्ठभूमि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का झुकाव आरम्भ से […] - [श्रमिक वर्ग में असंतोष](https://bharatkaitihas.com/labor-movements-in-india-part-one/): औद्योगिक श्रमिक वर्ग में असंतोष ब्रिटिश साम्राज्यवादी शासकों द्वारा लम्बे समय तक किए गए शोषण के विरोध में उत्पन्न हुआ था। श्रमिक वर्ग में असंतोष के कारण हड़तालों की शुरुआत हुई। भारत में 1835 ई. तक चाय बागान श्रमिक अस्तित्व में आ चुके थे फिर भी यह माना जा सकता है कि भारत में औद्योगिक […] - [ट्रेड यूनियनवाद का उदय](https://bharatkaitihas.com/labor-movement-in-india-part-two/): जब भारत में औद्योगिकीकरण के कारण श्रमिक वर्ग की संख्या में वृद्वि हुई और श्रमिक असंतोष बढ़ा, तब ट्रेड यूनियनवाद का उदय हुआ। ट्रेड यूनियनवाद का उदय बीसवीं सदी के दूसरे दशक में राष्ट्रव्यापी हड़तालों की पृष्ठभूमि में भारत का ट्रेड यूनियन आन्दोलन उत्पन्न हुआ। लगभग समस्त बड़े उद्योगों तथा औद्योगिक केन्द्रों में अधिकतर ट्रेड […] - [भारत सरकार अधिनियम 1919](https://bharatkaitihas.com/government-of-india-act-niniteen-hundred-ninteen/): मांटेग्यू-चैम्सफोर्ड रिपोर्ट के आधार पर 1919 ई. में ब्रिटिश संसद में एक विधेयक पारित किया गया। इसे मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम अथवा भारत सरकार अधिनियम 1919 कहते हैं। मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट से असंतोष  भारत की गोरी सरकार का 1909 ई. का अधिनियम मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट कहलाता है। यह कांग्रेस की 1907 ई. की सूरत फूट का […] - [हम सौ साल जिएं पर कैसे !](https://bharatkaitihas.com/ham-sau-saal-jien-par-kaise/): हम सौ साल जिएं यह वेदों का मूल मंत्र है। ऋग्वेद में एक ऋचा आती है जिसमें कहा गया है- जीवेम् शरदः शतम् पश्येम् शरदः शतम्, श्रुण्याम् शरदः शतम्, प्रब्रवाम् शरदः शतम्, स्यामदीनाः शरदः शतम्। अर्थात् मैं सौ शरद ऋतुओं तक जीवित रहूँ, देखूं, सुनूं, बोलूं और आत्मनिर्भर रहूं तथा सौ वर्ष के बाद भी […] - [लम्बे जीवन के लिए क्या हमने स्वयं को तैयार किया है!](https://bharatkaitihas.com/lambe-jivan-ke-liye/): शासन व्यवस्था तथा अर्थव्यवस्था में सुधार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रसार आदि कार्य तो सरकार एवं समाज द्वारा सामूहिक रूप से ही किए जा सकते हैं किंतु कुछ उपाय करके हम स्वयं को लम्बे जीवन के लिए तैयार कर सकते हैं और अपनी औसत आयु में 15 साल अथवा उससे अधिक वर्ष जोड़ सकते हैं। - [सोशियल मीडिया कमेण्ट्स से बदलता है हमारा भाग्य !](https://bharatkaitihas.com/our-comments-are-decided-by-negative-and-positive-energy/): निश्चित रूप से नकारात्मक टिप्पणी, गालियों और डिस्लाइक जैसी प्रतिक्रियाओं का प्रभाव यूट्यूबर पर बुरा होता है किंतु क्या हम जानते हैं कि उसका परिणाम और प्रभाव हमारे अपने लिए भी बुरा होता है। जब हम किसी के खिलाफ कोई नकारात्मक टिप्पणी करते हैं या गालियां लिखते हैं तो हमारे भीतर नकारात्मक एनर्जी का प्रवाह बहुत तेजी से होता है जिसके कारण हमारे भाग में भी बदलाव आते हैं। - [ब्लॉगिंग का इतिहास करोड़ों की कमाई!](https://bharatkaitihas.com/bloging-ka-itihaas-karodon-kee-kamaee/): यूट्यूब चैनल अपने सदस्यों को उनके वीडियो चैनल पर विज्ञापन दिखाने की भी सुविधा देता है जिससे वी-ब्लॉगर्स को अच्छी-खासी आमदनी होती है। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2013 में एक वी-लॉगर ने 7,20,000 यूएस डॉलर अर्थात् भारतीय मुद्रा में कहें तो लगभग 5 करोड़ रुपए कमाए। - [चौदह माह की बच्ची से बलात्कार](https://bharatkaitihas.com/rape-with-a-girl-child-and-dirty-politics-in-india/): A Bihari labour raped with a 14 months' girl child. Alpesh Thakore the Congress MLA of Gujrat and his followers attacked on all labour of Bihar and UP in Gujrat. Instead of discussing upon real problems of Indian society, political leaders are abusing each other. In this video we have discussed the mentality of Indian politics. - [मानव जाति का डी.एन.ए. क्या अप्सराओं ने बदला !](https://bharatkaitihas.com/did-nymphs-changed-the-dna-of-the-human-race/): Why did Elf live as wife of human beings Every human being on this earth believe that some elf or apsaras were coming from heaven to earth for living with human beings as their wife or spouse. Why did they do it! In this video we have described the reasons behind it. - [हिन्दूधर्म में परकाया प्रवेश की ऐतिहासिकता !](https://bharatkaitihas.com/parkaya-pravesh-in-hindu-religion/): परकाया प्रवेश को प्रायः अस्वाभाविक घटना समझा जाता है किंतु यह प्राणियों का स्वाभाविक धर्म है। परकाया प्रवेश का अर्थ है एक देह को छोड़कर दूसरी देह में प्रवेश करना। माँ के गर्भ में संतान का शरीर बनता है, वहाँ नवीन आत्मा का निर्माण नहीं होता। माँ के गर्भ में बनने वाली शिशु देह में हँसने-रोने एवं बोलने वाला जीवात्मा कहाँ से आता है? निश्चित रूप से वह किसी अन्य देह को छोड़कर आता है जिसे इसी प्रकृति प्रदत्त एवं स्वाभाविक प्रक्रिया के द्वारा नवीन शरीर की प्राप्ति हाती है। परमात्मा, देवगण, योगीजन, सिद्धजन और कुछ अन्य प्रकार के दैवीय अस्तित्वों को मां के गर्भ में बन रहे शिशु-शरीर में प्रवेश करने की अनिवार्यता नहीं है। वे स्वयं अपनी शक्तियों के बल पर इच्छानुसार शरीर का निर्माण कर सकते हैं जिसे योगज शरीर कहा जाता है। माँ के पेट में बन रहे शिशु में आत्मा प्रवेश नहीं करता, जीवात्मा प्रवेश करता है। वह किसी अन्य स्थान से आकर उस निर्माणाधीन शरीर का स्वामी बनता है। - [क्या है भैरवी साधना का रहस्य ?](https://bharatkaitihas.com/mystery-of-bhairavi-sadhna/): इस प्रक्रिया में गुरु की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जब काम का आवेग चढ़ता है तो साधक उसे नियंत्रित नहीं कर सकता है। अतः गुरु ही साधक को बताता है कि कैसे उसे नियंत्रित करके ऊपर की और मोड़ा जाए। - [ऊंदरिया पंथ के साधक साधना-भ्रष्ट साथी की हत्या करते थे!](https://bharatkaitihas.com/undaria-followers-used-to-murder-their-corrupt-fellow-practitioners/): इस पंथ की साधना सभाओं में स्त्री और पुरुष को जोड़े से आना होता था तथा वे पूर्ण निर्वस्त्र होकर एक बड़े समूह में गोलाकर बैठकर साधना करते थे। - [कूण्डापंथियों की रहस्यमयी साधना का साधन है नारीदेह !](https://bharatkaitihas.com/woman-body-is-the-main-source-of-kunda-panth-s-mysterious-penance/): There are so many ways of meditation and Penance In India. Every Penance system has it's own sect or separate religion. Kunda Panth is one of them. In this Penance system an alive woman body is used as partner and followers get the moksha, In this video we have discussed the history and salient features of Kunda Panth of Thar desert. - [कांचलिया पंथ की तंत्रसाधना अघोरियों तथा भैरवी साधकों से ली गई है !](https://bharatkaitihas.com/mysterious-kanchaliya-sect-is-based-upon-philosophy-of-aghor-panth-and-shakt-sect/): रात्रि के लगभग दो बजे तक भजनभाव होते हैं। भजन समाप्ति के बाद गुरु के निर्देशानुसार सभी साधक स्त्रियां अपनी कांचलियां खोलकर कोटवाल को देती हैं। कोटवाल इन कांचलियों को कलश के पास रखे मिट्टी के कूंडे में डाल देता है। पाट पर रखे चावलों में से गुरु अपने हाथ में चावल के कुछ दाने लेता है जिसे सादके धारना कहते हैं। - [चोलीपूजन पंथ की साधना का लक्ष्य मनो-दैहिक परमानंद का विस्फोट है !](https://bharatkaitihas.com/choli-poojan-sect-of-shakt-panth/): चोली पूजन के आयोजन में पंचों-मकारों का प्रयोग किया जाता है। आयोजन का पुजारी किसी बड़े पात्र में मदिरा भरकर उसकी पूजा करता है। स्त्री-साधिकाएं अपनी चोली उतारकर पात्र की मदिरा में भिगोकर उससे अपना वक्ष साफ करती हैं। इसके बाद वे अपनी चोली को उसी घड़े में डाल देती हैं। जब स्त्री साधिकाएं इस क्रिया को सम्पन्न करती हैं, तब तक पुरुष साधक, उस घडे के चारों ओर घेरा बनाकर नाचते हुए शराब पीते हैं। जब समस्त स्त्री साधिकाएं अपनी चोली उतारकर वक्ष साफ कर लेती हैं तब पुजारी देवी-प्रतिमा की पूजा करके उसे नई चोली धारण करवाता है तथा देवी के समक्ष मेमने की बलि देता है। मेमने का मांस उसी समय पकाकर देवी को भोग लगाया जाता है। इस समय भी मदिरा-पान का दौर जारी रहता है। - [मी टू का वायरस एक-दूसरे पर थूकने के लिए उकसा रहा है!](https://bharatkaitihas.com/me-too-will-ruin-the-society/): हमारी संस्कृति में पुरुष को ब्रह्मचारी रहने और स्त्री को पुत्रवती होने का आशीर्वाद वस्तुत इन दोनों की मनोभूमि एवं सहज प्रवृत्ति को संतुलति करने के लिए दिया जाता है। - [समलैंगिक अपने लिए अलग लिंग की मांग करेंगे ?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95/): It has become clear from the decision given by the Supreme Court that no matter what two women, two men or two bisexual people do inside a closed room, both law and society will not have the right to peep into their room, but now law and society Will have to face some new problems. Will the gay now demand separate sex for themselves, Gay can demand mutual marriage, There may be a demand of relationship with animals. - [मुहम्मद अली जिन्ना को जेल गए बिना ही पाकिस्तान कैसे मिला!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be/): अंग्रेजों के राज में हजारों लोगों को केवल इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता था क्योंकि वे वंदेमातरम् गाते थे या वंदेमातरम् का नारा लगाते थे। जबकि मुहम्मद अली जिन्ना को जेल गए बिना ही पाकिस्तान मिल गया। तिरंगा झण्डा हाथ में लेकर चलने वाले को गिरफ्तार कर लिया जाता था। अखबार में लेख लिखने पर […] - [अलवर महाराजा जयसिंह ने लेडी वायसराय के कुत्ते को अपने डेरे में नहीं घुसने दिया !](https://bharatkaitihas.com/history-of-alwar-maharaja-jaisingh/): अलवर महाराजा जयसिंह की गिनती भारत के इतिहास में बीसवीं सदी के महान व्यक्तियों में होती है। महाराजा स्वतंत्र विचारों के धनी और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उनकी राष्ट्रभक्ति असंदिग्ध थी। इस कारण अंग्रेज उनकी तरफ से सदैव ही आशंकित रहते थे। अलवर महाराजा जयसिंह केवल 10 वर्ष की आयु में राजा बने थे। वे स्वयं […] - [क्या गांधीजी राष्ट्रपिता हैं](https://bharatkaitihas.com/ia-gandhiji-realy-a-father-of-nation/): वर्ष 2005 में केन्द्रीय सूचना का अधिकार अधिनियम के अस्तित्व में आने के बाद कुछ नागरिकों ने भारत सरकार से उन दस्तावेजों की मांग की जिनके आधार पर गांधीजी को राष्ट्रपिता घोषित किया गया या उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि दी गई! भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने इस प्रार्थना पत्र के जवाब में संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत सरकार ने गांधीजी को राष्ट्रपिता की उपाधि नहीं दी। - [मृत्यु के समय कष्ट होता है ?](https://bharatkaitihas.com/do-humans-suffer-at-the-time-of-death/): People often say that a person suffer during the time of death? but this is a painless procedure. In this video we have proved it by giving many examples and reasons of this painless happening . - [स्वामी विवेकानंद शिकागो उद्बोधन के बाद क्यों रोए!](https://bharatkaitihas.com/swami-vivekananda-in-shikago/): स्वामी विवेकानंद का शिकागो उद्बोधन एक अंतर्राष्ट्रीय महत्व की घटना है। कहा जाता है कि शिकागो सम्मेलन में उद्बोधन देने के बाद स्वामीजी रात्रि में रोए। इस आलेख में हम इस बात पर विचार करेंगे कि क्या स्वामीजी उस रात्रि में सचमुच रोए थे! सदियों की गुलामी भोगने के बाद हिन्दू जाति में पहले मनुष्य […] - [अकबर की मूर्खता (161)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%96-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be/): अकबर की मूर्खता यह अकबर की मूर्खता का एक और उदाहरण था, जो लोग संस्कृत और फारसी दोनों भाषाओं को अच्छी तरह नहीं जानते थे, वे किसी संस्कृत ग्रंथ का फारसी में अनुवाद कैसे कर सकते थे? - [बदख्शां के मिर्जा को धन-दौलत एवं हाथी-घोड़े (162)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%be/): एक बार मिर्जा कामरान ने हरम बेगम पर मोहित होकर उसे अपने पास आने का निमंत्रण भेजा था ताकि कामरान हरम बेगम को भोग सके। तब हरम बेगम ने अपने जेठ हुमायूँ, पति सुलेमान तथा पुत्र मिर्जा इब्राहीम के हाथों कामरान को दण्डित करवाया था। - [अकबर की दोस्त थी खानिम बेगम! (163)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%be/): खानिम बेगम अपने पहले पति से हुए बेटे के साथ, अपने दूसरे पति मिर्जा सुलेमान के छोटे से बदख्शां राज्य पर कब्जा किए बैठी थी और उसका दूसरा पति मिर्जा सुलेमान अकबर से सहायता लेने के लिए फतहपुर सीकरी में शरण लिए हुए था। - [अकबर के शत्रु (164)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%81/): उत्तर-पश्चिमी सीमा से आने वाले लोगों एवं अकबर के पूर्वजों का खून भले ही एक था किंतु अब वे अकबर के शत्रु थे तथा अकबर के लिए आक्रांता थे। - [दक्षिण के शिया राज्य (165)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हसन गंगू के वंशज एक से बढ़कर एक क्रूर और अत्याचारी सुल्तान हुए तथा उन्होंने अपनी पूरी शक्ति अपने पड़ौसी विजयनगर साम्राज्य को कुचलने में लगाई। - [हिंदुआनी व्है रहूंगी मैं! (166)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82/): एक दिन चांद बीबी अपनी पालकी में सवार होकर अहमदनगर के बाजार से गुजर रही थी, तब अचानक ही कहारों ने पालकी बीच मार्ग में खड़ी कर दी। - [अकबर का बेटा मुराद बड़ा नामुराद निकला (167)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6/): इधर तो अकबर का बेटा मुराद और खानखाना अदमदनगर को अभय प्रदान कर रहे थे और उधर शहबाज खाँ कंबो शहजादे से अनुमति लिये बिना, चुपके से अहमदनगर के भीतर प्रविष्ट हो गया। - [मुराद की पगड़ी (168)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%97%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80/): जब डेरा खाली हो गया तो मुराद ने अपनी पगड़ी उतार कर खानखाना के पैरों में रख दी और गिड़गिड़ाकर बोला, मेरी लाज आपके हाथ में है खानखाना। - [चांद सुल्ताना बेपर्दा होकर खानखाना के सामने आ खड़ी हुई! (169)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/): खानखाना अपने पाँच सवारों को लेकर अहमदनगर के दुर्ग में दाखिल हुआ। ऊँचे घोड़े पर सवार, लम्बे कद और पतली-दुबली देह का खानखाना दूर से ही दिखाई देता था। चांद सुल्ताना के आदमी उसे सुलताना के महलों तक ले गये। चाँद ने खानखाना के स्वागत की भारी तैयारियां कर रखी थीं। - [चांद बीबी (170)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%80/): खानखाना की सीधी-सपाट बात सुनकर चांद बीबी की आँखों में आँसू आ गये। किसी तरह अपने आप को संभाल कर बोली- 'आप ज्ञानी हैं, इसी से इतने उदासीन हैं और बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं किंतु मैं अज्ञानी हूँ, मैं आपकी तरह संतोषी नहीं हो सकती।' - [अब्दुर्रहीम खानखाना से छल 171](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9b/): शहजादे को फतहपुर सीकरी छोड़कर आए हुए तीन साल बीत चुके थे और वह अब तक अपने पिता अकबर को अपनी विजय का एक भी समाचार नहीं भेज पाया था। इससे मुराद की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। - [रजाअली खाँ रूमी (172)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a5%80/): रजाअली खाँ रूमी तथा उसके सिपाहियों को ऐन वक्त पर अपना स्थान छोड़ दौड़कर जाते हुए देखकर मुराद के आदमी गुस्से से चिल्लाने लगे कि धोखेबाज रजाअली खाँ शत्रु से मिल गया है। - [खुरासान से आया बादशाह तो मर जाएगा किंतु हिन्दू धर्म और धरती यहीं रहेंगे! (173)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9/): एक तरफ बादशाह है तो दूसरी तरफ चाँद बीबी। यदि वह किसी एक के साथ हो जाता है तो दूसरे के साथ अन्याय होना निश्चित ही है किंतु भाग्य की विडम्बना को स्वीकार कर खानखाना दक्षिण के लिये रवाना हो गया। - [चांद बीबी की हत्या! (174)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%ac%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): जब दक्खिनी किले में प्रवेश कर गये तो हब्शी भी उनसे जा मिले। इन लोगों ने मिलकर उसी दिन चांद बीबी की हत्या कर दी। इस प्रकार चांद सुल्ताना राजनीति की गंदी दलदल में फंसकर दर्दनाक मृत्यु को प्राप्त हुई। - [दीने-इलाही (175)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80/): दीने-इलाही की सदस्यता अत्यन्त सीमित थी। अकबर जानता था कि उसे प्रसन्न करने अथवा अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिये बहुत बड़ी संख्या में लोग इसका सदस्य बनने के लिए तैयार होंगे। अकबर नहीं चाहता था कि लोग भय अथवा प्रलोभन वश इसके सदस्य बनें। - [ज्वालादेवी मंदिर में अकबर ने छत्र अर्पित किया! (176)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac/): मान्यता है कि जब अकबर ने यह छत्र देवी को अर्पित करना चाहा तो वह अकबर के हाथों से गिरकर टूट गया तथा सोने की बजाय किसी और धातु का बन गया। यह धातु न तो पीतल थी, न सोना थी, न चांदी थी, न ताम्बा थी और न लोहा! - [अकबर के बेटे शराब पी-पी कर मरने लगे ! (177)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%87/): बादशाह का पत्र पाकर खानखाना ने अकबर के बेटे दानियाल पर पहरा बैठा दिया और शहजादे के डेरे में शराब ले जाने की मनाही कर दी। इस पर भी दानियाल की चापलूसी में लगे हुए नमक हराम लोग बंदूक की नालियों में तेज शराब भरकर ले जाते और दानियाल को पिलाते। - [अकबर को जहर दे दिया शहजादे सलीम ने! (178)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%b0/): सलीम की इस दुष्टता से अकबर के जीवन में चारों ओर निराशा छा गयी। उसने हिन्दू नरेशों को अपनी सल्तनत का रक्षक नियुक्त कर कजलबाश, चगताई, ईरानी और तूरानी अमीरों से तो अपने राज्य की रक्षा कर ली थी किंतु घर में ही जन्मा कुपुत्र, अकबर के सीने में जहर बुझी कटारी की तरह गढ़ गया। - [अबुल फजल का कत्ल कर दिया शहजादे सलीम ने (179)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ab%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b2/): जब सलीम को ज्ञात हुआ कि अबुल फजल आ रहा है तो उसने ओरछा के राजा वीरसिंह बुंदेला को आदेश दिया कि वह अबुल फजल का कत्ल कर दे। अबुल फजल अकबर का मित्र था किंतु शहजादे को अकबर का एक भी मित्र पसंद नहीं था। - [सलीम की नीचता ! 180](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a4%be/): सलीम को अकबर से घृणा थी इसलिए वह नीचता करने लगा। सलीम की नीचता इस हद तक बढ़ गई कि अकबर ने उसे थप्पड़ मार कर गुसलखाने में बंद कर दिया! - [मृत्यु के बाद संभावनाएं !](https://bharatkaitihas.com/possibilities-after-death/): Death is not the end of life, it is just a beginning of a new life. - [मृत्यु क्या है?](https://bharatkaitihas.com/what-is-death/): इस प्रश्न पर संसार के प्रत्येक देश में, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में तथा काल प्रवाह के प्रत्येक युग में निरंतर चिंतन किया जाता है कि मृत्यु क्या है? ऋषि, मुनि, दार्शनिक, चिंतक एवं उपदेशकों से लगाकर वैज्ञानिकों तक ने इस विषय पर कार्य किया है। बहुत से लोगों ने मृत्यु की परिभाषाऐं दी हैं, […] - [देह कैसे मरती है?](https://bharatkaitihas.com/chronology-of-death/): सामान्यतः चिकित्सकों का अनुभव है कि यदि इन तीनों घटनाओं में से कोई एक घटना घटित हो गयी है तो दूसरी तथा तीसरी घटना कुछ ही समय में स्वतः ही घट जायेगी। - [मृत्यु शाश्वत है!](https://bharatkaitihas.com/death-is-eternal/): क्या मृत्यु शाश्वत है? क्या मृत्यु से बचा जा सकता है? क्या सृष्टि में कुछ ऐसे जीव हैं जो अमर हैं? क्या वे सदैव अमर रहेंगे? या वे भी एक दिन किसी न किसी प्रकार की मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे? आत्मा देह क्यों त्यागती है? इस प्रश्न के उत्तर में एक शाश्वत नियम बताया […] - [क्या पुनर्जीवन संभव है?](https://bharatkaitihas.com/concept-of-revival-of-humen-beings/): मृत्यु की इस परिभाषा से यह स्वतः स्पष्ट है कि जीवन, जीवात्मा तथा देह के सम्बन्ध से उत्पन्न होता है और इनके विलग होने पर मृत्यु जैसी घटना घटित होती है। - [मृत्यु के बाद जीवन!](https://bharatkaitihas.com/life-after-death/): क्या मृत्यु के बाद जीवन होता है? यदि होता है तो कैसा होता है? क्या मृत्यु के बाद के जीवन का मृत्यु के पहले के जीवन से कोई सम्बन्ध शेष रहता है? क्या जीवन एक ही तथा मृत्यु एवं जन्म उसमें दो पड़ावों की तरह हैं? विज्ञान न तो इन प्रश्नों के उत्तर देता है […] - [शवों की सुरक्षा](https://bharatkaitihas.com/precervation-of-humen-dead-body/): शवों की सुरक्षा दुनिया भर की संस्कृतियों में अनादि काल से की जाती है। हिमालय पर्वत की रहस्यमय गुफाओं से लेकर मिस्र के पिरामिडों तक में हजारों साल पुराने शव सुरक्षित हैं। भारतीय सभ्यता के अतिरिक्त भी, संसार में वर्तमान तथा अतीत में हो चुकी अनेकानेक सभ्यताएं मृत्यु के बाद के जीवन की कई तरह […] - [आत्मा का आकार](https://bharatkaitihas.com/size-of-soul-in-humen-body/): क्या आत्मा का कोई आकार होता है? क्या आत्मा का आकर मानव देह की लम्बाई-चौड़ाई और मोटाई आदि के अनुसार निर्धारित होता है? या फिर ईश्वर की तरह आत्मा भी पूर्ण रूप से निराकार है? भारत के उत्तरांचल की पहाड़ियों से एक विशालाकाय कंकाल प्राप्त हुआ है। यह इतना विशाल है कि आज का आदमी […] - [क्लोन में जीवात्मा कहां से आता है ?](https://bharatkaitihas.com/entry-of-soul-in-humen-clone/): जीवों के क्लोन में जीवात्मा कहां से आता है ? जब किसी जीव का क्लोन तैयार किया जाता है तो क्या उसमें निवास करने वाली जीवात्मा का भी क्लोन तैयार हो जाता है जो क्लोन से तैयार किए गए प्राणी में रहता है? या फिर क्लोन से तैयार किए गए शरीर के लिए ब्रह्माण्ड से […] - [सेवानिवृत्ति की आयु पचपन साल होनी चाहिये!](https://bharatkaitihas.com/retirement-age-in-government-services/): भारत में सरकारी एवं अर्द्ध-सरकारी सेवाओं में सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल से लेकर 65 साल के बीच में है। देश में बेरोजगारी अपने चरम पर है। इसलिए सेवानिवृत्ति की आयु घटाकर 55 साल की जानी चाहिए। भारत के राजनेता चौबीसों घण्टे केवल अपने वोट बैंक की परवाह करते हैं। उनकी सारी नीतियां अपने वोट […] - [दलितों का धर्म है, संभालिए इसे !](https://bharatkaitihas.com/dalits-belong-to-sanatan-dharma/): हिन्दू धर्म जिस तरह सवर्णों का धर्म है, उसी तरह दलितों का धर्म है, बहुत से राजनीतिक भेड़िए तथा धर्मान्तरण करने वाले भेड़िए हिन्दू धर्म को दलितों पर अत्याचार करने वाला धर्म बताकर उन्हें किसी अन्य मजहब, सम्प्रदाय या मत में ले जाने की कुचेष्टा करते हैं! हमें इन भेड़ियों के कुचक्रों को समझना होगा। […] - [उर्दू बीबी की मौत अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-of-book-urdu-bibi-ki-maut/): उर्दू बीबी की मौत अनुक्रमणिका पृष्ठ पर इस पुस्तक के अध्यायों के लिंक दिए गए हैं। पाठक नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके वांछित अध्याय तक पहुंच सकते हैं। 1. पुस्तक की भूमिका 2. अनुक्रमणिका – सुन उर्दू बदमास    3. भारत में मुसलमानी शासन 4. उर्दू का जन्म 5. तारणहार अंग्रेज 6. अट्ठारह सौ […] - [उर्दू बीबी की मौत - भूमिका](https://bharatkaitihas.com/foreword-note-of-urdu-bibi-ki-maut/): उर्दू बीबी की मौत – भूमिका पृष्ठ पर पुस्तक की विषय-वस्तु को स्पष्ट किया गया है। यह पुस्तक हिन्दू-उर्दू विवाद के ऐतिहासिक संघर्ष का रोचक विवरण उपलब्ध करवाती है। काल के प्रत्येक खण्ड में तथा संसार के प्रत्येक भूभाग में दो प्रकार के झगड़े अस्तित्व में रहते हैं। पहली प्रकार के झगड़े भौतिक सुख देने […] - [भारत में मुसलमानी शासन](https://bharatkaitihas.com/muslim-rule-in-india-in-medival-priod/): भारत में मुसलमानी शासन ई.1192 में आरम्भ हुआ और लगभग ईस्वी 1757 तक चला। इतने लम्बे शासन काल में भारत की मूल संस्कृति अंधकार में कहीं खो सी गई किंतु फिर भी हिन्दुओं ने इस संस्कृति का केन्द्रीय भाग किसी ने किसी प्रकार सुर्रिक्षत रख लिया। डिसमिस दावा तोर है सुन उर्दू बदमास (1) ई.1192 […] - [उर्दू का जन्म](https://bharatkaitihas.com/birth-of-urdu-in-india/): जब हिन्दू और मुसलमान सैनिक सैंकड़ों साल तक युद्ध शिविरों में साथ.साथ रहे तो उनकी भाषाएं आपस में घुलने.मिलने लगीं। इस सम्मिश्रिण से उर्दू का जन्म हुआ। जब दिल्ली स्थित तुर्कों की सल्तनत का भारत के अन्य क्षेत्रों में विकास हो रहा था, तब ई.1000 के लगभग दिल्ली एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रयुक्त […] - [तारणहार अंग्रेज](https://bharatkaitihas.com/status-of-urdu-language-in-british-government-of-india/): हिन्दुओं के लिए अंग्रेज तारणहार बनकर आए तथा ईस्वी 1765 में उन्होंने मुगल बादशाह से दिल्ली का शासन छीनकर उसे पेंशन पर बैठा दिया। - [अट्ठारह सौ सत्तावन](https://bharatkaitihas.com/history-of-eighteen-fifty-seven-revolution/): अट्ठारह सौ सत्तावन का सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम निःसंदेह भारत माता की आत्मा की पुकार थी जिसने देश वासियों को झकझोर कर रख दिया। यदि इसे अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध चलने वाली लम्बी लड़ाई का प्रथम सफल सोपान कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। अट्ठारह सौ सत्तावन ई.1757 से हिन्दुओं के मन में अंग्रेजों के […] - [न्यायालयों में उर्दू](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82/): ब्रिटिश-भारत के सरकारी कार्यालयों तथा न्यायालयों में अरबी लिपि में अरबी-फारसी मिश्रित उर्दू भाषा में लिखा-पढ़त की जाती थी। उस काल में भारत में अंग्रेजी भाषा को जानने वाले कर्मचारी नहीं मिलते थे। - [देवनागरी लिपि युक्त हिन्दी के लिए मैमोरेण्डम](https://bharatkaitihas.com/memorandum-to-british-government-for-devnagri-script/): हिन्दू जाति देवनागरी लिपि युक्त हिन्दी भाषा को ही हिन्दी के वास्तविक रूप में देखती थी जबकि अंग्रेजों की चेष्टा थी कि वे सरकारी कामकाज तथा न्यायालयों में फारसी लिपि युक्त उर्दू को हिन्दी भाषा के रूप में थोपें। हिन्दी-उर्दू विवाद का मूल कारण यही था। हिन्दी आंदोलन के पुरोधाओं में से एक बालमुकुन्द ने […] - [रोवहु सब मिलि के आवहु भाई](https://bharatkaitihas.com/miserability-of-indians-in-british-rule/): भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र ने ‘भारत दुर्दशा’ शीर्षक से एक छोटा सा नाटक लिखकर हिन्दू जाति की दुर्दशा पर बड़ा शोक व्यक्त किया। भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र ने अंग्रेजी राज में भारतवासियों की दुर्दशा पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा- रोवहु सब मिलि के आवहु भाई। जिस समय से (ई.1858 से) भारत पर ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया […] - [उर्दू बीबी की मौत](https://bharatkaitihas.com/hindi-urdu-conflict-in-british-india/): भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र ने उर्दू का स्यापा नामक आलेख लिया जिसमें उन्होंने उर्दू बीबी की मौत का रोचक वर्णन करते हुए लिखा कि अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट और बनारस अखबार को देखने से ज्ञात हुआ कि बीबी उर्दू मारी गई और परम अहिंसानिष्ठ होकर भी राजा शिवप्रसाद ने यह हिंसा की। हाय हाय! बड़ा अंधेर हुआ […] - [हिन्दी-उर्दू की लड़ाई](https://bharatkaitihas.com/history-of-hindi-and-urdu-lanuages/): हिन्दी-उर्दू की लड़ाई भारत के भाषाई विवादों में सबसे मुखर विषय है। अंग्रेजी शासन काल में यह लड़ाई अंग्रेजों के लिए हिन्दुओं एवं मुसलमानों को एक-दूसरे के विरुद्ध भड़काए रखने का औजार बन गई थी। फारसी लिपि वाली उर्दू भाषा को मान्यता राजा शिवप्रसाद सितारा ए हिन्द, भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र तथा अनेकानेक हिन्दू भाषी व्यक्तियों […] - [सुन उर्दू बदमास](https://bharatkaitihas.com/qurrel-of-hindi-and-urdu/): डिगरी हिन्दी की करों मैं अपने इजलास, डिसमिस दावा तोर है सुन उर्दू बदमास । तुम हिन्दी गुन आगरी काम तुम्हारे स्वच्छ, तेरो गुन क्या जानहिं उर्दू और मलेच्छ। हिन्दी आन्दोलन के दौरान हिन्दी-उर्दू विवाद की कटुता अपने चरम पर पहुंच गई। उन दिनों सोहन प्रसाद नामक एक शिक्षक ने ‘हिन्दी उर्दू की लड़ाई’ शीर्षक […] - [न्यायालय में हिन्दी-उर्दू मुकदमा](https://bharatkaitihas.com/agitations-for-hindi-in-british-raj/): ब्रिटिश न्यायालय में हिन्दी-उर्दू मुकदमा हिन्दी-उर्दू मुकदमा दशकों तक चला किंतु उसका कभी कोई अंत नहीं आया। अंग्रेजी न्यायालय वैसे भी न्याय नहीं देते थे, मुकदमे को लम्बे से लम्बा खींचते थे। इस कारण समाज में बेचैनी बढ़ती थी और अपराधियों के हौंसले बुलंद होते थे। सोहन प्रसाद मुदर्रिस की पुस्तक का पहला विज्ञापन ‘भारत […] - [सोहन प्रसाद मुदर्रिस के समर्थन में आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/agitations-for-hindi-andolan/): सोहन प्रसाद मुदर्रिस का यह कथन निश्चय ही देश में हिन्दू-मुसलमान दंगों को भड़काने के लिए उकसाने वाली कार्यवाही माना जा सकता था किंतु अंग्रेज अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। सोहन प्रसाद मुदर्रिस पर किए गए अभियोग से जुड़ा हुआ सबसे रोचक और महत्त्वपूर्ण भाग यह भी था कि सोहन प्रसाद की […] - [सोहनप्रसाद मुदर्रिस का मुकदमा](https://bharatkaitihas.com/struggle-for-hindi-in-british-rule/): जब अंग्रेजी न्यायालय में सोहनप्रसाद मुदर्रिस का मुकदमा चला तो इस मुकदमे का खर्च जुटाने के लिए भारत की जनता से चंदा मांगा गया। भारत के समस्त राजाओं, सेठों एवं जनसामान्य से अपील की गई कि वे हिन्दी भाषा की रक्षा के लिए आगे आएं तथा मुक्त हृदय से चंदा उपलब्ध करवाएं ताकि इस मुकदमे […] - [सोहनप्रसाद मुदर्रिस का समर्थन](https://bharatkaitihas.com/struggle-for-hindi/): जिस समय न्यायालय में सोहनप्रसाद मुदर्रिस का मुकदमा चल रहा था तो बहुत से बुद्धिजीवी, विद्वान एवं समाचार पत्र सोहनप्रसाद मुदर्रिस का समर्थन करने लगे और बहुत से लोग सोहन प्रसाद के विरोध में उतर आए। ऐसा करने वालों में सत्यवक्ता और उचित वक्ता नामक समाचार पत्र प्रमुख थे। ‘भारत जीवन’ साप्ताहिक समाचार पत्र सोहन […] - [सोहन प्रसाद मुदर्रिस के मुकदमे का पटाक्षेप](https://bharatkaitihas.com/end-of-judicial-case-of-hindi-urdu-conflict/): पूरा देश अंग्रेजी न्यायालय में चल रहे सोहन प्रसाद के मुकदमे को दम साध कर देख रहा था किंतु जब मुसलमानों ने मुकमा वापस ले लिया तो सोहन प्रसाद मुदर्रिस के मुकदमे का पटाक्षेप हो गया। गोरखपुर मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सोहन प्रसाद पर किया गया मुकदमा अधिक लम्बा नहीं खिंचा तथा नवम्बर में मुकदमे […] - [हिन्दी एवं उर्दू को समान दर्जा](https://bharatkaitihas.com/status-of-urdu-and-hindi-in-british-rule/): ब्रिटिश सरकार ने हिन्दी एवं उर्दू को समान दर्जा देकर इस समस्या को सुलझाना चाहा किंतु समस्या और भी अधिक उलझ गई क्योंकि अंग्रेजों ने जिस हिन्दी को सरकारी न्यायालयों एवं कार्यालयों में मान्यता दी, वह फारसी लिपि में लिखी जाती थी। जब उत्तर भारत में हिन्दी-उर्दू विवाद को लेकर साम्प्रदायिक तनाव चरम पर पहुंचने […] - [स्वतंत्र भारत में हिन्दी एवं उर्दू](https://bharatkaitihas.com/hindi-and-urdu-in-india-after-indepandance/): अंग्रेजों ने हिन्दी एवं उर्दू विवाद को अपने पूरे शासन काल के में बनाए रखा, उसी प्रकार स्वतंत्र भारत में हिन्दी एवं उर्दू विवाद पूरे जोर-शोर से बना रहा। भारत सरकार ने इसे हल करने का प्रयास किया तथा किसी सीमा तक इसमें सफलता भी प्राप्त की। भारत विभाजन ई.1947 में भारत को ब्रिटिश शासन […] - [मदर इण्डिया और दुखी भारत](https://bharatkaitihas.com/mother-india-of-miss-kaithrin-meyo-and-dukhi-bharat-of-lala-lajpat-rai/): मदर इण्डिया और दुखी भारत दो पुस्तकें हैं। मदर इण्डिया की लेखिका कैथरीन मेयो अमरीका की रहने वाली थीं। उन्होंने भारतवासियों को नीचा दिखाने के लिए यह पुस्तक लिखी थी। इस पुस्तक का जवाब देने के लिए लाला लाजपतराय ने दुखी भारत नामक पुस्तक लिखी। ई.1927 में मिस कैथरीन मेयो नामक एक अमरीकी महिला ने […] - [भगवा रंग के क्या अर्थ हैं?](https://bharatkaitihas.com/importance-of-saffron-colour-in-hindu-religion/): भगवा रंग किसी भी दृष्टि से उग्र प्रवृत्ति का नहीं, अपितु शांत प्रवृत्ति का द्योतक है। यह आक्रामकता का नहीं, अभयदान का प्रतीक है। - [उपन्यासों में सौन्दर्य दृष्टि](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%aa/): ‘डॉ. मोहनलाल गुप्ताजी के उपन्यासों में सौन्दर्य दृष्टि’ शीर्षक से लिखे गए शोधग्रंथ में गुप्ताजी के तीन उपन्यासों- चित्रकूट का चातक, संघर्ष एवं पासवान गुलाबराय की समालोचना की गई है तथा इन उपन्यासों में लेखक की सौन्दर्य दृष्टि की विवेचना की गई है। साहित्य-सृजन का मूल उद्देश्य सम्पूर्ण सृष्टि को सुंदर बनाना है। इसलिए हर […] - [भारतीयों का डीएनए एक है क्या?](https://bharatkaitihas.com/is-indian-people-have-one-dna/): विगत लगभग एक दशक से भारत की राजनीति में भारतीयों का डीएनए चर्चा के मुख्य विषयों में बना हुआ है। आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत समस्त भारतीयों का डीएनए एक बताते हैं, किंतु क्या इस बात में किंचित् भी सच्चाई है? पिछले कुछ समय से देश के समक्ष यह अवधारणा प्रस्तुत की जा रही […] - [बेबी को बुरका पसंद है!](https://bharatkaitihas.com/demographic-cahges-in-india/): यह लिखते हुए आत्मा हाहाकर करती है कि अब भारतीय बेबी को बुरका पसंद है, बाबुल तो उसे दुश्मन जैसा दिखाई देता है। भारतीय युवतियों के मन में यह परिवर्तन आजादी के बाद के वर्षों में भारत सरकार, भारत के संविधान, भारतीय सिनेमा तथा भारतीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रमों के माध्यम से किया […] - [प्रांतों की स्वाभाविक संस्कृति को कुचल रही हैं राजनीतिक पार्टियाँ!](https://bharatkaitihas.com/current-politics-in-india/): सत्ता के लालच में प्रांतों की स्वाभाविक संस्कृति को कुचल रही हैं राजनीतिक पार्टियाँ! लालची नेताओं के लिए वोट चरने का मैदान बन गए हैं प्रांत! भारत हजारों साल पुराना देश है जिसका स्वरूप समय-समय पर बदलता रहा है। इसके वर्तमान स्वरूप का निर्माण 15 अगस्त 1947 को 11 ब्रिटिश शासित प्रोविंसों, 6 ब्रिटिश शासित […] - [कांग्रेस ! तुमसे ना हो पाएगा !](https://bharatkaitihas.com/congress-will-never-come-back/): कांग्रेस की हवा दिन पर दिन निकलती जा रही है और उसकी दशा पिचके हुए गुब्बारे जैसी रह गई है। इस कारण कांग्रेस ! तुमसे ना हो पाएगा ! कुछ भी ना हो पाएगा ! 6 नवम्बर 2022 को देश के 6 राज्यों में 7 रिक्त विधानसभा सीटों के उपचुनावों के परिणाम आए। 7 सीटों […] - [भारतीय न्यायिक व्यवस्था के घावों को उपचार की आवश्यकता है!](https://bharatkaitihas.com/need-of-reformations-in-indian-judiciary/): भारतीय न्यायिक व्यवस्था घायल है और उसके घावों को उपचारों की आवश्यकता है। करोड़पतियों के लिए भारतीय न्यायिक व्यवस्था मखमली गलीचा बिछाकर आधी रात को भी तैयार रहती है तथा आम आदमी की पीढ़ियां न्यायिक व्यवस्था के दरवाजे के बाहर ही दम तोड़ देती हैं। सूरज से धरती निकली है और धरती से चंद्रमा। यही […] - [मुलायमसिंह का अतीत मृत्यु के साबुन से नहीं धुल सकता!](https://bharatkaitihas.com/past-history-and-death-of-mulayam-singh/): मुलायमसिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में हिन्दुओं के विरुद्ध जो घृणित कार्य किए हैं उन्हें कभी क्षमा नहीं किया जा सकता। मुलायमसिंह का अतीत मृत्यु के साबुन से नहीं धुल सकता! मुलायम सिंह यादव नहीं रहे…… इसमें दुख की कोई बात नहीं है। सभी लोग मरते हैं….. सबको यहाँ मरना है…… कोई भी यहाँ जिन्दा […] - [हे कलियुगी गौतम, ये तुमने क्या किया!](https://bharatkaitihas.com/message-of-gautam-buddha/): हे कलियुगी गौतम, तुम मुझे नहीं पहचानते किंतु मैं तुम्हें पहचानता हूँ। तुमने मेरे बारे में सुन अवश्य रखा है किंतु तुमने जो सुना है, उसे समझा नहीं है। तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हारा नाम मेरे नाम पर गौतम तो रख दिया किंतु तुम गौतम बन नहीं सके। आज मैं तुम्हें बताता हूँ कि गौतम होना […] - [महाराजा अग्रसेन प्रजापालक राजाओं के आदर्श !](https://bharatkaitihas.com/life-and-aims-of-maharaja-agrasen/): महाराजा अग्रसेन का इतिहास पाँच हजार साल से भी अधिक पुराना है। वे भगवान श्रीकृष्ण के समकालीन थे। उनका जन्म द्वापर के अंतिम चरण में हुआ था। इस काल में भारत भूमि पर दुष्ट राजाओं का बोलबाला था और उनके दमन के लिए बड़ी तैयारियां चल रही थीं। यदुवंशी श्रीकृष्ण भारत भूमि से कंस, जरासंध, […] - [भारतीय ज्योतिष एवं कालगणना का सम्पूर्ण विश्व ऋणी है!](https://bharatkaitihas.com/the-whole-world-is-indebted-to-indian-astrology/): भारतीय ज्योतिष एवं कालगणना का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। प्रसिद्ध फ्रांसीसी ज्योतिषी विओट ने लिखा है कि भारतीयों ने नक्षत्र ज्ञान चीनियों से ग्रहण किया। एक अन्य यूरोपीय विद्वान ह्विटनी भी इस मत का समर्थक है। कुछ अन्य विद्वानों ने लिखा है कि भारतीयों ने नक्षत्र ज्ञान बेबिलोन के लोगों या अरब के लोगों से […] - [हनुमान बाहुक में काल की करालता](https://bharatkaitihas.com/power-of-time-in-hindi-literature/): हनुमान बाहुक एक लघु काव्यग्रंथ है जिसमें केवल 44 पद हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे गोस्वामी तुलसीदासजी की अत्यंत प्रौढ़ रचना माना है। - [भारत-चीन सम्बन्ध](https://bharatkaitihas.com/indo-china-relationship/): विगत हजारों सालों में भारत-चीन सम्बन्ध बनते और बिगड़ते रहे हैं। दोनों देशों के शासक अपने-अपने राज्यों का विस्तार करने के लिए एक दूसरे के विरुद्ध सेनाएं भी भेजते रहे हैं तथा एक-दूसरे की संस्कृति को जानने का प्रयास भी करते रहे हैं। 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट ने चीन के […] - [मरता हुआ धर्म - तेरी गठरी में लागा चोर!](https://bharatkaitihas.com/a-dying-religion/): क्या हिन्दू धर्म मरता हुआ धर्म है ? यदि यह सवाल पूछा जाए तो करोड़ों हिन्दुओं को ठेस पहुंचेगी तथा वे मरने-मारने पर उतारू हो जाएंगे। कुछ देर के लिए हिन्दुओं की भावनाएं एक तरफ रखकर यदि विगत चौदह सौ सालों के इतिहास को वर्तमान सच्चाई से जोड़कर देखा जाए तो इस प्रश्न के उत्तर […] - [सीजर की पत्नी को संदेहों से परे होना चाहिए!](https://bharatkaitihas.com/comments-of-supreme-court-upon-nupur-sharma/): एक पुरानी रोमन कहावत है कि सीजर की पत्नी को संदेहों से परे होना चाहिए। (Caesar’s wife must be above suspicion) इस कहावत का भारतीय परम्परागत शब्दावली में अनुवाद इस प्रकार किया जाता है कि सीजर की पत्नी को पवित्र होना ही नहीं चाहिए, पवित्र दिखना भी चाहिए! 1 जुलाई 2022 को भारत के सर्वोच्च […] - [एकनाथ शिंदे](https://bharatkaitihas.com/eknath-shinde-will-be-the-chief-minister-of-maharashtra/): महाराष्ट्र की राजनीति कोई बड़ी करवट लेने वाली है। कोई ऐसे ही एकनाथ शिंदे की सरकार नहीं बना देता! भारतीय राजनीति में द्वापर के योगिराज कृष्ण और कलियुग के आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य के नाम आदर से लिए जाते हैं। इन दोनों के काल में हजारों साल का अंतर है, इसके उपरांत भी दोनों की राजनीति […] - [हिन्दुत्व में शांतिपाठ का महत्व!](https://bharatkaitihas.com/imortance-of-peace-in-hinduism/): हिन्दुत्व में शांतिपाठ का महत्व किसी से छिपा हुआ नहीं है। प्रत्येक हिन्दू दैनिक पूजा-पाठ के अंत में शांतिपाठ करता है। शांतिपाठ ही प्रत्येक यज्ञ अथवा पूजा की पूर्णाहुति है। यह संसार हलचलों से भरा हुआ है। हर ओर संघर्ष है, भागमभाग है, शोर है और प्रतिस्पर्द्धा है। यह सारा संघर्ष, भागमभाग, शोर और प्रतिस्पर्द्धा […] - [करोड़ों का रेडियो!](https://bharatkaitihas.com/history-of-a-history-maker-radio/): करोड़ों का रेडियो – एक बादशाह अपनी रियासत से रुखसत हो गया और किसी को कानोंकान खबर न हुई! जब मैंने इस धरती पर आखें खोलीं और घर की चीजों को पहचानना आरम्भ किया तो मैंने पाया कि हमारे घर में कुछ वस्तुएं बहुत ही आकर्षक थीं और इतनी विशिष्ट थीं कि आसपास के घरों […] - [कोट बेच कर भी पुस्तकें खरीदिए](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9a-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80/): कैम्पिस नामक एक चिंतक का कहना था कि अपना कोट बेच कर भी पुस्तकें खरीदिए ! कोट के अभाव में शरीर को ठण्ड के कारण कष्ट होगा किंतु पुस्तकों के अभाव में आत्मा भूखी मर जाएगी ! मैं बीसवीं सदी के उस दौर में पैदा हुआ जिसमें पुस्तक पढ़ने वाले व्यक्ति को अत्यंत आदर की […] - [तेतीस करोड़ देवता कौनसे हैं?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a5%9c-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): प्रत्येक भाषा में कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। ऐसे शब्दों को अनेकार्थक शब्द कहा जाता है। यदि अनेकार्थक शब्दों को समुचित संदर्भ में ग्रहण नहीं किया जाए तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है। तेतीस करोड़ देवता होने का मिथक भी ऐसा ही अनर्थ है। बृहदारण्यकोपनिषद में आए […] - [अनारकली के लिए लड़े अकबर और सलीम (181)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%80/): नारकली की हत्या से उन्मादी होकर ही जहांगीर ने अपने पिता अकबर को जहर देने एवं उसके विरुद्ध हथियार उठाने जैसे क्रूर निर्णय लिए होंगे न कि अकबर का राज्य पाने के लालच में। - [अकबर की मृत्यु (182)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81/): अकबर की मृत्यु के समय उसके तीन रत्न ही जीवित बचे थे जिनमें मुल्ला दो प्याजा, खानखाना अब्दुर्रहीम तथा राजा मानसिंह के नाम आते हैं। अतः अकबर की मृत्यु पर रोने के लिए उसके मित्रों में से केवल तीन ही जीवित बचे थे। - [हिन्दू राजाओं पर नियंत्रण (183)](https://bharatkaitihas.com/hindu-kings-had-to-take-leave-from-akbar/): अकबर ने यह भी अनुभव कर लिया था कि मध्यएशिया से आए हुए लड़ाके किसी भी स्तर पर न तो नैतिकता का पालन करते हैं और न बादशाह के प्रति स्वामिभक्त हैं। - [अकबर कालीन वेश्याएँ (184)](https://bharatkaitihas.com/prostitutes-were-noticed-by-akbar/): मुताह की जाने वाली औरतें भी अकबर कालीन वेश्याएँ ही थीं अथवा वेश्यावृत्ति का बदला हुआ रूप थीं। - [तुलसीदासजी की लोकप्रियता से पीछे रह गया अकबर! (185)](https://bharatkaitihas.com/tulsidas-was-more-famous-then-akbar/): तुलसीदासजी की तुलना में अकबर का व्यक्तित्व बहुत छोटा सिद्ध होता है। अकबर औरतों और सल्तनत का लालची था न कि जनता का निश्छल सेवक या कि दिव्य गुणों से सम्पन्न अद्भुत संत! अकबर केवल बादशाह था जबकि तुलसीदासजी न केवल अपने युग के लोकनायक थे अपितु आज भी उन्होंने अपना वह स्थान बनाए रखा है। - [कैसे बना था पाकिस्तान - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-kaise-bana-tha-pakistan/): इस अध्याय में पाकिस्तान के निर्माण पर लिखी गई सुप्रसिद्ध पुस्तक कैसे बना था पाकिस्तान की अनुक्रमणिका लिखी गई है। पाकिस्तान निर्माण के समय मुस्लिम लीग एवं उसके नेताओं की गतिविधियों के बारे में जानना तो रोचक है ही, साथ ही ब्रिटिश सत्ता के अधिकारियों के षड़यंत्र एवं जोधपुर, अलवर तथा बीकानेर आदि हिन्दू रियासतों […] - [कैसे बना था पाकिस्तान-प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/preface-kaise-bana-tha-pakistan/): इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य इतिहास के उन पन्नों को टटोल कर देखना है ताकि हम भविष्य में उन्हीं गलतियों को फिर से न दोहराएं जिनके कारण हम भारत-पाकिस्तान के विभाजन के खतरनाक निर्णय पर पहुंचे थे। - [भारत स्वयं महाद्वीप है](https://bharatkaitihas.com/india-is-a-continent/): हमें पाकिस्तान बनने के इतिहास से पहले साम्प्रदायिकता की उस आग के इतिहास को समझना होगा, जिसने पाकिस्तान का निर्माण किया। - [इस्लाम का वैश्विक विस्तार](https://bharatkaitihas.com/history-of-extension-of-islam-in-world/): इस्लाम का वैश्विक विस्तार बहुत तेज गति से हुआ। संसार में कोई भी मजहब इतनी तेज गति से नहीं फैला! आज भी इसकी गति मंद नहीं हुई है। इस्लाम को अपने उद्भव के समय से ही सैनिक तथा राजनीतिक स्वरूप प्राप्त हो गया था जिसके कारण इस्लाम का वैश्विक विस्तार तीव्र गति से कर पाना […] - [इस्लामिक विश्वव्यापी प्रसार के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-extension-of-islam-in-world/): जहाँ-जहाँ इस्लाम के उपासक गए, उन्होंने विरोधी सम्प्रदाय के सामने तीन रास्ते रखे- या तो कुरान हाथ में लो और इस्लाम कबूल करो या जजिया दो और अधीनता स्वीकार करो। यदि दोनों में से कोई बात पसन्द न हो तो तुम्हारे गले पर गिरने के लिए हमारी तलवार प्रस्तुत है। - [नशेड़ी अंग्रेज मजिस्ट्रेट से निर्दोष सुनार के पक्ष में फैसला लिखवाया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-got-verdict-in-favor-of-innocent-goldsmith-from-drunk-british-magistrate/): सुनार पर आरोप लगा कि वह व्यभिचार की नीयत से एक औरत के घर में घुसा था। झूठे गवाहों के बल पर सुनार को सजा होना निश्चित था। सुनार ने वल्लभभाई को अपना वकील बनाया। वादी पक्ष के झूठे गवाह इतने मजबूत थे कि उनकी बात काट पाना संभव नहीं था। - [सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट को वल्लभभाई के आगे जिद्द छोड़नी पड़ी](https://bharatkaitihas.com/crazy-english-magistrate-had-to-give-up-his-stubbornness-in-front-of-vallabhbhai/): यद्यपि अंग्रेजी न्याय व्यवस्था साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर चलती थी किंतु बहुत से सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट अपनी सनक के कारण साधारण मुकदमों में भी तरह-तरह के निर्णय दिया करते थे। कुछ सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट मुकदमों की सुनवाई के लिए भी अजीब-अजीब से तरीके अपनाया करते थे। वे वकीलों, गवाहों, अभियुक्तों एवं वादियों को […] - [विट्ठलभाई पटेल को बैरिस्ट्री पढ़ने लंदन भेज दिया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-sent-vitthalbhai-to-london-in-his-place-to-study-baristry/): यह संसार में अपनी तरह का एक ही प्रकरण है जिसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल को अपनी जगह बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने लंदन भेज दिया। वल्लभभाई बोरसद के न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे थे किंतु उनकी इच्छा थी कि वे इंग्लैण्ड से बैरिस्ट्री पढ़ कर आयें। उन्होंने इंग्लैण्ड जाने […] - [वल्लभभाई की उदारता](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-used-to-give-his-thing-to-others/): व्यक्तित्व की विराटता और स्वभाव की उदारता यद्यपि एक दूसरे के पूरक हैं किंतु सरदार पटेल में ये दोनों गुण चरम पर मौजूद थे जिनका लाभ न केवल उन्हें या उनके परिवार को अपितु सम्पूर्ण मानवता को भी मिला। - [सरदार पटेल में कर्त्तव्यनिष्ठा - कोर्ट में बहस करते रहे वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-continued-to-argue-in-court-even-after-receiving-telegram-of-his-wifes-death/): 11 जनवरी 1909 को अचानक झबेरबा का निधन हो गया। वल्लभभाई को तार द्वारा इस दुःखद घटना की सूचना दी गई। - [बैरिस्टर बनने का संकल्प](https://bharatkaitihas.com/wifes-death-could-not-change-the-idea-to-become-barrister/): बच्चों को पालने की विकट समस्या आ खड़ी हुई। इस पर भी वल्लभभाई ने लंदन जाकर बैरिस्टरी पढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा। - [रोमन कानून याद कर लिया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-memorized-roman-law-during-his-journey/): रोमन कानून बहुत लम्बा और जटिल तो था ही, साथ ही भारतीय नैसर्गिक न्याय चिंतन से बिलकुल उलट था। इस कारण रोमन कानून को समझना और उसे याद रख पाना एक दुष्कर कार्य था। - [लंदन में वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/all-day-either-walking-or-reading-books-vallabhbhai/): सरदार पटेल भारत में अपनी जमी-जमाई वकालात छोड़कर बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने इंग्लैण्ड गए थे। लंदन में वल्लभभाई अत्यंत साधारण जिंदगी जीते थे। इस समय उनकी आय का कोई भी स्रोत नहीं था। जब उनके अग्रज विठ्ठलभाई बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने लंदन गए थे तब सरदार ने उनकी पढ़ाई तथा उनके परिवार का खर्चा उठाया […] - [लंदन में धूम](https://bharatkaitihas.com/boy-from-karamsad-village-made-a-splash-in-london/): शेडर्ज नामक एक अंग्रेज किसी समय गुजरात में कमिश्नर रहा था, उसने जब वल्लभभाई के चित्र अखबारों में देखे तो वह स्वयं चलकर वल्लभभाई के पास पहुंचा और बधाई देने के साथ-साथ अपने घर पर भोजन करने का निमंत्रण देकर गया। - [व्यावसायिक सफलता के गुर सीख लिये वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-learned-all-tricks-of-professional-success/): वल्लभभाई ने अंग्रेजों के रहने, खाने, चलने, बोलने तथा परस्पर व्यवहार करने के तरीकों को भी गहराई से परखा। - [जज नहीं बने वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/instead-of-becoming-a-judge-in-high-court-vallabhbhai-decided-to-practice-in-ahmedabad/): वल्लभभाई ने विनम्रतापूर्वक इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे स्वयं अपनी प्रैक्टिस करेंगे। - [मिस्टर फॉक्स के छक्के छुड़ा दिये वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-defeated-fox/): अहमदाबाद का एक कुख्यात अंग्रेज मजिस्ट्रेट मिस्टर फॉक्स दिन में कोर्ट लगाने के स्थान पर रात्रि में 9 बजे से 12 बजे तक कोर्ट लगाता था। - [आत्मविश्वास से परिपूर्ण वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-became-invincible-in-the-world-of-law/): आत्मविश्वास से परिपूर्ण वल्लभभाई का यह व्यक्तित्व स्वतंत्रता संग्राम के समय पूरी तरह तो नहीं बदला, हाँ उन्होंने अंग्रेजी हैट-टाई और सूट-बूट छोड़कर देशी झब्बा और धोती धारण कर ली। - [मुवक्किल की जमानत](https://bharatkaitihas.com/on-two-questions-of-vallabhbhai-magistrate-granted-bail-to-his-client/): वल्लभभाई ने दूसरा प्रश्न पूछा कि यदि ऐसा नहीं है तो उनके मुवक्किल को जमानत क्यों नहीं मिली जबकि उसके विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण भी नहीं है ? - [ब्रिज के खिलाड़ी सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/at-request-of-mrs-wadia-patel-freed-her-husband-from-condition-at-behest-of-mrs-wadia/): जब तीसरे दिन का खेल चल रहा था तब वाडिया की पत्नी क्लब में आईं और उन्होंने वल्लभभाई से अनुरोध किया कि वे खेल को बंद कर दें। - [किसान की गुदड़ी के लाल थे वल्लभभाई!](https://bharatkaitihas.com/gandhi-was-son-of-minister-but-vallabhbhai-grew-up-in-farmer-house/): जहाँ दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेज जाति ने गांधी का इतना अपमान किया था कि वे तिलमिलाकर भारत लौट आये थे, वहीं भारत के गोरे मजिस्ट्रेट, वल्लभभाई का सामना करने से घबराते थे। - [प्लेग रोगियों की सेवा करते-करते स्वयं भी प्लेग की चपेट में आ गये पटेल](https://bharatkaitihas.com/while-serving-plague-patients-patel-himself-came-in-grip-of-plague/): वल्लभ भाई ने कुछ लोगों को अपने साथ लेकर एक समिति बनाई जो लोगों को इस महामारी से छुटकारा दिलाने की दिशा में काम करने लगी। - [चम्पारन आंदोलन में गांधीजी की ओर ध्यान गया पटेल का!](https://bharatkaitihas.com/after-champaran-movement-patel-got-attention-of-gandhi/): सरदार पटेल व्यावहारिक मनुष्य थे। उन्हें अति आदर्शवाद और अति काल्पनिकता की बातें अच्छी नहीं लगती थीं। इस कारण उन्हें मोहनदास कर्मचंद गांधी के भाषणों से अरुचि थी। - [मोहनदास गांधी से भेंट](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-patel-and-mohandas-gandhi-meet-first-time-in-godhra/): उस समय तक देश में गांधी, नेहरू और पटेल को बहुत कम लोग जानते थे जबकि बाल गंगाधर तिलक के भाषणों की धूम मची हुई थी। लोकमान्य तिलक को गुजराती नहीं आती थी इसलिये वे हिन्दी में बोले और शापर्डे ने दुभाषिया बनकर उनके भाषण का गुजराती में अनुवाद सुनाया। - [गुजरात में बेगार](https://bharatkaitihas.com/byefforts-of-vallabhbhai-forced-labor-banned-in-gujarat/): वल्लभभाई ने अपनी पूर्व चेतावनी के अनुसार, बेगारी न देने के आह्वान के पर्चे छपवाकर गांवों में बंटवा दिये। इसके बाद जब सरकारी अधिकारी गांवों में दौरे पर गये तो लोगों ने बेगार देने से मना कर दिया तथा अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों से बेगार लेने का चलन बंद हो गया। - [खेड़ा आंदोलन में अंग्रेजी वेशभूषा त्याग दी वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-renounced-english-costumes-in-kheda-movement/): सरदार पटेल तथा मोहनदास गांधी ने खेड़ा क्षेत्र के किसानों का आह्वान किया कि वे सरकार को लगान न दें। इस पर सरकार ने किसानों पर अत्याचार किये तथा उनकी जमीनें जब्त कर लीं। - [सत्याग्रह का मार्ग](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-proved-that-path-of-satyagraha-is-effective/): सरदार पटेल ने सिद्ध कर दिया कि सत्याग्रह का मार्ग प्रभावशाली है! मोहनदास कर्मचंद गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में प्रिटोरिया सरकार के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन किया था जो बुरी तरह विफल रहा था। सत्याग्रह आंदोलन को गांधीजी सत्याग्रह का मार्ग कहते थे। गांधीजी ने भारत में भी सत्याग्रह आंदोलन का प्रयोग दोहराना चाहा। कांग्रेसी नेता […] - [विश्वयुद्ध के मोर्चे पर भारतीय युवक](https://bharatkaitihas.com/indian-youth-joined-english-army-at-vallabhbhais-suggestion/): जो भारतीय नौजवान प्रथम विश्वयुद्ध के मोर्चे से लौट कर आये, उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना संसार के अन्य देशों से की। उन सैनिकों को भरोसा हो गया कि भारत में भी संसार के समक्ष पूरी तरह तन कर खड़े होने की क्षमता है। - [असहयोग आंदोलन की बागडोर](https://bharatkaitihas.com/gandhiji-handed-over-command-of-non-cooperation-movement-to-sardar/): कांग्रेस ने जनरल डायर के कुकृत्य की जांच की मांग की। कांग्रेस को अपेक्षा थी कि रौलट एक्ट के विरोध में गांधीजी कुछ करेंगे किंतु गांधीजी बीमार थे इसलिये वे कुछ निर्णय नहीं ले सके। - [असहयोग आंदोलन का नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/sardar-and-his-brother-left-vakalat-to-participate-in-non-cooperation-movement/): गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का नेतृत्व सरदार पटेल को सौंपा था। असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिये सरदार पटेल ने वकालात छोड़ दी। उनके साथ उनके बड़े भाई विठ्ठल भाई पटेल भी वकालात छोड़कर पूरी तरह से असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा पुनः असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव स्वीकार कर […] - [सत्याग्रह आंदोलन बंद](https://bharatkaitihas.com/after-patels-support-country-accepted-decision-to-stop-satyagraha-movement/): गांधीजी के इस निर्णय से देश की जनता कांग्रेस के विरुद्ध भड़क गई। जनता की दृष्टि में चौरीचौरा की घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसके कारण राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रश्न को भी छोड़ दिया जाये। कांग्रेस के भीतर भी गांधीजी के विरुद्ध आवाजें उठने लगीं। - [झण्डा जुलूस](https://bharatkaitihas.com/nagpur-collector-lifted-ban-on-flag-procession-of-vallabhbhai/): उस काल में बहुत कम आयु के अंग्रेज लड़के बिना कोई समुचित प्रशिक्षण दिए ब्रिटिश भारत के जिलों में कलक्टर लगा दिए जाते थे। ये अनुभवहीन एवं प्रशिक्षणहीन अंग्रेज लड़के जनता पर मनमर्जी का कानून थोप देते थे जिसे उन दिनों व्यंग्य से पॉकेट रूल कहा जाता था। - [बोरसद आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-launched-an-unprecedented-movement-against-government-arbitrariness/): सरकार ने अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था के नाम पर बोरसद के लोगों पर 2.40 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक कर लगा दिया। लोगों ने वल्लभभाई से सरकार की इस कार्यवाही की शिकायत की। - [अहमदाबाद में स्कूल खोलकर सरकार को करारा जवाब दिया सरदार पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-gave-a-befitting-reply-to-english-government-by-opening-schools/): पटेल ने इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स को लिखा कि अब वह नगर पालिका के स्कूलों को न तो अनुदान भेजे और न निरीक्षण करने के लिये आये। - [गुजरात की जनता ने पटेल को गरीब नवाज तथा अपना मसीहा कहा](https://bharatkaitihas.com/people-of-gujarat-called-patel-as-god-of-poor/): वल्लभभाई ने वायसराय को लोगों की समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरदार पटेल ने मांग की कि सरकार अपने खर्चे से उन लोगों के मकान बनवाये जो फिर से मकान बनावाने की स्थिति में नहीं हैं। - [बारदोली आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-told-government-that-i-am-not-outsider-in-bardoli/): सरदार पटेल ने किसानों से पूछा कि यदि वे सरकार के विरुद्ध आंदोलन करेंगे तो सरकार उनकी जमीनें, मवेशी और घरबार छीन लेगी। उन्हें जेलों में ठूंस देगी। उनके गांवों में आग लगायेगी और औरतों तथा बच्चों पर डण्डे बरसायेगी। क्या वे इतनी तकलीफें सहन करने के लिये तैयार हैं ? - [हाथी और मच्छर](https://bharatkaitihas.com/britsh-sarkar-is-a-mad-elephant-i-am-going-to-be-a-mosquito-in-its-ear/): बारदोली में अंग्रेज सरकार द्वारा की जा रही मनमानियों के विरोध में सरदार पटेल ने जनता से कहा कि यह हाथी और मच्छर की लड़ाई है। गोरी सरकार पागल हाथी है, इम इसके कान में मच्छर बनकर घुसेंगे! बारदोली आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने के लिये वल्लभभाई ने सूक्ष्मता से तैयारी की। उन्होंने बारदोली […] - [बारदोली आंदोलन की सफलता](https://bharatkaitihas.com/white-government-was-scared-by-the-sound-of-drums/): पटेल ने लोगों से कहा कि गलत आदमी का बहिष्कार करना समाज का अधिकार है किंतु उसके विरुद्ध हिंसा न की जाये। यदि वह व्यक्ति पारिवारिक समारोह में किसी को भोजन के लिये बुलाये तो बेशक उसके घर कोई न जाये किंतु यदि वह बीमार पड़ जाये तो उसकी सेवा करने के लिये गांव का प्रत्येक व्यक्ति उसके घर जाये। - [सरदार पटेल का सम्मान](https://bharatkaitihas.com/rural-women-with-torn-rags-marked-tilak-on-patels-head/): जब बारदोली के किसानों ने सरकार की बात नहीं मानी तथा बढ़ा हुआ कर नहीं चुकाता तो सरकार ने किसानों पर अत्याचार बढ़ा दिए। इस पर सरदार पटेल ने गांवों का दौरा बढ़ा दिया। लोग सरदार पटेल का सम्मान करने के लिए आतुर रहते। फटे चीथड़ों वाली ग्रामीण महिलाएं पटेल के भाल पर तिलक लगाती […] - [गांधीजी का मंत्र](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-did-first-successful-test-of-mantra-of-gandhiji/): सरदार पटेल ने गांधीजी का मंत्र अपनी जीवन में उतारा तथा उसे सार्वजनिक जीवन में सिद्ध करके दिखाया। यह मंत्र था सत्य पर अड़े रहना, जिसे गांधीजी सत्याग्रह कहते थे। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के पत्र को पढ़कर बम्बई का गवर्नर हिल गया। उसे सरदार पटेल की शक्ति का अनुमान हो गया। उसे यह भी समझ […] - [राजनैतिक मंच से क्रांति नहीं होती](https://bharatkaitihas.com/shouting-from-political-platform-does-not-lead-to-revolution/): प्रायः लोगों को यह भ्रम होता है कि किसी भी समाज में अथवा राष्ट्र में राजनीतिक मंच से क्रांति होनी संभव है किंतु वास्तविकता यह है कि राजनैतिक मंच से चिल्लाने से क्रांति नहीं होती! बारदोली की सफलता के बाद सरदार पटेल एक चमत्कारिक पुरुष के रूप में देखे जाने लगे। उन्होंने वह कर दिखाया […] - [बालगंगाधर तिलक की अनुगूंज](https://bharatkaitihas.com/sound-of-bal-gangadhar-tilak-was-heard-in-voice-of-sardar-patel/): इस काल तक सरदार पटेल न केवल गुजरात कांग्रेस के अपितु अखिल भारतीय कांग्रेस के भी सर्वमान्य नेता बन गए थे। उन्होंने बोरसद, खेड़ा, अहमदाबाद एवं बारदोली में सफल आंदोलन चलाए थे। कांग्रेसी नेताओं को सरदार पटेल की वाणी में बालगंगाधर तिलक की अनुगूंज सुनाई देती थी। अभी सरदार पटेल महाराष्ट्र में जन-जागरण के कार्य […] - [बिहारी किसानों की दुर्दशा देखकर सरदार पटेल का हृदय रो उठा](https://bharatkaitihas.com/seeing-plight-of-farmers-of-bihar-sardar-patels-heart-wept/): जब से देश में तुर्कों का आगमन हुआ था, तब से पूरे देश के किसानों की हालत खराब होने लगी थी। मुगलों के काल में भी किसानों का बहुत शोषण हुआ। अंग्रेजों ने जमींदारी व्यवस्था को मजबूत करके किसानों के शोषण के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित कर दिया। बिहारी किसानों की दुर्दशा देखकर सरदार […] - [लाहौर कांग्रेस की अध्यक्षता](https://bharatkaitihas.com/on-gandhijis-wish-patel-refused-to-become-the-president-of-the-congress/): सरदार पटेल और मोहनदास कर्मचंद गांधी दोनों गुजराती थे। इस समय तक गांधीजी को जितनी भी सफलता मिली थी, उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल का हाथ अधिक था। गांधीजी अपने दम पर अब तक कोई सफलता प्राप्त नहीं कर सके थे। फिर भी गांधजी को पटेल की बजाय नेहरू अधिक पसंद थे। गांधीजी की इच्छा देखकर […] - [सविनय अवज्ञा आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/patel-said-when-guns-are-fired-then-history-is-made/): मरना है तो बहादुरों की मौत मरो। कायरों की नहीं। जब तोपों से गोले बरसते हैं, हवाई जहाजों से बम गिरते हैं, हजारों की संख्या में लोग मरते हैं, तभी इतिहास बनता है। - [गांधीजी की दाण्डी यात्रा को सफल बनाने के लिये पटेल गांव-गांव घूमे](https://bharatkaitihas.com/patel-traveled-from-village-to-village-to-make-gandhijis-dandi-march-successful/): गांधीजी की दाण्डी यात्रा को भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। इस यात्रा ने पूरे देश के लोगों का ध्यान कांग्रेस के कार्यक्रमों की तरफ खींचा। जब गांधीजी पैदल चले तो सैंकड़ों भावुक भारतीय भी इस आशा में उनके साथ हो लिए कि एक दिन यही व्यक्ति भारत को आजादी दिलवाएगा। […] - [ब्रिटिश कमिश्नर का स्वागत](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-refused-to-stand-to-welcome-british-commissioner/): एक बार कमिश्नर गेरेट जेल के दौरे पर आया। उसके सम्मान के लिये समस्त कैदियों को एक पंक्ति में खड़े होने के लिये कहा गया। सरदार ने ब्रिटिश कमिश्नर का स्वागत करने के लिए खड़े होने से मना कर दिया। - [सिंह जेल में था और गीदड़ उसका घर खराब कर रहे थे](https://bharatkaitihas.com/loin-was-in-jail-and-jackals-were-spoiling-his-house/): सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान सरदार पटेल ने जनता में सरकार का विरोध करने का साहस संचारित किया जिसके कारण सरकार घबरा गई। सरकार ने सरदार पटेल को जेल में ठूंस दिया तथा सरदार की माता पर अत्याचार किया। यह वैसा ही था जैसे कि सिंह जेल में था और गीदड़ उसका घर खराब कर […] - [सरदार पटेल की सिंह-गर्जना से गोरी सरकार कांप उठी](https://bharatkaitihas.com/white-government-shook-with-lions-roar-of-sardar-patel/): 25 जनवरी 1931 को विशेष आदेश जारी करके भारत सरकार ने कांग्रेस के 26 शीर्ष नेताओं को रिहा कर दिया ताकि कांग्रेस को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिये मनाया जा सके। रिहा होने वाले नेताओं में सरदार पटेल भी थे। - [गांधी-इरविन पैक्ट से देश में उत्तेजना फैल गई](https://bharatkaitihas.com/gandhi-irwin-pact-spread-excitement-in-country/): देश की आजादी का मुद्दा पूरी तरह गौण हो गया था। क्रांतिकारियों को उनके भाग्य पर अकेला छोड़ दिया गया था। सुभाषचंद्र बोस तथा विट्ठलभाई उस समय विदेश में थे। - [कराची सम्मेलन की अध्यक्षता](https://bharatkaitihas.com/sardar-gets-the-thorny-crown-of-chairmanship-of-karachi-conference/): सरदार ने कहा कि इस समय गांधीजी की आयु 63 वर्ष और मेरी आयु 56 वर्ष है। हम लोग अपने जीवन में ही देश को स्वतंत्र देखना चाहते हैं, इसलिये आपसे अधिक व्यग्र हम हैं। सरदार के इन शब्दों से युवकों का गुस्सा ठण्डा हुआ। - [लौह निर्मित हैं सरदार](https://bharatkaitihas.com/whites-did-not-know-that-sardar-was-made-of-iron-not-of-flesh-and-flesh/): गोरों को पता नहीं था कि हाड़-मांस से नहीं, लौह निर्मित हैं सरदार! अंग्रेजी सरकार वल्लभभाई को अन्य नेताओं की तरह मानकर व्यवहार कर रही थी किंतु सरकार को पता नहीं था कि हाड़-मांस से नहीं, लौह निर्मित हैं सरदार! गोलमेज सम्मेलन के बाद गांधी ने लंदन में भारत मामलों के मंत्री होरे से भेंट […] - [सोने का सरदार](https://bharatkaitihas.com/selfless-service-turned-iron-sardar-gold-lord/): सरदार पटेल ने स्वयंसेवकों के दल गठित किये जो गांव-गांव घूमकर लोगों की सेवा करते, मृतकों का दाह संस्कार करते तथा ग्रामीणों को प्लेग से बचने और उससे लड़ने के तरीके बताते। - [चुनावी टिकटों का बंटवारा करने के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत](https://bharatkaitihas.com/patel-formulated-guidelines-for-election-ticket-distribution/): चुनावी टिकटों का बंटवारा राजनीतिक दलों के लिए बहुत बड़ा संकट रहा है। जो लोग निःस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करते हैं, वे अपने लिए कभी पद नहीं मांगते किंतु जो लोग सत्ता एवं शक्ति प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों में घुस जाते हैं, वे चुनावी टिकटों का बंटवारा होते समय चालाकियां दिखाकर […] - [सरदार पटेल साम्प्रदायिक हैं!](https://bharatkaitihas.com/nariman-accuses-sardar-patel-of-being-communal/): नरीमन ने इसे अपना अमान समझा और अपने प्रभाव वाले अखबारों में सरदार पटेल के विरुद्ध बहुत सी अनर्गल बातें छपवाईं जिनका सीधा-सीधा अर्थ यह होता था कि सरदार पटेल साम्प्रदायिक हैं इसलिये उन्होंने पारसी धर्म के नरीमन को बम्बई विधान सभा में कांग्रेस का नेता नहीं बनने दिया। - [गांधीजी को समर्थन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-once-again-supported-gandhiji-in-the-hour-of-crisis/): संकट की घड़ी में एक बार फिर सरदार पटेल ने गांधीजी को समर्थन दिया! गांधीजी और सरदार पटेल के बीच बड़े विचित्र सम्बन्ध थे। सरदार पटेल प्रायः गांधीजी की बातों से सहमत नहीं होते थे किंतु गांधीजी जब कांग्रेस पर अथवा सरदार पटेल पर अपना व्यक्तिगत निर्णय थोप देते थे तो सरदार आंख मूंदकर उसे […] - [गांधीजी का अंधानुकरण](https://bharatkaitihas.com/patel-used-to-follow-gandhiji-blindly-without-reality/): कांग्रेस की विचित्र स्थिति थी। पहले विश्वयुद्ध में भी अंग्रेजों ने भारत के लोगों से पूछे बिना भारत को विश्वयुद्ध में धकेल दिया था और गांधीजी ने वायसराय से समझौता करके भारतीय नौजवानों को सेना में भरती होने का अभियान चलाया था। - [भारत छोड़ो आंदोलन में जनता की प्रतिक्रिया पर सरदार पटेल को गर्व था](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-proud-of-publics-reaction-to-quit-india-movement/): एक तरफ अंग्रेज अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहे थे और दूसरी ओर जापान का विजय रथ तेजी से आगे बढ़ रहा था। कांग्रेस की ढुलमुल और गलत नीतियों से दुःखी होकर सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज का गठन किया तथा बर्मा की तरफ से भारत में प्रवेश कर लिया। - [शिमला सम्मेलन 1945 में भाग लेने के लिये पटेल को जेल से रिहा किया गया](https://bharatkaitihas.com/patel-released-from-jail-to-attend-shimla-conference/): डॉ. भीमराव अम्बेडकर चाहते थे कि स्वतंत्र भारत में दलित जातियों को उचित स्थान दिया जाये। अंग्रेज चाहते थे कि भारत को पूर्ण स्वतंत्रता न देकर डोमिनियन स्टेटस दिया जाये। - [भारतीय सैनिक और सरकार](https://bharatkaitihas.com/sardar-made-a-pact-between-indian-soldiers-and-white-government/): 20 जनवरी 1946 को कराची में वायुसेना के सैनिकों ने आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों के समर्थन में हड़ताल कर दी जो बम्बई, लाहौर और दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालयों पर भी फैल गई। - [पटेल प्रधानमंत्री नहीं बने](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-could-not-become-prime-minister/): गांधीजी को लगता था कि नेहरू ने यूरोप, चीन, रूस आदि देशों की यात्रा की थी इसलिये अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी से बात करने में नेहरू अधिक सक्षम थे। - [सरदार पटेल और चर्चिल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-warned-winston-churchill/): विंस्टन चर्चिल समझ गये कि समय का पहिया तेजी से घूम रहा है, यदि समझदारी नहीं दिखाई गई तो इंग्लैण्ड को भारत की मित्रता से हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिये चर्चिल ने विदेश सचिव ऐंथनी हेडन के द्वारा पटेल को यह संदेश भिजवाया- 'मुझे पटेल के प्रत्युत्तर से बड़ा आनंद हुआ। - [मुस्लिमलीग को गृह-मंत्रालय न देने पर अड़ गये सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-adamant-on-not-giving-home-ministry-to-muslim-league/): जिन्ना ने सरदार पटेल से गृह मंत्रालय छीनने की चाल चली। उसने नेहरू से कहा कि यदि गृहमंत्री मुस्लिम लीग का बने तो मुस्लिम लीग अंतरिम सरकार में सम्मिलित हो जायेगी। - [लॉर्ड वैवेल भारत को और दस वर्ष और गुलाम रखेगा](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-believed-that-wavell-would-keep-india-slave-for-another-ten-years/): वायसराय को इंगलैण्ड की सरकार पर अविश्वास था और प्रधानमंत्री एटली, वायसराय पर विश्वास नहीं करता था। भारतीय नेताओं में भी परस्पर अविश्वास का वातावरण था। सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू भारत के विभाजन को अनिवार्य मानते थे! - [मुस्लिम लीग का बजट](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-opposes-budget-presented-by-minister-of-muslim-league/): वित्तमंत्री की हैसियत से लियाकत अलीखां को सरकार के प्रत्येक विभाग में दखल देने का अधिकार मिल गया था। वह प्रत्येक प्रस्ताव को या तो अस्वीकार कर देता था या फिर उसमें बदलाव कर देता था। - [पटेल और नेहरू ने गांधीजी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया](https://bharatkaitihas.com/patel-and-nehru-rejected-gandhis-proposal/): विभाजन को रोकने के लिये गांधीजी इस सीमा तक आतुर थे कि उन्होंने वही सोच रखा था जो कभी राजा सोलोमन ने सोचा था। बच्चे को काट कर आधा न बांटो। पूरा देश ही जिन्ना को दे दो। जिन्ना अपनी मुस्लिम लीग के साथ सामने आयें, सरकार बनायें। देश के तीस करोड़ नागरिकों पर राज्य करें। - [देश का विभाजन नहीं होता तो हमारे हाथ से सबकुछ चला जाता](https://bharatkaitihas.com/sardar-believed-that-if-country-had-not-been-divided-then-everything-would-have-gone/): यदि शरीर का एक भाग खराब हो जाये तो उसको शीघ्र हटाना ठीक है, ताकि सारे शरीर में जहर न फैले। मैं मुस्लिम लीग से छुटकारा पाने के लिए भारत का कुछ भाग देने के लिए तैयार हूँ। - [मुसलमानों के दुश्मन नहीं थे सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-not-an-enemy-of-muslims-and-pakistan/): मोरारजी देसाई ने लिखा है- 'मुझे लगभग 20 वर्ष तक सरदार के नेतृत्व में कार्य करने का अवसर मिला निजी अनुभव के आधार पर मैं दावे से कह सकता हूँ कि सरदार एक मात्र व्यक्ति थे जो साम्प्रदायिक, जातिगत या धार्मिक पूर्वाग्रह से मुक्त थे और सभी धर्मों तथा समुदायों के प्रति सद्भाव रखते थे।' - [शरणार्थियों का पुनर्वास करने के लिये दिन-रात एक कर दिये सरदार पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/patel-did-hard-work-to-rehabilitate-refugees/): जहाँ शाम को खाली मैदान दिखाई देते थे, सुबह उठकर लोग देखते थे कि उन मैदानों में रातों-रात हजारों शरणार्थियों ने डेरे जमा लिये हैं। ये लोग भूख-प्यास, सर्दी, बरसात और बीमारियों के सताये हुए थे और अपना सर्वस्व पाकिस्तान में छोड़कर आये थे। - [आजादी की नाव को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आने वाली थी सरदार पटेल पर](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-going-to-have-responsibility-of-safeguarding-freedom/): दुर्दिन के मसीहाओं ने भविष्यवाणी की थी कि हिंदुस्तान की आजादी की नाव रजवाड़ों की चट्टान से टकरायेगी। सरदार पटेल पर जिम्मदारी आने वाली थी कि आजादी की नाव इस चट्टान टकराकर चूर-चूर न हो जाये। - [राजे-रजवाड़े स्वतंत्र भारत की झोली में डाल दें](https://bharatkaitihas.com/patel-said-to-mountbatten-to-put-all-princes-in-bag-of-india/): सदार पटेल ने माउण्टबेटन से कहा कि वे ब्रिटिश भारत के समस्त राजे-रजवाड़े स्वतंत्र भारत की झोली में डाल दें! भारत के 566 देशी राज्यों में से 12 राज्य, प्रस्तावित पाकिस्तान की भौगोलिक सीमा में स्थित थे जबकि शेष 554 में से अधिकांश, भारतीय क्षेत्रों से घिरे हुए थे। कुछ राज्य प्रस्तावित भारत-पाकिस्तान की सीमा […] - [सरदार पटेल की चुनौती](https://bharatkaitihas.com/a-big-challenge-was-ready-for-sardar-patel/): जिन्ना ने निजाम हैदराबाद से भी सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया क्योंकि उसके प्रति माउंटबेटन का रवैया अत्यंत नरम था। कुछ हिन्दू रियासतों के शासक भी पाकिस्तान में सम्मिलित होने को तैयार हो गये जो कि कांग्रेस के नेताओं से नाराज थे। - [लौह-पुरुष अपनी धोती समेट कर राजाओं के पीछे पड़ जायेगा](https://bharatkaitihas.com/congress-knew-that-iron-man-would-fold-his-dhoti-and-follow-the-kings/): पटेल का जोरदार व्यक्तित्व और मेनन के लचीले दिमाग का संयोग इस मौके पर अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ। - [कोरफील्ड को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-dispatched-corfield-to-england/): सरदार पटेल ने राजनैतिक सलाहकार कोनार्ड कोरफील्ड को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया वायसराय के राजनैतिक सलाहकार कोनार्ड कोरफील्ड ने मुहम्मद अली जिन्ना की सहायता करने के लिये, रेजीडेंटों और पॉलिटिकल एजेंटों के माध्यम से देशी राजाओं को भारतीय संघ से पृथक रहने के लिये प्रेरित किया। वायसराय के […] - [बड़ौदा नरेश प्रतापसिंह गायकवाड़ को गद्दी से उतार दिया!](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-dethroned-the-king-of-baroda/): भारत सरकार ने महाराजा प्रतापसिंह गायकवाड़ की मान्यता समाप्त करके उनके पुत्र फतहसिंह को महाराजा बड़ौदा स्वीकार किया। यह राजाओं के लिये बड़ा झटका था, सच्चाई उनकी समझ में आने लगी थी। - [सरदार पटेल का लक्ष्य राजाओं के झुण्ड को हाँककर भारत संघ में लाना था](https://bharatkaitihas.com/sardar-patels-goal-was-to-bring-flock-of-kings-to-union-of-india/): भारत की आजादी के समय जब चारों ओर चीख-चिल्लाहट मची हुई थी तब सरदार पटेल का लक्ष्य भारत के 565 राजाओं में से अधिकांश राजाओं को भारत संघ में सम्मिलित करना था। 5 जुलाई 1947 को रियासती विभाग के अस्तित्व में आते ही सरदार पटेल ने देशी राजाओं से अपील की कि वे 15 अगस्त […] - [सरदार पटेल के हाथ राजाओं की भुजाओं पर कसने लगे](https://bharatkaitihas.com/patels-hand-with-velvet-gloves-tightened-on-kings-arms/): राजा लोग सदियों से अपने राज्यों को भोगते आए थे। पहले वे मुगलों की छत्रछाया में रहे और बार में अंग्रेजों के संरक्षण में रहे किंतु अब उन्हें कांग्रेस शासित भारत में मिलने से डर लग रहा था किंतु सरदार पटेल के हाथ राजाओं की भुजाओं पर कसने लगे। अधिकांश राजाओं को डर था कि […] - [देशी रियासतों का विलय](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-merged-all-princely-states-into-india-before-independence/): भारत की आजादी के समय भारत में 566 देशी रियासतें थीं किंतु पाकिस्तान के अलग हो जाने के कारण उस क्षेत्र की 12 रियासतें पाकिस्तान में चली गईं। सरदार पटेल ने शेष 554 में से 550 देशी रियासतों का विलय भारत में कर लिया। भारतीय राजाओं ने भारत संघ में सम्मिलित होने के लिये एक-एक […] - [लक्षद्वीप पर अधिकार](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-included-lakshadweep-in-india/): लक्षद्वीप में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती थी, इसलिए डर था कि पाकिस्तान इन पर कब्जा कर लेगा किंतु सरदार पटेल ने लक्षद्वीप पर अधिकार कर लिया। जब अरब के मुसलमानों ने दुनिया में इस्लाम फैलाना आरम्भ किया तब उन्होंने दुनिया के उन हिस्सों को अपना पहला निशाना बनाया जो सीरिया और ईरान की […] - [जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान में मिलने की घोषणा करके पटेल को चुनौती दे बैठा](https://bharatkaitihas.com/nawab-of-junagadh-challenged-patel-by-announcing-to-merge-with-pakistan/): जूनागढ़ का नवाब रसूलखानजी कट्टर मुसलमान था। भारत की आजादी के समय उसने प्रयास किया कि जूनागढ़ रियासत पाकिस्तान में शामिल हो जाए। वस्तुतः हैदराबाद, जूनागढ़ और भोपाल नवाब एक ऐसा मुस्लिम गलियारा बनाना चाहते थे जिसका एक सिरा भारत में तो दूसरा सिरा पाकिस्तान में खुलता हो! गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में जूनागढ़ रियासत […] - [माउण्टबेटन का सुझाव](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-refuses-to-accept-mountbattens-suggestion/): माउण्टबेटन का सुझाव था किजूनागढ़ के मसले को यूनाईटेड नेशन्स में ले जाना चाहिये अन्यथा भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ जायेगा। सरदार पटेल ने माउण्टबेटन का सुझाव मानने से मना कर दिया! जूनागढ़ नवाब द्वारा पाकिस्तान में मिलने की घोषणा करने से जूनागढ़ की जनता में बेचैनी फैल गई तथा जनता ने नवाब […] - [निजाम हैदराबाद ने हैदराबाद की समस्या को भारत के पेट में नासूर बना दिया!](https://bharatkaitihas.com/sardar-believed-that-hyderabad-was-like-cancer-in-the-stomach-of-india/): भारत की आजादी के समय हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा राज्य था। यहां की जनता हिन्दू थी किंतु शासक मुसलमान था जिसे निजाम हैदराबाद कहा जाता था। वह भारत में शामिल नहीं होना चाहता था। इसलिए निजाम हैदराबाद ने हैदराबाद की समस्या को भारत के पेट में नासूर बना दिया! 15 अगस्त 1947 तक भारत […] - [हैदराबाद में सत्याग्रह आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/patel-instructed-congress-to-run-satyagraha-movement-in-hyderabad/): जब निजाम हैदराबाद ने भारत में सम्मिलन के पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए तो पटेल ने कांग्रेस को हैदराबाद में सत्याग्रह आंदोलन चलाने का निर्देश दिया ! 9 जून 1947 को निजाम ने वायसराय माउण्टबेटन को एक पत्र लिखा जिसमें उसने अपने मन की अकुलाहट को खुलकर व्यक्त किया- ‘पिछले कुछ दिनों में मैंने स्वाधीनता […] - [माउण्टबेटन योजना घर चली गई!](https://bharatkaitihas.com/patel-said-mountbatten-plan-has-gone-home/): पटेल ने हैदराबाद के नवाब से कहा कि माउण्टबेटन योजना घर चली गई है! उस समय नेहरू यूरोप दौरे पर थे तथा सरदार पटेल कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे थे। वायसराय के दबाव से नवम्बर 1947 में हैदराबाद निजाम ने भारत के साथ स्टेंडस्टिल एग्रीमेंट पर दस्तख्त कर दिये जिसके अनुसार भारत […] - [काश्मीर की समस्या यू.एन.ओ. में ले जाने पर पटेल, जवाहरलाल से नाराज हो गये](https://bharatkaitihas.com/patel-gets-angry-with-jawaharlal-for-taking-problem-of-kashmir-to-uno/): पटेल ने रक्षामंत्री बलदेवसिंह को विश्वास में लेकर भारतीय सुरक्षा दलों को काश्मीर की सीमा पर भारतीय क्षेत्रों में इस प्रकार नियोजित किया जिससे उन्हें तत्काल युद्ध क्षेत्र में भेजा जा सके। - [भोपाल नवाब को घुटने टेकने पर विवश कर दिया!](https://bharatkaitihas.com/patel-forced-bhopal-nawab-to-kneel-down/): सरदार पटेल ने नवाब को पत्र लिखकर उसे धिक्कारा कि मेरे लिये यह एक बड़ी निराशाजनक और दुःख की बात थी कि आपके विवादित हुनर तथा क्षमताओं को आपने देश के उपयोग में उस समय नहीं आने दिया जब देश को उसकी जरूरत थी। - [भारतीय नागरिक सेवाएँ बनाए रखने का निर्णय लिया पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/sardar-decides-to-retain-ics-officers/): भारत की आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू भारतीय नागरिक सेवाएँ भंग करना चाहते थे किंतु सरदार पटेल ने देश का शासन चलाने के लिए भारतीय नागरिक सेवाएँ बनाए रखने का निश्चय किया ताकि देश को मजबूत शासन तंत्र दिया जा सके! स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय नागरिक सेवाओं (आईसीएस) में दक्षिण भारतीयों का बोलबाला […] - [फांसी चढ़ाने का अधिकार](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-want-kings-to-have-right-to-hang-subjects/): देशी रियासतों के राजाओं के पास अपनी जनता को सजा देने के अधिकार थे। वे किसी को भी फांसी पर चड़ा सकते थे।सरदार पटेल नहीं चाहते थे कि भारत की आजादी के बाद भी राजाओं के पास प्रजा को फांसी चढ़ाने का अधिकार हो! देशी राज्यों को भारत में सम्मिलित कर लेना सरदार पटेल की […] - [देशी राज्यों का विलय](https://bharatkaitihas.com/patel-tied-native-states-in-bundle/): देशी राज्यों का विलय स्वतंत्र भारत के सामने एक उलझन भरी समस्या बन गया। राजा लोग किसी भी कीमत पर न अपने राज्य छोड़ना चाहते थे और न अधिकार। भारत संघ में रह गये 554 देशी राज्यों में से अधिकांश, आर्थिक दृष्टि से इतने कमजोर एवं छोटे थे कि वे अपने संसाधनों से एक छोटी […] - [पटेल का व्यावहारिक रुख](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-took-a-very-practical-stand-with-kings/): पांच सौ चौवन राजाओं के सैंकड़ों साल पुराने राज्य खत्म होने जा रहे थे, मुसलमान अपना बोरिया-बिस्तर लेकर पाकिस्तान भाग रहे थे। सिक्खों के सैलाब पश्चिमी पंजाब से भारत की तरफ भागे चल आ रहे थे। सिंध प्रदेश पाकिस्तान में छूट गया था, देश में चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। ऐसी स्थिति में सरदार […] - [राजाओं का धन नहीं, उनके राज्य चाहिये थे!](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-want-wealth-of-kings-but-their-kingdoms/): जब भारत सरकार राजाओं से उनके राज्य छीन रही थी, तब सरदार पटेल ने अत्यंत व्यावहारिक रुख अपाया। लोग चाहते थे कि राजा लोग अपना धन और महल छोड़कर निकल जाएं किंतु सदार पटेल को राजाओं का धन नहीं, उनके राज्य चाहिये थे! सदार पटेल ने भारत के 554 राजाओं के राज्य, भारत में मिलाये […] - [अलवर नरेश तेजसिंह नजरबंद !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-arrested-alwar-king-tej-singh/): राजा लोग विगत कुछ दशकों से अंग्रेजों की छत्रछाया में कांग्रेसी नेताओं से संघर्ष करते आ रहे थे। इसलिए वे देशी की आजादी के समय भी हवा के रुख के परिवर्तन को नहीं पहुंचा सके और भारत सरकार के नेताओं की अवज्ञा करने लगे। जब अलवर नरेश तेजसिंह नजरबंद कर लिया गया, तब जाकर राजाओं […] - [भरतपुर महाराजा का भाग्य](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-protected-the-fate-of-bharatpur-maharaja/): भारत की आजादी के समय भरतपुर महाराजा ने भारत सरकार को नाराज करने वाले कई कार्य किए। इस कारण भारत सरकार भरतपुर महाराजा के विरुद्ध हो गई और उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने पर विचार करने लगी। ऐसी स्थिति में सरदार वल्लभभाई ने भरतपुर महाराजा का भाग्य बचाया। रियासती विभाग भरतपुर राज्य की गतिविधियों से […] - [देशी रियासतों का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/patel-did-what-bismarck-did-in-germany-and-kabur-in-italy/): देशी रियासतों का एकीकरण करके सरदार पटेल ने भारत में वह कर दिखाया जो जर्मनी में बिस्मार्क ने तथा इटली में काबूर ने किया था! सरदार पटेल के नेतृत्व में देशी रियासतों का एकीकरण करने का काम तेजी से चला। दिसम्बर 1947 में उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के 39 राज्यों का उड़ीसा और मध्यप्रान्त में विलय […] - [अजमेर दंगे !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-got-into-a-dispute-with-jawaharlal-nehru-over-ajmer-riots/): भारत की आजादी के तुरंत बाद हुए अजमेर दंगे सरदार पटेल एवं जवाहर लाल नेहरू के बीच विवाद का विषय बन गए। जवाहर लाल नेहरू ने इन दंगों के बाद हिन्दुओं को कुचलने की तैयारी की जबकि पटेल का मानना था कि दंगे मुसलमानों ने किए थे। 5 दिसम्बर 1947 को अजमेर में साम्प्रदायिक दंगे […] - [नेहरू को फटकार !](https://bharatkaitihas.com/patel-rebuked-by-writing-a-letter-to-nehrus-prominent-personal-secretary/): अजमेर दंगे के बहाने से जवाहर लाल नेहरू जिस तरह की ओछी हरकतें कर रहे थे, उनसे सरदार पटेल को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने नेहरू को फटकार लगाने का निश्चय किया। सरदार के सार्वजनिक वक्तव्य को नेहरू ने अपनी व्यक्गितगत प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और उन्होंने व्यक्तिशः अजमेर भ्रमण का कार्यक्रम बनाया किंतु अचानक […] - [नेहरू को पत्र](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-showed-displeasure-by-writing-a-letter-to-nehru/): यद्यपि सरदार पटेल अजमेर दंगे पर आयंग की यात्रा के लिए आयंगर के माध्यम से नेहरू को फटकार चुके थे किंतु इससे पटेल को संतोष नहीं हुआ। उन्होनें सीधे ही नेहरू को पत्र लिखने का निश्चय किया। 23 दिसम्बर 1947 को सरदार पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर कहा कि आयंगर की अजमेर यात्रा आश्चर्य […] - [नेहरू द्वारा पदत्याग की इच्छा !](https://bharatkaitihas.com/nehru-wrote-a-letter-to-sardar-patel-and-offered-to-step-down/): अजमेर दंगे के बाद सरदार पटेल द्वारा जवाहर लाल नेहरू को लगाई गई फटकार से व्यथित होकर नेहरू द्वारा पदत्याग करने की इच्छा व्यक्त की गई! नेहरू ने सरदार को लिखा कि आपके और मेरे बीच में इस प्रकार की घटनाओं की प्रवृत्ति तथा कठिनाइयां उत्पन्न होने से मैं बहुत अप्रसन्न हूँ। ऐसा लगता है […] - [पटेल-नेहरू विवाद काल के गर्त में समा गया!](https://bharatkaitihas.com/with-death-of-gandhi-patel-nehru-dispute-got-engulfed-in-a-period-of-time/): कश्मीर समस्या अपने चरम पर पहुँच गई थी तथा देश में साम्प्रदायिक तनाव भी अपने उच्चतम स्तर पर था। भारत सरकार इस समय संक्रांति काल में थी। एक छोटा सा धक्का भी बहुत बड़ा नुक्सान पहुँचा सकता था। - [भीमराव अम्बेडकर की नियुक्ति में पटेल की भूमिका](https://bharatkaitihas.com/patel-had-an-important-role-in-appointment-of-ambedkar/): सरदार पटेल ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाने का निश्चय किया किंतु भीमराव अम्बेडकर की नियुक्ति में कठिनाई यह थी कि उस काल की कांग्रेस में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का कद इतना ऊँचा नहीं था। जिस समय भारत की संविधान सभा का गठन हुआ और संविधान का प्रारूप बनाने के लिए […] - [पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये](https://bharatkaitihas.com/patel-protested-against-giving-fifty-five-crore-rupees-to-pakistan/): गांधी ने पटेल की इस बात का यह कहकर विरोध किया कि यदि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये नहीं दिये गये तो उसके बदले में अधिक हिंसा और बदले की कार्यवाही की जायेगी। - [अल्पसंख्यक आयोग का विरोध किया पटेल ने !](https://bharatkaitihas.com/patel-opposes-the-decision-to-set-up-a-minorities-commission/): जब नेहरू ने भारत में रह गए मुसलमानों के लिए अल्पसंख्यक आयोग स्थापित करने का प्रयास किया तो पटेल ने अल्पसंख्यक आयोग का विरोध किया। भारत का विभाजन हिन्दू एवं मुसलमान जनसंख्या के आधार पर किया गया था। चूंकि भारत के मुसलमानों ने हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया था, इसी आधार पर […] - [पटेल-नेहरू द्वंद्व](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-let-nehrus-personal-wishes-dominate-congress/): सरदार पटेल एवं जवाहर लाल नेहरू अलग-अलग व्यक्तित्व के धनी थे। भारत की आजादी के बाद पटेल-नेहरू द्वंद्व अधिक मुखर होकर सामने आया। पटेल ने नेहरू की व्यक्तिगत इच्छाओं को कांग्रेस पर हावी नहीं होने दिया! पटेल एवं नेहरू दोनों ही कांग्रेस के सर्वाग्रणी नेता थे। स्वतंत्रता के समय कांग्रेस में पटेल को अधिक पसंद […] - [सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-rebuilt-ancient-somnath-temple/): आजादी की लड़ाई में सरदार पटेल की उपलब्धियां विलक्षण थीं किंतु आजादी के समय उनकी भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण थी। उन्होंने देश की 554 देशी रियासतों का भारत में सम्मिलन करवाया। स्वतंत्र भारत में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि गुजरात के प्राचीन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाना रही। सोमनाथ का जगत् प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के […] - [शेख अब्दुल्ला की बोलती बंद कर दी पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/patel-stopped-sheikh-abdullah/): कश्मीर समस्या के तीन मुख्य सूत्रधार थे- शेख अब्दुल्ला, जवाहरलाल नेहरू और महाराजा हरिसिंह! तीन की महत्वाकांक्षाओं ने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया तथा कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की समस्या बना दिया। यह समस्या आज भी पूरी तरह नहीं सुलझ सकी है। शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे। शेख अब्दुल्ला का परदादा […] - [अल्लाह हमारी जान बचा (127)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be/): उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में ई.1910 में जन्मे श्यामनारायण पाण्डेय ने 17 सर्गों में हल्दीघाटी नामक काव्य की रचना की जिसे राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई। - [मुगल सेना की दुर्दशा (128)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be/): हल्दीघाटी का युद्ध (War of Haldighati) समाप्त होने के बाद महाराणा प्रता (Maharana Pratap) ने मुगल सेना की दुर्दशा की तथा उसे पहाड़ियों में कैद कर लिया। महाराणा प्रताप के भय से मुगल सेना अरावली के पहाड़ों में चूहों की तरह फंस गई। जब महाराणा प्रताप रक्ततलाई से हल्दीघाटी (Haldighati) होता हुआ पहाड़ों में चला […] - [मानसिंह की ड्यौढ़ी बंद (129)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a6/): कविराज श्यामलदास ने वीर विनोद में लिखा है कि इन आपत्तियों से घबराकर शाही सेना राजपूतों से लड़ती-भिड़ती अजमेर के लिए रवाना हो गई। मार्ग में महाराणा की सेना ने उन्हें जगह-जगह घेरा और बहुत से मुगल सैनिकों को मार डाला। - [मानसिंह पर संदेह (130)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b9/): अकबर को मानसिंह पर संदेह हल्दीघाटी युद्ध में अकबर की पराजय और प्रताप की विजय सूचित करता है जिसकी आधुनिक इतिहासकारों ने पूरी तरह अनदेखी की है। - [हल्दीघाटी युद्ध का परिणाम (131)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a3%e0%a4%be/): आधुनिक साम्यवादी लेखकों ने हल्दीघाटी के युद्ध के वास्तविक इतिहास पर जो धूल बिछाई है, आशा है कि इस तथ्यपरक विवेचन के बाद वह धूल छंट जाएगी। - [अकबर का गोगूंदा अभियान (132)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/): एक रात उन्होंने मुगलों की सेना पर छापा मारा और मुगलों के चार हाथी दुर्ग में लाकर महाराणा को भेंट किये। - [महाराणा प्रताप की हत्या करना चाहता था अकबर ! (133)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): दिसम्बर 1578 में शाहबाज खाँ पुनः मेवाड़ के लिये रवाना हुआ। उसके आते ही प्रताप फिर से पहाड़ों में चला गया। - [पीथल और पाथल (134)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a5%e0%a4%b2-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a5%e0%a4%b2/): पीथल (Pithal) और पाथल (Pathal) बीकानेर के राजकुमार पृथ्वीसिंह (Kunwar Prithvisingh Rathore) और मेवाड़ के महाराणा प्रतापसिंह (Maharana Pratap) को कहा जाता है। कन्हैयालाल सेठिया (Kanhaiyalal Sethia) ने इसी शीर्षक से एक कविता लिखकर पीथल और पाथल के बीच हुए संवाद का काव्यमय वर्णन किया है। यह घटना डिंगल के कवियों में विशेष लोकप्रिय है […] - [मीना बाजार (135)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0/): अकबर रूपी ठग भी एक दिन इस संसार से चला जायेगा और उसकी यह हाट भी उठ जायेगी परन्तु संसार में यह बात अमर रह जायगी कि क्षत्रियों के धर्म में रहकर उस धर्म को केवल राणा प्रतापसिंह ने ही निभाया। - [सिराजुद्दौला जिंदा होकर लौटा आया है!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%be/): बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला ईस्वी 1757 में मर गया था किंतु पूरे 267 साल बाद फिर से जीवित होकर भारत में घुसने की कोशिश कर रहा है। बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के अधीन वर्तमान बांग्लादेश के साथ-साथ पश्चिमी बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा के क्षेत्र भी शामिल थे। बांग्लादेश के मुसलमानों ने मांग की है कि […] - [हिन्दू धर्म के सिद्धांत ही बचा सकते हैं दुनिया को!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4/): आज दुनिया भर में जिस तरह बमों और मिसाइलों की बरसात की जा रही है, ऐसी स्थिति में केवल हिन्दू धर्म के सिद्धांत ही दुनिया को बचा सकते हैं! - [प्रियंका गांधी का भाषण क्या गांधियों के गौरव की पुनर्स्थापना है?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%a3/): लोकसभा में पहली बार हुआ कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी का भाषण गांधी परिवार के अतीत के गौरव की पुनर्स्थापना की चेष्टा से भरा हुआ था। यह स्वाभाविक ही है कि प्रत्येक नेता अपने, अपने परिवार के और अपने दल के गौरव का ही बखान करता है किंतु यह एक विचित्र सी बात थी कि […] - [हिन्दुओं का गौरवशाली अतीत लौटा पाएगी भाजपा?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%80/): हलांकि हिन्दू भारत भर में हजारों की संख्या में अपने पुराने धार्मिक स्थलों को फिर से पाना चाहते हैं किंतु वर्तमान में देश में केवल 10 मस्जिदों या दरगाहों के विरुद्ध 18 मामले लंबित हैं। - [बंग-भंग निरस्त नहीं हुआ होता तो लाखों हिन्दुओं के प्राण बच जाते!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ad%e0%a4%82%e0%a4%97/): इसमें कोई दो राय नहीं है कि बंग-भंग को भारतीय इतिहास में अंग्रेजी शासन के ऊपर एक कलंक के रूप में तथा गहरे काले धब्बे के रूप में देखा जाता है किंतु बंग-भंग के माध्यम से वायसराय लॉर्ड कर्जन क्या वास्तव में भारतीयों के साथ कोई घिनौना खेल खेल रहा था, इस निष्कर्ष पर पहुंचने […] - [दिवेर का युद्ध (136)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): दिवेर का युद्ध हल्दीघाटी के युद्ध (War of Haldighati) से भी अधिक परिणाम देने वाला था किंतु इतिहासकारों ने जानबूझ कर इस युद्ध की उपेक्षा की है क्योंकि इस युद्ध में महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने मुगलों में कसकर मार लगाई थी और प्रताप का मेवाड़ (Mewar) के बहुत से भूभाग पर फिर से अधिकार […] - [महाराणा प्रताप तथा अकबर (137)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%a4%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0/): क्या महाराणा प्रताप तथा अकबर का संघर्ष दो जातियों का संघर्ष था? निश्चित रूप से महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) तथा अकबर (Akbar) का संघर्ष दो जातियों का संघर्ष था किंतु साम्यवादी इतिहासकारों ने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत की रक्षा के लिए इसे केवल दो राजाओं के बीच का संघर्ष कहकर इसकी गरिमा को कम करने का […] - [हल्दीघाटी की ललकार! (138)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): जिन परिस्थितियों में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ, उन्हें देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत के राष्ट्रीय गौरव की किलकारी थी हल्दीघाटी की ललकार! - [शिया सुन्नी तथा सूफी (139)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%ab%e0%a5%80/): अकबर (Akbar) स्वयं सुन्नी मुसलमान (Sunni Musalman) था किंतु उसके रक्त में शिया (Shia) सुन्नी (Sunni) तथा सूफी (Sufi) तीनों का खून बहता था। वह इस्लाम की इन तीनों धाराओं का संयुक्त वारिस था। ईस्वी 1576 के आते-आते अकबर का राज्य काफी विस्तृत हो चुका था। इसलिए उसने अपनी प्रजा का प्रशासनिक नेतृत्व करने के […] - [अकबर का राज्य! (140)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/): यह सही है कि अकबर के संरक्षक बैराम खां (Bairam Khan, the guardian of Akbar) ने अकबर का राज्य स्थापित किया था और उसे दुश्मनों से बचाया था किंतु जिस समय बैराम खाँ इतिहास के नेपथ्य में गया, उस समय तक अकबर का राज्य बहुत छोटा था। उसने अपने बाहुबल, हिम्मत और अपनी सेनाओं के […] - [नरेन्द्र मोदी से अपेक्षा है बड़े बदलावों की!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/): भारत की जनता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपेक्षा है कि वे देश में बड़े बदलाव करें। हालांकि लोकतंत्रीय शासन पद्धति में प्रधानमंत्री अकेला निर्णय नहीं लेता, मंत्रिमण्डल के सामूहिक निर्णय से सरकार चलती है। मंत्रिमण्डल अपने राजनीतिक दल की नीतियों के अनुसार निर्णय लेता है तथा राजनीतिक दल जनता की अपेक्षा के अनुसार सरकार […] - [भगवान बुद्ध कौन थे?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a5%87/): यदि हिन्दू धर्म के अवतारवाद के दर्शन को अच्छी तरह से समझ लिया जाए तो यह गुत्थी बड़ी सरलता से सुलझ जाती है कि वैदिक ऋषि भगवान बुद्ध और शाक्यमुनि गौतम बुद्ध अलग-अलग हैं! - [हिन्दूधर्म और सिक्खपंथ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%96%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%a5/): भारत की आजादी के समय सिक्खों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर अपने उन पड़ौसियों एवं सगे सम्बन्धियों के प्राणों की रक्षा की जो सिक्ख नहीं थे, हिन्दू थे। हिन्दुओं ने भी सिक्खों के लिए अपनी जान की बाजी लगाई। - [राहुल गांधी का आचरण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): राहुल गांधी द्वारा विगत बीस वर्ष में किया गया आचरण गुण्डागर्दी की श्रेणी में आता है या नहीं! - [नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति !](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%a8%e0%a5%80/): हिन्दुओं को नरेन्द्र मोदी सरकार से सबसे पहली अपेक्षा यह है कि भारत में अवैध रूप से निवास कर रहे प्रत्येक रोहिंग्या को देश से बाहर निकालकर उनके अपने देशों बांगलादेश या बर्मा में धकेल दिया जाए। - [राम कालीन जातियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): इस आलेख में हम राम कालीन जातियाँ विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं। भगवान राम के समय भारत में कितनी जातियाँ निवास करती थीं, इसके सम्बन्ध में किसी ग्रंथ में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती किंतु विभिन्न प्राचीन ग्रंथों के आधार पर भगवान राम के काल की जातियों का अनुमान लगाया जा सकता है। आज भारत […] - [सनातन धर्म की रक्षा के लिए मठों से बाहर निकलने का समय आ गया!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/): भारत की जनता को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भारत में इस्लाम के प्रसार के लिए चलाए जा रहे षड़यंत्रों का ही सामना नहीं करना है, उन्हें उन ईसाई मिशनरियों का भी सामना करना है जो आदिवासियों, निर्धनों एवं भोलेभाले लोगों को चमत्कारों में फंसाकर हिन्दू धर्म से दूर कर रहे हैं। - [आरक्षण का लाभ गरीबों को देकर गरीबी दूर की जा सकती है](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ad/): आरक्षण का लाभ केवल गरीब परिवारों को देकर गरीबी दूर की जा सकती है! 1947 के विभाजन के बाद भारत में 34 करोड़ 50 लाख लोग रह गए थे। उस समय देश में 80 प्रतिशत लोग अर्थात् 27 करोड़ 60 लाख लोग गरीब थे। संविधान निर्माताओं ने गरीबी का कारण सामाजिक पिछड़ेपन को माना और […] - [अकबर महान् ! (141)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d/): अकबर बड़ी ऊंची उमंगों वाला बादशाह था और अपने जीवन के अंत समय तक वह अपना साम्राज्य बढ़ाने की धुन में चढ़ाइयां करता रहा। - [सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार में से कौन बड़ा है?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f/): जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की अनुशंसा भारत सरकार के लिए बाध्यकारी है या नहीं, जब से इस विषय पर चर्चा उठी है, तब से जनता में यह प्रश्न उठने लगा है कि ताकतवर कौन है, सुप्रीम कोर्ट या भारत सरकार? सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार में से कौन अधिक ताकतवर है, इसका कानूनी […] - [कांग्रेस की घटती हैसियत](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%a4/): कांग्रेस की घटती हैसियत का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि अब उसे आप जैसी पिद्दी पार्टियाँ भी मुँह लगाने से बचती हैं! पिछले एक दशक में भारत की राजनीति पूरी तरह करवट ले चुकी है। इस कारण कांग्रेस अब भारत के राजनीतिक परिदृश्य में छुटभैया राजनीतिक दलों की छोटी बहिन बनकर […] - [कानून धर्म के लिए होना चाहिए न कि धर्म निरपेक्षता की रक्षा के लिए!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%a8-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f/): कानून को निष्प्राण नहीं होना चाहिए। प्राणवान होना चाहिए और केवल प्राणवान ही नहीं होना चाहिए, धर्मप्राण भी होना चाहिए। कानून अंधा नहीं होना चाहिए, आंख वाला होना चाहिए! - [साईं बाबा की पूजा क्या जबर्दस्ती करवाओगे!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%88%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be/): साईं बाबा उर्फ चांद खाँ को फकीर मानकर आदर तो दे सकते हैं किंतु चांद खाँ को शिव, विष्णु और दुर्गा के समकक्ष बैठाकर पूज नहीं सकते। अपने सनातन धर्म के मंदिरों में स्थापित नहीं कर सकते। - [नसरुल्ला का जनाजा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be/): नसरुल्ला के शव पर एक खंरोच तक नहीं मिली। उसका शरीर पूरी तरह सुरक्षित है। दुनिया भर के लोगों का अनुमान है कि नसरुल्ला की मौत एक सुरक्षित बंकर में पहुंच रही बम धमाकों की आवाज सुनकर हृदयाघात से हुई। - [ऐश्वर्या राय से क्यों नाराज हैं राहुल गांधी?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%90%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af/): ऐश्वर्या राय एक फिल्म अभिनेत्री हैं और राहुल गांधी भारत की लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, दोनों एक दूसरे के रास्ते कहीं नहीं काटते, फिर भी राहुल गांधी ऐश्वर्या राय से क्यों नाराज हैं, यह समझ से परे है! राहुल गांधी का अयोध्या के राम मंदिर से क्या रिश्ता है, इसे समझना अधिक कठिन […] - [हसन नसरुल्लाह की मौत पर मुस्लिम देशों में दंगे!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9/): हसन नसरुल्लाह की मौत पर मुस्लिम देशों में बेचैनी है तथा मध्य एशिया के मुस्लिम दुशों में शिया-सुन्नी दंगे भड़क गए हैं। इस बीच हजारों पाकिस्तानियों ने 30 सितम्बर को पाकिस्तान की सरकार पर आरोप लगाया कि वह काफिरों का साथ दे रही है। इसके जवाब में पाकिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान के कई शहरों […] - [खतरनाक जॉम्बी बन रहे हैं हम!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%9c%e0%a5%89%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a5%80/): जॉम्बी बन जाने के कारण हम यह भी नहीं समझ पाते कि आज भारत के लोग जितना घी खा रहे हैं, क्या उतना घी हमें पशुओं के दूध से मिल सकता है? - [विपक्षी ईको सिस्टम - गुण्डे के प्राण बाद में निकलते हैं, जाति पहले निकलती है!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%88%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae/): भारत में गुण्डों की मौत पर बड़ी अजीब सी राजनीति होती है। गुण्डों के पक्ष में पूरा विपक्षी ईको सिस्टम खड़ा हुआ दिखाई देता है। संसार में ऐसा शायद ही कहीं होता हो! उत्तर प्रदेश में इन दिनों गोली-गोली पर लिखा है गुण्डे का नाम। पुलिस की गोलियां गुण्डों की टांगों का पीछा कर रही […] - [डॉ. मोहन भागवत की बातें आधी-अधूरी सी लगती हैं!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%a4/): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन मधुकर भागवत सार्वजनिक मंचों पर दिए गए भाषणों के माध्यम से हिन्दुओं को उनका धर्म स्मरण कराते रहते हैं। मैं भी हिन्दू हूँ तथा बचपन से ही संघ के संस्कारों में पला-बढ़ा हूँ, डॉ. हेडगवार, गुरु गोलवलकर, छत्रपति शिवाजी महाराजा और वीर विनायक दामोदर सावरकर के चित्रों […] - [मुसलमानों से अन्याय क्यों किया अकबर ने! (142)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af/): सोलहवीं शताब्दी ईस्वी के मुस्लिम उलेमा एवं मुल्ला-मौलवी (Ulema and Mullah-Maulvi) तो यह मानते ही थे कि अकबर (Akbar) ने मुसलमानों से अन्याय किया किंतु यह देखकर हैरानी होती है कि बीसवीं सदी के लेखक एवं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) भी यह मानते थे कि अकबर ने मुसलमानों से […] - [इबादतखाना (143)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%a4%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be/): अकबर द्वारा स्थापित इबादतखाना सोलहवीं शताब्दी ईस्वी के युग में एक बहुत बड़ी घटना थी। अकबर इसके माध्यम से विभिन्न मजहबों एवं पंथों के नेताओं के बीच बहस करवाकर धर्म के किसी वास्तविक स्वरूप की खोज करना चाहता था किंतु अकबर इसमें बुरी तरह असफल हुआ। इसका कारण यह था कि अकबर केवल यह छोटा […] - [अकबर का मजहबी चिन्तन (144)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%ac%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): अकबर का मजहबी चिन्तन (Akbar’s religious thought) जहाँ अकबर के भीतर अंसतोष को जन्म देता था वहीं दूसरी ओर सभी मजहबों के नेताओं को निराश करता था। अकबर का मजहबी चिन्तन न तो अकबर को मुसलमान रहने देता था और न किसी और मजहब को अपनाने देता था। इस कारण विभिन्न मुल्ला-मौलवी उसे इस्लाम का […] - [केजरीवाल ...... थोड़ी-थोड़ी और बजेगी!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2/): भारत की राजनीति में यह एक कमाल का कारनामा हुआ है, जिस समय तक केजरीवाल जेल में बंद थे, तब तक तो वे सरकारी कागज पर हस्ताक्षर कर सकते थे किंतु जेल से बाहर आने पर उनकी यह शक्ति छीन ली गई है। इस पर भी केजरीवाल ने जेल से बाहर आते ही यह वक्तव्य […] - [क्या अकबर मुसलमान था ? (145)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%be/): इतिहासकारों ने इस प्रश्न को लेकर बहुत माथापच्ची की है कि क्या अकबर मुसलमान था? (Was Akbar a Muslim?) विभिन्न इतिहासकारों ने इस प्रश्न का उत्तर अलग-अलग ढंग से दिया है। अधिकांश विदेशी इतिहासकारों का मानना है कि अकबर निश्चित रूप से जीवन भर इस्लाम और पैगम्बर (Islam and Prophet) पर विश्वास करता रहा इसलिए […] - [अकबर का इस्लाम (146)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae/): इस्लाम तो एक (Islam is One) ही है किंतु समय-समय पर मुस्लिम शासकों ने इस्लाम की अलग-अलग व्याख्या करने के प्रयास किए हैं ताकि वे स्वयं को मजहबी नेता भी घोषित कर सकें। मुस्लिम शासकों की इन चेष्टाओं से मुल्ला, मौलवी, उलेमा आदि उनके विरोधी हो जाते थे। अकबर का इस्लाम भी अपने काल के […] - [अल्लाह का दूत (147)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a4/): शहंशाह को देखकर संवेदनशील लोग मुस्कुराए और बोले यह आश्चर्यजनक है कि हुजूर को अजमेर के ख्वाजा में इतना विश्वास है जबकि हुजूर ने अपने पैगम्बर के हर आधार को नकार दिया है जिसकी पोशाक से ख्वाजा जैसे सैंकड़ों-हजारों पीर निकले हैं। - [मुल्लों को दण्ड (148)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1/): जब मुल्लों ने अकबर को इस्लाम विरोधी बताकर हल्ला मचाया तो अकबर ने मुल्लों को दण्ड देने का निश्चय किया।  अकबर ने मुल्लों को धागों की तरह बिखेर दिया! जब अकबर ने इस्लाम की व्याख्या करने के विषय में स्वयं को समस्त उलेमाओं से ऊपर घोषित कर दिया तो सल्तनत के बहुत से मुल्ला अकबर […] - [हाजी इब्राहीम सरहिंदी (149)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/): एक बलूची के एक ही स्त्री से 25 बच्चे थे। वह बलूची एक दिन अकबर के दरबार में उपस्थित हुआ तथा उसने अकबर से कहा कि यह स्त्री बहुत भली है किंतु इसके 25 बच्चे हो गए हैं जिनके कारण मेरा जीवन मुश्किल हो गया है तथा यह स्त्री मेरे लिए हराम हो गई है। मेरे दुःखों का कोई इलाज नहीं है। - [राय पुरुषोत्तम को धोखे से मार दिया अकबर के सेनापतियों ने! (150)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae/): राय पुरुषोत्तम अकबर का एक हिन्दू मंत्री था। उसने अकबर को हिन्दू धर्मग्रंथों का अध्ययन करवाया था। अकबर के मुसलमान मंत्री राय पुरुषोत्तम को पसंद नहीं करते थे और उसके विरुद्ध षड़यंत्र रचते रहते थे। अकबर को सूचना मिली कि गुजरात की तरफ के कुछ बंदरगाहों पर यूरोपियन लोग हज पर जाने वाले मुसलमानों को […] - [विपक्षी सांसद एवं विधायक राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित !](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95/): जब से पड़ौसी देश बांगलादेश में हिन्दुओं का भयानक नरसंहार हुआ है, तब से भारत का हिन्दू मतदाता तो अपने भविष्य को लेकर चिंतित है ही, साथ ही सैंकड़ों विपक्षी सांसद एवं विधायक भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस चिंता के कारण बहुत स्पष्ट हैं। भारत के मतदाताओं को टीवी चैनलों पर […] - [अकबर के दरबारी (151)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनी की दृष्टि में अकबर के दरबारी मूर्खों की टुकड़ी थे जो हर समय अकबर को प्रसन्न करने के लिए इस्लाम विरोधी बातें करते थे और अकबर को सूअर एवं कुत्तों की पूजा करने के लिए उकसाते थे। मुल्ला की दृष्टि में अकबर के दरबारी कितने गिरे हुए थे, इसे लक्ष्य करके […] - [अकबर इस्लाम विरोधी था? (152)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%a5%e0%a4%be/):  अकबर कालीन मुल्लाओं ने यह आरोप बारबार लगाया है कि अकबर इस्लाम विरोधी था! बदायूनी का यह आरोप सही है कि कुछ चापलूसों में अकबर को महान् बताने एवं अकबर के माध्यम से धरती का उपकार होने की पुरानी भविष्यवाणियां बताने की होड़ मच गई। मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनी ने इन चापलूस लोगों पर तक-तक […] - [मुल्ला बदायूनी के आरोप (153)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a5%80/): अमीरों के बच्चों की पढ़ाई का विरोध करते हुए बदायूनी ने लिखा है कि नए सीखने वाले बच्चों के हाथ में ज्योतिषीय गणनाओं के लेख मत रखो। एक घोड़ा जो अरबी नस्ल का है, उस पर यूनानी ठप्पा मत लगाओ। - [रज्मनामाह (154)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9/): मुल्ला लिखता है कि इस पुस्तक में मुझे ऐसे-ऐसे वार्तालाप पढ़ने को मिले, जिन्हें मैंने कभी किसी ग्रंथ में नहीं पढ़ा था, जैसे कि क्या मुझ अभक्ष्य चीजें खानी चाहिए, क्या मुझे कंद-मूल खाने चाहिए! मुल्ला लिखता है कि मेरा भाग्य ही खराब था जो मुझे ऐसे गंदे काम में लगना पड़ा। - [अकबर द्वारा सूर्य-पूजन (155)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8/): रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रंथों को पढ़ने के बाद अकबर की रुचि सूर्यपूजन की तरफ जागृत हुई। - [संत कुम्भनदास और अकबर (156)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%a8%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): संत कुम्भनदास और अकबर समकालीन थे। अकबर चाहता था कि संत कुंभनदास फतहपुर सीकरी आकर रहें तथा अकबर के नवरत्न बन जाएं किंतु कुंभनदास को  राजसी वैभव की कोई लालसा नहीं थी। उन्होंने अकबर से कहलवाया कि जिस अकबर का मुंह देखकर दुःख उत्पन्न होता है उसे फतहपुर सीकरी आकर सलाम क्यों करूं? बीरबल आदि […] - [संत तुलसीदास और अकबर (157)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0/): संत तुलसीदास और अकबर समकालीन थे। तुलसीदास संत थे और अकबर बादशाह किंतु तुलसीदास की प्रसिद्धि अकबर से भी अधिक थी। अकबर चाहता था कि संत तुलसीदास और अकबर का साथ हो जाए किंतु तुलसी बाबा अकबर का मुंह देखने को भी तैयार नहीं थे। अकबर ने वैष्णव संतों को अपने दरबार में बुलाने के […] - [कल्ला राठौड़ ने भरे दरबार में मूंछों पर ताव देकर अकबर को चुनौती दी (158)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a5%8c%e0%a4%a1%e0%a4%bc/): राजस्थान के इतिहास में दो कल्ला राठौड़ हुए हैं, दोनों ही अकबर के समकालीन थे। एक मेड़ता का राजकुमार था और दूसरा सियाना का शासक। इस कड़ी में हम सियाना के जागीरदार की चर्चा कर रहे हैं। यद्यपि अब तक राजपूताना के अधिकांश हिन्दू शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी तथापि उनमें […] - [मुताह (159)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b9/): मध्यकाल में अरब के लोगों में गुलाम-दम्पत्तियों की पुत्रियों एवं गुलाम औरतों को पत्नी के रूप में भोगने का चलन था और उसे निकाह की सीमा से बाहर माना जाता था। कुछ लोग ऐसी औरतों से मुताह के माध्यम से शादी कर लेते थे और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में भोगते थे। - [कोट पर जनेऊ डालकर घूमने वाले से डरते हैं लोग!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%8a/): भारत में कानून के दायरे में रहकर जिंदगी जीने वाला कोई भी व्यक्ति किसी से नहीं डरता किंतु कोट पर जनेऊ डालकर घूमने वाले से हर कोई डरता है! यह अनोखा क्रांतिकारी अमरीकियों से हमारी जाने क्या शिकायत कर आए, यह सोचकर हर कोई भयभीत रहता है। राहुल गांधी ने अमरीका वालों से जाकर शिकायत […] - [मोहन भागवत आखिर चाहते क्या हैं?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%a4/): मोहन भागवत भले ही नाम न लें किंतु बीजेबी के समर्थकों एवं विरोधियों दोनों को समझ में आता है कि वह स्वयंसेवक कौन है जो मोहन भागवत की दृष्टि में घमण्डी हो गया है और स्वयं को भगवान समझने लगा है! - [रेल कर्मचारी हैं कि अराजक तत्व!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): इन दिनों आगरा एवं गंगापुर सिटी मण्डलों के रेल कर्मचारी उदयपुर-आगरा कैंट वंदे भारत ट्रेन के संचालन को लेकर आपस में जो मारपीट कर रहे हैं, उसने संसार के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय रेल की संस्कृति का सिर शर्म से झुका देने जैसा काम किया है। यह मारपीट कई दिनों से चल रही है। रेल […] - [जातीय जगनणना में दूर खड़ी मुस्कुराएंगी सवर्ण जातियाँ !](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%a3%e0%a4%a8%e0%a4%be/): अब तक दलित वर्ग में आरक्षण का बड़ा हिस्सा खा रहीं यूपी की जाटव और बिहार की पासवान जैसी जातियां, जनजाति वर्ग में मीणा, ओबीसी वर्ग में कुर्मी और यादव जैसी जातियां, राजस्थान में जाट, माली और चारण जैसी जातियाँ संभवतः आरक्षण का वैसा लाभ न ले सकें जैसा वे अब तक लेती आई हैं। - [जातीय उन्माद के भंवर में फंस गई देश की कश्ती!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a6/): हिन्दू समाज को जातियों के नाम पर लड़वाने का अधिकांश काम तो पहले ही पूरा हो चुका है। अब तो एस सी को एस सी से, एसटी को एस टी से और ओबीसी को ओबीसी से लड़वाना ही बाकी रहा है। - [चिराग पासवान खो चुके हैं अपनी विश्वसनीयता!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%97-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8/): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही एनडीए की तीसरी सरकार के तीन बड़े स्टेक होल्डरों में से तीसरे चिराग पासवान ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अपनी विश्वसनीयता खो दी है! पिछले दिनों उन्होंने जातीय जनगणना के मामले में राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाया, वक्फ बोर्ड के प्रावधानों पर आपत्ति की तथा […] - [ममताबनर्जी की असली ताकत कौन है?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%a4/): भारत के संविधान ने केन्द्र सरकार को जिम्मदारी दी है कि वह राज्य की जनता को अराजकता एवं निरंकुश शासन से बचाए। - [कंगना रनौत ने गलत क्या कहा?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a4/): लोकतंत्र हो अथवा राजतंत्र राजनीति में सत्य को प्रायः दूसरा स्थान मिलता है, पहला स्थान पाखण्ड को मिलता है। इसी पाखण्ड को राजनीति और कूटनीति कहा जाता है। यही कारण है कि कंगना रनौत सत्य बोलकर कई बार विरोधियों के निशाने पर आ जाती हैं। हर बार उन्हें अपने द्वारा बोले गए सत्य के लिए […] - [योगी आदित्यनाथ की आवाज सुनो!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5/): योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के दिन जो कुछ कहा, वैसा कहने की हिम्मत वर्ष 2014 से पहले देश में केवल दो ही राजनेताओं में थी, एक तो स्वयं योगी आदित्यनाथ जिन्होंने भारत की संसद में सनातन की रक्षा के लिए राजनीतिक दलों से बार-बार गुहार लगाई और दूसरे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री […] - [कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d/): श्रीकृष्ण के प्रयासों से वैदिक धर्म ने नया रूप धारण किया। मन की उदारता और हृदय की विशालता को हिन्दुओं ने अपनी संस्कृति का अभिन्न अंग बना लिया। - [छत्रपति शिवाजी संघर्ष एवं उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%8f%e0%a4%b5/): छत्रपति शिवाजी संघर्ष एवं उपलब्धियाँ शीर्षक से लिखी गई इस पुस्तक में हिन्दू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी राजे की जीवनी, इतिहास, उपलब्धियों एवं संघर्षों को उस काल की परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में लिखा गया है। प्रायद्वीपीय भारत के उत्तरी केन्द्र में तथा भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित महाराष्ट्र में भारत की कई महान् विभूतियों का […] - [सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रेरक एवं रोचक प्रसंग](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ad-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b2/): सरदार पटेल के व्यक्तित्व का आकर्षण न केवल उस समय के ब्रिटिश शासकों, भारतीय नेताओं और देशवासियों के सिर चढ़कर बोलता था अपितु आज भी देशवासियों के दिलों की धड़कनें बढ़ा देता है। - [भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या एवं हिन्दू प्रतिरोध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be/): इस पुस्तक में भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या एवं हिन्दू प्रतिरोध का संक्षिप्त इतिहास लिखा गया है। हिन्दू धर्म, भारतवर्ष की भूमि पर आकार लेने वाला प्रथम धर्म है। जब हम भारतवर्ष की बात करते हैं तो उसका आशय आज के ‘यूनियन ऑफ इण्डिया जो कि भारत’ से नहीं अपितु हिन्दुकुश पर्वत से लेकर आज […] - [भारत की लुप्त सभ्यताएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): मानव सभ्यता के उस कालखण्ड को जिसमें मानव अर्थात् ‘आदिमानव’ पत्थर, लकड़ी एवं हड्डी के औजार और उपकरण काम में ले रहा था, प्रागैतिहासिक कालखण्ड है और जहाँ से मानव अर्थात् ‘विकसित मानव’ धातुकालीन सभ्यता में प्रवेश करता है, वहीं से मानव सभ्यता का ऐतिहासिक काल आरम्भ होता है। - [भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का इतिहास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83/): भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का इतिहास का लेखन विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रमों के आधार पर किया गया है। ‘भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति’ विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता और संस्कृतियों में से एक है। इसके उद्भव के समय दक्षिणी अमरीका की माया सभ्यता, अफ्रीका में नील नदी के किनारे विकसित मिश्र की सभ्यता और एशिया में विकसित सुमेरियन […] - [भारत के मुगलकालीन प्रमुख भवन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96/): भारतीय भवनों का यह विध्वंस दिल्ली सल्तनत-काल एवं मुगल सल्तनत-काल में निरंतर जारी रहा किंतु मुगलों ने जहाँ एक ओर मंदिरों को तोड़कर नष्ट किया वहीं नवीन महलों, मकबरों, मस्जिदों, उद्यानों आदि का निर्माण भी किया। - [दिल्ली सल्तनत की दर्दभरी दास्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%80/): भारत की भौतिक सम्पदा की कहानियाँ दूर-दूर तक व्याप्त हो जाने से दूरस्थ देशों के लोग भारत को लूटने के लिए लालायित रहने लगे। यही कारण था कि ईसा के जन्म से सैंकड़ों साल पहले पश्चिमी आक्रांताओं ने हिन्दुकुश पर्वत को पार करके भारत पर आक्रमण करने आरम्भ कर दिए। - [बाबर के बेटों की दर्दभरी दास्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a6/): बाबर ने हुमायूं को अपनी सल्तनत का सर्वेसर्वा तो बनाया किंतु उसे यह जिम्मेदारी भी दी कि चाहे उसके भाई उसके प्रति कितने ही अपराध क्यों न करें, हुमायूं अपने भाइयों को क्षमा करे तथा उन्हें कभी दण्डित न करे। - [विजयनगर साम्राज्य का इतिहास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/): यदि यह कहा जाए कि विजयनगर साम्राज्य भारत माता की आत्मा द्वारा संजोया गया एक स्वर्णिम-स्वप्न था जिसे आर्य संस्कृति के चारों वर्णों- ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों एवं शिल्पियों ने मिलकर साकार किया था, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। - [गोस्वामी तुलसीदास का जीवनवृत्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): गोस्वामीजी का बाल्यकाल अत्यंत कठिन था। माँ उन्हें जन्म देने के कुछ समय बाद ही मृत्यु को प्राप्त हुई और पिता की छाया भी जल्दी ही छिन गई। - [प्रथम सिद्ध सरहपाद](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6/): चौरासी सिद्धों की परम्परा में हुए प्रथम सिद्ध सरहपाद ने भारत के साहित्य, दर्शन एवं अध्यात्म को गहराई तक प्रभावित किया। - [सरहपा का साहित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): सरहपा का साहित्य सातवीं-आठवीं शताब्दी ईस्वी के भारत में भाषा, साहित्य एवं दर्शन की महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। उन्हें हिन्दी सहित अनेक भाषाओं के प्रथम कवि के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने लम्बी आयु पाई तथा भारत भ्रमण करते हुए भी विपुल साहित्य की रचना की। सरहपा को सरहपाद भी कहा जाता है। उनके […] - [सरहपाद बौद्ध या हिन्दू !](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82/): सरहपाद अथवा सरहपा द्वारा प्रतिपादित सहजयान सम्प्रदाय को बौद्धधर्म के अंतर्गत गिना जाता है किंतु दार्शनिक स्तर पर सरहपाद बौद्धदर्शन से काफी दूर है। - [श्रीराम जन्मभूमि मंदिर किसने तोड़ा?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0/): महमूद गजनवी का उद्देश्य मंदिरों की सम्पदा को लूटना था। राममंदिर इसलिए महत्वहीन था क्योंकि वहाँ सम्पदा मिलने की आशा नहीं थी। - [सती सावित्री सीता क्या कमजोर नारियाँ हैं?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be/): सती, सावित्री, सीता एवं अनुसुइया जैसे नारी चरित्र जो हजारों वर्षों से भारतीय समाज के समक्ष आदर्श बने रहे हैं, क्या ये पौराणिक युग के नारी चरित्र भारतीय नारियों की कमजोरी के प्रतीक हैं ? - [श्रीराम जन्मभूमि पर वामपंथी इतिहासकारों का मकड़जाल](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf/): वर्ष 2024 के आरम्भ में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का उद्घाटन होने के साथ ही यद्यपि रामजन्मभूमि संघर्ष का पटाक्षेप हो चुका है तथापि इस विषय पर वामपंथी इतिहासकारों का मकड़जाल अपने पीछे कई प्रश्न छोड़ गया है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का धरती पर कब अवतरण हुआ, उनका प्राकट्य किस स्थान पर हुआ, उनकी लीलाएं […] - [मैं भी जाट हूँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/): एक बार ब्रिटिश संसद के अध्यक्ष बर्नाड वैदरहिल भारत की लोकसभा के अध्यक्ष डॉ. बलराम जाखड़ से कहा था कि मैं भी जाट हूँ। यह किस्सा सुनाने से पहले हम राजस्थान के एक गांव में रहने वाली सुनहरी बालों वाली लड़की का किस्सा जानते हैं। - [जाट कौन हैं - कहाँ से आए हैं!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%8f-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/): यह एक प्राचीन भारतीय जाति है। भारत की अन्य बहुत सी जातियों की तरह इस जाति का इतिहास भी उलझा हुआ है। - [क्या गुर्जर जनजाति है!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): भारत में गुर्जरों का अधिवास बड़ी संख्या में पाया जाता है। यह जाति कश्मीर की घाटियों से लेकर, पंजाब की नदी क्षेत्रों, राजस्थान के मैदानों तथा नीचे मध्यप्रदेश आदि प्रांतों में पाई जाती है। - [भारतीय दर्शन परम्परा](https://bharatkaitihas.com/traditional-indian-philosophy/): भारतीय दर्शन परम्परा षड्दर्शन के रूप में प्रकट हुई। दर्शन के ये समस्त छः अंग  अर्थात् सांख्य, योग, न्याय, मीमांसा, वेदांत और वैशेषिक; पूर्णतः आस्तिक हैं अर्थात् वे वेदों को प्रामाणिक मानते हैं। मीमांसा को छोड़कर अन्य सभी दर्शन ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करते हैं। - [विशिष्टाद्वैत के प्रवर्तक रामानुजाचार्य](https://bharatkaitihas.com/ramanujacharya-philosopher-of-vishishtadwait/): यामुनाचार्य के पश्चात रामानुजाचार्य ने वैष्णव तत्व के प्रचार-प्रसार को तमिलनाडु से बाहर भी फैलाया तथा कर्नाटक के तोण्डसुर में जयस्तम्भ स्थापित किया। रामानुजाचार्य ने तमिलनाडु में श्रीरंगम के रंगनाथ (विष्णु) मंदिर में आचार्य पद पर अधिष्ठित रहते हुए मन्दिर में सेवा-अर्चा एवं अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित नियमों का निर्धारण किया। - [वैष्णव संत रामानंद से पहले हिन्दू धर्म की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/vaishnav-saint-ramananda/): वैष्णव संत रामानंद का जन्म ईस्वी 1299 में हुआ। उनके अवतरण से पहले हिन्दू धर्म में याज्ञिक कर्मकाण्ड के वैभवपूर्ण आयोजन होते थे। कर्मकाण्ड की जटिलता के कारण उस काल में वैदिक धर्म जनसामान्य की पहुँच से दूर होता जा रहा था। एक समय ऐसा भी आया जब वैदिक धर्म केवल राजाओं, पुरोहितों और श्रेष्ठियों […] - [रामानंद की समन्वयवादी परम्परा](https://bharatkaitihas.com/message-of-religious-harmony-by-ramananda/): रामानुजाचार्य की शिष्य परंपरा में विक्रम की चौदहवीं शताब्दी में श्री संप्रदाय के प्रधान आचार्य राघवानंद हुए। राघवानंद, रामानंद को दीक्षा देकर निश्चिंत हुए। - [रामानंद के शिष्य](https://bharatkaitihas.com/ramananda-and-his-pupil/): वैष्णव संत रामानंद तथा रामानंद के शिष्य पंद्रहवीं-सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में भारतीय जनमानस का अध्यात्मिक नेतृत्व करने के लिए विशेष भूमिका निभाने में सफल रहे। - [गोस्वामी तुलसीदास का काव्य तत्कालीन समय का इतिहास है!](https://bharatkaitihas.com/poetry-of-goswami-tulsidas-is-mirror-of-his-time/): तुलसी के राम इतने विलक्षण हैं कि वे एक ही समय में शस्त्र, शास्त्र, धर्म एवं नीति के पथ पर चलते हुए, अपने कर्म और आचरण के माध्यम से अपने पक्ष में लोकमत तैयार करते हैं। - [गोस्वामी तुलसीदास की दृष्टि में लौकिक दु:ख](https://bharatkaitihas.com/vision-of-goswami-tulsidas/): गोस्वामी तुलसीदास की दृष्टि उनके साहित्य में निहित लोकहित पर टिकी हुई है। उनके साहित्य के सम्बन्ध में लोकदृष्टि पर जितनी अधिक बात हुई है, उतनी बात किसी और साहित्यकार की दृष्टि पर नहीं हुई। यह एक अद्भुत बात है कि जिसकी दृष्टि सबसे अधिक स्पष्ट है, उसी की दृष्टि पर सर्वाधिक बात हुई। यद्यपि […] - [रामचरित मानस में ज्योतिष](https://bharatkaitihas.com/astrology-in-ram-charit-manas/): यद्यपि गोस्वामी तुलसीदास का सम्पूर्ण साहित्य धर्म, दर्शन एवं अध्यात्म को लक्ष्य बनाकर लिखा गया है तथापि उनका सर्वप्रधान लक्ष्य लोकमंगल है। किसी कालजयी साहित्य के जितने भी विराट् लक्ष्य हो सकते हैं, गोस्वामी तुलसीदास का साहित्य उन लक्ष्यों को एक साथ साधता है। इस लेख में हम गोस्वामीजी के साहित्य में वर्णित ज्योतिषीय उल्लेखों पर चर्चा कर रहे हैं। - [रामाज्ञा-प्रश्न में ज्योतिष की अनूठी पद्धति](https://bharatkaitihas.com/astrology-in-ramagya-prashna/): अपने मित्र गंगाराम ज्योतिषी की सहायता करने के लिए गोस्वामीजी ने केवल छः घण्टे में 'रामाज्ञा-प्रश्न' की रचना की। इस ग्रन्थ में सात सर्ग हैं। प्रत्येक सर्ग में सात-सात सप्तक हैं। सभी सप्तकों में सात-सात दोहे हैं। इसके सातवें सर्ग के सातवें सप्तक में गोस्वामीजी ने शकुन-प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने की विधि बतलायी है। - [दोहावली में ज्योतिष शास्त्र के संदर्भ](https://bharatkaitihas.com/astrology-in-dohawali/): कौन-सी तिथि किस दिन पड़ने पर हानिकारक एवं कष्टदायी योग बनाती हैं, इससे सम्बन्धित एक दोहा, दोहावली में इस प्रकार कहा गया है- रविवार को द्वादशी, सोमवार को एकादशी, मंगलवार को दशमी, बुधवार को तृतीया, गुरुवार को षष्ठी, शुक्रवार को द्वितीया और शनिवार को सप्तमी तिथियाँ पड़ती हैं, तब ये कुयोग का सूचक और सर्वसामान्य के लिये हानिकारक योग बनाती हैं। - [राजा टोडरमल ने अकबर के अधिकारियों को जेलों में सड़ा दिया! (160)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%b2/): टोडरमल ने बहुत से बेईमान अधिकारियों को तब तक जेल में रखा जब तक कि वे मर नहीं गए। इस कारण टोडरमल को जल्लादों एवं तलवारों से प्राण लेने वालों की जरूरत ही नहीं पड़ी - [मुगलिया राजनीति में बड़ी चालाकी से सुलहकुल का प्रवेश हुआ!](https://bharatkaitihas.com/mughal-politics-and-sulahkul-policy/): बहुत कम आयु में ही अकबर समझ चुका था कि वह हिन्दू शासकों से लड़कर लम्बे समय तक अपनी सल्तनत में बना नहीं रह सकता। उसे किसी न किसी प्रकार से हिन्दू शासकों को अपने अधीन करने का मार्ग ढूंढना था। अपने इसी विचार के कारण अकबर ने बड़ी ही चालाकी से मुगलिया राजनीति में सुलह-कुल की नीति का प्रर्वत्तन किया। - [देहदान है महादान !](https://bharatkaitihas.com/dehadaan-hai-mahaadaan/): वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं चिकित्सा विज्ञान के छात्रों के लिए मनुष्य की मृत देह की आज भी उतनी ही आवश्यकता है जितनी पंद्रहवीं-सोलहवीं शताब्दी में थी। ऐसा लगता है मानो धर्म, कानून और विज्ञान इस बिंदु पर आकर उलझ गए हों। इस उलझन को दूर करता है देहदान है महादान का महामंत्र। - [चित्रकूट की ओर (123)](https://bharatkaitihas.com/towards-chitrakoot/): – ‘शहंशाहे आलम! गुलाम की दरख्वास्त है कि मुझे कुछ दिनों के लिये चित्रकूट जाने की इजाजत दी जाये।’ खानखाना ने जहाँगीर के सामने उपस्थित हो कर निवेदन किया। – ‘क्यों अतालीक बाबा? यहाँ किसी किस्म की तकलीफ है आपको?’ जहाँगीर ने अपने स्वभाव के विपरीत स्वर कोमल ही रखा जाने क्यों आज उसे अपने […] - [सब भाड़ में (124)](https://bharatkaitihas.com/sab-bhaad-mein/): रहीम ने भाड़ में घास झौंकते हुए रीवां नरेश को जवाब दिया कि जिस रहीम के सिर पर विशाल मुगलिया सल्तनत का भार था उस रहीम ने सल्तनत का भार सब भाड़ में झौंक दिया है। रीवां नरेश की आँखें फटी की फटी रह गयीं। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि जो दृश्य वे अपनी आँखों […] - [गोद लिये हुलसी फिरै (125)](https://bharatkaitihas.com/god-liye-hulasee-phirai/): गुसाईंजी ने वृद्ध ब्राह्मण के हाथों से चिट्ठी लेकर पढ़ी तो उनके नेत्रों से आंसुओं की धारा बह निकली। खानखाना ने उसमें लिखा था- गोद लिये हुलसी फिरै तुलसी सो सुत होय। – ‘तुलसी बाबा! ई बूढ़ा विप्र तोहरे शरण में आइ बा। हमार रक्षा आप न करिहैं तो कवन करे?’ एक बूढ़ा ब्राह्मण गुसाईंजी […] - [बादशाह का अपहरण (126)](https://bharatkaitihas.com/kidnapping-of-badshah/): आखिर वही हुआ जो नूरजहाँ चाहती थी, खुर्रम अपने बाप की नजरों में गिर गया। खुसरो पहले ही मर चुका था और जहाँदार वैसे भी किसी काम का न था। इस प्रकार शहरयार के बादशाह के तख्त तक पहुँचने के मार्ग में आने वाली तीन बाधायें स्वतः हट चुकी थीं। अब केवल परवेज बचा था […] - [खीरा सिर से काटिये (127)](https://bharatkaitihas.com/kheera-sir-se-kaatiye/): खानखाना के बेटे दाराबखाँ की पुत्री नूरजहाँ के भाई आसिफखाँ के बेटे शायस्ताखाँ को ब्याही गयी थी। चूंकि दाराबखाँ और दाराबखाँ के बेटे को महावतखाँ ने मार डाला था इसलिये खानखाना की यह पौत्री महावतखाँ से बड़ी क्रुद्ध रहा करती थी। महावतखाँ का कोई भी परिचित आदमी जब भी उससे मिलता तो वह एक ही […] - [बेरहम वक्त (128)](https://bharatkaitihas.com/beraham-vakt/): – ‘इस कुतिया के बच्चे को कह कि हुक्का भर कर लाये नहीं तो मार-मार कर चमड़ी उधेड़ दूंगा।’ शराब के नशे में धुत्त कुंवर हरिसिंह ने चिल्लाकर कहा तो खुर्रम की रूह कांप गयी। हुक्का लाने वाली दासी भी कुंवर का यह रौद्र रूप देखकर सहम गयी। ऐसा घनघोर अपमान! खुर्रम तो स्वप्न में […] - [काला साया (129)](https://bharatkaitihas.com/kaala-saaya/): बदजात महावतखाँ बादशाह से कोई दुर्व्यवहार तो नहीं करता था किंतु उसने बादशाह पर ढेर सारी पाबंदियाँ लाद दी थीं जो किसी दुर्व्यवहार से कम नहीं थीं। बिना महावतखाँ की इजाजत के कोई परिंदा तक बादशाह के पास पर नहीं मार सकता था। उसे सुबह-शाम दो सेर शराब और आधा सेर कबाब दिया जाता था। […] - [फिर से दक्खिन (130)](https://bharatkaitihas.com/south-again-raheem/): नूरजहाँ ने जहाँगीर को आया देखकर सिर पीट लिया किंतु बाहर से उसने बड़ी प्रसन्नता जाहिर की और बादशाह का स्वागत किया। अगली रात नूरजहाँ के डेरों में बड़ा भारी जलसा किया गया। जलसे में ईरान से आयी हुई उन खूबसूरत रक्कासाओं के ऊपर अशर्फियाँ उछाली गयीं किंतु बादशाही आदेश से इस जलसे में किसी […] - [दुखती रग (131)](https://bharatkaitihas.com/dukhatee-rag/): महावतखाँ लड़ता कम था और भागता अधिक था। उधर खानखाना लड़ना तो चाहता था किंतु किसी मैदान में अच्छी तरह मोर्चा बांधकर। इस कारण दोनों ही सेनाएं छुट-पुट लड़ाईयाँ ही करती थीं। जब दक्खिन बहुत कम दूरी पर रह गया तब खानखाना ने पूरी ताकत के साथ महावतखाँ पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। जब […] - [अद्भुत बालक (132)](https://bharatkaitihas.com/wonderful-child/): जेठ का महीना है और सूर्यदेव आकाश के ठीक मध्य में विराजमान हैं। सन-सनाती लू से परिपूर्ण आकाश में धूल के तप्त कण घुल जाने से जब वायु कानों में घुसती है तो लगता है किसी ने पिघला हुआ सीसा उंडेल दिया है। ऐसी विकट गर्मी में मनुष्यों और पशुओं की कौन कहे, चिड़ियों तक […] - [बेहोशी (133)](https://bharatkaitihas.com/unconscious/): आज पूरे चार दिन बाद रहीम की बेहोशी टूटी थी। जाने कहाँ-कहाँ से ढूंढ कर लायी थी जाना उसे। तीन दिनों की भागम भाग के बाद खानखाना दिल्ली के बाहर जंगलों में बेसुध पड़ा हुआ मिला था। – ‘बेटी जाना!’ – ‘हाँ अब्बा हुजूर।’ – ‘देखो तो कमरे में कितना अंधेरा घिर आया है, जरा […] - [उड़ गया चातक (134)](https://bharatkaitihas.com/ud-gaya-chatak/): खानखाना की चेतना लौटी। उसने देखा हवेली पूरी तरह निस्तब्ध है। कहीं से कोई शब्द नहीं। बेटी जाना बाप के पलंग पर ही कंधा रखकर सो गयी है। शमां की रौशनी तेल खत्म हो जाने से अपने अंतिम क्षण गिन रही है जिससे कमरे में अंधेरा छाता जा रहा है। पूरी रात खानखाना सुधि और […] - [उच्छवास (135)](https://bharatkaitihas.com/uchhawas-the-lastthoughts/): मैं इस उपन्यास की भूमिका में लिख आया हूँ- ”उस युग में एक सिपाही का कवि हो जाना कितनी बड़ी बात थी इसका अनुमान लगा पाना आज की परिस्थितियों में संभव नहीं है।” उपन्यास के पूरा हो जाने पर मैं उच्छवास के रूप मेंइस वक्तव्य में कुछ और भी जोड़ना चाहता हूँ। उस युग में […] - [प्रस्तावना - चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/preface-chishtiya-suphi-sampradaya/): प्रस्तावना – चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया गया है। बहुत से लोग सूफीवाद को इस्लाम का एक रूप मानते हैं तथा सूफियों को मुसलमान मानते हैं किंतु सूफीवाद का उदय इस्लाम के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति के रूप में हुआ। […] - [इस्लाम का उदय तथा प्रसार](https://bharatkaitihas.com/the-rise-and-spread-of-islam/): मध्य एशिया में स्थित 'सउदी अरेबिया' नामक देश के 'मक्का' नगर में रहने वाले 'कुरेश कबीले' में ई.570 में 'हजरत मुहम्मद' का जन्म हुआ। - [भारत में सूफी मत की सफलता के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-to-the-success-of-sufism-in-india/): भारत में सूफी मत का आगमन एक युगांतरकारी घटना थी। सूफ मत ने इस्लाम को तो प्रभावित किया ही, साथ ही हिन्दुओं के मन में भी कुछ आकर्षण उत्पन्न किया। शरीअत के खिलाफ बगावत कुछ विद्वानों का मत है कि सूफीवाद, इस्लाम की शरीअत के खिलाफ एक बगावत थी। सूफी मत कोई एक मत नहीं […] - [सूफी परम्परा](https://bharatkaitihas.com/chishtiya-sampradaya/): इस्लाम के उदय एवं प्रसार के कई सौ साल बाद सूफी परम्परा का जन्म हुआ। सूफी परम्परा के कुछ सिद्धांत इस्लाम से मेल खाते हैं तो कुछ सिद्धांत दुनिया के अन्य सम्प्रदायों एवं दर्शनों से मेल खाते हैं। वैराग्ययुक्त साधना द्वारा अल्लाह की उपासना को श्रेयस्कर मानने वाले सूफी कहलाते थे। सूफी परम्परा अथवा ससव्वुफ […] - [ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/khwaja-moinuddin-chishti/): ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने गौर साम्राज्य की अंतिम सीमा पर स्थित अजमेर को अपना स्थाई निवास बनाया। मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रारम्भिक जीवन विषयक प्रामाणिक सूचनाओं का प्रायः अभाव है। गौस उल आजम का एक शिष्य था मोईनुद्दीन, जिसका जन्म फारस में हुआ था। ई.1186 में मोइनुद्दीन को अपने गुरु का उत्तराधिकारी चुना गया। उन दिनों […] - [मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह](https://bharatkaitihas.com/moinuddin-chishti-dargah/): ख्वाजा मोइनुद्दीन को उसी हुज्रा (कोठरी) में दफनाया गया जिसमें उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय प्रार्थनायें करने में व्यतीत किया था। इसी को अब मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह कहते हैं। आरंभ में यह कच्ची मजार के रूप में एक पहाड़ी पर स्थित थी जो झाड़ियों एवं पौधों से घिरी हुई थी। ख्वाजा हुसैन नागौरी […] - [छत्रपति शिवाजी का संघर्ष एवं उपलब्धियाँ - प्रस्तावना](https://bharatkaitihas.com/preface-of-book-chhatrapati-shivaji/): छत्रपति शिवाजी का संघर्ष बहुकोणीय था। उन्होंने बीजापुर के शिया राज्य से भूमि छीनकर हिन्दू राज्य की स्थापना की। शिवाजी ने औरंगजेब से जीवन भर संघर्ष किया। छत्रपति ने आम्बेर नरेश मिर्जाराजा जयसिंह तथा जोधपुर नरेश जसवंतसिंह जैसे दुराधर्ष योद्धाओं से अपने राज्य को बचाया तथा औरंगजेब के जीवन काल में ही अपना राज्याभिषेक करवाया। […] - [शिवाजी के पूर्वज (2)](https://bharatkaitihas.com/ancestors-of-shivaji/): माना जाता है कि शिवाजी के पूर्वज मेवाड़ के महाराणाओं के वंश में से निकले थे। राजकुमार सज्जनसिंह अथवा सुजानसिंह उनका पूर्वज था। ई.1303 में अल्लाऊद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग तोड़ा और रावल रत्नसिंह को मार डाला। उसकी मृत्यु के साथ ही मेवाड़ के गुहिलों की रावल शाखा का अंत हो गया। तब बहुत से […] - [शिवाजी का बाल्यकाल (3)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-childhood/): शिवाजी का बाल्यकाल बड़ी कठिनाइयों में बीता। कहा जा सकता है कि इन कठिनाइयों ने ही शिवाजी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण किया। शाहजी एवं जीजाबाई का विवाह मालोजी अभी तक जाधवराय द्वारा किए गए अपमान को भूला नहीं था। मालोजी भी अभी तक अहमदनगर की सेवा में था तथा उसकी पुत्री जीजाबाई भी अब […] - [शिवाजी की राजनीति](https://bharatkaitihas.com/shivajis-entry-into-active-politics/): शिवाजी की राजनीति बहुत स्पष्ट थी। उनकी राजनीति अपने लिए एक राज्य बनाने तक सीमित नहीं थी। वे भारत भूमि पर विशाल हिन्दू साम्राज्य की स्थापना करना चाहते थे। सक्रिय राजनीति में प्रवेश शिवाजी का सक्रिय राजनीति में प्रवेश उनकी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण हुआ। वे अपने पिता से अलग रहकर अपनी माता के संरक्षण […] - [अफजल खाँ का वध (5)](https://bharatkaitihas.com/slaughter-of-afzal-khan/): शिवाजी को शाहजी के आगमन का समाचार मिला तो वह कई मील पैदल चलकर अपने पिता की अगवानी करने पहुंचा। एक मंदिर में पिता-पुत्र का मिलन हुआ। - [शाइस्ता खाँ को शिकस्त (6)](https://bharatkaitihas.com/defeat-to-shaista-khan/): महाराजा जसवंतसिंह को शाइस्ता खाँ के साथ दक्षिण के अभियान पर भेजा गया था किंतु वह शिवाजी के विरुद्ध किए जा रहे अभियान से सहमत नहीं था। - [सूरत की लूट (7)](https://bharatkaitihas.com/plunder-of-surat/): शिवाजी के सिपाही सूरत नगर में घुसकर व्यापारियों का धन छीनने लगे और शिवाजी के डेरे में लाकर ढेर लगाने लगे। - [मिर्जा राजा जयसिंह का अभियान (8)](https://bharatkaitihas.com/campaign-of-mirza-raja-jai-singh/): सूरत के बाद शिवाजी ने औरंगाबाद तथा अहमदनगर के बीच स्थित मुगल क्षेत्रों पर आक्रमण किए। - [शिवाजी की आगरा यात्रा (9)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-agra-tour/): शिवाजी की आगरा यात्रा किसी महानायक की दिग्वजय यात्रा से कम नहीं है। भारतीय इतिहास में इसकी गूंज कई सदियों तक सुनाई देती रहेगी। वस्तुतः इस यात्रा ने ही शिवाजी को महानायक के रूप में स्थापित किया। 22 जनवरी 1666 को आगरा के लाल किले में औरंगजेब के पिता शाहजहाँ की मृत्यु हो गई। औरंगजेब […] - [शिवाजी का औरंगजेब विरोध (10)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-opposes-aurangzeb/): छत्रपति शिवाजी द्वारा औरंगजेब का विरोध भारतीय इतिहास को गति प्रदान करती है। - [साल्हेर मुल्हेर का युद्ध (11)](https://bharatkaitihas.com/war-of-salher-mulher/): मराठों ने मुगलों की सेनाओं को बुरी तरह नष्ट कर दिया। कई हजार मुगलों को मार डाला तथा कई हजार मुगलों को बंदी बना लिया। - [प्रतापराव गूजर का बलिदान (12)](https://bharatkaitihas.com/sacrifice-of-commander-pratap-rao/): कोंडाजी के आदमियों ने दुर्ग का फाटक खोल दिया जिससे पास में छिपी हुई मराठा सेना प्रवेश कर गई। इस सेना ने दुर्ग के मुख्य रक्षक तथा उसके बहुत से सैनिकों को नींद में ही काट डाला। - [शिवाजी का राज्याभिषेक (13)](https://bharatkaitihas.com/coronation-of-shivaji/): शिवाजी का राज्याभिषेक एक युगांतरकारी घटना थी। औरंगजेब के जीवित रहते यह संभव नहीं था किंतु शिवाजी ने औरंगजेब सहित तीन मुसलमान बादशाहों और सुल्तानों से लड़कर अपने राज्य का निर्माण किया तथा स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित किया। उस समय उत्तर भारत में केवल महाराणा राजसिंह तथा दक्षिण भारत में छत्रपति शिवाजी ही ऐसे […] - [शिवाजी की शासन व्यवस्था (14)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-governance/): शिवाजी की शासन व्यवस्था प्राचीन क्षत्रिय राज्यों के अनुसार की गई। राज्य कार्य संचालन के लिए अष्ट-प्रधान की नियुक्ति की गई। राज्य का समस्त कार्य इन आठ प्रधानों में बांट दिया गया (1.) पेशवा: राज्य का प्रधान व्यवस्थापक पेशवा कहलाता था। शिवाजी ने इस पद पर मोरोपंत पिंघले को नियुक्त किया। (2.) मजीमदार: इस मंत्री […] - [मुगलों पर पुनः आक्रमण (15)](https://bharatkaitihas.com/re-invasion-of-mughals/): ओरंगजेब ने दिलेर खाँ को पुनः दिल्ली बुलवा लिया था। इस कारण सूबेदार बहादुर खाँ ही दक्षिण में मुगल सत्ता का अकेला प्रतिनिधि था। - [शिवाजी का कर्नाटक अभियान (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/): शिवाजी का कर्नाटक अभियान इसलिए किया गया था ताकि सेनाओं का व्यय निकल सके। कर्नाटक अत्यंत प्राचीन काल से ही एक समृद्ध प्रदेश था जिसे मुसलमान लूट रहे थे। जब शिवाजी दक्षिण भारत में मुगलों के क्षेत्र को कई बार लूट चुका तो उसका ध्यान कर्नाटक की ओर गया। कर्नाटक में चार शताब्दियों से मुसलमानों […] - [सम्भाजी का दुराचरण (17)](https://bharatkaitihas.com/misbehavior-of-shambhaji/): जब दिलेर खाँ को ज्ञात हुआ कि शिवाजी ने सम्भाजी को पन्हाला दुर्ग में बंदी बनाकर रखा है तो दिलेर खाँ ने पत्रों के माध्यम से सम्भाजी से सम्पर्क किया। - [जजिया का विरोध (18)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-opposes-jaziya/): मुझे आपके अधिकारियों की स्वामिभक्ति पर आश्चर्य होता है, क्योंकि वे वास्तविकता को आपसे छिपाते हैं और प्रज्वलित अग्नि को फूस से ढंकते हैं। मेरी कामना है कि जहांपनाह का राजत्व महानता के क्षितिज के ऊपर चमके। - [शिवाजी का निधन (19)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-passed-away/): शिवाजी का निधन भारतवासियों के लिए एक अपूर्णनीय क्षति थी। भारत माता को ऐसे वीर पुत्रों की कमी नहीं थी किंतु शिवाजी उनमें सबसे अलग था। - [शिवाजी का भारत पर प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/the-influence-of-shivajis-rise-on-indian-politics/): शिवाजी का भारत पर प्रभाव शताब्दियों के अंतराल में भी देखा जा सकता है। शिवाजी राजे की भीषण टक्करों से दक्षिण भारत में स्थित बीजापुर का आदिलशाही राज्य पूरी तरह कमजोर हो गया। इसी शिया मुस्लिम राज्य में से शिवाजी ने अपने हिन्दू राज्य का निर्माण किया। गोलकुण्डा का कुतुबशाही राज्य अपनी शक्ति खोकर शिवाजी […] - [महाकवि भूषण की कविता में शिवाजी (21)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-in-the-poem-of-mahakavi-bhushan/): भारत के अनेक राजा महाकवि भूषण को अपने दरबार में देखना चाहते थे किंतु उन्होंने शिवाजी के दरबार में रहना पसंद किया। - [शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be/): शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन सम-सामयिक परिस्थितियों के अनुसार किया जाना चाहिए। उसके कार्य अपने समय से बहुत आगे थे। उसने विस्मयकारी उपलब्धियाँ अर्जित कीं। शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन (1.) साम्राज्य संस्थापक के रूप में शेरशाह भारत के उन गिने-चुने शासकों में से है जिसने एक साधारण परिवार में जन्म लेकर विशाल साम्राज्य खड़ा […] - [शेरशाह के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शेरशाह के उत्तराधिकारी शेरशाह की तरह प्रतिभावान नहीं थे। उन्हें शेरशाह से जो साम्राज्य प्राप्त हुआ, वह लगातार कम होता हुआ नष्ट हो गया। इस्लामशाह शेरशाह ने अपने जीवन काल में ही अपने बड़े पुत्र आदिल खाँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया परन्तु शेरशाह की मृत्यु के उपरान्त अमीरों ने शेरशाह के छोटे पुत्र जलाल […] - [सूरी साम्राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): सूरी साम्राज्य का पतन होने के कई कारण थे। उस काल में उत्तर-पश्चिमी भारत में मुगल एवं अफगान तो सक्रिय थे ही, राजपूत राजाओं के वंशज भी अपनी खोई हुई स्वतंत्रता को पाने के लिए उद्यत थे। सूरी साम्राज्य का पतन होने के कारण (1.) शेरशाह की अकाल मृत्यु शेरशाह की अकाल-मृत्यु से सूरी साम्राज्य […] - [अकबर का प्रारम्भिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-first-part/): जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर ने ई. 1556 से1605 तक शासन किया। अकबर का प्रारम्भिक जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था। उसे अपने ही परिवार के षड़यंत्रों का शिकार होना पड़ा। अकबर का प्रारम्भिक जीवन अकबर का जन्म अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था। उसके पिता का नाम हुमायूँ और माता का नाम हमीदा बानू […] - [पानीपत का दूसरा युद्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): ऐतिहासिक दृष्टि से पानीपत का दूसरा युद्ध मुगल बादशाह अकबर तथा दिल्ली के शासक हेमचंद्र विक्रमादित्य के बीच हुआ किंतु वस्तुतः यह युद्ध बैरम खाँ तथा हेमचंद्र विक्रमादित्य के बीच लड़ा गया। पानीपत का दूसरा युद्ध हेमू का उत्कर्ष हेमू का असली नाम हेमराज था। वह धूसर जाति का बनिया था। कुछ इतिहासकार उसे गौड़ […] - [बैरम खाँ का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): हुमायूँ ने बैरम खाँ को अल्पवय अकबर का संरक्षक नियुक्त किया था। बैरम खाँ ने ही अकबर को उसके पिता का खोया हुआ राज्य फिर से दिलवाया था किंतु जैसे ही अकबर वयस्क हुआ, उसने बैरम खाँ से छुटकारा पाने का प्रयास किया। बैरम खाँ का विद्रोह मूलतः इसी कारण हुआ था। बैरम खाँ से […] - [अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): भारतीय इतिहासकारों ने अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला है। इन इतिहासकारों के अनुसार अकबर ने अपने शासन के कुछ निश्चित उद्देश्य निर्धारित किए तथा इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसने जीवन भर प्रयास किए। अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य शासन की बागडोर हाथ में लेने के उपरान्त अकबर […] - [अकबर का साम्राज्य विस्तार](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-second-part/): अकबर का साम्राज्य विस्तार अकबर की राजधानी फतहपुर सीकरी के चारों ओर दूर-दूर तक हुआ। इतने बड़े देश पर अधिकार करने के लिए अकबर को इतना व्यापक विस्तार अभियान चलाना पड़ा। अकबर का साम्राज्य विस्तार और नीति-वैषम्य हुमायूँ द्वारा जीते गये भू-भाग तथा बैरम खाँ द्वारा विजित क्षेत्रों से आगे बढ़कर  साम्राज्य विस्तार करने के […] - [अकबर की राजपूत नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अकबर की राजपूत नीति मध्यकालीन भारतीय इतिहास मे युगांतरकारी परिवर्तन लाने में सक्षम सिद्ध हुई। अकबर ने राजपूतों के साथ सुलह एवं मैत्री का मार्ग अपनाया। अकबर अशिक्षित था किंतु संघर्षों ने उसे चतुर राजनीतिज्ञ बना दिया था। कामरान की निर्दयता, बैरमखाँ की संगति, हरम के कुचक्रों तथा मिर्जाओं के षड़यंत्रों ने अकबर को अपनी […] - [अकबर की राजपूतों पर विजय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af/): अकबर की राजपूतों पर विजय अकबर की साम्राज्य विस्तार नीति का प्रमुख अंग थी। अकबर ने न केवल राजपूतों को अपने अधीन किया अपितु उनसे ही अपने राज्य का विस्तार करवाया। आम्बेर के साथ मैत्री सम्बन्ध राजपूताना में स्थित आम्बेर राज्य पर कच्छवाहा राजपूतों का शासन था। इन दिनों राजा भारमल वहाँ शासन कर रहा […] - [अकबर की शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-fourth-part/): अकबर की शासन व्यवस्था त्रिस्तरीय थी जिसमें सर्वोच्च स्तर पर केन्द्रीय शासन, मध्यम स्तर पर प्रांतीय शासन तथा निम्नतम स्तर पर स्थानीय शासन था। अकबर की शासन व्यवस्था केन्द्रीय शासन अकबर का केन्द्रीय शासन पूर्ण रूप से स्वेच्छाचारी तथा निरंकुश राजतंत्र पद्धति पर आधारित था। इस केन्द्रीय शासन का कार्य न केवल राजधानी में रहने […] - [अकबर का सैन्य प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): अकबर भारत जैसे विशाल देश के अधिकांश हिस्से पर शासन करता था। यह केवल एक विशाल सेना के बल पर ही किया जा सकता था। इस कारण अकबर का सैन्य प्रबन्धन अत्ंयंत बेहतर अवस्था में था। अकबर ने विशाल मुगल सल्तनत का निर्माण सेना के बल पर ही किया था। सल्तनत की सुरक्षा एवं सल्तनत […] - [अकबर का भूमि प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): अकबर का भूमि प्रबन्धन उस युग की परिस्थितियों को देखते हुए काफी हद तक वैज्ञानिक था। इसमें किसानों से निश्चित कर लेने की व्यवस्था की गई थी जिसके कारण कर्मचारी किसानों पर मनमानी नहीं कर सकते थे। अकबर ने सैनिक सुधारों की भांति भूमि सुधार भी गुजरात विजय के बाद ही आरम्भ किये। इस्लामशाह की […] - [अकबर के सामाजिक सुधार](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-fifth-part/): अकबर के सामाजिक सुधार भारत के मध्यकालीन इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं। अकबर ने मजहबी कट्टरता के उस वातावरण में भी गैर-इस्लामिक प्रजा को अपनी प्रजा समझा तथा उन्हें पूर्ववर्ती सुल्तानों एवं बादशाहों की तुलना में अनेक सहूलियतें दीं। अकबर के सामाजिक सुधार अकबर ने ऐसे कई सामाजिक सुधार किये जिनका उसकी समस्त प्रजा […] - [अकबर की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अकबर की धार्मिक नीति एक वैचारिक रूप से सुदृढ़ शासक की नीति थी। जीवन की पाठशाला में हुए अनुभवों ने उसे सिखा दिया था कि सभी धर्मों में अच्छाइयाँ एवं कमियाँ हैं। कोई भी धर्म पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं है। अकबर अपने युग के मुस्लिम बादशाहों से बिल्कुल उलट, उदार तथा व्यापक दृष्टिकोण […] - [दीन-ए-इलाही](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%8f-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80/): दीन-ए-इलाही का शाब्दिक अर्थ, ‘ईश्वर का धर्म’ होता है परन्तु वास्तव में दीन-ए-इलाही कोई धर्म नहीं था। यह ऐसे लोगों की एक गोष्ठी थी जो अकबर के विचारों तथा विश्वासों से सहमत थे और जो उसे अपना पीर या गुरु मानने को तैयार थे। अकबर जानता था कि न तो समस्त धर्मों को जोड़कर एक […] - [अकबर के शासन की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-third-part/): अकबर के शासन की विशेषताएँ उसके सम्पूर्ण शासनकाल में दिखाई देती हैं। उसने निरकुंश एवं एकच्छत्र शासक होते हुए भी प्रजा के विभिन्न वर्गों के हित के लिए कार्य किए। महान साम्राज्य निर्माता भारत में जिस प्रकार दो अफगान साम्राज्यों की स्थापना हुई थी। ठीक उसी प्रकार तीन मुगल साम्राज्यों की स्थापना हुई थी। पहले […] - [अकबर का व्यक्तित्व](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-sixth-part/): अकबर का व्यक्तित्व मध्यकालीन मुसलमान शासकों की तुलना में अधिक उदार एवं बड़ा था। वह बड़ी सल्तनत का शासक था और उसके व्यक्तित्व में बड़ी सल्तनत पर शासन करने के समस्त आवश्यक गुण विद्यमान थे।  अकबर की गणना भारत के महान् शासकों में की जाती है। उसके व्यक्तित्व के सम्बन्ध में विद्वानों ने इतना अधिक […] - [इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87/): इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर का स्थान बहुत ऊँचा है। चाहे भारतीय इतिहासकार हों या विदेशी इतिहासकार सभी ने अकबर के शासन की प्रशंसा की है। जवाहर लाल नेहरू ने अकबर को भारत के दो महान राजाओं में से एक बताया है। मध्यकालीन इतिहासकारों से लेकर आधुनिक इतिहासकारों ने अकबर के बारे में बहुत कुछ […] - [नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर](https://bharatkaitihas.com/nooruddin-muhammad-jahangir-first-part/): नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर ने ईस्वी 1605 से 1627 तक शासन किया। वह अकबर के चार पुत्रों में सबसे बड़ा था। जिस समय अकबर की मृत्यु हुई, उस समय अकबर के पुत्रों में अकेला वही जीवित बचा था। नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का प्रारम्भिक जीवन नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का बचपन का नाम सलीम था। उसकी माता हीराकंवर […] - [नूरजहाँ का उत्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8/): नूरजहाँ का उत्थान जहाँगीर कालीन राजनीति की प्रमुख घटना थी। जहाँगीर के शासनकाल में नूरजहाँ ही मुगललिया सल्तनत की वास्तविक शासक थी। नूरजहाँ का बचपन का नाम मेहरुन्निसा था। फारसी में मेहर प्रेम को कहते हैं तथा अरबी में निसा स्त्री को कहते हैं। इस प्रकार मेहरुन्निसा का शाब्दिक अर्थ प्रेम करने योग्य स्त्री होता […] - [खुर्रम का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): खुर्रम का विद्रोह जहाँगीर की दरबारी गुटबंदी का परिणाम थी। यह गुटबंदी नूरजहाँ ने आरम्भ की थी। जब जहाँगीर के पुत्रों को लगा कि नूरजहाँ अपने पुत्र को अगला बादशाह बनाना चाहती है, तब खुर्रम ने बगावत का झण्डा बुलंद कर दिया। जब जहाँगीर बीमार पड़ा तो खुर्रम में, तख्त प्राप्त करने की आतुरता बढ़ […] - [महाबत खाँ का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): महाबत खाँ का विद्रोह नूरजहाँ के भाई आसफ खाँ के षड़यंत्रों एवं का परिणाम था। नूरजहाँ ने आसफ खाँ ने महाबत खाँ के लिए ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कर दीं जिनके कारण महाबत खाँ को बगावत करनी पड़ी। खुर्रम के विद्रोह के समय खुर्रम का श्वसुर आसफ खाँ चुपचाप विद्रोह की गतिविधियों को देखता रहा। उसने […] - [जहाँगीर का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): इतिहासकारों के लिए जहाँगीर का चरित्र किसी पहेली से कम नहीं है। जब तक अकबर जीवित रहा, जहाँगीर ने कई बार अपने पिता से विद्रोह किया तथा अपनी पत्नी मानबाई और अपने पिता के मित्र अबुल फजल की हत्या जैसे गंभीर अपराध किए किंतु जब वह बादशाह बना तो वह न्यायप्रिय शासक एवं कलाओं का […] - [नूरजहाँ का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): नूरजहाँ का चरित्र मध्यकालीन इतिहास में किसी पहेली से कम नहीं है। उस युग में इस बात पर विश्वास नहीं किया जाता था कि किसी औरत में शासकीय प्रतिभा हो सकती है किंतु जहाँगीर ने अपने राज्य का पूरा शासन नूरजहाँ पर छोड़ दिया था। नूरजहाँ का चरित्र नूरजहाँ के गुणों के कारण जहाँगीर ने […] - [शाहजहाँ](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-first-part/): शाहजहाँ ने ईस्वी 1628 से 1658 तक शासन किया। वह अपने पिता जहाँगीर की तुलना में अधिक कट्टर शासक था। उसने अपने पितामह की सुलहकुल नीति को तो नहीं छोड़ा किंतु उसने कई मंदिरों को तुड़वाया जिनमें पुष्कर का प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर भी शामिल है। शाहजहाँ का प्रारम्भिक जीवन शाहजहाँ का वास्तविक नाम खुर्रम था। […] - [शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध मुस्लिम इतिहासकारों की दृष्टि में शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध मध्यकालीन इतिहास का स्वर्णयुग था जबकि हिन्दू इतिहासकार उसके शासन प्रबन्ध को मजहबी कट्टरता से परिपूर्ण मानते हैं। शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध शाहजहाँ ने बादशाह बनने के पहले से ही अपनी योग्यता का परिचय देकर ख्याति अर्जित कर ली थी। वह अपने […] - [उत्तराधिकार युद्ध](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-second-part/): शाहजहाँ के जीवित रहते हुए ही शाहजहाँ के पुत्रों में उत्तराधिकार युद्ध हुआ जिसमें औरंगजेब विजयी रहा और उसने शाहजहाँ को पकड़कर ताजमहल में कैद कर लिया। सितम्बर 1657 में शाहजहाँ बीमार पड़ गया। वह 65 वर्ष का हो चुका था। वृद्धावस्था के कारण उसकी बीमारी में सुधार नहीं हुआ और उसकी दशा बिगड़ती चली […] - [औरंगजेब (आलमगीर)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac/): औरंगजेब का पूरा नाम मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब था। उसे आलमगीर भी कहा जाता था। उसने ईस्वी 1658 से 1707 तक भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया। वह एक क्रूर एवं धर्मान्ध कट्टर सुन्नी मुसलमान शासक था। उसकी कट्टर नीतियों ने मुगल सल्तनत को पतन के मार्ग पर धकेल दिया। औरंगजेब का प्रारम्भिक जीवन मुहीउद्दीन […] - [औरंगजेब की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): औरंगजेब की धार्मिक नीति इस्लामिक मजहबी कट्टरता पर आधारित थी। वह सुन्नी मुसलमान था और भारत की सम्पूर्ण प्रजा को सुन्नी मुसलमान बनाना चाहता था। औरंगजेब कट्टर सुन्नी मुसलमान था। इस्लाम में उसकी बड़ी अनुरक्ति थी। वह स्वयं को इस्लाम का रक्षक तथा पोषक समझता था। इसलिये राज्य के समस्त साधनों को इस्लाम की सेवा […] - [औरंगजेब की राजपूत नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): औरंगजेब की राजपूत नीति मजहबी संकीर्णता पर आधारित थी। वह राजपूत राजाओं से अपने साम्राज्य का विस्तार तो करवाना चाहता था किंतु साथ ही उन्हें मुसलमान भी बनाना चाहता था। औरंगजेब की हिन्दू विरोधी नीति के कारण राजपूत राज्यों के साथ उसका संघर्ष अनिवार्य हो गया। औरंगजेब की राजपूत नीति बुंदेलों से युद्ध सबसे पहले […] - [औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति](https://bharatkaitihas.com/muhiuddin-muhammad-aurangzeb-second-part/): औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति न केवल मुगल सल्तनत के लिए, न केवल भारत की जनता के लिए अपितु स्वयं उसके लिए भी विनाशकारी सिद्ध हुई। औरंगजेब अपनी सल्तनत का विस्तार भारत के बचे हुए भू-भाग तथा उत्तर पूर्व में उन क्षेत्रों तक करना चाहता था जिन पर किसी समय तैमूर लंग का शासन था। उसने […] - [औरंगजेब के अंतिम दिन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/): औरंगजेब के अंतिम दिन कष्ट से भरे हुए थे। वह भारत की समस्त प्रजा को सुन्नी मुसलमान बनाना चाहता था किंतु लाखों हिन्दुओं का रक्त बहाकर भी वह इस लक्ष्य को अर्जित नहीं कर पाया। उसके सामने ही चारों ओर विद्रोहों की ज्वालाएँ फूट पड़ी थीं। 1682 ई. से औरंगजेब (आलमगीर) दक्षिण में लड़ रहा […] - [औरंगजेब के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/aurangzebs-successor/): औरंगजेब के उत्तराधिकारी न तो औरंगजेब द्वारा छोड़ी गई विशाल मुगलिया सल्तनत को संभाल सके और न औरंगजेब द्वारा उत्पन्न की गई अव्यवस्था को संभाल सके। 1707 ई. में दक्खिन के मोर्चे पर जब औरंगजेब की मृत्यु हुई, तब तक मुगल सल्तनत राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक दृष्टि से काफी कमजोर हो गई थी किंतु उसकी […] - [मुगल सल्तनत का विघटन](https://bharatkaitihas.com/disintegration-of-mughal-sultanate-first-part/): औरंगजेब के आँखें बन्द करते ही चारों तरफ से मुगल सल्तनत का विघटन आरम्भ हो गया। सल्तनत के प्रभावशाली अमीरों और मनसबदारों ने अपने-अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित करने आरम्भ कर दिये। आरम्भ में यह कार्य केन्दीय राजधानी दिल्ली से दूर के क्षेत्रों में हुआ, बाद में उत्तर भारत में भी कई छोटे-छोटे राज्य बन गये। […] - [मुगल सल्तनत का अंत](https://bharatkaitihas.com/disintegration-of-mughal-sultanate-second-part/): मुगल सल्तनत का अंत कोई आकस्मिक राजनीतिक घटना नहीं थी। मुगल सल्तनत का विघटन तो औरंगजेब के जीवनकाल में ही आरम्भ हो गया था। मुगल सल्तनत का अंत होने के कारण मुगल दरबार में दलबन्दी अमीरों, मनसबदारों, शहजादों तथा बेगमों के निजी स्वार्थों और आपसी स्पर्द्धा के कारण हुमायूँ के समय से ही मुगल दरबार […] - [मुगल शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/mughal-governance-and-institutions-first-part/): मुगल शासन व्यवस्था को भारतीय इतिहास में कुलीनों का शासन कहा जाता है। मुगलकालीन शासन व्यवस्था के मूल ढाँचे को खड़ा करने का श्रेय अकबर को है। उसने जिस शासन पद्धति को लागू किया, वह थोड़े-से परिवर्तनों के साथ औरंगजेब के समय तक तथा उसके भी बाद तक जारी रही। मंगोलों की शासन व्यवस्था में […] - [मुगलों की मनसबदारी प्रथा](https://bharatkaitihas.com/mansabdari-system-of-mughals/): आधुनिक इतिहासकार अभी तक मुगलों की मनसबदारी प्रथा को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। फिर भी इतना स्पष्ट है कि मनसबदारी प्रथा सैनिक रैंक के साथ-साथ जमींदारी की हैसियत से भी जुड़ी हुई थी। मुगलों की मनसबदारी प्रथा मनसब प्रथा की आवश्यकता अकबर के शासन के आरम्भिक वर्षों में शाही सेना में मंगोल, तुर्क, […] - [मुगलों की जागीरदारी प्रथा](https://bharatkaitihas.com/feudatory-system-of-mughals/): मुगलों की जागीरदारी प्रथा का आधार वे हिन्दू एवं मुसलमान सेनापति थे जो अपनी प्रजा पर कड़ाई से नियंत्रण करके प्रजा से राजस्व वसूल करके केन्द्रीय कोषागार में समय पर जमा करवा सके। मुगलों की जागीरदारी प्रथा में जागीरों के प्रकार राज्य कर्मचारियों को वेतन के बदले जो भूमि दी जाती थी उसे जागीर कहते […] - [मुगलों का प्रांतीय शासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): मुगलों का प्रांतीय शासन पूर्ववर्ती तुर्कों द्वारा स्थापित प्रांतीय शासन की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ था। विद्रोह करने वाले प्रांतपतियों का सख्ती से दमन किया जाता था। बाबर एवं हुमायूँ ने प्रान्तीय व्यवस्था स्थापित करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया। इसलिये सल्तनत कालीन व्यवस्था ही चलती रही। अकबर के शासनकाल मंे मुगल सल्तनत को सूबों […] - [मुगलों की सैनिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/mughal-governance-and-institutions-second-part/): मुगलों की सैनिक व्यवस्था ही उनकी साम्राज्य शक्ति का मुख्य आधार थी। सेना के बल पर ही इतने विशाल साम्राज्य को स्थिर रखा जा सकता था। मुगलों की सैनिक व्यवस्था बाबर ने सैनिक शक्ति के बल पर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। उसकी सैन्य व्यवस्था तैमूर और चंगेज खाँ के संगठन पर आधारित थी। बाबर […] - [मुगलों की न्याय व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): मुगलों की न्याय व्यवस्था के सम्बन्ध में इतिहासकारों के मध्य विवाद रहा है। जदुनाथ सरकार ने इस व्यवस्था को सुगम, सक्रिय एवं अपूर्ण बताया है। डॉ. आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव ने इसे दोषपूर्ण बताया है जबकि डॉ. हसन ने इसे समयानुकूल माना है। डॉ. जैन का मत है कि मुगलों की न्याय व्यवस्था कम खर्चीली, शीघ्र कार्य […] - [मुगलों की राजस्व व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): मुगलों की राजस्व व्यवस्था पूर्ववर्ती दिल्ली सल्तनत कालीन राजस्व व्यवस्था से अधिक मजबूत थी। प्रजा से कर वसूल करके केन्द्रीय कोषागार तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए थे। बाबर और हुमायूँ, दोनों का शासनकाल किसी प्रकार के आर्थिक सुधारों को कार्यान्वित करने के लिए अपर्याप्त रहा। अकबर ने सल्तनत की अर्थव्यवस्था को संगठित […] - [मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2/): मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन करते समय हमें मध्ययुगीन परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिये। उस युग में धार्मिक कट्टरता की प्रधानता थी और कोई भी संस्था उससे अप्रभावित नहीं रह पाई थी। उस युग में यातायात, आवागमन तथा संचार के साधनों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया था। केन्द्रीय सरकार के लिए शासन की प्रांतीय […] - [मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/land-and-land-revenue-arrangements-of-mughals/): मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था अकबर के समय में स्थापित हुई थी। इस कार्य में राजा टोडरमल की मुख्य भूमिका थी। चूंकि राजा टोडरमल अफगान शासक शेरशाह सूरी का भी मंत्री था। इसलिए मुगलकालीन अर्थव्यवस्था को शेरशाह कालीन अर्थव्यवस्था ही माना जाता है। भारत पर अधिकार स्थापित करने वाले प्रारम्भिक तुर्क सुल्तानों के समक्ष यह समस्या […] - [मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व](https://bharatkaitihas.com/mughal-economy-land-ownership-and-land-revenue-agriculture-industry-technology-technology/): मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्वों में कृषि, भूस्वामित्व, भूराजस्व, कृषि, प्रौ़द्योगिकी एवं उद्यो तथा वाणिज्य एवं व्यापार आते हैं। मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्वों में कृषि, भूस्वामित्व, भूराजस्व, कृषि, प्रौ़द्योगिकी एवं उद्यो तथा वाणिज्य एवं व्यापार आते हैं। हमने इस अध्याय को तीन भागों में विभक्त किया है-1. मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व, 2. मुगलकालीन […] - [मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80/): प्राचीन काल से ही भारत में प्रौद्योगिकी विकास की गति बहुत धीमी रही थी। मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग भी विशेष उन्नति नहीं कर सका। मुगलकालीन प्रौद्योगिकी धातु प्रौद्योगिकी इस युग में धातु-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुछ उन्नति हुई। कांसे, पीतल, लोहे, सोना और चाँदी के बर्तन, मूर्तियाँ बनाने की प्रौद्योगिकी पहले की ही तरह चलती […] - [मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य](https://bharatkaitihas.com/trade-and-commerce-in-mughal-economy/): मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य वैदेशिक एवं अन्तर-प्रादेशिक दोनों ही स्तरों पर उन्नत अवस्था में था। व्यापार पर लगने वाले कर से मुगलों को अच्छी आय होती थी, इसलिए व्यापारियों को तंग नहीं किया जाता था। मुगल काल में आन्तरिक एवं बाह्य, दोनों प्रकार का व्यापार उन्नति पर था। पुरातन समय से ही भारत के बाह्य […] - [सरदार पटेल : प्रेरक एवं रोचक प्रसंग - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/one-hundred-seventeen-stories-of-sardar-patels-life/): इस विशाल राष्ट्रव्यापी आयोजन से देश के 140 करोड़ लोगों तक सरदार पटेल द्वारा राष्ट्र को दिये गये अवदान की जानकारी भी नये सिरे से पहुंचेगी जो देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ करेगी। - [भगवान श्रीराम के वंशज थे सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-a-descendant-of-lord-shri-ram/): सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म एक गुजराती लेवा पटेल परिवार में हुआ। लेवा स्वयं को भगवान श्रीराम के वंशज मानते हैं। उनके अनुसार लेवा भगवान श्रीराम के पुत्र लव के वंशज हैं। लेवा जाति पंजाब में निवास करने वाली क्षत्रिय जाति थी जो किसी समय गुजरात में आकर रहने लगी। लेवा जाति की पाटीदार […] - [लाड़बाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-and-vitthalbhai-were-last-to-remember-for-sweets/): सरदार वल्लभ भाई पटेल के पिता का नाम झबेरभाई और माता का नाम लाड़बाई था। अपने माता-पिता की कई संतानों में से एक होने के कारण मिठाई के लिये सबसे अंत में याद किये जाते थे वल्लभभाई और विट्ठलभाई। झबेरभाई की पहली पत्नी की मृत्यु होने पर उनका दूसरा विवाह हुआ। दूसरी पत्नी लाड़बाई उनसे […] - [सरदार का आत्मिक बल](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-stained-his-body-with-burning-bars/): सरदार पटेल का आत्मिक बल आजादी की लड़ाई के दौरान किए गये संघर्ष में उनके बहुत काम आया। वे कभी न तो अपने संकल्प से डिगे, न कर्म से डिगे और न उन्होंने किसी के समक्ष समर्पण किया। - [सरदार पटेल की हास्यप्रियता](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-did-not-let-any-opportunity-to-laugh/): अपने व्यक्तित्व में गंभीरता एवं हास्यप्रियता के समुचित मिश्रण के बल पर ही सरदार पटेल ने न केवल कोनार्ड कोरफील्ड जैसे षड़यंत्रकारी अंग्रेज अधिकारियों को हवाई जहाज में बैठाकर इंग्लैण्ड भेजा दिया अपितु भारत के 565 राजाओं के राज्य भारत में सम्मिलित करवा लिए। - [सरदार पटेल का स्वाभिमान](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-did-not-worry-about-opposition-from-anyone/): सरदार पटेल का स्वाभिमान – किसी से भी विरोध हो जाने की चिंता नहीं करते थे वल्लभभाई सरदार पटेल का स्वाभिमान बचपन से ही उच्च स्तर पर था। वे न तो बाल्यकाल में किसी से डरे, न अपने कैरियर में किसी से दबे और न आजादी की लड़ाई के दौरान किसी पुलिस अधिकारी अथवा जेलर […] - [गुजराती भाषा से प्रेम](https://bharatkaitihas.com/two-quarreling-scions-drove-everyone-away/): गुजराती भाषा से प्रेम – दो दंगाई पाड़ों ने सबको भगा दिया सरदार पटेल को बाल्यकाल में गुजराती भाषा से प्रेम था। चूंकि वे मेधावी क्षात्र थे, इसलिए अध्यापक चाहते थे कि वल्लभ भाई संस्कृत भाषा पढ़ें किंतु वल्लभ भाई ने संस्कृत के स्थान पर गुजाराती भाषा को चुना। मैट्रिक में विद्यार्थियों को अन्य विषयों […] - [झबेर बा से विवाह](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-wanted-to-go-to-england-and-see-what-such-a-specialty-is-in-that-country/): वे यह जानकर आश्चर्य चकित थे कि अंग्रेजी बोलने वाले अंग्रेजों का इंग्लैण्ड, बहुत छोटा सा देश है किंतु उन्होंने दुनिया में अपना राज्य इतना फैला लिया है कि उसमें कभी सूरज नहीं डूबता। - [गोधरा में वकालात](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-became-independent-lawyer-after-passing-mukhtaris-examination/): वल्लभभाई को किसी शहर से विफल होकर चले जाना अच्छा नहीं लगा। इसलिए वे गोधरा में वकालात करते रहे। - [बोरसद में वकालात](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-came-to-borsad-from-godhra-to-help-his-elder-brother/): बोरसद में वकालात के दौरान वल्लभभाई की ख्याति और आय दोनों में ही कई गुना वृद्धि हुई। वल्लभभाई के सम्पर्कों में भी विस्तार हुआ। - [मुकदमेबाजों के हथकण्डे](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-carefully-studied-the-tactics-of-litigants/): अंग्रेजों ने भारत में ब्रिटिश न्याय प्रणाली पर आधारित न्यायालयों की स्थापना की थी। इस व्यवस्था में पीड़ित को न्याय मिलने की प्राथममिकता नहीं थी, अपति विभिन्न आधारों पर अपराध कारित नहीं होने की स्थापना की जाती थी। इस कारण अपराधी अपराध करने के बाद विभिन्न प्रकार के हथकण्डे अपनाते थे। सरदार पटेल ने निर्दोष […] - [अंग्रेजी न्याय - को जेल जाने से बचा लिया वल्लभभाई ने !](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-saved-innocent-railway-inspector-from-going-to-jail/): वल्लभभाई ने मुकदमे का अध्ययन किया तो समझ गये कि दुष्ट अंग्रेज अधिकारी ने इतना मजबूत जाल रचा है कि वल्लभभाई अपने मुवक्किल को कोर्ट में सजा होने से नहीं बचा पायेंगे। - [भारत सरकार अधिनियम 1935](https://bharatkaitihas.com/government-of-india-act-niniteen-hundred-thirty-five/): भारत सरकार अधिनियम 1935 के माध्यम से प्रान्तों में स्वायत्त शासन तथा केन्द्र में आंशिक उत्तरदायी सरकार की स्थापना की व्यवस्था की गई। इसलिए भारत सचिव के उन अधिकारों में कमी की गई जिनके द्वारा वह भारत सरकार पर प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रखता था किन्तु गवर्नर जनरल तथा गवर्नरों के अधिकारों में वृद्धि कर […] - [भारत में साम्प्रदायिक समस्या](https://bharatkaitihas.com/development-of-communal-politics-in-india-part-one/): भारत में साम्प्रदायिक समस्या का आरम्भ मुसलमानों के भारत में प्रवेश के समय से हो गया था किन्तु ब्रिटिश शासन के दौरान इस समस्या ने एक नवीन रूप ग्रहण किया। साम्प्रदायिकता की समस्या साम्प्रदायिकता की समस्या हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन कर खड़ी हो गई। इस कारण जनता को आजादी […] - [भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास](https://bharatkaitihas.com/development-of-communal-politics-in-india-part-two/): भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास अंग्रेजी शासन के द्वारा किया गया। अंग्रेज अधिकारियों ने भारत के हिन्दुओं और मुसलमानों को एक-दूसरे से लड़ते रहने के लिए प्रेरित किया ताकि वे एकजुट होकर भारत की स्वाधीनता के लिए न लड़ सकें। भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का विकास (1.) मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसम्बर 1906 […] - [राजनीति में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस](https://bharatkaitihas.com/chapter-85-rise-of-netaji-subhash-chandra-bose-in-indian-politics-and-activism-in-congress/): भारतीय राजनीति में नेताजी सुभाषचन्द्र का नाम बहुत ऊँचा है। वे भारतीय राजनीति के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, देश की भूमि से बाहर जाकर सेना का निर्माण किया तथा ब्रिटिश कालीन राजनीति में नेताजी के नाम से जाने गए। प्रारम्भिक जीवन नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 […] - [भारतीय राष्ट्रीय सेना में सुभाषचंद्र बोस](https://bharatkaitihas.com/netaji-subhash-chandra-bose-and-indian-national-army/): कलकत्ता प्रेसीडेंसी में भूख हड़ताल करने से सुभाष बाबू की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इस पर सरकार ने उन्हें 5 दिसम्बर 1940 को जेल से मुक्त करके उनके घर में नजरबन्द कर दिया। घर में भी उन पर कड़े प्रतिबन्ध थे। भारत से पलायन नजरबंदी के दौरान कुछ दिनों तक सुभाष अपने घर में […] - [आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन](https://bharatkaitihas.com/reconstitution-of-azad-hind-fauj-by-netaji-subhash-chandra-bose/): रासबिहारी बोस ने 1 सितम्बर 1942 को आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी किंतु कुछ कठिनाइयों के कारण इसे भंग कर देना पड़ा। जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने रासबिहारी बोस के साथ काम करने का निश्चय किया तो सुभाष बाबू ने आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन करने का निश्चय किया। सुभाष द्वारा आजाद हिन्द […] - [सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/evaluation-of-netaji-subhash-chandra-boses-successes/): जिस समय देश को आजादी मिली, उस समय सुभाषचन्द्र बोस जीवित नहीं थे, फिर भी देश की आजादी में उनका बहुत बड़ा हाथ था। सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ अप्रतिम थीं। सुभाषचन्द्र बोस की सफलताएँ आजाद हिन्द फौज की सफलताओं का मूल्यांकन आजाद हिन्द फौज के नायकों और सैनिकों में देश भक्ति की उज्जवल भावना थी। […] - [स्वतंत्रता के द्वार पर भारत](https://bharatkaitihas.com/india-at-the-gateway-to-freedom/): भारत का स्वतंत्रता के द्वार पर पहुंचना एक विस्मयकारी ऐतिहासिक घटना थी। इसके लिए विगत लगभग एक सौ सालों से भारतीय जनता प्राण-प्रण से प्रयासरत थी। भारत की स्वतंत्रता किसी एक घटना या आंदोलन का परिणाम नहीं थी। इसके पीछे बहुत सी घटनाओं, आंदोलनों एवं दबावों ने काम किया। इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति अथवा […] - [भारत का विभाजन](https://bharatkaitihas.com/partition-of-india/): भारत का विभाजन आधुनिक भारत के इतिहास के सबसे बड़ी त्रासदी थी। इस्लाम की मजहबी कट्टरता और अंग्रेजों की मक्कारी ने भारत का विभाजन किया। कांग्रेस में भारत विभाजन के प्रति सहमति गांधीजी सहित लगभग समस्त कांग्रेसी नेता भारत विभाजन के विरुद्ध थे। राजाजी राजगोपालाचारी जैसे नेता तथा घनश्यामदास बिड़ला जैसे उद्योगपति, भारत की आजादी […] - [स्वाधीनता का उदय](https://bharatkaitihas.com/elimination-of-independence-and-rise-of-independence/): 14 अगस्त 1857 को सर्यास्त के साथ ही भारत से पराधीनता के चिह्न विलोपित होने लगे एवं स्वाधीनता का उदय होने लगा। ब्रिटिश नेताओं एवं भारतीय नेताओं ने ब्रिटिश राज्यशाही के विलोपन में गरिमा को बनाए रखा। भारत के अंग्रेजों के विरुद्ध किसी तरह की नारेबाजी नहीं की गई एवं न उन्हें अपमानित करने का […] - [विभाजन के बाद साम्प्रदायिक उन्माद](https://bharatkaitihas.com/communal-frenzy-after-partition-of-india/): भारत विभाजन के बाद साम्प्रदायिक उन्माद उठ खड़ा हुआ। जो लोग अपने घरों को छोड़कर जा रहे थे, उनमें दूसरे सम्प्रदाय के विरुद्ध अपार क्रोध था जिसकी परिणति साम्प्रदायिक उन्माद में हुई। लॉर्ड माउण्टबेटन ने रैडक्लिफ आयोग की रिपोर्ट 15 अगस्त के बाद प्रकाशित करने का निर्णय लिया था। जिस समय रैडक्लिफ की रिपोर्ट प्रकाशित […] - [देशी रजवाड़ों की समस्या](https://bharatkaitihas.com/question-of-merger-of-indigenous-princely-states-in-independent-india/): भारत में अत्यंत प्राचीन काल से देशी रजवाड़े मौजूद थे। अंग्रेज इन्हें एक केन्द्रीय शासन व्यवस्था के अधीन लाना चाहते थे किंतु राजा लोग इसके लिए तैयार नहीं थी। आजादी के बाद भी देशी रजवाड़ों की समस्या बनी रही। इसे सुलझाना आवश्यक था। देशी रजवाड़ों की समस्या स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश में गवर्नरों द्वारा […] - [देशी रियासतें पाकिस्तान में मिलाने हेतु षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/jinnah-conspiracy-on-merger-of-indigenous-states-with-india/): मुहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने के उद्देश्य से भारत का विभाजन करवाया था किंतु जब पाकिस्तान बनने लगा तो मुहम्मद अली जिन्ना तथा उसके साथी नेताओं ने राजपूताने की देशी रियासतें पाकिस्तान में मिलाने हेतु गहरा षड़यंत्र किया। भारत विभाजन का निर्णय हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या की बहुलता के क्षेत्रों के आधार […] - [जूनागढ़ की समस्या](https://bharatkaitihas.com/problem-of-junagadh-on-merger-in-india/): भारत में विलय के प्रश्न पर जूनागढ़ की समस्या जूनागढ़ के नवाब द्वारा अनावश्यक रूप से खड़ी की गई। जूनागढ़ की बहुसंख्य प्रजा हिन्दू थी और शासक मुसलमान था जो कि पाकिस्तन में मिलना चाहता था। गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में 1748 ई. से जूनागढ़ रियासत स्थित थी। इस पर मुस्लिम नवाब का शासन था। […] - [हैदराबाद की समस्या](https://bharatkaitihas.com/hyderabad-problem-on-merger-in-india/): जिस समय भारत को स्वतंत्रता मिली, उस समय हैदराबाद रियासत के शासक ने अपनी रियासत को भारत एवं पाकिस्तान दोनों से स्वतंत्र रहने का प्रयास किया। इस कारण भारत सरकार के समक्ष हैदराबाद की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया। हैदराबाद रियासत की स्थापना 1720 ई. में चिनकुलीजखाँ ने की थी जिसने निजामुल्मुल्क की […] - [कश्मीर समस्या](https://bharatkaitihas.com/kashmir-problem-on-merger-in-india/): जिस समय भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय हैदराबाद की तरह कश्मीर के शासक ने भी अपनी रियासत को स्वतंत्र रखने का विचार किया, इस कारण भारत सरकार के समक्ष कश्मीर समस्या से निबटने की चुनौती खड़ी हो गई। भारत के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में 2,10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला जम्मू-कश्मीर राज्य सामरिक दृष्टि से विशेष […] - [Princes faced exile (4)](https://bharatkaitihas.com/when-princes-faced-exile/): Shahjahan’s trio of Princes became restless as they were being sent away from the capital Delhi. Shahjahan’s Princes faced exile. On 6 April 1648, Shah Jahan was 56 years old when he entered Delhi’s Red Fort, still his body was full of vigor and energy. Although thousands of women lived in Shah Jahan’s harem, Shah […] - [Red Fort Illuminated by the children of Mumtaz Mahal ! (3)](https://bharatkaitihas.com/illuminated-by-children-of-mumtaz-mahal/): Red Fort Illuminated by the children of Mumtaz Mahal, As a result, Shahjahan’s other eight Begums and many of their children were badly neglected and their names couldn’t be recorded on the pages of history. Shah Jahan had nine Begams – Kandhari Mahal, Akbarabadi Begum, Mumtaz Mahal, Hasina Begum, Moti Begum, Kudsia Begum, Fatehpuri Mahal, […] - [Red fort Descended with Wings of dreams (2)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-descended-with-wings-of-dreams/): Red fort Descended were with Wings of dreams. The huge royal palace was built in the middle of the Red Fort where Shah Jahan himself and his future generations were to live. In 1628, Jahangir’s son Khurram became the possessor of India’s lush green plains, uninterrupted rivers and high rising mountains, killing 18 of his […] - [Babur and Humayun - From rags to riches (1)](https://bharatkaitihas.com/babur-and-humayun-from-rags-to-riches/): Babur and Humayun came to India in rags but when they defeated Ibrahim Lodi, The Sultan of Delhi, Babur and Humayun became the riches. The rivers originating from the Himalayas had irrigated the vast plains of northern India for millions of years and nurtured its flora and fauna. These plains on the banks of the […] - [Tears of Red Fort : A Historical series on YouTube Channel](https://bharatkaitihas.com/tears-of-red-fort-a-historical-series-on-youtube-channel/): Tears of Red Fort is a historical serial originally written in Hindi by renowned historian Dr. Mohanlal Gupta under the title Lal Qila Ki Dard Bhari Dastaan. There are two Red Forts in India. The first red fort is in Agra, which was built by Tomar Rajputs, centennials before Muslims came to India. Sikandar Lodi, […] - [देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/democratic-system-in-native-princely-states-after-independence-of-india/): स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था स्थापित करने के लिए स्थानीय राजनीतिक संस्थाओं ने आंदोलन चलाए। इस कारण कुछ राज्यों में लोकप्रिय सरकारें स्थापित हुईं किंतु देशी रियासतों में प्रजातन्त्रीय व्यवस्था इन रियासतों के विलीनीकरण के बाद ही स्थापित हो सकी। भारतीय राज्यों का भारत मे सम्मिलित होना एक बड़ी सफलता थी। […] - [ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी](https://bharatkaitihas.com/supreme-officials-of-british-rule-in-india/): भारत में ब्रिटिश शासन के सर्वोच्च अधिकारी समय-समय पर अलग-अलग पदनामों से नियुक्त होकर आते रहे। इस सूची में बंगाल के गवर्नर से लेकर अंतिम क्राउन रिप्रजेंटेटिव तक के नाम दिए गए हैं। बंगाल के गवर्नर (ई.1757 -1765) ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा ई.1757 में प्लासी युद्ध की विजय से लेकर ई.1773 तक बंगाल के गवर्नर […] - [मुगलकालीन स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/mughal-art-architecture-and-literature-first-part/): मुगलकालीन स्थापत्य कला भारत के मध्यकालीन इतिहास की विभिन्न प्रवृत्तियों को जानने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। मुगल शासक भारत में विध्वसंक आक्रांताओं के रूप में आए थे। इस कारण उन्होंने भारत के मूल स्थापत्य का विध्वंस करके उनके ऊपर ही नई संरचनाओं क निर्माण करवाया। मुगलकालीन स्थापत्य कला 1221 ई. से लेकर 1526 ई. […] - [मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल - शाहजहाँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%95/): मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल शाहजहाँ का शासनकाल मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँच गई। शाहजहाँ ने अनेक इमारतें बनवाईं। वह स्वयं स्थापत्य कला में निपुण था। वह अपनी इमारतांे के नक्शे स्वयं देखता था। शाहजहाँ की इमारतें श्वेत संगमरमर से निर्मित हैं। उसके समय में राजपूताने में […] - [पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): औरंगजेब एवं परवर्ती मुगल बादशाहों के काल के स्थापत्य को पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य कहा जाता है। इस काल में मुगलों ने महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण बंद कर दिया तथा हिन्दू स्थपात्य को बड़ी क्षति पहुंचाई। जहाँगीर की मृत्यु के बाद चित्रकला का और शाहजहाँ की मृत्यु के बाद मुगल स्थापत्य कला का पतन आरम्भ हो […] - [मुगलकालीन साहित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मुगलकालीन साहित्य मुगल सल्तनत की पूर्ववर्ती तुर्की सल्तनत की अपेक्षा बहुत अधिक समृद्व था। इसका सबसे बड़ा कारण मुगलों की संस्कृति का बर्बर तुर्कों की संस्कृति से अलग होना था। मुगलकालीन साहित्य मुगलों के आने से पहले एवं मुगलों के काल में भी शाही दरबार की भाषा फारसी थी। राज्याधिकारियों को अनिवार्य रूप से फारसी […] - [मुगल कालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): मुगल कालीन चित्रकला निश्चित रूप से हिन्दू चित्रकला से भिन्न थी। मुगल कालीन चित्रकला के बिम्ब, विषय एवं शैली तीनों ही हिन्दू चित्रकला से अलग थे। मुगल कालीन चित्रकला कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि मुगल साम्राज्य की स्थापना के साथ ही चित्रकला में नवजीवन आ गया क्योंकि मुगल बादशाह चित्रकला के महान् प्रेमी थे। […] - [राजपूत राज्यों का प्रशासन](https://bharatkaitihas.com/administrative-structure-and-institutions-of-rajput-states/): राजपूत राज्यों का प्रशासन प्राचीन क्षत्रियों की राज्य व्यवस्था के आधार पर स्थपित किया गया था जिसमें धर्म एवं नैतिकता को प्रमुखता दी गई थी किंतु मध्यकालीन भारत में राजपूतों ने मुगलों के अनुकरण पर राजपूत राज्यों का प्रशासन स्थिर किया जिसमें प्रजा के हितों को बहुत कम संरक्षण दिया गया था। राजपूत शासकों ने […] - [राजपूतों का राजस्व प्रशासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be/): राजपूतों का राजस्व प्रशासन इस प्राचीन सिद्धांत पर आधारित था कि भोग रा धणी राज हो, भोम रा धणी म्हाँ छो। अर्थात् भूमि तो जोतने वाले किसान की है, राजा केवल भोग अर्थात् राजस्व का अधिकारी है किंतु मुगल काल में इस मान्यता को ठुकरा दिया गया और राजा एवं जागीरदार ही समस्त भूमि के […] - [राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5/): राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था और दण्ड-व्यवस्था का आधार प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्र थे। परम्परा, रीति-रिवाज तथा देशाचार को भी मान्यता दी जाती थी। गाँवों में न्याय व्यवस्था गाँव में ग्राम चौधरी या पटेल न्याय देने को कार्य करते थे। ग्राम पंचायत और जाति पंचायतों द्वारा भी न्याय का कार्य किया जाता था। पंचायतों के निर्णयों के […] - [राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d/): राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन परमपरागत हिन्दू सैन्य प्रबन्धन पर आधारित था जिसके कारण वे मुगलों का सामना तो करते थे किंतु उन्हें पराजित नहीं कर पाते थे। राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन सेना का गठन मध्यकालीन राजपूत राज्यों में सेना का रख-रखाव सामान्तों द्वारा किया जाता था। राजा को जब सेना की आवश्यकता होती थी तब […] - [राजपूत राज्यों में समाज](https://bharatkaitihas.com/society-and-economy-in-rajput-states/): राजपूत राज्यों में समाज भारत के अन्य क्षुत्रों की जनता की तुलना में अधिक परम्परावादी थी। सामाजिक परम्पराओं में परिवर्तन की गति बहुत धीमी थी। राजपूत राज्यों में समाज का शैक्षिक स्तर बहुत निम्न था और लोगों में राजा के विरुद्ध आवाज उठाने को विद्रोह एवं पाप माना जाता था। राजपूत राज्यों में समाज मध्यकालीन […] - [राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a5%8d/): राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था प्राचीन हिन्दू जीवन शैली पर आधारित थी और अत्यंत सरल कार्यकलापों से युक्त थी। राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था प्राचीन हिन्दू जीवन शैली पर आधारित थी और अत्यंत सरल कार्यकलापों से युक्त थी। प्रजा से उनके द्वारा अर्जित किए जाने वाले धन पर राजा केवल उतना ही कर लेता था जितना कि […] - [जनपद राज्य और प्रथम मगधीय साम्राज्य (अध्याय 10)](https://bharatkaitihas.com/janpad-rajya-and-first-magadhiya-empire/): जनपद राज्य वैदिक आर्यों ने जन अर्थात् कबीलों की स्थापना की थी। जन का आकार बढ़ने एवं नगरीय जीवन का प्रादुर्भाव होने से, बड़े राज्यों अर्थात् जनपद राज्य का उदय हुआ। धीरे-धीरे लोगों की निष्ठा जन अथवा अपने कबीले के प्रति नहीं रहकर उस जनपद राज्य के प्रति हो गई जिसमें वे बसे हुए थे। […] - [पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क (अध्याय 11)](https://bharatkaitihas.com/indias-contact-with-the-western-world/): मानव सभ्यता के प्रथम चरण में घुमक्कड़ प्रवृत्ति का था। वह छोटे-छोटे समूहों में दूर-दूर तक यात्राएं किया करता था और शिकार करके अपना पेट भरता था। इस कारण पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क अत्यंत प्राचीन काल से था। उत्तर-पूर्व भारत के छोटे रजवाड़ों और गणराज्यों का विलयन धीरे-धीरे मगध साम्राज्य में हो गया […] - [चंद्रगुप्त मौर्य (अध्याय 12)](https://bharatkaitihas.com/chandra-gupta-mourya/): इस अध्याय में चंद्रगुप्त मौर्य के इतिहास के साथ-साथ उसकी विजयें एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का वर्णन किया गया है। चंद्रगुप्त मौर्य ही वह पहला राजा है जिसके समय से भारतीय राजाओं की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिखित प्रमाण मिलने आरम्भ होते हैं। मौर्य वंश मौर्य साम्राज्य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का प्रारम्भिक जीवन अन्धकार में […] - [अशोक महान् (अध्याय 13)](https://bharatkaitihas.com/ashok-the-great/): अशोक महान् मौर्य राजवंश का तीसरा राजा था। वह चंद्रगुप्त मौर्य का पौत्र तथा बिन्दुसार का पुत्र था। उसका वास्तविक नाम अशोक था किंतु जवाहरलाल नेहरू ने अशोक को अशोक महान् तथा अकबर को अकबर महान् लिखा है, इस कारण इतिहास में उसे अशोक महान् के नाम से जाना जाता है। मौर्य सम्राट बिन्दुसार के […] - [मौर्य कालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/mauryan-era-india/): मौर्य कालीन भारत का इतिहास भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की अनूठी विरासत को समेटे हुए है। मौर्य कालीन समाज आज के भारतीय समाज से पूर्णतः भिन्न था। मौर्य कालीन भारत को जानने के तीन प्रमुख साधन हैं- (1) मेगस्थनीज का भारतीय विवरण, (2) कौटिल्य का अर्थशास्त्र तथा (3) अशोक के अभिलेख। मौर्य कालीन समाज वर्ण-व्यवस्था […] - [शुंग वंश एवं कण्व वंश](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6/): मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में एक के बाद एक तीन ब्राह्मण राज्य स्थापित हुए। इन राज्यों के संस्थापक शुंग वंश, कण्व वंश एवं सातवाहन वंश के थे। इस अध्याय में शुंग वंश एवं कण्व वंश का इतिहास दिया गया है। मौर्य-साम्राज्य भारत का प्रथम विशाल साम्राज्य था। मौर्य काल में भारत को […] - [सातवाहन अथवा आन्ध्र वंश](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a8/): सातवाहन राजाओं के नामों में गौतम और वसिष्ठ लगा हुआ है। ये ब्राह्मण गोत्र हैं। नासिक अभिलेख में गौतमीपुत्र शातकर्णि की माता गौतमी बलश्री को राजर्षिवधू कहा गया है। आन्ध्र वंश अथवा सातवाहन आन्ध्र एक जाति का नाम था जो गोदावरी तथा कृष्णा नदियों के मध्य-भाग में निवास करती थी। वायु पुराण के अनुसार आन्ध्र […] - [भारत के विदेशी शासक - यूनानी, शक, पह्लव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): भारत के विदेशी शासक मुख्यतः यूनानी, शक, पह्लव एवं कुषाण वंश के थे। इस अध्याय में यूनानी, शक एवं पह्लवों पर जानकारी दी गई है। कुषाण वंश के बारे में अगले अध्याय में जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। विदेशी आक्रमण अशोक की मृत्यु के साथ ही भारत की राजनीतिक विशृंखलता पुनः आरम्भ हो गई। उत्तरकालीन […] - [गुप्त वंश](https://bharatkaitihas.com/gupta-empire/): भारत में गुप्त वंश के शासकों की एक दीर्घ शृंखला ने 320 ईण् से 495 ईण् तक शासन किया। गुप्त वंश के शासन काल को भारतीय पुनर्जागरण का युग तथा भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। मौर्य शासन के नष्ट हो जाने के बाद भारत की राजनीतिक एकता भंग हो गई थी, […] - [प्रारंभिक गुप्त शासक](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): प्रारंभिक गुप्त शासक अब भी इतिहास के कुहासे में हैं, उनके बारे में स्पष्ट एवं विस्तृत जानकारी अब तक नहीं जुटाई जा सकी है। फिर भी अब तक प्राप्त तथ्यों के आधार पर श्रीगुप्त, घटोत्कच एवं चंद्रगुप्त (प्रथम) को प्रारम्भिक गुप्त शासक माना जाता है। प्रारंभिक गुप्त शासक श्रीगुप्त श्रीगुप्त का काल 275 ई. से […] - [काच](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a/): कुछ स्वर्णमुद्रओं पर काच नामक राजा का नाम लिखा हुआ मिलता है। इन मुद्राओं के सामने की ओर एक राजा अंकित है जो अपने बाएँ हाथ में चक्रध्वज लिए खड़ा है। राजा के बाएँ हाथ के नीचे ब्राह्मी लिपि में एक वर्तुलाकार लेख उत्कीर्ण है- ‘ काचो गामवजित्य दिवं कर्मभिरुत्तमैः ’ अर्थात् – पृथ्वी-विजय के […] - [समुद्रगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): गुप्त सम्राटों में समुद्रगुप्त का बड़ा नाम है। उसने ई.335 से 375 तक भारत के बड़े भूभाग को अपने अधीन किया तथा उस पर सफलता पूर्वक शासन किया। चन्द्रगुप्त (प्रथम) के बाद उसका पुत्र समुद्रगुप्त मगध के सिंहासन पर बैठा। चन्द्रगुप्त (प्रथम) की माता लिच्छवियों की राजकुमारी कुमारदेवी थी। यद्यपि समुद्रगुप्त के और भी कई […] - [रामगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): समुद्रगुप्त के बाद उसका बड़ा पुत्र रामगुप्त पाटलिपुत्र का राजा हुआ। उसे अपने पिता का विशाल साम्राज्य पैतृक अधिकार में प्राप्त हुआ किंतु वह इतने बड़े साम्राज्य के शासक के रूप में अयोग्य सिद्ध हुआ। रामगुप्त (375 ई.) समुद्रगुप्त के कई पुत्र तथा पौत्र थे। उसके ज्येष्ठ पुत्र का नाम राम गुप्त था जो उसके […] - [चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य](https://bharatkaitihas.com/chandragupta-vikramaditya/): चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य को गुप्त शासकों के इतिहास में चन्द्रगुप्त द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। वह महान् हिन्दू सम्राट था जिसने भारत भूमि को धन-सम्पदा, ज्ञान-विज्ञान एवं धर्म-अध्यात्म से सम्पन्न बनाने में अद्भुत सफलताएं अर्जित कीं। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) समुद्रगुप्त की रानी दत्तदेवी का पुत्र था। वह बड़ा ही वीर तथा पराक्रमी राजकुमार था। […] - [गोविंद गुप्त बालादित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मालव अभिलेख के अनुसार चन्द्रगुप्त (द्वितीय) की मृत्यु के बाद गोविंद गुप्त बालादित्य राजा हुआ। अतः गोविंदगुप्त अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ किंतु उसका शासन अत्यंत अल्पकाल का रहा। गोविंद गुप्त बालादित्य (412-415 ई.) बसाढ़ (वैशाली) से ध्रुवस्वामिनी की एक मुहर प्राप्त हुई है जिस पर एक लेख इस प्रकार उत्कीर्ण है- महाराजाधिराज श्री चंद्रगुप्त-पत्नी […] - [कुमार गुप्त प्रथम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae/): कुमार गुप्त प्रथम गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय का कनिष्ठ पुत्र था। उसे महेन्द्रादित्य भी कहते हैं। गोविंद गुप्त बालादित्य के संक्षिप्त शासन काल के बाद कुमारगुप्त प्रथम गुप्तों के सिंहासन पर बैठा। कुमार गुप्त प्रथम (415-455 ई.) बिलसड़ अभिलेख के अनुसार कुमारगुप्त की आरम्भिक तिथि 415 ई. तथा उसके चांदी के सिक्कों पर उसकी अंतिम […] - [स्कन्दगुप्त](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): कुमारगुप्त की मृत्यु के उपरान्त उसका पुत्र स्कन्दगुप्त सिंहासन पर बैठा। जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार वह ई. 455 में गुप्तों के सिंहासन पर बैठा। जूनागढ़ अभिलेख में स्कन्दगुप्त अपने पिता कुमारगुप्त के नाम का उल्लेख तो करता है किंतु अपनी माता के नाम का उल्लेख नहीं करता जबकि गुप्त शासकों में इस प्रकार के शिलालेखों […] - [गुप्त साम्राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/fall-of-gupta-empire/): ईस्वी 570 के आसपास गुप्त साम्राज्य का पतन हो गया। गुप्तों के पतन के बाद देश की राजनीतिक एकता भंग हो गई तथा छोटे-छोटे राज्यों का उदय होने लगा। उत्तरकालीन गुप्त सम्राट स्कन्दगुप्त के बाद उसका विमात-पुत्र पुरुगुप्त वृद्धावस्था में सिंहासन पर बैठा। पुरुगुप्त ने 467 ई. से 473 ई. तक शासन किया। उसने धनुर्धर […] - [गुप्त कालीन शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): गुप्त कालीन शासन व्यवस्था राज्य के संरक्षण एवं प्रजा के हित-साधन के सिद्धांतों पर केन्द्रित थीं। शासक द्वारा प्रजा से न्यूनतम कर लिया जाता था। गुप्त कालीन शासन व्यवस्था के मूल तत्व शासन का आदर्श गुप्त-सम्राटों के शासन का आदर्श बहुत ऊँचा था। वे स्वयं को प्रजा का ऋणी समझते थे और प्रजा की सेवा […] - [भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल](https://bharatkaitihas.com/golden-age-of-india-in-gupta-period/): गुप्त शासकों के शासन काल को भारत का स्वर्णयुग कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस काल में प्रजा सुखी एवं सम्पन्न थी। प्रजा को न तो शासन का और न अपराधियों का भय था। इतिहास में स्वर्ण युग का तात्पर्य उस युग से होता है जो अन्य युगों से अधिक […] - [गुप्त कालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/india-in-gupta-period/): गुप्त कालीन भारत में ब्राह्मण धर्म का पुनरुद्धार हुआ। इस काल में अनेक पुराण, नीति, स्मृति एवं अन्य धर्मशास्त्रों का लेखन हुआ तथा वैष्णव मंदिरों का निर्माण हुआ। यज्ञों का फिर से विस्तार हुआ। गुप्त कालीन समाज गुप्त कालीन भारत में बाह्य संस्कृति को आत्मसात् करने की अपूर्व क्षमता थी। यही कारण है कि शक, […] - [हूण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%a3/): हूण लोग मूलतः चीन के निवासी थे। चीनी भाषा में इन्हें हिगनू कहा जाता था। संस्कृत-साहित्य तथा अभिलेखों में इन्हें हूण कहा गया है। हूण लोग मंगोल जाति के थे और सीथियनों की एक शाखा से थे। ये लोग बड़े ही असभ्य, निर्दयी, रक्त पिपासु तथा लड़ाकू होते थे और युद्ध कला में बड़े कुशल […] - [हर्षवर्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): हर्षवर्धन के शासनकाल की जानकारी कई साधनों से मिलती है। हर्ष के दरबार में रहने वाले कवि बाणभट्ट ने अपनी कृति हर्षचरित में हर्ष तथा उसके पूर्वजों का वर्णन किया है। पुष्यभूति वंश का उदय गुप्त साम्राज्य के छिन्न-भिन्न हो जाने के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता एक बार पुनः समाप्त हो गई और देश […] - [हर्ष की उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): हर्ष की उपलब्धियाँ उसके साम्राज्य विस्तार के रूप में तो हमारे सामने आती ही हैं, साथ ही सांस्कृतिक क्षेत्र में भी हर्ष की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं। हर्ष की उपलब्धियाँ हर्ष की गणना भारत के महान् सम्राटों में की जाती है, हर्ष की उपलब्धियाँ इस प्रकार से हैं- (1) महान् विजेता स्मिथ ने हर्ष की उपलब्धियों […] - [ह्वेनसांग की भारत यात्रा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): चीनी चात्री ह्वेनसांग की भारत यात्रा सातवीं शताब्दी ईस्वी में हुई। उस समय उत्तर भारत में हर्षवर्धन बहुत बड़े क्षेत्र पर शासन कर रहा था। ह्वेनसांग की भारत यात्रा के विवरण से हमें सातवीं शताब्दी ईस्वी के भारत के इतिहास की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है। चीनी चात्री ह्वेनसांग ह्वेनसांग एक चीनी यात्री था, जो […] - [पल्लव एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/the-contribution-of-the-pallavas-to-indian-culture/): दक्षिण के राज्यों में पल्लव वंश का बहुत बड़ा महत्त्व है। इस वंश ने दक्षिण भारत पर लगभग 500 वर्ष तक शासन किया। इस वंश का उदय लगभग 350 ई. में चोड अथवा चोल देश के पूर्वी समुद्र तट पर हुआ। दक्षिण भारत के राज्य भारतवर्ष के मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम दिशा की […] - [चालुक्य एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/contribution-of-chalukyas-to-indian-culture/): दक्षिण भारत के चालुक्य तीन शाखाओं में बंटे हुए थे- बादामी अथवा वातापी के चालुक्य, कल्याणी के चालुक्य एवं वेंगी के चालुक्य। गुजरात के अन्हिलवाड़ा में भी चालुक्यों की एक शाखा शासन करती थी। चालुक्य वंश चालुक्यों की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विद्वान एकमत नहीं हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार वे प्राचीन क्षत्रियों के वंशज […] - [चोल एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/the-contribution-of-the-cholas-in-indian-culture/): पल्लव वंश के कमजोर पड़ जाने पर उनके राज्य पर चोल वंश का शासन हो गया। चोल शासक आदित्य प्रथम ने पाण्ड्य नरेश पर आक्रमण करके उससे कोंगु प्रदेश छीन लिया। इस प्रकार आदित्य प्रथम ने शक्तिशाली चोल राज्य की स्थापना की। चोल वंश चोल तमिल भाषा के ‘चुल’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ […] - [राजपूतों का उदय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a4%af/): हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत की केन्द्रीय राजनीति में उत्पन्न शून्यता को भरने के लिए राजपूतों का उदय हुआ। राजपूतों ने पांच शताब्दियों तक मुसलमानों को भारत भूमि से बाहर रखा। पुष्यभूति राजा हर्षवर्द्धन की मृत्यु के उपरान्त भारत की राजनीतिक एकता पुनः भंग हो गई और देश के विभिन्न भागों में छोटे-छोटे राज्यों […] - [प्रमुख राजपूत वंश](https://bharatkaitihas.com/major-rajput-dynasties-of-india/): भारत के प्रमुख राजपूत वंश भारत भूमि को ऐसे समय में अपनी सेवाएं देने में सफल रहे जब प्राचीन राजवंश पूरी तरह निर्बल होकर इतिहास के नेपथ्य में जा चुके थे। गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहार वंश का उदय राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में गुर्जर प्रदेश में हुआ। इसी कारण इस वंश के नाम के पहले गुर्जर शब्द […] - [राजपूतकालीन भारत](https://bharatkaitihas.com/india-under-rajput-rulers/): राजपूतकालीन भारत का इतिहास में बहुत बड़ा महत्त्व है। राजपूतों ने लगभग साढ़े पांच शताब्दियों तक अदम्य उत्साह के साथ मुस्लिम आक्रांताओं से देश की रक्षा की। यद्यपि वे अन्त में अपने देश की स्वतंत्रता की रक्षा न कर सके परन्तु उनके त्याग, उनके देशप्रेम, उनके साहस तथा उनके उच्चादर्श की कहानियां अमर हो गईं। […] - [त्रिकोणीय संघर्ष (गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट)](https://bharatkaitihas.com/triangular-struggle-for-supremacy-gurjara-pratihara-pal-and-rashtrakuta-dynasty/): त्रिकोणीय संघर्ष गुर्जर.प्रतिहारों पालों और राष्ट्रकूटों के बीच हुआ। यह संघर्ष भारत भूमि के लिए अत्यंत विनाशकारी एवं दुर्भाग्यपूर्ण सिद्ध हुआ। इस कारण मुसलमानों के लिए भारत के द्वार खुलते चले गए। अवंति का गुर्जर-प्रतिहार वंश गुर्जर-प्रतिहारों का उदय मण्डोर में हुआ तथा वे जालोर होते हुए अवन्ति तक जा पहुंचे थे। गुर्जर प्रदेश का […] - [इस्लाम का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/rise-of-islam/): इस्लाम (Islam) का उत्कर्ष सम्पूर्ण विश्व की संस्कृतियों के लिए बड़े खतरे के रूप में हुआ। इस्लामी सेनाएँ (Islamic armies) जहाँ कहीं भी गईं, उन्होंने बड़ी संख्या में नरसंहार किया तथा वहाँ के सांस्कृतिक परिवेश एवं चिह्नों को नष्ट किया। इस्लाम का अर्थ इस्लाम अरबी भाषा के ‘सलम’ शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता […] - [अरबवासियों का भारत आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/arabs-invade-india/): अरबवासियों का भारत आक्रमण यद्यपि सिंध क्षेत्र तक सीमित था किंतु इससे अरबवासियों को भारतीयों की कमजोरियों का पता लग गया। अरबवासियों का परिचय अरब एशिया महाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रायद्वीप है। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिमी में लालसागर और पूर्व में फारस की खाड़ी स्थित है। इस क्षेत्र के निवासी […] - [महमूद गजनवी के आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): महमूद गजनवी के आक्रमण ईस्वी 1000 से 1027 के बीच कुल 17 बार हुए जिनमें भारत की प्रजा का बहुत बड़ा विनाश हुआ। महमूद गजनवी ने खलीफा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए प्रतिज्ञा की कि वह प्रतिवर्ष भारत के काफिरों पर आक्रमण करेगा। सिंध में अरबों के आक्रमण के लगभग 350 वर्ष बाद उत्तर-पश्चिमी […] - [शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी के आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी के आक्रमण भारत भूमि पर एक नई विपदा के रूप में हुए। उस काल में भारत की शक्ति अनेक छोटे-बड़े राज्यों में बिखरी हुई थी। इन राज्यों के शासक परस्पर युद्ध करके अपने-अपने राज्य का विस्तार करने में लगे रहते थे। इस कारण भारतीय राजा मुहम्मद गौरी के आक्रमणों का एकजुट होकर […] - [पानीपत का प्रथम युद्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): पानीपत का प्रथम युद्ध दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी तथा जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर के बीच हुआ। यह भारत के इतिहास के निर्णायक युद्धों में से एक था। इस युद्ध ने भारत में एक नवीन मुस्लिम राज्य की स्थापना का मार्ग खोल दिया। पानीपत का प्रथम युद्ध – पूर्व तैयारियाँ बाबर की सेना अप्रेल 1526 में […] - [खानवा की लड़ाई](https://bharatkaitihas.com/expansion-of-mughal-empire-second-part/): खानवा की लड़ाई समरकंद से आए मुगल आक्रांता जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर तथा राजपूताना के लगभग समस्त हिन्दू राजाओं के बीच लड़ी गई। हिन्दुओं की ओर से खानवा की लड़ाई का नेतृत्व महाराणा सांगा द्वारा किया गया। पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर के लिये भारत में पैर टिकाने के लिये पर्याप्त था किंतु साम्राज्य की स्थापना […] - [घाघरा का युद्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): घाघरा का युद्ध बाबर एवं अफगानों के बीच लड़ा गया था। जब बाबर ने इब्राहीम लोदी को मारकर अफगानों से दिल्ली एवं आगरा सहित अन्य क्षेत्र छीन लिए तो अफगानों ने महमूद लोदी के नेतृत्व में संगठित होकर बाबर से अंतिम युद्ध लड़ने का निर्णय लिया। बाबर अब तक पंजाब, दिल्ली, खनवा तथा चन्देरी के […] - [बाबर का चरित्र तथा उसके कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): बाबर का चरित्र इतिहासकारों में विवाद का विषय रहा है। कुछ विद्वानों के अनुसार बाबर महान साम्राज्य निर्माता था जबकि अन्य विद्वानों के अनुसार बाबर असमय प्रौढ़ बालक था जिसके कारण उसका व्यक्तित्व विकृतियों का शिकार हो गया थ और वह क्रूर हत्यारा एवं आक्रांता था। बाबर में मंगोलों की क्रूरता, तुर्कों का साहस एवं […] - [हुमायूँ और उसकी समस्याएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81/): हुमायूँ का पूरा नाम नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ था। बाबर दिल्ली सल्तनत पर अधिकार करने के बाद केवल तीन साल बाद अचानक ही मर गया था, इसलिए हुमायूँ को चारों ओर से समस्याओं ने घेर लिया। हुमायूँ का प्रारम्भिक जीवन बाबर के चार पुत्र और तीन पुत्रियाँ थीं जिनमें हुमायूँ सबसे बड़ा था। हुमायूँ का जन्म […] - [हुमायूँ की सामरिक उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): हुमायूँ की सामरिक उपलब्धियाँ भारत के मध्यकालीन इतिहास पर गहा प्रभाव डालने वाली सिद्ध हुईं। उसने अपने शत्रुओं का धैर्य पूर्वक मुकाबला किया तथा उन्हें एक-एक करके परास्त करता चला गया। इस कारण भारत में मुगल सल्तनत की फिर से स्थापना संभव हो सकी। हुमायूँ की सामरिक उपलब्धियाँ कालिंजर पर आक्रमण कालिंजर का दुर्ग उत्तर […] - [हुमायूँ - शेर खाँ संघर्ष](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7/): हुमायूँ – शेर खाँ संघर्ष हुमायूँ के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी थी। इस संघर्ष के कारण हूमायूँ को न केवल अपना राज्य छोड़कर अपितु भारत छोड़कर भी भाग जाना पड़ा। शेर खाँ हुमायूँ का सबसे भयंकर शत्रु सिद्ध हुआ। वह अफगानों का नेता था। उसने दक्षिण बिहार पर अधिकार स्थापित करके चुनार का दुर्ग […] - [हुमायूँ का पलायन एवं भारत वापसी](https://bharatkaitihas.com/age-of-instability-of-mughal-sultanate-second-part/): शेर खाँ से मिली पराजय के बाद भारत से हुमायूँ का पलायन मुगलों के इतिहास की सबसे बड़ी शर्मनाक घटना है। हुमायूँ का पलायन उसकी स्वयं की विफलता तो थी ही, उससे भी अधिक वह उसके भाइयों की गद्दारी थी हुमायूँ का पलायन सिंध प्रवास हुमायूँ ने हिन्दाल के साथ लाहौर से प्रस्थान कर सिन्ध […] - [हुमायूँ का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): हुमायूँ का चरित्र उसकी अच्छाइयों एवं कमजोरियों का सम्मिश्रण था। मूलतः वह एक अच्छा इंसान था किंतु साथ ही प्रमादी अर्थात् आलसी प्रवृत्ति का भी था। हुमायूँ की अच्छाइयाँ (1.) सुशिक्षित एवं सभ्य व्यक्ति के रूप में हुमायूँ सरल हृदय, सहज विश्वासी, परिवार से प्रेम करने वाला, सुशिक्षित तथा सभ्य व्यक्ति था। वह उच्च कोटि […] - [द्वितीय अफगान साम्राज्य का संस्थापक - शेरशाह सूरी](https://bharatkaitihas.com/second-afghan-empire-first-part/): द्वितीय अफगान साम्राज्य का संस्थापक शेरशाह सूरी ई.1540 में दिल्ली का सुल्तान बना तथा ई.1545 में एक दुर्घटना में मारा गया। इन पांच सालों में उसने अपने साम्राज्य में अनेक प्रशासनिक सुधार किए। सूर कबीला  सूर कबीला अफगानिस्तान में निवास करता था। ये लोग स्वयं को मुहम्म्द गौरी का वंशज मानते थे। शेरशाह के पूर्वज […] - [शेरशाह सूरी का शासन](https://bharatkaitihas.com/second-afghan-empire-second-part/): शेरशाह सूरी का शासन अफगान शासन पद्धति पर आधारित था। अन्य मध्यकालीन मुस्लिम शासकों की तरह शेरशाह भी केवल मुसलमानों को अपनी प्रजा मानता था और हिन्दुओं को उसके राज्य में रहने के लिए जजिया कर देना पड़ता था। शेरशाह सूरी का शासन शेरशाह सूरी (1540-45 ई.) के समय में भारत में दो प्रकार की […] - [भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का इतिहास-अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/history-of-indian-civilization-and-culture-index/): इस पृष्ठ पर भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का इतिहास नामक पुस्तक की अनुक्रमणिका दी गई है। - [सभ्यता एवं संस्कृति का अर्थ](https://bharatkaitihas.com/meaning-of-civilization-and-culture-part-one/): मानव जब जन्म लेता है, तब वह मानव की देह में होते हुए भी पूर्ण अर्थों में मानव नहीं होता। संस्कृति उसका परिष्कार करके उसे वास्तविक मानव बनाती है। संस्कृति, मानव को मानव बना देने वाले विशिष्ट तत्त्वों में सबसे महत्त्वपूर्ण है। - [पर्यावरण सभ्यता एवं संस्कृति का सम्बन्ध](https://bharatkaitihas.com/meaning-of-civilization-and-culture-part-two/): इस अध्याय में पर्यावरण सभ्यता एवं संस्कृति का सम्बन्ध स्पष्ट किया गया है। ये तीनों तत्व एक-दूसरे के अनुपूरक एवं अन्योन्याश्रित हैं तथा परिस्थितियों के अनुसार एक दूसरे का निर्माण, विकास एवं विनाश करते हैं। पर्यावरण, सभ्यता एवं संस्कृति का सम्बन्ध प्राकृतिक परिवेश को पर्यावरण कहते हैं। चूँकि मनुष्य किसी न किसी विशिष्ट प्रकार के […] - [भारतीय संस्कृति का प्रसार](https://bharatkaitihas.com/principal-elements-and-characteristics-of-indian-culture-part-one/): इस अध्याय में भारतीय संस्कृति का प्रसार विषय पर संक्षिप्त चर्चा की गई है। भारतीय संस्कृति का प्रसार न केवल भारत में अपितु सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ। यहाँ तक कि यूरोप की संस्कृति के मूल तत्व वैदिक आर्यों के द्वारा भारत से इटली एवं यूनान आदि देशों को ले जाए गए। विश्व में अनेक प्राचीन […] - [भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/principal-elements-and-characteristics-of-indian-culture-part-two/): इस अध्याय में भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ लिखी गई हैं। भारतीय संस्कृति अपनी विशेषताओं के कारण ही संसार भर में सबसे अनूठी है। भारत में आर्य संस्कृति का प्रसार सप्त-सिन्धु प्रदेश में निवास भारतीय आर्य चाहे भारत के मूल-निवासी रहे हों और चाहे मध्य एशिया से भारत में आए हों परन्तु यह निश्चित है कि […] - [भारतीय संस्कृति के तत्त्व](https://bharatkaitihas.com/principal-elements-and-characteristics-of-indian-culture-part-three/): जब हम भारतीय संस्कृति के तत्त्व विषय पर विचार करते हैं तो हम इस संस्कृति की कुछ निश्चित एवं मूलभूत विशेषताओं को सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति पर आच्छादित हुआ पाते हैं। भारतीय संस्कृति में एकता के तत्त्व भारत वर्ष के भौगोलिक विस्तार, जनसंख्या प्रसार, सांस्कृतिक वैविध्य, भाषाई बहुलता, क्षेत्रीय पहचान, वेषभूषा के अंतर तथा राजनीतिक विशृंखलता […] - [भारतीय संस्कृति का इतिहास जानने के साहित्यिक स्रोत](https://bharatkaitihas.com/means-to-know-the-history-of-indian-civilization-and-culture-part-one/): सौभाग्य से भारतीय संस्कृति का इतिहास जानने के साहित्यिक स्रोत विपुल मात्रा में उपलब्ध हैं। प्राचीनतम काल की भारतीय संस्कृति का इतिहास जानने का सबसे बड़ा साधन तो स्वयं वेद ही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि वेदों को केवल धार्मिक साहित्य समझकर न पढ़ा जाए अपितु उनमें में लिखी गई ऋचाओं के संदर्भों […] - [भारतीयसंस्कृति का इतिहास जानने के पुरातात्विक स्रोत](https://bharatkaitihas.com/means-to-know-the-history-of-indian-civilization-and-culture-part-two/): भारतीयसंस्कृति का इतिहास जानने के पुरातात्विक स्रोत गुफाओं, नदियों के किनारों, तालाबों के किनारों, टीलों तथा धरती में दबे हुए मिलते हैं। पुरातात्विक स्रोतों के आधार पर भारत की संस्कृति का इतिहास लिखा गया है। पुरातात्विक स्रोतों को को मुख्यतः चार भागों में विभक्त किया जा सकता है- (1) अभिलेख (2) दानपत्र (3) मुद्राएँ और […] - [अनुक्रमणिका - चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%ab%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae/): अनुक्रमणिका – चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के अध्यायों की सूची दी गई है। पाठक इन अध्यायों के शीर्षकों पर क्लिक करके सम्बन्धि अध्याय तक पहुंच सकते हैं। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भारत में चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय लेकर आए। […] - [अनुक्रमणिका - रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): अनुक्रमणिका – रजिया सुल्तान पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक रजिया सुल्तान के अध्यायों का क्रम दिया गया है। आप नीचे दिए गए अध्याय शीर्षकों पर क्लिक करके सीधे ही उन अध्यायों तक पहुंच सकते हैं। रजिया सुल्तान मध्यकालीन भारत के इतिहास की एक प्रमुख महिला शासक थी। भारतीय इतिहास के क्षितिज पर […] - [रुकुनुद्दीन फीरोजशाह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9/): 30 अप्रेल 1236 को सुल्तान इल्तुमिश की मृत्यु हो गई। उसने शहजादी रजिया फीरोजशाह को अपनी उत्तराधिकारी घोषित किया किंतु तुर्की अमीरों ने रजिया के निकम्मे एवं अयोग्य भाई रुकुनुद्दीन फीरोजशाह को सुल्तान बनाने का निश्चय किया। शहजादी रजिया के पिता इल्तुतमिश के द्वारा की गई व्यवस्था के अनुसार शहजादी रजिया को सुल्तान बनना था […] - [पाश्चात्य संस्कृति का भारतीय संस्कृति पर प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/western-influence-on-indian-culture/): ब्रिटिश शासन के काल में पाश्चात्य संस्कृति का भारतीय संस्कृति पर बड़ा प्रभाव पड़ा। भारतीय वेषभूषा, खानपान, रहन-सहन सभी में आमूलचूल परिवर्तन हो गया। भारतीय संस्कृति की दो बड़ी विशेषताएं हैं- यह बाहर से बहुत सख्त दिखाई देती है किंतु भीतर से इसमें सहिष्णुता का लचीलापन मौजूद है। भारतीय संस्कृति को वैदिक-काल से लेकर आधुनिक […] - [भारत की पाषाण सभ्यताएँ एवं संस्कृतियाँ](https://bharatkaitihas.com/stone-civilizations-and-cultures-of-india-part-one/): भारत की पाषाण सभ्यताएँ एवं संस्कृतियाँ कब आरम्भ हुईं, इसके बारे में कोई निश्चित तिथि नहीं दी जा सकती किंतु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि आज से कई लाख साल पहले भी भारत में ऐसा आदमी रहता था जो पत्थरों को हथियारों की तरह उपयोग में लेता था। भारत की पाषाण सभ्यताएँ एवं […] - [पूर्व-पाषाण कालीन सभ्यताएं (पेलियोलीथिक पीरियड)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be/): भारत में पूर्व-पाषाण कालीन सभ्यताएं (पेलियोलीथिक पीरियड) आज से लगभग पाँच लाख साल पहले आरम्भ हुईं तथा आज से लगभग दस हजार साल पहले तक अस्तित्व में रहीं। मानव-सभ्यता के प्रारम्भिक काल को पूर्व-पाषाण कालीन सभ्यताएं के नाम से पुकारा गया है। इसे पुरा पाषाण काल तथा उच्च पुरापाषाण युग भी कहते हैं। मानव की […] - [मध्यपाषाण कालीन सभ्यताएँ (मीजोलिथिक पीरियड)](https://bharatkaitihas.com/stone-civilizations-and-cultures-of-india-part-two/): पूर्वपाषाण कालीन सभ्यताओं के बाद भारत में विश्व के अन्य क्षेत्रों की तरह पहले मध्यपाषाण कालीन सभ्यताएँ आरम्भ हुईं एवं उनके बाद नवपाषाण कालीन सभ्यताएँ आरम्भ हुईं। गर्म युग आज से 12 हजार वर्ष पहले धरती पर ‘होलोसीन पीरियड’ आरंभ हुआ जो आज तक चल रहा है। यह गर्म युग है तथा वर्तमान हिमयुग के […] - [नवपाषाण कालीन सभ्यताएं](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82/): भारत में नवपाषाण कालीन सभ्यताएँ सामान्यतः मध्यपाषाण कालीन सभ्यताओं के बाद आरम्भ हुईं किंतु कुछ स्थल ऐसे भी थे जिनमें पूर्वपाषाण काल के बाद सीधे ही नवपाषाण काल आ गया। हालांकि ऐसा बहुत कम स्थलों पर देखा गया है। नव पाषाण कालीन सभ्यताएं निओलिथिक पीरियड भी कहलाती हैं। धरती पर पूर्व-पाषाण-कालीन सभ्यता लगभग 35 लाख […] - [पाषाण सभ्यताओं की तुलना](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be/): विश्व के अन्य स्थलों पर विकसित हुई पाषाण कालीन सभ्यताओं की तरह भारत में भी पुरापाषाण, मध्यपाषाण एवं नवपाषाण कालीन सभ्यताएं विकसित हुईं। तीनों पाषाण सभ्यताओं की तुलना करने पर हमें इनमें अंतर स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। तीनों पाषाण सभ्यताओं की तुलना काल का अंतर तीनों पाषाण सभ्यताओं की तुलना करने पर ज्ञात होता है […] - [भारत की आदिम जातियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): भारत में छः नृवंश जातियों के कंकाल एवं खोपड़ियाँ पाई गई हैं। इन्हें भारत की आदिम जातियाँ माना जाता है। ये समस्त आदिम जातियाँ प्रस्तर युगीन अथवा पाषाण कालीन सभ्यताओं से सम्बन्ध रखती थीं। भारत की आदिम जातियाँ (1.) नीग्रेटो यह भारत की प्राचीनतम जाति थी जो अफ्रीका से भारत में आई थी। यह नितांत […] - [भारत में ताम्राश्म संस्कृतियाँ](https://bharatkaitihas.com/copper-or-tamrasham-cultures-in-india-part-two/): भारत में ताम्राश्म संस्कृतियाँ प्रस्तर युग के बाद विकसित हुईं। ताम्राश्म संस्कृति उसे कहते हैं जिसमें ताम्रधातु एवं पाषाण के उपकरण साथ-साथ उपयोग में आते थे। ताम्राश्म संस्कृति को ताम्रपाषाणिक संस्कृति (Copper Stone Culture) भी कहते हैं। कहीं-कहीं पाषाण संस्कृति और ताम्राश्म संस्कृति एक साथ चलती रहीं। धातु काल में प्रवेश मानव सभ्यता ने पाषाण-काल […] - [सिंधु घाटी सभ्यता](https://bharatkaitihas.com/sindhu-civilization-religion-and-society-part-one/): सिंधु घाटी सभ्यता भारत भूमि पर प्रकट होने वाली सर्वप्रथम सुविकसित सभ्यता मानी जाती है। इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है। यह तृतीय कांस्य-कालीन सभ्यता थी। जिस समय सिंधु घाटी सभ्यता अस्तित्व में आई, लौह सभ्यताएं भविष्य के गर्भ में थीं, यहाँ तक कि इसके समानांतर रह रही प्राचीन बस्तियां अभी भी नव पाषाणकाल […] - [सिंधु सभ्यता का धर्म](https://bharatkaitihas.com/sindhu-civilization-religion-and-society-part-two/): सिंधु सभ्यता का धर्म क्या था, किन सिद्धांतों पर टिका हुआ था, इसके सम्बन्ध में कोई लिखित जानकारी नहीं मिलती किंतु सिंधु सभ्यता के स्थलों से प्राप्त पुरातत्व सामग्री के आधार पर यह अनुमान लागाने का प्रयास किया गया है कि सिंधु सभ्यता का धर्म कैसा था! सिंधु सभ्यता के निवासी भलीभांति शिक्षित थे और […] - [सिंधु सभ्यता का समाज](https://bharatkaitihas.com/sindhu-civilization-religion-and-society-part-three/): सिंधु सभ्यता का समाज प्राीचनतम भारत की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। यह एक तृतीय कांस्य कालीन सभ्यता का समाज था जिसका अर्थ है कि इस काल के मानव ने अपने से पूर्व की समस्त सभ्यताओं से काफी अधिक उन्नति कर ली थी। सैन्धव सभ्यता की खुदाई में मिली वस्तुओं से अनुमान लगाया जाता है […] - [सिंधु सभ्यता की अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/sindhu-civilization-religion-and-society-part-four/): सिंधु सभ्यता की अर्थव्यवस्था बड़ी उन्नत अवस्था में थी। यह केवल कृषि एवं पशुपालन पर आधारित नहीं थी अपितु व्यापार, शिल्प एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों से सम्पन्न थी। शिक्षा सिंधु सभ्यता का समाज शिक्षित समाज था। सैन्धववासी लिखना-पढ़ना जानते थे अतः अनुमान है कि उन्होंने शिक्षा देने का एक निश्चित तरीका विकसित कर लिया होगा। […] - [लौह युगीन संस्कृति](https://bharatkaitihas.com/iron-age-culture-of-india/): भारत में लौह युगीन संस्कृति काफी विलम्ब से आई। फिर भी ऋग्वैदिक प्रमाण सिद्ध करते हैं कि ऋग्वेद काल में भारत की सभ्यता लौह युग में प्रवेश कर चुकी थी। ऋग्वेद में अयस नामक एक ही धातु का उल्लेख हुआ है। अथर्वेद में लाल-अयस तथा श्याम-अयस नामक दो धातुओं का उल्लेख है। वाजसनेयी संहिता में […] - [महापाषाण संस्कृति](https://bharatkaitihas.com/megalithic-culture-of-south-india/): महापाषाण संस्कृति का उदय ई.पू.1000 के आसपास दक्षिण भारत में हुआ। यह संस्कृति दक्षिण भारत में कई शताब्दियों तक अस्तित्त्व में रही। दक्षिण भारत के कई स्थानों से महापाषाणीय शवाधान (मेगालिथस्) प्राप्त हुए हैं। इस संस्कृति के लोग मृतकों को समाधियों में गाड़ते थे तथा उनकी सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े पाषाणों का प्रयोग करते थे। […] - [वैदिक सभ्यता](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be/): वैदिक सभ्यता संसार की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह देखकर आश्चर्य होता कि आज से 10 हजार साल पहले के युग में भी मानव ने इतनी उत्कृष्ट सभ्यता का विकास किया। वैदिक सभ्यता एवं साहित्य की सत्य के प्रति ललक को ऋग्वेद के नासदीय सूक्त की इस ऋचा से समझा जा सकता है- न मुझे […] - [वेद](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a6/): वेद संसार के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। आश्चर्य होता कि आज से 10 हजार साल पहले के युग में भी मानव ने इतनी उत्कृष्ट भाषा का विकास किया, इतनी उत्कृष्ट संस्कृति को जन्म दिया एवं इतने उत्कृष्ट साहित्य का सृजन किया! वैदिक ग्रन्थों को तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है- (1.) वेद अथवा […] - [वेदांग](https://bharatkaitihas.com/vedic-civilization-and-literature-part-two/): वैदिक साहित्य के अंतर्गत ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद, उपनिषद, आरण्यक एवं ब्राह्मण ग्रंथों पर हम पिछले अध्याय में चर्चा कर चुके हैं। इस अध्याय में वेदांग पर चर्चा की जा रही है। विपुल वैदिक साहित्य अर्थात् वेद, ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक एवं उपनिषदों को पढ़ने एवं उनके गूढ़ अर्थ को समझने के लिए शिक्षा, छन्द, […] - [उपनिषदों का चिंतन](https://bharatkaitihas.com/thoughts-of-upanishads/): उपनिषदों का चिंतन संसार का सबसे गंभीर दार्शनिक चिंतन है। इसमें ईश्वर तथा जीव के परस्पर सम्बन्धों को जानने का प्रयास किया गया है। मुण्डक उपनिषद में कहा गया है कि दो सुन्दर पंखों वाले पक्षी, घनिष्ठ सखा, समान वृक्ष पर रहते हैं, उनमें से एक वृक्ष के स्वादिष्ट फलों को खाता है, दूसरा पक्षी […] - [वैदिक साहित्य का महत्त्व](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): वैदिक साहित्य का महत्त्व न केवल उसकी प्राचीनता के कारण है अपितु इस बात में भी है कि वैदिक साहित्य में उच्च कोटि का दर्शन, विज्ञान एवं अध्यात्म बीज रूप से उपलब्ध है। इसमें सृष्टि के निर्माण, ईश्वर के अस्तित्व एवं मानव जीवन के उद्देश्य आदि विषयों पर अत्यंत गंभीर जानकारी दी गई है। (1.) […] - [वैदिक तथा द्रविड़ सभ्यता में अन्तर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a4%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be/): वैदिक तथा द्रविड़ सभ्यता में अन्तर के कई कारण हैं जिनमें से सबसे बड़ा कारण यह है कि वैदिक सभ्यता के जनक हिमालय पर्वत की तरफ से सप्तसिंधु क्षेत्र में आए आर्य थे जबकि द्रविड़ सभ्यता के जनक भूमध्यसागरीय क्षेत्रों से आए हुए द्रविड़ थे। वर्तमान समय में राखीगढ़ी आदि की खुदाई से प्रमाण मिले […] - [ऋग्वैदिक समाज एवं धर्म](https://bharatkaitihas.com/rigvedic-society-and-religion-part-one/): ऋग्वैदिक समाज एवं धर्म स्वयं को प्रकृति का आभारी समझता था। इस काल का मानव समझ गया था कि प्रकृति की अनुकूलता से ही मानव का जीवन संभव है। इसलिए ऋग्वैदिक समाज पूर्णतः धर्म पर आधारित था। हे आदित्य, हे मित्र, हे वरुण, हे इन्द्र! आपके प्रति मैंने बहुत अपराध किए हैं; उन्हें क्षमा करें […] - [ऋग्वैदिक समाज](https://bharatkaitihas.com/rigvedic-society-and-religion-part-two/): ऋग्वैदिक समाज पारिवारिक व्यवस्था पर आधारित था। इस काल में लोग अपनी रुचि से अपने कार्य का चयन करते थे एवं वर्ण व्यवस्था का सुस्पष्ट विभाजन नहीं हुआ था। ऋग्वैदिक आर्यों का सामाजिक जीवन ऋग्वेद से तत्कालीन समाज की जानकारी मिलती है जिसके अनुसार सामाजिक संरचना का आधार सगोत्रता थी। अनेक ऋग्वैदिक राजाओं के नामों […] - [ऋग्वैदिक धर्म की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/rigvedic-society-and-religion-part-four/): ऋग्वैदिक धर्म की विशेषताएँ ऋग्वैदिक ऋचाओं में देखने को मिलती हैं। इस काल में धर्म का अर्थ ईश्वर नामक रहस्यमयी सत्ता को समझना तथा उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था। ऋग्वेद की अधिकांश ऋचाएं इन्हीं दो मंतव्यों से आप्लावित हैं। ऋग्वैदिक आर्यों का जीवन धर्ममय था। जीवन का ऐसा कोई अंग नहीं था जिस पर […] - [आर्यों का आर्थिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/rigvedic-society-and-religion-part-three/): आर्यों का आर्थिक जीवन अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में रखा जा सकता है। पहला है- ऋग्वैदिक आर्यों का आर्थिक जीवन और दूसरा है उत्तरवैदिक आर्यों का आर्थिक जीवन। इस अध्याय में में हम ऋग्वैदिक आर्यों का आर्थिक जीवन के बारे में चर्चा कर रहे हैं। ऋग्वैदिक आर्यों का आर्थिक जीवन ऋग्वैदिक आर्यों का […] - [उत्तरवैदिक राजनीतिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/post-vedic-society-and-religion-part-one/): उत्तरवैदिक राजनीतिक व्यवस्था की जानकारी उस काल के साहित्य से मिलती है। इस काल में आर्यों ने उन्नत राजनीतिक व्यवस्था विकसित कर ली थी। ऋग्वेद के बाद यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद एवं ब्राह्मण ग्रंथों (ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद) की रचना हुई। ऋग्वेद के बाद में लिखे गए, इन ग्रन्थों के रचना काल को उत्तर-वैदिक-काल कहते हैं। […] - [उत्तरवैदिक समाज](https://bharatkaitihas.com/post-vedic-society-and-religion-part-two/): नारद संहिता, गार्गी संहिता और वृहत संहिता ज्योतिष साहित्य के ऐसे ग्रन्थ हैं जिनसे उत्तरवैदिक समाज की जानकारी प्राप्त होती है। कल्पसूत्र साहित्य में विविध सामाजिक और धार्मिक विधि-विधानों तथा नियम- निर्देशों का वर्णन है। यद्यपि उत्तर-वैदिक-काल के आर्यों के गृह-निर्माण, वेश-भूषा, खान-पान, मनोरंजन आदि में विशेष परिवर्तन नहीं हुए थे परन्तु सामाजिक जीवन के […] - [उत्तरवैदिक आर्यों का धर्म](https://bharatkaitihas.com/post-vedic-society-and-religion-part-four/): उत्तरवैदिक आर्यों का धर्म ऋग्वैदिक काल के धर्म से थोड़ा अधिक जटिल था। उत्तरवैदिक आर्यों का धर्म मुख्यतः विभिन्न प्रकार के यज्ञों की अवधारणा पर आधारित था। ऋग्वैदिक-काल का धर्म, सरल तथा आडम्बरहीन था परन्तु उत्तर-वैदिक काल का धर्म जटिल तथा आडम्बरमय हो गया। इस काल में उत्तरी दोआब में ब्रह्माण धर्म के प्रभाव के […] - [उत्तरवैदिक आर्यों की अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/post-vedic-society-and-religion-part-three/): उत्तरवैदिक आर्यों की अर्थव्यवस्था में ऋग्वैदिक काल की अपेक्षा क्रमशः परिवर्तन होता गया था तथा अब उसमें जटिलता आने लगी थी। अब वे गाँवों के अतिरिक्त नगरों में भी निवास करने लगे थे और उनका जीवन अधिक सम्पन्न हो गया था। उत्तरवैदिक आर्यों की अर्थव्यवस्था की प्रमुख गतिविधियाँ (1.) धातु-ज्ञान में वृद्धि आर्यों को ऋग्वैदिक-काल […] - [उत्तर वैदिक साहित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): उत्तर वैदिक साहित्य का अर्थ उन ग्रंथों से हैं जो वेदों, ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों एवं उपनिषदों के बाद लिखे गए। इनमें सांख्य, योग आदि षड्दर्शन ग्रंथ, स्मृतियाँ पुराण, रामायण एवं महाभारत नामक महाकाव्य ग्रंथ आते हैं। उत्तर वैदिक साहित्य का अर्थ उन ग्रंथों से हैं जो वेदों, ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों एवं उपनिषदों के बाद लिखे […] - [उत्तरवैदिक आश्रम व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): उत्तरवैदिक आश्रम व्यवस्था से तात्पर्य वेदों की रचना के बाद के काल में आश्रम व्यवस्था के स्वरूप से है। इस कालखण्ड में बुद्धकाल, मौर्यकाल तथा शुंगकाल में आर्यों की आश्रम व्यवस्था का अध्ययन किया गया है। उत्तरवैदिक आश्रम व्यवस्था में आश्रमों का विभाजन वैदिक काल की आश्रम व्यवस्था के अनुरूप ही था। उसमें कोई विशेष […] - [भारतीय संस्कृति में रामायण का प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/influence-of-ramayana-and-mahabharata-on-indian-culture-part-one/): भारतीय संस्कृति में रामायण का प्रभाव जितना गहरा एवं व्यापक है, उतना और किसी ग्रंथ का नहीं है। भारतीय संस्कृति का निर्माण इसी ग्रंथ के आदर्शों पर हुआ है। भारतीय लोक-जीवन में रामायण, महाभारत एवं पुराणों का महत्व सदियों से है। इन ग्रंथों को वेदों के समान आदर दिया जाता है। रामायण भारतीयों का आदि-काव्य […] - [भारतीय संस्कृति में महाभारत का प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/influence-of-ramayana-and-mahabharata-on-indian-culture-part-two/): यदि यह कहा जाए कि भारतीय संस्कृति में महाभारत का प्रभाव रामायण से भी अधिक है, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। जहाँ रामायण आदर्श समाज का चित्रण करते हुए समाज को अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है, वहीं महाभारत में समाज के वास्तविक स्वरूप का चित्रण करते हुए, मानव मात्र […] - [महाकाव्यकालीन आर्यों की दशा](https://bharatkaitihas.com/influence-of-ramayana-and-mahabharata-on-indian-culture-part-three/): महाकाव्यकालीन आर्यों की दशा राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से बहुत उन्नत थी। आर्यों ने मानव जीवन की उन्नति की लिए बहुमुखी चिंतन किया था। महाकाव्य काल में आर्यों की राजनीतिक दशा महाकाव्यकालीन आर्यों की दशा में राजनीतिक दशा का अध्ययन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाकाव्य काल तक आते-आते आर्यों का प्रसार पूर्व की […] - [श्रीमद्भगवत्गीता का धर्म-दर्शन](https://bharatkaitihas.com/philosophy-of-srimad-bhagwatgita-part-one/): श्रीमद्भगवत्गीता का धर्म-दर्शन मानव मात्र को शांति देने वाला है। यह मनुष्य को ज्ञान, योग, भक्ति एवं कर्म के पथ पर चलने का सुझाव देता है। यह दर्शन महाभारत के भीष्मपर्व में वर्णित है।    श्रीमद्भगवत्गीता का धर्म-दर्शन जानने से पहले इस पुस्तक का संक्षिप्त परिचय एवं इसकी रचना की पृष्ठभूमि जाननी आवश्यक है। महाभारत […] - [गीता के अठारह अध्याय](https://bharatkaitihas.com/philosophy-of-srimad-bhagwatgita-part-two/): गीता के अठारह अध्याय भगवान श्रीकृष्ण द्वारा पृथा के पुत्र अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में दिए गए उपदेशों के एक निश्चित क्रम में हैं तथा विषय-वस्तु एवं दर्शन की दृष्टि से वे एक दूसरे से सम्बद्ध हैं। प्रथम अध्याय गीता के प्रथम अध्याय का नाम अर्जुन-विषाद-योग है। वह गीता के उपदेश का विलक्षण दृश्य […] - [ब्राह्मण धर्म से असंतोष](https://bharatkaitihas.com/jainism-and-its-influence-on-indian-culture-part-one/): आर्यों ने जिस वैदिक धर्म की स्थापना की थी, वह धर्म उत्तर वैदिक काल तथा महाकाव्य काल में ब्राह्मण धर्म के रूप में विकसित हुआ किंतु ईसा छठी शताब्दी ईस्वी पूर्व में प्रजा में ब्राह्मण धर्म से असंतोष उत्पन्न हो गया जिसके कारण भारत में वैचारिक एवं धार्मिक क्रांति ने जन्म लिया। ईसा के जन्म […] - [पार्श्वनाथ एवं महावीर स्वामी](https://bharatkaitihas.com/jainism-and-its-influence-on-indian-culture-part-two/): पार्श्वनाथ एवं महावीर स्वामी जैन धर्म के अंतिम दो तीर्थंकर हैं तथा दोनों ही जैन धर्म के सिद्धांतों एवं जैन दर्शन के प्रणेता हैं किंतु इनके दर्शन में कुछ अंतर है। जैन-धर्म का जन्म जैन-धर्म का जन्म कब हुआ, इसके बारे में ठीक से नहीं कहा जा सकता। जैन साहित्य के अनुसार जैन-धर्म आर्यों के […] - [जैन-धर्म के सिद्धान्त](https://bharatkaitihas.com/jainism-and-its-influence-on-indian-culture-part-three/): जैन-धर्म के सिद्धान्त बौद्ध धर्म के सिद्धांतों की अपेक्षा थोड़े क्लिष्ट हैं। इस कारण जन साधारण की समझ में नहीं आते हैं। इसी कारण जैन धर्म को बौद्ध धर्म की अपेक्षा कम लोकप्रियता प्राप्त हुई। निवृत्ति मार्ग जैन धर्म, आर्यों के प्रवृत्तिमूलक धर्म के विरुद्ध निवृत्तिमार्गी था। वह आर्यों की भाँति इस संसार के समस्त […] - [जैन धर्म](https://bharatkaitihas.com/jainism-and-its-influence-on-indian-culture-part-four/): जैन धर्म विश्व के सबसे पुराने धर्मों में से है। वर्तमान समय में जैन-धर्म के सिद्धांत, दर्शन एवं मान्यताओं पर महावीर स्वामी का प्रभाव सबसे अधिक है। महावीर स्वामी की मान्यताएँ महावीर स्वामी ने जैन-धर्म के सिद्धांत निर्धारित करने से पहले, उस युग में प्रचलित धार्मिक और सामाजिक बुराइयों के सम्बन्ध में कई बातें कहीं- […] - [जैन धर्म का साहित्य तथा भारतीय संस्कृति को देन](https://bharatkaitihas.com/jainism-and-its-influence-on-indian-culture-part-five/): जैन-धर्म का साहित्य जैन-धर्म का साहित्य बहुत विशाल है। अधिकांश में वह दार्शनिक साहित्य है। जैन-धर्म का मूल साहित्य ‘प्राकृत’ भाषा में लिखा गया है। मागधी भाषा में लिखा गया जैन साहित्य भी प्रचुर मात्रा में मिलता है। जैन विद्वानों ने कन्नड़, तमिल और तेलगु भाषाओं में भी अनेक ग्रन्थ लिखे। महावीर स्वामी के बाद […] - [महात्मा बुद्ध और उनका धर्म](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-one/): महात्मा बुद्ध और उनका धर्म दोनों ही समाज के समक्ष पूरी तरह स्पष्ट थे। उनकी सरलता और सहजता इस एक उपदेश से भी स्पष्ट हो जाती है- हे भिक्षुओं, तुम आत्मदीप बनकर विचरो। तुम अपनी ही शरण में जाओ। किसी अन्य का सहारा मत ढूँढो। केवल धर्म को अपना दीपक बनाओ। केवल धर्म की शरण […] - [बौद्ध धर्म के सिद्धान्त](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-two/): बौद्ध धर्म के सिद्धान्त महात्मा बुद्ध द्वारा अपने शिष्यों को दिए गए उपदेशों एवं शिष्यों के प्रश्नों के समाधान के रूप में दिए गए व्याख्यानों पर आधारित हैं। बुद्ध की मृत्यु के बाद उनकी शिष्य परम्परा द्वारा बौद्ध धर्म के सिद्धांत समय-समय पर विस्तारित एवं संकुचित होते रहे। बौद्ध धर्म के मुख्य सिद्धान्त इस प्रकार […] - [गौतम बुद्ध के विचार](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-three/): गौतम बुद्ध के विचार ही बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का आधार हैं। बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपने शिष्यों के समय तथा जनसाधारण में घूम-घूम कर जनसामान्य के समक्ष अपने विचार रखे। इन्हीं विचारों के आधार पर बौद्ध धर्म का ताना-बाना रचा गया। वैदिक धर्म के सम्बन्ध में गौतम बुद्ध के विचार वेदों […] - [बौद्ध धर्म का भारत में प्रसार एवं उसके कारण](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-four/): बौद्ध धर्म का भारत में प्रसार बड़ी तेजी से हुआ। इसके बहुत से कारण थे जिनमें बौद्ध संगीतियों का आयोजन, बौद्ध साहित्य में वृद्धि, राजाओं द्वारा दिया गया राज्याश्रय आदि करण प्रमुख थे। बौद्ध धर्म का भारत में प्रसार बौद्ध धर्म के विकास में बौद्ध संगीतियों का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा। चूंकि इन सभाओं में मूलतः […] - [बौद्ध धर्म का विदेशों में प्रसार एवं भारत से विलोपन](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-five/): बौद्ध धर्म का विदेशों में प्रसार बड़ी तेजी से हुआ। इसका सबसे बड़ा कारण था इसकी सरलता एवं सहजता। कोई भी व्यक्ति बौद्ध धर्म को अपना सकता था। इस धर्म का पालन करने में किसी प्रकार का आर्थिक अथवा शारीरिक कष्ट उठाने की आवश्यकता नहीं थी। बौद्ध धर्म लोक भाषा में अपनी बात कहता था […] - [बौद्ध धर्म की देन](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-six/): यद्यपि आज भारत भूमि में बौद्ध धर्म का प्रभाव नगण्य है तथापित भारतीय संस्कृति को बौद्ध धर्म की देन कम नहीं है। बौद्ध धर्म ने भारतीय जनता को सहज जीवन जीने एवं बाह्याडम्बरों से दूर रहने का मार्ग दिखाया। भारतीय संस्कति को बौद्ध धर्म की देन प्राचीन भारत में बौद्ध धर्म का उदय किसी महान् […] - [कुषाण वंश का इतिहास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6/): भारत के विदेशी शासक यूनानी, शक, पह्लव के बारे में हमने पिछले अध्याय में विचार किया था। इस अध्याय में कुषाण वंश का इतिहास लिखा गया है। कुषाण वंश का प्राचीन इतिहास चीनी ग्रंथों में मिलता है। ये लोग यू-ची अथवा यूह्ची जाति की एक शाखा से थे। यू-ची लोग प्रारम्भ में चीन के उत्तरी-पश्चिमी […] - [सिन्दूर का पौधा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%a7%e0%a4%be/): सिन्दूर के पौधे का वानस्पतिक नाम बिक्सा ओरेलाना है। दुनिया भर के देशों में सिन्दूर का पौधा अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है जिनमें सिंदूरी, सिंदूर, लिपिस्टिक ट्री, लटकन, अन्नाटा, एकियोटे आदि नाम प्रमुख हैं। इस पौधे पर लगने वाले गहरे लाल रंग के बीजों को जब कुचला जाता हे तब वे सूर्योदय के समय […] - [जैन और बौद्ध धर्म का तुलनात्मक अध्ययन](https://bharatkaitihas.com/buddhism-and-its-influence-on-indian-culture-part-seven/): जैन-धर्म और बौद्ध धर्म का तुलनात्मक अध्ययन जैन-धर्म और बौद्ध धर्म दोनों का प्रसार एक ही समय में, एक ही प्रकार से, एक जैसी परिस्थितयों में और एक जैसे उद्देश्यों को लेकर हुआ। इस कारण इतिहासकार बहुत समय तक महावीर स्वामी एवं महात्मा बुद्ध को एक ही व्यक्ति समझते रहे तथा इन दोनों धर्मों को […] - [चौके चूल्हे वाली औरतें!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82/): दुनिया तेज गति से दौड़ रही है, भारत की गति कुछ अधिक ही तेज है। भारत की इस तेज गति को चौके चूल्हे वाली औरतें ही संतुलन प्रदान कर सकती हैं। भारत सरकार द्वारा टीवी चैनलों पर एक लम्बा फीचर विज्ञापन दिखाया जा रहा है जिसमें विगत 11 साल में देश में हुई आर्थिक उन्नति […] - [नए युग की चुड़ैलें!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%82/): नए युग की चुड़ैलें पढ़ी-लिखी हैं, सुंदर हैं, पैसे वाली हैं, दुस्साहसी हैं। ऊँची सोसाइटी में रहती हैं तथा मोटा बैंक-बैलेंस रखती हैं। 15 जून 2025 को जोधपुर के न्यूज पेपर्स में एक समाचार छपा कि एक स्कूल संचालक ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उसे किसी औरत ने हनी ट्रैप में फंसा लिया था। […] - [पतियों को मारने वाली पढ़ी-लिखी औरतें!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/): भारत सरकार के क्राइम डाटा एवं राज्य सरकारों की रिपोर्टों के अनुसार विगत पांच सालों में केवल बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में 785 ऐसे केस पुलिस में रिपोर्ट हुए जिनमें पत्नियों ने ही अपने पति की हत्या की या करवाई। पतियों को मारने वाली इन औरतों में से अधिकांश औरतें पढ़ी-लिखी हैं और […] - [वामपंथी विचारधारा से प्रेरित भारतीय औरतें!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be/): वामपंथी विचारधारा से प्रेरित भारतीय औरतें क्या कभी भी भारत माता की पीड़ा को नहीं समझ पाएंगी? उन्हें हिन्दुओं से बेरुखी और हिन्दू-विरोधियों से सहानुभूति की घुट्टी किसने पिलाई है? हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बीकानेर आए जहाँ से उन्होंने पूरी दुनिया के नाम एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मेरी रगों में गर्म […] - [नरेन्द्र मोदी की गर्जना भारतीय उपमहाद्वीप की मुक्ति का महामंत्र है!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ad/): भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान की जनता को चेताया है कि अपने हिस्से की रोटी खाओ और सुख से जियो। नरेन्द्र मोदी की गर्जना सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप की मुक्ति का महामंत्र है!  यदि आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान तथा बांगलादेश की जनता ने मोदी के इस संदेश में छिपे शब्दों का मूल्य नहीं समझा और […] - [जेहाद का अंतिम पड़ाव !](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b5/): क्या इस संसार में कोई भी इस प्रश्न का उत्तर ईमानदारी से दे सकता है कि जेहाद क्या होता है और जेहाद का अंतिम पड़ाव क्या है? शायद नहीं…. कोई नहीं। इसलिए नहीं कि कोई जानता ही नहीं, जानते तो सब लोग हैं किंतु इस प्रश्न का उत्तर इतना खौफनाक है कि कोई उस खौफ […] - [पाकिस्तान का परमाणु बम किस का है!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%81-%e0%a4%ac%e0%a4%ae/): हाल ही में पाकिस्तान में आतंकवादियों के विरुद्ध भारतीय कार्यवाही के दौरान किराना पहाड़ी पर ब्रह्मोस मिसाइलों के गिरते ही अमरीका जिस तरह फड़फड़ाया, उसे सुनकर यह संशयह होता है कि पाकिस्तान का परमाणु बम किसका है! क्या किराना पहाड़ी में रखे परमाणु बम अमरीका के हैं? क्या अमरीका ने ये बम भारत की छाती […] - [Ama-Nagavaloka](https://bharatkaitihas.com/ama-nagavaloka/): After the demise of Ama-Nagavaloka Bappabhatti returned to Kanauj now ruled by former’s son Dunduka. Dunduka had already begun devoting himself to a dancing woman named Kantika and had made himself very obnoxious to his subjects and relations. The history of India in the eighth century and the early decades of the ninth is shrouded […] - [तुर्की कम्पनी सेलेबी पर शोर क्यों नहीं मचाया राहुल गांधी ने?](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%ac%e0%a5%80/): भारत की अपनी कम्पनी अडाणी पर इतना गुस्सा दिखाने वाले राहुल गांधी ने तुर्की की किसी भी कम्पनी पर कभी गुस्सा क्यों नहीं दिखाया। राहुल गांधी ने कभी भी भारत सरकार के विरुद्ध यह आवाज क्यों नहीं उठाई कि उसने तुर्की कम्पनी सेलेबी को इतना संवदेनशील कार्य देकर भारत की सुरक्षा क्यों दांव पर लगा […] - [Raja Kokkalla Founded The Kalachuri Dynasty](https://bharatkaitihas.com/raja-kokkalla/): There are three inscriptions- Inscription of Yuvaraja Deva II (of about third quarter of the 10th century A.D.), Karna’s Inscription of 1042 A.D. and Prithvideva’s Amoda Inscription of 1079 A.D., which provide us with information about Kalchuri Raja Kokkalla I. [1] The earliest one is the undated inscription of Yuvaraja Deva II [2] of circa […] - [राजा गणपति का सिर काटकर दाऊद को भिजवाया अकबर ने (113)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): गाजीपुर के राजा गणपति (Raja Ganpati) की रक्षापंक्ति टूट गई तथा मुगल सेना ने पंचपहाड़ के किले (Fort of Panch Pahad) में घुसकर राजा गणपति का सिर काटकर अकबर (Akbar) को भिजवा दिया। फतह खाँ बारहा का सिर भी काट लिया गया। अकबर ने इन दोनों सिरों को एक नाव में रखकर पटना भिजवा दिया, […] - [सिवाना दुर्ग पर अकबर ने कब्जा कर लिया (114)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/): सिवाना दुर्ग (Siwana Fort) थार मरुस्थल (Thar Desert) में ऊँची पहाड़ी पर स्थित था। इस दुर्ग को चौदहवीं शताब्दी ईस्वी के आरम्भ में यह जालोर (Jalore) के चौहानों के अधिकार में था। अल्लाऊद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) ने इसे बहुत मुश्किल से जीता था। जब सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में अकबर (Akbar) ने सिवाना दुर्ग पर आक्रमण […] - [जगमाल को चित्तौड़ का दुर्ग सौंप दिया अकबर ने (115)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2/): जिन दिनों अकबर (Akbar) अपने समस्त शत्रुओं पर विजय पाकर अत्यंत शक्तिशाली होकर फतहपुर सीकरी में स्थापित हो चुका था, उन्हीं दिनों मेवाड़ का मेवाड़ के महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का बड़ा भाई जगमाल (Jagmal) राज्य पाने की लालसा से अकबर की सेवा में पहुंचा। अकबर के गाजीपुर तथा पटना से लौट आने के बाद […] - [मेवाड़ के महाराणा क्यों बन गए थे हिन्दू नरेशों के सिरमौर (116)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be/): अत्यंत प्राचीन काल से ही भारत में एक से बढ़कर एक वीर राजकुल हुए जिन्होंने हिन्दू जाति को हजारों साल तक स्वतंत्र बनाए रखा तथा राजनीति एवं संस्कृति के उच्च मानदण्डों की स्थापना की। उन्हीं की परम्परा का पालन करते हुए मध्यकालीन भारत में मेवाड़ के महाराणा (Mewar Ke Maharana) हिन्दुओं के सिरमौर बन गए। […] - [मानसिंह की मेवाड़ यात्रा (117)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): कुंअर मानसिंह की मेवाड़ यात्रा मध्यकालीन भारतीय राजनीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी। इस यात्रा में कुंअर मानसिंह (Kunwar Mansingh) ने महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को समझाने का प्रयास किया कि महाराणा प्रताप अकबर (Akbar) की अधीनता स्वीकार कर लें किंतु  महाराणा प्रताप ने गरज कर कहा अपने फूफा को ले आना, हम सत्कार […] - [अकबर और महाराणा प्रताप एक-दूसरे के प्राण लेना चाहते थे (118)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%aa/): अकबर तथा महाराणा प्रताप के बीच आदि से अंत तक जो भी घटनाएं हुईं उनसे यह सिद्ध होता है कि न तो अकबर महाराणा प्रताप से संधि चाहता था और न महाराणा प्रताप किसी भी कीमत पर अकबर से संधि करना चाहता था। - [महाराणा प्रताप की सेना (119)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/): महाराणा प्रताप की सेना के हरावल का नेतृत्व हकीम खाँ सूर के हाथ में था। उसकी सहायता के लिये सलूम्बर का चूण्डावत किशनदास, सरदारगढ़ का डोडिया भीमसिंह, देवगढ़ का रावत सांगा तथा बदनोर का रामदास नियुक्त किये गये। - [मानसिंह की दुविधा (120)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be/): मुगलों द्वारा रामप्रसाद के महाबत को भी मार डाला गया। जैसे ही महाबत धरती पर गिरा, मुगल सेना के हाथियों का फौजदार हुसैन खाँ अपने हाथी से रामप्रसाद पर कूद गया। - [चेतक हल्दीघाटी में चक्कर काटने लगा! (121)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/): जब महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) अपने प्रिय अश्व चेतक (Chetak) पर बैठकर युद्धक्षेत्र में प्रकट हुआ तब शत्रुओं की परवाह किए बिना चेतक हल्दीघाटी में चक्कर काटने लगा। 18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध (War of Haldighati) आरम्भ होते ही दोनों पक्षों के हाथी अपनी-अपनी सेना के आगे आकर एक दूसरे पर जोर-आजमाइश करने […] - [महाराणा प्रताप का शौर्य (122)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हल्दीघाटी के युद्ध (War of Haldighati) में महाराणा प्रताप का शौर्य (Valor of Maharana Pratap) देखते ही बनता था। भारतीय राजा स्वयं युद्ध के मैदान में उतरकर लड़ते थे और अपने सैनिकों तथा सामंतों के समक्ष उच्च आदर्श प्रस्तुत करते थे। महाराणा प्रताप का शौर्य इसी उच्च आदर्श का प्रदर्शन था। 18 जून 1576 को […] - [किन्नर अथवा किम्पुरुष - भारतीय साहित्य एवं मूर्तिकला के संदर्भ में !](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7/): भारतीय साहित्य, चित्रकला एवं मूर्तिकला में किन्नर अथवा किम्पुरुष अत्यंत प्राचीन काल से उपस्थित हैं। पुराणों में भी किन्नर अथवा किम्पुरुष मौजूद हैं तथा प्राचीन मंदिरों के बार बनी मूर्तियों में प्रुखता के साथ स्थान लिए हुए हैं। किन्नर (किं नरः) का शाब्दिक अर्थ है- ‘क्या (यह) नर है?’ अर्थात् किन्नर शब्द से ही ऐसा […] - [पशु-काठियों के लोकनृत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): भारतीय संस्कृति में त्यौहारों एवं शादी-विवाहों में विभिन्न पशु-काठियों के लोकनृत्य आोजित किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उड़ीसा एवं तमिलनाडु सहित भारत के विभिन्न प्रदेशों में लकड़ी की घोड़ी बनाकर कच्छी घोड़ी अथवा लिल्ली घोड़ी का नृत्य किया जाता है। गुजरात में घोड़ी के साथ-साथ बैल तथा ऊँट की काठियां बनाई […] - [लिल्ली घोड़ी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80/): लिल्ली घोड़ी भारत का एक प्राचीन लोकनृत्य है जिसे सार्वजनिक समारोहों में खुले मंच पर अथवा लोगों की भीड़ के बीच में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाता है। लिल्ली घोड़ी लोकनृत्य में लोकगीत, लोकाख्यान, लोकवाद्य और लोकसंगीत का अद्भुत सामंजस्य होता है। यह एक सामूहिक नृत्य है जिसमें दो या दो से अधिक नर्तक […] - [ओरछा के मंदिर एवं महल](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%93%e0%a4%b0%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b2/): ओरछा के मंदिर एवं महल ओरछा राजाओं की भक्ति, शक्ति और स्थापत्य प्रेम के जीवंत प्रमाण हैं। सम्पूर्ण ओरछा नगर पर बुंदेला राजाओं के इतिहास की गहरी छाप है। ओरछा नगर की स्थापना 15वीं शताब्दी ईसवी में बुंदेला राजा रुद्रप्रताप सिंह जूदेव ने की थी। उस समय दिल्ली पर क्रूर सुल्तान सिकन्दर लोदी का शासन […] - [ओरछा के रामराजा सरकार](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%93%e0%a4%b0%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): ओरछा के रामराजा सरकार रानी गणेश कुंविर के पुत्र माने जाते हैं। रानी गणेश कुंवरि ने भगवान राम को पुत्र के रूप में पूजा और उन्हें अपना पुत्र बनाकर अयोध्या से ओरछा ले आईं! यह ऐतिहासिक घटना सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में घटित हुई। भगवान के करोड़ों-करोड़ भक्तों ने भगवान को अपनी-अपनी आस्था के रूप में […] - [महाराणा का छत्र (123)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): जब अकबर की सेना के कर्मचारी, युद्ध में मारे गए मुगल सैनिकों एवं घोड़ों की सूची बनाने लगे, तो सैय्यद अहमद खाँ बारहा ने उनसे कहा कि ऐसी फेहरिश्त बनाने से क्या लाभ है? - [हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप (124)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d/): मानसिंह तथा महाराणा प्रताप का सैंकड़ों साल पुराना रोटी-बेटी का सम्बन्ध था। जिस प्रकार महाराणा के कुल ने हिन्दुओं की बड़ी सेवा की थी, उसी प्रकार मानसिंह के कुल ने भी आगे चलकर हिन्दुओं की बड़ी सेवा की। - [रामशाह तंवर का बलिदान (125)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a8/): जिस प्रकार मानसिंह कच्छवाहा हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की उपलब्धियों से विलग और स्वतंत्र अभिव्यक्ति का आकांक्षी है। उसी प्रकार ग्वालियर नरेश रामशाह तंवर का बलिदान भी स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अभिलाषी है। तंवरों को भारत के इतिहास में तोमरों के नाम से भी जाना जाता है। राजा रामशाह तंवर(Ramshah Tanwr/Ramshah Tomar), महाराणा प्रताप (Maharana […] - [झाला मानसिंह की बहिन बोली भाई ने अपना सिर मुझे सींच दिया (126)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/): झाला बीदा ने शुद्ध स्वामिभक्ति से प्रेरित होकर अपने स्वामी के मस्तक पर से राज्यछत्र झपटकर छीन लिया और मानसिंह की सेना के समक्ष आगे बढ़कर चिल्लाना शुरू किया कि मैं ही महाराणा हूँ। इससे महाराणा प्रताप भार मुक्त हुए और हकीम सूर के साथ हल्दीघाटी के तंग दर्रे से गोगूंदा पहुँच सके। - [कर्मनासा (23)](https://bharatkaitihas.com/karmanasa-river/): कुदरत ने मध्य एशियाई मंगोलों का भाग्य उनके पुण्यकर्मों से नहीं उनकी खूनी ताकत से लिखा था किंतु हुमायूँ की आधी खूनी ताकत तो हिन्दुस्तान की आबोहवा ने खत्म कर दी थी और बची-खुची ताकत कर्मनासा ने नष्ट कर दी। जहाँ एक ओर भाग्यलक्ष्मी बैराम खाँ पर मेहरबान हुई वहीं दूसरी ओर हुमायूँ के उन […] - [जाके प्रिय न राम बैदेही (24)](https://bharatkaitihas.com/who-does-not-love-lord-ram-and-sita/): युवा संन्यासी ने लिखा- जाके प्रिय न राम बैदेही। तजिए ताहि  कोटि  बैरी  सम  जद्यपि  परम  सनेही। तज्यौ पिता  प्रहलाद,  बिभीषन  बंधु  भरत  महतारी। बलि गुरु तज्यो, कंत ब्रज बनितनि भये मुद मंगल कारी। जिस अयोध्या को मीर बाकी जला कर क्षार कर गया था और भगवान श्रीराम के जन्म स्थल पर स्थित विशाल देवालय […] - [लशकर गेब (25)](https://bharatkaitihas.com/lashkar-geb/): अचानक उसने देखा कि दुश्मन की सेना के पीछे से एक लश्कर प्रकट हुआ। बात ही बात में वह लश्कर टिड्डी दल की तरह दुश्मन पर छा गया। हुमायूँ ने अपने आदमियों से पूछा कि यह क्या लशकर गेब  है ?  कन्नौज से हुमायूँ और बैरामखाँ की सेनायें अलग हो गयीं थीं। जब हुमायूँ आगरा […] - [खानका (26)](https://bharatkaitihas.com/khanka/): एक दिन दोनों बादशाहों ने शिकार खेलने के बाद चोगानबाजी और कबलअंदाजी की। उस दिन बैरमबेग को खानका का खिताब दिया गया। हिन्दुस्थान से अपना दाना-पानी उठ गया जानकर हुमायूँ हिन्दुस्थान छोड़कर कंधार की ओर रवाना हुआ। हुमायूँ का भाई कामरान उसका रास्ता रोककर बैठ गया। वह नहीं चाहता था कि हुमायूँ सही सलामत हिन्दुस्थान […] - [फरमान (27)](https://bharatkaitihas.com/decree/): बैराम खाँ ने तुहमास्प से ईरानी सेना प्राप्त की और उससे तथा हूमायूँ से एक-एक फरमान लेकर फिर से हिन्दुस्थान आया। ये फरमान उसने हुमायूँ के भाई कामरान के नाम लिखवाये थे ताकि भाई को भाई के खिलाफ नहीं लड़ना पड़े और उनमें प्रेम हो जाये। बैरामखाँने हिन्दुकुश पर्वत पार कर कांधार पर आक्रमण किया। […] - [कातर निगाहें (28)](https://bharatkaitihas.com/beggar-eyes/): बैराम खाँ एक ऐसा स्वामिभक्त था जिसके हृदय में निजी अभिमान का अंशमात्र भी नहीं होता और जो अपने स्वामी की कातर निगाहें देखने के बजाय मर जाना अधिक पसंद करता है, भले ही स्वामी कितना ही मक्कार और बदजात क्यों न हो! कामरान ने एक माह तक बैराम खाँ को अपने पास रखा उसने […] - [तोप के सामने (29)](https://bharatkaitihas.com/in-front-of-cannon/): दुष्ट कामरान ने शहजादे अकबर को तोप के सामने लटका दिया। अब उसे बचाने वाला कोई नहीं था। बैराम खाँ ने पिछले दरवाजे से दुर्ग में घुसकर दुर्ग की प्राचीर से लटक रहे तीन वर्ष के अकबर को तोप के सामने से उतारा और मुख्य दरवाजा खोलकर हुमायूँ के पास चला आया। हिन्दुकुश पर्वत पार […] - [आँखों में सलाई (30)](https://bharatkaitihas.com/needle-in-eye/): बैराम खाँ ने उसी समय लोहे की सलाईयां गरम करवाईं और कामरान की आँखों में फिरा दीं। आँखों में सलाई फिरते ही कामरान अंधा होकर चीखने और छटपटाने लगा। कांधार हाथ से निकल जाने के बाद कामरान फिर से काबुल भाग आया और मोर्चा बांधकर बैठ गया। वह जानता था कि हुमायूँ भले ही कितना […] - [फिर से दिल्ली (31)](https://bharatkaitihas.com/delhi-again/): अपने भाईयों से मुक्ति पाकर हुमायूँ ने फिर से दिल्ली और आगरा पर अधिकार करने की ठानी। 1540 ईस्वी में उसने दिल्ली और आगरा छोड़े थे और दर-दर की ठोकरें खाते हुए चौदह साल हो चले थे। वह काबुल से चलकर पेशावर आया और सिंधु नदी पार करके कालानौर  तक चला आया। यहाँ उसने अपनी […] - [मेवों की बेटी (32)](https://bharatkaitihas.com/daughters-of-meo-community/): पहली मेवों की बेटी चंगेज और तैमूरलंग के खानदान में और दूसरी बेटी तुर्कों की कराकूयलू शाखा के बहारलू खानदान में ब्याह दी गयी। आगे चलकर इसी मेवों की बेटी से 17 दिसम्बर 1556 को लाहौर में बैरामखाँ के पुत्र अब्दुर्रहीम का जन्म हुआ। दिल्ली के दक्षिण पश्चिम में स्थित रेवाड़ी, अलवर और तिजारा परगनों […] - [कच्चे चबूतरे का बादशाह (33)](https://bharatkaitihas.com/king-of-raw-pops/): बैराम खाँ ने साढ़े तेरह साल के बालक अकबर को बादशाह तो घोषित कर दिया किंतु वह केवल कच्चे चबूतरे का बादशाह था। मुगलों का असली तख्त तो दिल्ली में था जिस पर कोई भी कभी भी कब्जा कर सकता था। जब हुमायूँ दिल्ली को प्रस्थान कर गया तो सिकंदर सूर ने पहाड़ों से निकल […] - [सलीमा बेगम (34)](https://bharatkaitihas.com/salima-begum/): अकबर अपनी बुआ की बेटी सलीमा बेगम से यद्यपि उम्र में छोटा था किंतु वह सलीमा बेगम पर जान लुटाता था और उससे विवाह करना चाहता था लेकिन दूसरी ओर सलीमा बेगम खुरदरे चेहरे वाले जिद्दी और अनपढ़ अकबर को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। सदियों से ईरानी खून में तुर्कों, मंगोलों, तातारों, हब्शियों […] - [अकाल का महादानव (35)](https://bharatkaitihas.com/demon-of-famine/): बैरामखाँ जानता था कि सिकंदर सूर, आदिलशाह और इब्राहीम से निबटे बिना दिल्ली तक पहुंच पाना संभव नहीं था लेकिन इन सब शत्रुओं से प्रबल एक और शत्रु था जो बैरामखाँ को सबसे ज्यादा सता रहा था। वह था देश व्यापी महाअकाल। अकाल का महादानव पूरे देश में ताण्डव कर रहा था। सलीमा बेगम को […] - [धूसर बनिया (36)](https://bharatkaitihas.com/gray-merchant/): एक जमाना था जब रेवाड़ी की सड़कों पर एक धूसर बनिया नमक बेचा करता था। उसका नाम था हेमचंद्र लेकिन वह अपने आप को हेमू ही कहता था। वह बातों का बड़ा खिलाड़ी था। देखते ही देखते वह किसी को भी अपने पक्ष में कर लेता था। धीरे-धीरे वह राजकीय कर्मचारियों से घुल मिल गया […] - [विक्रमादित्य हेमचंद्र (37)](https://bharatkaitihas.com/vikramaditya-hemachandra/): जब महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र दिल्ली के अधीश्वर हुए तो देशवासियों का उत्साह विशाल झरने की भांति फूट पड़ा। महाराज हेमचंद्र के अफगान व तुर्क सैनिक हिन्दू जनता के इस उत्साह को आश्चर्य और कौतूहल से देखते थे। जब हेमू को ज्ञात हुआ कि हुमायूँ की मृत्यु हो गयी है और बैरामखाँ अकबर को लेकर दिल्ली […] - [काबुल या दिल्ली (38)](https://bharatkaitihas.com/kabul-or-delhi/): जब अकबर के समक्ष यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि काबुल या दिल्ली तो अकबर ने अकबर अपने अमीरों की सलाह से आदेश दिया कि सेना को दिल्ली की ओर बढ़ाने के बजाय काबुल की ओर कूच किया जाये। उन दिनों उत्तरी भारत के समस्त बादशाह और सेनापति हेमू के नाम से थर्राते थे। इब्राहीम सूर […] - [तार्दीबेग की हत्या (39)](https://bharatkaitihas.com/murder-of-tardibeg/): जब अकबर जंगल में काफी आगे तक चला गया तो बैरामखाँ ने तार्दीबेग को अपने डेरे पर बुलवाया। जैसे ही तार्दीबेग बैरामखाँ के डेरे पर पहुँचा, बैराम खाँ ने तलवार निकाल कर तार्दीबेग की हत्या कर दी। अकबर की सहमति पाकर बैरामखाँ ने खिज्र खाँ को सिकंदर सूर से निबटने के लिये तैनात किया और […] - [फिर से पानीपत (40)](https://bharatkaitihas.com/panipat-again/): बाबर ने पानीपत के मैदान में ही इब्राहीम लोदी से भारत का राज्य छीना था। आज एक बार मुगल सेना फिर से पानीपत की ओर चल पड़ी थी जहाँ उसे महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र की विशाल सेना से दो-दो हाथ करने थे। जब महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र ने देखा कि बैराम खाँ मुगल सेना लेकर दिल्ली की […] - [काफिरों की हत्या (41)](https://bharatkaitihas.com/killing-the-infidels/): काफिरों की हत्या करने के बाद बैरामखाँ ने अपने प्रबलतम शत्रु महाराज हेमचंद्र का सिर काबुल भेज दिया जहाँ उसे चौराहे पर लटका दिया गया ताकि शत्रु समझ लें कि बैरामखाँ का विरोध करने वालों का क्या हश्र होता है। अलीकुलीखाँ और शाहकुली मरहम मूर्च्छित महाराजा हेमचंद्र को लेकर बैरामखाँ के पास आये। महाराज के […] - [सोने की ईंटें (42)](https://bharatkaitihas.com/gold-bricks/): रानी अलवर जिले में स्थित बीजवाड़े की पहाड़ियों में जाकर छिप गयी। उसने कई दिनों तक जंगलों में घूम-घूम कर सोने की ईंटें तथा स्वर्ण-आभूषण धरती में अलग-अलग स्थानों पर दबा दिये ताकि यदि बैराम खाँ सोने का पीछा करता हुआ बीजवाड़े की पहाड़ियों में आ भी पहुँचे तो भी उसे एक साथ सम्पूर्ण कोष […] - [मस्त हाथी (43)](https://bharatkaitihas.com/drunk-elephant/): एक दिन शाम के समय बैराम खाँ यमुना में नौका विहार के लिये गया। जाने कैसे एक शाही हाथी बिगड़ गया और बैराम खाँ को कुचलने के लिये झपटा। बैराम खाँ किसी तरह मस्त हाथी से अपनी जान बचाकर लौट आया। दिल्ली और उसके बाद आगरा भी मुगलों ने फिर से हासिल कर लिये किंतु […] - [खून की होली (44)](https://bharatkaitihas.com/bloody-holi/): नासिरुल्मुल्क को लगा कि अब बैराम खाँ खून की होली खेलने वाला है। इसलिए वह किसी तरह जान बचा कर अकबर के पास भाग आया। जब उसने आपबीती कहानी अपने मुँह से अकबर को सुनाई तो अकबर कांप उठा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहाड़ों की तलहटी में उन दिनों धमरी के पास मऊका परगना हुआ […] - [संकरी घाटी (45)](https://bharatkaitihas.com/narrow-valley/): विश्वभर के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे जब सेवक ने अपने स्वामी से विद्रोह किया हो किंतु ऐसे उदाहरण एक-दो ही हैं जब स्वामी अपने सेवक के विरुद्ध विद्रोह करने पर विवश हुआ हो। खानखाना बैराम खाँ और अकबर अब इतिहास की उसी संकरी घाटी में आ खड़े हुए थे जहाँ अपने सेवक […] - [माहम अनगा (46)](https://bharatkaitihas.com/maham-angaa/): माहम अनगा का लड़का आदम खाँ तथा जंवाई शियाबुद्दीन भी बहुत ही बदमाश और घमण्डी थे तथा किसी की भी परवाह नहीं करते थे। माहम अनगा और उसका परिवार यदि किसी से भय खाते थे तो वह था बैराम खाँ। अकबर की बहुत सी धायें और आयाएं थीं। उनमें से कुछ तो शिशु अकबर को […] - [आगरा से पलायन (47)](https://bharatkaitihas.com/departure-from-agra/): जब बादशाह ने आगरा से पलायन करके दिल्ली के लिए कूच किया तो खुरजे में माहम अनगा का जंवाई शहाबुद्दीन अहमद खाँ अपने सब भाई बंदों के साथ बादशाह की पेशवाई के लिये हाजिर हुआ। जब दिल्ली पर काबिज होने के चार साल पूरे होने को आये तो बैरामखाँ और अकबर राजकीय कार्य के सिलसिले […] - [हरम सरकार (48)](https://bharatkaitihas.com/government-of-harem/): अकबर के आगरा से दिल्ली चले आने पर आगरा में बैराम खाँ की सरकार और दिल्ली में हरम सरकार स्थापित हो गयी। ये दोनों सरकारें एक-दूसरे को खत्म करने पर तुल गयीं। अकबर इन दोनों सरकारों के बीच में बादशाह होते हुए भी प्यादे की तरह बेबस होकर रह गया। कैसी विचित्र शतरंज थी यह? […] - [लखनवी (49)](https://bharatkaitihas.com/lucknowi/): सलीमशाह ने भी एक बार एक लाख स्वर्ण मुद्रायें दी थीं जिन्हें बाबा रामदास ने उसी प्रकार भिखारियों में बांट दिया था जिस प्रकार से इस बार बांट दिया है। इसलिये सलीमशाह ने उसका नाम लखनवी रख दिया था। बैराम खाँ उस तपस्वी संगीतज्ञ को प्रणाम करके उठ आया। उन दिनों आगरा से मथुरा तक […] - [आगरा से अलविदा (50)](https://bharatkaitihas.com/goodbye-agra/): बैराम खाँ ने आनंद और विनोद में डूबे उस परिवार को दखल देना ठीक नहीं समझा और दूर से ही उल्टे पैरों लौट गया। उसने मन ही मन निश्चय कर लिया कि अब वह खुदा की इबादत के लिये मक्का चला जायेगा। आगरा से अलविदा कहने का समय आ गया था। जब अपने सारे आदमियों […] - [बैराम खाँ का विद्रोह (51)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): बैराम खाँ का विद्रोह मुगलों के इतिहास की ऐसी दर्दनाक दास्तान है जिसे पढ़कर किसी भी नेकदिल इंसान का दिल सियासत लिए हिकारत के भावों से भर जाएगा। वापस आगरा न जाकर बैराम खाँ वहीं से अलवर के लिये रवाना हो गया ताकि वहाँ से अपने परिवार को लेकर मक्का के लिये प्रस्थान कर सके। […] - [बारूद में आग (52)](https://bharatkaitihas.com/rising-tension/): अब तो पूरी तरह बारूद में आग दिखा दी गयी थी। अपनी मान-मर्यादा को इस तरह धूल में मिलते देखकर सत्ता का चतुर खिलाड़ी बैराम खाँ एक बार फिर से खून की होली खेलने को तैयार हो गया। जब अकबर को ज्ञात हुआ कि बैराम खाँ बागी हो गया है तो उसे माहम अनगा की […] - [विशाल अजगर (53)](https://bharatkaitihas.com/giant-python/): बादशाही लश्कर पहाड़ के नीचे जमा खड़ा था। ज्यों ही बैरामखाँ आता हुआ दिखायी दिया तो बड़ा कोलाहल मचा। मुगल सेना के विशाल अजगर ने वक्राकार होकर बैरामखाँ को चारों ओर से घेर लिया। जब अकबर ने सुना कि बैरामखाँ अपनी सेना लेकर जालंधर तक आ पहुँचा है तो भी वह शिकार खेलने में व्यस्त […] - [नकाबपोश (54)](https://bharatkaitihas.com/masked/): बहुत दूर से वे पाँचों नकाबपोश घोड़े फैंकते हुए चले आ रहे थे। बालू के टीले और कंटीले झुरमुट उनका रास्ता रोकते थे किंतु उनकी परवाह किये बिना वे सरपट घोडा़ दौड़ाये चले जा रहे थे। उनके घोड़े थक चुके थे और मुँह से श्वेत फेन बहने लगा था। हालांकि नकाब के कारण अश्वारोहियों के […] - [बुरी खबर (55)](https://bharatkaitihas.com/bad-news/): अकबर अन्तर्मन के जिस दड़बे में छिपकर रहता था, उस दड़बे की छत इस बुरी खबर की आंधी ने एक ही झटके में उड़ा दी थी। अकबर ने इस दड़बे में स्मृतियों के जाने कितने क्षण कबूतरों की तरह पाल रखे थे। – ‘रहीम कौन ?’ तरुण बादशाह ने अत्यन्त ही अन्यमनस्कता से पूछा। असमय […] - [दो फकीर (56)](https://bharatkaitihas.com/two-saints/): बालक अब्दुर्रहीम को दो फकीर अकबर के पास लेकर आए थे। उन फकीरों के मुंह से बैराम खाँ की हत्या का विवरण सुनकर अकबर का चेहरा सफेद पड़ गया, मानो किसी ने उसके चेहरे का समस्त रक्त निचोड़ लिया हो! बाबा जम्बूर और मुहम्मद अमीन दीवाना बादशाह की सेवा में उपस्थित हुए तो बादशाह ने […] - [खुरदरा चेहरा (57)](https://bharatkaitihas.com/rough-face/): अकबर का खुरदरा चेहरा और अधिक खुरदरा हो आया। बहुत देर तक तरुण बादशाह के खुरदरे चेहरे पर विभिन्न प्रकार की लकीरें बनती-बिगड़ती रहीं। अधिकतर लकीरें ऐसी थीं जिन्हें बाबा जम्बूर किसी भी हालत में नहीं पढ़ सकता था लेकिन बाबा जम्बूर ने हारना नहीं सीखा था। बाबा जम्बूर तो उस समय भी नहीं हारा […] - [प्रलाप (58)](https://bharatkaitihas.com/babble/): अकबर मन ही मन प्रलाप कर रहा था। आज जीवन में पहली बार उसे इस बात का ज्ञान हुआ था कि बड़े से बड़े बादशाह का भी परिस्थितियों पर कोई नियंत्रण नहीं होता। अकबर के खुरदरे चेहरे से चिंता की लकीरें मिटी नहीं। न तो अब्दुर्रहीम और न ही दोनों करिश्माई फकीर उसके सीने में […] - [शत्रु की वापसी (59)](https://bharatkaitihas.com/return-of-enemy/): जब माहम अनगा को पता लगा कि बैरामखाँ का बेटा फिर से बादशाह के पास लौट आया है तो उसकी चिंता का पार न रहा। उसे लगा कि शत्रु की वापसी हो गई है और अब तक के सब किये धरे पर पानी फिर गया है। माहम चाहती थी कि माहम का अपना बेटा आदमखाँ […] - [हरम सरकार के दुर्दिन (60)](https://bharatkaitihas.com/bad-days-of-harem-government/): माहम अनगा की बेटी माहबानू की सगाई अब्दुर्रहीम से कर देने की खुशी में अकबर ने माहम अनगा के बेटे अजीज कोका को खानेआजम की पदवी दी लेकिन कुछ दिनों बाद जब अकबर ने अतगाखाँ को राज्य का वकीले मुतलक[1]  नियुक्त किया तो माहम अनगा समझ गयी कि अब मेरे दिन लद गये किंतु वह […] - [फिर से गुजरात (61)](https://bharatkaitihas.com/gujarat-again/): हुमायूँ के गुजरात अभियान के दौरान बैरामखाँ का सितारा बुलंदी पर पहुँचा था और वह साधारण सिपाही से मुगलिया सल्तनत का खानखाना तथा अकबर के अतालीक के पद पर आसीन हुआ था। ईस्वी 1572 में अकबर ने गुजरात पर चढ़ाई की। इस अभियान में उसने मिर्जा खाँ अब्दुर्रहीम को भी अपने साथ लिया। इस प्रकार […] - [सितारा बुलंदी पर (62)](https://bharatkaitihas.com/fortune-at-heights/): रहीम का सितारा भाग्य के आकाश पर पूरे जोर से चमकने लगा। रहीम का सितारा बुलंदी पर देखकर बहुत से लोगों की छाती पर सांप लोटने लगे। जब अकबर ने मेवाड़ नरेश महाराणा प्रतापसिंह के खिलाफ अभियान किया तो उसने अपने समस्त योग्य सेनापतियों को अजमेर पहुँचने का आदेश दिया। मिर्जाखाँ रहीम को भी ये […] - [मछलियाँ और कछुए (63)](https://bharatkaitihas.com/fish-and-turtles/): मछलियाँ और कछुए इतिहास के उस मोड़ पर आ पहुंचे थे जहाँ अब उनमें से किसी एक का साम्राज्य बचे रहना था और दूसरे को मिट जाना था। ईसा की नौवीं-दसवीं शताब्दी में चम्बल नदी के किनारे कूर्मवंशी क्षत्रियों की तीन शाखाएं राज्य करती थीं। इनमें से एक शाखा नरवर पर, दूसरी ग्वालिअर पर तथा […] - [पेट में दर्द (64)](https://bharatkaitihas.com/stomach-ache/): महाराणा प्रताप ने मानसिंह से कहलवाया कि हमारे पेट में दर्द है इसलिए हम आपके साथ भोजन नहीं करेंगे। मानसिंह तुरंत समझ गया कि महाराणा प्रताप मुझे म्लेच्छों का नौकर जानकर मेरे साथ भोजन नहीं करेंगे और यह मेरा अपमान है। जब मेवाड़ राजवंश ने अपनी कन्याएं मुगलों को देने से मना कर दिया तो […] - [नववर्ष उत्सव (65)](https://bharatkaitihas.com/new-year-celebration/): आज के दरबार में बड़ी भीड़ थी। दरबारे आम में वैसे भी बड़ी भीड़ रहती है किंतु आज की भीड़ कुछ अलग किस्म की थी। आम दिनों में तो मांगने वालों और फरियादियों का तांता लगता है किंतु आज के दिन रियाया बादशाह को नववर्ष उत्सव की मुबारिकबाद देने के लिये उपस्थित हुई थी। आज […] - [चित्रकूट की एक शाम (66)](https://bharatkaitihas.com/an-evening-of-chitrakoot/): चित्रकूट की एक शाम तीन राजपुरुष अपने कीमती और ऊँचे घोड़ों को मंथर गति से मंदाकिनी के किनारे-किनारे चलाये ले जा रहे थे। वे तीनों असाधारण रूप से चुप थे। वनावली के सघन होने पर भी मार्ग बिल्कुल साफ था किंतु ऐसा लगता था कि नदी और अश्व अपनी-अपनी गति को एक दूसरे के अनुरूप […] - [प्रजापालन (67)](https://bharatkaitihas.com/service-to-public/): राजा के मंत्री ही राजा की ओर से प्रजापालन , प्रजा का अनुशासन और उसकी सार-संभाल करते हैं। जिस राजा के सचिव, सहायक और सेवक प्रजा को दुख देते हैं, उस राजा का नाश हो जाता है और प्रजा पीड़ित होती है। अतिथियों के भोजन के बाद चारों व्यक्ति तसल्ली से बैठे। किसी को किसी […] - [अयोग्य शिष्य (68)](https://bharatkaitihas.com/inept-pupil/): खानखाना अब्दुर्रहीम अच्छी तरह जनता था कि शहजादा सलीम एक ऐसा अयोग्य शिष्य है जिसे कभी भी पढ़ा-लिखा कर इंसान नहीं बनाया जा सकता। कच्छवाहों की राजकुमारी जोधाबाई से निकाह करके अकबर ने उसे मरियम उज्जमानी नाम दिया और उसे शाह-बेगम घोषित किया। उससे उत्पन्न पुत्र सलीम का नामकरण सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के […] - [कविता का व्याकरण (69)](https://bharatkaitihas.com/poetry-grammar/): खानखाना अच्छी तरह समझता था कि जीवन रूपी कठोर कविता का व्याकरण और चाटुकारिता से भरी हुई कविता का व्याकरण कितने अलग होते हैं। शहजादे का अतालीक मुकर्रर किये जाने से अब्दुर्रहीम के रुतबे और ख्याति में एकाएक ही बहुत वृद्धि हुई। अब्दुर्रहीम की विद्वता की ख्याति सुनकर उसके दरबार में दुनिया भर के लोग […] - [जुआ (70)](https://bharatkaitihas.com/gambling/): मिर्जा खाँ को रणक्षेत्र से बाहर खींच ले जाने का प्रयास करने वाले उसके शुभचिंतक सैनिक नहीं जानते थे कि मिर्जा खाँ आज सेनापति नहीं था, जुआरी था, जिसने पराये हाथों में थमे पासों पर अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया था। हर हालत में उसे जुआ खेलना ही अभीष्ट था, पक्के जुआरी की तरह, […] - [नोपकृतं (71)](https://bharatkaitihas.com/do-never/): प्राप्य चलानधिकारान् शत्रुषु,  मित्रेषु बंधुवर्गेषुं। नोपकृतं  नोपकृतं  नोपकृतं  कि कृतं तेन।। अर्थात्- जिसने चल अधिकार पाकर शत्रु, मित्र और भाई बंदों का क्रमशः उपकार, उपकार और उपकार नहीं किया, उसने कुछ नहीं किया। गुजरात विजय के उपलक्ष्य में खानखाना बनाये जाने पर अब्दुर्रहीम दिल्ली दरबार में उपस्थित हुआ और उसने बादशाह के प्रति आभार का […] - [बनी के राना (72)](https://bharatkaitihas.com/king-of-forest/): तुम जंगल के सेर बनी के राना । बड़ेन  की  चाल  बड़ेन पहचाना ।। – ‘अब्बा हुजूर, फिर क्या हुआ?’ जाना ने पिता के कंधे पर मुक्का मारा। – ‘अरे कब क्या हुआ?’ खानखाना ने पूछा। – ‘अरे कल जो कहानी आप हमें सुना रहे थे, उसमें आगे क्या हुआ?’ – ‘हम कल कौनसी कहानी […] - [अहेर (73)](https://bharatkaitihas.com/hunt/): मैं यहाँ अहेर खेलने के लिये आया था। अपने साथियों से अलग होकर जंगल में भटक गया। खानखाना अपने कपड़े झाड़ते हुए उठ बैठा। उसकी भुजा में अब भी भयानक दर्द हो रहा था। अरावली की सघन उपत्यकाओं में एक आदमी तेजी से भागा चला जा रहा था किंतु हाथ में गाय का रस्सा पकड़े […] - [जसोदा बार बार भाखै (74)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%88/): जसोदा बार बार भाखै । है कोऊ ब्रज में हितू हमारो चलत गोपालहि राखै। अकबर ने शहजादा मुराद का विवाह खानखाना अब्दुर्रहीम के साले खाने-आजम मिर्जा अजीज कोका की बेटी से करना निश्चित किया। शहजादे मुराद के विवाह में भाग लेने के लिये अकबर ने मुगलिया सल्तनत के लगभग सभी बड़े अमीर, उमराव और सेनापतियों […] - [वकीले मुतलक (75)](https://bharatkaitihas.com/royal-representative/): एक तरफ मुगल सल्तनत का वकीले मुतलक है तो दूसरी ओर सल्तनत का महत्वपूर्ण सेनापति। स्वयं बादशाह तक इन दोनों में से किसी को नाराज नहीं करना चाहता। बादशाह ने दरबार बर्खास्त करने का आदेश दिया और खानखाना को संकेत से अपने साथ आने के लिये कह कर उठ खड़ा हुआ। एकांत पाकर बादशाह ने […] - [विचित्र दरबार (76)](https://bharatkaitihas.com/strange-court/): थोड़ी ही देर में रहीम ने जिस दरबार में प्रवेश किया उस विशाल और विचित्र दरबार की शोभा देखते ही बनती थी। दरबार का शामियाना सोने और चांदी की चोबों पर खड़ा था जो दिन-रात मोतियों की झालरों से झिलमिलाता था। – ‘हुजूर! बाहर फरियादियों का हुजूम इकट्ठा हो गया है। कुछ लोग तो सुबह […] - [शिकायत (77)](https://bharatkaitihas.com/complaint/): अमीरों को सबसे अधिक शिकायत इस बात से थी कि साधारण सिपाही के घर में जन्म लेने वाला रहीम हुमा का पर लगाकर दरबार करता है। भले ही उसका बाप खानखाना के पद तक जा पहुँचा हो किंतु था तो वह मूल रूप से एक साधारण सिपाही ही! खानखाना का ऐसा ठाठ-बाट, अकूत सम्पदा और […] - [जाडा महडू (78)](https://bharatkaitihas.com/jada-mahadu/): – ‘हुजूर! महाराणा प्रतापसिंह के भाई जगमाल का वकील जाडा महडू आपकी सेवा में हाजिर हुआ चाहता है।’ गुलाम ने राज्य के वकील खानखाना अब्दुर्रहीम से निवेदन किया। उस समय खानखाना अपने निजी दरबार में व्यस्त था। – ‘जाडा महडू!’ खानखाना के भीतर स्मृतियों का पिटारा खुला। कहाँ सुना यह नाम? कब? अचानक ही उसे […] - [चाकर रघुबीर के (79)](https://bharatkaitihas.com/servant-of-god/): हम चाकर रघुबीर के पटौ लिखौ दरबार। तुलसी हम का होंइगे नर के  मनसबदार। – ‘महात्मन्! शंहशाह की इच्छा है कि आप उनके दरबार को पवित्र करें।’ शहंशाह अकबर के वकीले मुतलक और काशी के सूबेदार अब्दुर्रहीम खानखाना ने गुंसाईजी से हाथ जोड़कर निवेदन किया। – ‘खानखानाजी, कैसी बात करते हैं आप? हम तो दास […] - [हुक्म उदूली (80)](https://bharatkaitihas.com/disobey/): जब तुलसीदासजी ने अकबर के दरबार में जाने से मना कर दिया तो अकबर ने इसे अपनी हुक्म उदूली समझा और वह आग-बबूला हो गया। – ‘उस भिखारी को इतना घमण्ड?’ क्रोध से चीख पड़ा अकबर। – ‘नहीं जिल्लेइलाही। बाबा को किसी तरह का घमण्ड नहीं। उन्होंने अपनी युवावस्था में ही गृह संसार त्यागकर सन्यास […] - [वानर (81)](https://bharatkaitihas.com/monkeys-in-royal-palace/): आधी रात के बाद सीकरी में हा-हाकार मच गया। जहाँ देखो वहीं लंगूर। महलों, छतों और कंगूरों पर उत्पात मचाते हुए हजारों लंगूर अचानक ही जाने कहाँ से आ गये थे। सैंकड़ों वानर लाल-लाल मुँह के थे तो हजारों काले मुँह के। उनकी लम्बी पूंछों और विकराल दाँतों ने बच्चों और स्त्रियों को ही नहीं […] - [छत्तीस लाख (82)](https://bharatkaitihas.com/thirty-six-lakhs/): खानखाना ने उसी समय अपने कोश में से छत्तीस लाख रुपये कवि गंग को प्रदान किये। उस पूरे काल में संभवतः किसी और कवि को इतना बड़ा पुरस्कार नहीं मिला था। – ‘महाराज जगन्नाथ!’ खानखाना ने अपने दरबार में उपस्थित कवि जगन्नाथ को सम्बोधित करके कहा। – ‘जी हुजूर!’ – ‘तनिक इस पर पर विचार […] - [मुख देखे दुःख उपजत (83)](https://bharatkaitihas.com/unlucky-face/): भारतीय संतों को राजाओं, बादशाहों और धनपतियों से कोई काम नहीं होता था। अकबर इस बात को समझ नहीं पाया। संत कुंभनदास ने अकबर को लिखकर भिजवाया- जिनको मुख देखे दुःख उपजत तिनको करिबे परी सलाम। – ‘महाराज! बैरामखाँ को सुअन अब्दुर्रहीम महाराज के श्रीचरनन में कोटि-कोटि प्रणाम निवेदन करि रह्यौ। खानखाना ने अपना मस्तक […] - [हुमा (84)](https://bharatkaitihas.com/auspicious-bird/): अब्दुर्रहीम के दरबारी मुल्ला शकेबी ने सिंध विजय पर एक कविता पढ़ी जिसमें कहा गया था- जो हुमा आकाश में उड़ाता था, उसको तूने पकड़ा और जाल से छोड़ दिया। अब्दुर्रहीम ने मुल्ला को एक हजार अशर्फियां इनाम में दीं। जिस प्रकार बारहमूला काश्मीर का दरवाजा है और जिस प्रकार गढ़ी बंगाल का दरवाजा है […] - [हसन गंगू (85)](https://bharatkaitihas.com/hassan-gangu/): एक दिन उस ब्राह्मण ने हसन गंगू की भाग्य रेखाओं को देखकर बताया कि एक दिन तू इस प्रदेश का राजा बनेगा। उसी ब्राह्मण के निर्देश पर हसन गंगू मुहम्मद बिन तुगलक की सेना में भर्ती हो गया और शीघ्र ही वह दक्षिण भारत में दिल्ली सल्तनत का सबसे विश्वस्त आदमी बन गया। आज जिस […] - [चाँदबीबी (86)](https://bharatkaitihas.com/chaandbibi/): हब्शियों से निबटकर मियाँ मंझू ने चाँदबीबी से निबटने की योजना निर्धारित की किंतु उसी समय उसने सुना कि मुगल शहजादा मुराद और खानखाना अब्दुर्रहीम विशाल सेना लेकर अहमद नगर की ओर बढ़ रहे हैं। सोलहवीं शताब्दी के अंतिम दशक में अहमद नगर अपने सरदारों की आपसी लड़ाई से अत्यंत जर्जर हो चला था। बुरहान […] - [छोटे सरकार (87)](https://bharatkaitihas.com/junior-lords/): छोटे सरकार की सवारी निकलने वाली है। उसे देखने के लिये सैंकड़ों बाशिंदे रास्ते के दोनों ओर जमा हैं। जब सवारी निकल जाये तो लोग भी निकल जायेंगे और हम भी। बड़ी-बड़ी मूंछों और लम्बी दाढ़ियों वाले चार दैत्याकार कहार शाही पालकी को अपने मजबूत कंधों पर उठाये हुए तेजी से नगर की सड़कों पर […] - [बेर केर को संग (88)](https://bharatkaitihas.com/mismatch/): सम्पूर्ण उत्तरी भारत पर अधिकार करने के बाद ई. 1591 में अकबर ने दक्षिण भारत के अहमदनगर, खानदेश, बीजापुर, बरार और गोलकुण्डा राज्यों पर अधिकार करने की नीयत से अपने दूत इन राज्यों को भिजवाये और उनसे राजस्व की मांग की। इस पर खानदेश के सुल्तान राजा अलीखाँ ने तो अकबर की अधीनता स्वीकार कर […] - [शहजादे की पगड़ी (89)](https://bharatkaitihas.com/prestige-issue-2/): किले पर अधिकार करने में असफल रहने के बाद मुराद समझ गया कि खानखाना की शक्ति प्राप्त किये बिना अहमदनगर का किला नहीं लिया जा सकता। उसने हार कर खानखाना को बुलाया। खानखाना अपने आदमियों के साथ शहजादे की सेवा में हाजिर हुआ। मुराद ने अन्य दिनों के विपरीत बड़ी लल्लो-चप्पो के साथ खानखाना का […] - [रहस्यमय संवाद (90)](https://bharatkaitihas.com/mystical-dialog/): शहजादे की अनुमति पाकर खानखाना स्वयं मुगलों की ओर से चाँदबीबी के सम्मुख उपस्थित हुआ। इससे उसके एक साथ दो उद्देश्य पूरे हो गये। एक तो खानखाना फिर से इस अभियान के केंद्र में आ गया और दूसरा यह कि चाँदबीबी को देख पाने की उसकी साध पूरी हो गयी। वह जब से अहमदनगर की […] - [वचन भंग (91)](https://bharatkaitihas.com/breach-of-promise/): राजधानी से निकलने के बाद तीन साल बीत जाने पर भी शहजादा मुराद बादशाह अकबर को एक भी विजय की सूचना नहीं भेज पा रहा था इससे मुराद की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। जब खानखाना ने अहमदनगर की सुलताना चाँद बीबी की ओर से प्राप्त प्रस्ताव मुराद के समक्ष रखा कि यदि मुराद अहमदनगर […] - [दक्षिण से वापसी (92)](https://bharatkaitihas.com/return-from-south/): शहजादा मुराद खानखाना के नियंत्रण से छुटकारा पाना चाहता था। उसने अकबर से खानखाना की शिकायत की कि वह चांद बीबी से मिल गया है। इस शिकायत पर खानखाना की दक्षिण से वापसी हो गई। मुराद तो यही चाहता था। यह बड़ी भारी विजय थी जिसके कारण पूरा दक्खिन काँप उठा था। जीत का सेहरा […] - [उलटा पहिया (93)](https://bharatkaitihas.com/reverse-wheel/): जब खानखाना लाहौर में अकबर की सेवा में उपस्थित हुआ तो अकबर ने उसकी ड्यौढ़ी बंद करवा दी।[1]  खानखाना निरंतर शहजादे की अप्रसन्नता, सादिकखाँ की शत्रुता और अपनी बेगुनाही के बारे में तरह-तरह से अर्ज करता रहा। जब कई माह बीत गये और कोई परिणाम नहीं निकला तो एक दिन खानखाना ने अंतिम प्रयास करने […] - [खप जासी खुरसाण (94)](https://bharatkaitihas.com/khap-jaasee-khurasaan/): – ‘हुजूर! महाराणा अमरसिंह का चारण आपकी सेवा में हाजिर हुआ चाहता है।’ पहरेदार ने खानखाना को सूचना दी। – ‘उसे यहीं ले आ।’ खानखाना ने आज्ञा दी। चारण मुजरा करके चुपचाप खड़ा हो गया। खानखाना उस समय कुछ लिख रहा था। इसलिये वह मुजरा स्वीकार करके फिर से अपने काम में लग गया। खानखाना […] - [फिर से दक्षिण में (95)](https://bharatkaitihas.com/south-again/): खानखाना नहीं चाहता था कि वह फिर से दक्षिण में जावे। वह जानता था कि दक्षिण उसके लिये दो पाटों की चक्की बन चुका है। एक तरफ बादशाह है तो दूसरी तरफ चाँद। दक्षिण के मोर्चे से एक बुरी खबर आई जिसे सुनकर अकबर थर्रा उठा। दक्षिण ने बलि लेनी शुरू कर दी थी। शहजादा […] - [नकाब में चाँद (96)](https://bharatkaitihas.com/moon-in-mask/): जब खानखाना दक्षिण में पहुँचा तो दानियाल ने उसे सबसे पहले अहमदनगर पर ही घेरा डालने के आदेश दिये। शहजादे के आदेश से खानखाना ने अहमदनगर को घेर लिया। एक रात जब खानखाना अपने डेरे में बैठा हुआ कुछ लिखा-पढ़ी कर रहा था तो उनकी नजर अचानक एक काले साये पर पड़ी जो चोरी से […] - [नियति के मोहरे (97)](https://bharatkaitihas.com/toys-of-destiny/): मुगलिया राजनीति तथा दक्खिन की शिया राजनीति के बीच खानखाना तथा चांद बीबी नियति के मोहरे बन कर रह गए थे। उधर सुलताना ने और इधर खानखाना ने योजना के अनुसार जल्दी-जल्दी सियासी मोहरे इधर से उधर किये। सुलताना ने अभंगखाँ हबशी को पंद्रह हजार घुड़सवारों सहित किले से बाहर निकाल कर चित्तार की तरफ […] - [बंदूक में शराब (98)](https://bharatkaitihas.com/alcohol-in-gun/): एक तरफ चाँद के नहीं रहने से और दूसरी तरफ मुराद के मर जाने से खानखाना सभी तरह की दुविधाओं से बाहर निकल आया था और वह दक्षिण में जबर्दस्त दबाव बना रहा था। खानखाना के पुत्र एरच ने भी पिता का बहुत साथ दिया और मलिक अम्बर जैसे दुर्दांत शत्रु को वह लगातार पीटता […] - [तैमूर की समाधि (99)](https://bharatkaitihas.com/taimur-ki-samadhi/): मुराद के बाद दानियाल के मरने की खबर पाकर बादशाह का मन हर उस वस्तु से उचाट हो गया जो उसके आस-पास थी। उसके चेहरे का खुरदुरापन उसके मन में उतर आया था। वह मन की शांति प्राप्त करना चाहता था किंतु उसका कोई उपाय नहीं सूझता था। उसने मक्का जाने का निश्चय किया किंतु […] - [विद्रोही (100)](https://bharatkaitihas.com/the-rebels/): अकबर के तीन शहजादों में से दो छोटे शहजादे मुराद और दानियाल अत्यधिक शराब पीकर मर चुके थे। तीसरा तथा सबसे बड़ा शहजादा सलीम भी अत्यधिक शराब पीकर न केवल खुद मौत के कगार पर जा खड़ा हुआ था अपितु अपने बुरे दोस्तों की सोहबत में अपने बाप अकबर तथा पूरी मुगलिया सल्तनत को मौत […] - [कहर (101)](https://bharatkaitihas.com/havoc/): – ‘आसमान से कहर बरपा है जिल्ले इलाही।’ तातार गुलाम ने भय से कांपते हुए कहा। – ‘क्या है कमजात? क्यों आसमान से कहर बरपाता है? तुझे शहजादे की सेवा में भेजा था, वहाँ से भाग आया क्या?’ गुलाम की बात सुनकर अकबर को चिंता तो हुई किंतु उसने अपने स्वर को मुलायम ही बनाये […] - [सुलह (102)](https://bharatkaitihas.com/reconciliation/): अकबर की यह हालत देखकर सलीमा बेगम ने पिता-पुत्र के मध्य सुलह करवाने का विचार किया। वह अकबर से अनुमति लेकर इलाहाबाद गयी और सलीम को समझा बुझा कर आगरा ले आयी। सलीम अपने बाप की यह दुर्दशा देखकर उसके पैरों पर गिर पड़ा और अपने अपराधों के लिये पश्चाताप करने लगा। अकबर ने अबुल […] - [पहरे दर पहरे (103)](https://bharatkaitihas.com/pahare-dar-pahare/): – ‘शहजादे!’ एक फुसफुसाहट सी सलीम के कानों में पड़ी। उसने इधर-उधर देखा किंतु कोई दिखाई नहीं दिया। बाहर शाम घिर आई थी तथा कमरे में इतना कम प्रकाश था कि उसमें कुछ भी स्पष्ट देखना संभव नहीं था। – ‘इधर देखो, इधर।’ सलीम ने फिर दृष्टि घुमाई किंतु कुछ भी दिखायी नहीं दिया। – […] - [हुमायूँ की तलवार (104)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-sword/): अभी सूरज निकलने में कुछ समय था जब सलीमा बेगम ने अपनी लौण्डी सहित बादशाह सलामत के कक्ष में प्रवेश किया। सलीमा बेगम ने अपना पूरा बदन बुर्के में छिपा रखा था किंतु उसके मुँह से कपड़ हटा हुआ था। जबकि लौण्डी के चेहरे पर कपड़ा पड़ा हुआ था। सलीमा बेगम को देखकर कच्छवाहा पहरेदार […] - [असार संसार (105)](https://bharatkaitihas.com/destitute-world/): जिस दिन अकबर सलीम के सिर पर अपनी पगड़ी रखकर एक ओर को लुढ़क गया था उसके बाद वह कभी भी नये सूरज का उजाला नहीं देख सका। वह छः दिन तक बेहोश रहा। सातवें दिन आधी रात के लगभग अकबर के प्राण पंखेरू उड़ गये। राजा मानसिंह अपने आदमियों को लेकर महल से बाहर […] - [भाग्य की विडम्बना (106)](https://bharatkaitihas.com/irony-of-fate-2/): खुसरो आगरा से निकल कर दिल्ली होते हुए लाहौर की ओर भागा। अपने बारह हजार आदमी लेकर वह सिक्खों के गुरु अर्जुनदेव की शरण में पहुँचा। अर्जुनदेव ने उसे बादशाह होने का आशीर्वाद दिया। जब यह समाचार जहाँगीर को मिला तो उसकी रूह काँप गयी। वह स्वयं सेना लेकर लाहौर गया। भैंरोंवाल[1]  के निकट पिता […] - [खानखाना की चिंता (107)](https://bharatkaitihas.com/khaanakhaana-ki-chinta/): इधर खानखाना अपने दामाद दानियाल के मर जाने तथा अपनी बेटी के शोक में डूब जाने के दोहरे कहर से जर्जर हो चला था और उधर अकबर तथा सलीम के बीच घट रहे घटनाक्रम से उसकी चिंतायें दिन दूनी और रात चौगुनी होती जाती थीं। आगरा से जिस तरह के समचार मिल रहे थे उनसे […] - [समंद और फतूह (108)](https://bharatkaitihas.com/samand-and-fatuah/): बेटी जाना की तसल्ली के लिये खानखाना ने मुकर्रब खाँ के साथ ही आगरा जाने का विचार किया। वह चाहता था कि चाहे जैसे भी हो, जाना के बेटों को लौटा लाये। खानखाना पूरी तैयारी के साथ जहाँगीर के सामने उपस्थित हुआ। वह इस अवसर को गंवाना नहीं चाहता था। उसने मोतियों के दो हार, […] - [दक्षिण में आग (109)](https://bharatkaitihas.com/fire-in-south/): खानखाना के दक्षिण से हटते ही दक्खिनियों के हौंसले बुलंद हो गये। वे एक जुट होकर खानेजहाँ लोदी में कसकर मार लगाने लगे। सल्तनत का विश्वस्त सेनापति अब्दुल्लाखाँ खानेजहाँ की सहायता के लिये भेजा गया किंतु वह हार कर गुजरात भाग आया। खाने आजम कोका भी बुरी तरह परास्त हुआ। रामदास कच्छवाहा और मानसिंह भी […] - [ऊदाराम ब्राह्मण (110)](https://bharatkaitihas.com/udaram-brahmin/): दक्षिण में इस तरह की शांति देखकर खानेजहाँ लोदी की छाती पर साँप लोट गया। वह कतई नहीं चाहता था कि बादशाह इस बात को देखे कि जिस मोर्चे पर खानेजहाँ असफल हो गया, वहाँ किसी और ने सफलता के झण्डे गाढ़ दिये। वस्तुतः मुगलिया सल्तनत की स्थापना से लेकर उसके अंत तक मुगल सेनापतियों […] - [कहर दर कहर (111)](https://bharatkaitihas.com/kahar-dar-kahar/): खानखाना ने जहाँगीर को हीरे की एक खान समर्पित की जो खानखाना के बेटे अमरूल्लाह ने खानदेश के जमींदार पनजू से छीनी थी। जहाँगीर ने अत्यंत प्रसन्न होकर खानखाना का खिताब सात हजारी मनसब और सात हजारी सवार कर दिया। ये वे क्षण थे जब जहाँगीर अपने जीवन में खानखाना पर सर्वाधिक प्रसन्न हुआ। इसके […] - [जौहर (112)](https://bharatkaitihas.com/jauhar/): पूरी मुगल सेना में हड़कम्प मचा हुआ था। जिसे देखो वही कुछ न कुछ नवीन सूचना बांटने में लगा हुआ था। जितने मुँह उतनी बातें। कोई कहता था कि खानखाना मलिक अम्बर के सामने समर्पण करने जा रहा है। कोई कहता था कि खानखाना ने जौहर करने का फैसला किया है। हालांकि जौहर हिन्दू स्त्रियों […] - [आधा सेर कबाब (113)](https://bharatkaitihas.com/aadha-ser-kabaab/): जहाँगीर ने अपने अमीरों से कहा कि मैंने अपना सारा राज्य नूरजहाँ को दे दिया है। अब मुझे क्या चाहिये? कुछ भी तो नहीं, सिवाय एक सेर शराब और आधा सेर कबाब के! किसी समय ईरान में मिर्जा गयास बेग नामक आदमी रहता था। वह था तो मिर्जाओं के वंश में से किंतु उसकी माली […] - [भेड़िये का बच्चा (114)](https://bharatkaitihas.com/bhediye-ka-bachcha/): जहाँगीर के पाँच बेटे थे- खुसरो, परवेज, खुर्रम, जहाँदार और शहरयार। खुसरो पहले ही बादशाह द्वारा आँखें फुड़वाकर मरवाया जा चुका था। अब परवेज ही सबसे बड़ा था और वही बादशाह को सबसे प्रिय था लेकिन नूरजहाँ के भाई आसफ अली की बेटी का विवाह खुर्रम के साथ हो जाने से नूरजहाँ परवेज के पक्ष […] - [दादा-पोते (115)](https://bharatkaitihas.com/daada-pote/): मुगलिया राजनीति की खूनी चौसर पर अब दादा.पोते एक-दूसरे का सिर उतारने के लिए आमने-सामने ख़ड़े थे। एक तरफ था अब्दुर्रहीम खानखाना तो दूसरी ओर उसका पोता मनूंचहर! खानखाना के समझाने पर खुर्रम ने बादशाह के पास क्षमा याचना की कई अर्जियाँ भिजवाईं किंतु बादशाह ने उन पर कोई विचार नहीं किया। जो भी वकील […] - [षड़यंत्र (116)](https://bharatkaitihas.com/conspiracy/): – ‘क्या बात है लाल मुहम्मद?’ – ‘हुजूर कहते हुए जुबान कटती है। जान बख्शी जाये तो कुछ हिम्मत करूं।’ – ‘बिना किसी डर के अपनी बात कहो, लाल मुहम्मद। तुम हमारे भरोसेमंद हो।’ शहजादे खुर्रम से आश्वासन पाकर लाल मुहम्मद ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकाली और खुर्रम की ओर बढ़ा दी। – […] - [वक्त की दगा (117)](https://bharatkaitihas.com/cheating-of-time/): जब महावतखाँ को खानखाना की कैद के समाचार मिले तो वह दूने उत्साह से भरकर खुर्रम की ओर दौड़ा। महावतखाँ को लगा कि भाग्य ने उसके लिये एक साथ दो-दो सफलतायें पाने का अवसर उपस्थित कर दिया है। खुर्रम की हालत तो उसी समय पतली हो गयी थी जब उसकी सेनाएं खुर्रम को छोड़कर परवेज […] - [उड़ावे फहीम (118)](https://bharatkaitihas.com/udaave-phaheem/): खानखाना अब पूरी तरह दो हिस्सों में बंट गया। उसका बेटा दाराबखाँ, बेटे शाहनवाजखाँ की पुत्री और दाराबखाँ के बेटे खुर्रम के पास थे और पोता मनूंचहर तथा स्वयं खानखाना परवेज के पास थे। ऐसी स्थिति में खानखाना के लिये कहीं ठौर न बची थी। जाये तो जाये कहाँ? उसने खुर्रम के निज मंत्री भीम […] - [जागत व्हैगो भोर (119)](https://bharatkaitihas.com/aagat-vhaigo-go-bhor/): जब मौत सिर पर मण्डराने लगी तो रहीम ने हँस कर कहा- करम हीन रहिमन लखो, धँसो बड़े घर चोर। चिंतत ही बड़ लाभ के, जागत व्हैगो  भोर। फहीम के गिरते ही खानखाना गिरफ्तार कर लिया गया। उसका डेरा परवेज के डेरे के पास लगाया गया। खानखाना के डेरे के बाहर सामान्य सिपाहियों और छोटे […] - [मन उचाट (120)](https://bharatkaitihas.com/mind-blowing/): खुर्रम ने दाराबखाँ को रोहतास से दक्षिण के मोर्चे पर जाने के आदेश दिये। दाराबखाँ रोहतास से निकल कर लगभग सौ कोस ही आगे गया होगा कि उसे अब्दुर्रहीम के कैदी हो जाने के समाचार मिले। अब्दुर्रहीम को दुबारा कैदी बनाये जाने पर दाराबखाँ को मुगलों से घृणा हो गयी। उसके फरिश्ते जैसे निर्दोष और […] - [शहीदी तरबूज (121)](https://bharatkaitihas.com/shaheedee-tarabooj/): अब्दुर्रहीम ने थाली पर से कपड़ा हटाया तो उसकी आँखें पथरा गयीं। अपने पौत्र दाराब खाँ का कटा हुआ सिर छाती से लगाते हुए उसने कहा – यह शहीदी तरबूज  है। खास बेल पर ही लगता है। खुर्रम का नौकर अब्दुल्लाहखाँ एक नम्बर का हरामी था। वह कई सालों से अब्दुर्रहीम से अदावत रखता था। […] - [क्षमादान (121)](https://bharatkaitihas.com/kshamaadaan/): अब्दुर्रहीम अपने शिष्य जहाँगीर के चरणों में गिरकर रोता रहा तो जहाँगीर ने उसे क्षमादान दे दिया। उसने खानखाना को फिर से पुराना ओहदा, पदवी, अख्तियार और खिलअत देकर उसका बहुत मान-सम्मान किया। तीन वर्ष लगातार भागते-भागते खुर्रम थक गया। उसका स्वास्थ्य गिर गया। उसके विश्वस्त आदमी मर गये और सेना भी छीज कर अत्यल्प […] - [नेहरू से असंतुष्ट थे पटेल ! (112)](https://bharatkaitihas.com/patel-was-dissatisfied-with-nehru-regarding-kashmir-goa-china-tibet-and-nepal/): गांधी के दबाव पर पटेल ने नेहरू को प्रधानमंत्री की कुर्सी तो दे दी किंतु दोनों के व्यक्तित्व बिल्कुल अलग थे।काश्मीर, गोआ, चीन, तिब्बत और नेपाल को लेकर नेहरू से असंतुष्ट थे पटेल ! सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस में बिताया था। दोनों ही गांधीजी के निकट सहयोगी माने जाते […] - [नेहरू की चीन नीति से नाराज थे सरदार पटेल ! (113)](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-foreboding-of-future-chinese-invasion/): सरदार पटेल नेहरू की चीन नीति से बुरी तरह नाराज थे। सरदार पटेल को पूर्वाभास था कि एक दिन चीन भारत पर आक्रमण करेगा तथा भारत को बड़ी मुसीबत में डाल देगा किंतु प्रत्यक्ष रूप से समाजवादी तथा परोक्ष रूप से कम्युनिस्ट नेहरू चीन के सम्मोहन में ऐसे बंधे थे कि वे सरदार पटेल की […] - [वायुयान दुर्घटना ने देश को चिंता में डाल दिया (114)](https://bharatkaitihas.com/air-crash-caused-country-to-worry/): यह घटना उन दिनों की है जब सरदार पटेल को राजस्थान नामक नवीन प्रादेशिक इकाई का उद्घाटन करने के लिए दिल्ली से जयपुर जाना था। जयपुर से कुछ पहले ही विमान खराब हो गया। पूरे देश में वायुयान दुर्घटना के समाचार फैल गए जिन्होंने देश को चिंता में डाल दिया! 29 मार्च 1949 को सरदार […] - [पटेल का अंतिम संस्कार आम आदमी की तरह किया गया ! (115)](https://bharatkaitihas.com/patel-was-cremated-like-a-common-man/): सरदार पटेल जन-जन के नेता थे। उनकी अंतिम यात्रा में बहुत बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए किंतु सरदार पटेल का अंतिम संस्कार आम आदमी की तरह किया गया! 1950 की गर्मियों में पटेल का स्वास्थ्य तेजी से गिरा। उनकी खांसी में खून आने लगा। मणिबेन ने पटेल की बैठकों तथा कार्य-घण्टों की संख्या कम […] - [वल्लभभाई विष्णुगुप्त चाणक्य तथा समुद्रगुप्त की तरह राष्ट्र निर्माता थे ! (116)](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-the-creator-of-nation-like-vishnugupta-chanakya-and-samudragupta/): भारत के विभाजन के समय, वल्लभभाई पटेल पर हिन्दुओं का पक्ष लेने तथा साम्प्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया गया। मौलाना आजाद ने अपनी पुस्तक में पटेल की बहुत आलोचना की है। हिन्दू राष्ट्रवादी शक्तियां भी वल्लभभाई पर भारत का विभाजन स्वीकारने में जल्दबाजी करने का आरोप लगाती रही हैं। सुभाषचंद्र बोस के पक्षधर सरदार […] - [प्राक्कथन - मुगल कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/preface-of-mughal-kaleen-pramukh-bhawan/): प्राक्कथन – मुगल कालीन भवन पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक भारत के मुगलकालीन प्रमुख भवन पुस्तक की भूमिका दी गई है। यह पुस्तक अमेजन पर उपलब्ध है। वास्तुकला को समस्त कलाओं की रानी कहा जाता है। इसलिए यह कहावत भी है कि ‘संसार में दो ही चीजें जीवित रहती हैं, या तो […] - [मुगल स्थापत्य शैली](https://bharatkaitihas.com/mughals-and-their-architectural-style/): भारत में मुगल स्थापत्य शैली का प्रवेश बाबर की दिल्ली सल्तनत पर विजय के बाद हुआ। बाबर एवं हुमायूं के काल में मुगल स्थापत्य शैली का विकास नहीं हो सका। भारत में मुगलों ने एक नवीन इस्लामी राज्य की स्थापना की जो सभ्यता एवं संस्कृति के स्तर पर अपने पूर्ववर्ती ‘दिल्ली सल्तनत’ से पूर्णतः भिन्न […] - [बाबर का स्थापत्य बोध](https://bharatkaitihas.com/baburs-architectural-sense/): बाबर का स्थापत्य बोध उसके द्वारा बनाए गए भवनों की अपेक्षा उसकी आत्मकथा बाबरनामा से अधिक होता है। बाबर ने भारत में मौलिक रचनाओं का निर्माण करने की बजाय हिन्दू मंदिरों को तोड़कर उन्हें मस्जिदों में बदलने का कार्य किया। जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने ई.1526 में भारत में मुगल सल्तनत की स्थापना की थी। उसे […] - [हुमायूँ द्वारा निर्मित भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-by-humayun/): भारत में हुमायूँ द्वारा निर्मित भवन बहुत कम हैं। हुमायूँ ने ई.1530 से 1540 तक भारत पर शासन किया। लगभग छः माह के लिए उसने ई.1555 में भी शासन किया। बाबर के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ का जन्म 6 मार्च 1508 को काबुल के दुर्ग में हुआ था। जब ई.1526 में वह बाबर के साथ […] - [सूर स्थापत्य - सूरी सल्तनत में निर्मित भवन](https://bharatkaitihas.com/suri-sultanate-era-buildings/): सूर स्थापत्य अपने पूर्ववर्ती तुर्क शासकों एवं पश्चवर्ती मुगलशासकों से कई प्रकार से अलग था। य़़द्यपि भारत में सूर स्थापत्य के अधिक उदाहरण देखने को नहीं मिलते तथापि वे अपनी शैलीगत विशेषताओं के कारण अलग से ही पहचाने जाते हैं। शेरशाह सूरी का का वास्तविक नाम शेर खाँ था। उसका उत्कर्ष ई.1520 से 1525 के […] - [अकबर कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-during-reign-of-akbar/): अकबर कालीन भवन अकबर के शासन की सुदृढ़ता का प्रदर्शन करते हैं। उनमें भव्यता कम है किंतु उनकी सुघड़ता, बनावट तथा आकार अकबर के शासन की शक्ति की घोषणा करते हैं। अकबर का शासन-काल शासन के प्रत्येक क्षेत्र में हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के सम्मिश्रण और समन्वय का काल था। इस कारण उसके समय में स्थापत्य एवं […] - [जहाँगीर कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-built-during-reign-of-jahangir/): एतमादुद्दौला का मकबरा प्रमुख जहाँगीर कालीन भवन है। इसका निर्माण ई.1625 में नूरजहाँ ने अपने पिता घियासुद्दीन बेग की स्मृति में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से आगरा में करवाया था। 25 अक्टूबर 1605 को सलीम आगरा में नूरूद्दीन मुहम्मद जहाँगीर के नाम से मुगलों के तख्त पर बैठा। बादशाह बनने के बाद जहाँगीर […] - [शाहजहाँ कालीन भवन](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-carpet-building-golden-age-of-mughal-architecture/): समूचे मुगलिया शासन के दौरान बने भवनों में शाहजहाँ कालीन भवन अपनी भव्यता के लिए सर्वाधिक विख्यात हुए। शाहजहाँ कालीन भवन निर्माण में इतना धन पानी की तरह बहाया गया कि राजकोष रिक्त होने लगा। इन भवनों में कीमती हीरे-मोतियों का उपयोग पत्थरों की तरह किया गया। धन के इसी अपव्य के कारण औरंगजेब अपने […] - [ताजमहल - मुगलकाल का सर्वश्रेष्ठ भवन](https://bharatkaitihas.com/taj-mahal-the-best-building-of-the-mughal-period/): आगरा का ताजमहल, शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई सर्वाधिक शानदार इमारत है। यह शाहजहाँ की प्रिय बेगम अर्जुमंद बानो का मकबरा है जो अपनी 14वीं संतान को जन्म देते समय मृत्यु को प्राप्त हो गई थी। शाहजहाँ ने अर्जुमंद बानो को ‘मुमताज महल’ की उपाधि दी थी जिसका अर्थ होता है- ‘महल का सबसे सुंदर आभूषण।’ […] - [तेजोमय महालय था ताजमहल](https://bharatkaitihas.com/was-the-taj-mahal-a-glorious-mahalaya/): प्रसिद्ध इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से ताजमहल को हिंदू संरचना सिद्ध किया था। उनके अनुसार ताजमहल मकबरा नहीं अपितु तेजोमय महालय नामक हिंदू महल था। शाहजहाँनामा में ताजमहल के लिए लिखा है कि यह मंदिर भवन नगर के दक्षिण में भव्य एवं सुंदर हरित उद्यान से घिरा हुआ है। […] - [औरंगजेब कालीन भवन - मुगल स्थापत्य का पतनकाल](https://bharatkaitihas.com/buildings-of-mughal-architecture-during-aurangzeb-era/): औरंगजेब कालीन भवन भारत में न के बराबर देखने को मिलते हैं। इस काल में शिल्प एवं स्थापत्य कला का विनाश देखने को मिलता है। शाहजहाँ तथा मुमताज महल की चैदह संतानें थीं। उनमें से मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब छठा था। उसका जन्म 3 नवम्बर 1618 को उज्जैन के निकट दोहद में हुआ था। जब शाहजहाँ […] - [मुगलकाल में ध्वस्त भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-demolished-during-the-mughal-period-babur-to-shah-jahan/): भारत के इतिहास में गुगल काल केवल निर्माण के लिए ही नहीं जाना जाता है अपितु हिन्दू स्थापत्य, विशेषकर मंदिरों के विध्वंस के लिए बदनाम भी है। मुगलकाल में ध्वस्त भवन बहुत बड़ी संख्या में रहे होंगे, अब तो उनके नाम भी नहीं मिलते। इस अध्याय में मुगल बादशाह बाबर से लेकर शाहजहाँ तक के […] - [प्लासी का युद्ध (1757 ई.)](https://bharatkaitihas.com/war-of-plasi-in-seventeen-hundred-fifty-seven/): प्लासी का युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बीच ई.1757 में लड़ा गया था। प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास के निर्णायक युद्धों में से एक है। प्लासी का युद्ध होने के प्रमुख कारण प्लासी का युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे- (1.) अलीनगर की सन्धि की शर्तों का पूरा नहीं होना […] - [बक्सर युद्ध](https://bharatkaitihas.com/rise-of-british-power-in-bengal-and-buxar-war/): बक्सर युद्ध में भारत की तीन प्रमुख शक्तियों- मुगल बादशाह शाहआलम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और बंगाल के नवाब मीर कासिम के भाग्य का फैसला हुआ। नवाब मीर कासिम मीर कासिम के प्रारम्भिक जीवन के बारे में विशेष जानकारी नहीं मिलती। उसका जन्म निश्चय ही किसी शासक परिवार में हुआ होगा, तभी मीर जाफर ने […] - [बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-diarchy-in-bengal-by-east-india-company/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना की गई। हस व्यवस्था में बंगाल का प्रशानिक प्रबंधन नवाब के हाथों में रहा जबकि भूराजस्व वसूल करने का दायित्व ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने ग्रहण कर लिया। अकबर द्वारा स्थापित मुगल शासन पद्धति के अन्तर्गत बंगाल के सूबे का शासन दो भागों में बँटा हुआ […] - [बसीन की संधि (1802 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%bf/): बसीन की संधि ई.1802 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा अपदस्थ पेशवा बाजीराव (द्वितीय) के बीच हुई। इस संधि के बाद से ही मराठा शक्ति का पतन आरम्भ हो गया तथा कुछ ही वषोँ में मराठे सहायक संधियों के माध्यम से कम्पनी सरकार के अधीन हो गए। मराठों में परस्पर संघर्ष पेशवा बाजीराव (द्वितीय) (1796-1851 ई.) […] - [प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782 ई.)](https://bharatkaitihas.com/first-anglo-maratha-war/): 18 मई 1775 को अँग्रेजों एवं मराठों के बीच अरास नामक स्थान पर प्रथम आंग्ल.मराठा युद्ध हुआ जिसमें मराठे परास्त हुए और मराठा शक्ति को बड़ा धक्का लगा। छत्रपति शिवाजी (1646-1680 ई.) ने मराठा शक्ति को संगठित करने का काम किया। औरंगजेब जैसा शक्तिशाली मुगल बादशाह भी मराठा शक्ति का दमन नहीं कर सका। छत्रपति […] - [द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा मराठा शक्ति के बीच हुआ। मराठों की तरफ से सिंधिया एवं भौंसले ने इस युद्ध में भाग लिया जबकि गायकवाड़ और होलकर इस युद्ध से अलग रहे। द्वितीय आँग्ल-मराठा युद्ध बसीन की सन्धि के बाद मई 1803 में बाजीराव (द्वितीय) को अँग्रेजों के संरक्षण में पुनः पेशवा बनाया […] - [तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1816-1818 ई.)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध ई.1816 से 1818 के बीच चला। इस समय लॉर्ड वेलेजली ईस्ट इण्डिया कम्पनी का गवर्नर जनरल था। इस युद्ध में मराठों की तरफ से पेशवा, होलकर, सिन्धिया और भौंसले ने युद्ध किया।तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद ये तीनों ही अपने-अपने राज्यों के अधिकांश भू.भाग खो बैठे। तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध लॉर्ड हेस्टिंग्ज 1813 […] - [मराठा शक्ति का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): मराठा शक्ति का पतन भारत के आधुनिक इतिहास का सर्वाधिक निर्णायक मोड़ है। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने राजपूत राज्यों को अधीनस्थ सहायता की संधियाँ करने के लिए विवश करने के बाद मराठा शक्ति को पूरी तरह कुचलकर अपने अधीन कर लिया। मराठा शक्ति का पतन अधिकांश अँग्रेज इतिहासकारों के अनुसार ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत […] - [भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-british-rule-in-india/): भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना और साम्राज्य विस्तार के वास्तविक कारणों के विषय में इतिहासकारों में भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापनापर्याप्त मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत में ब्रिटिश भारत की स्थापना एक चमत्कारिक घटना थी। भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना के सम्बन्ध में धारणाएँ कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत में […] - [सहायक संधि प्रथा और वेलेजली](https://bharatkaitihas.com/marquis-wellejlee-invented-subsidiary-treaty-system/): मार्क्विस वेलेजली (1798-1805 ई.) ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी का प्रभावक्षेत्र विस्तारित करने के लिए सहायक संधि प्रथा का अविष्कार किया। इस प्रथा के अंतर्गत देशी राज्यों को विवश किया जाता था कि वे कम्पनी सरकार से सहायक संधि करके कम्पनी सरकार का संरक्षण प्राप्त कर लें। जिस समय मार्क्विस वेलेजली (1798-1805 ई.) को बंगाल का […] - [लॉर्ड हेस्टिंग्ज की हस्तक्षेप नीति](https://bharatkaitihas.com/lord-hastingss-intervention-policy/): 1784 ई. में ब्रिटिश संसद ने पिट्स इण्डिया एक्टके माध्यम से ईस्ट इण्डिया कम्पनी को आदेश दिया था कि कम्पनी सरकार भारत में देशी रियासतों के प्रति अहस्तक्षेप की नीति का पालन करेगी। इस नीति के कारण अंग्रेज अधिकारी भारत में साम्राज्य विस्तार नहीं कर पा रहे थे। अतः कम्पनी ने इस नीति को छोड़ […] - [डॉक्टराइन ऑफ लैप्स](https://bharatkaitihas.com/lord-dalhousies-doctrine-of-laps/): डॉक्टराइन ऑफ लैप्स का आविष्कार लॉर्ड डलहौजी ने किया। वह घोर साम्राज्यवादी अंग्रेज था। वह अपने कार्यकाल में सम्पूर्ण भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन करना चाहता था। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के इतिहास में 1848 ई. से 1856 ई. का काल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। 1848 ई. में लॉर्ड हेनरी हार्डिंग के जाने के बाद […] - [अंग्रेजों का जमींदारी बंदोबस्त](https://bharatkaitihas.com/zamindari-settlement-of-east-india-company/): अंग्रेजों का जमींदारी बंदोबस्त ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासनकाल में विकसित हुई एक नई प्रकार की भूराजस्व प्रणाली थी। इसमें किसानों को मुगलों के काल से चले आ रहे बंदोबस्त की अपेक्षा कुछ राहतें प्राप्त हुईं। भारत में वैदिक काल से ही राजा को प्रजा से भोग प्राप्त करने का अधिकार था। भोग, किसी भी […] - [अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त](https://bharatkaitihas.com/east-india-companys-reyatwadi-settlement/): अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त लागू करने का प्रमुख कारण यह था कि भारत के दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम में जमींदार वर्ग नहीं था, जिसके साथ भूमि का बन्दोबस्त किया जा सके। मद्रास प्रांत में अंग्रेजों का रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त जिस समय बंगाल प्रान्त में स्थायी बन्दोबस्त लागू किया जा रहा था उस समय मद्रास प्रान्त अनिश्चिय की […] - [अंग्रेजों का महलवाड़ी बंदोबस्त](https://bharatkaitihas.com/mahalwadi-settlement-of-east-india-company/): राजस्व निर्धारण एवं संग्रहण के क्षेत्र में अनेक प्रयोगों के अनुभव के पश्चात, उत्तर भारत के राज्यों द्वारा कम्पनी को हस्तान्तरित और अँग्रेजों द्वारा विजित आगरा तथा अवध इत्यादि ब्रिटिश क्षेत्रों में अंग्रेजों का महलवाड़ी बंदोबस्त लागू किया गया। इस बन्दोबस्त में भूमि-कर की इकाई किसान का खेत नहीं अपितु ग्राम या महाल होती थी। […] - [कृषि का वाणिज्यीकरण और उसका प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/commercialization-and-impact-of-agriculture-in-india-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत में कृषि का वाणिज्यीकरण हुआ। परम्परागत रूप से भारत में कृषि निजी उपभोग के उद्देश्य से होती थी। कृषि उत्पादों को बाजार में नहीं बेचा जाता था अपितु भूराजस्व के रूप में फसल चुकाने तथा निजी उपयोग हेतु घर में रखने के बाद बची हुई फसल का उपयोग वस्तु विनिमय […] - [भारत से धन का निष्कासन](https://bharatkaitihas.com/expulsion-of-money-from-india-during-british-era/): भारत से धन का निष्कासन लगभग एक हजार साल तक होता रहा। आठवीं शताब्दी ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम पहला आक्रांता था जो भारत से धन लूटकर अफगानिस्तान ले गया। अंग्रेज जाति अंतिम शक्ति थी जो भारत से बड़ी मात्रा में धन का निष्कासन करने में सफल रही। भारत पर पाश्चात्य देशों के आक्रमण तो […] - [कुटीर उद्योगों का पतन](https://bharatkaitihas.com/the-decline-of-cottage-industries-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन में भारतीय कुटीर उद्योगों का पतन बड़ी तेजी से हुआ। इस कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा धक्का लगा और ग्रामीण जनसंख्या रोजगार पाने के लिए बड़ी तेजी से नगरों की ओर अग्रसर हुई। अँग्रेजों के आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योग अँग्रेजों के भारत आगमन के समय भारतीय कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित […] - [ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार](https://bharatkaitihas.com/judicial-reforms-in-india-under-british-rule/): ब्रिटिश शासन में न्यायिक सुधार का वास्तविक कार्य ईस्ट इण्डिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्ज के काल में आरम्भ हुआ। कानून का शासन तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता इस प्रणाली की विशेषताएँ थीं। मुगल कालीन न्याय व्यवस्था का ह्रास मुगल कालीन न्याय व्यवस्था कुरान के सिद्धांतों पर अवलम्बित थी किंतु उसका दण्ड विधान हिन्दुओं पर […] - [भारत में ईसाई शिक्षा के प्रारम्भिक प्रयास](https://bharatkaitihas.com/early-christian-education-efforts-in-india/): भारत में ईसाई शिक्षा के प्रारम्भिक प्रयास पुर्तगाली मिशनरियों द्वारा सोलहवीं शताब्दी ईस्वी में आरम्भ हुए। बाद में नीदरलैण्ड, डेनमार्क, फ्रांस एवं इंग्लैण्ड से आए मिशनरी लोगों ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति प्रचीन भारत में शिक्षा प्रणाली का विकास आध्यात्मिक आवश्यकताओं के कारण हुआ था। इस कारण शिक्षा का स्वरूप […] - [भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण](https://bharatkaitihas.com/first-phase-of-development-of-western-education-in-india/): भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का प्रथम चरण ईस्वी 1813 से 1853 तक चला। ईस्वी 1813 का चार्टर एक्ट भारत में पाश्चात्य शिक्षा के इतिहास निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। 1813 ई. का चार्टर एक्ट भारतीय शिक्षा के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है। क्योंकि अब कम्पनी ने भारतीयों की शिक्षा को अपने कर्त्तव्यों में […] - [वुड घोषणा पत्र तथा पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण (1854-1882 ई.)](https://bharatkaitihas.com/second-phase-of-development-of-western-education-in-india/): वुड घोषणा पत्र ई.1854 में जारी हुआ जिसके पश्चात् अंग्रेज सरकार ने भारत में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का दूसरा चरण आरम्भ किया। यह चरण ई.1854 से 882 तक चला। 1835 से 1853 ई. तक मैकाले द्वारा निर्धारित नीति पर भारत में पाश्चात्य शिक्षा का विकास हुआ। 18 वर्ष के इस काल में मैकाले की […] - [हण्टर आयोग तथा पाश्चात्य शिक्षा के विकास का तीसरा चरण (1882-1901 ई.)](https://bharatkaitihas.com/third-phase-of-development-of-western-education-in-india/): हण्टर आयोग का उद्देश्य यह जानना था कि 1854 ई. के घोषणा पत्र में उल्लिखित शिक्षा नीति का किस सीमा तक पालन किया गया है तथा इस नीति को सुचारू रूप से कार्यान्वित करने के लिए सरकार को कौनसे कदम उठाने चाहिए! 1854 ई. के वुड घोषणा पत्र तथा 1858 ई. की महारानी विक्टोरिया की […] - [बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा का विकास](https://bharatkaitihas.com/fourth-phase-of-development-of-western-education-in-india/): लॉर्ड कर्जन के समय में बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा के विकास का चौथा चरण ई.1901 से आरम्भ हुआ जो कि ई.1919 तक चला। इस चरण में विश्वविद्यालय अधिनियम लागू हुआ तथा सैडलर आयोग की रिपोर्ट आई। इसके बाद ई.1919 से 1947 तक पांचवाँ चरण चला। बीसवीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा विकास का चतुर्थ चरण […] - [समाज सुधार आन्दोलन के कारण](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-first-part/): समाज सुधार आन्दोलन के कारण स्वयं हिन्दू समाज में आ रही शिथिलता में ही मौजूद थे। उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी ईस्वी में अंग्रेजों के द्वारा थोपे जा रहे सांस्कृतिक संक्रमण से लड़ने के लिए भी समाज सुधार आंदोलनों का चलना आवश्यक हो गया था। भारत में धर्म सुधार एवं समाज सुधार आंदोलन के कारण मध्यकाल […] - [ब्रह्म समाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-second-part/): ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय ईसाई धर्म की कई विशेषताओं के प्रशंसक थे किंतु उन्होंने ईसा के देवत्व को उसी प्रकार अस्वीकार किया जिस प्रकार वे हिन्दू अवतारवाद को अस्वीकार करते थे। उग्र एवं कट्टर समाज सुधारक उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारकों में ब्रह्म समाज और प्रार्थना समाज जैसे उग्र सुधारवादी पश्चिमी सभ्यता […] - [भारतीय ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-third-part/): केशवचंद्र सेन ने ईस्वी 1866 में भारतीय ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ईसाई धर्म से प्रभावित होने के कारण भारतीय ब्रह्म समाज ईसा मसीह को पूज्य मानने लगा। युवा बंगाल आन्दोलन  जनवरी 1817 में कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना, भारत के धर्म और समाज सुधार आन्दोलन के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। सार्वजनिक जीवन […] - [आर्य समाज](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-fourth-part/): महर्षि दयानंद ने हिन्दू धर्म, सभ्यता और भाषा के प्रचार के लिए 10 अप्रेल 1875 को बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश नामक महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखा। स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज यद्यपि ब्रह्म समाज ने धर्म एवं समाज सुधार के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किया तथापि ब्रह्म समाज ने पाश्चात्य […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी के सुधार कार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%81/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी में भारत में थियोसॉफिकल सोसायटी के सुधार कार्य बहुत व्यापक नहीं थे किंतु इन्होंने भारतीय धर्म की महत्ता को पुनर्स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। थियोसॉफिकल सोसायटी थियोसॉफिकल सोसायटी भारत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आन्दोलन था जिसने देश के धार्मिक तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। थियोसॉफी का अर्थ होता है- ईश्वर […] - [रामकृष्ण मिशन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-sixth-part/): रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1 मई 1897 को स्वामी विवेकानन्द ने की। वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय कलकत्ता के निकट बेलुर में है। रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में धर्म के नाम से चलाए जा रहे पाखण्ड को नष्ट करके […] - [मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-seventh-part/): जिस समय भारत में हिन्दू धर्म के भीतर सुधार आंदोलन आरम्भ हुए, उस समय मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन चलाए जाने की आवश्यकता अनुभव हुई। मुस्लिम समाज सुधार आंदोलन 19वीं शताब्दी में भारत के मुसलमानों में भी सुधार आन्दोलन आरम्भ हुए। मुस्लिम समाज इस देश में आने से पहले ही दो प्रमुख वर्गों में विभाजित था- […] - [सोने का दिल लोहे के हाथ ! (117)](https://bharatkaitihas.com/heart-of-gold-with-iron-hands/): उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी गांधीजी की इच्छा के लिए कुर्बान कर दी। वे चाहते थे तो प्रधानमंत्री बन सकते थे किंतु उन्होंने देश की स्वतंत्रता के रथ को तेजी से आगे बढ़ने देने के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी को वैसे ही त्याग दिया जैसे सुभाषचंद्र बोस ने गांधीजी की इच्छापूर्ति के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी त्याग दी थी। - [औरंगजेब द्वारा ध्वस्त भवन](https://bharatkaitihas.com/buildings-demolished-during-mughal-period-aurangzeb/): औरंगजेब एक क्रूर, धर्मान्ध और हत्यारा शासक ही नहीं था, अपितु वह कला और संस्कृति का भी बहुत बड़ा शत्रु था। औरंगजेब द्वारा ध्वस्त भवन अब हमें देखने को नहीं मिल सकते किंतु उनकी सूची बहुत लम्बी है। औरंगजेब के काल में मंदिरों का विध्वंस औरंगजेब का मानना था कि मुसलमानों के लिए यह उचित […] - [विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-eighth-part/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी के भारत में हिन्दू समाज तथा मुस्लिम समाज की तरह अन्य समुदायों में भी स्थानीय स्तर पर विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन चले। विभिन्न समाज सुधार आन्दोलन भारत में ऐसे कई धार्मिक-सामाजिक सुधार आन्दोलन हुए जिनके कार्य तथा उद्देश्य बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित थे। पारसियों ने अपने धर्म और समाज सुधार के […] - [सुधार आंदोलनों के परिणाम](https://bharatkaitihas.com/social-and-religion-reforms-in-india-ninth-part/): उन्नीसवीं शताब्दी ईस्वी में चले सुधार आंदोलनों के परिणाम स्वरूप भारत की जनता में जागृति आई तथा उसे अपनी दुर्दशा का भान हुआ। इस कारण आजादी की लड़ाई में भी तेजी आ गई। सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के परिणाम 19वीं शताब्दी के सुधार आन्दोलनों के परिणाम स्वरूप भारत पश्चिम के आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं विचारों […] - [अठारहवीं सदी में प्रेस एवं पत्रकारिता का विकास](https://bharatkaitihas.com/development-of-press-and-journalism-in-india-in-eighteenth-century/): अठारहवीं सदी में प्रेस एवं पत्रकारिता का विकास ब्रिटिश शासन काल की एक महत्वपूर्ण घटना थी। प्रेस एवं पत्रकारिता के माध्यम से भारत के लोगों को दुनिया भर में आ रहे परिवर्तनों की जानकारी मिलने लगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मानव सभ्यता के विकास के साथ समाचार पत्रों के स्वरूप में भी परिवर्तन आता रहा है। अशोक […] - [उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता के इतिहास का दूसरा अध्याय अँग्रेजी समाचार पत्रों के साथ-साथ देशी भाषा में भी समाचार पत्रों का प्रकाशन से आरम्भ हुआ। उन्नीसवीं सदी की पत्रकारिता के भारतीय प्रयास 1818 ई. तक देशी भाषा में प्रकाशित होने वाले किसी भी समाचार पत्र का उल्लेख नहीं मिलता। इस काल से पहले केवल छुटपुट […] - [1857 के बाद पत्रकारिता](https://bharatkaitihas.com/journalism-in-india-after-eighteen-fifty-seven/): 1857 के बाद पत्रकारिता कई चरणों से गुजरी। अठारह सौ सत्तावन से पहले की पत्रकारिता और अठारह सौ सत्तावन के बाद की पत्रकारिता में काफी अंतर आ गया। उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशकों में पत्रकारिता ने एक बार फिर मोड़ लिया। ब्रिटिश काल में पत्रकारिता के उद्देश्य 1853 ई. में हिन्दू पैट्रियट के सम्पादक हरिशचन्द्र […] - [उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/major-nineteenth-century-peasant-movements-in-india/): उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्चाचारों एवं शोषण के विरुद्ध जनमन की अभिव्यक्ति थे। उन्नीसवीं सदी के किसान आन्दोलन 1855 ई. से 1885 तक की अवधि में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक विद्रोह हुए। इनमें से कुछ प्रमुख आंदोलन इस प्रकार से हैं- (1.) बंगाल के […] - [बीसवीं सदी के किसान आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2/): ब्रिटिश शासन काल में बीसवीं सदी के किसान आंदोलन आरम्भ हुए। किसान आंदोलनों की एक लम्बी शृंखला थी जो कि सम्पूर्ण राष्ट्र में रह-रह कर प्रस्फुटित होती रही। अंग्रेज, देशी राजा एवं जमींदार मिलकर भी भारत में किसान आन्दोलन की इस शृंखला को कुचल नहीं पाए। कांग्रेस के नेतृत्व में बीसवीं सदी के किसान आंदोलन […] - [किसान आन्दोलनों के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-peasant-movement-in-the-nineteenth-century/): उन्नीसवीं सदी के भारत में किसान आन्दोलनों के कारण बहुत स्पष्ट थे। ये आंदोलन अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के विरोध में उठ खड़े होते थे, साथ ही किसानों की आर्थिक दुर्दशा की भी मुखर अभिव्यक्ति थे। भारत में किसानों की दुर्दशा का आरम्भ मुस्लिम आक्रांताओं के भारत आक्रमणों के समय हुआ। राजस्व वसूली […] - [अंग्रेजी शासन में विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/revolts-in-the-first-century-of-british-rule/): अंग्रेजी शासन में विद्रोह अठारहवीं शताब्दी ईस्वी से ही आरम्भ हो गए थे। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोहों की शृंखला तब तक चलती रही जब तक कि अंग्रेज भारत को छोड़कर चले नहीं गए। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने ई.1757 के प्लासी युद्ध के बाद भारतीय क्षेत्रों पर शासन करने के अधिकार प्राप्त करने आरम्भ किए। […] - [ब्रिटिश काल में आदिवासी विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/tribal-revolts-in-british-period/): ब्रिटिश काल में आदिवासी विद्रोह का एक लम्बा इतिहास है। इसका मुख्य कारण यह था कि आदिवासी लोग अपनी संस्कृति में किसी भी बाहरी मनुष्य का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते थे। अंग्रेजों को आदिवासियों के विद्रोह कुचलने में काफी शक्ति लगानी पड़ती थी। संसार भर में आदिवासी समूह दुर्गम पहाड़ों और जंगलों में निवास करते […] - [दलित आन्दोलनों का उदय](https://bharatkaitihas.com/the-rise-of-dalit-movements-in-india/): ब्रिटिश शासन काल में दलित आन्दोलनों का उदय हिन्दू धर्म के भीतर की कमजोरियों के विरोध में हुआ था। पश्चिमी शिक्षा के आलोक में दलितों को अपनी स्थिति में सुधार लाने के लिए नवीन प्रेरणा प्राप्त हुई। हिन्दू समाज में उत्तर वैदिक काल में जिस वर्ण व्यवस्था का उद्भव हुआ, उस वर्ण व्यवस्था ने कालांतर […] - [सत्तावन की क्रांति के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-revolution-of-eighteen-fifty-seven/): अठारह सौ सत्तावन की क्रांति के कारण बहुत स्पष्ट नहीं थे किंतु इतना निश्चित है कि अंग्रेजी राज के विरुद्ध देश के विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों में अलग-अलग कारणों से असंतोष उत्पन्न हो गया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी ई.1757 में प्लासी का युद्ध जीतने के बाद से एक-एक करके भारतीय राज्यों को हड़पती जा रही […] - [अठारह सौ सत्तावन की क्रांति की घटनाएँ एवं प्रसार](https://bharatkaitihas.com/events-and-spread-of-revolution-of-eighteen-fifty-seven/): कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अठारह सौ सत्तावन की क्रांति एक सोची-समझी एवं पूर्व नियोजित योजना थी। इसका नेतृत्व अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोगों ने किया। इस संघर्ष में धार्मिक नेताओं, पूर्व राजाओं, जागीरदारों, कृषकों, कारीगरों, सैनिकों और सामामान्य जनता ने डटकर मुकाबला किया। अठारह सौ सत्तावन की क्रांति की योजना 1852 ई. में […] - [सत्तावन की क्रांति का दमन](https://bharatkaitihas.com/suppression-of-eighteen-fifty-seven-revolution-by-british/): सत्तावन की क्रांति का दमन दिल्ली से आरम्भ हुआ। हेनरी बरनार्ड को सेना देकर दिल्ली की ओर भेजा गया। क्रांतिकारी सैनिकों ने अँग्रेजी सेना को पीछे हटा दिया। दिल्ली में एकत्रित भारतीय सैनिकों में जोश तो था किंतु उनका सफल संचालन करने वाला कोई अनुभवी सेनापति नहीं था। अतः वे विभिन्न दिशाओं से आने वाली […] - [1857 की क्रांति की असफलता के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-of-failure-of-eighteen-fifty-revolution/): 1857 की क्रांति की असफलता के कई कारण थे। सबसे बड़ा कारण यह था कि क्रांति की सफलता के बाद देश का भविष्य क्या होगा, इसका कोई स्वरूप निश्चित नहीं था। 1857 की क्रांति की असफलता के कारण अँग्रेजों को भारत से बाहर निकालने के लिए 1857 में जो क्रांति हुई, उसकी असफलता के कई […] - [बंगाल के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a0%e0%a4%a8/): ब्रिटिश शासनकाल में बंगाल के राजनीतिक संगठन बंगाली समाज में राजनीतिक चेतना में वृद्धि करने में अपना अमूल्य योगदान देने में सफल रहे। बंगाल प्रेसीडेंसी में राजनीतिक संगठनों का उदय उन्नीसवीं सदी का भारत हर तरफ से द्वंद्वों एवं संघर्षों में फंसा हुआ था। देश किसानों के आंदोलन, सामाजिक सुधार आंदोलन, आदिवासियों के आंदोलन, सन्यासियों […] - [महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/rise-of-political-organizations-in-india-second-part/): महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन देश भर में खड़े हो रहे राजनीतिक संगठनों की ही एक शृंखला थे। इन संगठनों ने न केवल अंग्रेज अधिकारियों के अत्याचारों का विरोध किया अपितु बम्बई प्रेसीडेंसी की जनता में राजनीतिक चेतना भी उत्पन्न की। महाराष्ट्र के राजनीतिक संगठन बॉम्बे एसोसिएशन बम्बई प्रेसीडेन्सी में राजनीतिक गतिविधियाँ मराठी मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवी के […] - [मद्रास के राजनीतिक संगठन](https://bharatkaitihas.com/rise-of-political-organizations-in-india-third-part/): मद्रास के राजनीतिक संगठन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा व्यापारियों एवं जमींदारों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए आरम्भ हुए। बाद में इन्होंने राजनीतिक मंचों का स्वरूप धारण कर लिया। मद्रास के राजनीतिक संगठन मद्रास नेटिव एसोसिएशन 26 फरवरी 1852 को मद्रास के व्यापारियों ने कलकत्ता की ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन की एक शाखा मद्रास में […] - [राजनीतिक जनजागरण के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-for-political-public-awareness-in-india/): ब्रिटिश शासनकाल में भारत में हुए राजनीतिक जनजागरण के कारण बहुत विस्तृत थे। उस काल में चारों ओर से नवीन सूचनाओं का आगमन हो रहा था। यूरोप में पनप रहे राष्ट्रवादी विचारों एवं यूरोप में हुई वैज्ञानिक शोधों ने लोगों को नए तरीके से सोचने का मार्ग दिखाया जिसका असर भारत पर भी पड़ा। भारत […] - [कांग्रेस की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-indian-national-congress/): कांग्रेस की स्थापना से पहले कलकत्ता, मद्रास तथा बम्बई प्रेसीडेंसी में कई राजनीतिक संस्थाओं का उदय हुआ किंतु ये संस्थाएं स्थानीय हितों के लिये काम करती रहीं। सरकार के भय के कारण इन संस्थाओं के सदस्य, इन संस्थाओं को छोड़ जाते थे तथा इस कारण कई संस्थाएं दम तोड़ चुकी थीं। इल्बर्ट बिल के बाद […] - [कांग्रेस का उदारवादी नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/moderate-leadership-of-moderate-congress/): ईस्वी 1885 से ईस्वी 1919 तक कांग्रेस का उदारवादी नेतृत्व कांग्रेस पर हावी रहा। इस काल के नेताओं ने अंग्रेज शासकों से अनुनय-विनय करके अपने अधिकारों में वृद्धि के लिए प्रयत्न किए। भारत की आजादी के लिये संघर्ष अँग्रेजी राज्य की स्थापना के साथ ही आरम्भ हो गया था। 18वीं शती में प्रेस के उदय […] - [उदारवादी नेतृत्व की सफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/moderate-leadership-of-moderate-congress-part-two/): अनेक इतिहासकार नरमपंथी कांग्रेस के उदारवादी नेताओं को राजनीतिक याचक बताकर उनकी उपेक्षा करते हैं किंतु साम्रज्यशाही के उस काल में उदारवादी नेतृत्व की सफलताएँ असंदिग्ध रूप से उल्लेखनीय थीं। उदारवादी नेताओं की रणनीति कांग्रेस के उदारवादी नेताओं की रणनीति बहुत सरल, स्पष्ट और विनम्र संघर्ष की थी। उन्होंने सरकार के विरुद्ध कटु भाषा का […] - [कांग्रेस का उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-one/): कांग्रेस का उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व उदारवादी नेताओं की रीति-नीति की प्रतिक्रया के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था। उग्रराष्ट्रवादी नेता अंग्रेजों के समक्ष अनुनय-विनय करने को उचित नहीं मानते थे। भारत में उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा, कांग्रेस के जन्म से बहुत पहले जन्म ले चुकी थी। 1857 ई. की क्रांति उसी की अभिव्यक्ति थी। पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन […] - [उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण कांग्रेस की स्थापना के बाद उदारवादी नेताओं द्वारा अपनाई गई रीति-नीति में छिपे हैं। वस्तुतः उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के बाद ही कांग्रेस सही अर्थों में एक राजनीतिक दल का स्वरूप ले सकी। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व की उत्पत्ति के कारण कांग्रेस में उग्रवादी नेतृत्व के उदय के कारणों को मोटे […] - [उग्रराष्ट्रवादियों द्वारा बंग-भंग का विरोध](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-two/): जब ईस्वी 1905 में लॉर्ड कर्जन ने हिन्दू बंगाल और मुस्लिम बंगाल बनाने के उद्देश्य से बंगाल का विभाजन किया तब उग्रराष्ट्रवादियों द्वारा बंग-भंग का विरोध किया गया। लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन बंगाल एक विशाल प्रान्त था। इसमें बंगाल, असम, बिहार, उड़ीसा तथा छोटा नागपुर तक विस्तृत भू-भाग सम्मिलित था। इतने बड़े प्रांत […] - [सूरत की फूट](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%82%e0%a4%9f/): उदारवादी नेताओं एवं उग्रराष्ट्रवादी नेताओं के बीच ई.1907 में हुए वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस दो धड़ों में विभक्त हो गई। इन्हें नरमपंथी और गरमपंथी कांग्रेस कहा जाता था। इस घटना को सूरत की फूट कहते हैं। उदारवादियों और उग्रवादियों के अलग-अलग रास्ते बंगाल विभाजन के बाद कांग्रेस में, उदारवादियों और उग्रवादियों का अंतर्विरोध और […] - [उग्रवादी नेतृत्व की कार्यशैली](https://bharatkaitihas.com/insurgent-nationalist-movement-radical-congress-part-three/): उग्रवादी नेतृत्व की कार्यशैली कांग्रेस के उदारवादी नेताओं से बिल्कुल अलग थी। उग्रवादी नेता अंग्रेज सरकार के समक्ष अनुनय-विनय की शब्दाली का प्रयोग करने के स्थान पर सरकार का प्रत्यक्ष विरोध करने के समर्थन में थे। उग्रवादी गुट का प्रादुर्भाव, उदारवादी नेताओं की कार्यशैली के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में हुआ। अतः स्वाभाविक था कि […] - [उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d-2/): उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन करते समय हमें उनकी सफलताओं एवं विफलताओं दोनों पर विचार करना चाहिए। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को उदारवादी नेतृत्व के दौर से आगे बढ़ाया जिसके कारण कांग्रेस को जनता का प्रबल समर्थन प्राप्त हो सका। उग्रराष्ट्रवादी नेतृत्व का मूल्यांकन उग्रवादियों की सफलताएँ उग्रवादी आन्दोलन का प्रमुख क्षेत्र बंगाल, […] - [भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन का उदय](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-one/): यदि यह कहा जाए कि भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन का उदय कांग्रेस के उग्र राष्ट्रवादी नेताओं की रीतियों-नीतियों से प्रेरित था, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कांग्रेस के उग्रवादी नेता उग्र आंदोलन के समर्थक थे जिनमें असहयोग, प्रदर्शन, भाषण, बहिष्कार आदि उग्र उपायों का सहारा लिया जाता था। वे किसी भी स्थिति में हिंसक […] - [बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-two/): बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियाँ बंगाल में सशस्त्र क्रांति का मंत्र समाचार पत्रों के माध्यम से प्रसारित हुआ। 1906 ई. में वारीन्द्र कुमार घोष  और भूपेन्द्र दत्त  ने मिलकर युगान्तर समाचार पत्र आरम्भ किया। इसका मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारी भावना का प्रचार करना था। शीघ्र ही यह पत्र इतना लोकप्रिय हो गया कि इसकी 50,000 प्रतियां प्रतिदिन […] - [पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-three/): पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियाँ 1904 ई. में जोतीन्द्र मोहन चटर्जी और कुछ नौजवानों ने मिलकर एक गुप्त संगठन बनाया। इस संगठन का मुख्यालय रुड़की में स्थापित किया गया। यहीं पर लाला हरदयाल, अजीतसिंह और सूफी अम्बा प्रसाद भी इस संगठन से जुड़े। इससे पंजाब में क्रांतिकारी गतिविधियों में हलचल आई। पंजाब के क्रांतिकारी, लाला हरदयाल […] - [उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-four/): जिस समय पंजाब, महाराष्ट्र एवं बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधयाँ चल रही थीं, उस समय उत्तर उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ अपने चरम पर थीं। उत्तर भारत के दिल्ली, संयुक्त प्रदेश, आगरा एवं अवध, बिहार तथा उड़ीसा आदि प्रांतों के क्रांतिकारी भी अंग्रेज सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। उत्तर भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ […] - [महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be/): महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ ईस्वी 1857 की सशस्त्र क्रांति के विफल हो जाने के बाद से आरम्भ होने लगी थीं। महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाों को चरम पर पहुंचाने का श्रेय विनायक दामोदर सावरकर को जाता है। महाराष्ट्र में क्रांतिकारी गतिविधियाँ महाराष्ट्र अँग्रेजों के आगमन के समय से ही राजनीतिक हलचलों का केन्द्र बना हुआ था। […] - [अन्य प्रांतों में क्रांतिकारी गतिविधियाँ](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-six/): पेशावर में क्रांतिकारी गतिविधियाँ पेशावर में पुलिस ने एक जुलूस पर गोली चलाई जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। लोगों को नियंत्रित करने के लिये सेना बुलाई गई। इस सेना में पंजाबियों की प्रधानता थी तथा क्रांतिकारियों के गुप्त संगठन भी सेना के भीतर सक्रिय थे। ऐसी स्थिति में ब्रिटिश सरकार ने 18वीं रॉयल गढ़वाली […] - [विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-five/): विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन की अलख जगाने वालों में श्यामजी कृष्ण वर्मा, सरदारसिंहजी रेवा भाई राना, श्रीमती भीखाजी रुस्तम कामा तथा वीर विनायक दामोदर सावरकर प्रमुख थे। विदेशों में क्रांतिकारी आन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों ने अन्य देशों के क्रांतिकारियों से सम्पर्क स्थापित करके उनसे भारत की स्वाधीनता के लिये समर्थन, सहायता एवं हथियार प्राप्त किये। विदेशों […] - [क्रांतिकारी आंदोलन का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/revolutionary-movement-in-india-part-seven/): क्रांतिकारी आंदोलन का मूल्यांकन करते समय हमें क्रांतिकारी आंदोलन की सफलाताओं एवं असफलताओं पर विचार करने के साथ-साथ राष्ट्र को दिए गए योगदान पर भी चर्चा करनी होगी। क्रांतिकारी आन्दोलन की असफलता के कारण क्रांतिकारी आंदोलन भारत को अँग्रेजी शासन से मुक्त करवाने के उद्देश्य से आरम्भ किया गया था परन्तु यह आंदोलन अँग्रेजों से […] - [गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-one/): गांधीजी का प्रारम्भिक जीवन गुजरात के पोरबन्दर, राजकोट और बांकानेर राज्यों में बीता जहाँ गांधीजी के पिता करमचंद दीवान रहे। गांधी के जीवन पर उनकी माता पुतली बाई का काफी प्रभाव पड़ा। बीसवीं सदी में भारत की राजनीति में गांधी का पदार्पण, बीसवीं शताब्दी की प्रमुख घटनाओं में से एक है। उन्होंने कांग्रेस के चरित्र […] - [असहयोग आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-two/): कांग्रेस अधिवेशन में असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिये जाने के बाद रवीन्द्रनाथ ठाकुर आदि ख्याति प्राप्त लोगों ने तथा जन साधारण ने सरकारी उपाधियाँ लौटा दीं। असहयोग आन्दोलन से पहले की घटनाएँ प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार को पूरा सहयोग दिया था और गोरी सरकार ने युद्ध समाप्ति के […] - [असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-three/): असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति में गांधीजी ने कुछ और प्रयोग किए किंतु अहयोग आंदोलन की तरह वे सभी प्रयोग निष्फल सिद्ध हुए। गांधीजी ने जनता से जो वायदे किए, उन्हें वे पूरा नहीं कर सके। असहयोग आन्दोलन के बाद की राजनीति भारत में 1920 ई. में असहयोग आंदोलन आरम्भ हुआ जो लगभग विफल […] - [सविनय अवज्ञा आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-four/): सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित था। इस आंदोलन के माध्यम से गांधीजी ने भारतीयों से आह्वान किया कि वे ब्रिटिश सरकार के आदेशों का पालन नहीं करें ताकि अंग्रेज सरकार भारतीयों को शासन के अधिकार सौंप दें। सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण गांधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा आरम्भ किये […] - [गोलमेज सम्मेलन](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-five/): ब्रिटिश सरकार ने भारत के ब्रिटिश प्रांतों एवं देशी राज्यों को मिलाकर एक संघ बनाने के उद्देश्य से तीन गोलमेज सम्मेलन किए किंतु गोलमेज सम्मेलनों में गांधीजी की कोई विशेष भूमिका नहीं रही। प्रथम गोलमेज सम्मेलन लॉर्ड इरविन की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में ई.1930 में ब्रिटिश सरकार ने लन्दन में पहला गोलमेज सम्मेलन बुलाया। 12 […] - [द्वितीय विश्वयुद्ध](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-six/): ईस्वी 1939 से 1945 तक की अवधि में द्वितीय विश्वयुद्ध लड़ा गया। चूंकि उस काल में भारत ब्रिटिश साम्राज्य का अंग था, इसलिए भारत की सेनाओं ने भी इस युद्ध में भाग लिया। गांधीजी के आह्वान पर भारतीय युवक ब़ड़ी संख्या में सेना में भर्ती होकर द्वितीय विश्वयुद्ध के मोर्चों पर लड़ने के लिए गए। […] - [भारत छोड़ो आन्दोलन (1942 ई.)](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-indian-politics-part-seven/): क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद कांग्रेस ने भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ किया। चूंकि यह आंदोलन अगस्त माह में आरम्भ हुआ था, इसलिये इस आन्दोलन को अगस्त क्रांति भी कहा जाता है। भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण कांग्रेस द्वारा ईस्वी 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ करने के कई कारण थे- (1.) क्रिप्स मिशन की […] - [कांग्रेस समाजवादी दल](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-one/): कांग्रेस समाजवादी दल ने 21 अक्टूबर 1934 को बम्बई में आयोजित प्रथम अधिवेशन में पार्टी का लक्ष्य, भारत के लिए पूर्ण स्वाधीनता की प्राप्ति और समाजवादी समाज की स्थापना करना घोषित किया गया। कांग्रेस के युवा नेताओं में गांधीजी की नीतियों के विरुद्ध निरंतर असंतोष सुलग रहा था जो हर आंदोलन के बाद बढ़ जाता […] - [भारत में साम्यवाद का उदय एवं विकास](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-two/): भारत में साम्यवाद का उदय रूस की समाजवादी क्रान्ति से प्रेरित थी। साम्यवाद से प्रेरित युवकों को लगता था कि जिस प्रकार रूस में जार का शासन उखाड़ कर फैंक दिया गया है, उसी प्रकार भारत में साम्यवाद के बल पर साम्राज्यवादी अंग्रेजों का शासन समाप्त किया जा सकता है। भारत में साम्यवाद का उदय […] - [भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-three/): भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना का उद्देश्य, सम्पूर्ण स्वराज्य को प्राप्त करना और एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जिसमें उत्पादन और धन के वितरण पर सामूहिक स्वामित्व हो। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कानपुर षड़यन्त्र केस के कुछ दिनों बाद ही संयुक्त प्रांत में सक्रिय साम्यवादी समूह के नेता सत्यभक्त ने 1 सितम्बर 1924 […] - [फॉरवर्ड ब्लॉक एवं अन्य कम्युनिस्ट पार्टियाँ](https://bharatkaitihas.com/radical-left-movement-part-four/): नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने ई.1939 में कांग्रेस के अन्दर ही फॉरवर्ड ब्लॉक नामक प्रगतिशील पार्टी की स्थापना की जिसके झण्डे के नीचे समस्त वामपंथी तत्त्व एकत्र हो सकें। कांग्रेस के दक्षिण पंथी नेताओं ने इस पार्टी की स्थापना का विरोध नहीं किया। फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की पृष्ठभूमि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का झुकाव आरम्भ से […] - [श्रमिक वर्ग में असंतोष](https://bharatkaitihas.com/labor-movements-in-india-part-one/): औद्योगिक श्रमिक वर्ग में असंतोष ब्रिटिश साम्राज्यवादी शासकों द्वारा लम्बे समय तक किए गए शोषण के विरोध में उत्पन्न हुआ था। श्रमिक वर्ग में असंतोष के कारण हड़तालों की शुरुआत हुई। भारत में 1835 ई. तक चाय बागान श्रमिक अस्तित्व में आ चुके थे फिर भी यह माना जा सकता है कि भारत में औद्योगिक […] - [ट्रेड यूनियनवाद का उदय](https://bharatkaitihas.com/labor-movement-in-india-part-two/): जब भारत में औद्योगिकीकरण के कारण श्रमिक वर्ग की संख्या में वृद्वि हुई और श्रमिक असंतोष बढ़ा, तब ट्रेड यूनियनवाद का उदय हुआ। ट्रेड यूनियनवाद का उदय बीसवीं सदी के दूसरे दशक में राष्ट्रव्यापी हड़तालों की पृष्ठभूमि में भारत का ट्रेड यूनियन आन्दोलन उत्पन्न हुआ। लगभग समस्त बड़े उद्योगों तथा औद्योगिक केन्द्रों में अधिकतर ट्रेड […] - [भारत सरकार अधिनियम 1919](https://bharatkaitihas.com/government-of-india-act-niniteen-hundred-ninteen/): मांटेग्यू-चैम्सफोर्ड रिपोर्ट के आधार पर 1919 ई. में ब्रिटिश संसद में एक विधेयक पारित किया गया। इसे मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम अथवा भारत सरकार अधिनियम 1919 कहते हैं। मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट से असंतोष  भारत की गोरी सरकार का 1909 ई. का अधिनियम मार्ले-मिण्टो सुधार एक्ट कहलाता है। यह कांग्रेस की 1907 ई. की सूरत फूट का […] - [वैदिक सभ्यता का प्रसार MCQ :  40 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq-40-%e0%a4%ae/): वैदिक सभ्यता का प्रसार MCQ :  40 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न । यहाँ “वैदिक सभ्यता का प्रसार” विषय पर प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण 40 बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में प्रस्तुत हैं। प्रत्येक प्रश्न में सही उत्तर के सामने हरे टिक (✅) का चिह्न है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री वैदिक सभ्यता का प्रसार - [ऋग्वैदिक सभ्यता MCQ - 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%8b%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-mcq-50-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a5%82/): ऋग्वैदिक सभ्यता MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न। यहाँ ऋग्वैदिक सभ्यता विषय के मुख्य बिंदुओं से 50 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मूल अध्ययन सामग्री ऋग्वैदिक सभ्यता - [उत्तर-वैदिक सभ्यता MCQ - 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-mcq-50-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d/): उत्तर-वैदिक सभ्यता MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न। यहाँ उत्तर-वैदिक सभ्यता विषय के मुख्य बिंदुओं से 40 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। 1. उत्तर-वैदिक सभ्यता का समयकाल कौन सा है? a 1200–1000 ई.पू. b 1500–1200 ई.पू. c 1000–600 ई.पू. […] - [जनपद राज्य और प्रथम मगधीय साम्राज्य MCQ – 50 बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%aa%e0%a4%a6-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%af/): जनपद राज्य और प्रथम मगधीय साम्राज्य MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न। यहाँ जनपद राज्य और प्रथम मगधीय साम्राज्य विषय के मुख्य बिंदुओं से 50 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मूल पाठ्य सामग्री जनपद राज्य और […] - [पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क MCQ - 50 बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8/): यहाँ पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क MCQ – 50 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं जो “पश्चिमी देशों से भारत का सम्पर्क” मुख्य लेख से लिए गए हैं। हर प्रश्न के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं। सही उत्तर के सामने हरे रंग का टिक चिह्न ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मूल […] - [चंद्रगुप्त मौर्य MCQ – 80 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq-80-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5/): चंद्रगुप्त मौर्य MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न। यहाँ चंद्रगुप्त मौर्य पर 80 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। a चंद्रगुप्त मौर्य ✅b अशोक मौर्यc बिन्दुसारd पुष्यमित्र शुंग a चाणक्य ✅b विष्णुगुप्तc पाणिनीd मेगस्थनीज a सिकंदरb सैल्यूकस निकेटर ✅c प्लेटोd […] - [अशोक महान MCQ 50 बहुविकल्पी प्रश्न - सम्पूर्ण टेस्ट](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-50-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%aa/): अशोक महान MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न। यहाँ अशोक महान पर 50 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। अशोक महान् मौर्य वंश के सबसे महान सम्राटों में से एक थे। कलिंग युद्ध के पश्चात उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया और […] - [मौर्य कालीन भारत MCQ - 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-50-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a5%82/): मौर्य कालीन भारत MCQ – 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न पोस्ट में 80 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। ये प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मौर्य कालीन भारत - [शुंग एवं कण्व MCQ - 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-50-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d/): शुंग एवं कण्व MCQ में शुंग वंश एवं कण्व वंश से संबंधित 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं। ये प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। सही विकल्प के सामने हरा टिकमार्क ✅ लगा हुआ है। 2. पुष्यमित्र शुंग किसका सेनापति था?a) वसुदेव कण्वb) वृहद्रथ मौर्य ✅c) देवभूतिd) अग्निमित्र 3. […] - [सातवाहन वंश MCQ - 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-50-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%ac/): सातवाहन वंश MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सातवाहन वंश शासकों के इतिहास पर 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री सातवाहन अथवा आन्ध्र वंश - [यूनानी शक पह्लव MCQ: 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%b5-mcq/): यहाँ प्रमुख विषय-वस्तु “भारत के विदेशी शासक – यूनानी, शक, पह्लव” के इतिहास पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में दिए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं (a, b, c, d), सही उत्तर के बाद एक हरा टिक (✅) है, और हर प्रश्न के बीच स्पष्ट अंतर है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य […] - [कुषाण वंश MCQ : उत्तर सहित 50 बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-mcq-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4-50-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b5/): कुषाण वंश MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कुषाण शासकों के इतिहास पर 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. कुषाण वंश किस जाति की शाखा से सम्बंधित था?a कानी-सांगb यू-ची ✅c हूँग-नूd शक 2. यू-ची लोग प्रारंभ […] - [गुप्त वंश MCQ : 20 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-mcq/): गुप्त वंश MCQ इस पृष्ठ पर गुप्त वंश पर 20 महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं। इन प्रश्नों से सम्बन्धित मूल पाठ इसी वैबसाइट पर गुप्त वंश नामक अध्याय में पढ़ा जा सकता है। ✅मार्क वाला ऑप्शन सही उत्तर है। प्रश्न 1: गुप्त वंश की स्थापना किसने की थी?a) चंद्रगुप्त प्रथमb) श्रीगुप्त ✅c) समुद्रगुप्तd) घटोत्कच गुप्त […] - [प्रारम्भिक गुप्त शासक MCQ : 10 बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95-mcq/): प्रारम्भिक गुप्त शासक MCQ : 10 बहुविकल्पीय प्रश्न। इस पृष्ठ पर प्रारंभिक गुप्त शासकों पर 10 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सम्बन्धित मूल पाठ इसी वैबसाइट के प्राचीन भारत के प्रारम्भिक गुप्त शासक नामक अध्याय में पढ़ा जा सकता है। ✅मार्क वाला ऑप्शन सही उत्तर है। प्रारम्भिक गुप्त शासकों में से अब तक तीन गुप्त […] - [काच गुप्त MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-mcq/): काच गुप्त MCQ : यहाँ “काच गुप्त” के इतिहास पर केंद्रित 15 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी प्रश्न “काच” के महत्वपूर्ण इतिहास पर आधारित हैं—हर सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स (✅) है। ​-डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [समुद्रगुप्त MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-mcq/): समुद्रगुप्त MCQ : यहाँ “समुद्रगुप्त” के इतिहास के मुख्य तथ्यों पर आधारित 70 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी प्रश्न “समुद्रगुप्त” के प्रमुख तथ्यों पर आधारित हैं— हर सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स (✅) है। ​-डॉ. […] - [रामगुप्त MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-mcq/): रामगुप्त MCQ : यहाँ “रामगुप्त” विषय पर केंद्रित 15 महत्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी प्रश्न “रामगुप्त” के इतिहास पर आधारित हैं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हैं। सभी के सही विकल्प के अंत में हरा टिक […] - [चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d/): चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य” के इतिहास पर आधारित 75 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) दिए जा रहे हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी MCQ “चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य” के इतिहास पर आधारित हैं, और हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स […] - [गोविंद गुप्त बालादित्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): गोविंद गुप्त बालादित्य MCQ : यहाँ “गोविंद गुप्त बालादित्य” के इतिहास पर आधारित 15 महत्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए गए हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी प्रश्न “गोविंद गुप्त बालादित्य” के महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) […] - [कुमार गुप्त प्रथम MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae-mcq/): कुमार गुप्त प्रथम MCQ : यहाँ “कुमार गुप्त प्रथम” के इतिहास पर आधारित 40 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए जा रहे हैं। हर प्रश्न के सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी MCQ “कुमार गुप्त प्रथम” के इतिहास के प्रमुख तथ्यों पर आधारित हैं, हर सही विकल्प के अंत […] - [स्कन्दगुप्त MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-mcq/): स्कन्दगुप्त MCQ : यहाँ “स्कन्दगुप्त” के इतिहास पर आधारित 60 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी MCQ “स्कन्दगुप्त” के पूरे चैप्टर के मुख्य तथ्यों पर आधारित हैं और हर सही उत्तर के अंत में हरे टिक बॉक्स (✅) है। […] - [गुप्त साम्राज्य का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): गुप्त साम्राज्य का पतन MCQ : यहाँ “गुप्त साम्राज्य का पतन” विषय पर आधारित 60 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। सभी के सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स (✅) हैं। ये सभी प्रश्न “गुप्त साम्राज्य का पतन” के ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं, हर सही विकल्प के अंत में […] - [गुप्तकालीन शासन व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): गुप्तकालीन शासन व्यवस्था MCQ : यहाँ “गुप्त कालीन शासन व्यवस्था” के इतिहास पर आधारित 60 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। सभी के सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स (✅) हैं। ये सभी प्रश्न “गुप्त कालीन शासन व्यवस्था” के महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं, सही विकल्प के अंत में हरे […] - [भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95/): भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल MCQ : यहाँ “भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल” विषय पर आधारित 60 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। हर प्रश्न के सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी प्रश्न “भारत का स्वर्णयुग गुप्त-काल” के प्रमुख ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं। सभी के सही विकल्प […] - [गुप्त कालीन भारत MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-mcq/): गुप्त कालीन भारत MCQ : यहाँ “गुप्त कालीन भारत” के इतिहास पर आधारित 100 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। प्रत्येक सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री गुप्त कालीन भारत ​ ​ - [हूण MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%a3-mcq/): हूण MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “हूण” विषय के मुख्य तथ्यों पर आधारित 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए जा रहे हैं। प्रत्येक के सही उत्तर के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। ये सभी MCQ “हूण” के प्रमुख विषयों और प्रभावों पर आधारित हैं, हर सही विकल्प के […] - [हर्षवर्धन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8-mcq/): हर्षवर्धन MCQ : यहाँ “हर्षवर्धन” के इतिहास पर आधारित 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए गये हैं, सभी के सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। यह सभी MCQ “हर्षवर्धन” विषय के प्रमुख तथ्यों पर आधारित हैं एवं प्रत्येक प्रश्न के सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स (✅) लगाया […] - [हर्ष की उपलब्धियाँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-mcq-2/): हर्ष की उपलब्धियाँ MCQ : यहाँ “हर्ष की उपलब्धियाँ” विषय पर 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए जा रहे हैं, प्रत्येक प्रश्न के सही उत्तर के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री हर्ष की उपलब्धियाँ सभी MCQ “हर्ष की उपलब्धियाँ” के प्रमुख तथ्यों पर आधारित हैं, और […] - [ह्वेनसांग की भारत यात्रा MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-mcq/): ह्वेनसांग की भारत यात्रा MCQ : यहाँ “ह्वेनसांग की भारत यात्रा” पर आधारित 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए गये हैं। हर प्रश्न के चार विकल्प हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। यह सभी MCQ “ह्वेनसांग की भारत यात्रा” के मुख्य तथ्यों पर आधारित हैं। प्रत्येक प्रश्न के सही […] - [पल्लव वंश MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-mcq/): पल्लव वंश MCQ : यहाँ “पल्लव वंश की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ” के मुख्य विषयों पर आधारित 60 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) दिए जा रहे हैं। हर प्रश्न के चार विकल्प हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। यह सभी MCQ “पल्लव एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियाँ” विषय के महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं। प्रत्येक […] - [चालुक्यों की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95/): चालुक्यों की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ MCQ : यहाँ “चालुक्यों की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ” विषय पर 60 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। हर प्रश्न के चार विकल्प हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) है। 1. चालुक्य वंश की शाखाएँ कितनी थीं?a दोb चारc एकd तीन ✅ 2. चालुक्य वंश की बादामी शाखा किस जगह […] - [चोल साम्राज्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): चोल साम्राज्य MCQ : यहाँ “चोल साम्राज्य” विषय पर आधारित 50 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) दिए गए हैं। सही उत्तर पर हरे बॉक्स में टिक मार्क (✅) लगाया गया है। 1. ‘चोल’ शब्द किस भाषा से लिया गया है?a संस्कृतb पालि✅ c तमिलd तेलुगु 2. चोल वंश की स्थापना किसने की थी?✅ a विजयालयb राजराजc आदित्य […] - [राजपूतों का उदय MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a4%af-mcq/): राजपूतों का उदय MCQ : यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “राजपूतों का उदय” विषय पर आधारित 50 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिंदी में दिए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं और सही उत्तर पर हरे बॉक्स वाला टिक मार्क (✅) है। 1. हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद केन्द्रीय राजनीति में कैसा […] - [प्रमुख राजपूत वंश MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-mcq/): प्रमुख राजपूत वंश MCQ : यहाँ “प्रमुख राजपूत वंश” विषय पर आधारित 60 महत्त्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) दिए जा रहे हैं। सही उत्तर पर हरे बॉक्स वाला टिक मार्क (✅) है। 1. गुर्जर-प्रतिहार वंश का उदय कहाँ हुआ था?a गुजरातb कन्नौज✅ c राजस्थानd मालवा 2. प्रतिहार वंश के संस्थापक कौन माने जाते हैं?✅ a नागभट्टb […] - [राजपूत कालीन भारत MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-mcq/): राजपूत कालीन भारत MCQ: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राजपूत कालीन भारत के इतिहास पर 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. राजपूत काल में भारत की राजनीतिक दशा कैसी थी?a राजनैतिक एकता थीb सामाजिक संगठन की कमी थी✅ c […] - [त्रिकोणीय संघर्ष MCQ : 60 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%a3%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-mcq-60-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95/): त्रिकोणीय संघर्ष MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुर्जर प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट शासकों के त्रिकोणीय संघर्ष पर 60 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. गुर्जर-प्रतिहारों का सर्वप्रथम उदय कहाँ हुआ था?a) अवंति मेंb) मण्डोर में ✅c) कन्नौज […] - [इस्लाम का उत्कर्ष MCQ : 80 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-mcq/): इस्लाम का उत्कर्ष MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 80 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. ‘इस्लाम’ शब्द किस अरबी शब्द से निकला है?a) सलीमb) सलम ✅c) सलामd) अस्लम 2. ‘इस्लाम’ शब्द का अर्थ क्या है?a) शांतिb) आज्ञा […] - [अरबवासियों का भारत आक्रमण MCQ : 80 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/): अरबवासियों का भारत आक्रमण MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 80 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. अरब प्रायद्वीप में कौन सा महासागर दक्षिण में स्थित है?a) प्रशांत महासागरb) हिन्द महासागर ✅c) अटलांटिक महासागरd) आर्कटिक महासागर 2. अरबवासी […] - [महमूद गजनवी के आक्रमण MCQ : 80 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3-mcq/): महमूद गजनवी के आक्रमण MCQ : 80 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर। यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महमूद गजनवी के भारत आक्रमणों पर 80 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। 1. महमूद गजनवी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया?a 12b 15c 17 ✅d 21 2. महमूद गजनवी का जन्म कब हुआ था?a 997 ई.b 971 ई. […] - [मुहम्मद गौरी के आक्रमण MCQ - 80 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3-mcq/): मुहम्मद गौरी के आक्रमण MCQ पोस्ट में 80 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। ये प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मुहम्मद गौरी के आक्रमण - [प्राचीन भारत का इतिहास (पाषाण काल से ई.1200) - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/history-of-ancient-india-beginning-to-twelfth-century/): इस पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक प्राचीन भारत का इतिहास की अनुक्रमणिका दी गई है।पाठक अनुक्रमणिका में दिए गए अध्यायों को क्लिक करके सीधे ही सम्बन्धित अध्याय तक पहुंच सकते हैं। यह पुस्तक भारतीय विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिये स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रमों के अनुसार लिखी गई है तथा उत्तर भारत […] - [प्राचीन भारत का इतिहास जानने के स्रोत (अध्याय 1)](https://bharatkaitihas.com/sources-to-know-the-history-of-ancient-india/): प्राचीन भारत का इतिहास जानने के स्रोत दो हैं- (1.) साहित्यक स्रोत तथा (2.) पुरातात्विक स्रोत। इन दो स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ही भारत का प्राचीन इतिहास लिखा गया है। इतिहासकारों को प्राचीन भारत का इतिहास जानने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है क्योंकि इस काल का कोई ऐसा ग्रन्थ […] - [पाषाण-कालीन सभ्यता एवं संस्कृति (अध्याय 2)](https://bharatkaitihas.com/stone-age-civilization-and-culture/): धरती पर जहाँ-जहाँ पाषाण-कालीन सभ्यता एवं संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं, वहाँ-वहाँ से इतिहास लेखन को विश्वसनीय सामग्री प्राप्त हो सकी है। इसलिए इस काल की सभ्यता एवं संस्कृति के अवशेषों का अध्ययन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। प्रागैतिहासिक कालखण्ड के इतिहास जानने के स्रोत इसके अतिरिक्त और कोई नहीं हो सकते। धरती का […] - [ताम्राश्म संस्कृति का उदय (अध्याय 3)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-copper-culture/): ताम्राश्म संस्कृति का अर्थ है मानव सभ्यता का वह चरण जिसमें दैनिक उपयोग की वस्तुओं एवं औजारों के निर्माण के लिए ताम्बे एवं पत्थर दोनों का प्रचुरता से उपयोग हो रहा था। जब पाषाण युगीन मानव ने ताम्बे की खोज की तब वह अचानक ही ताम्राश्म संस्कृति में प्रविष्ट हो गया। धातु काल पाषाण-काल के […] - [हड़प्पा सभ्यता (अध्याय 4)](https://bharatkaitihas.com/harappan-civilization/): इस अध्याय में हड़प्पा सभ्यता की शुरुआत, उसकी प्रमुख विशेषताएं, नगर नियोजन तथा पतन आदि का इतिहास लिखा गया है। हड़प्पा सभ्यता को सिंधुघाटी सभ्यता भी कहा जाता है। सिन्धु-घाटी सिन्धु नदी हिमालय पर्वत से निकलकर पंजाब तथा सिन्धु प्रदेश (अब पाकिस्तान में) से होती हुई अरब सागर में जाकर मिलती है। इस नदी के […] - [भारत में लौह युगीन संस्कृति (अध्याय 5)](https://bharatkaitihas.com/iron-age-culture-in-india/): भारत में लौह युगीन संस्कृति ताम्र-कांस्य काल की संस्कृति के काफी बाद प्रकट हुई। चूंकि धातु के रूप में सबसे पहले ताम्बा खोजा गया और उसके बाद कांस्य की खोज हुई एवं अंत में लोहे की खोज हुई इसलिए धरती भर पर लौह युगीन संस्कृतियां काफी समय बाद ही प्रकट हो सकीं। कुछ बस्तियां पाषाण […] - [महा-पाषाण संस्कृति (अध्याय 6)](https://bharatkaitihas.com/megalithic-culture-in-south-india/): भारत के विभिन्न स्थानों से महा-पाषाण संस्कृति के महापाषाणीय शवाधान (मेगालिथस्) प्राप्त हुए हैं। महा-पाषाण संस्कृति के लोग अपने मृतकों को समाधियों में गाड़ते थे तथा उनकी सुरक्षा के लिये बड़े-बड़े पाषाणों का प्रयोग करते थे। इस कारण इन्हें वृहत्पाषाण अथवा महापाषाण कहा गया है। इन शवाधानों की खुदाइयों में लोहे के औजार, हथियार तथा […] - [वैदिक सभ्यता का प्रसार (अध्याय 7)](https://bharatkaitihas.com/spread-of-vedic-civilization-in-india/): इस अध्याय में वैदिक राजन्य तथा उनकी अर्थव्यवस्था के विशेष संदर्भ में वैदिक सभ्यता का प्रसार विषय पर पाठ्य-सामग्री प्रस्तुत की गई है। वैदिक सभ्यता का प्रसार आर्य जाति के द्वारा किया गया। यह सभ्यता बहुत विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी। वैदिक सभ्यता का प्रसार भारत के पश्चिम में वर्तमान अफगानिस्तान से लेकर पूर्व […] - [ऋग्वैदिक सभ्यता (अध्याय 8)](https://bharatkaitihas.com/rigvedic-period-civilization/): वैदिक सभ्यता उस काल की सभ्यता को कहते हैं जिसमें आर्यों ने वैदिक ग्रंथों की रचना की। ऋग्वैदिक सभ्यता उस सभ्यता को कहते हैं जिसमें आर्यों ने ऋग्वेद के मंत्रों की रचना की। इस काल में आर्य प्राकृतिक शक्तियों से अत्यंत प्रभावित थे और प्रत्येक प्राकृतिक शक्ति में मानवीय गुणों का अधिरोपण करके उनकी स्तुतियां […] - [उत्तर-वैदिक सभ्यता (अध्याय 9)](https://bharatkaitihas.com/post-vedic-civilization/): ऋग्वेद के बाद यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण ग्रंथों एवं सूत्र ग्रन्थों की रचना हुई। ऋग्वेद के बाद में लिखे गये, इन ग्रन्थों के रचना काल को उत्तर-वैदिक काल कहते हैं। इस काल की सभ्यता उत्तर-वैदिक सभ्यता कहलाती है। उत्तर वैदिक कालीन ग्रंथ, उत्तरी गंगा की घाटी में लगभग 1000-600 ई.पू. में रचे गए थे। ऋग्वैदिक […] - [आधुनिक भारत का इतिहास - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/index-of-history-of-modern-india-by-dr-mohanlal-gupta/): आधुनिक भारत का इतिहास प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। इतिहास के इस कालखण्ड में भारत ने अपनी आजादी की लड़ाई लड़ी एवं स्वतंत्रता प्राप्त करके स्वयं को सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न राष्ट्र घोषित किया। - [यूरोपीय जातियों का आगमन](https://bharatkaitihas.com/arrival-of-europeans-in-india/): जिस समय भारत में यूरोपीय जातियों का आगमन हुआ उस समय देश में मुगलों का शासन था। इस कारण यूरोपीय जातियों को न केवल स्थानीय शासकों से अपितु मुगलों से भी कृपा प्राप्त करनी आवश्यक थी। भारत में यूरोपीय जातियाँ ईस पूर्व की शताब्दियों से आ रही थीं। सिकंदर के भारत में आने (523 ई.पू.) […] - [अँग्रेजों का भारत आगमन](https://bharatkaitihas.com/political-situation-of-india-at-arrival-of-british-first-part/): अँग्रेजों का भारत आगमन ई.1608 में हुआ। वे भारत में समुद्री मार्ग से आये तथा उनका उद्देश्य भारत से मसाला व्यापार करना था। अँग्रेज भारत में समुद्री मार्ग से 1608 ई. में आये। उस समय भारत में मुगल बादशाह जहाँगीर का शासन था। मुगलों की केन्द्रीय सत्ता अत्यंत प्रबल थी। दक्षिण भारत के राज्य मुगलों […] - [क्षेत्रीय राज्यों का उदय](https://bharatkaitihas.com/political-situation-of-india-at-arrival-of-british-second-part/): जब अठारहवीं शताब्दी ईस्वी के आरम्भ में मुगलों की सत्ता कमजोर पड़ने लगी तो भारत के दूरस्थ क्षेत्रों में क्षेत्रीय राज्यों का उदय होने लगा। उसी काल में भारत में यूरोपियन जातियों का आगमन हुआ। मुगलों की कमजोरी का लाभ उठाते हुए राजपूतों, सिक्खों, मराठों तथा मुगल अमीरों ने अपने-अपने राज्यों की स्थापना करने एवं […] - [मराठा शक्ति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अँग्रेजों के आगमन के समय मुगल सत्ता अंतिम सांसें ले रही थी तथा भारत की राजनीतिक स्थिति में मराठा शक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी। मराठा शासक (छत्रपति) मराठा शक्ति की स्थापना छत्रपति शिवाजी ने की थी जिनका इतिहास हम मध्यकालीन भारत का इतिहास में पढ़ चुके हैं। शिवाजी के काल में भी अंग्रेज और […] - [पानीपत का तीसरा युद्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): पानीपत का तीसरा युद्ध अफगान आक्रांता अहमदशाह अब्दाली एवं पेशवा बालाजी बाजीराव की सेनाओं के बीच हुआ। इस युद्ध में मराठा शक्ति प्रमुख भूमिका में थी किंतु रणनीतिक कमजोरियों के कारण मराठे युद्ध हार गए। अहमदशाह अब्दाली द्वारा मराठों की दुर्दशा किये जाने से पेशवा बालाजी बाजीराव को अत्यधिक दुःख हुआ। उसने अपने चचेरे भाई […] - [अँग्रेजों और फ्रांसीसियों की प्रतिस्पर्धा](https://bharatkaitihas.com/competition-of-english-and-french-companies-in-india/): अंग्रेज और फ्रांसीसी भारत में व्यापार करने के लिए आए थे किंतु शीघ्र ही व्यापार पर एकाधिकार को लेकर अँग्रेजों और फ्रांसीसियों की प्रतिस्पर्धा आरम्भ हो गई। ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा फ्रैंच ईस्ट इण्डिया कम्पनी, भारत में व्यापारिक गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ स्थानीय राज्यों की आंतरिक राजनीति में किसी न किसी पक्ष की […] - [भारत की आर्थिक स्थिति](https://bharatkaitihas.com/economic-situation-of-india-at-arrival-of-british/): अँग्रेजों के आगमन के समय भारत की आर्थिक स्थिति अधिक अच्छी नहीं थी। औरंगजेब की कट्टर मजहबी नीतियों के कारण भारत में हर समय युद्ध चलते रहने से खेतियां और उद्योग धंधे उजड़ गए। मुगल सेनाएं देश के जिस हिस्से में जाती थीं, किसानों की फसलें लूट लेती थीं या उनमें आग लगा देती थीं। […] - [मध्यकालीन भारत का इतिहास - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8/): मध्यकालीन भारत का इतिहास – अनुक्रमणिका पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक की अनुक्रमणिका दी गई है। नीचे दिए गए अध्यायों पर क्लिक करके उन उध्यायों तक सीधे ही पहुंचा जा सकता है। डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित यह पुस्तक अमेजन पर ईबुक तथ प्रिण्टेड बुक के रूप में भी उपलब्ध है। मध्यकालीन […] - [भूमिका - मध्यकालीन भारत का इतिहास](https://bharatkaitihas.com/preface-of-madhyakaleen-bharat-ka-itihas/): भूमिका – मध्यकालीन भारत का इतिहास पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक मध्यकालीन भारत का इतिहास की विषय-वस्तु स्पष्ट की गई है। अध्ययन की सुविधा के लिए भारत के इतिहास को दो भागों में विभक्त किया जाता है- (1.) पुरा ऐतिहासिक काल, (2.) ऐतिहासिक काल। पुरा ऐतिहासिक काल में पाषाणीय मानव बस्तियों के […] - [दिल्ली सल्तनत कालीन इतिहास के स्रोत](https://bharatkaitihas.com/important-sources-of-medieval-indian-history-first-part/): दिल्ली सल्तनत कालीन इतिहास के स्रोत समकालीन ग्रंथों, भवनों, मकबरों, शिलालेखों आदि के रूप में बहुतायत से मिलते हैं। बहुत से विदेशी यात्रियों ने भी दिल्ली सल्तनत कालीन ऐतिहासिक घटनाओं को लिखा है। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत मध्यकालीन भारतीय इतिहास के प्रमुख स्रोत उस काल में रचे गये अरबी-फारसी एवं विभिन्न भाषाओं के ग्रंथ […] - [मुगलकालीन इतिहास के स्रोत](https://bharatkaitihas.com/important-sources-of-medieval-indian-history-second-part/): मुगलकालीन इतिहास के स्रोत फारसी, तुर्की और अरबी भाषा में हैं। क्षेत्रीय भाषाओं की ऐतिहासिक रचनाओं से भी पर्याप्त जानकारी मिलती है। पुर्तगाली, अंग्रेजी और फ्रांसीसी आदि विदेशी व्यापारियों के पत्रों तथा उनकी कम्पनियों के अभिलेखों से भी मुगलकालीन सूचनाएँ मिलती हैं। लिखित साहित्य के साथ-साथ मुगल शासकों के सिक्कों तथा स्मारकों से भी महत्त्वपूर्ण […] - [गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक](https://bharatkaitihas.com/rise-of-slave-dynasty-in-india/): गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक बचपन में ही गुलाम के रूप में बेच दिया गया था। इसलिये उसकी सामाजिक हैसियत अच्छी नहीं थी किंतु मुहम्मद गौरी को प्रसन्न करके उसने अमीर का पद प्राप्त कर लिया। गुलाम वंश की स्थापना गजनी के सुल्तान मुहम्मद गौरी ने 1175 ई. से 1194 ई. तक भारत पर […] - [सुल्तान इल्तुतमिश - दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक](https://bharatkaitihas.com/de-facto-founder-of-delhi-sultan-iltutmish/): कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की नींव रखी अवश्य थी किंतु भारत में दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक सुल्तान इल्तुतमिश ही था। इल्तुतमिश का प्रारम्भिक जीवन इल्तुतमिश का पिता आलम खाँ तुर्कों के इल्बरी कबीले का एक प्रधान व्यक्ति था। इल्तुतमिश बाल्यकाल से प्रतिभाशाली तथा रूपवान था इस कारण उसे अपने पिता की विशेष कृपा […] - [इल्तुतमिश के वंशज](https://bharatkaitihas.com/iltutmishs-descendants-ruled-delhi/): इल्तुतमिश के वंशज इतने योग्य नहीं निकले कि वे अपने पिता के द्वारा खड़े किए एक विशाल मुस्लिम राज्य को संभाल सकें। वे आपस में ही एक दूसरे को समाप्त करने लगे। रुकुनुद्दीन फीरोजशाह तुर्क शासकों में उत्तराधिकार के नियम निश्चित नहीं थे। सुल्तान के मरते ही सल्तनत के ताकतवर अमीरों में संघर्ष होता था […] - [सुल्तान गयासुद्दीन बलबन](https://bharatkaitihas.com/the-climax-of-ghulam-dynasty-and-gaya-suddin-balban/): सुल्तान गयासुद्दीन बलबन गुलाम वंश का सबसे शक्तिशाली सुल्तान था। उसने अपना जीवन तुच्छ गुलाम के रूप में आरम्भ किया था किंतु अपनी योग्यता के बल पर सुल्तान के महत्वपूर्ण पद तक जा पहुंचा था। सुल्तान गयासुद्दीन बलबन सुल्तान गयासुद्दीन बलबन का प्रारंभिक जीवन गयासुद्दीन बलबन का जन्म भी इल्तुतमिश की भांति तुर्कों के इल्बरी […] - [गुलाम वंश का पतन](https://bharatkaitihas.com/fall-of-slave-dynasty/): बलबन की मृत्यु के साथ ही गुलाम वंश का पतन आरम्भ हो गया। बलबन के उत्तराधिकारियों में कोई भी योग्य शहजादा जीवित नहीं बचा था। बलबन का बड़ा पुत्र मर चुका था और दूसरा पुत्र अपने पिता के कठोर स्वभाव से आतंकित था। बलबन के उत्तराधिकारी कैकुबाद (1287-1290) शहजादे मुहम्मद की मृत्यु के बाद बलबन […] - [सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी - खिलजी वंश का संस्थापक](https://bharatkaitihas.com/founder-of-khilji-dynasty-jalaluddin-khilji/): सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी खिलजी वंश का संस्थापक था। उसने अपने पूर्ववर्ती शिशु सुल्तान क्यूमर्स की हत्या करके दिल्ली सल्तनत पर अधिकार किया। खिलजी वंश कैकूबाद के तुर्की अमीरों ने सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी को मारने का षड़यंत्र इसलिये रचा था क्योंकि वह जलालुद्दीन खिलजी तुर्क नहीं था। तत्कालीन इतिहासकारों निजामुद्दीन अहमद, बदायूंनी तथा फरिश्ता ने खिलजियों […] - [अलाउद्दीन खिलजी - खिलजी वंश का चरमोत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/climax-of-khilji-dynasty-and-alauddin-khilji-first-part/): जब अलाउद्दीन खिलजी को सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी के परिवार में फूट पड़ने के समाचार मिले तो अलाउद्दीन ने दिल्ली जाने का निर्णय किया। उसने मार्ग में नये सैनिकों की भी भर्ती की। जब वह दिल्ली पहुँचा तो उसके पास 56 हजार घुड़सवार तथा 70 हजार पैदल सिपाही थे। अलाउद्दीन खिलजी का प्रारम्भिक जीवन अलाउद्दीन खिलजी […] - [अलाउद्दीन खिलजी : साम्राज्य विस्तार](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c/): अलाउद्दीन खिलजी: साम्राज्य विस्तार की दृष्टि से मुस्लिम इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य को केवल उत्तर भारत तक सीमित न रखकर दक्षिण भारत में भी बढ़ा लिया। उत्तरी भारत की विजय (1299-1305 ई.) लक्ष्य निश्चित कर लेने के उपरान्त अलाउद्दीन ने साम्राज्य विस्तार का कार्य आरम्भ किया। सर्वप्रथम […] - [अलाउद्दीन की सुधार योजनाएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be/): अलाउद्दीन की सुधार योजनाएँ दिल्ली सल्तनत के इतिहास में विशेष महत्व रखती हैं। उसने अपने राज्य पर कड़ाई से नियंत्रण स्थापित करने के लिए ये सुधार किए। अलाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान के विरुद्ध होने वाले विद्रोहों के कारण का अनुमान लगा लेने के उपरान्त उन कारणों को दूर करने का निश्चय किया। अमीरों के आचरण […] - [अलाउद्दीन के विरुद्ध विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6/): अलाउद्दीन ने कठोरता से शासन किया तथा अपने राज्य का लगातार विस्तार किया। इस कारण बहुत से लोग उससे नाराज हो गए तथा अल्लाउद्दीन के विरुद्ध विद्रोह लगातार होते रहे। तुर्की अमीर तो विद्रोही प्रकृति के थे ही, गैर तुर्की अमीर भी कुछ कम नहीं थे। वे सब सुल्तान को अपने-अपने गुट के वश में […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी : मंगोल नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b2/): अल्लाउद्दीन खिलजी : मंगोल नीति अलाउद्दीन खिलजी 1296 ई. में दिल्ली के तख्त पर बैठा था। उसके तख्त पर बैठने से पहले भी मंगोल कई बार भारत पर आक्रमण कर चुके थे। यहाँ तक कि जलालुद्दीन खिलजी मंगोलों को दिल्ली के बाहर मंगोलपुरी बसाकर रहने की अनुमति दे चुका था। मंगोलों के आक्रमण अलाउद्दीन खिलजी […] - [अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d/): अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियाँ उसकी सुधार योजनाओं का परिणाम थीं। ये उपलब्धियाँ सीमित कालखण्ड के लिए ही अर्जित की जा सकी थीं। अलाउद्दीन के मरते ही उसकी समस्त उपलब्धियाँ काल के गाल में समा गईं। अलाउद्दीन खिलजी के शासन में 1312 ई. से 1316 ई. तक का काल प्रतिक्रिया का काल माना जाता है। 1312 […] - [खिलजी वंश का पतन](https://bharatkaitihas.com/fall-of-khilji-dynasty/): अलाउद्दीन खिलजी के उत्तराधिकारी उमर खिलजी, मुबारक खिलजी, तथा नासिरूद्दीन खुसरो शाह अयोग्य निकले। इस कारण इन शासकों के काल में खिलजी वंश का पतन हो गया। अलाउद्दीन खिलजी के उत्तराधिकारी 1316 ई. में अलाउद्दीन की मृत्यु हो गई। इस समय उसकी बेगम मलिका-ए-जहाँ तथा पुत्र खिज्र खाँ कारागृह में बन्द थे। सेना पर मलिक […] - [तैमूरलंग का भारत आक्रमण एवं उसके प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/timur-lungs-invasion-on-india-and-its-effects/): तैमूरलंग का भारत आक्रमण भारत के मध्यकालीन इतिहास की सबसे घृणित घटनाओं में से एक है। इस आक्रमण में लाखों निर्दोष हिन्दुओं को अपने प्राण गंवाने पड़े। तैमूरलंग प्रारंभिक जीवन तैमूरलंग का जन्म 1336 ई. में समरकंद से 50 मील दूर मावरा उन्नहर के कैच नामक नामक नगर में हुआ था। उसके पिता का नाम […] - [तुगलक वंश का संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक](https://bharatkaitihas.com/ounder-of-tughlaq-dynasty-gaya-suddin-tughlaq/): तुगलक वंश का संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक दिल्ली सल्तनत से खिलजियों का शासन समाप्त करने में सफल रहा उसका वास्तविक नाम गाजी तुगलक था। तुगलक कौन थे? तुगलकों के सम्बन्ध में प्रारंभिक जानकारी फरिश्ता तथा इब्नबतूता के विवरणों से मिलती है। उन दोनों के अनुसार तुगलक, तुर्क थे। फरिश्ता के अनुसार तुगलक भारत में बलबन के […] - [मुहम्मद तुगलक की योजनाएँ](https://bharatkaitihas.com/climax-of-tughlaq-dynasty-and-muhammad-bin-tughluq-first-part/): मुहम्मद तुगलक की योजनाएँ इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि वह एक बुद्धिमान शासक था किंतु इन योजनाओं की विफलताओं के कारण उसे पागल सुल्तान कहा गया। मुहम्मद बिन तुगलक प्रारंभिक जीवन मुहम्मद बिन तुगलक के बचपन का नाम फखरुद्दीन मुहम्मद जूना खाँ था। वह अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा, सर्वाधिक महत्वाकांक्षी […] - [मुहम्मद तुगलक का शासन एवं विफलताएँ](https://bharatkaitihas.com/climax-of-tughlaq-dynasty-and-muhammad-bin-tughluq-second-part/): इतिहासकार मुहम्मद तुगलक का शासन सही नहीं मानते! वह अपने समय के अनुसार नहीं अपितु समय से आगे शासन कर रहा था। इस कारण उसका शासन विफलताओं के लिए याद किया जाता है। मुहम्मद बिन तुगलक योग्य तथा प्रतिभावान् व्यक्ति था। उसने शासन में कई सुधार किये तथा कई नई व्यवस्थाएँ कीं। मुहम्मद तुगलक का […] - [मुहम्मद तुगलक का चरित्र](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): इतिहासकारों के लिए मुहम्मद तुगलक का चरित्र एक रहस्यमयी पहेली बन गया है। कुछ लोगों के लिए वह एक महान शासक था और कुछ इतिहासकार उसे बुरा शासक मानते हैं। मुहम्मद तुगलक का चरित्र मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल की घटनाओं तथा उसके चरित्र का समीक्षात्मक अध्ययन करने से स्पष्ट हो जाता है कि […] - [मुहम्मद तुगलक पागल था!](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%a5%e0%a4%be/): क्या मुहम्मद बिन तुगलक पागल था? कुछ इतिहासकारों ने मुहम्मद बिन तुगलक को पागल तथा झक्की बताया है। एल्फिन्सटन पहला इतिहासकार था जिसने सुल्तान में पागलपन का कुछ अंश होने का लांछन लगाया। परवर्ती यूरोपीय इतिहासकारों हैवेल, इरविन, स्मिथ तथा लेनपूल ने भी एल्फिन्स्टन के इस मत का अनुमोदन किया परन्तु आधुनिक इतिहासकार इस मत […] - [सुल्तान फीरोजशाह तुगलक](https://bharatkaitihas.com/firoz-shah-tughlaq-first-part/): सुल्तान फीरोजशाह तुगलक ने दिल्ली के तख्त पर अपने अधिकार को पुष्ट बनाने के लिये स्वयं को खलीफा का नायब घोषित कर दिया। उसने खुतबे तथा मुद्राओं में खलीफा के नाम के साथ-साथ अपना नाम भी खुदवाया। मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु थट्टा में हुई थी। उस समय फीरोज तुगलक शाही खेमे में उपस्थित था। […] - [फीरोजशाह की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/firoz-shah-tughlaq-second-part/): फीरोजशाह की धार्मिक नीति मजहबी कट्टरता पर आधारित थी। फीरोजशाह तुगलक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। इस्लाम तथा कुरान में विश्वास होने के कारण उसने इस्लाम आधारित शासन का संचालन किया। फीरोजशाह की धार्मिक नीति फीरोजशाह की धार्मिक नीति का परिचय उसकी पुस्तक फतुहाते फिरोजशाही से मिलता है- (1.) अमीरों तथा उलेमाओं की सलाह से शासन […] - [फीरोजशाह तुगलक की शासनव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%8d/): फीरोजशाह तुगलक को युद्धों से विरक्ति थी जिसके लिए मुस्लिम इतिहासकारों ने लिखा है कि वह शांत प्रकृति का सुल्तान था। शासन सुधारों में उसकी विशेष रुचि थी। इसलिए फीरोजशाह तुगलक की शासनव्यवस्था अच्छी थी। फीरोजशाह तुगलक की शासनव्यवस्था फीरोजशाह तुगलक प्रजा के कल्याण की ओर विशेष रूप से ध्यान देता था परन्तु उलेमाओं के […] - [फीरोजशाह तुगलक का चरित्र](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): फीरोजशाह तुगलक का चरित्र एक कट्टरपंथी सुल्तान के रूप में किया जाता है जिसने केवल मुसलमानों को ही अपनी प्रजा समझा तथा हिन्दुओं को जिम्मी मानकर शासन किया। अच्छाइयों एवं बुराइयों का अद्भुत सम्मिश्रण फीरोज तुगलक में कई अच्छाईयां थीं जिनके कारण उसका शासन काल मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल की अशान्ति, अराजकता तथा […] - [फीरोजशाह का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%a8/): फीरोजशाह का मूल्यांकन उसके कार्यों से नहीं अपितु उसकी मजहबी कट्टरता से किया जा सकता है। वह इस्लाम के सिद्धांतों में अटूट विश्वास रखता था और भारत से हिन्दुओं का सफाया करना चाहता था। फीरोजशाह के कार्यों का मूल्यांकन (1.) शासक के रूप में सुन्नी प्रजा के लिये फीरोजशाह का शासन बड़ा उदार था। धार्मिक […] - [तुगलक राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/fall-of-tughlaq-dynasty/): फीरोजशाह तुगलक 80 वर्ष की आयु में मरा था। तुगलक राज्य का पतन उसके जीवन काल में ही होने लगा था। उसके प्रधानमंत्री खान-ए-जहाँ तथा शहजादे मुहम्मद ने राज्य पर अधिकार करने का प्रयत्न किया। इस पर दोनों को ही दिल्ली छोड़कर भाग जाना पड़ा था। इसलिये 80 साल का फीरोजशाह तब तक शासन करता […] - [सैयद वंश का शासन](https://bharatkaitihas.com/rule-of-syed-dynasty-in-delhi-sultanate/): तुगलक वंश के क्रूर अंत के बाद दिल्ली में सैयद वंश का शासन आरम्भ हुआ। सैयद वंश के सुल्तान नाम मात्र के लिए दिल्ली के शासक थे। उनमें शासन करने की प्रतिभा का नितांत अभाव था। सैयद वंश का शासन तुगलक वंश के अन्तिम सुल्तान महमूद की 1413 ई. में मृत्यु हो गई। इसके बाद […] - [लोदी वंश का शासन](https://bharatkaitihas.com/rule-of-lodi-dynasty-in-delhi-sultanate/): बहलोल लोदी ने लोदी वंश का शासन स्थापित किया। उसे दिल्ली का तख्त अनायास ही प्राप्त हुआ। जब सैयद शासक दिल्ली छोड़कर भाग गया तब बहलोल लोदी के लिए दिल्ली के तख्त पर बैठना बहुत आसान था। लोदी वंश लोदी अफगान थे। अफगानों को पठान भी कहा जाता है। अफगान अथवा पठान उस पर्वतीय प्रदेश […] - [दिल्ली सल्तनत का पतन और उसके कारण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): दिल्ली सल्तनत का पतन सोलहवीं शताब्दी ईस्वी के भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसके बाद भारत में मध्य एशियाई मुगलों का शासन स्थापित हुआ। 1206 ई. में दिल्ली सल्तनत का उदय हुआ था। गुलाम वंश का शासन काल दिल्ली सल्तनत की बाल्यावस्था का काल था, अलाउद्दीन खिलजी का शासन काल दिल्ली सल्तनत की […] - [प्रान्तीय राज्यों का उद्भव](https://bharatkaitihas.com/emergence-of-provincial-states/): जब तुगलक शासकों के कमजोर पड़ जाने पर दिल्ली सल्तनत बिखरने लगी तो अफगानिस्तानी कबीलों के मुखियाओं में दिल्ली सल्तनत के प्रांतों को स्वतंत्र करने की होड़ मची जिससे प्रान्तीय राज्यों का उद्भव हुआ। केन्द्रीय शक्ति का पराभव तुगलकों के पराभव तथा मुगलों के उदय के बीच के काल में भारत में अनेक प्रान्तीय राज्यों […] - [बहमनी राज्य](https://bharatkaitihas.com/bahmani-kingdom/): बहमनी राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल के अन्तिम भाग में दिल्ली साम्राज्य का विशृंखलन आरम्भ हो गया और प्रान्तीय गवर्नर स्वतंत्र होने लगे। इसी अशान्ति के बीच, दक्षिण भारत में ‘सादा अमीरों’ (विदेशी अमीरों) ने हसन कांगू के नेतृत्व में विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया और दौलताबाद में अपना स्वतंत्र […] - [विजयनगर राज्य](https://bharatkaitihas.com/vijayanagara-empire/): विजयनगर राज्य मध्यकालीन भारतीय इतिहास का सर्वाधिक महत्वपूर्ण हिन्दू राज्य था। उस काल में विजयनगर राज्य जैसा कोई अन्य विशाल हिन्दू राज्य अस्तित्व में नहीं था। विजयनगर राज्य की स्थापना विजयनगर राज्य की उत्पत्ति के सम्बन्ध में सेवेल ने सात मतों का उल्लेख किया है जिनमें से सर्वाधिक विश्वसनीय मत यह है कि इस राज्य […] - [विजयनगर की सामाजिक दशा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be/): विजयनगर की सामाजिक दशा मध्यकालीन दक्षिण भारत के समस्त राज्यों में सबसे अच्छी थी। सभी लोगों को अपने काम का चयन करने तथा अपनी परम्पराओं के अनुसार जीवन जीने की छूट थी। विजयनगर की सामाजिक दशा सामाजिक दशा विजयनगर राज्य में के समाज में हिन्दू परम्पराओं के अनुसार ब्राह्मणों का बड़ा आदर था। उन्हें प्राणदण्ड […] - [विजयनगर राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): दक्षिण भारत के शिया मुसलमान शासकों की कट्टरता के कारण विजयनगर राज्य का पतन हो गया। इन शिया राज्यों ने एक साथ मिलकर विजयनगर के हिन्दू राज्य पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर दिया। विजयनगर राज्य के पतन के कारण विजयनगर राज्य का इतिहास, पड़ौसी मुस्लिम राज्यों से संघर्ष का इतिहास है। इस संघर्ष में […] - [मध्यकालीन कला एवं स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/medieval-art-architecture-and-literature/): मध्यकालीन कला एवं स्थापत्य मध्य एशिया से आए आक्रांताओं के साथ भारत में आई। मध्यकालीन स्थापत्य में मीनारों एवं गुम्बदों की प्रमुखता है। मध्यकालीन कला एवं स्थापत्य मध्य एशिया से आए बर्बर तुर्क शासकों एवं उनके बाद आए मुगल आक्रांताओं द्वारा रचा गया। इन आक्रांताओं के भारत में आने के पीछे तीन उद्देश्य प्रमुख थे- […] - [मध्यकालीन साहित्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): भारत का मध्यकालीन साहित्य दो धाराओं में बंटा हुआ है। पहली धारा विदेशी आक्रांताओं की संस्कृति से अनुप्राणित है तथा दूसरी धारा विदेशी आक्रांताओं के संत्रास से से ग्रस्त हिन्दू प्रजा के मनोबल को ऊंचा उठाने उद्देश्य से लिखे गए साहित्य की है। फारसी साहित्य अधिकांश तुर्क शासक साहित्य प्रेमी थे और विद्वानों तथा कवियों […] - [मध्यकालीन भक्ति आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/medieval-bhakti-movement-in-india/): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन भारत की जनता को आत्मिक सम्बल प्रदान करने के लिए चला ताकि वे विदेशी आक्रांताओं द्वारा दिए जा रहे संत्रास का सामना करके स्वयं को हिन्दू धर्म में दृढ़ता से खड़ा रख सकें। भगवद्-भक्ति की अवधारणा भगवद् प्राप्ति के लिये उसकी भक्ति करने की अवधारणा उपनिषद् काल में पनपी। श्रीमद्भगवद्गीता ने उसे […] - [भारत में सूफी सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/sufism-in-india/): इस्लाम के साथ-साथ भारत में सूफी सम्प्रदाय का भी प्रवेश हुआ। सूफी मत, इस्लाम का एक वर्ग अथवा समुदाय है और उतना ही प्राचीन है जितना कि इस्लाम। भारत में सूफी सम्प्रदाय सूफी प्रचारक कई वर्गों तथा संघांे में विभक्त थे। उनके अलग-अलग केन्द्र थे। इस्लाम की ही तरह सूफी मत का भी भारत में […] - [बाबर का भारत आगमन](https://bharatkaitihas.com/expansion-of-mughal-empire-first-part/): बाबर का भारत आगमन मध्यकालीन इतिहास की महत्वपूर्ण घटना थी। उसके आगमन के साथ ही दिल्ली में अंतिम सांस लेती हुई अफगान सत्ता दम तोड़ देती है तथा दिल्ली में नए मुस्लिम शासन की स्थापना होती है। जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर बाबर का वंश परिचय  बाबर का पिता उमर शेख मिर्जा, तैमूर लंग का वंशज था। […] - [लाल किले में हत्याकाण्ड](https://bharatkaitihas.com/british-killed-residents-of-red-fort-like-pheasants/): कितना दर्दनाक दृश्य था जब औरतों और बच्चों की भीड़ कश्मीरी और मोरी दरवाजे से बाहर आ रही थी। इनमें वे औरतें भी थीं जो कभी अपने घरों से बाहर नहीं निकली थीं। - [शाही बेगमों के कपड़े](https://bharatkaitihas.com/british-entered-the-red-fort-and-looted-the-clothes-of-the-royal-begums/): जो दुपट्टे, कमीजें, सलवारें, घाघरे और गरारे कल तक मुगल बेगमें और शहजादियां पहनती थीं, उन दुपट्टों, कमीजों सलवारों, घाघरों और गरारों को अंग्रेज और अंग्रेजी सेना के भारतीय सिपाही अपनी बीवियों के लिए ले जा रहे थे। - [बहादुरशाह जफर की गिरफ्तारी](https://bharatkaitihas.com/hodgson-brought-emperor-to-jail-in-red-fort/): बेगम जीनत महल नहीं चाहती थी कि बादशाह दिल्ली छोड़कर भागे क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि हॉडसन अपने वायदे पर स्थिर रहेगा और बहादुरशाह जफर, बेगम जीनत महल, शहजादे जवां बख्त तथ जीनत महल के पिता मिर्जा कुली खाँ को सुरक्षा देगा। - [मुगल शहजादों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/hodgson-naked-and-looted-the-princess/): हॉडसन ने तीनों शहजादों को गाड़ी से उतरने को कहा। फिर नंगा होने को कहा। फिर एक कॉल्ट रिवॉल्वर निकालकर उसने तीनों को गोली मार दी। - [जीनत महल](https://bharatkaitihas.com/british-soldiers-took-up-beard-of-mughal-emperor/): हम लोग एक और बेगम से मिलने गए जो अपने जमाने में बहुत खूबसूरत मानी जाती थीं। हमने उनको अत्यंत शोकग्रस्त अवस्था में पाया। - [दिल्ली में कत्लेआम](https://bharatkaitihas.com/british-reminded-taimurlung-and-nadirshah-in-slaughtering-people-of-delhi-and-awadh/): ई.1857 में तीन दिन तक चले कत्लेआम में दिल्ली के हजारों लोगों को मारा गया। जफरनामा लिखता है कि लोगों के सिर काट कर उनके ऊँचे ढेर लगा दिये गये और उनके धड़ हिंसक पशु-पक्षियों के लिये छोड़ दिये गये.......। - [लालकिले की गंदी कोठरियाँ](https://bharatkaitihas.com/british-put-bahadur-shah-zafar-in-a-dirty-cell/): जब भी कोई पुरुष इन शाही बेगमों एवं शहजादियों के कमरों में आता है तो ये दीवार की तरफ मुंह फेर लेती हैं। बादशाह को देखने आने वाले अंग्रेजों में से बहुतों को इस तरह औरतों का पर्दा तोड़कर बादशाह के परिवार को अपमानित करने में बहुत मजा आता है।' - [दिल्ली को दण्ड](https://bharatkaitihas.com/british-dug-up-every-house-in-delhi-and-took-out-the-goods/): जब दिल्ली के अधिकांश लोग या तो मार दिए गए या भाग गए तब अंगेजी सेनाओं ने दिल्ली के खाली पड़े घरों को लूटने का काम आरम्भ किया। - [मिर्जा गालिब](https://bharatkaitihas.com/british-allowed-hindu-families-to-come-back-to-delhi/): दिल्ली में न अब कोई सौदागर है न खरीदार! न कोई दुकानदार जिससे आटा खरीद सकें। धोबी, नाई और सफाई वाले सब दिल्ली से गायब हो गए थे। हमने अपने मौहल्ले की गली को पत्थरों के एक ऊंचे से ढेर से बंद कर लिया है। - [सलातीनों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/british-officials-hunted-and-killed-the-princes-and-salatins/): बहुत से शहजादों को बर्मा के मौलामेन नामक शहर की जेलों में भेज दिया गया। इनमें एक शहजादा या सलातीन तो निरा बालक ही था और एक शहजादा या सलातीन नितांत बूढ़ा था। - [रानी विक्टोरिया की प्रजा](https://bharatkaitihas.com/bahadur-shah-zafar-said-that-i-am-not-a-subject-of-queen-victoria/): बादशाह तथा उसके पक्षधरों का कहना था कि कम्पनी सरकार बादशाह पर मुकदमा नहीं चला सकती क्योंकि बादशाह रानी विक्टोरिया की प्रजा नहीं है। - [बादशाह का कोर्ट मार्शल](https://bharatkaitihas.com/red-fort-saw-another-of-its-emperors-being-insulted/): बादशाह को कई गवाहों के बयान सुनाए गए। बादशाह ने उन सारे गवाहों को झूठा बताया और तकिए पर सिर टिकाकर आराम से बैठ गया। - [बहादुरशाह का निष्कासन](https://bharatkaitihas.com/mughals-came-from-fargana-on-horses-were-loaded-into-bullock-carts-and-sent-to-burma/): 9 मार्च 1858 को कोर्ट मार्शल अंतिम बार बैठा। उसी दिन शाम को तीन बजे कोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया। पांचों सैनिक न्यायाधीशों ने एक स्वर से बहादुरशाह जफर को अपराधी ठहराया। - [जॉन लॉरेंस](https://bharatkaitihas.com/lords-of-britain-wanted-delhi-to-be-erased-from-the-map-of-india/): जॉन लॉरेंस ने लॉर्ड केनिंग को लिखा कि दिल्ली के अंग्रेज इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं मानो वे हिंदुस्तानियों को जड़ से उखाड़ फैंकने की लड़ाई कर रहे हों। - [लाल किले पर खतरा](https://bharatkaitihas.com/john-lawrence-saves-the-red-fort-from-being-invisible/): यमुना की तरफ सफेद संगमरमर की बारादरियां बनी हुई थीं, उन्हें भी नष्ट कर दिया गया। समस्त सुनहरी गुम्बद और संगमरमर की फिटिंग्स वसूली एजेंटों ने उतरवा लीं। - [दिल्ली की जामा मस्जिद](https://bharatkaitihas.com/british-wanted-to-eradicate-the-mughals-from-delhi/): दिल्ली की जामा मस्जिद मूलतः एक हिन्दू मंदिर था जो मुसलमानों के भारत में आने से कई सौ साल पहले से दिल्ली की धरती पर विष्णु भगवान को समर्पित करके बनाया गया था। यह हिन्दू कला, स्थापत्य एवं शिल्प का अनूठा उदाहरण होता। यदि मुसलमानों ने इसे जामा मस्जिद में नहीं बदला होता तो यह […] - [मुगलों की दुर्दशा](https://bharatkaitihas.com/moon-like-appearance-women-of-red-fort-were-roaming-streets-wearing-torn-pajamas/): जो मुगल भारत के स्वामी होने का दावा करते थे, अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के बाद उन मुगलों की दुर्दशा अपने चरम पर पहुंच गई। उनमें से बहुत से तांगा चलाने लगे, जूतियां गांठने लगे और कुछ तो केवल भीख मांगकर खाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सके। जब अंग्रेजों ने अठ्ठारह सौ […] - [मुसलमानों का षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/british-alleged-that-the-red-fort-wanted-to-rule-india-again/): एक रक्त की नदी ने कम से कम उत्तरी भारत में दो जातियों को अलग-अलग कर दिया तथा उस पर पुल बाँधना एक कठिन कार्य ही था। - [सन् सत्तावन का विप्लव](https://bharatkaitihas.com/eer-savarkar-said-it-was-not-a-rebellion-but-indias-first-freedom-war/): जिन लोगों ने विप्लव में भाग लिया अथवा विप्लवकारियों को शरण एवं सहायता दी, उनकी प्रशंसा में गीतों की रचना की गई। - [लाल किले की विफलता](https://bharatkaitihas.com/red-fort-could-not-offer-gallantry-to-the-goddess-of-revolution/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की विफलता वस्तुतः लाल किले की विफलता थी। लाल किले में बैठे बादशाह को शक्ति का स्रोत मानकर क्रांतिकारियों ने उसे अपना नेता चुना किंतु उन्हें पता नहीं था कि लाल किला बिल्कुल लुंज-पुंज और निशक्त है। वह तो विगत लगभग एक सौ साल से अंग्रेजों की पेंशन पर जी […] - [दो गज जमीन](https://bharatkaitihas.com/owner-of-red-fort-did-not-even-get-two-yards-of-land-in-india/): उभरते हुए नए भारत में किलों, घोड़ों, तलवारों एवं पालकियों का समय पीछे छूट रहा था और पिस्तौलों से लेकर बम बरसाने वाली तोपों तथा ट्रेनों का समय आ गया था किंतु इस हिंदुस्तान में बाबर के बेटों के लिए कोई स्थान नहीं था। उन्हें अब रंगून में अपना भविष्य तलाशना था। - [वैवस्वत मनु तथा उनके वंशज राजाओं की कथा (23)](https://bharatkaitihas.com/story-of-vaivasvata-manu-and-his-descendant-kings/): पिछली कथाओं में हमने वराह कल्प के 14 मनुओं में से पहले मनु अर्थात् स्वायंभू-मनु की चर्चा की थी। साथ ही उनके पुत्रों उत्तानपाद एवं प्रियव्रत और पौत्रों ध्रुव तथा उत्तम की भी चर्चा की थी। इस कथा में हम वराह कल्प के वर्तमान मनु अर्थात सातवें मनु की चर्चा करेंगे जिन्हें वैवस्वत मनु के […] - [लाल किला तोड़ दो](https://bharatkaitihas.com/public-said-break-the-red-fort-free-the-azad-hind-fauj/): साथियो! आपके युद्ध का नारा हो- चलो दिल्ली, चलो दिल्ली। इस स्वतन्त्रता संग्राम में हम में से कितने जीवित बचेंगे, यह मैं नहीं जानता परन्तु मैं यह जानता हूँ कि अन्त में विजय हमारी होगी और हमारा ध्येय तब तक पूरा नहीं होगा जब तक हमारे शेष जीवित साथी ब्रिटिश साम्राज्य की कब्रगाह- लाल किले पर विजयी परेड नहीं करेंगे। - [भारतीय सम्प्रभुता का प्रतीक](https://bharatkaitihas.com/last-farewell-of-british-was-from-red-fort/): लाल किला आज भी बड़ी शान से दिल्ली में खड़ा है जहाँ भारत के प्रधानमंत्री प्रत्येक 15 अगस्त को झण्डा फहराते हैं । तिरंगे की गौरवमय उपस्थिति के कारण आज यह किला भारत की आन-बान और शान का प्रतीक है। - [भूमिका - रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/preface-razia-sultana/): भूमिका – रजिया सुल्तान पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक रजिया सुल्तान की भूमिका दी गई है जिसमें इस पुस्तक के बारे में संक्षिप्त जानकारी लिखी गई है। तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में जब दिल्ली सल्तनत पर लड़ाका तुर्की कबीले शासन कर रहे थे, एक यतीम शहजादी का दिल्ली के तख्त पर काबिज हो […] - [इल्तुतमिश का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/rise-of-shamsuddin-iltutmish/): रजिया सुल्तान का इतिहास उसके पिता शम्सुद्दीन इल्तुतमिश से शुरु होता है। इल्तुतमिश मध्य एशिया में रहने वाले तुर्कों के अल्बारी अथवा इल्बरी कबीले के एक प्रमुख एवं प्रभावशाली व्यक्ति आलम खाँ का प्रतिभाशाली तथा रूपवान पुत्र था। इस कारण उसे अपने पिता की विशेष कृपा तथा वात्सल्य प्राप्त था। इससे इल्तुतमिश के भाइयों तथा […] - [शहजादी रजिया](https://bharatkaitihas.com/succession-to-shehzadi-razia/): शहजादी रजिया भारत के मुस्लिम शासकों में सबसे अलग चमकता हुआ सितारा है जिसे कट्टरपंथी मुसलमानों ने शासन नहीं करने दिया तथा अकारण ही उसकी हत्या कर दी। शहजादी रजिया का जन्म रजिया का जन्म सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक की शहजादी कुतुब बेगम के गर्भ से हुआ था। चूंकि रजिया का जन्म एक शहजादी के पेट […] - [शाह तुर्कान का कहर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%b0/): जब तुर्की अमीरों ने मरहूम सुल्तान इल्तुतमिश की इच्छा को नकार दिया तथा शहजादी रजिया को सुल्तान बनाने से मना करके रुकनुद्दीन फीरोजशाह को सुल्तान बना दिया तो नए सुल्तान रुकनुद्दीन फिरोजशाह की माँ शाह तुर्कान का कहर मरहूम सुल्तान इल्तुतमिश की बेगमों एवं शहजादियों पर टूट पड़ा। शाह तुर्कान का कहर अब शाह तुर्कान […] - [रजिया का दांव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5/): जब शाह तुर्कान के अत्याचारों के कारण दिल्ली सल्तनत में चारों ओर असंतोष फैल गया तो राजनीति की चतुर खिलाड़ी शहजादी रजिया ने शाह तुर्कान से पंजा लड़ाने का निश्चय किया। रजिया का दांव उलटा भी पड़ सकता था किंतु रजिया के लिए यह करो या मरो जैसी स्थिति थी। राजनीति के दांवपेच किशोरावस्था से […] - [रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): रुकुनुद्दीन फीरोजशाह की हत्या हो जाने के बाद रजिया अपने मरहूम बाप इल्तुतमिश की इच्छा के अनुसार सल्तनत के तख्त पर बैठी। भारतीय इतिहास में उसे रजिया सुल्तान तथा रजिया सुल्ताना कहा गया है। रजिया सुल्तान के सिर पर छत्र ताना गया, चंवर ढुलाये गये और उसकी विरुदावली गाई जाने लगी। दिल्ली ने बहुत से […] - [रजिया सुल्तान का शासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): रजिया सुल्तान का शासन उस काल के सुल्तानों की तुलना में काफी अच्छा था। औरत होने के कारण वह इस्लाम के बल पर शासन नहीं कर सकती थी। उसे अपने मित्रों एवं शत्रुओं के बीच संतुलन स्थापित करना था। यह कार्य उसने बड़ी सूझबूझ से किया। रजिया सुल्तान का शासन अमीरों की पुनर्नियुक्ति रजिया ने […] - [रजिया सुल्तान की हत्या](https://bharatkaitihas.com/fall-of-razia/): रजिया सुल्तान की हत्या भारत के मुस्लिम शासन का सबसे दुखद अध्याय है। रजिया सुल्तान मुसलमान होते हुए भी केवल मुसलमानों को अपनी प्रजा नहीं मानती थी। वह दिल्ली के आसपास शासन कर रहे राजपूत शासकों से अच्छे सम्बन्ध बनाकर अपनी सल्तनत में शांति चाहती थी। रजिया की हत्या के पीछे एक बड़ा कारण यह […] - [रजिया सुल्तान की असफलता](https://bharatkaitihas.com/causes-of-failure-of-razia/): रजिया सुल्तान की असफलता के लिए स्वयं रजिया बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं थी। अपितु तुर्की अमीरों की संकुचित दृष्टि एवं स्थार्थपरक राजनीति ने रजिया सुल्तान को सफल नहीं होने दिया। यद्यपि रजिया सुल्तान इल्तुतमिश के उत्तराधिकारियों में सर्वाधिक योग्य तथा राजपद के सर्वाधिक उपयुक्त थी परन्तु दूषित राजनीतिक वातावरण में वह शासन चलाने में असफल […] - [रजिया सुल्तान का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/razias-character-and-her-actions/): रजिया सुल्तान का मूल्यांकन उसके शासनकाल की अवधि अथवा सामरिक सफलताओं से नहीं अपितु मध्यकालीन परिस्थितियों में दिखाए गए साहस एवं धैर्य से किया जा सकता है। प्रथम स्त्री सुल्तान रजिया भारत की प्रथम स्त्री सुल्तान थी। यद्यपि विदेशों में रजिया सुल्तान के पूर्व भी स्त्रियां तख्त पर बैठ चुकी थीं परन्तु भारत में अब […] - [इतिहास में रजिया सुल्तान का स्थान](https://bharatkaitihas.com/impact-of-razia-sultan-on-indian-history-and-public-psyche/): भारत के मुस्लिम इतिहास में रजिया सुल्तान का स्थान अल्पावधि के शासन के उपरांत भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि इल्तुतमिश या बलबन का। रजिया ने इल्तुतमिश और बलबन की ही तरह कट्टर तुर्की अमीरों पर नकेल कसने में सफलता प्राप्त की। मध्यकालीन इतिहास में रजिया सुल्तान भारत के मध्यकाल का इतिहास रजिया सुल्तान […] - [मोहनजोदारो की नृत्यांगना - भूमिका](https://bharatkaitihas.com/preface/): मोहनजोदारो की नृत्यांगना भारत की दस हजार साल पुरानी सभ्यता पर लिखा गया एक उपन्यास है। इस उपन्यास में आधारभूत सामग्री के रूप में उस काल का वैदिक साहित्य एवं सैंन्धव पुरातत्व काम में लिया गया है। शरीर रचना शास्त्र  (Racical Anthropology) की दृष्टि से भारत भूमि पर निवास करने वाली आदिम जातियों के छः […] - [सप्तसिंधु (1)](https://bharatkaitihas.com/saptasindhu/): उन दिनों सिंधु, शतुद्रि, विपासा, परुष्णि, असिक्नी, वितस्ता तथा सरस्वती का सम्पूर्ण क्षेत्र सप्त सैंधव अथवा सप्तसिंधु कहलाता था। यह बहुत बाद की बात है कि गंगा-यमुना का क्षेत्र आर्य संस्कृति के प्रसार का केन्द्र बना। नदियाँ केवल जल लेकर प्रवाहित नहीं होतीं। जल के साथ पर्वतीय खण्ड भी उनके आकर्षण में बंधे चले आते […] - [मरुस्थल का पथिक (2)](https://bharatkaitihas.com/desert-wanderer/): मरुस्थल का पथिक प्रतनु इस कार्य के लिये उन्हें पर्याप्त स्वर्ण चुकायेगा किंतु कोई भी सैंधव इतना बड़ा खतरा उठाने को तैयार नहीं हुआ। इस पर भी प्रतनु निराश नहीं हुआ। निराश होना तो उसने जैसे जाना ही नहीं। अन्ततः वही हुआ जिसका प्रतनु को भय था। उसने कभी नहीं चाहा था इन आकृतियों को […] - [मोहेन-जो-दड़ो (3)](https://bharatkaitihas.com/mohen-jo-daro/): मोहेन-जो-दड़ो के पशुपति महालय का प्रधान पुजारी किलात सैंधव सभ्यता के महान दार्शनिक कोल्या की सातवीं पीढ़ी का वंशज है। कोल्या सैंधव सभ्यता का अनुभवी पुरोहित, गूढ़ उपदेशक, सुप्रसिद्ध न्यायकर्ता और दृढ़ प्रशासक था। सिंधु नदी के तट पर स्थित मोहेन-जो-दड़ो! [1] आज से पाँच हजार साल पहले भारत भूमि पर पल्लवित और पुष्पित होने […] - [दिव्य पूजन (4)](https://bharatkaitihas.com/divine-worship/): दिव्य पूजन की अंतिम प्रार्थना से पूर्व पद्म पत्रों पर रखे सहस्रों दीप सिंधु में प्रवाहित कर दिये गये। सिंधु की अनंत लहरों पर लहराते-इठलाते सहस्रों ज्योतिर्पुन्ज। ये मिट्टी और यव-चूर्ण से बने दीप नहीं, सैन्धव लोगों द्वारा अपने मन के अंधियारे को हटाने के घोषणा पत्र हैं। सूर्योदय अब भी नहीं हुआ था जब […] - [अदृश्य नृत्यांगना (5)](https://bharatkaitihas.com/invisible-dancer/): अदृश्य नृत्यांगना रोमा! जो पशुपति महालय की मुख्य नृत्यांगना है। रोमा! जो सद्यः यौवना है। रोमा! जो कला की  अधिष्ठात्री है। रोमा! जो नृत्यविधा में देवलोक की बहुविश्रुत अप्सराओं और अनजाने पर्वतीय प्रदेशों में नृत्यरत गांधर्वियों से अधिक निष्णात है। चन्द्रवृषभ समारोह में बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति होने से इसका आयोजन महालय के […] - [सभा (6)](https://bharatkaitihas.com/assembly/): सभा में साम-गायन के साथ-साथ विभिन्न यज्ञ भी निर्विघ्न रूप से होते हैं। पुरुषों के साथ जन की समस्त स्त्रियों को इस सभा में भाग लेना अनिवार्य है। अशक्त और रोगी प्रजा को सभा से अनुपस्थित रहने की अनुमति है। शुभ्र हिम से आच्छादित शिखरों की सघन शृंखला ने चारों ओर घूम कर एक दुर्ग […] - [गविष्टि (7)](https://bharatkaitihas.com/meeting/): गविष्टि के समय आर्यों का नेतृत्व करने वाले ‘गोप’ आर्य सुरथ ने ऋषियों को आश्वस्त करते हुए दुंदुभि को नमस्कार किया और दुंदुभि का आह्वान करते हुए कहा- ‘हे दुंदुभि! तू हमारे शत्रुओं के विरुद्ध घोष कर। हमें बल दे।’ ऋषि पत्नी अदिति ने यज्ञ शाला में स्थापित दुंदुभि उठाकर ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा के मंगलमय हाथों […] - [पुरोडाश (8)](https://bharatkaitihas.com/rituals/): इन्द्र ने अग्नि और सोम का आह्वान करके कहा कि तुम तो मेरे हो और मैं तुम्हारा हूँ। तुम क्यों इस दस्यु को बढ़ावा देते हो। इन्द्र ने अग्नि और सोम को प्रसन्न करने के लिये ‘एकादशकपाल पुरोडाश’ का निर्वपन किया। संध्याकाल में परुष्णि के पावन तट पर आर्यों की सभा पुनः जुड़ी। प्रातः अचानक […] - [अद्भुत प्रतिमा (9)](https://bharatkaitihas.com/amazing-statue/): कहाँ से आई यह अद्भुत प्रतिमा यहाँ ? किसने बनाया इसे ? क्या सैंधवों में भी कोई इतना निष्णात शिल्पी है! देव शिल्पी त्वष्टा और दानव शिल्पी मय के बारे में तो सुना है उन्होंने किंतु सैंधवों में तो कोई इतना निष्णात शिल्पी आज तक नहीं हुआ! मोहेन-जो-दड़ो पशुपति देवालय के वार्षिक समारोह को कोई […] - [अग्निहोत्र (10)](https://bharatkaitihas.com/havan/): इस समय आर्य-जन प्रातःकालीन अग्निहोत्र की तैयारी में संलग्न हैं। ऋषिगण चारों दिशाओं का वंदन कर रहे हैं। ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा ने पूर्व दिशा को नमस्कार करते हुए कहा- ‘प्रकाश दायिनी पूर्व दिशा का अधिपति सूर्य है। इसकी बाणरूप रश्मियाँ समस्त बंधनों से रहित करने वाली हैं। जगत की रक्षा करने वाले सूर्य को हमारा नमस्कार […] - [अभिसार (11)](https://bharatkaitihas.com/dating/): गगन मण्डल में सप्त सिंधुओं का प्रतिनिधत्व कर रहे सप्त नक्षत्र अब अपने पुर को जाने को लालायित थे किंतु यही सोचकर अटके हुए थे कि अभिसार पूर्ण होने से पहले चल देना उचित नहीं होगा। शुक्ल पक्ष की प्रथमा का क्षीण चंद्र अल्प समय आकाश में उपस्थित रह कर प्रस्थान कर चुका है। नक्षत्रों […] - [समिति (12)](https://bharatkaitihas.com/committee/): जन के ठीक मध्य में स्थित यज्ञशाला के निकट ही वृहद पर्णशाला [1] बनी हुई है जिसमें प्रातः कालीन सभा, सांध्यकालीन गोष्ठि [2] तथा विशेष अवसर उपस्थित होने पर समिति [3] का आयोजन होता है। गोधूलि बेला [4] के आगमन में अभी विलम्ब है तथा सूर्य देव की प्रखरता भी अभी कम नहीं हुई है। […] - [पर्वतीय उपत्यकाओं की ओर (13)](https://bharatkaitihas.com/to-the-valley/): वह उत्साह आज नहीं है। क्या आशा और क्या लक्ष्य लेकर लौटे वह अपने पुर को ? दीर्घ यात्रा के पश्चात अपने पुर को लौटने वाले अपने साथ कुछ अर्जित करके लौटते हैं। उसने क्या अर्जित किया है ? - [गोष्ठी (14)](https://bharatkaitihas.com/seminar/): मंद गति से विचरण करता हुआ निशीथ अंतरिक्ष के मध्य में आ बैठा था। दो प्रहर रात्रि व्यतीत हुई जान कर गोष्ठी विसर्जित की गयी। परुष्णि के तट पर आर्यों की सांध्यकालीन गोष्ठी जुड़ी है। आर्य सुरथ और आर्य सुनील अन्य आर्यवीरों के साथ सोम की खोज में गये थे किंतु वहाँ से न केवल […] - [मायावी स्त्रियाँ (15)](https://bharatkaitihas.com/elusive-women/): प्रतनु के मस्तिष्क में बार-बार यह शंका उत्पन्न हो रही थी कि कहीं ये मायावी स्त्रियाँ उसके नेत्रों पर वस्त्र बांध कर उसे पर्वत से नीचे धकेलने तो नहीं ले जा रहीं। वरुण देव ही जानें क्या माया है ? कई दिवसों से पर्वत उपत्यकाओं में निरूद्देश्य सा भटकता रहा है प्रतनु। मोहेन-जो-दड़ो से यहाँ […] - [यातुधान (16)](https://bharatkaitihas.com/demons/): गुहा द्वार पर पाँच यातुधान पहरा दे रहे थे किंतु वे पूरी तरह असावधान थे। उन्हें इस बात की कल्पना भी नहीं थी कि इस निविड़ पर्वत प्रदेश में कोई प्राणी उनके कार्य में विघ्न उपस्थित करने के लिये आ सकता है। दिन भर के श्रांत-क्लांत गोप सुरथ परुष्णि के जल में निमज्जित होकर थकान […] - [मायावी सरोवर (17)](https://bharatkaitihas.com/elusive-lake/): शर्करा के तट से सिंधु नद के विशाल तट तक। मोहेन-जो-दड़ो से नागों के इस अनजाने पुर तक। न कहीं ऐसा देखा, न कहीं ऐसा सुना। लगता था सम्पूर्ण उपवन मायावी विद्या से निर्मित है। ईशान कोण में स्थित मायावी सरोवर से ही आरंभ किया प्रतनु ने। सूर्योदय हुए काफी विलम्ब हो चुका था जब […] - [विचित्र स्वप्न (18)](https://bharatkaitihas.com/bizarre-dream/): ऋषिश्रेष्ठ ने विचित्र स्वप्न देखा कि एक वृक्ष है जिसकी शाखा पर दो पक्षी बैठे हैं। पहला पक्षी फल खा रहा है और दूसरा पक्षी देख रहा है। हर काल खण्ड में पहला पक्षी ही फल खा रहा है। जबकि किसी भी काल खण्ड में दूसरा पक्षी कुछ नहीं खा रहा। पर्ण शैय्या पर लेटते ही […] - [अमल-धवल प्रासाद (19)](https://bharatkaitihas.com/amal-dhawal-palace/): प्रतनु ने विशाल अमल-धवल प्रासाद में प्रवेश किया। मोहेन-जो-दड़ो के जिस विशाल और समृद्ध पशुपति महालय को देखकर प्रतनु ने दांतो तले अंगुलि दबा ली थी, वह महालय इस प्रासाद की भव्यता और विशालता के सामने कुछ भी नहीं था। प्रासाद के गगनोन्नत तोरण द्वार में प्रवेश करने के पश्चात् प्रतनु को विस्तृत प्रांगण दिखाई […] - [आर्य सुरथ का चिंतन (20)](https://bharatkaitihas.com/contemplation-of-arya-surath/): जनपदों की संगठित शक्ति न केवल असुरों से अपनी रक्षा करने में समर्थ होगी अपितु असुरों का दमन भी कर सकेगी। इन्हीं विचारों में डूबते उतरते जाने कब गोप सुरथ की आँख लगी और आर्य सुरथ का चिंतन कब समाप्त हुआ, उन्हें पता ही नहीं चला। दिन भर के संग्राम के पश्चात् जहाँ अन्य आर्य […] - [रानी मृगमंदा (21)](https://bharatkaitihas.com/queen-mrigmanda/): प्रतनु ने धरती पर घुटने टेककर रानी मृगमंदा का अभिवादन किया। प्रतनु ने अनुभव किया कि इस पूरे वार्तालाप में रानी मृगमंदा एक भी शब्द नहीं बोली है। हिन्तालिका और निर्ऋति ही उसकी तरफ से प्रश्न पूछती रही हैं। अमल-धवल प्रासाद के केन्द्रीय कक्ष में प्रवेश करते ही प्रकाश से आंखें चुंधिया गयीं प्रतनु की। […] - [जनपदों की ओर (22)](https://bharatkaitihas.com/towards-districts/): आर्य सुरथ ने अपनी बात पूरी करते-करते अनुभव किया कि अब आर्यों को जन से जनपदों की ओर ले जाने का समय आ गया है। लघु जनों की अपेक्षा वृहद् जनपदों में ही आर्य प्रजा सुरक्षित रह सकती है। गोप सुरथ ने सभा में अपना मंतव्य प्रस्तुत किया- ‘जिस प्रकार समस्त आर्य प्रजा परिवार में, […] - [तीसरा प्रश्न (23)](https://bharatkaitihas.com/third-question/): प्रतनु रानी मृगमंदा के तीसरे प्रश्न का उत्तर पा चुका है। वह दबे पांव अपने प्रासाद में लौट आया। तीसरा प्रश्न अनायास ही सुलझ गया था। नागों के इस विवर में अघोषित अतिथि के रूप में रहते हुए प्रतनु को कई दिन हो गये हैं। अघोषित अतिथि के रूप में वह विविध प्रकार का आनंद […] - [राजन् (24)](https://bharatkaitihas.com/king/): मैं वैवस्वत मनुपुत्र सुरथ, आर्य प्रजा के कल्याण के लिये और आर्य जनपदों को संगठित करने के लिये जनपति अर्थात् राजन् होना स्वीकार करता हूँ। आज प्रातःकालीन अग्निहोत्र के तत्काल पश्चात् विशेष समिति का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर निकटवर्ती आर्य जनों से भी अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। देवों के निमित्त […] - [घोषित अतिथि (25)](https://bharatkaitihas.com/announced-guest/): रानी मृगमंदा का घोषित अतिथि बन जाने के बाद प्रतनु को नागों के पुर में विशेष अधिकार प्राप्त हो गये। अब वह कहीं भी बिना रोक-टोक जा सकता था। प्रतनु ने अनुभव किया कि न केवल रानी मृगमंदा और उसकी सखियाँ अपितु समस्त नाग अनुचर, सैनिक एवं प्रहरी भी प्रतनु को विशेष सम्मान देते हैं। […] - [तूर्य (26)](https://bharatkaitihas.com/basset-horn/): नाग कुमारियों ने आज तूर्य [1] का आयोजन किया था। रानी मृगमंदा ने शिल्पी प्रतनु को भी इसमें सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया। सैंधवों में तूर्य आयोजित करने की परम्परा नहीं है इस कारण प्रतनु के लिये इस तरह का आयोजन देखने का पहला ही अवसर था।  रानी मृगमंदा ने बताया कि तूर्य समारोह में […] - [गरुड़ों का आक्रमण (27)](https://bharatkaitihas.com/garuda-invasion/): हम पर गरुड़ों का आक्रमण हुआ है। गरुड़ सैन्य ने रात्रि के अंधकार में दुर्ग तोड़ लिया है। सैंकड़ों गरुड़ दुर्ग में प्रवेश कर गये है। जाने कैसे उन्हें दुर्ग के गुप्त मार्ग का ज्ञान हुआ। प्रातः होने में अभी पर्याप्त समय शेष था, जब प्रतनु की निद्रा विचित्र कोलाहल के कारण भंग हो गयी। […] - [रानी मृगमंदा का प्रस्ताव (28)](https://bharatkaitihas.com/proposal-of-queen-mrigamanda/): रानी मृगमंदा का प्रस्ताव सुनकर गुल्मपति चौंका था किंतु अब समय आ गया था जब प्रतनु के विरुद्ध कुछ न कुछ बोलना आवश्यक था। अतः उसने रानी मृगमंदा से अनुमति मांगी कि उसे भी कुछ बोलने का अवसर दिया जाये। शत्रुओं के हाथ में लगभग जा चुके दुर्ग को पुनः हस्तगत करने के पश्चात रानी […] - [अतिथि की विदाई (29)](https://bharatkaitihas.com/guest-farewell/): अतिथि की विदाई की बात सुनकर रानी मृगमंदा हतप्रभ रह गई। उसे लगा कि रानी मृगमंदा के द्वारा ऩिऋित के माध्यम से दिए गए विवाह का प्रस्ताव सुनकर ही प्रतनु यहाँ से जाना चाहता है। घटनायें इतनी अप्रत्याशित गति से घटित हुईं कि निर्ऋति प्रतनु के प्रतिज्ञाबद्ध होने तथा सैंधव नृत्यांगना के प्रति अनुरक्त होने […] - [पिशाच (30)](https://bharatkaitihas.com/vampire/): प्रतनु ने अपने नेत्र पूरी तरह खोल दिये। श्वान-मुखी मादा पिशाच की पूर्णतः निर्वस्त्र वीभत्स देह प्रतनु की देह पर पूरी तरह झुकी हुई थी। उसने अपनी दोनों हथेलियाँ प्रतनु के शरीर पर ही टिका रखी थीं जिससे उसके लटकते हुए वीभत्स स्तन प्रतनु के शरीर को स्पर्श कर रहे थे। उषा के आगमन के […] - [अश्वारोहियों से भेंट (31)](https://bharatkaitihas.com/meeting-with-horsemen/): पिशाचों के बीच से पूर्णतः निर्वस्त्र अवस्था में प्राण बचाकर भागे प्रतनु की अश्वारोहियों से भेंट हुई तो प्रतनु को अपने प्राण फिर से संकट में प्रतीत होने लगे। बाल-बाल बचा प्रतनु। आर्यों का एक अश्वारोही दल काफी तीव्र गति से घोड़े फैंकता हुआ उन्हीं सघन वृक्षों के नीचे आकर रुका जिनकी छाया में प्रतनु […] - [पुनः मोहेन-जो-दड़ो में (32)](https://bharatkaitihas.com/again-in-mohen-jo-daro/): मोहेन-जो-दड़ो से प्रतनु के निष्कासन की अवधि समाप्त होने में अभी कुछ दिन शेष थे। नियमानुसार वह दो वर्ष से पूर्व पुनः मोहेन-जो-दड़ो में प्रवेश नहीं कर सकता था किंतु उसमें इतना धैर्य नहीं रह गया था कि वह नगर से बाहर रुककर अवधि पूर्ण होने की प्रतीक्षा करे। जिस समय प्रतनु मोहेन-जो-दड़ो के नगरद्वार […] - [किलात से भेंट (33)](https://bharatkaitihas.com/meeting-with-kilaat/): शिल्पी प्रतनु और नृत्यांगना रोमा ने सावधानी से कई बार काल गणना की और आश्वस्त हो जाने पर कि प्रतनु के निष्कासन की दो वर्ष की अवधि पूर्ण हो गयी है, प्रतनु ने आज ही किलात से भेंट करने का निर्णय लिया। पशुपति महालय के प्रातःकालीन पूजन के पश्चात् प्रतनु किलात की सेवा में उपस्थित […] - [नृत्यांगना की घोषणा (34)](https://bharatkaitihas.com/announcement-from-dancer/): मोहेन-जो-दड़ो के वातावरण में आज सनसनी है। पुरवासियों में इतनी सनसनी और इतनी उत्तेजना तो उस दिन भी नहीं थी जिस दिन देवी रोमा की निर्वसना प्रतिमा किसी अज्ञात शिल्पी ने नगर के मुख्यमार्ग पर लाकर रख दी थी। जिसने भी नृत्यांगना की घोषणा के बारे में सुना अवसन्न रह गया। भला यह कैसे संभव […] - [चतुरंगिणी (35)](https://bharatkaitihas.com/four-division-army/): चैथा अंग पदाति सैनिकों का था। यह अंग चतुरंगिणी का सबसे बड़ा और सबसे मुख्य अंग था। शेष अंग एक तरह से इसी अंग की सहायता के लिये संगठित किये गये थे। राजन् सुरथ ने ऊँची टेकरी पर चढ़कर चतुरंगिणी[1] का अवलोकन किया। चारों दिशायें आर्य सैनिकों से आप्लावित थीं। राजन् सुरथ तथा सेनप सुनील […] - [अमंगल की आशंका (36)](https://bharatkaitihas.com/apprehension-of-danger/): अमंगल की आशंका पुरवासियों के मन में घर कर गयी है। यदि मातृदेवी गर्भवती न हुई तो! वह एक क्षुद्र शिल्पी से कैसे गर्भवती होना स्वीकार करेगी! मोहेन-जो-दड़ो वासी एक बार फिर उत्तेजित हैं। इस बार युवकों की अपेक्षा बड़े बूढ़ों में अधिक बेचैनी है। देवी रोमा द्वारा प्रचारित घोषणा के एक दिन बाद स्वामी […] - [जयघोष (37)](https://bharatkaitihas.com/acclamation/): सेनप सुनील ने पुर की प्राचीर पर खड़े होकर अपना विकराल खड्ग मुक्त भाव से आकाश में लहराया और उच्च स्वर में जयघोष किया- ‘कृण्न्वतो विश्वम् आर्यम्।’ समस्त आर्य वीरों ने सेनप सुनील का जयघोष सुनकर हर्षध्वनि की और जो जहाँ स्थित था, वहीं से उसने अपने शस्त्र हवा में लहराये। आर्य चतुरंगिणी कई दिनों […] - [चन्द्रवृषभ (38)](https://bharatkaitihas.com/chandravrishabh/): भूदेवी को गर्भवती बनाने वाले चन्द्रवृषभ  की भूमिका में शिल्पी प्रतनु यथा समय उपस्थित हुआ। आज उसके लिये कठिन परीक्षा की घड़ी थी। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मोहेन-जोदड़ो वासियों एवं सैंधव प्रदेश के विभिन्न भागों से आये सैंधवों की सुविधा के लिये पशुपति महालय परिसर में विशाल वितान बनाया गया था जो […] - [प्लावन (39)](https://bharatkaitihas.com/natation/): यह एक सुखद संयोग ही था कि आर्यों को इतना ऊँचा और विशाल बालुका स्तूप मिल गया था अन्यथा इस प्लावन में उनका नष्ट हो जाना निश्चित था। कुभा, सुवास्तु क्रुमु, तथा गोमती आदि नदी-तटों को पीछे छोड़कर चतुरंगिणी पुनः सिंधु-नद के तट पर लौट आयी। असुरों के विरुद्ध उसका अभियान पूरा हो गया था। […] - [मेलुह्ह (40)](https://bharatkaitihas.com/meluhh/):   – ‘वह जो भित्ती दिखायी दे रही है, वही मेलुह्ह पुर की प्राचीर है। लगभग एक प्रहर में हम वहाँ होंगे। हमारे स्पश आज प्रातः ही वहाँ पहुँच गये थे। किसी भी क्षण वे हमें लौटते हुए मिलेंगे।’ सेनप सुनील ने अपना अश्व आर्य सुरथ के अश्व के बराबर लाते हुए कहा। लगभग पूरे […] - [मणिपर्यंक (41)](https://bharatkaitihas.com/bed-of-pearls/): चक्रवर्ती सम्राट सुरथ को लगा वे सिंधु की स्तुति नहीं कर रहे, वे तो शिल्पी प्रतनु को अर्घ्य दे रहे हैं जो नृत्यांगना रोमा के साथ सिंधु तट पर बिछे इतिहास के मणिपर्यंक पर सदा-सर्वदा के लिये शैय्यासीन हो गया है। ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा ने यज्ञकुण्ड में आहुति देकर अपने विशाल नेत्र खोले। आज दीर्घकाल के पश्चात् […] - [प्रस्तावना - चित्रकूट का चातक](https://bharatkaitihas.com/preface-chitrakoot-ka-chatak/): प्रस्तावना – चित्रकूट का चातक पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ऐतिहासिक उपन्यास चित्रकूट चातक की पृष्ठभूमि स्पष्ट की गई है। अब्दुर्रहीम खानखाना की पहचान आज के भारत में एक ‘संत-कवि’ की है। इसीलिये हिन्दू उन्हें रहीमदासजी कहते हैं। विगत चार सौ वर्षों से वे करोड़ों हिन्दी भाषी भारतीयों के लिये श्रद्धा के पात्र […] - [इंसानी खून का रंग (1)](https://bharatkaitihas.com/human-blood/): इस उपन्यास की कहानी हमें बताती है कि इंसानी खून का रंग किस तरह मानव को मानवता का दुश्मन बनाकर उसे दानवता की ओर ले जाता है। संसार में इंसानी खून का रंग हर जगह लाल है किंतु उसकी ताकत हर जगह अलग है। जब इंसानी खून की ताकत जोर मारती है तो इंसान, इंसान […] - [चन्द्रवंशी राजा ययाति (2)](https://bharatkaitihas.com/descendants-of-yayati/): हिन्दुओं में मान्यता है कि चन्द्रवंशी राजा ययाति के बेटे ‘तुरू’ के वंशज आगे चलकर ‘तुर्क’ कहलाये। कई पुराणों में राजा ययाति की कथा मिलती है। इस कथा का सर्वप्रथम उल्लेख महाभारत में हुआ है जिसके अनुसार राजा ययाति के दो विवाह हुए। पहला विवाह दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी से और दूसरा […] - [लाओ शंग (3)](https://bharatkaitihas.com/lao-shang/): लाओ शंग ने यू-ची राजा को मार डाला तथा उसकी खोपड़ी निकलवाकर अपने महल में ले गया। उसके बाद लाओ-शंग ने जीवन भर उसी खोपड़ी में पानी पिया। चीन के उत्तर में मंगोलिया का विशाल रेगिस्तान है। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र में कई बर्बर जातियाँ निवास करती थीं। इन बर्बर जातियों का […] - [बगदाद के खलीफा (4)](https://bharatkaitihas.com/khalifa-of-baghdad/): तुर्की गुलामों द्वारा खलीफाओं के तख्त उलट दिए गए तथा तुर्की गुलाम स्वयं बगदाद के खलीफा बन गए। इस्लाम के इतिहास में बगदाद के खलीफा बड़े प्रसिद्ध हुए। यू-ची गोबी प्रदेश छोड़कर नान-शान प्रदेश में चले गये किंतु यहाँ भी हूणों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 140 ई.पू. में हूणों की वू-सुन शाखा के राजकुमार […] - [भारत पर मुस्लिम आक्रमण (5)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): भारत पर मुस्लिम आक्रमण ऐसे समय में हुए जब भारत का वैभव अपने चरम पर था किंतु भारत भूमि छोटे-छोटे राज्यों में बंटी हुई थी। ई. 712 में मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया। वह पहला मुस्लिम आक्रांता था जिसने भारत की भूमि पर पैर रखा था। उसने सिंध के राजा दाहिर सेन […] - [रक्त और मांस का पिण्ड (6)](https://bharatkaitihas.com/ball-of-blood-and-flesh/): दिलम बोल्डक के तुर्क बादशाह ने रक्त और मांस का पिण्ड लेकर पैदा होने वाले इस इस अजीब शैतानी बालक का नाम रखा- चंगेजखाँ। 1155 ईस्वी की एक सुबह। ओमन नदी का शांत जल प्रतिदिन की भांति अपनी मंथर गति से प्रवाहित हो रहा था। उसके निर्मल जल में सहस्रों रूपहली मछलियाँ और जलमुर्गियाँ अठखेलियां […] - [स्तब्ध परमात्मा (7)](https://bharatkaitihas.com/stunned-god/): इंसान की खूनी ताकत अपने ही जैसे दूसरे इंसानों का खून बहता हुआ देखकर पैशाचिक अट्टहास करती थी और अपने ही बनाये हुए पुतले की क्रूरता को देखकर स्तब्ध परमात्मा पूरी तरह मौन एवं अदृश्य था। चंगेजखाँ पहला मंगोल था जिसने भारत पर आक्रमण किया। उन दिनों दिल्ली पर मुहम्मद गौरी के गुलाम के गुलाम, […] - [लंगड़ा दैत्य (8)](https://bharatkaitihas.com/lame-monster/): समरकंद से एक लाख घुड़सवारों की सेना लेकर एक लंगड़ा दैत्य भारत की ओर चल पड़ा है। वह सिंधु नदी पार कर चुका है और कुछ दिनों में पंजाब पहुँचने वाला है। वह जिस गाँव से गुजरता है, उस गाँव में किसी को जीवित नहीं छोड़ता। दीना ने भरी दुपहरी में अपने सिर से घास […] - [मृतकों के नगर (9)](https://bharatkaitihas.com/cities-of-dead/): कई महीनों तक दिल्ली में किसी पक्षी तक ने पर नहीं मारा फिर बेबस आदमी का तो कहना ही क्या था। चीलों, गिद्धों एवं सियारों को भी मृतकों के नगर साफ करने में कई महीने लग गए। यह तो नहीं कहा जा सकता कि इतिहास की वह कौनसी तिथि थी जब मंगोलों ने इस्लाम स्वीकार […] - [खूनी ताकतों का संगम (10)](https://bharatkaitihas.com/confluence-of-bloody-forces/): इस प्रकार बाबर की धमनियों में मध्य ऐशिया की दो खूनी ताकतों का संगम हो गया था। इन खूंखार आक्रांताओं में से एक का नाम चंगेज खाँ और दूसरे का नाम तैमूर लंग था। तैमूर लंगड़े का चौथा वंशज मिर्जा उमर शेख अपने बाप-दादों की तरह परम असंतोषी जीव था। वह फरगना[1]  का शासक था […] - [दिखकाट की बुढ़िया (11)](https://bharatkaitihas.com/old-lady-of-dikhkat/): दिखकाट की बुढ़िया ने पूरी रात जागकर बाबर को देवभूमि भारत की सम्पन्नता और तैमूर लंग की क्रूरता के किस्से सुनाये। इन किस्सों को सुनकर बाबर के आश्चर्य का पार न रहा। – ‘यह कौनसा गाँव है?’ पहले नौजवान ने अपने माथे पर छलक आये पसीने को अपने सिर की पगड़ी के कपड़े से पौंछते […] - [फिर से बादशाही (12)](https://bharatkaitihas.com/crownship-again/): फिर से बादशाही मिलने के बाद बाबर ने एक बार फिर से अपने बाप-दादों के राज्य पर अधिकार करने का प्रयत्न किया और ईरान के शाह से सहायता मांगी। भाग्य ने बाबर की शीघ्र ही फिर से सुधि ली। जब बाबर के शत्रु शैबानी खाँ ने कुन्दुज के शासक खुसरो शाह को हरा कर उसकी […] - [कराकूयलू (13)](https://bharatkaitihas.com/karakuylu/): तुर्कों की कई प्रबल शाखायें हुई जिन्होंने अलग-अलग स्थानों पर अपने राज्य कायम किये। जो ‘तुर्क’ तुर्किस्तान से आकर ईरान में बस गये थे, उन्हें तुर्कमान कहा जाता था। तुर्कमानों का जो कबीला काली बकरियां चराता था वह कराकूयलू कहलाता था। तुर्की भाषा में ‘करा’ काले को कहते हैं, ‘कूय’ माने बकरी और ‘लू’ का […] - [देवभूमि की ओर (14)](https://bharatkaitihas.com/towards-land-of-deities/): बाबर ने अपनी सात सौ तोपों को गाड़ियों पर रखवाया। और सेना को हिन्दुस्तान की ओर कूच करने का आदेश दिया। सैंकड़ों गाड़ियों को देवभूमि भारत की ओर बढ़ते हुए देखकर बाबर की खूनी ताकत हिलोरें लेने लगी। बाबर को अपनी खूनी ताकत पर पूरा भरोसा था जिसके बल पर वह अपना भाग्य नये सिरे […] - [कोहिनूर (15)](https://bharatkaitihas.com/kohinoor/): हुमायूँ ने बड़े जोर-शोर से बाप का स्वागत किया और लूट में प्राप्त हजारों कीमती पत्थरों के साथ कोहिनूर हीरा भी भेंट किया। बाबर ने इस करामाती हीरे के बड़े किस्से सुने थे। उसे अपने भाग्य पर विश्वास नहीं हुआ कि एक दिन वह खुद इस हीरे का मालिक होगा! बाबर ने भारत पर चार […] - [काले पन्ने (16)](https://bharatkaitihas.com/black-pages/): पूरे चार सौ सालों से सैंकड़ों हिन्दू नरेश और लाखों हिन्दू वीर अपने आराध्य की जन्मभूमि को फिर से प्राप्त करने के लिये प्राणों की आहुतियाँ दे रहे हैं। इन युद्धों में मीरबाकी के बहुत से शिलालेख नष्ट हो गये किंतु इतिहास के काले पन्ने मीरबाकी की क्रूरताओं के किस्से आज तक कहते हैं। बाबर […] - [अस्सी घाव (17)](https://bharatkaitihas.com/eighty-wounds/): राणा ने अपने शत्रुओं का जी भर कर मान मर्दन किया किंतु इन लड़ाईयों में उसके शरीर के हर हिस्से पर घाव लग गये। उसके शरीर पर कुल अस्सी घाव थे। वह एक आँख, एक हाथ और एक पैर से वंचित हो गया था किंतु उसकी शक्तियाँ अब भी उसके पास थीं। राजस्थान में मेवाड़ […] - [प्रसाद (18)](https://bharatkaitihas.com/holy-offerings/): राजकुमार विक्रमादित्य ने अपने पिता महाराणा संग्राम सिंह से अपनी बड़ी भाभी मीराबाई की शिकायत की कि मीरा बाई प्रसाद लेने से मना कर रही हैं। क्योंकि मीराबाई की दृष्टि में यह प्रसाद नहीं भैंसे का मांस है। – ‘प्रसाद का अपमान! भाभीसा, आप तो स्वयं को भगवान की भक्त कहती हैं!’ विक्रमादित्य ने चीख […] - [प्रस्थान (19)](https://bharatkaitihas.com/departure/): जब महाराणा सांगा ने बाबर से युद्ध करने के लिए चित्तौड़ से प्रस्थान किया तो उन्होंने महाराणी द्वारा तिलक किए जाने के बाद मीराबाई के हाथों से भी तिलक करवाया। सांगा का मन मीरा के भविष्य को लेकर उद्वेलित था। जब महाराणा सांगा ने देखा कि बाबर ने देखते ही देखते दिल्ली और आगरा पर […] - [खानुआ (20)](https://bharatkaitihas.com/khanua/): जिस दिन बाबर का मुख्य सेनापति अपने प्रथम सैनिक दस्ते के साथ खानुआ पहुँचा उसी दिन राणा सांगा ने बाबर पर आक्रमण किया। अरावली की उपत्यकाओं से निकलने वाली गंभीरी नदी की विपुल जल राशि आज भले ही काल के गाल में समा चुकी है किंतु उन दिनों अपने नाम के अनुरूप सचमुच ही वह […] - [बैरमबेग (21)](https://bharatkaitihas.com/bairambeg/): चांदनी के उजाले में पहली ही नजर में बादशाह को चालीसवाँ सिपाही जंच गया। सचमुच ही वह रात बैरमबेग की थी। उसके बुद्धि चातुर्य से हुमायूँ ने मात्र तीन सौ सिपाहियों के बल पर उसी रात फतह हासिल कर ली। बाबर अपना टूटे हुए दिल में नाउम्मीदियों का समुद्र भर कर ट्रांसआक्सियाना से अफगानिस्तान लौटा […] - [विषपान (22)](https://bharatkaitihas.com/poisoning/): मीरा ने दासी के हाथ से प्याला लेकर विषपान किया और हंस कर बोली जब राणाजी कहते हैं कि यह गिरिधर गोपालजी का चरणामृत है तो असत्य नहीं कहते हैं। यदि विष होता तो मैं जीवित थोड़े ही रहती। राणा सांगा की सारी आशंकायें सही सिद्ध हुई थीं। वह स्वयं युद्ध भूमि से लौट कर […] - [नशेड़ी अंग्रेज मजिस्ट्रेट से निर्दोष सुनार के पक्ष में फैसला लिखवाया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-got-verdict-in-favor-of-innocent-goldsmith-from-drunk-british-magistrate/): सुनार पर आरोप लगा कि वह व्यभिचार की नीयत से एक औरत के घर में घुसा था। झूठे गवाहों के बल पर सुनार को सजा होना निश्चित था। सुनार ने वल्लभभाई को अपना वकील बनाया। वादी पक्ष के झूठे गवाह इतने मजबूत थे कि उनकी बात काट पाना संभव नहीं था। - [सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट को वल्लभभाई के आगे जिद्द छोड़नी पड़ी](https://bharatkaitihas.com/crazy-english-magistrate-had-to-give-up-his-stubbornness-in-front-of-vallabhbhai/): यद्यपि अंग्रेजी न्याय व्यवस्था साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर चलती थी किंतु बहुत से सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट अपनी सनक के कारण साधारण मुकदमों में भी तरह-तरह के निर्णय दिया करते थे। कुछ सनकी अंग्रेज मजिस्ट्रेट मुकदमों की सुनवाई के लिए भी अजीब-अजीब से तरीके अपनाया करते थे। वे वकीलों, गवाहों, अभियुक्तों एवं वादियों को […] - [विट्ठलभाई पटेल को बैरिस्ट्री पढ़ने लंदन भेज दिया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-sent-vitthalbhai-to-london-in-his-place-to-study-baristry/): यह संसार में अपनी तरह का एक ही प्रकरण है जिसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल को अपनी जगह बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने लंदन भेज दिया। वल्लभभाई बोरसद के न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे थे किंतु उनकी इच्छा थी कि वे इंग्लैण्ड से बैरिस्ट्री पढ़ कर आयें। उन्होंने इंग्लैण्ड जाने […] - [वल्लभभाई की उदारता](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-used-to-give-his-thing-to-others/): व्यक्तित्व की विराटता और स्वभाव की उदारता यद्यपि एक दूसरे के पूरक हैं किंतु सरदार पटेल में ये दोनों गुण चरम पर मौजूद थे जिनका लाभ न केवल उन्हें या उनके परिवार को अपितु सम्पूर्ण मानवता को भी मिला। - [सरदार पटेल में कर्त्तव्यनिष्ठा - कोर्ट में बहस करते रहे वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-continued-to-argue-in-court-even-after-receiving-telegram-of-his-wifes-death/): 11 जनवरी 1909 को अचानक झबेरबा का निधन हो गया। वल्लभभाई को तार द्वारा इस दुःखद घटना की सूचना दी गई। - [बैरिस्टर बनने का संकल्प](https://bharatkaitihas.com/wifes-death-could-not-change-the-idea-to-become-barrister/): बच्चों को पालने की विकट समस्या आ खड़ी हुई। इस पर भी वल्लभभाई ने लंदन जाकर बैरिस्टरी पढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा। - [रोमन कानून याद कर लिया वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-memorized-roman-law-during-his-journey/): रोमन कानून बहुत लम्बा और जटिल तो था ही, साथ ही भारतीय नैसर्गिक न्याय चिंतन से बिलकुल उलट था। इस कारण रोमन कानून को समझना और उसे याद रख पाना एक दुष्कर कार्य था। - [लंदन में वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/all-day-either-walking-or-reading-books-vallabhbhai/): सरदार पटेल भारत में अपनी जमी-जमाई वकालात छोड़कर बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने इंग्लैण्ड गए थे। लंदन में वल्लभभाई अत्यंत साधारण जिंदगी जीते थे। इस समय उनकी आय का कोई भी स्रोत नहीं था। जब उनके अग्रज विठ्ठलभाई बैरिस्ट्री की पढ़ाई करने लंदन गए थे तब सरदार ने उनकी पढ़ाई तथा उनके परिवार का खर्चा उठाया […] - [लंदन में धूम](https://bharatkaitihas.com/boy-from-karamsad-village-made-a-splash-in-london/): शेडर्ज नामक एक अंग्रेज किसी समय गुजरात में कमिश्नर रहा था, उसने जब वल्लभभाई के चित्र अखबारों में देखे तो वह स्वयं चलकर वल्लभभाई के पास पहुंचा और बधाई देने के साथ-साथ अपने घर पर भोजन करने का निमंत्रण देकर गया। - [व्यावसायिक सफलता के गुर सीख लिये वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-learned-all-tricks-of-professional-success/): वल्लभभाई ने अंग्रेजों के रहने, खाने, चलने, बोलने तथा परस्पर व्यवहार करने के तरीकों को भी गहराई से परखा। - [जज नहीं बने वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/instead-of-becoming-a-judge-in-high-court-vallabhbhai-decided-to-practice-in-ahmedabad/): वल्लभभाई ने विनम्रतापूर्वक इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वे स्वयं अपनी प्रैक्टिस करेंगे। - [मिस्टर फॉक्स के छक्के छुड़ा दिये वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-defeated-fox/): अहमदाबाद का एक कुख्यात अंग्रेज मजिस्ट्रेट मिस्टर फॉक्स दिन में कोर्ट लगाने के स्थान पर रात्रि में 9 बजे से 12 बजे तक कोर्ट लगाता था। - [आत्मविश्वास से परिपूर्ण वल्लभभाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-became-invincible-in-the-world-of-law/): आत्मविश्वास से परिपूर्ण वल्लभभाई का यह व्यक्तित्व स्वतंत्रता संग्राम के समय पूरी तरह तो नहीं बदला, हाँ उन्होंने अंग्रेजी हैट-टाई और सूट-बूट छोड़कर देशी झब्बा और धोती धारण कर ली। - [मुवक्किल की जमानत](https://bharatkaitihas.com/on-two-questions-of-vallabhbhai-magistrate-granted-bail-to-his-client/): वल्लभभाई ने दूसरा प्रश्न पूछा कि यदि ऐसा नहीं है तो उनके मुवक्किल को जमानत क्यों नहीं मिली जबकि उसके विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण भी नहीं है ? - [ब्रिज के खिलाड़ी सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/at-request-of-mrs-wadia-patel-freed-her-husband-from-condition-at-behest-of-mrs-wadia/): जब तीसरे दिन का खेल चल रहा था तब वाडिया की पत्नी क्लब में आईं और उन्होंने वल्लभभाई से अनुरोध किया कि वे खेल को बंद कर दें। - [किसान की गुदड़ी के लाल थे वल्लभभाई!](https://bharatkaitihas.com/gandhi-was-son-of-minister-but-vallabhbhai-grew-up-in-farmer-house/): जहाँ दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेज जाति ने गांधी का इतना अपमान किया था कि वे तिलमिलाकर भारत लौट आये थे, वहीं भारत के गोरे मजिस्ट्रेट, वल्लभभाई का सामना करने से घबराते थे। - [प्लेग रोगियों की सेवा करते-करते स्वयं भी प्लेग की चपेट में आ गये पटेल](https://bharatkaitihas.com/while-serving-plague-patients-patel-himself-came-in-grip-of-plague/): वल्लभ भाई ने कुछ लोगों को अपने साथ लेकर एक समिति बनाई जो लोगों को इस महामारी से छुटकारा दिलाने की दिशा में काम करने लगी। - [चम्पारन आंदोलन में गांधीजी की ओर ध्यान गया पटेल का!](https://bharatkaitihas.com/after-champaran-movement-patel-got-attention-of-gandhi/): सरदार पटेल व्यावहारिक मनुष्य थे। उन्हें अति आदर्शवाद और अति काल्पनिकता की बातें अच्छी नहीं लगती थीं। इस कारण उन्हें मोहनदास कर्मचंद गांधी के भाषणों से अरुचि थी। - [मोहनदास गांधी से भेंट](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-patel-and-mohandas-gandhi-meet-first-time-in-godhra/): उस समय तक देश में गांधी, नेहरू और पटेल को बहुत कम लोग जानते थे जबकि बाल गंगाधर तिलक के भाषणों की धूम मची हुई थी। लोकमान्य तिलक को गुजराती नहीं आती थी इसलिये वे हिन्दी में बोले और शापर्डे ने दुभाषिया बनकर उनके भाषण का गुजराती में अनुवाद सुनाया। - [गुजरात में बेगार](https://bharatkaitihas.com/byefforts-of-vallabhbhai-forced-labor-banned-in-gujarat/): वल्लभभाई ने अपनी पूर्व चेतावनी के अनुसार, बेगारी न देने के आह्वान के पर्चे छपवाकर गांवों में बंटवा दिये। इसके बाद जब सरकारी अधिकारी गांवों में दौरे पर गये तो लोगों ने बेगार देने से मना कर दिया तथा अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों से बेगार लेने का चलन बंद हो गया। - [खेड़ा आंदोलन में अंग्रेजी वेशभूषा त्याग दी वल्लभभाई ने](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-renounced-english-costumes-in-kheda-movement/): सरदार पटेल तथा मोहनदास गांधी ने खेड़ा क्षेत्र के किसानों का आह्वान किया कि वे सरकार को लगान न दें। इस पर सरकार ने किसानों पर अत्याचार किये तथा उनकी जमीनें जब्त कर लीं। - [सत्याग्रह का मार्ग](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-proved-that-path-of-satyagraha-is-effective/): सरदार पटेल ने सिद्ध कर दिया कि सत्याग्रह का मार्ग प्रभावशाली है! मोहनदास कर्मचंद गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में प्रिटोरिया सरकार के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन किया था जो बुरी तरह विफल रहा था। सत्याग्रह आंदोलन को गांधीजी सत्याग्रह का मार्ग कहते थे। गांधीजी ने भारत में भी सत्याग्रह आंदोलन का प्रयोग दोहराना चाहा। कांग्रेसी नेता […] - [विश्वयुद्ध के मोर्चे पर भारतीय युवक](https://bharatkaitihas.com/indian-youth-joined-english-army-at-vallabhbhais-suggestion/): जो भारतीय नौजवान प्रथम विश्वयुद्ध के मोर्चे से लौट कर आये, उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना संसार के अन्य देशों से की। उन सैनिकों को भरोसा हो गया कि भारत में भी संसार के समक्ष पूरी तरह तन कर खड़े होने की क्षमता है। - [असहयोग आंदोलन की बागडोर](https://bharatkaitihas.com/gandhiji-handed-over-command-of-non-cooperation-movement-to-sardar/): कांग्रेस ने जनरल डायर के कुकृत्य की जांच की मांग की। कांग्रेस को अपेक्षा थी कि रौलट एक्ट के विरोध में गांधीजी कुछ करेंगे किंतु गांधीजी बीमार थे इसलिये वे कुछ निर्णय नहीं ले सके। - [असहयोग आंदोलन का नेतृत्व](https://bharatkaitihas.com/sardar-and-his-brother-left-vakalat-to-participate-in-non-cooperation-movement/): गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का नेतृत्व सरदार पटेल को सौंपा था। असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिये सरदार पटेल ने वकालात छोड़ दी। उनके साथ उनके बड़े भाई विठ्ठल भाई पटेल भी वकालात छोड़कर पूरी तरह से असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा पुनः असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव स्वीकार कर […] - [सत्याग्रह आंदोलन बंद](https://bharatkaitihas.com/after-patels-support-country-accepted-decision-to-stop-satyagraha-movement/): गांधीजी के इस निर्णय से देश की जनता कांग्रेस के विरुद्ध भड़क गई। जनता की दृष्टि में चौरीचौरा की घटना इतनी बड़ी नहीं थी, जिसके कारण राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रश्न को भी छोड़ दिया जाये। कांग्रेस के भीतर भी गांधीजी के विरुद्ध आवाजें उठने लगीं। - [झण्डा जुलूस](https://bharatkaitihas.com/nagpur-collector-lifted-ban-on-flag-procession-of-vallabhbhai/): उस काल में बहुत कम आयु के अंग्रेज लड़के बिना कोई समुचित प्रशिक्षण दिए ब्रिटिश भारत के जिलों में कलक्टर लगा दिए जाते थे। ये अनुभवहीन एवं प्रशिक्षणहीन अंग्रेज लड़के जनता पर मनमर्जी का कानून थोप देते थे जिसे उन दिनों व्यंग्य से पॉकेट रूल कहा जाता था। - [बोरसद आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-launched-an-unprecedented-movement-against-government-arbitrariness/): सरकार ने अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था के नाम पर बोरसद के लोगों पर 2.40 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक कर लगा दिया। लोगों ने वल्लभभाई से सरकार की इस कार्यवाही की शिकायत की। - [अहमदाबाद में स्कूल खोलकर सरकार को करारा जवाब दिया सरदार पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-gave-a-befitting-reply-to-english-government-by-opening-schools/): पटेल ने इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स को लिखा कि अब वह नगर पालिका के स्कूलों को न तो अनुदान भेजे और न निरीक्षण करने के लिये आये। - [गुजरात की जनता ने पटेल को गरीब नवाज तथा अपना मसीहा कहा](https://bharatkaitihas.com/people-of-gujarat-called-patel-as-god-of-poor/): वल्लभभाई ने वायसराय को लोगों की समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरदार पटेल ने मांग की कि सरकार अपने खर्चे से उन लोगों के मकान बनवाये जो फिर से मकान बनावाने की स्थिति में नहीं हैं। - [बारदोली आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-told-government-that-i-am-not-outsider-in-bardoli/): सरदार पटेल ने किसानों से पूछा कि यदि वे सरकार के विरुद्ध आंदोलन करेंगे तो सरकार उनकी जमीनें, मवेशी और घरबार छीन लेगी। उन्हें जेलों में ठूंस देगी। उनके गांवों में आग लगायेगी और औरतों तथा बच्चों पर डण्डे बरसायेगी। क्या वे इतनी तकलीफें सहन करने के लिये तैयार हैं ? - [हाथी और मच्छर](https://bharatkaitihas.com/britsh-sarkar-is-a-mad-elephant-i-am-going-to-be-a-mosquito-in-its-ear/): बारदोली में अंग्रेज सरकार द्वारा की जा रही मनमानियों के विरोध में सरदार पटेल ने जनता से कहा कि यह हाथी और मच्छर की लड़ाई है। गोरी सरकार पागल हाथी है, इम इसके कान में मच्छर बनकर घुसेंगे! बारदोली आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने के लिये वल्लभभाई ने सूक्ष्मता से तैयारी की। उन्होंने बारदोली […] - [बारदोली आंदोलन की सफलता](https://bharatkaitihas.com/white-government-was-scared-by-the-sound-of-drums/): पटेल ने लोगों से कहा कि गलत आदमी का बहिष्कार करना समाज का अधिकार है किंतु उसके विरुद्ध हिंसा न की जाये। यदि वह व्यक्ति पारिवारिक समारोह में किसी को भोजन के लिये बुलाये तो बेशक उसके घर कोई न जाये किंतु यदि वह बीमार पड़ जाये तो उसकी सेवा करने के लिये गांव का प्रत्येक व्यक्ति उसके घर जाये। - [सरदार पटेल का सम्मान](https://bharatkaitihas.com/rural-women-with-torn-rags-marked-tilak-on-patels-head/): जब बारदोली के किसानों ने सरकार की बात नहीं मानी तथा बढ़ा हुआ कर नहीं चुकाता तो सरकार ने किसानों पर अत्याचार बढ़ा दिए। इस पर सरदार पटेल ने गांवों का दौरा बढ़ा दिया। लोग सरदार पटेल का सम्मान करने के लिए आतुर रहते। फटे चीथड़ों वाली ग्रामीण महिलाएं पटेल के भाल पर तिलक लगाती […] - [गांधीजी का मंत्र](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-did-first-successful-test-of-mantra-of-gandhiji/): सरदार पटेल ने गांधीजी का मंत्र अपनी जीवन में उतारा तथा उसे सार्वजनिक जीवन में सिद्ध करके दिखाया। यह मंत्र था सत्य पर अड़े रहना, जिसे गांधीजी सत्याग्रह कहते थे। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के पत्र को पढ़कर बम्बई का गवर्नर हिल गया। उसे सरदार पटेल की शक्ति का अनुमान हो गया। उसे यह भी समझ […] - [राजनैतिक मंच से क्रांति नहीं होती](https://bharatkaitihas.com/shouting-from-political-platform-does-not-lead-to-revolution/): प्रायः लोगों को यह भ्रम होता है कि किसी भी समाज में अथवा राष्ट्र में राजनीतिक मंच से क्रांति होनी संभव है किंतु वास्तविकता यह है कि राजनैतिक मंच से चिल्लाने से क्रांति नहीं होती! बारदोली की सफलता के बाद सरदार पटेल एक चमत्कारिक पुरुष के रूप में देखे जाने लगे। उन्होंने वह कर दिखाया […] - [बालगंगाधर तिलक की अनुगूंज](https://bharatkaitihas.com/sound-of-bal-gangadhar-tilak-was-heard-in-voice-of-sardar-patel/): इस काल तक सरदार पटेल न केवल गुजरात कांग्रेस के अपितु अखिल भारतीय कांग्रेस के भी सर्वमान्य नेता बन गए थे। उन्होंने बोरसद, खेड़ा, अहमदाबाद एवं बारदोली में सफल आंदोलन चलाए थे। कांग्रेसी नेताओं को सरदार पटेल की वाणी में बालगंगाधर तिलक की अनुगूंज सुनाई देती थी। अभी सरदार पटेल महाराष्ट्र में जन-जागरण के कार्य […] - [बिहारी किसानों की दुर्दशा देखकर सरदार पटेल का हृदय रो उठा](https://bharatkaitihas.com/seeing-plight-of-farmers-of-bihar-sardar-patels-heart-wept/): जब से देश में तुर्कों का आगमन हुआ था, तब से पूरे देश के किसानों की हालत खराब होने लगी थी। मुगलों के काल में भी किसानों का बहुत शोषण हुआ। अंग्रेजों ने जमींदारी व्यवस्था को मजबूत करके किसानों के शोषण के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित कर दिया। बिहारी किसानों की दुर्दशा देखकर सरदार […] - [लाहौर कांग्रेस की अध्यक्षता](https://bharatkaitihas.com/on-gandhijis-wish-patel-refused-to-become-the-president-of-the-congress/): सरदार पटेल और मोहनदास कर्मचंद गांधी दोनों गुजराती थे। इस समय तक गांधीजी को जितनी भी सफलता मिली थी, उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल का हाथ अधिक था। गांधीजी अपने दम पर अब तक कोई सफलता प्राप्त नहीं कर सके थे। फिर भी गांधजी को पटेल की बजाय नेहरू अधिक पसंद थे। गांधीजी की इच्छा देखकर […] - [सविनय अवज्ञा आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/patel-said-when-guns-are-fired-then-history-is-made/): मरना है तो बहादुरों की मौत मरो। कायरों की नहीं। जब तोपों से गोले बरसते हैं, हवाई जहाजों से बम गिरते हैं, हजारों की संख्या में लोग मरते हैं, तभी इतिहास बनता है। - [गांधीजी की दाण्डी यात्रा को सफल बनाने के लिये पटेल गांव-गांव घूमे](https://bharatkaitihas.com/patel-traveled-from-village-to-village-to-make-gandhijis-dandi-march-successful/): गांधीजी की दाण्डी यात्रा को भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। इस यात्रा ने पूरे देश के लोगों का ध्यान कांग्रेस के कार्यक्रमों की तरफ खींचा। जब गांधीजी पैदल चले तो सैंकड़ों भावुक भारतीय भी इस आशा में उनके साथ हो लिए कि एक दिन यही व्यक्ति भारत को आजादी दिलवाएगा। […] - [ब्रिटिश कमिश्नर का स्वागत](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-refused-to-stand-to-welcome-british-commissioner/): एक बार कमिश्नर गेरेट जेल के दौरे पर आया। उसके सम्मान के लिये समस्त कैदियों को एक पंक्ति में खड़े होने के लिये कहा गया। सरदार ने ब्रिटिश कमिश्नर का स्वागत करने के लिए खड़े होने से मना कर दिया। - [सिंह जेल में था और गीदड़ उसका घर खराब कर रहे थे](https://bharatkaitihas.com/loin-was-in-jail-and-jackals-were-spoiling-his-house/): सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान सरदार पटेल ने जनता में सरकार का विरोध करने का साहस संचारित किया जिसके कारण सरकार घबरा गई। सरकार ने सरदार पटेल को जेल में ठूंस दिया तथा सरदार की माता पर अत्याचार किया। यह वैसा ही था जैसे कि सिंह जेल में था और गीदड़ उसका घर खराब कर […] - [सरदार पटेल की सिंह-गर्जना से गोरी सरकार कांप उठी](https://bharatkaitihas.com/white-government-shook-with-lions-roar-of-sardar-patel/): 25 जनवरी 1931 को विशेष आदेश जारी करके भारत सरकार ने कांग्रेस के 26 शीर्ष नेताओं को रिहा कर दिया ताकि कांग्रेस को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिये मनाया जा सके। रिहा होने वाले नेताओं में सरदार पटेल भी थे। - [गांधी-इरविन पैक्ट से देश में उत्तेजना फैल गई](https://bharatkaitihas.com/gandhi-irwin-pact-spread-excitement-in-country/): देश की आजादी का मुद्दा पूरी तरह गौण हो गया था। क्रांतिकारियों को उनके भाग्य पर अकेला छोड़ दिया गया था। सुभाषचंद्र बोस तथा विट्ठलभाई उस समय विदेश में थे। - [कराची सम्मेलन की अध्यक्षता](https://bharatkaitihas.com/sardar-gets-the-thorny-crown-of-chairmanship-of-karachi-conference/): सरदार ने कहा कि इस समय गांधीजी की आयु 63 वर्ष और मेरी आयु 56 वर्ष है। हम लोग अपने जीवन में ही देश को स्वतंत्र देखना चाहते हैं, इसलिये आपसे अधिक व्यग्र हम हैं। सरदार के इन शब्दों से युवकों का गुस्सा ठण्डा हुआ। - [लौह निर्मित हैं सरदार](https://bharatkaitihas.com/whites-did-not-know-that-sardar-was-made-of-iron-not-of-flesh-and-flesh/): गोरों को पता नहीं था कि हाड़-मांस से नहीं, लौह निर्मित हैं सरदार! अंग्रेजी सरकार वल्लभभाई को अन्य नेताओं की तरह मानकर व्यवहार कर रही थी किंतु सरकार को पता नहीं था कि हाड़-मांस से नहीं, लौह निर्मित हैं सरदार! गोलमेज सम्मेलन के बाद गांधी ने लंदन में भारत मामलों के मंत्री होरे से भेंट […] - [सोने का सरदार](https://bharatkaitihas.com/selfless-service-turned-iron-sardar-gold-lord/): सरदार पटेल ने स्वयंसेवकों के दल गठित किये जो गांव-गांव घूमकर लोगों की सेवा करते, मृतकों का दाह संस्कार करते तथा ग्रामीणों को प्लेग से बचने और उससे लड़ने के तरीके बताते। - [चुनावी टिकटों का बंटवारा करने के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत](https://bharatkaitihas.com/patel-formulated-guidelines-for-election-ticket-distribution/): चुनावी टिकटों का बंटवारा राजनीतिक दलों के लिए बहुत बड़ा संकट रहा है। जो लोग निःस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करते हैं, वे अपने लिए कभी पद नहीं मांगते किंतु जो लोग सत्ता एवं शक्ति प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों में घुस जाते हैं, वे चुनावी टिकटों का बंटवारा होते समय चालाकियां दिखाकर […] - [सरदार पटेल साम्प्रदायिक हैं!](https://bharatkaitihas.com/nariman-accuses-sardar-patel-of-being-communal/): नरीमन ने इसे अपना अमान समझा और अपने प्रभाव वाले अखबारों में सरदार पटेल के विरुद्ध बहुत सी अनर्गल बातें छपवाईं जिनका सीधा-सीधा अर्थ यह होता था कि सरदार पटेल साम्प्रदायिक हैं इसलिये उन्होंने पारसी धर्म के नरीमन को बम्बई विधान सभा में कांग्रेस का नेता नहीं बनने दिया। - [गांधीजी को समर्थन](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-once-again-supported-gandhiji-in-the-hour-of-crisis/): संकट की घड़ी में एक बार फिर सरदार पटेल ने गांधीजी को समर्थन दिया! गांधीजी और सरदार पटेल के बीच बड़े विचित्र सम्बन्ध थे। सरदार पटेल प्रायः गांधीजी की बातों से सहमत नहीं होते थे किंतु गांधीजी जब कांग्रेस पर अथवा सरदार पटेल पर अपना व्यक्तिगत निर्णय थोप देते थे तो सरदार आंख मूंदकर उसे […] - [गांधीजी का अंधानुकरण](https://bharatkaitihas.com/patel-used-to-follow-gandhiji-blindly-without-reality/): कांग्रेस की विचित्र स्थिति थी। पहले विश्वयुद्ध में भी अंग्रेजों ने भारत के लोगों से पूछे बिना भारत को विश्वयुद्ध में धकेल दिया था और गांधीजी ने वायसराय से समझौता करके भारतीय नौजवानों को सेना में भरती होने का अभियान चलाया था। - [भारत छोड़ो आंदोलन में जनता की प्रतिक्रिया पर सरदार पटेल को गर्व था](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-proud-of-publics-reaction-to-quit-india-movement/): एक तरफ अंग्रेज अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहे थे और दूसरी ओर जापान का विजय रथ तेजी से आगे बढ़ रहा था। कांग्रेस की ढुलमुल और गलत नीतियों से दुःखी होकर सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज का गठन किया तथा बर्मा की तरफ से भारत में प्रवेश कर लिया। - [शिमला सम्मेलन 1945 में भाग लेने के लिये पटेल को जेल से रिहा किया गया](https://bharatkaitihas.com/patel-released-from-jail-to-attend-shimla-conference/): डॉ. भीमराव अम्बेडकर चाहते थे कि स्वतंत्र भारत में दलित जातियों को उचित स्थान दिया जाये। अंग्रेज चाहते थे कि भारत को पूर्ण स्वतंत्रता न देकर डोमिनियन स्टेटस दिया जाये। - [भारतीय सैनिक और सरकार](https://bharatkaitihas.com/sardar-made-a-pact-between-indian-soldiers-and-white-government/): 20 जनवरी 1946 को कराची में वायुसेना के सैनिकों ने आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों के समर्थन में हड़ताल कर दी जो बम्बई, लाहौर और दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालयों पर भी फैल गई। - [पटेल प्रधानमंत्री नहीं बने](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-could-not-become-prime-minister/): गांधीजी को लगता था कि नेहरू ने यूरोप, चीन, रूस आदि देशों की यात्रा की थी इसलिये अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी से बात करने में नेहरू अधिक सक्षम थे। - [सरदार पटेल और चर्चिल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-warned-winston-churchill/): विंस्टन चर्चिल समझ गये कि समय का पहिया तेजी से घूम रहा है, यदि समझदारी नहीं दिखाई गई तो इंग्लैण्ड को भारत की मित्रता से हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिये चर्चिल ने विदेश सचिव ऐंथनी हेडन के द्वारा पटेल को यह संदेश भिजवाया- 'मुझे पटेल के प्रत्युत्तर से बड़ा आनंद हुआ। - [मुस्लिमलीग को गृह-मंत्रालय न देने पर अड़ गये सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-adamant-on-not-giving-home-ministry-to-muslim-league/): जिन्ना ने सरदार पटेल से गृह मंत्रालय छीनने की चाल चली। उसने नेहरू से कहा कि यदि गृहमंत्री मुस्लिम लीग का बने तो मुस्लिम लीग अंतरिम सरकार में सम्मिलित हो जायेगी। - [लॉर्ड वैवेल भारत को और दस वर्ष और गुलाम रखेगा](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-believed-that-wavell-would-keep-india-slave-for-another-ten-years/): वायसराय को इंगलैण्ड की सरकार पर अविश्वास था और प्रधानमंत्री एटली, वायसराय पर विश्वास नहीं करता था। भारतीय नेताओं में भी परस्पर अविश्वास का वातावरण था। सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू भारत के विभाजन को अनिवार्य मानते थे! - [मुस्लिम लीग का बजट](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-opposes-budget-presented-by-minister-of-muslim-league/): वित्तमंत्री की हैसियत से लियाकत अलीखां को सरकार के प्रत्येक विभाग में दखल देने का अधिकार मिल गया था। वह प्रत्येक प्रस्ताव को या तो अस्वीकार कर देता था या फिर उसमें बदलाव कर देता था। - [पटेल और नेहरू ने गांधीजी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया](https://bharatkaitihas.com/patel-and-nehru-rejected-gandhis-proposal/): विभाजन को रोकने के लिये गांधीजी इस सीमा तक आतुर थे कि उन्होंने वही सोच रखा था जो कभी राजा सोलोमन ने सोचा था। बच्चे को काट कर आधा न बांटो। पूरा देश ही जिन्ना को दे दो। जिन्ना अपनी मुस्लिम लीग के साथ सामने आयें, सरकार बनायें। देश के तीस करोड़ नागरिकों पर राज्य करें। - [देश का विभाजन नहीं होता तो हमारे हाथ से सबकुछ चला जाता](https://bharatkaitihas.com/sardar-believed-that-if-country-had-not-been-divided-then-everything-would-have-gone/): यदि शरीर का एक भाग खराब हो जाये तो उसको शीघ्र हटाना ठीक है, ताकि सारे शरीर में जहर न फैले। मैं मुस्लिम लीग से छुटकारा पाने के लिए भारत का कुछ भाग देने के लिए तैयार हूँ। - [मुसलमानों के दुश्मन नहीं थे सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-not-an-enemy-of-muslims-and-pakistan/): मोरारजी देसाई ने लिखा है- 'मुझे लगभग 20 वर्ष तक सरदार के नेतृत्व में कार्य करने का अवसर मिला निजी अनुभव के आधार पर मैं दावे से कह सकता हूँ कि सरदार एक मात्र व्यक्ति थे जो साम्प्रदायिक, जातिगत या धार्मिक पूर्वाग्रह से मुक्त थे और सभी धर्मों तथा समुदायों के प्रति सद्भाव रखते थे।' - [शरणार्थियों का पुनर्वास करने के लिये दिन-रात एक कर दिये सरदार पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/patel-did-hard-work-to-rehabilitate-refugees/): जहाँ शाम को खाली मैदान दिखाई देते थे, सुबह उठकर लोग देखते थे कि उन मैदानों में रातों-रात हजारों शरणार्थियों ने डेरे जमा लिये हैं। ये लोग भूख-प्यास, सर्दी, बरसात और बीमारियों के सताये हुए थे और अपना सर्वस्व पाकिस्तान में छोड़कर आये थे। - [आजादी की नाव को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आने वाली थी सरदार पटेल पर](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-going-to-have-responsibility-of-safeguarding-freedom/): दुर्दिन के मसीहाओं ने भविष्यवाणी की थी कि हिंदुस्तान की आजादी की नाव रजवाड़ों की चट्टान से टकरायेगी। सरदार पटेल पर जिम्मदारी आने वाली थी कि आजादी की नाव इस चट्टान टकराकर चूर-चूर न हो जाये। - [राजे-रजवाड़े स्वतंत्र भारत की झोली में डाल दें](https://bharatkaitihas.com/patel-said-to-mountbatten-to-put-all-princes-in-bag-of-india/): सदार पटेल ने माउण्टबेटन से कहा कि वे ब्रिटिश भारत के समस्त राजे-रजवाड़े स्वतंत्र भारत की झोली में डाल दें! भारत के 566 देशी राज्यों में से 12 राज्य, प्रस्तावित पाकिस्तान की भौगोलिक सीमा में स्थित थे जबकि शेष 554 में से अधिकांश, भारतीय क्षेत्रों से घिरे हुए थे। कुछ राज्य प्रस्तावित भारत-पाकिस्तान की सीमा […] - [सरदार पटेल की चुनौती](https://bharatkaitihas.com/a-big-challenge-was-ready-for-sardar-patel/): जिन्ना ने निजाम हैदराबाद से भी सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया क्योंकि उसके प्रति माउंटबेटन का रवैया अत्यंत नरम था। कुछ हिन्दू रियासतों के शासक भी पाकिस्तान में सम्मिलित होने को तैयार हो गये जो कि कांग्रेस के नेताओं से नाराज थे। - [लौह-पुरुष अपनी धोती समेट कर राजाओं के पीछे पड़ जायेगा](https://bharatkaitihas.com/congress-knew-that-iron-man-would-fold-his-dhoti-and-follow-the-kings/): पटेल का जोरदार व्यक्तित्व और मेनन के लचीले दिमाग का संयोग इस मौके पर अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ। - [कोरफील्ड को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-dispatched-corfield-to-england/): सरदार पटेल ने राजनैतिक सलाहकार कोनार्ड कोरफील्ड को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया को इंग्लैण्ड के लिये डिस्पैच करवाया वायसराय के राजनैतिक सलाहकार कोनार्ड कोरफील्ड ने मुहम्मद अली जिन्ना की सहायता करने के लिये, रेजीडेंटों और पॉलिटिकल एजेंटों के माध्यम से देशी राजाओं को भारतीय संघ से पृथक रहने के लिये प्रेरित किया। वायसराय के […] - [बड़ौदा नरेश प्रतापसिंह गायकवाड़ को गद्दी से उतार दिया!](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-dethroned-the-king-of-baroda/): भारत सरकार ने महाराजा प्रतापसिंह गायकवाड़ की मान्यता समाप्त करके उनके पुत्र फतहसिंह को महाराजा बड़ौदा स्वीकार किया। यह राजाओं के लिये बड़ा झटका था, सच्चाई उनकी समझ में आने लगी थी। - [सरदार पटेल का लक्ष्य राजाओं के झुण्ड को हाँककर भारत संघ में लाना था](https://bharatkaitihas.com/sardar-patels-goal-was-to-bring-flock-of-kings-to-union-of-india/): भारत की आजादी के समय जब चारों ओर चीख-चिल्लाहट मची हुई थी तब सरदार पटेल का लक्ष्य भारत के 565 राजाओं में से अधिकांश राजाओं को भारत संघ में सम्मिलित करना था। 5 जुलाई 1947 को रियासती विभाग के अस्तित्व में आते ही सरदार पटेल ने देशी राजाओं से अपील की कि वे 15 अगस्त […] - [सरदार पटेल के हाथ राजाओं की भुजाओं पर कसने लगे](https://bharatkaitihas.com/patels-hand-with-velvet-gloves-tightened-on-kings-arms/): राजा लोग सदियों से अपने राज्यों को भोगते आए थे। पहले वे मुगलों की छत्रछाया में रहे और बार में अंग्रेजों के संरक्षण में रहे किंतु अब उन्हें कांग्रेस शासित भारत में मिलने से डर लग रहा था किंतु सरदार पटेल के हाथ राजाओं की भुजाओं पर कसने लगे। अधिकांश राजाओं को डर था कि […] - [देशी रियासतों का विलय](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-merged-all-princely-states-into-india-before-independence/): भारत की आजादी के समय भारत में 566 देशी रियासतें थीं किंतु पाकिस्तान के अलग हो जाने के कारण उस क्षेत्र की 12 रियासतें पाकिस्तान में चली गईं। सरदार पटेल ने शेष 554 में से 550 देशी रियासतों का विलय भारत में कर लिया। भारतीय राजाओं ने भारत संघ में सम्मिलित होने के लिये एक-एक […] - [लक्षद्वीप पर अधिकार](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-included-lakshadweep-in-india/): लक्षद्वीप में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती थी, इसलिए डर था कि पाकिस्तान इन पर कब्जा कर लेगा किंतु सरदार पटेल ने लक्षद्वीप पर अधिकार कर लिया। जब अरब के मुसलमानों ने दुनिया में इस्लाम फैलाना आरम्भ किया तब उन्होंने दुनिया के उन हिस्सों को अपना पहला निशाना बनाया जो सीरिया और ईरान की […] - [जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान में मिलने की घोषणा करके पटेल को चुनौती दे बैठा](https://bharatkaitihas.com/nawab-of-junagadh-challenged-patel-by-announcing-to-merge-with-pakistan/): जूनागढ़ का नवाब रसूलखानजी कट्टर मुसलमान था। भारत की आजादी के समय उसने प्रयास किया कि जूनागढ़ रियासत पाकिस्तान में शामिल हो जाए। वस्तुतः हैदराबाद, जूनागढ़ और भोपाल नवाब एक ऐसा मुस्लिम गलियारा बनाना चाहते थे जिसका एक सिरा भारत में तो दूसरा सिरा पाकिस्तान में खुलता हो! गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में जूनागढ़ रियासत […] - [माउण्टबेटन का सुझाव](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-refuses-to-accept-mountbattens-suggestion/): माउण्टबेटन का सुझाव था किजूनागढ़ के मसले को यूनाईटेड नेशन्स में ले जाना चाहिये अन्यथा भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ जायेगा। सरदार पटेल ने माउण्टबेटन का सुझाव मानने से मना कर दिया! जूनागढ़ नवाब द्वारा पाकिस्तान में मिलने की घोषणा करने से जूनागढ़ की जनता में बेचैनी फैल गई तथा जनता ने नवाब […] - [निजाम हैदराबाद ने हैदराबाद की समस्या को भारत के पेट में नासूर बना दिया!](https://bharatkaitihas.com/sardar-believed-that-hyderabad-was-like-cancer-in-the-stomach-of-india/): भारत की आजादी के समय हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा राज्य था। यहां की जनता हिन्दू थी किंतु शासक मुसलमान था जिसे निजाम हैदराबाद कहा जाता था। वह भारत में शामिल नहीं होना चाहता था। इसलिए निजाम हैदराबाद ने हैदराबाद की समस्या को भारत के पेट में नासूर बना दिया! 15 अगस्त 1947 तक भारत […] - [हैदराबाद में सत्याग्रह आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/patel-instructed-congress-to-run-satyagraha-movement-in-hyderabad/): जब निजाम हैदराबाद ने भारत में सम्मिलन के पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए तो पटेल ने कांग्रेस को हैदराबाद में सत्याग्रह आंदोलन चलाने का निर्देश दिया ! 9 जून 1947 को निजाम ने वायसराय माउण्टबेटन को एक पत्र लिखा जिसमें उसने अपने मन की अकुलाहट को खुलकर व्यक्त किया- ‘पिछले कुछ दिनों में मैंने स्वाधीनता […] - [माउण्टबेटन योजना घर चली गई!](https://bharatkaitihas.com/patel-said-mountbatten-plan-has-gone-home/): पटेल ने हैदराबाद के नवाब से कहा कि माउण्टबेटन योजना घर चली गई है! उस समय नेहरू यूरोप दौरे पर थे तथा सरदार पटेल कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे थे। वायसराय के दबाव से नवम्बर 1947 में हैदराबाद निजाम ने भारत के साथ स्टेंडस्टिल एग्रीमेंट पर दस्तख्त कर दिये जिसके अनुसार भारत […] - [काश्मीर की समस्या यू.एन.ओ. में ले जाने पर पटेल, जवाहरलाल से नाराज हो गये](https://bharatkaitihas.com/patel-gets-angry-with-jawaharlal-for-taking-problem-of-kashmir-to-uno/): पटेल ने रक्षामंत्री बलदेवसिंह को विश्वास में लेकर भारतीय सुरक्षा दलों को काश्मीर की सीमा पर भारतीय क्षेत्रों में इस प्रकार नियोजित किया जिससे उन्हें तत्काल युद्ध क्षेत्र में भेजा जा सके। - [भोपाल नवाब को घुटने टेकने पर विवश कर दिया!](https://bharatkaitihas.com/patel-forced-bhopal-nawab-to-kneel-down/): सरदार पटेल ने नवाब को पत्र लिखकर उसे धिक्कारा कि मेरे लिये यह एक बड़ी निराशाजनक और दुःख की बात थी कि आपके विवादित हुनर तथा क्षमताओं को आपने देश के उपयोग में उस समय नहीं आने दिया जब देश को उसकी जरूरत थी। - [भारतीय नागरिक सेवाएँ बनाए रखने का निर्णय लिया पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/sardar-decides-to-retain-ics-officers/): भारत की आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू भारतीय नागरिक सेवाएँ भंग करना चाहते थे किंतु सरदार पटेल ने देश का शासन चलाने के लिए भारतीय नागरिक सेवाएँ बनाए रखने का निश्चय किया ताकि देश को मजबूत शासन तंत्र दिया जा सके! स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय नागरिक सेवाओं (आईसीएस) में दक्षिण भारतीयों का बोलबाला […] - [फांसी चढ़ाने का अधिकार](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-want-kings-to-have-right-to-hang-subjects/): देशी रियासतों के राजाओं के पास अपनी जनता को सजा देने के अधिकार थे। वे किसी को भी फांसी पर चड़ा सकते थे।सरदार पटेल नहीं चाहते थे कि भारत की आजादी के बाद भी राजाओं के पास प्रजा को फांसी चढ़ाने का अधिकार हो! देशी राज्यों को भारत में सम्मिलित कर लेना सरदार पटेल की […] - [देशी राज्यों का विलय](https://bharatkaitihas.com/patel-tied-native-states-in-bundle/): देशी राज्यों का विलय स्वतंत्र भारत के सामने एक उलझन भरी समस्या बन गया। राजा लोग किसी भी कीमत पर न अपने राज्य छोड़ना चाहते थे और न अधिकार। भारत संघ में रह गये 554 देशी राज्यों में से अधिकांश, आर्थिक दृष्टि से इतने कमजोर एवं छोटे थे कि वे अपने संसाधनों से एक छोटी […] - [पटेल का व्यावहारिक रुख](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-took-a-very-practical-stand-with-kings/): पांच सौ चौवन राजाओं के सैंकड़ों साल पुराने राज्य खत्म होने जा रहे थे, मुसलमान अपना बोरिया-बिस्तर लेकर पाकिस्तान भाग रहे थे। सिक्खों के सैलाब पश्चिमी पंजाब से भारत की तरफ भागे चल आ रहे थे। सिंध प्रदेश पाकिस्तान में छूट गया था, देश में चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। ऐसी स्थिति में सरदार […] - [राजाओं का धन नहीं, उनके राज्य चाहिये थे!](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-want-wealth-of-kings-but-their-kingdoms/): जब भारत सरकार राजाओं से उनके राज्य छीन रही थी, तब सरदार पटेल ने अत्यंत व्यावहारिक रुख अपाया। लोग चाहते थे कि राजा लोग अपना धन और महल छोड़कर निकल जाएं किंतु सदार पटेल को राजाओं का धन नहीं, उनके राज्य चाहिये थे! सदार पटेल ने भारत के 554 राजाओं के राज्य, भारत में मिलाये […] - [अलवर नरेश तेजसिंह नजरबंद !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-arrested-alwar-king-tej-singh/): राजा लोग विगत कुछ दशकों से अंग्रेजों की छत्रछाया में कांग्रेसी नेताओं से संघर्ष करते आ रहे थे। इसलिए वे देशी की आजादी के समय भी हवा के रुख के परिवर्तन को नहीं पहुंचा सके और भारत सरकार के नेताओं की अवज्ञा करने लगे। जब अलवर नरेश तेजसिंह नजरबंद कर लिया गया, तब जाकर राजाओं […] - [भरतपुर महाराजा का भाग्य](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-protected-the-fate-of-bharatpur-maharaja/): भारत की आजादी के समय भरतपुर महाराजा ने भारत सरकार को नाराज करने वाले कई कार्य किए। इस कारण भारत सरकार भरतपुर महाराजा के विरुद्ध हो गई और उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने पर विचार करने लगी। ऐसी स्थिति में सरदार वल्लभभाई ने भरतपुर महाराजा का भाग्य बचाया। रियासती विभाग भरतपुर राज्य की गतिविधियों से […] - [देशी रियासतों का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/patel-did-what-bismarck-did-in-germany-and-kabur-in-italy/): देशी रियासतों का एकीकरण करके सरदार पटेल ने भारत में वह कर दिखाया जो जर्मनी में बिस्मार्क ने तथा इटली में काबूर ने किया था! सरदार पटेल के नेतृत्व में देशी रियासतों का एकीकरण करने का काम तेजी से चला। दिसम्बर 1947 में उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के 39 राज्यों का उड़ीसा और मध्यप्रान्त में विलय […] - [अजमेर दंगे !](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-got-into-a-dispute-with-jawaharlal-nehru-over-ajmer-riots/): भारत की आजादी के तुरंत बाद हुए अजमेर दंगे सरदार पटेल एवं जवाहर लाल नेहरू के बीच विवाद का विषय बन गए। जवाहर लाल नेहरू ने इन दंगों के बाद हिन्दुओं को कुचलने की तैयारी की जबकि पटेल का मानना था कि दंगे मुसलमानों ने किए थे। 5 दिसम्बर 1947 को अजमेर में साम्प्रदायिक दंगे […] - [नेहरू को फटकार !](https://bharatkaitihas.com/patel-rebuked-by-writing-a-letter-to-nehrus-prominent-personal-secretary/): अजमेर दंगे के बहाने से जवाहर लाल नेहरू जिस तरह की ओछी हरकतें कर रहे थे, उनसे सरदार पटेल को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने नेहरू को फटकार लगाने का निश्चय किया। सरदार के सार्वजनिक वक्तव्य को नेहरू ने अपनी व्यक्गितगत प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और उन्होंने व्यक्तिशः अजमेर भ्रमण का कार्यक्रम बनाया किंतु अचानक […] - [नेहरू को पत्र](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-showed-displeasure-by-writing-a-letter-to-nehru/): यद्यपि सरदार पटेल अजमेर दंगे पर आयंग की यात्रा के लिए आयंगर के माध्यम से नेहरू को फटकार चुके थे किंतु इससे पटेल को संतोष नहीं हुआ। उन्होनें सीधे ही नेहरू को पत्र लिखने का निश्चय किया। 23 दिसम्बर 1947 को सरदार पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर कहा कि आयंगर की अजमेर यात्रा आश्चर्य […] - [नेहरू द्वारा पदत्याग की इच्छा !](https://bharatkaitihas.com/nehru-wrote-a-letter-to-sardar-patel-and-offered-to-step-down/): अजमेर दंगे के बाद सरदार पटेल द्वारा जवाहर लाल नेहरू को लगाई गई फटकार से व्यथित होकर नेहरू द्वारा पदत्याग करने की इच्छा व्यक्त की गई! नेहरू ने सरदार को लिखा कि आपके और मेरे बीच में इस प्रकार की घटनाओं की प्रवृत्ति तथा कठिनाइयां उत्पन्न होने से मैं बहुत अप्रसन्न हूँ। ऐसा लगता है […] - [पटेल-नेहरू विवाद काल के गर्त में समा गया!](https://bharatkaitihas.com/with-death-of-gandhi-patel-nehru-dispute-got-engulfed-in-a-period-of-time/): कश्मीर समस्या अपने चरम पर पहुँच गई थी तथा देश में साम्प्रदायिक तनाव भी अपने उच्चतम स्तर पर था। भारत सरकार इस समय संक्रांति काल में थी। एक छोटा सा धक्का भी बहुत बड़ा नुक्सान पहुँचा सकता था। - [भीमराव अम्बेडकर की नियुक्ति में पटेल की भूमिका](https://bharatkaitihas.com/patel-had-an-important-role-in-appointment-of-ambedkar/): सरदार पटेल ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाने का निश्चय किया किंतु भीमराव अम्बेडकर की नियुक्ति में कठिनाई यह थी कि उस काल की कांग्रेस में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का कद इतना ऊँचा नहीं था। जिस समय भारत की संविधान सभा का गठन हुआ और संविधान का प्रारूप बनाने के लिए […] - [पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये](https://bharatkaitihas.com/patel-protested-against-giving-fifty-five-crore-rupees-to-pakistan/): गांधी ने पटेल की इस बात का यह कहकर विरोध किया कि यदि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये नहीं दिये गये तो उसके बदले में अधिक हिंसा और बदले की कार्यवाही की जायेगी। - [अल्पसंख्यक आयोग का विरोध किया पटेल ने !](https://bharatkaitihas.com/patel-opposes-the-decision-to-set-up-a-minorities-commission/): जब नेहरू ने भारत में रह गए मुसलमानों के लिए अल्पसंख्यक आयोग स्थापित करने का प्रयास किया तो पटेल ने अल्पसंख्यक आयोग का विरोध किया। भारत का विभाजन हिन्दू एवं मुसलमान जनसंख्या के आधार पर किया गया था। चूंकि भारत के मुसलमानों ने हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया था, इसी आधार पर […] - [पटेल-नेहरू द्वंद्व](https://bharatkaitihas.com/patel-did-not-let-nehrus-personal-wishes-dominate-congress/): सरदार पटेल एवं जवाहर लाल नेहरू अलग-अलग व्यक्तित्व के धनी थे। भारत की आजादी के बाद पटेल-नेहरू द्वंद्व अधिक मुखर होकर सामने आया। पटेल ने नेहरू की व्यक्तिगत इच्छाओं को कांग्रेस पर हावी नहीं होने दिया! पटेल एवं नेहरू दोनों ही कांग्रेस के सर्वाग्रणी नेता थे। स्वतंत्रता के समय कांग्रेस में पटेल को अधिक पसंद […] - [सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-rebuilt-ancient-somnath-temple/): आजादी की लड़ाई में सरदार पटेल की उपलब्धियां विलक्षण थीं किंतु आजादी के समय उनकी भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण थी। उन्होंने देश की 554 देशी रियासतों का भारत में सम्मिलन करवाया। स्वतंत्र भारत में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि गुजरात के प्राचीन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाना रही। सोमनाथ का जगत् प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के […] - [शेख अब्दुल्ला की बोलती बंद कर दी पटेल ने!](https://bharatkaitihas.com/patel-stopped-sheikh-abdullah/): कश्मीर समस्या के तीन मुख्य सूत्रधार थे- शेख अब्दुल्ला, जवाहरलाल नेहरू और महाराजा हरिसिंह! तीन की महत्वाकांक्षाओं ने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया तथा कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की समस्या बना दिया। यह समस्या आज भी पूरी तरह नहीं सुलझ सकी है। शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे। शेख अब्दुल्ला का परदादा […] - [गयासुद्दीन तुगलक MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-mcq/): गयासुद्दीन तुगलक MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “तुगलक वंश का संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. तुगलक वंश का संस्थापक कौन था?A) अलाउद्दीन खिलजीB) गयासुद्दीन तुगलक ✅C) मुहम्मद बिन तुगलकD) बलबन 2. गयासुद्दीन तुगलक का […] - [मुहम्मद तुगलक की योजनाएँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-mcq/): मुहम्मद तुगलक की योजनाएँ MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुहम्मद तुगलक की योजनाएँ” विषय पर 80 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. मुहम्मद बिन तुगलक का प्रारंभिक जीवन कैसा था?A) साधारणB) सैनिक की भांति ✅C) राजसीD) व्यापारी 2. मुहम्मद बिन […] - [मुहम्मद तुगलक का शासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-mcq/): मुहम्मद तुगलक का शासन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुहम्मद तुगलक का शासन एवं विफलताएँ” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. मुहम्मद बिन तुगलक का शासन किस प्रकार का था?A) लोकतांत्रिकB) स्वेच्छाचारी एवं निरंकुश ✅C) मिलाजुलाD) समीहित […] - [मुहम्मद तुगलक का चरित्र MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-mcq/): मुहम्मद तुगलक का चरित्र MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुहम्मद तुगलक का चरित्र” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. मुहम्मद तुगलक को किस प्रश्न ने इतिहासकारों के लिए रहस्यमयी बना दिया?A) उसकी युद्ध नीतिB) उसका चरित्र ✅C) […] - [मुहम्मद तुगलक पागल था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मुहम्मद तुगलक पागल था MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मुहम्मद तुगलक पागल था” विषय पर 55 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [सुल्तान फीरोजशाह तुगलक MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-mcq/): सुल्तान फीरोजशाह तुगलक MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुल्तान फीरोजशाह तुगलक विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [फीरोजशाह की धार्मिक नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-mcq/): फीरोजशाह की धार्मिक नीति MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “फीरोजशाह की धार्मिक नीति” विषय पर 30 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [फीरोजशाह की शासनव्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): फीरोजशाह की शासनव्यवस्था MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “फीरोजशाह तुगलक की शासनव्यवस्था” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [फीरोजशाह तुगलक का चरित्र MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-mcq/): फीरोजशाह तुगलक का चरित्र MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “फीरोजशाह तुगलक का चरित्र” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क (✅) दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता ​ - [फीरोजशाह का मूल्यांकन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%a8-mcq/): फीरोजशाह का मूल्यांकन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “फीरोजशाह का मूल्यांकन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. फीरोजशाह का शासन किस धर्म-संप्रदाय के लिए विशेष तौर पर उदार था?a हिन्दूb शियाc सुन्नी ✅d बौद्ध 2. फीरोजशाह ने शासन […] - [तुगलक राज्य का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): तुगलक राज्य का पतन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “तुगलक राज्य का पतन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न हिन्दी में प्रस्तुत हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. तुगलक वंश की स्थापना किसने की थी?a मुहम्मद तुगलकb फीरोजशाह तुगलकc गयासुद्दीन तुगलक ✅d नासिरुद्दीन 2. […] - [सैयद वंश का शासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%a6-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-mcq/): सैयद वंश का शासन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “सैयद वंश का शासन” विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न हिन्दी में प्रस्तुत हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. सैयद वंश की स्थापना किसने की थी?a मुबारकशाहb अलाउद्दीन आलमशाहc खिज्र खाँ ✅d बहलोल लोदी 2. […] - [लोदी वंश का शासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-mcq/): लोदी वंश का शासन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ लोदी वंश का शासन विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गये हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. लोदी वंश की स्थापना किसने की थी?a सिकंदर लोदीb बहलोल लोदी ✅c इब्राहीम लोदीd मलिक काला 2. […] - [दिल्ली सल्तनत का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): दिल्ली सल्तनत का पतन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ दिल्ली सल्तनत का पतन और उसके कारण विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गये हैं। प्रत्येक सही उत्तर के अंत में हरा टिक मार्क ✅ रखा गया है। 1. दिल्ली सल्तनत की स्थापना किस वर्ष हुई थी?a 1192b 1206 ✅c 1326d 1526 […] - [प्रान्तीय राज्यों का उद्भव MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): प्रान्तीय राज्यों का उद्भव MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रान्तीय राज्यों का उद्भव विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर, प्रत्येक सही विकल्प के बाद हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. प्रान्तीय राज्यों का उद्भव किसके कमजोर पड़ने पर हुआ था?a तुगलक शासकों केb मौर्य शासकों केc लोदी शासकों केd खिलजी शासकों […] - [बहमनी राज्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): बहमनी राज्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘बहमनी राज्य‘ विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. बहमनी राज्य की स्थापना किसने की थी?a) मुहम्मद बिन तुगलकb) हसन कांगू ✅c) अलाउद्दीन खिलजीd) महमूद गवां 2. हसन कांगू ने […] - [विजयनगर राज्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): विजयनगर राज्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘विजयनगर राज्य‘ विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. विजयनगर राज्य किस काल का सबसे महत्वपूर्ण हिन्दू राज्य था?a) प्राचीनb) मध्यकालीन ✅c) आधुनिकd) वैदिक 2. विजयनगर राज्य की स्थापना किसने […] - [विजयनगर की सामाजिक दशा MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be-mcq/): विजयनगर की सामाजिक दशा MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‛विजयनगर की सामाजिक दशा’ विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. विजयनगर की सामाजिक दशा किस क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध थी?a) पूर्व भारतb) दक्षिण भारत ✅c) उत्तर भारतd) […] - [विजयनगर राज्य का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): विजयनगर राज्य का पतन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विजयनगर राज्य का पतन विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. विजयनगर राज्य का पतन किसके कारण हुआ?a) हिन्दू राजाओं की कट्टरताb) शिया मुसलमान शासकों की कट्टरता ✅c) […] - [मध्यकालीन कला एवं स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4/): मध्यकालीन कला एवं स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘मध्यकालीन कला एवं स्थापत्य’ विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. भारत में मध्यकालीन स्थापत्य किसके साथ आया?a) फारसी शासकोंb) मध्य एशिया के आक्रांताओं ✅c) गुप्त वंशd) मराठा […] - [मध्यकालीन साहित्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): मध्यकालीन साहित्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मध्यकालीन साहित्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क दिया गया है। 1. भारत का मध्यकालीन साहित्य कितनी धाराओं में बंटा हुआ है?a) एकb) दो ✅c) तीनd) चार 2. पहली धारा किसकी संस्कृति से अनुप्राणित […] - [मध्यकालीन भक्ति आंदोलन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-mcq/): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मध्यकालीन भक्ति आंदोलन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में दिए गए हैं। सही विकल्प के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. मध्यकालीन भक्ति आंदोलन किस काल में चला था?a दिल्ली सल्तनत काल ✅b वैदिक कालc आधुनिक कालd मौर्य काल […] - [भारत में सूफी सम्प्रदाय MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%ab%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af-mcq/): भारत में सूफी सम्प्रदाय MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “भारत में सूफी सम्प्रदाय” विषय से जुड़े 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं, प्रत्येक सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. सूफी सम्प्रदाय किस धर्म से संबंधित है?a इस्लाम ✅b हिन्दू धर्मc ईसाईd सिख 2. सूफी […] - [बाबर का भारत आगमन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a4%ae%e0%a4%a8-mcq/): बाबर का भारत आगमन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “बाबर का भारत आगमन” विषय से संबंधित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न, सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स ✅ सहित: 1. बाबर का असली नाम क्या था?a जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ✅b तैमूर लंगc उमर शेखd अकबर 2. बाबर का पिता कौन था?a उमर […] - [पानीपत का प्रथम युद्ध MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-mcq/): पानीपत का प्रथम युद्ध MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “पानीपत का प्रथम युद्ध” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, प्रत्येक सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. पानीपत का प्रथम युद्ध किसके बीच लड़ा गया था?a इब्राहीम लोदी और बाबर ✅b हुमायूँ और राणा […] - [खानवा की लड़ाई MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%88-mcq/): खानवा की लड़ाई MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “खानवा की लड़ाई” पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, प्रत्येक सही विकल्प के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. खानवा की लड़ाई कब लड़ी गई थी?a 27 मार्च 1527 ✅b 26 मार्च 1528c 1 मई 1526d 10 जनवरी […] - [घाघरा का युद्ध MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-mcq/): घाघरा का युद्ध MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “घाघरा का युद्ध” पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, प्रत्येक सही विकल्प के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. घाघरा का युद्ध किसके बीच लड़ा गया था?a बाबर और अफगानों ✅b बाबर और राजपूतc अकबर और शेरशाहd बाबर […] - [बाबर का चरित्र MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-mcq/): बाबर का चरित्र MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “बाबर का चरित्र तथा उसके कार्यों का मूल्यांकन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. बाबर किस वंश से था?a तैमूर वंश ✅b लोदीc मुग़लd राजपूत 2. बाबर का […] - [हुमायूँ और उसकी समस्याएँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-mcq/): हुमायूँ और उसकी समस्याएँ MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “हुमायूँ और उसकी समस्याएँ” पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, प्रत्येक सही विकल्प के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. हुमायूँ का पूरा नाम क्या था?a नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ ✅b जलालुद्दीन अकबरc बाबर हुमायूँd मुहम्मद हुमायूँ 2. बाबर […] - [हुमायूँ की उपलब्धियाँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-mcq/): हुमायूँ की उपलब्धियाँ MCQ : यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “हुमायूँ की सामरिक उपलब्धियाँ” विषय से सम्बंधित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, प्रत्येक सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. किस मुगल शासक ने भारत में मुगल सल्तनत की पुनर्स्थापना की?a अकबरb बाबरc हुमायूँ ✅d शेरशाह 2. […] - [हुमायूँ - शेरखाँ संघर्ष MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-mcq/): हुमायूँ – शेरखाँ संघर्ष MCQ : “हुमायूँ – शेर खाँ संघर्ष” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. हुमायूँ – शेर खाँ संघर्ष किसके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी थी?a बाबरb हुमायूँ ✅c अकबरd हिन्दाल 2. शेर खाँ किसका नेता था?a मुगलों काb […] - [हुमायूँ की भारत वापसी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%b8%e0%a5%80-mcq/): हुमायूँ की भारत वापसी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हुमायूँ का पलायन एवं भारत वापसी विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. हुमायूँ का भारत से पलायन किसके कारण हुआ था?a शेर खाँ ✅b बाबरc अकबरd हिन्दाल […] - [हुमायूँ का चरित्र MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-mcq/): हुमायूँ का चरित्र MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हुमायूँ का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन पर आधारित 70 बहुविकल्प प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. हुमायूँ किस प्रकार का शासक था?a आलसी एवं सहज विश्वासी ✅b बहादुर c क्रूरd अत्याचारी 2. […] - [द्वितीय अफगान साम्राज्य संस्थापक शेरशाह MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%85%e0%a4%ab%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/): द्वितीय अफगान साम्राज्य संस्थापक शेरशाह MCQ : यहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए द्वितीय अफगान साम्राज्य के संस्थापक शेरशाह सूरी विषय पर 80 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। प्रत्येक सही उत्तर के बाद हरा टिकमार्क✅ लगाया गया है। 1. शेरशाह सूरी किस साम्राज्य का संस्थापक था?a द्वितीय अफगान साम्राज्य✅b तैमूरी साम्राज्यc मौर्य साम्राज्यd […] - [शेरशाह सूरी का शासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-mcq/): शेरशाह सूरी का शासन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ शेरशाह सूरी का शासन विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। प्रत्येक में सही उत्तर के बाद ✅ हरा टिक लगा है। 1. शेरशाह सूरी का शासन किस शासन पद्धति पर आधारित था?a अफगान शासन पद्धति✅b मुगल शासन पद्धतिc मराठा पद्धतिd […] - [शेरशाह के कार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): शेरशाह के कार्य MCQ : यहाँ शेरशाह सूरी के कार्यों के मूल्यांकन मुख्य बिंदुओं पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ दिखाया गया है। 1. शेरशाह सूरी किस साम्राज्य का संस्थापक था?a) पहला अफगान साम्राज्यb) द्वितीय अफगान साम्राज्य ✅c) मुगल साम्राज्यd) मराठा साम्राज्य 2. शेरशाह का […] - [शेरशाह के उत्तराधिकारी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-mcq/): शेरशाह के उत्तराधिकारी MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शेरशाह के उत्तराधिकारी विषय पर 20 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ है। 1. शेरशाह के बाद उसका उत्तराधिकारी कौन था?a इस्लामशाह ✅b सिकंदरशाहc महमूदशाहd अकबर 2. इस्लामशाह का वास्तविक नाम क्या था?a जलाल […] - [सूरी साम्राज्य का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): सूरी साम्राज्य का पतन MCQ : यहाँ “सूरी साम्राज्य का पतन” विषय पर 38 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ है। 1. सूरी साम्राज्य का संस्थापक कौन था?a शेरशाह सूरी ✅b इस्लामशाहc सिकन्दरशाहd बाबर 2. शेरशाह सूरी की अकाल मृत्यु कैसे हुई थी?a अपनी सेना की […] - [अकबर का प्रारम्भिक जीवन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-mcq/): अकबर का प्रारम्भिक जीवन MCQ : यहाँ “अकबर का प्रारम्भिक जीवन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं, सही उत्तर के अन्त में ✅ हरा टिक दिया गया है। 1. अकबर का पूरा नाम क्या था?a जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर ✅b नसीरुद्दीन अकबरc हुमायूँ अकबरd अकबर शाह 2. अकबर के पिता का नाम […] - [पानीपत का दूसरा युद्ध MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-mcq/): पानीपत का दूसरा युद्ध MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “पानीपत का दूसरा युद्ध” के मुख्य विषय से 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। सही उत्तर के अंत में ✅ दिया गया है। 1. पानीपत का दूसरा युद्ध किसके बीच हुआ था?a अकबर और हेमू ✅b बाबर और इब्राहीम लोदीc हुमायूं और […] - [बैरम खाँ का विद्रोह MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9-mcq/): बैरम खाँ का विद्रोह MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निम्नलिखित 30 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) “बैरम खाँ का विद्रोह” के मुख्य विषय-वस्तु से तैयार किए गए हैं। प्रत्येक सही उत्तर के अंत में ✅ है। 1. हुमायूँ ने बैरम खाँ को किसका संरक्षक नियुक्त किया था?a अकबर ✅b बाबरc हुमायूँd जलालुद्दीन 2. बैरम […] - [अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d-2/): अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 70 बहुविकल्पीय प्रश्न “अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य” के मुख्य विषयों पर तैयार किए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स ✅ है।​ 1. अकबर का सर्वप्रथम शासन उद्देश्य क्या था?a) युद्ध करनाb) राज्य में शांति व व्यवस्था स्थापित […] - [अकबर का साम्राज्य विस्तार MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be/): अकबर का साम्राज्य विस्तार MCQ : ‘अकबर का साम्राज्य विस्तार‘ विषय पर यहाँ 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरे रंग का टिक बॉक्स ✅ है। ​ 1. अकबर के साम्राज्य का विस्तार किस राजधानी के चारों ओर हुआ था?a) दिल्लीb) आगराc) फतहपुर सीकरी ✅d) लाहौर 2. मालवा विजय […] - [अकबर की राजपूत नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-mcq/): अकबर की राजपूत नीति MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अकबर की राजपूत नीति विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) तैयार किए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरे टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। ​ 1. अकबर ने राजपूतों के साथ किस प्रकार की नीति अपनाई थी?a) आक्रमण कीb) सुलह एवं […] - [अकबर की राजपूतों पर विजय MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af-mcq/): अकबर की राजपूतों पर विजय MCQ : ​विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ अकबर की राजपूतों पर विजय विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक सही विकल्प के बाद हरे रंग का टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. किस राजपूत राज्य का राजा अकबर के समय आम्बेर में शासन कर […] - [अकबर की शासन व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): अकबर की शासन व्यवस्था MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ अकबर की शासन व्यवस्था पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिक✅ है। 1. अकबर की शासन व्यवस्था कितने स्तरों वाली थी?a) एकb) दोc) तीन ✅d) चार 2. अकबर के शासन का सबसे ऊँचा […] - [अकबर का सैन्य प्रबन्धन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8-mcq/): अकबर का सैन्य प्रबन्धन MCQ : यहाँ पर अकबर का सैन्य प्रबन्धन विषय पर 70 MCQ बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं, सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क दिया गया है। 1. अकबर ने किस वर्ष में जागीर प्रथा को समाप्त किया था?a) 1570b) 1575 ✅c) 1580d) 1585 2. अकबर के शासन […] - [अकबर का भूमि प्रबन्धन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8-mcq/): अकबर का भूमि प्रबन्धन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अकबर का भूमि प्रबन्धन” विषय पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए गए हैं। सही उत्तर के आगे ग्रीन टिक बॉक्स ✅ है। 1. अकबर का भूमि प्रबन्धन किस दृष्टि से महत्वपूर्ण था?a धार्मिकb सैन्यc वैज्ञानिक ✅d सामाजिक 2. अकबर ने […] - [अकबर के सामाजिक सुधार MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq/): अकबर के सामाजिक सुधार MCQ : यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अकबर के सामाजिक सुधार से जुड़े 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। सही उत्तर के आगे ग्रीन टिक ✅ है। 1. अकबर का काल किस दृष्टि से महत्वपूर्ण था?a धार्मिक दृष्टि सेb सामाजिक दृष्टि सेc सामाजिक सुधारों के लिए ✅d युद्ध […] - [अकबर की धार्मिक नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-mcq/): अकबर की धार्मिक नीति MCQ : यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अकबर की धार्मिक नीति से संबंधित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। सही उत्तर के आगे ग्रीन टिक बॉक्स ✅ दिया गया है। 1. अकबर ने अपने राज्य में किस नीति को अपनाया था?a धार्मिक कट्टरताb केवल सुन्नी शासनc धार्मिक सहिष्णुता […] - [दीन-ए-इलाही MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%8f-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-mcq/): दीन-ए-इलाही MCQ : यहाँ “दीन-ए-इलाही” के मुख्य विषय-वस्तु से तैयार 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) प्रस्तुत हैं। सही उत्तर के आगे हरे टिक बॉक्स (✅) लगाए गए हैं। 1. दीन-ए-इलाही का शाब्दिक अर्थ क्या है?a) अकबर का धर्मb) गुरु का मार्गc) ईश्वर का धर्म ✅d) मुस्लिम धर्म 2. दीन-ए-इलाही का निर्माण किसने किया था?a) बाबरb) शेरशाहc) […] - [अकबर के शासन की विशेषताएँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-mcq/): अकबर के शासन की विशेषताएँ MCQ : यहाँ “अकबर के शासन की विशेषताएँ” मुख्य लेख से तैयार 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के आगे टिक बॉक्स (✅) है। 1. अकबर के शासनकाल में किस बात को सर्वोपरि माना गया था?a) केवल मुस्लिम प्रजा का कल्याणb) शक्ति का प्रदर्शनc) प्रजा के […] - [अकबर का व्यक्तित्व MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-mcq/): अकबर का व्यक्तित्व MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अकबर का व्यक्तित्व” विषय से 70 महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में दिये जा रहे हैं, सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅दिया गया है। 1. अकबर का कद कैसा था?a मझोला ✅b बहुत ऊँचाc बहुत छोटाd औसत 2. अकबर की भुजायें कैसी […] - [इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87-2/): इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर MCQ : यहाँ “इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर” के मुख्य विषय-वस्तु से 70 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में प्रस्तुत हैं। सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ जोड़ा गया है। 1. जवाहरलाल नेहरू ने भारत के कितने महान राजाओं में अकबर को शामिल किया?a एकb दो ✅c तीनd […] - [नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%80/): नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर” विषय पर 70 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं, सही उत्तर के बाद हरा टिक-बॉक्स ✅ है। 1. नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर ने किस वर्ष से किस वर्ष तक शासन किया?a 1600-1620b 1605-1627 ✅c 1611-1650d 1622-1640 2. जहाँगीर किस मुगल […] - [नूरजहाँ का उत्थान MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-mcq/): नूरजहाँ का उत्थान MCQ : यहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “नूरजहाँ का उत्थान” मुख्य विषय-वस्तु से 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में दिए जा रहे हैं, सही विकल्प के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ है। 1. नूरजहाँ का बचपन का नाम क्या था?a रूखसारb लाडलीc मेहरुन्निसा ✅d फातिमा 2. ‘मेहरुन्निसा’ का शाब्दिक […] - [खुर्रम का विद्रोह MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9-mcq/): खुर्रम का विद्रोह MCQ : यहाँ “खुर्रम का विद्रोह” के मुख्य विषय-वस्तु से सम्बंधित 70 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्प दिए गये हैं, सही उत्तर के बाद ✅ हरा टिक मार्क है। 1. खुर्रम के विद्रोह का मुख्य कारण क्या था?a नूरजहाँ की महत्वाकांक्षाb शाहजहाँ की बीमारीc […] - [महाबत खाँ का विद्रोह MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9-mcq/): महाबत खाँ का विद्रोह MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महाबत खाँ का विद्रोह विषय पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के बाद हरे रंग का टिक बॉक्स ;✅ दिया गया है। 1. महाबत खाँ का विद्रोह किसके षड़यंत्रों का परिणाम था?a नूरजहाँb आसफ खाँ ✅c जहाँगीरd शाहजहाँ […] - [जहाँगीर का चरित्र एवं कार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): जहाँगीर का चरित्र एवं कार्य MCQ: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 70 बहुविकल्पीय प्रश्न “जहाँगीर का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन” विषय पर दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. जहाँगीर का असली नाम क्या था?a अकबरb सलीम ✅c हुमायूँd खुर्रम 2. जहाँगीर के […] - [नूरजहाँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-mcq/): नूरजहाँ MCQ: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नूरजहाँ का चरित्र एवं मूल्यांकन विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. नूरजहाँ का असली नाम क्या था?a माहताबb मेहरून्निसा ✅c जहाँआराd रमाबाई 2. नूरजहाँ किस मुगल सम्राट की पत्नी थी?a अकबरb शाहजहाँc […] - [शाहजहाँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-mcq/): शाहजहाँ MCQ: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शाहजहाँ विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के बाद ✅ हरा टिक मार्क दिया गया है। 1. शाहजहाँ का असली नाम क्या था?a अकबरb खुर्रम ✅c जहाँगीरd मुराद 2. शाहजहाँ का जन्म कब और कहाँ हुआ था?a 1600, आगराb 1592, लाहौर ✅c […] - [शाहजहाँ का शासन-प्रबन्ध MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7-mcq/): शाहजहाँ का शासन-प्रबन्ध MCQ: शाहजहाँ के शासन प्रबन्ध पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के अंत में ग्रीन टिक बॉक्स (✅) है। 1. शाहजहाँ के शासनकाल को किस इतिहासकार ने स्वर्णयुग की संज्ञा दी?a अकबरb जहाँगीरc खाफीखाँ ✅d औरंगजेब 2. शाहजहाँ का शासन काल किस की नीति का पालन […] - [उत्तराधिकार का युद्ध MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-mcq/): उत्तराधिकार का युद्ध MCQ:विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “उत्तराधिकार युद्ध” (शाहजहाँ के पुत्रों का उत्तराधिकार युद्ध) विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही विकल्प के बाद हरा टिक (✅) दिया गया है। (51–70 अगले उत्तर में…) -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री उत्तराधिकार युद्ध - [औरंगजेब (आलमगीर) MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%86%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0-mcq/): औरंगजेब (आलमगीर) MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए औरंगजेब (आलमगीर) विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के साथ हरा टिक (✅) दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री औरंगजेब (आलमगीर) - [औरंगजेब की धार्मिक नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-mcq/): औरंगजेब की धार्मिक नीति MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “औरंगजेब की धार्मिक नीति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न, सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स (✅) है। 1. औरंगजेब की धार्मिक नीति किस पर आधारित थी?a सहिष्णुताb मजहबी कट्टरता ✅c सुलह-कुलd उदारता 2. औरंगजेब किस संप्रदाय का था?a शियाb सूफीc सुन्नी ✅d […] - [औरंगजेब की राजपूत नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-mcq/): औरंगजेब की राजपूत नीति MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “औरंगजेब की राजपूत नीति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। हर सही विकल्प के आगे हरा टिक बॉक्स ✅ लगा है: 1. औरंगजेब की राजपूत नीति किस पर आधारित थी?a धार्मिक सहिष्णुताb मजहबी संकीर्णता ✅c मध्यस्थताd राजपूत समर्थन 2. बुंदेलों के विद्रोह का नेतृत्व […] - [औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80/): औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न, सही विकल्प के आगे हरे टिक बॉक्स (✅) लगा है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति - [औरंगजेब के अंतिम दिन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-mcq/): औरंगजेब के अंतिम दिन MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “औरंगजेब के अंतिम दिन” विषय पर 30 बहुविकल्पीय प्रश्न, प्रत्येक विकल्प के बाद सही उत्तर पर हरे टिक (✅) के साथ: -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री औरंगजेब के अंतिम दिन - [औरंगजेब के उत्तराधिकारी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-mcq/): प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए औरंगजेब के उत्तराधिकारी MCQ: यहाँ “औरंगजेब के उत्तराधिकारी” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं, सही उत्तर के आगे हरे रंग का टिक (✅) लगा है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री औरंगजेब के उत्तराधिकारी - [मुगल सल्तनत का विघटन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8-mcq/): मुगल सल्तनत का विघटन MCQ: मुगल सल्तनत का विघटन MCQ : यहाँ मुगल सल्तनत का विघटन विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। हर प्रश्न हिंदी में है और सही विकल्प के अंत में हरा टिक बॉक्स (✅) दिया गया है। 1. मुगल सल्तनत के विघटन की शुरुआत किसके मृत्यु के बाद हुई थी?a) […] - [मुगल सल्तनत का अंत MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4-mcq/): मुगल सल्तनत का अंत MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ मुगल सल्तनत का अंत विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं, सही विकल्प के बाद हरे रंग का टिक बॉक्स (✅) लगाया गया है। 1. मुगल सल्तनत का विघटन किसके शासनकाल में आरम्भ हुआ था?a) अकबरb) शाहजहाँc) औरंगजेब ✅d) बाबर 2. […] - [मुगल शासन व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मुगल शासन व्यवस्था MCQ: यहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुगल शासन व्यवस्था एवं संस्थाएँ विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं, सही विकल्प के बाद हरे रंग का टिक बॉक्स (✅) लगाया गया है। 1. मुगल शासन व्यवस्था का मुख्य आधार क्या था?a) कृषकों का नियंत्रणb) सैनिक शासन ✅c) व्यापारिक संगठनd) […] - [मनसबदारी प्रथा MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मनसबदारी प्रथा MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ मुगलों की मनसबदारी प्रथा विषय पर 70 MCQ दिए गए हैं, हर सही विकल्प के बाद अंत में हरे रंग का टिक बॉक्स (✅) लगाया गया है। 1. मनसब शब्द का क्या अर्थ है?a) सैनिकb) एक प्रकार का रैंक या पोजीशन ✅c) धनd) जागीर […] - [मुगल जागीदार प्रथा MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मुगल जागीदार प्रथा MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुगलों की जागीरदारी प्रथा विषय पर 70 MCQ दिए गए हैं, हर सही विकल्प के बाद अंत में हरे रंग का टिक बॉक्स (✅) लगाया गया है। 1. मुगलों की जागीरदारी प्रथा का मुख्य उद्देश्य क्या था?a) सैनिकों की भर्तीb) राज्य कर्मचारियों को वेतन […] - [मुगलों का प्रांतीय शासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-mcq/): मुगलों का प्रांतीय शासन MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुगलों का प्रांतीय शासन” से संबंधित 60 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर MCQ दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. मुगलों का प्रांतीय शासन किसके शासन की तुलना में अधिक सुदृढ़ था?a तुर्कों […] - [मुगल सैन्य प्रबंधन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%a8-mcq/): मुगल सैन्य प्रबंधन MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुगलों की सैनिक व्यवस्था विषय पर 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिंदी में दिए जा रहे हैं। हर प्रश्न के सही विकल्प के आगे ✅ हरे रंग का टिक मार्क है। 1. मुगलों के साम्राज्य की शक्ति का मुख्य आधार क्या था?a) संस्कृतिb) सेना ✅c) […] - [मुगल न्याय व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मुगल न्याय व्यवस्था MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुगलों की न्याय व्यवस्था” के मुख्य कंटेंट से 30 MCQ हिंदी में दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मुगलों की न्याय व्यवस्था - [मुगल राजस्व व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मुगल राजस्व व्यवस्था MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मुगलों की राजस्व व्यवस्था” विषय पर 60 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रश्न के सही उत्तर के बाद हरा टिक बॉक्स ✅ है। प्रश्न 1: मुगलों की राजस्व व्यवस्था किस पूर्ववर्ती काल की व्यवस्था से अधिक मजबूत थी?a अकबर कालb दिल्ली सल्तनत […] - [मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2-2/): मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन MCQ : यहाँ “मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन” के मुख्य विषय-वस्तु से 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में दिए जा रहे हैं। सभी प्रश्नों में चार विकल्प (a, b, c, d) हैं और सही उत्तर के बाद हरे टिक (✅) का संकेत है। 1. मुगल शासन व्यवस्था का मूल्यांकन करते समय किस […] - [मुगल भूराजस्व व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-mcq/): मुगल भूराजस्व व्यवस्था MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था (Land Revenue System of Mughals) विषय पर आधारित 60 हिंदी बहुविकल्पी प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं और सही विकल्प के अंत में हरा टिक ✅ दिया गया […] - [मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के तत्त्व MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95/): मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के तत्त्व MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व विषय पर आधारित 60 हिंदी बहुविकल्पी प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्प (a, b, c, d) हैं और सही विकल्प के अंत में हरा टिक ✅ दिया गया है। अगर किसी विशेष […] - [मुगलकालीन उद्योग MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-mcq/): मुगलकालीन उद्योग MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग विषय पर आधारित 60 हिंदी बहुविकल्पी प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं और सही विकल्प के अंत में हरा टिक ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मुगलकालीन […] - [मुगलकालीन व्यापार MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq/): मुगलकालीन व्यापार MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ 70 हिंदी बहुविकल्पी प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं, जो मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य विषय पर आधारित हैं। हर प्रश्न में चार विकल्प हैं (a, b, c, d) और सही विकल्प के बाद हरा टिक ✅ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री […] - [मुगलकालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): मुगलकालीन स्थापत्य MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुगलकालीन स्थापत्य कला” मुख्य आलेख की सामग्री से 60 महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में दिए जा रहे हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है: -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मुगलकालीन स्थापत्य ​ - [मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3%e0%a4%95-2/): मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुगल स्थापत्य का स्वर्णकाल अर्थात् शाहजहाँ कालीन स्थापत्य” मुख्य लेख से 60 महत्त्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिन्दी में दिए जा रहे हैं। हर सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री […] - [पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य MCQ: यहाँ “पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य कला” से मुख्य 30 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) हिन्दी में दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है: -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री पतनोन्मुख मुगल स्थापत्य कला​ - [मुगलकालीन साहित्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): मुगलकालीन साहित्य MCQ : यहाँ “मुगलकालीन साहित्य” मुख्य सामग्री से 60 महत्त्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिन्दी में दिए जा रहे हैं। सही उत्तर के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री ​मुगलकालीन साहित्य - [मुगलकालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%ae/): मुगलकालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला MCQ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “मुगल कालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला” मुख्य सामग्री से 60 महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न हिन्दी में दिए जा रहे हैं, सही उत्तर के आगे हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मुगलकालीन चित्रकला एवं मूर्तिकला - [राजपूत राज्यों का प्रशासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): राजपूत राज्यों का प्रशासन MCQ: यहाँ “राजपूत राज्यों का प्रशासन” मुख्य आलेख की सामग्री से 60 महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न हिन्दी में प्रस्तुत हैं। प्रत्येक प्रश्न के सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क✅ लगाया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री राजपूत राज्यों का प्रशासन - [राजपूतों का राजस्व प्रशासन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be-2/): राजपूतों का राजस्व प्रशासन MCQ : यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “राजपूतों का राजस्व प्रशासन” मुख्य सामग्री से 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए जा रहे हैं। सभी प्रश्न हिंदी में हैं, सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ दिया गया है। मुख्य अध्ययन सामग्री ​राजपूत राजस्व प्रशासन - [राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5-2/): राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था MCQ: यहाँ “राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था” मुख्य लेख की सामग्री से 60 महत्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिन्दी में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। हर प्रश्न के सही विकल्प के अंत में हरा टिक मार्क ✅ लगाया गया है -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री राजपूतों की न्यायिक व्यवस्था - [राजपूत सैन्य प्रबन्धन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8-mcq/): राजपूत सैन्य प्रबन्धन MCQ : राजपूत सैन्य प्रबन्धन पर आधारित मुख्य सामग्री से 60 महत्त्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) हिन्दी में प्रस्तुत हैं। हर सही उत्तर के आगे हरा टिक मार्क ✅ है। 1. राजपूतों का सैन्य प्रबन्धन किस पर आधारित था?a मुगल परंपराb हिन्दू सैन्य प्रबन्धन ✅c ब्रिटिश नीतिd मराठा शैली 2. राजपूत राजा की […] - [राजपूत राज्यों में समाज MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-mcq/): राजपूत राज्यों में समाज MCQ : यहाँ “राजपूत राज्यों में समाज” मुख्य लेख की सामग्री से 60 महत्त्वपूर्ण MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्न) दिए जा रहे हैं। सभी प्रश्न हिन्दी में हैं, हर विकल्प को a, b, c, d फ़ॉर्मेट में रखा गया है, और सही उत्तर के बाद हरे टिक मार्क ✅ दिया गया है। 1. […] - [राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a5%8d-2/): राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था MCQ: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था पर 60 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री राजपूत राज्यों की अर्थव्यवस्था - [भारतीय इतिहास के स्रोत MCQ: 30 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a4%be/): भारतीय इतिहास के स्रोत MCQ: प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के लिए विभिन्न स्रोत उपलब्ध हैं। यहाँ प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत विषय पर 30 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। 1. प्राचीन भारत के इतिहास को जानने के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?क) साहित्यिक स्रोतख) पुरातात्विक स्रोतग) विदेशी विवरणघ) उपरोक्त सभी ✅ […] - [पाषाण-कालीन सभ्यता एवं संस्कृति: महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%82/): पाषाण-कालीन सभ्यता एवं संस्कृति: महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) यहाँ पाषाण-कालीन सभ्यता एवं संस्कृति के मुख्य बिंदुओं से 74 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दें: -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मूल अध्ययन सामग्री पाषाण-कालीन सभ्यता एवं […] - [ताम्राश्म संस्कृति MCQ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-mcq/): ताम्राश्म संस्कृति MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न यहाँ ताम्राश्म संस्कृति के मुख्य बिंदुओं से 40 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मूल अध्ययन सामग्री ताम्राश्म संस्कृति - [हड़प्पा सभ्यता MCQ - महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय 40 प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-mcq/): हड़प्पा सभ्यता MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हड़प्पा सभ्यता के इतिहास पर 40 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर के सामने हरे बॉक्स में सही का टिकमार्क ✅ दिया गया है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री हड़प्पा सभ्यता - [भारत में लौह युगीन संस्कृति MCQ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%b9-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83/): भारत में लौह युगीन संस्कृति MCQ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न : यहाँ भारत में लौह युगीन संस्कृति के 40 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मूल अध्ययन सामग्री भारत में लौह युगीन संस्कृति - [महापाषाण संस्कृति MCQ - महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-40-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4/): महापाषाण संस्कृति MCQ – महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न। यहाँ महापाषाण संस्कृति विषय के मुख्य बिंदुओं से 40 MCQ दिए गए हैं। प्रत्येक के चार विकल्प (a, b, c, d) हैं, सही उत्तर ✅ हरे टिक बॉक्स के साथ है। 1 महा-पाषाण संस्कृति का काल कौन-सा था?a 3000 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्वb 1500 ईसा पूर्व […] - [फर्रूखसियर](https://bharatkaitihas.com/farrukhsiyar-was-engulfed-in-terrible-conspiracies-as-soon-as-he-became-king/): बादशाह बनने के बाद फर्रूखसियर ने इलाहाबाद के सूबेदार सैयद अब्दुल्ला खाँ को अपना वजीर नियुक्त किया तथा अब्दुल्ला के छोटे भाई सैयद हुसैन अली को अपनी सेना का प्रधान नियुक्त किया। - [महाराजा अजीतसिंह से दुश्मनी](https://bharatkaitihas.com/the-emperor-reached-his-tent-to-kill-maharaja-ajitsingh/): फर्रूखसियर ने महाराजा को पांच हजार जात एवं पांच हजार सवार का मनसब दिया तथा उसे अपने दरबार में उपस्थित होने के निर्देश दिए। - [बंदासिंह बैरागी की हत्या](https://bharatkaitihas.com/farrukhsiyar-got-banda-bairagi-and-his-associates-cut-into-pieces/): बंदासिंह बैरागी की हत्या के बाद सिक्ख नेतृत्व-विहीन हो गये। जब सिक्खों के सामने न गुरु रहा, न गुरु का बन्दा, तब सिक्खों ने सरबत खालसा और गुरुमत्ता की प्रथाएँ आरम्भ कीं। - [चूड़ामन जाट का अंत](https://bharatkaitihas.com/chudaman-captured-the-keys-of-the-red-fort/): चूड़ामन को राहदार बनाए जाने पर टिप्पणी करते हुए इतिहासकार कानूनगो ने लिखा है- 'एक भेड़िये को भेड़ों के झुण्ड का रक्षक बना दिया गया।' - [सवाई जयसिंह](https://bharatkaitihas.com/red-fort-gets-loyal-defenders-as-sawai-jai-singh/): आम्बेर का राजा सवाई जयसिंह भारत के इतिहास में एक अद्भुत राजा हुआ है। उसने कम से कम पांच मुगल शासकों के काल में मुगलों की सेवा की तथा उनकी नाक के नीचे हिन्दू धर्म का उत्थान किया। जब भी लाल किला उजड़ता हुआ दिखाई दिया, तब ही सवाई जयसिंह ने लाल किले को संरक्षण […] - [फर्रुखसीयर की हत्या](https://bharatkaitihas.com/emperor-was-strangulated-beaten-with-shoes-in-red-fort/): सैयद बन्धु फर्रूखसियर को अनुभवहीन जानकर उसे अपने हाथों की कठपुतली बनाकर रखना चाहते थे किंतु जब फर्रुखसीयर ने सैयद बंधुओं के इशारों पर नाचने से मना कर दिया तो उन दोनों दुष्टों ने बादशाह फर्रुखसीयर की हत्या करने का षड़यंत्र रचा। फर्रूखसियर सैयद बन्धुओं के सहयोग से बादशाह बना था। इसलिये उसने सैयद अब्दुल्ला […] - [सैयद बन्धु](https://bharatkaitihas.com/syed-brothers-killed-mughal-emperors-like-insects/): जब रफी-उद्-दरजात को तख्त पर बैठाने के लिए ले जाया गया, तब उसकी माता फूट-फूटकर रो रही थी। - [मुहम्मदशाह रंगीला](https://bharatkaitihas.com/emperors-mother-wrote-a-secret-letter-to-chinkulich-khan/): रौशन अख्तर का जन्म 7 अगस्त 1702 को अफगानिस्तान के गजना नामक स्थान पर कुदसिया बेगम के पेट से हुआ था। - [सैयद बंधुओं की हत्या](https://bharatkaitihas.com/emperor-killed-prime-minister-and-commander-in-chief/): सैयदों ने दोस्त मुहम्मद खाँ रूहेला को भी साढ़े तीन हजार घुड़सवारों के साथ चिनकुलीच खाँ पर चढ़ाई करने के लिए रिवाना कर दिया। - [मुहम्मदशाह रंगीला का दरबार](https://bharatkaitihas.com/emperor-himself-used-to-draw-his-bare-pictures/): नूर बाई नामक वेश्या के कोठे के आगे शाही अमीरों और धनी लोगों की इतनी भीड़ लगती थी कि उनके हाथियों से दिल्ली की गलियों में जाम लग जाता था। - [बदनसिंह जाट](https://bharatkaitihas.com/sawai-jai-singh-enthroned-badansingh-jat-with-his-own-hands/): इस घटना के बाद जयसिंह, बदनसिंह जाट का मित्र बन गया। - [हिन्दू राज्य की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/maharaja-ajitsingh-established-hindu-principality-in-ajmer/): महाराजा ने तीस हजार घुड़सवारों के साथ अजमेर नगर को घेर लिया तथा मुगल सूबेदार को अजमेर से मारकर भगा दिया। - [मल्लिका उज्जमानी](https://bharatkaitihas.com/mallika-ujjmani-becomes-thirsty-for-the-life-of-maharaja-ajitsinh/): बादशह बेगम बनकर फर्रूखसियर की बेटी मलिका उज्जमानी महाराजा अजीतसिंह के प्राणों की प्यासी हो गई। - [चिनकुलीच खाँ](https://bharatkaitihas.com/red-fort-said-with-pride-see-how-beautifully-dances-the-donkey-of-south/): मुहम्मदशाह ने अपने बहुत से दुश्मनों की गलतियों को नजर अंदाज करके उन्हें अपनी सेवा में बने रहने दिया। - [अलीवर्दी खाँ](https://bharatkaitihas.com/emperor-continued-to-enjoy-awadh-and-bengal-became-independent/): अलीवर्दी खाँ बिहार का छोटा सा सूबेदार था किंतु उसने बादशाह मुहम्मदशाह रंगीला के निकम्मेपन का लाभ उठाकर बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा पर कब्जा कर लिया तथा बंगाल में अलग मुस्लिम राज्य की स्थापना की। औरंगजेब के समय से ही मुगलों का विरोध कर रहे राजपूतों, सिक्खों, मराठों तथा अन्य हिन्दू शक्तियों ने मुहम्मदशाह रंगीला […] - [पेशवा बालाजी विश्वनाथ](https://bharatkaitihas.com/owner-of-red-fort-sitting-under-the-shadow-of-beauty-and-marathas-were-rushing-rapidly/): मराठा शक्ति का अभ्युदय छत्रपति शिवाजी द्वारा ई.1645 से 1680 की अवधि में शाहजहाँ एवं औरंगजेब के काल में किया गया था। - [मराठों का आतंक](https://bharatkaitihas.com/red-fort-tried-to-frighten-the-marathas-but-the-nose-broke/): मराठों ने राजपूताना रियासतों पर बार-बार हमले करने और चौथ वसूलने की नीति अपना ली थी। इस कारण मराठों का आतंक पूरे उत्तर भारत में छा गया। - [पेशवा बाजीराव](https://bharatkaitihas.com/peshwa-bajirao-shakes-the-tenon-of-the-red-fort/): जयसिंह ने पेशवा बाजीराव को जयपुर बुलाने तथा जयपुर से दिल्ली ले जाकर बादशाह से मिलवाने का निश्चय किया। - [उर्दू शायरी](https://bharatkaitihas.com/emperor-was-singing-dhrupad-and-listening-poetry-but-nadirshah-came-to-take-kohinoor/): जब उर्दू शायरी मुगल दरबार से निकलकर दिल्ली की गलियों में टहलने निकली तो उसने वेश्याओं और नृत्यांगनाओं के कोठों पर मुकाम किया। - [नादिरशाह](https://bharatkaitihas.com/there-is-no-one-whom-you-can-kill-with-your-sword-except-to-raise-the-dead-and-kill-again/): जिस बादशाह को औरतों के कपड़े पहनने और अपने ही नंगे चित्र बनाने से फुर्सत न हो, उस बादशाह की सेना का नेतृत्व करने के लिए कोई योग्य सेनापति कहाँ से आता! - [लाल किले का खजाना](https://bharatkaitihas.com/largest-armed-robbery-in-human-history-took-place-in-red-fort/): कोहिनूर का मूल्य संसार के ढाई दिन के भोजन के व्यय के बराबार आंका जाता था। - [कोहिनूर हीरा](https://bharatkaitihas.com/emperors-favorite-prostitute-told-nadirshah-the-address-of-the-kohinoor-diamond/): तूने दिल्ली से अब तक जो लूटा है, वह उस दौलत के सामने कुछ भी नहीं है जो दौलत मुहम्मदशाह की पगड़ी में छिपी हुई है। - [नादिरशाह का कत्ल](https://bharatkaitihas.com/nadirshah-tied-misfortune-with-kohinoor-as-well/): जिन मुगलों ने विगत दो सौ साल में भारतीयों को कंगाल बना दिया था, उन्हीं मुगलों को नादिरशाह ने लंगोटी लगाकर छोड़ दिया। - [कोहिनूर हीरे की यात्रा](https://bharatkaitihas.com/kohinoor-reaches-london-via-iran-afghanistan-and-punjab-from-red-fort/): महाराजा रणजीतसिंह ने अपनी वसीयत में लिखा कि यह हीरा उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर को भेंट कर दिया जाए किंतु उनके उत्तराधिकारियों ने महाराजा की इस इच्छा का सम्मान नहीं किया। - [नादिरशाह की फूफियाँ](https://bharatkaitihas.com/nadir-shah-came-to-meet-his-aunts-in-red-fort/): हम हिन्दुस्तान पर हमला करने नहीं आए बल्कि लाल किले में नादिरशाह की फूफियाँ रहती हैं, हम अपनी फूफी जान से मुलाक़ात करने आए हैं। - [मुहम्मदशाह रंगीला की मौत](https://bharatkaitihas.com/chinkkulich-khan-the-emperors-dear-friend-was-killed-on-the-banks-of-the-sutlej/): किसानों द्वारा उगाई जा रही फसलों से मिलने वाले लगान से लाल किले का व्यय मजे से चलता रहा। - [बादशाह अहमदशाह बहादुर](https://bharatkaitihas.com/udham-bais-son-sat-on-the-throne-of-the-mughals/): जब मुहम्मदशाह रंगीला बादशाह हुआ तो उसने ऊधम बाई से विवाह करके उसे कुदसिया बेगम की उपाधि दी थी। - [शाही हरम के हिंजड़े](https://bharatkaitihas.com/khwajasaras-ruled-mughalia-haram/): ख्वाजासरा उस पुरुष को कहते थे जिसके यौन अंग काट दिए जाते थे अथवा जो नैसर्गिक रूप से नपुंसक उत्पन्न होते थे। - [मुगल हरम में समलैंगिकता](https://bharatkaitihas.com/shahi-haram-was-obsessed-with-homosexuality/): प्राचीन यूनान में समलैंगिकता को कला, बौद्धिकता और नैतिक गुणों की तरह देखा जाता था। - [ख्वाजासरा जाविद खाँ](https://bharatkaitihas.com/emperor-and-wazir-fought-for-chief-kinnar/): ख्वाजासरा जाविद खाँ शाही महल के हिंजड़ों का मुखिया था। उसे लेकर बादशाह अहमदशाह बहादुर एवं वजीर सफदरजंग में ठन गई! इस विवाद के कारण अवध सूबा मुगल सल्तनत से स्वतंत्र हो गया। बादशाह अहमदशाह बहादुर ने अवध के नवाब सफदरजंग को सल्तनत के मुख्य वजीर के पद पर बने रहने दिया था तथा चिनकुलीच […] - [इमादुलमुल्क](https://bharatkaitihas.com/wazir-blinds-the-emperor-and-his-mother-and-puts-them-in-jail/): मुगलिया राजनीति की चौसर पर बादशाह और शहजादे एक-एक करके मारे जा रहे थे किंतु लाल किला अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाने के अतिरिक्त और कुछ करने की स्थिति में नहीं था। - [मुगल बादशाहों के हरम](https://bharatkaitihas.com/there-were-eight-thousand-women-in-ahmad-shah-bahadurs-harem/): एक बादशाह के हरम में इतनी औरतों का होना विचित्र बात लगती है किंतु उस काल में भारत के मुगल बादशाहों के हरम पूरी दुनिया में अपने बड़े आकार के लिए चर्चित थे। - [आलमगीर बादशाह](https://bharatkaitihas.com/alamgir-became-emperor-after-spending-forty-years-in-prison/): अजीजुद्दीन ने औरंगजेब की तरह भारत पर कठोर शासन व्यवस्था स्थापित करने का सपना देखा और अपना नाम आलमगीर रख लिया। - [अहमदशाह अब्दाली](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-handed-over-two-of-its-princesses-to-ahmad-shah-abdali/): महाराजा सूरजमल चाहता था कि मराठों को उत्तर भारत की राजनीति से दूर रखा जाए तथा उन्हें नर्बदा पार करके लौट जाने के लिए कह दिया जाए। - [अहमदशाह अब्दाली का कहर](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-built-minarets-of-beheaded-people-of-brij/): उत्तर भारत के लोगों पर अहमदशाह अब्दाली का कहर ठीक वैसा ही था जैसा उसके पूर्ववर्ती आक्रांताओं मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, तैमूर लंग, बाबर और नादिरशाह आदि रक्त-पिपासुओं ने ढाया था। अहमदशाह अब्दाली ने निर्दोष हिन्दुओं के सिर काटकर उनकी मीनारें बनवाईं। जब महाराजा सूरजमल ने अहमदशाह अब्दाली के आदेश को मानने […] - [महाराजा सूरजमल](https://bharatkaitihas.com/maharaja-suraj-mal-challenges-ahmad-shah-abdali-to-attack-bharatpur/): अहमदशाह अब्दाली ने पत्र महाराजा सूरजमल को लिखकर धमकाया कि यदि वह रुपये नहीं देगा तो भरतपुर, डीग तथा कुम्हेर के किले धरती में मिला दिये जायेंगे। - [शाही महिलाओं का शीलहरण](https://bharatkaitihas.com/royal-women-were-humiliated-in-red-fort/): शहजादी हजरत बेगम इस समय केवल सोलह साल की थी और बहुत सुंदर दिखती थी। बादशाह आलमगीर (द्वितीय) स्वयं भी इस शहजादी से विवाह करना चाहता था। - [मराठा सेनापति रघुनाथ राव](https://bharatkaitihas.com/the-marathas-surrounded-the-red-fort-as-soon-as-abdali-left/): पेशवा नाना साहब अर्थात् बालाजी बाजी राव ने अपने चचेरे भाई रघुनाथ राव तथा मराठा सरदार मल्हारराव होलकर को आदेश दिए थे कि वे अहमदशाह अब्दाली का मार्ग रोकने के लिए दिल्ली पहुंचें। - [मल्हारराव होलकर](https://bharatkaitihas.com/raghunath-rao-used-cannons-to-fire-at-the-red-fort/): नजीब खाँ ने मल्हारराव को अपना धर्मपिता कहकर उसके पांव पकड़ लिये तथा उसके समक्ष समर्पण करने को तैयार हो गया। - [लाल किले की कंगाली](https://bharatkaitihas.com/mother-india-was-also-shedding-tears-along-with-red-fort/): कई दिन की निरंतर भूख से पीड़ित होकर शहजादियां परदा तोड़कर शहर में जाने लगीं जिन्हें बड़ी कठिनाई से रोका गया। - [यूरोपीय कम्पनियों का ताण्डव](https://bharatkaitihas.com/french-dragged-red-fort-into-seven-years-war-of-europe/): हमारे देश में तोप का पहला गोला छूटने के साथ ही अमरीका और एशिया की तोपों में भी आग लग जाती थी। - [आलमगीर की हत्या](https://bharatkaitihas.com/wazir-killed-emperor-after-not-removing-afghan-flag-from-red-fort/): प्लासी एक ऐसा सौदा था, जिसमें बंगाल के धनी लोगों और मीर जाफर ने नवाब को अँग्रेजों के हाथों बेच दिया। - [सदाशिव राव भाऊ](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-comes-back-to-extract-blood-from-indias-wounds/): सदाशिव राव भाऊ अविवेकी व्यक्ति था, उसने सूरजमल के व्यावहारिक सुझावों को मानने से मना कर दिया। - [जाट मराठा संघ](https://bharatkaitihas.com/marathas-took-down-silver-from-red-fort-and-cast-coins/): दिल्ली हाथ में आते ही सदाशिव राव भाऊ तोते की तरह आंख बदलने लगा। महाराजा सूरजमल के लाख मना करने पर भी भाऊ ने लाल किले के दीवाने खास की छतों से चांदी के पतरे उतार लिये और नौ लाख रुपयों के सिक्के ढलवा लिये। - [मराठों का कत्ल](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-killed-one-lakh-marathas/): मराठा सेनापतियों की अदूरदर्शिता ने मराठों को संकट में डाल दिया तथा अहमदशाह अब्दाली ने एक लाख मराठों का कत्ल कर दिया। - [मराठा परिवारों की दुर्दशा](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-captured-thousands-of-marathas/): अब्दाली के सैनिकों ने पानीपत की गलियों में भागती मराठा औरतों एवं उनके बच्चों को पकड़ लिया। हजारों औरतों ने अब्दाली के सैनिकों के हाथों में पड़ने से बचने के लिए पानीपत के कुओं एवं तालाबों में छलांग लगा दी। - [जाटों की राजमाता](https://bharatkaitihas.com/kishore-devi-rajmata-of-the-jats-said-maratha-soldiers-are-my-children-dont-kill-them/): भरतपुर के जाटों की राजमाता किशोरी देवी को मराठों पर बड़ी दया आई। राजमाता ने घोषणा की कि मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं, इन्हें नहीं मारें। - [महाराजा सूरजमल की विजय](https://bharatkaitihas.com/maharaja-surajmal-snatched-two-capitals-of-the-mughals-2/): सूरजमल की सेना ने आगरा के लाल किले के किलेदार के परिवार को पकड़ लिया तथा किलेदार पर दबाव बनाया कि वह लाल किला सूरजमल को समर्पित कर दे। - [महाराजा सूरजमल की हत्या](https://bharatkaitihas.com/red-fort-killed-maharaja-suraj-mal/): एक रूहेला सैनिक महाराजा सूरजमल की कटी हुई भुजा को अपने भाले की नोक में पताका की भांति उठाकर नजीबुद्दौला के पास ले गया। - [बक्सर का युद्ध](https://bharatkaitihas.com/maharaja-surajmal-snatched-two-capitals-of-the-mughals/): बक्सर विजय के परिणाम स्वरूप, सम्पूर्ण अवध सूबे पर ईस्ट इण्डिया कम्पनी का नियंत्रण हो गया। - [शाहआलम (द्वितीय)](https://bharatkaitihas.com/wazir-did-not-allow-the-emperor-to-enter-red-fort-for-six-years/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने मुगल बादशाह शाहआलम (द्वितीय) को 26 लाख रुपये वार्षिक पेंशन देकर शासन के कार्य से लगभग मुक्त कर दिया। - [सिक्ख लाल किले में](https://bharatkaitihas.com/sikhs-took-control-of-the-red-fort/): सिक्खों को न तो मुगलों की औरतें चाहिए थीं और न लाल किले की सत्ता। वे तो लाल किले का मान-मर्दन करके अपने गुरुओं एवं गुरु-पुत्रों की हत्याओं का बदला ले रहे थे! - [बेगम समरू](https://bharatkaitihas.com/begum-samaru-protects-emperor-shah-alam/): लाल किले की शहजादियों और बेगमों को ईरानी और अफगानी आक्रांता जबर्दस्ती पकड़-पकड़कर ले गए थे जिसके कारण लाल किला भीतर से बिल्कुल सुनसान दिखाई देता था। - [मलिका उज्मानी](https://bharatkaitihas.com/malika-ujmani-gave-twelve-lakh-rupees-to-make-emperor-blind/): लाल किले पर ढाई माह के अधिकार के दौरान गुलाम कादिर ने शाहआलम के 22 पुत्र-पुत्रियों को मार डाला। - [महादजी सिंधिया](https://bharatkaitihas.com/mahadji-scindia-made-shah-alam-emperor-again/): शाहआलम ने महादजी सिंधिया को अपना वकीले मुतलक अर्थात् मुख्य वजीर नियुक्त किया था तथा उसे अमीर-उल उमरा की उपाधि दी थी जिसका अर्थ होता है, सभी अमीरों का मुखिया। - [मुल्ला का किला](https://bharatkaitihas.com/east-india-company-snatches-title-of-mughal-emperor/): अंग्रेजी न्यायिक व्यवस्था का दिखावटी चेहरा था, वास्तविकता यह थी कि अंग्रेजों से पेंशन पा रहे बादशाह को उन सभी आदेशों पर अपनी मुहर लगानी पड़ती थी जो अंग्रेज उसके समक्ष प्रस्तुत करते थे। - [मिर्जा अकबर शाह](https://bharatkaitihas.com/raja-rammohan-roy-went-to-london-to-increase-emperors-pension/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधिकारियों ने एक बार अकबरशाह के पुत्र मिर्जा जहांगीर को बंदी बना लिया। अकबर की बेगम ने कुतुबुद्दीन काकी की मजार पर जाकर मनौती मांगी कि यदि मिर्जा जहांगीर की रिहाई हो जाए तो वह काकी की दरगाह पर चादर चढ़ाएगी। - [बहादुरशाह जफर](https://bharatkaitihas.com/lord-dalhousie-asked-the-mughal-emperor-to-vacate-the-fort/): अँग्रेजों ने बादशाह की इच्छा के विरुद्ध, बादशाह के सबसे निकम्मे पुत्र मिर्जा कोयास को बादशाह का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। - [लॉर्ड डलहौजी का शिकंजा](https://bharatkaitihas.com/the-discontent-of-the-red-fort-started-growing-as-a-spark-towards-the-british/): देशी राज्य हमारी दया पर निर्भर हैं तथा वे ही भारत में हमारी वास्तविक शक्ति हैं। इस शक्ति का अनुमान हमें तब तक नहीं होगा जब तक कि हम उसे खो न देंगे। - [नीच और मूर्ख भारतीय](https://bharatkaitihas.com/british-used-to-hang-indians-in-name-of-power-of-red-fort/): अंग्रेज जिन्हें नीच और मूर्ख भारतीय कहते थे, अब छाती ठोक कर अंग्रेजों के सामने खड़े हो गए और अंग्रेजों को गोली मारने लगे। - [वाजिद अली शाह](https://bharatkaitihas.com/british-decided-to-seize-awadh-by-force/): भगवान श्री कृष्ण को संबोधित करके लिखी गई उसकी एक ठुमरी इस प्रकार है- 'मोरे कान्हा जो आए पलट के, अब के होली मैं खेलूंगी डट के।' - [अवध की मुक्ति](https://bharatkaitihas.com/british-captured-nawab-wajid-ali-shah-of-awadh-and-sent-him-to-calcutta/): वाजिद अली शाह ने हसीन बेगमों को रहने और उन्हें नृत्य का प्रशिक्षण देने के लिए 'परीखाना' का निर्माण करवाया। - [हिन्दू सैनिकों का क्रोध](https://bharatkaitihas.com/goddess-of-revolution-was-looking-towards-red-fort-with-hopeful-eyes/): भारतीय आकाश यद्यपि इस समय बिल्कुल शांत है किंतु एक छोटा सा बादल जो एक मुट्ठी से बड़ा न हो, उठ सकता है, जो बढ़कर हमारा सर्वनाश कर सकता है। - [नाना साहब पेशवा](https://bharatkaitihas.com/peshwa-nana-saheb-brought-message-of-revolution-to-red-fort/): नाना साहब ने भारत में राष्ट्रव्यापी स्वातंत्र्य संग्राम आरम्भ करने के लिए उन रजवाड़ों से सम्पर्क करने की योजना बनाई जिनके राज्य अंग्रेजों ने छीन लिए थे या जिन राजाओं की पेंशनें बंद कर दी थीं। - [लाल कमल का फूल](https://bharatkaitihas.com/lotus-flowers-and-roti-began-to-roam-from-village-to-village/): हिन्दू संस्कृति में लाल कमल का फूल बहुत श्रद्धा से देखा जाता है। देवी लक्ष्मी कमल के आसान पर विराजमान हैं, भगवान विष्णु के हाथों में कमल का फूल है तथा ब्रह्माजी की पूजा कमल के फूलों से की जाती है। इस कारण 1857 की राष्ट्रव्यापी सशस्त्र क्रांति के समय लाल कमल का फूल क्रांति […] - [मंगल पाण्डे](https://bharatkaitihas.com/mangal-pandey-shot-english-officer-and-played-bugle-of-nationwide-mahakranti/): मंगल पाण्डे ने विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया। उसने अपने साथियों को ललकारा- 'तुम लोग धर्म के लिये संग्राम में उतर पड़ो।' - [द लास्ट मुगल](https://bharatkaitihas.com/red-fort-was-not-in-a-position-to-face-british-due-to-internal-strife/): एक मरियल कुत्ते को गलती से भेड़िया समझा जा सकता है। - [बहादुरशाह जफर का हरम](https://bharatkaitihas.com/red-fort-was-poor-but-bahadur-shah-zafars-harem-was-rich/): बहादुरशाह में कई खूबियां हो सकती हैं किंतु हरम को काबू में रखना उसके वश में नहीं था। - [भूखे-नंगे शहजादे](https://bharatkaitihas.com/two-thousand-hungry-bare-princesses-were-closed-in-red-fort/): सलातीन के निवास में एक बहुत ऊंची दीवार है ताकि कोई उनको नहीं देख पाए। इसके अंदर उनके लिए छप्पर वाली अनेक झौंपड़ियां हैं। जहाँ यह बेचारे रहते हैं। जब दरवाजे खुले तो बहुत से अधनंगे, भूखे, मुसीबत जदा लोगों ने हमको घेर लिया। उनमें से कुछ तो अस्सी साल के थे और बिल्कुल प्राकृतिक अवस्था में थे, अर्थात् नंगे थे। - [सर चार्ल्स मेटकाफ](https://bharatkaitihas.com/metcalf-family-made-the-red-fort-pathetic/): सर चार्ल्स मेटकाफ अत्यंत चालाक व्यक्ति था। उसने शालीमार बाग में अपने लिए एक शानदार बंगला बनवा रखा था और एक खूबसूरत सिक्ख लड़की से विवाह करके उस बंगले में रहा करता था। - [दिल्ली में खूनी क्रांति](https://bharatkaitihas.com/red-fort-accepted-to-lead-a-nationwide-revolution/): यह एक मजहबी जंग है और मजहब के नाम पर लड़ी जा रही है। इसलिए तमाम शहरों और गांवों के हिन्दुओं और मुसलमानों का फर्ज है कि वे अपने-अपने मजहब और रस्मो-रिवाज पर कायम रहें और उनकी हिफाजत करें। - [कानपुर की क्रांति](https://bharatkaitihas.com/peshwa-nana-sahebs-army-entered-ganges-river-and-killed-hundreds-of-british/): भारतीय सिपाही गंगाजी में उतर पड़े तथा अंग्रेज अधिकारियों को नावों से खींच-खींचकर मारने लगे। - [बीबीघर का हत्याकाण्ड](https://bharatkaitihas.com/two-hundred-british-women-and-children-were-killed-in-bibi-ghar/): बीबीघर का हत्याकाण्ड अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के दौरान हुई एक बड़ी ही शर्मनाक घटना है जिसने भारतीय क्रांति के सैनिकों को कलंकित किया तथा अंग्रेजों को भारतीय सैनिकों का शत्रु बना दिया। नाना साहब पेशवा ने अंग्रेजों से कानपुर मुक्त करवाकर अंग्रेज अधिकारियों को छूट दी थी कि वे अपने परिवारों को लेकर […] - [बेगम हजरत महल](https://bharatkaitihas.com/begum-hazrat-mahal-sitting-on-an-elephant-killed-british/): बेगम हज़रत महल का जन्म अवध रियासत के फ़ैज़ाबाद कस्बे में हुआ था। वह पेशे से तवायफ़ थी और अपने माता-पिता द्वारा बेचे जाने के बाद खवासीन के रूप में अवध के शाही हरम में ले ली गई थी। - [अंग्रेजों का खूनी खेल](https://bharatkaitihas.com/british-converted-trees-in-a-machine-to-hang-revolutionaries/): बाराबंकी के जंगलों से छापामार गतिविधियां चला रहे अवध के क्रांतिकारी जागीरदार जयलाल सिंह को अंग्रेजों ने छल पूर्वक पकड़ लिया तथा उसे 1 अक्टूबर 1859 को लखनऊ में फांसी दे दी। - [जागीरदार कुंवरसिंह](https://bharatkaitihas.com/kunwar-singh-hosted-his-flag-on-palace-before-he-died/): कुंवरसिंह के सिपाहियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों को खदेड़ कर जगदीशपुर के महल से यूनियन जैक उतारकर अपना झण्डा लगा दिया। - [नसीराबाद की क्रांति](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-shot-major-spotswood-and-cut-colonel-newbury-to-pieces/): छावनी क्षेत्र में एक असिस्टेण्ट कमिश्नर, एक सिविल सर्जन तथा उसकी पत्नी, गवर्नमेंट कॉलेज का प्रिंसीपल, उसका एक सहायक तथा आधा दर्जन नॉन कमीशन्ड अधिकारी तोपखाने के पास ही रहते थे। - [चलो दिल्ली मारो फिरंगी](https://bharatkaitihas.com/the-revolutionaries-of-nasirabad-also-walked-towards-the-red-fort/): विद्रोही घुड़सवार को एक तोपची ने मार गिराया। उसके पांच विद्रोही साथियों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। तीन को आजीवन कारावास दिया गया तथा पच्चीस सैनिकों के हथियार छीनकर दूसरे सैनिकों को दे दिये गये। - [ठाकुर कुशालसिंह](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-beheaded-political-agent-mac-mawson-and-hung-him-outside-the-fort/): कप्तान शावर्स ने सेना लेकर विद्रोही सिपाहियों का पीछा किया। वह शाहपुरा भी गया किंतु शाहपुरा के शासक लक्ष्मणसिंह ने कप्तान शावर्स के लिये नगर के द्वार नहीं खोले। - [मेजर बर्टन की हत्या](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-beheaded-major-burton-and-locked-the-maharaja-of-kota-in-the-fort/): कोटा रियासत के विद्रोही सेनिकों ने ब्रिटिश सेना के मेजर बर्टन की हत्या कर दी और उसका सिर काटकर कोटा के किले पर लटका दिया। - [महारानी लक्ष्मी बाई](https://bharatkaitihas.com/maharani-laxmi-bai-introduced-the-british-to-power-of-indian-women/): महारानी महारानी लक्ष्मी बाई की दशा देखकर पृथ्वीसिंह को भारत भूमि की दुर्दशा का बोध हुआ। पृथ्वीसिंह ने महारानी को दो दिन तक अपने महल में ठहराया तथा उसे नये वस्त्र प्रदान किये। - [तात्या टोपे](https://bharatkaitihas.com/marathi-brahmin-tatya-tope-defeated-british/): तात्या टोपे पेशवा बाजीराव (द्वितीय) के निजी कर्मचारी पाण्डुरंग राव भट्ट़ का स्वाभिमानी बेटा था। तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पाण्डुरंग राव था, परंतु उसे स्नेह से तात्या कहा जाता था। - [तात्या टोपे का संघर्ष](https://bharatkaitihas.com/saffron-flag-nut-and-betel-leaf-began-to-roam-from-village-to-village/): अंग्रेज समझ गए कि नाना साहब या तात्या टोपे इस क्षेत्र में आने वाले हैं तथा उनके गुप्त संगठन जन साधारण को नाना साहब या तात्या टोपे के पक्ष में संगठित कर रहे हैं। - [मेरठ के क्रांतिकारी](https://bharatkaitihas.com/tilangas-entered-delhi-and-started-a-terrible-game-of-violence-and-plunder/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी की दिल्ली में स्थित सेनाओं में कोई विद्रोह नहीं हुआ था। जब मेरठ के क्रांतिकारी दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने क्रांति की शुरुआत की। चूंकि यह सशस्त्र सैनिक क्रांति थी इसलिए क्रांति का प्राकट्य हिंसा से हुआ और हिंसा से ही इस क्रांति का समापन हो सका। 10 मई 1857 को रविार था […] - [दिल्ली की लूट](https://bharatkaitihas.com/tilangas-cut-jennings-beautiful-daughter/): मरने वालों में फादर जेनिंग्स की एक खूबसूरत बेटी भी शामिल थी। अभी उसने यौवन की देहरी पर पैर ही रखा था कि बेरहम मौत ने उसे बिना किसी अपराध के आकर जकड़ लिया। - [तिलंगों का कहर](https://bharatkaitihas.com/theophilus-metcalf-reached-kotwali-in-a-shirt-and-under-wear/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में भाग लने वाले पुरबिया सैनिकों को भारतीय इतिहास में तिलंगा कहा गया है। दिल्ली वासियों ने इन तिलंगों का कहर अपनी आंखों से देखा। जब तिलंगों ने दिल्ली पर आक्रमण किया, तब उनका उद्देश्य अंग्रेजों को मारकर दिल्ली को मुक्त करवाना और बहादुरशाह जफर को बादशाह घोषित करना था […] - [अंग्रेजों की लाशें](https://bharatkaitihas.com/bahadur-shah-zafar-sewed-shroud-for-the-british-of-delhi/): किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह दिल्ली की उन सड़कों पर निकलकर देखे कि अंग्रेजों की लाशें किन-किन सड़कों पर पड़ी हैं! कौनसे लाला की हवेली के दरवाजे टूटे पड़े हैं और कौनसे रईस के अस्तबल के घोड़े कल सुबह से भूखे खड़े हैं! - [बहादुरशाह जफर की बादशाहत](https://bharatkaitihas.com/cannon-thunder-rose-from-red-fort-in-midnight/): जब तिलंगों ने रानी विक्टोरिया और गोरों को गालियां देना आरम्भ किया तो बादशाह खिन्न हो गया। उसने अनुभव किया कि तिलंगों की नारेबाजी में उस गरिमा का अभाव है जो बादशाह के जुलूसों में चलने वाले सिपाहियों में होती है। - [काफिरों पर कहर](https://bharatkaitihas.com/people-of-delhi-believed-that-god-sent-tilangas-to-delhi/): अंग्रेजों पर खुदा का कहर टूटा है। उनके घमंड को खुदाई इंतकाम ने चूर-चूर कर दिया है। कुरआन शरीफ में लिखा है कि खुदा घमण्ड करने वालों को पसंद नहीं करता है। वह इन ईसाइयों पर ऐसी प्रलय लाया है कि थोड़े ही समय में इस खून-खराबे ने उनको बिल्कुल ही तबाह और बर्बाद कर दिया। - [दिल्ली की तवायफें](https://bharatkaitihas.com/tilangas-captured-kothas-of-delhis-tawaifs/): डॉ. चमनलाल जो कि हिन्दू से ईसाई बन गया था, उसे इन दंगों में मार दिया गया जबकि एंग्लो इण्डियन ईसाई औरत मिसेज ऑल्डवैल को इसलिए जीवित छोड़ दिया गया क्योंकि उसे कलमा पढ़ना आता था। - [तिलंगे](https://bharatkaitihas.com/mother-india-will-be-grateful-to-tilangas/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के समय तिलंगे शब्द बड़ा विख्यात हुआ। अंग्रेज अधिकारी इस शब्द से भयभीत थे तो भारतीयों के सीने इस शब्द को सुनकर गर्व से फूल जाते थे। आज भी बहुत से नौजवान जानना चाहते हैं कि तिलंगे कौन थे और कहाँ से आए थे! अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति होने […] - [दिल्ली में भुखमरी](https://bharatkaitihas.com/failure-of-red-fort-leads-to-starvation-in-delhi/): बहादुरशाह जफर का मानना था कि दिल्ली में घुस आए क्रांतिकारी सैनिक भरोसेमंद नहीं हैं। उन्हें दरबारी तौर-तरीकों की कोई जानकारी नहीं है। वे किसी की इज्जत करना नहीं जानते हैं। - [अंग्रेजों का आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/major-british-officers-died-of-cholera-even-before-invading-delhi/): अंग्रेज सेनाओं ने इन क्रांतिकारी सेनाओं पर तत्काल आक्रमण कर दिया जिससे क्रांतिकारियों की सेनाओं को बड़ली की सराय से पीछे भागकर दिल्ली में घुस जाना पड़ा और अंग्रेजों ने यमुना के पश्चिमी तट पर स्थित रिज पर अधिकार कर लिया जो कि दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित थी। - [विलियम हॉडसन के जासूस](https://bharatkaitihas.com/william-hodgsons-spies-spread-all-over-delhi/): हॉडसन के घुड़सवार दस्ते को अंग्रेजी सेनाओं के आगे रहकर शत्रु सेना की जासूसी करनी थी ताकि अंग्रेजों को अपनी रणनीति तय करने में सहायता मिल सके। - [लाल किले पर गोलीबारी](https://bharatkaitihas.com/english-cannon-shells-started-falling-on-red-fort/): बादशाह और शाही खानदान के लोग लाल किले की छत पर बैठ गए। सलातीन भी लाल किले की दीवारों के बुर्जों से इस गोली-बारी को देखते रहते। - [ब्रिगेडियर जॉन निकल्सन](https://bharatkaitihas.com/john-nicholson-has-come-as-the-death-of-indian-soldiers/): विलियम डेलरिम्पल ने लिखा है कि जॉन निकल्सन प्रोटेस्टेण्ट ईसाई था किंतु चापलूस हिन्दुस्तानियों का एक समूह उसे निकल सेन कहता था और उसे विष्णु का अवतार बताता था। - [मेजर जनरल आर्कडेल विल्सन](https://bharatkaitihas.com/entering-delhi-the-english-army-took-heavy-alcohol/): सार्जेंट कारमाइकल ने कश्मीरी गेट को बारूद से उड़ा दिया। मेजर रीड बुरी तरह घायल हो गया और उसका पूरा कॉलम बिखर गया। - [दिल्ली में दहशत](https://bharatkaitihas.com/delhi-became-vacant-due-to-fear-of-british-forces-and-goons/): किसी भी भारतीय के घर में आग लगा देना, सरे आम कोड़ों से पिटवाना और किसी भी भारतीय को फांसी के फंदे से लटका देना अंग्रेजों के लिए आम बात थी। - [दिल्ली की औरतें](https://bharatkaitihas.com/women-of-delhi-came-to-fight-the-british-for-bahadur-shah-zafar/): दिल्ली की औरतें के जिहादी चाहते थे कि बादशाह बहादुरशाह जफर स्वयं घोड़े पर सवार होकर अंग्रेजों की सेना से लड़ें किंतु जब लोगों ने देखा कि बादशाह कायरता दिखा रहा है तो दिल्ली की औरतें जिहादियों की भीड़ में शामिल होकर अंग्रेजों को मारने के लिए निकल पड़ीं। 16 सितम्बर 1857 को जिस दिन […] - [बाबर का आखिरी वंशज](https://bharatkaitihas.com/baburs-last-descendant-left-red-fort-in-dark-of-night/): जब सूरज निकला तो बादशाह एक कश्ती में बैठकर अपनी मंजिल की ओर रवाना हो गया। कुछ देर बाद बाबर का आखिरी वंशज यमुना नदी के पुराने किले के घाट की तरफ उतरा। - [चित्रकूट की ओर (123)](https://bharatkaitihas.com/towards-chitrakoot/): – ‘शहंशाहे आलम! गुलाम की दरख्वास्त है कि मुझे कुछ दिनों के लिये चित्रकूट जाने की इजाजत दी जाये।’ खानखाना ने जहाँगीर के सामने उपस्थित हो कर निवेदन किया। – ‘क्यों अतालीक बाबा? यहाँ किसी किस्म की तकलीफ है आपको?’ जहाँगीर ने अपने स्वभाव के विपरीत स्वर कोमल ही रखा जाने क्यों आज उसे अपने […] - [सब भाड़ में (124)](https://bharatkaitihas.com/sab-bhaad-mein/): रहीम ने भाड़ में घास झौंकते हुए रीवां नरेश को जवाब दिया कि जिस रहीम के सिर पर विशाल मुगलिया सल्तनत का भार था उस रहीम ने सल्तनत का भार सब भाड़ में झौंक दिया है। रीवां नरेश की आँखें फटी की फटी रह गयीं। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि जो दृश्य वे अपनी आँखों […] - [गोद लिये हुलसी फिरै (125)](https://bharatkaitihas.com/god-liye-hulasee-phirai/): गुसाईंजी ने वृद्ध ब्राह्मण के हाथों से चिट्ठी लेकर पढ़ी तो उनके नेत्रों से आंसुओं की धारा बह निकली। खानखाना ने उसमें लिखा था- गोद लिये हुलसी फिरै तुलसी सो सुत होय। – ‘तुलसी बाबा! ई बूढ़ा विप्र तोहरे शरण में आइ बा। हमार रक्षा आप न करिहैं तो कवन करे?’ एक बूढ़ा ब्राह्मण गुसाईंजी […] - [बादशाह का अपहरण (126)](https://bharatkaitihas.com/kidnapping-of-badshah/): आखिर वही हुआ जो नूरजहाँ चाहती थी, खुर्रम अपने बाप की नजरों में गिर गया। खुसरो पहले ही मर चुका था और जहाँदार वैसे भी किसी काम का न था। इस प्रकार शहरयार के बादशाह के तख्त तक पहुँचने के मार्ग में आने वाली तीन बाधायें स्वतः हट चुकी थीं। अब केवल परवेज बचा था […] - [खीरा सिर से काटिये (127)](https://bharatkaitihas.com/kheera-sir-se-kaatiye/): खानखाना के बेटे दाराबखाँ की पुत्री नूरजहाँ के भाई आसिफखाँ के बेटे शायस्ताखाँ को ब्याही गयी थी। चूंकि दाराबखाँ और दाराबखाँ के बेटे को महावतखाँ ने मार डाला था इसलिये खानखाना की यह पौत्री महावतखाँ से बड़ी क्रुद्ध रहा करती थी। महावतखाँ का कोई भी परिचित आदमी जब भी उससे मिलता तो वह एक ही […] - [बेरहम वक्त (128)](https://bharatkaitihas.com/beraham-vakt/): – ‘इस कुतिया के बच्चे को कह कि हुक्का भर कर लाये नहीं तो मार-मार कर चमड़ी उधेड़ दूंगा।’ शराब के नशे में धुत्त कुंवर हरिसिंह ने चिल्लाकर कहा तो खुर्रम की रूह कांप गयी। हुक्का लाने वाली दासी भी कुंवर का यह रौद्र रूप देखकर सहम गयी। ऐसा घनघोर अपमान! खुर्रम तो स्वप्न में […] - [काला साया (129)](https://bharatkaitihas.com/kaala-saaya/): बदजात महावतखाँ बादशाह से कोई दुर्व्यवहार तो नहीं करता था किंतु उसने बादशाह पर ढेर सारी पाबंदियाँ लाद दी थीं जो किसी दुर्व्यवहार से कम नहीं थीं। बिना महावतखाँ की इजाजत के कोई परिंदा तक बादशाह के पास पर नहीं मार सकता था। उसे सुबह-शाम दो सेर शराब और आधा सेर कबाब दिया जाता था। […] - [फिर से दक्खिन (130)](https://bharatkaitihas.com/south-again-raheem/): नूरजहाँ ने जहाँगीर को आया देखकर सिर पीट लिया किंतु बाहर से उसने बड़ी प्रसन्नता जाहिर की और बादशाह का स्वागत किया। अगली रात नूरजहाँ के डेरों में बड़ा भारी जलसा किया गया। जलसे में ईरान से आयी हुई उन खूबसूरत रक्कासाओं के ऊपर अशर्फियाँ उछाली गयीं किंतु बादशाही आदेश से इस जलसे में किसी […] - [दुखती रग (131)](https://bharatkaitihas.com/dukhatee-rag/): महावतखाँ लड़ता कम था और भागता अधिक था। उधर खानखाना लड़ना तो चाहता था किंतु किसी मैदान में अच्छी तरह मोर्चा बांधकर। इस कारण दोनों ही सेनाएं छुट-पुट लड़ाईयाँ ही करती थीं। जब दक्खिन बहुत कम दूरी पर रह गया तब खानखाना ने पूरी ताकत के साथ महावतखाँ पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। जब […] - [अद्भुत बालक (132)](https://bharatkaitihas.com/wonderful-child/): जेठ का महीना है और सूर्यदेव आकाश के ठीक मध्य में विराजमान हैं। सन-सनाती लू से परिपूर्ण आकाश में धूल के तप्त कण घुल जाने से जब वायु कानों में घुसती है तो लगता है किसी ने पिघला हुआ सीसा उंडेल दिया है। ऐसी विकट गर्मी में मनुष्यों और पशुओं की कौन कहे, चिड़ियों तक […] - [बेहोशी (133)](https://bharatkaitihas.com/unconscious/): आज पूरे चार दिन बाद रहीम की बेहोशी टूटी थी। जाने कहाँ-कहाँ से ढूंढ कर लायी थी जाना उसे। तीन दिनों की भागम भाग के बाद खानखाना दिल्ली के बाहर जंगलों में बेसुध पड़ा हुआ मिला था। – ‘बेटी जाना!’ – ‘हाँ अब्बा हुजूर।’ – ‘देखो तो कमरे में कितना अंधेरा घिर आया है, जरा […] - [उड़ गया चातक (134)](https://bharatkaitihas.com/ud-gaya-chatak/): खानखाना की चेतना लौटी। उसने देखा हवेली पूरी तरह निस्तब्ध है। कहीं से कोई शब्द नहीं। बेटी जाना बाप के पलंग पर ही कंधा रखकर सो गयी है। शमां की रौशनी तेल खत्म हो जाने से अपने अंतिम क्षण गिन रही है जिससे कमरे में अंधेरा छाता जा रहा है। पूरी रात खानखाना सुधि और […] - [उच्छवास (135)](https://bharatkaitihas.com/uchhawas-the-lastthoughts/): मैं इस उपन्यास की भूमिका में लिख आया हूँ- ”उस युग में एक सिपाही का कवि हो जाना कितनी बड़ी बात थी इसका अनुमान लगा पाना आज की परिस्थितियों में संभव नहीं है।” उपन्यास के पूरा हो जाने पर मैं उच्छवास के रूप मेंइस वक्तव्य में कुछ और भी जोड़ना चाहता हूँ। उस युग में […] - [प्रस्तावना - चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/preface-chishtiya-suphi-sampradaya/): प्रस्तावना – चिश्तिया सूफी सम्प्रदाय एवं ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया गया है। बहुत से लोग सूफीवाद को इस्लाम का एक रूप मानते हैं तथा सूफियों को मुसलमान मानते हैं किंतु सूफीवाद का उदय इस्लाम के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति के रूप में हुआ। […] - [इस्लाम का उदय तथा प्रसार](https://bharatkaitihas.com/the-rise-and-spread-of-islam/): मध्य एशिया में स्थित 'सउदी अरेबिया' नामक देश के 'मक्का' नगर में रहने वाले 'कुरेश कबीले' में ई.570 में 'हजरत मुहम्मद' का जन्म हुआ। - [भारत में सूफी मत की सफलता के कारण](https://bharatkaitihas.com/reasons-to-the-success-of-sufism-in-india/): भारत में सूफी मत का आगमन एक युगांतरकारी घटना थी। सूफ मत ने इस्लाम को तो प्रभावित किया ही, साथ ही हिन्दुओं के मन में भी कुछ आकर्षण उत्पन्न किया। शरीअत के खिलाफ बगावत कुछ विद्वानों का मत है कि सूफीवाद, इस्लाम की शरीअत के खिलाफ एक बगावत थी। सूफी मत कोई एक मत नहीं […] - [सूफी परम्परा](https://bharatkaitihas.com/chishtiya-sampradaya/): इस्लाम के उदय एवं प्रसार के कई सौ साल बाद सूफी परम्परा का जन्म हुआ। सूफी परम्परा के कुछ सिद्धांत इस्लाम से मेल खाते हैं तो कुछ सिद्धांत दुनिया के अन्य सम्प्रदायों एवं दर्शनों से मेल खाते हैं। वैराग्ययुक्त साधना द्वारा अल्लाह की उपासना को श्रेयस्कर मानने वाले सूफी कहलाते थे। सूफी परम्परा अथवा ससव्वुफ […] - [ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती](https://bharatkaitihas.com/khwaja-moinuddin-chishti/): ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने गौर साम्राज्य की अंतिम सीमा पर स्थित अजमेर को अपना स्थाई निवास बनाया। मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रारम्भिक जीवन विषयक प्रामाणिक सूचनाओं का प्रायः अभाव है। गौस उल आजम का एक शिष्य था मोईनुद्दीन, जिसका जन्म फारस में हुआ था। ई.1186 में मोइनुद्दीन को अपने गुरु का उत्तराधिकारी चुना गया। उन दिनों […] - [मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह](https://bharatkaitihas.com/moinuddin-chishti-dargah/): ख्वाजा मोइनुद्दीन को उसी हुज्रा (कोठरी) में दफनाया गया जिसमें उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय प्रार्थनायें करने में व्यतीत किया था। इसी को अब मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह कहते हैं। आरंभ में यह कच्ची मजार के रूप में एक पहाड़ी पर स्थित थी जो झाड़ियों एवं पौधों से घिरी हुई थी। ख्वाजा हुसैन नागौरी […] - [छत्रपति शिवाजी का संघर्ष एवं उपलब्धियाँ - प्रस्तावना](https://bharatkaitihas.com/preface-of-book-chhatrapati-shivaji/): छत्रपति शिवाजी का संघर्ष बहुकोणीय था। उन्होंने बीजापुर के शिया राज्य से भूमि छीनकर हिन्दू राज्य की स्थापना की। शिवाजी ने औरंगजेब से जीवन भर संघर्ष किया। छत्रपति ने आम्बेर नरेश मिर्जाराजा जयसिंह तथा जोधपुर नरेश जसवंतसिंह जैसे दुराधर्ष योद्धाओं से अपने राज्य को बचाया तथा औरंगजेब के जीवन काल में ही अपना राज्याभिषेक करवाया। […] - [शिवाजी के पूर्वज (2)](https://bharatkaitihas.com/ancestors-of-shivaji/): माना जाता है कि शिवाजी के पूर्वज मेवाड़ के महाराणाओं के वंश में से निकले थे। राजकुमार सज्जनसिंह अथवा सुजानसिंह उनका पूर्वज था। ई.1303 में अल्लाऊद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग तोड़ा और रावल रत्नसिंह को मार डाला। उसकी मृत्यु के साथ ही मेवाड़ के गुहिलों की रावल शाखा का अंत हो गया। तब बहुत से […] - [शिवाजी का बाल्यकाल (3)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-childhood/): शिवाजी का बाल्यकाल बड़ी कठिनाइयों में बीता। कहा जा सकता है कि इन कठिनाइयों ने ही शिवाजी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण किया। शाहजी एवं जीजाबाई का विवाह मालोजी अभी तक जाधवराय द्वारा किए गए अपमान को भूला नहीं था। मालोजी भी अभी तक अहमदनगर की सेवा में था तथा उसकी पुत्री जीजाबाई भी अब […] - [शिवाजी की राजनीति](https://bharatkaitihas.com/shivajis-entry-into-active-politics/): शिवाजी की राजनीति बहुत स्पष्ट थी। उनकी राजनीति अपने लिए एक राज्य बनाने तक सीमित नहीं थी। वे भारत भूमि पर विशाल हिन्दू साम्राज्य की स्थापना करना चाहते थे। सक्रिय राजनीति में प्रवेश शिवाजी का सक्रिय राजनीति में प्रवेश उनकी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण हुआ। वे अपने पिता से अलग रहकर अपनी माता के संरक्षण […] - [अफजल खाँ का वध (5)](https://bharatkaitihas.com/slaughter-of-afzal-khan/): शिवाजी को शाहजी के आगमन का समाचार मिला तो वह कई मील पैदल चलकर अपने पिता की अगवानी करने पहुंचा। एक मंदिर में पिता-पुत्र का मिलन हुआ। - [शाइस्ता खाँ को शिकस्त (6)](https://bharatkaitihas.com/defeat-to-shaista-khan/): महाराजा जसवंतसिंह को शाइस्ता खाँ के साथ दक्षिण के अभियान पर भेजा गया था किंतु वह शिवाजी के विरुद्ध किए जा रहे अभियान से सहमत नहीं था। - [सूरत की लूट (7)](https://bharatkaitihas.com/plunder-of-surat/): शिवाजी के सिपाही सूरत नगर में घुसकर व्यापारियों का धन छीनने लगे और शिवाजी के डेरे में लाकर ढेर लगाने लगे। - [मिर्जा राजा जयसिंह का अभियान (8)](https://bharatkaitihas.com/campaign-of-mirza-raja-jai-singh/): सूरत के बाद शिवाजी ने औरंगाबाद तथा अहमदनगर के बीच स्थित मुगल क्षेत्रों पर आक्रमण किए। - [शिवाजी की आगरा यात्रा (9)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-agra-tour/): शिवाजी की आगरा यात्रा किसी महानायक की दिग्वजय यात्रा से कम नहीं है। भारतीय इतिहास में इसकी गूंज कई सदियों तक सुनाई देती रहेगी। वस्तुतः इस यात्रा ने ही शिवाजी को महानायक के रूप में स्थापित किया। 22 जनवरी 1666 को आगरा के लाल किले में औरंगजेब के पिता शाहजहाँ की मृत्यु हो गई। औरंगजेब […] - [शिवाजी का औरंगजेब विरोध (10)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-opposes-aurangzeb/): छत्रपति शिवाजी द्वारा औरंगजेब का विरोध भारतीय इतिहास को गति प्रदान करती है। - [साल्हेर मुल्हेर का युद्ध (11)](https://bharatkaitihas.com/war-of-salher-mulher/): मराठों ने मुगलों की सेनाओं को बुरी तरह नष्ट कर दिया। कई हजार मुगलों को मार डाला तथा कई हजार मुगलों को बंदी बना लिया। - [प्रतापराव गूजर का बलिदान (12)](https://bharatkaitihas.com/sacrifice-of-commander-pratap-rao/): कोंडाजी के आदमियों ने दुर्ग का फाटक खोल दिया जिससे पास में छिपी हुई मराठा सेना प्रवेश कर गई। इस सेना ने दुर्ग के मुख्य रक्षक तथा उसके बहुत से सैनिकों को नींद में ही काट डाला। - [शिवाजी का राज्याभिषेक (13)](https://bharatkaitihas.com/coronation-of-shivaji/): शिवाजी का राज्याभिषेक एक युगांतरकारी घटना थी। औरंगजेब के जीवित रहते यह संभव नहीं था किंतु शिवाजी ने औरंगजेब सहित तीन मुसलमान बादशाहों और सुल्तानों से लड़कर अपने राज्य का निर्माण किया तथा स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित किया। उस समय उत्तर भारत में केवल महाराणा राजसिंह तथा दक्षिण भारत में छत्रपति शिवाजी ही ऐसे […] - [शिवाजी की शासन व्यवस्था (14)](https://bharatkaitihas.com/shivajis-governance/): शिवाजी की शासन व्यवस्था प्राचीन क्षत्रिय राज्यों के अनुसार की गई। राज्य कार्य संचालन के लिए अष्ट-प्रधान की नियुक्ति की गई। राज्य का समस्त कार्य इन आठ प्रधानों में बांट दिया गया (1.) पेशवा: राज्य का प्रधान व्यवस्थापक पेशवा कहलाता था। शिवाजी ने इस पद पर मोरोपंत पिंघले को नियुक्त किया। (2.) मजीमदार: इस मंत्री […] - [मुगलों पर पुनः आक्रमण (15)](https://bharatkaitihas.com/re-invasion-of-mughals/): ओरंगजेब ने दिलेर खाँ को पुनः दिल्ली बुलवा लिया था। इस कारण सूबेदार बहादुर खाँ ही दक्षिण में मुगल सत्ता का अकेला प्रतिनिधि था। - [शिवाजी का कर्नाटक अभियान (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%9f%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/): शिवाजी का कर्नाटक अभियान इसलिए किया गया था ताकि सेनाओं का व्यय निकल सके। कर्नाटक अत्यंत प्राचीन काल से ही एक समृद्ध प्रदेश था जिसे मुसलमान लूट रहे थे। जब शिवाजी दक्षिण भारत में मुगलों के क्षेत्र को कई बार लूट चुका तो उसका ध्यान कर्नाटक की ओर गया। कर्नाटक में चार शताब्दियों से मुसलमानों […] - [सम्भाजी का दुराचरण (17)](https://bharatkaitihas.com/misbehavior-of-shambhaji/): जब दिलेर खाँ को ज्ञात हुआ कि शिवाजी ने सम्भाजी को पन्हाला दुर्ग में बंदी बनाकर रखा है तो दिलेर खाँ ने पत्रों के माध्यम से सम्भाजी से सम्पर्क किया। - [जजिया का विरोध (18)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-opposes-jaziya/): मुझे आपके अधिकारियों की स्वामिभक्ति पर आश्चर्य होता है, क्योंकि वे वास्तविकता को आपसे छिपाते हैं और प्रज्वलित अग्नि को फूस से ढंकते हैं। मेरी कामना है कि जहांपनाह का राजत्व महानता के क्षितिज के ऊपर चमके। - [शिवाजी का निधन (19)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-passed-away/): शिवाजी का निधन भारतवासियों के लिए एक अपूर्णनीय क्षति थी। भारत माता को ऐसे वीर पुत्रों की कमी नहीं थी किंतु शिवाजी उनमें सबसे अलग था। - [शिवाजी का भारत पर प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/the-influence-of-shivajis-rise-on-indian-politics/): शिवाजी का भारत पर प्रभाव शताब्दियों के अंतराल में भी देखा जा सकता है। शिवाजी राजे की भीषण टक्करों से दक्षिण भारत में स्थित बीजापुर का आदिलशाही राज्य पूरी तरह कमजोर हो गया। इसी शिया मुस्लिम राज्य में से शिवाजी ने अपने हिन्दू राज्य का निर्माण किया। गोलकुण्डा का कुतुबशाही राज्य अपनी शक्ति खोकर शिवाजी […] - [महाकवि भूषण की कविता में शिवाजी (21)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-in-the-poem-of-mahakavi-bhushan/): भारत के अनेक राजा महाकवि भूषण को अपने दरबार में देखना चाहते थे किंतु उन्होंने शिवाजी के दरबार में रहना पसंद किया। - [शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be/): शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन सम-सामयिक परिस्थितियों के अनुसार किया जाना चाहिए। उसके कार्य अपने समय से बहुत आगे थे। उसने विस्मयकारी उपलब्धियाँ अर्जित कीं। शेरशाह के कार्यों का मूल्यांकन (1.) साम्राज्य संस्थापक के रूप में शेरशाह भारत के उन गिने-चुने शासकों में से है जिसने एक साधारण परिवार में जन्म लेकर विशाल साम्राज्य खड़ा […] - [शेरशाह के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): शेरशाह के उत्तराधिकारी शेरशाह की तरह प्रतिभावान नहीं थे। उन्हें शेरशाह से जो साम्राज्य प्राप्त हुआ, वह लगातार कम होता हुआ नष्ट हो गया। इस्लामशाह शेरशाह ने अपने जीवन काल में ही अपने बड़े पुत्र आदिल खाँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया परन्तु शेरशाह की मृत्यु के उपरान्त अमीरों ने शेरशाह के छोटे पुत्र जलाल […] - [सूरी साम्राज्य का पतन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): सूरी साम्राज्य का पतन होने के कई कारण थे। उस काल में उत्तर-पश्चिमी भारत में मुगल एवं अफगान तो सक्रिय थे ही, राजपूत राजाओं के वंशज भी अपनी खोई हुई स्वतंत्रता को पाने के लिए उद्यत थे। सूरी साम्राज्य का पतन होने के कारण (1.) शेरशाह की अकाल मृत्यु शेरशाह की अकाल-मृत्यु से सूरी साम्राज्य […] - [अकबर का प्रारम्भिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-first-part/): जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर ने ई. 1556 से1605 तक शासन किया। अकबर का प्रारम्भिक जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था। उसे अपने ही परिवार के षड़यंत्रों का शिकार होना पड़ा। अकबर का प्रारम्भिक जीवन अकबर का जन्म अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था। उसके पिता का नाम हुमायूँ और माता का नाम हमीदा बानू […] - [पानीपत का दूसरा युद्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): ऐतिहासिक दृष्टि से पानीपत का दूसरा युद्ध मुगल बादशाह अकबर तथा दिल्ली के शासक हेमचंद्र विक्रमादित्य के बीच हुआ किंतु वस्तुतः यह युद्ध बैरम खाँ तथा हेमचंद्र विक्रमादित्य के बीच लड़ा गया। पानीपत का दूसरा युद्ध हेमू का उत्कर्ष हेमू का असली नाम हेमराज था। वह धूसर जाति का बनिया था। कुछ इतिहासकार उसे गौड़ […] - [बैरम खाँ का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): हुमायूँ ने बैरम खाँ को अल्पवय अकबर का संरक्षक नियुक्त किया था। बैरम खाँ ने ही अकबर को उसके पिता का खोया हुआ राज्य फिर से दिलवाया था किंतु जैसे ही अकबर वयस्क हुआ, उसने बैरम खाँ से छुटकारा पाने का प्रयास किया। बैरम खाँ का विद्रोह मूलतः इसी कारण हुआ था। बैरम खाँ से […] - [अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d/): भारतीय इतिहासकारों ने अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला है। इन इतिहासकारों के अनुसार अकबर ने अपने शासन के कुछ निश्चित उद्देश्य निर्धारित किए तथा इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसने जीवन भर प्रयास किए। अकबर के शासन सम्बन्धी उद्देश्य शासन की बागडोर हाथ में लेने के उपरान्त अकबर […] - [अकबर का साम्राज्य विस्तार](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-second-part/): अकबर का साम्राज्य विस्तार अकबर की राजधानी फतहपुर सीकरी के चारों ओर दूर-दूर तक हुआ। इतने बड़े देश पर अधिकार करने के लिए अकबर को इतना व्यापक विस्तार अभियान चलाना पड़ा। अकबर का साम्राज्य विस्तार और नीति-वैषम्य हुमायूँ द्वारा जीते गये भू-भाग तथा बैरम खाँ द्वारा विजित क्षेत्रों से आगे बढ़कर  साम्राज्य विस्तार करने के […] - [अकबर की राजपूत नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अकबर की राजपूत नीति मध्यकालीन भारतीय इतिहास मे युगांतरकारी परिवर्तन लाने में सक्षम सिद्ध हुई। अकबर ने राजपूतों के साथ सुलह एवं मैत्री का मार्ग अपनाया। अकबर अशिक्षित था किंतु संघर्षों ने उसे चतुर राजनीतिज्ञ बना दिया था। कामरान की निर्दयता, बैरमखाँ की संगति, हरम के कुचक्रों तथा मिर्जाओं के षड़यंत्रों ने अकबर को अपनी […] - [अकबर की राजपूतों पर विजय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af/): अकबर की राजपूतों पर विजय अकबर की साम्राज्य विस्तार नीति का प्रमुख अंग थी। अकबर ने न केवल राजपूतों को अपने अधीन किया अपितु उनसे ही अपने राज्य का विस्तार करवाया। आम्बेर के साथ मैत्री सम्बन्ध राजपूताना में स्थित आम्बेर राज्य पर कच्छवाहा राजपूतों का शासन था। इन दिनों राजा भारमल वहाँ शासन कर रहा […] - [अकबर की शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-fourth-part/): अकबर की शासन व्यवस्था त्रिस्तरीय थी जिसमें सर्वोच्च स्तर पर केन्द्रीय शासन, मध्यम स्तर पर प्रांतीय शासन तथा निम्नतम स्तर पर स्थानीय शासन था। अकबर की शासन व्यवस्था केन्द्रीय शासन अकबर का केन्द्रीय शासन पूर्ण रूप से स्वेच्छाचारी तथा निरंकुश राजतंत्र पद्धति पर आधारित था। इस केन्द्रीय शासन का कार्य न केवल राजधानी में रहने […] - [अकबर का सैन्य प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): अकबर भारत जैसे विशाल देश के अधिकांश हिस्से पर शासन करता था। यह केवल एक विशाल सेना के बल पर ही किया जा सकता था। इस कारण अकबर का सैन्य प्रबन्धन अत्ंयंत बेहतर अवस्था में था। अकबर ने विशाल मुगल सल्तनत का निर्माण सेना के बल पर ही किया था। सल्तनत की सुरक्षा एवं सल्तनत […] - [अकबर का भूमि प्रबन्धन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): अकबर का भूमि प्रबन्धन उस युग की परिस्थितियों को देखते हुए काफी हद तक वैज्ञानिक था। इसमें किसानों से निश्चित कर लेने की व्यवस्था की गई थी जिसके कारण कर्मचारी किसानों पर मनमानी नहीं कर सकते थे। अकबर ने सैनिक सुधारों की भांति भूमि सुधार भी गुजरात विजय के बाद ही आरम्भ किये। इस्लामशाह की […] - [अकबर के सामाजिक सुधार](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-fifth-part/): अकबर के सामाजिक सुधार भारत के मध्यकालीन इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं। अकबर ने मजहबी कट्टरता के उस वातावरण में भी गैर-इस्लामिक प्रजा को अपनी प्रजा समझा तथा उन्हें पूर्ववर्ती सुल्तानों एवं बादशाहों की तुलना में अनेक सहूलियतें दीं। अकबर के सामाजिक सुधार अकबर ने ऐसे कई सामाजिक सुधार किये जिनका उसकी समस्त प्रजा […] - [अकबर की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): अकबर की धार्मिक नीति एक वैचारिक रूप से सुदृढ़ शासक की नीति थी। जीवन की पाठशाला में हुए अनुभवों ने उसे सिखा दिया था कि सभी धर्मों में अच्छाइयाँ एवं कमियाँ हैं। कोई भी धर्म पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं है। अकबर अपने युग के मुस्लिम बादशाहों से बिल्कुल उलट, उदार तथा व्यापक दृष्टिकोण […] - [दीन-ए-इलाही](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%8f-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80/): दीन-ए-इलाही का शाब्दिक अर्थ, ‘ईश्वर का धर्म’ होता है परन्तु वास्तव में दीन-ए-इलाही कोई धर्म नहीं था। यह ऐसे लोगों की एक गोष्ठी थी जो अकबर के विचारों तथा विश्वासों से सहमत थे और जो उसे अपना पीर या गुरु मानने को तैयार थे। अकबर जानता था कि न तो समस्त धर्मों को जोड़कर एक […] - [अकबर के शासन की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-third-part/): अकबर के शासन की विशेषताएँ उसके सम्पूर्ण शासनकाल में दिखाई देती हैं। उसने निरकुंश एवं एकच्छत्र शासक होते हुए भी प्रजा के विभिन्न वर्गों के हित के लिए कार्य किए। महान साम्राज्य निर्माता भारत में जिस प्रकार दो अफगान साम्राज्यों की स्थापना हुई थी। ठीक उसी प्रकार तीन मुगल साम्राज्यों की स्थापना हुई थी। पहले […] - [अकबर का व्यक्तित्व](https://bharatkaitihas.com/restoration-of-mughal-sultanate-sixth-part/): अकबर का व्यक्तित्व मध्यकालीन मुसलमान शासकों की तुलना में अधिक उदार एवं बड़ा था। वह बड़ी सल्तनत का शासक था और उसके व्यक्तित्व में बड़ी सल्तनत पर शासन करने के समस्त आवश्यक गुण विद्यमान थे।  अकबर की गणना भारत के महान् शासकों में की जाती है। उसके व्यक्तित्व के सम्बन्ध में विद्वानों ने इतना अधिक […] - [इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87/): इतिहासकारों की दृष्टि में अकबर का स्थान बहुत ऊँचा है। चाहे भारतीय इतिहासकार हों या विदेशी इतिहासकार सभी ने अकबर के शासन की प्रशंसा की है। जवाहर लाल नेहरू ने अकबर को भारत के दो महान राजाओं में से एक बताया है। मध्यकालीन इतिहासकारों से लेकर आधुनिक इतिहासकारों ने अकबर के बारे में बहुत कुछ […] - [नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर](https://bharatkaitihas.com/nooruddin-muhammad-jahangir-first-part/): नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर ने ईस्वी 1605 से 1627 तक शासन किया। वह अकबर के चार पुत्रों में सबसे बड़ा था। जिस समय अकबर की मृत्यु हुई, उस समय अकबर के पुत्रों में अकेला वही जीवित बचा था। नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का प्रारम्भिक जीवन नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का बचपन का नाम सलीम था। उसकी माता हीराकंवर […] - [नूरजहाँ का उत्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8/): नूरजहाँ का उत्थान जहाँगीर कालीन राजनीति की प्रमुख घटना थी। जहाँगीर के शासनकाल में नूरजहाँ ही मुगललिया सल्तनत की वास्तविक शासक थी। नूरजहाँ का बचपन का नाम मेहरुन्निसा था। फारसी में मेहर प्रेम को कहते हैं तथा अरबी में निसा स्त्री को कहते हैं। इस प्रकार मेहरुन्निसा का शाब्दिक अर्थ प्रेम करने योग्य स्त्री होता […] - [खुर्रम का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): खुर्रम का विद्रोह जहाँगीर की दरबारी गुटबंदी का परिणाम थी। यह गुटबंदी नूरजहाँ ने आरम्भ की थी। जब जहाँगीर के पुत्रों को लगा कि नूरजहाँ अपने पुत्र को अगला बादशाह बनाना चाहती है, तब खुर्रम ने बगावत का झण्डा बुलंद कर दिया। जब जहाँगीर बीमार पड़ा तो खुर्रम में, तख्त प्राप्त करने की आतुरता बढ़ […] - [महाबत खाँ का विद्रोह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): महाबत खाँ का विद्रोह नूरजहाँ के भाई आसफ खाँ के षड़यंत्रों एवं का परिणाम था। नूरजहाँ ने आसफ खाँ ने महाबत खाँ के लिए ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कर दीं जिनके कारण महाबत खाँ को बगावत करनी पड़ी। खुर्रम के विद्रोह के समय खुर्रम का श्वसुर आसफ खाँ चुपचाप विद्रोह की गतिविधियों को देखता रहा। उसने […] - [जहाँगीर का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): इतिहासकारों के लिए जहाँगीर का चरित्र किसी पहेली से कम नहीं है। जब तक अकबर जीवित रहा, जहाँगीर ने कई बार अपने पिता से विद्रोह किया तथा अपनी पत्नी मानबाई और अपने पिता के मित्र अबुल फजल की हत्या जैसे गंभीर अपराध किए किंतु जब वह बादशाह बना तो वह न्यायप्रिय शासक एवं कलाओं का […] - [नूरजहाँ का चरित्र एवं कार्यों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): नूरजहाँ का चरित्र मध्यकालीन इतिहास में किसी पहेली से कम नहीं है। उस युग में इस बात पर विश्वास नहीं किया जाता था कि किसी औरत में शासकीय प्रतिभा हो सकती है किंतु जहाँगीर ने अपने राज्य का पूरा शासन नूरजहाँ पर छोड़ दिया था। नूरजहाँ का चरित्र नूरजहाँ के गुणों के कारण जहाँगीर ने […] - [शाहजहाँ](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-first-part/): शाहजहाँ ने ईस्वी 1628 से 1658 तक शासन किया। वह अपने पिता जहाँगीर की तुलना में अधिक कट्टर शासक था। उसने अपने पितामह की सुलहकुल नीति को तो नहीं छोड़ा किंतु उसने कई मंदिरों को तुड़वाया जिनमें पुष्कर का प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर भी शामिल है। शाहजहाँ का प्रारम्भिक जीवन शाहजहाँ का वास्तविक नाम खुर्रम था। […] - [शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7/): शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध मुस्लिम इतिहासकारों की दृष्टि में शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध मध्यकालीन इतिहास का स्वर्णयुग था जबकि हिन्दू इतिहासकार उसके शासन प्रबन्ध को मजहबी कट्टरता से परिपूर्ण मानते हैं। शाहजहाँ का शासन प्रबन्ध शाहजहाँ ने बादशाह बनने के पहले से ही अपनी योग्यता का परिचय देकर ख्याति अर्जित कर ली थी। वह अपने […] - [उत्तराधिकार युद्ध](https://bharatkaitihas.com/shah-jahan-second-part/): शाहजहाँ के जीवित रहते हुए ही शाहजहाँ के पुत्रों में उत्तराधिकार युद्ध हुआ जिसमें औरंगजेब विजयी रहा और उसने शाहजहाँ को पकड़कर ताजमहल में कैद कर लिया। सितम्बर 1657 में शाहजहाँ बीमार पड़ गया। वह 65 वर्ष का हो चुका था। वृद्धावस्था के कारण उसकी बीमारी में सुधार नहीं हुआ और उसकी दशा बिगड़ती चली […] - [औरंगजेब (आलमगीर)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac/): औरंगजेब का पूरा नाम मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब था। उसे आलमगीर भी कहा जाता था। उसने ईस्वी 1658 से 1707 तक भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया। वह एक क्रूर एवं धर्मान्ध कट्टर सुन्नी मुसलमान शासक था। उसकी कट्टर नीतियों ने मुगल सल्तनत को पतन के मार्ग पर धकेल दिया। औरंगजेब का प्रारम्भिक जीवन मुहीउद्दीन […] - [औरंगजेब की धार्मिक नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): औरंगजेब की धार्मिक नीति इस्लामिक मजहबी कट्टरता पर आधारित थी। वह सुन्नी मुसलमान था और भारत की सम्पूर्ण प्रजा को सुन्नी मुसलमान बनाना चाहता था। औरंगजेब कट्टर सुन्नी मुसलमान था। इस्लाम में उसकी बड़ी अनुरक्ति थी। वह स्वयं को इस्लाम का रक्षक तथा पोषक समझता था। इसलिये राज्य के समस्त साधनों को इस्लाम की सेवा […] - [औरंगजेब की राजपूत नीति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): औरंगजेब की राजपूत नीति मजहबी संकीर्णता पर आधारित थी। वह राजपूत राजाओं से अपने साम्राज्य का विस्तार तो करवाना चाहता था किंतु साथ ही उन्हें मुसलमान भी बनाना चाहता था। औरंगजेब की हिन्दू विरोधी नीति के कारण राजपूत राज्यों के साथ उसका संघर्ष अनिवार्य हो गया। औरंगजेब की राजपूत नीति बुंदेलों से युद्ध सबसे पहले […] - [औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति](https://bharatkaitihas.com/muhiuddin-muhammad-aurangzeb-second-part/): औरंगजेब की साम्राज्यवादी नीति न केवल मुगल सल्तनत के लिए, न केवल भारत की जनता के लिए अपितु स्वयं उसके लिए भी विनाशकारी सिद्ध हुई। औरंगजेब अपनी सल्तनत का विस्तार भारत के बचे हुए भू-भाग तथा उत्तर पूर्व में उन क्षेत्रों तक करना चाहता था जिन पर किसी समय तैमूर लंग का शासन था। उसने […] - [औरंगजेब के अंतिम दिन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/): औरंगजेब के अंतिम दिन कष्ट से भरे हुए थे। वह भारत की समस्त प्रजा को सुन्नी मुसलमान बनाना चाहता था किंतु लाखों हिन्दुओं का रक्त बहाकर भी वह इस लक्ष्य को अर्जित नहीं कर पाया। उसके सामने ही चारों ओर विद्रोहों की ज्वालाएँ फूट पड़ी थीं। 1682 ई. से औरंगजेब (आलमगीर) दक्षिण में लड़ रहा […] - [औरंगजेब के उत्तराधिकारी](https://bharatkaitihas.com/aurangzebs-successor/): औरंगजेब के उत्तराधिकारी न तो औरंगजेब द्वारा छोड़ी गई विशाल मुगलिया सल्तनत को संभाल सके और न औरंगजेब द्वारा उत्पन्न की गई अव्यवस्था को संभाल सके। 1707 ई. में दक्खिन के मोर्चे पर जब औरंगजेब की मृत्यु हुई, तब तक मुगल सल्तनत राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक दृष्टि से काफी कमजोर हो गई थी किंतु उसकी […] - [मुगल सल्तनत का विघटन](https://bharatkaitihas.com/disintegration-of-mughal-sultanate-first-part/): औरंगजेब के आँखें बन्द करते ही चारों तरफ से मुगल सल्तनत का विघटन आरम्भ हो गया। सल्तनत के प्रभावशाली अमीरों और मनसबदारों ने अपने-अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित करने आरम्भ कर दिये। आरम्भ में यह कार्य केन्दीय राजधानी दिल्ली से दूर के क्षेत्रों में हुआ, बाद में उत्तर भारत में भी कई छोटे-छोटे राज्य बन गये। […] - [मुगल सल्तनत का अंत](https://bharatkaitihas.com/disintegration-of-mughal-sultanate-second-part/): मुगल सल्तनत का अंत कोई आकस्मिक राजनीतिक घटना नहीं थी। मुगल सल्तनत का विघटन तो औरंगजेब के जीवनकाल में ही आरम्भ हो गया था। मुगल सल्तनत का अंत होने के कारण मुगल दरबार में दलबन्दी अमीरों, मनसबदारों, शहजादों तथा बेगमों के निजी स्वार्थों और आपसी स्पर्द्धा के कारण हुमायूँ के समय से ही मुगल दरबार […] - [मुगल शासन व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/mughal-governance-and-institutions-first-part/): मुगल शासन व्यवस्था को भारतीय इतिहास में कुलीनों का शासन कहा जाता है। मुगलकालीन शासन व्यवस्था के मूल ढाँचे को खड़ा करने का श्रेय अकबर को है। उसने जिस शासन पद्धति को लागू किया, वह थोड़े-से परिवर्तनों के साथ औरंगजेब के समय तक तथा उसके भी बाद तक जारी रही। मंगोलों की शासन व्यवस्था में […] - [मुगलों की मनसबदारी प्रथा](https://bharatkaitihas.com/mansabdari-system-of-mughals/): आधुनिक इतिहासकार अभी तक मुगलों की मनसबदारी प्रथा को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। फिर भी इतना स्पष्ट है कि मनसबदारी प्रथा सैनिक रैंक के साथ-साथ जमींदारी की हैसियत से भी जुड़ी हुई थी। मुगलों की मनसबदारी प्रथा मनसब प्रथा की आवश्यकता अकबर के शासन के आरम्भिक वर्षों में शाही सेना में मंगोल, तुर्क, […] - [मुगलों की जागीरदारी प्रथा](https://bharatkaitihas.com/feudatory-system-of-mughals/): मुगलों की जागीरदारी प्रथा का आधार वे हिन्दू एवं मुसलमान सेनापति थे जो अपनी प्रजा पर कड़ाई से नियंत्रण करके प्रजा से राजस्व वसूल करके केन्द्रीय कोषागार में समय पर जमा करवा सके। मुगलों की जागीरदारी प्रथा में जागीरों के प्रकार राज्य कर्मचारियों को वेतन के बदले जो भूमि दी जाती थी उसे जागीर कहते […] - [मुगलों का प्रांतीय शासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): मुगलों का प्रांतीय शासन पूर्ववर्ती तुर्कों द्वारा स्थापित प्रांतीय शासन की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ था। विद्रोह करने वाले प्रांतपतियों का सख्ती से दमन किया जाता था। बाबर एवं हुमायूँ ने प्रान्तीय व्यवस्था स्थापित करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया। इसलिये सल्तनत कालीन व्यवस्था ही चलती रही। अकबर के शासनकाल मंे मुगल सल्तनत को सूबों […] - [मुगलों की सैनिक व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/mughal-governance-and-institutions-second-part/): मुगलों की सैनिक व्यवस्था ही उनकी साम्राज्य शक्ति का मुख्य आधार थी। सेना के बल पर ही इतने विशाल साम्राज्य को स्थिर रखा जा सकता था। मुगलों की सैनिक व्यवस्था बाबर ने सैनिक शक्ति के बल पर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। उसकी सैन्य व्यवस्था तैमूर और चंगेज खाँ के संगठन पर आधारित थी। बाबर […] - [मुगलों की न्याय व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/): मुगलों की न्याय व्यवस्था के सम्बन्ध में इतिहासकारों के मध्य विवाद रहा है। जदुनाथ सरकार ने इस व्यवस्था को सुगम, सक्रिय एवं अपूर्ण बताया है। डॉ. आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव ने इसे दोषपूर्ण बताया है जबकि डॉ. हसन ने इसे समयानुकूल माना है। डॉ. जैन का मत है कि मुगलों की न्याय व्यवस्था कम खर्चीली, शीघ्र कार्य […] - [मुगलों की राजस्व व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): मुगलों की राजस्व व्यवस्था पूर्ववर्ती दिल्ली सल्तनत कालीन राजस्व व्यवस्था से अधिक मजबूत थी। प्रजा से कर वसूल करके केन्द्रीय कोषागार तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए थे। बाबर और हुमायूँ, दोनों का शासनकाल किसी प्रकार के आर्थिक सुधारों को कार्यान्वित करने के लिए अपर्याप्त रहा। अकबर ने सल्तनत की अर्थव्यवस्था को संगठित […] - [मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2/): मुगल शासनव्यवस्था का मूल्यांकन करते समय हमें मध्ययुगीन परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिये। उस युग में धार्मिक कट्टरता की प्रधानता थी और कोई भी संस्था उससे अप्रभावित नहीं रह पाई थी। उस युग में यातायात, आवागमन तथा संचार के साधनों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया था। केन्द्रीय सरकार के लिए शासन की प्रांतीय […] - [मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/land-and-land-revenue-arrangements-of-mughals/): मुगलों की भूराजस्व व्यवस्था अकबर के समय में स्थापित हुई थी। इस कार्य में राजा टोडरमल की मुख्य भूमिका थी। चूंकि राजा टोडरमल अफगान शासक शेरशाह सूरी का भी मंत्री था। इसलिए मुगलकालीन अर्थव्यवस्था को शेरशाह कालीन अर्थव्यवस्था ही माना जाता है। भारत पर अधिकार स्थापित करने वाले प्रारम्भिक तुर्क सुल्तानों के समक्ष यह समस्या […] - [मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व](https://bharatkaitihas.com/mughal-economy-land-ownership-and-land-revenue-agriculture-industry-technology-technology/): मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्वों में कृषि, भूस्वामित्व, भूराजस्व, कृषि, प्रौ़द्योगिकी एवं उद्यो तथा वाणिज्य एवं व्यापार आते हैं। मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्वों में कृषि, भूस्वामित्व, भूराजस्व, कृषि, प्रौ़द्योगिकी एवं उद्यो तथा वाणिज्य एवं व्यापार आते हैं। हमने इस अध्याय को तीन भागों में विभक्त किया है-1. मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के प्रमुख तत्त्व, 2. मुगलकालीन […] - [मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80/): प्राचीन काल से ही भारत में प्रौद्योगिकी विकास की गति बहुत धीमी रही थी। मुगलकालीन प्रौद्योगिकी एवं उद्योग भी विशेष उन्नति नहीं कर सका। मुगलकालीन प्रौद्योगिकी धातु प्रौद्योगिकी इस युग में धातु-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुछ उन्नति हुई। कांसे, पीतल, लोहे, सोना और चाँदी के बर्तन, मूर्तियाँ बनाने की प्रौद्योगिकी पहले की ही तरह चलती […] - [मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य](https://bharatkaitihas.com/trade-and-commerce-in-mughal-economy/): मुगलकालीन व्यापार तथा वाणिज्य वैदेशिक एवं अन्तर-प्रादेशिक दोनों ही स्तरों पर उन्नत अवस्था में था। व्यापार पर लगने वाले कर से मुगलों को अच्छी आय होती थी, इसलिए व्यापारियों को तंग नहीं किया जाता था। मुगल काल में आन्तरिक एवं बाह्य, दोनों प्रकार का व्यापार उन्नति पर था। पुरातन समय से ही भारत के बाह्य […] - [सरदार पटेल : प्रेरक एवं रोचक प्रसंग - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/one-hundred-seventeen-stories-of-sardar-patels-life/): इस विशाल राष्ट्रव्यापी आयोजन से देश के 140 करोड़ लोगों तक सरदार पटेल द्वारा राष्ट्र को दिये गये अवदान की जानकारी भी नये सिरे से पहुंचेगी जो देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ करेगी। - [भगवान श्रीराम के वंशज थे सरदार पटेल](https://bharatkaitihas.com/sardar-patel-was-a-descendant-of-lord-shri-ram/): सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म एक गुजराती लेवा पटेल परिवार में हुआ। लेवा स्वयं को भगवान श्रीराम के वंशज मानते हैं। उनके अनुसार लेवा भगवान श्रीराम के पुत्र लव के वंशज हैं। लेवा जाति पंजाब में निवास करने वाली क्षत्रिय जाति थी जो किसी समय गुजरात में आकर रहने लगी। लेवा जाति की पाटीदार […] - [लाड़बाई](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-and-vitthalbhai-were-last-to-remember-for-sweets/): सरदार वल्लभ भाई पटेल के पिता का नाम झबेरभाई और माता का नाम लाड़बाई था। अपने माता-पिता की कई संतानों में से एक होने के कारण मिठाई के लिये सबसे अंत में याद किये जाते थे वल्लभभाई और विट्ठलभाई। झबेरभाई की पहली पत्नी की मृत्यु होने पर उनका दूसरा विवाह हुआ। दूसरी पत्नी लाड़बाई उनसे […] - [सरदार का आत्मिक बल](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-stained-his-body-with-burning-bars/): सरदार पटेल का आत्मिक बल आजादी की लड़ाई के दौरान किए गये संघर्ष में उनके बहुत काम आया। वे कभी न तो अपने संकल्प से डिगे, न कर्म से डिगे और न उन्होंने किसी के समक्ष समर्पण किया। - [सरदार पटेल की हास्यप्रियता](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-did-not-let-any-opportunity-to-laugh/): अपने व्यक्तित्व में गंभीरता एवं हास्यप्रियता के समुचित मिश्रण के बल पर ही सरदार पटेल ने न केवल कोनार्ड कोरफील्ड जैसे षड़यंत्रकारी अंग्रेज अधिकारियों को हवाई जहाज में बैठाकर इंग्लैण्ड भेजा दिया अपितु भारत के 565 राजाओं के राज्य भारत में सम्मिलित करवा लिए। - [सरदार पटेल का स्वाभिमान](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-did-not-worry-about-opposition-from-anyone/): सरदार पटेल का स्वाभिमान – किसी से भी विरोध हो जाने की चिंता नहीं करते थे वल्लभभाई सरदार पटेल का स्वाभिमान बचपन से ही उच्च स्तर पर था। वे न तो बाल्यकाल में किसी से डरे, न अपने कैरियर में किसी से दबे और न आजादी की लड़ाई के दौरान किसी पुलिस अधिकारी अथवा जेलर […] - [गुजराती भाषा से प्रेम](https://bharatkaitihas.com/two-quarreling-scions-drove-everyone-away/): गुजराती भाषा से प्रेम – दो दंगाई पाड़ों ने सबको भगा दिया सरदार पटेल को बाल्यकाल में गुजराती भाषा से प्रेम था। चूंकि वे मेधावी क्षात्र थे, इसलिए अध्यापक चाहते थे कि वल्लभ भाई संस्कृत भाषा पढ़ें किंतु वल्लभ भाई ने संस्कृत के स्थान पर गुजाराती भाषा को चुना। मैट्रिक में विद्यार्थियों को अन्य विषयों […] - [झबेर बा से विवाह](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-wanted-to-go-to-england-and-see-what-such-a-specialty-is-in-that-country/): वे यह जानकर आश्चर्य चकित थे कि अंग्रेजी बोलने वाले अंग्रेजों का इंग्लैण्ड, बहुत छोटा सा देश है किंतु उन्होंने दुनिया में अपना राज्य इतना फैला लिया है कि उसमें कभी सूरज नहीं डूबता। - [गोधरा में वकालात](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-became-independent-lawyer-after-passing-mukhtaris-examination/): वल्लभभाई को किसी शहर से विफल होकर चले जाना अच्छा नहीं लगा। इसलिए वे गोधरा में वकालात करते रहे। - [बोरसद में वकालात](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-came-to-borsad-from-godhra-to-help-his-elder-brother/): बोरसद में वकालात के दौरान वल्लभभाई की ख्याति और आय दोनों में ही कई गुना वृद्धि हुई। वल्लभभाई के सम्पर्कों में भी विस्तार हुआ। - [मुकदमेबाजों के हथकण्डे](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-carefully-studied-the-tactics-of-litigants/): अंग्रेजों ने भारत में ब्रिटिश न्याय प्रणाली पर आधारित न्यायालयों की स्थापना की थी। इस व्यवस्था में पीड़ित को न्याय मिलने की प्राथममिकता नहीं थी, अपति विभिन्न आधारों पर अपराध कारित नहीं होने की स्थापना की जाती थी। इस कारण अपराधी अपराध करने के बाद विभिन्न प्रकार के हथकण्डे अपनाते थे। सरदार पटेल ने निर्दोष […] - [अंग्रेजी न्याय - को जेल जाने से बचा लिया वल्लभभाई ने !](https://bharatkaitihas.com/vallabhbhai-saved-innocent-railway-inspector-from-going-to-jail/): वल्लभभाई ने मुकदमे का अध्ययन किया तो समझ गये कि दुष्ट अंग्रेज अधिकारी ने इतना मजबूत जाल रचा है कि वल्लभभाई अपने मुवक्किल को कोर्ट में सजा होने से नहीं बचा पायेंगे। - [भक्तिआन्दोलन पुनरुद्धार के कारण MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0/): भक्तिआन्दोलन पुनरुद्धार के कारण MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “भक्ति आन्दोलन का पुनरुद्धार एवं उसके कारण ” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भक्तिआन्दोलन पुनरुद्धार के कारण MCQ : अध्ययन सामग्री भक्ति आन्दोलन का पुनरुद्धार एवं उसके कारण - [मध्ययुगीन भक्ति सम्प्रदाय MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af-mcq/): मध्ययुगीन भक्ति सम्प्रदाय MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्ययुगीन भक्ति सम्प्रदाय MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्य-युगीन भक्ति सम्प्रदाय - [भक्तिआन्दोलन की धाराएँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81-2/): भक्तिआन्दोलन की धाराएँ MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भक्तिआन्दोलन की धाराएँ MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भक्तिआन्दोलन की प्रमुख धाराएँ - [भक्ति आन्दोलन का प्रभाव MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5-mcq/): भक्ति आन्दोलन का प्रभाव MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भक्ति आन्दोलन का प्रभाव MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भक्ति आन्दोलन का प्रभाव - [रामानुजाचार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): रामानुजाचार्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। यदि आपको अन्य MCQ चाहिए हों या फॉर्मेटिंग में कोई बदलाव चाहते हों तो बताएं! -डॉ. मोहनलाल गुप्ता रामानुजाचार्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री रामानुजाचार्य - [माधवाचार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): माधवाचार्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए माधवाचार्य पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता माधवाचार्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री माधवाचार्य - [निम्बार्काचार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): निम्बार्काचार्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निम्बार्काचार्य पर 20 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता निम्बार्काचार्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री निम्बार्काचार्य - [रामानन्दाचार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): रामानन्दाचार्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 25 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. रामानन्दाचार्य किसकी शिष्य परम्परा से सम्बंधित थे?a) मध्वाचार्यb) निम्बार्काचार्यc) रामानुजाचार्य ✅d) वल्लभाचार्य 2. रामानन्दाचार्य किस शताब्दी ईस्वी में हुए माने जाते हैं?a) 12वीं शताब्दीb) 13वीं शताब्दीc) 14वीं शताब्दी ✅d) 15वीं […] - [गुरु नानकदेव MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-mcq/): गुरु नानकदेव MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता गुरु नानकदेव MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री गुरु नानकदेव - [संत कबीर MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b0-mcq/): संत कबीर MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संत कबीर के जीवन, विचार, वाणी एवं भक्ति आंदोलन पर आधारित विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता संत कबीर MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री संत कबीर - [दादू दयाल MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2-mcq/): दादू दयाल MCQ :प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दादू दयाल पर आधारित 20 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), सही उत्तर के अंत में हरा टिक ✅ है। दादू दयाल MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री दादू दयाल - [संत तुकाराम MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-mcq/): संत तुकाराम MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संत तुकाराम पर 20 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता संत तुकाराम MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री संत तुकाराम - [तुलसीदास MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-mcq/): तुलसीदास MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता तुलसीदास MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री तुलसीदास - [मीरा बाई MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%88-mcq/): मीरा बाई MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मीरा बाई MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मीरा बाई - [वल्लभाचार्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): वल्लभाचार्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वल्लभाचार्य पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता वल्लभाचार्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री वल्लभाचार्य - [सूरदास MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-mcq/): सूरदास MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सूरदास पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। उत्तर: सोलहवीं उत्तर: वल्लभाचार्य उत्तर: भक्ति आंदोलन उत्तर: नहीं उत्तर: वल्लभाचार्य उत्तर: भागवत पुराण उत्तर: सूरदास उत्तर: भगवान कृष्ण उत्तर: निर्गुण उत्तर: ब्रज भाषा उत्तर: सूरदास उत्तर: भक्ति उत्तर: पुष्टि मार्ग […] - [संत नामदेव MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-mcq/): संत नामदेव MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संत नामदेव पर 25 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता संत नामदेव MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री संत नामदेव - [भक्त रैदास MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-mcq/): भक्त रैदास MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भक्त रैदास पर 25 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भक्त रैदास MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भक्त रैदास - [चैतन्य महाप्रभु MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a5%81-mcq/): चैतन्य महाप्रभु MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए चैतन्य महाप्रभु पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। चैतन्य महाप्रभु MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री चैतन्य महाप्रभु -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c/): मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज - [मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c-mcq/): मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज - [मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq/): मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार - [मध्यकालीन वेशभूषा MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b7%e0%a4%be-mcq/): मध्यकालीन वेशभूषा MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन वेशभूषा MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन वेशभूषा - [मध्यकालीन भोजन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8-mcq/): मध्यकालीन भोजन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन भोजन MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन भोजन - [मध्यकालीन आवास MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8-mcq/): मध्यकालीन आवास MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मध्यकालीन आवास” विषय पर 30 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन आवास MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन आवास - [मध्यकालीन मनोरंजन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8-mcq/): मध्यकालीन मनोरंजन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मध्यकाल में मनोरंजन के साधन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन मनोरंजन MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकाल में मनोरंजन के साधन - [मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq/): मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार” विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार - [मुस्लिम त्यौहार MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-mcq/): मुस्लिम त्यौहार MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मुसलमानों के प्रमुख त्यौहार” विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुस्लिम त्यौहार MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मुसलमानों के प्रमुख त्यौहार - [भारतीय कला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): भारतीय कला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारतीय कला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भारतीय कला - [भारतीय मूर्ति कला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): भारतीय मूर्ति कला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भारतीय मूर्ति कला विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारतीय मूर्ति कला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भारतीय मूर्ति कला - [भारत के शैलचित्र MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-mcq/): भारत के शैलचित्र MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भारत के शैलचित्र विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारत के शैलचित्र MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भारत के शैलचित्र - [भारत की चित्रकला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): भारत की चित्रकला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भारत की चित्रकला विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता भारत की चित्रकला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री भारत की चित्रकला - [मुस्लिम चित्रकला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): मुस्लिम चित्रकला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मुस्लिम चित्रकला” विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुस्लिम चित्रकला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मुस्लिम चित्रकला - [राजपूत चित्रकला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): राजपूत चित्रकला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राजपूत चित्रकला विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। राजपूत चित्रकला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री राजपूत चित्रकला -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [मौर्य कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): मौर्य कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मौर्य कालीन स्थापत्य” विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मौर्य कालीन स्थापत्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मौर्य कालीन स्थापत्य - [हिन्दू स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): हिन्दू स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हिन्दू स्थापत्य विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता हिन्दू स्थापत्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री हिन्दू स्थापत्य - [राजपूत स्थापत्य कला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): राजपूत स्थापत्य कला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राजपूत स्थापत्य कला विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता राजपूत स्थापत्य कला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री राजपूत स्थापत्य कला - [खजुराहो मंदिर शैली MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80-mcq/): खजुराहो मंदिर शैली MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए खजुराहो मंदिर शैली विषय पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता खजुराहो मंदिर शैली MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री खजुराहो मंदिर शैली - [कलिंग मंदिर शैली MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80-mcq/): कलिंग मंदिर शैली MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कलिंग मंदिर शैली विषय पर 30 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता कलिंग मंदिर शैली MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री कलिंग मंदिर शैली - [हिन्दू दुर्ग स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): हिन्दू दुर्ग स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हिन्दू दुर्ग स्थापत्य MCQ पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता हिन्दू दुर्ग स्थापत्य MCQ हिन्दू दुर्ग स्थापत्य - [हिन्दू जल स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): हिन्दू जल स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “हिन्दू जल स्थापत्य” विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. हिन्दू जल स्थापत्य कला का सबसे प्राचीन उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?a. महाभारतb. मनुस्मृतिc. ऋग्वेद ✅d. पुराण 2. जलाशयों को हिन्दू समाज में किस […] - [इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला किस काल में विकसित हुई?a. मौर्य कालb. दिल्ली सल्तनत काल ✅c. गुप्त कालd. चोल काल 2. दिल्ली सल्तनत काल में मुस्लिम शासकों द्वारा किस प्रकार […] - [हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य में अंतर” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. मध्यकालीन भारत में किस काल में मुस्लिम स्थापत्य कला का प्रवेश हुआ?a. सातवीं शताब्दीb. ग्यारहवीं शताब्दीc. बारहवीं शताब्दी ✅d. सोलहवीं शताब्दी 2. मुस्लिम स्थापत्य शैली […] - [मुग़ल स्थापत्य कला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%bc%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): मुग़ल स्थापत्य कला MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुग़ल स्थापत्य कला विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुग़ल स्थापत्य कला MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री मुग़ल स्थापत्य कला - [बाबर कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): बाबर कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाबर कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता बाबर कालीन स्थापत्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री बाबर कालीन स्थापत्य - [हुमायूँ कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): हुमायूँ कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हुमायूँ कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. हुमायूँ कालीन स्थापत्य का मुख्य स्वरूप किस तक सीमित था?a) महलb) मस्जिद ✅c) बावड़ीd) गुरुद्वारा 72. दिल्ली के पुराने किले में हुमायूँ ने क्या बनवाया […] - [अकबर कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): अकबर कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अकबर कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. अकबर कालीन स्थापत्य शैली किसका समन्वय है?a) हिन्दू शैलीb) मुस्लिम शैलीc) हिन्दू-मुस्लिम शैली ✅d) ब्रिटिश शैली 2. अकबर ने शिल्पकारों को इमारतें बनाने के लिए […] - [जहाँगीर कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): जहाँगीर कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जहाँगीर कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. सिकन्दरा का मकबरा किसके काल का उदाहरण है?a) अकबरb) जहाँगीर ✅c) शाहजहाँd) बाबर 2. सिकन्दरा का मकबरे की योजना किसने तैयार की थी?a) जहाँगीरb) नूरजहाँc) […] - [शाहजहाँ कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): शाहजहाँ कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शाहजहाँ कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. शाहजहाँ के शासनकाल को स्थापत्य कला का कौन सा युग कहा जाता है?a) शिल्पयुगb) मध्यकालc) स्वर्णयुग ✅d) लौहयुग 2. किस मुगल सम्राट को ‘निर्माताओं का […] - [ताजमहल का स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): ताजमहल का स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. ताजमहल का निर्माण किसने करवाया?a) अकबरb) जहाँगीरc) शाहजहाँ ✅d) औरंगजेब 2. ताजमहल किसकी याद में बनवाया गया था?a) नूरजहाँb) अर्जुमंद बानो मुमताज महल ✅c) रूख्साना बेगमd) सलीमा सुलताना […] - [औरंगजेब कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): औरंगजेब कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए औरंगजेब कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. औरंगजेब कालीन स्थापत्य की कौन सी विशेषता रही?a) भव्यताb) गहनों का प्रयोगc) सादगी ✅d) अधिक रंग 2. औरंगजेब ने इस्लाम के किस सिद्धांत पर ज़ोर […] - [ब्रिटिश कालीन स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): ब्रिटिश कालीन स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रिटिश कालीन स्थापत्य विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. ब्रिटिश कालीन स्थापत्य में मुख्य रूप से किन शैलियों का समावेश था?a) भारतीयb) मुस्लिमc) यूरोपीयd) भारतीय, मुस्लिम और यूरोपीय ✅ 2. किस शताब्दी में यूरोपीय […] - [दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दक्षिण भारत के मन्दिर स्थापत्य और द्रविड़ शैली विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. दक्षिण भारत के मन्दिर स्थापत्य का वास्तविक विकास कब प्रारम्भ हुआ था?a) गुप्तकाल मेंb) छठी शताब्दी ईस्वी से ✅c) […] - [पल्लव मन्दिर स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): पल्लव मन्दिर स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “पल्लव मन्दिर स्थापत्य MCQ” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. पल्लव मंदिर स्थापत्य कला की कितनी प्रमुख शैलियाँ मानी जाती हैं?a. दोb. तीनc. चार ✅d. पाँच 2. महेन्द्रवर्मन शैली की विशेषता कौन-सी है?a. विशाल […] - [राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa-2/): राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला किस क्षेत्र की प्रमुख शैली है?a) उत्तर भारतb) पूर्व भारतc) दक्षिण भारत ✅d) पश्चिम भारत 2. राष्ट्रकूट किस क्षेत्र में […] - [चोल मन्दिर स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): चोल मन्दिर स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “चोल मन्दिर स्थापत्य” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. द्रविड़ मंदिर शैली का चरमोत्कर्ष किसके स्थापत्य में आया?a) पल्लवb) पाण्ड्यc) चोल ✅d) राष्ट्रकूट 2. चोलों ने किसकी स्थापत्य कला को आगे बढ़ाया?a) मौर्यb) पल्लव […] - [चालुक्य मन्दिर स्थापत्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): चालुक्य मन्दिर स्थापत्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “चालुक्य मन्दिर स्थापत्य MCQ” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. चालुक्य मंदिर स्थापत्य कला के कितने प्रमुख केन्द्र थे?a) चारb) पाँचc) तीन ✅d) दो 2. एहोल किसके लिए प्रसिद्ध है?a) चित्रकलाb) मंदिरों का नगर […] - [दक्षिण भारत की मूर्तिकला MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a3-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be-mcq/): दक्षिण भारत की मूर्तिकला MCQ : यहाँ “दक्षिण भारत की मूर्तिकला” (Temple Architecture of South India) विषय पर 40 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) दिए गए हैं। सही उत्तर के अंत में हरे टिक (✅) का चिह्न है। 1. दक्षिण भारत की मूर्तिकला मुख्यतः किसका परिचय देती है?a) मध्य भारत की संस्कृतिb) दक्षिण के मंदिर स्थापत्य एवं […] - [कालीदास MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-mcq/): कालीदास MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कालीदास पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. महाकवि कालीदास किस भाषा के महान कवि थे?a) हिन्दीb) संस्कृत ✅c) अंग्रेजीd) उर्दू 2. कालीदास का जन्म किस परिवार में हुआ था?a) क्षत्रियb) ब्राह्मण ✅c) वैश्यd) शूद्र 3. कालीदास ने […] - [तुलसीदास का साहित्य MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-mcq/): तुलसीदास का साहित्य MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संत तुलसीदास पर आधारित 50 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (MCQ) हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। सही उत्तर के आगे हरे रंग की टिक ✅ है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता तुलसीदास का साहित्य MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री संत तुलसीदास का साहित्य - [मीराबाई का जीवन: जन्मस्थान से भक्ति विलीन तक – 50+ तथ्यात्मक प्रश्नोत्तरी](https://bharatkaitihas.com/meerabai-jeevan-tathya-mcq-hindi/): मीराबाई का जीवन: जन्मस्थान से भक्ति विलीन तक – 50+ तथ्यात्मक प्रश्नोत्तरी : यहाँ मीराबाई पर आधारित 50 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (MCQ) हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री मीराबाई - [रवीन्द्र नाथ टैगोर MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%9f%e0%a5%88%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b0-mcq/): रवीन्द्र नाथ टैगोर MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रवीन्द्र नाथ टैगोर पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म किस वर्ष हुआ था?a) 1860b) 1861 ✅c) 1865d) 1870 2. टैगोर का जन्म किस शहर में हुआ था?a) मुंबईb) वाराणसीc) कलकत्ता […] - [भारतीय पुनर्जागरण MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%a3-mcq/): भारतीय पुनर्जागरण MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भारतीय पुनर्जागरण विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. भारतीय पुनर्जागरण किस प्रकार का आंदोलन था?a) धार्मिकb) बौद्धिक ✅c) राजनीतिकd) आर्थिक 2. किस काल में भारतीय संस्कृति ने अपने को नष्ट होने से बचाने के लिए […] - [राजा राममोहन राय और ब्रह्मसमाज MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%8d/): राजा राममोहन राय और ब्रह्मसमाज MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “राजा राममोहन राय और उनका ब्रह्मसमाज” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। यहाँ लेख से 50 MCQ (बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर) दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न बोल्ड में है, विकल्प a, b, c, d क्रमशः […] - [युवा बंगाल आन्दोलन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-mcq/): युवा बंगाल आन्दोलन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “युवा बंगाल आन्दोलन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता युवा बंगाल आन्दोलन MCQ : मुख्य अध्ययन सामग्री युवा बंगाल आन्दोलन - [केशवचन्द्र सेन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%b5%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8-mcq/): केशवचन्द्र सेन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “केशवचन्द्र सेन का भारतीय ब्रह्मसमाज” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुख्य अध्ययन सामग्री : केशवचन्द्र सेन MCQ केशवचन्द्र सेन का भारतीय ब्रह्मसमाज - [आत्माराम पाण्डुरंग MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97-mcq/): आत्माराम पाण्डुरंग MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “आत्माराम पाण्डुरंग और प्रार्थना समाज” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. आत्माराम पाण्डुरंग ने प्रार्थना समाज की स्थापना किस शहर में की थी?a) कलकत्ताb) बम्बई ✅c) पुणेd) मद्रास 2. प्रार्थना समाज की स्थापना किस वर्ष […] - [स्वामी दयानन्द सरस्वती MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%80-mcq/): स्वामी दयानन्द सरस्वती MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म किस वर्ष में हुआ था?a 1824 ✅b 1830c 1818d 1850 2. स्वामी दयानन्द सरस्वती का प्रारंभिक नाम […] - [स्वामी श्रद्धानंद MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%a6-mcq/): स्वामी श्रद्धानंद MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “स्वामी श्रद्धानंद का शुद्धि आंदोलन” विषय पर 20 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। स्वामी श्रद्धानंद MCQ – मुख्य अध्ययन सामग्री स्वामी श्रद्धानंद का शुद्धि आंदोलन - [रामकृष्ण परमहंस MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%b8-mcq/): रामकृष्ण परमहंस MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रामकृष्ण परमहंस पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. रामकृष्ण परमहंस का जन्म किस वर्ष हुआ था?a) 1825b) 1836 ✅c) 1845d) 1856 2. रामकृष्ण परमहंस का बचपन का नाम क्या था?a) गदाधर चट्टोपाध्याय ✅b) नरेंद्रc) हरिनाथd) शारदा […] - [स्वामी विवेकानन्द MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6-mcq/): स्वामी विवेकानन्द MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्वामी विवेकानन्द पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. स्वामी विवेकानन्द का जन्म किस शहर में हुआ था?a) मुंबईb) दिल्लीc) कलकत्ता ✅d) चेन्नई 2. स्वामी विवेकानन्द का बचपन का नाम क्या था?a) रामदत्तb) नरेन्द्र दत्त ✅c) मोहनदासd) […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80-mcq/): थियोसॉफिकल सोसायटी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “थियोसॉफिकल सोसायटी” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. थियोसॉफिकल सोसायटी की स्थापना कब हुई थी?A) 1875B) 1876 ✅C) 1886D) 1885 2. थियोसॉफिकल सोसायटी की स्थापना कहाँ हुई थी?A) भारतB) इंग्लैंडC) अमेरिका ✅D) दक्षिण अफ्रीका 3. […] - [विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-mcq/): विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन MCQ की मुख्य अध्ययन सामग्री विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन - [मुस्लिम सुधार आन्दोलन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-mcq/): मुस्लिम सुधार आन्दोलन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मुस्लिम सुधार आन्दोलन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता मुस्लिम सुधार आन्दोलन MCQ की मुख्य अध्ययन सामग्री मुस्लिम सुधार आन्दोलन - [समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82-2/): समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. समाज सुधार आंदोलनों का प्रारंभ किस शताब्दी में हुआ था?a. 16वींb. 17वींc. 19वीं ✅d. 20वीं 2. किसने सती-प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया?a. लार्ड […] - [तिलक का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): तिलक का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “बाल गंगाधर तिलक का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. बाल गंगाधर तिलक का जन्म कब हुआ था?a. 1885b. 1856 ✅c. 1876d. 1845 2. तिलक का जन्म […] - [गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2/): गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “मोहनदास कर्मचंद गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. मोहनदास कर्मचंद गांधी का जन्म कब हुआ था?a. 15 अगस्त 1947b. 2 अक्टूबर 1869 ✅c. 26 जनवरी […] - [राष्ट्रीय आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस MCQ](https://bharatkaitihas.com/rashtriya-andolan-mein-subhash-chandra-bose-mcq/): राष्ट्रीय आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुभाष चन्द्र बोस का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. सुभाष चन्द्र बोस का जन्म कब हुआ था?a) 23 जनवरी 1897 ✅b) 15 अगस्त 1895c) 2 अक्टूबर […] - [आचार्य सुश्रुत MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a4-mcq/): आचार्य सुश्रुत MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आचार्य सुश्रुत पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. आचार्य सुश्रुत का जन्म किस स्थान पर हुआ था?a) तक्षशिलाb) काशी 🟩c) पाटलिपुत्रd) उज्जैन 2. सुश्रुत संहिता के प्रणेता कौन हैं?a) चरकb) वाग्भट्टc) सुश्रुत 🟩d) धन्वन्तरि 3. आचार्य […] - [महर्षि चरक MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf-%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a4%95-mcq/): महर्षि चरक MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महर्षि चरक पर 30 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। यह 30 प्रश्नों का अपेक्षित सेट आपकी आवश्यकता के अनुसार है। अधिक प्रश्न या सुधार के लिए कृपया बताएं! -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [आर्यभट्ट MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ad%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f-mcq/): आर्यभट्ट MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्यभट्ट पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। -डॉ. मोहनलाल गुप्ता - [वराहमिहिर MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b0-mcq/): वराहमिहिर MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वराहमिहिर पर 30 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. वराहमिहिर किस शताब्दी के वैज्ञानिक थे?a) 3वींb) 5वीं-6वीं ✅c) 8वींd) 12वीं 2. वराहमिहिर का जन्म किस वर्ष हुआ था?a) ई. 499 ✅b) ई. 587c) ई. 550d) ई. 470 3. वराहमिहिर […] - [जगदीश चन्द्र बसु MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%b8%e0%a5%81-mcq/): जगदीश चन्द्र बसु MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जगदीश चन्द्र बसु पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. जगदीश चन्द्र बसु किस क्षेत्र के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे?a) गणितb) भौतिकी ✅c) समाजशास्त्रd) भूगोल 2. जगदीश चन्द्र बसु का जन्म किस सन में हुआ था?a) 1858 […] - [सी. वी. रमन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a8-mcq/): सी. वी. रमन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सी. वी. रमन (चन्द्रशेखर वेंकटरमन) विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. चन्द्रशेखर वेंकटरमन का जन्म किस वर्ष हुआ था?A) 1888 ✅B) 1890C) 1895D) 1879 2. सी. वी. रमन का जन्म कहाँ हुआ था?A) विशाखापत्तनमB) […] - [मध्यकालीन भारत का इतिहास प्रश्नोत्तरी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-2/): मध्यकालीन भारत का इतिहास प्रश्नोत्तरी MCQ : इस पृष्ठ पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक मध्यकालीन भारत का इतिहास पर तैयार किए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के अध्यायों की अनुक्रमणिका दी गई है। 1. मुगलकालीन इतिहास के स्रोत MCQ   2. कुतुबुद्दीन ऐबक MCQ  3. इल्तुतमिश MCQ  4. इल्तुतमिश […] - [मध्यकालीन इतिहास के स्रोत MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b/): मध्यकालीन इतिहास के स्रोत MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली सल्तनत कालीन इतिहास के स्रोत विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. दिल्ली सल्तनत का आरंभ किस वर्ष में हुआ था?a) 1206 ई. ✅b) 1192 ई.c) 1300 ई.d) 1526 ई. 2. दिल्ली सल्तनत […] - [मुगलकालीन इतिहास के स्रोत MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b/): मुगलकालीन इतिहास के स्रोत MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुगलकालीन इतिहास के स्रोत विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. बाबर की आत्मकथा का नाम क्या है?a) बाबरनामा ✅b) अकबरनामाc) हुमायूँनामाd) आलमगीरनामा 2. बाबरनामा किस भाषा में लिखा गया था?a) चगताई-तुर्की ✅b) फारसीc) […] - [कुतुबुद्दीन ऐबक MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%90%e0%a4%ac%e0%a4%95-mcq/): कुतुबुद्दीन ऐबक MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. गुलाम वंश का संस्थापक कौन था? 2. कुतुबुद्दीन ऐबक को किसने गुलाम बनाकर खरीदा था? 3. गुलाम वंश को किस अन्य नाम से […] - [इल्तुतमिश MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6-mcq/): इल्तुतमिश MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “सुल्तान इल्तुतमिश – दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. इल्तुतमिश का जन्म किस जनजाति में हुआ था?A) मंगोलB) तुर्क✅C) अफगानD) ईरानी 2. इल्तुतमिश के पिता का नाम क्या था?A) आलम खाँ✅B) […] - [इल्तुतमिश के वंशज MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%9c-mcq/): इल्तुतमिश के वंशज MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इल्तुतमिश के वंशज विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क है। 1. इल्तुतमिश की वंशज रजिया सुल्ताना कौन थीं?A) इल्तुतमिश की माँB) इल्तुतमिश की पत्नीC) इल्तुतमिश की पुत्री✅D) इल्तुतमिश की बहन 2. इल्तुतमिश ने अपना उत्तराधिकारी किसे […] - [गयासुद्दीन बलबन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%a8-mcq/): गयासुद्दीन बलबन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुल्तान गयासुद्दीन बलबन के जीवन, कार्य, नीति, शासन, उपलब्धियाँ, चरित्र आदि पर आधारित 75 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर प्रस्तुत हैं। सही विकल्प के बाद हरा टिक ✅ है। 1. गयासुद्दीन बलबन किस वंश का सुल्तान था?a) तुगलकb) खिलजीc) गुलाम ✅d) लोधी 2. बलबन का बचपन किस तरह […] - [गुलाम वंश का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): गुलाम वंश का पतन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “गुलाम वंश का पतन” पर 60 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर प्रस्तुत हैं, सही विकल्प के बाद हरे रंग की टिक ✅ है। 1. गुलाम वंश का अंतिम शक्तिशाली सुल्तान कौन था?a) इल्तुतमिशb) बलबन ✅c) कैकुबादd) नासिरुद्दीन 2. बलबन की मृत्यु के साथ किस वंश का […] - [जलालुद्दीन खिलजी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-mcq/): जलालुद्दीन खिलजी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी के जीवन, राज्य और उपलब्धियों पर आधारित 70 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर प्रस्तुत हैं। सही विकल्प के बाद ✅ हरा टिक मार्क। 1. सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी किस वंश के संस्थापक थे?a) तुगलकb) खिलजी ✅c) लोधीd) सौर 2. जलालुद्दीन खिलजी ने किस शासक की हत्या […] - [अलाउद्दीन खिलजी MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-mcq/): अलाउद्दीन खिलजी MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अलाउद्दीन खिलजी – खिलजी वंश का चरमोत्कर्ष” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क। 1. अलाउद्दीन खिलजी का जन्म किस वर्ष हुआ था?A) 1296B) 1266-67 ✅C) 1275D) 1288 2. अलाउद्दीन खिलजी का पिता कौन था?A) जलालुद्दीनB) शिहाबुद्दीन मसउद […] - [अलाउद्दीन की सुधार योजनाएँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be-2/): अलाउद्दीन की सुधार योजनाएँ MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अलाउद्दीन की सुधार योजनाएँ” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिक मार्क। 1. अलाउद्दीन खिलजी ने गुप्तचर विभाग को क्यों पुनर्संगठित किया?A) आर्थिक सुधार के लिएB) विद्रोहियों पर निगरानी के लिए ✅C) धार्मिक उद्देश्य सेD) सेना बढ़ाने […] - [अलाउद्दीन के विरुद्ध विद्रोह MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6-2/): अलाउद्दीन के विरुद्ध विद्रोह MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अलाउद्दीन के विरुद्ध विद्रोह” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में ✅ हरा टिकमार्क। 1. अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध सबसे पहला विद्रोह किसका था?A) नव-मुसलमान ✅B) अकत खाँC) हाजी मौलाD) अमीर उमर 2. नव-मुसलमानों का विद्रोह किस वर्ष हुआ था?A) […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की मंगोल नीति MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97/): अल्लाउद्दीन खिलजी की मंगोल नीति MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अल्लाउद्दीन खिलजी : मंगोल नीति” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ 1. अल्लाउद्दीन खिलजी किस वर्ष दिल्ली के तख्त पर बैठा था?A) 1280 ई.B) 1296 ई. ✅C) 1310 ई.D) 1320 ई. 2. जलालुद्दीन खिलजी ने […] - [अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियाँ MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a5%8d-2/): अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियाँ MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए “अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियाँ” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ है। 1. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में कौन सा काल प्रतिक्रिया का काल कहा जाता है?A) 1296-1300 ई.B) 1312-1316 ई. ✅C) 1300-1305 ई.D) […] - [खिलजी वंश का पतन MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8-mcq/): खिलजी वंश का पतन MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ खिलजी वंश का पतन विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. खिलजी वंश के पतन के समय सुल्तान कौन था?A) अलाउद्दीन खिलजीB) उमर खिलजी ✅C) मुबारक खिलजीD) खुसरो शाह […] - [तैमूरलंग MCQ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%97-mcq/): तैमूरलंग MCQ : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ “तैमूरलंग का भारत आक्रमण” विषय पर 70 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प के अंत में हरा टिकमार्क ✅ दिया गया है। 1. तैमूरलंग का जन्म कब हुआ था?A) 1336 ई. ✅B) 1350 ई.C) 1320 ई.D) 1340 ई. 2. तैमूरलंग का जन्म किस नगर […] - [मुगल हरम (6)](https://bharatkaitihas.com/mughal-harems-were-full-of-mughal-princesses/): मुगल हरम अकबर के समय से ही मुगल शहजादियों से भरने लगा था क्योंकि अकबर ने शहजादियों के विवाह करने की परम्परा बंद कर दी थी। - [तैमूरी खून (7)](https://bharatkaitihas.com/the-blood-of-genghis-khan-and-timur-lang-beating-hard-in-veins-of-the-princes/): मुगल शहजादों में उत्तराधिकार का प्रश्न शहजादों के खून से ही सुलझता आया था। - [महाराणा राजसिंह (8)](https://bharatkaitihas.com/maharana-snatched-mandalgarh-as-soon-as-shah-jahan-became-ill/): महाराणा राजसिंह ने शाहजहाँ के बीमार होने का सूचना सुनी तो उसने माण्डलगढ़ पर आक्रमण करके माण्डलगढ़ का किला छीन लिया। - [आगरा का लाल किला (9)](https://bharatkaitihas.com/emperor-left-delhi-and-went-to-agra/): शाहजहाँ दिल्ली छोड़कर आगरा चला गया! आगरा का लाल किला उसने नहीं बनवाया था किंतु फिर भी आगरा और लाल किला दोनों ही उसे पसंद थे। - [शाहजहाँ की बीमारी (10)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-was-common-enemy-of-the-three-little-princesses/): शाहजहाँ की बीमारी के समाचार लाल किले की दीवारों से बाहर निकलकर पूरी सल्तनत में तेजी से फैलते जा रहे थे। - [औरंगजेब का भय (11)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-was-most-afraid-of-aurangzeb/): दारा ने कई बार कट्टर मुल्ला-मौलवियों, अमीर-उमरावों तथा सूबेदारों को दण्डित किया था इसलिए वे दारा शिकोह से दुश्मनी रखते थे और औरंगजेब के प्रति जबर्दस्त समर्थन रखते थे। - [राठौड़ राजा (12)](https://bharatkaitihas.com/the-rathore-kings-did-not-like-aurangzeb-at-all/): औरंगज़ेब न केवल हिन्दुस्तान की किस्मत का मालिक बनना चाहता था अपितु बड़े भाई दारा शिकोह के कारण मुगलिया राजनीति जिस गलत दिशा में चल पड़ी थी, उस दिशा का मुँह भी मोड़ देना चाहता था। - [शाहशुजा (13)](https://bharatkaitihas.com/shahshuja-declared-himself-king-and-rushed-to-agra/): शाहशुजा ने भविष्य में फिर कभी बगावत नहीं करने तथा मुंगेर के पास स्थित राजमहल को अपनी राजधानी बनाकर वहीं तक सीमित रहने का वचन दिया। - [मुरादबक्श (14)](https://bharatkaitihas.com/muradbaksh-proclaimed-himself-emperor-and-rushed-to-agra/): जिस समय शाहशुजा की सेनाएं बनारस में शाही सेनाओं से युद्ध कर रही थीं, तब कुछ ऐसे समाचार मिले कि शाहशुजा आसानी से दारा को परास्त कर देगा। अतः मुरादबक्श चिंता में पड़ गया। - [शाहजहाँ का भय (15)](https://bharatkaitihas.com/the-old-shah-jahan-was-afraid-of-dara-shikoh-and-jahanara-as-well/): शहजादी रौशनआरा ने आगरा का सारा हाल और शाहजहाँ का भय अपने भाई औरंगज़ेब को लिख भेजा। बाकी शहजादियाँ भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। - [कासिम खाँ की नमकहरामी (16)](https://bharatkaitihas.com/cheating-of-qasim-khan/): दारा शिकोह को जिस कासिम खाँ पर पूरा विश्वास था, उसी कासिम खाँ की नमकहरामी ने महाराजा जसवंतसिंह को पराजय और मृत्यु के कगार पर पहुंचा दिया। - [धरमत का युद्ध (17)](https://bharatkaitihas.com/the-entire-army-of-maharaja-jaswant-singh-was-destroyed-and-he-alone-could-reach-to-jodhpur/): महाराजा और उसके राजपूत, मुगलिया राजनीति की खूनी चौसर में ऐसे स्थान पर घेर लिए गए जहाँ से न तो महाराजा जसवंतसिंह के लिए और न उसके राजपूतों के लिए बचकर निकल पाना संभव था। - [दारा शिकोह की हताशा (18)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-arrives-at-agras-doorstep-by-dodging-dara/): इस विशाल सैन्य समूह के सामने औरंगज़ेब और मुराद के पास कुल मिलाकर चालीस हजार घुड़सवार ही थे जो धरमत का युद्ध करने और लगातार चलते रहने के कारण थक कर चूर हो रहे थे। - [रूपसिंह राठौड़ (19)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-was-afraid-of-maharaja-roop-singh/): औरंगजेब को राजा रूपसिंह का भय सता रहा था! इस समय वह शाहजहाँ और दारा शिकोह के चारों ओर एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ा था। - [शामूगढ़ का युद्ध (20)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-roop-singhs-sword-reached-aurangzebs-neck/): दारा ने महाराजा रूपसिंह को तलवार लेकर पैदल ही औरंगज़ेब के हाथी की तरफ दौड़ते हुए देखा तो दारा की सांसें थम सी गईं। - [जहाँआरा का शोक (21)](https://bharatkaitihas.com/on-hearing-the-news-of-the-death-of-maharaja-roop-singh-shahzadi-jahanara-put-on-black-clothes/): महाराजा रूपसिंह की मृत्यु का समाचार सुनकर शहजादी जहाँआरा ने काले कपड़े पहन लिए! जहाँआरा का शोक शब्दों में व्यक्त करने योग्य नहीं था। - [शाहजहाँ की कैद (22)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-imprisons-the-owner-of-the-red-fort/): शाहजहाँ की शहजादियों ने जिस पिता को तख्त से उतारने के लिए हजार षड़यंत्र रचे थे, आज उसी शाहजहाँ की कैद उनके समस्त दुखों का कारण बन गई थी। - [शाहजहाँ के दुर्दिन (23)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-turned-down-the-proposal-of-partition-of-the-sultanate/): अकबर, जहांगीर तथा शाहजहाँ ने अनेक हिन्दू राजवंशों द्वारा विगत कई शताब्दियों में संचित किए गए खजाने छीनकर आगरा में लाकर जमा कर लिए थे। - [मुरादबक्श की हत्या (24)](https://bharatkaitihas.com/the-red-forts-of-delhi-and-agra-got-away-from-the-eyes-of-muradbaksh/): मुरादबक्श (Murad Bakhsh) की हत्या औरंगजेब (Aurangzeb) की योजना के प्रारम्भिक भाग में कल्पित नहीं की गई थी किंतु मुरादबक्श की उतावली ने औरंगजेब को मजबूर कर दिया कि दारा शिकोह (Dara Shikoh) की हत्या करने से पहले औरंगजेब मुरादबक्श की हत्या करे। बादशाह शाहजहाँ (Shahjahan) तथा शहजादी जहाँआरा (Jahanara Begum) को कैद करने के […] - [महाराजा जसवंतसिंह (25)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-conspired-to-assassinate-aurangzeb/): महाराजा जसवंतसिंह खजुआ के मैदान में औरंगजेब की तरफ से लड़ने के लिए पहुंच तो गया किंतु महाराजा की आत्मा महाराजा को धिक्कारती थी। - [शाहशुजा की हत्या (26)](https://bharatkaitihas.com/shahshuja-was-captured-by-wild-people-and-killed/): जब शाहशुजा ने देखा कि उसकी सेना युद्ध के मैदान से भाग छूटी है तो वह भी सिर पर पैर रखकर अपनी सेना के पीछे-पीछे भाग लिया। - [जोधपुर नरेश जसवंतसिंह राठौड़ (27)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-refused-to-accompany-dara-shikoh/): जोधपुर नरेश जसवंतसिंह राठौड़ (Maharaja Jaswantsingh) शाहजहाँ एवं औरंगजेब (Aurangzeb) कालीन मुगल राजनीति (Mughal Politics) में एक बहुप्रतिष्ठित एवं बुद्धिमान राजा हुआ है किंतु मुगलिया राजनीति की चौसर ने उसे ऐसा जकड़ लिया कि लाख चाहने पर भी जसवंतसिंह उस चौसर से स्वयं को अलग नहीं कर सका। दारा शिकोह (Dara Shikoh) आगरा से भागकर […] - [दौराई का युद्ध (28)](https://bharatkaitihas.com/the-sparks-of-cannonballs-glowed-like-lightning/): दौराई का युद्ध मुगलों के इतिहास में वैसा ही महत्व रखता है जैसा कि शामूगढ़ का युद्ध। - [जम्मू का राजा रामरूपराय (29)](https://bharatkaitihas.com/raja-ramroop-rai-of-jammu-sacrificed-for-aurangzeb/): दारा शिकोह की मोर्चाबंदी और धुंआधार बारूद बरसाने के कारण जम्मू का राजा रामरूपराय औरंगजेब के लिए बलिदान हो गया! - [उत्तराधिकार का युद्ध (30)](https://bharatkaitihas.com/unfortunately-hindu-rajas-took-wrong-decisions-regarding-dara/): उत्तराधिकार का युद्ध इस बात की गवाही देता है कि मुगल काल की राजनीति में हिन्दु राजाओं ने गलत निर्णय लिए। यहां तक कि महाराजा जसवंतसिंह ने भी! - [दारा शिकोह की गिरफ्तारी (31)](https://bharatkaitihas.com/the-treacherous-emir-sold-dara-to-aurangzeb/): दारा शिकोह की गिरफ्तारी से पूरे भारत में हा-हाकर मच गया। दुष्ट और छली षड़यंत्रकारियों की विजय हो गई तथा हिन्दुओं का एक मित्र उनसे हमेशा के लिए छिन गया। - [शहजादी रौशन आरा (32)](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-roshanara-demanded-death-for-her-brother-dara/): शहजादी रौशनआरा ने अपने भाई दारा शिकोह के लिए प्राणदण्ड की मांग की! दरअसल वह अपने आप को उत्तराधिकार के युद्ध की वास्तविक विजेता मानती थी। - [सुलेमान शिकोह (33)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-made-shahzade-suleiman-shikoh-drink-opium-and-get-it-killed/): सुलेमान शिकोह (Suleman Shikoh) अपने पिता दारा शिकोह (Dara Shikoh) का बड़ा पुत्र था। सबको लगता था कि शाहजहाँ (Shahjahan) के बाद दारा शिकोह और दारा शिकोह के बाद सुलेमान शिकोह हिन्दुस्तान का बादशाह तथा लाल किलों (Red Forts of Agra and Delhi) का मालिक होगा। इसलिए सुलेमान बड़े उत्साह से राजकाज एवं युद्धों में […] - [जहानआरा के अहसान (34)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-could-not-forget-the-blessings-of-jahanara/): औरंगजेब (Aurangzeb) ने अपने पिता शाहजहाँ (Shahjahan) के साथ अपनी बड़ी बहिन जहानआरा बेगम (Jahanara Begum) को बंदी बना तो लिया था किंतु औरंगजेब पर जहानआरा के अहसान इतने थे कि औरंगजेब उन्हें चाह कर भी भुला नहीं सकता था। शहजादी जहानआरा का जन्म 23 मार्च 1614 को अजमेर में हुआ था। वह शाहजहाँ (Shahjahan) […] - [शहजादी जहानआरा (35)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-jahanara-was-engulfed-in-flames/): आग की लपटों में घिर गई शहजादी जहानआरा ! किसी भी मुगल शहजादी न इससे पहले या इसके बाद इस तरह की आग स्वप्न में भी नहीं देखी होगी। - [जहानआरा की दौलत (36)](https://bharatkaitihas.com/jahanara-was-the-richest-woman-of-the-mughalia-sultanate/): शाह-बेगम की पदवी मिल जाने के कारण जहानआरा को शासन में सीधे हस्तक्षेप करने के अधिकार मिल गए थे। इसी कारण उसे बेगम-साहिब भी कहा जाता था। - [रौशनआरा का रुतबा (37)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-roshanara-defeated-jahanara-the-elder-sister/): वह जहानआरा द्वारा शाहजहाँ के उत्तराधिकारी के रूप में पसंद किए गए भाई दारा शिकोह को नापसंद करने लगी और उद्दण्ड औरंगजेब का पक्ष लेने लगी। - [शाहजहाँ के हीरे मोती (38)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-quarrelled-with-shah-jahan-for-diamonds-and-pearls/): शाहजहाँ ने औरंगजेब को लिखा कि वक्त आने पर तेरे बेटे भी तेरे साथ वही करेंगे जो तूने मेरे साथ किया है। - [शाहजहाँ की मृत्यु (39)](https://bharatkaitihas.com/after-all-shah-jahan-died-in-one-evening/): आखिर एक शाम शाहजहाँ की मृत्यु हो गई। जिस आदमी ने लाखों लोगों को मौत बांटी थी, आज वही आदमी मर गया और उसकी मौत से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। - [शाहबेगम (40)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-made-jahanara-again-shah-begum/): औरंगजेब ने जहानआरा को फिर से शाहबेगम बना दिया! वह अपनी इस बड़ी बहिन के अहसान कभी नहीं भूल सकता था। उसी ने औरंगजेब को पाला था। - [रौशनआरा की हत्या (41)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-killed-raushanara-by-slow-poison/): रौशनआरा की हत्या मुगलिया राजनीति का एक ऐसा काला और रहस्यमय अध्याय है जो मुगलों की राजनीतिक हवस को अच्छी तरह उजागर करता है। - [मुगल शहजादियों के विवाह (42)](https://bharatkaitihas.com/clarions-of-the-marriage-of-mughal-princesses-started-ringing-again-in-red-fort/): लाल किले में मुगल शहजादियों के विवाह की शहनाइयाँ फिर से बजने लगीं! ये शहनाइयाँ अकबर के समय से बंद पड़ी थीं। - [लाल किले की रंगीनियाँ (43)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-expelled-artists-from-red-fort/): शाहजहां के काल में गहरी जड़ें जमा चुकीं लाल किले की रंगीनियाँ औरंगजेब को फूटी आंख नहीं सुहाती थीं। वह इन रंगीनियों को इस्लाम विरोधी समझता था। - [मुगलिया भवनों की सजावट (44)](https://bharatkaitihas.com/orders-for-building-construction-were-not-issued-now-from-red-fort/): मुगल सैनिक पूरे भारत को लूट कर लाल किलों को महंगे रत्नों से भर रहे थे और लाल किलों में बैठे उनके मालिक इन रत्नों को इन भवनों में लगा रहे थे। शाहजहां कालीन मुगलिया भवनों की सजावट देखते ही बनती थी। - [दिलरास बानू का मकबरा (45)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-did-not-provide-money-for-his-begums-tomb/): औरंगजेब ने अपनी बेगम दिलरास बानू का मकबरा अत्यंत साधारण पत्थरों से बनवाया था जिसे देखकर दिलरास बानू के पुत्रों को बड़ी निराशा हुई। - [जीनत-उन्निसा (46)](https://bharatkaitihas.com/due-to-fear-of-hindus-aurangzeb-built-a-mosque-in-red-fort/): जीनत-उन्निसा औरंगजेब की दूसरे नम्बर की बेटी थी। वह अपने बाबा शाहजहाँ की लाड़ली थी और अपने बाप औरंगजेब को पसंद नहीं करती थी। - [औरंगजेब की कट्टरता (47)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-prohibited-the-writing-of-kalma-on-coins/): औरंगजेब का इस्लाम अपने जमाने के तमाम मुसलमानों से अलग था। कारण कुछ लोग उसे पीर एवं औलिया मानते थे तो कुछ लोग इसे औरंगजेब की कट्टरता कहते थे। - [औरंगजेब का मंदिर विनाश (48)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-of-delhi-started-hammering-hindu-temples/): सुबह-शाम बजने वाले नगाड़े और शहनाइयां के स्वर मानो औरंगजेब के भय से यमुनाजी के जल में समाधि ले चुके थे। - [मूर्तिभंजक औरंगजेब (49)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-demolished-temples-of-ujjain-ayodhya-and-jagannathpuri/): 21 सितम्बर 1681 को औरंगजेब ने बेलदारों के दारोगा जवाहर चंद को आदेश दिए कि वह बुरहानपुर जाए तथा अजमेर से बुरहानपुर तक के मार्ग में स्थित प्रत्येक मंदिर को तोड़ डाले। - [ब्रजभूमि पर कहर (50)](https://bharatkaitihas.com/braj-devastated-by-havoc-of-red-fort-but-rajputana-settled/): ई.1670 में औरंगजेब के आदेश से मथुरा के केशवराय मन्दिर को तोड़कर उसके पत्थरों से उसी स्थान पर मस्जिद बनवाई गई तथा मथुरा का नाम बदलकर इस्लामाबाद रख दिया गया। - [राजपूताने पर कहर (51)](https://bharatkaitihas.com/after-desolating-braj-aurangzeb-bared-his-teeth-on-rajputana/): मुगल सेना ने खण्डेला स्थित मोहनजी का मंदिर, खाटू श्यामजी स्थित सांवलजी का मंदिर एवं निकटवर्ती अन्य मंदिर तोड़ दिए। - [दक्षिण भारत पर कहर (52)](https://bharatkaitihas.com/beladar-became-daroga-of-bathroom-who-demolished-temples-for-aurangzeb/): मुगल सैनिकों ने मंदिर में गायों को लाकर उनकी हत्या की तथा मंदिर को ढहा दिया। - [शाइस्ता खाँ की मक्कारी (53)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-imprisoned-aurangzebs-army-in-mountains/): अभी शाइस्ता खाँ मार्ग में ही था कि उसे समाचार मिला कि शिवाजी ने छुरा भौंककर बीजापुर के सेनापति अफजल खाँ का वध कर दिया है। - [शाइस्ता खाँ की अंगुली (54)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-cut-off-the-finger-of-aurangzebs-maternal-uncle/): छत्रपति शिवाजी ने शाइस्ता खाँ की अंगुली नहीं काटी थी, अपितु अंगुली के रूप में औरंगजेब की नाक काटकर उसके हाथ में पकड़ाई थी। - [महाराजा जसवंतसिंह का उपकार (55)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-gave-shivaji-an-opportunity-to-escape/): शिवाजी पर किया गया महाराजा जसवंतसिंह का उपकार स्वयं महाराजा के लिए बहुत भारी पड़ा। औरंगजेब ने जसवंतसिंह के पुत्रों को छल-बल से मारा। - [राजकुमारी चारुमती का विवाह (56)](https://bharatkaitihas.com/maharana-raj-singh-married-with-princess-charumati/): औरंगजेब ने महाराणा को एक कड़ा पत्र लिखकर नाराजगी व्यक्त की जिसमें कहा गया कि मेरे हुक्म के बिना किशनगढ़ जाकर तुमने शादी क्यों की? - [सूरत बंदरगाह की लूट (57)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-shivaji-looted-the-estate-of-jahanara/): सूरत बंदरगाह की लूट औरंगजेब के गाल पर जड़ा गया ऐसा तमाचा था जिसकी गूंज पूरे भारत में सुनाई दी।इस लूट के बाद शिवाजी हिन्दू जाति के नायक बन गए। - [शिवाजी लाल किले में (58)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-shivaji-entered-red-fort-with-bhagwa-flag-on-elephant/): शिवाजी की आगरा यात्रा न केवल मुगल सल्तनत के इतिहास की अपितु मराठों के इतिहसा की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना ने मराठों की धाक जमा दी। - [शिवाजी की गर्जना (59)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-walls-shook-with-shivajis-roar/): जब शिवाजी लाल किले में खड़े होकर गरजे तो औरंगजेब जैसे क्रूर एवं मदांध बादशाह की रूह भी कांप उठी। शिवाजी की गर्जना से लाल किले की दीवारें कांप उठीं! शिवाजी की गर्जना न केवल मुगल इतिहास की, अपितु हिन्दुओं के इतिहास की भी अत्यंत महत्वपूर्ण घटना बन गई। जब औरंगजेब के बख्शी असद खाँ […] - [अमरसिंह राठौड़ की गर्जना (60)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-saw-the-walls-of-the-red-fort-shivering-with-the-roar-of-amarsingh-rathod/): औरंगजेब वह दिन भूल नहीं पाता था जब नागौर के राव अमरसिंह राठौड़ ने औरंगजेब के पिता शाहजहाँ की आंखों के सामने ही भरे दरबार में बादशाह के बख्शी सलावत खाँ को मार डाला था! - [शिवाजी का पलायन (61)](https://bharatkaitihas.com/the-walls-of-the-red-fort-could-not-stop-shivaji/): औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा में नजरबंद कर रखा था किंतु उसके सैनिक शिवाजी का पलायन नहीं रोक पाए। - [संभाजी की वापसी (62)](https://bharatkaitihas.com/the-brahmin-couple-fed-sambhaji-in-their-plate/): औरंगजेब को जब शिवाजी और उनके पुत्र संभाजी के सकुशल रायगढ़ पहुंच जाने के समाचार मिले तो वह अपमान और क्रोध से तिलमिलका कर रह गया। - [हिन्दू राजाओं की सुन्नत (63)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-played-a-conspiracy-to-take-hindu-rajas-to-iran-and-circumcise-them/): राजकुुमार पद्मसिंह को बीकानेर राजवंश का अब तक का सबसे वीर पुरुष माना जाता है। उसकी तलवार का वजन आठ पौण्ड तथा खाण्डे का वजन पच्चीस पौण्ड था। - [मिर्जाराजा जयसिंह (64)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-killed-mirzaraja-jaisingh-by-poisoning-him/): ई.1636 में शाहजहाँ ने जयसिंह को 'मिर्जा-राजा' की उपाधि दी थी। तब से मिर्जाराजा जयसिंह शाहजी एवं शिवाजी को हानि पहुंचाता आ रहा था। - [वीर गोकुला जाट (65)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-got-veer-gokula-jat-sliced-in-agras-red-fort/): गंगा-यमुना के दो-आब में निवास करने के कारण जाटों को मुसलमान शासकों के हाथों दीर्घकाल तक उत्पीड़न झेलना पड़ा जिसके कारण इनमें संघर्ष करने की प्रवृत्ति विकसित हो गई। - [औरंगजेब को चुनौती (66)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-looted-surat-for-second-time-and-openly-challenged-aurangzeb-for-war/): छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्पूर्ण अस्तित्व ही धूर्त औरंगजेब को चुनौती था। औरंगजेब के समक्ष शिवाजी की शक्ति कुछ भी नहीं थी किंतु औरंगजेब शिवाजी को छू भी नहीं पाता था। शिवाजी की आगरा यात्रा के लिए मिर्जाराजा जयसिंह के माध्यम से शिवाजी को शाही खजाने से 1 लाख रुपए दिए गए थे। जब शिवाजी […] - [छत्रसाल बुंदेला (67)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-made-chhatrasal-an-enemy-of-the-red-fort/): औरंगजेब तो ई.1707 में छत्रसाल का दमन करने की अधूरी इच्छा के साथ मर गया किंतु राजा छत्रसाल ई.1731 तक मातृभूमि की सेवा करता रहा। - [छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक](https://bharatkaitihas.com/red-fort-saw-with-great-surprise-the-coronation-of-chhatrapati-shivaji/): ब तक वह कट्टरपंथी औरंगजेब, अकबर के सिंहासन पर बैठा रहा, एक भी राजपूत उसे बचाने के लिए अपनी अंगुली भी हिलाने को तैयार नहीं था। औरंगजेब को अपनी दाहिनी भुजा खोकर दक्षिण के शत्रुओं के साथ युद्ध करना पड़ा। - [भारतीय औरतों से विवाह (68)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-did-not-like-that-portuguese-men-marry-indian-women/): पुर्तगालियों ने अराकानी स्त्रियों के साथ विवाह करने आरम्भ कर दिए क्योंकि पुर्तगाली औरतें भारत में आकर रहने को तैयार नहीं थीं। - [सतनामियों के ताबीज (69)](https://bharatkaitihas.com/afraid-of-satnamis-aurangzeb-tied-amulets-on-cannons/): संत रैदास तथा उनके शिष्यों द्वारा दिए गए भगवद्भक्ति के मंत्र ने सतनामियों को इतना साहस प्रदान किया कि वे भारतीय इतिहास का अमिट हिस्सा बन गए।  - [सिक्ख गुरुओं की हत्या (70)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-killed-guru-arjun-dev-and-guru-tegh-bahadur/): 11 नवम्बर 1675 को दिल्ली के चाँदनी चौक में काज़ी ने फ़तवा पढ़ा और जल्लाद जलालदीन ने तलवार से गुरु तेग बहादुर का शीश धड़ से अलग कर दिया। - [नेताजी पाल्कर](https://bharatkaitihas.com/netaji-palkar-became-a-hindu-again-by-defying-the-red-fort/): लाल किले को धता बताकर नेताजी पाल्कर फिर से हिन्दू बन गया! - [औरंगजेब की औलादें](https://bharatkaitihas.com/shahzada-muhammad-sultan-died-in-salimgarh-jail/): औरंगजेब की औलादें जेलों में सड़-सड़ कर मरीं, जो जीवित बचीं वे आपस में कट-कट कर मरीं। औरंगजेब ने सबकी जिंदगी नर्क बना रखी थी। - [यूसुफजइयों के कबीले](https://bharatkaitihas.com/yusufjai-sold-twenty-thousand-men-and-women-of-kabul-to-the-markets-of-central-asia/): यूसुफजइयों के कबीले बड़े दुर्दान्त, लड़ाकू एवं क्रूर थे। वे प्रायः आसपास के मैदानों पर धावा बोलते थे और लूटमार करके भाग जाते थे। - [महाराजा जसवंतसिंह की रानियाँ](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-imprisoned-the-queens-of-maharaja-jaswant-singh/): औरंगजेब को पूरा विश्वास था कि स्वर्गीय महाराजा की दोनों रानियां एवं राजकुमार अजीतसिंह दिल्ली में ही कहीं पर छिपे हुए हैं। अतः घर-घर तलाशी ली गई। - [भारत में जजिया](https://bharatkaitihas.com/red-fort-re-enforced-jiziya-in-india/): जजिया एक विशेष प्रकार का कर है जो मुस्लिम शासकों द्वारा अपनी गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाता था। भारत में जजिया से प्रथम परिचय ई.712 में हुआ था जब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध प्रदेश को जीतकर वहाँ के हिन्दुओं पर जजिया लागू किया था। लाल किले के नए मालिकों ने भी कई बार भारत […] - [औरंगजेब से नफरत](https://bharatkaitihas.com/the-whole-country-stood-up-against-the-red-fort/): जब औरंगजेब ने हिन्दू राजाओं की एक साथ सुन्नत करने का प्रयास किया तो हिन्दू राजा औरंगजेब से विमुख हो गए। - [राठौड़ों का राजकुमार](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-could-not-get-the-prince-of-the-rathores/): महाराणा राजसिंह ने राजकुमार अजीतसिंह को केलवा ठिकाणे का पट्टा देकर वहाँ रक्खा तथा जोधपुर के राजपूत सरदारों को आश्वस्त किया कि बादशाह कितना ही ताकतवर क्यों न हो, वह वीर दुर्गादास तथा मेवाड़ की सम्मिलित शक्ति का सामना नहीं कर सकता। - [राजपूताने पर आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/rathores-and-sisodis-drag-aurangzeb-into-the-mountains/): महाराणा ने भीलों की सेना को पहाड़ों की नाकाबंदी करने पर नियुक्त कर दिया। इन भीलों ने सैंकड़ों मुगल सैनिकों को अपने तीरों से मार डाला। - [कुंवर भीमसिंह](https://bharatkaitihas.com/maharana-raj-singh-brought-the-gold-of-the-mughals-to-udaipur-by-loading-on-camels/): अब औरंगजेब मेवाड़ की तरफ से निश्चिंत होकर अपनी सम्पूर्ण शक्ति मराठों के विरुद्ध लगा सकता था। - [औरंगजेब का चौथा बेटा](https://bharatkaitihas.com/aurangzebs-fourth-prince-was-rebel/): औरंगजेब अपने अमीरों, उमरावों, एवं सेनापतियों को भी संदेह की दृष्टि से देखता था। इसलिए वह राज्य के छोटे-से-छोटे काम को स्वयं करने का प्रयत्न करता था। - [औरंगजेब का छल](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-wrote-a-false-letter-and-sent-it-to-veer-durgadas/): शंभाजी ने अकबर को आश्वासन दिया कि वह शीघ्र ही एक बड़ी सेना लेकर औरंगजेब पर आक्रमण करने के लिए उत्तर भारत की तरफ अभियान करेगा। - [शहजादी जेबुन्निसा](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-jailed-his-elder-daughter-zebunnisa/): औरंगजेब को चित्रकला, मूर्तिकला एवं संगीतकला से घृणा थी किंतु जेबुन्निसा को संगीत तथा साहित्य में बहुत रुचि थी और वह अपने समय की अच्छी गायिका थी। - [शहजादी जेबुन्निसा का अंत](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-jebunnisa-died-in-jail/): औरंगजेब अपनी पांच पुत्रियों में से सबसे अधिक प्रेम अपनी बड़ी पुत्री जेबुन्निसा से करता था और अपने पांच पुत्रों में से सर्वाधिक प्रेम अपने चौथे नम्बर के पुत्र अकबर से करता था किंतु इन दोनों ने ही औरंगजेब को मुगलों के तख्त से उतारने का षड़यंत्र रचा। - [बेगम जहांजेब बानू](https://bharatkaitihas.com/jahanzeb-daughter-in-law-of-aurangzeb-made-anirudh-singh-a-son/): वह नित्य प्रतिदिन अल्लाह से प्रार्थना किया करे कि उसका पिता मर जाए ताकि अकबर को एक दिन मुगलों का बादशाह बनने का अवसर मिल सके। - [मुअज्जम](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-prohibited-cutting-of-shahzades-hair-and-nails/): इस समय तक मुअज्जम यौवन की दहलीज पर पैर रख चुका था इसलिए उसके मन में औरतों के प्रति आकर्षण उत्पन्न होना स्वाभाविक था। - [वीर राजाराम जाट](https://bharatkaitihas.com/veer-rajaram-jat-put-the-bones-of-emperor-akbar-in-the-fire/): गोकुला के दर्दनाक अंत से बुरी तरह आहत हुए जाट धीरे-धीरे सिनसिनी गांव के निवासी ब्रजराज जाट तथा उसके भाई भज्जासिंह जाट के नेतृत्व में एकत्रित होने लगे। - [शंभाजी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80/): औरंगजेब ने सोचा था कि शंभाजी की हत्या के बाद मराठा शक्ति बिखर जाएगी किंतु हुआ ठीक उलटा। - [गुरु गोविन्दसिंह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/): नौ वर्ष की आयु में जब गोविन्दसिंह के पिता दिल्ली में शहीद हुए तब सिक्ख पंथ का भार बालक गोविन्द सिंह के कन्धों पर आ गया और वे सिक्खों के दसवें गुरु हुए। - [शहजादी सफियतुन्निसा](https://bharatkaitihas.com/veer-durgadas-returned-aurangzebs-grandson-and-granddaughter/): राजकुमार अजीतसिंह शहजादी सफियतुन्निसा से विवाह करना चाहता था किंतु वीर दुर्गादास ने अजीतसिंह को शहजादी सफियतुन्निसा से मिलने एवं उससे विवाह करने पर रोक लगा दी। - [दक्षिण भारत में औरंगजेब](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-was-in-a-rage-in-south-india-for-twenty-five-years/): दक्षिण भारत में औरंगजेब के पच्चीस साल उतने ही भयावह थे जितने तैमूर लंग के कुछ साल उत्तर भारत के लिए भयंकर विनाशकारी रहे थे। - [मुगल काल में किसान](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-was-squeezing-blood-of-people-of-india/): किसानों के खेतों पर जाने वाले कर्मचारी एवं सिपाही बेईमान थे इस कारण वे किसानों से बड़ी क्रूरता से पेश आते थे। - [औरंगजेब की मौत](https://bharatkaitihas.com/nobody-was-crying-over-aurangzebs-death/): औरंगजेब का जन्म ई.1618 में हुआ था और अब वह जीवन के उननब्बेवां पतझड़ देख रहा था। - [चगताई शहजादों का रक्त](https://bharatkaitihas.com/baburs-descendants-were-accustomed-to-murder-of-chagatai-shahzadas/): इस वंश के जितने शहजादों का खून स्वयं इस परिवार के सदस्यों ने बहाया, उतना खून उनके शत्रुओं ने भी नहीं बहाया था। - [औरंगजेब की वसीयत](https://bharatkaitihas.com/my-part-in-the-house-is-from-floor-to-ceiling-your-part-is-from-roof-to-sky/): औरंगजेब की वसीयत में मुगल सल्तनत के उत्तरी भारत के प्रांतों को दिल्ली एवं आगरा नामक दो भागों में विभक्त करके अपने शेष दो पुत्रों को आपस में बांट लेने की सलाह दी थी। - [शाहआलम](https://bharatkaitihas.com/after-killing-aurangzebs-favorite-sons-shah-alam-became-the-emperor-of-india/): आजमशाह को किसी नजूमी ने बताया कि यदि 20 जून को युद्ध आरम्भ हुआ तो तेरी विजय होगी। - [महाराजा अजीतसिंह](https://bharatkaitihas.com/maharaja-ajitsingh-washed-the-jodhpur-fort-with-ganga-water/): अजीतसिंह पूरे मारवाड़ राज्य का स्वामी था किंतु औरंगजेब ने उसे अपने ही राज्य में एक छोटा सा जागीरदार बनाने की साजिश की थी। - [शाहे बेखबर](https://bharatkaitihas.com/the-court-of-shahe-bekhar-was-divided-into-shia-and-sunni/): बादशाह राजकीय कार्यों में इतना अधिक लापरवाह था, कि लोग उसे 'शाहे-बेख़बर' कहने लगे थे किंतु इतिहासकारों का यह आरोप सही नहीं लगता है। - [शहजादा कामबक्श](https://bharatkaitihas.com/bahadurshah-heals-with-his-hands-on-the-wounds-of-kambaksha/): कामबख्श बुरी तहर से घायल हो गया तथा उसके शरीर से रक्त बह जाने के कारण वह बेहोश हो गया। - [सवाई जयसिंह से दुश्मनी](https://bharatkaitihas.com/kachhawahs-rathores-and-sisodis-formed-a-union-against-red-fort/): जजाऊ के युद्ध में आजमशाह तथा बेदारबख्त की मृत्यु हो गई तथा सवाई जयसिंह के भी बहुत से राजपूत सिपाही मारे गए। - [बंदासिंह बैरागी](https://bharatkaitihas.com/red-fort-finds-bandasingh-bairagi-as-new-enemy/): माधवदास बैरागी, गुरु गोविंदसिंह की बातों से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उसने स्वयं को गुरु का बन्दा कहना आरम्भ कर दिया। - [चूड़ामन जाट](https://bharatkaitihas.com/red-fort-kneels-in-front-of-chudaman-jat/): जब औरंगजेब दक्षिण भारत में अंतिम सांसें गिन रहा था तब जाटों का नेतृत्व चूड़ामन जाट के हाथों में था। - [बहादुरशाह की मृत्यु](https://bharatkaitihas.com/body-of-emperor-could-not-be-buried-for-two-and-a-half-months/): बादशाह सिक्खों का दमन करने तथा लाहौर के मुल्ला-मौलवियों से समझौता करने के लिए लाहौर चला गया। - [जहाँदारशाह](https://bharatkaitihas.com/jahandarshah-made-the-red-fort-a-dance-house/): बहादुरशाह के पुत्रों में से जहाँदारशाह सबसे बड़ा था। उसका वास्तविक नाम मिर्जा मुइज्जुद्दीन बेग मुहम्मद खान था। - [जहाँदारशाह की हत्या](https://bharatkaitihas.com/iranian-wazirs-betrayed-jahandarshah-and-got-him-killed/): जहाँदारशाह की हत्या से भारत के मुगलों में बादशाहों की हत्या का एक लम्बा सिलसिला शुरु होता है। हत्याओं के इसी सिलसिले ने मुगल सल्तनत को उसके अंत तक पहुंचा दिया। ईरानी वजीरों ने गद्दारी करके जहाँदारशाह की हत्या करवाई! मुगल बादशाह जहाँदारशाह ने शासन व्यवस्था में बड़े परिवर्तन करने के प्रयास किए। उसने राज्य […] - [कर्मनासा (23)](https://bharatkaitihas.com/karmanasa-river/): कुदरत ने मध्य एशियाई मंगोलों का भाग्य उनके पुण्यकर्मों से नहीं उनकी खूनी ताकत से लिखा था किंतु हुमायूँ की आधी खूनी ताकत तो हिन्दुस्तान की आबोहवा ने खत्म कर दी थी और बची-खुची ताकत कर्मनासा ने नष्ट कर दी। जहाँ एक ओर भाग्यलक्ष्मी बैराम खाँ पर मेहरबान हुई वहीं दूसरी ओर हुमायूँ के उन […] - [जाके प्रिय न राम बैदेही (24)](https://bharatkaitihas.com/who-does-not-love-lord-ram-and-sita/): युवा संन्यासी ने लिखा- जाके प्रिय न राम बैदेही। तजिए ताहि  कोटि  बैरी  सम  जद्यपि  परम  सनेही। तज्यौ पिता  प्रहलाद,  बिभीषन  बंधु  भरत  महतारी। बलि गुरु तज्यो, कंत ब्रज बनितनि भये मुद मंगल कारी। जिस अयोध्या को मीर बाकी जला कर क्षार कर गया था और भगवान श्रीराम के जन्म स्थल पर स्थित विशाल देवालय […] - [लशकर गेब (25)](https://bharatkaitihas.com/lashkar-geb/): अचानक उसने देखा कि दुश्मन की सेना के पीछे से एक लश्कर प्रकट हुआ। बात ही बात में वह लश्कर टिड्डी दल की तरह दुश्मन पर छा गया। हुमायूँ ने अपने आदमियों से पूछा कि यह क्या लशकर गेब  है ?  कन्नौज से हुमायूँ और बैरामखाँ की सेनायें अलग हो गयीं थीं। जब हुमायूँ आगरा […] - [खानका (26)](https://bharatkaitihas.com/khanka/): एक दिन दोनों बादशाहों ने शिकार खेलने के बाद चोगानबाजी और कबलअंदाजी की। उस दिन बैरमबेग को खानका का खिताब दिया गया। हिन्दुस्थान से अपना दाना-पानी उठ गया जानकर हुमायूँ हिन्दुस्थान छोड़कर कंधार की ओर रवाना हुआ। हुमायूँ का भाई कामरान उसका रास्ता रोककर बैठ गया। वह नहीं चाहता था कि हुमायूँ सही सलामत हिन्दुस्थान […] - [फरमान (27)](https://bharatkaitihas.com/decree/): बैराम खाँ ने तुहमास्प से ईरानी सेना प्राप्त की और उससे तथा हूमायूँ से एक-एक फरमान लेकर फिर से हिन्दुस्थान आया। ये फरमान उसने हुमायूँ के भाई कामरान के नाम लिखवाये थे ताकि भाई को भाई के खिलाफ नहीं लड़ना पड़े और उनमें प्रेम हो जाये। बैरामखाँने हिन्दुकुश पर्वत पार कर कांधार पर आक्रमण किया। […] - [कातर निगाहें (28)](https://bharatkaitihas.com/beggar-eyes/): बैराम खाँ एक ऐसा स्वामिभक्त था जिसके हृदय में निजी अभिमान का अंशमात्र भी नहीं होता और जो अपने स्वामी की कातर निगाहें देखने के बजाय मर जाना अधिक पसंद करता है, भले ही स्वामी कितना ही मक्कार और बदजात क्यों न हो! कामरान ने एक माह तक बैराम खाँ को अपने पास रखा उसने […] - [तोप के सामने (29)](https://bharatkaitihas.com/in-front-of-cannon/): दुष्ट कामरान ने शहजादे अकबर को तोप के सामने लटका दिया। अब उसे बचाने वाला कोई नहीं था। बैराम खाँ ने पिछले दरवाजे से दुर्ग में घुसकर दुर्ग की प्राचीर से लटक रहे तीन वर्ष के अकबर को तोप के सामने से उतारा और मुख्य दरवाजा खोलकर हुमायूँ के पास चला आया। हिन्दुकुश पर्वत पार […] - [आँखों में सलाई (30)](https://bharatkaitihas.com/needle-in-eye/): बैराम खाँ ने उसी समय लोहे की सलाईयां गरम करवाईं और कामरान की आँखों में फिरा दीं। आँखों में सलाई फिरते ही कामरान अंधा होकर चीखने और छटपटाने लगा। कांधार हाथ से निकल जाने के बाद कामरान फिर से काबुल भाग आया और मोर्चा बांधकर बैठ गया। वह जानता था कि हुमायूँ भले ही कितना […] - [फिर से दिल्ली (31)](https://bharatkaitihas.com/delhi-again/): अपने भाईयों से मुक्ति पाकर हुमायूँ ने फिर से दिल्ली और आगरा पर अधिकार करने की ठानी। 1540 ईस्वी में उसने दिल्ली और आगरा छोड़े थे और दर-दर की ठोकरें खाते हुए चौदह साल हो चले थे। वह काबुल से चलकर पेशावर आया और सिंधु नदी पार करके कालानौर  तक चला आया। यहाँ उसने अपनी […] - [मेवों की बेटी (32)](https://bharatkaitihas.com/daughters-of-meo-community/): पहली मेवों की बेटी चंगेज और तैमूरलंग के खानदान में और दूसरी बेटी तुर्कों की कराकूयलू शाखा के बहारलू खानदान में ब्याह दी गयी। आगे चलकर इसी मेवों की बेटी से 17 दिसम्बर 1556 को लाहौर में बैरामखाँ के पुत्र अब्दुर्रहीम का जन्म हुआ। दिल्ली के दक्षिण पश्चिम में स्थित रेवाड़ी, अलवर और तिजारा परगनों […] - [कच्चे चबूतरे का बादशाह (33)](https://bharatkaitihas.com/king-of-raw-pops/): बैराम खाँ ने साढ़े तेरह साल के बालक अकबर को बादशाह तो घोषित कर दिया किंतु वह केवल कच्चे चबूतरे का बादशाह था। मुगलों का असली तख्त तो दिल्ली में था जिस पर कोई भी कभी भी कब्जा कर सकता था। जब हुमायूँ दिल्ली को प्रस्थान कर गया तो सिकंदर सूर ने पहाड़ों से निकल […] - [सलीमा बेगम (34)](https://bharatkaitihas.com/salima-begum/): अकबर अपनी बुआ की बेटी सलीमा बेगम से यद्यपि उम्र में छोटा था किंतु वह सलीमा बेगम पर जान लुटाता था और उससे विवाह करना चाहता था लेकिन दूसरी ओर सलीमा बेगम खुरदरे चेहरे वाले जिद्दी और अनपढ़ अकबर को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। सदियों से ईरानी खून में तुर्कों, मंगोलों, तातारों, हब्शियों […] - [अकाल का महादानव (35)](https://bharatkaitihas.com/demon-of-famine/): बैरामखाँ जानता था कि सिकंदर सूर, आदिलशाह और इब्राहीम से निबटे बिना दिल्ली तक पहुंच पाना संभव नहीं था लेकिन इन सब शत्रुओं से प्रबल एक और शत्रु था जो बैरामखाँ को सबसे ज्यादा सता रहा था। वह था देश व्यापी महाअकाल। अकाल का महादानव पूरे देश में ताण्डव कर रहा था। सलीमा बेगम को […] - [धूसर बनिया (36)](https://bharatkaitihas.com/gray-merchant/): एक जमाना था जब रेवाड़ी की सड़कों पर एक धूसर बनिया नमक बेचा करता था। उसका नाम था हेमचंद्र लेकिन वह अपने आप को हेमू ही कहता था। वह बातों का बड़ा खिलाड़ी था। देखते ही देखते वह किसी को भी अपने पक्ष में कर लेता था। धीरे-धीरे वह राजकीय कर्मचारियों से घुल मिल गया […] - [विक्रमादित्य हेमचंद्र (37)](https://bharatkaitihas.com/vikramaditya-hemachandra/): जब महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र दिल्ली के अधीश्वर हुए तो देशवासियों का उत्साह विशाल झरने की भांति फूट पड़ा। महाराज हेमचंद्र के अफगान व तुर्क सैनिक हिन्दू जनता के इस उत्साह को आश्चर्य और कौतूहल से देखते थे। जब हेमू को ज्ञात हुआ कि हुमायूँ की मृत्यु हो गयी है और बैरामखाँ अकबर को लेकर दिल्ली […] - [काबुल या दिल्ली (38)](https://bharatkaitihas.com/kabul-or-delhi/): जब अकबर के समक्ष यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि काबुल या दिल्ली तो अकबर ने अकबर अपने अमीरों की सलाह से आदेश दिया कि सेना को दिल्ली की ओर बढ़ाने के बजाय काबुल की ओर कूच किया जाये। उन दिनों उत्तरी भारत के समस्त बादशाह और सेनापति हेमू के नाम से थर्राते थे। इब्राहीम सूर […] - [तार्दीबेग की हत्या (39)](https://bharatkaitihas.com/murder-of-tardibeg/): जब अकबर जंगल में काफी आगे तक चला गया तो बैरामखाँ ने तार्दीबेग को अपने डेरे पर बुलवाया। जैसे ही तार्दीबेग बैरामखाँ के डेरे पर पहुँचा, बैराम खाँ ने तलवार निकाल कर तार्दीबेग की हत्या कर दी। अकबर की सहमति पाकर बैरामखाँ ने खिज्र खाँ को सिकंदर सूर से निबटने के लिये तैनात किया और […] - [फिर से पानीपत (40)](https://bharatkaitihas.com/panipat-again/): बाबर ने पानीपत के मैदान में ही इब्राहीम लोदी से भारत का राज्य छीना था। आज एक बार मुगल सेना फिर से पानीपत की ओर चल पड़ी थी जहाँ उसे महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र की विशाल सेना से दो-दो हाथ करने थे। जब महाराज विक्रमादित्य हेमचंद्र ने देखा कि बैराम खाँ मुगल सेना लेकर दिल्ली की […] - [काफिरों की हत्या (41)](https://bharatkaitihas.com/killing-the-infidels/): काफिरों की हत्या करने के बाद बैरामखाँ ने अपने प्रबलतम शत्रु महाराज हेमचंद्र का सिर काबुल भेज दिया जहाँ उसे चौराहे पर लटका दिया गया ताकि शत्रु समझ लें कि बैरामखाँ का विरोध करने वालों का क्या हश्र होता है। अलीकुलीखाँ और शाहकुली मरहम मूर्च्छित महाराजा हेमचंद्र को लेकर बैरामखाँ के पास आये। महाराज के […] - [सोने की ईंटें (42)](https://bharatkaitihas.com/gold-bricks/): रानी अलवर जिले में स्थित बीजवाड़े की पहाड़ियों में जाकर छिप गयी। उसने कई दिनों तक जंगलों में घूम-घूम कर सोने की ईंटें तथा स्वर्ण-आभूषण धरती में अलग-अलग स्थानों पर दबा दिये ताकि यदि बैराम खाँ सोने का पीछा करता हुआ बीजवाड़े की पहाड़ियों में आ भी पहुँचे तो भी उसे एक साथ सम्पूर्ण कोष […] - [मस्त हाथी (43)](https://bharatkaitihas.com/drunk-elephant/): एक दिन शाम के समय बैराम खाँ यमुना में नौका विहार के लिये गया। जाने कैसे एक शाही हाथी बिगड़ गया और बैराम खाँ को कुचलने के लिये झपटा। बैराम खाँ किसी तरह मस्त हाथी से अपनी जान बचाकर लौट आया। दिल्ली और उसके बाद आगरा भी मुगलों ने फिर से हासिल कर लिये किंतु […] - [खून की होली (44)](https://bharatkaitihas.com/bloody-holi/): नासिरुल्मुल्क को लगा कि अब बैराम खाँ खून की होली खेलने वाला है। इसलिए वह किसी तरह जान बचा कर अकबर के पास भाग आया। जब उसने आपबीती कहानी अपने मुँह से अकबर को सुनाई तो अकबर कांप उठा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहाड़ों की तलहटी में उन दिनों धमरी के पास मऊका परगना हुआ […] - [संकरी घाटी (45)](https://bharatkaitihas.com/narrow-valley/): विश्वभर के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे जब सेवक ने अपने स्वामी से विद्रोह किया हो किंतु ऐसे उदाहरण एक-दो ही हैं जब स्वामी अपने सेवक के विरुद्ध विद्रोह करने पर विवश हुआ हो। खानखाना बैराम खाँ और अकबर अब इतिहास की उसी संकरी घाटी में आ खड़े हुए थे जहाँ अपने सेवक […] - [माहम अनगा (46)](https://bharatkaitihas.com/maham-angaa/): माहम अनगा का लड़का आदम खाँ तथा जंवाई शियाबुद्दीन भी बहुत ही बदमाश और घमण्डी थे तथा किसी की भी परवाह नहीं करते थे। माहम अनगा और उसका परिवार यदि किसी से भय खाते थे तो वह था बैराम खाँ। अकबर की बहुत सी धायें और आयाएं थीं। उनमें से कुछ तो शिशु अकबर को […] - [आगरा से पलायन (47)](https://bharatkaitihas.com/departure-from-agra/): जब बादशाह ने आगरा से पलायन करके दिल्ली के लिए कूच किया तो खुरजे में माहम अनगा का जंवाई शहाबुद्दीन अहमद खाँ अपने सब भाई बंदों के साथ बादशाह की पेशवाई के लिये हाजिर हुआ। जब दिल्ली पर काबिज होने के चार साल पूरे होने को आये तो बैरामखाँ और अकबर राजकीय कार्य के सिलसिले […] - [हरम सरकार (48)](https://bharatkaitihas.com/government-of-harem/): अकबर के आगरा से दिल्ली चले आने पर आगरा में बैराम खाँ की सरकार और दिल्ली में हरम सरकार स्थापित हो गयी। ये दोनों सरकारें एक-दूसरे को खत्म करने पर तुल गयीं। अकबर इन दोनों सरकारों के बीच में बादशाह होते हुए भी प्यादे की तरह बेबस होकर रह गया। कैसी विचित्र शतरंज थी यह? […] - [लखनवी (49)](https://bharatkaitihas.com/lucknowi/): सलीमशाह ने भी एक बार एक लाख स्वर्ण मुद्रायें दी थीं जिन्हें बाबा रामदास ने उसी प्रकार भिखारियों में बांट दिया था जिस प्रकार से इस बार बांट दिया है। इसलिये सलीमशाह ने उसका नाम लखनवी रख दिया था। बैराम खाँ उस तपस्वी संगीतज्ञ को प्रणाम करके उठ आया। उन दिनों आगरा से मथुरा तक […] - [आगरा से अलविदा (50)](https://bharatkaitihas.com/goodbye-agra/): बैराम खाँ ने आनंद और विनोद में डूबे उस परिवार को दखल देना ठीक नहीं समझा और दूर से ही उल्टे पैरों लौट गया। उसने मन ही मन निश्चय कर लिया कि अब वह खुदा की इबादत के लिये मक्का चला जायेगा। आगरा से अलविदा कहने का समय आ गया था। जब अपने सारे आदमियों […] - [बैराम खाँ का विद्रोह (51)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%88%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b9/): बैराम खाँ का विद्रोह मुगलों के इतिहास की ऐसी दर्दनाक दास्तान है जिसे पढ़कर किसी भी नेकदिल इंसान का दिल सियासत लिए हिकारत के भावों से भर जाएगा। वापस आगरा न जाकर बैराम खाँ वहीं से अलवर के लिये रवाना हो गया ताकि वहाँ से अपने परिवार को लेकर मक्का के लिये प्रस्थान कर सके। […] - [बारूद में आग (52)](https://bharatkaitihas.com/rising-tension/): अब तो पूरी तरह बारूद में आग दिखा दी गयी थी। अपनी मान-मर्यादा को इस तरह धूल में मिलते देखकर सत्ता का चतुर खिलाड़ी बैराम खाँ एक बार फिर से खून की होली खेलने को तैयार हो गया। जब अकबर को ज्ञात हुआ कि बैराम खाँ बागी हो गया है तो उसे माहम अनगा की […] - [विशाल अजगर (53)](https://bharatkaitihas.com/giant-python/): बादशाही लश्कर पहाड़ के नीचे जमा खड़ा था। ज्यों ही बैरामखाँ आता हुआ दिखायी दिया तो बड़ा कोलाहल मचा। मुगल सेना के विशाल अजगर ने वक्राकार होकर बैरामखाँ को चारों ओर से घेर लिया। जब अकबर ने सुना कि बैरामखाँ अपनी सेना लेकर जालंधर तक आ पहुँचा है तो भी वह शिकार खेलने में व्यस्त […] - [नकाबपोश (54)](https://bharatkaitihas.com/masked/): बहुत दूर से वे पाँचों नकाबपोश घोड़े फैंकते हुए चले आ रहे थे। बालू के टीले और कंटीले झुरमुट उनका रास्ता रोकते थे किंतु उनकी परवाह किये बिना वे सरपट घोडा़ दौड़ाये चले जा रहे थे। उनके घोड़े थक चुके थे और मुँह से श्वेत फेन बहने लगा था। हालांकि नकाब के कारण अश्वारोहियों के […] - [बुरी खबर (55)](https://bharatkaitihas.com/bad-news/): अकबर अन्तर्मन के जिस दड़बे में छिपकर रहता था, उस दड़बे की छत इस बुरी खबर की आंधी ने एक ही झटके में उड़ा दी थी। अकबर ने इस दड़बे में स्मृतियों के जाने कितने क्षण कबूतरों की तरह पाल रखे थे। – ‘रहीम कौन ?’ तरुण बादशाह ने अत्यन्त ही अन्यमनस्कता से पूछा। असमय […] - [दो फकीर (56)](https://bharatkaitihas.com/two-saints/): बालक अब्दुर्रहीम को दो फकीर अकबर के पास लेकर आए थे। उन फकीरों के मुंह से बैराम खाँ की हत्या का विवरण सुनकर अकबर का चेहरा सफेद पड़ गया, मानो किसी ने उसके चेहरे का समस्त रक्त निचोड़ लिया हो! बाबा जम्बूर और मुहम्मद अमीन दीवाना बादशाह की सेवा में उपस्थित हुए तो बादशाह ने […] - [खुरदरा चेहरा (57)](https://bharatkaitihas.com/rough-face/): अकबर का खुरदरा चेहरा और अधिक खुरदरा हो आया। बहुत देर तक तरुण बादशाह के खुरदरे चेहरे पर विभिन्न प्रकार की लकीरें बनती-बिगड़ती रहीं। अधिकतर लकीरें ऐसी थीं जिन्हें बाबा जम्बूर किसी भी हालत में नहीं पढ़ सकता था लेकिन बाबा जम्बूर ने हारना नहीं सीखा था। बाबा जम्बूर तो उस समय भी नहीं हारा […] - [प्रलाप (58)](https://bharatkaitihas.com/babble/): अकबर मन ही मन प्रलाप कर रहा था। आज जीवन में पहली बार उसे इस बात का ज्ञान हुआ था कि बड़े से बड़े बादशाह का भी परिस्थितियों पर कोई नियंत्रण नहीं होता। अकबर के खुरदरे चेहरे से चिंता की लकीरें मिटी नहीं। न तो अब्दुर्रहीम और न ही दोनों करिश्माई फकीर उसके सीने में […] - [शत्रु की वापसी (59)](https://bharatkaitihas.com/return-of-enemy/): जब माहम अनगा को पता लगा कि बैरामखाँ का बेटा फिर से बादशाह के पास लौट आया है तो उसकी चिंता का पार न रहा। उसे लगा कि शत्रु की वापसी हो गई है और अब तक के सब किये धरे पर पानी फिर गया है। माहम चाहती थी कि माहम का अपना बेटा आदमखाँ […] - [हरम सरकार के दुर्दिन (60)](https://bharatkaitihas.com/bad-days-of-harem-government/): माहम अनगा की बेटी माहबानू की सगाई अब्दुर्रहीम से कर देने की खुशी में अकबर ने माहम अनगा के बेटे अजीज कोका को खानेआजम की पदवी दी लेकिन कुछ दिनों बाद जब अकबर ने अतगाखाँ को राज्य का वकीले मुतलक[1]  नियुक्त किया तो माहम अनगा समझ गयी कि अब मेरे दिन लद गये किंतु वह […] - [फिर से गुजरात (61)](https://bharatkaitihas.com/gujarat-again/): हुमायूँ के गुजरात अभियान के दौरान बैरामखाँ का सितारा बुलंदी पर पहुँचा था और वह साधारण सिपाही से मुगलिया सल्तनत का खानखाना तथा अकबर के अतालीक के पद पर आसीन हुआ था। ईस्वी 1572 में अकबर ने गुजरात पर चढ़ाई की। इस अभियान में उसने मिर्जा खाँ अब्दुर्रहीम को भी अपने साथ लिया। इस प्रकार […] - [सितारा बुलंदी पर (62)](https://bharatkaitihas.com/fortune-at-heights/): रहीम का सितारा भाग्य के आकाश पर पूरे जोर से चमकने लगा। रहीम का सितारा बुलंदी पर देखकर बहुत से लोगों की छाती पर सांप लोटने लगे। जब अकबर ने मेवाड़ नरेश महाराणा प्रतापसिंह के खिलाफ अभियान किया तो उसने अपने समस्त योग्य सेनापतियों को अजमेर पहुँचने का आदेश दिया। मिर्जाखाँ रहीम को भी ये […] - [मछलियाँ और कछुए (63)](https://bharatkaitihas.com/fish-and-turtles/): मछलियाँ और कछुए इतिहास के उस मोड़ पर आ पहुंचे थे जहाँ अब उनमें से किसी एक का साम्राज्य बचे रहना था और दूसरे को मिट जाना था। ईसा की नौवीं-दसवीं शताब्दी में चम्बल नदी के किनारे कूर्मवंशी क्षत्रियों की तीन शाखाएं राज्य करती थीं। इनमें से एक शाखा नरवर पर, दूसरी ग्वालिअर पर तथा […] - [पेट में दर्द (64)](https://bharatkaitihas.com/stomach-ache/): महाराणा प्रताप ने मानसिंह से कहलवाया कि हमारे पेट में दर्द है इसलिए हम आपके साथ भोजन नहीं करेंगे। मानसिंह तुरंत समझ गया कि महाराणा प्रताप मुझे म्लेच्छों का नौकर जानकर मेरे साथ भोजन नहीं करेंगे और यह मेरा अपमान है। जब मेवाड़ राजवंश ने अपनी कन्याएं मुगलों को देने से मना कर दिया तो […] - [नववर्ष उत्सव (65)](https://bharatkaitihas.com/new-year-celebration/): आज के दरबार में बड़ी भीड़ थी। दरबारे आम में वैसे भी बड़ी भीड़ रहती है किंतु आज की भीड़ कुछ अलग किस्म की थी। आम दिनों में तो मांगने वालों और फरियादियों का तांता लगता है किंतु आज के दिन रियाया बादशाह को नववर्ष उत्सव की मुबारिकबाद देने के लिये उपस्थित हुई थी। आज […] - [चित्रकूट की एक शाम (66)](https://bharatkaitihas.com/an-evening-of-chitrakoot/): चित्रकूट की एक शाम तीन राजपुरुष अपने कीमती और ऊँचे घोड़ों को मंथर गति से मंदाकिनी के किनारे-किनारे चलाये ले जा रहे थे। वे तीनों असाधारण रूप से चुप थे। वनावली के सघन होने पर भी मार्ग बिल्कुल साफ था किंतु ऐसा लगता था कि नदी और अश्व अपनी-अपनी गति को एक दूसरे के अनुरूप […] - [प्रजापालन (67)](https://bharatkaitihas.com/service-to-public/): राजा के मंत्री ही राजा की ओर से प्रजापालन , प्रजा का अनुशासन और उसकी सार-संभाल करते हैं। जिस राजा के सचिव, सहायक और सेवक प्रजा को दुख देते हैं, उस राजा का नाश हो जाता है और प्रजा पीड़ित होती है। अतिथियों के भोजन के बाद चारों व्यक्ति तसल्ली से बैठे। किसी को किसी […] - [अयोग्य शिष्य (68)](https://bharatkaitihas.com/inept-pupil/): खानखाना अब्दुर्रहीम अच्छी तरह जनता था कि शहजादा सलीम एक ऐसा अयोग्य शिष्य है जिसे कभी भी पढ़ा-लिखा कर इंसान नहीं बनाया जा सकता। कच्छवाहों की राजकुमारी जोधाबाई से निकाह करके अकबर ने उसे मरियम उज्जमानी नाम दिया और उसे शाह-बेगम घोषित किया। उससे उत्पन्न पुत्र सलीम का नामकरण सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के […] - [कविता का व्याकरण (69)](https://bharatkaitihas.com/poetry-grammar/): खानखाना अच्छी तरह समझता था कि जीवन रूपी कठोर कविता का व्याकरण और चाटुकारिता से भरी हुई कविता का व्याकरण कितने अलग होते हैं। शहजादे का अतालीक मुकर्रर किये जाने से अब्दुर्रहीम के रुतबे और ख्याति में एकाएक ही बहुत वृद्धि हुई। अब्दुर्रहीम की विद्वता की ख्याति सुनकर उसके दरबार में दुनिया भर के लोग […] - [जुआ (70)](https://bharatkaitihas.com/gambling/): मिर्जा खाँ को रणक्षेत्र से बाहर खींच ले जाने का प्रयास करने वाले उसके शुभचिंतक सैनिक नहीं जानते थे कि मिर्जा खाँ आज सेनापति नहीं था, जुआरी था, जिसने पराये हाथों में थमे पासों पर अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया था। हर हालत में उसे जुआ खेलना ही अभीष्ट था, पक्के जुआरी की तरह, […] - [नोपकृतं (71)](https://bharatkaitihas.com/do-never/): प्राप्य चलानधिकारान् शत्रुषु,  मित्रेषु बंधुवर्गेषुं। नोपकृतं  नोपकृतं  नोपकृतं  कि कृतं तेन।। अर्थात्- जिसने चल अधिकार पाकर शत्रु, मित्र और भाई बंदों का क्रमशः उपकार, उपकार और उपकार नहीं किया, उसने कुछ नहीं किया। गुजरात विजय के उपलक्ष्य में खानखाना बनाये जाने पर अब्दुर्रहीम दिल्ली दरबार में उपस्थित हुआ और उसने बादशाह के प्रति आभार का […] - [बनी के राना (72)](https://bharatkaitihas.com/king-of-forest/): तुम जंगल के सेर बनी के राना । बड़ेन  की  चाल  बड़ेन पहचाना ।। – ‘अब्बा हुजूर, फिर क्या हुआ?’ जाना ने पिता के कंधे पर मुक्का मारा। – ‘अरे कब क्या हुआ?’ खानखाना ने पूछा। – ‘अरे कल जो कहानी आप हमें सुना रहे थे, उसमें आगे क्या हुआ?’ – ‘हम कल कौनसी कहानी […] - [अहेर (73)](https://bharatkaitihas.com/hunt/): मैं यहाँ अहेर खेलने के लिये आया था। अपने साथियों से अलग होकर जंगल में भटक गया। खानखाना अपने कपड़े झाड़ते हुए उठ बैठा। उसकी भुजा में अब भी भयानक दर्द हो रहा था। अरावली की सघन उपत्यकाओं में एक आदमी तेजी से भागा चला जा रहा था किंतु हाथ में गाय का रस्सा पकड़े […] - [जसोदा बार बार भाखै (74)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%88/): जसोदा बार बार भाखै । है कोऊ ब्रज में हितू हमारो चलत गोपालहि राखै। अकबर ने शहजादा मुराद का विवाह खानखाना अब्दुर्रहीम के साले खाने-आजम मिर्जा अजीज कोका की बेटी से करना निश्चित किया। शहजादे मुराद के विवाह में भाग लेने के लिये अकबर ने मुगलिया सल्तनत के लगभग सभी बड़े अमीर, उमराव और सेनापतियों […] - [वकीले मुतलक (75)](https://bharatkaitihas.com/royal-representative/): एक तरफ मुगल सल्तनत का वकीले मुतलक है तो दूसरी ओर सल्तनत का महत्वपूर्ण सेनापति। स्वयं बादशाह तक इन दोनों में से किसी को नाराज नहीं करना चाहता। बादशाह ने दरबार बर्खास्त करने का आदेश दिया और खानखाना को संकेत से अपने साथ आने के लिये कह कर उठ खड़ा हुआ। एकांत पाकर बादशाह ने […] - [विचित्र दरबार (76)](https://bharatkaitihas.com/strange-court/): थोड़ी ही देर में रहीम ने जिस दरबार में प्रवेश किया उस विशाल और विचित्र दरबार की शोभा देखते ही बनती थी। दरबार का शामियाना सोने और चांदी की चोबों पर खड़ा था जो दिन-रात मोतियों की झालरों से झिलमिलाता था। – ‘हुजूर! बाहर फरियादियों का हुजूम इकट्ठा हो गया है। कुछ लोग तो सुबह […] - [शिकायत (77)](https://bharatkaitihas.com/complaint/): अमीरों को सबसे अधिक शिकायत इस बात से थी कि साधारण सिपाही के घर में जन्म लेने वाला रहीम हुमा का पर लगाकर दरबार करता है। भले ही उसका बाप खानखाना के पद तक जा पहुँचा हो किंतु था तो वह मूल रूप से एक साधारण सिपाही ही! खानखाना का ऐसा ठाठ-बाट, अकूत सम्पदा और […] - [जाडा महडू (78)](https://bharatkaitihas.com/jada-mahadu/): – ‘हुजूर! महाराणा प्रतापसिंह के भाई जगमाल का वकील जाडा महडू आपकी सेवा में हाजिर हुआ चाहता है।’ गुलाम ने राज्य के वकील खानखाना अब्दुर्रहीम से निवेदन किया। उस समय खानखाना अपने निजी दरबार में व्यस्त था। – ‘जाडा महडू!’ खानखाना के भीतर स्मृतियों का पिटारा खुला। कहाँ सुना यह नाम? कब? अचानक ही उसे […] - [चाकर रघुबीर के (79)](https://bharatkaitihas.com/servant-of-god/): हम चाकर रघुबीर के पटौ लिखौ दरबार। तुलसी हम का होंइगे नर के  मनसबदार। – ‘महात्मन्! शंहशाह की इच्छा है कि आप उनके दरबार को पवित्र करें।’ शहंशाह अकबर के वकीले मुतलक और काशी के सूबेदार अब्दुर्रहीम खानखाना ने गुंसाईजी से हाथ जोड़कर निवेदन किया। – ‘खानखानाजी, कैसी बात करते हैं आप? हम तो दास […] - [हुक्म उदूली (80)](https://bharatkaitihas.com/disobey/): जब तुलसीदासजी ने अकबर के दरबार में जाने से मना कर दिया तो अकबर ने इसे अपनी हुक्म उदूली समझा और वह आग-बबूला हो गया। – ‘उस भिखारी को इतना घमण्ड?’ क्रोध से चीख पड़ा अकबर। – ‘नहीं जिल्लेइलाही। बाबा को किसी तरह का घमण्ड नहीं। उन्होंने अपनी युवावस्था में ही गृह संसार त्यागकर सन्यास […] - [वानर (81)](https://bharatkaitihas.com/monkeys-in-royal-palace/): आधी रात के बाद सीकरी में हा-हाकार मच गया। जहाँ देखो वहीं लंगूर। महलों, छतों और कंगूरों पर उत्पात मचाते हुए हजारों लंगूर अचानक ही जाने कहाँ से आ गये थे। सैंकड़ों वानर लाल-लाल मुँह के थे तो हजारों काले मुँह के। उनकी लम्बी पूंछों और विकराल दाँतों ने बच्चों और स्त्रियों को ही नहीं […] - [छत्तीस लाख (82)](https://bharatkaitihas.com/thirty-six-lakhs/): खानखाना ने उसी समय अपने कोश में से छत्तीस लाख रुपये कवि गंग को प्रदान किये। उस पूरे काल में संभवतः किसी और कवि को इतना बड़ा पुरस्कार नहीं मिला था। – ‘महाराज जगन्नाथ!’ खानखाना ने अपने दरबार में उपस्थित कवि जगन्नाथ को सम्बोधित करके कहा। – ‘जी हुजूर!’ – ‘तनिक इस पर पर विचार […] - [मुख देखे दुःख उपजत (83)](https://bharatkaitihas.com/unlucky-face/): भारतीय संतों को राजाओं, बादशाहों और धनपतियों से कोई काम नहीं होता था। अकबर इस बात को समझ नहीं पाया। संत कुंभनदास ने अकबर को लिखकर भिजवाया- जिनको मुख देखे दुःख उपजत तिनको करिबे परी सलाम। – ‘महाराज! बैरामखाँ को सुअन अब्दुर्रहीम महाराज के श्रीचरनन में कोटि-कोटि प्रणाम निवेदन करि रह्यौ। खानखाना ने अपना मस्तक […] - [हुमा (84)](https://bharatkaitihas.com/auspicious-bird/): अब्दुर्रहीम के दरबारी मुल्ला शकेबी ने सिंध विजय पर एक कविता पढ़ी जिसमें कहा गया था- जो हुमा आकाश में उड़ाता था, उसको तूने पकड़ा और जाल से छोड़ दिया। अब्दुर्रहीम ने मुल्ला को एक हजार अशर्फियां इनाम में दीं। जिस प्रकार बारहमूला काश्मीर का दरवाजा है और जिस प्रकार गढ़ी बंगाल का दरवाजा है […] - [हसन गंगू (85)](https://bharatkaitihas.com/hassan-gangu/): एक दिन उस ब्राह्मण ने हसन गंगू की भाग्य रेखाओं को देखकर बताया कि एक दिन तू इस प्रदेश का राजा बनेगा। उसी ब्राह्मण के निर्देश पर हसन गंगू मुहम्मद बिन तुगलक की सेना में भर्ती हो गया और शीघ्र ही वह दक्षिण भारत में दिल्ली सल्तनत का सबसे विश्वस्त आदमी बन गया। आज जिस […] - [चाँदबीबी (86)](https://bharatkaitihas.com/chaandbibi/): हब्शियों से निबटकर मियाँ मंझू ने चाँदबीबी से निबटने की योजना निर्धारित की किंतु उसी समय उसने सुना कि मुगल शहजादा मुराद और खानखाना अब्दुर्रहीम विशाल सेना लेकर अहमद नगर की ओर बढ़ रहे हैं। सोलहवीं शताब्दी के अंतिम दशक में अहमद नगर अपने सरदारों की आपसी लड़ाई से अत्यंत जर्जर हो चला था। बुरहान […] - [छोटे सरकार (87)](https://bharatkaitihas.com/junior-lords/): छोटे सरकार की सवारी निकलने वाली है। उसे देखने के लिये सैंकड़ों बाशिंदे रास्ते के दोनों ओर जमा हैं। जब सवारी निकल जाये तो लोग भी निकल जायेंगे और हम भी। बड़ी-बड़ी मूंछों और लम्बी दाढ़ियों वाले चार दैत्याकार कहार शाही पालकी को अपने मजबूत कंधों पर उठाये हुए तेजी से नगर की सड़कों पर […] - [बेर केर को संग (88)](https://bharatkaitihas.com/mismatch/): सम्पूर्ण उत्तरी भारत पर अधिकार करने के बाद ई. 1591 में अकबर ने दक्षिण भारत के अहमदनगर, खानदेश, बीजापुर, बरार और गोलकुण्डा राज्यों पर अधिकार करने की नीयत से अपने दूत इन राज्यों को भिजवाये और उनसे राजस्व की मांग की। इस पर खानदेश के सुल्तान राजा अलीखाँ ने तो अकबर की अधीनता स्वीकार कर […] - [शहजादे की पगड़ी (89)](https://bharatkaitihas.com/prestige-issue-2/): किले पर अधिकार करने में असफल रहने के बाद मुराद समझ गया कि खानखाना की शक्ति प्राप्त किये बिना अहमदनगर का किला नहीं लिया जा सकता। उसने हार कर खानखाना को बुलाया। खानखाना अपने आदमियों के साथ शहजादे की सेवा में हाजिर हुआ। मुराद ने अन्य दिनों के विपरीत बड़ी लल्लो-चप्पो के साथ खानखाना का […] - [रहस्यमय संवाद (90)](https://bharatkaitihas.com/mystical-dialog/): शहजादे की अनुमति पाकर खानखाना स्वयं मुगलों की ओर से चाँदबीबी के सम्मुख उपस्थित हुआ। इससे उसके एक साथ दो उद्देश्य पूरे हो गये। एक तो खानखाना फिर से इस अभियान के केंद्र में आ गया और दूसरा यह कि चाँदबीबी को देख पाने की उसकी साध पूरी हो गयी। वह जब से अहमदनगर की […] - [वचन भंग (91)](https://bharatkaitihas.com/breach-of-promise/): राजधानी से निकलने के बाद तीन साल बीत जाने पर भी शहजादा मुराद बादशाह अकबर को एक भी विजय की सूचना नहीं भेज पा रहा था इससे मुराद की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। जब खानखाना ने अहमदनगर की सुलताना चाँद बीबी की ओर से प्राप्त प्रस्ताव मुराद के समक्ष रखा कि यदि मुराद अहमदनगर […] - [दक्षिण से वापसी (92)](https://bharatkaitihas.com/return-from-south/): शहजादा मुराद खानखाना के नियंत्रण से छुटकारा पाना चाहता था। उसने अकबर से खानखाना की शिकायत की कि वह चांद बीबी से मिल गया है। इस शिकायत पर खानखाना की दक्षिण से वापसी हो गई। मुराद तो यही चाहता था। यह बड़ी भारी विजय थी जिसके कारण पूरा दक्खिन काँप उठा था। जीत का सेहरा […] - [उलटा पहिया (93)](https://bharatkaitihas.com/reverse-wheel/): जब खानखाना लाहौर में अकबर की सेवा में उपस्थित हुआ तो अकबर ने उसकी ड्यौढ़ी बंद करवा दी।[1]  खानखाना निरंतर शहजादे की अप्रसन्नता, सादिकखाँ की शत्रुता और अपनी बेगुनाही के बारे में तरह-तरह से अर्ज करता रहा। जब कई माह बीत गये और कोई परिणाम नहीं निकला तो एक दिन खानखाना ने अंतिम प्रयास करने […] - [खप जासी खुरसाण (94)](https://bharatkaitihas.com/khap-jaasee-khurasaan/): – ‘हुजूर! महाराणा अमरसिंह का चारण आपकी सेवा में हाजिर हुआ चाहता है।’ पहरेदार ने खानखाना को सूचना दी। – ‘उसे यहीं ले आ।’ खानखाना ने आज्ञा दी। चारण मुजरा करके चुपचाप खड़ा हो गया। खानखाना उस समय कुछ लिख रहा था। इसलिये वह मुजरा स्वीकार करके फिर से अपने काम में लग गया। खानखाना […] - [फिर से दक्षिण में (95)](https://bharatkaitihas.com/south-again/): खानखाना नहीं चाहता था कि वह फिर से दक्षिण में जावे। वह जानता था कि दक्षिण उसके लिये दो पाटों की चक्की बन चुका है। एक तरफ बादशाह है तो दूसरी तरफ चाँद। दक्षिण के मोर्चे से एक बुरी खबर आई जिसे सुनकर अकबर थर्रा उठा। दक्षिण ने बलि लेनी शुरू कर दी थी। शहजादा […] - [नकाब में चाँद (96)](https://bharatkaitihas.com/moon-in-mask/): जब खानखाना दक्षिण में पहुँचा तो दानियाल ने उसे सबसे पहले अहमदनगर पर ही घेरा डालने के आदेश दिये। शहजादे के आदेश से खानखाना ने अहमदनगर को घेर लिया। एक रात जब खानखाना अपने डेरे में बैठा हुआ कुछ लिखा-पढ़ी कर रहा था तो उनकी नजर अचानक एक काले साये पर पड़ी जो चोरी से […] - [नियति के मोहरे (97)](https://bharatkaitihas.com/toys-of-destiny/): मुगलिया राजनीति तथा दक्खिन की शिया राजनीति के बीच खानखाना तथा चांद बीबी नियति के मोहरे बन कर रह गए थे। उधर सुलताना ने और इधर खानखाना ने योजना के अनुसार जल्दी-जल्दी सियासी मोहरे इधर से उधर किये। सुलताना ने अभंगखाँ हबशी को पंद्रह हजार घुड़सवारों सहित किले से बाहर निकाल कर चित्तार की तरफ […] - [बंदूक में शराब (98)](https://bharatkaitihas.com/alcohol-in-gun/): एक तरफ चाँद के नहीं रहने से और दूसरी तरफ मुराद के मर जाने से खानखाना सभी तरह की दुविधाओं से बाहर निकल आया था और वह दक्षिण में जबर्दस्त दबाव बना रहा था। खानखाना के पुत्र एरच ने भी पिता का बहुत साथ दिया और मलिक अम्बर जैसे दुर्दांत शत्रु को वह लगातार पीटता […] - [तैमूर की समाधि (99)](https://bharatkaitihas.com/taimur-ki-samadhi/): मुराद के बाद दानियाल के मरने की खबर पाकर बादशाह का मन हर उस वस्तु से उचाट हो गया जो उसके आस-पास थी। उसके चेहरे का खुरदुरापन उसके मन में उतर आया था। वह मन की शांति प्राप्त करना चाहता था किंतु उसका कोई उपाय नहीं सूझता था। उसने मक्का जाने का निश्चय किया किंतु […] - [विद्रोही (100)](https://bharatkaitihas.com/the-rebels/): अकबर के तीन शहजादों में से दो छोटे शहजादे मुराद और दानियाल अत्यधिक शराब पीकर मर चुके थे। तीसरा तथा सबसे बड़ा शहजादा सलीम भी अत्यधिक शराब पीकर न केवल खुद मौत के कगार पर जा खड़ा हुआ था अपितु अपने बुरे दोस्तों की सोहबत में अपने बाप अकबर तथा पूरी मुगलिया सल्तनत को मौत […] - [कहर (101)](https://bharatkaitihas.com/havoc/): – ‘आसमान से कहर बरपा है जिल्ले इलाही।’ तातार गुलाम ने भय से कांपते हुए कहा। – ‘क्या है कमजात? क्यों आसमान से कहर बरपाता है? तुझे शहजादे की सेवा में भेजा था, वहाँ से भाग आया क्या?’ गुलाम की बात सुनकर अकबर को चिंता तो हुई किंतु उसने अपने स्वर को मुलायम ही बनाये […] - [सुलह (102)](https://bharatkaitihas.com/reconciliation/): अकबर की यह हालत देखकर सलीमा बेगम ने पिता-पुत्र के मध्य सुलह करवाने का विचार किया। वह अकबर से अनुमति लेकर इलाहाबाद गयी और सलीम को समझा बुझा कर आगरा ले आयी। सलीम अपने बाप की यह दुर्दशा देखकर उसके पैरों पर गिर पड़ा और अपने अपराधों के लिये पश्चाताप करने लगा। अकबर ने अबुल […] - [पहरे दर पहरे (103)](https://bharatkaitihas.com/pahare-dar-pahare/): – ‘शहजादे!’ एक फुसफुसाहट सी सलीम के कानों में पड़ी। उसने इधर-उधर देखा किंतु कोई दिखाई नहीं दिया। बाहर शाम घिर आई थी तथा कमरे में इतना कम प्रकाश था कि उसमें कुछ भी स्पष्ट देखना संभव नहीं था। – ‘इधर देखो, इधर।’ सलीम ने फिर दृष्टि घुमाई किंतु कुछ भी दिखायी नहीं दिया। – […] - [हुमायूँ की तलवार (104)](https://bharatkaitihas.com/humayuns-sword/): अभी सूरज निकलने में कुछ समय था जब सलीमा बेगम ने अपनी लौण्डी सहित बादशाह सलामत के कक्ष में प्रवेश किया। सलीमा बेगम ने अपना पूरा बदन बुर्के में छिपा रखा था किंतु उसके मुँह से कपड़ हटा हुआ था। जबकि लौण्डी के चेहरे पर कपड़ा पड़ा हुआ था। सलीमा बेगम को देखकर कच्छवाहा पहरेदार […] - [असार संसार (105)](https://bharatkaitihas.com/destitute-world/): जिस दिन अकबर सलीम के सिर पर अपनी पगड़ी रखकर एक ओर को लुढ़क गया था उसके बाद वह कभी भी नये सूरज का उजाला नहीं देख सका। वह छः दिन तक बेहोश रहा। सातवें दिन आधी रात के लगभग अकबर के प्राण पंखेरू उड़ गये। राजा मानसिंह अपने आदमियों को लेकर महल से बाहर […] - [भाग्य की विडम्बना (106)](https://bharatkaitihas.com/irony-of-fate-2/): खुसरो आगरा से निकल कर दिल्ली होते हुए लाहौर की ओर भागा। अपने बारह हजार आदमी लेकर वह सिक्खों के गुरु अर्जुनदेव की शरण में पहुँचा। अर्जुनदेव ने उसे बादशाह होने का आशीर्वाद दिया। जब यह समाचार जहाँगीर को मिला तो उसकी रूह काँप गयी। वह स्वयं सेना लेकर लाहौर गया। भैंरोंवाल[1]  के निकट पिता […] - [खानखाना की चिंता (107)](https://bharatkaitihas.com/khaanakhaana-ki-chinta/): इधर खानखाना अपने दामाद दानियाल के मर जाने तथा अपनी बेटी के शोक में डूब जाने के दोहरे कहर से जर्जर हो चला था और उधर अकबर तथा सलीम के बीच घट रहे घटनाक्रम से उसकी चिंतायें दिन दूनी और रात चौगुनी होती जाती थीं। आगरा से जिस तरह के समचार मिल रहे थे उनसे […] - [समंद और फतूह (108)](https://bharatkaitihas.com/samand-and-fatuah/): बेटी जाना की तसल्ली के लिये खानखाना ने मुकर्रब खाँ के साथ ही आगरा जाने का विचार किया। वह चाहता था कि चाहे जैसे भी हो, जाना के बेटों को लौटा लाये। खानखाना पूरी तैयारी के साथ जहाँगीर के सामने उपस्थित हुआ। वह इस अवसर को गंवाना नहीं चाहता था। उसने मोतियों के दो हार, […] - [दक्षिण में आग (109)](https://bharatkaitihas.com/fire-in-south/): खानखाना के दक्षिण से हटते ही दक्खिनियों के हौंसले बुलंद हो गये। वे एक जुट होकर खानेजहाँ लोदी में कसकर मार लगाने लगे। सल्तनत का विश्वस्त सेनापति अब्दुल्लाखाँ खानेजहाँ की सहायता के लिये भेजा गया किंतु वह हार कर गुजरात भाग आया। खाने आजम कोका भी बुरी तरह परास्त हुआ। रामदास कच्छवाहा और मानसिंह भी […] - [ऊदाराम ब्राह्मण (110)](https://bharatkaitihas.com/udaram-brahmin/): दक्षिण में इस तरह की शांति देखकर खानेजहाँ लोदी की छाती पर साँप लोट गया। वह कतई नहीं चाहता था कि बादशाह इस बात को देखे कि जिस मोर्चे पर खानेजहाँ असफल हो गया, वहाँ किसी और ने सफलता के झण्डे गाढ़ दिये। वस्तुतः मुगलिया सल्तनत की स्थापना से लेकर उसके अंत तक मुगल सेनापतियों […] - [कहर दर कहर (111)](https://bharatkaitihas.com/kahar-dar-kahar/): खानखाना ने जहाँगीर को हीरे की एक खान समर्पित की जो खानखाना के बेटे अमरूल्लाह ने खानदेश के जमींदार पनजू से छीनी थी। जहाँगीर ने अत्यंत प्रसन्न होकर खानखाना का खिताब सात हजारी मनसब और सात हजारी सवार कर दिया। ये वे क्षण थे जब जहाँगीर अपने जीवन में खानखाना पर सर्वाधिक प्रसन्न हुआ। इसके […] - [जौहर (112)](https://bharatkaitihas.com/jauhar/): पूरी मुगल सेना में हड़कम्प मचा हुआ था। जिसे देखो वही कुछ न कुछ नवीन सूचना बांटने में लगा हुआ था। जितने मुँह उतनी बातें। कोई कहता था कि खानखाना मलिक अम्बर के सामने समर्पण करने जा रहा है। कोई कहता था कि खानखाना ने जौहर करने का फैसला किया है। हालांकि जौहर हिन्दू स्त्रियों […] - [आधा सेर कबाब (113)](https://bharatkaitihas.com/aadha-ser-kabaab/): जहाँगीर ने अपने अमीरों से कहा कि मैंने अपना सारा राज्य नूरजहाँ को दे दिया है। अब मुझे क्या चाहिये? कुछ भी तो नहीं, सिवाय एक सेर शराब और आधा सेर कबाब के! किसी समय ईरान में मिर्जा गयास बेग नामक आदमी रहता था। वह था तो मिर्जाओं के वंश में से किंतु उसकी माली […] - [भेड़िये का बच्चा (114)](https://bharatkaitihas.com/bhediye-ka-bachcha/): जहाँगीर के पाँच बेटे थे- खुसरो, परवेज, खुर्रम, जहाँदार और शहरयार। खुसरो पहले ही बादशाह द्वारा आँखें फुड़वाकर मरवाया जा चुका था। अब परवेज ही सबसे बड़ा था और वही बादशाह को सबसे प्रिय था लेकिन नूरजहाँ के भाई आसफ अली की बेटी का विवाह खुर्रम के साथ हो जाने से नूरजहाँ परवेज के पक्ष […] - [दादा-पोते (115)](https://bharatkaitihas.com/daada-pote/): मुगलिया राजनीति की खूनी चौसर पर अब दादा.पोते एक-दूसरे का सिर उतारने के लिए आमने-सामने ख़ड़े थे। एक तरफ था अब्दुर्रहीम खानखाना तो दूसरी ओर उसका पोता मनूंचहर! खानखाना के समझाने पर खुर्रम ने बादशाह के पास क्षमा याचना की कई अर्जियाँ भिजवाईं किंतु बादशाह ने उन पर कोई विचार नहीं किया। जो भी वकील […] - [षड़यंत्र (116)](https://bharatkaitihas.com/conspiracy/): – ‘क्या बात है लाल मुहम्मद?’ – ‘हुजूर कहते हुए जुबान कटती है। जान बख्शी जाये तो कुछ हिम्मत करूं।’ – ‘बिना किसी डर के अपनी बात कहो, लाल मुहम्मद। तुम हमारे भरोसेमंद हो।’ शहजादे खुर्रम से आश्वासन पाकर लाल मुहम्मद ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकाली और खुर्रम की ओर बढ़ा दी। – […] - [वक्त की दगा (117)](https://bharatkaitihas.com/cheating-of-time/): जब महावतखाँ को खानखाना की कैद के समाचार मिले तो वह दूने उत्साह से भरकर खुर्रम की ओर दौड़ा। महावतखाँ को लगा कि भाग्य ने उसके लिये एक साथ दो-दो सफलतायें पाने का अवसर उपस्थित कर दिया है। खुर्रम की हालत तो उसी समय पतली हो गयी थी जब उसकी सेनाएं खुर्रम को छोड़कर परवेज […] - [उड़ावे फहीम (118)](https://bharatkaitihas.com/udaave-phaheem/): खानखाना अब पूरी तरह दो हिस्सों में बंट गया। उसका बेटा दाराबखाँ, बेटे शाहनवाजखाँ की पुत्री और दाराबखाँ के बेटे खुर्रम के पास थे और पोता मनूंचहर तथा स्वयं खानखाना परवेज के पास थे। ऐसी स्थिति में खानखाना के लिये कहीं ठौर न बची थी। जाये तो जाये कहाँ? उसने खुर्रम के निज मंत्री भीम […] - [जागत व्हैगो भोर (119)](https://bharatkaitihas.com/aagat-vhaigo-go-bhor/): जब मौत सिर पर मण्डराने लगी तो रहीम ने हँस कर कहा- करम हीन रहिमन लखो, धँसो बड़े घर चोर। चिंतत ही बड़ लाभ के, जागत व्हैगो  भोर। फहीम के गिरते ही खानखाना गिरफ्तार कर लिया गया। उसका डेरा परवेज के डेरे के पास लगाया गया। खानखाना के डेरे के बाहर सामान्य सिपाहियों और छोटे […] - [मन उचाट (120)](https://bharatkaitihas.com/mind-blowing/): खुर्रम ने दाराबखाँ को रोहतास से दक्षिण के मोर्चे पर जाने के आदेश दिये। दाराबखाँ रोहतास से निकल कर लगभग सौ कोस ही आगे गया होगा कि उसे अब्दुर्रहीम के कैदी हो जाने के समाचार मिले। अब्दुर्रहीम को दुबारा कैदी बनाये जाने पर दाराबखाँ को मुगलों से घृणा हो गयी। उसके फरिश्ते जैसे निर्दोष और […] - [शहीदी तरबूज (121)](https://bharatkaitihas.com/shaheedee-tarabooj/): अब्दुर्रहीम ने थाली पर से कपड़ा हटाया तो उसकी आँखें पथरा गयीं। अपने पौत्र दाराब खाँ का कटा हुआ सिर छाती से लगाते हुए उसने कहा – यह शहीदी तरबूज  है। खास बेल पर ही लगता है। खुर्रम का नौकर अब्दुल्लाहखाँ एक नम्बर का हरामी था। वह कई सालों से अब्दुर्रहीम से अदावत रखता था। […] - [क्षमादान (121)](https://bharatkaitihas.com/kshamaadaan/): अब्दुर्रहीम अपने शिष्य जहाँगीर के चरणों में गिरकर रोता रहा तो जहाँगीर ने उसे क्षमादान दे दिया। उसने खानखाना को फिर से पुराना ओहदा, पदवी, अख्तियार और खिलअत देकर उसका बहुत मान-सम्मान किया। तीन वर्ष लगातार भागते-भागते खुर्रम थक गया। उसका स्वास्थ्य गिर गया। उसके विश्वस्त आदमी मर गये और सेना भी छीज कर अत्यल्प […] - [रोम में पांचवाँ दिन - 21 मई 2019 (6)](https://bharatkaitihas.com/fifth-day-in-rome/): आज रोम में हमारा पांचवाँ दिन था। आज हमें सेंट एंजिलो कैसल जाना था। इस कारण आज का दिन भी बहुत से नए अनुभवों वाला होने वाला था। शरीर भारतीय समय को भूलकर इटली का समय अपनाने लगा है। हालांकि अब भी आंख एक बार तो भारतीय समय के अनुसार प्रातः पाँच बजे खुल जाती […] - [फ्लोरेंस में पहला दिन - 22 मई 2019 (7)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-florence/): फ्लोरेंस में पहला दिन हमने यूरोप की सबसे पुरानी फार्मेसी का भवन ढूंढने में बिताया। फ्लोरेंस के लोग इस फार्मेसी के बारे में बिल्कुल भूल चुके थे। अंत में एक नई उम्र की लड़की ने हमें पुरानी फार्मेसी के बारे में कुछ संकेत बताए। आज हमें फ्लोरेंस के लिए निकलना है। हमारी ट्रेन प्रातः 11.30 […] - [फ्लोरेंस में दूसरा दिन - 23 मई 2019 (8)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-florence/): हमारा फ्लोरेंस में दूसरा दिन भारत के आम चुनावों के परिणाम देखने तथा पीसा शहर की यात्रा करने में व्यतीत हुआ। संसार भर के यात्री फ्लोरेंस एवं पीसा देखने के लिए आते हैं। रात भर नींद नहीं आई। हम जब भारत से चले थे तो सत्रहवीं लोकसभा के लिए मतदान करके चले थे और आज […] - [पीसा में एक दिन (9)](https://bharatkaitihas.com/a-day-in-pisa/): फ्लोरेंस से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर पीसा नामक शहर है जहाँ झुकी हुई मीनार स्थित है। दूरबीन के आविष्कारक गैलीलियो का जन्म ई.1564 में इसी पीसा शहर में हुआ था। हम सही समय पर रेल्वे स्टेशन पहुँच गए। फ्लोरेंस से प्रत्येक आधे घण्टे में पीसा के लिए ट्रेन है। यहाँ कई हॉल थे […] - [फ्लोरेंस में तीसरा दिन - 24 मई 2019 (10)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-florence/): आज फ्लोरेंस शहर देखने का कार्यक्रम बनाया था जिसे स्थानीय भाषा में फिरेंजे कहते हैं। किसी भी शहर के भीतरी भाग को देखना हो तो सबसे बढ़िया माध्यम पैदल चलना ही हो सकता है। आंख खुली तो देखा पाँच बज रहे हैं। यह कमाल ही था कि शरीर की जैविक घड़ी में भी अब भारत […] - [वेनेजिया में पहला दिन - 25 मई 2019 (11)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-venzia/): वेनेजिया में पहला दिन हमें अब तक विदेश यात्राओं में हुए अनुभवों से पूरी तरह अलग अनुभव देने वाला रहा। समझ में नहीं आता कि यह कैसा शहर है। शहरों में से नदी या नहरें गुजरती हुई तो हमने देखी थीं किंतु यह शहर समुद्री नदियों एवं नहरों के बीच से होकर गुजरता हुआ प्रतीत […] - [वेनेजिया में दूसरा दिन - 26 मई 2019 (12)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-venezia/): वेनेजिया में दूसरा दिन लगभग 90 साल की एक वृद्ध इटैलियन महिला से दीपा की हैलो के साथ आरम्भ हुआ जो एक विशाल बहुमंजिला भवन के किसी फ्लोर पर अकेली रहती थी। हैलो दीपा! सुबह पाँच बजे आंख खुल गई। मधु ने चाय बनाई। इस चाय के कारण ऐसा लगता ही नहीं है कि हम […] - [वेनेजिया में तीसरा दिन - 27 मई 2019 (13)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-venezia/): वेनेजिया में तीसरा दिन बरसात की भेंट चढ़ गया। दिन निकलने के साथ ही बरसात आरम्भ हो गई थी, इसलिए कहीं दूर आना-जान संभव नहीं था। इसलिए हमने शहर में ही एक छोटा सा चक्कर लगाने का निश्चय किया। प्रातः 4 बजे आंख खुल गई। लगभग पूरी रात बरसात होती रही इसलिए सुबह तक ठण्ड […] - [इटली में अंतिम दिन - 28 मई 2019 (14)](https://bharatkaitihas.com/last-day-in-italy/): आज हमारा इटली में अंतिम दिन था। इस दिन की शुरुआत रास्ते के लिए खाना बनाने से आरम्भ हुई। इस दिन का दूसरा बड़ा काम कचरा फैंकने के लिए स्थान ढूंढना रहा। कचरा फैंकने की मशक्कत सुबह 4.30 बजे उठकर निकलने की तैयारियां कीं। मधु एवं भानु ने रात में ही पूड़ियां बना ली थीं। […] - [लेखकीय - रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/preface-of-history-of-roman-empire/): लेखकीय – रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण पृष्ठ पर लेखकर डॉ. मोहनलाल गुप्ता की कलम से पुस्तक रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण की प्रस्तावना लिखी गई है। आदमी द्वारा किए गए आविष्कारों और खोजों की सूची आग और पहिए से आरम्भ होती है। इस सूची में घोड़े की पीठ […] - [इटली यूरोप का भारत (1)](https://bharatkaitihas.com/italy-the-india-of-europe/): कई मायनों में इटली यूरोप का भारत है। कई मायनों में इटली यूरोप का भारत है। इस बात को वहाँ जाकर ही समझा जा सकता है। इटली के लोगों की कद-काठी, बालों का रंग, चेहरा-मोहरा भारत के पंजाब प्रांत के लोगों से मिलता है न कि शेष यूरोपवासियों से। इटली को ‘यूरोप का भारत’ कहा […] - [रिपब्बलिका इटेलियाना (2)](https://bharatkaitihas.com/repubblica-italiana/): इटली की मूल भाषा लैटिन तथा वर्तमान राजभाषा ‘इटेलियन’ में इस देश का मूल नाम रिपब्बलिका इटेलियाना है। अंग्रेजी भाषा में इसे ‘इटली’ कहा जाता है। 35 से 47 डिग्री उत्तरी अक्षांशों एवं 6 से 19 डिग्री पूर्वी देशांतरों के बीच, यूरोप महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित इटालियन प्रायद्वीप, ई.1861 से एक देश के […] - [रोमन् सभ्यता की स्थापना एवं विस्तार (3)](https://bharatkaitihas.com/establishment-and-expansion-of-roman-civilization/): रोमन् सभ्यता की स्थापना का उद्भव तथा रोमन सभ्यता की स्थापना दो अलग-अलग विषय हैं। इस क्षेत्र में मानवों का अधिवास अत्यंत प्राचीन काल से था किंतु रोमन् सभ्यता की स्थापना उसके बहुत बाद में हुई तथा माना जाता है कि रोमन् सभ्यता की स्थापना भारत से गए आर्यों के किसी दल ने की जो […] - [रोम का प्राचीन धर्म (4)](https://bharatkaitihas.com/ancient-religion-of-rome/): रोम का प्राचीन धर्म भारत के वैदिक धर्म पर ही आधारित है। इस कारण रोमन देवी-देवताओं के नाम वैदिक देवी-देवताओं से समानता रखते हैं। भारोपीय (हिन्द-यूरोपीय) धर्म भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में यूरोप की सभ्यता एवं संस्कृति हजारों साल बाद की है। भारत में ऋग्वेद की रचना का काल यद्यपि पश्चिमी इतिहासकारों ने […] - [पाइथोगोरियन ब्रदरहुड](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-the-pythagorean-brotherhood-in-italy/): पाइथोगोरस यूरोपीय इतिहास का प्रथम ऋषि है जिसके बारे में लिखित प्रमाण मिलते हैं। पाइथोगोरस ने पाईथोगोरियनवाद नामक वैचारिक आन्दोलन की स्थापना की जिसे उस काल का धार्मिक मत भी कहा जा सकता है। उसके जीवन काल में उसे रहस्यवादी दार्शनिक माना जाता था। - [महान् रोमन गणराज्य](https://bharatkaitihas.com/great-roman-republic/): 6. महान् रोमन गणराज्य रोम की स्थापना के लगभग बाद पाँच सौ सालों तक रोम में राजा का राज्य चलता रहा किंतु ई.पू. 509 में रोमन गणराज्य की स्थापना हुई। यह एक विचित्र प्रकार का गणराज्य था जिस पर जमींदार वर्ग के कुछ धनी कुटुम्बों का वर्चस्व था। उन्हें सम्मिलित रूप से ‘सीनेट’ कहते थे। […] - [रोमनगणराज्य का नैतिक पतन (7)](https://bharatkaitihas.com/moral-decline-of-roman-republic/): रोमनगणराज्य का पतन होने से पहले रोमनगणराज्य का नैतिक पतन हुआ। इस कारण रोम की जनता रोमनगणराज्य से घृणा करने लगी। यह कैसा गणराज्य था जिसमें न तो गण की सुरक्षा थी और न राज की। रोमवासियों का गणराज्य से मोहभंग कार्थेज के पतन के बाद पराजित देशों से गुलाम पकड़ने का काम तेज हो […] - [जूलियस सीजर एवं क्लियोपैट्रा (8)](https://bharatkaitihas.com/julius-caesar-and-cleopatra/): जब तक जूलियस सीजर मिस्र पहुँचकर पॉम्पी को घेर पाता, मिस्र के राजा टॉलेमी (तेरहवें) ने पॉम्पी को पकड़कर उसकी हत्या कर दी। इससे पहले कि जूलियस सीजर मिस्र से वापस रोम लौटता, रानी क्लियोपैट्रा ने सीजर से गुप्त-स्थान पर भेंट करने की प्रार्थना भिजवाई। - [महान् रोमन साम्राज्य का उदय (9)](https://bharatkaitihas.com/the-rise-of-the-great-roman-empire/): जब रोमनगणराज्य का नैतिक पतन हो गया और रोमनगणराज्य बिखरने लगा तब महान् रोमन साम्राज्य की स्थापना का मार्ग स्वतः ही प्रशस्त होता चला गया। पूरी दुनिया राजतंत्र से गणतंत्र की ओर जाती है किंतु रोम के लोग गणतंत्र से तंग आकर राजतंत्र की ओर अग्रसर हुए। प्रिन्सेप्स ऑगस्टस ऑक्टेवियन सीजर जूलियस सीजर की हत्या […] - [ईसा मसीह को सूली (10)](https://bharatkaitihas.com/crucifix/): जेरूसलम और रोमन साम्राज्य में ईसा मसीह को सूली उस समय इतनी महत्त्वहीन थी कि रोमवासियों को तो कुछ पता ही नहीं चला कि उनके साम्राज्य के एक गवर्नर ने ‘प्रभु के पुत्र’ को सूली पर चढ़ाया है। यहाँ तक कि जेरूसलम में भी कोई हलचल नहीं हुई। ईसा मसीह का जन्म ईस्वी 4 में […] - [महान् रोमन शासक (11)](https://bharatkaitihas.com/ruler-of-great-roman-empire/): जिन राजाओं, राजकुमारों, रानियों एवं राजकुमारियों को महान् रोमन शासक कहा जाता है, वे वास्तव में कितने महान् थे, इसका विवरण तत्कालीन इतिहास की पुस्तकों से मिलता है। उनमें अधिकांश अपने ही वंश के रक्त के प्यासे, हत्यारे, लालची एवं बहुत छोटे दिमागों वाले मनुष्य थे किंतु उनकी कथाओं को इतना बढ़ा-चढ़ाकर लिख गया कि […] - [दो ऑगस्टस तथा दो सीजर (12)](https://bharatkaitihas.com/two-augustus-and-two-caesars/): डियोक्लेटियन ने ‘चार राजाओं के शासन’ का सिद्धांत बनाया जिसके तहत दो ऑगस्टस तथा दो सीजर की नियुक्ति की गई। सम्राट डियोक्लेटियन ने स्वयं को ऑगस्टस की उपाधि दी तथा ई.286 में अपने पुराने एवं विश्वस्त सैनिक साथी मैक्सीमियन को अपने अधीन सह-सम्राट (दूसरा ऑगस्टस) नियुक्त किया। नवम्बर 284 से अप्रेल 305 तक डियोक्लेटियन रोम […] - [ईसाइयों को प्राणदण्ड (13)](https://bharatkaitihas.com/death-to-christians-in-roman-empire/): रोमन लोग ईसाइयों को झगड़ालू और संकीर्ण मनोवृत्ति वाला समझने लगे। सम्राट की मूर्ति के समक्ष सिर नहीं झुकाना राजद्रोह समझा गया तथा इसके लिए बहुत से ईसाइयों को प्राणदण्ड दिया गया। ईसाई लोग मनोरंजन के उद्देश्य से होने वाली पशुओं और मनुष्यों की लड़ाइयों का भी विरोध करते थे। यीशू के भयग्रस्त अनुयायियों ने […] - [रोमन साम्राज्य का विभाजन (14)](https://bharatkaitihas.com/partition-of-great-roman-empire/): चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत तक पूर्वी रोमन साम्राज्य के सम्राट द्वारा पश्चिमी रोमन साम्राज्य के शासक को सह.शासक के रूप में नियुक्त किया जाता था किंतु पश्चिमी साम्राज्य पर पूर्वी सम्राट का नियंत्रण नाम मात्र का ही था। धीरे-धीरे रोमन साम्राज्य का विभाजन हो गया। ई.305 में कॉन्स्टेंटीन (प्रथम) रोम का शासक हुआ। उसे […] - [पश्चिमी रोमन साम्राज्य (15)](https://bharatkaitihas.com/western-roman-empire/): ई.379 से ई.392 तक पश्चिमी रोमन साम्राज्य में वेलेण्टाइन (द्वितीय) तथा मैग्नस मैक्सीमस नामक दो शासक अस्तित्व में थे, इन्होंने साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों पर अपनी सत्ता बनाए रखी। वेलेण्टाइन राजवंश ई.364 से 392 तक पश्चिमी रोमन साम्राज्य में वेलेण्टाइन राजवंश की सत्ता रही जिसकी राजधानी रोम थी। जूलियन की मृत्यु के बाद ई.364 में […] - [पूर्वी रोमन साम्राज्य (16)](https://bharatkaitihas.com/eastern-roman-empire/): चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में रोमन साम्राज्य दो भागों में बँट गया! पश्चिमी रोमन साम्राज्य की राजधानी रोम थी और पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया थी। जब सम्राट कॉन्स्टेन्टीन अपनी राजधानी रोम से बिजैन्तिया ले आया तब उसकी माँ ने फिलीस्तीन की राजधानी जेरूसलम में ईसा की समाधि के पास एक बड़ा चर्च […] - [ईसाई धर्म का अंतर्द्वन्द्व (17)](https://bharatkaitihas.com/internal-fight-in-christianity/): ईसाई धर्म का अंतर्द्वन्द्व अपने आप में एक लम्बा इतिहास लिए हुए है। इसी अंतर्द्वन्द्व के कारण ईसाई धर्म को अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता कि ईसाई धर्म का इतिहास रक्त रंजित है। ईसाई धर्म अपने जन्म के साथ ही अंतर्द्वन्द्वों में फंसा हुआ था। […] - [पोप का प्राकट्य एवं उसका शक्ति विस्तार (18)](https://bharatkaitihas.com/popes-presence-and-expansion-of-his-power/): रोम का सेंट पीटर्स लातीनी चर्च आगे चलकर कैथोलिक चर्च के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस चर्च का बिशप लातीनी सम्प्रदाय का प्रमुख माना गया। बाद में बिशप रोम का पोप कहलाने लगा। पोप का अर्थ पापा अर्थात् पिता से था। इस प्रकार रोम में पोप का प्राकट्य हुआ। ईसाई धर्म के विभिन्न सम्प्रदाय ईसा […] - [रोमन साम्राज्य का अंत (19)](https://bharatkaitihas.com/sad-end-of-great-roman-empire/): महान् रोमन साम्राज्य का अंत बड़ा दुःखद था। ईसाई धर्म ने उस प्राचीन रोमन धर्म को कुचल कर नष्ट कर दिया था जिस प्राचीन रोमन धर्म की पृष्ठभूमि में महान् रोमन साम्राज्य का जन्म हुआ था। रोमुलस ऑगुस्टस द्वारा पश्चिमी साम्राज्य का विभाजन ई.474 में कुस्तुंतुनिया के सम्राट लिओ (प्रथम) ने जूलियस नीपो को रोमन […] - [द्वितीय रोमन साम्राज्य (20)](https://bharatkaitihas.com/second-edition-of-the-great-roman-empire/): फ्रैंक कबीले ने ऑस्ट्रोगोथों को रोम से बाहर निकला दिया। पोप ने फ्रैंक सरदार क्लोविस को रोम का शासक स्वीकार कर लिया। इसी के साथ रोम में द्वितीय रोमन साम्राज्य की स्थापना हो गई। इटली का बिखराव ई.493 में पूर्वी रोमन साम्राज्य के सम्राट जेनो के आदेश से उसके सामंत  थियोडोरिक ने इटली पर आक्रमण […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य का प्रथम संस्करण (21)](https://bharatkaitihas.com/first-edition-of-holy-roman-empire/): पच्चीस दिसम्बर 800 के दिन सेंट पीटर्स बेसिलिका में फ्रैंक राजा शार्लमैन का पापल कोरोनेशन किया गया अर्थात् उसे पवित्र रोमन ताज पहनाया गया तथा उसे ऑगस्टस ऑफ रोमन्स की उपाधि दी गई। इसके साथ ही रोम में  पवित्र रोमन साम्राज्य की स्थापना हो गई। फ्रैंक राजा शार्लमैन द्वारा पोप का अपमान ई.772 में पोप […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय संस्करण (22)](https://bharatkaitihas.com/second-edition-of-holy-roman-empire/): पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय संस्करण केन्द्रीय यूरोप का एक बहुजातीय जटिल राजनैतिक संघ था जो ई.962 से ई.1806 तक अस्तित्व में रहा जब तक कि नेपोलियन बोनापार्ट ने इसे समाप्त नहीं कर दिया। यह राज्य मध्य-युग में मध्य-यूरोप का हिस्सा था। ई.955 में पोप जॉन (बारहवां) रोम के कैथोलिक चर्च का पोप हुआ। वह रोम […] - [गिरजाघरों की गॉथिक शैली का विकास (23)](https://bharatkaitihas.com/development-of-the-gothic-style-of-churches/): ईसा की ग्यारहवीं-बारहवीं सदी में पश्चिमी यूरोप में गिरजाघर निर्माण की एक नई शैली का विकास हुआ जिसे गिरजाघरों की गॉथिक शैली कहते हैं। इस शैली में गिरजाघरों का आकार बहुत बड़ा रखा जाता है। इसमें बड़ी एवं भारी छतों का भार, मुख्य भवन के बाहर बने पैनल्स पर टिकाया  जाता है। मुख्य भवन के […] - [वेनिस शहर की दुविधा (24)](https://bharatkaitihas.com/dilemma-of-venice-city/): उत्तरी इटली में स्थित वेनिस शहर की बसावट का इतिहास बहुत रोचक है तथा सामुद्रिक व्यापार से लेकर सामरिक महत्ता की दृष्टि से यह संसार के अन्य शहरों से बिल्कुल भिन्न है। यह दलदल पर बसा हुआ शहर है। इसे वेनेजिया भी कहते हैं। छठी शताब्दी ईस्वी में जब अतिला हूण आग लगाता हुआ और […] - [हिलाल के खिलाफ क्रॉस का क्रूसेड (25)](https://bharatkaitihas.com/crusade-of-the-cross-against-hilal/): मुसलमानों से लड़ने के लिए पोप के द्वारा दिए गए निर्णय को आलंकारिक भाषा में हिलाल (मुसलमानों का धार्मिक चिह्न- दूज का चांद) के खिलाफ क्रॉस (ईसाइयों का धार्मिक चिह्न- सूली) का क्रूसेड (धर्मयुद्ध) कहा गया। येरूशलम येरुशलम को हिब्रू में जेरूशलम तथा अरबी में अल-कुद्स कहा जाता है। यह संसार के सबसे प्राचीन नगरों […] - [पोप एवं रोमन सम्राट में टकराव का चरम (26)](https://bharatkaitihas.com/extreme-conflict-between-pope-and-holy-roman-emperor/): पोप एवं रोमन सम्राट में टकराव सत्ता में अधिकारों को लेकर आरम्भ हुआ और जब दोनों में शक्ति संतुलन स्थापित नहीं हो सका तो यह टकराव चरम पर पहुंच गया। फ्रेडरिक लालमुँहा बारहवीं एवं तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में रोमन साम्राज्य की बागडोर ‘होहेन्तॉफेन’ नामक ईसाई राजवंश के हाथों में रही। होहेन्तॉफेन जर्मनी का एक छोटा […] - [इनक्विजिशन की स्थापना (27)](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-inquisition-by-christian-association/): कैथोलिक चर्च के इतिहास में इनक्विजिशन का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इनक्विजिशन का अर्थ है जाँच-पड़ताल। यह एक तरह का न्यायाधिकरण है जिसकी स्थापना कैथोलिक धर्म के सिद्धान्तों से भटकने वाले व्यक्तियों का पता लगाकर उन्हें दण्ड दिलवाने के लिए सरकार को सौंपने के उद्देश्य से हुई थी। कैथोलिक धर्म के अधिकारी अपने धार्मिक विश्वासों […] - [पोप की प्रतिष्ठा को धक्का (28)](https://bharatkaitihas.com/decline-of-popes-reputation/): ई.1377 तक पोपों को फ्रांस के सम्राट के अंगूठे के अधीन रहना पड़ा। इससे पोप की प्रतिष्ठा को बड़ा धक्का लगा। कनौजा में पोप से मिलने के लिए सम्राट को घण्टों बर्फ में नंगे-पैर खड़े रहने की सजा अब इतिहास का पन्ना बनकर रह गई थी। पोप के शयनागार में फ्रांसीसी सम्राट का दूत जब […] - [पूर्वी रोमनसाम्राज्य का अंत (29)](https://bharatkaitihas.com/end-of-eastern-roman-empire/): ई.1453 में उस्मानिया तुर्कों अर्थात् ओट्टोमन तुर्कों ने पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया को घेर लिया और कुस्तुंतुनिया के शासक कॉन्स्टेन्टीन ग्यारहवें को मार दिया। इस प्रकार पूर्वी रोमनसाम्राज्य का अंत हुआ। हमें पूर्वी रोमन साम्राज्य का इतिहास बीच में ही छोड़ना पड़ा था किंतु यहाँ उसकी चर्चा फिर से करनी होगी। पूर्वी रोमन […] - [रिनेंसाँ नामक युग का प्रारम्भ (30)](https://bharatkaitihas.com/beginning-of-the-era-of-rinensa-in-italy/): पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी पर ईसाइयों का शासन समाप्त होने के साथ ही यूरोप के इतिहास में मध्य.युग की समाप्ति होती है तथा यूरोप मानो गहरी नींद से जागता है। उसे अपने पतन का अहसास होता है और वह अपने अस्तित्व को बचाने लिए अपने पुनरुत्थान के लिए प्रयास करता है। यूरोप के इतिहास […] - [धर्म एवं विज्ञान में संघर्ष (31)](https://bharatkaitihas.com/conflict-between-religion-and-science/): धर्म एवं विज्ञान एक दूसरे के पूरक हैं। भारत में तो धर्म को ही विज्ञान कहा जाता है तथा माना जाता है कि जब मनुष्य को आत्मा और परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हो जाता है तो उसे मोक्ष मिल जाता है किंतु ईसाइयत में धर्म एवं विज्ञान को एक दूसरे के शत्रु के […] - [कैथोलिक धर्म से अलग सम्प्रदायों का उदय (32)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-different-sects-from-christianity/): ईसाइयत में कैथोलिक धर्म ही अकेला पंथ या सम्प्रदाय नहीं है। कैथोलिक धर्म से अलग भी बहुत से सम्प्रदाय हैं। ये पंथ एवं सम्प्रदाय भी ईसाई धर्म के अंतर्गत हैं किंतु कैथोलिक मान्यताओं से अलग मान्यताएं रखते हैं। मार्टिन लूथर का आंदोलन धर्म एवं विज्ञान के बीच हुए संघर्ष में वैज्ञानिकों पर किए गए अत्याचारों […] - [यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण (33)](https://bharatkaitihas.com/discrimination-and-exploitation-in-european-society/): यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण का सिलसिला आदि काल से है। संसार में यूरोप के लोगों को सर्वाधिक सुसभ्य माना जाता है किंतु यह बात सही नहीं है। आज भी यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण संसार की अन्य सभ्यताओं की तुलना में अधिक हैं। धर्म के नाम पर अत्याचारों का सिलसिला ईसाई धर्म […] - [यूरोप में लोकतांत्रिक विचार (34)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-democratic-ideas-in-europe/): छोटे-छोटे बर्बर कबीलों में बंटा हुआ यूरोप छोटे-छोटे देशों में बदल गया। इस कारण यूरोप में लोकतांत्रिक विचार का जन्म लेना और विकसित होना एक अत्यंत कठिन कार्य था। भाप के इंजन का आविष्कार अठारहवीं शताब्दी के आरम्भ में ई.1712 में इंग्लैण्ड में भाप के ऐसे इंजन का आविष्कार हो गया जो तरह-तरह की मशीनें […] - [यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (35)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-nationalism-in-europe/): यूरोप की धरती पर विभिन्न भाषाओं, रीति-रिवाजों एवं परम्पराओं को मानने वाले लोग रहते थे। ये लोग अपने कबीले को ही अपना देश मानते थे। धीरे-धीरे यूरोप के लोगों ने अपनी कबीलाई पहचाहन को अपने राष्ट्र के रूप में देखना आरम्भ किया। इसी को यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय कहा जाता है। अठारहवीं सदी में […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय का अन्त (36)](https://bharatkaitihas.com/end-of-second-edition-of-holy-roman-empire/): जिस प्रकार पवित्र रोमन साम्राज्य प्रथम का अन्त हुआ था, उसी प्रकार पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय का अन्त भी बड़ा दुखद था। मुसलमानों के छोटे से धक्के से वह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। नेपालियन का विजय अभियान अठारहवीं शताब्दी के अंत में इटली में छोटे-छोटे राजा राज्य किया करते थे। इनमें से […] - [इटली का एकीकरण (37)](https://bharatkaitihas.com/integration-of-italy/): विभिन्न समुद्री द्वीपों और कबीलाई संस्कृतियों से बने इटली का एकीकरण एक कठिन प्रक्रिया थी। छोटे-छोटे इलाकों के राजा अपने अधिकारों को छोड़कर किसी एक बड़े देश में शामिल होने को तैयार नहीं थे। इटली का एकीकरण रीसॉर्जीमेंटो कहलाता है। वियना कांग्रेस में इटली का बंटवारा नेपोलियन बोनापार्ट को बंदी बनाए जाने के बाद सितंबर […] - [बैनितो मुसोलिनी - फासिज्म का नायक (38)](https://bharatkaitihas.com/fascisms-hero-banito-mussolini/): इटली में कारखाने के मालिकों ने देश में चल रही कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं को अपने पक्ष में किया तथा उन्हें मजदूरों एवं समाजवादी नेताओं के विरुद्ध खड़ा कर दिया। इन संगठनों में बैनितो मुसोलिनी का ई.1910 से चल रहा संगठन प्रमुख था। प्रथम विश्वयुद्ध आरम्भ होने से पहले ही इटली भयानक आर्थिक संकट में फंसा […] - [फासीवाद और नाजीवाद (39)](https://bharatkaitihas.com/fasci-nazi-bhai-bhai/): फासीवाद और नाजीवाद दोनों अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं थीं किंतु राजनीतिक स्वार्थों के चलते दोनों ने हाथ मिला लिया तथा इटली की सड़कों पर फासी-नाजी भाई-भाई के नारे लगने लगे। फासीवाद और नाजीवाद में समानता जिस समय रूस में बोल्शेविक क्रांति की सफलता के बाद साम्यवादी राज्य की स्थापना हो रही थी तथा एक नए समाज […] - [इटली में गणराज्य की स्थापना (40)](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-modern-republic-in-italy/): वर्ष 1946 में इटली में इटली में गणराज्य की स्थापना हुई। यह वह समय था जब द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूरी दुनिया में अधिकांश देशों के नक्शे बदल रहे थे और नई सरकारों की स्थापना हो रही थी। गणतन्त्र शासन की स्थापना 2 जून 1946 को इटली में आम-चुनाव हुए जिनमें देश की जनता ने […] - [रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास (41)](https://bharatkaitihas.com/history-of-the-roman-catholic-church/): रोमन कैथोलिक चर्च का आशय किसी एक विशिष्ट भवन से न होकर विश्व-व्यापी संस्था से है। यह विश्व का सबसे बड़ा ईसाई चर्च है। इस चर्च के सदस्यों की संख्या एक सौ करोड़ से अधिक है। उनके नेता पोप हैं जो विश्व भर में फैले हुए ईसाई धर्माध्यक्षों अर्थात् पादरियों, बिशपों एवं कार्डिनलों के समुदाय […] - [कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं (42)](https://bharatkaitihas.com/major-doctrines-and-teachings-of-the-roman-catholic-church/): कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं उन्हीं मूलभूत अवयवों से निर्मित हैं जिन तत्वों से धर्म नामक सार्वभौमिक तत्व का निर्माण होता है। फिर भी कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं दुनिया भर के मजहबों, पंथों, सम्प्रदायों से स्वयं को अलग दिखाने का प्रयास करते हैं। कुछ सीमा तक यह पृथकता एक वास्तविकता भी है। […] - [पोप (43)](https://bharatkaitihas.com/the-pope-of-rome/): रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म-गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं। ‘पोप’ का शाब्दिक अर्थ ‘पिता’ होता है। यह लैटिन भाषा के ‘पापा’ (papa) शब्द से बना है जो स्वयं ग्रीक भाषा के ‘पापास्’ (pápas) शब्द से व्युत्पन्न है। उन्हें संत पापा (पिता) तथा ‘होली फादर’ भी कहते हैं। […] - [हिन्दू धर्म-साहित्य का अद्भुत कथा-संसार (1)](https://bharatkaitihas.com/wonderful-stories-of-hindu-religious-literature/): हिन्दू धर्म-साहित्य अत्यंत विशाल है। विश्व में अन्य किसी धर्म का इतना विपुल साहित्य उपलब्ध नहीं है। हिन्दू धर्म-साहित्य का अद्भुत कथा-संसार इतना रोचक, ज्ञानवर्द्धक और आत्मा के लिए कल्याणकारी है, जिसे शब्दों में वर्णित करना कठिन है। धर्म का अर्थ है धारण करना। जो मनुष्य उत्तम विचार, उत्तम दर्शन और उत्तम आचरण को धारण […] - [मधु-कैटभ के वध की कथा पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी है (2)](https://bharatkaitihas.com/story-of-the-slaughter-of-madhu-catabh-is-related-to-the-origin-of-the-earth/): मधु-कैटभ के वध की कथा पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी है वेदों में हिरण्यगर्भ से सौरमण्डल के उत्पन्न होने की कथा मिलती है। हिरण्यगर्भ को पुराणों में डिम्ब या अण्ड भी कहा गया है जिससे सौर मण्डल की उत्पत्ति हुई जिसमें सूर्य तथा उसके नौ ग्रहों के अस्तित्व में आने का उल्लेख है। इस कथा […] - [जल-प्लावन से जुड़ी हैं मत्स्यावतार, कूर्मावतार एवं वराह अवतार की कथाएं (3)](https://bharatkaitihas.com/stories-of-matsyavatar-kurmaavatar-varaha-avatar-are-associated-with-water-planks/): अत्यंत प्राचीन काल में धरती पर आए जल-प्लावन की कथाएं विश्व के प्रत्येक भूभाग की प्राचीन संस्कृतियों में मिलती हैं। इन कथाओं के अनुसार पृथ्वी का अधिकांश भूभाग इस जल-प्लावन में डूब गया था जिसके कारण प्राणियों की सृष्टि बड़ी कठिनाई से जीवित बची थी। भगवान श्री हरि विष्णु के तीन प्रथम अवतारों मत्स्यावतार, कूर्मअवतार […] - [मत्स्यावतार की कथा महा जल-प्लावन एवं जीवों के क्रमिक विकास से जुड़ी है (4)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): भगवान श्री हरि विष्णु के मत्स्यावतार की कथा वाल्मीकि रामायण, महाभारत, मत्स्य पुराण, हरिवंश पुराण आदि विविध ग्रंथों में मिलती है। यह कथा प्रकृति में दो हिमकालों के बीच होने वाले जलप्लावन एवं तत्पश्चात् आने वाले ऊष्णकाल के आगमन की घटना को दर्शाती है तथा भगवान द्वारा सृष्टि एवं ज्ञान की रक्षा के लिए अवतार […] - [कूर्मावतार की कथा मानव सृष्टि को वैभव प्रदान करने से जुड़ी है (5)](https://bharatkaitihas.com/story-of-kurmavatar-is-associated-with-providing-glory-to-the-human-creation/): कूर्मावतार की कथा सृष्टि का आरम्भ होने की घटना से जुड़ी हुई है। पुराणों के अनुसार प्रजापति ने सन्तति प्रजनन के अभिप्राय से कूर्म का रूप धारण किया। शतपथ ब्राह्मण, महाभारत के आदि पर्व तथा पद्मपुराण के उत्तरखंड में उल्लेख है कि संतति प्रजनन हेतु प्रजापति, कच्छप का रूप धारण करके पानी में संचरण करता […] - [मोहिनी अवतार की कथा सृष्टि को पुनः वैभव प्रदान करने से जुड़ी है (6)](https://bharatkaitihas.com/story-of-mohini-avatar-is-associated-with-giving-glory-to-world-again/): मोहिनी अवतार धारी भगवान श्रीहरि ने देवताओं को अमृत तथा राक्षसों को वारुणि पिलाना आरम्भ कर दिया। राक्षस उस वारुणि को पीकर मदमत्त होने लगे। ‘राहू’ नामक एक राक्षस को भगवान के मोहिनी अवतार की इस चालाकी का पता चल गया। हमने पिछली कड़ी में समुद्र मंथन के दौरान हुए भगवान श्री हरि विष्णु के […] - [नील वाराह की अवतार कथा किसी प्राचीन हिमयुग की समाप्ति से जुड़ी है (07)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9/): ब्रह्माजी ने चिंतित होकर, जल में निवास करने वाले श्रीहरि विष्णु का स्मरण किया और फिर भगवान श्रीहरि विष्णु ने नील वाराह के रूप में प्रकट होकर धरती के कुछ भागों को जल से मुक्त किया। हमारे सौर मण्डल के समस्त ग्रह सूर्य से टूटकर अलग हुए हैं जिनमें से पृथ्वी भी एक है। आज […] - [हिरण्याक्ष की कथा धरती के समुद्र में डूब जाने की द्योतक है (8)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): जय और विजय बैकुण्ठ से गिर कर दिति के गर्भ में आ गए। कुछ काल के पश्चात् दिति के गर्भ से दो पुत्र उत्पन्न हुये जिनके नाम प्रजापति कश्यप ने हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु रखे। पिछली कड़ी में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के नील वाराह के अवतार की चर्चा की थी। इस कड़ी में हम […] - [आदिवाराह अवतार की कथा](https://bharatkaitihas.com/lord-shri-hari-took-incarnation-of-adi-varaha-and-saved-the-earth/): सृष्टि आरम्भ करने के लिए भूमि की आवश्यकता थी किंतु इस समय हिरण्याक्ष नामक दैत्य धरती को सागर के भीतर ले जाकर भू-देवी को अपना तकिया बना कर सोया हुआ था। हिरण्याक्ष ने अपने चारों ओर विष्ठा का घेरा बना रखा था ताकि देवता हिरण्याक्ष के निकट नहीं आएं। - [वाराह अवतार से जुड़ी हुई है दक्षिण भारत की वराह जाति (10)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0/): पिछली कुछ कड़ियों में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के नील वाराह एवं आदि वाराह के अवतारों की चर्चा की थी। इस कड़ी में हम नील वाराह वाराह अवतार, आदि वाराह अवतार तथा श्वेत वाराह वाराह अवतार के दक्षिण भारत की कुछ वनवासी जातियों से सम्बन्ध की चर्चा करेंगे। वाराह कल्प के 3 खण्ड हैं- […] - [नृसिंह अवतार की कथा (11)](https://bharatkaitihas.com/to-protect-the-devotee-prahlada-god-took-narsingh-avatar/): पिछली कड़ियों में चर्चा की थी कि सनकादि ऋषि के श्राप से भगवान विष्णु के जय एवं विजय नामक दो गण, दैत्य बनकर कश्यप ऋषि की पत्नी दिति के गर्भ से धरती पर आए। इनमें से दैत्यों के राजा हिरण्याक्ष के वध हेतु भगवान श्री हरि विष्णु के वाराह अवतार की कथा हम बता चुके […] - [वामन अवतार की कथा (12)](https://bharatkaitihas.com/vishnu-took-vamana-avatar-to-free-the-earth-and-heaven-from-demons/): इस धारावाहिक की पिछली कड़ियों में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के चार अवतारों- मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराह अवतार एवं नृसिंह अवतार की चर्चा की है। ये सभी अवतार मनुष्येतर रूप में अर्थात् जलचर, उभयचर एवं थलचर जीवों के रूप में थे जबकि इस कड़ी में हम भगवान श्री हरि के वामन अवतार की चर्चा कर […] - [प्रजापति कश्यप की कथा (13)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa/): हिन्दू धर्मग्रंथों में आए संदर्भों के अनुसार प्रजापति ब्रह्मा के पुत्र मरीचि हुए। मरीचि के पुत्र प्रजापति कश्यप हुए। प्रजापति कश्यप ने प्रजापति दक्ष की 17 पुत्रियों से विवाह किया। इनमें दिति और अदिति भी थीं। इस कड़ी में हम प्रजापति कश्यप तथा उनकी पत्नियों दिति एवं अदिति की चर्चा करेंगे। प्राचीन धर्म-ग्रंथों में प्रजापति […] - [दिति ने इन्द्रहंता पुत्र की प्राप्ति के लिए पति को प्रसन्न किया (14)](https://bharatkaitihas.com/diti-pleases-husband-to-get-indrahanta-son/): पिछली कड़ी में हमने देवमाता अदिति की कथा पर चर्चा की थी। इस कड़ी में हम दैत्यों की माता दिति की चर्चा करेंगे। अदिति की भांति दिति भी प्रजापति दक्ष की उन 17 पुत्रियों में  से थी जिनका विवाह प्रजापति मरीचि के पुत्र कश्यप से हुआ था। विभिन्न धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि एक […] - [इन्द्र ने दिति के गर्भ के उनन्चास टुकड़े कर दिए (15)](https://bharatkaitihas.com/indra-broke-ninety-nine-pieces-of-ditis-womb/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि अदिति के पुत्र इन्द्र को मारने के लिए अदिति की बहिन दिति ने एक तेजस्वी पुत्र की कामना की तथा अपने पति को प्रसन्न करके उससे एक तेजस्वी गर्भ प्राप्त कर लिया। महर्षि कश्यप ने दिति को तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने के लिए पुंसवन व्रत करने का […] - [कद्रू के पुत्र (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): अण्डों के उत्पन्न होने के पांच सौ वर्ष बीत जाने के बाद कद्रु के अंडों से एक सहस्र नाग प्रकट हुए जो कद्रू के पुत्र कहलाए! हम पिछली कुछ कड़ियों में दक्ष की 17 पुत्रियों का उल्लेख करते आए हैं जिनका विवाह प्रजापति ब्रह्माजी के पौत्र कश्यप ऋषि से हुआ था। प्रजापति दक्षराज की इन […] - [कश्यप ऋषि को वसुदेव के रूप में पैदा होने का श्राप मिला था (17)](https://bharatkaitihas.com/rishi-kashyap-was-cursed-to-be-born-as-vasudeva/): एक बार ऋषि कश्यप ने अपने आश्रम में एक विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया तथा अनेक महाज्ञानी ऋषियों को यज्ञ सम्पन्न करने के लिए अपने आश्रम में बुलाया। - [वृत्रासुर वध की कथा धरती पर वर्षा आरम्भ होने की घटना से जुड़ी है (18)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%a7/): वृत्रासुर वध की कथा सबसे पहले ऋग्वेद के चतुर्थ ब्राह्मण में मिलती है। बाद में यह कविता बहुत से पुराणों में भी कही गई है। यद्यपि वैदिक ब्राह्मण एवं पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली इस कथा के मुख्य पात्र इन्द्र, त्वष्टा, विश्वरूप एवं वृत्रासुर ही हैं तथापि बाद की कथाओं में गुरु बृहस्पति एवं महर्षि […] - [वृत्रासुर ने इन्द्र को स्वर्ग से निकाल दिया (19)](https://bharatkaitihas.com/vritrasura-drove-indra-out-of-heaven/): पिछली कड़ी में हमने वैदिक ब्राह्मण के आधार पर देवराज इन्द्र द्वारा वृत्रासुर के वध की कथा की चर्चा की थी। इस कड़ी में तथा इसके बाद की एक और कड़ी में हम पुराणों में आए हुए संदर्भों के आधार पर इन्द्र द्वारा वृत्रासुर का वध किए जाने की चर्चा करेंगे। पुराणों में आए संदर्भों […] - [दधीचि ऋषि ने वृत्रासुर के नाश के लिए अपनी हड्डियां दे दीं (20)](https://bharatkaitihas.com/dadichi-rishi-gave-his-bones-to-destroy-vritrasura/): इस धारावाहिक की पिछली कड़ी में हमने त्वष्टा के यज्ञ से उत्पन्न वृत्रासुर की चर्चा की थी जिसने त्वष्टा के कहने पर इन्द्र पर आक्रमण कर दिया। ब्रह्माजी ने इन्द्र को सलाह दी कि वृत्रासुर को मारने हेतु वज्र बनाने के लिए वह दधीचि ऋषि की अस्थियों को प्राप्त करे। वैदिक ग्रंथों में जिन ऋषियों […] - [चौदह मनुओं की कथा (21)](https://bharatkaitihas.com/story-of-fourteen-manu/): चौदह मनुओं की कथा भारतीय पुराण साहित्य की विलक्षण संकल्पना है। यह कथा सृष्टि के नवीन रूप धारण करके बार-बार संभव होने के प्रति आश्वस्त करती है। अर्थात् सृष्टि कभी पूर्ण रूप से नष्ट नहीं होती। पहली सृष्टि में अर्जित ज्ञान अलगी सृष्टि में बीज रूप में स्थानांतरित होता है। हिन्दू मानते हैं कि हिन्दू […] - [स्वायंभू मनु तथा उनके वंशजों की कथा (22)](https://bharatkaitihas.com/story-of-swayambhu-manu-and-his-descendants/): पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि वराह कल्प के प्रथम मनु का नाम स्वायंभू मनु था, जिनके साथ मिलकर शतरूपा नामक स्त्री ने प्रथम मानव सृष्टि उत्पन्न की। स्वायंभू मनु एवं शतरूपा स्वयं धरती पर उत्पन्न हुए अर्थात् उनका कोई माता या पिता नहीं था। इन्हीं मनु की सन्तानें मानव अथवा मनुष्य कहलाती […] - [अश्वत्थामा के आँसू](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%b8%e0%a5%82/): अश्वत्थामा के आँसू एक हास्य व्यंग्य नाटिका है जिसे देश के कई हिस्सों में मंचित किया गया है। इस नाटिका के माध्यम से नाटककर डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गहरी चोट की है। भूमिका महाभारत का युद्ध हुए 5300 वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है किंतु आज भी […] - [जावा द्वीप पर अंतिम दिन (37)](https://bharatkaitihas.com/last-day-on-java-island/): आज हमारा जावा द्वीप पर अंतिम दिन था। 23 अप्रेल को हमें जावा द्वीप से विदाई लेनी थी। आज भी मैं प्रातः 6 बजे चाय पीने होटल की लॉबी में आया तो मुस्कुराहट से भरी वही लड़की, कल वाले स्थान पर खड़ी हुई अतिथियों का चाय पर स्वागत कर रही थी। आज हमें जकार्ता से […] - [पागल सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): पागल सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक – अनुक्रमणिका पृष्ठ पर दिल्ली सल्तनत के सुल्तन मुहम्मद बिन तुगलक के इतिहास के अध्यायों का क्रम दिया गया है। इस पृष्ठ पर दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करने से सीधे ही सम्बन्धित अध्याय को पढ़ा जा सकता है। 1.उसने उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए! 2 सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक […] - [उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए (1)](https://bharatkaitihas.com/he-whipped-ulema-and-kajis/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने सिपहसालारों का मांस चावल के साथ रांधकर उसके परिवार वालों को खाने के लिए भिजवाया। उसने उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए । मुहम्मद बिन तुगलक ने ई.1325 से ई.1351 अर्थात् 26 साल की दीर्घ अवधि तक भारत पर शासन किया। उसका व्यक्तित्व आकर्षक तथा प्रभावोत्पादक था। उसके समान विद्वान […] - [सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने महल में पिघला हुआ सोना भर दिया (2)](https://bharatkaitihas.com/sultan-ghiyasuddin-tughlaq-filled-molten-gold-in-palace-pond/): मक्कार गाजी खाँ , सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक के नाम से दिल्ली का शासक बन गया और उसका पुत्र जूना खाँ हाथ मलता रह गया! जूना खाँ इसके लिए तैयार नहीं था। मुहम्मद बिन तुगलक के बचपन का नाम फखरुद्दीन मुहम्मद जूना खाँ था। वह अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा, सर्वाधिक महत्वाकांक्षी एवं सबसे प्रतिभावान […] - [शहजादे जूना खाँ ने सुल्तान गयासुद्दीन की हत्या कर दी (3)](https://bharatkaitihas.com/prince-juna-khan-murdered-his-father-sultan-ghiyasuddin/): अब तक आप पढ़ चुके हैं कि किस प्रकार शहजादे जूना खाँ ने दिल्ली सल्तनत के खिलजी सुल्तान खुसरोशाह की हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के तख्त पर बैठने का प्रयास किया किंतु जब जूना खां का पिता गाजी तुगलक दिल्ली के तख्त पर बैठ गया तो जूना खाँ के हसीन सपने धरे के […] - [सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने सड़कों पर अशर्फियां लुटा दीं (4)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-looted-gold-incense-on-the-streets-of-delhi/): सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक को किसी भी प्रकार का आर्थिक संकट नहीं था। तख्त पर बैठते समय उसके तीन भाई जीवित थे किंतु किसी ने भी उसका विरोध नहीं किया। ई.1324 में जब सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक बंगाल विजय के लिये गया तब वह शहजादे जूना खाँ को राजधानी में छोड़ गया ताकि सुल्तान की अनुपस्थिति […] - [किसानों की आय बढ़ाने का सपना देखने वाला पहला मुस्लिम शासक (5)](https://bharatkaitihas.com/he-was-first-muslim-ruler-to-dream-of-increasing-income-of-farmers/): भारतीय राजा अपने राज्य में किसानों की आय बढ़ाने के लिए नहरें, तालाब आदि बनवाया करते थे किंतु मुहम्मद बिन तुगलक पहला ऐसा मुस्लिम शासक था जिसने किसानों की आय बढ़ाने का सपना देखा। हालांकि उसके लिए किसान का मतलब मुस्लिम किसान से था न कि हिन्दू किसान से। पिछली कड़ी में आपने देखा कि […] - [गंगा-यमुना क्षेत्र के किसान जंगलों में भाग गए (6)](https://bharatkaitihas.com/farmers-of-ganga-yamuna-region-fled-into-jungles-due-to-the-tax-increase-by-sultan/): तख्त पर बैठने के कुछ दिन बाद सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने गंगा-यमुना क्षेत्र के दोआब क्षेत्र में भू-राजस्व करों में वृद्धि की। किसानों पर भूमि कर के अतिरिक्त ‘घरी’ अर्थात गृहकर तथा ‘चरही’ अर्थात् चरागाह कर भी लगाया गया। तत्कालीन मुस्लिम लेखक जियाउद्दीन बरनी के अनुसार बढ़ा हुआ कर, प्रचलित करों का दस से […] - [राजधानी दिल्ली से दौलताबाद चले गए कुत्ते-बिल्ली और भिखारी (7)](https://bharatkaitihas.com/sultan-took-dog-cats-and-beggars-from-delhi-to-daulatabad/): जब मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की तब वह दिल्ली के कुत्ते-बिल्ली और भिखारी भी अपने साथ ले गया। दिल्ली सल्तनत की स्थापना ई.1193 में मुहम्मद गौरी के जीवनकाल में ही हो गई थी। तब से लेकर ई.1325 में मुहम्मद बिन तुगलक के दिल्ली का सुल्तान बनने तक की 132 […] - [ताम्बे के सिक्के ढलवाए मुहम्मद बिन तुगलक ने (8)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughlaq-casts-copper-coins-instead-of-gold-and-silver-coins/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने राज्य में सोने-चांदी की मुद्रा के स्थान पर ताम्बे के सिक्के ढलवाए। यह भारत में सांकेतिक मुद्रा का प्रथम प्रचलन था किंतु दुर्भाग्य से यह विफल हो गया। आज संसार में कई तरह की मुद्राएं चलती हैं जिनमें पेपर करंसी, मेटल करंसी, प्लास्टिक करंसी, क्रिप्टो करंसी आदि प्रमुख हैं। पेपर […] - [मंगोलों से संधि (9)](https://bharatkaitihas.com/instead-of-fighting-the-mongols-muhammad-bin-tughluq-gave-them-gold-and-silver-rupees/): मुहम्मद बिन तुगलक ने लड़ने की बजाय मंगोलों से संधि करने का मार्ग अपनाया तथा मंगोलों को सोने-चांदी के रुपए दिए किंतु इस नीति से वह मंगोलों का विश्वास नहीं जीत सका। चीन के उत्तर में स्थित गोबी-रेगिस्तान में मंगोल नामक घुमंतू एवं अर्द्धसभ्य जाति रहती थी जिसका मुख्य पेशा घोड़ों और अन्य पशुओं का […] - [कटोच राजपूत और मुहम्मद बिन तुगलक (10)](https://bharatkaitihas.com/katoch-rajputs-beaten-muhammad-bin-tughlaq/): कांगड़ा घाटी में नगरकोट नामक एक प्रसिद्ध राज्य था जिस पर एक प्राचीन हिन्दू राजवंश शासन करता था। इस राजवंश को कटोच राजपूत राजवंश कहा जाता था। तुगलकों के काल में दिल्ली सल्तनत अपने चरम-विस्तार को प्राप्त कर गई। तुगलक वंश के दूसरे सुल्तान अर्थात् मुहम्मद बिन तुगलक ने भी अनेक हिन्दू राजाओं का राज्य […] - [कराजल अभियान में मुहम्मद बिन तुगलक की सेना नष्ट हो गई (11)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-dreamed-of-conquering-iran-tibet-and-china/): कराजल अभियान मुहम्मद बिन तुगलक के लिए अत्यंत विनाशकारी सिद्ध हुआ। कराजल क्षेत्र के पहाड़ी हिन्दू योद्धाओं ने तुगलक की समस्त सेना नष्ट कर दी। ! नगरकोट अभियान के बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने खुरासान विजय की योजना बनाई। उसके दरबार में उन दिनों कुछ खुरासानी अमीर भी रहते थे जिन्होंने सुल्तान को खुरासान की […] - [बागियों का दमन करने में बड़ी क्रूरता दिखाई सुल्तान ने ! (12)](https://bharatkaitihas.com/sultan-sliced-his-cousin-and-cooked-it-in-rice/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी सल्तनत में होने वाले व्रिदोहों का बड़ी दृढ़ता से दमन किया तथा बागियों का दमन करने में बड़ी क्रूरता दिखाई ! उस युग में बागियों का दमन करने में ऐसी ही क्रूरता दिखाई जाती थी। मुहम्मद बिन तुगलक संसार के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक का स्वामी था। उसने […] - [विजयनगर साम्राज्य की स्थापना तथा मुहम्मद बिन तुगलक (13)](https://bharatkaitihas.com/vijayanagara-empire-was-established-but-muhammad-bin-tughluq-could-not-do-anything/): सुल्तान ने हरिहर को उस क्षेत्र का शासक और बुक्का को उसका मन्त्री बनाकर भेज दिया। वहाँ पहुँचने पर धीरे-धीरे हरिहर ने अपनी शक्ति संगठित कर ली और विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कर ली। मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के कारण सल्तनत में स्थान-स्थान पर हो रहे विद्रोहों को देखकर हिन्दू राजाओं ने भी स्वतन्त्र […] - [चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो गई (14)](https://bharatkaitihas.com/independent-kingdom-of-chittor-was-restored-and-muhammad-bin-tughluq-could-do-nothing/): ई.1303 में छल-बल से की गई रावल रत्नसिंह की पराजय का बदला ई.1338 में ले लिया गया तथा चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो गई। मुहम्मद बिन तुगलक के पूर्ववर्ती शासकों में से एक अल्लाउद्दीन खिलजी ने ई.1303 में चित्तौड़ के रावल रतनसिंह को छल से मारकर गुहिलों के चित्तौड़ राज्य को समाप्त कर दिया था। […] - [बहमनी सल्तनत की स्थापना (15)](https://bharatkaitihas.com/bahmani-empire-was-established-but-muhammad-bin-tughluq-could-not-do-anything/): हसन गंगू ने ने जफर खाँ की उपाधि धारण की तथा अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम पर बहमनी सल्तनत की स्थापना की। वह स्वयं को ईरान के शाह बहमन बिन असफन्द यार का वंशज बताता था। जब दक्षिण भारत में विजयनगर हिन्दू साम्राज्य की स्थापना तथा चित्तौड़ में गुहिलों के प्राचीन चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो […] - [पागल बादशाह क्यों कहा गया मुहम्मद बिन तुगलक को ! (16)](https://bharatkaitihas.com/was-muhammad-bin-tughlaq-mad/): मुहम्मद बिन तुगलक पागल नहीं था। फिर भी उसे भारत के इतिहास में पागल बादशाह के नाम से जाना गया। इसका कारण समकालीन इतिहास लेखकों की हठधर्मिता है न कि मुहम्मद बिन तुगलक की अयोग्यता! इस शृंखला में मैंने चौदहवीं शताब्दी ईस्वी में भारत के एक प्रमुख शासक मुहम्मद बिन तुगलक के बारे में अब […] - [लाल किले की दर्द भरी दास्तान - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/tragic-history-of-red-fort-book/): भारत में दो लाल किले हैं। पहला लाल किला आगरा में है जिसका निर्माण तोमर राजपूतों ने लाल कोट के नाम से करवाया था। - [शाहजहाँ का परिवार (1)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0/): शाहजहां को अपने बाप-दादाओं का जमा-जमाया साम्राज्य मिला था। इसलिए उसके सामने चुनौतियां बहुत कम थीं। - [मुगल शहजादियाँ (2)](https://bharatkaitihas.com/mughal-princesses-started-spreading-rumors-outside-the-walls-of-the-red-fort/): मुगल शहजादियां लाल किले की दीवारों से बाहर अफवाहें फैलाती रहती थीं, इन अफवाहों का मुख्य कारण उस युग की स्वार्थ भरी राजनीति थी। - [मुगल शहजादे (3)](https://bharatkaitihas.com/mughal-princes-used-to-kill-their-brothers-for-royal-throne/): मुगल शहजादे अपने भाइयों एवं चाचाओं को मारकर ही तख्त प्राप्त कर पाते थे। मुगलों में यह परम्परा सदियों से चली आ रही थी। - [दारा शिकोह (4)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-used-to-roam-in-red-fort-wearing-ramnami/): शाहजहाँ ने अपने कई अमीर-उमरावों और सेनानायकों के परिवारों की औरतों को अपने हरम में बुलाकर उन्हें खराब किया था। - [मुमताज महल (5)](https://bharatkaitihas.com/the-children-of-mumtaz-mahal-vied-to-kill-each-other-for-the-red-fort/): मुमताज महल की नसों में ईरान का तथा शाहजहाँ की नसों में समरकंद के मंगोलों का रक्त था। इस रक्त मिश्रण से उत्पन्न शहजादे रक्त के प्यासे रहते थे। - [लाल किले में हत्याकाण्ड](https://bharatkaitihas.com/british-killed-residents-of-red-fort-like-pheasants/): कितना दर्दनाक दृश्य था जब औरतों और बच्चों की भीड़ कश्मीरी और मोरी दरवाजे से बाहर आ रही थी। इनमें वे औरतें भी थीं जो कभी अपने घरों से बाहर नहीं निकली थीं। - [शाही बेगमों के कपड़े](https://bharatkaitihas.com/british-entered-the-red-fort-and-looted-the-clothes-of-the-royal-begums/): जो दुपट्टे, कमीजें, सलवारें, घाघरे और गरारे कल तक मुगल बेगमें और शहजादियां पहनती थीं, उन दुपट्टों, कमीजों सलवारों, घाघरों और गरारों को अंग्रेज और अंग्रेजी सेना के भारतीय सिपाही अपनी बीवियों के लिए ले जा रहे थे। - [बहादुरशाह जफर की गिरफ्तारी](https://bharatkaitihas.com/hodgson-brought-emperor-to-jail-in-red-fort/): बेगम जीनत महल नहीं चाहती थी कि बादशाह दिल्ली छोड़कर भागे क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि हॉडसन अपने वायदे पर स्थिर रहेगा और बहादुरशाह जफर, बेगम जीनत महल, शहजादे जवां बख्त तथ जीनत महल के पिता मिर्जा कुली खाँ को सुरक्षा देगा। - [मुगल शहजादों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/hodgson-naked-and-looted-the-princess/): हॉडसन ने तीनों शहजादों को गाड़ी से उतरने को कहा। फिर नंगा होने को कहा। फिर एक कॉल्ट रिवॉल्वर निकालकर उसने तीनों को गोली मार दी। - [जीनत महल](https://bharatkaitihas.com/british-soldiers-took-up-beard-of-mughal-emperor/): हम लोग एक और बेगम से मिलने गए जो अपने जमाने में बहुत खूबसूरत मानी जाती थीं। हमने उनको अत्यंत शोकग्रस्त अवस्था में पाया। - [दिल्ली में कत्लेआम](https://bharatkaitihas.com/british-reminded-taimurlung-and-nadirshah-in-slaughtering-people-of-delhi-and-awadh/): ई.1857 में तीन दिन तक चले कत्लेआम में दिल्ली के हजारों लोगों को मारा गया। जफरनामा लिखता है कि लोगों के सिर काट कर उनके ऊँचे ढेर लगा दिये गये और उनके धड़ हिंसक पशु-पक्षियों के लिये छोड़ दिये गये.......। - [लालकिले की गंदी कोठरियाँ](https://bharatkaitihas.com/british-put-bahadur-shah-zafar-in-a-dirty-cell/): जब भी कोई पुरुष इन शाही बेगमों एवं शहजादियों के कमरों में आता है तो ये दीवार की तरफ मुंह फेर लेती हैं। बादशाह को देखने आने वाले अंग्रेजों में से बहुतों को इस तरह औरतों का पर्दा तोड़कर बादशाह के परिवार को अपमानित करने में बहुत मजा आता है।' - [दिल्ली को दण्ड](https://bharatkaitihas.com/british-dug-up-every-house-in-delhi-and-took-out-the-goods/): जब दिल्ली के अधिकांश लोग या तो मार दिए गए या भाग गए तब अंगेजी सेनाओं ने दिल्ली के खाली पड़े घरों को लूटने का काम आरम्भ किया। - [मिर्जा गालिब](https://bharatkaitihas.com/british-allowed-hindu-families-to-come-back-to-delhi/): दिल्ली में न अब कोई सौदागर है न खरीदार! न कोई दुकानदार जिससे आटा खरीद सकें। धोबी, नाई और सफाई वाले सब दिल्ली से गायब हो गए थे। हमने अपने मौहल्ले की गली को पत्थरों के एक ऊंचे से ढेर से बंद कर लिया है। - [सलातीनों की हत्या](https://bharatkaitihas.com/british-officials-hunted-and-killed-the-princes-and-salatins/): बहुत से शहजादों को बर्मा के मौलामेन नामक शहर की जेलों में भेज दिया गया। इनमें एक शहजादा या सलातीन तो निरा बालक ही था और एक शहजादा या सलातीन नितांत बूढ़ा था। - [रानी विक्टोरिया की प्रजा](https://bharatkaitihas.com/bahadur-shah-zafar-said-that-i-am-not-a-subject-of-queen-victoria/): बादशाह तथा उसके पक्षधरों का कहना था कि कम्पनी सरकार बादशाह पर मुकदमा नहीं चला सकती क्योंकि बादशाह रानी विक्टोरिया की प्रजा नहीं है। - [बादशाह का कोर्ट मार्शल](https://bharatkaitihas.com/red-fort-saw-another-of-its-emperors-being-insulted/): बादशाह को कई गवाहों के बयान सुनाए गए। बादशाह ने उन सारे गवाहों को झूठा बताया और तकिए पर सिर टिकाकर आराम से बैठ गया। - [बहादुरशाह का निष्कासन](https://bharatkaitihas.com/mughals-came-from-fargana-on-horses-were-loaded-into-bullock-carts-and-sent-to-burma/): 9 मार्च 1858 को कोर्ट मार्शल अंतिम बार बैठा। उसी दिन शाम को तीन बजे कोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया। पांचों सैनिक न्यायाधीशों ने एक स्वर से बहादुरशाह जफर को अपराधी ठहराया। - [जॉन लॉरेंस](https://bharatkaitihas.com/lords-of-britain-wanted-delhi-to-be-erased-from-the-map-of-india/): जॉन लॉरेंस ने लॉर्ड केनिंग को लिखा कि दिल्ली के अंग्रेज इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं मानो वे हिंदुस्तानियों को जड़ से उखाड़ फैंकने की लड़ाई कर रहे हों। - [लाल किले पर खतरा](https://bharatkaitihas.com/john-lawrence-saves-the-red-fort-from-being-invisible/): यमुना की तरफ सफेद संगमरमर की बारादरियां बनी हुई थीं, उन्हें भी नष्ट कर दिया गया। समस्त सुनहरी गुम्बद और संगमरमर की फिटिंग्स वसूली एजेंटों ने उतरवा लीं। - [दिल्ली की जामा मस्जिद](https://bharatkaitihas.com/british-wanted-to-eradicate-the-mughals-from-delhi/): दिल्ली की जामा मस्जिद मूलतः एक हिन्दू मंदिर था जो मुसलमानों के भारत में आने से कई सौ साल पहले से दिल्ली की धरती पर विष्णु भगवान को समर्पित करके बनाया गया था। यह हिन्दू कला, स्थापत्य एवं शिल्प का अनूठा उदाहरण होता। यदि मुसलमानों ने इसे जामा मस्जिद में नहीं बदला होता तो यह […] - [मुगलों की दुर्दशा](https://bharatkaitihas.com/moon-like-appearance-women-of-red-fort-were-roaming-streets-wearing-torn-pajamas/): जो मुगल भारत के स्वामी होने का दावा करते थे, अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के बाद उन मुगलों की दुर्दशा अपने चरम पर पहुंच गई। उनमें से बहुत से तांगा चलाने लगे, जूतियां गांठने लगे और कुछ तो केवल भीख मांगकर खाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सके। जब अंग्रेजों ने अठ्ठारह सौ […] - [मुसलमानों का षड़यंत्र](https://bharatkaitihas.com/british-alleged-that-the-red-fort-wanted-to-rule-india-again/): एक रक्त की नदी ने कम से कम उत्तरी भारत में दो जातियों को अलग-अलग कर दिया तथा उस पर पुल बाँधना एक कठिन कार्य ही था। - [सन् सत्तावन का विप्लव](https://bharatkaitihas.com/eer-savarkar-said-it-was-not-a-rebellion-but-indias-first-freedom-war/): जिन लोगों ने विप्लव में भाग लिया अथवा विप्लवकारियों को शरण एवं सहायता दी, उनकी प्रशंसा में गीतों की रचना की गई। - [लाल किले की विफलता](https://bharatkaitihas.com/red-fort-could-not-offer-gallantry-to-the-goddess-of-revolution/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की विफलता वस्तुतः लाल किले की विफलता थी। लाल किले में बैठे बादशाह को शक्ति का स्रोत मानकर क्रांतिकारियों ने उसे अपना नेता चुना किंतु उन्हें पता नहीं था कि लाल किला बिल्कुल लुंज-पुंज और निशक्त है। वह तो विगत लगभग एक सौ साल से अंग्रेजों की पेंशन पर जी […] - [दो गज जमीन](https://bharatkaitihas.com/owner-of-red-fort-did-not-even-get-two-yards-of-land-in-india/): उभरते हुए नए भारत में किलों, घोड़ों, तलवारों एवं पालकियों का समय पीछे छूट रहा था और पिस्तौलों से लेकर बम बरसाने वाली तोपों तथा ट्रेनों का समय आ गया था किंतु इस हिंदुस्तान में बाबर के बेटों के लिए कोई स्थान नहीं था। उन्हें अब रंगून में अपना भविष्य तलाशना था। - [वैवस्वत मनु तथा उनके वंशज राजाओं की कथा (23)](https://bharatkaitihas.com/story-of-vaivasvata-manu-and-his-descendant-kings/): पिछली कथाओं में हमने वराह कल्प के 14 मनुओं में से पहले मनु अर्थात् स्वायंभू-मनु की चर्चा की थी। साथ ही उनके पुत्रों उत्तानपाद एवं प्रियव्रत और पौत्रों ध्रुव तथा उत्तम की भी चर्चा की थी। इस कथा में हम वराह कल्प के वर्तमान मनु अर्थात सातवें मनु की चर्चा करेंगे जिन्हें वैवस्वत मनु के […] - [लाल किला तोड़ दो](https://bharatkaitihas.com/public-said-break-the-red-fort-free-the-azad-hind-fauj/): साथियो! आपके युद्ध का नारा हो- चलो दिल्ली, चलो दिल्ली। इस स्वतन्त्रता संग्राम में हम में से कितने जीवित बचेंगे, यह मैं नहीं जानता परन्तु मैं यह जानता हूँ कि अन्त में विजय हमारी होगी और हमारा ध्येय तब तक पूरा नहीं होगा जब तक हमारे शेष जीवित साथी ब्रिटिश साम्राज्य की कब्रगाह- लाल किले पर विजयी परेड नहीं करेंगे। - [भारतीय सम्प्रभुता का प्रतीक](https://bharatkaitihas.com/last-farewell-of-british-was-from-red-fort/): लाल किला आज भी बड़ी शान से दिल्ली में खड़ा है जहाँ भारत के प्रधानमंत्री प्रत्येक 15 अगस्त को झण्डा फहराते हैं । तिरंगे की गौरवमय उपस्थिति के कारण आज यह किला भारत की आन-बान और शान का प्रतीक है। - [भूमिका - रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/preface-razia-sultana/): भूमिका – रजिया सुल्तान पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ई-बुक रजिया सुल्तान की भूमिका दी गई है जिसमें इस पुस्तक के बारे में संक्षिप्त जानकारी लिखी गई है। तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में जब दिल्ली सल्तनत पर लड़ाका तुर्की कबीले शासन कर रहे थे, एक यतीम शहजादी का दिल्ली के तख्त पर काबिज हो […] - [इल्तुतमिश का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/rise-of-shamsuddin-iltutmish/): रजिया सुल्तान का इतिहास उसके पिता शम्सुद्दीन इल्तुतमिश से शुरु होता है। इल्तुतमिश मध्य एशिया में रहने वाले तुर्कों के अल्बारी अथवा इल्बरी कबीले के एक प्रमुख एवं प्रभावशाली व्यक्ति आलम खाँ का प्रतिभाशाली तथा रूपवान पुत्र था। इस कारण उसे अपने पिता की विशेष कृपा तथा वात्सल्य प्राप्त था। इससे इल्तुतमिश के भाइयों तथा […] - [शहजादी रजिया](https://bharatkaitihas.com/succession-to-shehzadi-razia/): शहजादी रजिया भारत के मुस्लिम शासकों में सबसे अलग चमकता हुआ सितारा है जिसे कट्टरपंथी मुसलमानों ने शासन नहीं करने दिया तथा अकारण ही उसकी हत्या कर दी। शहजादी रजिया का जन्म रजिया का जन्म सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक की शहजादी कुतुब बेगम के गर्भ से हुआ था। चूंकि रजिया का जन्म एक शहजादी के पेट […] - [शाह तुर्कान का कहर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%b0/): जब तुर्की अमीरों ने मरहूम सुल्तान इल्तुतमिश की इच्छा को नकार दिया तथा शहजादी रजिया को सुल्तान बनाने से मना करके रुकनुद्दीन फीरोजशाह को सुल्तान बना दिया तो नए सुल्तान रुकनुद्दीन फिरोजशाह की माँ शाह तुर्कान का कहर मरहूम सुल्तान इल्तुतमिश की बेगमों एवं शहजादियों पर टूट पड़ा। शाह तुर्कान का कहर अब शाह तुर्कान […] - [रजिया का दांव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5/): जब शाह तुर्कान के अत्याचारों के कारण दिल्ली सल्तनत में चारों ओर असंतोष फैल गया तो राजनीति की चतुर खिलाड़ी शहजादी रजिया ने शाह तुर्कान से पंजा लड़ाने का निश्चय किया। रजिया का दांव उलटा भी पड़ सकता था किंतु रजिया के लिए यह करो या मरो जैसी स्थिति थी। राजनीति के दांवपेच किशोरावस्था से […] - [रजिया सुल्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): रुकुनुद्दीन फीरोजशाह की हत्या हो जाने के बाद रजिया अपने मरहूम बाप इल्तुतमिश की इच्छा के अनुसार सल्तनत के तख्त पर बैठी। भारतीय इतिहास में उसे रजिया सुल्तान तथा रजिया सुल्ताना कहा गया है। रजिया सुल्तान के सिर पर छत्र ताना गया, चंवर ढुलाये गये और उसकी विरुदावली गाई जाने लगी। दिल्ली ने बहुत से […] - [रजिया सुल्तान का शासन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): रजिया सुल्तान का शासन उस काल के सुल्तानों की तुलना में काफी अच्छा था। औरत होने के कारण वह इस्लाम के बल पर शासन नहीं कर सकती थी। उसे अपने मित्रों एवं शत्रुओं के बीच संतुलन स्थापित करना था। यह कार्य उसने बड़ी सूझबूझ से किया। रजिया सुल्तान का शासन अमीरों की पुनर्नियुक्ति रजिया ने […] - [रजिया सुल्तान की हत्या](https://bharatkaitihas.com/fall-of-razia/): रजिया सुल्तान की हत्या भारत के मुस्लिम शासन का सबसे दुखद अध्याय है। रजिया सुल्तान मुसलमान होते हुए भी केवल मुसलमानों को अपनी प्रजा नहीं मानती थी। वह दिल्ली के आसपास शासन कर रहे राजपूत शासकों से अच्छे सम्बन्ध बनाकर अपनी सल्तनत में शांति चाहती थी। रजिया की हत्या के पीछे एक बड़ा कारण यह […] - [रजिया सुल्तान की असफलता](https://bharatkaitihas.com/causes-of-failure-of-razia/): रजिया सुल्तान की असफलता के लिए स्वयं रजिया बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं थी। अपितु तुर्की अमीरों की संकुचित दृष्टि एवं स्थार्थपरक राजनीति ने रजिया सुल्तान को सफल नहीं होने दिया। यद्यपि रजिया सुल्तान इल्तुतमिश के उत्तराधिकारियों में सर्वाधिक योग्य तथा राजपद के सर्वाधिक उपयुक्त थी परन्तु दूषित राजनीतिक वातावरण में वह शासन चलाने में असफल […] - [रजिया सुल्तान का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/razias-character-and-her-actions/): रजिया सुल्तान का मूल्यांकन उसके शासनकाल की अवधि अथवा सामरिक सफलताओं से नहीं अपितु मध्यकालीन परिस्थितियों में दिखाए गए साहस एवं धैर्य से किया जा सकता है। प्रथम स्त्री सुल्तान रजिया भारत की प्रथम स्त्री सुल्तान थी। यद्यपि विदेशों में रजिया सुल्तान के पूर्व भी स्त्रियां तख्त पर बैठ चुकी थीं परन्तु भारत में अब […] - [इतिहास में रजिया सुल्तान का स्थान](https://bharatkaitihas.com/impact-of-razia-sultan-on-indian-history-and-public-psyche/): भारत के मुस्लिम इतिहास में रजिया सुल्तान का स्थान अल्पावधि के शासन के उपरांत भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि इल्तुतमिश या बलबन का। रजिया ने इल्तुतमिश और बलबन की ही तरह कट्टर तुर्की अमीरों पर नकेल कसने में सफलता प्राप्त की। मध्यकालीन इतिहास में रजिया सुल्तान भारत के मध्यकाल का इतिहास रजिया सुल्तान […] - [मोहनजोदारो की नृत्यांगना - भूमिका](https://bharatkaitihas.com/preface/): मोहनजोदारो की नृत्यांगना भारत की दस हजार साल पुरानी सभ्यता पर लिखा गया एक उपन्यास है। इस उपन्यास में आधारभूत सामग्री के रूप में उस काल का वैदिक साहित्य एवं सैंन्धव पुरातत्व काम में लिया गया है। शरीर रचना शास्त्र  (Racical Anthropology) की दृष्टि से भारत भूमि पर निवास करने वाली आदिम जातियों के छः […] - [सप्तसिंधु (1)](https://bharatkaitihas.com/saptasindhu/): उन दिनों सिंधु, शतुद्रि, विपासा, परुष्णि, असिक्नी, वितस्ता तथा सरस्वती का सम्पूर्ण क्षेत्र सप्त सैंधव अथवा सप्तसिंधु कहलाता था। यह बहुत बाद की बात है कि गंगा-यमुना का क्षेत्र आर्य संस्कृति के प्रसार का केन्द्र बना। नदियाँ केवल जल लेकर प्रवाहित नहीं होतीं। जल के साथ पर्वतीय खण्ड भी उनके आकर्षण में बंधे चले आते […] - [मरुस्थल का पथिक (2)](https://bharatkaitihas.com/desert-wanderer/): मरुस्थल का पथिक प्रतनु इस कार्य के लिये उन्हें पर्याप्त स्वर्ण चुकायेगा किंतु कोई भी सैंधव इतना बड़ा खतरा उठाने को तैयार नहीं हुआ। इस पर भी प्रतनु निराश नहीं हुआ। निराश होना तो उसने जैसे जाना ही नहीं। अन्ततः वही हुआ जिसका प्रतनु को भय था। उसने कभी नहीं चाहा था इन आकृतियों को […] - [मोहेन-जो-दड़ो (3)](https://bharatkaitihas.com/mohen-jo-daro/): मोहेन-जो-दड़ो के पशुपति महालय का प्रधान पुजारी किलात सैंधव सभ्यता के महान दार्शनिक कोल्या की सातवीं पीढ़ी का वंशज है। कोल्या सैंधव सभ्यता का अनुभवी पुरोहित, गूढ़ उपदेशक, सुप्रसिद्ध न्यायकर्ता और दृढ़ प्रशासक था। सिंधु नदी के तट पर स्थित मोहेन-जो-दड़ो! [1] आज से पाँच हजार साल पहले भारत भूमि पर पल्लवित और पुष्पित होने […] - [दिव्य पूजन (4)](https://bharatkaitihas.com/divine-worship/): दिव्य पूजन की अंतिम प्रार्थना से पूर्व पद्म पत्रों पर रखे सहस्रों दीप सिंधु में प्रवाहित कर दिये गये। सिंधु की अनंत लहरों पर लहराते-इठलाते सहस्रों ज्योतिर्पुन्ज। ये मिट्टी और यव-चूर्ण से बने दीप नहीं, सैन्धव लोगों द्वारा अपने मन के अंधियारे को हटाने के घोषणा पत्र हैं। सूर्योदय अब भी नहीं हुआ था जब […] - [अदृश्य नृत्यांगना (5)](https://bharatkaitihas.com/invisible-dancer/): अदृश्य नृत्यांगना रोमा! जो पशुपति महालय की मुख्य नृत्यांगना है। रोमा! जो सद्यः यौवना है। रोमा! जो कला की  अधिष्ठात्री है। रोमा! जो नृत्यविधा में देवलोक की बहुविश्रुत अप्सराओं और अनजाने पर्वतीय प्रदेशों में नृत्यरत गांधर्वियों से अधिक निष्णात है। चन्द्रवृषभ समारोह में बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति होने से इसका आयोजन महालय के […] - [सभा (6)](https://bharatkaitihas.com/assembly/): सभा में साम-गायन के साथ-साथ विभिन्न यज्ञ भी निर्विघ्न रूप से होते हैं। पुरुषों के साथ जन की समस्त स्त्रियों को इस सभा में भाग लेना अनिवार्य है। अशक्त और रोगी प्रजा को सभा से अनुपस्थित रहने की अनुमति है। शुभ्र हिम से आच्छादित शिखरों की सघन शृंखला ने चारों ओर घूम कर एक दुर्ग […] - [गविष्टि (7)](https://bharatkaitihas.com/meeting/): गविष्टि के समय आर्यों का नेतृत्व करने वाले ‘गोप’ आर्य सुरथ ने ऋषियों को आश्वस्त करते हुए दुंदुभि को नमस्कार किया और दुंदुभि का आह्वान करते हुए कहा- ‘हे दुंदुभि! तू हमारे शत्रुओं के विरुद्ध घोष कर। हमें बल दे।’ ऋषि पत्नी अदिति ने यज्ञ शाला में स्थापित दुंदुभि उठाकर ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा के मंगलमय हाथों […] - [पुरोडाश (8)](https://bharatkaitihas.com/rituals/): इन्द्र ने अग्नि और सोम का आह्वान करके कहा कि तुम तो मेरे हो और मैं तुम्हारा हूँ। तुम क्यों इस दस्यु को बढ़ावा देते हो। इन्द्र ने अग्नि और सोम को प्रसन्न करने के लिये ‘एकादशकपाल पुरोडाश’ का निर्वपन किया। संध्याकाल में परुष्णि के पावन तट पर आर्यों की सभा पुनः जुड़ी। प्रातः अचानक […] - [अद्भुत प्रतिमा (9)](https://bharatkaitihas.com/amazing-statue/): कहाँ से आई यह अद्भुत प्रतिमा यहाँ ? किसने बनाया इसे ? क्या सैंधवों में भी कोई इतना निष्णात शिल्पी है! देव शिल्पी त्वष्टा और दानव शिल्पी मय के बारे में तो सुना है उन्होंने किंतु सैंधवों में तो कोई इतना निष्णात शिल्पी आज तक नहीं हुआ! मोहेन-जो-दड़ो पशुपति देवालय के वार्षिक समारोह को कोई […] - [अग्निहोत्र (10)](https://bharatkaitihas.com/havan/): इस समय आर्य-जन प्रातःकालीन अग्निहोत्र की तैयारी में संलग्न हैं। ऋषिगण चारों दिशाओं का वंदन कर रहे हैं। ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा ने पूर्व दिशा को नमस्कार करते हुए कहा- ‘प्रकाश दायिनी पूर्व दिशा का अधिपति सूर्य है। इसकी बाणरूप रश्मियाँ समस्त बंधनों से रहित करने वाली हैं। जगत की रक्षा करने वाले सूर्य को हमारा नमस्कार […] - [अभिसार (11)](https://bharatkaitihas.com/dating/): गगन मण्डल में सप्त सिंधुओं का प्रतिनिधत्व कर रहे सप्त नक्षत्र अब अपने पुर को जाने को लालायित थे किंतु यही सोचकर अटके हुए थे कि अभिसार पूर्ण होने से पहले चल देना उचित नहीं होगा। शुक्ल पक्ष की प्रथमा का क्षीण चंद्र अल्प समय आकाश में उपस्थित रह कर प्रस्थान कर चुका है। नक्षत्रों […] - [समिति (12)](https://bharatkaitihas.com/committee/): जन के ठीक मध्य में स्थित यज्ञशाला के निकट ही वृहद पर्णशाला [1] बनी हुई है जिसमें प्रातः कालीन सभा, सांध्यकालीन गोष्ठि [2] तथा विशेष अवसर उपस्थित होने पर समिति [3] का आयोजन होता है। गोधूलि बेला [4] के आगमन में अभी विलम्ब है तथा सूर्य देव की प्रखरता भी अभी कम नहीं हुई है। […] - [पर्वतीय उपत्यकाओं की ओर (13)](https://bharatkaitihas.com/to-the-valley/): वह उत्साह आज नहीं है। क्या आशा और क्या लक्ष्य लेकर लौटे वह अपने पुर को ? दीर्घ यात्रा के पश्चात अपने पुर को लौटने वाले अपने साथ कुछ अर्जित करके लौटते हैं। उसने क्या अर्जित किया है ? - [गोष्ठी (14)](https://bharatkaitihas.com/seminar/): मंद गति से विचरण करता हुआ निशीथ अंतरिक्ष के मध्य में आ बैठा था। दो प्रहर रात्रि व्यतीत हुई जान कर गोष्ठी विसर्जित की गयी। परुष्णि के तट पर आर्यों की सांध्यकालीन गोष्ठी जुड़ी है। आर्य सुरथ और आर्य सुनील अन्य आर्यवीरों के साथ सोम की खोज में गये थे किंतु वहाँ से न केवल […] - [मायावी स्त्रियाँ (15)](https://bharatkaitihas.com/elusive-women/): प्रतनु के मस्तिष्क में बार-बार यह शंका उत्पन्न हो रही थी कि कहीं ये मायावी स्त्रियाँ उसके नेत्रों पर वस्त्र बांध कर उसे पर्वत से नीचे धकेलने तो नहीं ले जा रहीं। वरुण देव ही जानें क्या माया है ? कई दिवसों से पर्वत उपत्यकाओं में निरूद्देश्य सा भटकता रहा है प्रतनु। मोहेन-जो-दड़ो से यहाँ […] - [यातुधान (16)](https://bharatkaitihas.com/demons/): गुहा द्वार पर पाँच यातुधान पहरा दे रहे थे किंतु वे पूरी तरह असावधान थे। उन्हें इस बात की कल्पना भी नहीं थी कि इस निविड़ पर्वत प्रदेश में कोई प्राणी उनके कार्य में विघ्न उपस्थित करने के लिये आ सकता है। दिन भर के श्रांत-क्लांत गोप सुरथ परुष्णि के जल में निमज्जित होकर थकान […] - [मायावी सरोवर (17)](https://bharatkaitihas.com/elusive-lake/): शर्करा के तट से सिंधु नद के विशाल तट तक। मोहेन-जो-दड़ो से नागों के इस अनजाने पुर तक। न कहीं ऐसा देखा, न कहीं ऐसा सुना। लगता था सम्पूर्ण उपवन मायावी विद्या से निर्मित है। ईशान कोण में स्थित मायावी सरोवर से ही आरंभ किया प्रतनु ने। सूर्योदय हुए काफी विलम्ब हो चुका था जब […] - [विचित्र स्वप्न (18)](https://bharatkaitihas.com/bizarre-dream/): ऋषिश्रेष्ठ ने विचित्र स्वप्न देखा कि एक वृक्ष है जिसकी शाखा पर दो पक्षी बैठे हैं। पहला पक्षी फल खा रहा है और दूसरा पक्षी देख रहा है। हर काल खण्ड में पहला पक्षी ही फल खा रहा है। जबकि किसी भी काल खण्ड में दूसरा पक्षी कुछ नहीं खा रहा। पर्ण शैय्या पर लेटते ही […] - [अमल-धवल प्रासाद (19)](https://bharatkaitihas.com/amal-dhawal-palace/): प्रतनु ने विशाल अमल-धवल प्रासाद में प्रवेश किया। मोहेन-जो-दड़ो के जिस विशाल और समृद्ध पशुपति महालय को देखकर प्रतनु ने दांतो तले अंगुलि दबा ली थी, वह महालय इस प्रासाद की भव्यता और विशालता के सामने कुछ भी नहीं था। प्रासाद के गगनोन्नत तोरण द्वार में प्रवेश करने के पश्चात् प्रतनु को विस्तृत प्रांगण दिखाई […] - [आर्य सुरथ का चिंतन (20)](https://bharatkaitihas.com/contemplation-of-arya-surath/): जनपदों की संगठित शक्ति न केवल असुरों से अपनी रक्षा करने में समर्थ होगी अपितु असुरों का दमन भी कर सकेगी। इन्हीं विचारों में डूबते उतरते जाने कब गोप सुरथ की आँख लगी और आर्य सुरथ का चिंतन कब समाप्त हुआ, उन्हें पता ही नहीं चला। दिन भर के संग्राम के पश्चात् जहाँ अन्य आर्य […] - [रानी मृगमंदा (21)](https://bharatkaitihas.com/queen-mrigmanda/): प्रतनु ने धरती पर घुटने टेककर रानी मृगमंदा का अभिवादन किया। प्रतनु ने अनुभव किया कि इस पूरे वार्तालाप में रानी मृगमंदा एक भी शब्द नहीं बोली है। हिन्तालिका और निर्ऋति ही उसकी तरफ से प्रश्न पूछती रही हैं। अमल-धवल प्रासाद के केन्द्रीय कक्ष में प्रवेश करते ही प्रकाश से आंखें चुंधिया गयीं प्रतनु की। […] - [जनपदों की ओर (22)](https://bharatkaitihas.com/towards-districts/): आर्य सुरथ ने अपनी बात पूरी करते-करते अनुभव किया कि अब आर्यों को जन से जनपदों की ओर ले जाने का समय आ गया है। लघु जनों की अपेक्षा वृहद् जनपदों में ही आर्य प्रजा सुरक्षित रह सकती है। गोप सुरथ ने सभा में अपना मंतव्य प्रस्तुत किया- ‘जिस प्रकार समस्त आर्य प्रजा परिवार में, […] - [तीसरा प्रश्न (23)](https://bharatkaitihas.com/third-question/): प्रतनु रानी मृगमंदा के तीसरे प्रश्न का उत्तर पा चुका है। वह दबे पांव अपने प्रासाद में लौट आया। तीसरा प्रश्न अनायास ही सुलझ गया था। नागों के इस विवर में अघोषित अतिथि के रूप में रहते हुए प्रतनु को कई दिन हो गये हैं। अघोषित अतिथि के रूप में वह विविध प्रकार का आनंद […] - [राजन् (24)](https://bharatkaitihas.com/king/): मैं वैवस्वत मनुपुत्र सुरथ, आर्य प्रजा के कल्याण के लिये और आर्य जनपदों को संगठित करने के लिये जनपति अर्थात् राजन् होना स्वीकार करता हूँ। आज प्रातःकालीन अग्निहोत्र के तत्काल पश्चात् विशेष समिति का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर निकटवर्ती आर्य जनों से भी अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। देवों के निमित्त […] - [घोषित अतिथि (25)](https://bharatkaitihas.com/announced-guest/): रानी मृगमंदा का घोषित अतिथि बन जाने के बाद प्रतनु को नागों के पुर में विशेष अधिकार प्राप्त हो गये। अब वह कहीं भी बिना रोक-टोक जा सकता था। प्रतनु ने अनुभव किया कि न केवल रानी मृगमंदा और उसकी सखियाँ अपितु समस्त नाग अनुचर, सैनिक एवं प्रहरी भी प्रतनु को विशेष सम्मान देते हैं। […] - [तूर्य (26)](https://bharatkaitihas.com/basset-horn/): नाग कुमारियों ने आज तूर्य [1] का आयोजन किया था। रानी मृगमंदा ने शिल्पी प्रतनु को भी इसमें सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया। सैंधवों में तूर्य आयोजित करने की परम्परा नहीं है इस कारण प्रतनु के लिये इस तरह का आयोजन देखने का पहला ही अवसर था।  रानी मृगमंदा ने बताया कि तूर्य समारोह में […] - [गरुड़ों का आक्रमण (27)](https://bharatkaitihas.com/garuda-invasion/): हम पर गरुड़ों का आक्रमण हुआ है। गरुड़ सैन्य ने रात्रि के अंधकार में दुर्ग तोड़ लिया है। सैंकड़ों गरुड़ दुर्ग में प्रवेश कर गये है। जाने कैसे उन्हें दुर्ग के गुप्त मार्ग का ज्ञान हुआ। प्रातः होने में अभी पर्याप्त समय शेष था, जब प्रतनु की निद्रा विचित्र कोलाहल के कारण भंग हो गयी। […] - [रानी मृगमंदा का प्रस्ताव (28)](https://bharatkaitihas.com/proposal-of-queen-mrigamanda/): रानी मृगमंदा का प्रस्ताव सुनकर गुल्मपति चौंका था किंतु अब समय आ गया था जब प्रतनु के विरुद्ध कुछ न कुछ बोलना आवश्यक था। अतः उसने रानी मृगमंदा से अनुमति मांगी कि उसे भी कुछ बोलने का अवसर दिया जाये। शत्रुओं के हाथ में लगभग जा चुके दुर्ग को पुनः हस्तगत करने के पश्चात रानी […] - [अतिथि की विदाई (29)](https://bharatkaitihas.com/guest-farewell/): अतिथि की विदाई की बात सुनकर रानी मृगमंदा हतप्रभ रह गई। उसे लगा कि रानी मृगमंदा के द्वारा ऩिऋित के माध्यम से दिए गए विवाह का प्रस्ताव सुनकर ही प्रतनु यहाँ से जाना चाहता है। घटनायें इतनी अप्रत्याशित गति से घटित हुईं कि निर्ऋति प्रतनु के प्रतिज्ञाबद्ध होने तथा सैंधव नृत्यांगना के प्रति अनुरक्त होने […] - [पिशाच (30)](https://bharatkaitihas.com/vampire/): प्रतनु ने अपने नेत्र पूरी तरह खोल दिये। श्वान-मुखी मादा पिशाच की पूर्णतः निर्वस्त्र वीभत्स देह प्रतनु की देह पर पूरी तरह झुकी हुई थी। उसने अपनी दोनों हथेलियाँ प्रतनु के शरीर पर ही टिका रखी थीं जिससे उसके लटकते हुए वीभत्स स्तन प्रतनु के शरीर को स्पर्श कर रहे थे। उषा के आगमन के […] - [अश्वारोहियों से भेंट (31)](https://bharatkaitihas.com/meeting-with-horsemen/): पिशाचों के बीच से पूर्णतः निर्वस्त्र अवस्था में प्राण बचाकर भागे प्रतनु की अश्वारोहियों से भेंट हुई तो प्रतनु को अपने प्राण फिर से संकट में प्रतीत होने लगे। बाल-बाल बचा प्रतनु। आर्यों का एक अश्वारोही दल काफी तीव्र गति से घोड़े फैंकता हुआ उन्हीं सघन वृक्षों के नीचे आकर रुका जिनकी छाया में प्रतनु […] - [पुनः मोहेन-जो-दड़ो में (32)](https://bharatkaitihas.com/again-in-mohen-jo-daro/): मोहेन-जो-दड़ो से प्रतनु के निष्कासन की अवधि समाप्त होने में अभी कुछ दिन शेष थे। नियमानुसार वह दो वर्ष से पूर्व पुनः मोहेन-जो-दड़ो में प्रवेश नहीं कर सकता था किंतु उसमें इतना धैर्य नहीं रह गया था कि वह नगर से बाहर रुककर अवधि पूर्ण होने की प्रतीक्षा करे। जिस समय प्रतनु मोहेन-जो-दड़ो के नगरद्वार […] - [किलात से भेंट (33)](https://bharatkaitihas.com/meeting-with-kilaat/): शिल्पी प्रतनु और नृत्यांगना रोमा ने सावधानी से कई बार काल गणना की और आश्वस्त हो जाने पर कि प्रतनु के निष्कासन की दो वर्ष की अवधि पूर्ण हो गयी है, प्रतनु ने आज ही किलात से भेंट करने का निर्णय लिया। पशुपति महालय के प्रातःकालीन पूजन के पश्चात् प्रतनु किलात की सेवा में उपस्थित […] - [नृत्यांगना की घोषणा (34)](https://bharatkaitihas.com/announcement-from-dancer/): मोहेन-जो-दड़ो के वातावरण में आज सनसनी है। पुरवासियों में इतनी सनसनी और इतनी उत्तेजना तो उस दिन भी नहीं थी जिस दिन देवी रोमा की निर्वसना प्रतिमा किसी अज्ञात शिल्पी ने नगर के मुख्यमार्ग पर लाकर रख दी थी। जिसने भी नृत्यांगना की घोषणा के बारे में सुना अवसन्न रह गया। भला यह कैसे संभव […] - [चतुरंगिणी (35)](https://bharatkaitihas.com/four-division-army/): चैथा अंग पदाति सैनिकों का था। यह अंग चतुरंगिणी का सबसे बड़ा और सबसे मुख्य अंग था। शेष अंग एक तरह से इसी अंग की सहायता के लिये संगठित किये गये थे। राजन् सुरथ ने ऊँची टेकरी पर चढ़कर चतुरंगिणी[1] का अवलोकन किया। चारों दिशायें आर्य सैनिकों से आप्लावित थीं। राजन् सुरथ तथा सेनप सुनील […] - [अमंगल की आशंका (36)](https://bharatkaitihas.com/apprehension-of-danger/): अमंगल की आशंका पुरवासियों के मन में घर कर गयी है। यदि मातृदेवी गर्भवती न हुई तो! वह एक क्षुद्र शिल्पी से कैसे गर्भवती होना स्वीकार करेगी! मोहेन-जो-दड़ो वासी एक बार फिर उत्तेजित हैं। इस बार युवकों की अपेक्षा बड़े बूढ़ों में अधिक बेचैनी है। देवी रोमा द्वारा प्रचारित घोषणा के एक दिन बाद स्वामी […] - [जयघोष (37)](https://bharatkaitihas.com/acclamation/): सेनप सुनील ने पुर की प्राचीर पर खड़े होकर अपना विकराल खड्ग मुक्त भाव से आकाश में लहराया और उच्च स्वर में जयघोष किया- ‘कृण्न्वतो विश्वम् आर्यम्।’ समस्त आर्य वीरों ने सेनप सुनील का जयघोष सुनकर हर्षध्वनि की और जो जहाँ स्थित था, वहीं से उसने अपने शस्त्र हवा में लहराये। आर्य चतुरंगिणी कई दिनों […] - [चन्द्रवृषभ (38)](https://bharatkaitihas.com/chandravrishabh/): भूदेवी को गर्भवती बनाने वाले चन्द्रवृषभ  की भूमिका में शिल्पी प्रतनु यथा समय उपस्थित हुआ। आज उसके लिये कठिन परीक्षा की घड़ी थी। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मोहेन-जोदड़ो वासियों एवं सैंधव प्रदेश के विभिन्न भागों से आये सैंधवों की सुविधा के लिये पशुपति महालय परिसर में विशाल वितान बनाया गया था जो […] - [प्लावन (39)](https://bharatkaitihas.com/natation/): यह एक सुखद संयोग ही था कि आर्यों को इतना ऊँचा और विशाल बालुका स्तूप मिल गया था अन्यथा इस प्लावन में उनका नष्ट हो जाना निश्चित था। कुभा, सुवास्तु क्रुमु, तथा गोमती आदि नदी-तटों को पीछे छोड़कर चतुरंगिणी पुनः सिंधु-नद के तट पर लौट आयी। असुरों के विरुद्ध उसका अभियान पूरा हो गया था। […] - [मेलुह्ह (40)](https://bharatkaitihas.com/meluhh/):   – ‘वह जो भित्ती दिखायी दे रही है, वही मेलुह्ह पुर की प्राचीर है। लगभग एक प्रहर में हम वहाँ होंगे। हमारे स्पश आज प्रातः ही वहाँ पहुँच गये थे। किसी भी क्षण वे हमें लौटते हुए मिलेंगे।’ सेनप सुनील ने अपना अश्व आर्य सुरथ के अश्व के बराबर लाते हुए कहा। लगभग पूरे […] - [मणिपर्यंक (41)](https://bharatkaitihas.com/bed-of-pearls/): चक्रवर्ती सम्राट सुरथ को लगा वे सिंधु की स्तुति नहीं कर रहे, वे तो शिल्पी प्रतनु को अर्घ्य दे रहे हैं जो नृत्यांगना रोमा के साथ सिंधु तट पर बिछे इतिहास के मणिपर्यंक पर सदा-सर्वदा के लिये शैय्यासीन हो गया है। ऋषिश्रेष्ठ सौम्यश्रवा ने यज्ञकुण्ड में आहुति देकर अपने विशाल नेत्र खोले। आज दीर्घकाल के पश्चात् […] - [प्रस्तावना - चित्रकूट का चातक](https://bharatkaitihas.com/preface-chitrakoot-ka-chatak/): प्रस्तावना – चित्रकूट का चातक पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित ऐतिहासिक उपन्यास चित्रकूट चातक की पृष्ठभूमि स्पष्ट की गई है। अब्दुर्रहीम खानखाना की पहचान आज के भारत में एक ‘संत-कवि’ की है। इसीलिये हिन्दू उन्हें रहीमदासजी कहते हैं। विगत चार सौ वर्षों से वे करोड़ों हिन्दी भाषी भारतीयों के लिये श्रद्धा के पात्र […] - [इंसानी खून का रंग (1)](https://bharatkaitihas.com/human-blood/): इस उपन्यास की कहानी हमें बताती है कि इंसानी खून का रंग किस तरह मानव को मानवता का दुश्मन बनाकर उसे दानवता की ओर ले जाता है। संसार में इंसानी खून का रंग हर जगह लाल है किंतु उसकी ताकत हर जगह अलग है। जब इंसानी खून की ताकत जोर मारती है तो इंसान, इंसान […] - [चन्द्रवंशी राजा ययाति (2)](https://bharatkaitihas.com/descendants-of-yayati/): हिन्दुओं में मान्यता है कि चन्द्रवंशी राजा ययाति के बेटे ‘तुरू’ के वंशज आगे चलकर ‘तुर्क’ कहलाये। कई पुराणों में राजा ययाति की कथा मिलती है। इस कथा का सर्वप्रथम उल्लेख महाभारत में हुआ है जिसके अनुसार राजा ययाति के दो विवाह हुए। पहला विवाह दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी से और दूसरा […] - [लाओ शंग (3)](https://bharatkaitihas.com/lao-shang/): लाओ शंग ने यू-ची राजा को मार डाला तथा उसकी खोपड़ी निकलवाकर अपने महल में ले गया। उसके बाद लाओ-शंग ने जीवन भर उसी खोपड़ी में पानी पिया। चीन के उत्तर में मंगोलिया का विशाल रेगिस्तान है। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र में कई बर्बर जातियाँ निवास करती थीं। इन बर्बर जातियों का […] - [बगदाद के खलीफा (4)](https://bharatkaitihas.com/khalifa-of-baghdad/): तुर्की गुलामों द्वारा खलीफाओं के तख्त उलट दिए गए तथा तुर्की गुलाम स्वयं बगदाद के खलीफा बन गए। इस्लाम के इतिहास में बगदाद के खलीफा बड़े प्रसिद्ध हुए। यू-ची गोबी प्रदेश छोड़कर नान-शान प्रदेश में चले गये किंतु यहाँ भी हूणों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 140 ई.पू. में हूणों की वू-सुन शाखा के राजकुमार […] - [भारत पर मुस्लिम आक्रमण (5)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): भारत पर मुस्लिम आक्रमण ऐसे समय में हुए जब भारत का वैभव अपने चरम पर था किंतु भारत भूमि छोटे-छोटे राज्यों में बंटी हुई थी। ई. 712 में मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया। वह पहला मुस्लिम आक्रांता था जिसने भारत की भूमि पर पैर रखा था। उसने सिंध के राजा दाहिर सेन […] - [रक्त और मांस का पिण्ड (6)](https://bharatkaitihas.com/ball-of-blood-and-flesh/): दिलम बोल्डक के तुर्क बादशाह ने रक्त और मांस का पिण्ड लेकर पैदा होने वाले इस इस अजीब शैतानी बालक का नाम रखा- चंगेजखाँ। 1155 ईस्वी की एक सुबह। ओमन नदी का शांत जल प्रतिदिन की भांति अपनी मंथर गति से प्रवाहित हो रहा था। उसके निर्मल जल में सहस्रों रूपहली मछलियाँ और जलमुर्गियाँ अठखेलियां […] - [स्तब्ध परमात्मा (7)](https://bharatkaitihas.com/stunned-god/): इंसान की खूनी ताकत अपने ही जैसे दूसरे इंसानों का खून बहता हुआ देखकर पैशाचिक अट्टहास करती थी और अपने ही बनाये हुए पुतले की क्रूरता को देखकर स्तब्ध परमात्मा पूरी तरह मौन एवं अदृश्य था। चंगेजखाँ पहला मंगोल था जिसने भारत पर आक्रमण किया। उन दिनों दिल्ली पर मुहम्मद गौरी के गुलाम के गुलाम, […] - [लंगड़ा दैत्य (8)](https://bharatkaitihas.com/lame-monster/): समरकंद से एक लाख घुड़सवारों की सेना लेकर एक लंगड़ा दैत्य भारत की ओर चल पड़ा है। वह सिंधु नदी पार कर चुका है और कुछ दिनों में पंजाब पहुँचने वाला है। वह जिस गाँव से गुजरता है, उस गाँव में किसी को जीवित नहीं छोड़ता। दीना ने भरी दुपहरी में अपने सिर से घास […] - [मृतकों के नगर (9)](https://bharatkaitihas.com/cities-of-dead/): कई महीनों तक दिल्ली में किसी पक्षी तक ने पर नहीं मारा फिर बेबस आदमी का तो कहना ही क्या था। चीलों, गिद्धों एवं सियारों को भी मृतकों के नगर साफ करने में कई महीने लग गए। यह तो नहीं कहा जा सकता कि इतिहास की वह कौनसी तिथि थी जब मंगोलों ने इस्लाम स्वीकार […] - [खूनी ताकतों का संगम (10)](https://bharatkaitihas.com/confluence-of-bloody-forces/): इस प्रकार बाबर की धमनियों में मध्य ऐशिया की दो खूनी ताकतों का संगम हो गया था। इन खूंखार आक्रांताओं में से एक का नाम चंगेज खाँ और दूसरे का नाम तैमूर लंग था। तैमूर लंगड़े का चौथा वंशज मिर्जा उमर शेख अपने बाप-दादों की तरह परम असंतोषी जीव था। वह फरगना[1]  का शासक था […] - [दिखकाट की बुढ़िया (11)](https://bharatkaitihas.com/old-lady-of-dikhkat/): दिखकाट की बुढ़िया ने पूरी रात जागकर बाबर को देवभूमि भारत की सम्पन्नता और तैमूर लंग की क्रूरता के किस्से सुनाये। इन किस्सों को सुनकर बाबर के आश्चर्य का पार न रहा। – ‘यह कौनसा गाँव है?’ पहले नौजवान ने अपने माथे पर छलक आये पसीने को अपने सिर की पगड़ी के कपड़े से पौंछते […] - [फिर से बादशाही (12)](https://bharatkaitihas.com/crownship-again/): फिर से बादशाही मिलने के बाद बाबर ने एक बार फिर से अपने बाप-दादों के राज्य पर अधिकार करने का प्रयत्न किया और ईरान के शाह से सहायता मांगी। भाग्य ने बाबर की शीघ्र ही फिर से सुधि ली। जब बाबर के शत्रु शैबानी खाँ ने कुन्दुज के शासक खुसरो शाह को हरा कर उसकी […] - [कराकूयलू (13)](https://bharatkaitihas.com/karakuylu/): तुर्कों की कई प्रबल शाखायें हुई जिन्होंने अलग-अलग स्थानों पर अपने राज्य कायम किये। जो ‘तुर्क’ तुर्किस्तान से आकर ईरान में बस गये थे, उन्हें तुर्कमान कहा जाता था। तुर्कमानों का जो कबीला काली बकरियां चराता था वह कराकूयलू कहलाता था। तुर्की भाषा में ‘करा’ काले को कहते हैं, ‘कूय’ माने बकरी और ‘लू’ का […] - [देवभूमि की ओर (14)](https://bharatkaitihas.com/towards-land-of-deities/): बाबर ने अपनी सात सौ तोपों को गाड़ियों पर रखवाया। और सेना को हिन्दुस्तान की ओर कूच करने का आदेश दिया। सैंकड़ों गाड़ियों को देवभूमि भारत की ओर बढ़ते हुए देखकर बाबर की खूनी ताकत हिलोरें लेने लगी। बाबर को अपनी खूनी ताकत पर पूरा भरोसा था जिसके बल पर वह अपना भाग्य नये सिरे […] - [कोहिनूर (15)](https://bharatkaitihas.com/kohinoor/): हुमायूँ ने बड़े जोर-शोर से बाप का स्वागत किया और लूट में प्राप्त हजारों कीमती पत्थरों के साथ कोहिनूर हीरा भी भेंट किया। बाबर ने इस करामाती हीरे के बड़े किस्से सुने थे। उसे अपने भाग्य पर विश्वास नहीं हुआ कि एक दिन वह खुद इस हीरे का मालिक होगा! बाबर ने भारत पर चार […] - [काले पन्ने (16)](https://bharatkaitihas.com/black-pages/): पूरे चार सौ सालों से सैंकड़ों हिन्दू नरेश और लाखों हिन्दू वीर अपने आराध्य की जन्मभूमि को फिर से प्राप्त करने के लिये प्राणों की आहुतियाँ दे रहे हैं। इन युद्धों में मीरबाकी के बहुत से शिलालेख नष्ट हो गये किंतु इतिहास के काले पन्ने मीरबाकी की क्रूरताओं के किस्से आज तक कहते हैं। बाबर […] - [अस्सी घाव (17)](https://bharatkaitihas.com/eighty-wounds/): राणा ने अपने शत्रुओं का जी भर कर मान मर्दन किया किंतु इन लड़ाईयों में उसके शरीर के हर हिस्से पर घाव लग गये। उसके शरीर पर कुल अस्सी घाव थे। वह एक आँख, एक हाथ और एक पैर से वंचित हो गया था किंतु उसकी शक्तियाँ अब भी उसके पास थीं। राजस्थान में मेवाड़ […] - [प्रसाद (18)](https://bharatkaitihas.com/holy-offerings/): राजकुमार विक्रमादित्य ने अपने पिता महाराणा संग्राम सिंह से अपनी बड़ी भाभी मीराबाई की शिकायत की कि मीरा बाई प्रसाद लेने से मना कर रही हैं। क्योंकि मीराबाई की दृष्टि में यह प्रसाद नहीं भैंसे का मांस है। – ‘प्रसाद का अपमान! भाभीसा, आप तो स्वयं को भगवान की भक्त कहती हैं!’ विक्रमादित्य ने चीख […] - [प्रस्थान (19)](https://bharatkaitihas.com/departure/): जब महाराणा सांगा ने बाबर से युद्ध करने के लिए चित्तौड़ से प्रस्थान किया तो उन्होंने महाराणी द्वारा तिलक किए जाने के बाद मीराबाई के हाथों से भी तिलक करवाया। सांगा का मन मीरा के भविष्य को लेकर उद्वेलित था। जब महाराणा सांगा ने देखा कि बाबर ने देखते ही देखते दिल्ली और आगरा पर […] - [खानुआ (20)](https://bharatkaitihas.com/khanua/): जिस दिन बाबर का मुख्य सेनापति अपने प्रथम सैनिक दस्ते के साथ खानुआ पहुँचा उसी दिन राणा सांगा ने बाबर पर आक्रमण किया। अरावली की उपत्यकाओं से निकलने वाली गंभीरी नदी की विपुल जल राशि आज भले ही काल के गाल में समा चुकी है किंतु उन दिनों अपने नाम के अनुरूप सचमुच ही वह […] - [बैरमबेग (21)](https://bharatkaitihas.com/bairambeg/): चांदनी के उजाले में पहली ही नजर में बादशाह को चालीसवाँ सिपाही जंच गया। सचमुच ही वह रात बैरमबेग की थी। उसके बुद्धि चातुर्य से हुमायूँ ने मात्र तीन सौ सिपाहियों के बल पर उसी रात फतह हासिल कर ली। बाबर अपना टूटे हुए दिल में नाउम्मीदियों का समुद्र भर कर ट्रांसआक्सियाना से अफगानिस्तान लौटा […] - [विषपान (22)](https://bharatkaitihas.com/poisoning/): मीरा ने दासी के हाथ से प्याला लेकर विषपान किया और हंस कर बोली जब राणाजी कहते हैं कि यह गिरिधर गोपालजी का चरणामृत है तो असत्य नहीं कहते हैं। यदि विष होता तो मैं जीवित थोड़े ही रहती। राणा सांगा की सारी आशंकायें सही सिद्ध हुई थीं। वह स्वयं युद्ध भूमि से लौट कर […] - [मुसलमानों के प्रमुख त्यौहार](https://bharatkaitihas.com/middle-class-indian-society-social-institutions-and-customs-part-four/): मध्यकालीन भारत के मुस्लिम समाज में मुहर्रम, मीलाद उन-नबी, सबे-उल-फितर और ईद-उल-जुहा मुसलमानों के प्रमुख प्रमुख त्यौहार थे। मध्य-कालीन मुस्लिम समाज इन त्यौहारों को बड़ी श्रद्धा से मनाता था। मुहर्रम के पहले दस दिनों में शिया मुसलमान शोक मनाते थे। शिया अनुश्रुतियों के अनुसार हज़रत अली और उनके दो पुत्र-हसन और इमाम हुसैन, दीन की […] - [भारतीय कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): भारतीय कला चाहे वह शिल्पकला हो, मूर्तिकला हो, चित्रकला हो, संगीत कला हो या फिर और किसी भी प्रकार की कला हो, वह अपने माधुर्य, लावण्य एवं कला के चरमोत्कर्ष के लिए जानी जाती है। ई. बी. हावेल ने लिखा है- किसी भी राष्ट्रीय कला का वास्तविक मूल्यांकन करते समय हमें यह विचार नहीं करना […] - [भारतीय मूर्ति कला](https://bharatkaitihas.com/indian-sculpture/): ई. बी. हावेल ने भारतीय मूर्ति कला की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि सर्वोत्तम भारतीय मूर्ति सर्वोत्तम यूनानी मूर्ति की अपेक्षा अनुभूति के गहनतर स्वर और उत्कृष्ट मनोभावों को स्पर्श करती है।                      सिन्धु सभ्यता कालीन भारतीय मूर्ति कला सैन्धव सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता के काल से ही आग में पकी हुई मिट्टी की मूर्तियाँ, […] - [भारत के शैलचित्र](https://bharatkaitihas.com/rock-paintings-of-india/): भारत के शैलचित्र कम से कम बीस हजार साल पुराने हैं। ये भारत के लगभग समस्त प्रांतों में स्थित पहाड़ियों की गुफाओं में मिलते है। भारत के शैलचित्र इस बात की गवाही देते हैं कि भारत की सभ्यता कितनी पुरानी है। भारत के शैलचित्र के सबसे प्राचीन साक्ष्य आदिमकालीन गुफाओं से मिलते हैं। आदिम युगीन […] - [भारत की चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/painting-of-india-part-one/): भारत की चित्रकला अत्यंत प्राचीन है। भारत के धर्मशास्त्रों तक में चित्रकला का उल्लेख मिलता है। इन उल्लेखों से मानव समाज पर चित्रकला के प्रभाव की जानकारी मिलती है। कलाओं में चित्रकला सबसे ऊँची है जिसमें धर्म, अर्थ, काम एवम् मोक्ष की प्राप्ति होती है। अतः जिस घर में चित्रों की प्रतिष्ठा अधिक रहती है, […] - [मुस्लिम चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): भारत की मुस्लिम चित्रकला को दो भागों में बांटा जा सकता है- दिल्ली सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला तथा मुगल सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला। निश्चित रूप से भारत की मुस्लिम चित्रकला पर हिन्दू शैलियों का भी प्रभाव है। दिल्ली-सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला मूर्ति-पूजा करना और मनुष्यों के चित्र एवं मूर्तियाँ बनाना इस्लाम में वर्जित है। क्योंकि […] - [राजपूत चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/painting-of-india-part-two/): राजस्थान में मुगल शासकों के काल में विकसित हुई चित्रकला शैलियों को राजपूत चित्रकला के अंतर्गत रखा जाता है। राजपूत चित्रकला पर मुगल एवं ईरानी शैलियों का प्रभाव है। राजस्थान में अत्यंत प्राचीन काल से अब तक विकसित हुई चित्रकला की समृद्ध धारा के प्रवाह को देखा जा सकता है। कोटा जिले के आलणियां, दरा, […] - [मौर्य कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-one/): मौर्य कालीन स्थापत्य कला में स्तूपों का स्थान भी महत्वपूर्ण है। स्तूप ईंटों तथा पत्थरों के ऊँचे टीले तथा गुम्बदाकार स्मारक हैं। कुछ स्तूपों के चारों ओर पत्थर, ईंटें अथवा ईंटों की जालीदार बाड़ लगाई गई है। ‘वास्तु’ शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की ‘वस्’ धातु से हुई है जिसका अर्थ ‘बसना’ होता है। बसने […] - [हिन्दू स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-two/): हिन्दू स्थापत्य कला अत्यंत प्राचीन काल में विकसित हुई जिसमें देवालय, राजप्रासाद, दुर्ग, जलाशय, उद्यान आदि के भवन बनाए जाते थे। मौर्य काल के बाद हिन्दू स्थापत्य कला का तेजी से विकास हुआ। हिन्दू स्थापत्य कला दो रूपों में मिलती है- (1.) निजी उपयोग के भवन, (2.) सार्वजनिक उपयोग के भवन। निजी उपयोग के भवन […] - [राजपूत स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-three/): राजपूत स्थापत्य कला हिन्दू स्थापत्य कला का ही प्रमुख अंग है। राजपूत राजाओं के काल में विकसित इस स्थपत्य कला पर मुगल कला का भी न्यूनाधिक प्रभाव है। उत्तर भारत में बने अनेक देवालय, राजप्रासाद, दुर्ग, जलाशय, उद्यान आदि राजपूत स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। भारत के इतिहास में 7वीं से 12वीं सदी तक […] - [खजुराहो मंदिर शैली](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80/): खजुराहो मंदिर शैली हिन्दू स्थापत्य कला का ही प्रमुख अंग है। इस शैली के मंदिर चंदेल राजपूत राजाओं के काल में खजुराहो में बनाए गए थे। इसलिए इसे खजुराहो मंदिर शैली कहा जाता है। इस शैली के मंदिर मुख्यतः दसवीं से बारहवीं शताब्दी ईस्वी के बीच बने थे। खजुराहो मंदिर शैली मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले […] - [कलिंग मंदिर शैली](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80/): उड़ीसा का स्थापत्य प्राचीनकाल में विकसित कलिंग वास्तुकला शैली में निर्मित है। उड़ीसा के मंदिर कलिंग मंदिर शैली के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। कोणार्क का सूर्य मंदिर कोणार्क का सूर्य मंदिर 13वीं शताब्दी ईस्वी में गंगा राजवंश के राजा नरसिंघेव (प्रथम) ने बनवाया था। यह कलिंग शैली में बना है तथा भगवान बिरंचि-नारायण (सूर्य) को […] - [हिन्दू दुर्ग स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हिन्दू दुर्ग स्थापत्य अत्यंत प्राचीन काल से अस्तित्व में है। ऋग्वेद में इंद्र को पुरंदर कहा गया है जिसका अर्थ दुर्ग का राजा होता है। अर्थात् ऋग्वैदिक काल में भी भारतीयों को दुर्ग बनाने एवं उसमें रहने के महत्व का ज्ञान था। ‘दुः’ का तात्पर्य दुष्कर (कठिन) से है तथा ‘ग’ का तात्पर्य गमन करने […] - [हिन्दू जल स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हिन्दू जल स्थापत्य अथवा जल संग्रहण स्रोतों की स्थापत्य कला अत्यंत प्राचीन काल से ही उन्नत दशा में थी। भारत में जल को देवता के रूप में सम्मान दिया जाता था और जल की पूजा की जाती थी इसलिए जलाशयों को तीर्थ की तरह पवित्र बनाया जाता था। भारत में सार्वजनिक उपयोग हेतु कुओं, तालाबों, […] - [इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला](https://bharatkaitihas.com/indo-saracenic-architecture-and-architecture/): दिल्ली सल्तनत काल में मुस्लिम शासकों द्वारा भारत में बनाए गए भवनों की कला को मुस्लिम कला, तुर्क स्थापत्य कला एवं इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला कहा जाता है। यह कला भारत में प्रचलित प्राचीन हिन्दू स्थापत्य एवं मध्यकालीन राजपूत स्थापत्य से तो अलग थी ही, तुर्कों के बाद स्थापित होने वाली मुगल स्थापत्य कला से भी अलग […] - [हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य में अंतर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मध्यकालीन हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य का अंतर बहुत स्पष्ट है। इस काल में हिन्दू स्थापत्य को बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त किया गया तथा हिन्दू भवनों को तोड़कर उसी सामग्री से मुस्लिम स्थापत्य का निर्माण किया गया। बारहवीं शताब्दी ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ ही भारत में मुस्लिम स्थापत्य कला का प्रवेश हुआ। दिल्ली सल्तनत […] - [मुगल स्थापत्य कला की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-one/): मुगल स्थापत्य कला मुगलों के साथ भारत में नहीं आई थी। इसका विकास भारत में आने के बाद हिन्दू एवं फारसी शैलियों के मिश्रण से हुआ। ई.1526 में मंगोल-वंशी बाबर भारत में अपनी सत्ता स्थापित करने में सफल हो गया। भारत में बाबर तथा उसके वंशज ‘मुगलों’ के नाम से जाने गए। बाबर के वंशज […] - [बाबर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-two/): बाबर कालीन स्थापत्य मस्जिद एवं मकबरों के निर्माण तक सीमित था। बाबर एक क्रूर विध्वंसक था, इसलिए उसने भगवान श्रीराम का जन्मभूमि मंदिर तोड़कर वहाँ भी मस्जिद बनवाई। ई.1526 में बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को परास्त करके दिल्ली एवं आगरा पर अधिकार कर लिया। इसके बाद बाबर ने खानवा, चंदेरी […] - [हुमायूँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हुमायूँ कालीन स्थापत्य कुछ मस्जिदों तक सीमित था। उसने दिल्ली के पुराने किले में निवास स्थापित करने के लिए उसका परकोटा मरम्मत करवाया तथा वहाँ एक पुस्तकालय भी बनवाया। बाबर के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ ने ई.1533 में दिल्ली में यमुना के किनारे दीनपनाह नामक नवीन नगर का निर्माण आरम्भ करवाया। यह नगर ठीक उसी […] - [अकबर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-three/): अकबर ने भारत में प्रचलित तत्कालीन स्थापत्य शैलियों की बारीकी को समझा और अपने शिल्पकारों को इमारतें बनाने के लिए नये विचार दिये। अकबर कालीन स्थापत्य कला वास्तव में हिन्दू-मुस्लिम शैलियों का समन्वय थी। अकबर कालीन स्थापत्य अकबर ने लगभग 50 वर्ष भारत पर शासन किया। इस अवधि में उसका राज्य काफी विस्तृत हो गया […] - [जहाँगीर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-four/): जहाँगीर कालीन स्थापत्य का सबसे पहला उदाहरण आगरा से बाहर बना हुआ सिकन्दरा का मकबरा है जिसकी योजना स्वयं अकबर ने बनाई थी किंतु इसका निर्माण जहाँगीर ने अकबर की मृत्यु के बाद अपनी निगरानी में करवाया। यह मकबरा परम्परागत इस्लामी शैली का मकबरा नहीं है। जहाँगीर कालीन स्थापत्य जहाँगीर को भवन निर्माण में अकबर […] - [शाहजहाँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-five/): शाहजहाँ कालीन स्थापत्य मुगल शासन काल की स्थापत्य कला का स्वर्णयुग था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँच गई। कुछ इतिहासकारों ने शाहजहाँ को निर्माताओं का शहजादा कहा है। स्थापत्य कला का स्वर्णयुग इतिहासकारों की दृष्टि में शाहजहाँ का शासन-काल स्थापत्य कला का स्वर्णयुग था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम […] - [ताजमहल का स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-six/): मुख्य भवन के बाहर बने इवान, ऊपरी हिस्से में बने गुम्बद तथा इसके चारों ओर बनी मीनारों के आधार पर ताजमहल का स्थापत्य निश्चित रूप से एक मुगल स्थापत्य होने की गवाही देता है किंतु इस भवन का भीतरी भाग हिन्दू स्थापत्य की विशेषताओं से युक्त है। आगरा का ताजमहल, शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई सर्वाधिक […] - [औरंगजेब कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-seven/): औरंगजेब कालीन स्थापत्य सर्वथा गौरवहीन है। इसका मुख्य कारण यह है कि वह कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसे यह पसंद नहीं था कि ऐसा कोई भवन बने जो इस्लाम की सादगी के सिद्धांत के विरुद्ध हो। औरंगजेब के पिता शाहजहाँ तथा औरंगजेब के तीनों भाई चित्रकला, संगीतकला तथा स्थापत्य में रुचि रखते थे। औरंगजेब की […] - [ब्रिटिश कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): ब्रिटिश अधिकारियों ने भारत में अनेक विशाल भवन बनाए जिनमें भारतीय एवं मुस्लिम स्थापत्य शैलियों के साथ यूरोपीय स्थापत्य शैलियों का भी समावेश किया। इसे ब्रिटिश कालीन स्थापत्य कह सकते हैं। सत्रहवीं शताब्दी ईस्वी में अंग्रेज, पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी आदि यूरोपीय जातियों ने भारत में प्रवेश किया। उन्होंने यूरोपियन शैली के कुछ चर्च, फोर्ट एवं […] - [दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य एवं द्रविड़ शैली](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-one/): दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य से तात्पर्य दक्षिण भारत के मंदिर स्थापत्य एवं शैलियों से है जो प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल एवं आधुनिक काल में विकसित हुई हैं। दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य अपने आप में कितना अद्भुत है, इसका अनुमान प्रो. हीरेन के इस कथन से हो जाता है कि महाबलिपुरम् के कोरोमण्डल तट पर […] - [पल्लव मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-two/): गुप्तकाल एवं उससे पूर्ववर्ती काल में तमिल क्षेत्र को द्रविड़ प्रदेश कहा जाता था। उस काल की मंदिर कला में काष्ठ एवं कंदराओं का अधिक प्रयोग होता था। इसलिए प्रारम्भिक पल्लव शिल्पकारों ने पल्लव मन्दिर स्थापत्य कला में उन्हीं प्रणालियों का उपयोग किया। गुप्तकाल के पराभव के बाद जब छठी शताब्दी ईस्वी में सिंहविष्णु ने […] - [राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4/): राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला दक्षिण भारत की प्रमुख मंदिर स्थापत्य शैलियों में से है। राष्ट्रकूट राजा उत्तर भारत में आने से पहले दक्षिण भारत में शासन करते थे। एलौरा का कैलाश नाथ मन्दिर राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला का सर्वाधिक प्रसिद्ध उदाहरण एलौरा का कैलाश नाथ मन्दिर है। यह स्थान आन्ध्रप्रदेश के औरंगाबाद नगर से 15 […] - [चोल मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): द्रविड़ मंदिर शैली का चरमात्कर्ष चोल मन्दिर स्थापत्य कला में हुआ। चोलों ने पल्लवों और पाण्ड्यों का स्थान लिया था। इसलिए चोलों ने पल्लवों और पाण्ड्यों की स्थापत्य कला को ही आगे बढ़ाया। चोल मन्दिर स्थापत्य कला का कालखण्ड चोल मन्दिरों का निर्माण ई.850 से 1200 तक निरन्तर होता रहा। इन्हें दो वर्गों में रखा […] - [चालुक्य मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): चालुक्य मन्दिर स्थापत्य कला के तीन प्रमुख केन्द्र थे- एहोल, वातापी (बादामी) और पट्टडकल। एहोल में लगभग 70 मन्दिर मिले हैं जिनके कारण इस नगर को ‘मन्दिरों का नगर’ कहते हैं। समस्त मन्दिर गर्भगृह और मण्डपों से युक्त हैं परन्तु छतों की बनावट अलग-अलग है। कुछ मन्दिरों की छतें चपटी हैं तो कुछ की ढलवां। […] - [दक्षिण भारत की मूर्तिकला](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-three/): दक्षिण भारत की मूर्तिकला न केवल दक्षिण के मंदिर स्थापत्य एवं वास्तु आदि का परिचय देती हैं अपितु विभिन्न कालों में दक्षिण भारत की संस्कृति में आ रहे परिवर्तनों की भी सूचना देती है। दक्षिण भारत के मन्दिरों में मन्दिर की बाहरी दीवारों पर इतनी अधिक मूर्तियाँ उत्कीर्ण की गई हैं कि मन्दिर की वास्तुगत […] - [कालीदास](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-kalidas/): वैदिक एवं उत्तरवैदिक धार्मिक ग्रंथों के बाद संस्कृत साहित्य में महाकवि कालीदास को जितनी सफलता मिली, उतनी अन्य किसी कवि को नहीं मिली।  काउण्ट ब्जोन्सर्टजेरेना ने लिखा है कि भारत का साहित्य हमें अतीत काल के महान राष्ट्र से परिचित कराता है जिसका ज्ञान की हर शाखा पर अधिकार था और जो सदा ही मानव […] - [संत तुलसीदास का साहित्य](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-tulsidas/): भारतीय इतिहास के मध्य-काल में तथा आर्य-संस्कृति के लिए सर्वाधिक कठिन समय में संत तुलसीदास आर्य-संस्कृति के प्रतिनिधि कवि हुए। वे हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध और सर्वाधिक प्रतिभाशाली कवि थे। संत तुलसीदास की जीवनी संत तुलसीदास के जीवन के बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं मिलती किन्तु उनके जीवन की बहुत सी घटनाओं से उनके […] - [मीराबाई](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-meerabai/): मध्यकालीन राजस्थान में सगुण-भक्ति-रस की धारा प्रवाहित करने वाले संत-कवियों में सन्त शिरोमणि मीराबाई का नाम सर्वोपरि है। मीराबाई के जन्मकाल की घटनाएं तो मिलती हैं किंतु जन्म-मृत्यु के सम्बन्ध में निश्चित तिथियाँ नहीं मिलती हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने मीरा का जन्म वि.सं. 1573 (ई.1516) में माना है जबकि गौरीशंकर हीराचंद ओझा, हरविलास शारदा […] - [रवीन्द्र नाथ टैगोर](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-robindranath-tegore/): रवीन्द्र नाथ टैगोर का प्रारम्भिक जीवन रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता में हुआ। उनके पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने केशवचंद्र सेन से मतभेद हो जाने के कारण ब्रह्मसमाज से अलग होकर आदि-ब्रह्मसमाज की स्थापना की थी। रवीन्द्रनाथ की माता का नाम शारदा देवी था। रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता […] - [भारतीय पुनर्जागरण](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-one/): अपने आरम्भिक चरण में भारतीय पुनर्जागरण एक बौद्धिक आन्दोलन था जिसने पराधीन भारत के साहित्य, शिक्षा तथा चिंतनधारा को प्रभावित किया तथा जीवन के प्रत्येक अंग का परिष्कार किया। भारतीय सभ्यता, समाज एवं संस्कृति का विकास विश्व की अन्य संस्कृतियों से पूर्णतः पृथक एवं स्वतंत्र रूप से हुआ था। यह विश्व की प्राचीनतम संस्कृति थी […] - [राजा राममोहन राय और उनका ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-two/): राजा राममोहन राय ने शुद्ध एकेश्वरवाद के सिद्धांत पर आधारित ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ब्रह्मसमाज मूलतः भारतीय था और इसका आधार उपनिषदों का अद्वैतवाद था। भारत में धार्मिक और समाजिक आन्दोलनों के प्रवर्तक राजा राम मोहन राय का जन्म ई.1774 में बंगाल के राधानगर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। वे आरम्भ से ही […] - [युवा बंगाल आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): हेनरी लुई विवियन देरीजियो युवा बंगाल आन्दोलन का जनक था। उसने कलकत्ता के विद्यार्थियों को इस संस्था से जोड़कर अंग्रेजी कुशासन के विरुद्ध आंदोलन चलाया। इस कारण अंग्रेज उससे नाराज हो गए।  जनवरी 1817 में कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना, भारत के धर्म और समाज सुधार आन्दोलन के इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटना थी। सार्वजनिक […] - [केशवचन्द्र सेन का भारतीय ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%b5%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8/): केशवचन्द्र सेन ने ई.1866 में भारतीय ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ईसाई धर्म से प्रभावित होने के कारण भारतीय ब्रह्मसमाज ईसा मसीह को पूज्य मानने लगा। केशवचन्द्र सेन द्वारा संत सभा की स्थापना केशवचन्द्र सेन ई.1856 में ब्रह्मसमाज के सदस्य बने। उन्होंने अपने भाषणों तथा लेखों के माध्यम से नवयुवकों को ब्रह्मसमाज की ओर आकर्षित किया। […] - [आत्माराम पाण्डुरंग और प्रार्थना समाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97/): डॉ. आत्माराम पाण्डुरंग ने 31 मार्च 1867 को जस्टिस महादेव गोविन्द रानडे तथा इतिहासकार आर. जी. भंडारकर के साथ मिलकर बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की। प्रार्थना-समाज ब्रह्म-समाज से प्रेरित हिन्दूवादी आंदोलन था। यह प्राचीन वेदों पर आधारित था एवं पूर्णतः आस्तिक विचारधारा पर खड़ा था। आत्माराम पाण्डुरंग केशवचंद्र सेन से बहुत प्रभावित थे। […] - [स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-three/): स्वामी दयानन्द सरस्वती स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म ई.1824 में गुजरात के टंकारा परगने के शिवपुर ग्राम में सम्पन्न एवं रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके बचपन का नाम मूलशंकर था। 14 वर्ष की आयु में उन्होंने एक चूहे को शिवलिंग पर चढ़कर प्रसाद खाते देखा तो उनका मूर्ति-पूजा से विश्वास उठ गया। जब वे […] - [स्वामी श्रद्धानंद का शुद्धि आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-four/): स्वामी श्रद्धानंद का वास्तविक नाम महात्मा मुन्शीराम था। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले स्वामी श्रद्धानन्द कांग्रेस के लिए कार्य करते थे तथा देश भर में आर्य समाज के सिद्धांतों का प्रचार करते हुए लोगों को वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते थे। ई.1901 में मुंशीराम विज ने वैदिक धर्म तथा भारतीयता […] - [रामकृष्ण परमहंस](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-five/): रामकृष्ण परमहंस का जन्म ई.1836 में बंगाल के हुगली जिले में निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ने भारतीयों के समक्ष धर्म के सच्चे स्वरूप को प्रदर्शित किया। रामकृष्ण के बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। उन उन्हें बचपन से ही शिक्षा के प्रति रुचि नहीं थी। वे हर समय धार्मिक चिंतन में मग्न रहते […] - [स्वामी विवेकानन्द](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6/): शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानन्द ने कहा- मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूँ जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं।            स्वामी विवेकानन्द ने हिन्दू-धर्म का प्रतिपादन ब्रह्मसमाज […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80/): थियोसॉफिकल सोसायटी भारत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आन्दोलन था जिसने देश के धार्मिक तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। थियोसॉफी का अर्थ होता है- ‘ईश्वर का ज्ञान।’ संस्कृत में इसे ‘ब्रह्मविद्या’ कहते हैं। थियोसॉ फी  शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग तीसरी शताब्दी ईस्वी में एलेक्जेण्ड्रिया के ग्रीक विद्वान इम्बीकस ने किया था। आधुनिक काल में इस […] - [विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-six/): उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी में हिन्दू समाज में सुधार आंदोलन चले तब वे केवल हिन्दुओं तक सीमित नहीं रहे। अपितु भारत के विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन चले जिनसे उनमें भी नवीन ऊर्जा का आगमन हुआ। भारत में ऐसे कई धार्मिक-सामाजिक सुधार आन्दोलन हुए जिनके कार्य तथा उद्देश्य बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित थे। पारसियों […] - [मुस्लिम सुधार आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/muslim-reform-movement-in-nineteenth-and-twentieth-centuries/): 19वीं शताब्दी में भारत में मुस्लिम सुधार आन्दोलन आरम्भ हुए। मुस्लिम समाज दो प्रमुख वर्गों में विभाजित था- पहला, उच्च अभिजात्य वर्ग जिसमें बादशाह, अमीर तथा उनके परिवार के लोग थे और दूसरा, जन-साधारण जिसमें सैनिक, श्रमिक, सेवक तथा छोटे कार्य करने वाले मुसलमान थे। दूसरे वर्ग में वे मुसलमान भी थे जो मूलतः हिन्दू […] - [समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82/): उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दी ईस्वी में चले समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन करते समय इस बात पर विचार अवश्य किया जाना चाहिए कि उस समय देश पराधीन था और सीमित साधनों के बीच जो भी व्यक्ति या संगठन जितना कुछ भी कर पाया, उसका मूल्य किसी भी तरह कम नहीं था। 19वीं शताब्दी के मध्य में […] - [बाल गंगाधर तिलक का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/bal-gangadhar-tilaks-contribution-to-national-movement/): भारत में उग्र राष्ट्रवाद के जनक बाल गंगाधर तिलक न केवल भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अप्रतिम सेनानी थे अपितु वे महान् विचारक और राजनीतिज्ञ भी थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई ई.1857 की सशस्त्र-क्रांति को माना जाता है जिसे अंग्रेज सैनिक-विद्रोह एवं बगावत कहते थे। इस संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि भारत से […] - [मोहनदास कर्मचंद गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-the-national-movement/): मोहनदास कर्मचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोबंदर में हुआ। उनके पिता कर्मचंद गांधी पोरबंदर, राजकोट और वंकानेर रियासतों के दीवान रहे। गांधीजी ने ई.1914 के बाद भारतीय राजनीति में प्रवेश किया और देश के स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कांग्रेस के माध्यम से राजनीतिक आंदोलनों की एक क्रमबद्ध शृंखला […] - [सुभाष चन्द्र बोस का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/netaji-subhash-chandra-boses-contribution-to-national-movement/): भारत की राजनीति में सुभाष चन्द्र बोस अकेले ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने राष्ट्रसेवा के लिए विभिन्न मोर्चों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने समय की कठिनतम आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की, एक कॉलेज के प्रिंसीपल रहे, एक विशाल सशस्त्र सेना की स्थापना की और उसके अध्यक्ष रहे, वे सैनिक के रूप में युद्ध […] - [आचार्य सुश्रुत](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-sushruta/): भारतीय चिकित्सा में शल्य चिकित्सा के पितामह और सुश्रुत संहिता के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म ई.पू. छठी शताब्दी में काशी में हुआ था। भारतीय संस्कृति को आधुनिक विज्ञान ने अत्यधिक प्रभावित किया है। वैज्ञानिक आविष्कारों ने एक ओर मानव जीवन को सुखी बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है तो दूसरी ओर विश्व के विनाश […] - [महर्षि चरक](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-maharishi-charak/): महर्षि चरक को प्राचीन भारत के आयुर्वेद के महान ज्ञाता के रूप में ख्याति प्राप्त है। कुछ विद्वानों का मत है कि चरक कनिष्क के राजवैद्य थे अर्थात् वे ईसा की प्रथम शताब्दी में हुए परन्तु कुछ लोग उन्हें बौद्ध-काल से भी पहले का मानते हैं अर्थात् वे ई.पू. 600 से भी पूर्व हुए। त्रिपिटक […] - [आर्यभट्ट](https://bharatkaitihas.com/chief-scientist-of-india-aryabhata/): आर्यभट्ट (ई.476-550) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभट्टीय नामक ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इस ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्म-स्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 लिखा है। आर्यभट्ट का जन्म-स्थल कुसुमपुर दक्षिण भारत में था। एक अन्य मान्यता के अनुसार उनका जन्म […] - [वराहमिहिर](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-varahamihira/): वराहमिहिर अथवा वरःमिहिर ईसा की पाँचवीं-छठी शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ थे। उन्होंने अपने ग्रंथ पंचसिद्धान्तिका में सबसे पहले बताया कि अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर है। कापित्थक (उज्जैन) में उनके द्वारा विकसित गणितीय विज्ञान का गुरुकुल सात सौ वर्षों तक अद्वितीय रहा। वे बचपन से मेधावी थे। अपने पिता आदित्य दास […] - [जगदीश चन्द्र बसु](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-jagdish-chandra-basu/): डॉ. (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण खोजें कीं। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त […] - [चन्द्रशेखर वेंकटरमन (सी. वी. रमन)](https://bharatkaitihas.com/chief-scientist-of-india-chandrashekhar-venkataraman/): भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. चन्द्रशेखर वेंकटरमन विश्व भर के भौतिक-विज्ञानियों में विशेष स्थान रखते हैं। वे प्रथम भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्हें विश्व के सर्वोच्च ‘नोबल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। चन्द्रशेखर वेंकटरमन का जन्म 7 नवम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर के पास तिरूवालेक्कावाल गांव में में हुआ। उनके पिता चन्द्रशेखर अय्यर भौतिकी […] - [प्रस्तावना - हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया](https://bharatkaitihas.com/preface-of-hindutva-ki-chhaya-me-indinasia/): प्रस्तावना – हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया पृष्ठ पर पुस्तक की विषय वस्तु को स्पष्ट किया गया है। इस पुस्तक के लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता हैं। अत्यंत प्राचीन काल से भारतीय ऋषि-मुनि मानव मात्र को सुखी बनाने के उद्देश्य से धरती के विभिन्न द्वीपों और दूरस्थ देशों की यात्रा करके अहिंसा, प्रेम, सद्भाव एवं शांति […] - [अनुक्रमणिका - हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया](https://bharatkaitihas.com/index-of-hindutva-ki-chhaya-me-indinasia/): अनुक्रमणिका – हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया पृष्ठ पर इस पुस्तक के अध्यायों का क्रम दिया गया है। इस पृष्ठ पर दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके अध्यायों तक सीधे ही पहुंचा जा सकता है। 1. प्रस्तावना 2. इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ 3. जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास 4. सुमात्रा में बौद्ध धर्मानुयायी श्री विजय राजवंश 5. […] - [इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ (1)](https://bharatkaitihas.com/mythological-references-to-indonesian-islands/): इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ कई पुराणों में मिलते हैं जिनसे ज्ञात होता है कि इन समस्त द्वीपों पर भारतीय ऋषियों का आवागमन होता रहता था। इण्डोनेशिया गणराज्य, दीपान्तर अर्थात् पार-महा-द्वीपीय (ट्रांसकॉन्टीनेन्टल) देश है जो दक्षिण-पूर्व एशिया और ओशिनिया (उष्णकटिबन्धीय प्रशान्त महासागर के द्वीप) क्षेत्रों में स्थित है। भारतीय पुराणों में इसे ”द्वीपान्तर भारत” अर्थात् […] - [जावा द्वीप का इतिहास (2)](https://bharatkaitihas.com/early-history-of-java-island/): जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास यवद्वीप के नाम से मिलता है। भारतीय संस्कृत साहित्य में इस द्वीप का उल्लेख यवद्वीप के नाम से हुआ है जहाँ चावल एवं स्वर्ण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। चीनी संदर्भों में भी जावाद्वीप का इतिहास मिलता है। चीनी पुराणों के अनुसार जावा में लगभग 2 शताब्दी ईस्वी पूर्व में […] - [सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश (3)](https://bharatkaitihas.com/buddhist-dharmanuyayi-sri-vijay-dynasty-in-sumatra/): सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश मूलतः हिन्दू राजवंश था किंतु बाद में इसने बौद्ध मत अंगीकार कर लिया था। इण्डोनेशिया के इतिहास में इस राजवंश का बड़ा महत्व है। प्राचीन भारतीय संस्कृत साहित्य में सुमात्रा द्वीप को स्वर्णदीप तथा स्वर्णभूमि कहा गया है क्योंकि इस द्वीप के ऊपरी क्षेत्रों में स्वर्ण धातु के विशाल भण्डार उपलब्ध […] - [इण्डोनेशिया के मुसलमान (4)](https://bharatkaitihas.com/culture-of-muslims-of-indonesian-islands/): इण्डोनेशिया के मुसलमान पूरी दुनिया के मुसलमानों से अलग हैं। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपनी पुरानी संस्कृति को नष्ट कर दिया है। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपने पुरखों द्वारा अर्जित ज्ञान को अपना शत्रु समझ लिया है। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपने पुरखों के स्थापत्य एवं शिल्प तथा पुस्तकों को आग में […] - [मसाला द्वीपों के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्द्धा (5)](https://bharatkaitihas.com/competition-in-europe-for-trade-with-spice-islands/): पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में इण्डोनेशियाई एवं भारतीय मसाला द्वीपों के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्द्धा हुई जिसने कुछ ही वर्षों में खूनी जंग का रूप धारण कर लिया। यूरोप के बहुत से देश इन मसाला द्वीपों से व्यापार करने एवं इस व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए पूरी दुनिया में एक-दूसरे पर तोपों से गोले […] - [इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम (6)](https://bharatkaitihas.com/independence-struggle-of-indonesia/): इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम ई.1825 में आरम्भ हुआ जब इण्डोनेशिया की जनता ने डच शासन के विरुद्ध जबर्दस्त विद्रोह किया किंतु इस विद्रोह को कुचल दिया गया। डचों का दमन चक्र इतना क्रूर था कि लगभग 95 वर्ष तक इण्डोनेशिया की जनता शांत बनी रही। इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम पुनः ई.1914 में आरम्भ हुआ जब […] - [बाली में हिन्दू सभ्यता (7)](https://bharatkaitihas.com/development-of-hindu-civilization-in-bali-island/): बाली में हिन्दू सभ्यता अनादि काल से अपनी जड़ें जमाए हुए है। वस्तुतः वैदिक काल से लेकर गुप्त काल तक इण्डोनेशिया को भारतीय उपमहाद्वीप का ही नहीं अपितु भारत का ही एक द्वीप-समूह समझा जाना चाहिए। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार भारत की मुख्य भूमि पर सैंकड़ों राजा एवं राजवंश शासन करते थे, उसी प्रकार […] - [वर्तमान समय में बाली (8)](https://bharatkaitihas.com/present-day-bali/): लगभग चार पांच फुट ऊंचे स्तम्भ पर एक छोटा आला होता है जिसे काला (स्तंभ पर स्थित लघु देवालय) कहते हैं। - [इण्डोनेशिया के मंदिर (9)](https://bharatkaitihas.com/major-hindu-and-buddhist-temples-of-indonesia/): इण्डोनेशिया के मंदिर आकार में विशाल हैं, विषय-वस्तु में विविधता लिए हुए हैं तथा हिन्दू पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं किंतु उनमें सजावट का अंश न के बराबर है। इण्डोनेशिया के मंदिर धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दो भागों में विभक्त किए जा सकते हैं। पहले भाग में वे हिन्दू मंदिर आते हैं जो बड़ी […] - [परमबनन शिव मंदिर समूह (10)](https://bharatkaitihas.com/parambanan-shiva-temple-group/): मध्य जावा में स्थित परमबनन शिव मंदिर समूह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा और विशाल हिंदू मंदिर समूह है। यह मंदिर समूह मुख्यतः भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित है। परमबनन मंदिर विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। परमबनन शिव […] - [प्लाओसान बौद्ध मंदिर (11)](https://bharatkaitihas.com/plosan-buddhist-temple/): प्लाओसान बौद्ध मंदिर भी एक मंदिर समूह है जिसमें मंदिरों के खण्डहर स्थित हैं। यह मंदिर परमबनन मंदिर के उत्तर-पश्चिम में केवल एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस स्थान को बुगिसान गांव कहते हैं। यह सेंट्रल जावा के परमबनन जिले की क्लाटेन रीजेंसी का कस्बे जैसा गांव है जहाँ पक्की दुकानों की पंक्तियां बनी […] - [बोरोबुदुर बौद्ध चैत्य एवं विहार (12)](https://bharatkaitihas.com/borobudur-buddhist-chaitya-and-vihara/): बोरोबुदुर बौद्ध चैत्य एवं विहार महायान बौद्ध विहार है जो मध्य जावा प्रान्त के मगेलांग नगर में स्थित है। यह भी परमबनन शिव मंदिर तथा प्लाओसान बौद्ध विहार की भांति मूलतः 9वीं सदी ईस्वी में निर्मित है। जिस समय यह बना था उस समय यह संसार का सबसे बड़ा बौद्ध विहार था। इसका यह स्थान […] - [चण्डी बोरोबुदुर (13)](https://bharatkaitihas.com/chandi-borobudur/): इंडोनेशिया में प्राचीन मंदिरों को चण्डी कहा जाता है। इस कारण बोरोबुदुर बौद्ध स्मारक को ” चण्डी बोरोबुदुर ” भी कहा जाता है। जावा में चण्डी शब्द प्राचीन बनावट के द्वार और स्नान से सम्बन्धित रचनाओं के लिए प्रयुक्त होता है। बोरोबुदुर शब्द का अर्थ ज्ञात नहीं है। इस शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख अंग्रेज इतिहासकार […] - [जकार्ता के मंदिर (14)](https://bharatkaitihas.com/temples-of-jakarta/): जकार्ता शहर का वास्तविक नाम जयकार्ता है। यह पश्चिमी जावा में स्थित है तथा इंडोनेशिया की राजधानी है। - [बाली द्वीप के मंदिर (15)](https://bharatkaitihas.com/bali-island-temples/): बाली द्वीप के मंदिर हिन्दू देवी-देवताओं को समर्पित हैं। इनमें भगवान विष्णु, शिव, माता दुर्गा, सरस्वती तथा गणेश प्रमुख हैं। बाली में मंदिरों को पुरा कहा जाता है जो कि संस्कृत भाषा के ‘पुर’ शब्द से बना हुआ है जिसका आशय नगर एवं दुर्ग दोनों से लिया जाता है। बाली भाषा में ”पुरा” का अर्थ […] - [उबुद-वानर-वन के मंदिर एवं देव प्रतिमाएं (16)](https://bharatkaitihas.com/temples-and-gods-of-ubud-vanar-van/): एक स्तम्भ पर भरे हुए शरीर वाले योद्धा की मनुष्याकर प्रतिमा खड़ी है जिसने बाएं हाथ में ढाल एवं दायें हाथ में तलवार ले रखी है। इसकी आंखें लम्बी, मूछें बड़ी एवं भाव-भंगिमा कठोर है। - [बाली एवं जावा द्वीपों पर ग्यारह दिन (17)](https://bharatkaitihas.com/eleven-days-on-islands-of-bali-and-java/): बाली एवं जावा द्वीपों पर लेखक ने अपने परिवार के साथ ग्यारह दिन का प्रवास किया। इस प्रवास में लेखक को इन द्वीपों पर हिन्दू संस्कृति की छाप दिखाई दी। लेखक ने अपनी पुस्तक हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया नाम पुस्तक में बाली एवं जावा द्वीपों पर वर्तमान समय में हिन्दू धर्म की स्थिति का […] - [बाली द्वीप पर पांच दिन (18)](https://bharatkaitihas.com/five-days-on-bali-island/): इण्डोनेशिया देश में हमारी ग्यारह दिनों की यात्रा में से बाली द्वीप पर पांच दिन निर्धारित थे। वस्तुतः भारत के लोगों के लिए इण्डोनेशिया में सबसे बड़ा आकर्षण बाली द्वीप ही है। पुतु से भेंट अब हम एयरपोर्ट से बाहर जा सकते थे। हमने बाली द्वीप के मैंगवी नामक एक छोटे से गांव में अपना […] - [बाली द्वीप में पहला दिन (19)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-bali-island/): 14 अप्रेल 2017 को हम अपने सर्विस अपार्टमेंट में लगभग एक बजे पहुंच गए। इसी के साथ हमारा बाली द्वीप में पहला दिन आरम्भ हो गया। रास्ते में हमने एक सब्जी मण्डी देखी जिसे देखकर तबियत प्रसन्न हो गई और निर्णय लिया गया कि संध्या काल में इस सब्जी मण्डी से सब्जियां खरीदी जाएंगी। हम […] - [बाली द्वीप में दूसरा दिन (20)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-bali-island/): 15 अप्रेल 2017 को दूसरे दिन प्रातः पांच बजे ही आंख खुल गई। आज हमारा बाली द्वीप में दूसरा दिन था। इस समय भारत में तो रात के ढाई ही बजे होंगे किंतु हमारे शरीर में लगी जैविक घड़ी ने स्थानीय समय से पूरी तरह से तालमेल बैठा लिया था। चावल के खेतों के बीच […] - [तमन राम सीता (21)](https://bharatkaitihas.com/taman-ram-sita/): सीता अभय मुद्रा में हैं और राम इस मुद्रा में खड़े हैं मानो बाली द्वीपवासियों को सम्बोधित कर रहे हों! - [तमन अयुन पुराडेसा (22)](https://bharatkaitihas.com/taman-ayun-purdesa/): तमन अयुन पुराडेसा में प्रवेश करते ही एक बड़ा सा मण्डप है। इसमें प्रतिमाओं के माध्यम से बाली की सांस्कृतिक झांकी प्रस्तुत की गई है। तमन अयुन पुराडेसा मंदिर में प्रवेश के लिए प्रत्येक व्यक्ति को बीस हजार इण्डोनेशियन रुपए मूल्य का टिकट खरीदना होता है। हमने पांच टिकट खरीदे इसलिए एक लाख रुपए खर्च […] - [तनाहलोट मंदिर (23)](https://bharatkaitihas.com/towards-tanhalot-temple/): तमन अयुन टेम्पल देख लेने के बाद हम पुतु के सथ तनाहलोट मंदिर के लिए रवाना हुए। यह मेंगवी से लगभग एक घण्टे की दूरी पर है। लगभग एक घण्टे चलने के बाद हम तनाहलोट पहुंचे। प्राचीन तनाहलोट हिन्दू मंदिर, बाली द्वीप के तबनन रीजेंसी क्षेत्र में समुद्र के भीतर किंतु तट के काफी निकट […] - [गुलंगान पर्व के शानदार जुलूस (24)](https://bharatkaitihas.com/great-procession-of-gulangan-festival/): महिलाओं के सिर पर बांस की खपच्चियों से बने हुए कंदील थे जिनके ऊपरी हिस्से में दीपक का प्रकाश जगमगा रहा था। - [बाली द्वीप में तीसरा दिन (25)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-bali-island/): आज हमारा बाली द्वीप में तीसरा दिन था। आज हमें उलूवातू में वानर उद्यान तथा कुता शहर में राजा का महल देखने जाना था। तीसरी सुबह 16 अप्रेल को भी आंख जल्दी ही खुल गई। सूर्योदय का आनंद हमने उसी लॉन में बोगनविलिया के छज्जे के नीचे बैठकर चाय पीते हुए लिया। आज भी हमने […] - [बाली द्वीप में चौथा दिन (26)](https://bharatkaitihas.com/fourth-day-in-bali-island/): आज हमारा बाली द्वीप में चौथा दिन था। आज का दिन हमने मेंगवी गांव के विश्रामगृह में ही बिताने का निश्चित किया था। इसलिए हमने दिन में मेंगवी गांव तथा उसके आसपास का क्षेत्र देखने का निर्णय लिया। 17 अप्रेल को भी नींद प्रातः पांच बजे के आसपास खुल गई। इस समय भारत में तो […] - [जावा द्वीप पर पांच दिन (27)](https://bharatkaitihas.com/five-days-on-java-island/): मैंने कुछ रातें भारत-पाक सीमा पर पूरी-पूरी रात जीप में यात्रा करते हुए भी बिताई हैं, किंतु ऐसी खराब अनुभूति तो तब भी नहीं हुई। - [जावा द्वीप पर दूसरा दिन (28)](https://bharatkaitihas.com/second-day-on-java-island/): जैसे-तैसे प्रातः हुई। हम अपनी आदत के अनुसार प्रातः पांच बजे उठ गए। इसी के साथ जावा द्वीप पर हमारा दूसरा दिन आरम्भ हो गया। पहले दिन का अनुभव बहुत बुरा रहा था। आज का दिन हम उतना बुरा नहीं बिताना चाहते थे। गंदगी और बदबू से विदा तथा मासप्रियो का उपदेश टॉयलेट में हमने […] - [परमबनन शिव मंदिर (29)](https://bharatkaitihas.com/parambanan-shiva-temple/): धूप तेज थी और जहाँ से हमने परमबनन मंदिर के लिए चलना आरम्भ किया था, वहाँ से परमबनन शिव मंदिर के शिखर लगभग एक किलोमीटर दूर दिखाई दे रहे थे। जैसे-जैसे मंदिर के शिखर निकट आते गए, उनके चारों तरफ बिखरे हुए काले रंग के चौकोर एवं तराशे हुए सुगढ़ पत्थरों के विशाल ढेर हमारे […] - [जावा द्वीप पर तीसरा दिन](https://bharatkaitihas.com/third-day-on-java-island/): आज 19 मई हो चुकी थी। जावा के समयानुसार प्रातः चार बजे मेरी आंख खुल गई। आज जावा द्वीप पर तीसरा दिन था।मैंने हिसाब लगाया, इस समय बाली द्वीप पर सुबह के तीन ही बजे होंगे और भारत में रात के बारह बज रहे होंगे। यह शरीर भी कितना विचित्र है! इसमें लगी जैविक घड़ी […] - [बोरोबुदुर का पहाड़नुमा स्थापत्य (31)](https://bharatkaitihas.com/huge-hill-architecture/): बोरोबुदुर का पहाड़नुमा स्थापत्य हमारी आंखों के सामने था। इसे देखकर विश्वास नहीं होता कि कुछ साल पहले तक यह विशाल संरचना मिट्टी में दबकर इंसानों की दृष्टि से ओझल हो चुकी थी और लोग इसके बारे में भूल चुके थे। केव कुछ लोककथाओं में बोरोबुदुर के उल्लेख जीवित थे। लगभग एक घण्टा चलने के […] - [गैम्बीरा लोका जू (32)](https://bharatkaitihas.com/gambira-loca-zoo/): एक बाड़े में जवाई हाथी प्रदर्शित किए गए हैं जो डीलडौल एवं शारीरिक बनावट में भारतीय हाथियों के मुकाबले में कहीं नहीं टिकते। - [रावत जालान (34)](https://bharatkaitihas.com/search-for-food/): एक बड़े से साइन बोर्ड पर रोमन लिपि में बड़े-बड़े अक्षरों में रावत जालान लिखा हुआ था। पिताजी ने अनुमान लगाया कि जोधपुर में कुछ अग्रवाल परिवार अपना सरनेम जालान लगाते हैं। हो न हो यह जोधपुर के ही किसी अग्रवाल परिवार की दुकान हो। इसी प्रकार जोधपुर में रावत मिष्ठान भण्डार है जो कि […] - [योग्यकार्ता से विदा (35)](https://bharatkaitihas.com/depart-from-yugyakarta/): आज 21 अप्रेल को हमें योग्यकार्ता से विदा लेनी थी और इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता के लिए रवाना होना था। हमने एक लक्जरी ट्रेन से रिजर्वेशन करवा रखा था। यह ट्रेन प्रातः 8.57 पर योग्यकार्ता से चलकर सायं 4.52 पर जकार्ता पहुंचने वाली थी। रेलवे स्टेशन हमारे सर्विस अपार्टमेंट से केवल 8-9 किलोमीटर की दूरी […] - [इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता में तीन दिन (36)](https://bharatkaitihas.com/three-days-in-jakarta-capital-of-indonesia/): हम अपनी यात्रा के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुके थे। अब हमें इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता में तीन दिन व्यतीत करने थे और उसके बाद भारत के लिए प्रस्थान करना था। गम्बीरी स्टेस्यन यह भारत के किसी भी व्यस्त रेलवे स्टेशन जैसा था किंतु इस स्टेशन को देखना, विश्व इतिहास के दर्शन करने से […] - [लेखकीय - पोप के देश में ग्यारह दिन](https://bharatkaitihas.com/preface-pope-ke-desh-me/): लेखकीय – पोप के देश में ग्यारह दिन पृष्ठ पर लेखक डॉ. मोहन लाल गुप्ता द्वारा इटली में बिताए गए 11 दिनों के अनुभव के आधार पर यात्रा वृत्तांत लिखा गया है। हमारे लिए ये महंगी विदेश यात्राएं उस देश के इतिहास और संस्कृति को आत्मसात् करने और बाद में उसे ज्यों की त्यों पन्नों […] - [दुनिया की नाभि की ओर (1)](https://bharatkaitihas.com/towards-the-navel-of-the-world/): दुनिया की नाभि भारत में अत्यंत प्राचीन काल से रोम को दुनिया की नाभि कहा जाता है। यह तो तय है कि रोम धरती के मध्य में नहीं है, तो फिर रोम को दुनिया की नाभि क्यों कहा जाता है! निश्चित रूप से रोम ने यूरोप को ज्ञान-विज्ञान, धर्म और दर्शन दिया। कानून और नियम […] - [रोम में पहला दिन - 17 मई 2019 (2)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-rome/): 17 मई 2019 को सायं सात बजे हम इटली की राजधानी रोम से 35 किलोमीटर दूर लिओनार्डो दा विंची इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे। इसी के साथ रोम में पहला दिन आरम्भ हो गया। लियोनार्डो दा विंची एयरपोर्ट पर  सायं 7.00 बजे हम रोम से 35 किलोमीटर दूर लिओनार्डो दा विंची एयरपोर्ट पर उतरे। फ्लाइट 2.15 […] - [रोम में दूसरा दिन - 18 मई 2019](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-rome/): हमारा आज रोम में दूसरा दिन था। आज से ही हमें रोम का वास्तविक भ्रमण आरम्भ करना था। एक समय था जब पूरी दुनिया में यह कहावत प्रचलित थी- ऑल रोडस् लीड टू रोम’ अर्थात् दुनिया की सारी सड़कें रोम तक ले जाती हैं। आज उसी रोम की सड़कों पर हमें चलना था। सैलफोन चार्जर […] - [रोम में तीसरा दिन - 19 मई 2019](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-rome/): यहाँ की चौड़ी-चौड़ी सड़कें, उनके दोनों ओर खड़े फूलों के वृक्ष तथा बड़े-बड़े आवासीय भवन बरसात में भीगकर छायाचित्रों एवं कलैण्डरों में दिखने वाले दृश्य उत्पन्न कर रहे थे। - [रोम में चौथा दिन - 20 मई 2019](https://bharatkaitihas.com/fourth-day-in-rome/): आज हमारा रोम में चौथा दिन था। आज हमें विश्व इतिहास में बदनाम कोलोजियम को देखने जाना था। यह वही स्थान था जहाँ ईसा की आरम्भिक शताब्दियों में रोमनवासियों ने हजारों योद्धाओं का रक्त केवल अपने मनोरंजन के लिए बहा दिया था। रोम में तीसरा दिन अनुभवों से भरा रहा था और आज चौथे दिन […] - [फर्रूखसियर](https://bharatkaitihas.com/farrukhsiyar-was-engulfed-in-terrible-conspiracies-as-soon-as-he-became-king/): बादशाह बनने के बाद फर्रूखसियर ने इलाहाबाद के सूबेदार सैयद अब्दुल्ला खाँ को अपना वजीर नियुक्त किया तथा अब्दुल्ला के छोटे भाई सैयद हुसैन अली को अपनी सेना का प्रधान नियुक्त किया। - [महाराजा अजीतसिंह से दुश्मनी](https://bharatkaitihas.com/the-emperor-reached-his-tent-to-kill-maharaja-ajitsingh/): फर्रूखसियर ने महाराजा को पांच हजार जात एवं पांच हजार सवार का मनसब दिया तथा उसे अपने दरबार में उपस्थित होने के निर्देश दिए। - [बंदासिंह बैरागी की हत्या](https://bharatkaitihas.com/farrukhsiyar-got-banda-bairagi-and-his-associates-cut-into-pieces/): बंदासिंह बैरागी की हत्या के बाद सिक्ख नेतृत्व-विहीन हो गये। जब सिक्खों के सामने न गुरु रहा, न गुरु का बन्दा, तब सिक्खों ने सरबत खालसा और गुरुमत्ता की प्रथाएँ आरम्भ कीं। - [चूड़ामन जाट का अंत](https://bharatkaitihas.com/chudaman-captured-the-keys-of-the-red-fort/): चूड़ामन को राहदार बनाए जाने पर टिप्पणी करते हुए इतिहासकार कानूनगो ने लिखा है- 'एक भेड़िये को भेड़ों के झुण्ड का रक्षक बना दिया गया।' - [सवाई जयसिंह](https://bharatkaitihas.com/red-fort-gets-loyal-defenders-as-sawai-jai-singh/): आम्बेर का राजा सवाई जयसिंह भारत के इतिहास में एक अद्भुत राजा हुआ है। उसने कम से कम पांच मुगल शासकों के काल में मुगलों की सेवा की तथा उनकी नाक के नीचे हिन्दू धर्म का उत्थान किया। जब भी लाल किला उजड़ता हुआ दिखाई दिया, तब ही सवाई जयसिंह ने लाल किले को संरक्षण […] - [फर्रुखसीयर की हत्या](https://bharatkaitihas.com/emperor-was-strangulated-beaten-with-shoes-in-red-fort/): सैयद बन्धु फर्रूखसियर को अनुभवहीन जानकर उसे अपने हाथों की कठपुतली बनाकर रखना चाहते थे किंतु जब फर्रुखसीयर ने सैयद बंधुओं के इशारों पर नाचने से मना कर दिया तो उन दोनों दुष्टों ने बादशाह फर्रुखसीयर की हत्या करने का षड़यंत्र रचा। फर्रूखसियर सैयद बन्धुओं के सहयोग से बादशाह बना था। इसलिये उसने सैयद अब्दुल्ला […] - [सैयद बन्धु](https://bharatkaitihas.com/syed-brothers-killed-mughal-emperors-like-insects/): जब रफी-उद्-दरजात को तख्त पर बैठाने के लिए ले जाया गया, तब उसकी माता फूट-फूटकर रो रही थी। - [मुहम्मदशाह रंगीला](https://bharatkaitihas.com/emperors-mother-wrote-a-secret-letter-to-chinkulich-khan/): रौशन अख्तर का जन्म 7 अगस्त 1702 को अफगानिस्तान के गजना नामक स्थान पर कुदसिया बेगम के पेट से हुआ था। - [सैयद बंधुओं की हत्या](https://bharatkaitihas.com/emperor-killed-prime-minister-and-commander-in-chief/): सैयदों ने दोस्त मुहम्मद खाँ रूहेला को भी साढ़े तीन हजार घुड़सवारों के साथ चिनकुलीच खाँ पर चढ़ाई करने के लिए रिवाना कर दिया। - [मुहम्मदशाह रंगीला का दरबार](https://bharatkaitihas.com/emperor-himself-used-to-draw-his-bare-pictures/): नूर बाई नामक वेश्या के कोठे के आगे शाही अमीरों और धनी लोगों की इतनी भीड़ लगती थी कि उनके हाथियों से दिल्ली की गलियों में जाम लग जाता था। - [बदनसिंह जाट](https://bharatkaitihas.com/sawai-jai-singh-enthroned-badansingh-jat-with-his-own-hands/): इस घटना के बाद जयसिंह, बदनसिंह जाट का मित्र बन गया। - [हिन्दू राज्य की स्थापना](https://bharatkaitihas.com/maharaja-ajitsingh-established-hindu-principality-in-ajmer/): महाराजा ने तीस हजार घुड़सवारों के साथ अजमेर नगर को घेर लिया तथा मुगल सूबेदार को अजमेर से मारकर भगा दिया। - [मल्लिका उज्जमानी](https://bharatkaitihas.com/mallika-ujjmani-becomes-thirsty-for-the-life-of-maharaja-ajitsinh/): बादशह बेगम बनकर फर्रूखसियर की बेटी मलिका उज्जमानी महाराजा अजीतसिंह के प्राणों की प्यासी हो गई। - [चिनकुलीच खाँ](https://bharatkaitihas.com/red-fort-said-with-pride-see-how-beautifully-dances-the-donkey-of-south/): मुहम्मदशाह ने अपने बहुत से दुश्मनों की गलतियों को नजर अंदाज करके उन्हें अपनी सेवा में बने रहने दिया। - [अलीवर्दी खाँ](https://bharatkaitihas.com/emperor-continued-to-enjoy-awadh-and-bengal-became-independent/): अलीवर्दी खाँ बिहार का छोटा सा सूबेदार था किंतु उसने बादशाह मुहम्मदशाह रंगीला के निकम्मेपन का लाभ उठाकर बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा पर कब्जा कर लिया तथा बंगाल में अलग मुस्लिम राज्य की स्थापना की। औरंगजेब के समय से ही मुगलों का विरोध कर रहे राजपूतों, सिक्खों, मराठों तथा अन्य हिन्दू शक्तियों ने मुहम्मदशाह रंगीला […] - [पेशवा बालाजी विश्वनाथ](https://bharatkaitihas.com/owner-of-red-fort-sitting-under-the-shadow-of-beauty-and-marathas-were-rushing-rapidly/): मराठा शक्ति का अभ्युदय छत्रपति शिवाजी द्वारा ई.1645 से 1680 की अवधि में शाहजहाँ एवं औरंगजेब के काल में किया गया था। - [मराठों का आतंक](https://bharatkaitihas.com/red-fort-tried-to-frighten-the-marathas-but-the-nose-broke/): मराठों ने राजपूताना रियासतों पर बार-बार हमले करने और चौथ वसूलने की नीति अपना ली थी। इस कारण मराठों का आतंक पूरे उत्तर भारत में छा गया। - [पेशवा बाजीराव](https://bharatkaitihas.com/peshwa-bajirao-shakes-the-tenon-of-the-red-fort/): जयसिंह ने पेशवा बाजीराव को जयपुर बुलाने तथा जयपुर से दिल्ली ले जाकर बादशाह से मिलवाने का निश्चय किया। - [उर्दू शायरी](https://bharatkaitihas.com/emperor-was-singing-dhrupad-and-listening-poetry-but-nadirshah-came-to-take-kohinoor/): जब उर्दू शायरी मुगल दरबार से निकलकर दिल्ली की गलियों में टहलने निकली तो उसने वेश्याओं और नृत्यांगनाओं के कोठों पर मुकाम किया। - [नादिरशाह](https://bharatkaitihas.com/there-is-no-one-whom-you-can-kill-with-your-sword-except-to-raise-the-dead-and-kill-again/): जिस बादशाह को औरतों के कपड़े पहनने और अपने ही नंगे चित्र बनाने से फुर्सत न हो, उस बादशाह की सेना का नेतृत्व करने के लिए कोई योग्य सेनापति कहाँ से आता! - [लाल किले का खजाना](https://bharatkaitihas.com/largest-armed-robbery-in-human-history-took-place-in-red-fort/): कोहिनूर का मूल्य संसार के ढाई दिन के भोजन के व्यय के बराबार आंका जाता था। - [कोहिनूर हीरा](https://bharatkaitihas.com/emperors-favorite-prostitute-told-nadirshah-the-address-of-the-kohinoor-diamond/): तूने दिल्ली से अब तक जो लूटा है, वह उस दौलत के सामने कुछ भी नहीं है जो दौलत मुहम्मदशाह की पगड़ी में छिपी हुई है। - [नादिरशाह का कत्ल](https://bharatkaitihas.com/nadirshah-tied-misfortune-with-kohinoor-as-well/): जिन मुगलों ने विगत दो सौ साल में भारतीयों को कंगाल बना दिया था, उन्हीं मुगलों को नादिरशाह ने लंगोटी लगाकर छोड़ दिया। - [कोहिनूर हीरे की यात्रा](https://bharatkaitihas.com/kohinoor-reaches-london-via-iran-afghanistan-and-punjab-from-red-fort/): महाराजा रणजीतसिंह ने अपनी वसीयत में लिखा कि यह हीरा उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर को भेंट कर दिया जाए किंतु उनके उत्तराधिकारियों ने महाराजा की इस इच्छा का सम्मान नहीं किया। - [नादिरशाह की फूफियाँ](https://bharatkaitihas.com/nadir-shah-came-to-meet-his-aunts-in-red-fort/): हम हिन्दुस्तान पर हमला करने नहीं आए बल्कि लाल किले में नादिरशाह की फूफियाँ रहती हैं, हम अपनी फूफी जान से मुलाक़ात करने आए हैं। - [मुहम्मदशाह रंगीला की मौत](https://bharatkaitihas.com/chinkkulich-khan-the-emperors-dear-friend-was-killed-on-the-banks-of-the-sutlej/): किसानों द्वारा उगाई जा रही फसलों से मिलने वाले लगान से लाल किले का व्यय मजे से चलता रहा। - [बादशाह अहमदशाह बहादुर](https://bharatkaitihas.com/udham-bais-son-sat-on-the-throne-of-the-mughals/): जब मुहम्मदशाह रंगीला बादशाह हुआ तो उसने ऊधम बाई से विवाह करके उसे कुदसिया बेगम की उपाधि दी थी। - [शाही हरम के हिंजड़े](https://bharatkaitihas.com/khwajasaras-ruled-mughalia-haram/): ख्वाजासरा उस पुरुष को कहते थे जिसके यौन अंग काट दिए जाते थे अथवा जो नैसर्गिक रूप से नपुंसक उत्पन्न होते थे। - [मुगल हरम में समलैंगिकता](https://bharatkaitihas.com/shahi-haram-was-obsessed-with-homosexuality/): प्राचीन यूनान में समलैंगिकता को कला, बौद्धिकता और नैतिक गुणों की तरह देखा जाता था। - [ख्वाजासरा जाविद खाँ](https://bharatkaitihas.com/emperor-and-wazir-fought-for-chief-kinnar/): ख्वाजासरा जाविद खाँ शाही महल के हिंजड़ों का मुखिया था। उसे लेकर बादशाह अहमदशाह बहादुर एवं वजीर सफदरजंग में ठन गई! इस विवाद के कारण अवध सूबा मुगल सल्तनत से स्वतंत्र हो गया। बादशाह अहमदशाह बहादुर ने अवध के नवाब सफदरजंग को सल्तनत के मुख्य वजीर के पद पर बने रहने दिया था तथा चिनकुलीच […] - [इमादुलमुल्क](https://bharatkaitihas.com/wazir-blinds-the-emperor-and-his-mother-and-puts-them-in-jail/): मुगलिया राजनीति की चौसर पर बादशाह और शहजादे एक-एक करके मारे जा रहे थे किंतु लाल किला अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाने के अतिरिक्त और कुछ करने की स्थिति में नहीं था। - [मुगल बादशाहों के हरम](https://bharatkaitihas.com/there-were-eight-thousand-women-in-ahmad-shah-bahadurs-harem/): एक बादशाह के हरम में इतनी औरतों का होना विचित्र बात लगती है किंतु उस काल में भारत के मुगल बादशाहों के हरम पूरी दुनिया में अपने बड़े आकार के लिए चर्चित थे। - [आलमगीर बादशाह](https://bharatkaitihas.com/alamgir-became-emperor-after-spending-forty-years-in-prison/): अजीजुद्दीन ने औरंगजेब की तरह भारत पर कठोर शासन व्यवस्था स्थापित करने का सपना देखा और अपना नाम आलमगीर रख लिया। - [अहमदशाह अब्दाली](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-handed-over-two-of-its-princesses-to-ahmad-shah-abdali/): महाराजा सूरजमल चाहता था कि मराठों को उत्तर भारत की राजनीति से दूर रखा जाए तथा उन्हें नर्बदा पार करके लौट जाने के लिए कह दिया जाए। - [अहमदशाह अब्दाली का कहर](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-built-minarets-of-beheaded-people-of-brij/): उत्तर भारत के लोगों पर अहमदशाह अब्दाली का कहर ठीक वैसा ही था जैसा उसके पूर्ववर्ती आक्रांताओं मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, तैमूर लंग, बाबर और नादिरशाह आदि रक्त-पिपासुओं ने ढाया था। अहमदशाह अब्दाली ने निर्दोष हिन्दुओं के सिर काटकर उनकी मीनारें बनवाईं। जब महाराजा सूरजमल ने अहमदशाह अब्दाली के आदेश को मानने […] - [महाराजा सूरजमल](https://bharatkaitihas.com/maharaja-suraj-mal-challenges-ahmad-shah-abdali-to-attack-bharatpur/): अहमदशाह अब्दाली ने पत्र महाराजा सूरजमल को लिखकर धमकाया कि यदि वह रुपये नहीं देगा तो भरतपुर, डीग तथा कुम्हेर के किले धरती में मिला दिये जायेंगे। - [शाही महिलाओं का शीलहरण](https://bharatkaitihas.com/royal-women-were-humiliated-in-red-fort/): शहजादी हजरत बेगम इस समय केवल सोलह साल की थी और बहुत सुंदर दिखती थी। बादशाह आलमगीर (द्वितीय) स्वयं भी इस शहजादी से विवाह करना चाहता था। - [मराठा सेनापति रघुनाथ राव](https://bharatkaitihas.com/the-marathas-surrounded-the-red-fort-as-soon-as-abdali-left/): पेशवा नाना साहब अर्थात् बालाजी बाजी राव ने अपने चचेरे भाई रघुनाथ राव तथा मराठा सरदार मल्हारराव होलकर को आदेश दिए थे कि वे अहमदशाह अब्दाली का मार्ग रोकने के लिए दिल्ली पहुंचें। - [मल्हारराव होलकर](https://bharatkaitihas.com/raghunath-rao-used-cannons-to-fire-at-the-red-fort/): नजीब खाँ ने मल्हारराव को अपना धर्मपिता कहकर उसके पांव पकड़ लिये तथा उसके समक्ष समर्पण करने को तैयार हो गया। - [लाल किले की कंगाली](https://bharatkaitihas.com/mother-india-was-also-shedding-tears-along-with-red-fort/): कई दिन की निरंतर भूख से पीड़ित होकर शहजादियां परदा तोड़कर शहर में जाने लगीं जिन्हें बड़ी कठिनाई से रोका गया। - [यूरोपीय कम्पनियों का ताण्डव](https://bharatkaitihas.com/french-dragged-red-fort-into-seven-years-war-of-europe/): हमारे देश में तोप का पहला गोला छूटने के साथ ही अमरीका और एशिया की तोपों में भी आग लग जाती थी। - [आलमगीर की हत्या](https://bharatkaitihas.com/wazir-killed-emperor-after-not-removing-afghan-flag-from-red-fort/): प्लासी एक ऐसा सौदा था, जिसमें बंगाल के धनी लोगों और मीर जाफर ने नवाब को अँग्रेजों के हाथों बेच दिया। - [सदाशिव राव भाऊ](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-comes-back-to-extract-blood-from-indias-wounds/): सदाशिव राव भाऊ अविवेकी व्यक्ति था, उसने सूरजमल के व्यावहारिक सुझावों को मानने से मना कर दिया। - [जाट मराठा संघ](https://bharatkaitihas.com/marathas-took-down-silver-from-red-fort-and-cast-coins/): दिल्ली हाथ में आते ही सदाशिव राव भाऊ तोते की तरह आंख बदलने लगा। महाराजा सूरजमल के लाख मना करने पर भी भाऊ ने लाल किले के दीवाने खास की छतों से चांदी के पतरे उतार लिये और नौ लाख रुपयों के सिक्के ढलवा लिये। - [मराठों का कत्ल](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-killed-one-lakh-marathas/): मराठा सेनापतियों की अदूरदर्शिता ने मराठों को संकट में डाल दिया तथा अहमदशाह अब्दाली ने एक लाख मराठों का कत्ल कर दिया। - [मराठा परिवारों की दुर्दशा](https://bharatkaitihas.com/ahmad-shah-abdali-captured-thousands-of-marathas/): अब्दाली के सैनिकों ने पानीपत की गलियों में भागती मराठा औरतों एवं उनके बच्चों को पकड़ लिया। हजारों औरतों ने अब्दाली के सैनिकों के हाथों में पड़ने से बचने के लिए पानीपत के कुओं एवं तालाबों में छलांग लगा दी। - [जाटों की राजमाता](https://bharatkaitihas.com/kishore-devi-rajmata-of-the-jats-said-maratha-soldiers-are-my-children-dont-kill-them/): भरतपुर के जाटों की राजमाता किशोरी देवी को मराठों पर बड़ी दया आई। राजमाता ने घोषणा की कि मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं, इन्हें नहीं मारें। - [महाराजा सूरजमल की विजय](https://bharatkaitihas.com/maharaja-surajmal-snatched-two-capitals-of-the-mughals-2/): सूरजमल की सेना ने आगरा के लाल किले के किलेदार के परिवार को पकड़ लिया तथा किलेदार पर दबाव बनाया कि वह लाल किला सूरजमल को समर्पित कर दे। - [महाराजा सूरजमल की हत्या](https://bharatkaitihas.com/red-fort-killed-maharaja-suraj-mal/): एक रूहेला सैनिक महाराजा सूरजमल की कटी हुई भुजा को अपने भाले की नोक में पताका की भांति उठाकर नजीबुद्दौला के पास ले गया। - [बक्सर का युद्ध](https://bharatkaitihas.com/maharaja-surajmal-snatched-two-capitals-of-the-mughals/): बक्सर विजय के परिणाम स्वरूप, सम्पूर्ण अवध सूबे पर ईस्ट इण्डिया कम्पनी का नियंत्रण हो गया। - [शाहआलम (द्वितीय)](https://bharatkaitihas.com/wazir-did-not-allow-the-emperor-to-enter-red-fort-for-six-years/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने मुगल बादशाह शाहआलम (द्वितीय) को 26 लाख रुपये वार्षिक पेंशन देकर शासन के कार्य से लगभग मुक्त कर दिया। - [सिक्ख लाल किले में](https://bharatkaitihas.com/sikhs-took-control-of-the-red-fort/): सिक्खों को न तो मुगलों की औरतें चाहिए थीं और न लाल किले की सत्ता। वे तो लाल किले का मान-मर्दन करके अपने गुरुओं एवं गुरु-पुत्रों की हत्याओं का बदला ले रहे थे! - [बेगम समरू](https://bharatkaitihas.com/begum-samaru-protects-emperor-shah-alam/): लाल किले की शहजादियों और बेगमों को ईरानी और अफगानी आक्रांता जबर्दस्ती पकड़-पकड़कर ले गए थे जिसके कारण लाल किला भीतर से बिल्कुल सुनसान दिखाई देता था। - [मलिका उज्मानी](https://bharatkaitihas.com/malika-ujmani-gave-twelve-lakh-rupees-to-make-emperor-blind/): लाल किले पर ढाई माह के अधिकार के दौरान गुलाम कादिर ने शाहआलम के 22 पुत्र-पुत्रियों को मार डाला। - [महादजी सिंधिया](https://bharatkaitihas.com/mahadji-scindia-made-shah-alam-emperor-again/): शाहआलम ने महादजी सिंधिया को अपना वकीले मुतलक अर्थात् मुख्य वजीर नियुक्त किया था तथा उसे अमीर-उल उमरा की उपाधि दी थी जिसका अर्थ होता है, सभी अमीरों का मुखिया। - [मुल्ला का किला](https://bharatkaitihas.com/east-india-company-snatches-title-of-mughal-emperor/): अंग्रेजी न्यायिक व्यवस्था का दिखावटी चेहरा था, वास्तविकता यह थी कि अंग्रेजों से पेंशन पा रहे बादशाह को उन सभी आदेशों पर अपनी मुहर लगानी पड़ती थी जो अंग्रेज उसके समक्ष प्रस्तुत करते थे। - [मिर्जा अकबर शाह](https://bharatkaitihas.com/raja-rammohan-roy-went-to-london-to-increase-emperors-pension/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधिकारियों ने एक बार अकबरशाह के पुत्र मिर्जा जहांगीर को बंदी बना लिया। अकबर की बेगम ने कुतुबुद्दीन काकी की मजार पर जाकर मनौती मांगी कि यदि मिर्जा जहांगीर की रिहाई हो जाए तो वह काकी की दरगाह पर चादर चढ़ाएगी। - [बहादुरशाह जफर](https://bharatkaitihas.com/lord-dalhousie-asked-the-mughal-emperor-to-vacate-the-fort/): अँग्रेजों ने बादशाह की इच्छा के विरुद्ध, बादशाह के सबसे निकम्मे पुत्र मिर्जा कोयास को बादशाह का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। - [लॉर्ड डलहौजी का शिकंजा](https://bharatkaitihas.com/the-discontent-of-the-red-fort-started-growing-as-a-spark-towards-the-british/): देशी राज्य हमारी दया पर निर्भर हैं तथा वे ही भारत में हमारी वास्तविक शक्ति हैं। इस शक्ति का अनुमान हमें तब तक नहीं होगा जब तक कि हम उसे खो न देंगे। - [नीच और मूर्ख भारतीय](https://bharatkaitihas.com/british-used-to-hang-indians-in-name-of-power-of-red-fort/): अंग्रेज जिन्हें नीच और मूर्ख भारतीय कहते थे, अब छाती ठोक कर अंग्रेजों के सामने खड़े हो गए और अंग्रेजों को गोली मारने लगे। - [वाजिद अली शाह](https://bharatkaitihas.com/british-decided-to-seize-awadh-by-force/): भगवान श्री कृष्ण को संबोधित करके लिखी गई उसकी एक ठुमरी इस प्रकार है- 'मोरे कान्हा जो आए पलट के, अब के होली मैं खेलूंगी डट के।' - [अवध की मुक्ति](https://bharatkaitihas.com/british-captured-nawab-wajid-ali-shah-of-awadh-and-sent-him-to-calcutta/): वाजिद अली शाह ने हसीन बेगमों को रहने और उन्हें नृत्य का प्रशिक्षण देने के लिए 'परीखाना' का निर्माण करवाया। - [हिन्दू सैनिकों का क्रोध](https://bharatkaitihas.com/goddess-of-revolution-was-looking-towards-red-fort-with-hopeful-eyes/): भारतीय आकाश यद्यपि इस समय बिल्कुल शांत है किंतु एक छोटा सा बादल जो एक मुट्ठी से बड़ा न हो, उठ सकता है, जो बढ़कर हमारा सर्वनाश कर सकता है। - [नाना साहब पेशवा](https://bharatkaitihas.com/peshwa-nana-saheb-brought-message-of-revolution-to-red-fort/): नाना साहब ने भारत में राष्ट्रव्यापी स्वातंत्र्य संग्राम आरम्भ करने के लिए उन रजवाड़ों से सम्पर्क करने की योजना बनाई जिनके राज्य अंग्रेजों ने छीन लिए थे या जिन राजाओं की पेंशनें बंद कर दी थीं। - [लाल कमल का फूल](https://bharatkaitihas.com/lotus-flowers-and-roti-began-to-roam-from-village-to-village/): हिन्दू संस्कृति में लाल कमल का फूल बहुत श्रद्धा से देखा जाता है। देवी लक्ष्मी कमल के आसान पर विराजमान हैं, भगवान विष्णु के हाथों में कमल का फूल है तथा ब्रह्माजी की पूजा कमल के फूलों से की जाती है। इस कारण 1857 की राष्ट्रव्यापी सशस्त्र क्रांति के समय लाल कमल का फूल क्रांति […] - [मंगल पाण्डे](https://bharatkaitihas.com/mangal-pandey-shot-english-officer-and-played-bugle-of-nationwide-mahakranti/): मंगल पाण्डे ने विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया। उसने अपने साथियों को ललकारा- 'तुम लोग धर्म के लिये संग्राम में उतर पड़ो।' - [द लास्ट मुगल](https://bharatkaitihas.com/red-fort-was-not-in-a-position-to-face-british-due-to-internal-strife/): एक मरियल कुत्ते को गलती से भेड़िया समझा जा सकता है। - [बहादुरशाह जफर का हरम](https://bharatkaitihas.com/red-fort-was-poor-but-bahadur-shah-zafars-harem-was-rich/): बहादुरशाह में कई खूबियां हो सकती हैं किंतु हरम को काबू में रखना उसके वश में नहीं था। - [भूखे-नंगे शहजादे](https://bharatkaitihas.com/two-thousand-hungry-bare-princesses-were-closed-in-red-fort/): सलातीन के निवास में एक बहुत ऊंची दीवार है ताकि कोई उनको नहीं देख पाए। इसके अंदर उनके लिए छप्पर वाली अनेक झौंपड़ियां हैं। जहाँ यह बेचारे रहते हैं। जब दरवाजे खुले तो बहुत से अधनंगे, भूखे, मुसीबत जदा लोगों ने हमको घेर लिया। उनमें से कुछ तो अस्सी साल के थे और बिल्कुल प्राकृतिक अवस्था में थे, अर्थात् नंगे थे। - [सर चार्ल्स मेटकाफ](https://bharatkaitihas.com/metcalf-family-made-the-red-fort-pathetic/): सर चार्ल्स मेटकाफ अत्यंत चालाक व्यक्ति था। उसने शालीमार बाग में अपने लिए एक शानदार बंगला बनवा रखा था और एक खूबसूरत सिक्ख लड़की से विवाह करके उस बंगले में रहा करता था। - [दिल्ली में खूनी क्रांति](https://bharatkaitihas.com/red-fort-accepted-to-lead-a-nationwide-revolution/): यह एक मजहबी जंग है और मजहब के नाम पर लड़ी जा रही है। इसलिए तमाम शहरों और गांवों के हिन्दुओं और मुसलमानों का फर्ज है कि वे अपने-अपने मजहब और रस्मो-रिवाज पर कायम रहें और उनकी हिफाजत करें। - [कानपुर की क्रांति](https://bharatkaitihas.com/peshwa-nana-sahebs-army-entered-ganges-river-and-killed-hundreds-of-british/): भारतीय सिपाही गंगाजी में उतर पड़े तथा अंग्रेज अधिकारियों को नावों से खींच-खींचकर मारने लगे। - [बीबीघर का हत्याकाण्ड](https://bharatkaitihas.com/two-hundred-british-women-and-children-were-killed-in-bibi-ghar/): बीबीघर का हत्याकाण्ड अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के दौरान हुई एक बड़ी ही शर्मनाक घटना है जिसने भारतीय क्रांति के सैनिकों को कलंकित किया तथा अंग्रेजों को भारतीय सैनिकों का शत्रु बना दिया। नाना साहब पेशवा ने अंग्रेजों से कानपुर मुक्त करवाकर अंग्रेज अधिकारियों को छूट दी थी कि वे अपने परिवारों को लेकर […] - [बेगम हजरत महल](https://bharatkaitihas.com/begum-hazrat-mahal-sitting-on-an-elephant-killed-british/): बेगम हज़रत महल का जन्म अवध रियासत के फ़ैज़ाबाद कस्बे में हुआ था। वह पेशे से तवायफ़ थी और अपने माता-पिता द्वारा बेचे जाने के बाद खवासीन के रूप में अवध के शाही हरम में ले ली गई थी। - [अंग्रेजों का खूनी खेल](https://bharatkaitihas.com/british-converted-trees-in-a-machine-to-hang-revolutionaries/): बाराबंकी के जंगलों से छापामार गतिविधियां चला रहे अवध के क्रांतिकारी जागीरदार जयलाल सिंह को अंग्रेजों ने छल पूर्वक पकड़ लिया तथा उसे 1 अक्टूबर 1859 को लखनऊ में फांसी दे दी। - [जागीरदार कुंवरसिंह](https://bharatkaitihas.com/kunwar-singh-hosted-his-flag-on-palace-before-he-died/): कुंवरसिंह के सिपाहियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों को खदेड़ कर जगदीशपुर के महल से यूनियन जैक उतारकर अपना झण्डा लगा दिया। - [नसीराबाद की क्रांति](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-shot-major-spotswood-and-cut-colonel-newbury-to-pieces/): छावनी क्षेत्र में एक असिस्टेण्ट कमिश्नर, एक सिविल सर्जन तथा उसकी पत्नी, गवर्नमेंट कॉलेज का प्रिंसीपल, उसका एक सहायक तथा आधा दर्जन नॉन कमीशन्ड अधिकारी तोपखाने के पास ही रहते थे। - [चलो दिल्ली मारो फिरंगी](https://bharatkaitihas.com/the-revolutionaries-of-nasirabad-also-walked-towards-the-red-fort/): विद्रोही घुड़सवार को एक तोपची ने मार गिराया। उसके पांच विद्रोही साथियों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। तीन को आजीवन कारावास दिया गया तथा पच्चीस सैनिकों के हथियार छीनकर दूसरे सैनिकों को दे दिये गये। - [ठाकुर कुशालसिंह](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-beheaded-political-agent-mac-mawson-and-hung-him-outside-the-fort/): कप्तान शावर्स ने सेना लेकर विद्रोही सिपाहियों का पीछा किया। वह शाहपुरा भी गया किंतु शाहपुरा के शासक लक्ष्मणसिंह ने कप्तान शावर्स के लिये नगर के द्वार नहीं खोले। - [मेजर बर्टन की हत्या](https://bharatkaitihas.com/revolutionaries-beheaded-major-burton-and-locked-the-maharaja-of-kota-in-the-fort/): कोटा रियासत के विद्रोही सेनिकों ने ब्रिटिश सेना के मेजर बर्टन की हत्या कर दी और उसका सिर काटकर कोटा के किले पर लटका दिया। - [महारानी लक्ष्मी बाई](https://bharatkaitihas.com/maharani-laxmi-bai-introduced-the-british-to-power-of-indian-women/): महारानी महारानी लक्ष्मी बाई की दशा देखकर पृथ्वीसिंह को भारत भूमि की दुर्दशा का बोध हुआ। पृथ्वीसिंह ने महारानी को दो दिन तक अपने महल में ठहराया तथा उसे नये वस्त्र प्रदान किये। - [तात्या टोपे](https://bharatkaitihas.com/marathi-brahmin-tatya-tope-defeated-british/): तात्या टोपे पेशवा बाजीराव (द्वितीय) के निजी कर्मचारी पाण्डुरंग राव भट्ट़ का स्वाभिमानी बेटा था। तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पाण्डुरंग राव था, परंतु उसे स्नेह से तात्या कहा जाता था। - [तात्या टोपे का संघर्ष](https://bharatkaitihas.com/saffron-flag-nut-and-betel-leaf-began-to-roam-from-village-to-village/): अंग्रेज समझ गए कि नाना साहब या तात्या टोपे इस क्षेत्र में आने वाले हैं तथा उनके गुप्त संगठन जन साधारण को नाना साहब या तात्या टोपे के पक्ष में संगठित कर रहे हैं। - [मेरठ के क्रांतिकारी](https://bharatkaitihas.com/tilangas-entered-delhi-and-started-a-terrible-game-of-violence-and-plunder/): ईस्ट इण्डिया कम्पनी की दिल्ली में स्थित सेनाओं में कोई विद्रोह नहीं हुआ था। जब मेरठ के क्रांतिकारी दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने क्रांति की शुरुआत की। चूंकि यह सशस्त्र सैनिक क्रांति थी इसलिए क्रांति का प्राकट्य हिंसा से हुआ और हिंसा से ही इस क्रांति का समापन हो सका। 10 मई 1857 को रविार था […] - [दिल्ली की लूट](https://bharatkaitihas.com/tilangas-cut-jennings-beautiful-daughter/): मरने वालों में फादर जेनिंग्स की एक खूबसूरत बेटी भी शामिल थी। अभी उसने यौवन की देहरी पर पैर ही रखा था कि बेरहम मौत ने उसे बिना किसी अपराध के आकर जकड़ लिया। - [तिलंगों का कहर](https://bharatkaitihas.com/theophilus-metcalf-reached-kotwali-in-a-shirt-and-under-wear/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में भाग लने वाले पुरबिया सैनिकों को भारतीय इतिहास में तिलंगा कहा गया है। दिल्ली वासियों ने इन तिलंगों का कहर अपनी आंखों से देखा। जब तिलंगों ने दिल्ली पर आक्रमण किया, तब उनका उद्देश्य अंग्रेजों को मारकर दिल्ली को मुक्त करवाना और बहादुरशाह जफर को बादशाह घोषित करना था […] - [अंग्रेजों की लाशें](https://bharatkaitihas.com/bahadur-shah-zafar-sewed-shroud-for-the-british-of-delhi/): किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह दिल्ली की उन सड़कों पर निकलकर देखे कि अंग्रेजों की लाशें किन-किन सड़कों पर पड़ी हैं! कौनसे लाला की हवेली के दरवाजे टूटे पड़े हैं और कौनसे रईस के अस्तबल के घोड़े कल सुबह से भूखे खड़े हैं! - [बहादुरशाह जफर की बादशाहत](https://bharatkaitihas.com/cannon-thunder-rose-from-red-fort-in-midnight/): जब तिलंगों ने रानी विक्टोरिया और गोरों को गालियां देना आरम्भ किया तो बादशाह खिन्न हो गया। उसने अनुभव किया कि तिलंगों की नारेबाजी में उस गरिमा का अभाव है जो बादशाह के जुलूसों में चलने वाले सिपाहियों में होती है। - [काफिरों पर कहर](https://bharatkaitihas.com/people-of-delhi-believed-that-god-sent-tilangas-to-delhi/): अंग्रेजों पर खुदा का कहर टूटा है। उनके घमंड को खुदाई इंतकाम ने चूर-चूर कर दिया है। कुरआन शरीफ में लिखा है कि खुदा घमण्ड करने वालों को पसंद नहीं करता है। वह इन ईसाइयों पर ऐसी प्रलय लाया है कि थोड़े ही समय में इस खून-खराबे ने उनको बिल्कुल ही तबाह और बर्बाद कर दिया। - [दिल्ली की तवायफें](https://bharatkaitihas.com/tilangas-captured-kothas-of-delhis-tawaifs/): डॉ. चमनलाल जो कि हिन्दू से ईसाई बन गया था, उसे इन दंगों में मार दिया गया जबकि एंग्लो इण्डियन ईसाई औरत मिसेज ऑल्डवैल को इसलिए जीवित छोड़ दिया गया क्योंकि उसे कलमा पढ़ना आता था। - [तिलंगे](https://bharatkaitihas.com/mother-india-will-be-grateful-to-tilangas/): अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के समय तिलंगे शब्द बड़ा विख्यात हुआ। अंग्रेज अधिकारी इस शब्द से भयभीत थे तो भारतीयों के सीने इस शब्द को सुनकर गर्व से फूल जाते थे। आज भी बहुत से नौजवान जानना चाहते हैं कि तिलंगे कौन थे और कहाँ से आए थे! अठ्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति होने […] - [दिल्ली में भुखमरी](https://bharatkaitihas.com/failure-of-red-fort-leads-to-starvation-in-delhi/): बहादुरशाह जफर का मानना था कि दिल्ली में घुस आए क्रांतिकारी सैनिक भरोसेमंद नहीं हैं। उन्हें दरबारी तौर-तरीकों की कोई जानकारी नहीं है। वे किसी की इज्जत करना नहीं जानते हैं। - [अंग्रेजों का आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/major-british-officers-died-of-cholera-even-before-invading-delhi/): अंग्रेज सेनाओं ने इन क्रांतिकारी सेनाओं पर तत्काल आक्रमण कर दिया जिससे क्रांतिकारियों की सेनाओं को बड़ली की सराय से पीछे भागकर दिल्ली में घुस जाना पड़ा और अंग्रेजों ने यमुना के पश्चिमी तट पर स्थित रिज पर अधिकार कर लिया जो कि दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित थी। - [विलियम हॉडसन के जासूस](https://bharatkaitihas.com/william-hodgsons-spies-spread-all-over-delhi/): हॉडसन के घुड़सवार दस्ते को अंग्रेजी सेनाओं के आगे रहकर शत्रु सेना की जासूसी करनी थी ताकि अंग्रेजों को अपनी रणनीति तय करने में सहायता मिल सके। - [लाल किले पर गोलीबारी](https://bharatkaitihas.com/english-cannon-shells-started-falling-on-red-fort/): बादशाह और शाही खानदान के लोग लाल किले की छत पर बैठ गए। सलातीन भी लाल किले की दीवारों के बुर्जों से इस गोली-बारी को देखते रहते। - [ब्रिगेडियर जॉन निकल्सन](https://bharatkaitihas.com/john-nicholson-has-come-as-the-death-of-indian-soldiers/): विलियम डेलरिम्पल ने लिखा है कि जॉन निकल्सन प्रोटेस्टेण्ट ईसाई था किंतु चापलूस हिन्दुस्तानियों का एक समूह उसे निकल सेन कहता था और उसे विष्णु का अवतार बताता था। - [मेजर जनरल आर्कडेल विल्सन](https://bharatkaitihas.com/entering-delhi-the-english-army-took-heavy-alcohol/): सार्जेंट कारमाइकल ने कश्मीरी गेट को बारूद से उड़ा दिया। मेजर रीड बुरी तरह घायल हो गया और उसका पूरा कॉलम बिखर गया। - [दिल्ली में दहशत](https://bharatkaitihas.com/delhi-became-vacant-due-to-fear-of-british-forces-and-goons/): किसी भी भारतीय के घर में आग लगा देना, सरे आम कोड़ों से पिटवाना और किसी भी भारतीय को फांसी के फंदे से लटका देना अंग्रेजों के लिए आम बात थी। - [दिल्ली की औरतें](https://bharatkaitihas.com/women-of-delhi-came-to-fight-the-british-for-bahadur-shah-zafar/): दिल्ली की औरतें के जिहादी चाहते थे कि बादशाह बहादुरशाह जफर स्वयं घोड़े पर सवार होकर अंग्रेजों की सेना से लड़ें किंतु जब लोगों ने देखा कि बादशाह कायरता दिखा रहा है तो दिल्ली की औरतें जिहादियों की भीड़ में शामिल होकर अंग्रेजों को मारने के लिए निकल पड़ीं। 16 सितम्बर 1857 को जिस दिन […] - [बाबर का आखिरी वंशज](https://bharatkaitihas.com/baburs-last-descendant-left-red-fort-in-dark-of-night/): जब सूरज निकला तो बादशाह एक कश्ती में बैठकर अपनी मंजिल की ओर रवाना हो गया। कुछ देर बाद बाबर का आखिरी वंशज यमुना नदी के पुराने किले के घाट की तरफ उतरा। - [अनसूया हजारों साल बूढ़ी थी](https://bharatkaitihas.com/bhardwaj-introduced-shri-ram-and-sita-to-thousands-of-years-old-anasuya/): ऋषि भरद्वाज ने श्रीराम एवं सीता से हजारों साल बूढ़ी अनसूया का परिचय करवाया! जब दशरथ नंदन भरत अयोध्यावासियों को चित्रकूट से अयोध्या ले गए तो राजकुमार रामचंद्र ने लक्ष्मण एवं सीताजी को अपने साथ लेकर चित्रकूट छोड़ दिया और गहन दण्डकारण्य में प्रवेश किया। उन्होंने अरण्य में रहकर तपस्या करने वाले ऋषियों के आश्रमों […] - [शरभंग ऋषि ने श्रीराम को समस्त योग, यज्ञ, तप एवं व्रत समर्पित कर दिए (31)](https://bharatkaitihas.com/sharabhang-rishi-dedicated-all-yoga-yagya-penance-and-fast-to-shri-ram/): श्रीराम का लक्ष्य शरभंग ऋषि के आश्रम तक पहुंचने का था। इसलिए वे मुनियों से शरभंग ऋषि की कुटिया का मार्ग पूछने लगे। शीघ्र ही यह समाचार शरभंग ऋषि तक पहुंच गया कि श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीताजी शरभंग ऋषि के आश्रम की ओर बढ़ रहे हैं। महर्षि अत्रि एवं सती अनसूया से भेंट करने के […] - [सुतीक्ष्ण ऋषि ने भगवान को देखकर आंखें बंद कर लीं (32)](https://bharatkaitihas.com/sutikshan-closed-his-eyes-to-see-rama/): शरभंग ऋषि को विदा करके श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीताजी ने वनवासी सन्यांसियों से सुतीक्ष्ण ऋषि के आश्रम का पता पूछा। इस अवसर पर उपस्थित सैंकड़ों मुनियों, तापसों एवं ऋषि-पुत्रों ने श्रीराम से कहा कि हम आपको सुतीक्ष्णजी के आश्रम तक पहुंचाएंगे। वे लोग चाहते थे कि अधिक से अधिक समय तक वे श्रीराम का सान्निध्य […] - [महर्षि अगस्त्य से भेंट की श्रीराम ने (33)](https://bharatkaitihas.com/shri-ram-met-maharishi-agastya-to-get-divine-weapons/): भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के समय महर्षि अगस्त्य से भेंट करके उनसे दिव्य आयुध एवं अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए। महर्षि अगस्त्य से भेंट के पीछे श्रीराम का मंतव्य केवल इतना ही नहीं था। इस भेंट के पीछे बड़े गहरे प्रयोजन छिपे थे। श्रीराम, लक्ष्मण तथा जनकनंदिनी सीताजी महर्षि अगस्त्य से भेंट करने के लिए सुतीक्ष्ण […] - [दिव्य आयुध श्रीराम को समर्पित कर दिए अगस्त्य ऋषि ने (34)](https://bharatkaitihas.com/agastya-rishi-dedicated-his-divine-weapons-to-shri-ram/): जब भगवान श्रीराम महर्षि अगस्त्य के आश्रम में उपस्थित हुए, तब गूढ़ संवादों के माध्यम से दोनों ने एक-दूसरे को बता दिया कि उनके उद्देश्य एक समान हैं। अगस्त्य ऋषि ने दिव्य आयुध श्रीराम को समर्पित कर दिए! मुनि सुतीक्ष्ण श्रीराम, लक्ष्मण एवं जानकी को अपने साथ लेकर महर्षि अगस्त्य के आश्रम पहुंचे। यह आश्रम […] - [सीताजी की चिंता (35)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%be/): वाल्मीकि रामायण में सीताजी की चिंता का वर्णन हुआ है। जब वनवास काल में सीताजी भगवान श्रीराम को अपने कंधों पर हर समय धनुष धारण किए हुए देखती हैं तथा जंगलों में पशुओं का शिकार करते हुए देखती हैं तो सीताजी कहती हैं कि मैं आपकी यह प्रवृत्ति देखकर चिंतित हूँ। महर्षि अगस्त्य से भेंट […] - [शम्बूक वध का सच (36)](https://bharatkaitihas.com/shriram-killed-shambuk-who-was-meditating-for-his-heavenly-entry/): शम्बूक वध का सच भारतीय पौराणिक इतिहास की ऐसी जटिल पहेली बन गया है जिसे आज के राजनेता अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए काम में ले रहे हैं। उन्हें शम्बूक वध का सच नहीं जानना है, इस मिथक को अपने पक्ष में भुनाना है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब श्रीराम अयोध्या के राजा बन गए […] - [राजा शिबि](https://bharatkaitihas.com/raja-shibi-cut-off-flesh-of-his-body-and-gave-it-to-the-eagle/): राजा शिबि ने अपने शरीर का मांस काटकर बाज को दे दिया! पिछली एक कथा में हमने चर्चा की थी कि इन्द्र के कुपित हो जाने के कारण राजा ययाति स्वर्ग से नीचे गिरने लगा। उस स्थान पर अष्टक, प्रतर्दन, वसुमान् और शिबि नामक राजर्षि बैठे हुए तपस्या कर रहे थे। इस कथा में हम […] - [लवणासुर का वध कर दिया शत्रुघ्न ने](https://bharatkaitihas.com/shatrughan-killed-lavanasura-who-killed-his-ancestor-mandhata/): इस धारवाहिक की 9वीं कड़ी में हमने वायुपुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, भागवत पुराण, मत्स्य पुराण, वाल्मीकि रामायण तथा महाभारत आदि ग्रंथों में मिलने वाली राजा मांधाता की कथा की चर्चा की थी। राजा मांधाता त्रेता युग का पहला राजा था जो ईक्ष्वाकु कुल में उत्पन हुआ था। उसका वध लवणासुर नामक एक असुर ने […] - [लाल किले की दर्दभरी दास्तान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): लाल किले की दर्दभरी दास्तान शीर्षक से लिखी गई इस पुस्तक को देश-विदेश में अभूतपूर्व प्रसिद्धि प्राप्त हुई है। लाखों लोगों ने इसे पसंद किया एवं सराहा है। शाहजहाँ से लेकर औरंगजेब तक के मुगलों का जैसा रोमांचक एवं वास्तविक इतिहास इस पुस्तक में लिखा गया है, वैसा इतिहास अन्य पुस्तकों में नहीं मिलता। भारत […] - [पोप के देश में ग्यारह दिन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/): पोप के अस्तित्व में आने से पहले रोम की धरती पर बहुत कुछ ऐसा घटित हो चुका था जो न केवल प्राचीन रोम की पहचान है अपितु पूरी दुनिया को आज भी आकर्षित करता है। - [हिन्दी साहित्य की पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/literature-books-of-mohanlalgupta/): डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में सैंकड़ों की संख्या में आलेख, कविता, कहानियाँ, नाटक, लघुनाटिकाएँ आदि की रचना की है। उनकी रचनाएं विगत चार दशकों से देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं तथा रेडिया एवं टेलिविजन पर प्रसारित हुई हैं। उनकी बहुत से कहानियों एवं उपन्यासों के तेलुगु, मराठी […] - [इतिहास पुरुष](https://bharatkaitihas.com/historical-biographies-by-mohanlalgupta/): ये पुस्तकें हमारी नई पीढ़ी के ज्ञानवर्द्धन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं साक्षात्कारों की तैयारी करवाने में दुर्लभ संदर्भ सामग्री का कार्य करती हैं। - [राजस्थान का इतिहास](https://bharatkaitihas.com/books-of-history-of-rajasthan-by-mohanlal-gupta/): राजस्थान ज्ञान कोश नामक पुस्तक के अब तक 15 संस्करण प्रकाशित हुए हैं जिससे इस पुस्तक की लोकप्रियता एवं उयोगिता का अनुमान लगाया जा सकता है। - [विश्व इतिहास पर पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/books-of-world-history-by-mohanlal-gupta/): विश्व इतिहास की दृष्टि से डॉ. मोहनलाल गुप्ता की पुस्तकें अनूठी एवं अमूल्य हैं। भारतीय पाठकों के लिए ये पुस्तकें अद्यतन नवीन जानकारी प्रस्तुत करती हैं। - [डॉ. मोहनलाल गुप्ता की मुद्रित पुस्तकें](https://bharatkaitihas.com/books-by-dr-mohanlal-gupta-available-for-sale/): इस पृष्ठ पर डॉ. मोहनलाल गुप्ता की मुद्रित पुस्तकें संक्षिप्त विवरण सहित उपलब्ध, सूची रूप में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। ये पुस्तकें अमेजन डॉट इन से अथवा शुभदा प्रकाशन से सम्पर्क करके क्रय की जा सकती हैं। विश्व इतिहास 1. हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया, हार्ड बाउण्ड, पृष्ठ-176, मूल्य 350 रुपए। (ऑफसेट प्रिंटिंग, डिमाई […] - [पौराणिक धर्म अथवा वैष्णव धर्म का उदय एवं विकास](https://bharatkaitihas.com/rise-and-development-of-mythological-religion-or-vaishnavism-part-one/): पौराणिक धर्म अथवा वैष्णव धर्म का मुख्य आधार वेदों में वर्णित देवता विष्णु एवं उनके दस अवतार हैं। नारद पुराण में कहा गया है कि इस जगत में विष्णु सर्वत्र व्याप्त हैं, इस जगत् का कारण विष्णु हैं।…… विष्णु के समान कोई अन्य देव नहीं है।   जब जैन-धर्म तथा बौद्ध-धर्म ह्रास के मार्ग पर बढ़ […] - [पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व](https://bharatkaitihas.com/rise-and-development-of-mythological-religion-or-vaishnavism-part-two/): पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व भगवान विष्णु की भक्ति पर केन्द्रित हैं। विष्णु तथा उनके अवतारों की उपासना, प्रार्थना, भक्ति तथा उनकी कृपा का अवलम्बन ही इस धर्म का मूल तत्व है। पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व विष्णु पौराणिक धर्म के मूलतत्त्व भगवान विष्णु ही हैं। पुराणों का वैचारिक आधार विष्णु की भक्ति एवं उपासना पर अवलम्बित […] - [पौराणिक धर्म में समन्वय के तत्व](https://bharatkaitihas.com/rise-and-development-of-mythological-religion-or-vaishnavism-part-three/): पौराणिक धर्म को व्यावहारिक एवं लोकप्रिय बनाने के लिए विभिन्न मत-मतांतरों के तत्वों का पौराणिक धर्म में समन्वय किया गया। समन्वयन की प्रवृत्ति के कारण ही पौराणिक धर्म बौद्ध धर्म का सामना करके करोड़ों हिन्दुओं को हिन्दू धर्म के भीतर बनाए रखने में सफल रहा। पौराणिक धर्म (वैष्णव धर्म) को लोकप्रिय बनाने के प्रयास जनसामान्य […] - [शैव धर्म](https://bharatkaitihas.com/shaivism-and-shakta-dharma-part-one/): शैव धर्म भारत के सबसे प्राचीन धर्मों में से है। इस धर्म को मानने वाले लोगों के आराध्य देव भगवान शिव हैं जिनका सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। शैव मत के कई शाखाएं हैं जिन्हें पंथ कहा जाता है। ऋग्वेद में रुद्र नामक देवता का उल्लेख है, यजुर्वेद के 16वें अध्याय में भवागन रुद्र […] - [नाथ सिद्ध कालमुख एवं अघोरी सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/shaivism-and-shakta-dharma-part-two/): नाथ सिद्ध कालमुख एवं अघोरी मत अत्यंत प्राचीन काल से शैव धर्म की विभिन्न शाखाओं के रूप में विद्यमान हैं। यद्यपि ये समस्त शाखाएं भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करती हैं तथापि इन समस्त शाखाओं के साधकों का एक ही उद्देश्य है- शिवत्व को प्राप्त करना। शैव धर्म का नाथ संप्रदाय ‘नाथ’ शब्द […] - [शाक्त धर्म एवं उसके सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/shaivism-and-shakta-dharma-part-three/): वैष्णव धर्म (पौराणिक धर्म) एवं शैव धर्म की तरह शाक्त धर्म भी भारत में अत्यंत प्राचीन काल से विद्यमान है। यह भी पूरे भारत में फैला हुआ है। हालांकि आजकल शाक्त सम्प्रदाय को तांत्रिक धर्म मान लिया जाता है किंतु प्राचीन काल में इसका स्वरूप पूर्णतः तांत्रिक नहीं था। सिंधु घाटी सभ्यता में मातृदेवी की […] - [संगम युग में समाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/): संगम युग के तमिल जन्म और मृत्यु के अवसरों पर आनुष्ठानिक अस्वच्छता में भी विश्वास करते थे। मृतकों को दफनाया अथवा जलाया जाता था अ - [संगम साहित्य](https://bharatkaitihas.com/sangam-era-literature-society-and-culture-part-one/): संगम साहित्य से तात्पर्य पांड्य-शासकों द्वारा संरक्षित विद्वत्-परिषद् के साहित्यकारों द्वारा तीन अलग-अलग सम्मेलनों में तमिल भाषा में रचे गए साहित्य से है। इतिहासविद् संगम साहित्य की तुलना ग्रीस और रोम के गौरव-ग्रंथों तथा यूरोपीय पुनर्जागरण काल के साहित्य से करते हैं। कुछ विद्वान संगम युग को तमिलों का स्वर्ण-युग मानते हैं। निश्चय ही तमिलों […] - [संगम युगीन अर्थव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/sangam-era-literature-society-and-culture-part-two/): संगम युगीन साहित्य एवं शासन व्यवस्था दोनों ही इस बात के प्रमाण हैं कि संगम युगीन अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत रही होगी। अर्थव्यवस्था की मजबूती के बिना न तो उन्नत शासन व्यवस्था स्थापित की जा सकती है और इतना उत्कृष्ट साहित्य लिखा जा सकता है। संगम साहित्य में वर्णित राज्य व्यवस्था संगम काव्य दक्षिण भारत में […] - [इस्लाम का जन्म](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-a/): जिस समय भारत भूमि पर वैष्णव धर्म के भीतर विभिन्न दार्शनिक विचारों का विकास नवीन उत्कर्ष को प्राप्त कर रहा था, भारत भूमि से दूर अरब की भूमि पर इस्लाम का जन्म हो रहा था। पश्चिम एशिया में स्थित अरब प्रायद्वीप को भूमध्य सागर, लाल सागर, अरब सागर और फारस की खाड़ी तीन ओर से […] - [इस्लाम के सिद्धांत](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-b/): इस्लाम के सिद्धांत हजरत मुहम्मद के उपदेशों पर आधारित हैं तथा ये कुरान के माध्यम से मुसलमानों के लिए उपलब्ध हैं। माना जाता है कि कुरान किसी ने लिखी नहीं थी, अपितु इसकी आयतें इलहाम के माध्यम से मुहम्मद पर आयत हुई थीं, अर्थात् आसमान से उतरी थीं। मुसलमान के पांच कर्त्तव्य कुरान के अनुसार […] - [खलीफाओं का उत्कर्ष](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-c/): इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद की मृत्यु के बाद खलीफाओं का उत्कर्ष हुआ। खलीफाओं के प्रयत्नों से इस्लाम अरब की भूमि से बाहर निकल कर पूरी दुनिया में फैल गया। ‘खलीफा’ अरबी के ‘खलफ’ शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है- ‘लायक बेटा’ अर्थात् योग्य पुत्र परन्तु खलीफा का अर्थ है जाँ-नशीन या उत्तराधिकारी। हजरत मुहम्मद […] - [इस्लामी साम्राज्य का प्रसार](https://bharatkaitihas.com/birth-and-spread-of-islam-part-d/): इस्लामी साम्राज्य का प्रसार इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद के जीवन काल में ही होना आरम्भ हो गया था। मुहम्मद के प्रयासों से अरब के अधिकांश भू-भाग पर इस्लाम का वर्चस्व हो गया। मुहम्मद की मृत्यु के बाद खलीफाओं का उत्कर्ष होने पर खलीफाओं के नेतृत्व में इस्लामी साम्राज्य का प्रसार तेजी से हुआ। अरबवासियों ने […] - [सूफी मत](https://bharatkaitihas.com/sufism-in-india-in-bhartiya-sanskriti/): भारत में इस्लाम के साथ-साथ सूफी मत का भी प्रवेश हुआ। सूफी मत, इस्लाम का एक वर्ग अथवा समुदाय है और उतना ही प्राचीन है जितना कि इस्लाम। सूफी प्रचारक कई वर्गों तथा संघों में विभक्त थे। उनके अलग-अलग केन्द्र थे। इस्लाम की ही तरह सूफी मत का भी भारत में तीव्र गति से प्रचार […] - [गुरु नानक एवं उनका धर्म](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-a/): पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में गुरु नानक ने गुरुमत की खोज की। उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया, बाह्य आडम्बरों का विरोध किया तथा एकेश्वरवाद एवं निराकारवाद का प्रचार किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके सिद्धांतों को सिक्ख धर्म के रूप में मान्यता मिली।  गुरु नानक सिक्खों के प्रथम गुरु ‘नानक देव’ सिक्ख धर्म के प्रवर्त्तक […] - [सिक्ख धर्म के ग्रंथ एवं मंदिर](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-b/): सिक्ख धर्म के ग्रंथ सिक्ख धर्म की मान्यताओं का विवेचन करते हैं। सिक्खों का सर्वप्रमुख ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब है जिसमें सिक्ख गुरुओं एवं वैष्णव संतों के पद संग्रहीत हैं। सिक्ख धर्म के ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब सिक्खों का धार्मिक ग्रन्थ ‘श्री आदि ग्रंथ’ या ‘ज्ञान गुरु ग्रंथ साहिब’ है। इसे ‘आदि गुरु दरबार’ या […] - [सिक्ख गुरु एवं उनका इतिहास](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-c/): गुरु नानक से लेकर गुरु गोविन्दसिंह तक दस सिक्ख गुरु हुए जिनके नाम क्रमशः (1.) नानक, (2.) अंगद, (3.) अमरदास, (4.) रामदास, (5.) अर्जुनदेव, (6.) हरगोविन्द, (7.) हरराय, (8.) हरकृष्णराय, (9.) तेग बहादुर और (10.) गोविन्दसिंह है। प्रत्येक गुरु अपने अन्तिम समय में अपने उत्तराधिकारी को अपना पद सौंपकर उसे पंथ का गुरु घोषित कर […] - [बंदा बैरागी और सिक्ख धर्म](https://bharatkaitihas.com/sikhism-and-its-history-part-d/): एक हिन्दू पंडित प्रतापमल का पुत्र जब मुसलान बनने लगा, तब उससे कहा गया कि यदि तुम खान-पान की स्वतंत्रता के लिए हिन्दू-धर्म को छोड़ना चाहते हो तो अच्छा है कि मुसलमान न होकर सिक्ख हो जाओ। - [वैदिक भारत में शिक्षा व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-a/): यह देखकर सुख आश्चर्य होता है कि ऋषियों ने वैदिक भारत में शिक्षा व्यवस्था का जो तंत्र विकसित किया, उससे समाज में ज्ञान-विज्ञान, दर्शन एवं अध्यात्म का व्यापक प्रसार हुआ। वैदिक काल में शिष्य की पात्रता पर बड़ा ध्यान दिया जाता था। इस सम्बन्ध में निरुक्त में एक बहुत सुंदर उक्ति मिलती है जिसके अनुसार […] - [स्त्री शिक्षा एवं शूद्र शिक्षा](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-b/): प्राचीन भारत में स्त्री शिक्षा एवं शूद्र शिक्षा की स्थिति मध्यकाल की अपेक्षा बहुत अच्छी थी। स्त्रियों को पढ़ने का पूरा अधिकार था। इस कारण वे वेदों की ऋचाएं तक लिखने में निष्णात हो जाती थीं। शूद्रों को भी पढ़ने का अधिकार था। वैदिक-काल में स्त्री शिक्षा वैदिक-काल में स्त्री-शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता […] - [प्राचीन वैदिक शिक्षा केन्द्र](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-c/): प्राचीन वैदिक शिक्षा केन्द्र पूरे भारत में विद्यमान थे। ये प्रायः छोटे-छोटे गुरुकुलों के रूप में स्थापित हुए थे जिन्हें स्थानीय शासकों एवं नागरिकों द्वारा संसाधन उपलब्ध करवाए जाते थे और इनमें दूर-दूर से छात्र पढ़ने आते थे। उत्तरवैदिक-काल के अंत में शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप में परिवर्तन आने लगा और देश के विभिन्न क्षेत्रों […] - [प्राचीन जैन शिक्षा केन्द्र](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-d/): प्रायः जिन नगरों में वैदिक धर्म एवं बौद्ध धर्म की शिक्षा दी जाती थी, उन्हीं नगरों में जैन उपासरों को ही प्राचीन जैन शिक्षा केन्द्र के रूप विकसित किया गया। जैन धर्म भारत के अत्यंत प्राचीन धर्मों में से है। इसकी स्थापना ऋषभदेव के काल में हुई जिन्हें प्रथम तीर्थंकर तथा जैन धर्म का संस्थापक […] - [प्राचीन बौद्ध शिक्षा केन्द्र](https://bharatkaitihas.com/nature-of-education-and-major-education-centers-in-ancient-india-part-e/): महात्मा बुद्ध के उपदेशों से प्रभावित होकर बहुत से लोग किशोरावस्था में ही भिक्षुव्रत ग्रहण करके बौद्ध संघ में सम्मिलित हो गए। विभिन्न राज्यों के राजा एवं सम्पन्न गृहस्थ बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक दान देते थे। ये विहार प्राचीन बौद्ध शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित हुए जिनमें आचार्य और उपाध्याय अध्यापन का कार्य करते […] - [वर्णों की उत्पत्ति](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-a/): वर्णों की उत्पत्ति कर्म के आधार पर हुई थी। जो व्यक्ति जो कर्म करता था, वही उसका वर्ण बन जाता था। कर्म बदलने पर व्यक्ति का वर्ण भी बदल जाता था। शुक्र नीति के अनुसार इस संसार में जन्म से कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या म्लेच्छ नहीं होता है, गुण तथा कर्म के भेद […] - [प्राचीन काल में शूद्र](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-b/): प्राचीन काल में शूद्र वर्ण की स्थिति में निरंतर बदलाव आते रहे। वैदिक काल में कोई शूद्र नहीं था, रामायण काल में शिल्पी को शूद्र माना जाता था, महाभारत काल में हाथ से कार्य करने वाले को शूद्र माना जाता था, उसके बाद चाण्डाल आदि शूद्र जातियों का उद्भव हुआ। इन समस्त कालों में मैला […] - [मौर्य युग में वर्णव्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-c/): मौर्य युग में वर्णव्यवस्था वैदिक युग की वर्ण व्यवस्था से काफी आगे निकल चुकी थी। इस युग में मृत पशुओं की खाल निकालने वाले तथा शमशान में मृत मानवों का अंतिम संस्कार करने वाले शूद्र वर्ण का उदय हो चुका था। इन शूद्रों को गांव से बाहर निवास करना होता था। ‘कौटिल्य’ द्वारा रचित ग्रन्थ […] - [मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-d/): मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था का आशय मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात् शुंग, कण्व एवं सातवाहन काल में भारतीय समाज में प्रचलित वर्ण व्यवस्था से है। मौर्य कालीन वर्ण व्यवस्था की तुलना में में मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था अधिक जटिल हो गई थी। मौर्योत्तर वर्ण व्यवस्था से तात्पर्य शुंग, कण्व एवं सातवाहन काल में आर्य प्रजा में […] - [वर्ण व्यवस्था गुप्तकाल से मध्यकाल तक](https://bharatkaitihas.com/aryan-varna-system-part-e/): वैदिक काल में जिस वर्ण व्यवस्था ने आकार लेना आरम्भ किया वह उत्तर वैदिक काल में आते-आते पुष्ट हो गई। गुप्त काल तथा हर्षवर्द्धन काल में भी वर्ण-व्यवस्था और अधिक पुष्ट हुई। अब लोग एक वर्ण से दूसरे वर्ण में प्रवेश नहीं कर सकते थे। मौर्योत्तर  काल में चातुर्वण्य का जो रूप प्रचलित था, वह […] - [हिन्दुओं की जाति प्रथा](https://bharatkaitihas.com/caste-system-of-hindus-part-a/): सिडनी लो ने अपनी पुस्तक ए विजन ऑफ इण्डिया में लिखा है कि हिन्दुओं की जाति प्रथा अर्थात् जाति-संगठन वस्तुतः उनका क्लब, उनका व्यावसायिक संघ और उनका हितकारी तथा मानव-प्रेमी समाज है। हिन्दुओं की जाति-प्रथा के कारण भारत में कोई दरिद्रालय अथवा सुधारालय नहीं है, उसकी कोई आवश्यकता भी नहीं है। प्राचीन भारतीय आर्य ही, […] - [जाति प्रथा के गुणदोष](https://bharatkaitihas.com/caste-system-of-hindus-part-b/): जाति प्रथा के गुणदोष भारतीय सामाजिक व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुए। चूंकि जाति प्रथा का उदय वर्ण व्यवस्था के विस्तार से हुआ, इसलिए जाति व्यवस्था भी मूलतः श्रम-विभाजन पर आधारति है। भारतीय जाति प्रथा के गुणदोष पर विचार करने से पहले हमें भारतीय समाज की जटिलताओं एवं पूर्ववर्ती वर्ण-व्यवस्था को समझना होगा। जाति प्रथा के […] - [चाण्डाल एवं कायस्थ जातियों का जाति प्रथा में स्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/): चाण्डाल एवं कायस्थ जातियाँ भारतीय जाति प्रथा में तो स्थान रखती हैं किंतु वैदिक आर्य व्यवस्था में इन दोनों जातियों का कोई उल्लेख नहीं मिलता। इससे स्पष्ट है कि ये दोनों जातियाँ वैदिक काल के बाद में अस्तित्व में आईं। भारतीय इतिहास में चाण्डाल जाति मनुस्मृति तथा धर्मसूत्रों के अनुसार चाण्डाल जाति की उत्पत्ति शूद्र […] - [प्राचीन विवाह प्रणालियाँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81/): प्राचीन विवाह प्रणालियाँ कई प्रकार की थीं और पूरे भारत में प्रचलित थीं। इनमें से कुछ विवाह प्रणालियों को श्रेयस्कर तो कुछ प्रणालियों को बुरा माना जाता था। प्राचीन विवाह प्रणालियाँ स्त्री-पुरुष के यौन सम्बन्धों को अनुशासन में बांधने तथा मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की उपलब्धि कराने के लिए उसे सुव्यवस्थित गृहस्थ […] - [भारत में परिवारिक जीवन](https://bharatkaitihas.com/family-life-in-india-part-a/): भारतीय समाज एवं संस्कृति को समझने के लिए आवश्यक है कि भारत में परिवारिक जीवन को समझा जाए। इसे समझे बिना भारतीय समाज एवं संस्कृति तथा जीवन मूल्यों को समझना असंभव है। भारतीय सामाजिक संगठन का इतिहास पाँच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। जब विश्व के अधिकांश देश सभ्यता के उषाकाल में थे, […] - [भारतीय परिवार की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a4%be/): संसार में प्रत्येक समाज एवं संस्कृति में परिवार को महत्व दिया गया है किंतु भारतीय परिवार की विशेषताएँ अन्य संस्कृतियों के परिवारों से अलग हैं। भारतीय परिवार एक गतिशील संस्था है। समय-समय पर इसका स्वरूप बदलता रहा है। फिर भी भारतीय परिवार के संगठन का आधार ठोस है तथा इसकी मूलभूत विशेषताएँ आज भी देखी […] - [भारतीय परिवार के कर्त्तव्य](https://bharatkaitihas.com/family-life-in-india-part-b/): भारतीय परिवार के कर्त्तव्य विश्व की प्रत्येक संस्कृति में परिवार के प्रमुख कर्त्तव्यों में बच्चों का लालन-पालन, वृद्धों की सेवा, बीमारों की सुश्रुषा तथा प्रत्येक सदस्य को संरक्षण एवं सहारा देना शामिल होता है किंतु भारतीय परिवार कुछ विशिष्ट कार्यों को भी सम्पादित करता है। तीन ऋणों से उऋण होना, पंच महायज्ञ करना तथा सोलह […] - [संयुक्त परिवार प्रणाली](https://bharatkaitihas.com/family-life-in-india-part-c/): संयुक्त परिवार प्रणाली संयुक्त परिवार प्रणाली भारतीय जीवन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है। गृह्यसूत्रों में बड़े परिवारों का उल्लेख किया गया है। बौद्ध युग में भी परिवार बड़े हुआ करते थे। अनेक जातकों में ऐसे परिवारों का उल्लेख हुआ है जो अपने सदस्यों के सहयोग एवं सहायता से चलते थे। ऐसे कुटुम्बों का भी […] - [वैदिक काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-one/): वैदिक काल में नारी की स्थिति पुरुष के बराबर थी। उसे भोग की वस्तु न समझ कर परिवार की वृद्धि करने वाली, परिवार को पालने वाली तथा धर्म में साथ निभाने वाली माना जाता था। नारी की उपस्थिति के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान यथा धर्म-कर्म, दान-पुण्य, पितृशांति आदि कर्म सम्पन्न नहीं हो सकते थे। […] - [महाकाव्य काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): वैदिक काल में नारी की स्थिति की अपेक्षा महाकाव्य काल में नारी की स्थिति में कुछ परिवर्तन आ गया था। अब उन्हें पुरुष के संरक्षण में रहने के लिए कहा जाने लगा। ईस्वी पूर्व 800 से ईस्वी पूर्व 600 तक के कालखण्ड को महाकाव्य काल कहा जाता है। इस कालखण्ड में रामरायण तथा महाभारत नामक […] - [स्मृति काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-two/): स्मृति काल में नारी की स्थिति से आशय स्मृति ग्रंथों के रचना काल में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति से है। श्रुति अर्थात् (वेद, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद्) के बाद स्मृति ग्रंथ आते हैं। माना जाता है कि स्मृतियों की रचना ईस्वी पूर्व 1000 से ईस्वी पूर्व 500 के बीच के कालखण्ड में हुई। स्मृतियाँ बहुत […] - [पौराणिक काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): पौराणिक काल में नारी की स्थिति वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल के समान ही अत्यंत संतोषजनक थी। पौराणिक काल में नारी अपने विवाह आदि के सम्बन्ध में निर्णय स्वयं ले सकती थी। उसे पर्दा नहीं करना पड़ता था। पौराणिक काल पौराणिक काल उस कालखण्ड को कहते हैं जिसमें पुराणों की रचना हुई। पुराणों में धर्म […] - [पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/): पूर्वमध्यकाल में नारी की स्थिति से आशय गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद के भारत में नारी की स्थिति से है। इस काल में नारी की स्थिति वैदिक काल, महाकाव्यकाल, स्मृतिकाल तथा गुप्तकाल की नारी से बिल्कुल अलग थी। भारत के इतिहास में हर्ष की मृत्यु अर्थात् ई.648 से लेकर मुसलमानों के भारत में शासन […] - [मध्य काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-three/): मध्य काल में नारी की स्थिति प्राचीन काल की अपेक्षा बहुत अधिक खराब हो गई। इसका सबसे बड़ा कारण भारत में इस्लाम का शासन स्थापित हो जाना था। विदेशी आक्रांताओं के भय से नारी के लिए सार्वजनिक स्थलों पर जाना पुरुष-संरक्षण के बिना असंभव हो गया। भारत के इतिहास में मध्य-काल विदेशी आक्रांताओं के भीषण […] - [ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-five/): ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति में परिवर्तन अंग्रेजी शिक्षा, अंग्रेजी कानूनों एवं हिन्दू समाज सुधारकों के प्रयासों से आया। परम्परा के नाम पर नारी पर होने वाले अत्याचारों को दूर करने में बहुत लम्बा समय लगा। ब्रिटिश काल में नारी की स्थिति में सुधार अंग्रेजी शिक्षा का योगदान अंग्रेजी शिक्षा के कारण तथा अंग्रेजी […] - [आधुनिक काल में नारी की स्थिति](https://bharatkaitihas.com/status-of-women-in-old-age-society-part-four/): यह सामान्य प्रचलित धारणा है कि आधुनिक काल में नारी की स्थिति पहले के समस्त कालों की अपेक्षा बहुत अच्छी है किंतु यह पूर्ण सत्य नहीं है। नारी की जितनी अच्छी स्थिति वैदिक काल में थी, उतनी अच्छी स्थिति आधुनिक काल में नहीं है। भारतीय इतिहास में आधुनिक काल का आशय मुगल शासन की समाप्ति […] - [संस्कार](https://bharatkaitihas.com/sacraments-of-hindus/): ब्रह्मसूत्र भाष्य में कहा गया है कि व्यक्ति में गुणों का आरोपण करने के लिए जो कर्म किया जाता हैं, उसे संस्कार कहते हैं। भारतीय संस्कृति का ताना बना संस्कारों से ही बुना गया है। भारतीय समाज में ‘संस्कारों’ की अत्यधिक महत्ता है किंतु वेदों में इस शब्द का एक बार भी उल्लेख नहीं हुआ है। […] - [पुरुषार्थ-चतुष्टय की अवधारणा](https://bharatkaitihas.com/purushaarth-chatushtay-part-a/): पुरुषार्थ-चतुष्टय की अवधारणा मनुष्य के जीवन को संतुलित, सुखी एवं दीर्घ जीवन जीने के लिए है। यह प्रत्येक मनुष्य को अपना कर्म करते हुए मोक्ष की तरफ ले जाती है। इन्हें पुरुषार्थ भी कहा जाता है। पुरुषार्थ-चतुष्टय के चार अंग हैं- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इनमें से प्रथम पुरषार्थ है- धर्म! धर्म के सम्बन्ध […] - [धर्म - पुरुषार्थ-चतुष्टय (1)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae/): पुरुषार्थ में धर्म का स्थान सर्वोपरि है परन्तु यह किसी विशेष प्रकार के धार्मिक विश्वासों, सम्प्रदायों की मान्यताओं अथवा ईश्वर की विशिष्ट उपासना पद्धतियों तक ही सीमित नहीं है। पुरुषार्थ के अर्थ में इसका आशय अत्यंत व्यापक है। इसका आशय स्वयं को संयमित, मर्यादित, अनुशासित करने से है। इस प्रकार ‘धर्म’ व्यक्ति के चिंतन, आचरण […] - [अर्थ - पुरुषार्थ-चतुष्टय (2)](https://bharatkaitihas.com/purushaarth-chatushtay-part-b/): अर्थ रूपी पुरुषार्थ का आशय धन-सम्पत्ति एवं समृद्धि अर्जित करने से है। इसे दूसरा पुरुषार्थ माना गया है। धन के बिना समाज, परिवार एवं व्यक्ति का कार्य नहीं चल सकता किंतु धन में लालसा नहीं रखने को उच्च आदर्श माना जाता था। इस प्रकार भारतीय संस्कृति अर्थार्जन एवं निस्पृह जीवन के बीच संतुलन स्थापित करती […] - [काम - पुरुषार्थ-चतुष्टय (3)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae/): मनुष्य जीवन में ‘ काम ‘ को तीसरा पुरुषार्थ माना गया है। इस पुरुषार्थ का भी मनुष्य जीवन में शेष तीनों पुरुषार्थों के समान ही महत्त्व है। काम के दो स्वरूप हैं- (1.) कामना अर्थात् किसी भी वस्तु अथवा सुख को प्राप्त करने की इच्छा। (2.) यौन-सुख अथवा ऐन्द्रिक-इच्छा। पुरुषार्थ रूपी काम का प्रमुख आशय […] - [मोक्ष - पुरुषार्थ-चतुष्टय (4)](https://bharatkaitihas.com/purushaarth-chatushtay-part-c/): मानव-जीवन का अन्तिम लक्ष्य ‘मोक्ष’ है। धर्म, अर्थ और काम के सेवन का लक्ष्य भी मोक्ष है। वर्णाश्रम धर्म का लक्ष्य भी मोक्ष है। वेदों के अध्ययन-अध्यापन का अंतिम लक्ष्य भी मोक्ष है। श्रेष्ठतम एवं निकृष्टतम व्यक्ति भी अपने लिए अंत में मोक्ष की कामना करते हैं। इसलिए मोक्ष को चतुर्थ पुरुषार्थ में सम्मिलित किया […] - [आर्यों की आश्रम व्यवस्था](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-one/): मनुष्य जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आर्यों की आश्रम व्यवस्था की स्थापना हुई तथा मनुष्य के लिए नियम एवं कर्त्तव्य निर्धारित किए गए।       मनुष्य जीवन बचपन, यौवन, प्रौढ़वय एवं वृद्धावस्था से गुजरता हुआ  पूर्णता को प्राप्त होता है। प्रत्येक वय में मनुष्य की आवश्यकताएं, क्षमताएं एवं रुचियाँ भिन्न होती हैं तथा इनके […] - [ब्रह्मचर्य आश्रम](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-two/): मनुष्य को बाल्यकाल में ही शिक्षा, ज्ञान एवं विवेक प्राप्त हो, इसके लिए ब्रह्मचर्य आश्रम की व्यवस्था की गई। ब्रह्मचर्य दो शब्दों, ‘ब्रह्म’ और ‘चर्य’ से मिलकर बना है। ब्रह्म का अर्थ है ‘ईश्वर’ और ‘चर्य’ का अर्थ है। ‘विचरण’। इन दोनों का सम्मिलित अर्थ है ‘ब्रह्म के मार्ग पर चलना’। ब्रह्मचर्य का व्यावहारिक अर्थ […] - [गृहस्थ आश्रम](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-three/): मनुस्मृति में लिखा है कि जिस प्रकार प्राणवायु का आश्रय प्राप्त कर समस्त जीव जीवित रहते हैं, उसी प्रकार गृहस्थ आश्रम का आश्रय प्राप्त करके समस्त आश्रम चलते हैं।  गृहस्थ आश्रम की श्रेष्ठता गृहस्थ आश्रम मनुष्य जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण था। कुछ धर्मशास्त्रकारों ने इस आश्रम का महत्त्व प्रतिपादित करने के लिए आश्रमों के […] - [वानप्रस्थ आश्रम](https://bharatkaitihas.com/aryan-ashram-system-part-four/): लगभग पचास वर्ष की आुय में जब मनुष्य अपने गृहस्थ-कर्त्तव्यों और उत्तरदायित्वों को पूरा कर लेता था तब उसे सांसारिक मोह-माया त्यागकर वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करना होता था। आरण्यक ग्रंथों की रचना इन्हीं वानप्रस्थी तपस्वियों ने की थी, जो अरण्यों (जंगलों) में रहा करते थे। उपनिषद् युग में वानप्रस्थ जीवन का विस्तार हुआ। प्रौढ़ […] - [आश्रम व्यवस्था में स्त्री का स्थान](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): आर्यों की आश्रम व्यवस्था में स्त्री का स्थान जानने के लिए वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, महाकाव्य काल, बुद्ध काल, शुंग काल तथा मध्य काल में स्त्रियों की बदलती हुई स्थिति को जानना आावश्यक है। पुरुषों एवं स्त्रियों के लिए आश्रम-व्यवस्था के प्रावधानों में अंतर था। ब्राह्मण पुरुषों के लिए चार आश्रमों का तथा क्षत्रिय […] - [संन्यास आश्रम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/): मनुष्य के जीवन का अन्तिम भाग, पचहत्तर वर्ष की आयु से सौ वर्ष अथवा इसके बाद तक संन्यास आश्रम के अन्तर्गत रखा गया था। वानप्रस्थ आश्रम के बाद सन्यास आश्रम प्रारम्भ होता था। समस्त पुरुषार्थों के अन्तिम लक्ष्य अर्थात् मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में यह अंतिम चरण था। विष्णु-पुराण में उसे ‘परिवाट्’ तथा धर्मसूत्रों […] - [भगवद्भक्ति की अवधारणा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be/): आर्यों के प्रथम ग्रंथ ऋग्वेद में ईश्वर की स्तुतियां लिखी गई थीं। इस प्रकार भगवद्भक्ति की अवधारणा का बीज वेदों में उपलब्ध था जो उपनिषद काल में हरे-भरे पौधे में बदलने लगा। बादरायण के ब्रह्मसूत्र ने भगवद्भक्ति की अवधारणा को भलीभांति आगे बढ़ाया। श्रीमद्भगवतगीता ने भक्ति रूपी पौधे को वैचारिक एवं दार्शनिक खाद-पानी देकर भगवद्भक्ति […] - [भक्ति आन्दोलन का पुनरुद्धार एवं उसके कारण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): भारत के मध्यकालीन इतिहास में भक्ति आन्दोलन का पुनरुद्धार एक बड़ी घटना थी जिसने न केवल भारत की संस्कृति का आमूल-चूल परिवर्तन किया अपितु भारत के इतिहास की धारा का रुख भी मोड़ दिया। भारतीय संस्कृति में भक्ति आंदोलन वस्तुतः एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है जो वेदों के काल से आरम्भ होकर आज तक […] - [मध्य-युगीन भक्ति सम्प्रदाय](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6/): मध्य-युगीन भक्ति सम्प्रदाय भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों के प्रति भक्ति भावना रखने के निमित्त स्थापित हुए थे। इन समस्त सम्प्रदायों के मूल दर्शन में भगवान का भक्तवत्सल स्वरूप तथा दुष्ट हंता स्वरूप केन्द्रीय भाव में था, साथ ही भगवान को मोक्ष भक्तों के पापों को दूर करके उन्हें मोक्ष देने वाला भी प्रदर्शित किया […] - [भक्तिआन्दोलन की प्रमुख धाराएँ](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%81/): मध्यकालीन भक्तिआन्दोलन की प्रमुख धाराएँ देखने में भले ही अलग-अलग लगती हों किंतु वस्तुतः एक ही लक्ष्य को लेकर चलती हैं। वह लक्ष्य है भगवत्-प्राप्ति। श्रीमद्भगवत्गीता में मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बताये गये हैं- ज्ञान, कर्म एवं भक्ति। इनमें से ज्ञान-मार्ग सर्वाधिक कठिन और भक्ति-मार्ग सर्वाधिक सरल है। भक्ति अपने उपास्यदेव के प्रति भक्त […] - [भक्ति आन्दोलन का प्रभाव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5/): हिन्दू जाति पर मध्यकालीन भक्ति आन्दोलन का प्रभाव बहुत व्यापक था। जब मुसलमान आक्रांता बलपूर्वक हिन्दुओं को मुसलमान बना रहे थे, तब हिन्दुओं को भक्त कवियों की रचनाओं ने सम्बल प्रदान किया। भक्ति-आन्दोलन का भारतीयों के धार्मिक, सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। यह प्रभाव इतना गहरा था कि जहाँ साधारण जनता मुस्लिम […] - [रामानुजाचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): रामानुजाचार्य भक्ति मार्गी सन्त थे। वे वैष्णव भक्ति के सर्वप्रमुख देव विष्णु एवं देवी की भक्ति को प्रमुखता देते थे। उन्होंने जो परम्परा स्थापित की, वह आज तक विद्यमान है। भक्ति मार्गी सन्त रामानुजाचार्य ग्यारहवीं शताब्दी ईस्वी से भारत में वैष्णव आचार्यों की एक नवीन परम्परा आरम्भ हुई। इस परम्परा में आलवार संत यमुनाचार्य के […] - [माधवाचार्य (मध्वाचार्य)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में माधवाचार्य (ई.1197-1278) वैष्णव परम्परा के बड़े आचार्य हुए। उनका जन्म ई.1197 में कन्नड़ जिले के उडिपी नगर के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। अपनी शारीरिक शक्ति के कारण वे भीम समझे जाते थे। उन्होंने युवावस्था में ही सन्यास ले लिया। वे भी रामानुज की भांति विष्णु के उपासक थे। […] - [निम्बार्काचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): रामानुज तथा माधवाचार्य के बाद निम्बार्क स्वामी अथवा निम्बार्काचार्य ने बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी में वैष्णव धर्म को नवीन गति दी। उनका जन्म मद्रास प्रान्त के वेलारी जिले में हुआ था। वे रामानुज के समकालीन थे। निम्बार्काचार्य दक्षिण भारत से उत्तर भारत में चले आए तथा उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उस […] - [संत नामदेव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5/): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के काल में महाराष्ट्र में हुए वैष्णव भक्तों में संत नामदेव का नाम अग्रणी है। उनका जन्म ई.1270 में महाराष्ट्र के नरसी बामनी गांव के एक दर्जी परिवार में हुआ। संत नामदेव के पिता का नाम दयाशेठ और माता का नाम गोणाई था। उनका विवाह बाल्यावस्था में ही कर दिया गया तथा […] - [रामानन्दाचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): रामानुजाचार्य की शिष्य परम्परा में 14वीं शताब्दी ईस्वी में रामानंद हुए जिन्हें रामानन्दाचार्य भी कहा जाता है। उन्हें वैष्णव परम्परा की धार्मिक क्रांति को दक्षिण से उत्तर भारत में ले आने का श्रेय प्राप्त है- ‘भक्ति द्राविड़ ऊपजी, लाए रामानन्द।’ कुछ विद्वानों के अनुसार रामानंद का जन्म ई.1299 में प्रयाग के एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार […] - [वल्लभाचार्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म ई.1479 में दक्षिण भारत के एक तैलंग ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता एक उच्चकोटि के विद्वान् थे और उन्होंने बनारस को अपना कार्यक्षेत्र बना रखा था। 13 वर्ष की आयु में ही वल्लभाचार्य समस्त धर्मग्रन्थों में पारंगत हो गए। उनके विचारों पर विष्णु स्वामी के भक्ति-सिद्धान्तों का विशेष प्रभाव पड़ा। […] - [चैतन्य महाप्रभु](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a5%81/): चैतन्य महाप्रभु महाप्रभु वल्लभाचार्य के समकालीन थे। चैतन्य का जन्म ई.1486 में कलकत्ता से 75 मील उत्तर में स्थित नवद्वीप अथवा नादिया ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उस समय मुसलमानों के आतंक से भयभीत वैष्णव-भक्त बंगाल से भागकर नवद्वीप में शरण ले रहे थे। इस कारण नवद्वीप में वैष्णव-भक्ति की धारा अबाध […] - [सूरदास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): संत शिरोमणि सूरदास का जन्म सोलहवीं सदी में हुआ। वे वल्लभाचार्य के प्रमुख शिष्य थे तथा भक्ति आंदोलन के महान संत थे किंतु वे उपदेशक अथवा सुधारक नहीं थे। सूरदास ने अपने गुरु वल्लभाचार्य के निर्देश पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया तथा भागवत् पुराण में वर्णित लीलाओं को आधार बनाते हुए […] - [संत कबीर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%b0/): मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की बहुत सारी धाराओं में संत कबीर का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। वे राम को निराकार ब्रह्म के रूप में देखते थे। मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की बहुत सारी धाराओं में संत कबीर का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। वे राम को निराकार ब्रह्म के रूप में देखते […] - [भक्त रैदास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): भक्त रैदास का जन्म काशी के एक चमार परिवार में हुआ। वे रामानन्द के बारह प्रमुख शिष्यों में से थे। वे विवाहित थे तथा जूते बनाकर अपनी जीविका चलाते थे। भक्त रैदास तीर्थयात्रा, जाति-भेद, उपवास आदि के विरोधी थे। हिन्दू तथा मुसलमानों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं मानते थे। वे निर्गुण भक्ति में विश्वास […] - [गुरु नानकदेव](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5/): पंजाब के सन्तों में गुरु नानकदेव का नाम अग्रणी है। उनका जन्म ई.1469 में लाहैर से 50 किलोमीटर दूर तलवण्डी गांव के खत्री परिवार में हुआ। उनके पिता कालू ग्राम के पटवारी थे। नानक विवाहित थे तथा उनके दो पुत्र भी हुए किंतु बाद में साधु-संतों की संगत में रहने लगे। वे निर्गुण-निराकार ईश्वर की […] - [मीरा बाई](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%88/): मध्य-कालीन भक्तों में मीरा बाई का नाम अग्रणी है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने मीरा का जन्म वि.सं. 1573 (ई.1516) में माना है जबकि गौरीशंकर हीराचंद ओझा, हरविलास शारदा तथा गोपीनाथ शर्मा आदि इतिहासकारों ने मीरा बाई का जन्म वि.सं. 1555 (ई.1498) में माना है। मीरा मेड़ता के राठौड़ शासक राव दूदा के पुत्र रतनसिंह की […] - [तुलसीदास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): रामानंद की शिष्य मण्डली के प्रमुख सदस्य नरहरि आनंद के शिष्य तुलसीदास, अकबर के समकालीन संत हुए। उनका जन्म ई.1532 के लगभग हुआ। उन्होंने रामचरित मानस, गीतावली, कवितावली, विनय पत्रिका, एवं हनुमान बाहुक आदि ग्रंथों की रचना की। उन्होंने भारत की जनता को धनुर्धारी दशरथ-नदंन श्रीराम की भक्ति करने की प्रेरणा दी जो धरती, ब्राह्मण, […] - [संत तुकाराम](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae/): संत तुकाराम का जन्म ई.1608 में महाराष्ट्र के देहू गांव में हुआ। वे अपने समय के महान् संत और कवि थे तथा तत्कालीन भारत में चले रहे भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। उन्हें ‘तुकोबा’ भी कहा जाता है। उनके जन्म आदि के विषय में विद्वानों में मतभेद हैं। तुकाराम को चैतन्य नामक साधु ने […] - [दादू दयाल](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2/): भारत के मध्यकालीन भक्ति आन्दोलन के संतों में दादू दयाल का नाम आदर से लिया जाता है। दादू दयाल का जन्म ई.1544 में गुजरात के अहमदाबाद नगर में हुआ तथा उनका अधिकांश जीवन राजस्थान में व्यतीत हुआ। संत कबीर एवं नानकदेव की भाँति दादू ने भी अन्धविश्वास, मूर्ति-पूजा, जाति-पाँति, तीर्थयात्रा, व्रत-उपवास आदि का विरोध किया […] - [मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c/): दसवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में आए मुस्लिम लेखक अलबिरूनी ने मध्यकालीन हिन्दू रीति-रिवाज पर टिप्पणी करते हुए लिखा है- हिन्दू अलग-अलग बैठकर भोजन खाते हैं और उनके भोजन का स्थान गोबर से लिपा चौका होता है। वे उच्छिष्ट का उपयोग नहीं करते हैं और जिन बर्तनों में खाते हैं, यदि वे मिट्टी के होते […] - [मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c/): भारत में मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज विदेशी आक्रांताओं के साथ आए थे। जिन हिन्दुओं को बलपूर्वक या लालच से या स्वेच्छा से मुसलमान बना लिया गया वे भी मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज मानने लगे। मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज मुस्लिम परिवार में पुत्र का जन्म हालांकि मध्यकालीन मुस्लिम रीति-रिवाज हिन्दुओं से अलग थे किंतु मुसलमानों में भी हिन्दुओं की […] - [मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b9%e0%a4%be/): वैदिक आर्यों के काल से ही भारत में सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार पर ध्यान दिया गया। मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार भी वैदिक काल की तरह उन्नत था। वैदिक काल की तरह मध्यकालीन सामाजिक व्यवहार एवं शिष्टाचार में अब भी अतिथि सत्कार, बड़ों का अभिवादन, भूखे को भोजन, जीवदया, अहिंसा आदि कर्तव्य सम्मिलित थे। फिर […] - [मध्यकालीन वेशभूषा एवं आभूषण](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b7%e0%a4%be/): मध्यकालीन वेशभूषा एवं आभूषण लोगों की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक हैसियत के अनुसार होते थे। विभिन्न समुदायों के लोग प्रायः सूती वस्त्र पहनते थे। मध्यकालीन वेशभूषा एवं आभूषण वर्तमान काल की अपेक्षा काफी अलग थे। निर्धन लोगों के पास पूरा तन ढकने के लिए भी कपड़े नहीं होते थे। मध्यमवर्गीय परिवारों के वस्त्राभूषण भी अत्यंत […] - [मध्यकालीन समाज का भोजन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%a8/): मध्यकालीन समाज का भोजन आधुनिक समाज के भोजन से कई अर्थों में अलग था। अधिकांश लोग घर में बने हुए भोजन एवं व्यंजन उपयोग में लाते थे तथा शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता था। मध्यकालीन समाज का भोजन हिन्दुओं एवं मुसलमानों में मांस के अतिरिक्त एक जैसा ही था। हिन्दुओं के भोजन में विभिन्न […] - [मध्यकालीन आवास](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8/): भारत में मध्यकालीन आवास धनी, मध्यम एवं निर्धन वर्ग के लिए अलग-अलग प्रकार के थे। मध्यकालीन आवास के भीतर की सुख-सुविधा भी गृहस्वामी की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती थी। मध्य-कालीन समाज में आज की ही तरह अमीरों के घर बड़े, पक्के एवं महंगे होते थे जबकि गरीबों के घर छोटे, कच्चे एवं सस्ते होते […] - [मध्यकाल में मनोरजंन के साधन](https://bharatkaitihas.com/middle-class-indian-society-social-institutions-and-customs-part-three/): मध्यकाल में मनोरजंन के अनेक साधन उपलब्ध थे। अमीरों एवं गरीबों के खेल एवं मनोरंजन के साधन अलग-अलग थे। इसी प्रकार नगरों एवं गांवों के मनोरंजन के साधन अलग-अलग थे। गरीब लोग प्रायः कबड्डी, कुश्ती, गिल्ली डण्डा, गेंद आदि खेल खेलते थे। मध्यकाल में मनोरजंन के लिए शाही परिवारों के सदस्य, धनी लोग एवं मध्यमवर्गीय […] - [मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0/): मध्यकालीन हिन्दू त्यौहार और वर्तमान में मनाए जाने वाले हिन्दू त्यौहारों में विशेष अंतर नहीं है किंतु मध्यकालीन हिन्दू समाज में त्यौहारों की संख्या अधिक थी। आज का हिन्दू समाज बहुत से त्यौहारों को मनाना भूल चुका है। मध्य-कालीन समाज में त्यौहार, उत्सव और मेले हिन्दू और मुसलमान अलग-अलग त्यौहार मनाते थे। ये त्यौहार पूरे […] - [मुगल हरम (6)](https://bharatkaitihas.com/mughal-harems-were-full-of-mughal-princesses/): मुगल हरम अकबर के समय से ही मुगल शहजादियों से भरने लगा था क्योंकि अकबर ने शहजादियों के विवाह करने की परम्परा बंद कर दी थी। - [तैमूरी खून (7)](https://bharatkaitihas.com/the-blood-of-genghis-khan-and-timur-lang-beating-hard-in-veins-of-the-princes/): मुगल शहजादों में उत्तराधिकार का प्रश्न शहजादों के खून से ही सुलझता आया था। - [महाराणा राजसिंह (8)](https://bharatkaitihas.com/maharana-snatched-mandalgarh-as-soon-as-shah-jahan-became-ill/): महाराणा राजसिंह ने शाहजहाँ के बीमार होने का सूचना सुनी तो उसने माण्डलगढ़ पर आक्रमण करके माण्डलगढ़ का किला छीन लिया। - [आगरा का लाल किला (9)](https://bharatkaitihas.com/emperor-left-delhi-and-went-to-agra/): शाहजहाँ दिल्ली छोड़कर आगरा चला गया! आगरा का लाल किला उसने नहीं बनवाया था किंतु फिर भी आगरा और लाल किला दोनों ही उसे पसंद थे। - [शाहजहाँ की बीमारी (10)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-was-common-enemy-of-the-three-little-princesses/): शाहजहाँ की बीमारी के समाचार लाल किले की दीवारों से बाहर निकलकर पूरी सल्तनत में तेजी से फैलते जा रहे थे। - [औरंगजेब का भय (11)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-was-most-afraid-of-aurangzeb/): दारा ने कई बार कट्टर मुल्ला-मौलवियों, अमीर-उमरावों तथा सूबेदारों को दण्डित किया था इसलिए वे दारा शिकोह से दुश्मनी रखते थे और औरंगजेब के प्रति जबर्दस्त समर्थन रखते थे। - [राठौड़ राजा (12)](https://bharatkaitihas.com/the-rathore-kings-did-not-like-aurangzeb-at-all/): औरंगज़ेब न केवल हिन्दुस्तान की किस्मत का मालिक बनना चाहता था अपितु बड़े भाई दारा शिकोह के कारण मुगलिया राजनीति जिस गलत दिशा में चल पड़ी थी, उस दिशा का मुँह भी मोड़ देना चाहता था। - [शाहशुजा (13)](https://bharatkaitihas.com/shahshuja-declared-himself-king-and-rushed-to-agra/): शाहशुजा ने भविष्य में फिर कभी बगावत नहीं करने तथा मुंगेर के पास स्थित राजमहल को अपनी राजधानी बनाकर वहीं तक सीमित रहने का वचन दिया। - [मुरादबक्श (14)](https://bharatkaitihas.com/muradbaksh-proclaimed-himself-emperor-and-rushed-to-agra/): जिस समय शाहशुजा की सेनाएं बनारस में शाही सेनाओं से युद्ध कर रही थीं, तब कुछ ऐसे समाचार मिले कि शाहशुजा आसानी से दारा को परास्त कर देगा। अतः मुरादबक्श चिंता में पड़ गया। - [शाहजहाँ का भय (15)](https://bharatkaitihas.com/the-old-shah-jahan-was-afraid-of-dara-shikoh-and-jahanara-as-well/): शहजादी रौशनआरा ने आगरा का सारा हाल और शाहजहाँ का भय अपने भाई औरंगज़ेब को लिख भेजा। बाकी शहजादियाँ भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। - [कासिम खाँ की नमकहरामी (16)](https://bharatkaitihas.com/cheating-of-qasim-khan/): दारा शिकोह को जिस कासिम खाँ पर पूरा विश्वास था, उसी कासिम खाँ की नमकहरामी ने महाराजा जसवंतसिंह को पराजय और मृत्यु के कगार पर पहुंचा दिया। - [धरमत का युद्ध (17)](https://bharatkaitihas.com/the-entire-army-of-maharaja-jaswant-singh-was-destroyed-and-he-alone-could-reach-to-jodhpur/): महाराजा और उसके राजपूत, मुगलिया राजनीति की खूनी चौसर में ऐसे स्थान पर घेर लिए गए जहाँ से न तो महाराजा जसवंतसिंह के लिए और न उसके राजपूतों के लिए बचकर निकल पाना संभव था। - [दारा शिकोह की हताशा (18)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-arrives-at-agras-doorstep-by-dodging-dara/): इस विशाल सैन्य समूह के सामने औरंगज़ेब और मुराद के पास कुल मिलाकर चालीस हजार घुड़सवार ही थे जो धरमत का युद्ध करने और लगातार चलते रहने के कारण थक कर चूर हो रहे थे। - [रूपसिंह राठौड़ (19)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-was-afraid-of-maharaja-roop-singh/): औरंगजेब को राजा रूपसिंह का भय सता रहा था! इस समय वह शाहजहाँ और दारा शिकोह के चारों ओर एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ा था। - [शामूगढ़ का युद्ध (20)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-roop-singhs-sword-reached-aurangzebs-neck/): दारा ने महाराजा रूपसिंह को तलवार लेकर पैदल ही औरंगज़ेब के हाथी की तरफ दौड़ते हुए देखा तो दारा की सांसें थम सी गईं। - [जहाँआरा का शोक (21)](https://bharatkaitihas.com/on-hearing-the-news-of-the-death-of-maharaja-roop-singh-shahzadi-jahanara-put-on-black-clothes/): महाराजा रूपसिंह की मृत्यु का समाचार सुनकर शहजादी जहाँआरा ने काले कपड़े पहन लिए! जहाँआरा का शोक शब्दों में व्यक्त करने योग्य नहीं था। - [शाहजहाँ की कैद (22)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-imprisons-the-owner-of-the-red-fort/): शाहजहाँ की शहजादियों ने जिस पिता को तख्त से उतारने के लिए हजार षड़यंत्र रचे थे, आज उसी शाहजहाँ की कैद उनके समस्त दुखों का कारण बन गई थी। - [शाहजहाँ के दुर्दिन (23)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-turned-down-the-proposal-of-partition-of-the-sultanate/): अकबर, जहांगीर तथा शाहजहाँ ने अनेक हिन्दू राजवंशों द्वारा विगत कई शताब्दियों में संचित किए गए खजाने छीनकर आगरा में लाकर जमा कर लिए थे। - [मुरादबक्श की हत्या (24)](https://bharatkaitihas.com/the-red-forts-of-delhi-and-agra-got-away-from-the-eyes-of-muradbaksh/): मुरादबक्श (Murad Bakhsh) की हत्या औरंगजेब (Aurangzeb) की योजना के प्रारम्भिक भाग में कल्पित नहीं की गई थी किंतु मुरादबक्श की उतावली ने औरंगजेब को मजबूर कर दिया कि दारा शिकोह (Dara Shikoh) की हत्या करने से पहले औरंगजेब मुरादबक्श की हत्या करे। बादशाह शाहजहाँ (Shahjahan) तथा शहजादी जहाँआरा (Jahanara Begum) को कैद करने के […] - [महाराजा जसवंतसिंह (25)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-conspired-to-assassinate-aurangzeb/): महाराजा जसवंतसिंह खजुआ के मैदान में औरंगजेब की तरफ से लड़ने के लिए पहुंच तो गया किंतु महाराजा की आत्मा महाराजा को धिक्कारती थी। - [शाहशुजा की हत्या (26)](https://bharatkaitihas.com/shahshuja-was-captured-by-wild-people-and-killed/): जब शाहशुजा ने देखा कि उसकी सेना युद्ध के मैदान से भाग छूटी है तो वह भी सिर पर पैर रखकर अपनी सेना के पीछे-पीछे भाग लिया। - [जोधपुर नरेश जसवंतसिंह राठौड़ (27)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-refused-to-accompany-dara-shikoh/): जोधपुर नरेश जसवंतसिंह राठौड़ (Maharaja Jaswantsingh) शाहजहाँ एवं औरंगजेब (Aurangzeb) कालीन मुगल राजनीति (Mughal Politics) में एक बहुप्रतिष्ठित एवं बुद्धिमान राजा हुआ है किंतु मुगलिया राजनीति की चौसर ने उसे ऐसा जकड़ लिया कि लाख चाहने पर भी जसवंतसिंह उस चौसर से स्वयं को अलग नहीं कर सका। दारा शिकोह (Dara Shikoh) आगरा से भागकर […] - [दौराई का युद्ध (28)](https://bharatkaitihas.com/the-sparks-of-cannonballs-glowed-like-lightning/): दौराई का युद्ध मुगलों के इतिहास में वैसा ही महत्व रखता है जैसा कि शामूगढ़ का युद्ध। - [जम्मू का राजा रामरूपराय (29)](https://bharatkaitihas.com/raja-ramroop-rai-of-jammu-sacrificed-for-aurangzeb/): दारा शिकोह की मोर्चाबंदी और धुंआधार बारूद बरसाने के कारण जम्मू का राजा रामरूपराय औरंगजेब के लिए बलिदान हो गया! - [उत्तराधिकार का युद्ध (30)](https://bharatkaitihas.com/unfortunately-hindu-rajas-took-wrong-decisions-regarding-dara/): उत्तराधिकार का युद्ध इस बात की गवाही देता है कि मुगल काल की राजनीति में हिन्दु राजाओं ने गलत निर्णय लिए। यहां तक कि महाराजा जसवंतसिंह ने भी! - [दारा शिकोह की गिरफ्तारी (31)](https://bharatkaitihas.com/the-treacherous-emir-sold-dara-to-aurangzeb/): दारा शिकोह की गिरफ्तारी से पूरे भारत में हा-हाकर मच गया। दुष्ट और छली षड़यंत्रकारियों की विजय हो गई तथा हिन्दुओं का एक मित्र उनसे हमेशा के लिए छिन गया। - [शहजादी रौशन आरा (32)](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-roshanara-demanded-death-for-her-brother-dara/): शहजादी रौशनआरा ने अपने भाई दारा शिकोह के लिए प्राणदण्ड की मांग की! दरअसल वह अपने आप को उत्तराधिकार के युद्ध की वास्तविक विजेता मानती थी। - [सुलेमान शिकोह (33)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-made-shahzade-suleiman-shikoh-drink-opium-and-get-it-killed/): सुलेमान शिकोह (Suleman Shikoh) अपने पिता दारा शिकोह (Dara Shikoh) का बड़ा पुत्र था। सबको लगता था कि शाहजहाँ (Shahjahan) के बाद दारा शिकोह और दारा शिकोह के बाद सुलेमान शिकोह हिन्दुस्तान का बादशाह तथा लाल किलों (Red Forts of Agra and Delhi) का मालिक होगा। इसलिए सुलेमान बड़े उत्साह से राजकाज एवं युद्धों में […] - [जहानआरा के अहसान (34)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-could-not-forget-the-blessings-of-jahanara/): औरंगजेब (Aurangzeb) ने अपने पिता शाहजहाँ (Shahjahan) के साथ अपनी बड़ी बहिन जहानआरा बेगम (Jahanara Begum) को बंदी बना तो लिया था किंतु औरंगजेब पर जहानआरा के अहसान इतने थे कि औरंगजेब उन्हें चाह कर भी भुला नहीं सकता था। शहजादी जहानआरा का जन्म 23 मार्च 1614 को अजमेर में हुआ था। वह शाहजहाँ (Shahjahan) […] - [शहजादी जहानआरा (35)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-jahanara-was-engulfed-in-flames/): आग की लपटों में घिर गई शहजादी जहानआरा ! किसी भी मुगल शहजादी न इससे पहले या इसके बाद इस तरह की आग स्वप्न में भी नहीं देखी होगी। - [जहानआरा की दौलत (36)](https://bharatkaitihas.com/jahanara-was-the-richest-woman-of-the-mughalia-sultanate/): शाह-बेगम की पदवी मिल जाने के कारण जहानआरा को शासन में सीधे हस्तक्षेप करने के अधिकार मिल गए थे। इसी कारण उसे बेगम-साहिब भी कहा जाता था। - [रौशनआरा का रुतबा (37)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-roshanara-defeated-jahanara-the-elder-sister/): वह जहानआरा द्वारा शाहजहाँ के उत्तराधिकारी के रूप में पसंद किए गए भाई दारा शिकोह को नापसंद करने लगी और उद्दण्ड औरंगजेब का पक्ष लेने लगी। - [शाहजहाँ के हीरे मोती (38)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-quarrelled-with-shah-jahan-for-diamonds-and-pearls/): शाहजहाँ ने औरंगजेब को लिखा कि वक्त आने पर तेरे बेटे भी तेरे साथ वही करेंगे जो तूने मेरे साथ किया है। - [शाहजहाँ की मृत्यु (39)](https://bharatkaitihas.com/after-all-shah-jahan-died-in-one-evening/): आखिर एक शाम शाहजहाँ की मृत्यु हो गई। जिस आदमी ने लाखों लोगों को मौत बांटी थी, आज वही आदमी मर गया और उसकी मौत से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। - [शाहबेगम (40)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-made-jahanara-again-shah-begum/): औरंगजेब ने जहानआरा को फिर से शाहबेगम बना दिया! वह अपनी इस बड़ी बहिन के अहसान कभी नहीं भूल सकता था। उसी ने औरंगजेब को पाला था। - [रौशनआरा की हत्या (41)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-killed-raushanara-by-slow-poison/): रौशनआरा की हत्या मुगलिया राजनीति का एक ऐसा काला और रहस्यमय अध्याय है जो मुगलों की राजनीतिक हवस को अच्छी तरह उजागर करता है। - [मुगल शहजादियों के विवाह (42)](https://bharatkaitihas.com/clarions-of-the-marriage-of-mughal-princesses-started-ringing-again-in-red-fort/): लाल किले में मुगल शहजादियों के विवाह की शहनाइयाँ फिर से बजने लगीं! ये शहनाइयाँ अकबर के समय से बंद पड़ी थीं। - [लाल किले की रंगीनियाँ (43)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-expelled-artists-from-red-fort/): शाहजहां के काल में गहरी जड़ें जमा चुकीं लाल किले की रंगीनियाँ औरंगजेब को फूटी आंख नहीं सुहाती थीं। वह इन रंगीनियों को इस्लाम विरोधी समझता था। - [मुगलिया भवनों की सजावट (44)](https://bharatkaitihas.com/orders-for-building-construction-were-not-issued-now-from-red-fort/): मुगल सैनिक पूरे भारत को लूट कर लाल किलों को महंगे रत्नों से भर रहे थे और लाल किलों में बैठे उनके मालिक इन रत्नों को इन भवनों में लगा रहे थे। शाहजहां कालीन मुगलिया भवनों की सजावट देखते ही बनती थी। - [दिलरास बानू का मकबरा (45)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-did-not-provide-money-for-his-begums-tomb/): औरंगजेब ने अपनी बेगम दिलरास बानू का मकबरा अत्यंत साधारण पत्थरों से बनवाया था जिसे देखकर दिलरास बानू के पुत्रों को बड़ी निराशा हुई। - [जीनत-उन्निसा (46)](https://bharatkaitihas.com/due-to-fear-of-hindus-aurangzeb-built-a-mosque-in-red-fort/): जीनत-उन्निसा औरंगजेब की दूसरे नम्बर की बेटी थी। वह अपने बाबा शाहजहाँ की लाड़ली थी और अपने बाप औरंगजेब को पसंद नहीं करती थी। - [औरंगजेब की कट्टरता (47)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-prohibited-the-writing-of-kalma-on-coins/): औरंगजेब का इस्लाम अपने जमाने के तमाम मुसलमानों से अलग था। कारण कुछ लोग उसे पीर एवं औलिया मानते थे तो कुछ लोग इसे औरंगजेब की कट्टरता कहते थे। - [औरंगजेब का मंदिर विनाश (48)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-of-delhi-started-hammering-hindu-temples/): सुबह-शाम बजने वाले नगाड़े और शहनाइयां के स्वर मानो औरंगजेब के भय से यमुनाजी के जल में समाधि ले चुके थे। - [मूर्तिभंजक औरंगजेब (49)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-demolished-temples-of-ujjain-ayodhya-and-jagannathpuri/): 21 सितम्बर 1681 को औरंगजेब ने बेलदारों के दारोगा जवाहर चंद को आदेश दिए कि वह बुरहानपुर जाए तथा अजमेर से बुरहानपुर तक के मार्ग में स्थित प्रत्येक मंदिर को तोड़ डाले। - [ब्रजभूमि पर कहर (50)](https://bharatkaitihas.com/braj-devastated-by-havoc-of-red-fort-but-rajputana-settled/): ई.1670 में औरंगजेब के आदेश से मथुरा के केशवराय मन्दिर को तोड़कर उसके पत्थरों से उसी स्थान पर मस्जिद बनवाई गई तथा मथुरा का नाम बदलकर इस्लामाबाद रख दिया गया। - [राजपूताने पर कहर (51)](https://bharatkaitihas.com/after-desolating-braj-aurangzeb-bared-his-teeth-on-rajputana/): मुगल सेना ने खण्डेला स्थित मोहनजी का मंदिर, खाटू श्यामजी स्थित सांवलजी का मंदिर एवं निकटवर्ती अन्य मंदिर तोड़ दिए। - [दक्षिण भारत पर कहर (52)](https://bharatkaitihas.com/beladar-became-daroga-of-bathroom-who-demolished-temples-for-aurangzeb/): मुगल सैनिकों ने मंदिर में गायों को लाकर उनकी हत्या की तथा मंदिर को ढहा दिया। - [शाइस्ता खाँ की मक्कारी (53)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-imprisoned-aurangzebs-army-in-mountains/): अभी शाइस्ता खाँ मार्ग में ही था कि उसे समाचार मिला कि शिवाजी ने छुरा भौंककर बीजापुर के सेनापति अफजल खाँ का वध कर दिया है। - [शाइस्ता खाँ की अंगुली (54)](https://bharatkaitihas.com/shivaji-cut-off-the-finger-of-aurangzebs-maternal-uncle/): छत्रपति शिवाजी ने शाइस्ता खाँ की अंगुली नहीं काटी थी, अपितु अंगुली के रूप में औरंगजेब की नाक काटकर उसके हाथ में पकड़ाई थी। - [महाराजा जसवंतसिंह का उपकार (55)](https://bharatkaitihas.com/maharaja-jaswant-singh-gave-shivaji-an-opportunity-to-escape/): शिवाजी पर किया गया महाराजा जसवंतसिंह का उपकार स्वयं महाराजा के लिए बहुत भारी पड़ा। औरंगजेब ने जसवंतसिंह के पुत्रों को छल-बल से मारा। - [राजकुमारी चारुमती का विवाह (56)](https://bharatkaitihas.com/maharana-raj-singh-married-with-princess-charumati/): औरंगजेब ने महाराणा को एक कड़ा पत्र लिखकर नाराजगी व्यक्त की जिसमें कहा गया कि मेरे हुक्म के बिना किशनगढ़ जाकर तुमने शादी क्यों की? - [सूरत बंदरगाह की लूट (57)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-shivaji-looted-the-estate-of-jahanara/): सूरत बंदरगाह की लूट औरंगजेब के गाल पर जड़ा गया ऐसा तमाचा था जिसकी गूंज पूरे भारत में सुनाई दी।इस लूट के बाद शिवाजी हिन्दू जाति के नायक बन गए। - [शिवाजी लाल किले में (58)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-shivaji-entered-red-fort-with-bhagwa-flag-on-elephant/): शिवाजी की आगरा यात्रा न केवल मुगल सल्तनत के इतिहास की अपितु मराठों के इतिहसा की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना ने मराठों की धाक जमा दी। - [शिवाजी की गर्जना (59)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-walls-shook-with-shivajis-roar/): जब शिवाजी लाल किले में खड़े होकर गरजे तो औरंगजेब जैसे क्रूर एवं मदांध बादशाह की रूह भी कांप उठी। शिवाजी की गर्जना से लाल किले की दीवारें कांप उठीं! शिवाजी की गर्जना न केवल मुगल इतिहास की, अपितु हिन्दुओं के इतिहास की भी अत्यंत महत्वपूर्ण घटना बन गई। जब औरंगजेब के बख्शी असद खाँ […] - [अमरसिंह राठौड़ की गर्जना (60)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-saw-the-walls-of-the-red-fort-shivering-with-the-roar-of-amarsingh-rathod/): औरंगजेब वह दिन भूल नहीं पाता था जब नागौर के राव अमरसिंह राठौड़ ने औरंगजेब के पिता शाहजहाँ की आंखों के सामने ही भरे दरबार में बादशाह के बख्शी सलावत खाँ को मार डाला था! - [शिवाजी का पलायन (61)](https://bharatkaitihas.com/the-walls-of-the-red-fort-could-not-stop-shivaji/): औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा में नजरबंद कर रखा था किंतु उसके सैनिक शिवाजी का पलायन नहीं रोक पाए। - [संभाजी की वापसी (62)](https://bharatkaitihas.com/the-brahmin-couple-fed-sambhaji-in-their-plate/): औरंगजेब को जब शिवाजी और उनके पुत्र संभाजी के सकुशल रायगढ़ पहुंच जाने के समाचार मिले तो वह अपमान और क्रोध से तिलमिलका कर रह गया। - [हिन्दू राजाओं की सुन्नत (63)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-played-a-conspiracy-to-take-hindu-rajas-to-iran-and-circumcise-them/): राजकुुमार पद्मसिंह को बीकानेर राजवंश का अब तक का सबसे वीर पुरुष माना जाता है। उसकी तलवार का वजन आठ पौण्ड तथा खाण्डे का वजन पच्चीस पौण्ड था। - [मिर्जाराजा जयसिंह (64)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-killed-mirzaraja-jaisingh-by-poisoning-him/): ई.1636 में शाहजहाँ ने जयसिंह को 'मिर्जा-राजा' की उपाधि दी थी। तब से मिर्जाराजा जयसिंह शाहजी एवं शिवाजी को हानि पहुंचाता आ रहा था। - [वीर गोकुला जाट (65)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-got-veer-gokula-jat-sliced-in-agras-red-fort/): गंगा-यमुना के दो-आब में निवास करने के कारण जाटों को मुसलमान शासकों के हाथों दीर्घकाल तक उत्पीड़न झेलना पड़ा जिसके कारण इनमें संघर्ष करने की प्रवृत्ति विकसित हो गई। - [औरंगजेब को चुनौती (66)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-looted-surat-for-second-time-and-openly-challenged-aurangzeb-for-war/): छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्पूर्ण अस्तित्व ही धूर्त औरंगजेब को चुनौती था। औरंगजेब के समक्ष शिवाजी की शक्ति कुछ भी नहीं थी किंतु औरंगजेब शिवाजी को छू भी नहीं पाता था। शिवाजी की आगरा यात्रा के लिए मिर्जाराजा जयसिंह के माध्यम से शिवाजी को शाही खजाने से 1 लाख रुपए दिए गए थे। जब शिवाजी […] - [छत्रसाल बुंदेला (67)](https://bharatkaitihas.com/chhatrapati-made-chhatrasal-an-enemy-of-the-red-fort/): औरंगजेब तो ई.1707 में छत्रसाल का दमन करने की अधूरी इच्छा के साथ मर गया किंतु राजा छत्रसाल ई.1731 तक मातृभूमि की सेवा करता रहा। - [छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक](https://bharatkaitihas.com/red-fort-saw-with-great-surprise-the-coronation-of-chhatrapati-shivaji/): ब तक वह कट्टरपंथी औरंगजेब, अकबर के सिंहासन पर बैठा रहा, एक भी राजपूत उसे बचाने के लिए अपनी अंगुली भी हिलाने को तैयार नहीं था। औरंगजेब को अपनी दाहिनी भुजा खोकर दक्षिण के शत्रुओं के साथ युद्ध करना पड़ा। - [भारतीय औरतों से विवाह (68)](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-did-not-like-that-portuguese-men-marry-indian-women/): पुर्तगालियों ने अराकानी स्त्रियों के साथ विवाह करने आरम्भ कर दिए क्योंकि पुर्तगाली औरतें भारत में आकर रहने को तैयार नहीं थीं। - [सतनामियों के ताबीज (69)](https://bharatkaitihas.com/afraid-of-satnamis-aurangzeb-tied-amulets-on-cannons/): संत रैदास तथा उनके शिष्यों द्वारा दिए गए भगवद्भक्ति के मंत्र ने सतनामियों को इतना साहस प्रदान किया कि वे भारतीय इतिहास का अमिट हिस्सा बन गए।  - [सिक्ख गुरुओं की हत्या (70)](https://bharatkaitihas.com/red-fort-killed-guru-arjun-dev-and-guru-tegh-bahadur/): 11 नवम्बर 1675 को दिल्ली के चाँदनी चौक में काज़ी ने फ़तवा पढ़ा और जल्लाद जलालदीन ने तलवार से गुरु तेग बहादुर का शीश धड़ से अलग कर दिया। - [नेताजी पाल्कर](https://bharatkaitihas.com/netaji-palkar-became-a-hindu-again-by-defying-the-red-fort/): लाल किले को धता बताकर नेताजी पाल्कर फिर से हिन्दू बन गया! - [औरंगजेब की औलादें](https://bharatkaitihas.com/shahzada-muhammad-sultan-died-in-salimgarh-jail/): औरंगजेब की औलादें जेलों में सड़-सड़ कर मरीं, जो जीवित बचीं वे आपस में कट-कट कर मरीं। औरंगजेब ने सबकी जिंदगी नर्क बना रखी थी। - [यूसुफजइयों के कबीले](https://bharatkaitihas.com/yusufjai-sold-twenty-thousand-men-and-women-of-kabul-to-the-markets-of-central-asia/): यूसुफजइयों के कबीले बड़े दुर्दान्त, लड़ाकू एवं क्रूर थे। वे प्रायः आसपास के मैदानों पर धावा बोलते थे और लूटमार करके भाग जाते थे। - [महाराजा जसवंतसिंह की रानियाँ](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-imprisoned-the-queens-of-maharaja-jaswant-singh/): औरंगजेब को पूरा विश्वास था कि स्वर्गीय महाराजा की दोनों रानियां एवं राजकुमार अजीतसिंह दिल्ली में ही कहीं पर छिपे हुए हैं। अतः घर-घर तलाशी ली गई। - [भारत में जजिया](https://bharatkaitihas.com/red-fort-re-enforced-jiziya-in-india/): जजिया एक विशेष प्रकार का कर है जो मुस्लिम शासकों द्वारा अपनी गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाता था। भारत में जजिया से प्रथम परिचय ई.712 में हुआ था जब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध प्रदेश को जीतकर वहाँ के हिन्दुओं पर जजिया लागू किया था। लाल किले के नए मालिकों ने भी कई बार भारत […] - [औरंगजेब से नफरत](https://bharatkaitihas.com/the-whole-country-stood-up-against-the-red-fort/): जब औरंगजेब ने हिन्दू राजाओं की एक साथ सुन्नत करने का प्रयास किया तो हिन्दू राजा औरंगजेब से विमुख हो गए। - [राठौड़ों का राजकुमार](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-could-not-get-the-prince-of-the-rathores/): महाराणा राजसिंह ने राजकुमार अजीतसिंह को केलवा ठिकाणे का पट्टा देकर वहाँ रक्खा तथा जोधपुर के राजपूत सरदारों को आश्वस्त किया कि बादशाह कितना ही ताकतवर क्यों न हो, वह वीर दुर्गादास तथा मेवाड़ की सम्मिलित शक्ति का सामना नहीं कर सकता। - [राजपूताने पर आक्रमण](https://bharatkaitihas.com/rathores-and-sisodis-drag-aurangzeb-into-the-mountains/): महाराणा ने भीलों की सेना को पहाड़ों की नाकाबंदी करने पर नियुक्त कर दिया। इन भीलों ने सैंकड़ों मुगल सैनिकों को अपने तीरों से मार डाला। - [कुंवर भीमसिंह](https://bharatkaitihas.com/maharana-raj-singh-brought-the-gold-of-the-mughals-to-udaipur-by-loading-on-camels/): अब औरंगजेब मेवाड़ की तरफ से निश्चिंत होकर अपनी सम्पूर्ण शक्ति मराठों के विरुद्ध लगा सकता था। - [औरंगजेब का चौथा बेटा](https://bharatkaitihas.com/aurangzebs-fourth-prince-was-rebel/): औरंगजेब अपने अमीरों, उमरावों, एवं सेनापतियों को भी संदेह की दृष्टि से देखता था। इसलिए वह राज्य के छोटे-से-छोटे काम को स्वयं करने का प्रयत्न करता था। - [औरंगजेब का छल](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-wrote-a-false-letter-and-sent-it-to-veer-durgadas/): शंभाजी ने अकबर को आश्वासन दिया कि वह शीघ्र ही एक बड़ी सेना लेकर औरंगजेब पर आक्रमण करने के लिए उत्तर भारत की तरफ अभियान करेगा। - [शहजादी जेबुन्निसा](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-jailed-his-elder-daughter-zebunnisa/): औरंगजेब को चित्रकला, मूर्तिकला एवं संगीतकला से घृणा थी किंतु जेबुन्निसा को संगीत तथा साहित्य में बहुत रुचि थी और वह अपने समय की अच्छी गायिका थी। - [शहजादी जेबुन्निसा का अंत](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-jebunnisa-died-in-jail/): औरंगजेब अपनी पांच पुत्रियों में से सबसे अधिक प्रेम अपनी बड़ी पुत्री जेबुन्निसा से करता था और अपने पांच पुत्रों में से सर्वाधिक प्रेम अपने चौथे नम्बर के पुत्र अकबर से करता था किंतु इन दोनों ने ही औरंगजेब को मुगलों के तख्त से उतारने का षड़यंत्र रचा। - [बेगम जहांजेब बानू](https://bharatkaitihas.com/jahanzeb-daughter-in-law-of-aurangzeb-made-anirudh-singh-a-son/): वह नित्य प्रतिदिन अल्लाह से प्रार्थना किया करे कि उसका पिता मर जाए ताकि अकबर को एक दिन मुगलों का बादशाह बनने का अवसर मिल सके। - [मुअज्जम](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-prohibited-cutting-of-shahzades-hair-and-nails/): इस समय तक मुअज्जम यौवन की दहलीज पर पैर रख चुका था इसलिए उसके मन में औरतों के प्रति आकर्षण उत्पन्न होना स्वाभाविक था। - [वीर राजाराम जाट](https://bharatkaitihas.com/veer-rajaram-jat-put-the-bones-of-emperor-akbar-in-the-fire/): गोकुला के दर्दनाक अंत से बुरी तरह आहत हुए जाट धीरे-धीरे सिनसिनी गांव के निवासी ब्रजराज जाट तथा उसके भाई भज्जासिंह जाट के नेतृत्व में एकत्रित होने लगे। - [शंभाजी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80/): औरंगजेब ने सोचा था कि शंभाजी की हत्या के बाद मराठा शक्ति बिखर जाएगी किंतु हुआ ठीक उलटा। - [गुरु गोविन्दसिंह](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/): नौ वर्ष की आयु में जब गोविन्दसिंह के पिता दिल्ली में शहीद हुए तब सिक्ख पंथ का भार बालक गोविन्द सिंह के कन्धों पर आ गया और वे सिक्खों के दसवें गुरु हुए। - [शहजादी सफियतुन्निसा](https://bharatkaitihas.com/veer-durgadas-returned-aurangzebs-grandson-and-granddaughter/): राजकुमार अजीतसिंह शहजादी सफियतुन्निसा से विवाह करना चाहता था किंतु वीर दुर्गादास ने अजीतसिंह को शहजादी सफियतुन्निसा से मिलने एवं उससे विवाह करने पर रोक लगा दी। - [दक्षिण भारत में औरंगजेब](https://bharatkaitihas.com/aurangzeb-was-in-a-rage-in-south-india-for-twenty-five-years/): दक्षिण भारत में औरंगजेब के पच्चीस साल उतने ही भयावह थे जितने तैमूर लंग के कुछ साल उत्तर भारत के लिए भयंकर विनाशकारी रहे थे। - [मुगल काल में किसान](https://bharatkaitihas.com/the-red-fort-was-squeezing-blood-of-people-of-india/): किसानों के खेतों पर जाने वाले कर्मचारी एवं सिपाही बेईमान थे इस कारण वे किसानों से बड़ी क्रूरता से पेश आते थे। - [औरंगजेब की मौत](https://bharatkaitihas.com/nobody-was-crying-over-aurangzebs-death/): औरंगजेब का जन्म ई.1618 में हुआ था और अब वह जीवन के उननब्बेवां पतझड़ देख रहा था। - [चगताई शहजादों का रक्त](https://bharatkaitihas.com/baburs-descendants-were-accustomed-to-murder-of-chagatai-shahzadas/): इस वंश के जितने शहजादों का खून स्वयं इस परिवार के सदस्यों ने बहाया, उतना खून उनके शत्रुओं ने भी नहीं बहाया था। - [औरंगजेब की वसीयत](https://bharatkaitihas.com/my-part-in-the-house-is-from-floor-to-ceiling-your-part-is-from-roof-to-sky/): औरंगजेब की वसीयत में मुगल सल्तनत के उत्तरी भारत के प्रांतों को दिल्ली एवं आगरा नामक दो भागों में विभक्त करके अपने शेष दो पुत्रों को आपस में बांट लेने की सलाह दी थी। - [शाहआलम](https://bharatkaitihas.com/after-killing-aurangzebs-favorite-sons-shah-alam-became-the-emperor-of-india/): आजमशाह को किसी नजूमी ने बताया कि यदि 20 जून को युद्ध आरम्भ हुआ तो तेरी विजय होगी। - [महाराजा अजीतसिंह](https://bharatkaitihas.com/maharaja-ajitsingh-washed-the-jodhpur-fort-with-ganga-water/): अजीतसिंह पूरे मारवाड़ राज्य का स्वामी था किंतु औरंगजेब ने उसे अपने ही राज्य में एक छोटा सा जागीरदार बनाने की साजिश की थी। - [शाहे बेखबर](https://bharatkaitihas.com/the-court-of-shahe-bekhar-was-divided-into-shia-and-sunni/): बादशाह राजकीय कार्यों में इतना अधिक लापरवाह था, कि लोग उसे 'शाहे-बेख़बर' कहने लगे थे किंतु इतिहासकारों का यह आरोप सही नहीं लगता है। - [शहजादा कामबक्श](https://bharatkaitihas.com/bahadurshah-heals-with-his-hands-on-the-wounds-of-kambaksha/): कामबख्श बुरी तहर से घायल हो गया तथा उसके शरीर से रक्त बह जाने के कारण वह बेहोश हो गया। - [सवाई जयसिंह से दुश्मनी](https://bharatkaitihas.com/kachhawahs-rathores-and-sisodis-formed-a-union-against-red-fort/): जजाऊ के युद्ध में आजमशाह तथा बेदारबख्त की मृत्यु हो गई तथा सवाई जयसिंह के भी बहुत से राजपूत सिपाही मारे गए। - [बंदासिंह बैरागी](https://bharatkaitihas.com/red-fort-finds-bandasingh-bairagi-as-new-enemy/): माधवदास बैरागी, गुरु गोविंदसिंह की बातों से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उसने स्वयं को गुरु का बन्दा कहना आरम्भ कर दिया। - [चूड़ामन जाट](https://bharatkaitihas.com/red-fort-kneels-in-front-of-chudaman-jat/): जब औरंगजेब दक्षिण भारत में अंतिम सांसें गिन रहा था तब जाटों का नेतृत्व चूड़ामन जाट के हाथों में था। - [बहादुरशाह की मृत्यु](https://bharatkaitihas.com/body-of-emperor-could-not-be-buried-for-two-and-a-half-months/): बादशाह सिक्खों का दमन करने तथा लाहौर के मुल्ला-मौलवियों से समझौता करने के लिए लाहौर चला गया। - [जहाँदारशाह](https://bharatkaitihas.com/jahandarshah-made-the-red-fort-a-dance-house/): बहादुरशाह के पुत्रों में से जहाँदारशाह सबसे बड़ा था। उसका वास्तविक नाम मिर्जा मुइज्जुद्दीन बेग मुहम्मद खान था। - [जहाँदारशाह की हत्या](https://bharatkaitihas.com/iranian-wazirs-betrayed-jahandarshah-and-got-him-killed/): जहाँदारशाह की हत्या से भारत के मुगलों में बादशाहों की हत्या का एक लम्बा सिलसिला शुरु होता है। हत्याओं के इसी सिलसिले ने मुगल सल्तनत को उसके अंत तक पहुंचा दिया। ईरानी वजीरों ने गद्दारी करके जहाँदारशाह की हत्या करवाई! मुगल बादशाह जहाँदारशाह ने शासन व्यवस्था में बड़े परिवर्तन करने के प्रयास किए। उसने राज्य […] - [एक लाख हिन्दुओं की हत्या कर दी तैमूर लंग ने (148)](https://bharatkaitihas.com/timur-lung-killed-one-lakh-hindus-outside-delhi/): तैमूर लंग ने एक लाख हिन्दुओं को बंदी बना लिया था। इतने सारे बंदियों के रहते वह दिल्ली पर आक्रमण नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि एक लाख हिन्दुओं की हत्या कर दी जाए। तैमूर लंग की सेना ने भटनेर के किले पर अधिकार करके दस हजार हिन्दुओं को […] - [दिल्ली का कत्लेआम करवाया तैमूर लंग ने (149)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%86%e0%a4%ae/): तैमूर लंग की सेना ने दिल्ली का कत्लेआम करके मानवता के माथे पर कालिख पोत दी। कोई भी मनोवैज्ञानिक इस गुत्थी का हल नहीं बता सकता कि कैसे कोई मनुष्य मजहब के नाम पर किसी दूसरे धार्मिक विश्वास वाले लोगों को पशुओं की तरह काटकर खुदा का शुक्रिया अदा कर सकता है! तैमूर लंग की […] - [शिवालिक क्षेत्र पर आक्रमण करके तैमूर ने लाखों हिन्दुओं को मार दिया (150)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/): दिल्ली में कत्लेआम करने के बाद तैमूर लंग ने शिवालिक क्षेत्र पर आक्रमण किया। पहाड़ों के हिन्दुओं ने तैमूर की सेना का दृढ़ता से मुकाबला किया किंतु तैमूर की बर्बर सेना ने लाखों हिन्दुओं को मार दिया। तैमूर लंग की सेना को दिल्ली से लेकर मेरठ, तुगलुक नगर, सहारनपुर एवं हरिद्वार आदि अनेक स्थानों पर […] - [तैमूर लंग का विध्वंस (151)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b8/): तैमूर लंग का विध्वंस भारतीयों का मनोबल तोड़ गया। बहुत दिनों तक लोग एक दूसरे से आँख नहीं मिलाते थे! उनकी आंखों के सामने उनकी माता, बहिनों एवं पुत्रियों का बलात्कार हुआ था। उनके बच्चों को आग में झौंक दिया गया था। उनके सगे-सम्बन्धी तैमूर की सेना द्वारा गुलाम बनाकर मध्यएशिया ले जाए गए थे। […] - [खिज्र खाँ दिल्ली पर शासन करने लगा (152)](https://bharatkaitihas.com/khizr-khan-began-to-rule-delhi-on-behalf-of-samarkand/): तैमूर लंग द्वारा पंजाब के सूबेदार के रूप में नियुक्त खिज्र खाँ सैयद ने ई.1414 में दिल्ली पर अधिकार करके दिल्ली में एक नए शासक वंश की स्थापना की जिसे भारत के इतिहास में सैयद वंश कहा जाता है ई.1398-99 में किए गए तैमूर लंग के भारत अभियान के भारतीय समाज पर गहरे सामाजिक, आर्थिक, […] - [सैयद वंश दिल्ली पर शासन नहीं कर सका (153)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%a6-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6/): तैमूर लंग ने खिज्र खाँ सैयद को मुल्तान तथा दीपालपुर का गवर्नर नियुक्त किया था। ई.1414 में खिज्र खाँ ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया तथा स्वयं को समरकंद का प्रतिनिधि घोषित करके दिल्ली का सुल्तान बन गया। खिज्र खाँ ने दिल्ली में सैयद वंश की स्थापना की। ई.1421 में खिज्र खाँ बीमार पड़ा और […] - [बहलोल लोदी दिल्ली का सुल्तान बन गया (154)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80/): ई.1451 में दिल्ली का सुल्तान अल्लाउद्दीन आलमशाह सैयद दिल्ली छोड़कर बदायूं चला गया तथा लाहौर एवं सरहिंद के सूबेदार बहलोल लोदी ने दिल्ली के तख्त पर अधिकार कर लिया। इसके साथ ही दिल्ली से सैयद वंश की सदा के लिए विदाई हो गई तथा दुर्दांत लोदी दिल्ली के राजनीतिक मंच पर भूमिका निभाने आ गए। […] - [सिकंदर लोदी भारत का सुल्तान बन गया (155)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80/): ई.1489 में बहलोल लोदी की मृत्यु हो गई तथा उसका पुत्र निजाम खाँ, सिकंदर लोदी के नाम से दिल्ली का सुल्तान हुआ। वह हेमा नामक सुनार स्त्री के पेट से उत्पन्न हुआ था। सिकंदर का चेहरा बहुत सुंदर था और वह अपने चेहरे की सुन्दरता बनाये रखने के लिए दाढ़ी नहीं रखता था। अब्दुल्ला ने […] - [सिकंदर लोदी का शासन (156)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बनने के बाद सिकंदर लोदी को अगले तीन साल अपने विरोधियों को नष्ट करने में लगाने पड़े। इसके बाद उसने अफगान अमीरों को अनुशासन में बांधने का प्रयास किया। सिकंदर लोदी का शासन प्रबंधन तथा अमीरों पर नियंत्रण ये एक-साथ चलते रहे। अफगान अमीर अपनी उच्छृंखल प्रवृत्ति के कारण किसी का […] - [सिकंदर लोदी की कट्टरता (157)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be/): सिकंदर लोदी की कट्टरता उसे फीरोज तुगलक तथा औरंगजेब जैसे उन्मादी शासकों की श्रेणी में लाकर खड़ा करती है। वह इस्लाम के विशुद्ध स्वरूप में विश्वास करता था। उसने मुस्लिम औरतों को पीरों की मजारों पर जाने से रोक दिया! उसने शिया मुसलमानों को ‘ताजिया’ निकालने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया। सिकंदर लोदी ने अफगान […] - [सिकंदर लोदी के अत्याचार (158)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/): मजहबी कट्टरता से ग्रस्त सिकंदर लोदी के अत्याचार हिन्दुओं के लिए नई मुसीबतें लेकर आए। उसने हिन्दुओं की तीर्थयात्रा पर रोक लगा दी। उन्हें मंदिरों में जाने से रोक दिया तथा मंदिरों की मूर्तियां तुड़वाकर कसाइयों को दे दीं। उत्तर भारत की जनता सिकंदर लोदी के अत्याचारों से त्राहि-त्राहि करने लगी। सिकंदर लोदी ने अपनी […] - [ग्वालियर के तोमर और सिकंदर लोदी (159)](https://bharatkaitihas.com/sikandar-lodi-declared-jihad-against-the-tomars-of-gwalior/): सिकंदर लोदी के शासनकाल मेें ग्वालियर पर तोमर राजपूतों का शासन था। मुहम्मद गौरी के भारत आगमन के समय दिल्ली पर इन्हीं तोमरों का शासन था किंतु जब दिल्ली से तोमरों का राज्य हट गया तो वे ग्वालियर आ गए। सिकंदर के काल में ग्वालियर के तोमर बड़े शक्तिशाली हुआ करते थे। सिकन्दर लोदी ने […] - [सिकंदर लोदी का जेहाद (160)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6/): सिकंदर लोदी की बड़ी इच्छा थी कि वह मेवाड़ के गुहिल शासक महाराणा सांगा, ग्वालियर के तोमर राजा मानसिंह तथा रणथंभौर के हाड़ा चौहान को समाप्त करके सम्पूर्ण मध्यभारत पर अधिकार कर ले। जब वह इस कार्य में सफल नहीं हुआ तो उसने हिन्दू राजाओं के विरुद्ध जेहाद घोषित कर दिया। हिन्दू राजाओं ने सिकंदर […] - [इब्राहीम लोदी ने भाई जलाल खाँ की हत्या करवा दी (161)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80/): इस समय तक सुल्तान इब्राहीम की सेनाएं आगरा से ग्वालियर के लिए कूच कर चुकी थीं। इस कारण इब्राहीम की स्थिति दो पाटों के बीच फंसे घुन जैसी हो गई। इब्राहीम लोदी को अपनी गलती का अहसास हो गया कि उसने जौनपुर को स्वतन्त्र करके बड़ी भूल की है। 21 नवम्बर 1517 को दिल्ली के […] - [आजम हुमायूं शेरवानी को इब्राहीम लोदी ने छल से पकड़ लिया (162)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): सुल्तान इब्राहीम लोदी ने अपने पिता सिकंदर लोदी का सपना पूरा करने के लिए आजम हुमायूं शेरवानी नामक एक शक्तिशाली अमीर को ग्वालियर पर हमला करने भेजा। आजम हुमायूं शेरवानी के पास अपने पचास हजार घुड़सवार थे। सुल्तान इब्राहीम लोदी ने उसे 30 हजार घुड़सवार तथा 300 हाथीसवार योद्धा भी प्रदान किए। आजम हुमायूं शेरवानी […] - [ग्वालियर दुर्ग पर अधिकार कर लिया इब्राहीम लोदी ने (163)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/): राजा विक्रमादित्य तोमर समझ चुका था कि मनुष्यों एवं पशुओं को खोने के बाद अब उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं बचा था जिसके सहारे वह इस युद्ध को जीत सके। इसलिए राजा ने इब्राहीम लोदी के पास संधि का प्रस्ताव भिजवाया। इब्राहीम लोदी ने ग्वालियर दुर्ग पर अधिकार कर लिया! दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम […] - [विक्रमादित्य तोमर के पास था कोहिनूर हीरा (164)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b0/): दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी ने ग्वालियर दुर्ग पर विजय प्राप्त करके राजा विक्रमादित्य तोमर को शम्साबाद का जागीरदार बनाया किंतु विक्रमादित्य शम्साबाद की बजाय अपने परिवार को लेकर आगरा के किले में रहने लगा। हरिहर निवास द्विवेदी ने लिखा है कि धुरमंगद चम्बल की अपनी पुरानी गढ़ियों में चले गए और विक्रमादित्य अपने छोटे […] - [महाराणा सांगा से पराजय (165)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%af/): ग्वालियर के तोमरों को हराकर इब्राहीम लोदी ने मध्य भारत पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली किंतु उसके बाद इब्राहीम लोदी की चित्तौड़ के शासक महाराणा सांगा से पराजय हो गई। दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी ने ग्वालियर के दुर्ग पर विजय प्राप्त करके राजा विक्रमादित्य तोमर को शम्साबाद का जागीरदार बना दिया किंतु विक्रमादित्य […] - [तुर्की अमीरों की हत्या करवाता था इब्राहीम लोदी (166)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): बहुत से तुर्की अमीर सुल्तान इब्राहीम लोदी के साथ एक ही दरी पर बैठते थे और सुल्तान के सामने अपने हाथ अपनी छाती पर कैंची की तरह नहीं रखते थे। इस कारण सुल्तान इब्राहीम लोदी तुर्की अमीरों की हत्या करवा देता था। यदि कोई तुर्की अमीर गद्दारी करने का प्रयास करता था, तो उसके प्राण […] - [तुर्की अमीरों की बगावत को कुचल दिया इब्राहीम लोदी ने (167)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a4/): सुल्तान इब्राहीम लोदी ने अमीरों पर अंकुश रखने के लिए नियम एवं कायदे लागू किए जिसके कारण अनेक अमीर सुल्तान के विरोधी हो गए और अनेक तुर्की अमीरों ने बगावत कर दी। दिल्ली सल्तानत के सुल्तान के विरुद्ध तुर्की अमीरों की बगावत कोई नई बात नहीं थी। यह तो कुतुबुद्दीन एबक के समय से ही […] - [इब्राहीम लोदी की हत्या (168)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): भारत में ऐसा कौन था जो इब्राहीम लोदी की हत्या नहीं करना चाहता था किंतु भारत के किसी भी आदमी के लिए ऐसा करना संभव नहीं हुआ। अंत में यह कार्य समरकंद से आए मंगोल आक्रांता जहीरुद्दीन बाबर ने किया। उसकी सेना ने इब्राहीम लोदी का सिर काट दिया। दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी ने […] - [काश्मीर का मुसलमानीकरण (169)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3/): काश्मीर का मुसलमानीकरण करने में जितना हाथ मुस्लिम आक्रांताओं का रहा, उससे भी अधिक हाथ सूफियों का रहा। सबसे पहले सूफियों ने काश्मीर में जाकर मुसलमानों की जनसंख्या का निर्माण करना आरम्भ किया। यद्यपि सुल्तान इब्राहीम लोदी की मृत्यु के साथ ही दिल्ली सल्तनत तथा उसका इतिहास समाप्त हो जाते हैं तथापि उस काल में […] - [जौनपुर तथा खानदेश दिल्ली सल्तनत से अलग हो गए (170)](https://bharatkaitihas.com/jaunpur-and-khandesh-split-from-delhi-sultanate/): जौनपुर तथा खानदेश दिल्ली सल्तनत के काल में प्रांतीय मुस्लिम राज्य थे। जौनपुर तथा खानपुर दोनों के शासक दिल्ली के सुल्तान द्वारा नियुक्त किए जाते थे। जौनपुर जौनपुर उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के तट पर स्थित है। कहा जाता है कि इस नगर की स्थापना दिल्ली के सुल्तान फीरोजशाह तुगलक ने ई.1359-60 में की […] - [दिल्ली सल्तनत में बंगाल की स्थिति (171)](https://bharatkaitihas.com/delhi-could-not-keep-bengal-under-its-control/): दिल्ली सल्तनत में बंगाल की स्थिति कभी स्वतंत्र, कभी अर्द्धस्वतंत्र तो कभी पूर्णतः अधीनस्थ राज्य की रहती थी। दिल्ली से दूर होने के कारण दिल्ली के सुल्तान अधिक समय के लिए बंगाल को अपने अधीन नहीं रख पाते थे। भारत के अन्य प्रांतों की तरह बंगाल पर भी अनादि काल से हिन्दू राजाओं का शासन […] - [बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार हो गया (172)](https://bharatkaitihas.com/muslim-population-spread-in-bengal-under-the-umbrella-of-bengali-sultans/): बंगाल में अनादि काल से हिन्दू संस्कृति फल-फूल रही थी किंतु दिल्ली सल्तनत के काल में बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार हो गया तथा बंगाल की जनसंख्या को तलवार के बल पर इस्लाम के अधीन ले जाया गया। बलबन ने बंगाल के सुल्तान तुगरिल खाँ को मारकर अपने पुत्र बुगरा खाँ को बंगाल का […] - [गुजरात में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार (173)](https://bharatkaitihas.com/muslim-population-spread-in-gujarat-when-delhi-was-liberated-from-the-sultanate/): भारत के अन्य प्रदेशों की तरह गुजरात में भी अनादि काल से हिन्दू सभ्यता एवं संस्कृति विकसित थी किंतु जब दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों ने गुजरात को अपने अधीन किया तब गुजरात में मुस्लिम जनसंख्या का प्रसार होने लगा। पाठकों को स्मरण होगा कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ के मन्दिर को लूटकर अथाह सम्पत्ति प्राप्त […] - [महमूद बेगड़ा जहर खाकर जिंदा रहता था (174)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be/): गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा को डर था कि उसे छल से विष देकर मारा जा सकता है, इसलिए वह स्वयं ही प्रतिदिन थोड़ा सा जहर खाता था ताकि उसका शरीर जहर सेवन का आदी हो जाए। तैमूर लंग के आक्रमण के बाद दिल्ली सल्तन का शिकंजा ढीला पड़ गया तथा गुजरात, मालवा एवं नागौर […] - [मालवा में मुस्लिम जनसंख्या](https://bharatkaitihas.com/goris-and-khiljis-spread-muslim-population-in-malwa/): ई.1531 में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने मालवा को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया। - [बुढ़िया का चश्मा (हिन्दी लघु नाटक)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be/): प्रस्तावना – बुढ़िया का चश्मा बुढ़िया का चश्मा डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित भारतीय राजनीति तथा भारत में फैले भ्रष्टाचार पर एक करारा व्यंग्य है जो लघुनाटक के रूप में लिखा गया है। हिन्दी साहित्य में व्यंग्य नाटक लिखे जाने की परम्परा बहुत पुरानी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों की आकांक्षाएं जिस प्रकार बढ़ी […] - [चन्द्रमा](https://bharatkaitihas.com/deity-moon-killed-devguru-jupiters-wife/): चन्द्रमा ने देवगुरु बृहस्पति की पत्नी का हरण कर लिया! भगवान श्रीहरि विष्णु के नाभि-सरोवर के कमल से प्रजापति ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई। विष्णु पुराण तथा हरिवंश पुराण सहित अनेक ग्रंथों में आई एक कथा के अनुसार ब्रह्मा के पुत्र हुए अत्रि और अत्रि के पुत्र हुए चंद्रमा। उन्हीं अत्रि के नेत्रों से अमृतमय चन्द्रमा […] - [राजा इल](https://bharatkaitihas.com/king-il-married-budh-muni-as-ila/): राजा इल ने इला बनकर बुध मुनि से विवाह किया! वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड में राजा इल की अद्भुत एवं विस्मयकारी कथा मिलती है। इस कथा का उल्लेख अन्य पुराणों में भी किया गया है। इस कथा के अनुसार प्रजापति कर्दम के पुत्र इल बाल्हिक देश के राजा थे। वे बड़े धर्मात्मा नरेश थे तथा […] - [राजा इल को पुरुषत्व (4)](https://bharatkaitihas.com/king-il-was-blessed-with-masculinity-by-lord-shiva/): जब देवी पार्वती के श्राप से राजा इल स्त्री बन गया तो वह बड़ा दुखी हुआ। इस पर ऋषियों को राजा इल पर बड़ी दया आई और उन्होंने भगवान शिव से राजा इल को पुरुषत्व दिलवाया। जब समस्त किन्नरियां पर्वत के किनारे चली गईं तो मुनि के रूप में रह रहे राजा बुध ने इला […] - [उर्वशी](https://bharatkaitihas.com/bharat-muni-cursed-urvashi-and-sent-her-to-earth/): भरत मुनि ने उर्वशी को श्राप देकर धरती पर भेज दिया! श्रीहरिवंश पुराण सहित अनेक पुराणों में आए एक कथानक के अनुसार बुध एवं इला का पुत्र पुरुरवा हुआ। यही पुरुरवा चंद्रवंशी राजाओं का मूल पुरुष था। राजा पुरुरवा और उर्वशी का उल्लेख वेदों में भी मिलता है। वही पुरुरवा और उर्वशी पुराणों की कथाओं […] - [राजा नहुष ने इन्द्र बनकर शची को प्राप्त करना चाहा (6)](https://bharatkaitihas.com/raja-nahusha-wanted-to-get-shachi/): राजा नहुष ने इंद्राणी की यह बात स्वीकार कर ली तथा इंद्राणी पुनः देवगुरु बृहस्पति के घर आ गई। इन्द्राणी की बात सुनकर समस्त देवता एवं ऋषि इन्द्र के बारे में विचार करने लगे। चंद्रवंशी राजा पुरुरवा को स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी से आयु, वनायु, क्षतायु, दृढ़ायु, धीमंत और अमावसु नामक कई पुत्र प्राप्त हुए। […] - [नहुष को श्राप देकर महर्षि अगस्त्य ने इन्द्र को पुनः देवराज बना दिया (7)](https://bharatkaitihas.com/maharishi-agatsya-destroyed-nahush/): राजा नहुष अपने पुण्यकर्मों के संचय के कारण इंद्रलोक का स्वामी बन गया किंतु जब उसने अनाचार करके देवताओं को भयभीत कर दिया, तब महर्षि अगस्त्य ने नहुष को श्राप देकर अजगर बना दिया। भगवान विष्णु द्वारा इंद्र की पाप-मुक्ति का उपाय बताने पर देवताओं एवं ऋषियों ने इंद्र को तीनों लोकों में ढूंढना आरम्भ […] - [रजि पुत्रों की कथा (8) !](https://bharatkaitihas.com/devguru-brihaspati-and-sons-of-raji/): रजि पुत्रों की कथा के अनुसार देवगुरु बृहस्पति ने रजि पुत्रों को नास्तिक बनाकर स्वर्ग से बाहर निकलवा दिया। इससे देवता पुनः सुखी हो गए। हमने पूर्व की कड़ियों में चर्चा की थी कि उर्वशी एवं पुरुरवा के ज्येष्ठ पुत्र आयु ने राहु की कन्या प्रभा से विवाह किया था जिससे आयु को नहुष, क्षत्रवृद्ध, […] - [राजा धन्वंतरि ने मनुष्यों के कल्याण के लिए काशीराज के यहाँ जन्म लिया (9)](https://bharatkaitihas.com/dhanvantari-was-born-to-kashiraj-for-welfare-of-human-beings/): राजा धन्वंतरि ने मुनि भरद्वाज से आयुर्वेद तथा चिकित्साकर्म का ज्ञान प्राप्त किया तथा उसे आठ भागों में विभक्त कर दिया। फिर उन विभागों की विवेचना की। इसके पश्चात् भगवान् धन्वंतरि ने बहुत से शिष्यों को उस अष्टांग युक्त आयुर्वेद की शिक्षा प्रदान की। उर्वशी एवं पुरुरवा के ज्येष्ठ पुत्र आयु को नहुष, क्षत्रवृद्ध, रम्भ, […] - [कच ने शुक्राचार्य की पुत्री का प्रणय निवेदन स्वीकार नहीं किया (10)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%9a/): महाराज! मैं महर्षि अङ्गिरा का पौत्र और देवगुरु बृहस्पति का पुत्र कच हूँ। मैं आपकी शरण में रहकर, एक हज़ार वर्षों तक, आपकी सेवा करना चाहता हूँ। आप कृपया मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार कर लीजिए। महाभारत एवं अनेक पुराणों में में नहुष एवं विरजा के पुत्र राजा ययाति की कथा आई है जिसमें […] - [देवयानी ने दैत्यों के साथ रहने से मना कर दिया (11)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/): पिछली कथा में हमने दैत्यगुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी तथा दैत्यराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा की चर्चा की थी। विभिन्न पुराणों में आए आख्यानों  के अनुसार वे दोनों ही अत्यंत सुंदर थीं। एक दिन देवयानी तथा शर्मिष्ठा अपनी सखियों के साथ उद्यान में घूम रही थीं। कुछ समय पश्चात् दोनों कन्याएं अपनी सखियों को साथ […] - [ययाति को श्राप (12)](https://bharatkaitihas.com/shukracharya-cursed-yayati-to-become-old/): दैत्यगुरु शुक्राचार्य अपनी पुत्री शर्मिष्ठा के मोह में अंधा था। उसन महाराज ययाति को श्राप देकर बूढ़ा बना दिया जिससे ययाति की इच्छाएं अपूर्ण रह गईं। ययाति को श्राप की कथा अनेक पुराणें में मिलती है। देवयानी द्वारा दैत्यराज वृषपर्वा के राज्य का त्याग कर दिए जाने पर दैत्यगुरु शुक्राचार्य दैत्यराज वृषपर्वा के पास आए […] - [राजा ययाति एक हजार वर्ष तक अपने पुत्र का यौवन भोगता रहा (13)](https://bharatkaitihas.com/raja-yayati-continued-to-enjoy-his-sons-youth-for-a-thousand-years/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि देवयानी के शिकायत करने पर दैत्यगुरु शुक्राचार्य के शाप से राजा ययाति बूढ़ा हो गया। राजा ययाति ने भयभीत होकर कहा- ‘हे दैत्यगुरु! आपकी पुत्री के साथ विषय-भोग करते हुए अभी मेरी तृप्ति नहीं हुई है। इस शाप के कारण तो आपकी पुत्री का भी अहित है। […] - [महाराज ययाति इन्द्र के श्राप से स्वर्ग से धरती पर गिर पड़ा (14)](https://bharatkaitihas.com/raja-yayati-fell-down-from-heaven-to-the-earth-due-to-curse-of-indra/): नहुष की तरह नहुष का पुत्र महाराज ययाति भी अपने सद्कर्मों के कारण स्वर्ग में निवास करता था किंतु जब उसके सद्कर्म समाप्त हो गए तो महाराज इन्द्र के श्राप से स्वर्ग से धरती पर गिर पड़ा! पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि भोग-विलासों की निरर्थकाता समझकर राजा ययाति ने अपने पुत्र पुरु […] - [ययाति के पूर्वज ऋषियों के पुण्यकर्म (15)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%9c/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि स्वर्ग से गिरते हुए राजा ययाति को ययाति के पूर्वज अष्टक ऋषि ने आकाश में ही रोककर उससे इस प्रकार गिरने का कारण पूछा। जब अष्टक को लगा कि राजा ययाति सामान्य व्यक्ति नहीं है, वह ज्ञान और अनुभव की दृष्टि से अत्यंत परिपक्व है तो अष्टक […] - [हैहयराज कार्तवीर्य सहस्रार्जुन यदुवंश में उत्पन्न हुआ था (16)](https://bharatkaitihas.com/hayajaraja-kartavirya-sahasrarjuna-was-born-in-yaduvansh/): रुद्रश्रेण्य के वंश में आगे चलकर हैहयराज कार्तवीर्य सहस्रार्जुन का जन्म हुआ। उसने दस हजार वर्षों तक भगवान दत्तात्रेय की आराधना करके चार वरदान प्राप्त किए। इनमें से पहला वरदान यह था कि मेरी एक हजार भुजाएं हों। दूसरा वरदान यह था कि जो लोग सत्पुरुषों के साथ अधर्म करते हैं, मैं उनका निवारण करूं। […] - [ययाति का श्राप (17)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa/): विभिन्न पुराणों में ययाति का श्राप बहुलिखित आख्यान है। ययाति का श्राप बताता है कि आज की हिन्दू संस्कृति में तथा ययाति कालीन आर्य संस्कृति में बहुत अधिक अंतर नहीं था। पुत्रों पर पिता का अधिकार आज की ही तरह सिद्ध था। पिछली कड़ी में हमने चंद्रवंशी राजा ययाति के पुत्र यदु से चले वंशों […] - [ययाति की पुत्री माधवी महर्षि गालव को सौंप दी गई (18)](https://bharatkaitihas.com/raja-yayati-gave-his-daughter-madhvi-to-galwa-rishii/): चन्द्रवंशी राजा ययाति के पांच पुत्रों का उल्लेख हम इससे पूर्व की कथाओं में कर आए हैं। इस कथा में हम ययाति की पुत्री माधवी की चर्चा करेंगे। जहाँ तक मेरी जानकारी है किसी भी प्राचीन पुराण में माधवी का उल्लेख नहीं हुआ है। माधवी की कथा धूर्त वामवंथी लेखकों द्वारा गढ़ी गई है ताकि […] - [गालव ऋषि की पालित कन्या माधवी ने चार पुरुषों से चार पुत्र जन्मे (19)](https://bharatkaitihas.com/madhvi-gave-birth-to-four-sons/): हमने पिछली कथा में चर्चा की थी कि राजा ययाति ने अपनी पुत्री माधवी गालव ऋषि को सौंप दी ताकि गालव मुनि माधवी की सहायता से आठ सौ श्वेत अश्वों का प्रबंध कर सकें जिनका दायां कान काला हो। गालव ऋषि ने माधवी को प्राप्त करके ययाति से कहा- ‘ठीक है, राजन्! मेरा मनोरथ पूर्ण […] - [माधवी का आख्यान व्यभिचारिणी स्त्री की कथा नहीं है (20)](https://bharatkaitihas.com/the-story-of-madhavi-is-not-a-story-of-an-adulteress-woman/): माधवी का आख्यान व्यभिचारिणी स्त्री की कथा नहीं है! वेदों, उपनिषदों, ब्राह्मणों, आरण्यकों एवं पुराणों सहित किसी भी प्राीचन ग्रंथ में माधवी की कथा का उल्लेख नहीं है। पुराणों में ययाति के पांच पुत्रों- यदु, तुर्वसु, अनु, द्रह्यु और पुरू का ही उल्लेख है। ये नाम वेदों में भी आए हैं किंतु माधवी का उल्लेख […] - [शकुंतला विश्वामित्र एवं मेनका की पुत्री थी (21)](https://bharatkaitihas.com/shakuntala-was-daughter-of-menka-and-vishwamitra/): शकुंतला विश्वामित्र एवं मेनका की पुत्री थी। इस प्रकार शकुंतला एक ऋषि एवं एक अप्सरा की संतान थी। शकुंतला का पालन-पोषण महर्षि कण्व ने किया था। चंद्रवंशी राजाओं की कथाओं के क्रम में महर्षि अत्रि के कुल में उत्पन्न सातवें चंद्रवंशी राजा ययाति तथा उसके वंशजों की चर्चा कर रहे हैं। राजा ययाति ने अपने […] - [राजा भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा (22)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%b0%e0%a4%a4/): पिछली कड़ी में हमने चंद्रवंशियों के पुरु एवं तुर्वुसु नामक दो राजकुलों के मिलने से बने पौरव कुल के प्रथम राजा दुष्यंत और स्वर्ग की अप्सरा मेनका की पुत्री शकुन्तला के गंधर्व विवाह से उत्पन्न पुत्र राजा भरत की चर्चा की थी। मेनका के दौहित्र एवं शकुंतला के पुत्र राजा भरत की गणना महाभारत में […] - [सूर्य की पुत्री ताप्ती के लिए राजा संवरण ने घनघोर तपस्या की (23)](https://bharatkaitihas.com/raja-sanvar-performed-austerity-for-tapti-the-beautiful-daughter-of-sun/): पुराणों में कथा मिलती है कि भगवान सूर्य की पुत्री ताप्ती बहुत सुंदर थी। उसे पाने के लिए चंद्रवंशी राजा संवरण ने घनघोर तपस्या की। अत्रि के वंशजों में हम राजा भरत तक के कुछ विख्यात राजाओं की कथाओं की चर्चा कर चुके हैं। राजा भरत के चैथे वंशज राजा हस्ती हुए जिन्होंने गंगा-यमुना के […] - [राजा कुरु के परिश्रम से धर्म क्षेत्र बन गया कुरुक्षेत्र (24)](https://bharatkaitihas.com/kurukshetra-became-a-religion-zone-due-to-the-toil-of-raja-kuru/): पुराणों में उल्लेख है कि राजा कुरु ने अपने ससुर अत्यागस से, ईरान से लेकर यूनान तक का विशाल भूभाग प्राप्त किया था। उसने अपने राज्य का नाम अपने पिता अजमीड़ के नाम पर अजमीढ़ रखा था। पिछली कथा में हमने चंद्रवंशी राजा संवरण की चर्चा की थी। राजा संवरण हस्तिनापुर को बसाने वाले राजा […] - [गंगा ने राजा शांतनु के सात पुत्रों को नदी में बहा दिया (25)](https://bharatkaitihas.com/ganga-swept-the-seven-sons-of-king-shantanu-into-the-river/): महाराज शांतनु उस शिशु को लेकर अपने महल में आ गए। गंगा और शांतनु का यह आठवां पुत्र वास्तव में प्रभास नामक आठवां वसु था जो श्राप के कारण धरती पर ही रह गया। उसका नाम देवव्रत रखा गया किंतु भीषण प्रतिज्ञा करने के कारण वह बालक आगे चलकर भीष्म के नाम से प्रसिद्ध हुआ। […] - [सत्यवती से विवाह कर लिया राजा शांतनु ने (26)](https://bharatkaitihas.com/king-shantanu-married-matsyagandha-satyavati/): सत्यवती का उत्तर सुनकर महाराज शांतनु चकित रह गए। निषाद कन्या होकर इतना रूप वैभव, जिसकी समता कोई आर्यकन्या एवं देवकन्या भी नहीं कर सकती थी। पिछली कथा में हमने स्वर्ग की अप्सरा गंगा द्वारा आठ वसुओं को जन्म देने तथा आठवां पुत्र शांतनु को देकर फिर से स्वर्ग लौट जाने की कथा कही थी। […] - [वेदव्यास ने नियोग से चंद्रवंशियों के कुल की रक्षा की (27)](https://bharatkaitihas.com/satyavatis-son-vedvyas-protected-the-clan-of-chandravanshi-by-nioga/): एक वर्ष व्यतीत हो जाने पर वेदव्यास पुनः हस्तिनापुर आए। सबसे पहले वे बड़ी रानी अम्बिका के पास गए। अम्बिका अपने समक्ष इतने तेजस्वी ऋषि को देखकर भयभीत हो गई तथा उसने अपने नेत्र बन्द कर लिए। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि सत्यवती के पिता ने निषाद होते हुए भी आर्य राजाओं […] - [धृतराष्ट्र, पाण्डु एवं विदुर(28)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a7%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0/): धृतराष्ट्र तथा पाण्डु तो महर्षि वेदव्यास की संतान थे। फिर वे चंद्रवंशी राजसिंहासन के उत्तराधिकारी कैसे हुए! धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर एक ही पिता की संतान थे, फिर भी उनमें से धृतराष्ट्र एवं पाण्डु को राजकुमार तथा विदुर को दासीपुत्र क्यों माना गया। पिछली कथा में हमने सत्यवती के पुत्र वेदव्यास द्वारा कुरुवंशी रानियों अम्बिका […] - [गांधारी ने कुंती से द्वेष रखने के कारण अपना गर्भ गिरा दिया (29)](https://bharatkaitihas.com/gandhari-gave-up-her-pregnancy-due-to-malice-with-kunti/): गांधारी के पेट से लोहे के समान कठोर एक मांसपिण्ड निकला। गांधारी ने उसे मांस-पिण्ड को फिंकवाने का निर्णय किया। महर्षि वेदव्यास को योगबल से इस घटना का पता चल गया और वे तुरंत गांधारी के पास आए तथा उससे गर्भ गिराने का कारण पूछा। पिछली कथाओं में हमने चर्चा की थी कि स्वर्गीय चंद्रवंशी […] - [ऋषि किन्दम ने महाराज पाण्डु को स्त्री-संसर्ग से मृत्यु का श्राप दिया (30)](https://bharatkaitihas.com/rishi-kindam-cursed-maharaj-pandu-to-die-of-female-intercourse/): महाराज पाण्डु ने एक मृग युगल को तीर मारकर घायल कर दिया। वे दोनों मृग ऋषि किन्दम तथा उनकी पत्नी थे। ऋषि किन्दम ने महाराज पाण्डु को मृत्यु का श्राप दिया! यह कथा चंद्रवंशी राजा पाण्डु पर केन्द्रित है। एक बार हस्तिनापुर के राजा पाण्डु अपनी दोनों रानियों कुन्ती तथा माद्री के साथ आखेट के […] - [पाण्डुपुत्र (31)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): महाराज पाण्डु की रानियों कुंती एवं माद्री ने देवताओं से पांच पुत्र वरदान में प्राप्त किए जिन्हें लोक में पाण्डुपुत्र एवं पांच पाण्डव के नाम से प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि ब्रहृलोक जा रहे ऋषि-मुनियों ने महाराज पाण्डु के कोई पुत्र नहीं होने के कारण उन्हें अपने साथ ले […] - [माद्री ने देवताओं से दो पुत्रों को प्राप्त किया (32)](https://bharatkaitihas.com/rani-madri-received-two-sons-from-the-gods/): पिछली कथा में हमने महारानी कुंती द्वारा देवताओं का आह्वान करके तीन पुत्र प्राप्त करने की चर्चा की थी। इस कथा में हम रानी माद्री द्वारा दो पुत्र उत्पन्न किए जाने की कथा की चर्चा करेंगे। जब महारानी कुंती को दुर्वासा ऋषि द्वारा दिए गए दिव्य मंत्र की सहायता सेे तीन देवताओं के माध्यम से […] - [चंद्रवंशी राजा देवताओं और मनुष्यों का मिश्रण बन गए (33)](https://bharatkaitihas.com/chandravanshi-kings-became-a-mixture-of-gods-and-humans/): चंद्रवंशी राजा ययाति ने स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी तथा विश्वाची के साथ रमण किया। महाराज दुष्यंत ने स्वर्ग की अप्सरा मेनका की पुत्री से विवाह किया। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि स्वर्गीय महाराज पाण्डु के पांचों पुत्रों के हस्तिनापुर आगमन के साथ ही चंद्रवंशी राजाओं की पुरानी परम्परा समाप्त होती है तथा […] - [अर्जुन की परीक्षा लेने आए भगवान शंकर (34)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/): महाभारत, शिव पुराण तथा अन्य संस्कृत वांगमय में भगवान शिव के द्वारा अर्जुन की परीक्षा लिए जाने का प्रसंग आया है। इस परीक्षा के माध्यम से भगवान शंकर ने अर्जुन के बल की थाह ली ताकि यह ज्ञात हो सके कि वह भविष्य में होने वाले युद्ध की लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं! […] - [शिव अर्जुन संवाद (35)](https://bharatkaitihas.com/lord-shiv-opened-gates-of-heaven-for-arjun/): भगवान शिव एवं पाण्डुपुत्र अर्जुन के बीच हुए युद्ध का समापन शिव अर्जुन संवाद से होता है जिसमें भगवान शिव अर्जुन को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित करवाते हैं। पिछली कथा में हमने भगवान शिव तथा अर्जुन के बीच हुए युद्ध की चर्चा की थी। भगवान के द्वारा किए गए घूंसे के प्रहार से अर्जुन […] - [अर्जुन का स्वर्ग प्रवास (36)](https://bharatkaitihas.com/arjuna-rejects-the-love-of-his-great-grand-mother/): अर्जुन का स्वर्ग प्रवास महाभारत एवं कतिपय पुराणों में वर्णित है। अर्जुन के लिए मानव देह में स्वर्ग के द्वार खुलना एक अद्भुत घटना है। यद्यपि अर्जुन के कई पूर्वज मानव शरीर में ही स्वर्ग में रहे थे और अवधि पूर्ण होने पर धरती पर पुनः भेज दिए गए थे। पिछली कथा में हमने चर्चा […] - [लोमश ऋषि का आश्चर्य (37)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b6-%e0%a4%8b%e0%a4%b7%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/): अर्जुन को इन्द्र के सिंहासन पर विराजमान देखकर लोमश ऋषि का आश्चर्य देखते ही बनता था। वे समझ नहीं सके कि धरती से आया एक मानव देवराज के सिंहासन पर आधे भाग में कैसे बैठा है! पिछली कथा में हम अर्जुन के स्वर्ग में पहुंचने तथा देवताओं से शस्त्र-विद्याएं सीखने के साथ-साथ चित्रसेन गंधर्व से […] - [महारानी द्रौपदी एवं पाण्डुपुत्र हिमालय पर गिर गए (38)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8c%e0%a4%aa%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): महाभारत का युद्ध समाप्त होने के 37 वर्ष बाद महारानी द्रौपदी एवं पाण्डुपुत्र हिमालय पर्वत पर चले गए जहाँ वे अपने जीवन में किए गए पापों के कारण एक-एक करके हिमालय पर्वत पर गिर गए। केवल युधिष्ठिर ही एक कुत्ते के साथ आगे बढ़ते हुए स्वर्ग तक जा पहुंचे। पिछली कथा में हमने चर्चा की […] - [युधिष्ठिर का कुत्ता (39)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि सुमेरु पर्वत के दर्शनों के बाद महारानी द्रौपदी, सहदेव, नकुल तथा अर्जुन हिमालय की उपत्यकाओं में गिर पड़े। अब केवल भीमसेन एवं महाराज युधिष्ठिर ही बचे थे तथा युधिष्ठिर का कुत्ता साथ चल रहा था। थोड़ा ही आगे बढ़ने पर कुंती नंदन भीमसेन भी गिर पड़े। धर्मराज […] - [कलियुग सोने का मुकुट पहन कर धरती एवं धर्म को पीटने लगा (40)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97/): हे कलियुग! द्यूत, मद्यपान, परस्त्रीगमन और हिंसा इन चार स्थानों में असत्य, मद, काम और क्रोध का निवास होता है। मैं तुझे इन चार स्थानों में निवास करने की अनुमति देता हूँ। पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि जब युधिष्ठिर अपने भाइयों एवं महारानी द्रौपदी को साथ लेकर स्वर्ग जाने लगे तो उन्होंने […] - [राजा परीक्षित मृत्यु निकट जानकर गंगा तट पर जा बैठा (41)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि जब कलियुग महाराज परीक्षित के मुकुट में आकर बैठ गया तब राजा परीक्षित की बुद्धि भ्रमित हो गई और उसने शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डाल दिया! शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि- ‘हे अधर्मी राजा आज […] - [नागराज तक्षक राजा परीक्षित को डंसने के लिए राजमहल में घुस गया (42)](https://bharatkaitihas.com/nagraj-takshaka-entered-the-palace-of-raja-parikshit/): जब शमीक ऋषि के शिष्य गौमुख ने हस्तिनापुर के राजमहल में उपस्थित होकर राजा परीक्षित को सूचित किया कि शृंगी ऋषि ने आपको श्राप दिया है कि आज से सातवें दिन नागराज तक्षक आकर आपको अपने विष से जलाएगा तो राजा परीक्षित सावधान हो गया। पिछली कथा में हमने शापग्रस्त चंद्रवंशी राजा परीक्षित को शुकदेवजी […] - [राजा जनमेजय ने कहा, इन्द्र को भी सांपों के साथ घसीट लो (43)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a4%af/): आस्तीक द्वारा की गई यज्ञ की स्तुति को सुनकर राजा जनमेजय ने आस्तीक ऋषि को यज्ञशाला के भीतर बुलवाया। आस्तीक ऋषि ने यज्ञशाला में पहुंचकर वहाँ बैठे हुए यजमान, ऋत्विज्, सभासद् तथा अग्नि की स्तुति की जिसे सुनकर वहाँ उपस्थित सभी लोग प्रसन्न हो गए। पिछली कथा में हमने तक्षक द्वारा चंद्रवंशी राजा परीक्षित को […] - [दधीचि के पौत्र ने तपस्या का फल लेने से मना कर दिया ! (1)](https://bharatkaitihas.com/grandson-of-dadhich-refused-to-take-the-fruits-of-penance/): जब राजा इक्ष्वाकु ने पुण्यों का फल महर्षि दधीचि के पौत्र को वापस लौटाना चाहा तो महर्षि दधीचि के पौत्र ने एक बार दी गई वस्तु वापस लेने से मना कर दिया! ‘धर्म’ का शाब्दिक अर्थ है- धारण करना। जो मनुष्य उत्तम विचार, उत्तम दर्शन और उत्तम आचरण को धारण करता है, वह मनुष्य धर्म […] - [सुदर्शन चक्र भगवान के भक्त का अपमान सहन नहीं कर सका (2)](https://bharatkaitihas.com/sudarshan-chakra-could-not-bear-the-insult-of-a-saint/): राजा अम्बरीष न्यायप्रिय राजा होने के साथ-साथ भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। जब महर्षि दुर्वासा ने राजा अम्बरीष को श्राप देना चाहा तो सुदर्शन चक्र भगवान के भक्त का अपमान सहन नहीं कर सका। राजा अम्बरीष पौराणिक धर्म साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय पात्र हैं। वे वैवस्वत मनु के प्रपौत्र, ईक्ष्वाकु के पौत्र और राजा […] - [शुनःशेप की बलि (4)](https://bharatkaitihas.com/maharishi-vishwamitra-saved-shunahshep/): महर्षि विश्वामित्र के मंत्र से शुनःशेप बलि चढ़ने से बच गया! अंबरीष ने वरुण से प्रार्थना की कि वह शुनःशेप की बलि न ले किंतु वरुण अपने हठ पर दृढ़ रहा। महर्षि विश्वामित्र ने उसे बलि चढ़ने से बचा लिया ? शुनःशेप का आख्यान ऋग्वेद, ऐतरेय ब्राह्मण, वाल्मीकि रामायण, ब्रह्मपुराण तथा महाभारत आदि ग्रंथों में […] - [शुनःशेप का पिता कौन](https://bharatkaitihas.com/shunahshep-asked-the-sages-who-is-my-father-who-sold-me-or-bought-me/): शुनःशेप ने ऋषियों से पूछा कि मेरा पिता कौन है, मुझे बेचने वाला या खरीदने वाला! शुनःशेप का पिता कौन ? इस प्रश्न के माध्यम से मानव सम्बन्धों की जटिल व्याख्या की गई है। इस कहानी का निष्कर्ष भारतीय संस्कृति का निरूपण है। पिछली कड़ी में हमने देखा था कि महर्षि विश्वामित्र द्वारा दिए गए […] - [राजा वेन](https://bharatkaitihas.com/the-sages-killed-ven-by-a-roar/): राजा वेन को ऋषियों ने अपनी हुंकार से मार डाला! प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथों में राजा वेन की कथा मिलती है। इन कथाओं के आधार पर यह निश्चित करना कठिन हो जाता है कि वह कौनसे मनु का वंशज था। अलग-अलग कथाओं में उसे अलग-अलग मनु का वंशज बताया गया है। अलग-अलग कथाओं के अनुसार राजा […] - [राजा पृथु ने पिता बनकर पृथ्वी का पालन किया (6)](https://bharatkaitihas.com/raja-prithu-nourished-the-earth-as-a-father/): पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि ईक्ष्वाकु राजा अंग के अत्याचारी पुत्र वेन को ऋषियों ने अपनी हुंकार से मार डाला तथा वेन की माता सुनीथा ने मन्त्रा के बल से अपने पुत्र के शव की रक्षा की। जब धरती पर कोई राजा नहीं रहा तो चारों ओर अव्यवस्था होने लगी। चोर-डाकू और […] - [राजा धुंधुमार ने धुंधु राक्षस मार दिया (7)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0/): महाभारत के वन पर्व सहित अनेक पुराणों में राजा धुंधुमार की कथा मिलती है। यह कथा किसी प्राकृतिक घटना की ओर संकेत करती है। पुराणों में ईक्ष्वाकु वंश की वंशावली को बहुत ही विकृत कर दिया गया है। इस कारण राजाओं के क्रम का वास्तविक ज्ञान नहीं हो पाता। कुछ स्थानों पर उल्लेख मिलता है […] - [त्रेता युग लंगड़ाता हुआ आ गया (78)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%97/): सत्युग को कृत युग भी कहा जाता है तथा कहा जाता है कि गणितीय गणना के अनुसार कृतयुग के बाद द्वापर को, द्वापर के बाद त्रेता युग को और त्रेता के बाद कलियुग को आना चाहिए था किंतु कृतयुग के समाप्त होते ही द्वापर के स्थान पर त्रेता आ गया। पिछली कड़ियों में हमने ईक्ष्वाकु […] - [राजा मांधाता को दिव्य त्रिशूल से नष्ट कर दिया लवणासुर ने (9)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be/): राजा मांधाता की कथा वायुपुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण, भागवत पुराण, मत्स्य पुराण, वाल्मीकि रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों में मिलती है। इन कथाओं के अनुसार ईक्ष्वाकुवंशी राजा युवनाश्व सतयुग का अंतिम राजा था। विष्णु पुराण के अनुसार अयोध्या नरेश युवनाश्व निःसंतान था। च्यवन ऋषि की सलाह पर राजा युवनाश्व ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया। जब यज्ञ […] - [राजा सत्यव्रत के लिए नया स्वर्ग बना दिया ऋषि विश्वामित्र ने (10)](https://bharatkaitihas.com/vishwamitra-created-a-new-paradise-for-raja-satyavrat/): ईक्ष्वाकु वंश में राजा मांधाता के वंशजों में से सातवां वंशज राजा सत्यव्रत था। उसे पुराणों में त्रिशंकु के नाम से जाना जाता है। राजा त्रिशंकु की कहानी का वर्णन वाल्मीकि रामायण के बाल काण्ड में भी किया गया है। इस कथा के अनुसार राजा सत्यव्रत ईक्ष्वाकु वंशी राजा पृथु के पुत्र और राजा रामचंद्र […] - [राजा हरिश्चंद्र ने रानी से शमशान का कर मांगा (11)](https://bharatkaitihas.com/raja-harishchandra-told-his-queen-to-tear-half-of-her-sari-and-pay-tax-on-crematorium/): राजा हरिश्चंद्र ने अपनी रानी तारामती से कहा कि वह अपनी साड़ी फाड़कर आधी साड़ी से शमशान का कर चुकाए। शमशान का कर चुकाए बिना वह अपने पुत्र का संस्कार शमशान में नहीं कर पाएगी। ईक्ष्वाकु वंशी राजाओं में जितने भी प्रसिद्ध राजा हुए हैं उनमें महाराज हरिश्चंद्र का नाम भी अत्यधिक आदर से लिया […] - [राजा सगर ने यवनों के सिर मूंड कर उन्हें धर्म से वंचित कर दिया (12)](https://bharatkaitihas.com/raja-sagar-shaved-the-heads-of-yavanas-and-deprived-them-from-religion/): ईक्ष्वाकु वंशी राजाओं में राजा बाहुक का नाम बहुत प्रसिद्ध है। वे राजा हरिश्चंद्र के बाद की लगभग सातवीं पीढ़ी के राजा हैं। चूंकि अलग अलग पुराणों, वाल्मीकि रामायण एवं महाभारत में सगर के पिता का नाम अलग-अलग दिया हुआ है, इसलिए यह निश्चित कर पाना संभव नहीं है कि राजा बाहुक हरिश्चंद्र की पीढ़ी […] - [राजा सगर के पुत्र (13)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): राजा सगर के पुत्र बड़े पराक्रमी एवं वीर थे किंतु दुष्ट स्वभाव एवं क्रूर कर्मा होने के कारण उन्होंने धरती एवं समुद्र को बहुत कष्ट दिया। पिछली कड़ी में हमने राजा सगर की बड़ी रानी केशिनी के गर्भ से असमंजस नामक दुष्ट पुत्र की तथा छोटी रानी सुमति के गर्भ से एक तूम्बे का जन्म […] - [राजा भगीरथ ने गंगाजी को धरती पर लाने के लिए महातप किया (14)](https://bharatkaitihas.com/raja-bhagiratha-performed-a-great-battle-to-bring-gangaji-to-earth/): राजा भगीरथ पुनः अपने दिव्य रथ पर सवार होकर समुद्र की ओर चल दिए तथा गंगाजी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे चलती हुईं समुद्र तक पहुँच गयीं। यहाँ से राजा भगीरथ गंगाजी को रसातल में ले गए तथा अपने पितरों की भस्म को गंगाजल से सिंचित करके उन्हें मुक्ति दिलवाई। विभिन्न पुराणों से लेकर वाल्मीकि रामायण […] - [महर्षि अगस्त्य ने समुद्र पी लिया (15)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): बहुत से पुराणों में महर्षि अगस्त्य द्वारा समुद्रों को पीकर उन्हें खाली करने का आख्यान मिलता है। महाभारत में भी इस आख्यान का विस्तार से वर्णन किया गया है। पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि जब राजा भगरीथ गंगाजी को स्वर्ग से उतार कर लाए तो वे गंगाजी को धरती से पाताल लोक […] - [राजा नाभि के समय नवीन सृष्टि आरम्भ हुई (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%bf/): राजा ईक्ष्वाकुवंशी राजा अंशुमान के पौत्र राजा भगीरथ गंगाजी को धरती पर लाये। राजा भगीरथ के बाद उनका पुत्र श्रुत और श्रुत के बाद राजा नाभि अयोध्या का राजा हुआ। पौराणिक अख्यानों के अनुसार राजा नाभि के समय में धरती पर बहुत सी बड़ी हलचलें हुईं। चूंकि वह काल हिमयुग के व्यतीत हो जाने के […] - [राजा ऋतुपर्ण ने आकाश से ही पेड़ के पांच करोड़ पत्ते गिन लिए (17)](https://bharatkaitihas.com/raja-rituparna-counted-five-crore-leaves-of-the-tree-from-the-sky/): राजा नल वस्त्राभूषणों से अलंकृत होकर अपनी रानी दमयन्ती एवं अपने श्वसुर राजा भीष्मक से मिला। राजा भीष्मक ने बड़ी प्रसन्नता के साथ नल का स्वागत किया। राजा नल के आगमन की प्रसन्नता में विदर्भ नगर में बड़ा आनंद हुआ। - [राजा सौदास महर्षि वसिष्ठ के श्राप से कल्मषपाद राक्षस बन गया (18)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8c%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b8/): ईक्ष्वाकु वंशी राजा सौदास का उल्लेख अनेक हिन्दू पौराणिक ग्रंथों एवं महाभारत में हुआ है। विष्णु पुराण के अनुसार राजा सौदास इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न राजा ऋतुपर्ण का प्रपौत्र, राजा सर्वकाम का पौत्र तथा राजा सुदास का पुत्र था। सुदास का पुत्र होने के कारण इसे सौदास कहा जाता था। कुल पुरोहित वसिष्ठ के आशीर्वाद […] - [राजा खट्वांग की कथा](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): राजा खट्वांग अपनी मृत्यु की जानकारी होते ही स्वर्ग छोड़कर अयोध्या आ गए ! ईक्ष्वाकु वंश के द्वापर युगीन राजाओं में खट्वांग भी महाप्रतापी, धर्मपरायण एवं सत्यव्रती राजा हुए हैं। इनकी कथा अनेक पुराणों एवं महाभारत में भी मिलती है। कुछ पुराणों में इन्हें राजा दिलीप भी कहा गया है। ईक्ष्वाकु वंश में दिलीप नामक […] - [राजा दिलीप ने सिंह से कहा वह गौ के स्थान पर मुझे खा ले (20)](https://bharatkaitihas.com/raja-dileep-asked-singh-to-eat-me-in-place-of-cow/): महर्षि वसिष्ठ ने राजा दिलीप को बताया कि आपने स्वर्ग लोक में  कामधेनु गाय का अपमान किया है। इसी दोष से आपकी संतान की कामना फलवती नहीं होती। पिछली कड़ी में हमने राजा खट्वांग की कथा कही थी। राजा खट्वांग से दीर्घबाहु नामक पुत्र हुआ। कुछ पुराणों में राजा खट्वांग को दिलीप कहा गया है […] - [महाराज रघु](https://bharatkaitihas.com/maharaj-raghu-received-tax-for-brahman-kumar-from-yaksharaj-kubera/): महाराज रघु ने यक्षराज कुबेर से ब्राह्मणकुमार के लिए कर प्राप्त किया! अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के पुराण-प्रसिद्ध राजा दिलीप के पुत्र राजा रघु हुए। वे अत्यंत प्रतापी एवं सत्यनिष्ठ राजा थे। अनेक पुराणों में राजा रघु की कथा मिलती है जिनके अनुसार राजा दिलीप को नंदिनी गाय की सेवा करने के प्रसाद के रूप […] - [राजा अज](https://bharatkaitihas.com/raja-aj-cut-wood-in-the-forest-and-paid-guru-dakshina/): राजा अज ने जंगल में लकड़ियां काटकर गुरु दक्षिणा चुकाई! अज का अर्थ होता है जिसका जन्म नहीं हुआ हो। इसीलिए प्रजापति ब्रह्मा को अज कहा जाता है। पौराणिक काल में अज नामक कई राजा हुए हैं। इनमें सर्वाधिक विख्यात ईक्ष्वाकु वंश का राजा अज था। वह महाराज रघु का पुत्र था। विष्णु पुराण सहित […] - [रानी कैकेयी](https://bharatkaitihas.com/rani-kaikeyi-protected-life-of-raja-dasharatha-in-devasur-sangram/): रानी कैकेयी ने देवासुर संग्राम में राजा दशरथ के प्राणों की रक्षा की! राजा दशरथ ईक्ष्वाकु वंशी राजा अज के पुत्र थे एवं त्रेता युग में कौशल राज्य के राजा थे जिसकी राजधानी अयोध्या थी। राजा दशरथ का उल्लेख विभिन्न पुराणों, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण एवं भगवान वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में हुआ है। […] - [राजा दशरथ की रानियाँ](https://bharatkaitihas.com/three-queens-of-raja-dasharatha-symbolize-pranamaya-annamaya-and-manomaya-kosh/): प्राणमय, अन्नमय ओर मनोमय कोश की प्रतीक हैं राजा दशरथ की रानियाँ ! विभिन्न पुराणों में आई हुई कथाओं में वर्णित ईक्ष्वाकु वंशी राजाओं को मानव देह धारी होने के साथ-साथ प्राकृतिक शक्तियों के रूप में देखा जाता है। उदाहरण के लिए राजा सगर के साठ हजार पुत्रों की कथा, राजा धुंधुमार द्वारा धुंधु राक्षस […] - [श्रीराम कितने पुराने हैं](https://bharatkaitihas.com/hindu-scripture-ikshvaku-vanshi-tells-raja-ramachandra-to-be-twenty-five-million-years-old/): ईक्ष्वाकु वंशी श्रीराम कितने पुराने हैं ? इस प्रश्न का उत्तर आज तक नहीं दिया जा सका है! धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्य श्रीराम का कालखण्ड अलग-अलग समय पर निर्धारित करते हैं! हिन्दू धर्म ग्रंथराजा रामचंद्र को पौने दो करोड़ साल पुराना बताते हैं!  ईक्ष्वाकु वंशी राजा दशरथ के चार पुत्र हुए। बड़े पुत्र रामचंद्र […] - [भरत तुम मनुष्यों के राजा बनो, मैं जंगली पशुओं का सम्राट बनूंगा (26)](https://bharatkaitihas.com/hey-bharata-you-be-the-king-of-men-i-will-be-the-emperor-of-wild-animals/): जब श्रीराम ने भरत से यह कहा कि तुम मनुष्यों के राजा बनो और मैं जंगली पशुओं का सम्राट बनूंगा तो इस बात में कई गुप्त संदेश छिपे हुए थे। उनके कहने का आशय यह था कि अब मैं जंगल में घुसकर वहाँ निवास करने वाले नरभक्षी राक्षसों का अनुशासन करंगा अर्थात् उन्हें नष्ट करूंगा। […] - [महर्षि जाबालि को कड़ी फटकार लगाई वनवासी राम ने (27)](https://bharatkaitihas.com/vanvasi-ram-reprimanded-maharishi-zabali/): हमने पिछली कड़ी में उल्लेख किया था कि दशरथ नंदन श्रीराम ने चित्रकूट में अपने अनुज भरत को यह समझाने का प्रयास किया कि पुत्रों को अपने मृत पिता के वचनों का पालन करके उसे ऋण से मुक्त करवाने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने समस्त पितरों की रक्षा एवं मुक्ति का प्रयास करना चाहिए। […] - [महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम को ईक्ष्वाकुओं की परम्परा बताई (28)](https://bharatkaitihas.com/maharishi-valmiki-told-shriram-the-tradition-of-the-ikshvakus/): आज हमें रामकथा का प्राचीनतम स्वरूप महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण में मिलता है। इस ग्रंथ में श्रीराम का चित्रण मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में किया गया है। जब भगवान श्रीराम ने जाबालि ऋषि से रोषपूर्ण बातें कहीं तो गुरु वसिष्ठ ने श्रीराम को बताया कि जाबालि ऋषि नास्तक नहीं हैं। वे तो आपसे केवल […] - [जयंत की आंख फोड़कर उसे जीवित छोड़ दिया श्रीराम ने (29)](https://bharatkaitihas.com/shriram-broke-the-eye-of-jayanta-son-of-indra-and-left-him-alive/): राजकुमार भरत द्वारा अयोध्यावासियों को अपने साथ लेकर अयोध्या लौट जाने के बाद भी राम, लक्ष्मण एवं सीता कुछ दिनों तक चित्रकूट में निवास करते रहे। वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण, नरसिंह पुराण, पद्म पुराण तथा गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस में श्रीराम के चित्रकूट प्रवास के दौरान घटित इंद्र के पुत्र जयंत की कथा का […] - [रोम में पांचवाँ दिन - 21 मई 2019 (6)](https://bharatkaitihas.com/fifth-day-in-rome/): आज रोम में हमारा पांचवाँ दिन था। आज हमें सेंट एंजिलो कैसल जाना था। इस कारण आज का दिन भी बहुत से नए अनुभवों वाला होने वाला था। शरीर भारतीय समय को भूलकर इटली का समय अपनाने लगा है। हालांकि अब भी आंख एक बार तो भारतीय समय के अनुसार प्रातः पाँच बजे खुल जाती […] - [फ्लोरेंस में पहला दिन - 22 मई 2019 (7)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-florence/): फ्लोरेंस में पहला दिन हमने यूरोप की सबसे पुरानी फार्मेसी का भवन ढूंढने में बिताया। फ्लोरेंस के लोग इस फार्मेसी के बारे में बिल्कुल भूल चुके थे। अंत में एक नई उम्र की लड़की ने हमें पुरानी फार्मेसी के बारे में कुछ संकेत बताए। आज हमें फ्लोरेंस के लिए निकलना है। हमारी ट्रेन प्रातः 11.30 […] - [फ्लोरेंस में दूसरा दिन - 23 मई 2019 (8)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-florence/): हमारा फ्लोरेंस में दूसरा दिन भारत के आम चुनावों के परिणाम देखने तथा पीसा शहर की यात्रा करने में व्यतीत हुआ। संसार भर के यात्री फ्लोरेंस एवं पीसा देखने के लिए आते हैं। रात भर नींद नहीं आई। हम जब भारत से चले थे तो सत्रहवीं लोकसभा के लिए मतदान करके चले थे और आज […] - [पीसा में एक दिन (9)](https://bharatkaitihas.com/a-day-in-pisa/): फ्लोरेंस से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर पीसा नामक शहर है जहाँ झुकी हुई मीनार स्थित है। दूरबीन के आविष्कारक गैलीलियो का जन्म ई.1564 में इसी पीसा शहर में हुआ था। हम सही समय पर रेल्वे स्टेशन पहुँच गए। फ्लोरेंस से प्रत्येक आधे घण्टे में पीसा के लिए ट्रेन है। यहाँ कई हॉल थे […] - [फ्लोरेंस में तीसरा दिन - 24 मई 2019 (10)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-florence/): आज फ्लोरेंस शहर देखने का कार्यक्रम बनाया था जिसे स्थानीय भाषा में फिरेंजे कहते हैं। किसी भी शहर के भीतरी भाग को देखना हो तो सबसे बढ़िया माध्यम पैदल चलना ही हो सकता है। आंख खुली तो देखा पाँच बज रहे हैं। यह कमाल ही था कि शरीर की जैविक घड़ी में भी अब भारत […] - [वेनेजिया में पहला दिन - 25 मई 2019 (11)](https://bharatkaitihas.com/first-day-in-venzia/): वेनेजिया में पहला दिन हमें अब तक विदेश यात्राओं में हुए अनुभवों से पूरी तरह अलग अनुभव देने वाला रहा। समझ में नहीं आता कि यह कैसा शहर है। शहरों में से नदी या नहरें गुजरती हुई तो हमने देखी थीं किंतु यह शहर समुद्री नदियों एवं नहरों के बीच से होकर गुजरता हुआ प्रतीत […] - [वेनेजिया में दूसरा दिन - 26 मई 2019 (12)](https://bharatkaitihas.com/second-day-in-venezia/): वेनेजिया में दूसरा दिन लगभग 90 साल की एक वृद्ध इटैलियन महिला से दीपा की हैलो के साथ आरम्भ हुआ जो एक विशाल बहुमंजिला भवन के किसी फ्लोर पर अकेली रहती थी। हैलो दीपा! सुबह पाँच बजे आंख खुल गई। मधु ने चाय बनाई। इस चाय के कारण ऐसा लगता ही नहीं है कि हम […] - [वेनेजिया में तीसरा दिन - 27 मई 2019 (13)](https://bharatkaitihas.com/third-day-in-venezia/): वेनेजिया में तीसरा दिन बरसात की भेंट चढ़ गया। दिन निकलने के साथ ही बरसात आरम्भ हो गई थी, इसलिए कहीं दूर आना-जान संभव नहीं था। इसलिए हमने शहर में ही एक छोटा सा चक्कर लगाने का निश्चय किया। प्रातः 4 बजे आंख खुल गई। लगभग पूरी रात बरसात होती रही इसलिए सुबह तक ठण्ड […] - [इटली में अंतिम दिन - 28 मई 2019 (14)](https://bharatkaitihas.com/last-day-in-italy/): आज हमारा इटली में अंतिम दिन था। इस दिन की शुरुआत रास्ते के लिए खाना बनाने से आरम्भ हुई। इस दिन का दूसरा बड़ा काम कचरा फैंकने के लिए स्थान ढूंढना रहा। कचरा फैंकने की मशक्कत सुबह 4.30 बजे उठकर निकलने की तैयारियां कीं। मधु एवं भानु ने रात में ही पूड़ियां बना ली थीं। […] - [लेखकीय - रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण](https://bharatkaitihas.com/preface-of-history-of-roman-empire/): लेखकीय – रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण पृष्ठ पर लेखकर डॉ. मोहनलाल गुप्ता की कलम से पुस्तक रोमन साम्राज्य का इतिहास एवं इटली का एकीकरण की प्रस्तावना लिखी गई है। आदमी द्वारा किए गए आविष्कारों और खोजों की सूची आग और पहिए से आरम्भ होती है। इस सूची में घोड़े की पीठ […] - [इटली यूरोप का भारत (1)](https://bharatkaitihas.com/italy-the-india-of-europe/): कई मायनों में इटली यूरोप का भारत है। कई मायनों में इटली यूरोप का भारत है। इस बात को वहाँ जाकर ही समझा जा सकता है। इटली के लोगों की कद-काठी, बालों का रंग, चेहरा-मोहरा भारत के पंजाब प्रांत के लोगों से मिलता है न कि शेष यूरोपवासियों से। इटली को ‘यूरोप का भारत’ कहा […] - [रिपब्बलिका इटेलियाना (2)](https://bharatkaitihas.com/repubblica-italiana/): इटली की मूल भाषा लैटिन तथा वर्तमान राजभाषा ‘इटेलियन’ में इस देश का मूल नाम रिपब्बलिका इटेलियाना है। अंग्रेजी भाषा में इसे ‘इटली’ कहा जाता है। 35 से 47 डिग्री उत्तरी अक्षांशों एवं 6 से 19 डिग्री पूर्वी देशांतरों के बीच, यूरोप महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित इटालियन प्रायद्वीप, ई.1861 से एक देश के […] - [रोमन् सभ्यता की स्थापना एवं विस्तार (3)](https://bharatkaitihas.com/establishment-and-expansion-of-roman-civilization/): रोमन् सभ्यता की स्थापना का उद्भव तथा रोमन सभ्यता की स्थापना दो अलग-अलग विषय हैं। इस क्षेत्र में मानवों का अधिवास अत्यंत प्राचीन काल से था किंतु रोमन् सभ्यता की स्थापना उसके बहुत बाद में हुई तथा माना जाता है कि रोमन् सभ्यता की स्थापना भारत से गए आर्यों के किसी दल ने की जो […] - [रोम का प्राचीन धर्म (4)](https://bharatkaitihas.com/ancient-religion-of-rome/): रोम का प्राचीन धर्म भारत के वैदिक धर्म पर ही आधारित है। इस कारण रोमन देवी-देवताओं के नाम वैदिक देवी-देवताओं से समानता रखते हैं। भारोपीय (हिन्द-यूरोपीय) धर्म भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में यूरोप की सभ्यता एवं संस्कृति हजारों साल बाद की है। भारत में ऋग्वेद की रचना का काल यद्यपि पश्चिमी इतिहासकारों ने […] - [पाइथोगोरियन ब्रदरहुड](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-the-pythagorean-brotherhood-in-italy/): पाइथोगोरस यूरोपीय इतिहास का प्रथम ऋषि है जिसके बारे में लिखित प्रमाण मिलते हैं। पाइथोगोरस ने पाईथोगोरियनवाद नामक वैचारिक आन्दोलन की स्थापना की जिसे उस काल का धार्मिक मत भी कहा जा सकता है। उसके जीवन काल में उसे रहस्यवादी दार्शनिक माना जाता था। - [महान् रोमन गणराज्य](https://bharatkaitihas.com/great-roman-republic/): 6. महान् रोमन गणराज्य रोम की स्थापना के लगभग बाद पाँच सौ सालों तक रोम में राजा का राज्य चलता रहा किंतु ई.पू. 509 में रोमन गणराज्य की स्थापना हुई। यह एक विचित्र प्रकार का गणराज्य था जिस पर जमींदार वर्ग के कुछ धनी कुटुम्बों का वर्चस्व था। उन्हें सम्मिलित रूप से ‘सीनेट’ कहते थे। […] - [रोमनगणराज्य का नैतिक पतन (7)](https://bharatkaitihas.com/moral-decline-of-roman-republic/): रोमनगणराज्य का पतन होने से पहले रोमनगणराज्य का नैतिक पतन हुआ। इस कारण रोम की जनता रोमनगणराज्य से घृणा करने लगी। यह कैसा गणराज्य था जिसमें न तो गण की सुरक्षा थी और न राज की। रोमवासियों का गणराज्य से मोहभंग कार्थेज के पतन के बाद पराजित देशों से गुलाम पकड़ने का काम तेज हो […] - [जूलियस सीजर एवं क्लियोपैट्रा (8)](https://bharatkaitihas.com/julius-caesar-and-cleopatra/): जब तक जूलियस सीजर मिस्र पहुँचकर पॉम्पी को घेर पाता, मिस्र के राजा टॉलेमी (तेरहवें) ने पॉम्पी को पकड़कर उसकी हत्या कर दी। इससे पहले कि जूलियस सीजर मिस्र से वापस रोम लौटता, रानी क्लियोपैट्रा ने सीजर से गुप्त-स्थान पर भेंट करने की प्रार्थना भिजवाई। - [महान् रोमन साम्राज्य का उदय (9)](https://bharatkaitihas.com/the-rise-of-the-great-roman-empire/): जब रोमनगणराज्य का नैतिक पतन हो गया और रोमनगणराज्य बिखरने लगा तब महान् रोमन साम्राज्य की स्थापना का मार्ग स्वतः ही प्रशस्त होता चला गया। पूरी दुनिया राजतंत्र से गणतंत्र की ओर जाती है किंतु रोम के लोग गणतंत्र से तंग आकर राजतंत्र की ओर अग्रसर हुए। प्रिन्सेप्स ऑगस्टस ऑक्टेवियन सीजर जूलियस सीजर की हत्या […] - [ईसा मसीह को सूली (10)](https://bharatkaitihas.com/crucifix/): जेरूसलम और रोमन साम्राज्य में ईसा मसीह को सूली उस समय इतनी महत्त्वहीन थी कि रोमवासियों को तो कुछ पता ही नहीं चला कि उनके साम्राज्य के एक गवर्नर ने ‘प्रभु के पुत्र’ को सूली पर चढ़ाया है। यहाँ तक कि जेरूसलम में भी कोई हलचल नहीं हुई। ईसा मसीह का जन्म ईस्वी 4 में […] - [महान् रोमन शासक (11)](https://bharatkaitihas.com/ruler-of-great-roman-empire/): जिन राजाओं, राजकुमारों, रानियों एवं राजकुमारियों को महान् रोमन शासक कहा जाता है, वे वास्तव में कितने महान् थे, इसका विवरण तत्कालीन इतिहास की पुस्तकों से मिलता है। उनमें अधिकांश अपने ही वंश के रक्त के प्यासे, हत्यारे, लालची एवं बहुत छोटे दिमागों वाले मनुष्य थे किंतु उनकी कथाओं को इतना बढ़ा-चढ़ाकर लिख गया कि […] - [दो ऑगस्टस तथा दो सीजर (12)](https://bharatkaitihas.com/two-augustus-and-two-caesars/): डियोक्लेटियन ने ‘चार राजाओं के शासन’ का सिद्धांत बनाया जिसके तहत दो ऑगस्टस तथा दो सीजर की नियुक्ति की गई। सम्राट डियोक्लेटियन ने स्वयं को ऑगस्टस की उपाधि दी तथा ई.286 में अपने पुराने एवं विश्वस्त सैनिक साथी मैक्सीमियन को अपने अधीन सह-सम्राट (दूसरा ऑगस्टस) नियुक्त किया। नवम्बर 284 से अप्रेल 305 तक डियोक्लेटियन रोम […] - [ईसाइयों को प्राणदण्ड (13)](https://bharatkaitihas.com/death-to-christians-in-roman-empire/): रोमन लोग ईसाइयों को झगड़ालू और संकीर्ण मनोवृत्ति वाला समझने लगे। सम्राट की मूर्ति के समक्ष सिर नहीं झुकाना राजद्रोह समझा गया तथा इसके लिए बहुत से ईसाइयों को प्राणदण्ड दिया गया। ईसाई लोग मनोरंजन के उद्देश्य से होने वाली पशुओं और मनुष्यों की लड़ाइयों का भी विरोध करते थे। यीशू के भयग्रस्त अनुयायियों ने […] - [रोमन साम्राज्य का विभाजन (14)](https://bharatkaitihas.com/partition-of-great-roman-empire/): चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत तक पूर्वी रोमन साम्राज्य के सम्राट द्वारा पश्चिमी रोमन साम्राज्य के शासक को सह.शासक के रूप में नियुक्त किया जाता था किंतु पश्चिमी साम्राज्य पर पूर्वी सम्राट का नियंत्रण नाम मात्र का ही था। धीरे-धीरे रोमन साम्राज्य का विभाजन हो गया। ई.305 में कॉन्स्टेंटीन (प्रथम) रोम का शासक हुआ। उसे […] - [पश्चिमी रोमन साम्राज्य (15)](https://bharatkaitihas.com/western-roman-empire/): ई.379 से ई.392 तक पश्चिमी रोमन साम्राज्य में वेलेण्टाइन (द्वितीय) तथा मैग्नस मैक्सीमस नामक दो शासक अस्तित्व में थे, इन्होंने साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों पर अपनी सत्ता बनाए रखी। वेलेण्टाइन राजवंश ई.364 से 392 तक पश्चिमी रोमन साम्राज्य में वेलेण्टाइन राजवंश की सत्ता रही जिसकी राजधानी रोम थी। जूलियन की मृत्यु के बाद ई.364 में […] - [पूर्वी रोमन साम्राज्य (16)](https://bharatkaitihas.com/eastern-roman-empire/): चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में रोमन साम्राज्य दो भागों में बँट गया! पश्चिमी रोमन साम्राज्य की राजधानी रोम थी और पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया थी। जब सम्राट कॉन्स्टेन्टीन अपनी राजधानी रोम से बिजैन्तिया ले आया तब उसकी माँ ने फिलीस्तीन की राजधानी जेरूसलम में ईसा की समाधि के पास एक बड़ा चर्च […] - [ईसाई धर्म का अंतर्द्वन्द्व (17)](https://bharatkaitihas.com/internal-fight-in-christianity/): ईसाई धर्म का अंतर्द्वन्द्व अपने आप में एक लम्बा इतिहास लिए हुए है। इसी अंतर्द्वन्द्व के कारण ईसाई धर्म को अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता कि ईसाई धर्म का इतिहास रक्त रंजित है। ईसाई धर्म अपने जन्म के साथ ही अंतर्द्वन्द्वों में फंसा हुआ था। […] - [पोप का प्राकट्य एवं उसका शक्ति विस्तार (18)](https://bharatkaitihas.com/popes-presence-and-expansion-of-his-power/): रोम का सेंट पीटर्स लातीनी चर्च आगे चलकर कैथोलिक चर्च के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस चर्च का बिशप लातीनी सम्प्रदाय का प्रमुख माना गया। बाद में बिशप रोम का पोप कहलाने लगा। पोप का अर्थ पापा अर्थात् पिता से था। इस प्रकार रोम में पोप का प्राकट्य हुआ। ईसाई धर्म के विभिन्न सम्प्रदाय ईसा […] - [रोमन साम्राज्य का अंत (19)](https://bharatkaitihas.com/sad-end-of-great-roman-empire/): महान् रोमन साम्राज्य का अंत बड़ा दुःखद था। ईसाई धर्म ने उस प्राचीन रोमन धर्म को कुचल कर नष्ट कर दिया था जिस प्राचीन रोमन धर्म की पृष्ठभूमि में महान् रोमन साम्राज्य का जन्म हुआ था। रोमुलस ऑगुस्टस द्वारा पश्चिमी साम्राज्य का विभाजन ई.474 में कुस्तुंतुनिया के सम्राट लिओ (प्रथम) ने जूलियस नीपो को रोमन […] - [द्वितीय रोमन साम्राज्य (20)](https://bharatkaitihas.com/second-edition-of-the-great-roman-empire/): फ्रैंक कबीले ने ऑस्ट्रोगोथों को रोम से बाहर निकला दिया। पोप ने फ्रैंक सरदार क्लोविस को रोम का शासक स्वीकार कर लिया। इसी के साथ रोम में द्वितीय रोमन साम्राज्य की स्थापना हो गई। इटली का बिखराव ई.493 में पूर्वी रोमन साम्राज्य के सम्राट जेनो के आदेश से उसके सामंत  थियोडोरिक ने इटली पर आक्रमण […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य का प्रथम संस्करण (21)](https://bharatkaitihas.com/first-edition-of-holy-roman-empire/): पच्चीस दिसम्बर 800 के दिन सेंट पीटर्स बेसिलिका में फ्रैंक राजा शार्लमैन का पापल कोरोनेशन किया गया अर्थात् उसे पवित्र रोमन ताज पहनाया गया तथा उसे ऑगस्टस ऑफ रोमन्स की उपाधि दी गई। इसके साथ ही रोम में  पवित्र रोमन साम्राज्य की स्थापना हो गई। फ्रैंक राजा शार्लमैन द्वारा पोप का अपमान ई.772 में पोप […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय संस्करण (22)](https://bharatkaitihas.com/second-edition-of-holy-roman-empire/): पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय संस्करण केन्द्रीय यूरोप का एक बहुजातीय जटिल राजनैतिक संघ था जो ई.962 से ई.1806 तक अस्तित्व में रहा जब तक कि नेपोलियन बोनापार्ट ने इसे समाप्त नहीं कर दिया। यह राज्य मध्य-युग में मध्य-यूरोप का हिस्सा था। ई.955 में पोप जॉन (बारहवां) रोम के कैथोलिक चर्च का पोप हुआ। वह रोम […] - [गिरजाघरों की गॉथिक शैली का विकास (23)](https://bharatkaitihas.com/development-of-the-gothic-style-of-churches/): ईसा की ग्यारहवीं-बारहवीं सदी में पश्चिमी यूरोप में गिरजाघर निर्माण की एक नई शैली का विकास हुआ जिसे गिरजाघरों की गॉथिक शैली कहते हैं। इस शैली में गिरजाघरों का आकार बहुत बड़ा रखा जाता है। इसमें बड़ी एवं भारी छतों का भार, मुख्य भवन के बाहर बने पैनल्स पर टिकाया  जाता है। मुख्य भवन के […] - [वेनिस शहर की दुविधा (24)](https://bharatkaitihas.com/dilemma-of-venice-city/): उत्तरी इटली में स्थित वेनिस शहर की बसावट का इतिहास बहुत रोचक है तथा सामुद्रिक व्यापार से लेकर सामरिक महत्ता की दृष्टि से यह संसार के अन्य शहरों से बिल्कुल भिन्न है। यह दलदल पर बसा हुआ शहर है। इसे वेनेजिया भी कहते हैं। छठी शताब्दी ईस्वी में जब अतिला हूण आग लगाता हुआ और […] - [हिलाल के खिलाफ क्रॉस का क्रूसेड (25)](https://bharatkaitihas.com/crusade-of-the-cross-against-hilal/): मुसलमानों से लड़ने के लिए पोप के द्वारा दिए गए निर्णय को आलंकारिक भाषा में हिलाल (मुसलमानों का धार्मिक चिह्न- दूज का चांद) के खिलाफ क्रॉस (ईसाइयों का धार्मिक चिह्न- सूली) का क्रूसेड (धर्मयुद्ध) कहा गया। येरूशलम येरुशलम को हिब्रू में जेरूशलम तथा अरबी में अल-कुद्स कहा जाता है। यह संसार के सबसे प्राचीन नगरों […] - [पोप एवं रोमन सम्राट में टकराव का चरम (26)](https://bharatkaitihas.com/extreme-conflict-between-pope-and-holy-roman-emperor/): पोप एवं रोमन सम्राट में टकराव सत्ता में अधिकारों को लेकर आरम्भ हुआ और जब दोनों में शक्ति संतुलन स्थापित नहीं हो सका तो यह टकराव चरम पर पहुंच गया। फ्रेडरिक लालमुँहा बारहवीं एवं तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में रोमन साम्राज्य की बागडोर ‘होहेन्तॉफेन’ नामक ईसाई राजवंश के हाथों में रही। होहेन्तॉफेन जर्मनी का एक छोटा […] - [इनक्विजिशन की स्थापना (27)](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-inquisition-by-christian-association/): कैथोलिक चर्च के इतिहास में इनक्विजिशन का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इनक्विजिशन का अर्थ है जाँच-पड़ताल। यह एक तरह का न्यायाधिकरण है जिसकी स्थापना कैथोलिक धर्म के सिद्धान्तों से भटकने वाले व्यक्तियों का पता लगाकर उन्हें दण्ड दिलवाने के लिए सरकार को सौंपने के उद्देश्य से हुई थी। कैथोलिक धर्म के अधिकारी अपने धार्मिक विश्वासों […] - [पोप की प्रतिष्ठा को धक्का (28)](https://bharatkaitihas.com/decline-of-popes-reputation/): ई.1377 तक पोपों को फ्रांस के सम्राट के अंगूठे के अधीन रहना पड़ा। इससे पोप की प्रतिष्ठा को बड़ा धक्का लगा। कनौजा में पोप से मिलने के लिए सम्राट को घण्टों बर्फ में नंगे-पैर खड़े रहने की सजा अब इतिहास का पन्ना बनकर रह गई थी। पोप के शयनागार में फ्रांसीसी सम्राट का दूत जब […] - [पूर्वी रोमनसाम्राज्य का अंत (29)](https://bharatkaitihas.com/end-of-eastern-roman-empire/): ई.1453 में उस्मानिया तुर्कों अर्थात् ओट्टोमन तुर्कों ने पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुन्तुनिया को घेर लिया और कुस्तुंतुनिया के शासक कॉन्स्टेन्टीन ग्यारहवें को मार दिया। इस प्रकार पूर्वी रोमनसाम्राज्य का अंत हुआ। हमें पूर्वी रोमन साम्राज्य का इतिहास बीच में ही छोड़ना पड़ा था किंतु यहाँ उसकी चर्चा फिर से करनी होगी। पूर्वी रोमन […] - [रिनेंसाँ नामक युग का प्रारम्भ (30)](https://bharatkaitihas.com/beginning-of-the-era-of-rinensa-in-italy/): पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी पर ईसाइयों का शासन समाप्त होने के साथ ही यूरोप के इतिहास में मध्य.युग की समाप्ति होती है तथा यूरोप मानो गहरी नींद से जागता है। उसे अपने पतन का अहसास होता है और वह अपने अस्तित्व को बचाने लिए अपने पुनरुत्थान के लिए प्रयास करता है। यूरोप के इतिहास […] - [धर्म एवं विज्ञान में संघर्ष (31)](https://bharatkaitihas.com/conflict-between-religion-and-science/): धर्म एवं विज्ञान एक दूसरे के पूरक हैं। भारत में तो धर्म को ही विज्ञान कहा जाता है तथा माना जाता है कि जब मनुष्य को आत्मा और परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हो जाता है तो उसे मोक्ष मिल जाता है किंतु ईसाइयत में धर्म एवं विज्ञान को एक दूसरे के शत्रु के […] - [कैथोलिक धर्म से अलग सम्प्रदायों का उदय (32)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-different-sects-from-christianity/): ईसाइयत में कैथोलिक धर्म ही अकेला पंथ या सम्प्रदाय नहीं है। कैथोलिक धर्म से अलग भी बहुत से सम्प्रदाय हैं। ये पंथ एवं सम्प्रदाय भी ईसाई धर्म के अंतर्गत हैं किंतु कैथोलिक मान्यताओं से अलग मान्यताएं रखते हैं। मार्टिन लूथर का आंदोलन धर्म एवं विज्ञान के बीच हुए संघर्ष में वैज्ञानिकों पर किए गए अत्याचारों […] - [यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण (33)](https://bharatkaitihas.com/discrimination-and-exploitation-in-european-society/): यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण का सिलसिला आदि काल से है। संसार में यूरोप के लोगों को सर्वाधिक सुसभ्य माना जाता है किंतु यह बात सही नहीं है। आज भी यूरोपीय समाज में भेदभाव एवं शोषण संसार की अन्य सभ्यताओं की तुलना में अधिक हैं। धर्म के नाम पर अत्याचारों का सिलसिला ईसाई धर्म […] - [यूरोप में लोकतांत्रिक विचार (34)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-democratic-ideas-in-europe/): छोटे-छोटे बर्बर कबीलों में बंटा हुआ यूरोप छोटे-छोटे देशों में बदल गया। इस कारण यूरोप में लोकतांत्रिक विचार का जन्म लेना और विकसित होना एक अत्यंत कठिन कार्य था। भाप के इंजन का आविष्कार अठारहवीं शताब्दी के आरम्भ में ई.1712 में इंग्लैण्ड में भाप के ऐसे इंजन का आविष्कार हो गया जो तरह-तरह की मशीनें […] - [यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (35)](https://bharatkaitihas.com/rise-of-nationalism-in-europe/): यूरोप की धरती पर विभिन्न भाषाओं, रीति-रिवाजों एवं परम्पराओं को मानने वाले लोग रहते थे। ये लोग अपने कबीले को ही अपना देश मानते थे। धीरे-धीरे यूरोप के लोगों ने अपनी कबीलाई पहचाहन को अपने राष्ट्र के रूप में देखना आरम्भ किया। इसी को यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय कहा जाता है। अठारहवीं सदी में […] - [पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय का अन्त (36)](https://bharatkaitihas.com/end-of-second-edition-of-holy-roman-empire/): जिस प्रकार पवित्र रोमन साम्राज्य प्रथम का अन्त हुआ था, उसी प्रकार पवित्र रोमन साम्राज्य द्वितीय का अन्त भी बड़ा दुखद था। मुसलमानों के छोटे से धक्के से वह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। नेपालियन का विजय अभियान अठारहवीं शताब्दी के अंत में इटली में छोटे-छोटे राजा राज्य किया करते थे। इनमें से […] - [इटली का एकीकरण (37)](https://bharatkaitihas.com/integration-of-italy/): विभिन्न समुद्री द्वीपों और कबीलाई संस्कृतियों से बने इटली का एकीकरण एक कठिन प्रक्रिया थी। छोटे-छोटे इलाकों के राजा अपने अधिकारों को छोड़कर किसी एक बड़े देश में शामिल होने को तैयार नहीं थे। इटली का एकीकरण रीसॉर्जीमेंटो कहलाता है। वियना कांग्रेस में इटली का बंटवारा नेपोलियन बोनापार्ट को बंदी बनाए जाने के बाद सितंबर […] - [बैनितो मुसोलिनी - फासिज्म का नायक (38)](https://bharatkaitihas.com/fascisms-hero-banito-mussolini/): इटली में कारखाने के मालिकों ने देश में चल रही कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं को अपने पक्ष में किया तथा उन्हें मजदूरों एवं समाजवादी नेताओं के विरुद्ध खड़ा कर दिया। इन संगठनों में बैनितो मुसोलिनी का ई.1910 से चल रहा संगठन प्रमुख था। प्रथम विश्वयुद्ध आरम्भ होने से पहले ही इटली भयानक आर्थिक संकट में फंसा […] - [फासीवाद और नाजीवाद (39)](https://bharatkaitihas.com/fasci-nazi-bhai-bhai/): फासीवाद और नाजीवाद दोनों अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं थीं किंतु राजनीतिक स्वार्थों के चलते दोनों ने हाथ मिला लिया तथा इटली की सड़कों पर फासी-नाजी भाई-भाई के नारे लगने लगे। फासीवाद और नाजीवाद में समानता जिस समय रूस में बोल्शेविक क्रांति की सफलता के बाद साम्यवादी राज्य की स्थापना हो रही थी तथा एक नए समाज […] - [इटली में गणराज्य की स्थापना (40)](https://bharatkaitihas.com/establishment-of-modern-republic-in-italy/): वर्ष 1946 में इटली में इटली में गणराज्य की स्थापना हुई। यह वह समय था जब द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूरी दुनिया में अधिकांश देशों के नक्शे बदल रहे थे और नई सरकारों की स्थापना हो रही थी। गणतन्त्र शासन की स्थापना 2 जून 1946 को इटली में आम-चुनाव हुए जिनमें देश की जनता ने […] - [रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास (41)](https://bharatkaitihas.com/history-of-the-roman-catholic-church/): रोमन कैथोलिक चर्च का आशय किसी एक विशिष्ट भवन से न होकर विश्व-व्यापी संस्था से है। यह विश्व का सबसे बड़ा ईसाई चर्च है। इस चर्च के सदस्यों की संख्या एक सौ करोड़ से अधिक है। उनके नेता पोप हैं जो विश्व भर में फैले हुए ईसाई धर्माध्यक्षों अर्थात् पादरियों, बिशपों एवं कार्डिनलों के समुदाय […] - [कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं (42)](https://bharatkaitihas.com/major-doctrines-and-teachings-of-the-roman-catholic-church/): कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं उन्हीं मूलभूत अवयवों से निर्मित हैं जिन तत्वों से धर्म नामक सार्वभौमिक तत्व का निर्माण होता है। फिर भी कैथोलिक चर्च के सिद्धांत एवं शिक्षाएं दुनिया भर के मजहबों, पंथों, सम्प्रदायों से स्वयं को अलग दिखाने का प्रयास करते हैं। कुछ सीमा तक यह पृथकता एक वास्तविकता भी है। […] - [पोप (43)](https://bharatkaitihas.com/the-pope-of-rome/): रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म-गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं। ‘पोप’ का शाब्दिक अर्थ ‘पिता’ होता है। यह लैटिन भाषा के ‘पापा’ (papa) शब्द से बना है जो स्वयं ग्रीक भाषा के ‘पापास्’ (pápas) शब्द से व्युत्पन्न है। उन्हें संत पापा (पिता) तथा ‘होली फादर’ भी कहते हैं। […] - [हिन्दू धर्म-साहित्य का अद्भुत कथा-संसार (1)](https://bharatkaitihas.com/wonderful-stories-of-hindu-religious-literature/): हिन्दू धर्म-साहित्य अत्यंत विशाल है। विश्व में अन्य किसी धर्म का इतना विपुल साहित्य उपलब्ध नहीं है। हिन्दू धर्म-साहित्य का अद्भुत कथा-संसार इतना रोचक, ज्ञानवर्द्धक और आत्मा के लिए कल्याणकारी है, जिसे शब्दों में वर्णित करना कठिन है। धर्म का अर्थ है धारण करना। जो मनुष्य उत्तम विचार, उत्तम दर्शन और उत्तम आचरण को धारण […] - [मधु-कैटभ के वध की कथा पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी है (2)](https://bharatkaitihas.com/story-of-the-slaughter-of-madhu-catabh-is-related-to-the-origin-of-the-earth/): मधु-कैटभ के वध की कथा पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़ी है वेदों में हिरण्यगर्भ से सौरमण्डल के उत्पन्न होने की कथा मिलती है। हिरण्यगर्भ को पुराणों में डिम्ब या अण्ड भी कहा गया है जिससे सौर मण्डल की उत्पत्ति हुई जिसमें सूर्य तथा उसके नौ ग्रहों के अस्तित्व में आने का उल्लेख है। इस कथा […] - [जल-प्लावन से जुड़ी हैं मत्स्यावतार, कूर्मावतार एवं वराह अवतार की कथाएं (3)](https://bharatkaitihas.com/stories-of-matsyavatar-kurmaavatar-varaha-avatar-are-associated-with-water-planks/): अत्यंत प्राचीन काल में धरती पर आए जल-प्लावन की कथाएं विश्व के प्रत्येक भूभाग की प्राचीन संस्कृतियों में मिलती हैं। इन कथाओं के अनुसार पृथ्वी का अधिकांश भूभाग इस जल-प्लावन में डूब गया था जिसके कारण प्राणियों की सृष्टि बड़ी कठिनाई से जीवित बची थी। भगवान श्री हरि विष्णु के तीन प्रथम अवतारों मत्स्यावतार, कूर्मअवतार […] - [मत्स्यावतार की कथा महा जल-प्लावन एवं जीवों के क्रमिक विकास से जुड़ी है (4)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): भगवान श्री हरि विष्णु के मत्स्यावतार की कथा वाल्मीकि रामायण, महाभारत, मत्स्य पुराण, हरिवंश पुराण आदि विविध ग्रंथों में मिलती है। यह कथा प्रकृति में दो हिमकालों के बीच होने वाले जलप्लावन एवं तत्पश्चात् आने वाले ऊष्णकाल के आगमन की घटना को दर्शाती है तथा भगवान द्वारा सृष्टि एवं ज्ञान की रक्षा के लिए अवतार […] - [कूर्मावतार की कथा मानव सृष्टि को वैभव प्रदान करने से जुड़ी है (5)](https://bharatkaitihas.com/story-of-kurmavatar-is-associated-with-providing-glory-to-the-human-creation/): कूर्मावतार की कथा सृष्टि का आरम्भ होने की घटना से जुड़ी हुई है। पुराणों के अनुसार प्रजापति ने सन्तति प्रजनन के अभिप्राय से कूर्म का रूप धारण किया। शतपथ ब्राह्मण, महाभारत के आदि पर्व तथा पद्मपुराण के उत्तरखंड में उल्लेख है कि संतति प्रजनन हेतु प्रजापति, कच्छप का रूप धारण करके पानी में संचरण करता […] - [मोहिनी अवतार की कथा सृष्टि को पुनः वैभव प्रदान करने से जुड़ी है (6)](https://bharatkaitihas.com/story-of-mohini-avatar-is-associated-with-giving-glory-to-world-again/): मोहिनी अवतार धारी भगवान श्रीहरि ने देवताओं को अमृत तथा राक्षसों को वारुणि पिलाना आरम्भ कर दिया। राक्षस उस वारुणि को पीकर मदमत्त होने लगे। ‘राहू’ नामक एक राक्षस को भगवान के मोहिनी अवतार की इस चालाकी का पता चल गया। हमने पिछली कड़ी में समुद्र मंथन के दौरान हुए भगवान श्री हरि विष्णु के […] - [नील वाराह की अवतार कथा किसी प्राचीन हिमयुग की समाप्ति से जुड़ी है (07)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%b2-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9/): ब्रह्माजी ने चिंतित होकर, जल में निवास करने वाले श्रीहरि विष्णु का स्मरण किया और फिर भगवान श्रीहरि विष्णु ने नील वाराह के रूप में प्रकट होकर धरती के कुछ भागों को जल से मुक्त किया। हमारे सौर मण्डल के समस्त ग्रह सूर्य से टूटकर अलग हुए हैं जिनमें से पृथ्वी भी एक है। आज […] - [हिरण्याक्ष की कथा धरती के समुद्र में डूब जाने की द्योतक है (8)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be/): जय और विजय बैकुण्ठ से गिर कर दिति के गर्भ में आ गए। कुछ काल के पश्चात् दिति के गर्भ से दो पुत्र उत्पन्न हुये जिनके नाम प्रजापति कश्यप ने हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु रखे। पिछली कड़ी में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के नील वाराह के अवतार की चर्चा की थी। इस कड़ी में हम […] - [आदिवाराह अवतार की कथा](https://bharatkaitihas.com/lord-shri-hari-took-incarnation-of-adi-varaha-and-saved-the-earth/): सृष्टि आरम्भ करने के लिए भूमि की आवश्यकता थी किंतु इस समय हिरण्याक्ष नामक दैत्य धरती को सागर के भीतर ले जाकर भू-देवी को अपना तकिया बना कर सोया हुआ था। हिरण्याक्ष ने अपने चारों ओर विष्ठा का घेरा बना रखा था ताकि देवता हिरण्याक्ष के निकट नहीं आएं। - [वाराह अवतार से जुड़ी हुई है दक्षिण भारत की वराह जाति (10)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0/): पिछली कुछ कड़ियों में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के नील वाराह एवं आदि वाराह के अवतारों की चर्चा की थी। इस कड़ी में हम नील वाराह वाराह अवतार, आदि वाराह अवतार तथा श्वेत वाराह वाराह अवतार के दक्षिण भारत की कुछ वनवासी जातियों से सम्बन्ध की चर्चा करेंगे। वाराह कल्प के 3 खण्ड हैं- […] - [नृसिंह अवतार की कथा (11)](https://bharatkaitihas.com/to-protect-the-devotee-prahlada-god-took-narsingh-avatar/): पिछली कड़ियों में चर्चा की थी कि सनकादि ऋषि के श्राप से भगवान विष्णु के जय एवं विजय नामक दो गण, दैत्य बनकर कश्यप ऋषि की पत्नी दिति के गर्भ से धरती पर आए। इनमें से दैत्यों के राजा हिरण्याक्ष के वध हेतु भगवान श्री हरि विष्णु के वाराह अवतार की कथा हम बता चुके […] - [वामन अवतार की कथा (12)](https://bharatkaitihas.com/vishnu-took-vamana-avatar-to-free-the-earth-and-heaven-from-demons/): इस धारावाहिक की पिछली कड़ियों में हमने भगवान श्री हरि विष्णु के चार अवतारों- मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराह अवतार एवं नृसिंह अवतार की चर्चा की है। ये सभी अवतार मनुष्येतर रूप में अर्थात् जलचर, उभयचर एवं थलचर जीवों के रूप में थे जबकि इस कड़ी में हम भगवान श्री हरि के वामन अवतार की चर्चा कर […] - [प्रजापति कश्यप की कथा (13)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa/): हिन्दू धर्मग्रंथों में आए संदर्भों के अनुसार प्रजापति ब्रह्मा के पुत्र मरीचि हुए। मरीचि के पुत्र प्रजापति कश्यप हुए। प्रजापति कश्यप ने प्रजापति दक्ष की 17 पुत्रियों से विवाह किया। इनमें दिति और अदिति भी थीं। इस कड़ी में हम प्रजापति कश्यप तथा उनकी पत्नियों दिति एवं अदिति की चर्चा करेंगे। प्राचीन धर्म-ग्रंथों में प्रजापति […] - [दिति ने इन्द्रहंता पुत्र की प्राप्ति के लिए पति को प्रसन्न किया (14)](https://bharatkaitihas.com/diti-pleases-husband-to-get-indrahanta-son/): पिछली कड़ी में हमने देवमाता अदिति की कथा पर चर्चा की थी। इस कड़ी में हम दैत्यों की माता दिति की चर्चा करेंगे। अदिति की भांति दिति भी प्रजापति दक्ष की उन 17 पुत्रियों में  से थी जिनका विवाह प्रजापति मरीचि के पुत्र कश्यप से हुआ था। विभिन्न धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि एक […] - [इन्द्र ने दिति के गर्भ के उनन्चास टुकड़े कर दिए (15)](https://bharatkaitihas.com/indra-broke-ninety-nine-pieces-of-ditis-womb/): पिछली कथा में हमने चर्चा की थी कि अदिति के पुत्र इन्द्र को मारने के लिए अदिति की बहिन दिति ने एक तेजस्वी पुत्र की कामना की तथा अपने पति को प्रसन्न करके उससे एक तेजस्वी गर्भ प्राप्त कर लिया। महर्षि कश्यप ने दिति को तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने के लिए पुंसवन व्रत करने का […] - [कद्रू के पुत्र (16)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0/): अण्डों के उत्पन्न होने के पांच सौ वर्ष बीत जाने के बाद कद्रु के अंडों से एक सहस्र नाग प्रकट हुए जो कद्रू के पुत्र कहलाए! हम पिछली कुछ कड़ियों में दक्ष की 17 पुत्रियों का उल्लेख करते आए हैं जिनका विवाह प्रजापति ब्रह्माजी के पौत्र कश्यप ऋषि से हुआ था। प्रजापति दक्षराज की इन […] - [कश्यप ऋषि को वसुदेव के रूप में पैदा होने का श्राप मिला था (17)](https://bharatkaitihas.com/rishi-kashyap-was-cursed-to-be-born-as-vasudeva/): एक बार ऋषि कश्यप ने अपने आश्रम में एक विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया तथा अनेक महाज्ञानी ऋषियों को यज्ञ सम्पन्न करने के लिए अपने आश्रम में बुलाया। - [वृत्रासुर वध की कथा धरती पर वर्षा आरम्भ होने की घटना से जुड़ी है (18)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%a7/): वृत्रासुर वध की कथा सबसे पहले ऋग्वेद के चतुर्थ ब्राह्मण में मिलती है। बाद में यह कविता बहुत से पुराणों में भी कही गई है। यद्यपि वैदिक ब्राह्मण एवं पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली इस कथा के मुख्य पात्र इन्द्र, त्वष्टा, विश्वरूप एवं वृत्रासुर ही हैं तथापि बाद की कथाओं में गुरु बृहस्पति एवं महर्षि […] - [वृत्रासुर ने इन्द्र को स्वर्ग से निकाल दिया (19)](https://bharatkaitihas.com/vritrasura-drove-indra-out-of-heaven/): पिछली कड़ी में हमने वैदिक ब्राह्मण के आधार पर देवराज इन्द्र द्वारा वृत्रासुर के वध की कथा की चर्चा की थी। इस कड़ी में तथा इसके बाद की एक और कड़ी में हम पुराणों में आए हुए संदर्भों के आधार पर इन्द्र द्वारा वृत्रासुर का वध किए जाने की चर्चा करेंगे। पुराणों में आए संदर्भों […] - [दधीचि ऋषि ने वृत्रासुर के नाश के लिए अपनी हड्डियां दे दीं (20)](https://bharatkaitihas.com/dadichi-rishi-gave-his-bones-to-destroy-vritrasura/): इस धारावाहिक की पिछली कड़ी में हमने त्वष्टा के यज्ञ से उत्पन्न वृत्रासुर की चर्चा की थी जिसने त्वष्टा के कहने पर इन्द्र पर आक्रमण कर दिया। ब्रह्माजी ने इन्द्र को सलाह दी कि वृत्रासुर को मारने हेतु वज्र बनाने के लिए वह दधीचि ऋषि की अस्थियों को प्राप्त करे। वैदिक ग्रंथों में जिन ऋषियों […] - [चौदह मनुओं की कथा (21)](https://bharatkaitihas.com/story-of-fourteen-manu/): चौदह मनुओं की कथा भारतीय पुराण साहित्य की विलक्षण संकल्पना है। यह कथा सृष्टि के नवीन रूप धारण करके बार-बार संभव होने के प्रति आश्वस्त करती है। अर्थात् सृष्टि कभी पूर्ण रूप से नष्ट नहीं होती। पहली सृष्टि में अर्जित ज्ञान अलगी सृष्टि में बीज रूप में स्थानांतरित होता है। हिन्दू मानते हैं कि हिन्दू […] - [स्वायंभू मनु तथा उनके वंशजों की कथा (22)](https://bharatkaitihas.com/story-of-swayambhu-manu-and-his-descendants/): पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि वराह कल्प के प्रथम मनु का नाम स्वायंभू मनु था, जिनके साथ मिलकर शतरूपा नामक स्त्री ने प्रथम मानव सृष्टि उत्पन्न की। स्वायंभू मनु एवं शतरूपा स्वयं धरती पर उत्पन्न हुए अर्थात् उनका कोई माता या पिता नहीं था। इन्हीं मनु की सन्तानें मानव अथवा मनुष्य कहलाती […] - [अश्वत्थामा के आँसू](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%81%e0%a4%b8%e0%a5%82/): अश्वत्थामा के आँसू एक हास्य व्यंग्य नाटिका है जिसे देश के कई हिस्सों में मंचित किया गया है। इस नाटिका के माध्यम से नाटककर डॉ. मोहनलाल गुप्ता ने भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गहरी चोट की है। भूमिका महाभारत का युद्ध हुए 5300 वर्ष से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है किंतु आज भी […] - [जावा द्वीप पर अंतिम दिन (37)](https://bharatkaitihas.com/last-day-on-java-island/): आज हमारा जावा द्वीप पर अंतिम दिन था। 23 अप्रेल को हमें जावा द्वीप से विदाई लेनी थी। आज भी मैं प्रातः 6 बजे चाय पीने होटल की लॉबी में आया तो मुस्कुराहट से भरी वही लड़की, कल वाले स्थान पर खड़ी हुई अतिथियों का चाय पर स्वागत कर रही थी। आज हमें जकार्ता से […] - [पागल सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक - अनुक्रमणिका](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): पागल सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक – अनुक्रमणिका पृष्ठ पर दिल्ली सल्तनत के सुल्तन मुहम्मद बिन तुगलक के इतिहास के अध्यायों का क्रम दिया गया है। इस पृष्ठ पर दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करने से सीधे ही सम्बन्धित अध्याय को पढ़ा जा सकता है। 1.उसने उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए! 2 सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक […] - [उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए (1)](https://bharatkaitihas.com/he-whipped-ulema-and-kajis/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने सिपहसालारों का मांस चावल के साथ रांधकर उसके परिवार वालों को खाने के लिए भिजवाया। उसने उलेमाओं और काजियों पर कोड़े बरसाए । मुहम्मद बिन तुगलक ने ई.1325 से ई.1351 अर्थात् 26 साल की दीर्घ अवधि तक भारत पर शासन किया। उसका व्यक्तित्व आकर्षक तथा प्रभावोत्पादक था। उसके समान विद्वान […] - [सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने महल में पिघला हुआ सोना भर दिया (2)](https://bharatkaitihas.com/sultan-ghiyasuddin-tughlaq-filled-molten-gold-in-palace-pond/): मक्कार गाजी खाँ , सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक के नाम से दिल्ली का शासक बन गया और उसका पुत्र जूना खाँ हाथ मलता रह गया! जूना खाँ इसके लिए तैयार नहीं था। मुहम्मद बिन तुगलक के बचपन का नाम फखरुद्दीन मुहम्मद जूना खाँ था। वह अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा, सर्वाधिक महत्वाकांक्षी एवं सबसे प्रतिभावान […] - [शहजादे जूना खाँ ने सुल्तान गयासुद्दीन की हत्या कर दी (3)](https://bharatkaitihas.com/prince-juna-khan-murdered-his-father-sultan-ghiyasuddin/): अब तक आप पढ़ चुके हैं कि किस प्रकार शहजादे जूना खाँ ने दिल्ली सल्तनत के खिलजी सुल्तान खुसरोशाह की हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के तख्त पर बैठने का प्रयास किया किंतु जब जूना खां का पिता गाजी तुगलक दिल्ली के तख्त पर बैठ गया तो जूना खाँ के हसीन सपने धरे के […] - [सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने सड़कों पर अशर्फियां लुटा दीं (4)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-looted-gold-incense-on-the-streets-of-delhi/): सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक को किसी भी प्रकार का आर्थिक संकट नहीं था। तख्त पर बैठते समय उसके तीन भाई जीवित थे किंतु किसी ने भी उसका विरोध नहीं किया। ई.1324 में जब सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक बंगाल विजय के लिये गया तब वह शहजादे जूना खाँ को राजधानी में छोड़ गया ताकि सुल्तान की अनुपस्थिति […] - [किसानों की आय बढ़ाने का सपना देखने वाला पहला मुस्लिम शासक (5)](https://bharatkaitihas.com/he-was-first-muslim-ruler-to-dream-of-increasing-income-of-farmers/): भारतीय राजा अपने राज्य में किसानों की आय बढ़ाने के लिए नहरें, तालाब आदि बनवाया करते थे किंतु मुहम्मद बिन तुगलक पहला ऐसा मुस्लिम शासक था जिसने किसानों की आय बढ़ाने का सपना देखा। हालांकि उसके लिए किसान का मतलब मुस्लिम किसान से था न कि हिन्दू किसान से। पिछली कड़ी में आपने देखा कि […] - [गंगा-यमुना क्षेत्र के किसान जंगलों में भाग गए (6)](https://bharatkaitihas.com/farmers-of-ganga-yamuna-region-fled-into-jungles-due-to-the-tax-increase-by-sultan/): तख्त पर बैठने के कुछ दिन बाद सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने गंगा-यमुना क्षेत्र के दोआब क्षेत्र में भू-राजस्व करों में वृद्धि की। किसानों पर भूमि कर के अतिरिक्त ‘घरी’ अर्थात गृहकर तथा ‘चरही’ अर्थात् चरागाह कर भी लगाया गया। तत्कालीन मुस्लिम लेखक जियाउद्दीन बरनी के अनुसार बढ़ा हुआ कर, प्रचलित करों का दस से […] - [राजधानी दिल्ली से दौलताबाद चले गए कुत्ते-बिल्ली और भिखारी (7)](https://bharatkaitihas.com/sultan-took-dog-cats-and-beggars-from-delhi-to-daulatabad/): जब मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की तब वह दिल्ली के कुत्ते-बिल्ली और भिखारी भी अपने साथ ले गया। दिल्ली सल्तनत की स्थापना ई.1193 में मुहम्मद गौरी के जीवनकाल में ही हो गई थी। तब से लेकर ई.1325 में मुहम्मद बिन तुगलक के दिल्ली का सुल्तान बनने तक की 132 […] - [ताम्बे के सिक्के ढलवाए मुहम्मद बिन तुगलक ने (8)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughlaq-casts-copper-coins-instead-of-gold-and-silver-coins/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने राज्य में सोने-चांदी की मुद्रा के स्थान पर ताम्बे के सिक्के ढलवाए। यह भारत में सांकेतिक मुद्रा का प्रथम प्रचलन था किंतु दुर्भाग्य से यह विफल हो गया। आज संसार में कई तरह की मुद्राएं चलती हैं जिनमें पेपर करंसी, मेटल करंसी, प्लास्टिक करंसी, क्रिप्टो करंसी आदि प्रमुख हैं। पेपर […] - [मंगोलों से संधि (9)](https://bharatkaitihas.com/instead-of-fighting-the-mongols-muhammad-bin-tughluq-gave-them-gold-and-silver-rupees/): मुहम्मद बिन तुगलक ने लड़ने की बजाय मंगोलों से संधि करने का मार्ग अपनाया तथा मंगोलों को सोने-चांदी के रुपए दिए किंतु इस नीति से वह मंगोलों का विश्वास नहीं जीत सका। चीन के उत्तर में स्थित गोबी-रेगिस्तान में मंगोल नामक घुमंतू एवं अर्द्धसभ्य जाति रहती थी जिसका मुख्य पेशा घोड़ों और अन्य पशुओं का […] - [कटोच राजपूत और मुहम्मद बिन तुगलक (10)](https://bharatkaitihas.com/katoch-rajputs-beaten-muhammad-bin-tughlaq/): कांगड़ा घाटी में नगरकोट नामक एक प्रसिद्ध राज्य था जिस पर एक प्राचीन हिन्दू राजवंश शासन करता था। इस राजवंश को कटोच राजपूत राजवंश कहा जाता था। तुगलकों के काल में दिल्ली सल्तनत अपने चरम-विस्तार को प्राप्त कर गई। तुगलक वंश के दूसरे सुल्तान अर्थात् मुहम्मद बिन तुगलक ने भी अनेक हिन्दू राजाओं का राज्य […] - [कराजल अभियान में मुहम्मद बिन तुगलक की सेना नष्ट हो गई (11)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-dreamed-of-conquering-iran-tibet-and-china/): कराजल अभियान मुहम्मद बिन तुगलक के लिए अत्यंत विनाशकारी सिद्ध हुआ। कराजल क्षेत्र के पहाड़ी हिन्दू योद्धाओं ने तुगलक की समस्त सेना नष्ट कर दी। ! नगरकोट अभियान के बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने खुरासान विजय की योजना बनाई। उसके दरबार में उन दिनों कुछ खुरासानी अमीर भी रहते थे जिन्होंने सुल्तान को खुरासान की […] - [बागियों का दमन करने में बड़ी क्रूरता दिखाई सुल्तान ने ! (12)](https://bharatkaitihas.com/sultan-sliced-his-cousin-and-cooked-it-in-rice/): मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी सल्तनत में होने वाले व्रिदोहों का बड़ी दृढ़ता से दमन किया तथा बागियों का दमन करने में बड़ी क्रूरता दिखाई ! उस युग में बागियों का दमन करने में ऐसी ही क्रूरता दिखाई जाती थी। मुहम्मद बिन तुगलक संसार के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक का स्वामी था। उसने […] - [विजयनगर साम्राज्य की स्थापना तथा मुहम्मद बिन तुगलक (13)](https://bharatkaitihas.com/vijayanagara-empire-was-established-but-muhammad-bin-tughluq-could-not-do-anything/): सुल्तान ने हरिहर को उस क्षेत्र का शासक और बुक्का को उसका मन्त्री बनाकर भेज दिया। वहाँ पहुँचने पर धीरे-धीरे हरिहर ने अपनी शक्ति संगठित कर ली और विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कर ली। मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के कारण सल्तनत में स्थान-स्थान पर हो रहे विद्रोहों को देखकर हिन्दू राजाओं ने भी स्वतन्त्र […] - [चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो गई (14)](https://bharatkaitihas.com/independent-kingdom-of-chittor-was-restored-and-muhammad-bin-tughluq-could-do-nothing/): ई.1303 में छल-बल से की गई रावल रत्नसिंह की पराजय का बदला ई.1338 में ले लिया गया तथा चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो गई। मुहम्मद बिन तुगलक के पूर्ववर्ती शासकों में से एक अल्लाउद्दीन खिलजी ने ई.1303 में चित्तौड़ के रावल रतनसिंह को छल से मारकर गुहिलों के चित्तौड़ राज्य को समाप्त कर दिया था। […] - [बहमनी सल्तनत की स्थापना (15)](https://bharatkaitihas.com/bahmani-empire-was-established-but-muhammad-bin-tughluq-could-not-do-anything/): हसन गंगू ने ने जफर खाँ की उपाधि धारण की तथा अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम पर बहमनी सल्तनत की स्थापना की। वह स्वयं को ईरान के शाह बहमन बिन असफन्द यार का वंशज बताता था। जब दक्षिण भारत में विजयनगर हिन्दू साम्राज्य की स्थापना तथा चित्तौड़ में गुहिलों के प्राचीन चित्तौड़ राज्य की पुनर्स्थापना हो […] - [पागल बादशाह क्यों कहा गया मुहम्मद बिन तुगलक को ! (16)](https://bharatkaitihas.com/was-muhammad-bin-tughlaq-mad/): मुहम्मद बिन तुगलक पागल नहीं था। फिर भी उसे भारत के इतिहास में पागल बादशाह के नाम से जाना गया। इसका कारण समकालीन इतिहास लेखकों की हठधर्मिता है न कि मुहम्मद बिन तुगलक की अयोग्यता! इस शृंखला में मैंने चौदहवीं शताब्दी ईस्वी में भारत के एक प्रमुख शासक मुहम्मद बिन तुगलक के बारे में अब […] - [लाल किले की दर्द भरी दास्तान - प्राक्कथन](https://bharatkaitihas.com/tragic-history-of-red-fort-book/): भारत में दो लाल किले हैं। पहला लाल किला आगरा में है जिसका निर्माण तोमर राजपूतों ने लाल कोट के नाम से करवाया था। - [शाहजहाँ का परिवार (1)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0/): शाहजहां को अपने बाप-दादाओं का जमा-जमाया साम्राज्य मिला था। इसलिए उसके सामने चुनौतियां बहुत कम थीं। - [मुगल शहजादियाँ (2)](https://bharatkaitihas.com/mughal-princesses-started-spreading-rumors-outside-the-walls-of-the-red-fort/): मुगल शहजादियां लाल किले की दीवारों से बाहर अफवाहें फैलाती रहती थीं, इन अफवाहों का मुख्य कारण उस युग की स्वार्थ भरी राजनीति थी। - [मुगल शहजादे (3)](https://bharatkaitihas.com/mughal-princes-used-to-kill-their-brothers-for-royal-throne/): मुगल शहजादे अपने भाइयों एवं चाचाओं को मारकर ही तख्त प्राप्त कर पाते थे। मुगलों में यह परम्परा सदियों से चली आ रही थी। - [दारा शिकोह (4)](https://bharatkaitihas.com/dara-shikoh-used-to-roam-in-red-fort-wearing-ramnami/): शाहजहाँ ने अपने कई अमीर-उमरावों और सेनानायकों के परिवारों की औरतों को अपने हरम में बुलाकर उन्हें खराब किया था। - [मुमताज महल (5)](https://bharatkaitihas.com/the-children-of-mumtaz-mahal-vied-to-kill-each-other-for-the-red-fort/): मुमताज महल की नसों में ईरान का तथा शाहजहाँ की नसों में समरकंद के मंगोलों का रक्त था। इस रक्त मिश्रण से उत्पन्न शहजादे रक्त के प्यासे रहते थे। - [शाह तुर्कान ने दिल्ली सल्तनत पर कब्जा कर लिया (58)](https://bharatkaitihas.com/beautiful-shah-turkan-captured-delhi-sultanate/): रुकुनुद्दीन की माँ शाह तुर्कान ने शासन की बागडोर अपने हाथों में ले ली। शाह तुर्कान बला की खूबसूरत औरत थी। उसका जन्म अभिजात्य तुर्कों में न होकर निम्न समझे जाने वाले वंश में हुआ था। वह अपने दैहिक सौन्दर्य के बल पर इल्तुतमिश जैसे प्रबल सुल्तान की बेगम बनी थी। छब्बीस साल तक शासन […] - [शाह तुर्कान का सिर काट दिया गुण्डों ने (59)](https://bharatkaitihas.com/gundas-of-delhi-beheaded-shah-turkan/): रजिया ने बूढ़े मुसलमानों की परवाह नहीं की तथा वह मस्जिद से निकलने वाले नौजवानों के सामने अपनी बात बार-बार दोहराने लगी। मुस्लिम नौजवानों पर रजिया का जादू चल गया। उन्होंने रजिया की गुहार स्वीकार कर ली। कुछ गुण्डों ने शाह तुर्कान का सिर काट दिया! इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों को निकम्मा जानकर अपनी पुत्री […] - [रजिया सुल्ताना तुर्की अमीरों को फटकारने लगी (60)](https://bharatkaitihas.com/razia-reprimand-turkish-amir/): दिल्ली के नौजवानों को भड़का कर शाह तुर्कान का सिर कटवाकर रजिया दिल्ली की सुल्तान बन गई। चालीसा के जिन अमीरों ने रजिया के उत्तराधिकार का विरोध किया था, उन्हीं अमीरों ने रजिया को सुल्तान स्वीकार कर लिया। रजिया को भारत के इतिहास में रजिया सुल्ताना कहा जाता है। दिल्ली के अमीरों द्वारा रजिया को […] - [रजिया का सौंदर्य और प्रेम के किस्से इतिहास पर हावी हो गए (61)](https://bharatkaitihas.com/tales-of-beauty-and-love-dominated-history-of-razia/): इतिहास के साथ किंवदन्तियाँ और मिथक भी अवश्य ही जुड़ जाते हैं जिनके कारण सत्य और असत्य का निर्धारण कठिन हो जाता है। इसी प्रवृत्ति के कारण रजिया का सौंदर्य और प्रेम के किस्से इतिहास पर हावी हो गए! तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में जब दिल्ली पर अफगानिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों से आए लड़ाका तुर्की कबीले […] - [याकूत हब्शी से प्रेम करने लगी रजिया सुल्ताना (62)](https://bharatkaitihas.com/razia-sultan-started-loving-yakut-habshi/): कहा नहीं जा सकता कि इसमें कितना सच और कितना झूठ है किंतु रजिया सुल्ताना के बारे में पूरी दिल्ली सल्तनत में यह अपवाद व्याप्त हो गया कि रजिया सुल्ताना अपने गुलाम याकूत हब्शी से प्रेम करने लगी है। तेरहवीं सदी के बेरहम तुर्की भारत में रजिया सुल्ताना किसी आश्चर्य से कम नहीं थी। उस […] - [रणथंभौर तथा ग्वालियर दुर्ग रजिया ने हिन्दुओं को सौंप दिए (63)](https://bharatkaitihas.com/razia-handed-over-fort-of-ranthambore-and-gwalior-to-hindus/): रजिया सुल्ताना समझ गई कि वह एक साथ कई मोर्चों पर नहीं लड़ सकती थी। इस समय उसे दिल्ली के तुर्की अमीरों से निबटना था, इसलिए उसने रणथंभौर तथा ग्वालियर दुर्ग हिन्दुओं को सौंप दिए! रजिया सुल्ताना ने अपनी रक्षा के लिए अबीसीनियाई हब्शी गुलाम जमालुद्दीन याकूत को अपनी सेवा में नियुक्त किया जो हर […] - [अल्तूनिया से विवाह कर लिया रजिया ने (64)](https://bharatkaitihas.com/razia-married-cunning-altunia/): अप्रेल 1240 में रजिया बंदी बना ली गई। अपनी शक्ति और बुद्धि का अहंकार रखने वाले तुर्की अमीरों ने एक लड़की को छल से बंदी बनाया। वे युद्ध के मैदान में रजिया का सामना करने की स्थिति में नहीं थे। सूबेदारों की संयुक्त सेनाओं द्वारा रजिया बंदी बनाई जाकर अल्तूनिया को समर्पित कर दी गई। […] - [रजिया की हत्या कर दी लुटेरों ने (65)](https://bharatkaitihas.com/robbers-killed-razia-and-altunia/): कैथल के निकट जाटों ने अल्तूनिया तथा रजिया को पकड़ लिया और उनका माल-असबाब लूटकर उनकी हत्या कर दी। इस प्रकार रजिया सुल्तान का सदा के लिये अंत हो गया। एक अन्य मत के अनुसार रजिया तथा अल्तूनिया को पकड़कर दिल्ली लाया गया तथा बहरामशाह के आदेश से अल्तूनिया तथा रजिया की हत्या की गई। […] - [सुल्तान बहरामशाह की बहिन से विवाह कर लिया एतिगीन ने (66)](https://bharatkaitihas.com/etigine-forcibly-married-sultans-sister/): एतिगीन ने सुल्तान बहरामशाह की एक बहिन से जबर्दस्ती विवाह कर लिया। इस प्रकार वह सुल्तान से भी अधिक महत्त्वपूर्ण तथा शक्तिशाली हो गया तथा निरंकुश व्यवहार करने लगा। रजिया भारत की प्रथम तथा अन्तिम स्त्री सुल्तान थी। यद्यपि विदेशों में रजिया के पूर्व भी स्त्रियां तख्त पर बैठ चुकी थीं तथा बाद में कुछ […] - [सुल्तान नासिरुद्दीन औरतों के कपड़े पहनकर दिल्ली में घुसा (67)](https://bharatkaitihas.com/nasiruddin-entered-delhi-wearing-womens-clothes-and-became-a-sultan/): सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद इल्तुतमिश का पुत्र था। उसका बचपन कारागार में व्यतीत हुआ था। दिल्ली की जनता जानती थी कि नासिरुद्दीन महमूद ने अपने भतीजे एवं पूर्ववर्ती सुल्तान मसूदशाह की धोखे से हत्या करके दिल्ली का तख्त हथियाया है फिर भी प्रजा ने उसे सार्वजनिक दरबार में अपना सुल्तान स्वीकार कर लिया। बहरामशाह की हत्या […] - [इल्बरी कबीले का गुलाम था बलबन (68)](https://bharatkaitihas.com/another-slave-of-ilbari-clan-came-to-rule-delhi/): सुल्तान नासिरुद्दीन ने बलबन को अपना प्रधानमंत्री बना लिया। वह इल्बरी कबीले का तुर्क गुलाम था। बलबन में अपने समय के समस्त तुर्की अमीरों की अपेक्षा साहस, शक्ति एवं योग्यता की मात्रा बहुत अधिक थी। दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद नासिरुद्दीन को भी अपने पूर्ववर्ती सुल्तानों की तरह अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। […] - [नासिरुद्दीन ने हिन्दू राजाओं दमन किया (69)](https://bharatkaitihas.com/sultan-nasiruddin-brutally-suppressed-hindu-kings/): नासिरुद्दीन ने अपने गुलाम बलबन की सहायता से चालीसा मण्डल पर नियंत्रण कस लिया तथा अपनी सल्तनत को मजबूती से जमा लिया किंतु सुल्तान तथा सल्तनत दोनों के संकटों का कोई अंत नहीं था। जब तक तुर्की अमीर जीवित थे, जब तक मंगोल जीवित थे और जब तक हिन्दू सरदार जीवित थे, दिल्ली सल्तनत शांति […] - [गयासुद्दीन बलबन दिल्ली का सुल्तान बन गया (70)](https://bharatkaitihas.com/a-turkish-slave-became-sultan-of-delhi/): बीस वर्ष तक दिल्ली सल्तनत पर शासन करने के बाद सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद ई.1266 में मृत्यु को प्राप्त हुआ। उसने अपनी मृत्यु से पहले ही अपने तुर्की गुलाम गयासुद्दीन बलबन को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया जो कि सुल्तान का श्वसुर भी था। दिल्ली सल्तनत के इतिहास में आगे बढ़ने से पहले हमें दिल्ली के नए […] - [बलबन को पैगम्बर मान लिया मुस्लिम इतिहासकारों ने (71)](https://bharatkaitihas.com/muslim-historians-consider-balban-a-prophet/): बलबन एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उस काल के मुस्लिम इतिहासकार बलबन को पैगम्बर मानते थे जिसे अल्लाह ने भारत में इस्लाम के प्रसार हेतु भेजा था। अतः स्वाभाविक ही था कि बलबन विद्रोही हिन्दू राजाओं का कठोरता से दमन करता। दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बनकर गियासुद्दीन बलबन ने ‘जिल्ले इलाही’ तथा ‘नियामत ए खुदाई’ […] - [मेवों के सिर के बदले बलबन ने चांदी के सिक्के दिए (72)](https://bharatkaitihas.com/balban-gave-two-silver-coins-for-each-head-of-meo/): प्रत्येक अफगान सैनिक सौ-सौ मेवों के सिर काटकर लाया। मल्का को भी उसके परिवार के 250 सदस्यों के साथ बंदी बनाया गया। बलबन ने मल्का से 142 घोड़े तथा 30 हजार टंके छीन लिए। बलबन ने सल्तनत को मजबूती देने के लिए विद्रोहियों एवं अपने विरोधियों को दण्ड देने में कोई संकोच नहीं किया। एक […] - [बलबन की क्रूरता (73)](https://bharatkaitihas.com/balbans-cruelty-was-higher-than-timurlung-and-nadirshah/): बलबन की क्रूरता के आगे तैमूरलंग और नादिरशाह की तलवारों की चमक फीकी पड़ गई। बलबन ने नागरिक बस्तियों में आग लगवा कर उन्हें नष्ट कर दिया। गंगा-यमुना के दो-आब क्षेत्र के लोग युगों से स्वातंत्र्यप्रिय थे। इस क्षेत्र के राजा भले ही  गजनी के आक्रांताओं से युद्धों में हार गए थे किंतु इस क्षेत्र […] - [बलबन का चित्तौड़ अभियान (74)](https://bharatkaitihas.com/chittor-defeated-balban/): बलबन ने रजिया सुल्ताना की तरह राजस्थान के बड़े हिन्दू राजाओं से दूर ही रहने की नीति अपनाई किंतु बलबन का चित्तौड़ अभियान इसका अपवाद था। बलबन का चित्तौड़ अभियान गुजरात तक पहुंचने के लिए हुआ था। गियासुद्दीन बलबन द्वारा दिल्ली के निकट रहने वाले मेवों, गंगा-यमुना दो-आब के किसानों और अवध तथा कटेहर के […] - [तुगरिल खाँ को फांसी पर चढ़ा दिया बलबन ने (75)](https://bharatkaitihas.com/balban-hanged-tughril-khan-the-ruler-of-bengal-in-market-of-lakhnauti/): तुगरिल खाँ अपने कुछ साथियों के साथ जाजनगर के जंगलों में भाग गया। बड़ी खोज के बाद तुगरिल खाँ को पकड़ा जा सका। उसे लखनौती के बाजार में सरेआम सूली पर लटकाया गया तथा उसका सिर काटकर नदी में फेंक दिया गया। उसकी स्त्रियों तथा बच्चों को कैद कर लिया गया। बलबन ने चालीसा मण्डल […] - [बलबन का राजत्व सिद्धान्त (76)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4/): दिल्ली सल्तनत के इतिहास में बलबन का राजत्व सिद्धान्त बहुत प्रसिद्ध है। यह देखकर आश्चर्य होता है कि एक अनपढ़, क्रूर तुर्की गुलाम राजत्व के ऐसे ऊचे आदर्श एवं सिद्धांत गढ़ पाया जैसे बड़े-बड़े बादशाह नहीं गढ़ पाते हैं। गियासुद्दीन बलबन ने सल्तनत को स्थाई, सुल्तान को प्रभावशाली तथा सरकार को मजबूत बनाने के लिये […] - [कुरूप किंतु भाग्यवान बलबन ने दिल्ली सल्तनत को मजबूती प्रदान की (77)](https://bharatkaitihas.com/ugly-but-fortunate-balban-firmly-solidified-delhi-sultanate/): कुरूप किंतु भाग्यवान बलबन दिल्ली का सुल्तान था। उसने दिल्ली सल्तनत को मजबूती प्रदान की। वह अपने समस्त पूर्ववर्ती सुल्तानों से अधिक प्रतिभावान था। वह जितना अधिक कुरूप था, उतना ही अधिक क्रूर भी था। गियासुद्दीन बलबन का एक गुलाम पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर एक विशाल सल्तनत का स्वामी बन जाना एक अलग बात थी […] - [शहजादा बुगरा खाँ सल्तनत छोड़कर भाग गया (78)](https://bharatkaitihas.com/balbans-prince-escaped-leaving-the-sultanate/): बलबन ने शहजादा बुगरा खाँ को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहा किंतु शहजादा बुगरा खाँ अपने पिता के कठोर स्वभाव से डरकर लखनौती भाग गया। इस पर बलबन ने अपने बड़े पुत्र मुहम्मद के पुत्र कैखुसरो को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। शरीर से कुरूप किंतु भाग्यवान बलबन ने लड़खड़ाती हुई दिल्ली सल्तनत को अपनी बुद्धि, परिश्रम […] - [कैकुबाद ने पिता को पैरों में गिराकर सलाम करवाया (79)](https://bharatkaitihas.com/kaikubad-receives-his-fathers-salute-by-dropping-him-in-feet/): जब बुगरा खाँ अपने पुत्र सुल्तान कैकुबाद के समक्ष उपस्थित हुआ तो बुगरा खाँ ने अन्य अमीरों की तरह धरती पर माथा रगड़कर सुल्तान की जमींपोशी की तथा सुल्तान के पैर पकड़कर उसकी पैबोशी की। दिल्ली के सुल्तान गियासुद्दीन बलबन ने अपने बड़े शहजादे मुहम्मद की मृत्यु हो जाने के कारण अपने द्वितीय पुत्र बुगरा […] - [गुलाम वंश का अंत (80)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a4/): खिलजियों ने सुल्तान कैकुबाद को लातों से मारकर यमुनाजी में फैंक दिया! इसी के साथ दिल्ली सल्तनत से गुलाम वंश का अंत हो गया। अमीरों ने कैकुबाद के अल्पवयस्क पुत्र क्यूमर्स को सुल्तान बना दिया। बलबन के पोते कैकुबाद को दिल्ली पर शासन करते हुए तीन साल ही हुए थे कि अत्यधिक शराब पीने के […] - [जलालुद्दीन खिलजी हिन्दुओं के ढोल नगाड़े सुनकर खून के आंसू रोता था (81)](https://bharatkaitihas.com/jalaluddin-khilji-used-to-cry-tears-of-blood-on-hearing-drums-of-hindus/): सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी अफगानिस्तान के खिलजी कबीले का तुर्क था। वह कट्टर मुसलमान था जो हिन्दुओं के ढोल-नगाड़े सहन करने को तैयार नहीं था। वह भारत के समस्त हिन्दुओं को मुसलमान बनाना चाहता था। दिल्ली सल्तनत के तुर्की अमीरों ने जलालुद्दीन खिलजी को मारने का षड़यंत्र इसलिए रचा था क्योंकि तुर्की अमीरों की दृष्टि में […] - [मलिक छज्जू के साथ हो गए बागी हिन्दू (82)](https://bharatkaitihas.com/rebel-hindus-geathered-with-chhajju-like-ants-and-locusts/): बलबन के भतीजे मलिक छज्जू ने बगावत का झण्डा उठाया जो कि कड़ा-मानिकपुर का गवर्नर बनाया गया था। मलिक छज्जू ने भरे दरबार में सुल्तान की अधीनता स्वीकार की थी और तभी से राजभक्ति प्रदर्शित कर रहा था किंतु असन्तुष्ट तुर्क सरदारों ने उसे विद्रोह करने के लिए उकसाया। तुर्की सरदार सत्ता के इतने भूखे […] - [जलालुद्दीन खिलजी की नीति (83)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): हालांकि जलालुद्दीन खिलजी दो मुसलमान बादशाहों की हत्या करके दिल्ली सल्तनत के तख्त पर बैठा था किंतु सुल्तान बन जाने के बाद जलालुद्दीन खिलजी की नीति हिन्दुओं के साथ कठोरतम व्यवहार करने की और मुसलमानों के साथ उदारता बरतने की बन गई। सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने तुर्की अमीरों को अपने पक्ष में करने के लिए […] - [सीदी मौला भारत का खलीफा बनना चाहता था (84)](https://bharatkaitihas.com/sidi-maula-wants-to-become-khalifa-of-india-by-killing-sultan/): सीदी मौला अजुद्धान अर्थात् पाकपटन के ‘शेख फरीदुद्दीन गजेशंकर’ का शिष्य था। सीदी मौला के गुरु ने उसे राजनीति से दूर रहने का उपदेश दिया था परन्तु दिल्ली आने पर सीदी मौला की रुचि राजनीति में हो गई। दिल्ली के सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने पूर्व सुल्तान बलबन के भतीजे मलिक छज्जू का सफलता पूर्वक दमन […] - [रणथम्भौर दुर्ग नहीं जीत सका जलालुद्दीन खिलजी (85)](https://bharatkaitihas.com/one-hair-of-muslim-soldiers-is-worth-more-than-hundred-forts-of-ranthambore/): सुल्तान ने रणथम्भौर दुर्ग पर आक्रमण करने का निश्चय किया। रणथंभौर के शासक वीर हम्मीरदेव चौहान के सैनिक अपने दुर्ग की रक्षा के लिए दृढ़़-सकंल्प थे। राजपूतों की दृढ़़ता तथा दुर्ग की अभेद्यता से हताश होकर सुल्तान ने रणथम्भौर विजय का विचार त्याग दिया और घेरा उठाने के आदेश दिए। जलालुद्दीन खिलजी ने बलबन के […] - [जलालुद्दीन खिलजी की बेटी मंगोलों को दे दी गई (86)](https://bharatkaitihas.com/jalaluddin-khilji-married-his-daughter-to-mongols-and-settled-in-delhi/): जलालुद्दीन खिलजी संसार में किसी भी कीमत पर इस्लाम का प्रसार करना चाहता था। उसने मंगोलों को भी मुसलमान बनने का प्रस्ताव दिया। इसके बदले में जलालुद्दीन खिलजी की बेटी मंगोलों को दे दी गई तथा मंगोलों को दिल्ली में लाकर बसाया गया। ई.1292 में सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी की आज्ञा से उसके भतीजे एवं दामाद […] - [देवगिरि के यादव अल्लाउद्दीन से परास्त हो गए (87)](https://bharatkaitihas.com/yadavas-of-devagiri-gave-gold-pearl-diamond-and-thousand-mana-silver-to-allauddin/): देवगिरि के यादव अल्लाउद्दीन से परास्त हो गए! उन्होंने अल्लाउद्दीन को 50 मन सोनाए 5 मन मोतीए 2 मन हीरे और 1 हजार मन चाँदी दी। अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना ने देवगिरि राज्य को जमकर लूटा। मंगोलों पर की गई सैनिक कार्यवाही के बाद सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने कभी कोई सैनिक अभियान नहीं किया तथा […] - [जलालुद्दीन खिलजी की हत्या (88)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी की हत्या करके उसका सिर भाले पर लटका दिया । सुल्तान का सिर अवध के विभिन्न शहरों शहरों में घुमाया गया ताकि पूरी सल्तनत तक यह समाचार भलीभांति पहुंच जाए। अल्लाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान जलालुद्दीन से चंदेरी पर अभियान करने की अनुमति मांगी और ऐलिचपुर को जीतने के बाद […] - [दिल्ली का शाही तख्त सुल्तानों के खून का प्यासा था (89)](https://bharatkaitihas.com/delhis-royal-throne-was-thirsty-for-sultans-blood/): दिल्ली का शाही तख्त अब तक कई सुल्तानों का खून पी चुका था। प्रत्येक शहजादा, अमीर और विदेशी आक्रांता दिल्ली का शाही तख्त प्राप्त करना चाहता था। इस कारण अधिकतर सुल्तानों को अपनी स्वाभाविक मौत नसीब नहीं हो पाती थी। दिल्ली सल्तनत का शाही-तख्त इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद से ही सुल्तानी खून का प्यासा […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली में घुस गया (90)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khiljis-mother-in-law-could-not-stop-allauddin-from-entering-delhi/): अपने मजहबी विश्वासों के प्रति उन्मादी सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी धोखे, छल, फरेब से भरी तेरहवीं शताब्दी के भारत में अपने दुष्ट भतीजे अल्लाउद्दीन खिलजी के ऊपर विश्वास करके भयानक मृत्यु को प्राप्त हुआ। इतिहास के पन्नों में आगे बढ़ने से पहले हमें अल्लाउद्दीन खिलजी के बाल्यकाल में झांकना चाहिए। यद्यपि उस काल के इतिहासकारों ने […] - [जलाली अमीर (91)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0/): पूर्व सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी के विश्वस्त अमीरों को जलाली अमीर कहा जाता था। चूंकि अल्लाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान जलालुद्दीन की हत्या की थी, इसलिए जलाली अमीर अल्लाउद्दीन को क्षमा करने को तैयार नहीं थे। इसलिए नए सुल्तान ने जलाली अमीर अंधे करके जेल में ठूंस दिए। जिस समय अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली का शासक बना, वह […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की समस्याएँ (92)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8/): दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद अल्लाउद्दीन खिलजी की समस्याएँ बढ़ गईं किंतु अशिक्षित होने के कारण अल्लाउद्दीन खिलजी उन समस्याओं को समझने की बजाय एक नया मजहब चलाना चाहता था और मुसलमानों का नबी बनना चाहता था। अल्लाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि के यादवों से लूटी गई सोने की अशर्फियों के बल पर न केवल […] - [मंगोल आक्रांता अल्लाउद्दीन खिलजी को दिल्ली की गलियों में ढूंढने लगे (93)](https://bharatkaitihas.com/mongols-searched-allauddin-khilji-in-streets-of-delhi/): मंगोलों ने दिल्ली की गलियों में धावे मारे। वे सुल्तान अल्लाउद्दीन को दिल्ली में ढूंढते रहे किंतु अल्लाउद्दीन उनके हाथ नहीं लगा। अंत में निजामुद्दीन औलिया ने मंगोल सरदार से बात की और मंगोल दिल्ली छोड़कर चले गए। इस प्रकार लगभग तीन महीने तक दिल्ली मंगोलों के अधिकार में रही। काजी अलाउलमुल्क के परामर्श से […] - [मंगोलों के सिर कटवाकर मीनारें बनवाईं अल्लाउद्दीन खिलजी ने (94)](https://bharatkaitihas.com/allahuddin-khilji-built-minarets-after-beheading-mongols/): मलिक काफूर ने रावी नदी के तट पर कबक खाँ नामक मंगोल सरदार को बीस हजार मंगोलों सहित कैद कर लिया। इन्हें दिल्ली लाकर हाथियों के पैरों तले कुचलवाया गया। इन मंगोलों के सिर कटवार बदायूं दरवाजे पर मंगोलों के सिरों की एक मीनार बनाई गई। ई.1302 में मंगोल दिल्ली पर अधिकार करने में सफल […] - [सीरी दुर्ग की नींव में डलवाए अल्लाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों के कटे हुए सिर (95)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-put-severed-head-of-mongols-in-foundation-of-siri-fort/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने सीरी दुर्ग की नींव में उन आठ हजार मंगोलों के कटे हुए सिर डलवा दिए जो बदायूं दरवाजे के पास पड़े सड़ रहे थे। इस घटना के बाद जब तक अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली के तख्त पर बैठा रहा, तब तक मंगोलों का भारत पर आक्रमण नहीं हुआ। अल्लाउद्दीन खिलजी के समय में […] - [उलूग खाँ कर्ण बघेला की रानी को उठा लाया (96)](https://bharatkaitihas.com/ulugh-khan-snatched-the-queen-of-karna-baghela/): राजा कर्ण बघेला की रानी कमलावती अप्रतिम सौंदर्य की स्वामिनी थी। उलूग खाँ ने अपने सनिकों से कहा कि वे रानी पर वार नहीं करें अपितु उसे जीवित ही पकड़ लें। खिलजी सैनिकों के थोड़े से परिश्रम से रानी पकड़ ली गई। ई.1299 में अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना ने गुजरात-अभियान पर जाने के लिए थार […] - [जालोर के चौहान सोमनाथ शिवलिंग के खण्ड छीनने में सफल रहे (97)](https://bharatkaitihas.com/chauhans-of-jalore-snatched-blocks-of-somnath-from-khiljis/): जब अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े लेकर दिल्ली लौटी तथा मार्ग में जालोर राज्य से होकर गुजरी तो जालोर के चौहान अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना से सोमनाथ शिवलिंग के खण्ड छीनकर ले जाने में सफल रहे। अल्लाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खाँ तथा नुसरत खाँ ने गुजरात की राजधानी अन्हिलवाड़ा पर आक्रमण […] - [अल्लाउद्दीन की माँ को लूट लिया जैसलमेर के राजकुमारों ने (98)](https://bharatkaitihas.com/the-princes-of-jaisalmer-looted-allauddins-mother/): ई.1304 में दिल्ली के सुल्तान अल्लाउद्दीन की माँ लगभग साढ़े पांच सौ खच्चरों पर सोने-चांदी की अशर्फियां, कीमती रेशमी कपड़े तथा खाने-पीने की बहुमूल्य वस्तुएँ लेकर मुल्तान एवं सिंध होते हुए जैसलमेर राज्य के रास्ते हज करने मक्का जा रही थी, तब भाटियों ने दिल्ली की सेना को अपनी तलवार का पानी पिलाने का निश्चय […] - [जैसलमेर दुर्ग छोड़कर भाग गए भूख से व्याकुल तुर्की सैनिक (99)](https://bharatkaitihas.com/hungry-turkish-soldiers-fled-from-jaisalmer-fort/): जैसलमेर दुर्ग ऐसे विकट रेगिस्तान में स्थित था जहाँ सैंकड़ों मील दूर तक रेत के टीलों के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं देता था। तुर्की सैनिक इन परिस्थितियों में रहने के अभ्यस्त नहीं थे। अतः एक दिन उन्होंने जैसलमेर दुर्ग के टूटे हुए दरवाजों को कांटों की बाड़ से बंद किया तथा चुपचाप दुर्ग खाली […] - [बागी मंगोल वेश्याओं को लेकर जालोर से भाग गए (100)](https://bharatkaitihas.com/mongols-flee-from-jalore-with-their-prostitutes/): बागी मंगोल सैनिकों ने कहा कि वे राजा कान्हड़देव के मित्र हैं, उसके अधीन नहीं हैं। हम उसका आदेश स्वीकार नहीं कर सकते। राजा कान्हड़देव ने उन्हें चेतावनी दी कि वे हमारी शरण में हैं और हमारे राज्य में रह रहे हैं अतः उन्हें राजा का आदेश मानना होगा। सोमथनाथ से लौट रही अल्लाउद्दीन खिलजी […] - [रणथंभौर का जौहर (101)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-sneaked-into-the-ranthambore-fort/): अल्लाउद्दीन खिलजी के आक्रमणों के कारण राजपूताने के कई किलों में जौहर हुए। इनमें चित्तौड़ का जौहर, जालौर का जौहर, सिवाना का जौहर, जैसलमेर का जौहर तथा रणथंभौर का जौहर बहुत चर्चित हैं। अन्य किलों में भी जौैहर हुए। हिन्दू रानियों से लेकर दासियां, छोटी बच्चियां यहाँ तक कि अवयस्क लड़के भी जौहर की भीषण […] - [चित्तौड़ दुर्ग को मिट्टी में मिलाने निकल पड़ा अल्लाउद्दीन खिलजी (102)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-attacked-chittor-fort-to-demolish-it/): अल्लाउद्दीन खिलजी अब तक जैसलमेर तथा रणथंभौर के दुर्गों को जीत कर अधीन कर चुका था और अब उसकी आँख चित्तौड़ दुर्ग पर लगी हुई थी। ई.1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी एक विशाल सेना लेकर चित्तौड़ अभियान पर चल दिया। आगे बढ़ने से पहले हमें चित्तौड़ दुर्ग के इतिहास पर दृष्टि डालनी चाहिए। यह तो नहीं […] - [चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी को छीनना चाहता था अल्लाउद्दीन (103)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-wanted-to-snatch-the-queen-of-chittor/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने ई.1301 में रणथंभौर दुर्ग पर विजय प्राप्त करने के बाद ई.1303 में भारत के सबसे दुर्गम माने जाने वाले दुर्गों में से एक चित्तौड़ पर आक्रमण के लिए प्रस्थान किया। अल्लाउद्दीन चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी को छीनना चाहता था। चित्तौड़ दुर्ग गंभीरी और बेढ़च नदियों के संगम पर मेसा के पठार पर […] - [पृथ्वीराज रासो से आई है जायसी की पद्मावती (104)](https://bharatkaitihas.com/padmavati-of-jayasi-has-come-from-prithviraj-raso/): बहुत से लोग जायसी की पद्मावती को केन्द्रबिंदु बनाकर चित्तौड़ का इतिहास लिखने का प्रयास करते हैं किंतु इस ग्रंथ की नायिका जायसी की मौलिक रचना नहीं है, न ही वह चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी अथवा पद्मावती है। जायसी की पद्मिनी अथवा पद्मावती तो ‘पृथ्वीराज रासो’ नामक ग्रंथ से उधार ली हुई है। ई.1303 में […] - [राणा हमीर ने शत्रुओं को पत्थरों से बांधकर चित्तौड़ दुर्ग से नीचे गिरा दिया (105)](https://bharatkaitihas.com/rana-hamir-tied-enemies-with-stones-and-dropped-them-down-walls-of-chittor-fort/): एक दिन राणा हमीर ने चित्तौड़ दुर्ग पर आक्रमण किया। उसके सैनिक चुपचाप दुर्ग में प्रवेश करके दुर्ग की प्राचीरों तक जा पहुंचे और उन्होंने, मुस्लिम तथा चौहान सैनिकों को पत्थरों से बांध-बांधकर दुर्ग की दीवारों से नीचे गिरा दिया और दुर्ग पर अधिकार कर लिया। ई.1303 में अल्लाउद्दीन खिजली ने चित्तौड़ दुर्ग पर आक्रमण […] - [बंगाल में ब्रिटिश प्रभुसत्ता का विस्तार](https://bharatkaitihas.com/expansion-of-british-sovereignty-in-bengal/): बंगाल में मुस्लिम नवाब का शासन था। नवाब के परिवार में सत्ता की प्राप्ति के लिए षड़यंत्र चलते रहते थे। इस कारण ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा बंगाल में ब्रिटिश प्रभुसत्ता का विस्तार तेजी से किया जाना संभव हुआ। ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना तथा भारत में प्रवेश 1600 ई. में ब्रिटेन के कुछ व्यापारियों ने […] - [शहजादी फीरोजा ने वीरमदेव से विवाह करने का प्रण लिया (106)](https://bharatkaitihas.com/shehzadi-feroza-pledged-to-marry-prince-veeramdev-of-jalore/): शहजादी फीरोजा की माता और महल की अन्य बेगमों ने शहजादी को समझाया कि वह हिन्दू है और तुम मुसलमान। दोनों का विवाह कैसे हो सकता है? परन्तु शहजादी फीरोजा ने बहुत हठ किया और मरने को तैयार हो गई। अतः बेगमों ने बादशाह को सूचित किया। ई.1303 में दिल्ली के सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने […] - [राजकुमार वीरमदेव के कटे सिर ने शहजादी से मुंह फेर लिया (107)](https://bharatkaitihas.com/veeramdevs-severed-head-turned-his-back-on-princess/): मुंहता नैणसी री ख्यात में आए विवरण के अनुसार राजकुमार वीरमदेव ने जालोर आकर अपने पिता रावल कान्हड़देव को बताया कि दिल्ली के बादशाह ने मुझे अपनी शहजादी फीरोजा से विवाह करने का लगन दिया है तो राजा कान्हड़देव ने सोचा कि बात बिगड़ गई। उसने कामदारों को बुलाकर शीघ्र ही किलेबन्दी करवाई तथा युद्ध […] - [जालोर पर आक्रमण किया शहजादी फीरोजा की धाय गुलबहिश्त ने (108)](https://bharatkaitihas.com/shahzadi-ferozas-nurse-gulabhisht-invaded-jalore/): पद्मनाभ तथा मुंहता नैणसी द्वारा दिए गए विवरणों के अनुसार जब जालोर के राजा कान्हड़देव ने अपने राजकुमार वीरमदेव का विवाह शहजादी फीरोजा से करने से मना कर दिया तो शहजादी दिल्ली लौट गई तथा अल्लाउद्दीन खिलजी ने शहजादी की धाय गुलबहिश्त के नेतृत्व में दिल्ली की सेना जालोर जालोर पर आक्रमण करने भेजी। पद्मनाभ […] - [सिवाना पर आक्रमण किया अल्लाउद्दीन खिलजी ने (109)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%a3/): अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा अब तक गुजरात के अन्हिलवाड़ा, मालवा के मांडू, उज्जैन, धारा नगरी तथा चन्देरी एवं राजपूताने के जैसलमेर, रणथंभौर एवं चित्तौड़ जैसे राज्यों को जीतने के उपरांत भी जालोर का राज्य उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था इसलिए उसने जालोर पर अभियान करने का निश्चय किया किंतु जालोर पर अभियान करने से पहले […] - [मलिक काफूर कर्ण बाघेला की पुत्री देवलदेवी को उठा लाया (110)](https://bharatkaitihas.com/malik-kafur-stole-karnal-bazholas-daughter-devaladevi/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत के अभियानों की जिम्मेदारी अपने गुलाम मलिक काफूर को सौंपी जो खम्भात से खरीद कर लाया गया एक हिन्दू लड़का था और उसे खवासरा अर्थात् नपुंसक बनाकर एवं इस्लाम में परिवर्तित करके सुल्तान की सेवा में रखा गया था। अल्लाउद्दीन खिलजी का सपना पूरे भारत पर अधिकार करने का था। […] - [प्रताप रुद्रदेव ने मलिक काफूर को कोहीनूर हीरा दिया (111)](https://bharatkaitihas.com/pratap-rudra-dev-gave-malik-kafur-kohinoor-diamond/): ई.1310 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने मलिक काफूर को वारांगल पर आक्रमण करने भेजा। अल्लाउद्दीन ने मलिक काफूर को आदेश दिया कि यदि प्रताप रुद्रदेव सुल्तान की अधीनता स्वीकार कर ले और अपना कोष, घोड़े तथा हाथी समर्पित करे तो उससे सन्धि कर ली जाये और उसका राज्य न छीना जाये। मलिक काफूर ने एक विशाल […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की नीति (112)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4/): अल्लाउद्दीन खिलजी की नीति ने सिद्ध कर दिया कि केवल अनपढ़ ही शासन कर सकते हैं। उससे पहले दिल्ली का कोई भी सुल्तान इतना सफल सिद्ध नहीं हुआ था। अल्लाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर ने देवगिरि, वारांगल, द्वारसमुद्र तथा मदुरा को जीतकर उन्हें खिलजी सल्तनत के अधीन कर लिया तथा खिलजी का साम्राज्य उत्तर […] - [खिलजी का बाजार प्रबन्धन (113)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%a8/): दिल्ली के सुल्तानों के लिए बाजार प्रबन्धन शासन का कोई आधार ही नहीं था किंतु खिलजी का बाजार प्रबन्धन दिल्ली सल्तनत शासन में एक नवीन घटना थी। इसका अध्ययन दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों एवं इतिहासकारों के लिए कौतूहल का विषय है। नितांत अनपढ़ होने के उपरांत भी सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन के […] - [हिन्दू प्रजा पर अत्याचार किया अल्लाउद्दीन खिलजी ने (114)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने मुल्लाओं की सलाह पर हिन्दू प्रजा पर अत्याचार किया तथा हिन्दुओं की सम्पत्ति छीनकर उन्हें गरीब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपनी सम्पत्ति की रक्षा करने के लिए हिन्दुओं के सामने केवल यही एक रास्ता बचा था कि वे मुसलमान बन जाएं। अल्लाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली सल्तनत के शासन में बड़े […] - [तुर्की अमीरों का दमन (115)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%a8/): अल्लाउद्दीन खिलजी ने तुर्की अमीरों का दमन करने के लिए उनकी शराब और वेश्याएं छीन लीं। तुर्की अमीर न तो शराब के बिना रह सकते थे और न वेश्याओं के बिना। इसलिए वे सुल्तान के विरुद्ध हो गए किंतु सुल्तान की शक्ति के कारण खुलकर बगावत नहीं कर सके। सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी ने एक ओर […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी का दण्डविधान (116)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-used-to-ampute-hands-and-feet-on-suspicion-of-minor-crime/): अल्लाउद्दीन खिलजी का दण्डविधान बहुत कठोर था। वह मामूली अपराध के संदेह में हाथ-पैर कटवा देता था। अपराधी को सरेआम कोड़े लगवाने से लेकर फांसी पर चढ़ाना उसके दण्डविधान के अनिवार्य अंग थे। अल्लाउद्दीन खिलजी ने तुर्की एवं गैर-तुर्की अमीरों की सम्पत्तियां छीनकर उन्हें इतना कमजोर कर दिया कि अब वे सुल्तान के विरुद्ध न […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की क्रूरता ने मिस्र के फैरोह को पीछे छोड़ दिया (117)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-murdered-humans-more-than-pharaohs-of-egypt/): भारत के इतिहास की पुस्तकें अल्लाउद्दीन खिलजी की क्रूरता के किस्सों से भरी पड़ी हैं। कहा जाता है कि उसने मनुष्यों का रक्तपात करने के मामले में मिस्र के फैरोह को भी पीछे छोड़ दिया। अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपनी सल्तनत को सैनिक शासन के आधार पर खड़ा किया जो उसके क्षमतावान रहने तक ही खड़ी […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी का शासन सर्वथा गौरवहीन था (118)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khiljis-rule-was-utterly-shameless/): कई इतिहासकारों की दृष्टि में अल्लाउद्दीन खिलजी दिल्ली के सुल्तानों में सर्वश्रेष्ठ था किंतु कई अन्य इतिहासकार इस बात से सहमत नहीं हैं। वी. ए. स्मिथ ने उसके शासन को सर्वथा गौरवहीन बताते हुए लिखा है कि वह वास्तव में बड़ा ही बर्बर तथा क्रूर शासक था और न्याय का बहुत कम ध्यान रखता था। […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी के अंतिम दिन (119)](https://bharatkaitihas.com/allauddin-khilji-used-to-cry-like-crazy-in-roar/): अल्लाउद्दीन खिलजी के अंतिम दिन अच्छे नहीं बीते। वह हर समय शराब के नशे में धुत्त रहता था और अपने महल में अकेला पड़ा हुआ पागलों की तरह दहाड़ें मार कर रोता था! अल्लाउद्दीन खिलजी का जन्म ई.1266 में हुआ था। तीस साल की आयु में अर्थात् ई.1296 में वह सुल्तान बना था और ई.1316 […] - [अल्लाउद्दीन खिलजी की बेगम से एक किन्नर ने विवाह कर लिया (120)](https://bharatkaitihas.com/kinnar-married-sultans-begum/): मलिक काफूर ने अल्लाउद्दीन खिलजी की बेगम मलिका-ए-जहाँ की सारी सम्पत्ति छीन ली तथा मलिका को उसके पुत्र मुबारक खाँ के साथ ग्वालियर के जेल में बन्द कर दिया। यद्यपि मरहूम सुल्तान अल्लाउद्दीन के दोनों बड़े पुत्र अल्लाउद्दीन के समय से ही कारागार में बंद थे तथापि वे किसी भी समय मलिक काफूर के लिए […] - [सुल्तान मुबारक खाँ नंगा होकर दरबार में दौड़ने लगा (121)](https://bharatkaitihas.com/sultan-mubarak-khan-got-naked-and-started-running-in-court/): सुल्तान मुबारक खाँ अल्लाउद्दीन खिलजी का तीसरे नम्बर का पुत्र मुबारक खाँ मलिक काफूर तथा अपने छोटे भाई शिहाबुद्दीन उमर की हत्या करके मुबारक शाह के नाम से स्वयं सुल्तान बन गया। उसने अपने बड़े भाई खिज्र खाँ की हत्या करके उसकी पत्नी देवलदेवी को भी छीन लिया। उन्हीं दिनों मुबारक शाह ने अपने अन्य […] - [तुर्की अमीर इस्लाम के नाम पर भारतीय अमीरों को नष्ट करने लगे! (122)](https://bharatkaitihas.com/turkish-ministers-destroyed-indian-ministers-in-name-of-islam/): जब नासिरुद्दीन खुसरोशाह अल्लाउद्दीन खिलजी के पुत्र को मारकर दिल्ली का सुल्तान बन गया तो तुर्की अमीर इस परिवर्तन को सहन नहीं कर सके। वे किसी भारतीय मुसलमान को सुल्तान के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते थे। इसलिए तुर्की अमीर इस्लाम के नाम पर भारतीय अमीरों को नष्ट करने लगे! गुजरात के एक हिन्दू […] - [गाजी मलिक भारत का सुल्तान बन गया (123)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95/): गाजी मलिक ने सिबिस्तान, मुल्तान तथा समाना के उन तुर्की सेनापतियों से सहयोग मांगा जो एक हिन्दुस्तानी मुसलमान को सुल्तान के रूप में नहीं देखना चाहते थे। इन प्रांतों में नियुक्त तुर्की मूल के बहुत से अधिकारी गाजी मलिक का सहयोग करने को तैयार हो गए। अंतिम खिलजी सुल्तान मुबारकशाह को मारकर एक भारतीय मुसलमान […] - [बुद्ध के सामाजिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी - 6](https://bharatkaitihas.com/general-knowledge-quiz-social-thoughts-of-mahatma-buddha/): बुद्ध के सामाजिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी – 6 में महात्मा बुद्ध के सामाजिक विचारों के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: बौद्ध धर्म का एक प्रमुख तत्त्व करुणा है। करुणा के कितने भेद कहे गए हैं? उत्तर: करुणा के तीन भेद हैं- (1.) स्वार्थमूलक करुणा: इस करुणा में स्वार्थ होता है। […] - [महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी: 5](https://bharatkaitihas.com/general-knowledge-quiz-religious-thoughts-of-mahatma-buddha/): महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचार : सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी: 5 में महात्मा बुद्ध के धार्मिक विचारों के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: अष्टांग-पथ के तीन प्रधान अंग कौनसे हैं? उत्तर: अष्टांग-पथ का अनुसरण करने से मनुष्य के भीतर शील, समाधि और प्रज्ञा का उदय होता है जो कि बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग […] - [बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्त : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-4](https://bharatkaitihas.com/chief-principles-of-boddh-dharma-quiz/): बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्त : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-4 में बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धांतों एवं दर्शन के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: महात्मा बुद्ध ने कितने सत्य बताए हैं? उत्तर : चार। 2. प्रश्न: महात्मा बुद्ध के चार सत्यों को क्या कहा जाता है? उत्तर : चार आर्य-सत्य अथवा चत्वारि आर्य […] - [महात्मा बुद्ध का परिचय : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-3](https://bharatkaitihas.com/introduction-of-mahatma-buddha-quiz/): महात्मा बुद्ध का परिचय : प्राचीन भारत प्रनोत्तरी-3 में महात्मा बुद्ध का जीवन परिचय एवं उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी दी गई है। 1. प्रश्न: बौद्ध धर्म के प्रवर्तक कौन थे? उत्तर: महात्मा बुद्ध। 2. प्रश्न: बौद्ध धर्म को किस धर्म के विरुद्ध धार्मिक क्रांति माना जाता है? उत्तर: ब्राह्मण धर्म […] - [प्राचीन भारतीय साहित्य प्रनोत्तरी-2](https://bharatkaitihas.com/ancient-indian-literature-quiz/): प्राचीन भारतीय साहित्य प्रनोत्तरी-2 में भारत के प्राचीन साहित्य के सम्बन्ध में परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न तथा उनके उत्तर लिखे गए हैं। 1. प्रश्न: भारतीयों को लिपि का ज्ञान कब हुआ? उत्तर: ई.पू. 2500 में लिपि की जानकारी हो चुकी थी। 2. प्रश्न: भारत में सबसे प्राचीन उपलब्ध हस्तलिपियाँ कितनी पुरानी हैं? उत्तर: […] - [सभ्यता एवं संस्कृति प्रश्नोत्तरी 1](https://bharatkaitihas.com/civilization-and-culture-quiz/): प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति प्रश्नोत्तरी में भारत की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के सम्बन्ध में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न तथा उनके उत्तर लिखे गए हैं। 1. प्रश्न : सभ्यता का शाब्दिक अर्थ क्या होता है? उत्तर : सभा में बैठने की योग्यता। सभायाम् अर्हति इति। 2. प्रश्न : पाश्चात्य विद्वानों के […] - [गयासुद्दीन तुगलक ने हिन्दू प्रजा पर धन रखने से रोक लगा दी (124)](https://bharatkaitihas.com/ghazi-tughlaq-prohibited-the-hindu-subjects-from-keeping-wealth/): तुर्की अमीरों ने हिन्दुस्तानी मुस्लिम अमीरों को परास्त करके खुसरोशाह को मार दिया और दिपालपुर का गवर्नर गाजी मलिक तुगलक ‘गयासुद्दीन तुगलक गाजी’ के नाम से दिल्ली का सुल्तान बन गया। उस समय सल्तनत की दशा बड़ी शोचनीय थी। इस कारण नये सुल्तान के समक्ष कई कठिनाइयां मुँह बाये खड़ी थीं। केन्द्रीय सरकार के शक्तिहीन […] - [जूना खाँ ने सुल्तान को तम्बू के नीचे दबाकर मार दिया (125)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%81/): खिलजियों के पतन के बाद भारत में मुस्लिम सल्तनत की इमारत डोलने लगी थी किंतु गयासुद्दीन तुगलक ने भारत में मुस्लिम राज्य को फिर से मजबूत कर दिया। उसके दुर्भाग्य से उसका पुत्र जूना खाँ अत्यंत महत्त्वाकांक्षी था जो जल्दी ही दिल्ली का सुल्तान बनना चाहता था, इसलिए जूना खाँ ने छल से सुल्तान गयासुद्दीन […] - [मुहम्मद तुगलक (126)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95/): शहजादे जूना खाँ ने अपने पिता सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक की हत्या कर दी और स्वयं मुहम्मदशाह तुगलक के नाम से दिल्ली का सुल्तान बन गया। निजामुद्दीन औलिया और अब्बासी खलीफा ने मुहम्मद बिन तुगलक को दिल्ली का सुल्तान मान लिया! सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक के अति महत्त्वाकांक्षी पुत्र जूना खाँ ने ई.1325 में अपने पिता की […] - [किसानों की हत्या कर दी मुहम्मद तुगलक ने (127)](https://bharatkaitihas.com/muhammad-bin-tughluq-captured-and-killed-the-peasants-from-the-jungles/): मुहम्मद तुगलक भारत में इस्लाम का राज्य स्थापित करना चाहता था। इसलिए वह हिन्दू किसानों की आर्थिक स्थिति नष्ट करके मुसलमानों की सम्पत्ति बढ़ाना चाहता था। उसने बहुत बड़ी संख्या में जंगलों में छिपे हुए हिन्दू किसानों की हत्या कर दी। मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद जनता में सोने-चांदी की […] - [धरती उबलने वाली है](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): अब यह कोई अनुमान की बात नहीं है, न ही कोई भविष्यवाणी है, अब यह एक सत्य है जो सबको नंगी आंखों से दिखाई दे रहा है कि धरती उबलने वाली है। धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि आगामी 50 वर्षों में धरती पर तापक्रम बढ़ने की यही गति बनी रहती है […] - [कोलवी की बौद्ध गुफाएं](https://bharatkaitihas.com/buddhist-caves-of-kolvi-and-hatyagouda/): कोलवी की बौद्ध गुफाएं राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित हैं। इन्हीं गुफाओं के पास हात्यागौड़ की बौद्ध गुफाएं भी स्थित हैं। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित बौद्ध गुफाएं तथा कोलवी की बौद्ध गुफाएं भी अधिक दूरी पर स्थित नहीं हैं। भगवान बुद्ध कभी राजस्थान नहीं आये किंतु उनके निर्वाण के बाद के 1000 […] - [स्वात में बामियान दोहराया जायेगा](https://bharatkaitihas.com/will-bamiyan-be-repeated-in-swat/): पाकिस्तान के धुर पश्चिम में स्वात क्षेत्र स्थित है। यह हरी-भरी पहाड़ियों वाला अत्यंत सुंदर क्षेत्र है। इसीलिये इसे स्वात कहा जाता है। स्वात शब्द ‘‘स्वाति’’ का अपभ्रंश है जिसका अर्थ होता है- सूर्य की पत्नी। यह क्षेत्र सचमुच इतना सुंदर है कि इसे सूर्य की पत्नी कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। किसी […] - [दिल्ली से दौलताबाद (128)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6/): जब मुहम्मद बिन तुगलक अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद ले गया तब दिल्ली के लोग गालियां लिखे कागज तीरों में बांधकर मुहम्मद बिन तुगलक के महल में फैंकते थे! मुहम्मद बिन तुगलक ने दो-आब के क्षेत्र में खेती पर लगने वाले कर में अतिशय वृद्धि कर दी जिसके कारण हिन्दू किसान अपने घरों एवं खेतों […] - [तुगलक की सांकेतिक मुद्रा को जनता ने विफल कर दिया (129)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/): चौदहवीं शताब्दी ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक ने सोने-चांदी के सिक्कों के स्थान पर ताम्बे के सिक्के चलाए। इसे तुगलक की सांकेतिक मुद्रा कहा जाता है। लोगों ने अपने घरों में ताम्बे के सिक्के ढाल लिए तथा उनके बदले में राजकोष से सोने-चांदी के सिक्के ले लिए। मुहम्मद बिन तुगलक ने दक्षिण भारत में स्थाई […] - [कराजल पर हमला कर दिया मुहम्मद बिन तुगलक ने (130)](https://bharatkaitihas.com/karajal-was-attacked-by-muhammad-tughlaq-for-the-women/): सुंदर कराजली औरतें पाने के लिए मुहम्मद बिन तुगलक ने कराजल पर हमला कर दिया किंतु मुहम्मद और उसके सैनिक उन सुंदर औरतों को छू भी नहीं पाए। मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में भारत में घट रही घटनाओं के समाचार मध्यएशिया तक भी पहुंच रहे थे। दो-आब में कर बढ़ा देने तथा राजधानी […] - [बागी अमीरों का दमन करने के लिए उनकी खाल में भूसा भरा गया (131)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%a8/): अफगानिस्तान में मंत्रियों को अमीर कहा जाता था। मुहम्मद बिन तुगलक के अमीरों ने बड़ी संख्या में विद्रोह किए। बागी अमीरों का दमन करने के लिए मुहम्मद बिन तुगलक ने उनकी खाल में भूसा भरवा कर देश भर में घुमाया। पिछली कड़ी में हमने चर्चा की थी कि मुहम्मद बिन तुगलक ने करांचल, हिमाचल, नगरकोट […] - [विजयनगर तथा चित्तौड़गढ़ स्वतंत्र हो गए (132)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8c%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc/): जिस समय मुहम्मद बिन तुगलक अपनी अमीरों एवं प्रांतीय शासकों की बगावतों को कुचलने में लगा हुआ था, उस समय अवसर पाकर विजयनगर तथा चित्तौड़गढ़ के हिन्दू राज्य स्वतंत्र हो गए। विजयनगर तथा चित्तौड़गढ़ के ये दो बड़े राज्य दिल्ली के मुसलमानों तथा प्रांतीय मुस्लिम शासकों से कई सौ साल तक लड़ते रहे। मुहम्मद बिन […] - [दक्षिण भारत के शियाराज्य विजयनगर के शत्रु हो गए (133)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a3-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/): विजयनगर के अस्तित्व में आने के बाद दक्षिण भारत में बहमनी शिया राज्य की स्थापना हुई जो कुछ समय बाद पाँच शिया राज्यों में टूट गया। दक्षिण भारत के शियाराज्य विजयनगर के हिन्दू राज्य के कट्टर शत्रु हो गए। देश भर में हिन्दू राजाओं ने दिल्ली सल्तनत के विरुद्ध विद्रोह करके अपने राज्य स्वतंत्र करवा […] - [मुहम्मद बिन तुगलक को पागल घोषित कर दिया मुल्ला-मौलवियों ने (134)](https://bharatkaitihas.com/mullah-clerics-declared-muhammad-bin-tughluq-as-insane/): मुहम्मद बिन तुगलक के जीवन काल में ही दक्षिण भारत में हसन गंगू नामक एक ईरानी अमीर ने बहमनी सल्तनत की स्थापना कर ली जो आगे चलकर पांच शिया राज्यों में विभक्त हो गया। दक्षिण भारत के शियाराज्य हर समय आपस में लड़ते रहते थे किंतु विजयनगर के हिन्दू राज्य से लड़ने के लिए एक […] - [हिन्दू खतरे में थे ! हिन्दुओं के चोटी, पोथी और मूर्ति भी खतरे में थे (135)](https://bharatkaitihas.com/chotis-pothis-and-idols-of-hindus-were-in-danger/): मुहम्मद बिन तुगलक के काल में हिन्दू खतरे में थे। उनकी चोटी, पोथी और मूर्तियाँ भी खतरे में थीं। उत्तर भारत में सुन्नी शासक तथा दक्षिण भारत में शिया शासक हिन्दुओं को निरंतर नष्ट कर रहे थे किंतु इस काल में हिन्दू जाति भी वीरता पूर्वक मुसलमानों से संघर्ष कर रही थी। मुहम्मद बिन तुगलक […] - [फीरोजशाह तुगलक और ख्वाजाजहाँ ! (136)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be/): यद्यपि मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद दिल्ली तख्त के दो दावेदार उठ खड़े हुए- फीरोजशाह तुगलक और ख्वाजाजहाँ ! यह तुर्की अमीरों पर निर्भर करता था कि वे किसे सुल्तान बनाएं ! यद्यपि मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने चचेरे भाई फीरोजशाह तुगलक को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था तथापित मुहम्मद बिन तुगलक का […] - [फीरोजशाह तुगलक उलेमाओं की कठपुतली बन गया (137)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95/): मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद राज्य के प्रधानमंत्री ख्वाजाजहाँ ने मुहम्मद के अवयस्क भांजे को मुहम्मद का दत्तक पुत्र घोषित करके उसे सुल्तान बना दिया किंतु सल्तनत के अमीरों ने मुहम्मद के 42 वर्षीय चचेरे भाई फीरोजशाह तुगलक को सुल्तान मनोनीत किया। इस पर फीरोजशाह तुगलक ने प्रधानमंत्री ख्वाजाजहाँ तथा उसके द्वारा घोषित […] - [फीरोज तुगलक का शासन (138)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): फीरोज तुगलक का शासन इस्लाम के सिद्धांतों पर चलता था जिसमें अपराधियों एवं विधर्मियों को कठोर दण्ड दिया जाता था और विधर्मियों के लिए कठोर कर-व्यवस्था लागू की गई थी। फीरोज तुगलक को मुल्ला-मौलवियों की कृपा से सुल्तान का तख्त प्राप्त हुआ था, इसलिए वे दीन का मुखौटा लगाकर तथा सल्तनत के कार्यों में मुल्ला-मौलवियों […] - [फीरोज तुगलक की कट्टरता (139)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be/): दिल्ली सल्तनत के इतिहास में फीरोज तुगलक की कट्टरता कुख्यात है। वह हिन्दुओं को तो जीवित ही आग में झौंक देता था किंतु मुस्लिम स्त्रियों का करुण क्रंदन नहीं सुन सकता था! फीरोज तुगलक ने पिछले सुल्तान का परलोक सुधारने के लिए जनता से क्षमापत्र लिखवाकर उसकी कब्र में गढ़वाए तथा इस्लामिक शिक्षा देने के […] - [फीरोजशाह तुगलक की करनीति (140)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/): फीरोजशाह तुगलक की करनीति बड़ी विचित्र थी। वह हिन्दुओं से तो कर लेना चहाता था किंतु मुसलमानों से कर नहीं लेना चाहता था अपितु जब कोई मुस्लिम सेनापति या प्रांतपति किसी हिन्दू राज्य को लूटता था तो फीरोजशाह तुगलक द्वारा लूट के माल में से पांचवा हिस्सा लिया जाता था। फीरोजशाह तुगलक ने हिन्दुओं एवं […] - [फीरोजशाह तुगलक का शासन (114)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8/): फीरोजशाह तुगलक का शासन क्रूरता की सभी सीमाओं को पार कर गया था वह हिन्दू अपराधी को महल के समक्ष जीवित जलवा देता था जबकि मुस्लिम अपराधी पर रहम दिखाकर छोड़ देता था। फीरोज तुगलक ने हिन्दुओं एवं मुसलमानों के लिए अलग-अलग युद्ध नीति अपनाई। इस कारण उसने नगरकोट तथा जाजनगर के हिन्दू राज्यों को […] - [फीरोजशाह तुगलक की मृत्यु (142)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81/): अस्सी वर्ष की आयु में फीरोजशाह तुगलक की मृत्यु हो गई। वह सिकंदर लोदी और औरंगजेब की भांति मजहबी संकीर्णता से ग्रस्त था और हिन्दुओं पर अत्याचार करने का एक भी अवसर हाथ से नहीं जाने देता था। फीरोजशाह तुगलक ने मुल्ला-मौलवियों की सलाह पर अपने शासन का संचालन किया। इस कारण राज्य में सुन्नी […] - [ब्राह्मणों पर अत्याचार करता था फीरोजशाह तुगलक (143)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a3%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/): फीरोजशाह तुगलक वैसे तो समस्त हिन्दुओं पर अत्चार करता था किंतु वह ब्राह्मणों पर अत्याचार करने में सभी सीमाएँ लांघ जाता था। उसने ब्राह्मणों पर जजिया लगा दिया तथा एक मूर्तिपूजक ब्राह्मण को लड़की की मुहर के साथ जीवित जला दिया! फीरोजशाह तुगलक की धर्मांधता ने दिल्ली सल्तनत के शासनतंत्र में कई तरह की विसंगतियां […] - [तुगलक वंश का पतन (144)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%a8/): फीरोजशाह तुगलक के जीवनकाल में ही तुगलक वंश का पतन आरम्भ हो गया था। उसके मरने के बाद तो तुगलक वंश का पतन बड़ी तेजी से हुआ। सल्तनत का वजीर ख्वाजा जहाँ अय्याशी करता रहा और तुगलकों की सल्तनत बिखरती रही। फीरोजशाह तुगलक की मजहबी संकीर्णता ने दिल्ली सल्तनत के शासनतंत्र में कई तरह की […] - [तुर्की अमीरों की अय्याशी (145)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80/): तुगलक कालीन तुर्की तुर्की अमीरों की अय्याशी देखते ही बनती थी। वे भी सुल्तानों की तरह अपने-अपने दरबार सजाते थे जिनमें वे सल्तनत के शासन के सम्बन्ध में अथवा सल्तनत की समस्याओं के सम्बन्ध में विचार-विमर्श करने के स्थान पर वेश्याएँ नचाते थे। इस कारण दिल्ली सल्तनत तेजी से बिखरने लगी। सुल्तान महमूद नासिरूद्दीन के […] - [तुगलक शासकों की कमजोरियाँ (146)](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%95-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/): तुगलक शासकों की कमजोरियाँ तुगलक वंश के पतन का सबसे बड़ा कारण बनीं। तुगलकों से पहले किसी भी मुस्लिम राजवंश ने भारत में इतने बड़े क्षेत्र पर शासन नहीं किया था। यह एक आश्चर्य की ही बात है कि तुगलक वंश के अनेक सुल्तानों में से केवल मुहम्मद बिन तुगलक ही शासन करने का वास्तविक […] - [तैमूर लंग ने भटनेर में दस हजार हिन्दुओं को मार डाला (147)](https://bharatkaitihas.com/timur-lung-killed-ten-thousand-hindus-in-the-fort-of-bhatner/): तैमूर लंग को ज्ञात था कि दिल्ली का तुगलक वंश अत्यन्त दुर्बल है जिसके कारण भारत में राजनीतिक अराजकता तथा भ्रष्टाचार का प्रकोप है। तैमूर लंग भारत की इस कमजोरी का लाभ उठाना चाहता था। साथ ही वह भारत की समृद्धि से भी अवगत था और भारत की अथाह सम्पदा को लूटकर अपनी राजधानी समरकंद […] - [मुसलमानों के प्रमुख त्यौहार](https://bharatkaitihas.com/middle-class-indian-society-social-institutions-and-customs-part-four/): मध्यकालीन भारत के मुस्लिम समाज में मुहर्रम, मीलाद उन-नबी, सबे-उल-फितर और ईद-उल-जुहा मुसलमानों के प्रमुख प्रमुख त्यौहार थे। मध्य-कालीन मुस्लिम समाज इन त्यौहारों को बड़ी श्रद्धा से मनाता था। मुहर्रम के पहले दस दिनों में शिया मुसलमान शोक मनाते थे। शिया अनुश्रुतियों के अनुसार हज़रत अली और उनके दो पुत्र-हसन और इमाम हुसैन, दीन की […] - [भारतीय कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): भारतीय कला चाहे वह शिल्पकला हो, मूर्तिकला हो, चित्रकला हो, संगीत कला हो या फिर और किसी भी प्रकार की कला हो, वह अपने माधुर्य, लावण्य एवं कला के चरमोत्कर्ष के लिए जानी जाती है। ई. बी. हावेल ने लिखा है- किसी भी राष्ट्रीय कला का वास्तविक मूल्यांकन करते समय हमें यह विचार नहीं करना […] - [भारतीय मूर्ति कला](https://bharatkaitihas.com/indian-sculpture/): ई. बी. हावेल ने भारतीय मूर्ति कला की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि सर्वोत्तम भारतीय मूर्ति सर्वोत्तम यूनानी मूर्ति की अपेक्षा अनुभूति के गहनतर स्वर और उत्कृष्ट मनोभावों को स्पर्श करती है।                      सिन्धु सभ्यता कालीन भारतीय मूर्ति कला सैन्धव सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता के काल से ही आग में पकी हुई मिट्टी की मूर्तियाँ, […] - [भारत के शैलचित्र](https://bharatkaitihas.com/rock-paintings-of-india/): भारत के शैलचित्र कम से कम बीस हजार साल पुराने हैं। ये भारत के लगभग समस्त प्रांतों में स्थित पहाड़ियों की गुफाओं में मिलते है। भारत के शैलचित्र इस बात की गवाही देते हैं कि भारत की सभ्यता कितनी पुरानी है। भारत के शैलचित्र के सबसे प्राचीन साक्ष्य आदिमकालीन गुफाओं से मिलते हैं। आदिम युगीन […] - [भारत की चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/painting-of-india-part-one/): भारत की चित्रकला अत्यंत प्राचीन है। भारत के धर्मशास्त्रों तक में चित्रकला का उल्लेख मिलता है। इन उल्लेखों से मानव समाज पर चित्रकला के प्रभाव की जानकारी मिलती है। कलाओं में चित्रकला सबसे ऊँची है जिसमें धर्म, अर्थ, काम एवम् मोक्ष की प्राप्ति होती है। अतः जिस घर में चित्रों की प्रतिष्ठा अधिक रहती है, […] - [मुस्लिम चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%be/): भारत की मुस्लिम चित्रकला को दो भागों में बांटा जा सकता है- दिल्ली सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला तथा मुगल सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला। निश्चित रूप से भारत की मुस्लिम चित्रकला पर हिन्दू शैलियों का भी प्रभाव है। दिल्ली-सल्तनत कालीन मुस्लिम चित्रकला मूर्ति-पूजा करना और मनुष्यों के चित्र एवं मूर्तियाँ बनाना इस्लाम में वर्जित है। क्योंकि […] - [राजपूत चित्रकला](https://bharatkaitihas.com/painting-of-india-part-two/): राजस्थान में मुगल शासकों के काल में विकसित हुई चित्रकला शैलियों को राजपूत चित्रकला के अंतर्गत रखा जाता है। राजपूत चित्रकला पर मुगल एवं ईरानी शैलियों का प्रभाव है। राजस्थान में अत्यंत प्राचीन काल से अब तक विकसित हुई चित्रकला की समृद्ध धारा के प्रवाह को देखा जा सकता है। कोटा जिले के आलणियां, दरा, […] - [मौर्य कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-one/): मौर्य कालीन स्थापत्य कला में स्तूपों का स्थान भी महत्वपूर्ण है। स्तूप ईंटों तथा पत्थरों के ऊँचे टीले तथा गुम्बदाकार स्मारक हैं। कुछ स्तूपों के चारों ओर पत्थर, ईंटें अथवा ईंटों की जालीदार बाड़ लगाई गई है। ‘वास्तु’ शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की ‘वस्’ धातु से हुई है जिसका अर्थ ‘बसना’ होता है। बसने […] - [हिन्दू स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-two/): हिन्दू स्थापत्य कला अत्यंत प्राचीन काल में विकसित हुई जिसमें देवालय, राजप्रासाद, दुर्ग, जलाशय, उद्यान आदि के भवन बनाए जाते थे। मौर्य काल के बाद हिन्दू स्थापत्य कला का तेजी से विकास हुआ। हिन्दू स्थापत्य कला दो रूपों में मिलती है- (1.) निजी उपयोग के भवन, (2.) सार्वजनिक उपयोग के भवन। निजी उपयोग के भवन […] - [राजपूत स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/indian-architecture-ancient-and-rajput-architecture-part-three/): राजपूत स्थापत्य कला हिन्दू स्थापत्य कला का ही प्रमुख अंग है। राजपूत राजाओं के काल में विकसित इस स्थपत्य कला पर मुगल कला का भी न्यूनाधिक प्रभाव है। उत्तर भारत में बने अनेक देवालय, राजप्रासाद, दुर्ग, जलाशय, उद्यान आदि राजपूत स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। भारत के इतिहास में 7वीं से 12वीं सदी तक […] - [खजुराहो मंदिर शैली](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80/): खजुराहो मंदिर शैली हिन्दू स्थापत्य कला का ही प्रमुख अंग है। इस शैली के मंदिर चंदेल राजपूत राजाओं के काल में खजुराहो में बनाए गए थे। इसलिए इसे खजुराहो मंदिर शैली कहा जाता है। इस शैली के मंदिर मुख्यतः दसवीं से बारहवीं शताब्दी ईस्वी के बीच बने थे। खजुराहो मंदिर शैली मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले […] - [कलिंग मंदिर शैली](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a5%80/): उड़ीसा का स्थापत्य प्राचीनकाल में विकसित कलिंग वास्तुकला शैली में निर्मित है। उड़ीसा के मंदिर कलिंग मंदिर शैली के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। कोणार्क का सूर्य मंदिर कोणार्क का सूर्य मंदिर 13वीं शताब्दी ईस्वी में गंगा राजवंश के राजा नरसिंघेव (प्रथम) ने बनवाया था। यह कलिंग शैली में बना है तथा भगवान बिरंचि-नारायण (सूर्य) को […] - [हिन्दू दुर्ग स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हिन्दू दुर्ग स्थापत्य अत्यंत प्राचीन काल से अस्तित्व में है। ऋग्वेद में इंद्र को पुरंदर कहा गया है जिसका अर्थ दुर्ग का राजा होता है। अर्थात् ऋग्वैदिक काल में भी भारतीयों को दुर्ग बनाने एवं उसमें रहने के महत्व का ज्ञान था। ‘दुः’ का तात्पर्य दुष्कर (कठिन) से है तथा ‘ग’ का तात्पर्य गमन करने […] - [हिन्दू जल स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हिन्दू जल स्थापत्य अथवा जल संग्रहण स्रोतों की स्थापत्य कला अत्यंत प्राचीन काल से ही उन्नत दशा में थी। भारत में जल को देवता के रूप में सम्मान दिया जाता था और जल की पूजा की जाती थी इसलिए जलाशयों को तीर्थ की तरह पवित्र बनाया जाता था। भारत में सार्वजनिक उपयोग हेतु कुओं, तालाबों, […] - [इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला](https://bharatkaitihas.com/indo-saracenic-architecture-and-architecture/): दिल्ली सल्तनत काल में मुस्लिम शासकों द्वारा भारत में बनाए गए भवनों की कला को मुस्लिम कला, तुर्क स्थापत्य कला एवं इण्डो-सारसैनिक वास्तुकला कहा जाता है। यह कला भारत में प्रचलित प्राचीन हिन्दू स्थापत्य एवं मध्यकालीन राजपूत स्थापत्य से तो अलग थी ही, तुर्कों के बाद स्थापित होने वाली मुगल स्थापत्य कला से भी अलग […] - [हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य में अंतर](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): मध्यकालीन हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य का अंतर बहुत स्पष्ट है। इस काल में हिन्दू स्थापत्य को बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त किया गया तथा हिन्दू भवनों को तोड़कर उसी सामग्री से मुस्लिम स्थापत्य का निर्माण किया गया। बारहवीं शताब्दी ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ ही भारत में मुस्लिम स्थापत्य कला का प्रवेश हुआ। दिल्ली सल्तनत […] - [मुगल स्थापत्य कला की विशेषताएँ](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-one/): मुगल स्थापत्य कला मुगलों के साथ भारत में नहीं आई थी। इसका विकास भारत में आने के बाद हिन्दू एवं फारसी शैलियों के मिश्रण से हुआ। ई.1526 में मंगोल-वंशी बाबर भारत में अपनी सत्ता स्थापित करने में सफल हो गया। भारत में बाबर तथा उसके वंशज ‘मुगलों’ के नाम से जाने गए। बाबर के वंशज […] - [बाबर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-two/): बाबर कालीन स्थापत्य मस्जिद एवं मकबरों के निर्माण तक सीमित था। बाबर एक क्रूर विध्वंसक था, इसलिए उसने भगवान श्रीराम का जन्मभूमि मंदिर तोड़कर वहाँ भी मस्जिद बनवाई। ई.1526 में बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को परास्त करके दिल्ली एवं आगरा पर अधिकार कर लिया। इसके बाद बाबर ने खानवा, चंदेरी […] - [हुमायूँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): हुमायूँ कालीन स्थापत्य कुछ मस्जिदों तक सीमित था। उसने दिल्ली के पुराने किले में निवास स्थापित करने के लिए उसका परकोटा मरम्मत करवाया तथा वहाँ एक पुस्तकालय भी बनवाया। बाबर के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ ने ई.1533 में दिल्ली में यमुना के किनारे दीनपनाह नामक नवीन नगर का निर्माण आरम्भ करवाया। यह नगर ठीक उसी […] - [अकबर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-three/): अकबर ने भारत में प्रचलित तत्कालीन स्थापत्य शैलियों की बारीकी को समझा और अपने शिल्पकारों को इमारतें बनाने के लिए नये विचार दिये। अकबर कालीन स्थापत्य कला वास्तव में हिन्दू-मुस्लिम शैलियों का समन्वय थी। अकबर कालीन स्थापत्य अकबर ने लगभग 50 वर्ष भारत पर शासन किया। इस अवधि में उसका राज्य काफी विस्तृत हो गया […] - [जहाँगीर कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-four/): जहाँगीर कालीन स्थापत्य का सबसे पहला उदाहरण आगरा से बाहर बना हुआ सिकन्दरा का मकबरा है जिसकी योजना स्वयं अकबर ने बनाई थी किंतु इसका निर्माण जहाँगीर ने अकबर की मृत्यु के बाद अपनी निगरानी में करवाया। यह मकबरा परम्परागत इस्लामी शैली का मकबरा नहीं है। जहाँगीर कालीन स्थापत्य जहाँगीर को भवन निर्माण में अकबर […] - [शाहजहाँ कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-five/): शाहजहाँ कालीन स्थापत्य मुगल शासन काल की स्थापत्य कला का स्वर्णयुग था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँच गई। कुछ इतिहासकारों ने शाहजहाँ को निर्माताओं का शहजादा कहा है। स्थापत्य कला का स्वर्णयुग इतिहासकारों की दृष्टि में शाहजहाँ का शासन-काल स्थापत्य कला का स्वर्णयुग था। इस काल में स्थापत्य कला अपने चरम […] - [ताजमहल का स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-six/): मुख्य भवन के बाहर बने इवान, ऊपरी हिस्से में बने गुम्बद तथा इसके चारों ओर बनी मीनारों के आधार पर ताजमहल का स्थापत्य निश्चित रूप से एक मुगल स्थापत्य होने की गवाही देता है किंतु इस भवन का भीतरी भाग हिन्दू स्थापत्य की विशेषताओं से युक्त है। आगरा का ताजमहल, शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई सर्वाधिक […] - [औरंगजेब कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/mughal-architecture-part-seven/): औरंगजेब कालीन स्थापत्य सर्वथा गौरवहीन है। इसका मुख्य कारण यह है कि वह कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसे यह पसंद नहीं था कि ऐसा कोई भवन बने जो इस्लाम की सादगी के सिद्धांत के विरुद्ध हो। औरंगजेब के पिता शाहजहाँ तथा औरंगजेब के तीनों भाई चित्रकला, संगीतकला तथा स्थापत्य में रुचि रखते थे। औरंगजेब की […] - [ब्रिटिश कालीन स्थापत्य](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): ब्रिटिश अधिकारियों ने भारत में अनेक विशाल भवन बनाए जिनमें भारतीय एवं मुस्लिम स्थापत्य शैलियों के साथ यूरोपीय स्थापत्य शैलियों का भी समावेश किया। इसे ब्रिटिश कालीन स्थापत्य कह सकते हैं। सत्रहवीं शताब्दी ईस्वी में अंग्रेज, पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी आदि यूरोपीय जातियों ने भारत में प्रवेश किया। उन्होंने यूरोपियन शैली के कुछ चर्च, फोर्ट एवं […] - [दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य एवं द्रविड़ शैली](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-one/): दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य से तात्पर्य दक्षिण भारत के मंदिर स्थापत्य एवं शैलियों से है जो प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल एवं आधुनिक काल में विकसित हुई हैं। दक्षिण का मन्दिर स्थापत्य अपने आप में कितना अद्भुत है, इसका अनुमान प्रो. हीरेन के इस कथन से हो जाता है कि महाबलिपुरम् के कोरोमण्डल तट पर […] - [पल्लव मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-two/): गुप्तकाल एवं उससे पूर्ववर्ती काल में तमिल क्षेत्र को द्रविड़ प्रदेश कहा जाता था। उस काल की मंदिर कला में काष्ठ एवं कंदराओं का अधिक प्रयोग होता था। इसलिए प्रारम्भिक पल्लव शिल्पकारों ने पल्लव मन्दिर स्थापत्य कला में उन्हीं प्रणालियों का उपयोग किया। गुप्तकाल के पराभव के बाद जब छठी शताब्दी ईस्वी में सिंहविष्णु ने […] - [राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4/): राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला दक्षिण भारत की प्रमुख मंदिर स्थापत्य शैलियों में से है। राष्ट्रकूट राजा उत्तर भारत में आने से पहले दक्षिण भारत में शासन करते थे। एलौरा का कैलाश नाथ मन्दिर राष्ट्रकूट मन्दिर स्थापत्य कला का सर्वाधिक प्रसिद्ध उदाहरण एलौरा का कैलाश नाथ मन्दिर है। यह स्थान आन्ध्रप्रदेश के औरंगाबाद नगर से 15 […] - [चोल मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): द्रविड़ मंदिर शैली का चरमात्कर्ष चोल मन्दिर स्थापत्य कला में हुआ। चोलों ने पल्लवों और पाण्ड्यों का स्थान लिया था। इसलिए चोलों ने पल्लवों और पाण्ड्यों की स्थापत्य कला को ही आगे बढ़ाया। चोल मन्दिर स्थापत्य कला का कालखण्ड चोल मन्दिरों का निर्माण ई.850 से 1200 तक निरन्तर होता रहा। इन्हें दो वर्गों में रखा […] - [चालुक्य मन्दिर स्थापत्य कला](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/): चालुक्य मन्दिर स्थापत्य कला के तीन प्रमुख केन्द्र थे- एहोल, वातापी (बादामी) और पट्टडकल। एहोल में लगभग 70 मन्दिर मिले हैं जिनके कारण इस नगर को ‘मन्दिरों का नगर’ कहते हैं। समस्त मन्दिर गर्भगृह और मण्डपों से युक्त हैं परन्तु छतों की बनावट अलग-अलग है। कुछ मन्दिरों की छतें चपटी हैं तो कुछ की ढलवां। […] - [दक्षिण भारत की मूर्तिकला](https://bharatkaitihas.com/temple-architecture-of-south-india-part-three/): दक्षिण भारत की मूर्तिकला न केवल दक्षिण के मंदिर स्थापत्य एवं वास्तु आदि का परिचय देती हैं अपितु विभिन्न कालों में दक्षिण भारत की संस्कृति में आ रहे परिवर्तनों की भी सूचना देती है। दक्षिण भारत के मन्दिरों में मन्दिर की बाहरी दीवारों पर इतनी अधिक मूर्तियाँ उत्कीर्ण की गई हैं कि मन्दिर की वास्तुगत […] - [कालीदास](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-kalidas/): वैदिक एवं उत्तरवैदिक धार्मिक ग्रंथों के बाद संस्कृत साहित्य में महाकवि कालीदास को जितनी सफलता मिली, उतनी अन्य किसी कवि को नहीं मिली।  काउण्ट ब्जोन्सर्टजेरेना ने लिखा है कि भारत का साहित्य हमें अतीत काल के महान राष्ट्र से परिचित कराता है जिसका ज्ञान की हर शाखा पर अधिकार था और जो सदा ही मानव […] - [संत तुलसीदास का साहित्य](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-tulsidas/): भारतीय इतिहास के मध्य-काल में तथा आर्य-संस्कृति के लिए सर्वाधिक कठिन समय में संत तुलसीदास आर्य-संस्कृति के प्रतिनिधि कवि हुए। वे हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध और सर्वाधिक प्रतिभाशाली कवि थे। संत तुलसीदास की जीवनी संत तुलसीदास के जीवन के बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं मिलती किन्तु उनके जीवन की बहुत सी घटनाओं से उनके […] - [मीराबाई](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-meerabai/): मध्यकालीन राजस्थान में सगुण-भक्ति-रस की धारा प्रवाहित करने वाले संत-कवियों में सन्त शिरोमणि मीराबाई का नाम सर्वोपरि है। मीराबाई के जन्मकाल की घटनाएं तो मिलती हैं किंतु जन्म-मृत्यु के सम्बन्ध में निश्चित तिथियाँ नहीं मिलती हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने मीरा का जन्म वि.सं. 1573 (ई.1516) में माना है जबकि गौरीशंकर हीराचंद ओझा, हरविलास शारदा […] - [रवीन्द्र नाथ टैगोर](https://bharatkaitihas.com/indian-literature-heritage-robindranath-tegore/): रवीन्द्र नाथ टैगोर का प्रारम्भिक जीवन रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता में हुआ। उनके पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने केशवचंद्र सेन से मतभेद हो जाने के कारण ब्रह्मसमाज से अलग होकर आदि-ब्रह्मसमाज की स्थापना की थी। रवीन्द्रनाथ की माता का नाम शारदा देवी था। रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता […] - [भारतीय पुनर्जागरण](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-one/): अपने आरम्भिक चरण में भारतीय पुनर्जागरण एक बौद्धिक आन्दोलन था जिसने पराधीन भारत के साहित्य, शिक्षा तथा चिंतनधारा को प्रभावित किया तथा जीवन के प्रत्येक अंग का परिष्कार किया। भारतीय सभ्यता, समाज एवं संस्कृति का विकास विश्व की अन्य संस्कृतियों से पूर्णतः पृथक एवं स्वतंत्र रूप से हुआ था। यह विश्व की प्राचीनतम संस्कृति थी […] - [राजा राममोहन राय और उनका ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-two/): राजा राममोहन राय ने शुद्ध एकेश्वरवाद के सिद्धांत पर आधारित ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ब्रह्मसमाज मूलतः भारतीय था और इसका आधार उपनिषदों का अद्वैतवाद था। भारत में धार्मिक और समाजिक आन्दोलनों के प्रवर्तक राजा राम मोहन राय का जन्म ई.1774 में बंगाल के राधानगर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। वे आरम्भ से ही […] - [युवा बंगाल आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/): हेनरी लुई विवियन देरीजियो युवा बंगाल आन्दोलन का जनक था। उसने कलकत्ता के विद्यार्थियों को इस संस्था से जोड़कर अंग्रेजी कुशासन के विरुद्ध आंदोलन चलाया। इस कारण अंग्रेज उससे नाराज हो गए।  जनवरी 1817 में कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना, भारत के धर्म और समाज सुधार आन्दोलन के इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटना थी। सार्वजनिक […] - [केशवचन्द्र सेन का भारतीय ब्रह्मसमाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%b5%e0%a4%9a%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8/): केशवचन्द्र सेन ने ई.1866 में भारतीय ब्रह्मसमाज की स्थापना की। ईसाई धर्म से प्रभावित होने के कारण भारतीय ब्रह्मसमाज ईसा मसीह को पूज्य मानने लगा। केशवचन्द्र सेन द्वारा संत सभा की स्थापना केशवचन्द्र सेन ई.1856 में ब्रह्मसमाज के सदस्य बने। उन्होंने अपने भाषणों तथा लेखों के माध्यम से नवयुवकों को ब्रह्मसमाज की ओर आकर्षित किया। […] - [आत्माराम पाण्डुरंग और प्रार्थना समाज](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97/): डॉ. आत्माराम पाण्डुरंग ने 31 मार्च 1867 को जस्टिस महादेव गोविन्द रानडे तथा इतिहासकार आर. जी. भंडारकर के साथ मिलकर बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की। प्रार्थना-समाज ब्रह्म-समाज से प्रेरित हिन्दूवादी आंदोलन था। यह प्राचीन वेदों पर आधारित था एवं पूर्णतः आस्तिक विचारधारा पर खड़ा था। आत्माराम पाण्डुरंग केशवचंद्र सेन से बहुत प्रभावित थे। […] - [स्वामी दयानन्द सरस्वती और आर्य समाज](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-three/): स्वामी दयानन्द सरस्वती स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म ई.1824 में गुजरात के टंकारा परगने के शिवपुर ग्राम में सम्पन्न एवं रूढ़िवादी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके बचपन का नाम मूलशंकर था। 14 वर्ष की आयु में उन्होंने एक चूहे को शिवलिंग पर चढ़कर प्रसाद खाते देखा तो उनका मूर्ति-पूजा से विश्वास उठ गया। जब वे […] - [स्वामी श्रद्धानंद का शुद्धि आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-four/): स्वामी श्रद्धानंद का वास्तविक नाम महात्मा मुन्शीराम था। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले स्वामी श्रद्धानन्द कांग्रेस के लिए कार्य करते थे तथा देश भर में आर्य समाज के सिद्धांतों का प्रचार करते हुए लोगों को वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते थे। ई.1901 में मुंशीराम विज ने वैदिक धर्म तथा भारतीयता […] - [रामकृष्ण परमहंस](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-five/): रामकृष्ण परमहंस का जन्म ई.1836 में बंगाल के हुगली जिले में निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ने भारतीयों के समक्ष धर्म के सच्चे स्वरूप को प्रदर्शित किया। रामकृष्ण के बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। उन उन्हें बचपन से ही शिक्षा के प्रति रुचि नहीं थी। वे हर समय धार्मिक चिंतन में मग्न रहते […] - [स्वामी विवेकानन्द](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6/): शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानन्द ने कहा- मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूँ जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं।            स्वामी विवेकानन्द ने हिन्दू-धर्म का प्रतिपादन ब्रह्मसमाज […] - [थियोसॉफिकल सोसायटी](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a5%89%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a5%80/): थियोसॉफिकल सोसायटी भारत का एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक आन्दोलन था जिसने देश के धार्मिक तथा सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। थियोसॉफी का अर्थ होता है- ‘ईश्वर का ज्ञान।’ संस्कृत में इसे ‘ब्रह्मविद्या’ कहते हैं। थियोसॉ फी  शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग तीसरी शताब्दी ईस्वी में एलेक्जेण्ड्रिया के ग्रीक विद्वान इम्बीकस ने किया था। आधुनिक काल में इस […] - [विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन](https://bharatkaitihas.com/social-reform-movements-of-nineteenth-and-twentieth-centuries-part-six/): उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी में हिन्दू समाज में सुधार आंदोलन चले तब वे केवल हिन्दुओं तक सीमित नहीं रहे। अपितु भारत के विभिन्न सम्प्रदायों में सुधार आंदोलन चले जिनसे उनमें भी नवीन ऊर्जा का आगमन हुआ। भारत में ऐसे कई धार्मिक-सामाजिक सुधार आन्दोलन हुए जिनके कार्य तथा उद्देश्य बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित थे। पारसियों […] - [मुस्लिम सुधार आन्दोलन](https://bharatkaitihas.com/muslim-reform-movement-in-nineteenth-and-twentieth-centuries/): 19वीं शताब्दी में भारत में मुस्लिम सुधार आन्दोलन आरम्भ हुए। मुस्लिम समाज दो प्रमुख वर्गों में विभाजित था- पहला, उच्च अभिजात्य वर्ग जिसमें बादशाह, अमीर तथा उनके परिवार के लोग थे और दूसरा, जन-साधारण जिसमें सैनिक, श्रमिक, सेवक तथा छोटे कार्य करने वाले मुसलमान थे। दूसरे वर्ग में वे मुसलमान भी थे जो मूलतः हिन्दू […] - [समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन](https://bharatkaitihas.com/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%82/): उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दी ईस्वी में चले समाजसुधार आंदोलनों का मूल्यांकन करते समय इस बात पर विचार अवश्य किया जाना चाहिए कि उस समय देश पराधीन था और सीमित साधनों के बीच जो भी व्यक्ति या संगठन जितना कुछ भी कर पाया, उसका मूल्य किसी भी तरह कम नहीं था। 19वीं शताब्दी के मध्य में […] - [बाल गंगाधर तिलक का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/bal-gangadhar-tilaks-contribution-to-national-movement/): भारत में उग्र राष्ट्रवाद के जनक बाल गंगाधर तिलक न केवल भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अप्रतिम सेनानी थे अपितु वे महान् विचारक और राजनीतिज्ञ भी थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई ई.1857 की सशस्त्र-क्रांति को माना जाता है जिसे अंग्रेज सैनिक-विद्रोह एवं बगावत कहते थे। इस संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि भारत से […] - [मोहनदास कर्मचंद गांधी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/gandhis-contribution-to-the-national-movement/): मोहनदास कर्मचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोबंदर में हुआ। उनके पिता कर्मचंद गांधी पोरबंदर, राजकोट और वंकानेर रियासतों के दीवान रहे। गांधीजी ने ई.1914 के बाद भारतीय राजनीति में प्रवेश किया और देश के स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कांग्रेस के माध्यम से राजनीतिक आंदोलनों की एक क्रमबद्ध शृंखला […] - [सुभाष चन्द्र बोस का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान](https://bharatkaitihas.com/netaji-subhash-chandra-boses-contribution-to-national-movement/): भारत की राजनीति में सुभाष चन्द्र बोस अकेले ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने राष्ट्रसेवा के लिए विभिन्न मोर्चों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने समय की कठिनतम आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की, एक कॉलेज के प्रिंसीपल रहे, एक विशाल सशस्त्र सेना की स्थापना की और उसके अध्यक्ष रहे, वे सैनिक के रूप में युद्ध […] - [आचार्य सुश्रुत](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-sushruta/): भारतीय चिकित्सा में शल्य चिकित्सा के पितामह और सुश्रुत संहिता के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म ई.पू. छठी शताब्दी में काशी में हुआ था। भारतीय संस्कृति को आधुनिक विज्ञान ने अत्यधिक प्रभावित किया है। वैज्ञानिक आविष्कारों ने एक ओर मानव जीवन को सुखी बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है तो दूसरी ओर विश्व के विनाश […] - [महर्षि चरक](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-maharishi-charak/): महर्षि चरक को प्राचीन भारत के आयुर्वेद के महान ज्ञाता के रूप में ख्याति प्राप्त है। कुछ विद्वानों का मत है कि चरक कनिष्क के राजवैद्य थे अर्थात् वे ईसा की प्रथम शताब्दी में हुए परन्तु कुछ लोग उन्हें बौद्ध-काल से भी पहले का मानते हैं अर्थात् वे ई.पू. 600 से भी पूर्व हुए। त्रिपिटक […] - [आर्यभट्ट](https://bharatkaitihas.com/chief-scientist-of-india-aryabhata/): आर्यभट्ट (ई.476-550) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभट्टीय नामक ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इस ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्म-स्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 लिखा है। आर्यभट्ट का जन्म-स्थल कुसुमपुर दक्षिण भारत में था। एक अन्य मान्यता के अनुसार उनका जन्म […] - [वराहमिहिर](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-varahamihira/): वराहमिहिर अथवा वरःमिहिर ईसा की पाँचवीं-छठी शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ थे। उन्होंने अपने ग्रंथ पंचसिद्धान्तिका में सबसे पहले बताया कि अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर है। कापित्थक (उज्जैन) में उनके द्वारा विकसित गणितीय विज्ञान का गुरुकुल सात सौ वर्षों तक अद्वितीय रहा। वे बचपन से मेधावी थे। अपने पिता आदित्य दास […] - [जगदीश चन्द्र बसु](https://bharatkaitihas.com/indias-leading-scientist-jagdish-chandra-basu/): डॉ. (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण खोजें कीं। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त […] - [चन्द्रशेखर वेंकटरमन (सी. वी. रमन)](https://bharatkaitihas.com/chief-scientist-of-india-chandrashekhar-venkataraman/): भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. चन्द्रशेखर वेंकटरमन विश्व भर के भौतिक-विज्ञानियों में विशेष स्थान रखते हैं। वे प्रथम भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्हें विश्व के सर्वोच्च ‘नोबल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। चन्द्रशेखर वेंकटरमन का जन्म 7 नवम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर के पास तिरूवालेक्कावाल गांव में में हुआ। उनके पिता चन्द्रशेखर अय्यर भौतिकी […] - [प्रस्तावना - हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया](https://bharatkaitihas.com/preface-of-hindutva-ki-chhaya-me-indinasia/): प्रस्तावना – हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया पृष्ठ पर पुस्तक की विषय वस्तु को स्पष्ट किया गया है। इस पुस्तक के लेखक डॉ. मोहनलाल गुप्ता हैं। अत्यंत प्राचीन काल से भारतीय ऋषि-मुनि मानव मात्र को सुखी बनाने के उद्देश्य से धरती के विभिन्न द्वीपों और दूरस्थ देशों की यात्रा करके अहिंसा, प्रेम, सद्भाव एवं शांति […] - [अनुक्रमणिका - हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया](https://bharatkaitihas.com/index-of-hindutva-ki-chhaya-me-indinasia/): अनुक्रमणिका – हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया पृष्ठ पर इस पुस्तक के अध्यायों का क्रम दिया गया है। इस पृष्ठ पर दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके अध्यायों तक सीधे ही पहुंचा जा सकता है। 1. प्रस्तावना 2. इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ 3. जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास 4. सुमात्रा में बौद्ध धर्मानुयायी श्री विजय राजवंश 5. […] - [इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ (1)](https://bharatkaitihas.com/mythological-references-to-indonesian-islands/): इण्डोनेशियाई द्वीपों के पौराणिक संदर्भ कई पुराणों में मिलते हैं जिनसे ज्ञात होता है कि इन समस्त द्वीपों पर भारतीय ऋषियों का आवागमन होता रहता था। इण्डोनेशिया गणराज्य, दीपान्तर अर्थात् पार-महा-द्वीपीय (ट्रांसकॉन्टीनेन्टल) देश है जो दक्षिण-पूर्व एशिया और ओशिनिया (उष्णकटिबन्धीय प्रशान्त महासागर के द्वीप) क्षेत्रों में स्थित है। भारतीय पुराणों में इसे ”द्वीपान्तर भारत” अर्थात् […] - [जावा द्वीप का इतिहास (2)](https://bharatkaitihas.com/early-history-of-java-island/): जावा द्वीप का प्रारम्भिक इतिहास यवद्वीप के नाम से मिलता है। भारतीय संस्कृत साहित्य में इस द्वीप का उल्लेख यवद्वीप के नाम से हुआ है जहाँ चावल एवं स्वर्ण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। चीनी संदर्भों में भी जावाद्वीप का इतिहास मिलता है। चीनी पुराणों के अनुसार जावा में लगभग 2 शताब्दी ईस्वी पूर्व में […] - [सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश (3)](https://bharatkaitihas.com/buddhist-dharmanuyayi-sri-vijay-dynasty-in-sumatra/): सुमात्रा का श्रीविजय राजवंश मूलतः हिन्दू राजवंश था किंतु बाद में इसने बौद्ध मत अंगीकार कर लिया था। इण्डोनेशिया के इतिहास में इस राजवंश का बड़ा महत्व है। प्राचीन भारतीय संस्कृत साहित्य में सुमात्रा द्वीप को स्वर्णदीप तथा स्वर्णभूमि कहा गया है क्योंकि इस द्वीप के ऊपरी क्षेत्रों में स्वर्ण धातु के विशाल भण्डार उपलब्ध […] - [इण्डोनेशिया के मुसलमान (4)](https://bharatkaitihas.com/culture-of-muslims-of-indonesian-islands/): इण्डोनेशिया के मुसलमान पूरी दुनिया के मुसलमानों से अलग हैं। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपनी पुरानी संस्कृति को नष्ट कर दिया है। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपने पुरखों द्वारा अर्जित ज्ञान को अपना शत्रु समझ लिया है। पूरी दुनिया में मुसलमानों ने अपने पुरखों के स्थापत्य एवं शिल्प तथा पुस्तकों को आग में […] - [मसाला द्वीपों के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्द्धा (5)](https://bharatkaitihas.com/competition-in-europe-for-trade-with-spice-islands/): पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी में इण्डोनेशियाई एवं भारतीय मसाला द्वीपों के लिए यूरोप में प्रतिस्पर्द्धा हुई जिसने कुछ ही वर्षों में खूनी जंग का रूप धारण कर लिया। यूरोप के बहुत से देश इन मसाला द्वीपों से व्यापार करने एवं इस व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए पूरी दुनिया में एक-दूसरे पर तोपों से गोले […] - [इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम (6)](https://bharatkaitihas.com/independence-struggle-of-indonesia/): इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम ई.1825 में आरम्भ हुआ जब इण्डोनेशिया की जनता ने डच शासन के विरुद्ध जबर्दस्त विद्रोह किया किंतु इस विद्रोह को कुचल दिया गया। डचों का दमन चक्र इतना क्रूर था कि लगभग 95 वर्ष तक इण्डोनेशिया की जनता शांत बनी रही। इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता संग्राम पुनः ई.1914 में आरम्भ हुआ जब […] - [बाली में हिन्दू सभ्यता (7)](https://bharatkaitihas.com/development-of-hindu-civilization-in-bali-island/): बाली में हिन्दू सभ्यता अनादि काल से अपनी जड़ें जमाए हुए है। वस्तुतः वैदिक काल से लेकर गुप्त काल तक इण्डोनेशिया को भारतीय उपमहाद्वीप का ही नहीं अपितु भारत का ही एक द्वीप-समूह समझा जाना चाहिए। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार भारत की मुख्य भूमि पर सैंकड़ों राजा एवं राजवंश शासन करते थे, उसी प्रकार […] - [वर्तमान समय में बाली (8)](https://bharatkaitihas.com/present-day-bali/): लगभग चार पांच फुट ऊंचे स्तम्भ पर एक छोटा आला होता है जिसे काला (स्तंभ पर स्थित लघु देवालय) कहते हैं। - [इण्डोनेशिया के मंदिर (9)](https://bharatkaitihas.com/major-hindu-and-buddhist-temples-of-indonesia/): इण्डोनेशिया के मंदिर आकार में विशाल हैं, विषय-वस्तु में विविधता लिए हुए हैं तथा हिन्दू पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं किंतु उनमें सजावट का अंश न के बराबर है। इण्डोनेशिया के मंदिर धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दो भागों में विभक्त किए जा सकते हैं। पहले भाग में वे हिन्दू मंदिर आते हैं जो बड़ी […] - [परमबनन शिव मंदिर समूह (10)](https://bharatkaitihas.com/parambanan-shiva-temple-group/): मध्य जावा में स्थित परमबनन शिव मंदिर समूह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा और विशाल हिंदू मंदिर समूह है। यह मंदिर समूह मुख्यतः भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित है। परमबनन मंदिर विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। परमबनन शिव […] - [प्लाओसान बौद्ध मंदिर (11)](https://bharatkaitihas.com/plosan-buddhist-temple/): प्लाओसान बौद्ध मंदिर भी एक मंदिर समूह है जिसमें मंदिरों के खण्डहर स्थित हैं। यह मंदिर परमबनन मंदिर के उत्तर-पश्चिम में केवल एक किलोमीटर की दूरी पर है। इस स्थान को बुगिसान गांव कहते हैं। यह सेंट्रल जावा के परमबनन जिले की क्लाटेन रीजेंसी का कस्बे जैसा गांव है जहाँ पक्की दुकानों की पंक्तियां बनी […] - [बोरोबुदुर बौद्ध चैत्य एवं विहार (12)](https://bharatkaitihas.com/borobudur-buddhist-chaitya-and-vihara/): बोरोबुदुर बौद्ध चैत्य एवं विहार महायान बौद्ध विहार है जो मध्य जावा प्रान्त के मगेलांग नगर में स्थित है। यह भी परमबनन शिव मंदिर तथा प्लाओसान बौद्ध विहार की भांति मूलतः 9वीं सदी ईस्वी में निर्मित है। जिस समय यह बना था उस समय यह संसार का सबसे बड़ा बौद्ध विहार था। इसका यह स्थान […] - [चण्डी बोरोबुदुर (13)](https://bharatkaitihas.com/chandi-borobudur/): इंडोनेशिया में प्राचीन मंदिरों को चण्डी कहा जाता है। इस कारण बोरोबुदुर बौद्ध स्मारक को ” चण्डी बोरोबुदुर ” भी कहा जाता है। जावा में चण्डी शब्द प्राचीन बनावट के द्वार और स्नान से सम्बन्धित रचनाओं के लिए प्रयुक्त होता है। बोरोबुदुर शब्द का अर्थ ज्ञात नहीं है। इस शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख अंग्रेज इतिहासकार […] - [जकार्ता के मंदिर (14)](https://bharatkaitihas.com/temples-of-jakarta/): जकार्ता शहर का वास्तविक नाम जयकार्ता है। यह पश्चिमी जावा में स्थित है तथा इंडोनेशिया की राजधानी है। - [बाली द्वीप के मंदिर (15)](https://bharatkaitihas.com/bali-island-temples/): बाली द्वीप के मंदिर हिन्दू देवी-देवताओं को समर्पित हैं। इनमें भगवान विष्णु, शिव, माता दुर्गा, सरस्वती तथा गणेश प्रमुख हैं। बाली में मंदिरों को पुरा कहा जाता है जो कि संस्कृत भाषा के ‘पुर’ शब्द से बना हुआ है जिसका आशय नगर एवं दुर्ग दोनों से लिया जाता है। बाली भाषा में ”पुरा” का अर्थ […] - [उबुद-वानर-वन के मंदिर एवं देव प्रतिमाएं (16)](https://bharatkaitihas.com/temples-and-gods-of-ubud-vanar-van/): एक स्तम्भ पर भरे हुए शरीर वाले योद्धा की मनुष्याकर प्रतिमा खड़ी है जिसने बाएं हाथ में ढाल एवं दायें हाथ में तलवार ले रखी है। इसकी आंखें लम्बी, मूछें बड़ी एवं भाव-भंगिमा कठोर है। - [बाली एवं जावा द्वीपों पर ग्यारह दिन (17)](https://bharatkaitihas.com/eleven-days-on-islands-of-bali-and-java/): बाली एवं जावा द्वीपों पर लेखक ने अपने परिवार के साथ ग्यारह दिन का प्रवास किया। इस प्रवास में लेखक को इन द्वीपों पर हिन्दू संस्कृति की छाप दिखाई दी। लेखक ने अपनी पुस्तक हिन्दुत्व की छाया में इण्डोनेशिया नाम पुस्तक में बाली एवं जावा द्वीपों पर वर्तमान समय में हिन्दू धर्म की स्थिति का […] - [बाली द्वीप पर पांच दिन (18)](https://bharatkaitihas.com/five-days-on-bali-island/): इण्डोनेशिया देश में हमारी ग्यारह दिनों की यात्रा में से बाली द्वीप पर पांच दिन निर्धारित थे। वस्तुतः भारत के लोगों के लिए इण्डोनेशिया में सबसे बड़ा आकर्षण बाली द्वीप ही है। पुतु से भ