मुगल बेगमों की दर्दभरी दास्तान नामक यूट्यूब धारवाहिक में भारत में शासन करने वाले मुगल बेगमों का वास्तविक इतिहास बताया गया है। इतिहास की पुस्तकों में मुगल बेगमों का उल्लेख तो होता है किंतु उनके बारे में महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी नहीं दी जाती। इसलिए तत्कालीन मुगल स्रोतों के आधार पर इस धारवाहिक में मुगल बेगमों की दर्दभरी दास्तानें लिखी गई हैं।
मुगल बेगमों की जिंदगियां मुगलिया महलों की दीवारों के पीछे छिपी एक बेहद दर्दभरी और घुटन भरी दास्तानें थीं। मुगलिया हरम की चारदीवारी और बलपूर्वक हिंजड़े बनाए गए मर्दों की सख्त पहरेदारी में कैद मुगल बेगमों को अपनी इच्छाओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं बलिदान देना पड़ता था।
भले ही इस दौर में मुगल बेगमें सत्ता के केंद्र में थीं किंतु वे न केवल मुगलिया राजनीतिक चौसर की मोहरें मात्र थीं, अपितु बादशाहों की सनकों और युद्धों विभीषिकाओं की सबसे ज्यादा शिकार भी थीं।
बाबर और हुमायूँ के समय में मुगल बेगमों और शहजादियों की जिंदगी अलग प्रकार की थीं किंतु अकबर के एक निर्णय ने मुगल शहजादियों की जिंदगियां खराब कर दीं। उसने मुगल शहजादियों के विवाह पर रोक लगा दी और उन्हें बड़ी सख्ती से हरम में बंद कर दिया। इस कारण वे दुनिया की नजर से ओझल हो गईं। बादशाह की अनुमति के बिना उन्हें अपने महलों से बाहर जाने या किसी से मिलने की आजादी नहीं थी।
जब औरंगजेब बादशाह हुआ और उसने मुगल शहजादियों के जीवन में छिपी त्रासदियों को समझा तो उसने मुगल बेगमों के विवाह पर लगी रोक हटा दी। इसके बाद मुगल शहजादियों और बेगमों को अक्सर राजनीतिक समझौते के तहत दुश्मनों से विवाह करने के लिए मजबूर किया जाता था। मोहम्मद शाह की बेटी हजरत बेगम को मात्र 16 साल की उम्र में जबरन 60 साल के अहमद शाह अब्दाली से शादी करनी पड़ी और अपना वतन छोड़ना पड़ा।
युद्धों के दौरान, मुगल बेगमों को अक्सर दुश्मनों के हाथों में पड़ने का डर रहता था। चौसा के युद्ध के बाद हुमायूँ की बहनों और लाल किले के पतन के समय, बहुत सी मुगल शहजादियों और बेगमों को अपमान और असुरक्षा का सामना करना पड़ा।
कई मुगल बेगमों को बादशाह की नर्तकियों, हिंजड़ों और सौतेली बेगमों के अत्याचारों के कारण उपेक्षा और अपमान से भरे खून के आंसू रोने पड़ते थे।
बादशाह की मृत्यु के बाद, बेगमों को अक्सर सादा और एकाकी जीवन बिताना पड़ता था, जिसमें वे अपने पति की याद में शोक मनाती थीं, जैसा कि बहू बेगम के मामले में देखा गया।
बाबर की पुत्री गुलबदन बेगम ने अपने भाइयों के बीच के संघर्षों में मुगल शहजादियों और बेगमों की पीड़ा और अनिश्चितता का वर्णन किया है, जब उन्हें बेघर होना पड़ा था।
हुमायूँ का बेटा कामरान अपनी सौतेली बहिन को जबर्दस्ती घसीटकर हिन्दुस्तान से काबुल ले गया।
हजरत बेगम को अपनी खूबसूरती के कारण जबरन अहमद शाह अब्दाली को सौंप दिया गया, जो उसके लिए एक दर्दनाक और अपमानजनक अंत था। अहमदशाह अब्दाली ने मुगल बेगमों और शहजादियों को नंगी करके उन्हें लाल किले के भीतर दौड़ाया था।
संक्षेप में, मुगल सत्ता की चकाचौंध के पीछे इन बेगमों का जीवन केवल विलासिता का नहीं, अपितु मानसिक पीड़ाओं, बलात्कारों और अत्याचारों का एक लंबा सिलसिला था।
मुगल बेगमों की दर्द भरी दास्तान में हम बाबर के जीवन काल से लेकर लाल किले के पतन के समय तक की मुगल बेगमों का इतिहास बताएंगे। आशा है कि मुगल बेगमों की दर्दभरी दास्तान नामक यह धारवाहिक, अब तक दर्शकों की आंखों से ओझल रहे मुगल बेगमों के वास्तविक इतिहास को दर्शकों के समक्ष लाने में सफल होगा। आप नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करके यूट्यूब चैनल ग्लिम्प्स ऑफ इण्डियन हिस्ट्री पर देख सकते हैं।
एपीसोड – 1 : मुगलिया वैभव के बीच खून के आंसू रोती थीं मुगल बेगमें !
एपीसोड – 2 : बाबर की गुप्त शक्ति थी ऐसान दौलत बेगम!
एपीसोड – 3 : ऐसान दौलत बेगम ने ख्वाजा कलां की हत्या कर दी!
एपीसोड – 4 : ऐसान दौलत बेगम के कहने से बाबर समरंकद पर चढ़ बैठा!
एपीसोड – 5 : बाबर को एक पल के लिए अकेला नहीं छोड़ती थी कुतलुग निगार खानम बेगम!
एपीसोड – 6 : बाबर की ताकत का चौथा स्तम्भ थी फख्र-उन-निशा बेगम!
एपीसोड – 7: बाबर ने खानजादः बेगम उज्बेकों को सौंपकर अपनी जान बचाई!
एपीसोड – 8: कामरान मिर्जा ने खानजादः बेगम को बंदी बना लिया!
एपीसोड – 9: अचानक मर गई खानजादः बेगम!
एपीसोड – 10: बाबर की तीन बहिनों को उज्बेकों ने पकड़ लिया!
एपीसोड – 11: 97 मुगल बेगमें काबुल से भारत आ गईं!
एपीसोड – 12: मुगल बेगमों की वैशाखियों पर खड़ा था बाबर का जीवन!
एपीसोड – 13: शाही दरबार में बाबर के साथ बैठती थी माहम बेगम!
एपीसोड – 14: मौसियों ने रक्षा की किंतु चाचियों ने बाबर का जीना हराम कर दिया!
एपीसोड – 15: गुलरुख बेगम के बेटों ने हुमायूँ को बर्बाद कर दिया!
एपीसोड – 16: युद्ध शिविरों में बचपन बीता था गुलरुख बेगम का!
एपीसोड – 17: गुलचहर बेगम का दूसरा पति निकाह होते ही भाग खड़ा हुआ!
एपीसोड – 18: प्रत्येक सुंदर लड़की हुमायूँ की सेवा में लाई गई!
एपीसोड – 19: हुमायूँ ने बेगा बेगम से कहा मैं अफीमची हूँ, मुझे माफ कर दो!
एपीसोड – 20: हुमायूँ की बेगमों को शेरशाह सूरी ने पकड़ लिया!
एपीसोड – 21: अफगानिस्तान के पहाड़ों में विलीन हो गईं मुगल बेगमें!
एपीसोड – 22: घोड़े पर बैठकर सिंध से ईरान पहुंच गई हमीदा बेगम!
एपीसोड – 22: चूचक बेगम ने ताकतवर मुगल सेनापति को लूट लिया!
एपीसोड – 23: चूचक बेगम ने ताकतवर मुगल सेनापति को लूट लिया!
एपीसोड – 24: चूचक बेगम को उसके दामाद ने मार डाला!
एपीसोड – 25: उपेक्षित शहजादी गुलबर्ग बेगम की दर्दभरी दास्तान!
एपीसोड – 26: इतिहास के पन्नों में गुम हो गईं हुुमायूँ की ये बेगमें!
एपीसोड – 27: छिछोरे प्रेमपत्र से तिलमिला गई हरम बेगम!
एपीसोड – 28: हुमायूँ की बेटियों की दर्द भरी दास्तान!
एपीसोड – 29: अकबर को खतरे में देखकर माहम अनगा जान पर खेल गई!







