काशी नामकरण का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

काशी (Kashi) को पुराणों] धर्मशास्त्रों, विविध हिन्दू ग्रंथों, इतिहास ग्रंथों  तथा लोकपरंपरा में अनेक नामों से पुकारा जाता है। इसके प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं—

  1. काशी (Kashi) – सबसे प्राचीन एवं आध्यात्मिक नाम, जिसका अर्थ “प्रकाश की नगरी” माना जाता है।
  2. वाराणसी (Varanasi) – वरुणा (Varuna) और असी (Assi) नदियों के मध्य स्थित होने के कारण।
  3. बनारस (Banaras/Benares) – वाराणसी का अपभ्रंश रूप, जो मध्यकाल एवं अंग्रेजी शासनकाल में अधिक प्रचलित हुआ।
  4. अविमुक्त क्षेत्र (Avimukta Kshetra) – ऐसा क्षेत्र जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते।
  5. आनन्दवन (Anandavan) – शिव का आनन्दमय वन या दिव्य निवास।
  6. महाश्मशान (Mahashmashan) – मोक्षदायिनी नगरी एवं अंतिम संस्कारों के महान केंद्र के रूप में।
  7. मोक्षदायिनी नगरी (City of Salvation) – जहाँ मृत्यु होने पर मोक्ष प्राप्ति की मान्यता है।
  8. शिवपुरी (Shivpuri) – भगवान शिव की नगरी।
  9. रुद्रावास (Rudravas) – रुद्र अर्थात शिव का निवास स्थान।
  10. सुरंधन / सुरपुरी (Surandhan / Surpuri) – देवताओं की नगरी के रूप में वर्णित।
  11. दीपों की नगरी (City of Light) – आध्यात्मिक ज्ञान एवं प्रकाश का प्रतीक।
  12. विश्वनाथ की नगरी (City of Vishwanath) – काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के कारण।
  13. मुक्तिक्षेत्र (Muktikshetra) – मुक्ति प्रदान करने वाला क्षेत्र।
  14. तपोभूमि (Tapobhoomi) – ऋषियों-मुनियों की साधना स्थली।
  15. धर्मनगरी (Religious Capital) – सनातन धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में।

स्कन्द पुराण (Skanda Purana) एवं काशी खंड (Kashi Khand) में काशी के अनेक अन्य विशेषणात्मक नाम भी मिलते हैं।

काशी नगर का ज्ञात इतिहास 1000 ई.पू. अर्थात लगभग तीन हजार वर्ष पुराना है। [1] स्कन्द पुराण (Skanda Purana) में इस नगर का प्रशस्ति में 15000 छंदों में गौरव गान किया गया है। काशी पावन गंगा नदी (Ganga River) के तट पर बसा हुआ है जिसे भगवान विश्वनाथ (Vishwanath/Shiva) का निवास स्थान माना जाता है। विश्वनाथ (विश्वेश्वर) बारह ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlinga) में से एक माने जाते हैं।

अनेक हिन्दू प्राचीन धर्म ग्रंथों (Ancient Hindu Scriptures) में काशी और विश्वनाथ का उल्लेख पाया जाता है। काशी नगर के अन्य अनेक नामों में से एक वाराणसी (Varanasi/Banaras) नाम समान रूप से लोकप्रिय है। वरुणा (Varuna River) और असी (Assi River) नामक नदियों के मिलन स्थल (संगम स्थल) पर बसा हुआ होने के कारण वाराणसी नाम प्रचलन में आया माना जाता है। [2]

यहाँ यह सहज शंका उठती है कि जब गंगा जैसी परम पावन विश्वविख्यात नदी के तट पर काशी बसी है तो उसका नामकरण गंगा नदी की अपेक्षा वरुणा और असी नामक धाराओं को सार्थक करने वाला चयनित क्यों हुआ?

काशी शब्द की उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ (Origin and Spiritual Meaning of Kashi)

प्रसंगवश काशी शब्द के मूल में संस्कृत (Sanskrit) शब्द काश जुड़ा है। प्राचीनकाल में इस नगर का नाम काशी क्यों रखा गया था? यह ऐतिहासिक दृष्टि से उतना ही सहज है जितना कि भारत का नाम है। भारत अर्थात भा (प्रकाश) + रत। यहाँ दोनों नामों में निहितार्थ प्रकाश अर्थात आध्यात्मिक प्रकाश (Spiritual Light) से है जिसकी वैदिक प्रेरणा (Vedic Inspiration) तमसो मा ज्योतिर्गमय के अनुरूप होना प्रतीत होती है।

भारत का नामकरण चक्रवर्ती सम्राट भरत (Emperor Bharat) (ऋषि विश्वामित्र (Rishi Vishwamitra) का नाती और शकुन्तला-दुष्यन्त (Shakuntala-Dushyant) का पुत्र) के द्वारा मान्य किया जाता है। उसी प्रकार क्या काशी नामकरण भी किसी चक्रवर्ती सम्राट अथवा चक्रवर्ती विजेता के द्वारा प्रचलन में आया था? यह ज्ञात नहीं है।

आर्य विजय अभियान एवं काशी (Aryan Campaign and Kashi)

इतिहासकारों (Historians) ने पुरा प्रमाणों के आधार पर व्यक्त किया है कि ई.पू. 1600 से ई.पू. 1100 तक सम्पूर्ण एशिया (Asia) में आर्यों (Aryans) की तीन प्रमुख शाखाओं — कुषाई (Kushai/Kassite), मितन्नी (Mitanni) और हित्ती (Hittite) — का साम्राज्य छा गया था जिनमें कुषाई सर्वाधिक बलशाली थे और उनका सम्पूर्ण ईराक (Iraq) पर साम्राज्य था। [3]

यह विजय आर्यों के चक्रवर्ती अभियान की सफलता के फलस्वरूप हुई थी किन्तु यह ज्ञात नहीं है कि इस विजय अभियान का उद्गम अथवा विधिवत आरम्भ किस स्थान से हुआ था। [4]

पाश्चात्य इतिहासकारों (Western Historians) ने इन पाँच शताब्दियों के, ईराक पर आर्य-शासन को ‘अंधकार युग’ (Dark Age) की संज्ञा दी है किन्तु साथ ही यह भी स्वीकार किया है कि इन विजेताओं का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया था।  [5]

ये आर्य विजेता संख्या में कम होने के उपरान्त भी स्थानीय लोगों से घुलमिल गए थे। इन आर्यों ने नगरीय व्यवस्था के स्थान पर ग्रामीण व्यवस्था को अपनाया। एनसाइक्लोपीडिया ऑफ मॉडर्न ईराक (Encyclopedia of Modern Iraq) में उल्लेख मिलता है कि इन विजेता आर्यों के देवताओं के नाम सूर्य (Surya/Soryas) और वरुण (Varuna/Boryas) इत्यादि थे। इन विजेताओं का सम्बोधन न केवल कस्साइट (Kassite) था अपितु कोशाई (Koshai/Kushai) भी उल्लिखित है।

काशी एवं वाराणसी नाम की ऐतिहासिक सम्भावनाएँ (Historical Possibilities of Kashi and Varanasi)

कोशाई अथवा कुशाई शब्द का मूल कहीं काश अथवा काशी तो नहीं? इस विजय अभियान के प्रथम राजा का नाम एकओम (Ekoam) (एम ओम, ई.पू. 1574–1565) प्रथम था और इनके देवता वैदिक देवता (Vedic Deities) थे।

इन आर्य विजेताओं ने 1565 ई.पू. में राजा एकओम द्वितीय के नेतृत्व में शक्तिशाली बेबीलोन (Babylon) नगर पर भी ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी। बेबीलोन नगर फरात (यूफ्रेटीस/Euphrates) नदी के तट पर बसा हुआ नगर था। एक भारतीय इतिहासकार के अनुसार फरात नामकरण भारत शब्द का अपभ्रंश है। [6]

इससे संकेत मिलता है कि प्रकाश (काश अथवा काशी) शब्द की आध्यात्मिक मौलिकता इस अभियान से जुड़ी रही होगी। इसी कुषाई वंश (Kushai Dynasty) के एक शासक का नाम बोरना बोरयस द्वितीय (Borna Boryas II) (ई.पू. 1404–1378) था जिसका संभावित अपभ्रंश मूल नाम वरण+वीर+यश अथवा वरण+पुर+अस (असि) प्रतीत होता है।

ज्ञातव्य है कि पाश्चात्य इतिहासकारों ने कुषाई साम्राज्य के अनेक मूल शब्दों (संस्कृत मूल) को कीलाक्षर लिपियुक्त बेबीलोन की भाषा में अनुवाद करके उनका पुनः सुमेरी भाषा (Sumerian Language) में अनुवाद और आगे यूनानी भाषा (Greek Language) से अंग्रेजी भाषा (English Language) में अनुवाद किया है। अतः मूल संस्कृत शब्दों में कितना परिवर्तन होकर कुषाई-कस्साइट तथा वरण+पुर+असि (बोरना बोरयस) हो सकता है, यह अनुमानित किया जा सकता है।[7]

वरुण+असि+पुर का निवासी अर्थात वाराणसी पुर (नगर) का मूल निवासी यदि यही वीर राजा बोरना बोरेयस द्वितीय (प्रथम तो इससे पहले हुआ होगा जिसकी सही तिथि अभी तक नहीं ढूँढ़ी जा सकी है) था तो सहज है कि काशी को विश्व विजय का श्रेय दिलाने वाली यह घटना विश्वनाथ नाम को सार्थक करने वाली है तथा वाराणसी नाम भी ऐतिहासिक है और ई.पू. 1000 से पहले की घटनाओं का काशी के मान्यता प्राप्त इतिहास में अभी तक समावेश न होने के कारण कोई आश्चर्य नहीं कि यह भारतीय तथ्य उजागर नहीं हो पाया है।

निष्कर्ष

यही कहा जा सकता है कि प्राचीन ईराक (Ancient Iraq) के कुषाई विजय अभियान और लगभग ढाई हजार वर्ष पहले हुए महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha) की जातक कथाओं (Jataka Tales) (बुद्ध के पूर्व जन्म की गाथाओं) [8] में पाये जाने वाले काशी के अनेक बृहद नाम वाले राजाओं की ऐतिहासिकता पर विधिवत शोध (Historical Research) किया जाना चाहिए। इससे न केवल काशी का वाराणसी नामकरण अपितु अन्य अनेक भारतीय नगरों और राजाओं के विलुप्त गौरवशाली संभावित सत्यों-तथ्यों को उजागर करने में सहायता मिल सकेगी। ऐसा शोध कार्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाना अपेक्षित है।

संदर्भ (References)


[1] Varanasi 2000; Department of Tourism, Govt. of India, New Delhi.

[2] Guide and Map Varanasi 1996; Department of Tourism, Govt. of India, New Delhi.

[3] Iraq Museum 1976; Min. of Information, Director General of Antiquities, Baghdad P. 25 to 32.

[4] आर्यों की इस दिग्विजय का विस्तृत विवरण मैंने अपने उपन्यास मोहनजोदरो की नृत्यांगना की भूमिका में दिया है।

[5] Encyclopedia of Modern Iraq (1976) Part-I, Khaled-Al-ANI, Arab Encyclopedia House.
Baghdad P. 50 to 61.

[6] The Fountain Head of Religion 1909 by Ganga Prasad, Arya Pratinidhi Sabha (U.P.), P. 154.

[7] काशी-वाराणसी: नामकरण, वीरेन्द्रनाथ भार्गव, वैचारिकी, जनवरी-मार्च 2008, पृ. 48-50.

[8] जातकमाला 1994, डॉ. सूर्यकान्त व्यास, चौखम्बा संस्कृत संस्थान, पो. बॉक्स 1160, वाराणसी.

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