मोहन भागवत के नाम खुला पत्र
मोहन भागवत के नाम खुला पत्र राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित भाव से लिखा गया है। आज जब हिन्दू अपनी राष्ट्रीय चेतना की राह में तेजी से अग्रसर है, मोहन भागवत समय-समय पर ऐसे वक्तव्य क्यों देते हैं जिनसे हिन्दुओं में उनके प्रति निराशा का भाव जन्म लेता है!
इसमें कोई संदेह नहीं कि डॉक्टर मोहन भागवत संसार के सबसे बड़े सामाजिक सांस्कृति संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर्वप्रमुख कर्ता धर्ता हैं। उन्होंने आरएसएस बनाया नहीं है, उन्हें कुछ दिनों के लिए नेतृत्व करने के लिए मिला है।
आरएसएस को बनाने में लाखों करोड़ों हिन्दुओं ने अपनी ऊर्जा लगाई है। डॉक्टर मोहन भागवत आरएसएस के मालिक नहीं हैं, हो भी नहीं सकते किंतु वे व्यवहार ऐसा करते हैं जैसे आरएसएस ही नहीं वे सम्पूर्ण हिन्दू जाति के, सम्पूर्ण हिन्दू मेधा और चेतना के और भारत राष्ट्र के मालिक हैं।
इसी लिए तो वे जब भी बोलते हैं मालिक की भाषा बोलते हैं, मालिक भी ऐसा जो अपने पथ से भटका हुआ है, स्वयं अपने आप में कन्फ्यूज्ड है। संत कबीर ने ऐसे ही गुरु के लिए कहा था कि अंधा गुरु अंधे चेले को लेकर कुंए में गिर जाता है।
सौभाग्य से हिन्दू जाति, हिन्दू मेधा और हिन्दू चेतना अंधी नहीं है। वह सदियों से जाग्रत थी, है और रहेगी। हिन्दू जाति के इतिहास में मोहन भागवत जैसे कई आए और काल के गाल में समा गए किंतु हिन्दू जाति की आत्मा अखण्ड ज्योति की तरह जगमगाती है।
डॉ. मोहन भागवत को पहले डीएनए का बुखार चढ़ा था कि भारतीयों का डीनए एक है और अब पाकिस्तान के साथ संवाद की खिड़की का बुखार चढ़ा है। हाल ही में मोहन भागवत ने बयान दिया कि हम हिटलर नहीं हैं, भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद की खिड़की खुली रखनी चाहिए।
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किस तरह के संवाद की खिड़की खोलना चाहते हैं मोहन भागवत? पुराना इतिहास छोड़ देते हैं, अटल बिहारी वाजपेयी के समय से लेकर आज तक की घटनाओं को देखते हैं।
क्या मोहन भागवत वह खिड़की फिर से खोलना चाहते हैं जो अटल बिहारी वाजपेयी ने खोली थी, या फिर उस तरह की जो डॉक्टर मनमोहन सिंह ने खोल रखी थी?
अटल बिहारी वाजपेयी इस खिड़की को खोलने के लिए बस में बैठकर लाहौर गए थे और उसके बाद भारत आए पाकिस्तानी दल ने आगरा के होटल में भारतीय हिन्दू राजनयिक महिला की साड़ी खींची थी और भारत को कारगिल धोखे की सौगात दी थी।
क्या मोहन भागवत उस खिड़की को खुला रखना चाहते हैं जिस खिड़की को खुला रखने के लालच में अटल बिहारी वाजपेयी ने विदेशों में जाकर भारत की जनता से पूछा था कि आपके यहाँ सबसे ज्यादा मुसलमान रहते हैं किंतु आप उन्हें रखते कैसे हैं?
जब गुजरात में दंगे हुए तो अटलजी को लगा कि कहीं यह खिड़की बंद न हो जाए, इसलिए उन्होंने तब के मुख्यमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी से कहा था कि राजधर्म का पालन करो और मुख्यमंत्री ने विनम्रता से उत्तर दिया था, वही तो कर रहा हूँ। अटल बिहारी वाजपेयी के आठ साल के कार्यकाल में वह खिड़की पूरी तरह खुली रही किंतु भारत माता का क्या हित किया उस खिड़की ने?
डॉक्टर मनमोहनसिंह ने पाकिस्तान की तरफ संवाद की खिड़की ही खुली नहीं रखी, कई तरह के और भी दरवाजे खोल दिए थे। इन दरवाजों में से होकर थार एक्सप्रेस आरपार जाती थी और वहाँ से पोलियो का वायरस से लेकर अवैध घुसपैठियों, नशीले पदार्थों, आतंकवादियों और फेक करंसी के बण्डल भारत लेकर आती थी। इसी खिड़की में से कसाब जैसे आतंकवादी घुस आते थे और निर्दोष भारतीयों को मार डालते थे।
जब नरेंद्र भाई मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने भी इस खिड़की को खुले रखने का भरसक प्रयास किया किंतु परिणाम क्या हुआ?
27 जुलाई 2015 को पाकिस्तानी सेना की वर्दी में आए और भारी हथियारों से लैस तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पंजाब के गुरदासपुर जिले के दीनानगर पुलिस स्टेशन पर हमला करके पंजाब पुलिस के एक सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, 4 पुलिसकर्मी और 3 नागरिक मार डाले।
इस घटना के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी 25 दिसम्बर 2015 को अचानक लाहौर पहुंचे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की माताजी के पैर छूकर आशीर्वाद मांगा। हालांकि पाकिस्तान के लोग तो खुद अपनी माताजी के पैर नहीं छूते। क्या नरेन्द्र मोदी का यह प्रयास भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह की खिड़की को खुली रखने में सहायक हो सका?
नरेन्द्र मोदी की लाहौर यात्रा के केवल 7 दिन बाद 2 जनवरी 2016 को पाकिस्तान से आए जैश ए मोहम्मद के आतंकवादियों ने पठानकोट में भारतीय वायुसेना के बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन पर आत्मघाती हमला किया। आतंकवादियों के साथ यह लड़ाई कई दिनों तक चली, जिसमें भारतीय एजेंसी एनएसजी के लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार सहित 7 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।
18 सितंबर 2016 को जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास प्रशासनिक सेना मुख्यालय पर जैश ए मोहम्मद के 4 आत्मघाती आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला किया। इस आतंकी हमले में भारतीय सेना के 19 जवान शहीद हुए।
29 नवंबर 2016 को पुलिस की वर्दी में आए आतंकवादियों ने जम्मू के पास नगरोटा में सेना की एक रेजीमेंट के शिविर पर हमला करके हमारे सैनिकों को बंधक बनाने की कोशिश की। इस आतंकी हमले में दो सैनिक अधिकारियों सहित सेना के 7 जवान शहीद हुए।
10 जुलाई 2017 को लश्कर ए तैयबा के आतंकवादियों ने अनंतनाग जिले में अमरनाथ तीर्थयात्रियों से भरी एक नागरिक बस पर घात लगाकर गोलीबारी की। इस हमले में 7 हिन्दुओं की मौत हो गई और 19 अन्य घायल हुए।
14 फरवरी 2019 को मोदी सरकार के कार्यकाल का और जम्मू कश्मीर के इतिहास का सबसे भयानक और घातक आतंकी हमला हुआ। जैश ए मोहम्मद के एक स्थानीय आत्मघाती हमलावर ने राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर सीआरपीएफ के जवानों को ले जा रहे वाहनों के काफिले को निशाना बनाकर विस्फोटक से लदी कार सेना की बस से टकरा दी। इस भीषण आत्मघाती विस्फोट में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए।
मई 2024 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने कश्मीर के पहलगाम और गगनगीर (सोनमर्ग गांदरबल) इलाके में पर्यटकों एवं टनल निर्माण में लगे श्रमिकों को धर्म पूछकर गोली मारी। इसमें कई निर्दोष हिन्दुओं की जान गई।
इन सब घटनाओं के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान से व्यापार बंद किया, रेल, बस हवाई जहाज बंद किए, सर्जीकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर किया, वैदिक नदियों का जल भारत में ही रोका तो क्या इससे भारत माता का कोई अहित हुआ? क्या हिन्दू जाति का कोई अहित हुआ? क्या प्राकृतिक न्याय के किसी नियम का उल्लंघन हुआ?
मोहन भागवत जो खिड़की खोलना चाहते हैं, उसमें से क्या क्या निकलेगा? क्या 15 लाख टन गेहूं निकलेंगे जिन्हें पाकिस्तान भेजने की वकालात आरएसएस आज से कई साल पहले कर चुकी है? क्या भारत की सतलुज नदी से लेकर व्यास, रावी, चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों का जल निकलेगा जिसे पाकिस्तान भेजना चाहते हैं? या फिर इस खिड़की में से पाकिस्तानी माल के भारत में आने और भारतीय माल के पाकिस्तान में जाने की सड़क बनाना चाहते हैं। या फिर आतंकवादियों के लिए फिर से एक नई जन्नत का निर्माण करना चाहते हैं? आखिर क्या चाहते हैं?
क्या नित्य ही चलने वाली आतंकवादी घटनाओं के कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान की तरफ खुलने वाली सभी खिड़कियां बंद करके स्वयं को हिटलर घोषित किया है? यदि नहीं तो मोहन भागवत जी आप हिटलर किसे कहते हैं?
मोहन भागवतजी भारत की जनता सरल और सीधी है, भोली भाली है, क्षमाशील है किंतु आप हिन्दुओं के इन गुणों के कारण सम्पूर्ण हिन्दू चेतना एवं हिन्दू मेधा को बेवकूफ समझते हैं। इशारों ही इशारों में आप करोड़ों हिन्दुओं द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री को तरह तरह से अपमानित कर चुके हैं। इस बार आपने उन्हें हिटलर कहा है।
यदि मेरी बात आपकी समझ में आए तो समझ लेना कि यदि भारतीय हितों के लिए हमें हिटलर तो क्या मुसोलिनी से लेकर ट्रॉटस्की तक कुछ भी बनना पड़ा तो हम बनेंगे।
क्या आपको ज्ञात है कि वर्ष 2014 के बाद से लेकर आज तक आपने जितने भी हिन्दू विरोधी और पाकिस्तान परस्त वक्तव्य दिये हैं, उनसे मेरे जैसे करोड़ों हिन्दुओं में आरएसएस के प्रति निराशा का भाव उत्पन्न होता है।
डॉक्टर केशवराम बलिराम हेडगवार ने आरएसएस की स्थापना हिन्दू जाति को जागृत एवं संगठित करके हिन्दू शक्ति को राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगाने के उद्देश्य से की थी। गुरु गोलवलकर ने भी डॉक्टर हेडगवार के इसी संकल्प को सुदृढ़ बनाया था।
आप कौनसी आरएसएस चला रहे हैं? इसे किस दिशा में ले जा रहे हैं? आपके इस कार्य से हिन्दू जाति का और भारत माता का नित्य अहित हो रहा है। क्या आप इतनी सी बात समझने में असमर्थ हैं?
यदि जनता आपसे यह कहे कि आप जनता के बाप बनने का प्रयास मत करो, जनता की सेवा करनी हो तो करो, नहीं तो आराम से घर में बैठकर हिन्दू धर्मशास्त्रों का अध्ययन करके अपना इहलोक और परलोक सुधारो, तो क्या आपको अच्छा लगेगा? मेरी बात कड़वी तो लगेगी किंतु आपके लिए कल्याणकारी सिद्ध होगी। हिन्दू किसी का बुरा नहीं चाहता, मैं भी आपका बुरा नहीं चाहता? आप भी हमारा बुरा मत सोचिए।
डॉ. मोहन भागवत के नाम खुला पत्र किसी बुरे उद्देश्य से नहीं लिखा गया है। इसका आशय समझा जाए और इसमें उठाए गए प्रश्नों का उत्तर दिया जाए तो हिन्दू समाज में डॉ. मोहन भागवत के प्रति समझ में वृद्धि होगी।
डॉ. मोहनलाल गुप्ता
डॉ. मोहनलाल गुप्ता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष रहे हैं।



